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न पुतिन न ट्रंप, इस बार कौन होगा रिपब्लिक डे का चीफ गेस्ट? PM मोदी ने किसे दिया न्योता और क्यों

नई दिल्ली एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर यही दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. इस बार न रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आ रहे हैं, न अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. इसके बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा न्योता दिया है, जो भारत के कूटनीतिक इतिहास में पहली बार हो रहा है. पहली बार किसी एक देश के नेता को नहीं बल्कि यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेताओं को एक साथ रिपब्लिक डे का चीफ गेस्ट बनाया गया है. यह फैसला सिर्फ परंपरा तोड़ने वाला नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की रणनीतिक सोच को भी दिखाता है. रिपोर्ट के अनुसार यह न्योता ऐसे समय दिया गया है जब दुनिया की राजनीति तेजी से बदल रही है. अमेरिका और ट्रांसअटलांटिक रिश्तों में खटास बढ़ी है. अमेरिका और यूरोप के बीच भरोसे की दरार खुलकर सामने आ रही है. इसी बीच भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के और करीब आ रहे हैं. भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत निर्णायक मोड़ पर है. रक्षा, सुरक्षा, क्लीन एनर्जी और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर साझेदारी गहरी हो रही है. ऐसे में EU के दोनों शीर्ष नेताओं को एक साथ न्योता देना भारत का बड़ा कूटनीतिक दांव माना जा रहा है. कौन हैं एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन? एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं, जबकि उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं. ये दोनों पद EU की सबसे ताकतवर संस्थाओं का नेतृत्व करते हैं. 27 देशों के इस समूह में नीतिगत फैसलों से लेकर वैश्विक रणनीति तक, इन दोनों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. क्यों खास है यह न्योता? पहली बार हुआ ऐसा भारत के इतिहास में अब तक रिपब्लिक डे पर किसी एक देश के नेता को ही मुख्य अतिथि बनाया गया है. इस बार तस्वीर बदली है. EU को एक इकाई के रूप में मान्यता देना, अपने आप में बड़ा संकेत है. यह दिखाता है कि भारत अब द्विपक्षीय रिश्तों से आगे बढ़कर ब्लॉक-लेवल डिप्लोमेसी को भी उतनी ही अहमियत दे रहा है. ट्रंप फैक्टर और बदलते वैश्विक समीकरण डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए तबसे अमेरिका-यूरोप रिश्ते फिर तनाव में हैं. NATO, व्यापार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद बढ़े हैं. EU ऐसे समय में भारत को एक भरोसेमंद, स्थिर और उभरते वैश्विक साझेदार के तौर पर देख रहा है. भारत भी पश्चिमी देशों के साथ संतुलन बनाते हुए अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है. इस दौरे का पूरा शेड्यूल क्या है?     25 जनवरी को दोनों नेता भारत पहुंचेंगे.     राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे.     26 जनवरी को रिपब्लिक डे परेड में चीफ गेस्ट होंगे.     27 जनवरी को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी.     भारत-EU बिजनेस फोरम भी आयोजित होगा. भारत-EU FTA क्यों बना सबसे बड़ा एजेंडा? भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत 2007 से चल रही है. दिसंबर 2025 में इसे नई रफ्तार मिली. अब इसे अंतिम चरण में माना जा रहा है. EU भारत को चीन पर निर्भरता कम करने के विकल्प के तौर पर देखता है, जबकि भारत को यूरोपीय बाजार, टेक्नोलॉजी और निवेश की ज़रूरत है. इस दौरे से क्या-क्या निकल सकता है?     भारत-EU FTA पर बड़ा ब्रेकथ्रू.     डिफेंस और सिक्योरिटी पार्टनरशिप का औपचारिक ऐलान.     ग्रीन एनर्जी, हाइड्रोजन और क्लीन टेक्नोलॉजी में सहयोग.     सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन में भारत की भूमिका मजबूत.     वैश्विक नियम-आधारित व्यवस्था की संयुक्त पैरवी. क्यों कहा जा रहा है इसे बड़ा कूटनीतिक दांव? EU ने हाल ही में भारत के लिए नई स्ट्रैटेजिक एजेंडा तैयार की है. वहीं भारत भी EU को सिर्फ देशों के समूह के तौर पर नहीं, बल्कि एक रणनीतिक शक्ति के रूप में देखने लगा है. इस दौर में यह न्योता बताता है कि भारत वैश्विक राजनीति में सिर्फ संतुलन नहीं, बल्कि दिशा तय करने की भूमिका में आ चुका है.

टोल प्लाजा पर नकद भुगतान बंद, 1 अप्रैल से FASTag और UPI से ही होगी एंट्री

 नई दिल्ली FASTag Toll Payment: देश के हाइवे पर यात्रा का तरीका बदलने जा रहा है. हाईवे जर्नी को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है. 1 अप्रैल से देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. अब टोल टैक्स सिर्फ FASTag या UPI के जरिए ही चुकाया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इस फैसले से न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि समय, फ्यूल और पैसे की भी बचत होगी. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने कहा कि, भारत तेजी से डिजिटल इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है. पहले UPI से टोल भुगतान की सुविधा शुरू की गई थी, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया. अब सरकार ने टोल प्लाजा पर कैश भुगतान (Cash Payment) पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया है. 1 अप्रैल के बाद टोल पर सिर्फ FASTag या UPI ही मान्य होंगे. टोल प्लाजा से खत्म होगा कैश लेन इस फैसले के बाद देशभर के टोल प्लाजा पर कैश लेन पूरी तरह बंद हो जाएंगे. इससे मैन्युअल वसूली के कारण लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलेगी. सरकार का कहना है कि कैशलेस टोलिंग से सिस्टम ज्यादा फास्ट, ट्रांसपैरेंट और भरोसेमंद बनेगा. अब भी कई लोग FASTag होने के बावजूद कैश लेन का इस्तेमाल करते थे, जिससे खासकर त्योहारों और पीक आवर्स में जाम की स्थिति बनती थी. फ्यूल और टाइम की बचत टोल प्लाजा पर बार-बार रुकने से गाड़ियों का फ्यूल ज्यादा खर्च होता है और ड्राइवरों को भी थकान होती है. वी. उमाशंकर के मुताबिक हर बार रुकने और फिर गाड़ी चलाने में समय और डीजल दोनों की बर्बादी होती है. लंबी दूरी की यात्रा में यह नुकसान और बढ़ जाता है. कैशलेस सिस्टम से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी. बैरियर-फ्री टोलिंग की तैयारी कैशलेस टोल का यह फैसला भविष्य की एक बड़ी योजना की तैयारी भी माना जा रहा है. सरकार जल्द ही मल्टी लेन फ्री फ्लो यानी MLFF टोलिंग सिस्टम लागू करने जा रही है. इस सिस्टम में टोल प्लाजा पर कोई बैरियर नहीं होगा और वाहन बिना रुके हाईवे पर फर्राटा भरते हुए निकल सकेंगे. टोल शुल्क अपने आप FASTag और व्हीकल आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के जरिए कट जाएगा. 25 टोल प्लाजाओं पर पायलट प्रोजेक्ट सरकार ने MLFF सिस्टम के पायलट प्रोजेक्ट के लिए देशभर में 25 टोल प्लाजाओं को चिन्हित किया है. यहां इस नई तकनीक को लागू करने से पहले नियमों  और यात्रियों के अनुभवों की जांच की जाएगी. इसके बाद इस सिस्टम को पूरे देश में लागू करने की योजना है. इससे जाम खत्म होगा, ट्रैवेल टाइम घटेगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी. सरकार ने यात्रियों से अपील की है कि वे 1 अप्रैल से पहले अपना FASTag एक्टिव रखें और उसमें पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करें, या UPI भुगतान के लिए तैयार रहें. कैशलेस टोलिंग और बैरियर-फ्री हाईवे का यह कदम भारत की सड़क यात्रा को पूरी तरह बदलने वाला है. आने वाले समय में टोल प्लाजाओं पर किसी तरह का कोई जाम नहीं लगेगा और सफर ज्यादा बेहतर और आसान होगा.

F-35 और Su-57 के बिना भी सुपर पावर बनेगा IAF, ₹325000 करोड़ की डील से चीन-पाक को आया पसीना

बेंगलुरु   तमाम रिपोर्ट्स में फ्रांस की डसॉल्ट डिफेंस एविएशन कंपनी के साथ तीन लाख करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा की राफेल फाइटर जेट डील पर आगे बढ़ने की बात कही जा रही है. अभी तक के सबसे बड़े लड़ाकू विमान खरीद करार के तहत 114 राफेल जेट खरीदने की बात कही जा रही है. इसके तहत 12 से 18 एयरक्राफ्ट फ्लाई-अवे यानी पूरी तरह से डेवलप कंडीशन में मिलेंगे, जबकि अन्‍य जेट का को-प्रोडक्‍शन भारत में होगा. रिपोर्टस की मानें तो यह डील ₹325000 करोड़ की है. तकरीबन डेढ़ दशक पहले भी सौ से ज्‍यादा राफेल जेट खरीदने को लेकर फ्रांस के साथ समझौता हुआ था, जिसे साल 2015 में रद्द कर दिया गया था. बाद में गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट डील के तहत 36 राफेल जेट खरीदे गए थे. इसकी डिलीवरी पूरी हो चुकी है. राफेल फाइटर जेट भारत के संवेदनशील एयरबेस पर तैनात हैं. इस जेट ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमताओं और उपयोगिता का प्रदर्शन किया था. इसके बाद भारत अब 114 अतिरिक्‍त राफेल फाइटर जेट खरीदने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ रहा है. बता दें कि इंडियन नेवी के लिए 26 राफेल-M फाइटर जेट अलग से खरीदने का करार हुआ है, जो एडवांस स्‍टेज में है. अब सवाल उठता है कि 114 राफेल जेट को खरीदने का फैसला क्‍यों किया गया और यह डील पहले के खरीद समझौते से कैसे अलग होने वाला है. मौजूदा डील में दो सीक्रेट प्रोविजन किए गए हैं. इससे इंडियन एयरफोर्स साउथ एशिया रीजन में काफी शक्तिशाली हो जाएगी. एयर पावर कैलकुलस भी बदल जाएगा. चीन-पाकिस्‍तान जैसे देश भारत की तरफ आंख उठाकर देखने से पहले हजार बार सोचेंगे. इंडियन एयरफोर्स के लिए फिलहाल 42 स्‍क्‍वाड्रन तय किया गया है, पर यह संख्‍या चिंताजनक तरीके से 30 से नीचे आ चुका है. इस गैप न केवल भरने कोशिश की जा रही है, बल्कि सैंक्‍शन्‍ड स्‍क्‍वाड्रन को 42 से बढ़ाकर 50 तक करने की प्‍लानिंग है, ताकि पश्चिमी और उत्‍तरी सीमा को अभेद्य बनाया जा सके. इन सबके बीच फ्रांस के रक्षा विमानन पोर्टल avionslegendaires.net की एक रिपोर्ट सामने आई है. इसमें दावा किया गया है कि भारत और फ्रांस के बीच प्रस्तावित राफेल लड़ाकू विमान सौदा केवल 114 नए राफेल F4 फाइटर जेट की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे कहीं बड़ा और व्यापक हो सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, इस पैकेज में भारतीय वायुसेना (IAF) के बेड़े में पहले से शामिल 36 राफेल F3R (3FR) स्‍टैंडर्ड के जेट्स को भी अत्याधुनिक F4 स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जा सकता है. इससे भारतीय वायुसेना के अधिकांश राफेल विमान एक ही उन्नत तकनीकी स्तर पर आ जाएंगे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित 114 नए राफेल विमानों में से कम से कम 24 विमान भविष्य के राफेल F5 स्टैंडर्ड के हो सकते हैं, जिनका उत्पादन 2030 के बाद शुरू होने की उम्मीद है. हालांकि, इन 24 राफेल F5 विमानों का निर्माण पूरी तरह फ्रांस में ही किया जा सकता है, न कि भारत में प्रस्तावित लोकर प्रोडक्‍शन लाइन के तहत. राफेल F4 vs राफेल F5 राफेल F4 राफेल F5 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): मिशन को आसान बनाने के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल, जिससे पायलट पर काम का बोझ कम होगा और आसपास की स्थिति बेहतर समझ में आएगी. नया फाइटर जेट अब बिना पायलट वाले ड्रोन (UCAV) के साथ मिलकर काम करेगा. यह ड्रोन ‘लॉयल विंगमैन’ की तरह जेट के साथ उड़ान भरकर दुश्‍मन पर हमला करेगा. एडवांस एवियोनिक्स: कॉकपिट में बड़े डिस्प्ले, आधुनिक होलोग्राफिक HUD और बेहतर कम्युनिकेशन सिस्टम, जिससे जानकारी तेजी से साझा होगी. इसमें हाइपरसोनिक मिसाइल ASN4G लगाने की तैयारी है, जो बहुत तेज रफ्तार से गहराई तक हमला (डीप अटैक) करने में सक्षम होगी. नई और ताकतवर हथियार क्षमता: MICA NG मिसाइल (नई पीढ़ी) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इसके अलावा AASM हैमर बम भी होगा. इस जेट में 1,000 किलो तक का बम ले जाने की क्षमता के साथ दूर से सटीक हमला करना संभव होगा. जेट में अब और ताकतवर रडार (RBE2XG) और खास इन्फ्रारेड सेंसर लगाए जाएंगे, जिससे दुश्‍मन के छिपे हुए विमान या स्‍टील्‍थ फाइटर जेट भी पकड़े जा सकेंगे. TALIOS पॉड: AI से लैस उन्नत टारगेटिंग सिस्टम, जिससे निशाना ज्यादा सटीक होगा. TALIOS पॉड को बेहतर बनाया गया है, जिससे निगरानी, जानकारी जुटाने और टारगेट को पहचानने की क्षमता बढ़ेगी. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम: SPECTRA सिस्टम को और मजबूत किया गया है, जो दुश्मन के खतरों और मिसाइलों को जल्दी पहचानकर बचाव करेगा. नए डाटा लिंक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पायलट को युद्ध के दौरान फैसले लेने में आसानी होगी. कनेक्टेड कॉम्बैट: रियल टाइम में सेना की अन्य इकाइयों के साथ डेटा शेयर करने की सुविधा. SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्‍टम को और मजबूत किया गया है, ताकि दुश्‍मन के रडार और मिसाइल से बेहतर बचाव हो सके. साइबर सुरक्षा: डेटा को सुरक्षित रखने के लिए बेहतर साइबर प्रोटेक्शन. इसमें नई मिसाइलें और हथियार जोड़े जाएंगे, जो दुश्‍मन के एयर डिफेंस को नष्‍ट करने में मदद करेंगे. ट्रेनिंग सुविधा: विमान में ही एडवांस ट्रेनिंग के लिए सिमुलेशन सिस्टम. जेट में अब ज्‍यादा ताकतवर इंजन लगाए जाने की उम्‍मीद है, जिससे इसकी रफ्तार और ताकत बढ़ेगी. अपग्रेड में आसानी: पुराने राफेल F3 वर्जन को आसानी से F4 में बदला जा सकता है. यह विमान पूरी तरह पांचवीं पीढ़ी का स्‍टील्‍थ जेट नहीं है, लेकिन पुराने मॉडल की तुलना में इसे इंटरसेप्‍ट करना आसान नहीं होगा, जिससे दुश्‍मन के लिए इसे पकड़ना मुश्किल होगा.  राफेल F4 अपग्रेड: मौजूदा फ्लीट में बड़ा बदलाव मीडिया रिपोर्ट में किया गया यह दावा यदि सही साबित होता है तो भारतीय वायुसेना के पास तब राफेल के तीन अलग-अलग वर्जन (F3R, F4 और भविष्य में F5) एक साथ सेवा में होंगे, जो इसकी लड़ाकू क्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के 36 राफेल F3R विमानों को F4 स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जाना एक साधारण सुधार नहीं, बल्कि एक गहरा और व्यापक आधुनिकीकरण होगा. इस अपग्रेड में एवियोनिक्स, सेंसर, हथियारों का इंटीग्रेशन, कम्‍यूनिकेशन सिस्‍टम और रखरखाव ढांचे में बड़े बदलाव शामिल होंगे. F4 अपग्रेड का सबसे अहम हिस्सा उन्नत एवियोनिक्स सिस्टम है. इसमें पहले से लगे RBE2 AESA रडार … Read more

थमी नहीं बांग्लादेश में हिंसा: अल्पसंख्यक हिंदुओं को बनाया जा रहा निशाना

ढाका बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में कट्टरपंथियों के मन से कानून का भय पूरी तरह से खत्म हो चुका है। ताजा मामले में सिलहट जिले के गोवाईघाट उपजिला में एक हिंदू शिक्षक बीरेंद्र कुमार डेके घर में आग लगा दी गई। इसकी वजह से पीड़ित के परिवार और आसपास के लोगों में डर और घबराहट फैल गई। हमले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि घर में तेजी से आग की लपटें दिख रही थीं और परिवार के सदस्य भागने की कोशिश कर रहे थे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिलहट जिले के गोवाईघाट उपजिला के नंदिरगांव यूनियन के बहोर गांव में इस्लामी समूह ने कथित तौर पर एक स्कूल टीचर के घर में आग लगा दी। एक अन्य मामले में इस हफ्ते की शुरुआत में फेनी जिले के दगनभुइयां उपजिला में बदमाशों ने एक हिंदू शख्स की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। 27 साल के ऑटो रिक्शा ड्राइवर समीर दास की लाश सोमवार को बांग्लादेश के जगतपुर गांव के खेत से मिली। परिवार वालों और पुलिस के हवाले से बांग्लादेश के अखबार डेली मनोबकांठा ने बताया कि समीर रविवार शाम को अपने ऑटो रिक्शा से निकला था। जब वह देर रात तक घर वापस नहीं आया, तो उसके रिश्तेदारों ने उसे अलग-अलग जगहों पर ढूंढना शुरू कर दिया। बाद में, वहां के लोगों को उपजिला के सदर यूनियन के तहत जगतपुर गांव के एक खेत में समीर की बॉडी मिली। खबर मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बरामद किया। यह 24 दिनों में नौवीं घटना थी, जिसमें पूरे बांग्लादेश में हिंदू समुदायों को निशाना बनाकर हिंसा को अंजाम दिया गया। ऐसे हालात को लेकर लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जाहिर की जा रही है। इससे पहले 9 जनवरी को भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर बार-बार होने वाले हमलों के परेशान करने वाले पैटर्न पर गहरी चिंता जताई थी। भारत ने कहा था कि वह पड़ोसी देश में स्थिति पर नजर रख रहा है और उम्मीद करता है कि सांप्रदायिक हिंसा की ऐसी घटनाओं से सख्ती से निपटा जाएगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर IMF की मुहर, भाजपा बोली—राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति को जवाब

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की तरफ से भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रशंसा किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा कि आईएमएफ का भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ करना राहुल गांधी के झूठे नैरेटिव और घटिया राजनीतिक एजेंडे पर एक करारा जवाब है। सीआर केसवन ने राहुल गांधी को 'लीडर ऑफ पेसिमिज्म' (एलओपी) बताते हुए कहा, "उन्होंने जानबूझकर झूठ बोला और भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में बुरा-भला कहा। क्या वे अब देश और जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे?" भाजपा प्रवक्ता ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "आईएमएफ की ओर से भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ राहुल गांधी के झूठे नैरेटिव और घटिया राजनीतिक एजेंडे पर एक करारा जवाब और झटका है। उन्होंने देश की शानदार प्रगति और विकास को कम आंकने की कोशिश की थी। राहुल गांधी को जनता बार-बार नकार रही है, क्योंकि अपने छोटे, नाकाम राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भारत को गाली देने और बदनाम करने में उन्हें कोई पछतावा या शर्म नहीं है।" ज्ञात हो कि राहुल गांधी और कांग्रेस ने कुछ महीने पहले भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' करार दिया था। राहुल गांधी ने अपने एक बयान में कहा, "सब जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक मरी हुई अर्थव्यवस्था है। इस बारे में पूरी दुनिया जानती है।" हालांकि, आईएमएफ ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि हाल की तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर गति से बढ़ी है। आईएमएफ ने यह भी कहा कि वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने में भारत की भूमिका बहुत अहम है। भारत की 2025 की आर्थिक वृद्धि को लेकर पूछे गए सवाल पर आईएमएफ की संचार विभाग की निदेशक जूली कोजेक ने कहा, "भारत ग्लोबल विस्तार को आगे बढ़ा रहा है, भले ही व्यापक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल में अनिश्चितता छाई हुई हो।" कोजेक ने आगे कहा, "हमने देखा है कि भारत दुनिया के लिए एक प्रमुख ग्रोथ इंजन है।" इससे पहले, भारत ने पहली और दूसरी तिमाही में क्रमशः 7.8 प्रतिशत और 8.2 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ रेट दर्ज की। इसकी तीसरी तिमाही में 7 प्रतिशत से काफी ऊपर ग्रोथ रहने का अनुमान है। एक प्रमुख एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए देश की कुल ग्रोथ रेट 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

वोट कटने का आरोप: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को घेरा, कहा– लोकतंत्र से हो रहा खिलवाड़

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भारत के चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के जरिए जानबूझकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का दावा है कि अल्पसंख्यक बहुल मालदा में करीब 90,000 वोटरों के नाम अंतिम वोटर लिस्ट से हटाने की तैयारी की जा रही है। उत्तर बंगाल रवाना होने से पहले कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “अल्पसंख्यक समुदाय की शिकायतें बिल्कुल सही हैं। उनके वोटरों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। मुझे जानकारी मिली है कि केवल मालदा में ही 90,000 नाम हटाए जा सकते हैं। सिर्फ अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि मतुआ, राजवंशी और आदिवासी समुदाय जैसे पिछड़े वर्गों के वोटरों को भी निशाना बनाया जा रहा है। यहां तक कि अमर्त्य सेन और कवि जॉय गोस्वामी जैसे प्रसिद्ध लोगों के नाम भी नहीं छोड़े जा रहे हैं।” शुक्रवार सुबह से मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा इलाके में तनाव बना हुआ है। यह तनाव तब शुरू हुआ, जब पड़ोसी राज्य झारखंड में कथित तौर पर मारे गए एक स्थानीय प्रवासी मजदूर का शव वापस लाया गया। इस घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि बेलडांगा में लोगों को भड़काने के पीछे कौन लोग हैं। फिर भी मैं सभी से अपील करती हूं कि शांति बनाए रखें और किसी भी उकसावे में न आएं। पश्चिम बंगाल में जानबूझकर हिंसा फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसके पीछे बीजेपी का हाथ है और इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है और उनकी हत्याएं हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं ऐसे सभी मामलों पर नजर रख रही हूं। मेरी सरकार और तृणमूल कांग्रेस ऐसे प्रवासी मजदूरों के परिवारों के साथ खड़ी है।” हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं की। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर रोक लगा दी थी। यह एफआईआर राजनीतिक सलाहकार कंपनी आई-पैक के दफ्तर और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर पर हाल ही में हुई तलाशी से जुड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय जांच में राज्य एजेंसियों की कथित दखलअंदाजी जैसे गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल पंचोली की बेंच ने इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया। ये नोटिस ईडी की उन याचिकाओं पर जारी किए गए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि पिछले हफ्ते हुई तलाशी के दौरान जांच में रुकावट डाली गई थी।

रेल यात्रियों के लिए बड़ी सौगात: वंदे भारत स्लीपर में मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं, पहली यात्रा में ही बन जाएंगे फैन

नई दिल्ली भारतीय रेलवे पिछले 11 साल से यात्रियों की सुविधा को सुगम, सुरक्षित और तेज बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। भारतीय रेलवे ने इस दौरान अपनी यात्रा में कई नए अध्याय जोड़े हैं। पिछले कुछ सालों में रेलवे ने रेलगाड़ियों की गति, उसके इंफ्रास्ट्रक्चर और साथ ही रेल डिब्बों और इंजन के विकास के साथ कैसे रेलवे की यात्रा यात्रियों के लिए सुखद, सुविधाजनक और समय बचाने वाली हो, इसको लेकर प्रयास किए हैं।  रेलवे ने इस विकास यात्रा में कई हाई स्पीड और सेमी हाई स्पीड ट्रेनों को पटरी पर उतारा है, जिनमें हमसफर, वंदे भारत और साथ ही अमृत भारत जैसी ट्रेनें हैं, जो समय के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से या तो शुरू की जा चुकी हैं या इनकी शुरुआत की जा रही है। अब रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए कई रूटों पर नई स्लीपर वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के परिचालन का फैसला लिया है। अभी तक वंदे भारत ट्रेनें केवल बैठकर यात्रा करने के लिए डिजाइन की गई थीं। लेकिन, अब लंबी दूरी के यात्रियों को ध्यान में रखते हुए और उनकी यात्रा को सुखद और सुविधाजनक बनाने के लिए स्लीपर वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के परिचालन का फैसला रेलवे ने लिया है। इस स्लीपर वंदे भारत ट्रेन के परिचालन और इसकी स्पीड की वजह से लंबी दूरी की यात्राओं में यात्रियों का 3 घंटे से ज्यादा का समय बचेगा और साथ ही यात्रियों की यात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा आरामदायक और लग्जरी होगी। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को पीएम नरेंद्र मोदी 17 जनवरी को हरी झंडी दिखाएंगे और 18 जनवरी को हावड़ा से कामख्या के लिए इस ट्रेन की नियमित सेवा शुरू हो जाएगी। इसमें स्लीपर के साथ एसी1, एसी2 और एसी3 कोच भी शामिल होंगे। इस ट्रेन के इंटीरियर को जहां भारतीय संस्कृति से प्रेरित होकर डिजाइन किया गया है, वहीं यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसमें 'कवच' ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट और बेहतर सैनिटेशन के लिए कीटाणुनाशक तकनीक (डिसइंफेक्टेंट टेक्नोलॉजी) का इस्तेमाल किया गया है। यानी यात्रियों की सुरक्षित यात्रा के लिए इस ट्रेन में ड्राइवर के केबिन में भी एडवांस कंट्रोल और सुरक्षा सिस्टम लगे होंगे। ट्रेन का बाहरी लुक भी एरोडायनामिक होगा, यानी यह हवा को चीरता हुआ आगे बढ़ेगा। इसके बाहरी दरवाजे भी ऑटोमेटिक तरीके से खुलेंगे और बंद होंगे। बेहतर सैनिटेशन के लिए कीटाणुनाशक तकनीक (डिसइंफेक्टेंट टेक्नोलॉजी) के इस्तेमाल की वजह से वंदे भारत स्‍लीपर में साथ बैठे यात्री को सर्दी-जुकाम है तो साथी यात्री को कोई टेंशन लेने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि अब नई तकनीक से वायरस की छुट्टी होगी। रेल मंत्रालय से अब जो जानकारी निकलकर सामने आई है, उसकी मानें तो इसके कोच में यूवीसी तकनीक का इस्‍तेमाल किया गया है, जिससे हवा में वायरस डिसइंफेक्टेंट हो जाएंगे। यानी यह उपकरण हवा को खींचेगा और फिर उसे फ्रेश करके दोबारा कोच में छोड़ देगा। वैसे इस लग्जरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की गति की बात करें तो इसकी अधिकतम गति सीमा 180 किमी/घंटा होगी, जबकि नियमित सेवा में यह 130 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेगी। इस स्लीपर ट्रेन में यात्रियों को कई प्रीमियम सुविधाएं मिलेंगी। यात्रियों को इसमें हाई क्वालिटी वाले कंबल कवर और एडवांस्ड बेडरोल यात्रा के दौरान दिए जाएंगे। इसके साथ ही इस ट्रेन में यात्रियों को कैटरिंग की सर्विस भी दी जाएगी। इसके साथ ही यह भी जानकारी है कि इस ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्रियों को आईआरसीटीसी की तरफ से 1 लीटर रेल नीर बोतल के साथ एक अखबार भी मिलेगा, जिसके लिए अलग से कोई चार्ज नहीं किया जाएगा। इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें यात्री अपनी आरामदायक यात्रा का इसलिए भी आनंद ले सकेंगे क्योंकि इसमें कोई आरएससी (आरएसी) या वेटिंग लिस्ट का झंझट नहीं होगा, इसके साथ ही पार्ट कन्फर्म टिकट की भी इसमें व्यवस्था नहीं होगी। यानी इसमें केवल पूर्णतः कंफर्म टिकट ही प्राप्त होगा और इसी के साथ यात्री इस ट्रेन में सफर कर सकेंगे। मतलब अब टिकट कंफर्म है तो चार्ट बनने के इंतजार वाले सिस्टम से यात्रियों को मुक्ति मिलेगी। इस ट्रेन में यात्रियों की आरामदायक यात्रा के लिए बेहतर कुशनिंग के साथ आरामदायक बर्थ और शोर कम करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यानी इसमें एर्गोनोमिक बर्थ की सुविधा मिलेगी। साथ ही इस यात्रा में यात्रियों के लिए सभी ऑनबोर्ड स्टाफ निर्धारित यूनिफॉर्म में ट्रेन पर तैनात रहेंगे। इस ट्रेन के बारे में जो विशेष जानकारी मिल पाई है, उसके अनुसार इसकी यात्रा सेवा के दौरान नो वीआईपी कोटा ऑप्शन बना रहेगा। यानी इस ट्रेन में वीआईपी या इमरजेंसी कोटा की अनुमति नहीं होगी। यहां तक कि वरिष्ठ रेल अधिकारी भी पास का इस्तेमाल करके इसमें यात्रा नहीं कर पाएंगे। यानी इसमें केवल चार कोटा होंगे, महिला कोटा, दिव्यांग कोटा, वरिष्ठ नागरिक कोटा, और ड्यूटी पास कोटा। इसके अलावा इसमें कोई कोटा मान्य नहीं होगा। इस ट्रेन में यात्रियों का सफर अब सिर्फ तेज और आरामदायक नहीं, बल्कि स्वाद से भरपूर भी होने वाला है। भारतीय रेलवे की तरफ से अब वंदे भारत ट्रेनों में वही खाना परोसा जाएगा, जो उस इलाके की पहचान है, जहां से ट्रेन की शुरुआत होगी। बात करें तो वंदे भारत स्लीपर का किराया राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों से थोड़ा ज्यादा होगा। जानकारी के मुताबिक इसका न्यूनतम किराया 400 किमी की दूरी के आधार पर तय किया गया है।

स्टार्टअप इंडिया की बड़ी सफलता: 2 लाख पंजीकृत स्टार्टअप, 21 लाख से अधिक नौकरियां सृजित

नई दिल्ली देश में शुक्रवार को 'स्टार्टअप इंडिया' पहल को 10 साल पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रमुख स्टार्टअप उद्यमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आज भारत में करीब 2 लाख स्टार्टअप रजिस्टर्ड हैं। इन स्टार्टअप्स के जरिए अब तक 21 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल चुका है। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है और देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है। पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारतीय स्टार्टअप आज 50 से ज्यादा अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, एग्रीटेक, फिनटेक, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डीप टेक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पिछले बजट में सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का 'फंड ऑफ फंड्स' घोषित किया था, जिसके जरिए हाई-टेक और डीप टेक स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि देश के कुल स्टार्टअप्स में से करीब 50 प्रतिशत स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं, जो इस बात का सबूत है कि उद्यमिता अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु अब ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र बनकर उभर रहे हैं। पीयूष गोयल के मुताबिक, दुनिया के 100 से ज्यादा देश भारत के साथ स्टार्टअप सेक्टर में साझेदारी करना चाहते हैं। सरकार इस दिशा में योजना बना रही है कि इन देशों के साथ सहयोग को कैसे आगे बढ़ाया जाए, ताकि भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर और ज्यादा अवसर मिल सकें। इससे पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि 'स्टार्टअप इंडिया' क्रांति को एक दशक पूरा हो गया है। यह एक साहसिक कदम था, जिसने भारत को बड़ा सोचने और उससे भी बड़ा करने की ताकत दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस दूरदर्शी पहल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण देश में डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स और उनके द्वारा पैदा किए गए 21 लाख से ज्यादा रोजगार हैं। पीयूष गोयल ने कहा कि इस सफलता को यह तथ्य और खास बनाता है कि इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में उद्यमिता की भावना को नई ऊर्जा मिली है और युवाओं व महिलाओं को सशक्त बनाया गया है। राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों की यह यात्रा निरंतरता, समावेशिता और विकास को दर्शाती है, साथ ही भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के उज्ज्वल भविष्य का भरोसा भी देती है।

PWD–NHAI ने हटाए अवैध निर्माण, NH-89 पर फिर से खुला रास्ता

अजमेर नेशनल हाईवे-89 पर अतिक्रमण के खिलाफ बुधवार को प्रशासन ने बड़ी और सख्त कार्रवाई की। देवनगर नागौर गांव से गुजर रहे NH-89 पर PWD और नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) ने संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस दौरान करीब 22 किलोमीटर लंबे हिस्से में अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीनों का व्यापक उपयोग किया गया और हाईवे की जद में आ रहे मकान, दुकानें व अन्य निर्माण हटाए गए। ढाई माह पहले दिए गए थे नोटिस नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि हाईवे किनारे अतिक्रमण करने वालों को करीब ढाई माह पहले नोटिस जारी किए गए थे। नियमों के तहत जिन मकानों और दुकानों को हटाया जाना था, उनके मालिकों को मुआवजा भी दिया जा चुका था। इसके बावजूद कई लोगों ने अतिक्रमण नहीं हटाया, जिसके बाद मजबूरन प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि NH-89 पर लगातार बढ़ते यातायात और दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए हाईवे की चौड़ाई और सुरक्षा मानकों को बनाए रखना जरूरी था। अतिक्रमण के कारण न केवल ट्रैफिक बाधित हो रहा था, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ था।   भारी पुलिस जाप्ते में हुई कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की इस बड़ी कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। स्थानीय थाना प्रभारी विक्रम सिंह राठौड़ के नेतृत्व में पुलिस जाप्ता मौके पर मौजूद रहा। पुलिस ने पूरे अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखी और कार्रवाई को शांतिपूर्वक संपन्न कराया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कुछ स्थानों पर लोगों ने विरोध का प्रयास किया, लेकिन पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद स्थिति नियंत्रित रही। हाईवे सुरक्षा और विकास पर जोर PWD और NHAI अधिकारियों ने दो टूक कहा कि नेशनल हाईवे पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाईवे की सुरक्षा, सुचारु यातायात और भविष्य के विकास कार्यों के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में भी अन्य हिस्सों में अतिक्रमण के खिलाफ इसी तरह सख्त अभियान चलाया जाएगा। स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। जहां कुछ लोगों ने इसे विकास और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम बताया, वहीं प्रभावित लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास और सहयोग की मांग की। फिलहाल NH-89 पर अतिक्रमण हटने से यातायात पहले की तुलना में अधिक सुचारु हो गया है। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान हाईवे को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।  

ग्रीनलैंड में तनाव बढ़ा, अमेरिका सैनिक भेजे, यूरोप ने ट्रंप की नीति पर जताई नाराजगी

वाशिंगटन ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच गंभीर मतभेद सामने आ गए हैं। इसी तनाव के बीच यूरोप के कई देशों के सैनिक डेनमार्क के समर्थन में ग्रीनलैंड पहुंचने लगे हैं। इसका मकसद यूरोपीय एकजुटता दिखाना और अमेरिका को यह संदेश देना है कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा नाटो मिलकर कर सकता है। हाल ही में व्हाइट हाउस ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के साथ होने वाली बातचीत को “ग्रीनलैंड के अधिग्रहण से जुड़ी तकनीकी वार्ता” बताया। यह बयान डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन के रुख से अलग था। रासमुसेन ने कहा कि बातचीत का उद्देश्य केवल मतभेदों को सुलझाने के रास्ते तलाशना है, न कि किसी अधिग्रहण पर सहमति बनाना। वार्ता शुरू होने से पहले ही डेनमार्क ने घोषणा की थी कि वह ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाएगा। इसके बाद फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नॉर्वे, स्वीडन और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों ने प्रतीकात्मक संख्या में सैनिक भेजने शुरू कर दिए हैं या जल्द भेजने का वादा किया है। डेनमार्क के रक्षा मंत्री ट्रोएल्स लुंड पाउल्सेन ने बताया कि कई नाटो देशों के सैनिक बारी-बारी से ग्रीनलैंड में तैनात रहेंगे। इसका उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करना है, जहां रूस और चीन की बढ़ती दिलचस्पी चिंता का कारण बनी हुई है।   हालांकि, अमेरिका अपने रुख पर कायम है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने साफ कहा कि यूरोपीय सैनिकों की तैनाती से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोच पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक, ट्रंप मानते हैं कि ग्रीनलैंड को हासिल करना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने दोहराया है कि ग्रीनलैंड उनके लिए केवल रणनीतिक संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी संप्रभुता और पहचान का सवाल है। इसी वजह से आने वाले हफ्तों में बनने वाला उच्च स्तरीय कार्य समूह इस विवाद में अहम भूमिका निभा सकता है।