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धामी सरकार का बड़ा कदम: यूसीसी में बदलाव, उपनल कर्मियों पर भी आया बड़ा निर्णय

देहरादून मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अध्यक्षता में आज बृहस्पतिवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के 19 प्रस्ताव रखे गए। इसमें यूसीसी में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। वहीं, उत्तराखंड पर्यटन की नियमावली को भी मंजूरी मिल गई है। वहीं, उपनल कर्मचारियों के लिए भी समान वेतन को लेकर बड़ा निर्णय हुआ है। ये हुए फैसले     पेराई सत्र 2025-26 के लिए 270 करोड़ की शासकीय प्रतिभूति यानी स्टेट गारंटी को मंजूरी। अब चीनी मिलें ऋण ले सकेंगी।     चीनी मिलों के गन्ने के मूल्य को मंजूरी। 405 रुपये अगेती के मिलेंगे।     निर्वाचन विभाग में सेवा नियमावली को मंजूरी।     उत्तराखंड संस्कृत अकादमी का नाम उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम होगा।     यूकॉस्ट के तहत अल्मोड़ा व चंपावत के साइंस सेंटर के लिए 6-6 पद स्वीकृत किए गए।     2024-25 की ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी।     वन निगम की रिपोर्ट सदन में रखने पर मुहर।     बागवानी मिशन के तहत एंटी हेलनेट पर भारत सरकार की 50% के साथ अब राज्य से 25% अतिरिक्त मिलेंगे।     दून विवि में हिन्दू अध्ययन केंद्र के तहत 6 पदों (4 अकादमी,2 अन्य) को स्वीकृति मिली।     उपनल कर्मचारियों के लिए: पूर्व में चरणों में समान कार्य समान वेतन के 12 वर्ष के बजाय 10 वर्ष पूरे करने वालों को समान कार्य समान वेतन 7000 से 8000 कर्मचारियों को मिलेगा। 2018 से पूर्व के बाकी को भी अलग से मिलेगा लाभ। भविष्य में उपनल के माध्यम से भूतपूर्व सैनिकों के लिए पुनर्वास कार्य ही किए जाएंगे।     सतेंद्र कुमार बनाम सीबीआई के तहत एनडीपीएस, पॉक्सो, के तहत विशेष न्यायालय बनेंगे। 16 न्यायालय बनेंगे, जिसमें 144 पद स्वीकृत हैं। देहरादून हरिद्वार नैनीताल और उधमसिंह नगर में 7 एडीजी, 9 एसीजेएम स्तर के न्यायालय होंगे।     उत्तराखंड की विधानसभा के शीतकालीन सत्र के लिए सीएम को निर्णय के लिए अधिकृत किया गया।     खनन विभाग: नंधौर व अन्य नदियों में खनन का आदेश संशोधित किया गया है।     विभिन्न खेल प्रतियोगिता के लिए विधायक स्तर की चैंपियन ट्रॉफी और एक लाख, सांसद स्तर पर चैंपियनशिप ट्राफी और 2 लाख, राज्य स्तर पर 5 लाख और ट्रॉफी मिलेगी।     ब्रिडकुल रोपवे, टनल व कैविटी पार्किंग, ऑटोमेटेड या मेकैनिकल पार्किंग भी बनाएगा।     बीएनएस की धारा 330 में दो पक्षों के सहमत होने पर विशेषज्ञ की जरूरत नहीं है। उसका एक फॉरमेट बनाने के लिए नियमावली को मंजूरी।     यूसीसी में संशोधन को मंजूरी। अध्यादेश आएगा। जनवरी 2025 से पूर्व शादी वालों को छह माह के बजाय एक साल में कराना होगा विवाह पंजीकरण। रजिस्ट्रार जनरल अब अपर सचिव लेवल के अधिकारी होंगे। समय से काम न करने पर फाइन के बजाय पेनाल्टी किया गया।     उत्तराखंड पर्यटन की नियमावली को मंजूरी, होम स्टे योजना का लाभ स्थानीय को ही मिलेगा। अब इसके लिए स्थायी निवास जरूरी होगा। ब्रेड एन्ड ब्रेकफास्ट ही करा सकेंगे बाहरी राज्यों के लोग। होम स्टे जैसा कोई लाभ नहीं मिलेगा।      केदारनाथ धाम में एक पायलट प्रोजेक्ट बनेगा। इसमें गोबर व चीड़ की पत्तियों से बायो मास पैलेट बनेंगे। पर्यटन विभाग करेगा।  

US में भारतीयों के खिलाफ नफरत क्यों बढ़ी? ट्रंप दौर की नीतियों ने कैसे बनाया टारगेट

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत वीजा नियमों में किए गए बदलाव भारतीयों के लिए कई परेशानियां खड़ी कर रहे हैं। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक कुशल कामगारों के लिए मिलने वाले H-1B वीजा नियमों में बदलाव के बाद भारतीय प्रोफेशनल्स और भारतीय मूल के कारोबारियों के खिलाफ अमेरिका में नफरत भरा माहौल बना है और भारतीयों के प्रति भेदभाव भी बढ़ता दिख रहा है।   बता दें कि ट्रंप सरकार ने नए नियमों के तहत H-1B वीजा के लिए आवेदन शुल्क बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दिया गया है। इसके साथ ही वेतन के आधार पर चयन की व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें ज्यादा सैलरी वाली नौकरियों को प्राथमिकता मिलेगी। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव अमेरिकी कामगारों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। वहीं फरवरी से नियम और सख्त होने वाले हैं। अमेरिकी अधिकारी सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले लेवल-4 H-1B आवेदकों को प्राथमिकता देंगे। इससे कई कुशल विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए वीजा पाना और मुश्किल हो जाएगा। बड़ी कंपनियां निशाने पर रिपोर्ट में बताया है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा किए गए इन बदलावों के बाद हालात और बदतर हुए हैं। कई बड़ी अमेरिकी कंपनियां, जैसे फेडएक्स, वॉलमार्ट और वेरिजोन को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर निशाना बनाया गया है। सोशल मीडिया पर इन कंपनियों पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वे गैरकानूनी तरीके से भारतीयों को नौकरियां ‘बेच’ रही हैं। नौकरी चोर’ और ‘वीजा स्कैमर’ का टैग एडवोकेसी ग्रुप ‘स्टॉप एएपीआई हेट’ और काउंटर टेररिज्म फर्म ‘मूनशॉट’ के मुताबिक पिछले साल नवंबर में दक्षिण एशियाई समुदायों के खिलाफ हिंसा की धमकियों में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसी दौरान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर गालियों और अपशब्दों के इस्तेमाल में भी 69 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ। बीते दिसंबर में भी एक भारतीय कंपनी को जमकर निशाना बनाया गया। दरअसल सोशल मीडिया पर फेडएक्स के एक क्षतिग्रस्त ट्रक का वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद भारतीय मूल के सीईओ राज सुब्रमणियम को निशाना बनाया गया। ऑनलाइन पोस्ट में ‘अमेरिकी कंपनियों पर भारतीय कब्जा रोकने’ जैसी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। हालांकि फेडएक्स ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। मामले पर बात करते हुए सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राकिब नाइक ने बताया कि इनमें से कई हमले संगठित कैंपेन का हिस्सा प्रतीत हैं। उनके मुताबिक, सरकारी स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से लोन लेने वाले भारतीय-अमेरिकी कारोबारियों को खास तौर पर निशाना बनाया गया है। नाइक ने चेतावनी दी कि भेदभाव बढ़ रहा है और भारतीयों को ‘नौकरी चोर’ और ‘वीजा स्कैमर’ तक कहा जा रहा है। ऐसे माहौल में कम्पनियां समावेशी वातावरण बनाने की नीति को होल्ड पर डाल चुकी हैं।  

आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान, साख बचाने के लिए सरकारी उपक्रम बेचने की मजबूरी

नई दिल्ली पाकिस्तान की सरकारी कंपनियों को राजनीतिक दखल, खराब शासन और अव्यवस्था की वजह से भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। एक पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हालात ऐसे हैं कि सरकारी कंपनियां बहुत कम कीमतों पर प्रोडक्ट्स और सर्विस बेचने के लिए मजबूर हैं। पाकिस्तान के एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार शासन में सुधार करने के बजाय, एक के बाद एक आने वाली सरकारें मुश्किल फैसले टालती रहती हैं। सरकारी कंपनियों को खराब परफॉर्मेंस, राजनीतिक हस्तक्षेप और कमजोर उत्तरदायित्व के बावजूद नियमित तौर पर बनाए रखा जाता है। जब वे भारी नुकसान और बहुत ज्यादा कर्ज जमा कर लेती हैं, तभी अचानक निजीकरण को हल मान लिया जाता है। यह पैटर्न सभी क्षेत्रों में एक जैसा दिखता है। व्यवसायिक मैनेजमेंट की जगह धीरे-धीरे राजनीतिक नियुक्ति ले लेती है, और कमर्शियल अनुशासन खत्म हो जाता है। सालों की अनदेखी और पब्लिक फंड डालने के बाद ऐसी कंपनियों को बेचने से नुकसान सामाजिक हो जाता है और फायदे प्राइवेट हो जाते हैं। पाकिस्तान में निजीकरण शायद ही कभी कोई जानबूझकर या अच्छी तरह से प्लान किया गया इकोनॉमिक रिफॉर्म रहा हो। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) इस नाकामी को साफ तौर पर दिखाता है। कभी एक जानी-मानी क्षेत्रीय एयरलाइन, पीआईए को ज्यादा स्टाफ, राजनीतिक हस्तक्षेप और बिजनेस लॉजिक की कमी ने कमजोर कर दिया। एक के बाद एक सरकारों ने एयरलाइन को एक कमर्शियल एंटिटी के बजाय सिर्फ पैसे कमाने का जरिया माना। इसे चालू रखने के लिए अरबों रुपए खर्च किए गए, जबकि सर्विस की क्वालिटी खराब होती गई और प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई। पीआईए का निजीकरण किया जाना कोई रणनीतिक योजना नहीं थी। यह लंबे समय से चली आ रही गवर्नेंस की नाकामी को मानना ​​था। प्राइवेटाइजेशन के सपोर्टर अक्सर टेलीकॉम कंपनी पीटीसीएल को इस बात का सबूत बताते हैं कि प्राइवेट ओनरशिप से परफॉर्मेंस बेहतर होती है। असल में, प्राइवेटाइजेशन के बाद पीटीसीएल ने ऑपरेशनल और तकनीकी सुधार किए। नेटवर्क मॉडर्नाइजेशन और सर्विस का विस्तार हुआ। फिर भी यह उदाहरण पाकिस्तान के प्राइवेटाइजेशन के तरीकों में गहरी कमियों को भी सामने लाता है। सालों बाद भी, हजारों पुराने सरकारी कर्मचारी और पेंशनर पेंशन, सर्विस रेगुलराइजेशन, और प्राइवेटाइजेशन के बाद के अधिकारों को लेकर चल रहे केस में फंसे हुए हैं। ये अनसुलझे झगड़े बताते हैं कि कैसे इंसानी और कानूनी खर्चों को दूसरी चिंता माना गया। आर्टिकल में कहा गया है कि वे एक ऐसे प्रोसेस का खुलासा करते हैं जो इंस्टीट्यूशनल जिम्मेदारी को सुरक्षित रखने के बजाय लेनदेन को पूरा करने पर फोकस करता है। प्राइवेटाइजेशन से कंज्यूमर्स को अपने आप कम कीमतों का फायदा मिलता है, यह सोच गुमराह करने वाली है। पाकिस्तान का अपना अनुभव इस सोच को गलत साबित करता है। के-इलेक्ट्रिक इसका एक साफ उदाहरण है। प्राइवेटाइजेशन के बावजूद, बिजली के टैरिफ कम नहीं हुए हैं, बल्कि रिकॉर्ड लेवल तक बढ़ गए हैं।

ट्रंप पर हमले की तस्वीर वायरल, ईरान ने दी सख्त चेतावनी — कहा ‘इस बार बचना मुश्किल’

तेहरान ईरान के ताजा हालात चिंताजनक हैं। अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की आशंका के बीच अब ईरान ने भी अपनी भौहें सिकोड़ ली हैं। ईरान ने एक तस्वीर के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दे दी है। इस बीच तनावपूर्ण हालात में ब्रिटेन ने तेहरान में अपने दूतावास को कुछ समय के लिए बंद कर दिया है। इसके साथ ही ब्रिटेन ने अपने सभी डिप्लोमैटिक स्टाफ को वापस बुला लिया है। ब्रिटेन के फॉरेन ऑफिस ने कहा, “हमने तेहरान में ब्रिटिश दूतावास को कुछ समय के लिए बंद कर दिया है। यह अब रिमोटली ऑपरेट होगा।” ईरान ने 2024 में पेन्सिलवेनिया में ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले की एक तस्वीर दिखाई, जिसमें उन्हें एक कैंपेन रैली में मारने की कोशिश करते हुए दिखाया गया था। साथ ही चेतावनी दी गई, "इस बार निशाना चूकेगा नहीं।" फारसी से ट्रांसलेट किए गए इस मैसेज की तस्वीरें कई मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए तेजी से ऑनलाइन फैलीं और ईरान के सरकारी टेलीविजन पर भी दिखाई गईं। यह ब्रॉडकास्ट ट्रंप की बार-बार दी गई चेतावनियों के बाद आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने लिखा, "अगर ईरान शांति से विरोध करने वालों को मारता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा। हम आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।" ईरानी मीडिया ने जिस तस्वीर का इस्तेमाल किया, वह जुलाई 2024 में पेन्सिलवेनिया के बटलर में एक कैंपेन रैली के दौरान ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले की थी। उस समय थॉमस क्रुक्स नाम के एक बंदूकधारी ने स्टेज पर गोलियां चलाई थीं, जो ट्रंप के कान को छूते हुए निकल गई थी। इस घटना ने अमेरिका को चौंका दिया था। हाल के दिनों में ईरान और यूरोपीय देशों के बीच डिप्लोमैटिक रिश्ते और खराब हो गए हैं। अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद ईरान ने फिलहाल अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है। बढ़ते तनाव के बावजूद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में कहा है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है और पिछले दो दशकों से उसने यही रुख बनाए रखा है। कूटनीति युद्ध से कहीं बेहतर है। अराघची ने वाशिंगटन से सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत से समाधान निकालने का आग्रह किया है।

अमेरिका के दबाव के सामने साथ आए शिया और सुन्नी देश, सऊदी अरब ने ईरान को दिया बड़ा संकेत

तेहरान अमेरिका की ओर से ईरान को लगातार हमले की धमकियां दी जा रही हैं। इस बीच इस्लामिक जगत में शिया और सुन्नी मुसलमान देशों के बीच के मतभेद खत्म होते दिख रहे हैं। अमेरिकी हमले की स्थिति में सऊदी अरब ने ईरान को भरोसा दिया है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा। सऊदी अरब ने ईरान को बताया है कि वह अपनी जमीन का उसके खिलाफ हमलों में इस्तेमाल नहीं होने देगा। यही नहीं वह अपने एयरस्पेस से भी ऐसे किसी लड़ाकू विमान को गुजरने नहीं देगा, जिसका मकसद ईरान पर हमला करना हो। सऊदी अरब की ओर से ईरान को मिला यह भरोसा अहम माना जा रहा है।   वॉशिंगटन से कई बार ईरान को धमकी मिल चुकी है, जिसमें उसने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरती गई तो वह सैन्य हस्तक्षेप करेगा। सऊदी अरब को अमेरिका के करीबी दोस्तों में शुमार किया जाता है। इसके अलावा शिया और सु्न्नी विवाद के कारण भी ईरान और सऊदी अरब के बीच एक दूरी रही है। ऐसे में सऊदी अरब की तरफ से ईरान को भरोसा दिया जाना बड़ा संकेत है। खासतौर पर तब जबकि पाकिस्तान समेत किसी भी इस्लामिक देश ने ईरान के साथ एकता की बात नहीं की है। पाकिस्तान अकसर इस्लामिक एकता का राग अलापता रहा है, लेकिन अमेरिकी की ओर से ईरान को मिल रही धमकियों के बाद भी वह चुप है। अमेरिका के मिडल ईस्ट में कई ठिकाने, सऊदी अरब में भी सऊदी विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने एएफपी को बताया, 'हमारी ओर से ईरान को स्पष्ट कर दिया गया है कि सऊदी अरब उसके खिलाफ किसी भी अलायंस का हिस्सा नहीं बनेगा। इसके अलावा हम ईरान पर हमले के लिए अपनी जमीन और एयरस्पेस का भी इस्तेमाल नहीं होने देंगे।' अमेरिका के मिडल ईस्ट में कई ठिकाने हैं। इनमें से कुछ सऊदी अरब में भी हैं। माना जाता रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग में सऊदी अऱब किसी का पक्ष नहीं लेगा। उसका अब भी ऐसा ही स्टैंड है, लेकिन ईरान को उसने जो भरोसा दिया है, वह अहम है। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस कदर है कि तेहरान ने एयरस्पेस बंद कर दिया है।  

PM मोदी बोले- डिजिटल पेमेंट से स्वास्थ्य तक, भारत ने दुनिया में बनाई सशक्त पहचान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, आर्थिक उपलब्धियों, सामाजिक समावेशन और वैश्विक योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं है, बल्कि हमारे मूल्यों, सोच और कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज कई क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। भारत का यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली बन चुका है। इसके साथ ही भारत विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है और यहां तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम मौजूद है। वैश्विक विमानन बाजार में भारत तीसरे स्थान पर है, जबकि दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क और तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क भी भारत के पास है। इसके अलावा भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक और तीसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में लोकतंत्र इसलिए परिणाम देता है, क्योंकि देश के हर नागरिक की प्राथमिकता सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा, "हम बिना किसी भेदभाव के सार्वजनिक कल्याण की भावना से हर व्यक्ति के लिए काम कर रहे हैं।" इसी सोच का परिणाम है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने इसे 'डेमोक्रेसी डिलीवर्स,' यानी लोकतंत्र के परिणाम देने का जीवंत उदाहरण बताया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में लोगों की आकांक्षाओं और सपनों को ठोस कार्यों में बदला गया है। प्रक्रियाओं से लेकर तकनीक तक हर क्षेत्र में लोकतंत्रीकरण किया गया ताकि आम नागरिक के रास्ते में कोई बाधा न आए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक भावना हमारी नसों में दौड़ती है, हमारे विचारों में बसती है और हमारे मूल्यों में रची-बसी है। कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले पूरी दुनिया इस संकट से जूझ रही थी और भारत भी इससे अछूता नहीं था, लेकिन इन चुनौतियों के बीच भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराईं। लोगों का स्वास्थ्य, कल्याण और भलाई भारत के मूल्यों में निहित है, और ये मूल्य हमें हमारे लोकतंत्र से मिले हैं। प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र के विशाल स्वरूप पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 2024 में हुए आम चुनाव मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास था। करीब 98 करोड़ नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकृत थे, जो कुछ महाद्वीपों की कुल आबादी से भी अधिक है। इन चुनावों में 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से ज्यादा राजनीतिक दलों ने भाग लिया। खास बात यह रही कि महिला मतदाताओं की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर पर रही। महिलाओं की भूमिका पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारतीय महिलाएं केवल भागीदारी नहीं कर रहीं, बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश की राष्ट्रपति एक महिला हैं और जिस दिल्ली शहर में यह सम्मेलन हो रहा है, वहां की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। ग्रामीण और स्थानीय निकायों में करीब 15 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, जो लगभग 50 प्रतिशत जमीनी स्तर के नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आंकड़ा वैश्विक स्तर पर बेजोड़ है। भारत की विविधता का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश में सैकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं और 900 से अधिक टीवी चैनल विभिन्न भाषाओं में प्रसारित होते हैं। हजारों अखबार और पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं। उन्होंने कहा कि इतनी व्यापक विविधता को बहुत कम समाज इतनी सफलतापूर्वक संभाल पाते हैं। भारत इस विविधता का उत्सव मनाता है, क्योंकि हमारे लोकतंत्र की नींव मजबूत है। प्रधानमंत्री ने भारत के लोकतंत्र की तुलना एक विशाल वृक्ष से करते हुए कहा कि यह गहरी जड़ों से समर्थित है। उन्होंने विश्वास जताया कि यही मजबूत लोकतांत्रिक आधार भारत को भविष्य में भी प्रगति, समावेशन और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाता रहेगा।

ममता vs ED सुनवाई में हाई वोल्टेज ड्रामा: कपिल सिब्बल की दलील पर मीलॉर्ड का सख्त रुख

नई दिल्ली कोलकाता में पिछले दिनों पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे मामले में आज (गुरुवार, 15 जनवरी को) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। यह केस ED बनाम ममता बनर्जी का मामला बन गया है। इस बीच, ईडी ने एक नई याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल पुलिस के तीन बड़े अधिकारियों, जिनमें डीजीपी राजीव कुमार भी शामिल हैं, को निलंबित किए जाने की मांग की है। ED का आरोप है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित तौर पर चोरी में मदद की। अर्जी में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीजीपी राजीव कुमार पूर्व में कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे थे।   ईडी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू और ईडी के स्पेशल वकील जोहेब हुसैन पेश हुए तो पश्चिम बंगाल और ममता बनर्जी की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। सुनवाई के दौरान SG मेहता ने आरोप लगाया कि I-PAC के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच में बाधा डाली और फाइलें/डिवाइस ले गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में कल कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा हुआ। उन्होंने राज्य में भीड़तंत्र हावी होने का भी आरोप लगाया और कहा कि राज्य में लोकतंत्र नहीं बचा है। भीड़तंत्र लोकतंत्र पर हावी SG मेहता ने शीर्ष अदालत से कहा कि हमने हाई कोर्ट में संपर्क किया था लेकिन वहां अव्यवस्था उत्पन्न हो गई। उन्होंने कहा, "अब देखिए क्या होता है जब भीड़तंत्र लोकतंत्र पर हावी हो जाता है। देखिए HC जज ऑर्डर में क्या कहते हैं। इसमें कहा गया है कि बड़ी संख्या में वकील इकट्ठा हुए और हंगामा किया। उन्होंने टॉप कोर्ट से कहा कि हाई कोर्ट में माहौल सुनवाई के लिए ठीक नहीं है। इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि वह नोटिस जारी कर मामले की समीक्षा करना चाहती है। यह बहुत गंभीर मामला है शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि ईडी की छापेमारी संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट में हुए हंगामे से वह अत्यंत व्यथित है। इसी बीच, ASG राजू ने कहा, "मैं वहां था। मैं बता सकता हूं कि वहां क्या हुआ था?" इसी बीच, TMC चीफ ममता बनर्जी का पक्ष रख रहे कपिल सिब्बल ने कहा, "मैं भी वहीं था।" इस पर जस्टिस मिश्रा ने झिड़की देते हुए कहा, "यहां हंगामा मत कीजिए।" इसके बाद पीठ ने मौखिक टिप्पणी की, ‘‘यह बहुत गंभीर मामला है; हम नोटिस जारी करेंगे। हमें इसकी समीक्षा करनी होगी।’’ ASG राजू का माइक बार-बार बंद किया गया SG तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट में कल की सुनवाई के दौरान ASG राजू का माइक बार-बार बंद किया गया। उन्होंने कहा कि वह इससे ज्यादा नहीं कहना चाहते। उनका इशारा हाई कोर्ट में सुनवाई नहीं कराने का था। उन्होंने कहा कि वो इस अदालत में मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए आए हैं। इसी बीच, कपिल सिब्बल ने कहा, "मुझे भी अपनी बात रखने दीजिए। वे जानते हैं। मैं तृणमूल कांग्रेस के चेयरमैन की तरफ से पेश हो रहा हूं।" इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा, “हमें सुनने दीजिए। जिस तरह से हाई कोर्ट में हुआ है, उससे हम बहुत परेशान हैं….” आप मेरे मुंह में अपने शब्द नहीं डाल सकते सिब्बल ने आगे कहा, "सुनवाई कल हुई थी। इस कोर्ट को यह मानना ​​होगा कि HC न्याय नहीं दे सकता है।" इस पर शीर्ष अदालत सिब्बल पर भड़क उठा। SC जज ने कहा, "आप मेरे मुंह में अपने शब्द नहीं डाल सकते। हम तय करेंगे कि क्या मानना ​​है और क्या नहीं।" इस पर सिब्बल ने फिर कहा, "HC को केस सुनना होता है, फैसला देना होता है और फिर हम अपील में जाते हैं लेकिन इन लोगों (ED) ने अब समानांतर कार्यवाही शुरू कर दी है।" सिब्बल ने आरोप लगाया कि वहां चुनावों में गड़बड़ी करने की कोशिश हो रही है… चुनाव डेटा चुराने की कोशिश हुई है। उन्होंने यह भी कहा, "CM सिर्फ पार्टी से संबंधित दस्तावेज और निजी लैपटॉप लेकर गई थीं। सारा चुनावी डेटा गोपनीय होता है, अगर यह किसी के हाथ लग जाए, हम चुनाव कैसे लड़ेंगे?”

एंजेल चकमा मर्डर केस में बड़ी कार्रवाई, नेपाल से प्रत्यर्पण की तैयारी शुरू

देहरादून 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मुख्य आरोपी के नेपाल फरार होने की सूचना के बाद देहरादून पुलिस ने प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की। देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि लोकल इंटेलिजेंस यूनिट ने एंजेल चकमा हत्याकांड के मुख्य आरोपी यज्ञराज अवस्थी को नेपाल से भारत लाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को रिपोर्ट भेज दी है। उधर, मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने परिजनों को न्याय दिलाने का वादा किया।   जानकारी के अनुसार, त्रिपुरा निवासी एमबीए छात्र एंजेल चकमा की 9 दिसंबर को देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र में चाकू और अन्य धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई थी। गंभीर रूप से घायल एंजेल ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस मामले को लेकर बुधवार को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने मृतक छात्र के परिजनों से उनके आवास पर मुलाकात की और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। त्रिपुरा सीएम साहा बोले- न्याय दिलाकर रहेंगे मुख्यमंत्री माणिक साहा ने ANI से बातचीत में कहा कि वह इस मामले को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने कहा, “मैंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से कई बार बात की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अब तक 6 में से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह बेहद दुखद घटना है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दे।” एंजेल का छोटा भाई मानसिक तनाव में मृतक के पिता तरुण देबबर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि न्याय जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली दौरे के दौरान वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से इस मामले पर फिर बात करेंगे। मेरा छोटा बेटा इस समय मानसिक रूप से बहुत परेशान है और ज्यादा बोलता भी नहीं। मुख्यमंत्री ने उसके लिए रोजगार की संभावनाओं पर भी मदद का आश्वासन दिया है।” एंजेल को न्याय की मांग तेज हुई इस बीच ऑल इंडिया चकमा स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष दृश्यमुनि चकमा ने कहा कि संगठन ने निष्पक्ष और पारदर्शी सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए मामले की सुनवाई दिल्ली में कराए जाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने जांच के दौरान हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड में चल रही जांच को लेकर हमें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। इसलिए हमने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि CBI जांच के साथ मुकदमे की सुनवाई दिल्ली में कराई जाए, ताकि निष्पक्ष फैसला हो सके। इसके साथ ही हमने मृतक के पिता को बीएसएफ, अगरतला में नौकरी और उनके बेटे माइकल को उसकी योग्यता के अनुसार राज्य सरकार में अवसर देने की भी मांग की है।” बताया जा रहा है कि एंजेल चकमा पर 9 दिसंबर की रात कुछ बदमाशों ने चाकू और अन्य हथियारों से हमला किया था। पुलिस इस जघन्य हत्याकांड से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

ईरान सरकार बदली, भारत के हितों पर असर; पाकिस्तान और चीन को मिला फायदा

तेहरान ईरान में अयातुल्लाह अली खामेनेई का शासन पहली बार अंदर और बाहर से इतने दबाव में है। एक तरफ देश में प्रदर्शन चल रहे हैं तो वहीं अमेरिका की ओर से लगातार सैन्य हस्तक्षेप की धमकियां दी जा रही हैं। बीते करीब 4 दशकों से देश से बाहर रह रहे विपक्षी नेता रजा पहलवी भी ऐक्टिव हो गए हैं और उनका कहना है कि वह जल्दी ही ईरान लौट सकते हैं। ऐसे हालात में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें काफी ज्यादा हैं। इस बीच जानकारों का कहना है कि यदि ईरान में सरकार बदलती है तो इससे भारत को ही झटका लगेगा। वहीं चीन और पाकिस्तान जैसे मुल्कों को इसका कुछ फायदा हो सकता है।     पहली वजह यह है कि जब पाकिस्तान जमीनी रास्ते के जरिए पश्चिम एशिया पहुंचने की भारत की कोशिशों के आड़े आता है तो उसमें ईरान एक मददगार के रूप में दिखता है। सालों से ईरान और भारत इस मामले में रणनीतिक साझेदार रहे हैं। चाबहार बंदरगाह इसकी एक बानगी है, जिसे चीन और पाकिस्तान के बनाए ग्वादर पोर्ट के मुकाबले में देखा जाता है। इसके अलावा सुन्नी मुसलमान देश पाकिस्तान जब उम्मा के नाम पर इस्लामिक एकता की बात करता है तो उसमें ईरान एक काउंटर-बैलेंस बनाता है। भारत के लिए यह फायदे की स्थिति रही है, लेकिन जब ईरान में अमेरिकी पिट्ठू सरकार होगी तो भारत के लिए स्थिति बदल जाएगी।  

India-EU डील पर ट्रंप को एक्सपर्ट की तगड़ी प्रतिक्रिया, कहा- ‘अमेरिका ही हारा’

वाशिंगटन एक ओर जहां डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ (Donald Trump Tariff) की धौंस जमाकर अपनी शर्तों पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश में लगे हैं, तो भारत सरकार अपनी रणनीति पर आगे बढ़ते हुए बिना किसी की शर्तों के आगे झुके एक के बाद एक कई देशों से ट्रेड डील कर रहा है. हाल ही में ओमान और न्यूजीलैंड के बाद अब यूरोपीय यूनियन के साथ भी भारत का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU FTA) फाइनल होने के करीब है.  यूरोपीय मीडिया की रिपोर्ट्स की मानें, तो 27 जनवरी को इस पर अंतिम मुहर भी लग सकती है. इस बड़ी डील को लेकर एक्सपर्ट डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए नजर आ गए है. 'द ग्रेट रिसेट' के लेखक और स्ट्रेटिजिक एनालिस्ट नवरूप सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) के जरिए एक पोस्ट करते हुए लिखा है कि, 'ये खबर साबित करती है कि अमेरिकी ही अंतिम रूप से हारा है.' 27 जनवरी का बड़ा समझौता! European Union 27 जनवरी को भारत के साथ अपने अब तक के सबसे बड़े व्यापार समझौते को औपचारिक रूप दे सकता है. यूरोपियन मीडिया यूरेक्टिव की एक रिपोर्ट को देखें, तो इस डील पर साइन करने के लिए EU के टॉप ऑफिशियल नई दिल्ली भेजे जाएंगे. रिपोर्ट में खास बात ये है कि India-EU FTA में एग्रीकल्चर सेक्टर को दूर रखा गया है. बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अटकने में एक अहम मुद्दा कृषि और डेयरी प्रोडक्ट भी हैं. इसमें बताया गया कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को यूरोपीय संसद के सदस्यों को बंद कमरे में बताया कि समझौते पर इस महीने हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसमें कृषि शामिल नहीं है. इसे लेकर यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के साथ समझौते पर साइन के लिए भारत यात्रा पर आएंगे.  एक्सपर्ट बोले- 'ये ट्रंप के लिए संदेश' ट्रेड डील को लेकर आई इस बड़ी खबर के बाद 'द ग्रेट रिसेट' (The Great Reset) के लेखक नवरूप सिंह ने इस समझौते के अंतिम पड़ाव पर पहुंचने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर निशाना साधा है. उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि, 'कृषि क्षेत्र में बिना किसी समझौते के फाइनल होने जा रही इस डील से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह संदेश जाता है कि भारत कृषि या डेयरी जैसे अपने मूल हितों पर कभी समझौता नहीं करेगा.' नवरूप सिंह ने X पोस्ट में लिखा,'यह होने जा रही डील संदेश है कि भारत अपने मूल हितों के साथ समझौता नहीं करेगा, फिर चाहे न्यूजीलैंड हुआ करार हो या फिर फ्रांस के साथ राफेल डील और जर्मनी के साथ पनडुब्बी सौदा, जो भारतीय सामान के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक को खोलने का प्रयास है.' 'भारत कर रहा टैरिफ का मुकाबला' नवरूप सिंह ने कहा कि भारत के ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और ओमान के साथ हुए हालिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में 99% भारतीय सामानों के आयात पर जीरो टैरिफ (Zero Tariff) हो जाता है. उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक पेशेवर की तरह खेल रहा है और ट्रंप के हाई टैरिफ का मुकाबला कर रहा है. भारत हर मुक्त व्यापार समझौते और डीफेंस डील (India Defence Deal) के साथ एक तरह से अमेरिका की ताकत और दबाव को कम करता नजर  आ रहा है और अंततः इसमें अमेरिका ही हार रहा है!