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इंडिगो एयरलाइंस पर बड़ा झटका: सरकार ने भेजा 58.75 करोड़ रुपए का टैक्स नोटिस

नई दिल्ली  बड़ी संख्या में उड़ान रद्द होने के कारण सरकारी जांच का सामना कर रही बजट एयरलाइन इंडिगो को 58.75 करोड़ रुपए का टैक्स नोटिस मिला है। यह जानकारी एयरलाइन की ओर से शुक्रवार को दी गई। एयरलाइन ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा है कि यह नोटिस वित्त वर्ष 2020-21 के लिए दिल्ली दक्षिण के सीजीएसटी के अतिरिक्त आयुक्त की ओर से दिया गया है। फाइलिंग में इंडिगो की प्रवर्तक कंपनी इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड ने कहा कि उसे गुरुवार (11 दिसंबर) को टैक्स पेनल्टी ऑर्डर प्राप्त हुआ, जिसमें जीएसटी की मांग के साथ-साथ जुर्माना भी शामिल है। एयरलाइन यह टैक्स नोटिस ऐसे समय पर मिला है, जब इंडिगो इस महीने की शुरुआत में बड़ी संख्या में उड़ानों के रद्द होने के कारण मुश्किलों का सामना कर रही है। इससे पहले नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इंडिगो पर बड़ा एक्शन लिया है और उन चार फ्लाइट निरीक्षकों को निकाल दिया है, जो कि इंडिगो की सुरक्षा और ऑपरेशनल मानकों के लिए जिम्मेदार थे। इसके अलावा विमानन नियामक ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को समन भेजा है और उन्हें शुक्रवार को अधिकारियों के समक्ष फिर से पेश होने के लिए कहा गया है। सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण और निगरानी ड्यूटी में लापरवाही पाए जाने के बाद डीजीसीए ने निरीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की है। नियामक ने अब इंडिगो के गुरुग्राम कार्यालय में दो विशेष निगरानी दल तैनात किए हैं ताकि एयरलाइन के संचालन पर कड़ी नजर रखी जा सके। यह दल प्रतिदिन शाम 6 बजे तक डीजीसीए को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। एक दल इंडिगो के बेड़े की क्षमता, पायलटों की उपलब्धता, चालक दल के उपयोग के घंटे, प्रशिक्षण कार्यक्रम, ड्यूटी विभाजन पैटर्न, अनियोजित अवकाश, स्टैंडबाय क्रू और चालक दल की कमी के कारण प्रभावित उड़ानों की संख्या की निगरानी कर रहा है। दूसरा दल यात्रियों पर संकट के प्रभाव पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसमें एयरलाइन और ट्रैवल एजेंट दोनों से रिफंड की स्थिति, नागर विमानन आवश्यकताओं (सीएआर) के तहत दी जाने वाली क्षतिपूर्ति, समय पर उड़ान भरना, सामान की वापसी और समग्र रद्दीकरण की स्थिति की जांच करना शामिल है।

2027 जनगणना की तैयारी तेज: केंद्र ने 11,718 करोड़ के विशाल बजट को दी हरी झंडी

नई दिल्ली  केंद्रीय कैबिनेट ने जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कोलसेटू नीति और खोपरा MSP 2025 पर भी अहम फैसले लिए गए हैं। जानें आजादी के बाद की 8वीं जनगणना से जुड़ी खास बातें। कैबिनेट ने शुक्रवार को तीन महत्वपूर्ण फैसलों का मंजूरी दी। कैबिनेट ने जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री मंडल ने कोयला लिंकेज नीति में सुधार के लिए कोलसेटू नीति को भी मंजूरी दी है। सरकार ने खोपरा 2025 सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को भी नीतिगत मंजूरी दे दी है।   जनगणना 2027 के बारे में केंद्रीय मंत्री ने क्या बताया? कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जनगणना 2027 की जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विश्व का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास होगा। जनगणना 2027 अब तक की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी। जनगणना केंद्र का विषय है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत इसे किया जाता है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। कोविड महामारी के कारण जनगणना 2021 आयोजित नहीं की जा सकी। इससे पहले 16 जून 2025 को जनगणना 2027 की राजपत्र अधिसूचना जारी की गई। जनगणना 2027 की अनुमानित लागत 11,718 करोड़ रुपये होगी  दो चरणों में होगी जनगणना केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 को 00:00 बजे होगी। बर्फ से ढके क्षेत्रों के लिए यह तिथि 1 अक्तूबर 2026 को 00:00 बजे होगी। वैष्णव ने कहा, "जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहले चरण में  मकान सूचीकरण और आवास जनगणना (HLO) होगी। इसे अप्रैल से सितंबर 2026 तक अंजाम दिया जाएगा। दूसरे चरण में जनसंख्या की गिनती (PE) होगी। यह फरवरी 2027 से शुरू होगी। बर्फ से ढके क्षेत्रों में सितंबर 2026 से शुरू होगी। इससे पहले, सरकार की कैबिनेट बैठक को लेकर कई बड़े दावे सामने आए। सूत्रों के अनुसार, मनरेगा का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ किए जाने पर विचार हो सकता है। बताया जा रहा है कि ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम की पहचान और प्रभाव को नया रूप देने के उद्देश्य से यह बदलाव प्रस्तावित है।

कड़ाके की सर्दी ने बढ़ाई चिंता, 19 दिसंबर तक स्कूलों में छुट्टी घोषित

जम्मू-कश्मीर देश के कई राज्यों में तापमान तेजी से गिर रहा है और ठंड अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ रही है। कई जगहों पर शीतलहर की दस्तक ने हालात और कठिन बना दिए हैं। घना कोहरा सुबह के समय जीवन को प्रभावित कर रहा है, जिसका असर सबसे ज़्यादा स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। जैसे-जैसे सर्दी तीखी होती जा रही है, वैसे-वैसे बच्चे स्कूलों में छुट्टी की घोषणा का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। इसी बीच देश के एक राज्य में स्कूलों में लंबी छुट्टियों का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर में स्कूल बंद… 7 दिन की तुरंत छुट्टी घोषित जम्मू-कश्मीर के विंटर ज़ोन (मुख्यतः पहाड़ी इलाकों) में 13, 14, 15, 16, 17, 18 और 19 दिसंबर को स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इस क्षेत्र में शीतलहर, भारी बर्फबारी और घने कोहरे के कारण मौसम का ‘ट्रिपल अटैक’ जारी है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए छुट्टियाँ घोषित की हैं। ये छुट्टियाँ केवल शुरुआती सात दिन नहीं हैं- इससे आगे भी स्कूल बंद रहेंगे क्योंकि विंटर ज़ोन में पूरा दिसंबर छुट्टियों के तौर पर निर्धारित किया गया है। जम्मू-कश्मीर में सर्दियों की छुट्टियों का पूरा शेड्यूल प्री-प्राइमरी: 26 नवंबर 2025 से 28 फ़रवरी 2026 तक कक्षा 1 से 8: 1 दिसंबर 2025 से 28 फ़रवरी 2026 तक कक्षा 9 से 12: 11 दिसंबर 2025 से 22 फ़रवरी 2026 तक बच्चों और अभिभावकों के चेहरे पर खिली खुशी इतनी लंबी सर्दियों की छुट्टियाँ मिलने से बच्चों की ख़ुशी देखते ही बनती है। न सिर्फ बच्चे, बल्कि अभिभावक और शिक्षक भी राहत महसूस कर रहे हैं। ठंड के बीच स्कूल आने-जाने की दिक्कतों से छुटकारा मिला है और परिवारों को एक लंबा ब्रेक मिल गया है। यदि आप चाहें तो मैं इस लेख को और अधिक पत्रकारिता शैली में, सोशल मीडिया पोस्ट शैली में, या ब्रेकिंग न्यूज़ फॉर्मेट में भी बदलकर दे सकता हूँ।

कड़ाके की सर्दी का कहर: दिल्ली-NCR में शीतलहर, राजस्थान-हरियाणा में तापमान गिरा रिकॉर्ड स्तर पर

नई दिल्ली  देश में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है. उत्तर भारत में कई जगह भीषण ठंड पड़ रही है. कई राज्यों में शीतलहर का प्रकोप जारी है. दिल्ली में भी शीतलहर सितम ढा रही है. शुक्रवार को राजधानी में हल्की धुंध छाए रहने की संभावना है. इसके साथ ही आज सुबह उत्तर प्रदेश में बहुत घना कोहरा छाए रहने की संभावना है. असम, मेघालय, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और ओडिशा में भी घना कोहरा छाए रहने का पूर्वानुमान है. ऐसा रहेगा दिल्ली-एनसीआर का मौसम दिल्ली-एनसीआर में दिन का अधिकतम तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान है. वहीं, सुबह और रात का न्यूनतम तापमान 6 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है. पूरे दिन शीतलहर का असर देखने को मिलेगा. दिल्ली-एनसीआर में सुबह घना कोहरा और हल्की धुंध छाई रहने का अलर्ट है. इससे विजिबिलिटी कम रह सकती है. राजस्थान में पड़ रही है भीषण ठंड राजस्थान में कई जगह भीषण सर्दी पड़ रही है. बुधवार रात फतेहपुर में पारा 4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. मौसम विभाग का कहना है कि राज्य के ज्यादातर हिस्सों में आगामी एक सप्ताह मौसम शुष्क रहेगा. हालांकि, एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के मामूली प्रभाव के चलते दो-तीन दिन आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं. इससे न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. पंजाब-हरियाणा में शीतलहर का प्रकोप पंजाब और हरियाणा में भी शीतलहर का प्रकोप जारी है. दोनों ही राज्यों में कई जगह न्यूनतम तापमान सामान्य से कुछ डिग्री नीचे बना हुआ है. फरीदकोट पंजाब का सबसे ठंडा स्थान रहा. यहां न्यूनतम तापमान 4.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. वहीं, अमृतसर में न्यूनतम तापमान 6.7, लुधियाना में 6.4 डिग्री सेल्सियस, पटियाला में 7.4, पठानकोट में 6.9 डिग्री सेल्सियस और बठिंडा में 6.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. कश्मीर में कड़ाके की ठंड कश्मीर के ज्यादातर हिस्सों में तापमान में गिरावट के चलते लोगों को रात में कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ रहा है. श्रीनगर में बुधवार रात को तापमान मंगलवार रात के मुकाबले 1 डिग्री गिरकर माइनस 2.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड में न्यूनतम तापमान माइनस 3.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम विभाग का कहना है कि 12 दिसंबर तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है. 13 से 15 दिसंबर के बीच उत्तरी और मध्य कश्मीर के ऊंचाई वाले कुछ हिस्सों में हल्की बर्फबारी हो सकती है. आने वाले दिनों में कश्मीर घाटी में कई जगह हल्की से मध्यम स्तर की धुंध छाई रह सकती है.  

‘कुछ तो गलत है’—SC ने मद्रास हाई कोर्ट की कार्यवाही पर जताई गंभीर आपत्ति

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने मामलों की लिस्टिंग और सुनवाई में अपनाए जा रहे नियमों पर मद्रास हाई कोर्ट पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने करूर भगदड़ के बाद हाई कोर्ट की भूमिका पर अपनी जांच तेज कर दी है और कहा है कि जिस तरह से हाई कोर्ट ने इस त्रासदी से जुड़े मामलों को संभाला, उसमें कुछ गड़बड़ है। इस घटना में एक्टर से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान 41 लोगों की जान चली गई थी।   जस्टिस जेके माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा सब्मिट की गई एक रिपोर्ट की जांच करने के बाद यह टिप्पणी की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर में मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल उठाया था कि करूर मदुरै बेंच के अधिकार क्षेत्र में आने के बावजूद हाई कोर्ट की चेन्नई बेंच ने इस मामले को कैसे हैंडल किया। रिपोर्ट को पार्टियों के बीच सर्कुलेट करने का आदेश दिया गया, और बेंच ने उनसे जवाब मांगा। रजिस्ट्रार जनरल की एक्सप्लेनेशन को देखने के बाद, बेंच ने कमेंट किया: "हाई कोर्ट में कुछ गलत हो रहा है। यह सही बात नहीं है जो हाई कोर्ट में हो रही है… रजिस्ट्रार जनरल ने एक रिपोर्ट भेजी है।" सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई सवाल उठाए थे, जिनमें यह भी शामिल था कि चेन्नई बेंच ने करूर से जुड़े मामले में दखल क्यों दिया, उसने एक ऐसी याचिका पर पूरी तरह से तमिलनाडु पुलिस अधिकारियों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कैसे किया, जिसमें सिर्फ राजनीतिक रैलियों के लिए गाइडलाइंस मांगी गई थीं और हाई कोर्ट की दो बेंचों से विरोधाभासी आदेश क्यों आए, जबकि मदुरै बेंच ने उसी दिन जांच को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को ट्रांसफर करने से मना कर दिया था। तमिलनाडु की ओर से पेश हुए सीनियर वकील पी. विल्सन ने कोर्ट से कहा, "हमारे हाई कोर्ट में, जो भी मामला कोर्ट के सामने आता है, उससे जुड़ी हर बात पर वे आदेश देते हैं…" इस पर जस्टिस माहेश्वरी ने जवाब दिया, "अगर कोई प्रैक्टिस गलत है।" बेंच ने 13 अक्टूबर के अपने आदेश के एक हिस्से में बदलाव करने की मौखिक रिक्वेस्ट को भी ठुकरा दिया, जिसमें निर्देश दिया गया था कि सीबीआई जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय समिति करेगी। आदेश के अनुसार, जस्टिस रस्तोगी को तमिलनाडु कैडर के दो सीनियर आईपीएस अधिकारियों को चुनना होगा जो उस राज्य के मूल निवासी न हों।  

ट्रंप का बड़ा भू-राजनीतिक दांव: कोर-5 प्लान से साथ बैठेंगे भारत, चीन, रूस और जापान

वाशिंगटन  अमेरिका अर्थव्यवस्था के मानदंडों को छोड़कर अब ऐसे देशों को साथ लाना चाहता है जिनकी आबादी ज्यादा है। इस ग्रुप को 'कोर-5' या 'सी-5' नाम दिया गया है। इस तरह का ग्रुप बनाने का उद्देश्य भारत, चीन, रूस और जापान को एक साथ लाना है। हालांकि मौजूदा परिदृश्य को देखें तो यह पानी में घी मिलाने जैसा काम है। एक तरफ भारत और चीन का 36 का आंकड़ा है तो दूसरी तरफ चीन और जापान भी प्रतिद्वंद्वी हैं। रूस और अमेरिकी की बात करें तो डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन से करीबी बढ़ाने के लिए पहल जरूर की है।   जानकारों का कहना है कि अमेरिका चाहता है कि ऐसे देशों का संगठन हो जो कि सेना और जनसंख्या के स्तर पर मजबूत हों। अमेरिका के प्रकाशन पॉलिटिको ने 12 दिसंबर को एक आर्टिकल में कहा कि अमेरिका को जी-7 और जी-20 जैसे फोरम नाकाफी लग रहे हैं। ऐसे में मल्टीपोलर दुनिया के लिए नए फोरम का विचार हो रहा है। इसकी पहली मीटिंग में ही मध्य एशिया में शांति स्थापित करने और इजरायल-सऊदी अरब के बीच रिश्ते सुधारने को लेकर चर्चा हो सकती है। कुल मिलाकर डोनाल्ड ट्रंप का अजेंडा यह है कि यूरोप आधारिक संगठनों को आगे बढ़ाने से अच्छा है कि उभरती हुई ताकतों का संगठन बनाया जाए। वाइट हाउस की नेशनल सिक्योरिटी का प्लान है कि इस ग्रुप का फोकस कुछ खास मुद्दों पर होगा। इसके अलावा जी-7 की ही तरह इसके शिखर सम्मेलन होंगे। हालांकि इस विचार पर अभी बहस चल रही है क्योंकि इस तरह का ग्रुप दुनियाभर में बड़ा उथल-पुथल करने वाला हो सकता है। एक पक्ष का कहना है कि अमीर और डेमोक्रेटिक देशों से इतर यह संगठन शक्ति पर आधारित होगा। सी-5 को लेकर अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टता नहीं है। हालांकि अमेरिका की विदेश नीति से लगता है कि वह इसे धरती पर उतार सकता है। ऐसे में चीन और भारत जैसे प्रतिद्वंद्वी भी एक मंच पर दिखाई देंगे। वहीं भारत के लिए इंडो पसिफिक मुद्दों पर संबोधन के लिए यह एक अच्छा प्लैटफॉर्म हो सकता है। यह संगठन रूस को सामने रखते हुए नाटो को कमजोर करने का प्लान भी साबित हो सकता है।  

न्यायपालिका पर दबाव? जस्टिस स्वामीनाथन के समर्थन में 56 पूर्व जज, कहा—हमारी बस एक अपील…

नई दिल्ली मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की कोशिश पर 56 पूर्व जजों ने ऐतराज जताया है। इन जजों की ओर से एक खुला पत्र लिखा गया है और महाभियोग की कोशिश को जजों को धमकाने का एक तरीका बताया है। इन पूर्व जजों का कहना है कि जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ प्रस्ताव लाना एक प्रयास है कि ऐसे जजों को धमकाया जाए, जो किसी खास विचारधारा से ताल्लुक नहीं रखते हैं या फिर उनकी बात को ही महत्व नहीं देते हैं। इन जजों ने सांसदों, वकीलों, सिविल सोसायटी और नागरिकों से अपील की है कि ऐसे प्रस्ताव को खारिज कर दें।   पूर्व जजों ने कहा कि यह जरूरी है कि अदालतों की स्वायत्तता और अखंडता को बरकरार रखा जाए। अदालतों पर किसी तरह का दबाव डालना ठीक नहीं है। इस बयान में लिखा गया है, 'हम माननीय सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के पूर्व न्यायाधीश एवं मुख्य न्यायाधीश इस बात को लेकर गंभीर आपत्ति जताते हैं, जिस तरह से जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ कुछ सांसदों ने महाभियोग का प्रस्ताव रखा है। यह एक खतरनाक प्रयास है कि ऐसे जजों को धमकाया जाए, जो किसी खास विचारधारा की पक्ष में बात नहीं करते या फिर उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरते। यदि इस तरह के प्रयासों को आगे बढ़ने दिया गया तो फिर हमारे लोकतंत्र की जड़ें ही कमजोर हो जाएंगी और न्यापालिका की स्वतंत्रता को भी खतरा होगा।' यही नहीं इस बयान में आपातकाल के दौर का भी जिक्र किया गया। बयान में कहा गया कि तब भी ऐसे जजों को प्रताड़ित किया गया था, जो एक पक्ष के साथ नहीं थे। एडीएम जबलपुर केस में अपनी असहमति जाहिर करने के बाद जस्टिस एच.आर. खन्ना को किनारे लगा दिया गया था। ऐसे तमाम दबावों के दौर में भी हमारी न्यायपालिका निष्पक्ष और स्वतंत्र भाव से खड़ी रही है। लेकिन एक बार फिर से उसकी स्वतंत्रता और अखंडता को प्रभावित करने की कोशिशें हो रही हैं। इससे न्यायपालिका को बचाने की जरूरत है। हमारी सभी सांसदों, समाज के लोगों से अपील है कि वे ऐसे किसी भी प्रयास के खिलाफ हों। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आदर्श गोयल, हेमंत गुप्ता शामिल हैं। इसके अलावा कई उच्च न्यायालयों के चीफ जस्टिस अनिल देव सिंह, नरसिम्हा रेड्डी शामिल हैं। एस.एन. ढींगरा, आरके गौबा, विनोद गोयल भी इन जजों में शामिल हैं।  

केवल 68 शब्द! शिवाजी महाराज का इतिहास ‘संक्षेप’ करने से महाराष्ट्र सदन में विरोध के स्वर तेज

मुंबई  छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को सीबीएसई की किताबों में केवल 68 शब्दों का स्थान मिला है। इस बात पर भड़कते हुए निर्दलीय विधायक सत्यजीत तांबे ने महाराष्ट्र विधान परिषद में कड़ा रोष व्यक्त किया है। सत्यजीत ने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर सीबीएसई के पास छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी जानकारी नहीं है तो राज्य सरकार को इस विषय पर जानकारी देनी चाहिए।   विधान परिषद में इस मुद्दे को उठाते हुए तांबे ने कहा कि केंद्रीय स्कूलों में पाठ्यक्रम में शिवाजी महाराज के पूरे इतिहास को केवल 68 शब्दों में समेट दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का इतिहास देश भर तक नहीं पहुंच रहा है। यह महाराष्ट्र सरकार और शिक्षा विभाग की विफलता है। सदन में इस मुद्दे पर आधा घंटा चर्चा की मांग करते हुए तांबे ने कहा, "महाराष्ट्र के आराध्य छत्रपति शिवाजी महाराज का इतिहास अगर देशभर के विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच रहा है, तो यह राज्य के शिक्षा विभाग की विफलता है। शिवाजी महाराज ने राज्य को खड़ा किया। विविध समाज के मावलों को एक साथ लाकर बहुजन हिताय राज्य की स्थापना की। उन्होंने माता जीजाबाई और पिता शाहजी राजेके स्वराज्य के स्वप्न को साकार किया।" तांबे ने सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर इतना प्रेरणादायक और विशाल इतिहास आखिर केवल 68 शब्दों में कैसे समेटा जा सकता है? तांबे ने आरोप लगाया कि सीबीएसई में अन्य राजाओं के इतिहास का विस्तृत वर्णन दिया गया है। कई ऐसे राजाओं के बारे में भी भर-भरकर लिखा गया है, जिन्होंने अपने जीवन में केवल महल बनवाए थे, तो फिर आखिर छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर राज्य सरकार उदासीन क्यों है? तांबे की बात को बाद में अन्य सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों का भी समर्थन मिला। सरकार की तरफ से मंत्री डॉक्टर पंकज भोयर ने इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा, "राज्य शिक्षा आयोग को एनसीआरटी का पाठ्यक्रम बदने का अधिकार नहीं है। हालांकि, इस विषय पर परिषद ने जरूरी जानकारी एनसीआरटी को भेज दी है। हम आगे भी यह जानकारी भेजते रहेंगे।"  

पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं! IMF ने रखीं कड़ी शर्तें, कर्ज मंजूरी पर मंडराया खतरा

इस्लामाबाद  अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान के लिए अपने 7 अरब डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम के तहत 11 नई शर्तें जोड़ दी हैं। गुरुवार को जारी दूसरी समीक्षा की स्टाफ-लेवल रिपोर्ट में शामिल इन शर्तों के बाद पिछले 18 महीनों में लगाई गई कुल शर्तों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है। नई शर्तें पाकिस्तान के सुशासन ढांचे की पुरानी खामियों, व्यापक भ्रष्टाचार जोखिमों और घाटे वाले क्षेत्रों में सुधार से जुड़ी हैं। सबसे अहम शर्तों में से एक यह है कि दिसंबर 2026 तक सभी उच्च स्तरीय केंद्रीय सिविल सेवकों (ग्रेड-19 और ऊपर) की संपत्ति घोषणाएं आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएंगी। आईएमएफ का कहना है कि इससे आय और संपत्ति में विसंगतियों का पता लगाना आसान होगा। सरकार ने प्रांतीय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी यह नियम लागू करने का इरादा जाहिर किया है। बैंकिंग क्षेत्र को इन घोषणाओं की पूरी जानकारी दी जाएगी। भ्रष्टाचार पर बड़ा हमला आईएमएफ ने अक्टूबर 2026 तक 10 सबसे अधिक जोखिम वाले विभागों में भ्रष्टाचार के खतरे को कम करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना जारी करने को कहा है। नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) इन योजनाओं का समन्वय करेगा। प्रांतीय एंटी-करप्शन संस्थाओं को वित्तीय खुफिया जानकारी प्राप्त करने और वित्तीय अपराधों की जांच क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। ये कदम आईएमएफ-प्रायोजित गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नोस्टिक असेसमेंट की सिफारिशों पर आधारित हैं, जिसमें पाकिस्तान के कानूनी, प्रशासनिक और निगरानी ढांचे में व्यापक कमियां उजागर हुई थीं। सीमा-पार भुगतान और रेमिटेंस लागत की समीक्षा आईएमएफ ने पाकिस्तान को मई 2026 तक विदेशी रेमिटेंस भेजने की लागत और बाधाओं की व्यापक समीक्षा पूरी करने को कहा है। अनुमान है कि रेमिटेंस लागत आने वाले वर्षों में 1.5 अरब डॉलर तक बढ़ सकती है, जबकि यही राशि पाकिस्तान के सीमित आयातों के लिए सबसे बड़ा वित्तीय स्रोत है। सितंबर 2026 तक स्थानीय मुद्रा बॉन्ड मार्केट के विकास में बाधाओं की जांच कर सुधारों की रणनीतिक योजना प्रकाशित करनी होगी। चीनी उद्योग में एकाधिकार तोड़ने की कवायद जून 2026 तक कंद्र और प्रांतीय सरकारों को मिलकर राष्ट्रीय चीनी बाजार उदारीकरण नीति पर सहमति बनानी होगी। इस नीति में लाइसेंसिंग नियम, मूल्य नियंत्रण, आयात-निर्यात अनुमति, जोनिंग मानदंड और कार्यान्वयन की स्पष्ट समय-सीमा शामिल होगी। नीति को संघीय कैबिनेट से मंजूरी लेनी होगी। इसे लंबे समय से शक्तिशाली माने जाने वाले शुगर उद्योग में प्रभाव के केंद्रीकरण को खत्म करने का प्रयास माना जा रहा है। एफबीआर (FBR) की खराब कार्यक्षमता पर सख्ती दिसंबर 2025 के अंत तक एफबीआर सुधारों का पूरा रोडमैप तैयार करना होगा जिसमें प्राथमिकता वाले क्षेत्र, स्टाफिंग जरूरतें, समय-सारिणी, माइलस्टोन, अपेक्षित राजस्व परिणाम और KPI शामिल होंगे। इसके बाद कम-से-कम तीन प्राथमिकता वाले सुधारों को पूरी तरह लागू करना होगा। दिसंबर 2026 तक मध्यम अवधि की टैक्स सुधार रणनीति भी प्रकाशित करनी होगी। बिजली क्षेत्र में निजीकरण की तैयारी अगले केंद्रीय बजट से पहले हैदराबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (HESCO) और सुक्कूर इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (SEPCO) में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए आधार तैयार करने होंगे और सात सबसे बड़ी बिजली वितरण कंपनियों के साथ पब्लिक सर्विस ऑब्लिगेशन समझौते पूरे करने होंगे। कंपनीज एक्ट 2017 में संशोधन संसद में पेश करने होंगे ताकि गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनुपालन जरूरतें बढ़ाई जा सकें। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) कानून में प्रस्तावित संशोधनों के लिए कॉन्सेप्ट नोट भी जारी करना होगा। राजस्व कम हुआ तो मिनी-बजट लाना होगा आईएमएफ रिपोर्ट में दर्ज है कि यदि दिसंबर 2025 के अंत तक राजस्व लक्ष्य से चूक हुई तो सरकार मिनी-बजट लाएगी। इसमें उर्वरक और कीटनाशकों पर फेडरल एक्साइज ड्यूटी 5% बढ़ाना, उच्च चीनी वाले उत्पादों पर नया एक्साइज ड्यूटी लगाना और कई वस्तुओं को स्टैंडर्ड सेल्स टैक्स दर में लाना शामिल होगा। आईएमएफ ने गवर्नेंस और भ्रष्टाचार डायग्नोस्टिक रिपोर्ट में चिह्नित कमियों को दूर करने की कार्ययोजना प्रकाशित करने की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। पाकिस्तान पहले ही 7 अरब डॉलर के EFF कार्यक्रम के तहत कड़ी निगरानी में है और इन नई शर्तों से आर्थिक सुधारों की गति और तेज करने का दबाव बढ़ गया है।

चेतावनी के 24 घंटे बाद सरकार की कार्रवाई: महाराष्ट्र विधानसभा ने अहम प्रस्ताव को दी मंजूरी

मुंबई  समाजसेवी अन्ना हजारे ने गुरुवार को चेतावनी दी थी कि यदि लोकायुक्त कानून को महाराष्ट्र में लागू नहीं किया गया तो वह जनवरी 2026 में आमरण अनशन शुरू करेंगे। इससे पहले उन्होंने यूपीए सरकार के कार्यकाल में आंदोलन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। यही नहीं यह आंदोलन इतना बड़ा हो गया था कि इससे निकली आम आदमी पार्टी ने जब दिल्ली में चुनाव लड़ा तो उसे जीत हासिल हुई। इसी से निकली पार्टी फिलहाल पंजाब की सत्ता पर काबिज है। अन्ना हजारे ने लोकायुक्त कानून को लेकर चेतावनी दी और अगले ही दिन महाराष्ट्र की विधानसभा में इस कानून को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। विधानसभा में इस ऐक्ट के तहत आईएएस अधिकारियों को भी शामिल किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस तरह महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून, 2023 को संशोधित किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी। इस प्रस्ताव को सीएम देवेंद्र फडणवीस की ओर से ही विधानसभा में रखा गया, जिसे मंजूरी मिल गई। उन्होंने कहा कि अब इस संशोधन से कानून में स्पष्टता हो गई है कि आखिर कौन-कौन लोग लोकायुक्त के दायरे में आएंगे। उन्होंने कहा कि साफ है कि अब राज्य सरकार की ओर से तैनाती पाने वाले आईएएस अधिकारी भी लोकायुक्त कानून के तहत जवाबदेह होंगे। अन्ना हजारे के सवाल का अब भी नहीं मिला है जवाब हालांकि अभी यह साफ नहीं किया गया है कि लोकायुक्त कानून को कब से लागू किया जाएगा। अन्ना हजारे की यही शिकायत है कि महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को लागू नहीं किया जा रहा है। लोकपाल और लोकायुक्त कानून, 2013 के तहत राज्य में भी लोकायुक्त की व्यवस्था लागू की गई है। कानून में नए संशोधन से क्या फायदा होगा अब नए संशोधन के अनुसार राज्य के किसी बोर्ड, निगम, समिति या अन्य संस्था में तैनात आईएएस अधिकारियों को भी इस ऐक्ट के तहत कवर किया जाएगा। इसके तहत उन सभी अधिकारियों को शामिल किया जाएगा, जिनकी नियुक्ति राज्य सरकार ने की है। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इससे केंद्र और राज्य सरकार के कानून में किसी तरह का टकराव नहीं होगा और नियमों को लेकर स्पष्टता रहेगी।