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फैज हमीद पर कार्रवाई के बाद पाकिस्तान में आशंकाओं की बाढ़—क्या यह बड़े सफाए की शुरुआत है?

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में पूर्व पीएम इमरान खान दो साल से ज्यादा वक्त से जेल में बंद हैं। इस बीच उनके करीबी रहे आईएसआई के पूर्व चीफ फैज हमीद को 14 साल कैद की सजा दी गई है। गुरुवार को ही आए फैसले में फैज हमीद को राजनीतिक संलिप्तता रखने, अपने अधिकार का बेजा इस्तेमाल करने, लोगों को नुकसान पहुंचाने और ऑफिशियल सीक्रेट ऐक्ट का उल्लंघन करने के आरोप में सजा दी गई है। इसमें सबसे अहम पहलू राजनीतिक संलिप्तता को माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि फैज हमीद को 9 मई को हुई हिंसा के मामले में यह सजा दी गई है। यही नहीं यदि ऐसा ही है तो फिर फैज हमीद की सजा बस एक शुरुआत भर है। इमरान खान के समर्थकों और अन्य लोगों को डर सता रहा है कि 9 मई को हुई हिंसा के मामले और भी तमाम लोगों पर मिलिट्री कोर्ट में मामले चल सकते हैं। इन लोगों को सख्त सजाएं मिल सकती हैं। पहले भी ऐसी ही चर्चाएं थीं कि मिलिट्री कोर्ट में उन लोगों के खिलाफ केस चलाए जा सकते हैं, जिन्हें लेकर कहा जा रहा है कि वे इमरान खान की गिरफ्तारी को लेकर हुई हिंसा में शामिल थे। पाकिस्तान की सेना ने एक बयान भी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि फैज हमीद को मिलिट्री लॉ के तहत सजा दी गई है। लेकिन सेना के बयान के आखिरी पैराग्राफ की बहुत चर्चा हो रही है। इस पैराग्राफ में सेना ने लिखा है कि राजनीतिक आंदोलन को उकसाने और अस्थिरता पैदा करने के मामलों की अलग से जांच हो रही है। इसमें शामिल लोगों के खिलाफ ऐक्शन लिया जाएगा। सेना के बयान से साफ है कि उसने फैज हमीद और कुछ अन्य नेताओं को हिंसा का जिम्मेदार माना है। साफ है कि अभी और लोगों के खिलाफ भी ऐक्शन हो सकता है। पाकिस्तान का लंबा खूनी इतिहास रहा है, जिसमें गद्दी से हटने के बाद भी कोई शासक सुरक्षित पनाहगाह के लिए तरसता रहा है। भले ही वह जुल्फिकार अली भुट्टो हों या फिर परवेज मुशर्रफ या इमरान खान। ऐसे में एक बार फिर से आशंकाएं तेज हैं कि सेना को बेतहाशा ताकत मिलने के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक विपक्षियों को चुन-चुनकर टारगेट किया जा सकता है।  

क्लब डेथ केस: मालिकों में दहशत, बोले— अब हमारी बारी है, हमें भी मार देंगे

नई दिल्ली  गोवा में 25 लोगों की जिंदगी छीन लेने वाले क्लब के मालिकों गौरव लूथरा (44) और सौरभ लूथरा को डर है कि उन्हें पीट-पीटकर मार डाला जाएगा। अदालत में दायर जमानत याचिका में दोनों भाइयों ने 'गोवा में लिंचिंग' का डर जाहिर किया। आग लगने के बाद थाइलैंड भागे दोनों भाइयों का पासपोर्ट रद्द किए जाने के बाद उन्हें वहां हिरासत में ले लिया गया है। भारत लाए जाने से पहले दोनों भाइयों ने अपने वकीलों के माध्यम से दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी जिसे खारिज कर दिया गया।   अडिशनल सेशंस जज वंदना ने गुरुवार को लूथरा ब्रदर्स की अग्रिम जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि 'प्राथमिक दृष्टया अपराध की प्रकृति गंभीर है।' दोनों भाइयों को थाइलैंड में हिरासत में ले लिया गया है और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लूथरा भाइयों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकीलों सिद्धार्थ लूथरा और तनवीर अहमद मीर ने चार सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मांगी। उन्होंने कहा कि भारत आने पर उनकी सुरक्षा को खतरा है और वह गोवा की अदालत में राहत की अपील के लिए जमानत चाहते हैं। रोमियो लेन चेन के मालिकों ने उनकी प्रॉपर्टीज पर हुए बुलडोजर ऐक्शन का भी जिक्र किया और यह जताने की कोशिश की कि अथॉरिटीज उनके साथ गलत ढंग से पेश आ सकती हैं। मुवक्किल की ओर से वकील ने कहा, 'मेरी सुरक्षा को सीधा खतरा है। गोवा में मेरी लिंचिंग हो जाएगी। मेरे दूसरे रेस्तरां पर सीधा बुलडोजर चला दिया गया। हम जांच में शामिल होंगे… मुझ पर मुकदमा चलाया जाए, लेकिन सताया ना जाए।' वकीलों ने कहा कि लूथरा भाइयों ने तुरंत दिल्ली की अदालत पहुंचे और बिना किसी देरी के जांच में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, 'यदि आज रात मैं इंडिया में लैंड करता हूं और जांच अधिकारी आधी रात को पेश होने को कहते हैं, मैं वहां जाऊंगा।' जज दिखाए गए उन दस्तावेजों को भी संज्ञान में लिया जिनके मुताबिक लूथरा भाइयों ने 7 दिसंबर की रात 7.17 बजे टिकट बुक की और सुबह 5.20 की फ्लाइट से देश से बाहर निकल गए। जज ने कहा कि उनके वकीलों ने तथ्य को छिपाया और यह कहा कि वे भीषण आग लगने से पहले ही थाइलैंड गए थे। आग आधी रात के पहले लगी थी इसका मतलब है कि दोनों भाइयों ने ट्रिप को लेकर प्लान बनाया और घटना की जानकारी मिलने के बाद थाइलैंड के लिए निकले। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि आवेदन के साथ दायर दस्तावेजों से पता चलता है कि लाइसेंस अग्रीमेंट, ट्रेड लाइसेंस और लीज डीड पहले ही एक्सपायर हो चुकी थी।

भारतीय मूल के करोड़पति विक्रम बेरी अरेस्ट: टेस्ला में आगजनी की साजिश का सनसनीखेज आरोप

वाशिंगटन अमेरिका में भारतीय मूल के करोड़पति व्यापारी बेरी विक्रम को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक विक्रम पर आरोप है कि उन्होंने कैलिफोर्निया के बे एरिया में एक शराब की दुकान में आग लगाने की कोशिश की। जब वह इसमें असफल रहे तो टेस्ला को दूसरी गाड़ियों से टक्कर मारकर आग लगाने की कोशिश की। इसके बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक विक्रम एक मानसिक स्वास्थ्य कंपनी बेटरलाइफ के संस्थापक हैं। घटना की जानकारी देते हुए सांता क्लारा काउंटी शेरिफ के कार्यालय ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा। इस पोस्ट में लिखा, यह घटना साराटोगा की गैरोड फार्म्स पर हुई। इस जगह पर विक्रम ने वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने विक्रम को आग लगाने की कोशिश करते हुए पकड़ा। इसके बाद उनकी कहासुनी हो गई। इस पर गु्स्साए विक्रम ने कर्मचारियों को ऊपर वाइन से भरी बोतल फेंकी और वहां से भागने की कोशिश की। अधिकारियों के मुताबिक दुकान के बाहर खड़ी अपनी टेस्ला कार में बैठकर विक्रम ने वहां पर मौजूद दो कारों में जानबूझकर टक्कर मार दी। इसके बाद दुकान के कर्मचारियों ने पुलिस को कॉल किया। पुलिस के पहुंचने पर विक्रम ने खुद को अपनी इलेक्ट्रिक कार में बंद कर लिया और बाहर आने से इनकार कर दिया। शेरिफ कार्यालय के मुताबिक, वहां पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने विक्रम बेरी को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा लेकिन उसने ऐसा करने के से इनकार कर दिया। बाद में कर्मचारियों ने उसे बाहर निकालने के लिए पेपरबॉल और स्प्रे का इस्तेमाल किया। इसके बाद उसे गिरफ्तार करके अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान 42 वर्षीय विक्रम बेरी, मेनेलो पार्क निवासी के तौर पर हुई है। इस घटना के बाद उसके ऊपर घातक हथियार से हमला करने और गिरफ्तारी का विरोध करने का आरोप लगाया गया है। कौन हैं विक्रम बेरी? विक्रम की लिंक्डन प्रोफाइल के मुताबिक उसने अपनी कॉलेज की पढ़ाई अर्बाना-शैंपेन यूनिवर्सिटी से पूरी की और बाद में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया। डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक विक्रम एक करोड़पति है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डेलॉयट में एक कंस्लटेंट के रूप में की और बाद में कुछ और कंपनियों में काम करके 2016 में खुद की कंपनी शुरू की। फिलहाल विक्रम को गिरफ्तार करके उनसे इस घटना के बारे में पूछताछ की जा रही है।  

GCA की बड़ी कार्रवाई: इंडिगो विवाद के बीच चार इंस्पेक्टर निलंबित

नई दिल्ली  देश की विमानन व्यवस्था में जारी उथल-पुथल के बीच डीजीसीए (DGCA) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया। ये अधिकारी एयरलाइन की सुरक्षा, पायलट प्रशिक्षण और परिचालन अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण कामों की निगरानी करते हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स आज डीजीसीए के सामने पेश हो सकते हैं। बीते दिनों इंडिगो की भारी संख्या में उड़ानें रद्द होने का संकट गहराता गया था। पिछले सप्ताह शुक्रवार को भारत भर में इंडिगो ने 1,600 से अधिक उड़ानें रद्द की थीं, जो अब तक का सबसे बड़ा व्यवधान साबित हुआ। इस संकट का मुख्य कारण Flight Duty Time Limitations फेज-2 को सही तरीके से लागू करने में इंडिगो की विफलता के साथ-साथ क्रू रोस्टर और स्टाफ प्रबंधन में एयरलाइन का कुप्रबंधन था। सरकार ने भी एयरलाइन की योजना और प्रबंधन को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। जैसे-जैसे रद्द उड़ानों ने यात्रियों की यात्रा योजनाएं बिगाड़ीं, सरकार ने कई कदम उठाए। समय पर रिफंड सुनिश्चित करने के लिए सख्त समयसीमा तय की गई। अन्य एयरलाइनों को टिकट कीमतें नियंत्रित रखने का आदेश दिया गया। इसके अलावा इंडिगो को अपनी दैनिक उड़ानें 10% कम करने का निर्देश दिया गया। पीटीआई के अनुसार, कटौती के बाद इंडिगो 1,950 उड़ानें संचालित करेगा, जिनमें लगभग 3 लाख यात्री सफर करेंगे। सामान्यत: एयरलाइन सर्दियों में करीब 2,300 उड़ानें प्रतिदिन संचालित करती है। इससे पहले गुरुवार को DGCA अधिकारियों को सीधे इंडिगो के मुख्यालय भेजा गया ताकि वे स्थिति की लाइव निगरानी कर सकें। उसी दिन दिल्ली और बेंगलुरु हवाईअड्डों पर 200 से अधिक उड़ानें रद्द हो गईं। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने संसद को बताया कि इंडिगो ने 1 दिसंबर को हुई बैठक में किसी भी समस्या का संकेत तक नहीं दिया था, जो इस संकट को और गंभीर बनाता है।

डोनाल्ड ट्रंप ने तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा जताया, मीटिंग पर मीटिंग से झुंझलाए, रूस पर यूक्रेन का दबाव

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब रूस और यूक्रेन की शांति बातचीत से लगभग ऊब चुके हैं. कई दौर की मीटिंग चली, कई प्रस्ताव दिए गए, कई दखल भी हुए, लेकिन जमीन पर कोई बदलाव नहीं हुआ. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार साफ शब्दों में कहा है कि वह ‘अब समय बर्बाद नहीं करना चाहते’.ट्रंप की नाराजगी सिर्फ रूस पर नहीं है. वह खुलकर यूरोपीय देशों और यूक्रेन से भी खफा दिखे. NBC की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप लंबे समय से ट्रंप के प्रस्तावों से बचने की कोशिश कर रहा है, खासकर उस मांग से जिसमें यूक्रेन को रूस को जमीन सौंपने की बात कही गई है. यूरोप ने कहा है कि यह प्लान अस्वीकार्य है, जबकि ट्रंप इसे ‘तुरंत लागू होने वाला समाधान’ बताते रहे हैं. वहीं ट्रंप ने रूस-यूक्रेन की लड़ाई को तीसरे विश्वयुद्ध तक पहुंचने की बात कही है. ट्रंप ने कहा, ‘मैंने उन्हें कुछ दिन पहले बताया था. मैंने कहा था कि अगर हर कोई इसी तरह के खेल खेलता रहा, तो अंततः तीसरा विश्व युद्ध छिड़ जाएगा.’ यह उन सभी देशों को संदेश है जो या तो रूस या यूक्रेन के पक्ष में खड़े हैं. ट्रंप क्यों हुए परेशान? एक बिजनेस राउंडटेबल में ट्रंप ने कहा, ‘वे लोग चाहते हैं कि हम वीकेंड में यूरोप मीटिंग के लिए आएं. हम तभी आएंगे जब कुछ ठोस लेकर वापस आएंगे. हम समय बर्बाद करने नहीं बैठे.’ उन्होंने यहां तक कह दिया, ‘कई बार आपको लोगों को आपस में लड़ने देना पड़ता है, कई बार नहीं.’ यह बयान बताता है कि ट्रंप अब खुद को इस डिप्लोमेसी से दूर करने की तैयारी में हैं. उधर जेलेंस्की ने भी पहली बार माना कि अमेरिका उन पर ‘बड़े भूभाग छोड़ने’ का दबाव बना रहा है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने खुलासा किया कि विवाद की सबसे बड़ी वजह डोनेत्स्क क्षेत्र और जापोरिज्ज्या न्यूक्लियर प्लांट पर नियंत्रण है. ज़ेलेंस्की ने कहा, ‘वे चाहते हैं कि यूक्रेन डोनेत्स्क छोड़ दे और रूस वहां न घुसे. वे इसे फ्री इकोनॉमिक जोन कह रहे हैं.’ रूस में कहां हुआ हमला? इसी तनाव के बीच यूक्रेन ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने रूस को पूरी तरह चौंका दिया है. यूक्रेन ने पहली बार कैस्पियन सागर में रूस के ऑफशोर तेल प्लेटफॉर्म पर लंबी दूरी के ड्रोन से वार किया है. यह मिशन पहले कभी सार्वजनिक नहीं हुआ था. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस के सूत्रों ने बताया, ‘यह पहली बार है जब यूक्रेन ने कैस्पियन सागर में रूस की तेल फैसिलिटी को निशाना बनाया है. जो भी यूनिट्स रूसी युद्ध मशीन को फंड करती हैं, वे सब वैध लक्ष्य हैं.’ यह हमला रूस की बड़ी ऊर्जा कंपनियों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस की रिफाइनरी, तेल पाइपलाइन, टर्मिनल और यहां तक कि टैंकरों पर भी हमले तेज कर दिए हैं. सिर्फ अगस्त से नवंबर के बीच यूक्रेन ने रूस की 77 एनर्जी फैसिलिटी हिट की हैं, जो साल के पहले सात महीनों की तुलना में लगभग दोगुना है. बड़ी बात यह है कि अब यूक्रेन एक ही रिफाइनरी को बार-बार टारगेट कर रहा है ताकि वह कभी पूरी तरह चालू न हो सके. सारातोव रिफाइनरी को अगस्त से अब तक आठ बार निशाना बनाया जा चुका है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? विशेषज्ञों का कहना है कि रूस तेल की कमाई से सेना में भर्ती और वेतन बढ़ाकर अपना युद्ध तंत्र मजबूत कर रहा है. इसलिए यूक्रेन अब सीधा उस ‘एनर्जी ATM’ पर वार कर रहा है जिससे रूस को सबसे ज्यादा पैसा मिलता है. परिणाम साफ हैं कि रूस की मरम्मत की रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है और कई जगहों पर लंबे समय तक भारी नुकसान हुआ है. दूसरी तरफ, मोर्चे पर रूस धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और बातचीत का हर दौर रूस की मांगों को और मजबूत कर रहा है.

जापान में 6.7 का शक्तिशाली भूकंप, तटीय क्षेत्रों में सुनामी का खतरा, देश में चौथी बार भूकंप

टोक्यो जापान में आज सुबह फिर तेज झटके महसूस किए गए. समुद्र में आया 6.7 मैग्नीट्यूड का भूकंप इतना जोरदार था कि तटीय इलाकों से लेकर दूर बसे शहरों तक धरती हिल गई. भारतीय समय के मुताबिक यह भूकंप सुबह 8:14 बजे आया. इसकी गहराई 10.7 किलोमीटर थी, जो इसे खतरनाक बनाती है. भूकंप तट के करीब आया, और झटकों की तीव्रता देखकर कई जगह लोग घरों से बाहर भागते दिखे. दुकानों और दफ्तरों में अलार्म बजा दिए गए. जापान में भूकंप के बाद सुनामी की कहां चेतावनी? जापानी मीडिया आउटलेट के मुताबिक भूकंप के बाद जापान मौसम एजेंसी ने 1 मीटर तक ऊंची लहरें आने की चेतावनी जारी की है. कई तटीय इलाकों में दोपहर तक लगातार अलर्ट दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक होक्काइडो सेंट्रल पैसिफिक कोस्ट, आओमोरी प्रीफेक्चर, इवाते प्रीफेक्चर और मियागी प्रीफेक्चर में सुनामी की चेतावनी दी गई. बताया जा रहा है कि ये एक मीटर तक ऊंची हो सकती हैं. इसी हफ्ते आए कई भूकंप जापान इस हफ्ते भूकंपों की सीरीज से जूझ रहा है. सोमवार को 7.6 मैग्नीट्यूड का बड़ा भूकंप आया, जिसमें 50 से ज्यादा लोग घायल हुए. सड़कें टूटीं, इमारतें हिली, और छोटे सुनामी वेव्स भी दिखे. मंगलवार को होंचो शहर में 6.7 मैग्नीट्यूड के झटके महसूस किए गए. बुधवार को आओमोरी और होक्काइडो में 6.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया. अब शुक्रवार को फिर 6.7, यानी जापान इस सप्ताह चौथे दिन कांप चुका है. जापान ने जारी की बड़ी चेतावनी सोमवार के भूकंप के बाद जापान एजेंसी ने दुर्लभ ‘मेगाक्वेक एडवाइजरी’ जारी कर दी है. एजेंसी का कहना है कि अगले एक हफ्ते में 8.0 या उससे बड़ा भूकंप आने की संभावना बढ़ गई है. 2011 का विनाशकारी 9.0 भूकंप भी इसी पैटर्न की तरह था. जापान की टेक्टॉनिक प्लेट्स इस समय भारी दबाव में हैं, खासकर होक्काइडो-सानरिकु तट के पास. आज आए भूकंप से क्या नुकसान हुआ? अभी तक किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं मिली है. फिलहाल भूकंप के तुरंत बाद कई ट्रेनें रोक दी गईं. तटीय हाइवे बंद होने लगे हैं. वहीं स्थानीय. प्रशासन अलर्ट पर है. लोग अपने घरों से तुरंत बाहर निकल आए और खुले इलाके में जमा हो गए. सरकार ने कहा है कि हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है.

नितिन गडकरी का बयान: ‘भारत टैक्सी ऐप’ से सर्ज प्राइसिंग पर रोक, अभी टेस्टिंग और ट्रायल में है ऐप

नई दिल्ली   निजी ऑनलाइन कैब एग्रीगेटर्स यानी प्राइवेट कैब ऐप्स द्वारा किराए में बढ़ोतरी (सर्ज प्राइसिंग) के बढ़ते मामलों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सहकारी मोबाइल ऐप 'भारत टैक्सी ऐप' टेस्टिंग और ट्रायल फेज में है। गडकरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि भारत टैक्सी ऐप का उद्देश्य सहकारी मॉडल पर ड्राइवरों के स्वामित्व वाली एक एप्लीकेशन बनाना है।  यह ऐप सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) के तहत काम करेगा। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) इस 'भारत टैक्सी' राइड-हेलिंग सेवा को स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। गडकरी ने आगे कहा कि सरकार ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स गाइडलाइंस, 2025 जारी की हैं, जिनका उद्देश्य एग्रीगेटर्स, जिनमें ऐप-आधारित कैब सेवाएं भी शामिल हैं, को हल्के तरीके से रेगुलेट करना है। साथ ही, यूजर्स की सुरक्षा और ड्राइवर की भलाई से संबंधित मुद्दों का ध्यान रखना है। इन गाइडलाइंस में किराए को लेकर भी नियम दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा, "इन गाइडलाइंस में डायनेमिक प्राइसिंग की अनुमति दी गई है, जिसमें एग्रीगेटर्स राज्य-निर्धारित बेस फेयर से 50 प्रतिशत कम शुल्क ले सकते हैं और पीक घंटों में अधिकतम सर्ज प्राइसिंग को बेस फेयर के दो गुना तक सीमित किया गया है। साथ ही पारदर्शिता, जिम्मेदारी और यात्रियों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य द्वारा निर्धारित शुल्क को बेस फेयर माना जाएगा।” गाइडलाइंस के अनुसार, ड्राइवर-स्वामित्व वाले वाहन को कम से कम 80 प्रतिशत किराया मिलेगा, जबकि एग्रीगेटर द्वारा स्वामित्व वाले वाहन के मामले में ऑन-बोर्ड ड्राइवर को कम से कम 60 प्रतिशत भाड़ा मिलेगा। वहीं, सर्ज प्राइसिंग के मामले में लाभार्थी ड्राइवर होगा। इससे आपूर्ति बढ़ेगी और उच्च मांग के दौरान सेवाएं बेहतर उपलब्ध होंगी। गडकरी ने बताया कि गाइडलाइंस में यह भी प्रावधान है कि अगर एग्रीगेटर कोई अत्यधिक या अनुचित भाड़ा यात्रियों से वसूलता है, तो उनके लाइसेंस को निलंबित या रद्द किया जा सकता है। गाइडलाइंस यह सुनिश्चित करती हैं कि किसी भी यात्री से डेड माइलेज के लिए शुल्क नहीं लिया जाएगा, सिवाय इसके कि जब यात्रा की दूरी तीन किलोमीटर से कम हो और भाड़ा केवल शुरुआत बिंदु से गंतव्य तक ही लिया जाएगा।

केंद्रीय मंत्रियों की गैरमौजूदगी से राज्यसभा ठप, विपक्ष का विरोध

नई दिल्ली  संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। इस बीच कैबिनेट मंत्रियों की अनुपस्थिति के चलते शुक्रवार को राज्यसभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। यह स्थिति उस समय उत्पन्न हुई जब सदन ने 13 दिसंबर 2001 के संसद हमले में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद कामकाज शुरू किया गया। जैसे ही कार्यवाही आगे बढ़ी कि विपक्षी सांसदों ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि सदन में कोई भी कैबिनेट मंत्री मौजूद नहीं है।  इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि वह इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाएंगे और एक जूनियर मंत्री को कैबिनेट मंत्री को बुलाने का अनुरोध करने को कहा। उन्होंने कहा, “मैं प्रक्रिया को समझता हूं। मैंने मंत्री से अनुरोध किया है। एक कैबिनेट मंत्री को आना चाहिए।” लेकिन विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं हुआ। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “यह सदन का अपमान है। जब तक कोई कैबिनेट मंत्री नहीं आता, सदन को स्थगित करना होगा।” लगभग पांच मिनट इंतजार करने के बाद सभापति ने कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। सदन के पुनः जुटने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कैबिनेट मंत्रियों की अनुपस्थिति के लिए खेद जताया। उन्होंने बताया कि उन्हें लोकसभा में पूर्व स्पीकर और पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल के निधन पर श्रद्धांजलि देने के लिए जाना पड़ा था। उन्होंने यह भी बताया कि नेता सदन जेपी नड्डा के नाम से लोकसभा में प्रश्न लगे थे, जिसके कारण वे भी वहां मौजूद थे। रिजिजू ने कहा, “मुझे खेद है कि सदन में कोई कैबिनेट मंत्री मौजूद नहीं था।” कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि पाटिल राज्यसभा के भी पूर्व सदस्य रहे हैं, इसलिए यहां भी श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए। इस पर रिजिजू ने बताया कि औपचारिक प्रक्रिया के चलते थोड़ा समय लग रहा है और राज्यसभा में भी उचित श्रद्धांजलि दी जाएगी। सदन के पुनर्गठन के बाद निर्मला सीतारमण, किरन रिजिजू और जेपी नड्डा सहित अन्य मंत्री मौजूद थे।

कांग्रेस के सीनियर नेता शिवराज पाटिल का 90 वर्ष की उम्र में निधन, सात बार रहे लातूर से सांसद

 लातूर कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का शुक्रवार को लातूर में 90 साल की उम्र में निधन हो गया. पाटिल ने सुबह करीब 6:30 बजे लातूर में अपने घर पर आखिरी सांस ली, जहां वे लंबी बीमारी के कारण घर पर ही देखरेख में थे. शिवराज पाटिल ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई अहम पद संभाला, जिसमें लोकसभा स्पीकर और केंद्रीय कैबिनेट में कई अहम पद शामिल हैं. पाटिल ने लातूर लोकसभा सीट से सात बार जीत हासिल की. उनके गुजर जाने के बाद पूरे महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति में शोक का माहौल है, क्योंकि पाटिल को भारतीय राजनीति में एक शांत, संयत और बेहद मेहनती नेता के तौर पर जाना जाता था.  शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर 1935 को लातूर जिले के चाकुर में हुआ था. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले आयुर्वेद का अभ्यास किया और फिर मुंबई विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा ली. राजनीति में उनका सफर 1967 में शुरू हुआ, जब उन्होंने लातूर नगर पालिका में काम संभाला. यह शुरुआत आगे चलकर एक बड़े राजनीतिक करियर की नींव बनी. कैसा रहा सियासी सफर… 1980 में वे पहली बार लातूर लोकसभा सीट से सांसद बने और उसके बाद लगातार सात बार इसी सीट से जीतकर संसद पहुंचे. यह उपलब्धि उन्हें महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली नेताओं में जगह दिलाती है. इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में उन्होंने रक्षा, वाणिज्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण विभागों में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी निभाई. शिवराज पाटिल, 1991 से 1996 तक लोकसभा के स्पीकर रहे. अपने कार्यकाल में उन्होंने लोकसभा के आधुनिकीकरण, कंप्यूटरीकरण, कार्यवाही के सीधा प्रसारण और नई लाइब्रेरी बिल्डिंग के निर्माण जैसे कामों को तेजी दी. यह समय भारतीय संसद के तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव का अहम दौर माना जाता है. 2004 में चुनाव हारने के बावजूद उन्हें केंद्र में गृह मंत्री बनाया गया. लेकिन 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया. बाद में उन्हें पंजाब का गवर्नर और चंडीगढ़ का प्रशासक बनाया गया, जहां उन्होंने 2010 से 2015 तक सेवा दी. 

आंध्र प्रदेश: घाट रोड पर बस खाई में गिरी, 9 की मौत, कई यात्री गंभीर रूप से घायल

 मरेडुमिल्ली आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. करीब 5 बजकर 30 मिनट पर चित्तूर जिले के यात्रियों को लेकर जा रही एक प्राइवेट बस अचानक अनियंत्रित होकर मरेडुमिल्ली घाट क्षेत्र में गहरी खाई में गिर गई.  हादसा तुलसीपाकालु गांव के पास हुआ, जहां सड़क संकरी और मोड़ों से भरी मानी जाती है. बस में कुल 35 यात्री थे, चालक और क्लीनर मिलाकर संख्या 37 थी. खाई में गिरने के बाद मौके पर चीख पुकार मच गई. कई यात्री बस के अंदर फंस गए. स्थानीय लोगों ने सबसे पहले राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी. कुछ ही देर में चिंटूर पुलिस, रेस्क्यू टीम और एंबुलेंस मौके पर पहुंच गईं.  ASR जिला कलेक्टर दिनेश कुमार के अनुसार, कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी घायलों को तत्काल भद्राचलम अस्पताल ले जाया गया है, जहां कई लोगों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। हादसे की वजहों की जांच जारी दुर्घटना के बाद प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन कर रही हैं। अधिकारियों ने जानकारी दी कि बस हादसे के सही कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। सीएम नायडू ने व्यक्त किया दुख आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस हादसे पर गहरा शोक जताया। उन्होंने कहा कि चित्तूर जिले के अल्लूरी सीताराम राजू क्षेत्र के पास यात्रियों से भरी एक निजी बस का दुर्घटनाग्रस्त होना बेहद दुखद है। कई लोगों की मौत की खबर विचलित करने वाली है। सीएम ने बताया कि उन्होंने पूरी घटना की जानकारी अधिकारियों से ली है और राहत कार्यों की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। नायडू ने आश्वासन दिया कि सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।