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पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन जल्द पटरी पर: जानें किन राज्यों में मिलेगी सुविधा और क्या है पूरा रूट

नई दिल्ली अगर आप अक्सर लंबी ट्रेन यात्रा करते हैं और लंबे सफर से थक जाते हैं, तो अब आपके लिए अच्छी खबर है। इंडियन रेलवे जल्द ही देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने जा रहा है। यह ट्रेन तेज़स की स्पीड, राजधानी की आरामदायक सुविधाओं और वंदे भारत की मॉडर्न टेक्नोलॉजी का परफेक्ट मेल होगी। ट्रेन की तैयारियां और ट्रायल रन रेलवे सूत्रों के मुताबिक, बेंगलुरु के BEML फैक्ट्री में दो रैक तैयार किए जा रहे हैं। पहला रैक 12 दिसंबर को नॉर्दर्न रेलवे के लिए रवाना होगा। ट्रेन का ट्रायल रन पटना-दिल्ली रूट पर होगा और रिपोर्ट अप्रूव होने के बाद रेगुलर ऑपरेशन शुरू कर दिया जाएगा। कोच और बर्थ की जानकारी ट्रेन में 16 कोच होंगे और कुल 827 बर्थ होंगे। ➤ थर्ड AC: 11 कोच, 611 बर्थ ➤ सेकंड AC: 4 कोच, 188 बर्थ ➤ फर्स्ट AC: 1 कोच, 24 बर्थ ➤ जरूरत पड़ने पर कोच की संख्या 24 तक बढ़ाई जा सकती है। ➤ थर्ड AC का अनुमानित किराया लगभग ₹2,000 होगा। आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षा वंदे भारत स्लीपर में यात्रियों के लिए ये सुविधाएं होंगी: ऑटोमैटिक दरवाजे बायो-टॉयलेट ➤ हर बर्थ पर पर्सनल रीडिंग लाइट ➤ CCTV कैमरे और प्रीमियम इंटीरियर्स ➤ कवच एंटी-कोलिजन सिस्टम और क्रैश-प्रूफ बॉडी डिज़ाइन ➤ स्पीड: 160-180 km/h, जिससे दिल्ली-पटना का सफर 11-11.5 घंटे में पूरा होगा। शेड्यूल और रूट ट्रेन सप्ताह में 6 दिन चलेगी। ➤ पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल से शाम को रवाना होगी और अगली सुबह दिल्ली पहुंचेगी। ➤ शुरुआती दौर में दिल्ली-पटना रूट पर फोकस होगा, बाद में मुंबई-पटना, बैंगलोर-पटना और गोरखपुर-दिल्ली जैसे रूट जोड़े जाएंगे। फायदे ➤ लंबी दूरी की यात्रा में आराम ➤ ट्रैवल टाइम में कमी ➤ टूरिज्म और ट्रेड को बढ़ावा  

इंडिगो विवाद में सुप्रीम दखल नहीं होगा: कोर्ट ने सरकार पर छोड़ा मामला

नई दिल्ली इंडिगो संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अभी सरकार कदम उठा रही है। हम फिलहाल मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। सीजेआई ने कहा कि हम समझते हैं कि लाखों लोग इस समस्या का सामना कर रहे हैं, लेकिन सरकार मामले को देख रही है। उन्हें ही इसे संभालने दें। दरअसल पिछले 7 दिन से देशभर के एयरपोर्ट्स पर इंडिगो की फ्लाइट लगातार कैंसिल हो रही है। इससे लाखों यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। इंडिगो संकट को लेकर देश के शीर्ष न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। मामले की सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि अभी सरकार कदम उठा रही है। हालत जस के तस होते तो अलग बात थी। उन्हें ही इसे संभालने दें। वहीं याचिकाकर्ता ने वकील ने कहा कि 2500 उड़ानें विलंबित हैं और 95 हवाई अड्डे प्रभावित हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेंद्र मिश्रा ने जनहित याचिका दायर कर पूरे संकट पर कोर्स से स्वतः संज्ञान लेने और तुरंत हस्तक्षेप की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा और मुआवजे की मांग की गई है। कोर्ट में दायर याचिका में यात्रियों को भारी परेशानी और मानवीय संकट पैदा होने का दावा किया और इस पर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की गई। 6 दिसंबर को सीजेआई के घर पहुंचे थे याचिकाकर्ता के वकील 6 दिसंबर को याचिकाकर्ता के वकील CJI सूर्यकांत के घर पहुंचे और उनसे इस मामले में तत्काल सुनवाई करने की मांग की। फ्लाइट के कैंसिल होने पर सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल की गई। वकील नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि जस्टिस सूर्यकांत ने हमारी याचिका देखी और स्टाफ को इस मामले के लिए निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि सीजेआई के स्टाफ ने ओएसडी कुंतल शर्मा पाठक का नंबर मुझे दिया है। सीजेआई की ओर से आश्वासन दिया गया था कि मामले पर जल्द सुनवाई की जाएगी। ऐसे में आज याचिका को लेकर सुनवाई होनी है। याचिका में यात्रियों को भारी परेशानी और मानवीय संकट पैदा होने की बात कही गई है। 7वें दिन भी 350 से अधिक फ्लाइट कैंसिल इधर यात्रियों पर इंडिगो का टॉर्चर जारी है। केंद्र सरकार के अल्टीमेटम के बाद भी देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की उड़ान सेवाएं सोमवार को भी पटरी पर नहीं लौट सकीं हैं। आज (8 दिसंबर) सातवें दिन भी सुबह 10 बजे तक 350 से अधिक फ्लाइट कैंसिल हो चुकी है। दिल्ली, श्रीनगर, हैदराबाद, बेंगलुरु एयरपोर्ट से 350 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल हो चुकी हैं। दिल्ली (IGI) और मुंबई दोनों ही प्रमुख हवाई अड्डों पर IndiGo के यात्री सोमवार को भी भी फ्लाइट रद्द होने होने से परेशान दिखे। दरअसल देश की सबसे बड़ी एयरलाइन ने रविवार को 650 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी थी, हालांकि यह संख्या दो दिन पहले के 1000 से अधिक कैंसिलेशन से कम है। दिल्ली एयरपोर्ट (IGI) ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी उड़ानों की ताजा स्थिति चेक कर लें। एयरपोर्ट ने कहा कि उनकी टीमें दिक्कतों को कम करने के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।

संकट का असर: IndiGo के शेयर धड़ाम, शेयर बाजार भी लाल निशान में

नई दिल्ली देश के कई हवाई अड्डों पर IndiGo की उड़ानें सामान्य नहीं हो पाई हैं, जिसके कारण देरी और कैंसिलेशन का सिलसिला जारी है. लगातार सातवें दिन बड़े पैमाने पर फ्लाइट्स रद्द होने का सिलसिला जारी रहा जिसकी वजह से प्रमुख हवाई अड्डों पर IndiGo के यात्री परेशान दिखे. भारत में एयर ट्रैवल के इतिहास में ऐसे संकट का इतना बड़ा स्तर पहले कभी नहीं देखा गया. सोमवार को विभिन्न हवाई अड्डों पर लगभग 300 इंडिगो उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. दिल्ली एयरपोर्ट पर आज 134 फ्लाइट (75 डिपार्चर और 59 अराइवल) रद्द की गईं. वहीं, बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 127 उड़ानें रद्द हुईं. अहमदाबाद में 20 और विशाखापत्तनम में 7 उड़ानें रद्द रहीं. मुंबई और कोलकाता सहित अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर भी भारी अव्यवस्था देखी गई. सुबह 9:30 बजे तक कुल 289 रद्द उड़ानों की पुष्टि हो चुकी थी. दरअसल देश की सबसे बड़ी एयरलाइन ने रविवार को 650 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी थी, हालांकि यह संख्या दो दिन पहले के 1000 से अधिक कैंसिलेशन से कम है. अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित यात्रियों के लिए 610 करोड़ रुपये से अधिक का टिकट रिफंड जारी किया जा चुका है. कंपनी के अनुसार, यह संकट मुख्य रूप से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (FDTL) नियमों (पायलट आराम पर सरकारी नियम) के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद कॉकपिट क्रू की कमी के कारण शुरू हुआ. इससे बड़े पैमाने पर कैंसिलेशन हुआ और प्रमुख हवाई अड्डों पर पूरी तरह अराजकता फैल गई.  सरकारी सख्ती और रिफंड पर दबाव इसके बाद सरकार ने हस्तक्षेप किया और नियमों पर रोक लगाई. यह क्राइसिस पूरी तरह कब खत्म होगा इस पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि 10 दिसंबर तक परिचालन सामान्य हो सकता है. नागर विमानन मंत्रालय ने एयरलाइन पर हवाई किराए की सीमा तय करने और रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश देने सहित कई उपाय किए हैं.  मंत्रालय ने IndiGo को अल्टीमेटम दिया था, जिसके बाद कंपनी ने शनिवार तक 610 करोड़ रुपये का रिफंड प्रोसेस कर 3000 सामान यात्रियों तक इसे पहुंचाया है. वहीं इस संकट की उच्च-स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है.  नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी एयरलाइन की है क्योंकि पायलट ड्यूटी के निर्देश एक साल पहले ही जारी किए गए थे. रविवार को नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने IndiGo के सीईओ पीटर एल्बर्स और जवाबदेह प्रबंधक इसिड्रो पोरक्वेरास को कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए 24 घंटे (सोमवार शाम 6 बजे तक) का अतिरिक्त समय दिया. दिल्ली एयरपोर्ट की यात्री एडवाइजरी वहीं दिल्ली एयरपोर्ट (IGI) ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी उड़ानों की ताजा स्थिति चेक कर लें. एयरपोर्ट ने कहा कि उनकी टीमें दिक्कतों को कम करने के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रही हैं. दिल्ली एयरपोर्ट ने अपनी एडवाइजरी में कहा, "IndiGo की उड़ानों में अभी भी देरी हो सकती है. यात्रियों से अनुरोध है कि किसी असुविधा से बचने के लिए हवाई अड्डे आने से पहले अपनी एयरलाइन के साथ ताजा फ्लाइट स्टेट्स को चेक कर लें. हमारी टीम सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि व्यवधान को कम किया जा सके और यात्रियों को सहज यात्रा अनुभव सुनिश्चित किया जा सके. सहायता के लिए, जिसमें मेडिकल सपोर्ट भी शामिल है, कृपया सूचना काउंटर पर जाएं, जहां हमारा ऑन-ग्राउंड स्टाफ मदद के लिए तैयार है. '

सीजफायर फेल होने के बाद थाईलैंड का कंबोडिया में सैन्य हमला

बैंकाक  थाईलैंड और कंबोडिया के बीच फिर युद्ध भड़क गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में हुए सीजफायर के बावजूद थाईलैंड ने एक बार फिर से कंबोडिया की सीमा पर एयर स्ट्राइक किया है. थाई सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल विंथाई सुवारी ने सोमवार को कहा कि थाईलैंड ने कंबोडिया के साथ अपनी विवादित सीमा पर हवाई हमले किए हैं. इससे पहले दोनों देशों ने एक दूसरे पर सीजफायर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया.  थाई सेना ने कम्बोडिया बॉर्डर पर F-16 को तैनात कर दिया है और कंबोडिया के बॉर्डर पर हमला कर रही है. थाईलैंड की सेना ने एक बयान में बताया कि उबोन रत्चाथानी प्रांत के सबसे पूर्वी इलाके में दो जगहों पर हुई नई झड़पों में कम से कम एक थाई सैनिक मारा गया और चार घायल हो गए.  यह सीमा विवाद जुलाई में पांच दिन के युद्ध में बदल गया था, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने सीजफायर समझौता करवाया था. ट्रंप अक्टूबर में कुआलालंपुर में दोनों देशों के बीच एक बड़े सीजफायर समझौते पर हस्ताक्षर के गवाह बने थे. लेकिन ये सीजफायर दो महीने भी नहीं चला.  थाईलैंड ने कंबोडिया पर भड़काऊ कार्रवाई का आरोप लगाया है. थाईलैंड के प्रमुख अखबार द नेशन ने कहा है कि रॉयल थाई आर्मी के कमांडरों ने कई इलाकों में थाई-कंबोडियाई सीमा पर बढ़ते टकराव की सूचना दी है. थाई सेना ने नियमों के तहत जवाब दिया और नागरिकों को निकालने में मदद के लिए तेज़ी से कदम उठाए.  रविवार (7 दिसंबर) को लगातार लड़ाई के बाद जब कंबोडियाई सैनिकों ने सी सा केट प्रांत के कंथारालक जिले के फू फा लेक-प्लान हिन पैट कोन इलाके में हमला किया.  आज तड़के गोलीबारी, फायरिंग और एयर स्ट्राइक थाई सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल विंथाई ने कहा कि सोमवार तड़के उबोन रत्चाथानी प्रांत के नाम युएन जिले के चोंग आन मा इलाके में झड़पें हुईं. कंबोडियाई सैनिकों ने सुबह करीब 5.05 बजे छोटे हथियारों और इनडायरेक्ट-फायर हथियारों से गोलीबारी शुरू की और फायरिंग जारी रखी. रॉयल थाई एयर फोर्स (RTAF) के प्रवक्ता एयर मार्शल जैक्रिट थम्माविचई ने बताया कि यह ऑपरेशन सुरानारी टास्क फ़ोर्स के साथ मिलकर किया गया था. यह कंबोडियाई मिलिट्री की उन कार्रवाइयों के जवाब में था जिनसे थाईलैंड की राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमावर्ती इलाकों में रहने वालों की सुरक्षा और उस इलाके में काम कर रहे थाई कर्मियों को सीधा खतरा था. थाईलैंड की सेना का दावा है कि कंबोडिया ने भारी हथियार सीमा पर पहुंचा दिए थे. और लड़ाकू यूनिट्स को बॉर्डर पर तैनात कर दिया था. थाईलैंड का दावा है कि ये ऐसी गतिविधियां थीं जो सैन्य ऑपरेशन्स को बढ़ा सकती थीं और थाई सीमा क्षेत्र के लिए खतरा पैदा कर सकती थीं.  इन घटनाक्रमों के कारण हवाई ताकत का इस्तेमाल किया गया ताकि कंबोडिया की सैन्य क्षमताओं को रोका जा सके और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी न्यूनतम स्तर तक कम किया जा सके.  कंबोडिया का दावा वहीं कंबोडिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को थाई सैन्य बलों पर प्रेह विहार प्रांत में सीमा पर कंबोडियाई सैनिकों पर "क्रूर और अमानवीय" हमलों की एक सीरीज़ शुरू करने का आरोप लगाया. कम्बोडिया ने इस घटना को सिर्फ छह हफ्ते पहले साइन किए गए द्विपक्षीय शांति समझौते का गंभीर उल्लंघन बताया.  प्रीह विहार मंदिर पर हमला कंबोडिया की सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल मैली सोचियाटा ने कहा कि हमले 8 दिसंबर को सुबह करीब 5:04 बजे आन सेस इलाके में शुरू हुए, जहां कथित तौर पर थाई सैनिकों ने कंबोडियाई ठिकानों पर गोलीबारी की. बयान के अनुसार, थाई सेना ने बाद में टैमोन थोम मंदिर, प्रीह विहार मंदिर के पास 5 मकारा इलाके और चोमका चेक की ओर टैंक के गोले दागे, जिसे कंबोडिया ने कई दिनों की उकसावे की कार्रवाई के बाद एक समन्वित हमले के रूप में बताया. मंत्रालय ने कहा कि यह हमला थाई सेना द्वारा "कई उकसावे वाली कार्रवाइयों" के बाद हुआ, जिसमें पिछले दिन प्रोरलीन थमार में हुई एक घटना भी शामिल है, जिसके बारे में नोम पेन्ह का मानना ​​है कि इसका मकसद टकराव भड़काना था.  दो अलग-अलग हमलों के बावजूद कंबोडिया ने कहा कि उसकी सेना ने "अधिकतम संयम" बरता और जवाबी गोलीबारी नहीं की और शांतिपूर्ण संघर्ष समाधान और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का पालन करने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया.  कंबोडियाई कमांडर स्थिति पर "पूरी सतर्कता और अत्यधिक सावधानी" से नजर रख रहे हैं. ट्रंप ने 45 दिन पहले कराया था सीजफायर  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मात्र 45 दिन पहले ही थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद में सीजफायर कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. यह घटना 2025 में हुई थी. जब जुलाई के अंत में सीमा पर झड़पें हुई. ट्रंप ने 26 जुलाई 2025 को दोनों देशों के नेताओं से बातचीत की और व्यापारिक दबाव की धमकी देकर तत्काल युद्धविराम वार्ता के लिए राजी किया. इसके बाद, 28 जुलाई 2025 से युद्धविराम प्रभावी हो गया. इसकी औपचारिक घोषणा और विस्तारित समझौता 26 अक्टूबर 2025 को मलेशिया के कुआलालंपुर में आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ, जहां ट्रंप भी शामिल थे. 

‘पत्नी और बच्चों को भेजो भारत’—जेडी वेंस के विवादित बयान से अमेरिका में हड़कंप

वाशिंगटन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने बयानों से एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. इस बार फिर से उनकी पत्नी भी निशाने पर हैं. जेडी वेंस ने माइग्रेशन को अमेरिकी ड्रीम की चोरी कह दिया. उन्होंने दावा किया कि बड़े पैमाने पर हो रही आव्रजन प्रक्रिया (इमिग्रेशन प्रोसेस) ने अमेरिकी लोगों के काम करने के मौके छीन लिए हैं. इस पर सोशल जनता भड़क गई. उन पर पाखंड और दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगने लगा. वेंस को जेनोफोबिया का शिकार होने का भी आरोप मढ़ा जाने लगा. उनकी इस टिप्पणी ने एक बार फिर से उनकी हिंदू-भारतीय मूल की पत्नी ऊषा वेंस को लेकर चल रहे विवाद को हवा दे दी, क्योंकि उनकी पत्नी स्वयं प्रवासी माता-पिता की संतान हैं. वेंस लगातार अमेरिका में आ रहे प्रवासियों को अमेरिकी लोगों की नौकरी छीनने का आरोप लगाते रहते हैं. इसी तरह वेंस ने एक बार फिर से एक्स (ट्विटर) पर लिखा कि मास माइग्रेशन अमेरिकन ड्रीम की चोरी है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसके उलट दावे करने वाले शोध, उसी पुराने सिस्टम से फायदा उठाने वाले लोगों द्वारा फंड किए गए हैं. उनकी इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. एक यूजर ने वेंस के ट्वीट को कोट करते हुए कहा कि आपको ऊषा, उनकी इंडियन फैमिली और अपने द्विजातीय (बाइरेशियल) बच्चों को भारत भेजना होगा. हवाई जहाज का टिकट खरीदते समय हमें बताएं. आपको खुद उदाहरण पेश करना होगा. इसी तरह की टिप्पणियों से उनके ट्वीट का टाइमलान भर गया.  पहले भी पत्नी पर कमेंट कर विवादों में आए थे वेंस वेंस अपनी पत्नी को लेकर एक कमेंट के बाद विवाद में आए थे. पिछले महीने जेडी वांस ने एक और विवाद छेड़ दिया, जब उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी पत्नी ऊषा, जो हिंदू परिवार में पैदा हुई थीं, एक दिन ईसाई धर्म अपना सकती हैं. उन्होंने TPUSA के समर्थकों से कहा कि ऊषा उनके साथ चर्च जाती हैं और वे सचमुच चाहते हैं कि एक दिन वह उनका ईसाई विश्वास साझा करें. इन बयानों को हिंदू-अमेरिकी समूहों और धार्मिक स्वतंत्रता समर्थकों ने पसंद नहीं किया. बाद में वांस ने स्पष्ट किया कि उनकी पत्नी का धर्म बदलने का कोई इरादा नहीं है. फिर भी यह सवाल बना हुआ है कि उनका रूढ़िवादी श्वेत-राष्ट्रवादी आधार ऊषा को अमेरिका की सेकंड लेडी के रूप में पूरी तरह स्वीकार करता है या नहीं. उनकी ब्राउन (भारतीय) पहचान को अक्सर निशाना बनाया जाता है, खासकर हाल की H-1B वीजा पर बहस के बाद. इमिग्रेशन पर टफ हैं वेंस जेडी वेंस ने इस तरह की टिप्पणी पहली बार नहीं की है. उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट के पॉडकास्ट में भी कहा था कि यह पूरी तरह उचित और स्वीकार्य है कि अमेरिकी लोग ऐसे पड़ोसी नहीं चाहते जिनसे उनका कुछ भी सांस्कृतिक समान न हो, चाहे वह नस्ल, भाषा या त्वचा का रंग हो. वेंस, अपने बॉस डोनाल्ड ट्रंप की तरह, बाइडेन प्रशासन को एक ऐसी इमिग्रेशन प्रणाली के लिए दोषी ठहराते हैं जिसने अमेरिका में विभाजन को बढ़ावा दिया. हालांकि ट्रंप वेंस की बात से इत्तेफाक नहीं रखते दिखते. हाल ही में उन्होंने एच-1बी वीजा को लेकर सकारात्मक बातें की थीं. उन्होंने कहा था कि अमेरिका में वह टैलेंट नहीं है, इसलिए हमें बाहर से लोगों को लाना पड़ेगा.  वहीं वेंस वांस बार-बार दावा करते रहे हैं कि प्रवासी अमेरिकी श्रमिकों की संभावनाओं को नुकसान पहुँचा रहे हैं. मिसिसिप्पी में हुए एक टर्निंग पॉइंट USA कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि प्रवासी अमेरिकी श्रमिकों के वेतन को कम कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने ट्रंप की H-1B वीजा सुधार नीति का बचाव भी किया. ट्रंप ने नए H-1B वीजा धारकों के लिए एक बार में 1 लाख डॉलर शुल्क का ऐलान किया है.  ममदानी ने लोगों से की अपील; ICE अधिकारियों का स्वागत करें लोग वहीं वेंस ने जब न्यूयॉर्क पोस्टे के पॉडकास्ट में पूछा गया कि क्या ट्रंप प्रशासन सभी अवैध प्रवासियों को निर्वासित करने की योजना बना रहा है. इस पर वांस ने कहा कि हम जितने संभव हो सकें, उतनों को हटाने की कोशिश कर रहे हैं. हाल के दिनों में अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारी लगभग घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रहे हैं. इसकी वजह से लोगों में डर बैठ गया है. इस पर न्यूयॉर्क के मेयर इलेक्ट जोहरान ममदानी ने आवाज उठाई है. उन्होंने लोगों से कहा है कि वे डरें नहीं और ICE अधिकारियों का स्वागत करें और उनसे बात करके मामले को सुलझाएं. 

हैदराबाद एयरपोर्ट हाई अलर्ट पर, तीन अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को मिली बम से उड़ाने की धमकी

हैदराबाद  हैदराबाद के शमशाबाद स्थित राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक साथ तीन विमानों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई. ई-मेल के जरिए यह धमकी केरल के कन्नूर से हैदराबाद आ रही इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट 6E-7178, जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से हैदराबाद आ रही लुफ्थांसा की फ्लाइट LH-752 और लंदन से हैदराबाद आ रही ब्रिटिश एयरवेज की उड़ान को लेकर दी गई. जैसे ही यह सूचना एयरपोर्ट अधिकारियों को मिली, तुरंत आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए. तीनों विमानों को पूरी सतर्कता के साथ सुरक्षित रूप से शमशाबाद एयरपोर्ट पर उतारा गया. लैंडिंग के तुरंत बाद सभी यात्रियों को विमानों से उतारकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया. सबसे पहले यात्रियों को आइसोलेशन एरिया में शिफ्ट किया गया, ताकि किसी भी संभावित खतरे से उन्हें दूर रखा जा सके. इस दौरान एयरपोर्ट पर भारी संख्या में सुरक्षा बल, सीआईएसएफ, स्थानीय पुलिस और बम स्क्वॉड की टीमें तैनात रहीं. सुरक्षा एजेंसियों ने तीनों विमानों की गहन तलाशी शुरू की. बम निरोधक दस्ते और स्निफर डॉग्स की मदद से यात्रियों के सामान, कार्गो एरिया और विमान के हर हिस्से की बारीकी से जांच की गई. अधिकारियों का कहना है कि अब तक किसी भी विमान से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है, लेकिन एहतियातन जांच प्रक्रिया जारी रखी गई है. धमकी देने वाले ई-मेल की भी साइबर एजेंसियों के जरिए जांच की जा रही है, ताकि इसके पीछे किसकी साजिश है, इसका पता लगाया जा सके. एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को भरोसा दिलाया कि उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा रहा है. इस घटना के चलते कुछ देर के लिए एयरपोर्ट पर परिचालन प्रभावित रहा और कई उड़ानों में देरी भी हुई. फिलहाल स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में बताई जा रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

क्या 2026 बनेगा विनाशकारी साल? चौंकाने वाली भविष्यवाणी से बढ़ी चिंता

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 का नववर्ष 19 मार्च से शुरू होगा। यह वर्ष विक्रम संवत 2083 के रूप में मनाया जाएगा और इसे ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर रौद्र संवत्सर कहा जा रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार यह साल कई दृष्टियों से चुनौतीपूर्ण और उथल-पुथल से भरा हो सकता है। वैश्विक स्तर पर संभावित प्रभाव ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के मुताबिक, रौद्र संवत्सर में दुनिया भर में गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। संभावित घटनाओं में शामिल हैं:     मौसम में बड़े बदलाव     ज्वालामुखी विस्फोट     युद्ध या हिंसा की स्थिति     शक्तिशाली भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति इन घटनाओं को प्रभावित कर सकती है। ग्रह स्थिति और उनके प्रभाव 2026 के नववर्ष में गुरु (बृहस्पति) वर्ष का राजा ग्रह होगा। हालांकि उनकी अतिचारी अवस्था अशांति और असंतुलन बढ़ा सकती है।     मंगल, जो 2025 के मंत्री ग्रह हैं, क्रूर ग्रहों के साथ योग बनाते हुए विध्वंसकारी प्रभाव दे सकते हैं।     शनि, गुरु की राशि मीन में गोचर कर रहे हैं, जिससे प्रतिकूल परिस्थितियों की संभावना बढ़ सकती है। ज्योतिषियों का मानना है कि इन ग्रह स्थितियों के कारण कई क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण घटनाएं सामने आ सकती हैं। भारत पर संभावित प्रभाव रौद्र संवत्सर भारत के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के अनुसार संभावित प्रभाव इस प्रकार हैं:     राजनीति में बड़े बदलाव और प्रमुख राज्यों में संकट     प्रदूषण में वृद्धि     प्राकृतिक आपदाओं की संभावना     कुछ महीनों में भूकंप या अन्य प्राकृतिक संकट की संभावना विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि वर्ष 2026 में किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। युद्ध और महामारी की चेतावनी ज्योतिषीय गणनाओं में 2026 में मंगल की स्थिति बड़े युद्ध की स्थिति पैदा कर सकती है, और यदि युद्ध एक बार शुरू हुआ तो वह 2027 तक चलेगा। साथ ही, ग्रह-गोचर संकेत देते हैं कि जून–जुलाई 2026 में किसी महामारी या संक्रमण के रूप में स्वास्थ्य संकट दोबारा उभर सकता है। इन ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के अनुसार 2026 कई स्तरों पर चुनौतीपूर्ण हो सकता है, हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से इन दावों की पुष्टि आवश्यक है।  

बाबा वेंगा की भविष्यवाणियों का धमाका! 2025 में क्या-क्या सच निकला?

 पूरी दुनिया में साल 2025 के अंत में आई प्राकृतिक आपदाओं की एक श्रृंखला को लोग कथित तौर पर बाबा वेंगा की 2025 के लिए की गई भविष्यवाणियों से जोड़कर देख रहे हैं। म्यांमार में आया भूकंप हो, इथोपिया में ज्वालामुखी विस्फोट हो, श्रीलंका में तूफान से आई तबाही हो या वियतनाम में आई बाढ़—इन घटनाओं में हुए काफ़ी जानमाल के नुकसान ने लोगों के बीच अटकलों को बढ़ा दिया है। क्या कहा था बाबा वेंगा ने 2025 के लिए? दिसंबर 2024 में बाबा वेंगा की 2025 को लेकर जो भविष्यवाणियां वायरल हुई थीं उनमें साल के अंत में भीषण तबाही की बात कही गई थी। उनकी भविष्यवाणियों के अनुसार दुनिया में बदल रहे मौसम के चलते इस साल के अंत और 2026 की शुरुआत में प्राकृतिक आपदाओं से भयानक तबाही के आसार थे। उन्होंने सालभर युद्ध का तनाव बने रहने, भू-राजनीतिक संकट गहराने और सामाजिक उथल-पुथल मचने के भी संकेत दिए थे।   2025 की आपदाएं और भविष्यवाणियों का मेल लोग मौजूदा आपदाओं को इन्हीं भविष्यवाणियों से जोड़ रहे हैं: घटना विवरण श्रीलंका तूफान नवंबर 2025 में आए दित्वा तूफ़ान के कारण 153 लोगों की मौत हुई और हज़ारों लोग बेघर हुए। मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड और श्रीलंका से आई बाढ़ की रिपोर्टें चौंकाने वाली हैं। इथोपिया ज्वालामुखी 23 नवंबर 2025 को इथोपिया में ज्वालामुखी में आए विस्फोट के कारण पूरी दुनिया कांप गई थी और इसका असर भारत तक देखने को मिला था। भू–राजनीतिक संकट पूरे साल रूस–यूक्रेन युद्ध, इजरायल–हमास लड़ाई और भारत–पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव के कारण युद्ध का तनाव बना रहा जो उनकी भविष्यवाणी से मेल खाता है।  कौन थीं रहस्यमयी बाबा वेंगा? रहस्यमयी बल्गेरियाई भविष्यवक्ता बाबा वेंगा का जन्म 1911 में बुल्गारिया में हुआ था। 12 साल की उम्र में उनकी देखने की शक्ति छिन गई थी लेकिन उनके समर्थक उन्हें भविष्यवक्ता मानते थे। प्रिंसेज डायना की मौत और 9/11 के हमले समेत उनकी कई भविष्यवाणियों के सच होने का दावा किया गया है। 1996 में उनका निधन हो गया था। 2026 की भविष्यवाणियां भी डरावनी 2025 के बाद अब 2026 को लेकर बाबा वेंगा की भविष्यवाणियों ने भी लोगों को डराया है। इनमें ग्लोबल इकोनॉमिक क्राइसिस के चलते सोना महंगा होने, बड़ी प्राकृतिक आपदा के आसार, एक बड़े युद्ध की आहट, एलियन लाइफ से पहला संपर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दबदबा जैसी बातें प्रमुख हैं।  

पति नहीं मिल रहे, समाधान बना ‘हसबैंड ऑन रेंट’! जानें क्यों तेजी से बढ़ रही है यह नई मांग

लातविया दुनिया भर में जनसंख्या असंतुलन को लेकर कई तरह की चर्चाएँ होती हैं, लेकिन लातविया का मामला बिल्कुल अनोखा है। यूरोप का यह छोटा-सा देश आज एक ऐसी स्थिति का सामना कर रहा है, जिसने समाज में एक अप्रत्याशित और दिलचस्प सेवा को जन्म दिया है “Husband for an Hour” यानी 'एक घंटे के लिए पति'।लातविया में महिलाओं और पुरुषों की आबादी के बीच भारी अंतर है।विशेषज्ञों के अनुसार, लातविया में हर 100 महिलाओं के मुकाबले लगभग 84 पुरुष ही रह गए हैं।महिलाओं की लाइफ एक्सपेक्टेंसी भी पुरुषों से 10 वर्ष अधिक होती है।देश में अधिकतर युवा, शिक्षित महिलाएँ विदेशों में बस जाती हैं, जिससे स्थानीय पुरुषों की कमी और बढ़ गई है। इस लैंगिक असंतुलन के कारण लातविया में अविवाहित व अकेली महिलाओं की संख्या बहुत अधिक हो चुकी है। परिणामस्वरूप, घरेलू काम, मुरम्मत और सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए महिलाएँ अब “किराए के पति” जैसी सेवाओं पर निर्भर हो रही हैं।  ‘एक घंटे के लिए पति’ सेवा कैसे काम करती है?     यह सेवा सामान्य घरेलू सहायता की तरह नहीं, बल्कि एक अत्यधिक संगठित प्रणाली है। यहाँ कुछ प्रमुख बातें शामिल हैं: ऑनलाइन या फोन के माध्यम से बुकिंग महिलाएँ किसी भी समय ऐप या वेबसाइट के जरिए बुकिंग कर सकती हैं। तत्काल सेवा की मांग होने पर पुरुष 60 मिनट के भीतर घर पहुँच जाते हैं। इन पुरुषों को दिया जाता है विशेष नाम: “Men with Golden Hands” इस सेवा को चलाने वाली कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को “सुनहरे हाथों वाले पुरुष” के रूप में विज्ञापित करती हैं।  उनकी विशेषज्ञता सिर्फ मरम्मत तक सीमित नहीं, बल्कि “महिला-फ्रेंडली हैंडलिंग” पर भी जोर दिया जाता है।  किस तरह की सेवाएँ मिलती हैं?     टपकते नल की मुरम्मत     टीवी या वॉशिंग मशीन इंस्टॉल करना     फर्नीचर फिटिंग     इलेक्ट्रिक वर्क     पेंटिंग     गार्डनिंग     घर की भारी वस्तुएँ उठाना     घर के अंदर सुरक्षा संबंधी छोटे काम     कुछ मामलों में महिला अकेली हो तो "सुरक्षा की भावना" के लिए पुरुष की मौजूदगी     यह सेवा किसी भी व्यक्तिगत या अनुचित गतिविधि से जुड़ी नहीं होती     बल्कि पूरी तरह घरेलू सहायता और तकनीकी कामों के लिए होती है।  क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड? विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय से लातविया में पुरुषों की संख्या तेजी से कम होती जा रही है। महिलाएँ अधिक पढ़ी-लिखी और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं। अधिकतर करियर-ओरिएंटेड महिलाओं को घर के तकनीकी कामों के लिए भरोसेमंद पुरुष मिलना मुश्किल हो रहा है।कई महिलाएँ रिश्तों के लिए विदेश में पार्टनर तलाशती हैं।इससे देश में स्थानीय पुरुषों की कमी और बढ़ती जा रही है।कई महिलाएँ बताती हैं कि उन्हें घर में मुरम्मत के दौरान “किसी सक्षम पुरुष” के मौजूद होने से सुरक्षा महसूस होती है। पिछले 5 वर्षों में मांग तीन गुना बढ़ी लातविया के बड़े शहरों रिगा, डॉगवपिल्स और लिएपाजा में यह सेवा अब आम हो चुकी है।कंपनियों का दावा है कि उन्हें रोजाना सैकड़ों बुकिंग मिलती हैं।कुछ सामाजिक समूहों का कहना है कि यह सेवा सामाजिक असमानता को दर्शाती है। यह पारंपरिक पारिवारिक ढाँचे में आ रहे बदलावों का संकेत है। हालांकि महिलाएँ इसे अपनी स्वतंत्रता और सुविधा के रूप में देखती हैं।   लातविया में पुरुषों की कमी से पैदा हुआ असंतुलन एक अनोखी लेकिन जरूरत आधारित सेवा का कारण बना है। "एक घंटे के लिए पति" केवल घरेलू कामों की मदद नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक संरचना का भी संकेत है। महिलाओं की बढ़ती आत्मनिर्भरता और पुरुषों की घटती संख्या ने मिलकर इस सेवा को लातविया की बड़ी सामाजिक आवश्यकता बना दिया है।  

पुतिन की भारत यात्रा बनी वजह? ट्रंप का सख्त ऐलान – अब इन लोगों को नहीं मिलेगा वीजा

वाशिंगटन  डोनल्ड ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे ऐसे आवेदकों को वीजा जारी करने से मना कर दें, जिन्होंने फैक्ट-चेकिंग, कंटेंट मॉडरेशन, कंप्लायंस या ऑनलाइन सेफ्टी से जुड़े पदों पर काम किया है। रॉयटर्स ने अमेरिकी विदेश विभाग के एक मेमो के हवाले से यह जानकारी दी है। किन लोगों को वीजा देने पर प्रतिबंध? उम्मीद की जा रही है कि इन नए वीजा प्रतिबंधों का टेक्नोलॉजी वर्कर्स पर, खासकर भारत जैसे देशों से आवेदन करने वालों पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। मेमो में स्पष्ट निर्देश है कि कांसुलर अधिकारी ऐसे किसी भी व्यक्ति को वीजा न दें जो संयुक्त राज्य अमेरिका में सुरक्षित अभिव्यक्ति की सेंसरशिप या सेंसरशिप की कोशिश के लिए जिम्मेदार या इसमें शामिल पाया जाए।   यह निर्देश पत्रकारों और टूरिस्ट सहित सभी तरह के वीजा पर लागू होता है, लेकिन इसका मुख्य फोकस H-1B वीजा पर है। यह वीजा आमतौर पर टेक्नोलॉजी और संबंधित सेक्टर में उच्च कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को दिया जाता है। आवेदकों की जाएगी जांच गलत सूचना से मुकाबला करने, कंटेंट मॉडरेशन, ट्रस्ट और सेफ्टी, और कंप्लायंस जैसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए आवेदकों की प्रोफेशनल हिस्ट्री, लिंक्डइन प्रोफाइल और सोशल मीडिया अकाउंट की गहन जांच की जाएगी। इस तरह की भूमिकाओं में शामिल होने के सबूत मिलने पर आवेदक एंट्री के लिए अयोग्य हो सकते हैं। इन प्रोफेशनल्स को टारगेट करती है यह पॉलिसी रॉयटर्स के मुताबिक, ऐसा प्रतीत होता है कि यह पॉलिसी ऑनलाइन सेफ्टी के काम में शामिल प्रोफेशनल्स को टारगेट करती है, जिसमें बाल यौन शोषण सामग्री, यहूदी विरोधी भावना और अन्य नुकसानदायक ऑनलाइन कंटेंट से निपटने वाले लोग भी शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन ने इस निर्देश को फ्री स्पीच की रक्षा के तौर पर पेश किया है। इस संबंध में, 6 जनवरी, 2021 को कैपिटल दंगे के बाद सोशल मीडिया बैन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के अपने अनुभवों का हवाला दिया गया है। यह पॉलिसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर टेक सेक्टर में कर्मचारियों के प्रवेश को सीमित करने का एक बड़ा कदम है।