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उमर सरकार का बड़ा फैसला: मेरिट आधारित आरक्षण में बढ़ेगा प्रतिशत

श्रीनगर  कैबिनेट द्वारा EWS और RBA कैटेगरी में कोटा कम करके ओपन मेरिट कोटा 10 परसेंट बढ़ाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी देने के एक दिन बाद, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज कहा कि फाइल पर साइन करके उसे अप्रूवल के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास भेज दिया गया है और सरकार को उम्मीद है कि वह जल्द ही फॉर्मल ऑर्डर जारी कर देगी। श्रीनगर में रिपोर्टर्स से बात करते हुए, उमर अब्दुल्ला ने कहा कि फाइल पर कल साइन करके उसे वेटिंग के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास भेज दिया गया था। रिजर्वेशन रिपोर्ट के स्टेटस पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि वह इसे मंज़ूरी देंगे और उसके बाद ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने रिहैबिलिटेशन असिस्टेंस स्कीम (RAS), जिसे पहले SRO-43 के नाम से जाना जाता था, के तहत उन सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को अपॉइंटमेंट ऑर्डर जारी किए हैं जिनकी सर्विस के दौरान मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि कश्मीर प्रांत से लगभग 60 मामलों में बुधवार को फॉर्मल ऑर्डर मिले, जबकि एक दिन पहले जम्मू में भी इसी तरह की एक्सरसाइज़ की गई थी।  "यह स्कीम यह पक्का करती है कि मरे हुए सरकारी कर्मचारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए ताकि उन्हें मुश्किल से निपटने में मदद मिल सके।"   CM ने कहा कि ऑर्डर में कुछ प्रोसेस से जुड़ी दिक्कतें हैं जिन्हें वे ठीक कर देंगे, लेकिन केस प्रोसेस हो चुके हैं और ऑर्डर अब सौंप दिए गए हैं। नौगाम ब्लास्ट की जांच के बारे में एक सवाल के जवाब में, उन्होंने कहा कि सभी संबंधित केस की जांच चल रही है। उन्होंने कहा, "उन सभी की जांच हो रही है। जहां छूट की जरूरत होगी, वह दी जाएगी। नहीं तो, नॉर्मल ऑर्डर जारी किए जाएंगे।" दरबार मूव और सर्दियों में सेक्रेटेरिएट के कामकाज पर, CM उमर ने कहा कि मंत्री और अधिकारी सर्दियों में श्रीनगर से काम करते रहते हैं। उन्होंने कहा, "हर हफ्ते, एक मंत्री यहां ड्यूटी पर रहता है। लोगों को राहत मिलनी चाहिए और उनका काम होना चाहिए।" राजभवन का नाम बदलकर लोकभवन करने के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि गवर्नेंस देने के लिए नाम दूसरी बात है। उन्होंने कहा, "नाम बदलने से कुछ नहीं होता। लोगों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम खुद को क्या कहते हैं; वे काम देखना चाहते हैं।"

स्वराज कौशल ने वकालत और मानवीयता दोनों में रचा इतिहास: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देश की पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज के पति और मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल के निधन पर दुख व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि स्वराज कौशल ने एक वकील के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारत के सबसे कम उम्र के गवर्नर बने और अपने कार्यकाल के दौरान मिजोरम के लोगों पर उन्होंने गहरी छाप छोड़ी। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''स्वराज कौशल के गुजर जाने से दुख हुआ। उन्होंने एक वकील और ऐसे इंसान के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई, जो कानूनी पेशे का इस्तेमाल जरूरतमंदों की जिंदगी बेहतर बनाने में करते थे।'' उन्होंने एक्स पोस्ट में आगे लिखा, ''वे भारत के सबसे कम उम्र के गवर्नर बने और अपने गवर्नर के कार्यकाल के दौरान मिजोरम के लोगों पर गहरी छाप छोड़ी। एक सांसद के तौर पर उनकी समझ भी काबिले-तारीफ थी। इस दुख की घड़ी में मेरी दुआएं उनकी बेटी बांसुरी और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ हैं।'' लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने लिखा, ''मिजोरम के पूर्व राज्यपाल, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व सांसद स्वराज कौशल का निधन अत्यंत दुखद है। दिल्ली स्थित उनके निवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनकी सुपुत्री, सांसद बांसुरी स्वराज व शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। स्वराज कौशल जी ने अपने दीर्घ सार्वजनिक जीवन में न्याय, लोकतंत्र और राष्ट्रसेवा के उच्च मूल्यों को जीवंत रखा। उनका सरल, संवेदनशील और कर्मनिष्ठ व्यक्तित्व सदैव स्मरणीय रहेगा।'' केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी स्वराज कौशल के निधन पर दुख जताया और लिखा, ''मिजोरम के पूर्व राज्यपाल और पूर्व राज्यसभा सांसद स्वराज कौशल के निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। उनका शांत, स्नेहिल और विद्वतापूर्ण व्यक्तित्व जनसेवा और न्यायप्रियता की मिसाल रहा। प्रभु श्री राम दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवार को इस कठिन घड़ी में धैर्य प्रदान करें।'' दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता स्वराज कौशल के निधन पर दुख जाहिर किया। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ''मिजोरम के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ अधिवक्ता स्वराज कौशल के निधन की खबर दुखद है। स्वराज कौशल जी का सार्वजनिक जीवन और विधि के क्षेत्र में योगदान हमेशा याद किया जाएगा। राष्ट्र और समाज के प्रति उनकी सेवा अविस्मरणीय है। दुख की इस घड़ी में, मेरी गहरी संवेदनाएं सांसद बांसुरी स्वराज और उनके समस्त परिजनों के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और उनके परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करें।''

फिच रेटिंग्स का अपडेट: GDP अनुमान 6.9% से बढ़कर 7.4%, उपभोक्ता खर्च और GST सुधार से मिली ताकत

मुंबई साख निर्धारित करने वाली एजेंसी फिच रेटिंग्स ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि अनुमान को 6.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया। मुख्य रूप से उपभोक्ता खर्च में वृद्धि और जीएसटी सुधारों के साथ बेहतर धारणा के कारण वृद्धि अनुमान को बढ़ाया गया है। गुरुवार को फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है. इससे पहले यह अनुमान 6.9 प्रतिशत था. फिच ने अपने आर्थिक विश्लेषण में कहा कि उपभोक्ता खर्च में तेजी, व्यावसायिक माहौल में सुधार और हाल ही में लागू किए गए जीएसटी सुधारों से अर्थव्यवस्था की गति तेज हुई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही, जो अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत थी. हालांकि, फिच का अनुमान है कि मार्च 2026 के अंत तक वृद्धि दर थोड़ी धीमी रह सकती है. बावजूद इसके, पूरे वर्ष के लिए एजेंसी ने अपनी वृद्धि दर का अनुमान 7.4 प्रतिशत पर रखा है. फिच ने क्या कहा फिच ने कहा कि घटती मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को दिसंबर में नीतिगत दरों में एक और कटौती करके इसे 5.25 प्रतिशत पर लाने गुंजाइश देती है। आरबीआई इस साल अब तक मुख्य नीतिगत दर रेपो में एक प्रतिशत की कटौती कर चुका है। उसने कहा कि जुलाई-सितंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर बढ़कर 8.2 प्रतिशत हो गई जो इससे पिछली अप्रैल-जून तिमाही के 7.8 प्रतिशत थी। रेटिंग एजेंसी ने दिसंबर के लिए अपनी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2025-26 (मार्च के अंत तक) की शेष अवधि में वृद्धि धीमी रहेगी, लेकिन हमने पूरे वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि अनुमान को सितंबर के 6.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है।’’ इस वर्ष वृद्धि को मुख्य रूप से निजी उपभोक्ता खर्च गति दे रहा है। इसका कारण मजबूत वास्तविक आय गतिशीलता, उपभोक्ता धारणा में सुधार और हाल ही में लागू किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों का प्रभाव है। क्या है डिटेल जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत लगभग 375 वस्तुओं पर कर की दरें कम की गई है। इससे 99 प्रतिशत से अधिक उपभोग की वस्तुएं सस्ती हुई हैं। जीएसटी में संशोधित दरें 22 सितंबर से प्रभावी हुई हैं। फिच को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी वृद्धि दर धीमी होकर 6.4 प्रतिशत रहेगी। इसने अनुमान लगाया है कि वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ अगले वित्त वर्ष (2026-27) की दूसरी छमाही में निजी निवेश में तेजी आएगी। खाने-पीने की चीजों की कम कीमतों के कारण अक्टूबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 0.3 प्रतिशत के अबतक के सबसे निचले स्तर पर आ गई। फिच ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि घटती मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को दिसंबर में नीतिगत दर में एक और कटौती करके इसे 5.25 प्रतिशत करने की गुंजाइश देगी…।’’ आरबीआई शुक्रवार को अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करेगा। फिच के अनुसार, मुख्य मुद्रास्फीति में सुधार और गतिविधियों के मजबूत बने रहने के अनुमान के साथ आरबीआई नीतिगत दर में कटौती के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया है और अगले दो साल तक नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बनी रहेगी। उपभोक्ता खर्च बना मुख्य चालक फिच के अनुसार, निजी उपभोक्ता खर्च इस वित्त वर्ष की वृद्धि का मुख्य स्तंभ है. इसे मजबूत वास्तविक आय, उपभोक्ता विश्वास में बढ़ोतरी और जीएसटी सुधारों से समर्थन मिला है. अक्तूबर में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 0.3 प्रतिशत के सर्वकालिक निम्न स्तर पर आ गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य और पेय पदार्थों की कम कीमतें रही. वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि दर घटने की संभावना एजेंसी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. फिच ने कहा कि वित्तीय स्थिति में नरमी आने पर अगले वर्ष की दूसरी छमाही में निजी निवेश में तेजी आ सकती है. आरबीआई को दरों में कटौती का अवसर मुद्रास्फीति में कमी के कारण फिच का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दिसंबर में नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत तक ले जा सकता है. साल 2025 में अब तक कुल 100 आधार अंकों की कटौती हो चुकी है, साथ ही नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में भी कई बार कमी की गई है. आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति शुक्रवार को अपनी नीति समीक्षा की घोषणा करेगी. फिच ने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति में सुधार और आर्थिक गतिविधियों के मजबूत बने रहने के कारण, केंद्रीय बैंक ने अपने सहजता चक्र के अंत तक पहुंच गया है और अगले दो वर्षों तक ब्याज दरें 5.25 प्रतिशत पर बनी रह सकती हैं.

बांसुरी स्वराज को लगा करारा व्यक्तिगत दुख, पिता के निधन पर नेताओं ने व्यक्त की संवेदना

नई दिल्ली  भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता और मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल का गुरुवार को निधन हो गया। स्वराज कौशल देश के जाने-माने अधिवक्ता थे और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज के पति थे। उनके निधन से राजनीतिक और विधि जगत में शोक की लहर है। स्वराज कौशल 1990 से 1993 तक मिजोरम के राज्यपाल रहे। इसके अलावा, वह लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रहे और कानूनी क्षेत्र में उनका योगदान व्यापक रूप से सराहा जाता है। अपने पिता के निधन की जानकारी देते हुए, भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट शेयर किया। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने एक्स पोस्ट में लिखा, "पापा स्वराज कौशल, आपका स्नेह, आपका अनुशासन, आपकी सरलता, आपका राष्ट्रप्रेम और आपका अपार धैर्य मेरे जीवन की वह रोशनी हैं जो कभी मंद नहीं होगी। आपका जाना हृदय की सबसे गहरी पीड़ा बनकर उतरा है, पर मन यही विश्वास थामे हुए है कि आप अब मां के साथ पुनः मिल चुके हैं, ईश्वर के सान्निध्य में, शाश्वत शांति में। आपकी बेटी होना मेरे जीवन का सबसे बड़ा गौरव है, और आपकी विरासत, आपके मूल्य और आपका आशीर्वाद ही मेरी आगे की हर यात्रा का आधार रहेंगे।" केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पोस्ट में लिखा, "मिजोरम के पूर्व राज्यपाल, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज के पूज्य पिताजी, स्वराज कौशल का आकस्मिक निधन अत्यंत दुखद है। आज बांसुरी जी के आवास जाकर उनके पिताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वराज कौशल ने अभूतपूर्व निष्ठा के साथ राष्ट्र की सेवा की। कानूनी क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्यों ने न्याय व्यवस्था को सशक्त करने के साथ ही समाज के उत्थान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  दुख की इस घड़ी में, मैं बांसुरी स्वराज और उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें।" दिल्ली भाजपा ने भी एक्स पोस्ट में स्वराज कौशल के निधन पर शोक प्रकट किया। पार्टी ने पोस्ट में लिखा, "सांसद एवं प्रदेश मंत्री बांसुरी स्वराज के पिताजी स्वराज कौशल का आज 4 दिसंबर, 2025 को निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार आज 4 दिसंबर, 2025 को सायं 4.30 बजे लोधी रोड श्मशान घाट पर किया जायेगा।"

पुतिन–मोदी की दोस्ती ने दुनिया को चौंकाया! भारत को मिला अब तक का सबसे बड़ा रक्षा तोहफ़ा

नई दिल्ली  भारत और रूस की दोस्ती एक बार फिर दुनिया को चौंकाने वाली है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत पहुंचने से पहले दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऐसी रक्षा डील को फाइनल कर दिया है, जिसे देखकर दुश्मन देशों की रातों की नींद उड़ जाएगी। ये समझौता न सिर्फ भारत की सैन्य शक्ति को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि हिंद महासागर से लेकर उत्तरी सीमाओं तक भारत की पकड़ और मजबूत करेगा। भारत और रूस के बीच लगभग दस साल से लंबित परमाणु-संचालित पनडुब्बी लीज़ समझौता आखिरकार फाइनल हो गया है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत लगभग 2 अरब डॉलर का भुगतान करके रूस से एक न्यूक्लियर अटैक सबमरीन किराए पर लेगा। यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस हफ्ते भारत दौरे पर आ रहे हैं। पुतिन के यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। कीमत को लेकर वर्षों से अटकी बातचीत बीते कई वर्षों से कीमत को लेकर अटकी बातचीत अब पूरी हो गई है। नवंबर में भारतीय अधिकारियों ने रूसी शिपयार्ड का दौरा किया था, जिसके बाद डील पर अंतिम सहमति बनी। भारत को पनडुब्बी की डिलीवरी दो वर्षों में मिलने की उम्मीद है, हालांकि परियोजना की जटिलता को देखते हुए समय बढ़ भी सकता है।   रणनीतिक संतुलन और मोदी की विदेश नीति इस समझौते के साथ भारत ने रूस के साथ रक्षा संबंधों को और गहरा किया है। हाल के महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका द्वारा 50% दंडात्मक टैरिफ लगाने के बाद रूस और चीन दोनों के साथ रिश्ते मजबूत करने का संदेश दिया है। वर्तमान में भारत ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए ऊँचे शुल्क कम कराने के लिए व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है ये वही शुल्क हैं जो अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीद जारी रखने पर दबाव बनाने के लिए लगाए थे।

शहबाज के फैसले से अटका आसिम मुनीर का CDF नोटिफिकेशन, पाकिस्तान में सुर्खियों में मामला

नई दिल्ली पाकिस्तान में चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (CDF) नोटिफिकेशन की देरी ने सियासी हलचल तेज कर दी है. पाकिस्तान में सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PMLN) सूत्रों के मुताबिक यह देरी सिर्फ तकनीकी मामला नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे बड़ी सौदेबाजी चल रही है. दावा है कि नवाज शरीफ अगली बार भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने सेना प्रमुख असिम मुनीर के सामने सीधे डील रखी है. सूत्रों का कहना है कि नवाज शरीफ और मरियम नवाज ने असिम मुनीर के CDF और COAS दोनों पदों पर पांच साल का कार्यकाल मंजूर करने के बदले में अपनी शर्तें रखीं. PMLN की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया कि अगर असिम मुनीर को पांच साल का टेन्योर चाहिए, तो उन्हें नवाज शरीफ की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करनी होगी. इसी वजह से CDF नोटिफिकेशन को रोककर मोलभाव किया जा रहा है. पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि यह पूरा सत्ता-संतुलन अगस्त के आखिरी हफ्ते में हुए मरी प्लान का हिस्सा है. इस मीटिंग में नवाज शरीफ, शहबाज शरीफ, असिम मुनीर, मरियम नवाज, असीम मलिक और मोहसिन नकवी शामिल थे. मीटिंग में दस साल के एक नए संयुक्त सत्ता ढांचे पर सहमति बनी थी. PMLN का कहना है कि उन्होंने अपनी तरफ से वादा पूरा कर दिया, यानी असिम मुनीर के लिए पांच साल का रास्ता खोल दिया. अब बारी सेना प्रमुख की है कि वे मरी प्लान के मुताबिक नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाएं. शरीफ खानदान की क्या है डिमांड? इसी के साथ नवाज शरीफ और मरियम नवाज सेना से भविष्य की सुरक्षित गारंटियां भी मांग रहे हैं. मरियम नवाज के एक करीबी साथी के अनुसार शरीफ परिवार चाहता है कि आने वाले वर्षों के लिए भी उनका राजनीतिक स्पेस सुरक्षित किया जाए. टॉप सूत्रों का दावा है कि नवाज शरीफ ने फौज में कुछ अहम प्रमोशन और पोस्टिंग को भी अपनी कंसल्टेंसी और सहमति के साथ मंजूर किए जाने की मांग रखी है. दावा है कि लेफ्टिनेंट जनरल नौमान जकारिया को वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनाया जाए और लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक को कमांडर NSC की जिम्मेदारी दी जाए. इसके अलावा कुछ अन्य मेजर और लेफ्टिनेंट स्तर के अधिकारियों को भी अहम पदों पर लगाने की मांग की गई है. CDF नोटिफिकेशन का क्या है विवाद? इस बीच पाकिस्तान की राजनीति में एक और सवाल उठ रहा है. क्या शहबाज शरीफ खुद अटकाव की वजह हैं? CDF का नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं किया गया है, जबकि असिम मुनीर का कार्यकाल 29 नवंबर को बढ़ना था. शहबाज लंदन यात्रा पर थे और स्वास्थ्य कारणों से उनकी वापसी में देरी हुई, जिससे कई नई चर्चाओं को हवा मिली. कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि शहबाज शरीफ जानबूझकर दूरी बनाए हुए थे, ताकि असिम मुनीर को पांच साल का कार्यकाल और CDF का पद देने में अपनी राजनीतिक जोखिम को कम कर सकें. उनके साइन का इंतजार होने की वजह से पाकिस्तान में एक तरह का संवैधानिक खालीपन भी बन गया है.

यमन में बंदी बनाए गए रवींद्रन की घर वापसी, भारत ने सहयोग के लिए जताया आभार

यमन  यमन में करीब पांच महीने से कैद भारतीय क्रू मेंबर अनिलकुमार रवींद्रन को आखिरकार रिहा कर दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी है। मंत्रालय के बयान के मुताबिक रवींद्रन लाइबेरिया झंडे वाली ग्रीक के एक बल्क कैरियर शिप MV Eternity C के क्रू का हिस्सा थे। इस जहाज पर बीते जुलाई महीने में हूती विद्रोहियों ने हमला किया था।   विदेश मंत्रालय के मुताबिक हमले के बाद रवींद्रन को पकड़ लिया गया था और वह 7 जुलाई 2025 से हिरासत में थे। मंत्रालय ने बताया कि रवींद्रन बुधवार को ओमान के मस्कट पहुंच गए हैं और जल्द ही भारत लौटने की उम्मीद है। इससे पहले सरकार लंबे समय से उनकी सुरक्षित रिहाई और वापसी सुनिश्चित करने के लिए कई पक्षों के साथ लगातार समन्वय कर रही थी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “भारत सरकार, MV Eternity C के भारतीय क्रू मेंबर अनिलकुमार रवींद्रन की रिहाई का स्वागत करती है। वह 7 जुलाई 2025 से यमन में हिरासत में थे। रवींद्रन मस्कट पहुंच गए हैं और जल्द ही भारत लौटेंगे। सरकार इस मामले में कई पक्षों के साथ समन्वय कर रही थी।” ओमान के प्रति आभार भारत ने रवींद्रन की रिहाई में सहयोग के लिए ओमान सरकार का आभार जताया है। हूती समर्थित मीडिया अल-मसीरा ने बताया है कि इस रिहाई में ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और क्रू को सुरक्षित तरीके से सना से मस्कट पहुंचाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक हूती विद्रोहियों द्वारा जुलाई में निशाना बनाए गए Eternity C जहाज के सभी 10 क्रू मेंबरों को रिहा कर सना से ओमान ट्रांसफर किया गया है।  

2009 का एसिड अटैक… अब तक ट्रायल जारी! CJI ने दिखाई कड़ी नाराज़गी, अदालत में लगाई फटकार

नई दिल्ली  साल 2009 में महिला पर हुए एसिड अटैक मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। जब याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 16 साल पहले 2009 में उस पर एसिड से हमला हुआ था और अब तक मामले का ट्रायल चल रहा है तो इस पर सीजेआई सूर्यकांत भड़क उठे और जमकर क्लास लगाई। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रीय राजधानी ऐसे हालात को हैंडल नहीं कर सकती है तो फिर कौन संभालेगा? यह तो शर्म की बात है। सिस्टम का मजाक है।   सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी हाई कोर्ट से एसिड अटैक केस में पेंडिंग ट्रायल के बारे में डेटा मांगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पेंडिंग एसिड अटैक केस के बारे में डेटा जमा करने का निर्देश दिया है। बार एंड बेंच के अनुसार, मामले की याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा, ''मेरे ऊपर 2009 में एसिड अटैक हुआ था, अभी तक ट्रायल चल रहा है। 2013 तक केस में कुछ नहीं हुआ और ट्रायल, जो अब दिल्ली के रोहिणी में हो रहा है, अब आखिरी सुनवाई के स्टेज में है।'' सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ''यह जुर्म 2009 का है और ट्रायल अब तक पूरा नहीं हुआ। अगर नेशनल कैपिटल ऐसी चुनौतियों को हैंडल नहीं कर पाएगी तो कौन करेगा? यह सिस्टम के लिए शर्म की बात है।'' याचिकाकर्ता ने बताया कि वह अपना केस लड़ने के साथ-साथ दूसरे एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद के लिए भी काम कर रही हैं। सीजेआई ने याचिकाकर्ता से ट्रायल में तेजी लाने के लिए एक ऐप्लीकेशन फाइल करने के लिए कहा। साथ ही कहा कि इस मामले का ट्रायल रोज होना चाहिए। बेंच ने सभी हाई कोर्ट की रजिस्ट्री से चार हफ्ते के अंदर डिटेल मांगी। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता ने उन पीड़ितों की बुरी हालत पर रोशनी डाली जिन्हें एसिड पीने के लिए मजबूर किया जाता है, अक्सर आर्टिफिशियल फीडिंग ट्यूब और गंभीर विकलांगता के सहारे जिंदा रहते हैं। बेंच ने उनकी इस अर्जी पर भी केंद्र से जवाब मांगा कि एसिड अटैक सर्वाइवर्स को दिव्यांगों की कैटेगरी में रखा जाए ताकि वेलफेयर स्कीम्स तक उनकी पहुंच पक्की हो सके।  

मंदिर में दीपक न जलाने पर हाईकोर्ट नाराज़, दरगाह विवाद फिर सुर्खियों में

चेन्नई  मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच ने बुधवार को एक तीखे शब्दों वाला अवमानना आदेश जारी किया। यह आदेश इसलिए जारी किया गया क्योंकि अधिकारियों ने तिरुप्परंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित विवादित पत्थर स्तंभ- दीपथून पर कार्तिगई दीपम त्योहार का दीपक जलाने के उसके पहले के निर्देश का पालन नहीं किया। यह स्थान लंबे समय से हिंदू मंदिर प्रशासन और बगल में स्थित मुस्लिम दरगाह के बीच विवाद का केंद्र रहा है। थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर भगवान सुब्रमण्य स्वामी का मंदिर और सिकंदर बधूसाह दरगाह स्थित है। सोमवार को न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामिनाथन ने मंदिर प्रशासन को निर्देश दिया था कि दीपथून पर परंपरा के अनुसार दीपक जलाया जाए। यह स्थान दरगाह के पास स्थित पहाड़ी का निचला शिखर है। बुधवार शाम 6 बजे इस आदेश के पालन न होने पर न्यायाधीश ने अधिकारियों को जानबूझकर अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा कि आदेश स्पष्ट था और इसे लागू न करना न्यायालय की प्रतिष्ठा को चुनौती देना है। अवमानना की कार्रवाई के तहत न्यायालय ने याचिकाकर्ता और उनके साथ दस लोगों को CISF सुरक्षा में दीपथून पर चढ़कर दीपक जलाने की अनुमति दी। अदालत ने इसे प्रतीकात्मक लेकिन आवश्यक कदम बताया। ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख अपने सोमवार के आदेश में न्यायमूर्ति स्वामिनाथन ने 1920 के एक दीवानी वाद और प्रिवी काउंसिल के पुराने फैसलों का हवाला दिया था। उन्होंने कहा कि विवादित स्तंभ मंदिर की भूमि पर स्थित है, न कि दरगाह के नियंत्रण क्षेत्र में। अदालत के अनुसार पहाड़ी दो शिखरों में विभाजित है- ऊपरी शिखर पर दरगाह और निचले शिखर पर दीपथून है। न्यायाधीश ने लिखा था कि निचले शिखर पर दीप जलाने से दरगाह या मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। CISF की तैनाती से बढ़ी संवेदनशीलता श्रद्धालुओं के एक वर्ग और तिरुप्परनकुंद्रम मंदिर प्रबंधन के बीच गतिरोध के बाद मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरई पीठ ने बुधवार को याचिकाकर्ता को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की सुरक्षा घेरे में पहाड़ी के प्राचीन स्तंभ पर दीप जलाने का निर्देश दिया। अदालत के पूर्व के निर्देश के बावजूद, बुधवार शाम ‘कार्तिगई दीपम’ के अवसर पर यहां तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दरगाह के पास प्राचीन स्तंभ पर दीप नहीं जलाया गया, जिसके कारण दक्षिणपंथी संगठन हिंदू मुन्नानी के कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं के एक वर्ग ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दीप को प्राचीन स्तंभ ‘दीपथून’ पर जलाया जाए जैसा कि पीठ ने निर्देश दिया था। एक याचिका के बाद, अदालत ने उच्च न्यायालय पीठ से संबद्ध सीआईएसएफ कमांडेंट को याचिकाकर्ता की सहायता के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मियों को तैनात करने का निर्देश दिया, जिन्हें आदेश का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए 10 अन्य कर्मियों को साथ ले जाने की अनुमति दी गई। इसके बाद, सीआईएसएफ सुरक्षा के साथ तिरुप्परनकुंद्रम आए याचिकाकर्ता राम रविकुमार और अन्य लोगों को पुलिस ने पहाड़ी की ओर बढ़ने से रोक दिया, क्योंकि मदुरै जिलाधिकारी ने मौजूदा कानून और व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्ष संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी की थी। तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई तिरुप्परनकुंद्रम में उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई जब कुछ लोगों ने पुलिस अवरोधक तोड़कर पहाड़ी पर चढ़ने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस धक्का-मुक्की में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन ने एक दिसंबर को अपने आदेश में कहा था कि सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के प्रबंधन को तीन दिसंबर को ‘कार्तिगई दीपम’ पर दीप जलाने की सुविधा प्रदान करनी चाहिए। अदालत के निर्देश के बावजूद, तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप नहीं जलाया गया। इसे तमिल महीने कार्तिगई (नवंबर-दिसंबर) में मनाए जाने वाले ‘कार्तिगई दीपम’ उत्सव के तहत, हमेशा की तरह उच्ची पिल्लैयार मंदिर के मंडपम में जलाया गया। कुछ प्रदर्शनकारी दीप जलाने के लिए पहाड़ी पर चढ़ने लगे लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें पहाड़ी पर चढ़ने से रोक दिया। मंदिर प्रबंधन ने शाम छह बजे होने वाले बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले अदालत में अपील दायर की, जिसमें दावा किया गया कि इस कदम से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। याचिकाकर्ता रामा रविकुमार ने अदालत से मंदिर प्रबंधन के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। पहाड़ी के आसपास के क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन ने निर्देश दिया कि शाम छह बजे तक दीप प्रज्वलित कर दिए जाएं, अन्यथा शाम 6.05 बजे अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की जाएगी, और मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। अदालत की अवमानना ​​की कार्रवाई की अपील स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने मंदिर के कार्यकारी अधिकारी और मदुरई पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया।  

हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी! इंडिगो की कई फ्लाइट्स रद्द—जानिए असली कारण क्या है

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इस सप्ताह अपने सबसे बड़े परिचालन संकटों में से एक का सामना कर रही है। मंगलवार और बुधवार को एयरलाइन की 200 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं, जबकि सैकड़ों उड़ानें घंटों देरी से चल रही हैं। इस वजह से देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों की लंबी कतारें लग गईं और हजारों लोग फंसकर परेशान हो गए। घरेलू विमानन कंपनी इंडिगो ने बृहस्पतिवार को तीन प्रमुख हवाई अड्डों से 180 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं। गुरुग्राम स्थित एयरलाइन, अपने पायलटों के लिए उड़ान-ड्यूटी और आराम अवधि के नए नियमों के मद्देनजर अपनी उड़ानों के संचालन के लिए जरूरी चालक दल सदस्यों की व्यवस्था करने को लेकर जूझ रही है। एक सूत्र ने कहा- इंडिगो ने बृहस्पतिवार को तीन हवाई अड्डों…मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु…. से 180 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दीं।’ मुंबई हवाई अड्डे पर रद्द होने वाली उड़ानों की संख्या दिन भर में 86 (41 आगमन और 45 प्रस्थान) रही। वहीं बेंगलुरु में 41 आगमन उड़ानों सहित 73 उड़ानें रद्द की गईं। इसके अलावा, बृहस्पतिवार के लिए दिल्ली हवाई अड्डे पर 33 उड़ानें रद्द की गईं। सूत्र ने कहा, ‘‘दिन चढ़ने के साथ रद्द होने वाली उड़ानों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।’ एयरलाइन का ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (ओटीपी) छह प्रमुख हवाई अड्डों… दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद… पर तीन दिसंबर को 19.7 प्रतिशत तक गिर गया, क्योंकि उसे अपनी सेवाओं के संचालन के लिए आवश्यक चालक दल जुटाने को लेकर जूझना पड़ रहा है। यह दो दिसंबर के आंकड़े से लगभग आधे से कम है। उस समय यह 35 प्रतिशत था। कई कारणों के एक साथ टकराने से इंडिगो की समय-सारिणी अचानक धराशायी हो गई। इन कारणों में प्रमुख हैं- क्रू की भारी कमी, नए ड्यूटी-टाइम नियम, तकनीकी खामियां आदि। आइए इसे विस्तार से समझते हैं। 1. क्रू की गंभीर कमी नए ड्यूटी-टाइम नियम 1 नवंबर से लागू हुए, जिनसे पायलट और क्रू के काम करने के घंटे कम कर दिए गए और अनिवार्य आराम समय बढ़ा दिया गया। नियम सख्त होने के बाद कई पायलट कानूनी तौर पर ड्यूटी के लिए उपलब्ध ही नहीं बचे, जिसके चलते दर्जनों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। कई रोटेशन पूरे ही नहीं हो पाए क्योंकि समय सीमा खत्म हो चुकी थी। 2. नए रोस्टर नियम (FDTL) के कारण बढ़ी चुनौती डीजीसीए द्वारा लागू नई 'फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन' में रात की लैंडिंग, लगातार ड्यूटी घंटों और साप्ताहिक विश्राम को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। इंडिगो प्रतिदिन करीब 2200 उड़ानें संचालित करती है और उसके पास रात में उड़ान भरने वाले विमानों की बड़ी संख्या है। नए नियमों के अनुसार रोस्टर और शेड्यूल दोबारा तैयार करना पड़ा, लेकिन यह प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाई थी। 3. प्रमुख हवाई अड्डों पर तकनीकी खामियां मंगलवार को दिल्ली और पुणे जैसे हवाई अड्डों पर चेक-इन और डिपार्चर कंट्रोल सिस्टम में तकनीकी समस्याएं आईं। इससे सुबह की उड़ानें पीछे खिसक गईं और देरी का यह प्रभाव पूरे दिन नेटवर्क में फैलता गया। 4. शीतकालीन भीड़ और एयरपोर्ट कंजेशन सर्दियों के मौसम में धुंध, बढ़ी हुई यात्री संख्या और पीक आवर्स की भीड़ ने हालात और खराब कर दिए। इंडिगो की तंग शेड्यूलिंग के कारण छोटी देरी भी पूरे नेटवर्क में लहर की तरह असर डालती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को इंडिगो की ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 35% पर आ गई- यानी एक दिन में 1,400 से अधिक उड़ानें देरी से चलीं। नवंबर महीने में ही एयरलाइन को 1,232 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। क्या हैं नए FDTL नियम? डीजीसीए के नए नियमों का उद्देश्य क्रू की थकान कम करना और उड़ान सुरक्षा को मजबूत करना है। इनमें शामिल हैं:     साप्ताहिक अनिवार्य आराम समय बढ़ा     रात की लैंडिंग की सीमा 6 से घटाकर 2     लगातार ड्यूटी घंटों में कमी इसके साथ ही पायलटों के लिए उड़ान समय की नई सीमाएं तय की गईं:     8 घंटे प्रतिदिन     35 घंटे प्रति सप्ताह     125 घंटे प्रति माह     1000 घंटे प्रति वर्ष इसके अलावा किसी भी 24 घंटे की अवधि में क्रू को कम से कम 10 घंटे अनिवार्य विश्राम देना होगा। ये नियम सुरक्षा के लिहाज से मजबूत हैं, पर एयरलाइनों को पहले की तुलना में अधिक पायलट और क्रू की जरूरत पड़ रही है। इंडिगो, जिसके पास रात की उड़ानों का बड़ा नेटवर्क है, वह सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। अन्य एयरलाइंस पर इतना असर क्यों नहीं? 1. पैमाना और उड़ानों की संख्या इंडिगो देश की घरेलू उड़ानों का सबसे बड़ा हिस्सा संचालित करता है। इतने बड़े नेटवर्क में छोटी गड़बड़ी भी बड़ा प्रभाव डालती है। 2. रात की उड़ानों का बड़ा नेटवर्क विस्तारा, एयर इंडिया और अकासा जैसी एयरलाइनों की रात की उड़ानें सीमित हैं, जबकि इंडिगो कई हाई-फ्रीक्वेंसी नाइट सेक्टर संचालित करती है। रात की लैंडिंग की सीमा घटने से इंडिगो पर अधिक दबाव पड़ा। 3. तंग क्रू-उपयोग मॉडल इंडिगो की परिचालन दक्षता कम खाली समय और उच्च उपयोग पर आधारित है। नए नियमों के बाद शेड्यूल में तुरंत खालीपन आ गया। 4. नेटवर्क पुनर्गठन में कम लचीलापन छोटी एयरलाइंस अपने शेड्यूल तेजी से बदल सकती हैं, लेकिन इंडिगो के विशाल नेटवर्क में यह प्रक्रिया कहीं अधिक जटिल है। कब तक सुधरेगी स्थिति? इंडिगो ने कहा है कि वह कैलिब्रेटेड एडजस्टमेंट्स कर रहा है और 48 घंटे में संचालन सामान्य होने की उम्मीद है। एयरलाइन इन कदमों पर काम कर रही है:     उच्च दबाव वाले रूटों पर क्रू की पुनर्नियुक्ति     नाइट शेड्यूल में बदलाव     अंतिम समय की अफरातफरी से बचने के लिए प्री-प्लान्ड कैंसिलेशन     विमान और क्रू रोटेशन को नए सिरे से व्यवस्थित करना एयरलाइन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे उड़ान स्थिति लगातार चेक करते रहें, क्योंकि देरी अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकती है। इंडिगो ने बयान जारी किया- हम अपने ग्राहकों से क्षमा चाहते हैं… अप्रत्याशित परिचालन चुनौतियों तकनीकी समस्याएं, सर्दियों से जुड़ी देरी, एयरपोर्ट कंजेशन और अपडेटेड क्रू रोस्टरिंग नियम का सामूहिक प्रभाव हमारे संचालन पर पड़ा … Read more