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डॉक्टरों की हड़ताल से प्रभावित स्वास्थ्य सेवाएं, हिमाचल में OPD बंद, आपात सेवाएं जारी

शिमला हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर संकट में आ गई हैं। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला के रेजिडेंट डॉक्टरों ने आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसके चलते प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में OPD और रूटीन ऑपरेशन पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। हालांकि, इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी। हड़ताल के पहले दिन ही मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीज इलाज के लिए निजी अस्पतालों या पड़ोसी राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं। SOP जारी, फिर भी हालात चिंताजनक मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट (DMER) ने हड़ताल को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है। इसमें कहा गया है कि इलाज और पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि OPD पूरी तरह बंद हैं और मरीज बिना इलाज लौट रहे हैं। सीएम के आश्वासन के बावजूद हड़ताल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा मांगें मानने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद डॉक्टर हड़ताल पर चले गए। शुक्रवार को सीएम और डॉक्टरों के बीच बैठक भी हुई थी, लेकिन बात नहीं बनी।शनिवार से डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। 3000 से ज्यादा डॉक्टर हड़ताल पर रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) के समर्थन में हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (HMOA) और स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स (SAMDCOT) भी उतर आई हैं। इससे करीब 3000 डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। क्या है पूरा विवाद? 22 दिसंबर को IGMC में पल्मोनरी डिपार्टमेंट के डॉक्टर राघव निरूला और एक मरीज के बीच मारपीट का वीडियो वायरल हुआ था। दोनों पक्षों में विवाद हुआ, जिसके बाद सरकार ने जांच करवाई। जांच रिपोर्ट में डॉक्टर और मरीज—दोनों को दोषी बताया गया। 24 दिसंबर को सरकार ने डॉ. राघव निरूला को टर्मिनेट कर दिया। इसके बाद डॉक्टरों में आक्रोश फैल गया। मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। AIIMS दिल्ली के डॉक्टर भी RDA के समर्थन में आ गए हैं। डॉक्टरों की प्रमुख मांगें डॉ. राघव निरूला की बर्खास्तगी वापस ली जाए IGMC परिसर में हुई हिंसा के दोषियों पर FIR दर्ज हो डॉक्टरों को जान से मारने की धमकी देने वालों पर कार्रवाई हो अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट शनिवार को भी अस्पतालों की OPD बंद रही। मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ेगा।

पाकिस्तान की आपत्तियाँ बेअसर, भारत ने चिनाब नदी पर नई परियोजना को दी मंजूरी

श्रीनगर भारत ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर 260 मेगावाट की दुलहस्ती स्टेज-II जलविद्युत परियोजना को पर्यावरण मंजूरी दे दी है। पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने इस महीने की शुरुआत में अपनी 45वीं बैठक में इस रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना के लिए मंजूरी दी, जिसकी अनुमानित लागत 3,200 करोड़ रुपये से अधिक है। यह मंजूरी निर्माण टेंडर जारी करने का रास्ता साफ करती है।   पाकिस्तान लंबे समय से सिंधु जल समझौते का राग अलापता रहा है, लेकिन भारत के ताजा कदमों से उसकी चिंताएं और बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के निलंबन से भारत को पश्चिमी नदियों पर अधिक स्वतंत्रता मिली है, जिससे जल सुरक्षा और ऊर्जा उत्पादन में मजबूती आएगी। जानकारी के अनुसार, समिति ने नोट किया कि चिनाब बेसिन का जल भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 की सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुसार साझा किया जाता था और परियोजना के पैरामीटर संधि के अनुरूप योजना बनाई गई थी। हालांकि, सिंधु जल संधि 23 अप्रैल 2025 से प्रभावी रूप से निलंबित है। सिंधु जल संधि लागू होने के दौरान पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर अधिकार थे, जबकि भारत को रावी, ब्यास और सतलुज पर। संधि के निलंबन के साथ अब केंद्र सरकार सिंधु बेसिन में कई जलविद्युत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रही है जैसे सावलकोटे, रतले, बुरसर, पाकल दुल, क्वार, किरु, और किर्थई-I तथा II।   दुलहस्ती स्टेज-II मौजूदा 390 मेगावाट की दुलहस्ती स्टेज-I जलविद्युत परियोजना (दुलहस्ती पावर स्टेशन) का विस्तार है, जो नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचपीसी) द्वारा 2007 में चालू की गई थी और सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। योजना के तहत, स्टेज-I पावर स्टेशन से पानी को 3,685 मीटर लंबी और 8.5 मीटर व्यास वाली अलग सुरंग के माध्यम से डायवर्ट किया जाएगा, जिससे स्टेज-II के लिए घोड़े की नाल आकार का तालाब बनेगा। परियोजना में एक सर्ज शाफ्ट, प्रेशर शाफ्ट और भूमिगत पावरहाउस शामिल है, जिसमें दो 130 मेगावाट की इकाइयां होंगी, जिससे कुल स्थापित क्षमता 260 मेगावाट हो जाएगी और वार्षिक ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा। परियोजना के लिए कुल भूमि आवश्यकता 60.3 हेक्टेयर अनुमानित है। इसमें किश्तवाड़ जिले के बेंजवार और पालमार गांवों से 8.27 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है। यह परियोजना क्षेत्र में बिजली उत्पादन क्षमता को मजबूत करेगी और जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत क्षमता के दोहन की केंद्र सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

10 घंटे की यातना: कोहरे में फंसी राजधानी एक्सप्रेस, यात्रियों को मिली सिर्फ एक कटोरी खिचड़ी

नई दिल्ली देश भर में भीषण ठंड का कहर जारी है। सड़कों पर सुबह-शाम कोहरा छाया रहता है। कोहरे की वजह से उड़ानें भी रद्द हो रही हैं। उधर, ट्रेनें भी अपने निर्धारित समय से लेट पहुंच रही है। वहीं, रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस बीते शुक्रवार को साढ़े दस घंटे देर से दिल्ली पहुंची। रेलवे की ओर से यात्रियों को दी गई सिर्फ एक कटोरी खिचड़ी रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस बीते शुक्रवार को साढ़े दस घंटे देर से रात पौने दस बजे दिल्ली पहुंची जबकि, दिल्ली पहुंचने का इसका निर्धारित समय दिन के 11 बजे है। बता दें कि भले ही कोहरे की वजह से रांची-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस लेट हुई, लेकिन इसमें यात्रियों का क्या कसूर है कि जो रेलवे की ओर से उन्हें सिर्फ एक कटोरी खिचड़ी दी गई। लंबी दूरी की अन्य ट्रेनें भी घंटों लेट रांची से दिल्ली जा रहे दंपति ने बताया कि साढ़े दस घंटे में मात्र एक बार रेलवे की ओर से एक कटोरी खिचड़ी दी गई। उसके बाद बच्चे भूख से बिलबिलाते रहे, लेकिन पैंट्री स्टाफ ने कहा कि ट्रेन में अब न तो पीने का पानी है और न ही खाने का कोई सामान। वहीं, लंबी दूरी की अन्य ट्रेनें भी घंटों विलंब से चल रही हैं।  

हिंदुओं की रक्षा नहीं हुई तो आंदोलन तय, बांग्लादेशी प्रशासन को चेताया गया

कोलकाता बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचारों, विशेष रूप से हालिया लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ भारत के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन जारी हैं। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में गुरुवार को बांगिया हिंदू महामंच ने बड़ा प्रदर्शन किया, जबकि कोलकाता और गुवाहाटी में शुक्रवार को हजारों लोग सड़कों पर उतरे। इन प्रदर्शनों में बांग्लादेशी अधिकारियों पर दबाव बनाने और हिंदुओं की सुरक्षा की मांग की जा रही है। सिलीगुड़ी में बांगिया हिंदू महामंच के अध्यक्ष बिक्रमादित्य मंडल ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा- बांग्लादेश में हिंदुओं को जिस तरह लिंच किया जा रहा है, उसके खिलाफ हम प्रदर्शन कर रहे हैं। हमने पहले ही वीजा कार्यालय बंद करवा दिया है। अगर बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा नहीं हुई, तो हम यहां बांग्लादेशी अधिकारियों को शांतिपूर्वक रहने नहीं देंगे। हम उन्हें प्रताड़ित नहीं करेंगे, लेकिन उनके काम नहीं करने देंगे और सुनिश्चित करेंगे कि वे अपने देश वापस चले जाएं। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से बांग्लादेश के मायमनसिंह जिले में 18 दिसंबर को हुई दीपू चंद्र दास (27 वर्ष) की लिंचिंग से ट्रिगर हुए हैं। दीपू चंद्र दास नामक हिंदू युवक पर कथित ईशनिंदा का आरोप लगाकर भीड़ ने उन्हें पीटा, पेड़ से लटकाया और शरीर को आग लगा दी। इसके अलावा, हाल ही में एक अन्य हिंदू युवक अमृत मंडल की हत्या की खबरें भी सामने आई हैं। इन घटनाओं ने भारत में भारी राजनीतिक विवाद पैदा कर दिया है। पश्चिम बंगाल और असम में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कोलकाता में शुक्रवार को हजारों भगवा वस्त्र धारण किए हिंदू कार्यकर्ता बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन के बाहर जमा हुए। भाजपा नेता एवं पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी कमीशन परिसर में घुस गए और अधिकारियों से बात की। उन्होंने हिंदुओं पर अत्याचार रोकने की मांग की। असम के गुवाहाटी में भी बंगाली यूनाइटेड फोरम ने बांग्लादेश असिस्टेंट हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन किया। इससे पहले दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद में भी विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों ने प्रदर्शन किए। सिलीगुड़ी में वीजा सेंटर में तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुईं, जिसके बाद बांग्लादेश ने भारत के राजदूत को तलब किया था। भारत की ओर से प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा- भारत बांग्लादेश के लोगों से निकट और मित्रतापूर्ण संबंध चाहता है, जो मुक्ति संग्राम में जड़े हुए हैं और विकास एवं जन-जन के प्रयासों से मजबूत हुए हैं। बांग्लादेश में हो रहे राजनीतिक बदलावों, जैसे बीएनपी नेता तारिक रहमान की 17 वर्ष बाद वापसी और शेख हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध के संदर्भ में जायसवाल ने कहा- हम बांग्लादेश में शांति और स्थिरता के पक्षधर हैं। हम लगातार स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और भागीदारीपूर्ण चुनावों की मांग करते रहे हैं। बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने दीपू चंद्र दास मामले में 10 गिरफ्तारियां होने की जानकारी दी थी, लेकिन भारत में प्रदर्शनकारियों का मानना है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और कड़े कदम उठाने की जरूरत है। स्वतंत्र रिपोर्ट्स के अनुसार, यूनुस सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर 2,900 से अधिक हिंसा की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में तनाव, प्रधानमंत्री ने FTA वादे पर जताई नाराजगी

नई दिल्ली न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शनिवार को भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का स्वागत करते हुए इसे अपनी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इस समझौते को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई थीं और इसका विरोध किया था। प्रधानमंत्री लक्सन ने कहा, “हमने अपने पहले कार्यकाल में भारत के साथ FTA करने का वादा किया था और हमने उसे पूरा कर दिया है।” उन्होंने इस समझौते को आर्थिक विकास के लिए अहम बताते हुए कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर, आय में वृद्धि और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। लक्सन के अनुसार, यह समझौता 1.4 अरब भारतीय उपभोक्ताओं के विशाल बाजार के दरवाजे न्यूजीलैंड के लिए खोलेगा। लक्सन ने इसे अपनी सरकार के व्यापक एजेंडे से जोड़ते हुए कहा कि यह समझौता बुनियादी सुधार और भविष्य के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है। सत्तारूढ़ गठबंधन में मतभेद हालांकि, इस समझौते ने न्यूजीलैंड की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के भीतर मतभेद भी उजागर कर दिए हैं। विदेश मंत्री और न्यूजीलैंड फर्स्ट (NZF) पार्टी के नेता विंस्टन पीटर्स ने इस समझौते को न तो मुक्त और न ही निष्पक्ष करार दिया। पीटर्स ने कहा कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को अपनी पार्टी की चिंताओं से अवगत कराया है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह जयशंकर का पूरा सम्मान करते हैं। पीटर्स ने आरोप लगाया कि समझौते में गुणवत्ता से अधिक रफ्तार को प्राथमिकता दी गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “न्यूजीलैंड फर्स्ट ने अपने गठबंधन सहयोगी को चेतावनी दी थी कि भारत के साथ कमजोर और जल्दबाजी में किया गया समझौता न किया जाए।” उनका कहना था कि सरकार को पूरे संसदीय कार्यकाल का उपयोग कर एक बेहतर और संतुलित समझौता करना चाहिए था, जो दोनों देशों के नागरिकों के हित में होता। डेयरी सेक्टर सबसे बड़ा विवाद इस समझौते को लेकर सबसे बड़ा विवाद डेयरी उद्योग को लेकर है। पीटर्स ने आरोप लगाया कि न्यूजीलैंड ने भारत के लिए अपना बाज़ार खोल दिया, लेकिन बदले में भारतीय बाजार में न्यूजीलैंड के डेयरी उत्पादों जैसे दूध, पनीर और मक्खन पर टैरिफ में कोई ठोस रियायत नहीं मिली। उन्होंने कहा, “यह समझौता न्यूजीलैंड के किसानों के लिए अच्छा नहीं है और ग्रामीण समुदायों के सामने इसका बचाव करना असंभव है।” यह FTA इस सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई बातचीत के बाद घोषित किया गया था। दोनों नेताओं ने कहा कि यह समझौता अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर सकता है और अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर तक का निवेश ला सकता है। वर्ष 2024 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच कुल व्यापार 2.07 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 1.1 अरब डॉलर था। भारत से प्रमुख निर्यातों में दवाइयां शामिल हैं, जबकि न्यूजीलैंड से कृषि और वानिकी उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। भारत सरकार के अनुसार, न्यूजीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पीटर्स ने यह भी आरोप लगाया कि यह समझौता व्यापार से ज्यादा भारतीय श्रमिकों की आवाजाही और भारत में निवेश बढ़ाने पर केंद्रित है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय नागरिकों के लिए एक नया रोजगार वीजा श्रेणी बनाई गई है, जो ऑस्ट्रेलिया या ब्रिटेन जैसे साझेदारों को नहीं दी गई। उन्होंने कहा, “न्यूजीलैंड फर्स्ट हर प्रवासन नीति को इस कसौटी पर परखता है कि क्या वह स्थानीय लोगों के रोजगार और आव्रजन प्रणाली की अखंडता की रक्षा करती है।” पीटर्स के मुताबिक, भारत के साथ किया गया यह समझौता उस कसौटी पर खरा नहीं उतरता, खासकर ऐसे समय में जब न्यूजीलैंड का श्रम बाज़ार पहले से ही दबाव में है।

अफ्रीका में इजरायल का बड़ा दांव: सोमालिलैंड को मान्यता देने वाला पहला देश बना

सोमालिलैंड इजरायल शुक्रवार को दुनिया का पहला ऐसा देश बना जिसने स्व घोषित रिपब्लिक ऑफ सोमालिलैंड को औपचारिक रूप से एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता दी. इस फैसले को हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र की राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिससे सोमालिया के साथ इजरायल के रिश्तों में तनाव बढ़ना तय माना जा रहा है. सोमालिलैंड सुन्नी मुस्लिम आबादी वाला देश है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अब सोमालिलैंड के साथ कृषि, स्वास्थ्य, तकनीक और अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में तुरंत सहयोग शुरू करेगा. उन्होंने सोमालिलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही को बधाई देते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की और उन्हें इजरायल आने का निमंत्रण भी दिया. नेतन्याहू ने कहा कि यह घोषणा अब्राहम समझौतों की उसी भावना में की गई है, जो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर हुए थे. इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार और सोमालिलैंड के राष्ट्रपति के साथ मिलकर आपसी मान्यता का संयुक्त घोषणा पत्र भी साइन किया गया. वहीं, राष्ट्रपति अब्दुल्लाही ने कहा कि सोमालिलैंड अब्राहम समझौतों में शामिल होगा और यह कदम क्षेत्रीय और वैश्विक शांति की दिशा में अहम साबित होगा. सोमालिया से लेकर अफ्रीकन यूनियत तक में विरोध दूसरी ओर, सोमालिया और अफ्रीकन यूनियन ने इजरायल के इस फैसले को अवैध बताते हुए कड़ा विरोध जताया है. सोमालिया के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में इसे देश की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया गया. बयान में कहा गया कि संघीय सरकार अपनी क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं की रक्षा के लिए हर जरूरी कूटनीतिक, राजनीतिक और कानूनी कदम उठाएगी. मिस्र ने भी इस घटनाक्रम पर चिंता जताई है. मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलात्ती ने सोमालिया, तुर्की और जिबूती के विदेश मंत्रियों से बातचीत कर हालात पर चर्चा की. मिस्र के विदेश मंत्रालय के अनुसार, सभी देशों ने सोमालिया की एकता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की बात दोहराई और अलगाववादी क्षेत्रों को मान्यता देने को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बताया. अफ्रीकी संघ ने क्या कहा? अफ्रीकी संघ ने भी सोमालिलैंड को मान्यता देने के किसी भी कदम को खारिज करते हुए सोमालिया की एकता के प्रति अपनी अडिग प्रतिबद्धता जताई है. अफ्रीकी संघ ने चेतावनी दी कि ऐसे फैसले पूरे महाद्वीप में शांति और स्थिरता को कमजोर कर सकते हैं. गौरतलब है कि सोमालिलैंड 1991 से व्यावहारिक रूप से स्वायत्त है और स्थिर भी रहा है, लेकिन अब तक उसे किसी भी देश से औपचारिक मान्यता नहीं मिली थी. सोमालिलैंड को उम्मीद है कि इजरायल के इस कदम से अन्य देश भी आगे आएंगे और उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलेगी.

सर्दियों के तूफान से अमेरिका में हवाई यातायात ठप, ग्रेट लेक्स से नॉर्थईस्ट तक असर

न्यूयॉर्क  अमेरिका में कई एयरलाइंस ने देश के बड़े हिस्सों में गंभीर सर्दियों के तूफान की चेतावनी के कारण, हजारों फ्लाइट्स कैंसिल या लेट कर दी हैं. यह देश के अंदर पीक ट्रैवल सीज़न माना जाता है क्योंकि सर्दियों में लोगों छुट्टी होती है. एयरलाइंस ने  1,800 से ज़्यादा फ्लाइट्स रद्द कर दी हैं. हज़ारों उड़ानों में देरी हुई है.  खतरनाक मौसम ग्रेट लेक्स से लेकर नॉर्थईस्ट तक फैल गया, जिससे बड़े एयरपोर्ट्स पर कामकाज बाधित हुआ है. फ़्लाइट-ट्रैकिंग वेबसाइट FlightAware के मुताबिक, पूरे अमेरिका में एयरलाइंस ने शुक्रवार को हज़ारों फ्लाइट्स रद्द या देरी से चलाईं. वेबसाइट ने बताया कि शाम 4:04 बजे ET तक कुल 1,802 फ्लाइट्स रद्द की गईं और 22,349 में देरी हुई. 'बर्फबारी का अनुमान…' नेशनल वेदर सर्विस ने आज विंटर स्टॉर्म डेविन के लिए चेतावनी जारी की है, जिससे शनिवार सुबह तक ग्रेट लेक्स से लेकर उत्तरी मिड-अटलांटिक और दक्षिणी न्यू इंग्लैंड तक खतरनाक यात्रा की स्थिति बन सकती है. नेशनल वेदर सर्विस के स्टॉर्म प्रेडिक्शन सेंटर ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर बताया, "अपस्टेट न्यूयॉर्क से लेकर न्यूयॉर्क सिटी और लॉन्ग आइलैंड सहित ट्राई-स्टेट एरिया तक, शुक्रवार देर रात तक 4-8 इंच बर्फबारी का अनुमान है." रॉयटर्स के मुताबिक, जॉन एफ. कैनेडी एयरपोर्ट, ला गार्डिया एयरपोर्ट और डेट्रॉइट मेट्रोपॉलिटन वेन काउंटी एयरपोर्ट जैसे संभावित प्रभावित इलाकों के एयरपोर्ट्स ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करके यात्रियों को संभावित देरी या कैंसलेशन के बारे में चेतावनी दी है. जेटब्लू एयरवेज ने 225 फ्लाइट्स कैंसिल की हैं, जो सभी एयरलाइंस में सबसे ज़्यादा हैं. इसके बाद डेल्टा एयरलाइन्स DAL.N ने 186 फ्लाइट्स, रिपब्लिक एयरवेज ने 155, अमेरिकन एयरलाइंस ने 96 और यूनाइटेड एयरलाइंस ने 82 फ्लाइट्स कैंसिल की हैं. शुक्रवार को पूरे नॉर्थईस्ट में बर्फ और सर्दियों के तूफान की चेतावनी जारी की गई, क्योंकि एक शक्तिशाली बर्फीला तूफान ईस्ट कोस्ट की ओर बढ़ रहा था, जिससे खतरनाक यात्रा और बड़े पैमाने पर रुकावट का खतरा था. मौसम विभाग ने दक्षिणी कनेक्टिकट के कुछ हिस्सों, उत्तर-पूर्वी न्यू जर्सी, पेन्सिलवेनिया के कुछ इलाकों और दक्षिण-पूर्वी न्यूयॉर्क में भारी बर्फबारी की चेतावनी दी है, जहां 9 इंच तक बर्फ जम सकती है. यह अलर्ट शुक्रवार शाम 4 बजे से शनिवार दोपहर 1 बजे EST तक लागू रहेगा. नेशनल वेदर सर्विस ने देश के एक बड़े हिस्से में, वेस्ट कोस्ट से लेकर उत्तर-पूर्व और अलास्का तक, सर्दियों के तूफान की चेतावनी और सलाह जारी की है. कैलिफ़ोर्निया, नेवाडा, इडाहो, व्योमिंग, कोलोराडो, पेन्सिलवेनिया, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, अलास्का, कनेक्टिकट, वाशिंगटन, ओरेगन, मोंटाना, यूटा, मिनेसोटा, विस्कॉन्सिन, मिशिगन, ओहियो, वेस्ट वर्जीनिया, मैरीलैंड, वर्जीनिया, डेलावेयर और मैसाचुसेट्स के कुछ हिस्सों के लिए अलर्ट जारी किए गए हैं. पश्चिम में भी भारी बर्फबारी की उम्मीद है. कैलिफ़ोर्निया के मोनो काउंटी में, मौसम विभाग ने कहा कि 8,000 फीट से ऊपर के इलाकों में 1 से 3 फीट तक बर्फबारी हो सकती है, जबकि इससे कम ऊंचाई पर और US-395 के किनारे 4 से 12 इंच बर्फबारी की उम्मीद है. ब्लूमबर्ग द्वारा बताए गए अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के पूर्वानुमान के मुताबिक, 20 दिसंबर से 1 जनवरी के बीच रिकॉर्ड तादाद में अमेरिकियों के घर से करीब 50 मील दूर यात्रा करने की उम्मीद थी, जो पिछले साल की तुलना में करीब 2% की बढ़ोतरी है.  ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह खराब मौसम तब हो रहा है, जब ला नीना वापस आ रहा है, जो प्रशांत महासागर के पानी के ठंडा होने से जुड़ा एक क्लाइमेट पैटर्न है जो दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को बाधित कर सकता है और आपदाओं को ट्रिगर कर सकता है.

1 जनवरी से बड़े बदलाव लागू, जेब पर पड़ेगा असर: सैलरी हाइक से लेकर CNG-PNG की कीमतें घटेंगी

नई दिल्ली  कैलेंडर बदलने के साथ ही 1 जनवरी 2026 से आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम बदलने जा रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से लेकर रसोई गैस के दाम और सोशल मीडिया के इस्तेमाल तक, नए साल की सुबह कई बड़े बदलाव लेकर आएगी। अगर आपने समय रहते इन बदलावों की तैयारी नहीं की, तो आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। आइए जानते हैं 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले इन प्रमुख बदलावों के बारे में: 8वें वेतन आयोग का आगाज: सरकारी कर्मचारियों की मौज नए साल का सबसे बड़ा तोहफा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए हो सकता है। 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू होने की संभावना है। सैलरी में बढ़ोतरी: अनुमानों के मुताबिक, फिटमेंट फैक्टर में बदलाव के साथ कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में 20% से 35% तक का इजाफा हो सकता है। फिटमेंट फैक्टर: चर्चा है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर 2.4 से 3.0 के बीच रखा जा सकता है, जिससे न्यूनतम वेतन में बड़ी वृद्धि होगी। सस्ता होगा सफर और रसोई: CNG-PNG के दाम में राहत यूनिफाइड टैरिफ सिस्टम में बदलाव के कारण नए साल में गैस की कीमतें कम हो सकती हैं: CNG: प्रति किलो 1.25 से 2.50 रुपये तक की कटौती संभव है। PNG: पाइप वाली रसोई गैस के दामों में 0.90 से 1.80 रुपये (प्रति SCM) तक की राहत मिल सकती है। कम होगी लोन की EMI: रेपो रेट में कटौती का असर दिसंबर में आरबीआई (RBI) द्वारा रेपो रेट में 0.25% की कटौती किए जाने के बाद, 1 जनवरी से बैंक अपने लोन की ब्याज दरें घटा सकते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) कम होने की उम्मीद है। LPG सिलेंडर की नई कीमतें तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को रसोई गैस की कीमतों की समीक्षा करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर 1 जनवरी को घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम घट सकते हैं। बच्चों के लिए सुरक्षित होगा इंटरनेट: सोशल मीडिया पर सख्ती अगले साल से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सरकार नए नियमों के तहत बच्चों को आपत्तिजनक कंटेंट से बचाने के लिए 'एज वेरिफिकेशन' जैसे सख्त कदम उठाने जा रही है। नया इनकम टैक्स बिल 1 जनवरी से नया इनकम टैक्स बिल पूरी तरह प्रभावी हो सकता है। इसके तहत टैक्स स्लैब में बदलाव और जीएसटी (GST) में की गई कटौतियों का लाभ सीधे करदाताओं को मिलेगा, जिससे उनकी बचत बढ़ेगी। पैन-आधार लिंक और जुर्माना अगर आपने 31 दिसंबर 2025 तक अपने पैन कार्ड को आधार से लिंक नहीं किया, तो 1 जनवरी से आपका पैन कार्ड 'इनऑपरेटिव' (निष्क्रिय) हो सकता है। इसके बाद लिंक कराने पर आपको भारी जुर्माना देना पड़ सकता है और बैंकिंग ट्रांजेक्शन में दिक्कत आ सकती है। राशन कार्ड ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य राशन कार्ड धारकों के लिए 31 दिसंबर आखिरी मौका है। यदि आपने ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की है, तो 1 जनवरी से आपको मुफ्त या रियायती राशन मिलना बंद हो सकता है। इसे आप अपने मोबाइल या नजदीकी राशन दुकान के जरिए पूरा कर सकते हैं। 1 जनवरी 2026 से होने वाले ये बदलाव डिजिटल सुरक्षा से लेकर वित्तीय लाभ तक फैले हुए हैं। सुचारू लेनदेन और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 31 दिसंबर तक अपने पेंडिंग काम निपटाना ही समझदारी है।

न्यू ईयर ट्रैवल प्लान: माता वैष्णो देवी जाने वालों के लिए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान, कई स्टेशनों पर ठहराव

जम्मू जम्मू मंडल द्वारा यात्रियों के सुविधाजनक आवागमन हेतु समय-समय पर विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाता है। जिससे की रेलवे द्वारा यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के साथ, अतिरिक्त भीड प्रबंधन के दौरान यात्रियों की यात्रा को सुगम बनाया जा सके। इस दौरान भारी भीड़ और नए साल के उपलक्ष में रेलवे द्वारा नई दिल्ली – श्री माता वैष्णो देवी कटरा – नई दिल्ली तक दिनांक 27 दिसंबर 2025 से 01 जनवरी 2026 तक विशेष आरक्षित ट्रेन संख्या 04081/ 04082 चलाने का निर्णय लिया गया हैं। विशेष आरक्षित ट्रेनों का विवरण:-   विशेष आरक्षित ट्रेन संख्या 04081 नई दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा दिनांक 27.12.25 से 31.12.25 ( 05 ट्रिप )    यह विशेष आरक्षित ट्रेन अपने पहले दिन दिनांक 27 दिसंबर को नई दिल्ली से रात 11.45 बजे रवाना होकर अगले दिन दोपहर में 12 बजे श्री माता वैष्णो देवी कटरा पहुंचेगी। मार्ग में यह ट्रेन पानीपत, कुरूक्षेत्र, अम्बाला कैंट, लुधियाना, जालंधर कैंट, पठानकोट कैंट, जम्मू तथा शहीद कैप्टन तुषार महाजन ( उधमपुर ) रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी। विशेष आरक्षित ट्रेन संख्या 04082 श्री माता वैष्णो देवी कटरा से नई दिल्ली दिनांक 28.12.25 से 01.01.26 ( 05 ट्रिप )   यह विशेष आरक्षित ट्रेन अपने पहले दिन श्री माता वैष्णो देवी कटरा से दिनांक 28 दिसंबर को रात 09.20 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 10 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। मार्ग में यह ट्रेन शहीद कैप्टन तुषार महाजन ( उधमपुर) , जम्मू, पठानकोट कैंट, जालंधर कैंट, लुधियाना, अम्बाला कैंट, कुरूक्षेत्र तथा पानीपत  रेलवे स्टेशनों पर यथावत रूकेगी। कैसें करें टिकट बुकिंग             जम्मू मंडल में समय-समय पर चलने वाली विशेष ट्रेनों पर वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, श्री उचित सिंघल ने बताया कि इस आरक्षित विशेष ट्रेन का संचालन जम्मू कश्मीर में पर्यटकों की बढ़ती संख्या और स्थानीय लोगों की छुट्टियों के दौरान यात्रा की जरूरत को पूरा करने के लिए किया गया है, इससे उन्हें नए साल का जश्न मनाने के लिए अपने परिवारों और दोस्तों के साथ जुड़ने में आसानी होगी, तथा नए साल पर भीड़ से राहत मिलेगी। आरक्षित विशेष ट्रेन का संचालन 16 कोचों के साथ किया जाएगा। यात्री भारतीय रेल की आधिकारिक वेबसाइट/  एप या अधिकृत एजेंटों के माध्यम से टिकट बुक कर सकते हैं, तथा यात्रियों से अनुरोध किया जाता है, कि अपनी यात्रा प्रारंभ करने से पहले ट्रेन के समय की सटीक जानकारी अवश्य प्राप्त कर ले ‌।

बांग्लादेश में हिंदुओं के लिए कठिनाई, मोहम्मद यूनुस की एक गलती का पड़ा असर

ढाका  बांग्लादेश आज हिंसा और कट्टरपंथ की आग में झुलस रहा है. मुहम्मद यूनुस की एक गलती की सजा अब बांग्लादेश भुगत रहा है. चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, हर कोई हिंसा की आग में जल रहा है. आज बांग्लादेश की जो हालत है, उसकी जड़ें मुहम्मद यूनुस के एक फैसले से जुड़ी हैं. जी हां, जिस फैसले को यूनुस ने लोकतांत्रिक बताकर पेश किया था, आज वही फैसला बांग्लादेश के लिए अभिशाप बन गया है. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मु्हम्मद यूनुस के उस फैसले के कारण ही बांग्लादेश में हिंदू और मुसलमान के बीच खाई बढ़ गई है. अब नौबत यह है कि कभी हिंदू युवक दीपू दास और सम्राट की लिंचिंग हो जाती है तो कभी मुसलमान उस्मान हादी की हत्या. अब सवाल है कि आखिर यूनुस की वह गलती क्या है, जिसका अंजाम बांग्लादेश की आवाम भुगत रही है. कैसे वह एक फैसला हिंदुओं के लिए काल बन चुका है. दरअसल, शेख हसीना के पद छोड़ते ही मुहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश में एक ऐसा फैसला लिया, जिसने पूरे देश को अस्थिरता और कट्टरपंथ की आग में झोंक दिया. वह फैसला था जमात-ए-इस्लामी से बैन हटाना. जी हां, नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने शेख हसीना के देश छोड़ते ही जमात-ए-इस्लामी पर लगा प्रतिबंध हटा लिया था. इसे ही अब बांग्लादेश की मौजूदा दुर्दशा और हिंदू समुदाय पर बढ़ते अत्याचारों का मुख्य कारण माना जा रहा है. जमात-ए-इस्लामी एक कट्टरपंथी संगठन है. यह खिलाफत राष्ट्र की वकालत करता है. इसका पाकिस्तान प्रेम समय-समय पर झलका है. यूनुस के इसी फैसले ने एक कट्टरपंथी संगठन को खुली छूट दे दी, जिसका नतीजा आज बांग्लादेश में फैलते अतिवादऔर अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों के रूप में दिखाई दे रहा है. यूनुस की वो साजिशन गलती क्या 8 अगस्त ही वह तारीख थी, जब बांग्लादेश के बुरे दिन शुरू हो गए थे. पिछले साल 8 अगस्त को ही एक बड़ा फैसला हुआ था. वही फैसला अब पूरे बांग्लादेश को परेशान कर रहा है. उसके चलते ही बांग्लादेश की शांति खत्म हो गई है. जगह-जगह हिंसा हो रही है. बांग्लादेश का लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ चुका है. उसके आगे अब यूनुस की भी नहीं चल रही है. जी हां, 8 अगस्त को ही मोहम्मद यूनुस ने जमात-ए-इस्लामी नाम के संगठन पर लगा बैन हटा दिया था. यह संगठन कट्टरपंथी है और हिंदुओं से नफरत करता है. इस फैसले से बांग्लादेश में कट्टरवाद बढ़ गया और हिंदुओं पर हमले ज्यादा हो गए. क्यों शेख हसीना ने लगाया था बैन पहले शेख हसीना की सरकार ने 1 अगस्त 2024 को जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र ग्रुप इस्लामी छत्र शिबिर पर रोक लगाई थी. वजह थी छात्र कोटा के खिलाफ प्रदर्शनों में हुई हिंसा, जहां 150 से ज्यादा लोग मारे गए. शेख हसीना ने इसे आतंकवाद रोकने वाले कानून के तहत बैन किया, क्योंकि यह संगठन हिंसा फैलाने में डायरेक्ट शामिल था. जमात-ए-इस्लामी की शुरुआत 1941 में हुई थी. यह संगठन पूरी तरह से पाकिस्तान परस्त है. वह आईएसआई के इशारों पर काम करता है. इसकी झलक पूरी दुनिया 1971 के जंग में देख चुकी है. जी हां, 1971 के बांग्लादेश आजादी के युद्ध में जमात-ए-इस्लीमी ने पाकिस्तान की सेना का साथ दिया था और लाखों लोगों की हत्या में उसकाा हाथ था. साल 2013 में बांग्लादेश की कोर्ट ने इसे चुनाव लड़ने से रोक दिया था, क्योंकि इसका नियम संविधान के खिलाफ था. जमात-ए-इस्लामी क्या चाहता है? लेकिन 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना ने इस्तीफा दिया और भारत चली आईं. इसके बाद इस कट्टरपंथी संगठन के अच्छे दिन शुरू हो गए. 8 अगस्त को यूनुस की सरकार ने बैन हटा लिया. यूनुस सरकार ने कहा कि जमात की कोई आतंकी गतिविधि नहीं है और शेख हसीना सरकार का आरोप गलत था. पर सच तो यह है कि जमात कट्टर इस्लामी संगठन है, जो बांग्लादेश को शरिया कानून वाला देश बनाना चाहता है. इसका छात्र ग्रुप शिबिर बहुत हिंसक है, जो दुश्मनों की हत्या करता है, धार्मिक झगड़े भड़काता है और झूठी खबरें फैलाता है. यह संगठन हिंदुओं से नफरत करता है और दूसरे कट्टर ग्रुपों से जुड़ा है. साल 2013 में युद्ध अपराध के फैसले के बाद इसके लोगों ने 50 से ज्यादा हिंदू मंदिर तोड़े और 1,500 से ज्यादा हिंदू घरों-दुकानों को आग लगाई. बांग्लादेश में हिंदुओं के प्रति नफरत बढ़ गया है. जमात अब दे रहा हिंदुओं को जख्म मोहम्मद यूनुस के इसी फैसले से जमात को फिर से ताकत मिली. बैन हटने के बाद उन्होंने ढाका में बड़ी-बड़ी रैलियां कीं और कट्टरवाद फैलाया. यूनुस की सरकार आने के बाद देश में कट्टर ग्रुप मजबूत हुए, जिससे अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और लोगों के बीच एकता खराब हुई. सबसे ज्यादा नुकसान हिंदुओं को हुआ. 2024 की हिंसा में 4 से 20 अगस्त तक 2,010 हमले हुए, 1,705 परिवार प्रभावित हुए, 157 घर-दुकानें लूटी या जलाई गईं, और 152 मंदिरों को नुकसान पहुंचा. हिंदुओं की हत्याओं में जमात का कट्टरवाद साफ दिखता है, जहां राजनीति के नाम पर सांप्रदायिक हमले होते हैं. इस जमात के कारण ही बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार बढ़े. अभी बीते कुछ समय से जो हालात बने हुए हैं, उसके पीछे भी जमात है. दीपू दास की हत्या भी जमात की भीड़ ने की. शेख हसीना ने क्यों लगाया था जमात-ए-इस्लामी पर बैन?     शेख हसीना सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर इसलिए प्रतिबंध लगाया था क्योंकि यह संगठन खुले तौर पर कट्टर इस्लामी विचारधारा को बढ़ावा देता रहा है.     जमात पर 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान युद्ध अपराधों, नरसंहार और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के गंभीर आरोप रहे हैं.     शेख हसीना सरकार का मानना था कि यह संगठन लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए खतरा है.     इसी वजह से जमात-ए-इस्लामी को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखा गया था. मुहम्मद यूनुस ने बैन हटाकर दी खुली छूट     शेख हसीना के सत्ता से हटते ही अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने जमात-ए-इस्लामी से प्रतिबंध हटा दिया.     यूनुस सरकार की तरफ से तर्क दिया गया कि जमात-ए-इस्लामी आतंकी गतिविधियों में शामिल नहीं है और उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने का अधिकार … Read more