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ईडी की बड़ी कार्रवाई: 169.47 करोड़ की जब्त संपत्ति वापस मिली, सेंट्रल बैंक को राहत

कोलकाता प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मेसर्स प्रकाश वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। ईडी ने इस घोटाले में कुर्क की गई 169.47 करोड़ रुपए की संपत्तियों को वापस सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को दिला दिया। यह फैसला कोलकाता की सिटी सेशन कोर्ट ने सुनाया है। यह मामला मेसर्स प्रकाश वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर मनोज कुमार जैन से जुड़ा है। जांच में पता चला कि कंपनी ने फर्जी वित्तीय दस्तावेज और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए अकाउंट स्टेटमेंट के आधार पर बैंक से बड़ी क्रेडिट सुविधाएं लीं। इसके बाद इन फंड्स को नियमों के खिलाफ दूसरी जगह भेज दिया गया। इस धोखाधड़ी से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 234.57 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ईडी ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू की और पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ में फैली कई संपत्तियों को कुर्क किया। इनमें से 199.67 करोड़ रुपए की संपत्तियां चार अलग-अलग प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के जरिए जब्त की गई थीं, जिन्हें बाद में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी (न्यायनिर्णयन प्राधिकारी) की मंजूरी भी मिल गई। बैंक के पैसे की तुरंत रिकवरी के महत्व को देखते हुए ईडी ने सेंट्रल बैंक के अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इसके बाद बैंक ने अदालत में अटैच संपत्तियों को पाने के लिए आवेदन दिया, जिसे ईडी ने भी कंसेंट पिटीशन के माध्यम से समर्थन किया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया इन संपत्तियों का सही हकदार है, क्योंकि ये धोखाधड़ी से खोए हुए फंड की भरपाई कर सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ईडी को इस प्रक्रिया पर कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते कि बैंक बकाया रकम पूरी तरह रिकवर कर ले और अतिरिक्त राशि होने पर उसे पीएमएलए के तहत सक्षम प्राधिकरण को जमा कराए। सेंट्रल बैंक की नई वैल्यूएशन रिपोर्ट के अनुसार, अटैच संपत्तियों की कुल कीमत 169.47 करोड़ रुपए आंकी गई है।

संविधान सदन में आज ‘वंदे मातरम’ पर मंथन—10 घंटे की चर्चा में पीएम मोदी की मौजूदगी

नई दिल्ली  भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद के शीतकालीन सत्र में इस ऐतिहासिक गीत पर विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। लोकसभा में यह चर्चा सोमवार को होगी, जिसके लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस विशेष बहस में हिस्सा लेंगे। चर्चा का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के इस प्रेरक गीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करना है। इस निर्णय पर सहमति 30 नवंबर को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई ऑल-पार्टी मीटिंग और लोकसभा व राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठकों में बनी। राज्यसभा में भी एनडीए सदस्यों ने वंदे मातरम पर विशेष चर्चा की जोरदार वकालत की। सरकार ने इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए सभी राजनीतिक दलों को इसमें सहभागी बनने का आग्रह किया है। ‘वंदे मातरम’ का इतिहास भारत ने 1950 में ‘वंदे मातरम’ को अपने राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया था। इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में संस्कृतनिष्ठ बंगाली में लिखा था। यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है, जिसका प्रकाशन 1882 में किया गया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ जनमानस में जोश भरने वाला प्रमुख गीत बना। इसके 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने पिछले दिनों स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे स्वतंत्रता संग्राम की अमर धरोहर बताते हुए युवाओं से इसका अधिकाधिक गान करने की अपील की थी। संसद में सत्र की तैयारी और राजनीतिक हलचल लोकसभा BAC की बैठक में कांग्रेस ने विशेष गहन संशोधन (SIR) और चुनावी सुधारों पर बहस की मांग की, पर सरकार ने ‘वंदे मातरम’ की चर्चा को प्राथमिकता दी। तृणमूल कांग्रेस ने भी लोकसभा में इस विशेष चर्चा का समर्थन किया। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक सोमवार सुबह मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में अपनी रणनीति तय करेगा।   शीतकालीन सत्र का एजेंडा शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें 15 बैठकें होंगी। इस सत्र में 10 नए विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें परमाणु ऊर्जा, उच्च शिक्षा, राष्ट्रीय राजमार्ग और बीमा क्षेत्र सुधार से जुड़े बिल शामिल हैं। इसके अलावा, 2025–26 के प्रथम अनुपूरक अनुदान मांगों पर भी विस्तृत चर्चा होगी।  

सरकार का सख्त रुख: 8वें वेतन आयोग की इस मांग पर नहीं मिली मंजूरी

नई दिल्ली  8वें सेंट्रल पे कमीशन को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों को अंतरिम राहत (Interim Relief) देने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। साथ ही, महंगाई भत्ता (DA) को बेसिक सैलरी में जोड़ने की मांग को भी सरकार ने खारिज कर दिया। कर्मचारी क्या मांग रहे हैं? केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि तीन दशकों में महंगाई अपने सबसे अधिक स्तर पर है। उनका तर्क है कि मौजूदा DA और DR (पेंशनर्स का भत्ता) रिटेल महंगाई के मुकाबले पर्याप्त नहीं हैं। इसीलिए यूनियनों की मांग है कि DA 50% होने पर इसे बेसिक सैलरी में मिला दिया जाए। यह मांग तब और मजबूत हो गई जब सरकार ने नवंबर में 8th CPC के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस जारी किए थे। सरकार ने वायरल मैसेज को बताया फर्जी सोशल मीडिया पर हाल ही में एक संदेश वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया था कि फाइनेंस एक्ट 2025 के बाद DA बढ़ोतरी और पे कमीशन के फायदे बंद कर दिए जाएंगे, खासकर रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए।   किन कर्मचारियों पर हुआ नियम में बदलाव? सरकार ने स्पष्ट किया कि हाल में CCS (पेंशन) रूल्स, 2021 के रूल 37 में किया गया बदलाव सिर्फ एक छोटे समूह से जुड़ा है। यह बदलाव उन PSU कर्मचारियों पर लागू है जिन्हें किसी गंभीर गलती या गलत काम के कारण नौकरी से निकाला जाता है।    ऐसे मामलों में उनके रिटायरमेंट लाभ जैसे पेंशन आदि जब्त किए जा सकते हैं। सरकार ने कहा कि यह संशोधन डिपार्टमेंट ऑफ पेंशन एंड पेंशनर्स वेलफेयर और वित्त मंत्रालय की सलाह के बाद किया गया है, और इसका आम कर्मचारियों या रिटायर्ड पेंशनरों के DA/DR पर कोई असर नहीं पड़ेगा।  

लोकसभा स्पीकर ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, महत्वपूर्ण दो बिंदुओं पर नेताओं ने मिलकर बनाया रोडमैप

नई दिल्ली संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा की विपक्ष की मांग को लेकर संसद में चल रही गतिरोध को दूर करने के लिए सर्वदलीय बैठक हुई, जिसमें कई अहम फैसले लिए गए। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें सभी दलों के नेता शामिल हुए। इस मीटिंग में यह सहमति बनी है कि लोकसभा में 8 दिसंबर, यानी सोमवार, को ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्ष की सालगिरह पर एक विशेष चर्चा होगी। इसके अगले दिन लोकसभा में 9 दिसंबर, यानी मंगलवार, को चुनाव सुधारों पर पूरे दिन चर्चा होगी। इस विषय पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, और आवश्यकता पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जाएगा। इस पर सभी दलों में सहमति बन गई।  सर्वदलीय बैठक में लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि मैं सभी पार्टी नेताओं से एक बार फिर अपील करना चाहता हूं कि हम सब चाहते हैं कि संसद सुचारू रूप से चले। हर मुद्दे पर हर वह सदस्य जो बोलना चाहता है, उसे अवसर मिलना चाहिए। अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आने वाले सांसदों के अपने-अपने मुद्दे होते हैं, उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी अच्छी और विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, और फिर वे पारित होकर देश के विकास में योगदान दें, यह हम सभी की जिम्मेदारी है। बेवजह का गतिरोध नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने पहले दिन से ही कहा कि सरकार किसी भी विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन पिछले दो दिनों का जो नुकसान हुआ, उसका प्रमुख कारण यह था कि विपक्ष ने प्रश्नकाल के समय को लेकर दबाव बनाया था। मैंने आज भी स्पष्ट किया है कि जब हम चर्चा के लिए तैयार हो जाते हैं, तब एक-दो दिन का समय का निर्धारण संसद के व्यवसाय और प्रक्रिया को ध्यान में रखकर करना पड़ता है।

चार साल बिताए थे इसी घर में… अब ट्रंप का पुराना आशियाना बिकने को तैयार, दाम बना चर्चा का विषय

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बचपन वाला घर एक बार फिर सुर्खियों में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ऐतिहासिक घर जल्द ही 23 लाख डॉलर (लगभग 19 करोड़ रुपये) में बिकने वाला है। दिलचस्प बात यह है कि यह वही घर है, जहां ट्रंप 4 साल की उम्र तक यहीं रहे थे और लोग इसे भावनात्मक महत्व से जोड़कर देखते हैं। 1940 में ट्रंप के पिता ने बनवाया था यह घर यह घर कोई साधारण मकान नहीं है। इसे 1940 में ट्रंप के पिता फ्रेड ट्रंप ने बनवाया था, जो उस समय के जाने-माने रियल एस्टेट डेवलपर थे। घर ट्यूडर आर्किटेक्चर पर आधारित है और न्यूयॉर्क के जमैका एस्टेट्स जैसे हाई-प्रोफाइल इलाके में स्थित है। ट्रंप का बचपन यहीं बीता, इसलिए यह जगह उनकी निजी यादों से भी जुड़ी है। कभी जर्जर हालत में पहुंच गया था यह भवन हाल के वर्षों में इस घर की हालत काफी बिगड़ गई थी। एक समय ऐसा भी आया जब यह घर पूरी तरह बदहाली में बदल चुका था-दीवारें टूट रही थीं, और यहां तक कि जंगली बिल्लियों ने यहां डेरा बना लिया था। इसे एयरबीएनबी पर किराए पर देने का प्रयास भी किया गया, लेकिन वह भी ज्यादा सफल नहीं हुआ। ट्रंप ने 2016 में एक साक्षात्कार में इस घर की खराब हालत पर दुख जताया था, लेकिन साथ ही बताया था कि उनका बचपन यहां बेहद खुशहाल था। क्यों बदला अचानक इस घर का भविष्य? मामले में बड़ा बदलाव तब आया, जब मार्च 2024 में रियल एस्टेट डेवलपर टॉमी लिन ने यह घर मात्र 8.35 लाख डॉलर में खरीद लिया। खरीद के बाद उन्होंने करीब 5 लाख डॉलर खर्च करके इसके बड़े स्तर पर नवीनीकरण कराया। हालांकि इससे पहले भी मालिक माइकल डेविस ने इसमें मरम्मत करवाई थी, लेकिन टॉमी लिन ने इसे लगभग पूरी तरह रीबिल्ट जैसा बना दिया।    नवीनीकरण के बाद इस घर में कई आधुनिक सुविधाएं जोड़ दी गई हैं:     5 विस्तृत बेडरूम     3 फुल बाथरूम और 2 हाफ बाथरूम     पूरी तरह तैयार Basement     दो कारों के लिए गैरेज     अंदर हेरिंगबोन डिज़ाइन वाला लकड़ी का शानदार फर्श     मॉडर्न और हाई-एंड किचन घर को आधुनिक डिज़ाइन, नई तकनीक और बेहतर फिनिशिंग के साथ पूरी तरह नई पहचान दी गई है। कीमत इतनी तेजी से क्यों बढ़ी? इस घर की कीमत बढ़ने के प्रमुख कारण हैं:     इलाके की प्रीमियम लोकेशन     ट्रंप का बाल्यकाल यहां बीता, जिससे इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक कीमत बढ़ जाती है।     ट्रंप के समर्थक और विरोधी दोनों ही इस घर को एक प्रतीक के रूप में देखते हैं।     आधुनिक नवीनीकरण के बाद घर का बाजार मूल्य और बढ़ गया है। इन सभी कारणों से घर की कीमत बढ़कर अब 23 लाख डॉलर पर पहुंच चुकी है।  

न्यूक्लियर वॉर आने वाला है — मस्क की चेतावनी से दुनिया में बढ़ी बेचैनी

वाशिंगटन  टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने फिर एक बार अपने विवादित बयान से दुनिया का ध्यान खींच लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर मस्क ने खुलकर दावा किया कि दुनिया जल्द ही एक बड़े वैश्विक युद्ध की ओर बढ़ रही है। दरअसल, एक X यूजर ने लिखा कि न्यूक्लियर हथियारों के कारण बड़ी शक्तियों के बीच युद्ध नहीं हो रहे, जिससे सरकारों का ध्यान शासन से हट गया है। इस पर मस्क ने बेहद संक्षिप्त लेकिन चौंकाने वाला जवाब दिया “War is inevitable. 5 years, 10 at most.” यानि (युद्ध अवश्यंभावी है। 5 साल में,  2030 तक या अधिकतम 10 साल 2040 में।)  मस्क के इस बयान ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। उन्होंने यह नहीं बताया कि कौन-सा युद्ध, किन देशों के बीच या किस वजह से होगा। लेकिन मस्क का इशारा इस बात की ओर था कि दुनिया धीरे-धीरे बड़े टकराव की ओर बढ़ रही है। Grok AI ने समझाया-किस तरह का युद्ध? कुछ यूजर्स ने इस बयान की व्याख्या जानने के लिए मस्क की AI-Grok से सवाल पूछे।  Grok ने मस्क के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि मस्क कई संभावित खतरों की चेतावनी पहले भी दे चुके हैं:     यूरोप और ब्रिटेन में संभावित गृहयुद्ध, बढ़ते प्रवास और पहचान राजनीति के कारण     अमेरिका-चीन के बीच ताइवान को लेकर युद्ध     यूक्रेन-रूस संघर्ष के WW3 में बदलने का खतरा     न्यूक्लियर डिटरेंस कमजोर पड़ने की आशंका     यानी, मस्क के अनुमान के अनुसार आने वाले वर्षों में दुनिया के कई हॉटस्पॉट तनाव को युद्ध में बदल सकते हैं। क्यों मस्क का बयान गंभीर? डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल के दौरान एलन मस्क अमेरिकी प्रशासन के एक विशेष प्रोजेक्ट Department of Government Efficiency (DOGE) से भी जुड़े थे। इस कारण उनका बयान न सिर्फ सोशल मीडिया टिप्पणी माना जा रहा है, बल्कि कुछ विश्लेषक इसे जियोपॉलिटिकल संकेत भी कह रहे हैं।  हालांकि मस्क ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका दावा वैश्विक चेतावनी है या सिर्फ एक राजनीतिक संकेत।   

कोई बड़ी घुसपैठ नहीं—त्रिपुरा से बाहर जाने लगे अवैध प्रवासी: मुख्यमंत्री का बड़ा बयान

अगरतला त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा है कि वर्तमान समय में बांग्लादेश की ओर से राज्य में बड़ी घुसपैठ नहीं हो रही है, बल्कि अब त्रिपुरा से लोगों के बाहर जाने (एक्सफिल्ट्रेशन) की घटनाएं सामने आ रही हैं। त्रिपुरा की 856 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगती है और राज्य तीन ओर से पड़ोसी देश से घिरा हुआ है, जिसके कारण तस्करी और अन्य सीमा-पार अपराधों की आशंका लगातार बनी रहती है। मुख्यमंत्री साहा के अनुसार, पहले घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। मुख्यमंत्री ने सोमवार रात बीएसएफ के डायमंड जुबिली रेजिंग डे कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मीडिया से कहा, “सीमा पार से अब घुसपैठ नहीं हो रही है। त्रिपुरा में अब एक्सफिल्ट्रेशन की घटनाएं हो रही हैं। बीएसएफ कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (बीजीबी) और संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर पकड़े गए लोगों को उनके देश वापस भेज रही है।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। त्रिपुरा की भौगोलिक स्थिति और कठिन भू-भाग के कारण सीमा की सुरक्षा हमेशा चुनौतीपूर्ण बनी रहती है। मुख्यमंत्री साहा ने कहा, “सीमा के कुछ हिस्सों में अब भी फेंसिंग नहीं है, ऐसे क्षेत्रों में बीएसएफ अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। बीएसएफ अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा में सराहनीय काम कर रही है।” उन्होंने बताया कि बीएसएफ राज्य पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर समय-समय पर सभी आवश्यक कदम उठा रही है ताकि सीमा सुरक्षा मजबूत रहे। बीएसएफ के एक अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक 57 रोहिंग्या अवैध प्रवासियों, 628 बांग्लादेशी नागरिकों और 280 भारतीय नागरिकों को पकड़ा गया है। इसके साथ ही ड्रग्स और अन्य अवैध सामान की कुल 51.65 करोड़ रुपये की बरामदगी भी की गई है। अधिकारी ने बताया कि विभिन्न संयुक्त अभियानों के दौरान सीमा-पार अपराधों में भारी कमी दर्ज हुई है और 452.47 एकड़ में गांजे की खेती को नष्ट किया गया। उन्होंने कहा कि बीएसएफ और बीजीबी के बीच सेक्टर कमांडर स्तर से लेकर बॉर्डर आउटपोस्ट स्तर तक नियमित बैठकें हो रही हैं, जिससे समन्वय मजबूत हुआ है और कई मुद्दों का समाधान तेजी से हो पा रहा है। बीएसएफ त्रिपुरा फ्रंटियर ने आश्वस्त किया है कि वह राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य जारी रखेगी और सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखेगी।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल: बांग्ला बोलने वाले युवकों को रोहिंग्या बताकर 72 घंटे का नोटिस

भुवनेश्वर पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद के कई मुस्लिम युवक सालों से ओडिशा के नयागढ़ और आसपास के जिलों में कारोबार करते हैं। ये लोग वहां अपने दोपहिया वाहनों पर गांव-गांव और शहर-शहर जाकर कंबल, मच्छड़दानी और ऊनी कपड़े बेचते हैं। आपस में ये लोग बांग्ला में बात किया करते थे, यही बात वहां की पुलिस को नागवार लग गई। पुलिस ने उन्हें रोहिंग्या और बांग्लादेशी बताकर 72 घंटे के अंदर ओडिशा छोड़ने का फरमान थमाया है। ओडागांव पुलिस ने पिछले हफ्ते इसी तरह कारोबार कर रहे चार मुस्लिम युवकों को ओडिशा छोड़ने का आदेश दिया था लेकिन वह समय सीमा सोमवार को खत्म हो गई। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि गुरुवार को ओडागांव पुलिस स्टेशन में उन मुस्लिम युवकों ने अपने आधार और वोटर कार्ड दिखाए। बावजूद इसके पुलिस अधिकारियों ने उन्हें तीन दिनों के अंदर शहर छोड़ने का अल्टीमेटम थमा दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि थाने में ही वर्दी पहने पुलिस अफसर ने कई बार उन्हें कथित तौर पर बंगाली में बात करने पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी कहा। जिन चारों युवकों को ओडिशा छोड़ने का आदेश दिया गया है वे सभी मुर्शिदाबाद के डोमकल सबडिवीजन के जलंगी ब्लॉक में सागरपारा ग्राम पंचायत के रहने वाले हैं। उधेड़बुन में मुस्लिम कारोबारी ये चारों सैकड़ों लोगों के समूह का हिस्सा हैं, जो बंगाल से आकर ओडिशा में कई सालों से कारोबार कर रहे हैं। पुलिस का आदेश मिलने के बाद ये लोग सोमवार शाम ही बस से 100 KM से ज़्यादा दूर भुवनेश्वर के लिए निकलने वाले थे, जहां से वो फिर हावड़ा के लिए ट्रेन पकड़ते लेकिन सोमवार देर रात तक, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि घर का जो ज़रूरी सामान वे जल्दी में छोड़ आए और जो सामान अब तक नहीं बिक सका है, उसका क्या करें। सबसे बड़ी प्रॉब्लम हमारा स्टॉक उन युवकों में से 32 साल के साहेब सेख ने द टेलीग्राफ को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, “हमारे पास कन्फर्म ट्रेन टिकट नहीं हैं। सबसे बड़ी प्रॉब्लम हमारा स्टॉक है। हमारे मकान मालिक को हमें नोटिस देना पड़ा है। हमने स्टॉक रखने के लिए लगभग 30KM दूर दूसरी जगह ढूंढ ली थी। हमारे पास 2 लाख रुपये से ज़्यादा का स्टॉक है। अब उसका क्या करें?” उसने बताया कि हम कोई खरीदार ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, कम से कम कोई ऐसा जो इसे सस्ते रेट पर ही सही, कुछ खरीद ले। जैसे ही हम इसे कुछ बेच पाएंगे, हम घर लौट जाएंगे। बांग्लादेशी और रोहिंग्या होने के आरोप बता दें कि इस साल ओडिशा में बंगाल से आए मुस्लिम व्यापारियों और प्रवासी मज़दूरों को कई बार पुलिस हिरासत और भीड़ के हमलों का सामना करना पड़ा है। पिछले महीने 24 नवंबर को भी मुर्शिदाबाद के 24 साल के राहुल इस्लाम को ओडिशा के गंजम जिले में भीड़ ने कथित तौर पर बांग्लादेशी कहकर पीटा था, क्योंकि उसने “जय श्री राम” का नारा लगाने से मना कर दिया था। यह जगह साहेब के ग्रुप के घर से करीब 30KM दूर है। राहुल इस्लाम भी ऊनी के कपड़े बेचता था। ओडिशा में राहुल और साहेब के जैसी और भी कहानियां हैं, जिन पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या होने के आरोप लगाए जा रहे हैं और उन्हें भगाया जा रहा है।

हाईकोर्ट आदेश के बावजूद जेलर का विरोध, शहबाज सरकार झुकी—इमरान से मिलने जाएंगी बहन

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान कहां गए? वो सही सलामत हैं भी या नहीं. 4 नवंबर के बाद से परिवार के किसी सदस्य ने या फिर उनके किसी वकील ने उनसे अदियाला जेल में मुलाकात नहीं की है. इस वजह से ही आज मंगलवार को पाकिस्तान में इस्लामाबाद हाईकोर्ट और रावलपिंडी में अदियाला जेल के बाहर इमरान खान की बहनों और समथर्कों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया. स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शनों के बाद इमरान की एक बहन को मुलाकात करने की अनुमति मिल गई है. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि शायद अब इमरान खान की सेहत को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो जाएगा. दरअसल, इस्लामाबाद हाईकोर्ट के बाहर पाकिस्तानी तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के कार्यकर्ताओं, सांसदों और नेताओं की भारी भीड़ जुटी और सरकार के खिलाफ नारे लगाए. एक PTI प्रदर्शनकारी ने कहा, “यह सरकार अब सो नहीं पा रही. हम इमरान खान को रिहा कराएंगे. जब तक इमरान खान की बहनों को मुलाकात की इजाजत नहीं मिलेगी, हम यहीं बैठे रहेंगे.” अदियाला जेल के बाहर भी भारी प्रदर्शन कोर्ट के आदेश के बावजूद इमरान खान से उनकी बहनों और वकीलों को मिलने नहीं दिया जा रहा है. वहीं अदियाला जेल के बाहर भी इमरान समर्थकों ने पूर्व पीएम को रिहा करने की मांग को लेकर जबरदस्त प्ररदर्शन किया. इमरान खान की तीनों बहनों- अलीमा खान, नूरीन खान और आजमी खान का शक अब उनकी हालत को लेकर बढ़ रहा है. उनकी तीनों बहनें अदियाला जेल के बाहर चल रहे प्रदर्शन में भी शामिल हुईं. इससे पहले इमरान खान के बेटे ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि उनके पिता के साथ शायद कुछ ऐसा हुआ है, जिसे बदला नहीं जा सकता है. इस वजह से ही हुकूमत उनसे किसी को मिलने नहीं दे रही है. खैबर पख्तूनख्वा में इमरान की पार्टी की सरकार होगी बर्खास्त? बता दें कि बीते कई दिनों से न तो इमरान खान की कोई तस्वीर सामने आई है, ना ही उनसे मुलाकात के बाद किसी ने उनके सही-सलामत होने का भरोसा दिया है. पूर्व प्रधानमंत्री को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच ये खबर भी जोर पकड़ रही है कि खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी की सरकार को बर्खास्त कर राज्यपाल शासन लागू किया जा सकता है. दरअसल, खैबर पख्तूनख्वा के सीएम सोहेल अफरीदी इमरान को रिहा करने के प्रदर्शन में जोर-शोर से अपनी आवाज उठा रहे हैं. जल्‍लाद से कम नहीं ये जेलर! हाईकोर्ट के आदेश को रद्दी की टोकरी में फेंका, मिलने गए सीएम को 8 बार लौटाया पाकिस्तान की राजनीति में कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता. यहां प्रधानमंत्री जेल जाते हैं और जेलर ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ जाते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही जेलर की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसका रसूख शायद इस वक्‍त पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से कम नहीं है. एक ऐसा सरकारी मुलाज‍िम, जो वर्दी तो जेल पुलिस की पहनता है, लेकिन उसके तेवर किसी तानाशाह से कम नहीं हैं. हम बात कर रहे हैं रावलपिंडी की मशहूर अडियाला जेल के सुपरिंटेंडेंट (जेलर) अब्दुल गफूर अंजुम की. वही जेल, जहां पाकिस्तान की सियासत का सबसे बड़ा चेहरा, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, ‘कैदी नंबर 804’ बनकर बंद हैं. इस जेलर की कहानी पढ़कर आपको लगेगा कि क्या वाकई पाकिस्तान में कोई कानून-कायदा बचा है या फिर वहां ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ वाली कहावत ही संविधान बन चुकी है. अब्दुल गफूर अंजुम कोई आम जेलर नहीं हैं. वे पंजाब प्रेसिडेंट सर्विस के अफसर हैं और इन दिनों उनकी हनक ऐसी है कि वे हाईकोर्ट के जजों के आदेशों को भी सिगरेट के धुएं की तरह हवा में उड़ा देते हैं. हाईकोर्ट का आदेश? वो क्या होता है भाई जरा सोचिए, देश का एक पूर्व प्रधानमंत्री जेल में है. उसका परिवार अदालतों के चक्कर काट रहा है, सिर्फ इसलिए कि उन्हें अपने घर के मुखिया से मिलने दिया जाए. इस्लामाबाद हाईकोर्ट, जो देश की प्रतिष्ठित अदालतों में से एक है, साफ-साफ आदेश जारी करती है. आदेश में कहा जाता है कि इमरान खान के परिवार को उनसे हफ्ते में कम से कम दो बार मिलने की इजाजत दी जाए. यह बुनियादी मानवाधिकार है. किसी भी कैदी को उसके परिवार और वकीलों से मिलने का हक होता है. लेकिन, जब यह आदेश लेकर इमरान का परिवार और वकील अडियाला जेल के दरवाजे पर पहुंचते हैं, तो वहां उनकी मुलाकात होती है जेलर अब्दुल गफूर अंजुम के फरमान से. अंजुम साहब साफ कह देते हैं कि यह आदेश पूरा नहीं किया जा सकता. आप अंदाजा लगाइए, एक जेल सुपरिंटेंडेंट हाईकोर्ट के लिखित आदेश को मानने से इनकार कर रहा है. यह सिर्फ आदेश की अवहेलना नहीं है, यह न्यायपालिका के मुंह पर करारा तमाचा है. मानो जेलर साहब कह रहे हों कि जेल के अंदर मेरी अदालत चलती है, बाहर वालों की नहीं. सीएम को एक नहीं, आठ बार बेइज्‍जत कर लौटाया अगर आपको लगता है कि यह सिर्फ इमरान खान के परिवार तक सीमित है, तो आप गलत हैं. इस जेलर का खौफ और रसूख इतना है कि वह एक चुने हुए मुख्यमंत्री को भी कुछ नहीं समझता. खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मुख्यमंत्री सुहेल आफरीदी, जी हां, एक सिटिंग सीएम अपने नेता इमरान खान से मिलने अडियाला जेल पहुंचे. एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि पूरे आठ बार. और आठों बार जेलर अब्दुल गफूर अंजुम ने उन्हें जेल के दरवाजे से ही वापस लौटा दिया. प्रोटोकॉल के हिसाब से एक मुख्यमंत्री का दर्जा बहुत बड़ा होता है. लेकिन अंजुम के सामने प्रोटोकॉल की कोई अहमियत नहीं है. सोचिए, जिस देश में एक जेलर एक मुख्यमंत्री को आठ बार मिलने से मना कर दे, वहां लोकतंत्र की क्या हालत होगी? यह घटना बताती है कि पाकिस्तान में असली ताकत चुनी हुई सरकारों के पास नहीं, बल्कि कहीं और है. 4 नवंबर से ‘कालकोठरी’ में तब्दील इमरान की सेल जेलर अंजुम की मनमानी का सिलसिला यहीं नहीं रुकता. 4 नवंबर के बाद से तो उन्होंने अडियाला जेल में इमरान खान की सेल को एक तरह से ‘ब्लैक होल’ बना दिया है. तब से लेकर अब तक, इमरान खान को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है. … Read more

स्वीट जन्नत विवादों में घिरीं, सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित वीडियो से मचा बवाल

 मेघालय  मेघालय की फेमस इन्फ्लुएंसर स्वीट जन्नत इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। दरअसल, बीते दिनों Viral MMS विवाद को लेकर वह सुर्खियों में है, जिसको लेकर उनको तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। MMS वाली लड़की समझकर उनके पोस्ट पर कमेंट्स किए जा रहे हैं। वायरल कपल की नहीं हुई पहचान दरअसल, हाल ही में एक कपल का 19 मिनट 34 सेकेंड का निजी वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ, जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया। 19 मिनट 34 सेकंड वाले वीडियो में एक कपल काफी वल्गर बातें कर रहे हैं। अब तक वीडियो में दिख रहे कपल की भी पहचान नहीं हुई है। ना यह पता चल पाया यह वीडियो कैसे वायरल हुआ। लेकिन MMS वाली लड़की समझकर मेघालय की फेमस इन्फ्लुएंसर स्वीट जन्नत की पोस्ट पर कमेंट्स किए जा रहे हैं। कई यूजर्स ने अंदाजा लगाकर दावा किया कि वीडियो में दिख रही लड़की स्वीट जन्नत हैं। वीडियो वायरल होने के बाद स्वीट जन्नत ने खुद स्पष्ट किया कि यह वीडियो AI Deepfake है। स्वीट जन्नत ने अफवाहों पर लगाया विराम अफवाहों पर विराम लगाते हुए स्वीट जन्नत ने कहा, पहले मेरी शक्ल देखो, फिर वीडियो वाली को देखो कोई मैच नहीं। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली लड़की अंग्रेजी में बात कर रही है। दावा किया जा रहा है कि 19-मिनट MMS वाली लड़की ने शर्मिंदगी से सुसाइड कर लिया है। हालांकि सच्चाई क्या है, यह अब तक सामने नहीं आई है। बता दें कि मेघालय के महेंद्रगंज की रहने वाली स्वीट जन्नत एक इंस्टाग्राम इंफ्लूएंसर हैं, जो सोशल मीडिया पर अपनी डेली लाइफ वीडियो शेयर करती हैं।