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ब्रह्मोस की रेंज बढ़ी, ER Version से दिल्ली से निशाना सिर्फ एक क्लिक में

नई दिल्ली किसी भी देश के डिफेंस पावर की मजबूती को समझने और उसका आकलन करने के लिए मिसाइल सिस्‍टम के बारे में जानना जरूरी होता है. जिस देश के पास जितनी ताकतवर मिसाइल्‍स हैं, उसकी अटैकिंग क्षमता भी उतनी ही बेहतर मानी जाती है. भारत दुनिया के उन गिनेचुने देशों में शामिल है, जिसके पास अल्‍ट्रा मॉडर्न मिसाइल सिस्‍टम है. एक तरफ ब्रह्मोस जैसी अचूक क्रूज मिसाइल है तो दूसरी तरफ अग्नि-5 जैसी इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल है, जो दुश्‍मन की मांद में घुसकर उसे नेस्‍तनाबूद कर सकती है. अग्नि-5 मिसाइल ऐसी ICBM है जो MIRV टेक्‍नोलॉजी से लैस और न्‍यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम है. मतलब यह मिसाइल तबाही का दूसरा नाम है. भारत के पास एक और ऐसी ही मिसाइल है, जिससे दुश्‍मन खौफ खाते हैं और जिसका डंका पूरी दुनिया में बज रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने उसका अचूक निशाना और प्रचंड प्राक्रम भी देखा. जी हां…बात ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की हो रही है. भारत और रूस ने मिलकर इसे डेवलप किया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्‍तान ने इसकी प्रंडता देखी थी. ब्रह्मोस के वार से पाकिस्‍तान चारों खाने चित्‍त हो हो गया था और शांति की गुहार लगाने लगा था. अब वही ब्रह्मोस नए अवतार में सामने आने वाला है. भारतीय वैज्ञानियों के इसका रेंज इतना बढ़ा दिया है कि अब दिल्‍ली से एक बटन दबाते ही लाहौल और इस्‍लामाबाद के चीथड़े उड़ जाएंगे. ब्रह्मोस के नए अवतार को ब्रह्मोस- ER का नाम दिया गया है. दरअसल, भारत अपनी सामरिक और सैन्य क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. देश 2028 से लगभग 800 किलोमीटर मारक क्षमता वाली विस्तारित रेंज की ब्रह्मोस-ईआर (BrahMos-ER) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को सेना में शामिल करने की योजना बना रहा है. इस समय इस मिसाइल के लंबी दूरी वाली फ्लाइट प्रोफाइल को परखने के लिए परीक्षण चल रहे हैं. ब्रह्मोस-ER कार्यक्रम को ब्रह्मोस मिसाइल परिवार का अगला बड़ा चरण माना जा रहा है, जो आर्मी, नेवी और एयरफोर्स तीनों के लिए भारत की लंबी दूरी की सटीक प्रहार क्षमता को काफी मजबूत करेगा. ब्रह्मोस एयरोस्पेस पहले ही 450 किलोमीटर रेंज वाले ब्रह्मोस मिसाइल के उत्पादन की शुरुआत कर चुका है. यह वर्जन शुरुआती 300 किलोमीटर से कम रेंज वाली मिसाइलों की तुलना में एक बड़ा सुधार था. अब ब्रह्मोस-ER के जरिए इसकी मारक क्षमता को लगभग दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है. खास बात यह है कि रेंज बढ़ने के बावजूद इस मिसाइल की सुपरसोनिक गति, उच्च सटीकता और मल्‍टी-प्लेटफॉर्म से दागे जाने की क्षमता बरकरार रखी जाएगी. यह मिसाइल जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्‍लेटफॉर्म से दागी जा सकेगी. फोर्स मल्‍टीप्‍लायर भारतीय नौसेना और इंडियन आर्मी दोनों ही ब्रह्मोस-ER प्रोजेक्‍ट के मजबूत समर्थक हैं. नौसेना के लिए यह मिसाइल समुद्री क्षेत्र में ‘सी-डिनायल’ यानी दुश्मन की गतिविधियों को रोकने और लंबी दूरी से समुद्री हमले करने की क्षमता को काफी बढ़ाएगी. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, इससे युद्धपोतों और तटीय बैटरियों को यह ताकत मिलेगी कि वे दुश्मन के जहाजों और ठिकानों को विवादित समुद्री इलाकों के काफी भीतर तक निशाना बना सकें. इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ और मजबूत होगी. आर्मी के लिए ब्रह्मोस-ईआर एक अहम ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ साबित हो सकती है. इसकी 800 किलोमीटर तक की रेंज सेना को यह क्षमता देगी कि वह सामरिक क्षेत्र से काफी दूर स्थित हाई वैल्‍यू एसेट्स पर सटीक हमला कर सके. इससे न केवल भारत की प्रतिरोधक क्षमता (डेटरेंस) मजबूत होगी, बल्कि गहरे प्रहार (डीप स्ट्राइक) की रणनीति को भी नई धार मिलेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल सीमावर्ती इलाकों से दूर बैठे विरोधियों के लिए भी एक मजबूत संदेश होगी. ब्रह्मोस-ER क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस-ER मिसाइल की रेंज    800 किलोमीटर दिल्‍ली से लाहौर की दूरी    502 किलोमीटर दिल्‍ली से इस्‍लामाबाद की दूरी    740 से 800 किलोमीटर एयरफोर्स के लिए खास ब्रह्मोस-ER इसी के साथ भारतीय वायुसेना के लिए ब्रह्मोस-ER का हल्का संस्करण विकसित करने की योजना भी चल रही है. इस एयर-लॉन्च्ड वर्जन का वजन करीब 2.5 टन रखने का लक्ष्य है, ताकि इसे लड़ाकू विमानों से आसानी से दागा जा सके. हल्का वजन होने से विमानों पर इसके एकीकरण (इंटीग्रेशन) में आने वाली तकनीकी चुनौतियां कम होंगी और मिशन के अनुसार पेलोड और रेंज के बेहतर विकल्प मिल सकेंगे. इससे वायुसेना की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी और बढ़ेगी. भारतीय वायुसेना को ब्रह्मोस मिसाइल के इस्तेमाल का वास्तविक युद्ध अनुभव भी है. हाल ही में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के दौरान वायुसेना ने ब्रह्मोस-ए (एयर-लॉन्च्ड) क्रूज मिसाइल के पुराने संस्करणों का इस्तेमाल किया था, जिनकी रेंज लगभग 290 किलोमीटर थी. इन मिसाइलों के सफल उपयोग ने सिस्टम की विश्वसनीयता को साबित किया और वायुसेना का भरोसा और मजबूत किया. इसी अनुभव के आधार पर अब ज्यादा रेंज और क्षमता वाली ब्रह्मोस-ER की जरूरत को और अधिक गंभीरता से देखा जा रहा है. मल्‍टी-रेंज क्रूज मिसाइल फिलहाल ब्रह्मोस-ER का परीक्षण अहम चरण में है. इन परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मिसाइल लंबी दूरी पर भी अपनी गति, सटीकता और मारक क्षमता बनाए रखे. यदि तय समय-सीमा के अनुसार सब कुछ आगे बढ़ता है, तो 2028 से इसकी तैनाती भारत की सैन्य रणनीति में एक बड़ा बदलाव साबित होगी. इससे भारत को जमीन और समुद्र दोनों क्षेत्रों में गहरे, तेज और ज्यादा सुरक्षित सटीक हमले करने की क्षमता मिलेगी. कुल मिलाकर, 450 किलोमीटर रेंज वाले ब्रह्मोस के मौजूदा उत्पादन और भविष्य में 800 किलोमीटर रेंज की ब्रह्मोस-ER की तैनाती यह दर्शाती है कि भारत एक मजबूत, मल्‍टी-रेंज क्रूज मिसाइल शस्त्रागार की ओर तेजी से बढ़ रहा है. यह कदम बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य और उभरती चुनौतियों के बीच भारत की रणनीतिक तैयारी को नई मजबूती देगा.

गाजा पर इजरायल का सख्त रुख, रक्षा मंत्री काट्ज बोले— कभी नहीं होगी पूरी तरह वापसी

तेल अवीव  अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए पहचाने जाने वाले इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने फिर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है, "इजरायल गाजा पट्टी को पूरी तरह कभी भी खाली नहीं करेगा।" इजरायल के प्रमुख न्यूज पेपर्स में से एक माकोर रिशोन द्वारा आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान काट्ज ने कहा, "गाजा में, इजरायल कभी भी पूरी तरह से पीछे नहीं हटेगा—पट्टी के अंदर एक महत्वपूर्ण सुरक्षा क्षेत्र होगा, भले ही हम (शांति समझौते के) दूसरे चरण में चले जाएं, अगर हमास हथियार छोड़ देता है, तो इजरायली समुदायों की रक्षा के लिए हम गाजा के अंदर सिक्योरिटी का प्रबंध करेंगे।"  उन्होंने आगे कहा, "उचित समय पर, हम उत्तरी गाजा में उन बस्तियों की जगह पर नाहल चौकियां स्थापित करेंगे जो उखाड़ दी गई थीं।" नाहल इजरायली सेना की एक इकाई है जो सैन्य सेवा के साथ नागरिक कार्यों को जोड़ती है और ऐतिहासिक रूप से इजरायली बस्तियों की स्थापना में भूमिका निभाती रही है। काट्ज ने फिलाडेल्फी कॉरिडोर (गाजा और मिस्र के बीच की सीमा) पर नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा ऐसा नहीं हुआ तो ईरान हथियारों की तस्करी करने में सफल होगा। उन्होंने कहा कि अगर हमास निरस्त्रीकरण नहीं करता, तो इजरायल खुद ऐसा करेगा। काट्ज ने अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह बस्तियां बसाने की घोषणा नहीं है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से कहा जा रहा है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, "रिवर्स तो मैं सिर्फ गाड़ी चलाते समय करता हूं," यानी वह अपने बयान से पीछे नहीं हट रहे। हालांकि, बाद में रॉयटर्स को दिए बयान में उन्होंने स्पष्ट किया, "सरकार का गाजा पट्टी में बस्तियां बसाने का कोई इरादा नहीं है। नाहल इकाइयां केवल सुरक्षा कारणों से तैनात की जाएंगी। उन्होंने दावा किया कि गाजा के लिए उनका "विजन" "सही समय पर" पूरा किया जाएगा। काट्ज का दावा है कि "लोगों ने मेरे शब्दों की व्याख्या गाजा के अंदर बस्तियों की स्थापना की घोषणा के रूप में करने की कोशिश की," और उनका इरादा ऐसा नहीं था। इससे पहले मंगलवार को भी काट्ज ने कहा था कि इजरायली सेना गाजा पट्टी से कभी भी पूरी तरह से पीछे नहीं हटेगी। सुरक्षा कारणों से गाजा के अंदर एक महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्र रहेगा और एक सैन्य इकाई स्थापित की जाएगी। यह बयान कब्जे वाले वेस्ट बैंक के बेत एल बस्ती में एक समारोह के दौरान दिया गया, जहां 1,200 आवास इकाइयों की मंजूरी का जश्न मनाया जा रहा था।

चिकित्सा शिक्षा में बड़ा कदम: सीनियर रेजिडेंसी के लिए इंडक्शन ट्रेनिंग का शुभारंभ

शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने यहां स्वास्थ्य विभाग, इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, शिमला और निदेशालय चिकित्सा शिक्षा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों और आई.जी.एम.सी. शिमला में 22 दिसम्बर को हुई घटना पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग, आई.जी.एम.सी और निदेशालय चिकित्सा शिक्षा के अधिकारियों से इस घटना से जुड़े सभी तथ्यों के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। सुक्खू ने कहा कि इस घटना की जांच 24 दिसम्बर, 2025 तक पूर्ण कर अतिशीघ्र उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि हर संस्थान में पेशेवरों का व्यवहार सौम्य और शांत होना चाहिए। इससे व्यक्तित्व के साथ-साथ संस्थान की छवि भी झलकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आई.जी.एम.सी. से पढ़ाई करने के उपरान्त चिकित्सकों ने राज्य का नाम देश और विदेश में रौशन किया है। आई.जी.एम.सी. में हुई घटना निंदनीय है। किसी भी संस्थान में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुक्खू ने निदेशालय चिकित्सा शिक्षा को सीनियर रेजिडेंसी करने के लिए चिकित्सा महाविद्यालय में आने वाले चिकित्सकों को इंडक्शन टेªनिंग प्रदान करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने सीनियर रेजिडेंसी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने विगत तीन वर्षों के दौरान चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अनेक महत्त्वाकांक्षी पहल की हैं। चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ को संस्थान और अस्पताल में बेहतर वातावरण प्रदान करने के लिए विश्व-स्तरीय मानकों को अपनाया जा रहा है। सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को न केवल सुदृढ़ कर रही है बल्कि इस क्षेत्र में आदर्श राज्य बनने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास और विस्तार पर तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों में दो दशकों से इस्तेमाल हो रहे पुराने चिकित्सा उपकरणों को नए और अत्याधुनिक उपकरणों से बदला जा रहा है। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने चिकित्सा शिक्षा से सम्बन्धित विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव स्वास्थ्य संदीप कदम, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य डॉ. गोपाल बेरी, एम.एस. आई.जी.एम.सी डॉ.राहुल राव, अतिरिक्त निदेशक नीरज कुमार गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

अटल बिहारी वाजपेयी थे भविष्य को पहचानने वाले नेता, भारत को बनाया न्यूक्लियर पावर: नायडू

अमरावती  आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने भारत को परमाणु शक्ति बनाकर दुनिया के सामने भारतीयों की क्षमताओं को साबित किया। गुरुवार को वाजपेयी की 101वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान वाजपेयी ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि कोई भारत को चुनौती देगा तो वह उचित जवाब देगा। यही संकल्प हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री नायडू ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ अमरावती राजधानी क्षेत्र के वेंकटपालेम में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने वाजपेयी के जीवन पर आधारित फोटो प्रदर्शनी देखी और कार्यक्रम स्थल पर लगे विभिन्न स्टॉलों का भी अवलोकन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पास ही आयोजित सुशासन दिवस की जनसभा में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्रीनिवास वर्मा और पेम्मासानी चंद्रशेखर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव, राज्य मंत्री सत्यकुमार यादव, पी. नारायण, कंदुला दुर्गेश सहित कई नेता मौजूद रहे। टीडीपी, भाजपा, जनसेना के कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने प्रतिमा अनावरण समारोह में भाग लिया। इससे पहले मुख्यमंत्री नायडू ने ‘एक्स’ पर वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, “अपने नाम की तरह ही अटल बिहारी वाजपेयी जी राष्ट्र सेवा के संकल्प में अटल थे। वे गरिमामय राजनेता, कवि हृदय और दुर्लभ दूरदर्शिता वाले नेता थे, जो अपनी ईमानदारी, विनम्रता और दलों के बीच सहमति बनाने की क्षमता के लिए जाने जाते थे।” टीडीपी प्रमुख ने वाजपेयी के साथ अपने संबंधों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारत की सुरक्षा को मजबूत किया, शासन को नई दिशा दी और अपने विचारों व कार्यों से पीढ़ियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “मुझे उनके साथ काम करने और उनकी बुद्धिमत्ता से सीखने का सौभाग्य मिला। देश के विकास में उनके परिवर्तनकारी योगदान के लिए उन्हें हमेशा सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद किया जाएगा।” सुशासन दिवस की जनसभा में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि अमरावती को विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां के किसानों का बलिदान ही अमरावती में वाजपेयी स्मृति वनम के निर्माण की प्रेरणा है। उन्होंने कहा, “यह स्मारक हम अटल बिहारी वाजपेयी को ऐसा भव्य सम्मान देने के लिए बना रहे हैं, जिसे इतिहास याद रखेगा।” मुख्यमंत्री ने बताया कि भाजपा ने अटल–मोदी सुशासन यात्रा शुरू की है और गठबंधन सरकार मिलकर 26 जिला मुख्यालयों में वाजपेयी की प्रतिमाएं स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार वाजपेयी की जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मना रही है। नायडू ने पूर्व मुख्यमंत्री और टीडीपी संस्थापक एन. टी. रामाराव (एनटीआर) के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि एनटीआर और वाजपेयी ने इतिहास की दिशा बदल दी। एनटीआर ने गैर-कांग्रेस दलों को राष्ट्रीय मोर्चे के तहत एकजुट किया। वाजपेयी और एनटीआर के बीच लंबे समय से संबंध रहे। जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी के गठन तक की यात्रा भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के बुनियादी ढांचे की मजबूत नींव रखी। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, जिसकी शुरुआत ताड़ा से चेन्नई के बीच हुई, उनकी दूरदृष्टि का उदाहरण है। उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र में उदारीकरण की पहल की, जो ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना।

अटल जी की कविता से झलकी अडिग भारत की आत्मा, पीएम मोदी ने डायरी में किया साझा

नई दिल्ली  'टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते…' ये पंक्तियां सिर्फ एक कविता नहीं हैं, बल्कि एक सोच, एक संकल्प और एक जीवन-दर्शन हैं। आज अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर ये शब्द फिर से चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कुछ खास है। वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दशकों पुरानी निजी डायरी का वह हस्तलिखित पन्ना, जिसमें अटल की यह कविता लिखी है। यह पन्ना केवल यादों का हिस्सा नहीं है, बल्कि इस बात का सबूत है कि कैसे विचार एक व्यक्ति से निकलकर पीढ़ियों तक देश की दिशा तय करते हैं। उस दौर की कल्पना कीजिए, जब नरेंद्र मोदी एक युवा कार्यकर्ता थे। न पद था, न सत्ता, बस संगठन, संघर्ष और सीखने की ललक। ऐसे समय में अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता सिर्फ मंच से भाषण नहीं देते थे, वे अपने शब्दों से रास्ता दिखाते थे। अटल बिहारी की कविता, जिसमें सत्ता से सत्य के संघर्ष की बात है और अन्याय के सामने न झुकने का साहस है, उसी युवा मन में उतर गई। नरेंद्र मोदी ने उन शब्दों को सिर्फ पढ़ा नहीं, उन्हें अपनी साधना बना लिया। आमतौर पर राजनीति को सत्ता का खेल कहा जाता है, लेकिन यह प्रसंग बताता है कि राजनीति असल में विचारों की यात्रा है। अटल बिहारी को 'अजातशत्रु' कहा गया। वे ऐसे नेता थे जिनके विरोधी भी सम्मान करते थे। उनकी राजनीति में संवाद था, कविता थी और लोकतंत्र के प्रति गहरा विश्वास था। वही विश्वास पीएम नरेंद्र मोदी की सोच में भी दिखाई देता है, जहां संघर्ष को अवसर और चुनौती को संकल्प में बदला गया। डायरी का वह पन्ना इस बात का प्रतीक है कि गुरु-शिष्य की परंपरा आज भी जीवित है। अटल बिहारी के लिए कविता अभिव्यक्ति थी और पीएम मोदी के लिए वही कविता ऊर्जा का स्रोत बनी। यह दिखाता है कि नेतृत्व अचानक पैदा नहीं होता, वह वर्षों की साधना, अनुशासन और आदर्शों से गढ़ा जाता है। एक युवा कार्यकर्ता का उन शब्दों से जुड़ना और वर्षों बाद देश का नेतृत्व करना, यह अपने आप में एक प्रेरक यात्रा की कहानी को दर्शाता है। पीएम मोदी की डायरी में लिखे छंद की फोटो शेयर करते हुए, इसमें कहा गया है, "अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी जी के साहस, दृढ़ विश्वास और संकल्प के शब्द युवा नरेंद्र मोदी की डायरी में जगह पाए। नरेंद्र मोदी की पर्सनल डायरी का यह हाथ से लिखा हुआ पन्ना, जो दशकों पहले लिखा गया था, एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आदर्शों के हस्तांतरण को दर्शाता है।" छंद की पहली कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं, "हम टूट सकते हैं, लेकिन झुक नहीं सकते! "सत्ता के खिलाफ सच की लड़ाई, न्याय अत्याचार से लड़ता है, अंधेरे ने चुनौती दी है, आखिरी किरण ही रोशनी है।"

संविधान की नई पहचान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाली भाषा में किया संविधान का विमोचन

नई दिल्ली  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में संथाली भाषा में भारत का संविधान जारी किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह सभी संथाली लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है कि भारत का संविधान अब संथाली भाषा में, ओल चिकी लिपि में उपलब्ध है। इससे वे संविधान को अपनी भाषा में पढ़ और समझ सकेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इस वर्ष हम ओल चिकी लिपि की शताब्दी मना रहे हैं। उन्होंने विधि एवं न्याय मंत्री और उनकी टीम की प्रशंसा की, जिन्होंने शताब्दी वर्ष में भारत के संविधान को ओल चिकी लिपि में प्रकाशित करवाया। भारत के राष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट में बताया गया, "अलचिकि लिपि में लिखित संताली भाषा में भारत के संविधान का लोकार्पण करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्‍नता हो रही है। यह हमारे लिए गौरव एवं प्रसन्नता की बात है कि भारत का संविधान संताली भाषा में प्रकाशित हुआ है।"पोस्ट में आगे लिखा गया, "संताली भाषा में संविधान का उपलब्ध होना समस्त संताली समुदाय के लिए अत्यंत हर्ष का विषय है। ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में रहने वाले सभी संताली लोग अपनी मातृभाषा एवं लिपि में लिखे गए संविधान को पूरी तरह जान सकेंगे। संविधान के अनुच्छेदों को वे ठीक से समझ सकेंगे।" इस कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मौजूद रहे। बता दें कि संथाली भाषा, जिसे 2003 के 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है। यह झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में आदिवासी लोगों द्वारा बोली जाती है।

इतिहास रचा गया: सिंगापुर हिंदू बोर्ड की CEO बनीं सरोजिनी पद्मनाथन

सिंगापुर  सिंगापुर के हिंदू बोर्ड में मंदिरों और भारतीय संस्कृति के प्रबंधन के लिए एक अनुभवी महिला नियुक्त सिंगापुर, 25 दिसंबर (भाषा) सिंगापुर में प्रमुख हिंदू मंदिरों का प्रबंधन करने वाली एक वैधानिक संस्था, हिंदू एंडावमेंट्स बोर्ड (एचईबी) ने जन सेवा को समर्पित एक अनुभवी नेता को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। सरोजिनी पद्मनाथन को बुधवार को एचईबी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया। अपने 40 वर्षों के शानदार करियर में उन्होंने 1990 के दशक में अस्पतालों के पुनर्गठन और कोविड-19 महामारी के दौरान संगठनात्मक मजबूती बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और हेल्थ साइंसेज अथॉरिटी में वरिष्ठ पदों पर कार्य किया, जहां उन्होंने चिकित्सा, नर्सिंग और प्रशासनिक क्षेत्रों में कार्यबल विकास का नेतृत्व किया। साप्ताहिक ‘टैब्लॉइड' (लघुपत्र) ‘तबला!' के अनुसार, 57 वर्षीय पद्मनाथन इससे पहले एचईबी की वित्त सदस्य रह चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने वित्तीय प्रशासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और बोर्ड के संचालन से गहरे से जुड़ी रहीं। इसमें इसके चार मंदिर, एक पुनर्वास केंद्र और धार्मिक कार्यक्रम शामिल हैं। वर्ष 1968 में स्थापित एचईबी ने कहा, ‘‘उनका नेतृत्व अनुभव और मजबूत प्रशासनिक पृष्ठभूमि उन्हें बोर्ड की समुदाय-केंद्रित पहलों का मार्गदर्शन करने के लिए उपयुक्त बनाती है।'' पद्मनाथन जीवगंथ अरुमुगम का स्थान लेंगी, जो सितंबर 2024 से इस पद पर कार्यरत थे। हिंदू एंडावमेंट्स बोर्ड सिंगापुर के प्रमुख हिंदू मंदिरों – जैसे श्री मरिअम्मन मंदिर और श्री शिवन मंदिर का प्रबंधन करता है। इसके अलावा, यह संस्कृति, समुदाय और युवा मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय समुदाय के लिए सांस्कृतिक, धार्मिक और परोपकारी कार्यक्रमों की भी देखरेख करता है।    

भविष्य की फैक्टरी? चीन में AI संभाल रहा 5000 लूम का काम, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली  हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चीन की एक विशाल टेक्सटाइल फैक्ट्री के वीडियो तेजी से वायरल हुए हैं, जिनमें चीन के शिनजियांग प्रांत के अराल शहर में 5,000 से अधिक लूम (बुनाई मशीनें) स्वचालन और AI‑आधारित नियंत्रण के तहत 24 घंटे, 7 दिन nonstop चल रही हैं, और वहां कोई मानव श्रमिक दिखाई नहीं दे रहा। यह क्लिप टेक्सटाइल उद्योग में चीन के ऑटोमेशन रुझान को लेकर वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि 5000 करघे (looms) पूरी तरह AI के सहारे, बिना किसी इंसान के 24 घंटे चल रहे हैं।   इन वीडियो को “ZERO Humans Factory” और “Fully Autonomous Textile Plant” जैसे दावों के साथ साझा किया जा रहा है।  विशेषज्ञों के मुताबिक यह चीन की स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग क्रांति का उदाहरण है, लेकिन यह दावा अभी प्राधिकृत समाचार स्रोतों में पुष्ट नहीं हुआ है।  हालांकि, इस वीडियो को लेकर यह स्पष्ट प्रमाणित नहीं हुआ है कि यह किसी प्राधिकृत समाचार एजेंसी या सरकारी स्रोत द्वारा पुष्टि की गई रिपोर्ट है। यह मुख्य रूप से सोशल मीडिया और प्लेटफॉर्म वीडियो पोस्ट्स में दिखाई जा रहा तस्वीरों/फुटेज पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि इसे फैक्ट‑चेक की आवश्यकता है।     ऑटोमेशन है, लेकिन इंसान गायब नहीं प्रमाणिक औद्योगिक रिपोर्ट्स और चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, यह दावा भ्रामक और अधूरा है।  चीन ने वाकई AI-संचालित लूम्स, रोबोटिक यार्न हैंडलिंग, ऑटो-क्वालिटी डिटेक्शन और स्मार्ट सेंसर सिस्टम को बड़े पैमाने पर अपनाया है। लेकिन पूरी तरह इंसान-मुक्त टेक्सटाइल फैक्ट्री फिलहाल मौजूद नहीं है। AI क्या करता है?     करघों की गति और पैटर्न का ऑटो कंट्रोल     धागे की टूट-फूट का तुरंत पता     ऊर्जा दक्षता और उत्पादन ऑप्टिमाइज़ेशन     रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स इंसान कहां जरूरी ?     मशीन मेंटेनेंस और इमरजेंसी इंटरवेंशन     सॉफ्टवेयर मॉनिटरिंग     क्वालिटी ऑडिट और फाइनल इंस्पेक्शन     सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स क्यों फैल रहा है ‘ZERO Humans’ नैरेटिव? विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की तकनीकी ताकत को अति-नाटकीय तरीके से दिखाने और सोशल मीडिया एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए ऐसे दावे किए जाते हैं। वास्तविकता में इसे “High Automation Factory” कहना ज्यादा सही होगा, न कि “No Humans Factory”। चीन में टेक्सटाइल उद्योग में ऑटोमेशन और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग का विकास कई वर्ष से चल रहा है। औद्योगिक इंटरनेट और टेक्नोलॉजी से जुड़ी रिपोर्ट बताती हैं कि चीन की कई टेक्सटाइल फैक्ट्रियाँ AI, IoT और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के साथ काम कर रही हैं, जहाँ मशीनें उच्च गति पर लगातार चल रही हैं और केवल निगरानी के लिए कुछ लोग मौजूद रहते हैं। लेकिन यह सत्यापित नहीं हुआ है कि कोई फैक्टरी पूरी तरह बिना किसी मानव हस्तक्षेप के चल रही है। आमतौर पर उत्पादन लाइनें स्वचालित हैं, मगर इंसानों की निगरानी, रख‑रखाव और गुणवत्ता नियंत्रण अभी भी अधिकांश औद्योगिक सेट‑अप में आवश्यक है। चीन में ऑटोमेशन क्यों बढ़ा? चीन अब औद्योगिक ऑटोमेशन को राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बना रहा है, जिसमें AI‑संचालित रोबोट्स और मशीनें लागत कम, उत्पादन तेज और गुणवत्ता बढ़ाने में सहायता कर रही हैं।   रिपोर्टों के अनुसार, चीन में मैन्युफैक्चरिंग रोबोट्स की तैनाती दुनिया के कई देशों से अधिक है, जिससे ट्रेड‑वॉर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में चीन अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।  भारत‑चीन टेक्सटाइल मुकाबला  चीन की टेक्नोलॉजी‑भारी उत्पादन प्रणाली से भारत जैसे बड़े कपड़ा उत्पादक देशों पर प्रभाव भी दिख रहा है।  चीन सस्ते निर्यात और उच्च क्वालिटी उत्पादन के लिए ऑटोमेशन का लाभ उठा रहा है, जिससे दुनियाभर के बाजारों में चीन का प्रभाव और मजबूत हो रहा है। वहीं भारत में तकनीक‑उन्मुख अपग्रेडेशन और एक्सपोर्ट‑फोकस्ड प्रयासों से वैश्विक कपड़ा आपूर्ति श्रृंखला में हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश हो रही है। उदाहरण के लिए भारत अब कई बाजारों में कपड़ा निर्यात के नए केंद्र के रूप में उभरा है। ऐसे में AI‑बेस्ड ऑटोमेशन, मशीन‑ड्रिवन उत्पादन, और मानव श्रम की भूमिका में बदलाव आज वैश्विक टेक्सटाइल प्रतिस्पर्धा के नए परिदृश्य हैं।

खिलाड़ी ने पूछा- और कैसे हो, पीएम मोदी ने दिया फनी रिप्लाई, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

 नई दिल्ली सांसद खेल महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर के प्रतिभावान खिलाड़ियों से बात कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने हरियाणा के एक उभरते बॉक्सर से बातचीत की जो ओलंपिक में जाने का सपना देखता है. बातचीत की शुरुआत ही इतनी मजेदार थी कि देखते ही देखते ऑनलाइन वायरल हो गया.  जैसे ही प्रधानमंत्री कहते हैं – नीरज, राम-राम. उधर से बॉक्सर का जवाब मिलता है – और कैसे हो. इस पर पीएम मोदी मुस्कुराने लगते हैं और कहते हैं – मैं तेरे जैसा ही हूं. इस बॉक्सर के साथ पीएम मोदी की बातचीत का ये हिस्सा काफी वायरल हो रहा है. बॉक्सर नीरज ने इतनी मासूमियत से पीएम से सवाल करता है और उनके सवालों के जवाब देता है, जिसे सुनकर किसी की भी हंसी छूट जाए.  बॉक्सर नीरज की मासूमियत ने लोगों को किया कायल आगे पीएम मोदी बॉक्सर से पूछते हैं – अच्छा नीरज, ये नीरज का नाम सुनकर ही तुम्हें लगा होगा कि मेरा नाम नीरज है तो मैं भी नीरज चोपड़ा बन जाऊं. इस पर फिर बॉक्सर मासूमियत से जवाब देता है- हां जी. इसके बाद  पीएम नीरज को अपने बारे में कुछ बताने को कहते हैं. बॉक्सर बताता है कि मेरा नाम नीरज है जी. मेरे पिता जी का नाम बलवान सिंह है. वो कॉपरेटिव सोसाइटी में काम करते हैं. मम्मी घर का काम करती है और मैं हरियाणा के टोहाना के डांगरा गांव का रहने वाला हूं. मैं बॉक्सिंग खिलाड़ी हूं और नेशनल मेडलिस्ट भी हूं. पीएम मोदी ने पूछा – आपने खेलों में आगे करियर बनाने का सोचा है. इस पर नीरज ने कहा- हां जी, मैं आगे बॉक्सिंग मे आगे जाना चाहता है. पीएम मोदी ने जब पूछा कि क्या आप मोबाइल पर इंटरनेट पर दुनिया के बड़े-बड़े बॉक्सरों के मैच देखते हैं. इस पर नीरज ने कहा कि हां, जरूर देखता हूं. दुनिया के भी और अपने देश के भी बड़े बॉक्सरों के खेल देखता हूं और उनसे सीखता हूं. इससे मोटिवेट भी होता हूं.  पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए की बातचीत पीएम मोदी ने फिर नीरज से मजाकिया अंदाज में पूछा कि जब आप मोबाइल पर बैठे रहते होगे तो आपके पिता जी कहते होंगे ये क्या कर रहे हो. जाओ जाकर खेलो. नीरज ने बतााय कि हां ऐसा तो होता है, लेकिन बॉक्सरों की अच्छी फाइट देखकर खुद को रोक नहीं पाता.  नीरज ने ओलंपिक गोल्ड मेडल लाने का किया वादा पीएम मोदी ने पूछा कि क्या नीरज क्या मैं आज मानकर जाऊं कि आने वाले समय में हमारा एक और हरियाणवी बॉक्सर देश को ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीताएगा. इस पर नीरज ने बताया कि हां जी, जरूर. इस पर लोग तालियां बजाने लगे. नीरज ने कहा कि इस ओलंपिक में या उसके अगले ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर आऊं और आपके हाथ में लाकर दे दूं.

चीन में भारतीय ट्रैवल व्लॉगर को 15 घंटे डिटेन, बुनियादी ज़रूरतों से भी रखा गया वंचित

चीन  भारतीय ट्रैवल व्लॉगर अनंत मित्तल, जिन्हें सोशल मीडिया पर “ऑन रोड इंडियन” के नाम से जाना जाता है, ने चीन में अपने कथित हिरासत अनुभव को लेकर सनसनीखेज दावा किया है। अनंत के अनुसार, 16 नवंबर को चीन के एक एयरपोर्ट पर उन्हें चीनी अधिकारियों ने रोक लिया और लगभग 15 घंटे तक हिरासत में रखा।अनंत ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में बताया कि हिरासत के दौरान कई घंटों तक उनसे कोई बातचीत नहीं की गई। उनका कहना है कि उन्हें बाथरूम जाने की अनुमति नहीं दी गई और बार-बार मांगने के बाद ही थोड़ा-सा पानी उपलब्ध कराया गया।   अनंत के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने उनके बैग और निजी सामान की गहन जांच की, हालांकि उसमें कुछ भी अवैध नहीं मिला। इसके बावजूद उनसे लंबी पूछताछ की गई। अनंत का दावा है कि यह पूरी कार्रवाई उनकी अरुणाचल प्रदेश से जुड़ी टिप्पणी के कारण हुई। करीब 15 घंटे बाद, पूछताछ पूरी होने पर उन्हें छोड़ दिया गया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर चीन की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों और विदेशी नागरिकों के साथ व्यवहार को लेकर बहस तेज हो गई है।हालांकि, इस मामले पर चीनी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, और यह दावा फिलहाल व्लॉगर के व्यक्तिगत बयान पर आधारित है।