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मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी—दिसंबर में बारिश का कहर, कई इलाकों में कड़ाके की ठंड

नई दिल्ली  मौसम विभाग (IMD) के अनुसार चक्रवात दित्वा (Cyclone Dithwa) के कारण बंगाल की दक्षिण-पश्चिम खाड़ी और उत्तरी तमिलनाडु-पुडुचेरी क्षेत्र में मौसम बिगड़ गया है। विभाग ने 1 दिसंबर को तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा और तेलंगाना में भारी बारिश (Weather Update Heavy Rain) की संभावना जताई है। उत्तरी तमिलनाडु में गरज, बिजली और 70-80 किमी/घंटा की तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि दक्षिणी तमिलनाडु में 60–70 किमी/घंटा की हवा और बिजली-गरज के साथ बारिश का अनुमान है। 1 से 4 दिसंबर के बीच तमिलनाडु, तटीय आंध्र, यनम और रायलसीमा में तथा 2 से 4 दिसंबर तक केरल और माहे क्षेत्र में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।   MP में शीतलहर दूसरी ओर, मध्य प्रदेश में लगातार दूसरे दिन भी शीतलहर का असर बना रहा। प्रदेश में हवाओं का रुख उत्तरी और उत्तर-पूर्वी रहने से न्यूनतम तापमान गिर रहा है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार यह स्थिति अगले दो-तीन दिन बने रहने की संभावना है। नौगांव में प्रदेश का न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि भोपाल सहित 10 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।   बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान दितवाह सक्रिय बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान दित्वा तमिलनाडु और पुडुचेरी के तट के आसपास सक्रिय है, जो उत्तर दिशा में आगे बढ़ सकता है। साथ ही उत्तरी हरियाणा के पास हवा के ऊपरी स्तर पर पश्चिमी विक्षोभ भी बना हुआ है। IMD के अनुसार उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में अगले 48 घंटों तक न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, परंतु उसके बाद तीन दिनों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है। मध्य भारत में दो दिनों तक तापमान 2–3 डिग्री बढ़ सकता है, उसके बाद यह स्थिर रहेगा। वहीं उत्तर-पूर्व भारत में अगले 48 घंटों तक तापमान स्थिर रहने के बाद तीन दिनों में 3 से 4 डिग्री की गिरावट आ सकती है।  गुजरात में अगले चार दिनों तक तापमान 2–3 डिग्री तक गिर सकता है। महाराष्ट्र के उत्तरी हिस्सों में भी आगामी दो दिनों में तापमान में 2–3 डिग्री की कमी दर्ज हो सकती है। UP में करवट लेगा मौसम उत्तर प्रदेश में भी मौसम एक बार फिर करवट लेने की तैयारी में है। मंगलवार से न्यूनतम तापमान में 1–2 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। सुबह के समय हल्का कोहरा या धुंध छाए रहने की संभावना है। रविवार को अधिकतम तापमान 24.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 8.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सीजन में पहली बार 25 डिग्री से नीचे रहा। 27 नवंबर को तापमान 7.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो चार वर्षों में नवंबर का सबसे कम तापमान था। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि कड़ाके की ठंड दिसंबर के मध्य से शुरू होगी। 15 दिसंबर के बाद मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होंगे, जिससे बर्फीली हवाएं मैदानों की ओर बढ़ेंगी।

एयरपोर्ट चार्ज होगा महंगा: दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी की तैयारी

नई दिल्ली दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट से उड़ान भरना अब यात्रियों के लिए काफी महंगा साबित हो सकता है। दोनों प्रमुख एयरपोर्ट्स पर यूजर चार्जेस में 22 गुना तक की भारी बढ़ोतरी की आशंका है। यह स्थिति टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल (TDSAT) के हालिया आदेश के बाद बनी है, जिसमें 2009 से 2014 की अवधि के लिए टैरिफ गणना का तरीका बदल दिया गया है। नई गणना के अनुसार, इन पांच वर्षों में एयरपोर्ट ऑपरेटरों को 50,000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ। अब यह नुकसान यात्रियों से वसूले जाने वाले चार्जेज जैसे UDF, लैंडिंग और पार्किंग फीस के जरिए पूरा किया जा सकता है। इससे हवाई किराए पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा और टिकटों की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इस फैसले के खिलाफ AERA, घरेलू एयरलाइंस और लुफ्थांसा, एयर फ्रांस और गल्फ एयर जैसी विदेशी एयरलाइंस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, सुनवाई बुधवार को होगी। सूत्रों के मुताबिक, आदेश लागू होने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रियों से वसूला जाने वाला यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) 129 रुपए से बढ़कर 1,261 रुपए हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए यह फीस 650 रुपए से बढ़कर 6,356 रुपए तक जा सकती है। मुंबई एयरपोर्ट में भी तस्वीर बेहद चिंताजनक है- घरेलू यात्रियों की UDF 175 रुपए से बढ़कर 3,856 रुपए, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की फीस 615 रुपए से बढ़कर 13,495 रुपए तक पहुंच सकती है। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी से यात्रियों की संख्या पर गंभीर असर पड़ेगा। एक अधिकारी के अनुसार, “एयरपोर्ट्स और एयरलाइंस के बीच कानूनी विवादों का खामियाजा यात्रियों को नहीं भुगतना चाहिए।” विवाद की जड़ क्या है? यह विवाद करीब दो दशक पुराना है। 2006 में एयरपोर्ट्स के निजीकरण के दौरान एसेट्स के मूल्यांकन से जुड़े कई बिंदुओं पर विवाद शुरू हुआ था। AERA हर पांच साल में एयरपोर्ट टैरिफ तय करता है, जिसमें ऑपरेटर के निवेश और कमाई को आधार माना जाता है लेकिन AERA का गठन 2009 में हुआ, जबकि दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट की जिम्मेदारी उससे तीन साल पहले DIAL (GMR समूह) और MIAL (तब GVK, अब अडानी समूह) को सौंप दी गई थी। उस समय उपलब्ध एसेट्स का डेटा विश्वसनीय नहीं था। इसलिए सरकार और निजी ऑपरेटरों के बीच Hypothetical Regulatory Asset Base (HRAB) पर सहमति बनी, जो संपत्ति का काल्पनिक मूल्य निर्धारित करता है ताकि टैरिफ तय किया जा सके। किस मुद्दे पर टकराव? FY09–14 की टैरिफ गणना में AERA ने केवल एरोनॉटिकल एसेट्स—जैसे रनवे, टर्मिनल, चेक-इन काउंटर—को शामिल किया लेकिन ऑपरेटर DIAL और MIAL का कहना था कि नॉन-एरोनॉटिकल एसेट्स, जैसे ड्यूटी फ्री दुकानें, लाउंज और पार्किंग, का मूल्य भी शामिल होना चाहिए। AERA के इस फैसले को 2018 में TDSAT और 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था। बाद में ऑपरेटरों ने मंत्रालय की 2011 की चिट्ठी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार का आवेदन दिया। कोर्ट ने मामला फिर से TDSAT को भेज दिया। TDSAT का पलटा हुआ आदेश जुलाई में TDSAT ने अपना पुराना फैसला बदलते हुए ऑपरेटरों के पक्ष में निर्णय दिया और कहा कि टैरिफ निर्धारण में नॉन-एरोनॉटिकल एसेट्स को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसके आधार पर अनुमान लगाया गया कि दोनों एयरपोर्ट्स को FY09–14 के दौरान 50,000 करोड़ रुपए अधिक कमाने चाहिए थे, जिसकी भरपाई अब UDF बढ़ाकर की जा सकती है। भले ही मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन एयरपोर्ट शुल्कों में तेजी से बढ़ोतरी संसद में भी चिंता का विषय रही है। एक संसदीय समिति ने इस साल की शुरुआत में मंत्रालय को तलब कर कहा था कि निजीकरण के बाद एयरपोर्ट चार्जेज कई गुना बढ़े हैं, जिससे यात्रियों पर भारी बोझ पड़ रहा है।

फॉरेन में पासपोर्ट गायब? जानें इंडियन ट्रैवलर्स के लिए सबसे आसान रिटर्न रास्ता

विदेश में अपने पासपोर्ट का खो जाना किसी ट्रैवलर के लिए सबसे डरावना अनुभव हो सकता है। आपकी पूरी यात्रा संकट में पड़ सकती है और तनाव का स्तर बढ़ सकता है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं—यदि आप सही स्टेप्स फॉलो करें, तो यह परेशानी जल्दी हल हो सकती है। तुरंत पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएं जैसे ही आपको पता चले कि आपका पासपोर्ट खो गया है या चोरी हो गया है, तुरंत नज़दीकी पुलिस स्टेशन जाकर रिपोर्ट दर्ज कराएँ। पुलिस रिपोर्ट आपको लीगल सुरक्षा और आधिकारिक प्रमाण देती है कि आपका पासपोर्ट गुम या चोरी हो चुका है। इस रिपोर्ट की कॉपी आगे की हर प्रक्रिया में जरूरी होगी। इंडियन एंबेसी या हाई कमीशन से संपर्क करें पुलिस रिपोर्ट मिलने के बाद नज़दीकी इंडियन एंबेसी या हाई कमीशन से संपर्क करें। यही संस्था विदेश में आपकी पहचान को वैरीफाई कर सकती है और आपको भारत वापस लौटने में मदद कर सकती है। इमरजेंसी सर्टिफिकेट: देश वापसी का सबसे तेज़ रास्ता अगर समय बहुत कम है और आपको जल्दी से इंडिया लौटना है, तो एंबेसी इमरजेंसी सर्टिफिकेट (EC) जारी कर सकती है। यह एक बार का ट्रेवल डॉक्यूमेंट होता है और पासपोर्ट की जगह नहीं लेता, लेकिन सीधे भारत लौटने का सबसे तेज़ तरीका है। इमरजेंसी सर्टिफिकेट के लिए आपको चाहिए: पुलिस रिपोर्ट आधार कार्ड या पैन कार्ड पासपोर्ट फोटो एप्लीकेशन फीस टेंपरेरी पासपोर्ट: यात्रा जारी रखने का विकल्प यदि आपकी ट्रिप अभी खत्म नहीं हुई और आप यात्रा जारी रखना चाहते हैं, तो एंबेसी टेंपरेरी पासपोर्ट भी जारी कर सकती है। इसमें इमरजेंसी सर्टिफिकेट से अधिक समय लगता है क्योंकि आपकी पहचान की अधिक विस्तृत जांच की जाती है। फ्लाइट बुकिंग और इमीग्रेशन इमरजेंसी सर्टिफिकेट मिलने के बाद आप फ्लाइट बुक कर सकते हैं। एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन अधिकारियों द्वारा EC और पुलिस रिपोर्ट की क्रॉस‑वेरिफिकेशन की जाएगी। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि आप सुरक्षित और कानूनी रूप से अपने देश लौट सकें। एक्सपर्ट टिप्स: डिजिटल और फिजिकल कॉपी साथ रखें हमेशा अपने पासपोर्ट की फोटोकॉपी साथ रखें। या पासपोर्ट की डिजिटल कॉपी ईमेल या क्लाउड स्टोरेज में सेव करें। यह छोटी तैयारी एंबेसी वेरिफिकेशन और इमरजेंसी सिचुएशन में आपकी मदद कर सकती है।  

आसिम मुनीर की स्थिति पर उठे सवाल: CDF पद नहीं मिला, सेना प्रमुख का कार्यकाल भी पूरा—क्या बदला राजनीतिक समीकरण?

CDF नियुक्ति और सेना प्रमुख पद पर बदलाव के बाद आसिम मुनीर की भूमिका पर सवाल—क्या शहबाज़ सरकार का रुख बदला? आसिम मुनीर की स्थिति पर उठे सवाल: CDF पद नहीं मिला, सेना प्रमुख का कार्यकाल भी पूरा—क्या बदला राजनीतिक समीकरण? पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व में बदलाव से बढ़ी चर्चाएँ, आसिम मुनीर को लेकर शहबाज़ सरकार की रणनीति पर सवाल लाहौर   हम सभी जानते हैं कि पाकिस्तान में सत्ता की लड़ाई बिल्कुल अलग होती है. यहां पर सिर्फ नेता प्रधानमंत्री बनने के लिए आमने-सामने नहीं होते, इसका एक और पहिया होता है- सेना. कोई कितने भी बहुमत से यहां सरकार बना ले, उसे हमेशा डर तख्तापलट का लगा रहता है. इसका सीधा उदाहरण इस वक्त पाकिस्तान की अदियाला जेल में बंद इमरान खान हैं. यही वजह है कि शहबाज शरीफ ने सेना से कोई पंगा लेने के बजाय आसिम मुनीर से बनाकर चलते रहे. भारत-पाकिस्तान के बीच जब मई में जंग जैसे हालात बन गए, तो युद्धविराम के बाद खुद ही आसिम मुनीर ने जीत घोषित कर दी और इसका सेहरा भी अपने सिर बांध लिया. शहबाज शरीफ इस पूरे मामले में सिर्फ उनके लिए तालियां ही बजाते रहे. उन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि दे दी गई और विदेश दौरे पर भी आसिम मुनीर अकेले ही जाने लगे. कुल मिलाकर मान लिया गया था कि उन्हें सिर्फ एक ऑफिशियल टाइटल की जरूरत है बाकी सत्ता उनकी मुट्ठी में है. क्या बदल गया है शहबाज शरीफ का मूड? पाकिस्तान में विवादित 27वें संविधान संशोधन के जरिये आसिम मुनीर की ताकत को बढ़ाया गया. उनके लिए सीडीएफ नाम का नया पद गढ़ा गया, जिस पर बैठने के बाद वे ताउम्र पाकिस्तान के अघोषित तानाशाह बने रहेंगे. इस बात का नोटिफिकेशन जारी होकर ये काम जल्द से जल्द होना था, लेकिन इसी बीच अटकलें ये लगाई जा रही हैं कि शहबाज शरीफ का मूड बदल गया है. दरअसल पाकिस्तान के उपचुनाव का रिजल्ट हाल ही आया और उनकी पार्टी PMLN की ताकत बढ़ने के बाद वे इस काम में देरी कर रहे हैं. कहा ये भी जा रहा है कि उनके भाई नवाज शरीफ भी इसमें सलाह-मशविरा दे रहे हैं कि अगर आसिम मुनीर को अल्टीमेट पावर मिली, तो उनकी औकात कुछ नहीं रह जाएगी. आसिम मुनीर -शहबाज शरीफ. आसिम मुनीर कब बनेंगे CDF ? आसिम मुनीर को 29 नवंबर, 2022 को सेना प्रमुख बनाया गया था. इस हिसाब से 29 नवंबर को उनका तीन साल का कार्यकाल खत्म हो चुका है. अब तक नए सेना प्रमुख के तौर पर उनके नाम का नोटिफिकेशन भी नहीं आया है. वैसे तो पाकिस्तानी संसद ने सेना प्रमुख के कार्यकाल को 5 साल कर दिया था, ऐसे में वे पद पर तो बने रहेंगे लेकिन इसका नोटिस अब तक नहीं आया है. वहीं पिछले महीने हुए संविधान संशोधन में पाकिस्तान में CJCSC की जगह CDF पद बनाया गया जो तीनों सेनाओं के बीच तालमेल रखेगी. इस पर आसिम मुनीर को बैठना है. CJCSC शाहिद शमशाद मिर्जा का भी रिटायरमेंट 27 नवंबर को हो गया, पर मुनीर का नया पद अस्तित्व में नहीं आ पाया है. जब होना ही है, तो देरी क्यों? हालांकि इस मामले में तस्वीर साफ करने के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ आए और उन्होंने सोशल मीडिया पर एक्स अकाउंट से लिखा – ‘CDF की नोटिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जल्द ही नोटिफिकेशन जारी होगी.’ इस मामले में हो रही देरी को लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा. इसी बीच यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने भी 27वें संविधान संशोधन में देरी को लेकर टिप्पणी की थी, जिस पर पाकिस्तान बौखला गया था.  

India Plan-B on Tariff: ट्रंप की चाल हुई फेल, मोदी सरकार की रणनीति ने किया बड़ा असर

ट्रंप टैरिफ की हवा निकाल दी! मोदी सरकार के प्लान-B ने बचाई भारतीय अर्थव्यवस्था—जानें कैसे हुआ कमाल India Plan-B on Tariff: ट्रंप की चाल हुई फेल, मोदी सरकार की रणनीति ने किया बड़ा असर मोदी सरकार का प्लान-B आया काम, ट्रंप टैरिफ का असर किया बेअसर—भारत ने ऐसे पलट दिया खेल   नई दिल्ली यह कहना कि अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव पूरी तरह असफल हो गया, थोड़ी जल्दबाजी होगी. लेकिन ये तो अब कहा ही जा सकता है कि भारत ने अमेरिकी टैरिफ का तोड़ निकाल लिया है. दूसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े बता रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर ट्रंप की दबाव नीति काम नहीं आई.  दरअसल, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 8.2% रही, जो कि उम्मीद से बढ़कर है. क्योंकि RBI ने 6 फीसदी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया था. तमाम रेटिंग एजेंसियों ने भी 7.0-7.6 फीसदी के बीच जीडीपी ग्रोथ रहने का भरोसा जताया था, यानी हर पैमाने पर भारतीय अर्थव्यवस्था में बेहतर करती दिख रही है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग में 9.1% और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 7.2% उछाल देखने को मिली है. सर्विस-सेक्टर का भी शानदार प्रदर्शन रहा है. अमेरिका ने थोपा एकतरफा टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की रणनीति अब फेल होती नजर आ रही है, ट्रंप ने भारत में एकतरफा 50 फीसदी टैरिफ थोप दिया, उन्हें लगा है कि टैरिफ के दबाव में भारत झुक जाएगा, और वो अपनी बातें मनवाने में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, और अब उसका परिणाम भी दिख रहा है कि ट्रंप की दबाव नीति की हवा निकल चुकी है. बड़ेबोले ट्रंप ने तो भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डैड इकोनॉमी' तक करार दे दिया था.  लेकिन हकीकत में भारतीय अर्थव्यवस्था को रोकने के लिए ट्रंप ने चाल चली थी, उसे सरकार ने अपने प्लान-बी से फ्लॉप कर दिया, और भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ती जा रही है. इसी कड़ी में दूसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े ट्रंप की दबाव नीति को करारा जवाब है. कहा तो ये भी जा रहा है कि तीसरी तिमाही में और बेहतर जीडीपी के आंकड़े आ सकते हैं.  क्या है भारत का प्लान-B अब आइए जानते हैं कि आखिर भारत ने ऐसा क्या किया, जिससे ट्रंप टैरिफ बेअसर हो गया. दुनिया जानती है कि खपत के लिहाज भारत आज के दौर में सबसे बड़ा बाजार है, हर कोई इस बाजार में प्रवेश करना चाहता है. क्योंकि भारत में डिमांड बनी हुई है. यही देश की सबसे बड़ी ताकत है.  दरअसल, बात बेनतीजा होने के बाद अमेरिका ने जिस तरह से भारत पर रूसी तेल खरीदने का बहाना बनाकर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया, उसी दिन से भारत ने अपना प्लान-B को जमीन पर उतारने के लिए काम करना शुरू कर दिया. टैरिफ के शुरुआत असर को कम करने के लिए भारत ने काफी हद तक घरेलू मांग, निवेश और नीतियों पर फोकस किया. इसी कड़ी में आयकर में छूट (12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं) की व्यवस्था लागू की गई.  टैरिफ से विदेशी मांग थोड़ी मंद पड़ी, लेकिन इस बीच घरेलू खपत, निर्माण और सेवाएं तेज हो रही हों, जिससे GDP में कम असर दिखना स्वाभाविक है. टैरिफ को बेअसर करने के लिए सरकार ने खपत, कैपेक्स और रिफॉर्म पर जबरदस्त काम किया, जिसे आप Plan-B कह सकते हैं.  एकसाथ उठाए गए कई कदम सरकार की रणनीति दोतरफा रही, एक घरेलू मांग को बरकरार रखना और निवेश को प्रोत्साहित करना. अमेरिकी टैरिफ से निर्यात सेक्टर प्रभावित हुआ, जो अभी भी कुछ हद तक जूझ रहे हैं. लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेस की ताकत से GDP मजबूत बनी हुई है. अमेरिकी टैरिफ का इकोनॉमी पर कम प्रभाव के लिए ब्याज दरों में कटौती, और जीडीपी दरों में बदलाव जैसे भी कदम उठाए गए, जिससे घरेलू डिमांड को ताकत मिली.  बता दें, सितंबर महीने में भारत का कुल निर्यात 6.75% बढ़ा, जबकि अमेरिका को भेजे गए सामान में 11.9% की गिरावट दर्ज की गई. यह दर्शाता है कि भारत ने अमेरिका-व्यापार निर्भरता को कम कर दूसरे बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ा ली है. रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) की रिपोर्ट को मानें, तो अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50% तक के टैरिफ लगाने के बावजूद भारत अपना एक्सपोर्ट को बढ़ाने में सफल रहा है.  अमेरिकी विकल्प के तौर पर करीब 50 नए देशों से भारत की बातचीत चल रही है.  

चुनावी संकट गहराया: जमात का दावा—बांग्लादेश में स्वतंत्र मतदान पर खतरा

ढाका  बांग्लादेश में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज है। यूनुस की अंतरिम सरकार के आने के बाद से देश में राजनीतिक संकट गहराया हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा और विरोध के मामले सामने आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि अब तो यूनुस के समर्थक भी बगावत पर उतर आए हैं। दरअसल, कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने फरवरी 2026 के चुनाव की निष्पक्षता पर शक जताया है। राजशाही जिले में आठ इस्लामी पार्टियों की एक रैली को संबोधित करते हुए, जमात नेता मिया गुलाम पोरवार ने कहा कि सभी पार्टियां आने वाले चुनाव में हिस्सा लेने के लिए सहमत हो गई हैं। हालांकि, चुनाव की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल अभी भी बना हुआ है। खुलना कोर्ट गेट पर हुई हत्याओं को लेकर जमात नेता पोरवार ने कहा, "जिस देश में कोर्ट के सामने हत्याएं हो सकती हैं, वहां इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ऐसे प्रशासन के तहत पोलिंग स्टेशनों पर वोटिंग में धांधली या हत्याएं नहीं होंगी।" रविवार को मेट्रोपॉलिटन सेशंस जज कोर्ट के बाहर दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। किसी खास पार्टी का नाम लिए बिना, जमात नेता ने कहा कि जमात की बैठकें, अभियान और सभाओं के दौरान एक समूह ने हमले, मारपीट और तोड़फोड़ किए, जिसमें महिलाओं पर भी हमले शामिल हैं। इसके साथ ही मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए, पोरवार ने कहा, "अगर अधिकारी ऐसे हमलों को नहीं रोक सकते, तो उनकी देखरेख में हुए चुनाव निष्पक्ष नहीं हो सकते। सबको बराबर मौका नहीं दिया गया है। कई अधिकारियों की पोस्टिंग में चुपके से हेरफेर करके प्रशासन से समझौता किया गया है, जिससे एक पार्टी को फायदा हो रहा है।" जमात नेता ने कहा कि चुनाव से पहले, हर पार्टी को बराबर मौका मिलना चाहिए। यह जरूरी है। इस बीच, द बिजनेस स्टैंडर्ड ने बताया कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने आरोप लगाया है कि एक राजनीतिक दल बीएनपी और देश दोनों के खिलाफ साजिश कर रही है। रविवार को ढाका में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, बीएनपी स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य मिर्जा अब्बास ने जमात पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा, “उन्हें देश और विदेश के साथियों का समर्थन है और वे इस देश के लोगों को एक अनिश्चित भविष्य की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। वे लोगों के साथ ही हमारी माताओं-बहनों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।”

60% वैश्विक वैक्सीन उत्पादन और 20% से अधिक जेनेरिक दवाइयों का निर्यात—भारत की दवा शक्ति पर बोले जयशंकर

नई दिल्ली  भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर बायोलॉजिकल वेपन्स कन्वेंशन (बीडब्लूसी) 50 कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य संकट के दौरान भारत की भूमिका के बारे में बताया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत दुनिया के 60 फीसदी वैक्सीन बनाता है और 20 फीसदी जेनेरिक दवाइयां सप्लाई करता है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "मैं आज आपसे कुछ बातों पर गौर करने की गुजारिश करता हूं, एक, भारत दुनिया की 60 फीसदी वैक्सीन बनाता है। दो, भारत दुनिया की 20 फीसदी से ज्यादा जेनेरिक दवाइयां सप्लाई करता है, और अफ्रीका की 60 फीसदी जेनेरिक दवाइयां भारत से आती हैं। तीन, भारत में लगभग 11,000 बायोटेक स्टार्टअप हैं, जो 2014 में सिर्फ 50 थे।  अब यह दुनिया भर में तीसरा सबसे बड़ा बायोटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम है। चार, डिजिटल हेल्थ में बड़ी तरक्की के साथ हमारा हेल्थकेयर इन्वेस्टमेंट तेजी से बढ़ा है। पांच, हमारा रिसर्च नेटवर्क: आईसीएमआर, डीबीटी लैब्स, एडवांस्ड बीएसएल-3 और बीएसएल-4 सुविधाएं, वे कई तरह के जैविक खतरों का पता लगा सकते हैं और उनका जवाब दे सकते हैं।" उन्होंने कहा कि भारत के मजबूत प्राइवेट सेक्टर ने इसे आगे बढ़ाया है। इसने प्रोडक्शन बढ़ाने, दबाव में इनोवेट करने और ग्लोबल आउटरीच मैनेज करने की क्षमता दिखाई है। कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत ने वैक्सीन मैत्री शुरू किया। वैक्सीन मैत्री का मतलब है वैक्सीन फ्रेंडशिप, जिसे हमने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से शुरू किया और 100 से ज्यादा कम विकसित और कमजोर देशों को लगभग 300 मिलियन वैक्सीन डोज और मेडिकल मदद दी। इनमें से कई मुफ्त थीं।  इसका संदेश साफ था कि जब इतने बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ता है, तो एकजुटता जान बचाती है। भारत हमेशा एक भरोसेमंद वैश्विक साझेदार रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत एक जिम्मेदार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्य के रूप में, संवेदनशील और दोहरे उपयोग वाले सामान और तकनीक के प्रसार को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है और इस मामले में हमारा एक अच्छा रिकॉर्ड है। भारत ऐसे सामान और तकनीक के निर्यात को नियंत्रित करता है, जो परमाणु, जैविक, रासायनिक या अन्य विनाशकारी हथियारों के विकास में उपयोग हो सकते हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1540 को लागू करने के लिए एक मजबूत कानूनी और नियामक प्रणाली स्थापित की है। यह प्रस्ताव सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार को रोकने और उनके विकास के लिए सामग्री और तकनीक के निर्यात को नियंत्रित करने के लिए है। उन्होंने कहा कि अब, भारत न सिर्फ बीडब्ल्यूसी और सीडब्ल्यूसी की बहुपक्षीय संधियों का एक पार्टी है, बल्कि तीन बहुपक्षीय मुख्य एक्सपोर्ट कंट्रोल रिजीम, वासेनार अरेंजमेंट, मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम और ऑस्ट्रेलिया ग्रुप (एजी) का भी एक सक्रिय सदस्य है। ऑस्ट्रेलिया समूह इस कॉन्फ्रेंस के लिए सबसे जरूरी है क्योंकि यह दोहरे उपयोग वाले केमिकल्स, जैविक सामग्री (बायोलॉजिकल मटीरियल) और उससे जुड़ी चीजों पर नियंत्रण से जुड़ा है। इस साल ऑस्ट्रेलिया समूह की 40वीं वर्षगांठ है और हमें खुशी है कि एजी के लोग हमारे साथ हैं।

West Bengal SIR पर ECI का स्टैंड मजबूत: सुप्रीम कोर्ट में कहा—शांतिपूर्ण चुनाव के लिए SIR अनिवार्य

नई दिल्ली  चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठाए गए आरोपों का जवाब दिया है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि SIR प्रक्रिया के कारण मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने के आरोप अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किए जा रहे हैं और यह निहित राजनीतिक हित साधने के लिए किया जा रहा है। सांसद डोला सेन ने 24 जून और 27 अक्टूबर 2025 को जारी SIR आदेशों की वैधता को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी। इसके जवाब में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे में स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया संवैधानिक रूप से अनिवार्य, सुस्थापित और नियमित रूप से संचालित की जाती है। चुनाव आयोग का तर्क चुनाव आयोग ने कहा कि मतदाता सूचियों की शुद्धता और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए SIR आवश्यक है। आयोग ने इस प्रक्रिया का हवाला टीएन शेषन बनाम भारत सरकार (1995) मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मान्यता प्राप्त होने के साथ जोड़ा। आयोग ने कहा कि SIR संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 15, 21 और 23 के अंतर्गत आता है, जो चुनाव आयोग को आवश्यकता पड़ने पर मतदाता सूचियों में विशेष संशोधन करने का अधिकार देता है। SIR क्यों जरूरी है? हलफनामे में कहा गया कि 1950 के दशक से मतदाता सूचियों में समय-समय पर संशोधन किए जाते रहे हैं। इसमें 1962-66, 1983-87, 1992, 1993, 2002 और 2004 जैसे वर्षों में देशव्यापी संशोधन शामिल हैं। पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और मतदाताओं की बढ़ती गतिशीलता के कारण मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम जोड़ना और हटाना नियमित प्रक्रिया बन गई है।   चुनाव आयोग ने कहा कि दोहराई गई और गलत प्रविष्टियों का जोखिम बढ़ने के कारण तथा देश भर के राजनीतिक दलों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय स्तर पर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का निर्णय लिया गया है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि इसे संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया के रूप में मान्यता दी जाए और राजनीतिक आरोपों से स्वतंत्र रूप से देखा जाए।  

आकाश डिफेंस सिस्टम ने दिखाया भारतीय सैन्य शक्ति का दम, ऑपरेशन सिंदूर में प्रदर्शन देख वैश्विक विशेषज्ञ दंग

नई दिल्ली  भारत की रक्षा क्षमता में एक और माइलस्टोन जुड़ गया है। भारतीय सेना ने DRDO द्वारा तैयार किए गए ‘आकाश प्राइम’ एयर-डिफेंस सिस्टम का ऐसा परीक्षण किया जिसने वैश्विक सैन्य विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यह वही प्रणाली है जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने प्रदर्शन से कई देशों को चौंका दिया था। पहले ही अर्मेनिया इसके लिए भारत के साथ समझौता कर चुका है और अब तुर्की सहित कई अन्य देशों ने इसकी क्षमता को खुले तौर पर स्वीकार किया है। आकाश प्राइम को भारत की मौजूदा आकाश प्रणाली का अत्याधुनिक और उन्नत संस्करण माना जाता है। खास बात यह है कि यह शानदार प्रदर्शन अत्यंत कम लागत में स्वदेशी टेक्नोलॉजी के दम पर हासिल हुआ है- जो भारत के रक्षा-आत्मनिर्भरता मिशन की बड़ी उपलब्धि है। लद्दाख में सफल टेस्ट-तेज़ रफ्तार लक्ष्य को 15,000 फीट की ऊंचाई पर मार गिराया कठोर मौसम और मुश्किल पहाड़ी भूभाग में भारतीय सेना ने जब इसका परीक्षण किया, तो आकाश प्राइम ने तेज गति से उड़ रहे हवाई लक्ष्यों को ऊंची ऊंचाइयों पर सटीकता के साथ नेस्तनाबूद कर दिया। इस सफलता ने साफ कर दिया कि भारत के पास अब ऐसा एयर-डिफेंस सिस्टम मौजूद है जो ऊंचाई, मौसम या इलाके की चुनौती से ऊपर उठकर लगातार सटीक हमला कर सकता है। यह परीक्षण सिर्फ सैन्य क्षमता का संकेत नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती ताकत और वैश्विक बाजार में उसकी बड़ी भूमिका का इशारा भी देता है। हर मौसम में सटीक हमला-नई RF तकनीक ने बनाई इसे और घातक -आकाश प्राइम को एक उन्नत रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर से लैस किया गया है। इस तकनीक से:- -बारिश, धुंध, बर्फबारी या गरमी-किसी भी मौसम में इसका प्रदर्शन नहीं बदलता -ऊबड़-खाबड़, पहाड़ी या रेतीले इलाके-हर भूभाग में लक्ष्य भेदने की क्षमता बनी रहती है   हवा में तेजी से बदलते टारगेट का पीछा कर सटीक वार कर सकता है -यह संस्करण अब भारतीय सेना के तीसरे और चौथे आकाश रेजिमेंट में शामिल होने जा रहा है, जिससे वायु सुरक्षा और भी मजबूत होगी। -सीमा पर चीन और पाकिस्तान की आक्रामक रणनीतियों को देखते हुए यह सिस्टम भारत के रक्षा कवच को एक नई धार देता है। कम कीमत, उच्च गुणवत्ता-भारत की मिसाइल तकनीक दुनिया को चौंका रही सरकार ने आकाश प्राइम की प्रति-यूनिट कीमत का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह साफ है कि इसका विकास पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिसके कारण इसकी लागत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में उपलब्ध समान प्रणालियों के मुकाबले बेहद कम है। कुछ अनुमान बताते हैं कि पूरी आकाश प्रणाली को तैयार करने में लगभग 1,000 करोड़ रुपये का खर्च आया-जबकि कई देशों में इस श्रेणी की मिसाइलों पर भारत की तुलना में 8–10 गुना अधिक लागत आती है।  

भारत का दमदार रेस्क्यू मिशन: चक्रवात दित्वाह के बीच कोलंबो से सभी भारतीय सुरक्षित निकाले

कोलंबो भारत ने श्रीलंका में चक्रवात ‘दित्वा' के कारण मची तबाही के बाद कोलंबो में बचाव अभियान में तेजी लाते हुए वहां फंसे भारतीय नागरिकों के आखिरी समूह को सोमवार को निकाल लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कोलंबो में भारतीय उच्चायोग ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि भंडारनायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फंसे 104 भारतीयों का आखिरी समूह ‘ऑपरेशन सागर बंधु' के तहत भारतीय वायु सेना के विमान से सुबह करीब साढ़े छह बजे तिरुवनंतपुरम पहुंचा। उच्चायोग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि श्रीलंका के बचाव प्रयासों में भारत ने अपनी मदद तेज कर दी है और अभियान का विस्तार कई प्रभावित क्षेत्रों तक किया है। विज्ञप्ति के अनुसार चेतक हेलीकॉप्टर ने कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जबकि वायु सेना के कई हेलीकॉप्टर ने कोटमाले में तलाश अभियान संचालित किया जो सबसे ज्यादा प्रभावित मध्य पर्वतीय क्षेत्र है तथा भूस्खलन एवं बाढ़ के कारण यहां सड़क संपर्क टूट गया है। विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘ खोज एवं बचाव अभियानों के लिए भारत की विशेषीकृत आपदा प्रतिक्रिया एजेंसी एनडीआरएफ और एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) की टीम कल कोलंबो पहुंची। उन्होंने श्रीलंका के अधिकारियों के साथ मिलकर कोच्चिकाडे में बचाव अभियान संचालित किया।'' विज्ञप्ति के अनुसार, एनडीआरएफ की टीम अब पुट्टलम और बादुल्ला इलाकों में काम कर रही हैं जो चक्रवात से बुरी तरह प्रभावित हैं और संपर्क से कट गए हैं। एनडीआरएफ ने कहा, ‘‘एनडीआरएफ ने बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित परिवारों की मदद की और उनकी तुरंत सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद की।'' इस बीच, श्रीलंका की वायु सेना ने एक पायलट की मौत की पुष्टि की है। उत्तर-पश्चिमी तट पर वेन्नापुवा में राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश करते समय एक बेल 212 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। श्रीलंका में चक्रवात ‘दित्वा' के कारण मची तबाही में रविवार तक 334 लोग मारे गए हैं और 370 से अधिक व्यक्ति लापता हैं तथा बाढ़ एवं भूस्खलन की वजह से कई जिले अलग थलग पड़ गए हैं।