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भजन पर पाबंदी की कोशिश पड़ी भारी, सिंगर लगनाजिता चक्रवर्ती को रोकने वाला आरोपी गिरफ्तार

कोलकाता पश्चिम बंगाल की सिंगर लगनाजिता चक्रवर्ती को परेशान करने के आरोप में एक आदमी को गिरफ्तार किया गया है। सिंगर ने आरोप लगाया कि आरोपी महबूब मलिक ने ईस्ट मिदनापुर के भगवानपुर के एक प्राइवेट स्कूल में उनके लाइव शो के दौरान उनके साथ गाली-गलौज की और उन पर हमला करने की कोशिश की। बंगाली गाने ‘बसंतो एशे गेछे’ से मशहूर हुईं लगनाजिता चक्रवर्ती ने बताया कि वह एक बंगाली धार्मिक गाना, ‘जागो मां’गा रही थीं, तभी मलिक स्टेज पर आया और उसने उन पर शारीरिक हमला करने की कोशिश की। लगनाजिता चक्रवर्ती ने पुलिस शिकायत में कहा, “वह मुझे मारना चाहता था। ” उन्होंने बताया कि वह उन पर चिल्ला रहा था और कह रहा था, “बहुत हो गया जागो मां, अब कुछ सेक्युलर गाना गाओ।” पश्चिम बंगाल के कोलकाता में माता के भजन को लेकर विवाद हो गया। आयोजक ने आपत्ति जताई और कहा कि ‘ई ना चोलबे’। पुलिस ने आरोपी महबूब मलिक को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद इलाके में तनाव है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आयोजक का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई है। सीनियर पुलिस अधिकारी मिथुन डे ने बताया कि महबूब मलिक इस इवेंट का मुख्य आयोजक और स्कूल का मालिक था। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि मलिक सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य हैं। BJP के शंकुदेब पांडा ने कहा, “पश्चिम बंगाल जिहादियों के हाथ में है। वे सिंगर को बता रहे हैं कि उसे कौन सा गाना गाना चाहिए। यह हिंदू विरोधी रवैया था।” उन्होंने आरोप लगाया, “जब वह (लगनाजिता चक्रवर्ती) पुलिस स्टेशन गई थीं, तो ममता बनर्जी की पुलिस ने पुलिस शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया।” हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। सिंगर ने यह भी आरोप लगाया कि भगवानपुर पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अधिकारी ने केस दर्ज करने से मना कर दिया। बाद में केस दर्ज किया गया और मलिक को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अधिकारी मिथुन डे ने कहा, “भगवानपुर पुलिस स्टेशन के इंचार्ज और एक और अधिकारी के खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच शुरू की गई है। हम उनकी लापरवाही के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।”

डिब्रूगढ़ से पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला: असम में बांग्लादेशी घुसपैठ पर कही बड़ी बात, यूरिया प्लांट का लोकार्पण

गुवाहाटी पीएम नरेंद्र मोदी दो दिवसीय असम के दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गुवाहाटी स्थित ‘स्वाहिद स्मारक क्षेत्र’ में असम आंदोलन के शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद डिब्रूगढ़ में अमोनिया-यूरिया प्लांट का उद्घाटन किया, जिसकी सालाना उत्पादन क्षमता 12.7 लाख टन होगी। यह यूनिट 2030 तक चालू हो जाएगी। प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को खाद के लिए लाठियां खानी पड़ती थीं। जो काम कांग्रेस को उस समय करना था, उसने नहीं किया। इसलिए मुझे एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ रही है। बांग्लादेशी घुसपैठियों को कांग्रेस ने ही बसाया है और कांग्रेस ही उन्हें बचा रही है। SIR का विरोध कर रही है। तुष्टिकरण और वोट बैंक के इस कहर से हमें असम को बचाकर रखना है। मैं आपको गारंटी देता हूं कि असम की पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए भाजपा फौलाद बनकर खड़ी है। इससे पहले पीएम ने गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी में क्रूज पर 25 बच्चों के साथ करीब 45 मिनट परीक्षा पे चर्चा भी की। मोदी ने नामरूप में ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कॉर्प लिमिटेड (BVFCL) के मौजूदा परिसर में नए फर्टिलाइजर यूनिट की आधारशिला रखी। ANI के मुताबिक गुवाहाटी दौरे पर परीक्षा पर चर्च कार्यक्रम में भाग लेंगे, जिसमें प्रधानमंत्री ने असम के 25 प्रतिभाशाली छात्रों से बात करेंगे. यह बातचीत ब्रह्मपुत्र नदी में चल रहे एक क्रूज पर आयोजित की जाएगी. असम आंदोलन (1979-1985) ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) और ऑल असम गण संग्राम परिषद के नेतृत्व में चला था. इसका मुख्य उद्देश्य अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान कर उन्हें राज्य से बाहर करना था. इस आंदोलन के दौरान व्यापक प्रदर्शन, हड़तालें और पुलिस कार्रवाई हुईं, जिसमें सैकड़ों लोग शहीद हो गए. आंदोलन का समापन 1985 में असम समझौते के साथ हुआ, जिस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हस्ताक्षर किए थे.

ट्रेन से सफर हुआ महंगा! रेलवे ने बढ़ाया किराया, स्लीपर और एसी टिकट के नए दाम देखें

नई दिल्ली  रेल यात्रा करने वालों की जेब अब ज्यादा ढीली होने वाली है। भारतीय रेलवे ने किराए के ढांचे में बदलाव करने का फैसला किया है। ऐसे में जनरल, स्लीपर और एसी श्रेणी में टिकट महंगे हो जाएंगे। रेलवे ने बताया है कि किराये की नई दरें 26 दिसंबर से लागू हो जाएंगी। जानकारी के मुताबिक पैसेंजर ट्रेनों के टिकट के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। मेल, एक्सप्रेस और नॉन एसी कैटिगरी में 2 पैसा प्रति किलोमीटर किराया बढ़ाया गया है। इस हिसाब से 500 किलोमीटर पर 10 रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे।   अनुमान है कि इस बढ़े हुए किराए से रेलवे को 600 करोड़ रुपये का फायदा होगा। जानकारी के मुताबिक 215 किलोमीटर से ज्यादा के सफर के लिए यात्रियों के जनरल ट्रेन में एक पैसा प्रति किलोमीटर ज्यादा देना होगा। वहीं मेल/एक्सप्रेस, स्लीपर और एसी ट्रेन में सफर के लिए 215 किलोमीटर से ज्यादा के सफर पर दो पैसे प्रति किलोमीटर ज्यादा देने होंगे। नॉन एसी कोच में सफर के लिए 500 किलोमीटर के सफर पर 10 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। रेलवे का कहना है कि निम्न आय वाले परिवारों का ध्यान रखते हुए लोकल ट्रेनों के किराए में बढ़ोतरी नहीं की गई है। रेलवे के मुताबिक पिछले 10 सालों में ट्रेनों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। इसके अलावा ट्रैक का भी विस्तार किया गया है। सुरक्षा और अच्छे संचालन के लिए ज्यादा कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है। ऐसे में रेलवे पर सैलरी का बोझ भी बढ़ा है। रेलवे का कहना है कि अब मानव संसाधन पर 1.15 लाख करोड़ का खर्च है। इसके अलावा पेंशन का बोझ पहले से है। ऐसे में संतुलन के लिए किराए में वृद्धि जरूरी थी।  

दिव्यांग छात्राओं के यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा फैसला, कोर्ट ने स्पेशल स्कूल के प्राचार्य को ठहराया दोषी

मुंबई  महाराष्ट्र की एक स्पेशल कोर्ट ने एक दिव्यांग छात्रों के लिए बनाए गए एक स्कूल के पूर्व प्राचार्य और शिक्षक को यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई है। प्राचार्य और शिक्षक के ऊपर आरोप थे कि पद पर रहते हुए वह बोलने और सुनने में असमर्थ छात्राओं को अपने ऑफिस में बुलाते थे और फिर उनके साथ यौन उत्पीड़न करते थे। कोर्ट ने शिक्षकों को जीवन का मार्गदर्शक बताते हुए इसे बहुत बड़ा विश्वासघात करार दिया, और आरोपियों के 5 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई।   विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर नवंदर ने फैसला सुनाने के पहले कहा, "स्कूल एक पवित्र संस्था होती है। बच्चे अपने शिक्षक पर भरोसा करते हैं और उन्हें जीवन का मार्गदर्शक मानते हैं। यदि इस विश्वास के साथ विश्वासघात किया जाए और जब बच्चे के लिए भगवान समान व्यक्ति ही यौन उत्पीड़न करे तो इसमें कोई संदेह नहीं कि पीड़ित जीवन भर के लिए मानसिक आघात झेलेंगे। अदालत ने कहा कि उस स्कूल में सभी नाबालिग लड़कियां थीं, वह सुनने और बोलने में अक्षम थीं। स्कूल के प्राचार्य और शिक्षकों को ही उनके संरक्षण की जिम्मेदारी मिली हुई थी। आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बच्चों की शारीरिक अक्षमता का अनुचित लाभ उठाया। इसके बाद अदालत ने आरोपी 62 वर्षीय लॉर्डु पापी गाड़े रेड्डी (पूर्व प्राचार्य) और 61 साल के दत्तकुमार भास्कर पाटिल को पॉस्को अधिनियम की धारा 10 और भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत दोषी ठहराया। क्या था पूरा मामला? यह पूरा मामला 2013 और 2014 के बीच का था। इसी बीच रेड्डी और भास्कर यहां पर प्राचार्य और शिक्षक के रूप में पदस्थ थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार वह छात्राओं को अपने कक्ष में बुलाते और फिर उन्हें गले लगाकर चूमते थे, जबकि दूसरा शिक्षक उनकी अश्लील तस्वीरें खींचता था और उनके साथ अनुचित तरीके से छेड़छाड़ करता था। इनके यह काले कारनामे करीब दो सालों तक चलते रहे। इसके बाद एक पीड़ित ने इसके बारे में अपने परिजनों को बताया, जिससे यह मामला खुला। एक के सामने आने के बाद बाकी छात्राओं ने भी अपने साथ हुई आपबीती को बताया। क्योंकि यह सभी छात्राओं बोलने में असमर्थ थीं और नाबालिग थीं इसलिए इनके बयान लेते समय भाषा विशेषज्ञों की भी मदद ली गई, जिन्हें अदालत ने ठोस माना। मामले के शुरू होने के कुछ समय के बाद मुख्य शिकायतकर्ता और उसका परिवार अपनी शिकायत से मुकर गया। हालांकि अदालत ने दूसरी छात्राओं के आधार पर इस मुकदमे को जारी रखा। अदालत ने अभिभावकों की भी की आलोचना अदालत ने अपने इस फैसले में माता-पिता और संस्थानों की इस प्रवृ्त्ति की भी आलोचना की कि वह छात्राओं की शिकायतों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर तब जब शिक्षक समाज में ऊंचा दर्जा रखते हों। इस फैसले में अदालत ने प्रत्येक दोषी को पांच साल की सजा के अलावा 25 हजार रुपए का जुर्माना भी भरने का आदेश दिया। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश दिया कि पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए, क्योंकि जुर्माने की राशि पीड़ितों की पीड़ा की भरपाई करने के लिए अपर्याप्त है।  

एक जयशंकर बनाम पूरी दुनिया? सवाल पर विदेश मंत्री का मोदी से जुड़ा जवाब

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस जयशंकर अपनी वाकपटुता के लिए जाने जाते हैं। पुणे में एक कार्यक्रम वैश्विक राजनीति और रणनीति पर बात करते हुए जयशंकर ने भगवान श्री कृष्ण और भगवान हनुमान को दुनिया का सबसे महान रजानयिक बताया। इसी कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत के लिए एक जयशंकर काफी है या फिर हमें और जयशंकर की जरूरत है? इस सवाल का जवाब मुस्कराकर देते हुए जयशंकर ने कहा कि आपका सवाल ही गलत है। विदेश मंत्री ने कहा, "आपका सवाल यह होना चाहिए कि एक मोदी हैं। क्योंकि असली फर्क नेता और उसके विजन, आत्मविश्वास से पड़ता है। देश अपने नेताओं के विजन से पहचाने जाते हैं। उनके उस विजन को अमल में लाने वाले कई लोग होते हैं, लेकिन आखिरकार नेता ही मुख्य होता है।" पुणे बुक फेस्टिवल में पश्चिमी राजनयिकों पर अपनी बात रखते हुए जयशंकर ने महाभारत और रामायण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "ज्यादातर किताबें पश्चिमी लोगों के द्वारा लिखी गई हैं… मैं यह पढ़-पढ़कर थक गया हूं कि वह बहुत रणनीतिक हैं, जबकि भारत के पास रणनीति और राजकौशल की कोई परंपरा नहीं है। हम अपनी आस्थाओं और संस्कृतियों के साथ बड़े हुए हैं लेकिन हम अपने ही शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते… इसलिए दुनिया भी उन्हें नहीं जानती है।" उन्होंने कहा, "आम तौर पर हम महाभारत और रामायण को सत्ता, संघर्ष और परिवार की कहानी मानते हैं। हम इनकी रणनीति, युक्ति और गेम प्लान के बारे में स्पष्ट रूप से सोच नहीं पाते। दरअसल, एक बार जब मुझसे किसी ने पूछा था कि आपके हिसाब से सबसे महान राजनियक कौन हैं, तो मैंने कहा था कि भगवान श्रीकृष्ण और हनुमान। इनमें से एक महाभारत के महान राजनयिक हैं, तो दूसरे रामायण के।" गठबंधन के दौर में है दुनिया: जयशंकर वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल को लेकर अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि आज की दुनिया गठबंधन की राजनीति जैसी है। उन्होंने कहा, "आज किसी के पास भी पूर्ण बहुमत नहीं है। किसी गठबंधन के पास भी पूर्ण बहुमत नहीं ह। ऐसे में रोज नए समीकरण बनते हैं, सौदे होते हैं, कोई ऊपर होता है, कोई नीचे, हर दिन कोई नया मुद्दा उभरकर सामने आता है। बहुध्रवीय दुनिया कई पार्टियों के जैसी है। कभी आप एक के साथ होते हैं, तो कभी दूसरे मुद्दे पर दूसरे के साथ… लेकिन इस सब बातों के बीच बस एक ही सिद्धांत है… मेरे देश की मदद करना, जो भी मेरे देश के हित में हो, मदद कर रहा हो… बस वही मेरा विकल्प है।"

‘इस्लाम की विचारधारा अमेरिका की स्वतंत्रता के खिलाफ’—तुलसी गबार्ड का बड़ा दावा

एरिजोना अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) तुलसी गबार्ड ने इस्लाम की विचारधारा को अमेरिका की आजादी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह कोई धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि एक राजनीतिक विचारधारा है, जिसका उद्देश्य शरीयत कानून के तहत वैश्विक खिलाफत स्थापित करना है। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पश्चिमी लोकतांत्रिक मूल्यों के बिल्कुल विपरीत है। एरिजोना में टर्निंग पॉइंट यूएसए के अमेरिका फेस्ट को संबोधित करते हुए गबार्ड ने कहा कि यह खतरा अब केवल विदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के भीतर भी जड़ें जमा चुका है। उन्होंने कहा, “यह इस्लाम की विचारधारा हमारी आजादी के लिए सीधा खतरा है। यह एक राजनीतिक एजेंडा है, जिसका मकसद वैश्विक खिलाफत और शरीयत आधारित शासन स्थापित करना है।” यूरोप जैसी स्थिति की चेतावनी तुलसी गबार्ड ने चेताया कि यदि अमेरिका ने समय रहते इस विचारधारा को पहचानकर उसके खिलाफ कदम नहीं उठाए, तो देश को यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। तुलसी ने कहा, “अगर हम कार्रवाई नहीं करते और इसे उसके असली रूप में पहचान कर चुनौती नहीं देते हैं तो अमेरिका भी उन देशों की राह पर चला जाएगा। वहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लग चुके हैं।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जर्मनी में क्रिसमस मार्केट्स रद्द किए जा रहे हैं, जबकि ब्रिटेन में लोग सड़क किनारे चुपचाप प्रार्थना करने पर भी गिरफ्तार किए जा रहे हैं। अमेरिका के भीतर कट्टरपंथ के आरोप तुलसी गबार्ड ने दावा किया कि अमेरिका के कई शहरों में कट्टर इस्लाम की मौलवी खुलेआम युवाओं को भड़काने और कट्टरपंथ की ओर धकेलने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “डियरबॉर्न (मिशिगन) और मिनियापोलिस (मिनेसोटा) जैसे इलाकों में इस्लाम की मौलवी खुलकर इस विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं और युवाओं की भर्ती कर रहे हैं।” उन्होंने पैटरसन (न्यू जर्सी) और ह्यूस्टन (टेक्सास) का भी उल्लेख किया। तुलसी गबार्ड ने कहा कि इस विचारधारा से जुड़े लोग असहमति की आवाजों को दबाने के लिए केवल सेंसरशिप नहीं, बल्कि हिंसा और धमकी का भी सहारा लेते हैं। तुलसी में कहा, “अगर आप अपने ईश्वर-प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हैं, तो वे आपको चुप कराने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैंष” उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट तक के लिए लोगों को धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने सरकार और समाज से कट्टरपंथी विचारधाराओं के खिलाफ सख्त और स्पष्ट कार्रवाई की अपील की।  

भाजपा के जिक्र के साथ मोहन भागवत का बड़ा बयान: ‘हमें सिर्फ सेवा संगठन समझना भारी भूल’

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों पश्चिम बंगाल के चार दिवसीय दौरे पर हैं। उत्तर बंगाल से कोलकाता पहुंचे भागवत ने साइंस सिटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अगर आप संघ को समझना चाहते हैं, तो तुलना करने से गलतफहमियां पैदा होंगी। अगर आप संघ को केवल एक अन्य सेवा संगठन मानते हैं, तो आप गलत होंगे। आरसएस प्रमुख ने कहा कि कई लोगों में 'संघ' को भाजपा के नजरिए से समझने की प्रवृत्ति होती है, जो एक बहुत बड़ी गलती है। संघ की स्थापना का सार एक ही वाक्य में है 'भारत माता की जय'। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि अपनी खास संस्कृति, परंपरा और स्वभाव का नाम है। संघ का लक्ष्य इन मूल्यों को बनाए रखते हुए भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए समाज को तैयार करना है। 'संघ को समझाने के लिए इतिहास उदाहरण' भागवत ने साफ किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म किसी राजनीतिक मकसद, प्रतिस्पर्धा या विरोध के लिए नहीं हुआ। उनका कहना था कि संघ पूरी तरह हिंदू समाज के संगठन, उन्नति और संरक्षण के लिए समर्पित है। संघ की भूमिका समझाने के लिए भागवत ने इतिहास का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के निधन के बाद अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष भले ही थम गया, लेकिन राजा राम मोहन राय के समय से शुरू हुई समाज सुधार की प्रक्रिया लगातार चलती रही। उन्होंने इसे समुद्र के बीच एक ऐसे द्वीप की तरह बताया, जो समय के साथ मजबूती से कायम रहा। हमें अपने समाज को मजबूत करना है- आरएसएस प्रमुख अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने समाज को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि भारत एक महान विरासत वाला देश है और उसे वैश्विक नेतृत्व के लिए खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि अतीत में हम अंग्रेजों से युद्ध हार गए थे, लेकिन अब वक्त है कि हम अपने समाज को संगठित और सशक्त बनाएं। उनका पूरा भाषण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, ‘व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ की सोच और एकजुट हिंदू समाज के साथ समृद्ध भारत के लक्ष्य पर केंद्रित रहा।

सांस लेना हुआ मुश्किल: जहरीली हवा का कहर जारी, फिलहाल राहत नहीं

नई दिल्ली राजधानी में स्थानीय कारकों के चलते प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में हवा की गति धीमी होने के चलते लगातार छठे दिन भी हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार है। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के अनुसार, रविवार सुबह राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 393 दर्ज किया गया है। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। इससे पहले शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 398 दर्ज किया गया। रविवार को यानी आज हवा के गंभीर श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सुबह आठ बजे के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली के अलीपुर में एक्यूआई 375, आनंद विहार में एक्यूआई 426, अशोक विहार में 425, आया नगर में 309, बवाना में 439, बुराड़ी में 378, चांदनी चौक इलाके में 448 एक्यूआई दर्ज किया गया है। वहीं, डीटीयू में 433, द्वारका सेक्टर 8 इलाके में 408, आईजीआई एयरपोर्ट टी3 इलाके में 332, आईटीओ में 393, जहांगीरपुरी में 438, लोधी रोड 357, मुंडका 433, नजफगढ़ में 371, पंजाबी बाग में 420,  आरकेपुरम 394, रोहिणी 433, सोनिया विहार 410, विवेक विहार 413,  वजीरपुर में 443 दर्ज किया गया है। बीते आठ साल में सबसे प्रदूषित रहा दिसंबर दिल्ली में दिसंबर की ठंड के साथ इस बार जहरीली हवा ने भी लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि राजधानी में सांस लेना भी चुनौती जैसा महसूस हो रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि दिसंबर की शुरुआत से ही दिल्ली की हवा लगातार खराब बनी हुई है और पहले 18 दिनों में ही इसने बीते आठ साल की सबसे खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दर्ज किया। महीने की शुरुआत से ही हालात ऐसे रहे कि ज्यादातर दिनों में हवा बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में बनी रही। दिसंबर के पहले आठ दिनों तक लगातार एक्यूआई 300 से ऊपर रहा जिससे पूरे महीने का औसत एक्यूआई करीब 343 तक पहुंच गया। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 14 दिसंबर को एक्यूआई 461 दर्ज किया गया, जो बीते आठ वर्षों में दिसंबर महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। हवा के बिगड़ते हालात को देखते हुए 13 दिसंबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) का सबसे सख्त चरण, यानी स्टेज-चार लागू करना पड़ा।

वीजा संकट: भारत में H-1B अपॉइंटमेंट कैंसिल, प्रोसेस में लगेंगे कई महीने

नई दिल्ली भारत में बड़े पैमाने पर पहले से शेड्यूल एच-1बी वीजा अपॉइंटमेंट्स रद्द की गई हैं। इसके चलते अमेरिका जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जो अपॉइंटमेंट रद्द की गई हैं, वे पहले दिसंबर में तय थीं, लेकिन अब उन्हें कई महीनों बाद के लिए शेड्यूल किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सरकार के सख्त नियमों और सोशल मीडिया की निगरानी के लिए ये अपॉइंटमेंट्स रद्द किए गए हैं। दूतावास ने जारी किया बयान जिन आवेदकों की वीजा अपॉइंटमेंट्स 15 दिसंबर के बाद तय थी, वे नए निर्देश से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं और इनमें से कुछ इंटरव्यू अब अक्तूबर 2026 के लिए शेड्यूल कर दिए गए हैं। भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने वीजा आवेदकों से अपील की है कि वे अपने पहले से तय इंटरव्यू तारीख के लिए काउंसलर ऑफिस न आएं। एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी दूतावास ने लिखा, 'अगर आपको एक ईमेल मिला है, जिसमें बताया गया है कि आपकी वीजा अपॉइंटमेंट री-शेड्यूल कर दी गई है और आपको नई तारीख दी गई है तो अगर आप फिर भी पुराने शेड्यूल पर इंटरव्यू के लिए आते हैं तो आपको दूतावास में एंट्री नहीं मिलेगी।' कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए बढ़ी चुनौती अमेरिका की ट्रंप सरकार ने वीजा नियमों में सख्ती बढ़ाई है, जिसके चलते वीजा प्रक्रिया में लंबा समय लग रहा है। इसके चलते वे लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जो इंटरव्यू के लिए भारत में हैं। अब नया वीजा जारी होने तक वे वापस अमेरिका अपनी नौकरी पर नहीं जा पाएंगे। एच-1बी वीजा कैटेगरी के अलावा कई अन्य कैटेगरी के वीजा आवेदन भी अटक गए हैं। अमेरिका के अप्रवासन संबंधी वकील ने एच-1बी वीजा के अपॉइंटमेंट बड़े पैमाने पर रद्द करने के अमेरिकी सरकार के फैसले की आलोचना की है और कहा है कि इससे अमेरिका में कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए चुनौतियां बढ़ेंगी।

दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में खूनी वारदात, राहगीरों पर अंधाधुंध गोलीबारी; 10 लोगों की जान गई

जोहान्सबर्ग दक्षिण अफ्रीका में जोहान्सबर्ग के पास हुई गोलीबारी की घटना में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है। वहीं 10 अन्य घायल होने की खबर है। इनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। एएफपी ने पुलिस के हवाले से यह जानकारी दी है। एजेंसी ने बताया कि एक अज्ञात बंदूकधारी ने जोहान्सबर्ग के पास एक गांव में गोलीबारी की। पुलिस के अनुसार हमलावर के मकसद का अभी भी पता नहीं चला है। पुलिस ने कहा कि गोलीबारी की यह घटना जोहान्सबर्ग से 40 किलोमीटर की दूरी पर हुई। पुलिस ने बताया कि हमलावर ने अचानक रास्ते में आने-जाने वालों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में वहां चीख-पुकार मच गई। 10 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं कम से कम 10 लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक गोलीबारी की घटना शराबखाने के पास हुई। यहां आसपास सोने की खदाने हैं और बड़ी संख्या में मजदूर काम करते हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि उस इलाके में अवैध शराब का धंधा होता है। गोतेंग के कार्यवाहक पुलिस कमिश्नर ने बताया कि लोगों से घटना के बारे में पूछताछ की जा रही है। मौके पर अपराध और खुफिया विभाग की टीमें भी पहुंची हैं। दक्षिण अफ्रीका में आम हो गई गोलीबारी दक्षिण अफ्रीका में हाल ही में गोलीबारी की कई घटनाएं सामने आई हैं। 6 दिसंबर को कुछ बंदूकधारियों ने एक हॉस्टल पर हमला कर दिया था। इसमें कम से कम 12 लोग मारे गए थे। दक्षिण अफ्रीका में शराब का अवैध कारोबार भी चरम पर है।