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ट्रम्प ने किया ऐतिहासिक फैसला, बाइडेन के कार्यकाल के अधिकांश एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स रद्द

वाशिंगटन एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने सभी को हैरान कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में जारी किए गए 92% एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स को कैंसिल कर दिया है। इसकी जानकारी डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ के जरिए दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि यह सभी ऑर्डर्स ऑटोपेन से साइन किए गए थे, यानी जो भी ऑर्डर्स जारी किए गए थे वे मशीन द्वारा साइन किए गए थे और इस पर जो बाइडेन की मंजूरी नहीं थी। डोनाल्ड ट्रंप के इस बड़े कदम से जो बाइडेन के कई महत्वपूर्ण एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स प्रभावित हुए हैं। इन ऑर्डर्स में पर्यावरण, स्वास्थ्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे बड़े आदेश शामिल थे। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने जो बाइडेन को भी निशाने पर लिया और कहा कि अगर जो बाइडेन इन दस्तावेजों पर अपनी सहमति का दावा करेंगे तो उन पर झूठे बयान के आरोप लगेंगे। जो बाइडेन को डोनाल्ड ट्रंप ने सुस्त और चालाक बताया है। जानकारी दे दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने यह फैसला व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड्स पर हुए हमले के बाद लिया है। यह अवैध रूप से किया गया था: डोनाल्ड ट्रंप दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा कि ‘जो बाइडेन के ऑटोपेन से साइन किए गए लगभग 92% ऑर्डर्स रद्द किए जाते हैं और ऑटोपेन का इस्तेमाल तभी वैध है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट मंजूरी दी हो। यह अवैध रूप से किया गया था, बिडेन ऑटोपेन प्रक्रिया में शामिल नहीं थे।’ हालांकि ऐसा नहीं है कि जो बाइडेन के सभी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स रद्द कर दिए गए हैं। जो बाइडेन ने अपने कार्यकाल में कुल 162 एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स जारी किए थे, लेकिन इनमें से 80 ऑर्डर्स को डोनाल्ड ट्रंप ने पद संभालने के तुरंत बाद ही रद्द कर दिया था। ये बड़े एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स हो सकते हैं प्रभावित अभी भी जो बाइडेन के कई एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स जारी हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के बाद अब इन पर भी संकट मंडराने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक अब इन ऑर्डर्स में से कुछ रद्द होने का खतरा है। इनमें एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14087 शामिल है, जो अमेरिका में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों से जुड़ा हुआ है। इस ऑर्डर से ही दवा कंपनियों पर नियंत्रण लगाया जाता है और यह आम नागरिकों को सस्ती दवाएं प्रदान करवाता है। एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14096 प्रभावित हो सकता है। दूसरा एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14096 प्रभावित हो सकता है। यह ऑर्डर पर्यावरणीय न्याय पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को पर्यावरण प्रदूषण से बचाना था। इसके अलावा एक और ऑर्डर प्रभावित हो सकता है, जो एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14110 है। इस ऑर्डर के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास को लेकर नियम बनाए गए थे, खास तौर पर इसके उपयोग में क्षमता, जोखिम भरे कामों से बचाव और नैतिक उपयोग सुनिश्चित करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। अमेरिकी नियमों पर नजर डालें तो कोई भी मौजूदा राष्ट्रपति पूर्व राष्ट्रपति के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स को रद्द, संशोधित और अमान्य करने की पावर रखता है। यानी डोनाल्ड ट्रंप चाहे तो जो बिडेन के इन ऑर्डर्स को रद्द कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें ज्यादा जोर लगाने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि कुछ सीमाएं भी हैं, खासकर सजा में माफी और कमी से जुड़े मामलों में ये ऑर्डर्स वापस नहीं लिए जा सकते हैं।

बंगाल में बड़ा यू-टर्न! महीनों की ना के बाद ममता दीदी ने मंजूर किया नया वक्फ कानून, चुनाव से पहले रणनीति?

कोलकाता केंद्र के नए वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को महीनों तक टालने के बाद, पश्चिम बंगाल सरकार ने आखिरकार इस कानून को स्वीकार कर लिया है। राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य की करीब 82000 वक्फ संपत्तियों का विवरण निर्धारित समयसीमा 6 दिसंबर 2025 तक केंद्रीय पोर्टल (umeedminority.gov.in) पर अपलोड कर दिया जाए। यह जानकारी राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार देर शाम दी। सूत्रों ने बताया कि केंद्र ने राज्यों से छह दिसंबर तक सभी अविवादित वक्फ संपत्तियों की जानकारी अपलोड करने को कहा है, जिसके कारण राज्य प्रशासन ने तुरंत डेटा-एंट्री प्रक्रिया शुरू करने के लिए कदम उठाए हैं। उन्‍होंने कई मौकों पर कहा था कि वे इस संशोधित कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी. अब उनका रुख इस कानून को लेकर बदल गया है. ममता सरकार ने वक्‍फ संशोधन कानून-2025 को बंगाल में लागू करने को लेकर दिशा-न‍िर्देश जारी किए हैं. वक्‍फ संपत्तियों को केंद्रीय पोर्टल (umeedminority.gov.in) पर अपलोड करने को लेकर डेडलाइन भी फिक्‍स कर दी है. प्रदेश के माइनॉरिटी डिपार्टमेंट की ओर से 8 बिंदुओं में प्रोग्राम भी जारी किया गया है. केंद्र के वक्फ़ संशोधन अधिनियम, 2025 को लागू करने से महीनों तक इंकार करने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने आखिरकार इस कानून को अपने यहां लागू करने पर सहमत हो गई है. अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि राज्य की लगभग 82,000 वक्फ़ संपत्तियों का विवरण 5 दिसंबर की अंतिम तारीख से पहले केंद्र के पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाए. यह कानून इस साल अप्रैल में संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था. बंगाल के अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव पीबी सलीम ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को पत्र भेजकर कहा कि हर ज़िले की वक्फ़ संपत्तियों की जानकारी तय समय में umeedminority.gov.in पर अपलोड की जाए. राज्य सरकार का यू-टर्न क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की थी कि वह इस नए कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। अप्रैल में जब यह विधेयक संसद में पारित हुआ था, तब राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। 9 अप्रैल को जैन समुदाय के एक कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने कहा था- मैं वक्फ संशोधन अधिनियम को बंगाल में लागू नहीं होने दूंगी। हम 33 प्रतिशत मुसलमानों का राज्य हैं, जो सदियों से यहां रह रहे हैं। उनका संरक्षण करना मेरा कर्तव्य है। लेकिन उसके बाद कानूनी लड़ाई में भी राज्य सरकार को राहत नहीं मिली। अदालत में याचिका दाखिल करने के बावजूद सरकार को अनुकूल फैसला नहीं मिला। अधिनियम की धारा 3B के तहत सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की जानकारी छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर डालना अनिवार्य है। जिलाधिकारियों को राज्य सरकार का विस्तृत निर्देश राज्य के अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव पी. बी. सलीम ने जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में एक आठ बिंदु कार्रवाई कार्यक्रम भी जारी किया है, जिसके तहत उम्मीद पोर्टल पर उपलब्ध सुविधा और प्रक्रिया को समझना और मुतवल्लियों, इमामों और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें/कार्यशालाएं करना भी शामिल है। अधिकारी ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट को भेजे गए पत्र में चार प्राथमिक निर्देश दिए गए हैं। उनसे इमामों, मुअज्जिनों (मस्जिद में प्रति दिन पांच वक्त की नमाज कराने के लिए अजान लगाने वाला) और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें बुलाने और उन्हें अपलोड करने प्रक्रिया समझाने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारियों को कहा गया है कि पोर्टल में केवल निर्विरोध संपत्तियों को ही दर्ज किया जाए। अधिकारी ने कहा कि सभी जिलों को कहा गया है कि जहां भी तकनीकी सहायता की आवश्यकता हो वहां सुविधा केंद्र स्थापित करें।" उन्होंने कहा कि जिलों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कार्य बिना किसी देरी के हो। केंद्र सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में वक्फ अधिनियम 1995 के कई प्रावधानों में संशोधन किया। हालांकि इनमें से कुछ संशोधन अब भी उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं, लेकिन राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ध्यान दिलाया कि केंद्र के प्रस्तावित परिवर्तनों के कार्यान्वयन पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि राज्य को दी गयी समय-सीमा के भीतर निर्देश का पालन करना होगा। उन्होंने बताया कि संशोधित नियमों के तहत पश्चिम बंगाल में 8,063 वक्फ सम्पत्तियों के मुतवल्लियों (वक्फ की देखभाल करने वालों) को छह दिसंबर तक यूएमआईडी पोर्टल पर अपनी पूरी संपत्ति का विवरण दर्ज कराना होगा। कानून में प्रमुख बदलाव क्या हैं वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में कुछ बड़े प्रावधान किए गए हैं, जिनमें वक्फ बोर्ड और वक्फ ट्रिब्यूनल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति और किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित करने को लेकर अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिए जाने का प्रावधान है। इन्हीं प्रावधानों को लेकर पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विरोध देखने को मिला था। वक्‍फ संशोधन अधिनियम- 2025 को लेकर ममता सरकार के 8 निर्देश -:     वेबसाइट (उम्मीद पोर्टल) को देख लें और उससे परिचित हो जाएं.     संबंधित मुतवल्लियों, इमामों/मदरसा शिक्षकों को शामिल करते हुए बैठकें/कार्यशालाएं आयोजित करें, ताकि वे केंद्रीय पोर्टल पर विवरण जल्द से जल्द अपलोड कर सकें (मुतवल्लियों की एक सूची साझा की जा चुकी है).     डेटा एंट्री दो हिस्सों में की जाएगी: पहला, व्यक्तिगत मुतवल्लियों द्वारा ओटीपी-आधारित प्रारंभिक रजिस्ट्रेशन और दूसरा, वक्फ संपत्ति से जुड़े विवरणों का पंजीकरण.     विवादित वक्फ संपत्तियों को (यदि कोई हों) इस चरण में रजिस्‍टर्ड करने की आवश्यकता नहीं है.     कार्य के लिए अधिकारियों को विशेष रूप से नियुक्त करें और दैनिक प्रगति की निगरानी करें.     राज्य स्तर के दफ्तरों से वरिष्ठ अधिकारियों को अपने-अपने ज़िलों के दौरे पर भेजा जाए.     आठ जिलों में हेल्प डेस्क बनाए जा चुके हैं और बाकी ज़िले भी ऐसे ही हेल्प डेस्क बना सकते हैं.     राज्य वक्फ बोर्ड की ओर से हर दिन दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक वर्चुअल मोड में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें राज्यभर के सभी दफ्तरों से लोग जुड़ सकते हैं. ममता बनर्जी वक्‍फ संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी गई थीं. क्‍यों अहम है यह फैसला? ममता … Read more

सुरक्षा के लिए NHRC का अलर्ट: बसों की खतरनाक डिजाइन पर राज्यों को भेजा नोटिस

नई दिल्ली राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर सार्वजनिक परिवहन बसों की असुरक्षित डिजाइन पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग को मिली शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कई बसों में ड्राइवर केबिन को पूरी तरह अलग बनाया जा रहा है, जिससे आग लगने या आपात स्थिति में ड्राइवर और यात्रियों के बीच समय पर संवाद नहीं हो पाता। आयोग ने इसे यात्रियों की जान के लिए बड़ा खतरा बताया और इसे अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन माना है। शिकायत में कहा गया था कि हाल के दिनों में कई बसों में सफर के दौरान आग लगने की घटनाएं सामने आईं, जिनमें कई लोगों की मौत हो गई। आयोग की पीठ (जिसकी अध्यक्षता सदस्य प्रियंक कानूनगो कर रहे थे) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संरक्षण मानव अधिकार अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया और परिवहन मंत्रालय व केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (सीआईआरटी) पुणे से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी। सीआईआरटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि राजस्थान परिवहन विभाग के अनुरोध पर की गई जांच में हादसे वाली बस में कई गंभीर कमियां मिलीं। बस बॉडी निर्माण में मानकों का उल्लंघन किया गया था। स्लीपर बसों में ड्राइवर पार्टिशन डोर नियमों के खिलाफ है, फिर भी लगाया गया था। 12 मीटर से लंबी बसों में कम से कम 5 आपात निकास अनिवार्य हैं पर उपलब्ध नहीं थे।2019 से अनिवार्य फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (एफडीएसएस) बस में मौजूद नहीं था। स्लीपर कोच के स्लाइडर और चेसिस एक्सटेंशन जैसे खतरनाक हिस्से बगैर अनुमति लगाए गए थे। सीआईआरटी ने कई अहम सुझाव दिए। केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान का कहना है कि सभी स्लीपर कोचों में ड्राइवर पार्टिशन हटाया जाए, एफडीएसएस अनिवार्य रूप से लगाया जाए, 10 किलो के फायर एक्सटिंग्विशर चेक किए जाएं और नियमों के उल्लंघन वाले सभी बस बॉडी डिजाइन तत्काल बंद किए जाएं। आयोग ने कहा कि 14 अक्टूबर को जिस बस में आग लगी, वह पूरी तरह नियमों की अनदेखी का परिणाम था। न केवल निर्माता और बॉडी बिल्डर, बल्कि फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने वाले अधिकारी भी गंभीर लापरवाही के दोषी हैं। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से क्रिमिनल नेग्लिजेंस करार दिया। आयोग ने कहा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार सभी राज्यों को नियमों के सख्त पालन के लिए एडवाइजरी जारी करे। कोई भी बस ऑपरेटर या बॉडी बिल्डर सुरक्षा मानकों से बच न सके, इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर तंत्र तैयार किया जाए। सभी मुख्य सचिव सीआईआरटी की सभी सिफारिशों को राज्यभर में लागू करें। लापरवाह अधिकारियों और निर्माताओं पर तत्काल कार्रवाई हो। पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा व सहायता दी जाए। सभी राज्यों को दो सप्ताह के भीतर एटीआर भेजने का आदेश दिया गया है।

अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ सावरकर केस का ट्विस्ट, सीडी पेश की गई पर कोई सबूत नहीं

 पुणे पुणे की एमपी/एमएलए विशेष अदालत में गुरुवार को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान एक अप्रत्याशित घटना सामने आई। दरअसल हिंदू विचारक विनायक दामोदर सावरकर के कथित अपमान से जुड़े इस मामले में मुख्य सबूत के तौर पर एक सीडी पेश की गई थी। लेकिन यह सीडी अदालत में चलाए जाने पर खाली निकली। मामले की सुनवाई मजिस्ट्रेट अमोल शिंदे कर रहे हैं। शिकायत सावरकर के परपौत्र सत्यकी सावरकर ने दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने लंदन में दिए एक भाषण के दौरान सावरकर के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। सीलबंद सीडी खुलने पर बढ़ा ड्रामा इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कथित भाषण का वीडियो एक सीलबंद सीडी में अदालत में पहले ही जमा किया गया था। बताया गया था कि संज्ञान लेते समय यही सीडी अदालत में चलाई गई थी और उसी के आधार पर राहुल गांधी को समन जारी किया गया था। लेकिन गुरुवार को सुनवाई के दौरान जब सीडी खोली और चलाई गई, तो सभी हैरान रह गए। सीडी में कोई डेटा ही नहीं था। यह देख शिकायतकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता संग्राम कोल्हटकर भी चौंक गए। उन्होंने अदालत को याद दिलाया कि इसी सीडी को पहले अदालत ने देखा था और उसी के आधार पर प्रक्रिया चलाई गई थी। यूट्यूब लिंक देखने का अनुरोध खारिज खाली सीडी का खुलासा होने के बाद कोल्हटकर ने अदालत से यूट्यूब पर उपलब्ध भाषण को सीधे देखने की अनुमति मांगी। राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता मिलिंद दत्तात्रय पवार ने इसका कड़ा विरोध किया और कहा कि ऑनलाइन कंटेंट अपने आप में प्रमाणित नहीं होता। मजिस्ट्रेट शिंदे ने इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए कहा कि यूआरएल को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के अनुरूप प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं है, इसलिए यह सबूत के रूप में स्वीकार्य नहीं है। धारा 65-बी के तहत किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को अदालत में सबूत के रूप में मान्य कराने के लिए प्रमाणीकरण प्रमाणपत्र जरूरी होता है। दो और सीडी पेश करने की कोशिश भी नाकाम इसके बाद सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की विशेष अदालत ने सत्यकी द्वारा दायर उस याचिका को भी नामंजूर कर दिया जिसमें उन्होंने एक अतिरिक्त सीडी चलाने का अनुरोध किया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई सीडी मौजूद नहीं है। कुल मिलाकर 14 नवंबर को सत्यकी की मुख्य जिरह के दौरान सबूत के रूप में पेश की गई वह सीडी चलाई नहीं जा सकी जिसमें दावा किया गया था कि राहुल गांधी ने 2023 में लंदन में आपत्तिजनक भाषण दिया था। जांच में पता चला कि सीडी में कोई डेटा था ही नहीं। सत्यकी सावरकर के वकील संग्राम कोल्हटकर ने अदालत से सत्यकी सावरकर लिंक चलाने की अनुमति देने का अनुरोध किया, लेकिन अदालत ने इसे भी मंजूरी नहीं दी। न्यायिक जांच की मांग, सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित खाली हुई सीडी का रहस्य जानने और न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए कोल्हटकर ने स्थगन का अनुरोध किया। पवार ने इसका विरोध किया, लेकिन अंततः अदालत ने सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। इस पूरी घटना ने मामले में नया नाटकीय मोड़ ला दिया है और यह सवाल उठ खड़ा किया है कि पहले चलाई गई सीडी आखिर खाली कैसे हो गई।

विनीत तिवारी की फ़लस्तीन यात्रा, कहा— इंसानियत के नाम पर हमेशा फ़लस्तीन के साथ खड़ा रहना चाहिए

फ़लस्तीन यात्रा से लौटे विनीत तिवारी * फ़लस्तीन के साथ खड़ा होना इंसानियत का तकाज़ा _” अपने देश में बाँध विस्थापितों के नर्मदा बचाओ आंदोलन में या आदिवासी संगठनों के आंदोलनों में राज्य की हिंसा की वारदातों में, या सांप्रदायिक हिंसा पीड़ित इलाक़ों में स्वतंत्र जाँच दल के सदस्य की हैसियत से जाने पर अनेक बार पुलिस तथा सांप्रदायिक-फ़ासीवादी विचार वाले लोगों से आमना-सामना भी हुआ और झड़प भी, लेकिन फ़लस्तीन यात्रा मेरे लिए मानसिक तौर पर ज़्यादा चुनौतीपूर्ण थी। कभी डर का ऐसा अहसास नहीं हुआ था जैसा फ़लस्तीन जाते वक़्त हुआ। एक दूसरे देश में जहाँ इज़रायल ने हथियारों की ताक़त के दम पर इंसाफ़ को क़ैद किया हुआ है, जहाँ इतने बड़े-बड़े सीसीटीवी कैमरे लगे हैं कि लगता है, वे आपको कपड़ों में भी बिना कपड़ों के देख रहे हों, जहाँ चप्पे-चप्पे पर हथियारबंद फौजी होना आम बात है, और जहाँ इज़रायल ने 75 वर्षों से नस्लीय हिंसा फैला रखी है, वहाँ फ़लस्तीनियों के हाल जानना, उनसे मिलना कभी भी आशंकाओं से खाली नहीं होता था। लेकिन एक निश्चय था कि फ़लस्तीन के इंसाफ़ के संघर्ष को जानना और उसे जितना ज़्यादा हो सके, उतने लोगों तक पहुँचाना भी ज़रूरी है, इसीलिए मैं डर और ख़तरे के बावजूद वहाँ गया। – विनीत तिवारी (फ़लस्तीन से लौटकर)_ फ़लिस्तीनियों को मानव अधिकारों से वंचित रखकर दुनिया भर से मौकापरस्त यहूदियों और अन्य धर्मों के लोगों को फ़लस्तीन की ज़मीन पर बसाया गया है। इज़रायल में अमेरिकी समर्थन से ये लोग ऐश का जीवन जी रहे हैं। शेष आबादी, फ़लस्तीन के मूल निवासी, ईसाई और मुसलमान दोनों ही प्रताड़ित और अपमानित जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं। यह जानकारी प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने दी। वे हाल ही में फ़लस्तीन के हालात को क़रीब से जानने के लिए फ़लस्तीन गए थे। वहाँ उन्होंने दस दिनों तक वेस्ट बैंक के अनेक शहरों और गाँवों में जाकर मौजूदा हालात का जायज़ा लिया। प्रगतिशील लेखक संघ की इंदौर इकाई द्वारा अभिनव कला समाज में अनुभव साझा करने हेतु 24 नवंबर को आयोजित एक सभा में नगर के प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए विनीत तिवारी ने बताया कि इज़रायल में फ़लिस्तीनियों को बेहद सीमित आज़ादी मिली हुई है। उन्हें बेथलहम से दस किलोमीटर दूर जेरुसलम जाने के लिए भी तमाम चेकपोस्टों से होकर गुजरना पड़ता है। कदम-कदम पर उन्हें जाँच चौकियों पर इज़रायली सैनिकों के अपमानजनक व्यवहार और उनकी मनमानियों से जूझना पड़ता है। अधिकांश इज़रायली लोग फ़लिस्तीनियों के साथ घोर अपमानजनक भेदभावभरा नस्लभेदी व्यवहार करते हैं। इज़रायली सरकार ने फ़लस्तीनियों के लिए अलग सड़कें बना रखी हैं, उनकी गाड़ियों की नंबर प्लेटें भी अलग होती हैं। एक ही शहर में एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले तक जाने के लिए भी पाबंदियाँ हैं। जगह-जगह आठ मीटर ऊँची दीवारें खड़ी की हुई हैं, जिन पर पूरा वक़्त निगरानी रहती है। फ़लस्तीनी लोग उन सड़कों पर नहीं जा सकते जो इज़रायली लोगों के लिए बनायी गईं हैं। लेकिन इज़रायली लोगों को कुछ भी करने के विशेषाधिकार दिए हुए हैं। यहाँ तक कि फ़लस्तीनी लोगों की हत्या करने पर भी वे छोड़ दिये गए हैं। वेस्ट बैंक और गाज़ा के हालात में फ़र्क़ के बारे में उन्होंने कहा कि जो गाज़ा में इज़रायल ने एक झटके में कर दिया, वेस्ट बैंक में वे उसे धीरे-धीरे रोज़-रोज़ कर रहे हैं। फ़लस्तीन के किसानों की सैकड़ों एकड़ में खड़ी जैतून की फ़सल लूट लेना, उनकी ज़मीनों पर क़ब्ज़ा कर लेना, उनके मवेशी लूट लेना इज़रायली लोगों के लिए और इज़रायली फौजियों के लिए आम है। वहाँ के घुमंतू आदिवासी बेदुइन लोग इन इज़रायली घुसपैठियों के ज़ुल्म का रोज़ निशाना बनते हैं। इज़रायल दूसरे देशों से मौकापरस्त लाखों लोगों को ऐशो-आराम की ज़िंदगी का लालच देकर फ़लस्तीन की ज़मीन पर बसा रहा है ताकि फ़लस्तीनी लोग लगातार सिकुड़ते जाएँ। बेशक वेस्ट बैंक के हालात गाज़ा से बहुत बेहतर हैं। गाज़ा में अब तक क़रीब एक लाख फ़लस्तीनी लोग मार दिए गए हैं। हज़ारों लाशें मलबे के नीचे अभी भी दबी हुई हैं। नब्बे फ़ीसदी इमारतें इज़रायली बमों से ज़मींदोज़ हो चुकी हैं। अस्पताल भी बमों के निशाने बने हैं और डॉक्टर भी। स्कूल-कॉलेज तो भूल जाइए, तीन साल से युद्ध के चलते ज़रूरी दवाओं, सैनिटरी पैड्स, पीने के पानी और खाने के भी लाले पड़े हुए हैं। गाज़ा में जो लोग रहते हैं, वे भी वेस्ट बैंक के लोगों के ही रिश्तेदार हैं। अपने ही देश के लोगों और रिश्तेदारों की यह हालत उनके लिए भी बहुत तक़लीफ़देह है लेकिन वे मजबूर महसूस करते हैं। वेस्ट बैंक में हज़ारों एकड़ ज़मीन इज़रायली क़ब्ज़े में ली जा रही है जहाँ बाहर से लाकर लाखों लोगों को स्थानीय फ़लस्तीनी लोगों के अधिकार छीनकर बसाया जा रहा है। पेयजल वितरण में भी फ़लस्तीनियों के साथ पक्षपात होता है। सार्वजनिक स्थलों पर फ़लिस्तीनियों से सावधान रहने की चेतावनी के बोर्ड लगे हैं। उन्होंने पैलस्टीन एडमिनिस्ट्रेशन (पीए) और हमास के फ़र्क़ के बारे में भी बताया और एकता के सूत्रों के बारे में भी। उन्होंने बताया कि वे जेनिन रिफ्यूजी कैम्प के पीड़ितों से भी मिले जिनके हज़ारों घरों को जनवरी में एक रात में ही मलबे के ढेर में बदल दिया गया। उन्होंने जबाबदेह, नाबलुस, आर्मीनिया, जेरिको, जॉर्डन वैली, जेरुसलम और सबस्तिया आदि जगहों के अपने अनुभव बताये। एक महत्त्वपूर्ण बात उन्होंने यह भी बतायी कि सभी इज़रायली नागरिक इज़रायली सरकार के इस नस्लभेदी अमानवीय रवैये के समर्थक नहीं हैं। अनेक इज़रायली नागरिक फ़लस्तीनी नागरिकों के हक़ के लिए अपनी सरकार से लड़ भी रहे हैं। उन्हीं में रूसी मूल का युवा इज़रायली नागरिक आंद्रे और इज़रायली कम्युनिस्ट पार्टी की सांसद आईदा टॉमस सुलेमान, कैरोस फ़ॉर पैलस्टीन के रिफ़त कसीस जैसे लोग भी हैं जिनसे विनीत की मुलाक़ात हुई। वे बेतेलहेम विश्वविद्यालय के फ़लस्तीनी विद्यार्थियों से भी मिले जहाँ ग़सान कनाफ़ानी और मेहमूद दरवेश के चित्र और शब्द अंकित थे। उन्होंने बताया कि फिलिस्तीन की समस्या प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ब्रिटिश शासकों की देन है। उन्होंने फ़लस्तीन पर अपना क़ब्ज़ा हासिल करने के साथ ही दुनिया भर में फैले यहूदीवादी लोगों को फ़लस्तीन पर क़ब्ज़े के लिए उकसाना शुरू कर दिया था। बाद में 1948 में अँग्रेज़ों ने फ़लस्तीन से अपने हाथ झाड़कर यह देश यहूदियों … Read more

अंतरराष्ट्रीय एविएशन में हड़कंप: A320 अपडेट ने रोकीं सैकड़ों फ्लाइट्स

 नई दिल्ली दुनियाभर में इस्तेमाल होने वाले एअरबस A320 फैमिली के विमानों में सोलर रेडिएशन से फ्लाइट कंट्रोल डेटा करप्ट होने का खतरा सामने आया है. एअरबस ने हाल ही में हुई एक घटना के बाद अपने लगभग 6,000 विमानों पर तत्काल सॉफ्टवेयर/हार्डवेयर अपडेट का आदेश जारी कर दिया है. इसका सीधा असर भारत की एअरलाइंस इंडिगो और एअर इंडिया समेत दुनियाभर की कई कंपनियों पर पड़ रहा है. यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने भी इस पर इमरजेंसी एअरवर्थिनेस डायरेक्टिव (EAD) लागू कर दिया है, जिससे ग्लोबल उड़ान संचालन प्रभावित होना तय है.  उड़ान नहीं भर पा रहीं 6000 फ्लाइट्स, जानिए क्या है CME? अगर आप भी कहीं भी फ्लाइट से सफर करने का सोच रहे हैं तो यह खबर जरूर पढ़ लीजिए. देशभर में कई फ्लाइट्स कैसिंल हो सकती हैं या फिर उनका संचालन देरी से हो सकता है. दरअसल भारत समेत दुनियाभर के 6,000 विमानों की हवाई यात्राएं इस सप्ताह पूरी तरह से प्रभावित होने वाली हैं. इसका कारण है कि एयरबस A320 फैमिली के विमानों में टेक्निकल खराबी आ गई है, जिससे सही करने के लिए ग्राउंड किया जा रहा है. इन विमानों पर तेज सोलर रेडिएशन का खतरा मंडरा रहा है. भारत में इंडिगो और एयर इंडिया ग्रुप के लगभग 250 से ज्यादा A320 फैमिली के विमानों को इस अपग्रेड के लिए रोका जाएगा. साफ्टवेयर अपग्रेड होने में लगभग 2-3 दिन का समय लग सकता है.  जानिए क्या है समस्या Airbus A320 फैमिली एयरक्राफ्ट में बड़ी तकनीकी समस्या सामने आई है, जिसके चलते देश में 250 से ज्यादा विमानों को तुरंत सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर अपडेट की जरूरत पड़ गई है. सोलर रेडिएशन के कारण फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम में डेटा करप्शन की शंका है और इसी वजह से कई प्लेनों को ग्राउंड कर चेकिंग और अपडेट करना पड़ेगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विमान निर्माता कंपनी एयरबस ने अपने सभी ऑपरेटर्स को अलर्ट किया है कि हाल ही में A320 विमान में अचानक पिच डाउन की समस्या हुई थी. जांच में यह सामने आया कि समस्या एलीवेटर-ऐलेरॉन कंप्यूटर (ELAC) में टेक्निकल समस्या के कारण हो सकती है. एयरबस ने साफ किया कि अगर इस खराबी को समय पर ठीक नहीं किया गया तो विमान के फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बन सकता है. इस बीच ईयू एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने भी आदेश दिया है कि प्रभावित विमानों में तुरंत काम करने वाले ELAC इंस्टॉल किए जाएं और यह अपडेट अगली उड़ान से पहले अनिवार्य रूप से लागू होना चाहिए. EASA ने भी जारी किया अलर्ट यूरोपीय संघ उड्डयन सुरक्षा एजेंसी यानी EASA ने भी Airbus A320 विमान फैमिली के लिए एक इमरजेंसी एयर वर्थीनेस निर्देश (EAD) जारी कर दिया है. यह निर्देश विमान के ऑनबोर्ड कंप्यूटरों में से एक के सॉफ्टवेयर अपडेट द्वारा शुरू की गई एक संभावित समस्या को दूर करने के लिए जारी किया गया है. अंतरिक्ष का मौसम विमान इलेक्ट्रॉनिक्स को कैसे प्रभावित करता है? बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार Qantas Airline के पूर्व कैप्टन डॉ. इयान गेटली ने बताया कि आसमान में उड़ने वाले विमान कभी-कभी सूर्य से निकलने वाले एक बड़े विस्फोट से प्रभावित हो सकते हैं जिसे कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहा जाता है. यह तब होता है जब सूरज से भारी मात्रा में प्लाज्मा यानी ज्यादा गर्मी , आवेशित कण अंतरिक्ष में निकलता है. यह प्लाज्मा पृथ्वी की तरफ आता है और हमारे वायुमंडल में प्रवेश करता है. विमान पर इसका प्रभाव डॉ. गेटली के अनुसार CME जितना ज्यादा शक्तिशाली होगा, उतना ही 28,000 फीट से ऊपर उड़ने वाले विमानों और उपग्रहों के इलेक्ट्रॉनिक्स में समस्या आने की उतनी ही ज्यादा संभावना होती है. जब ये ज्यादा आवेशित कण वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो वे ऊपरी वायुमंडल में और भी ज्यादा आवेशित कण बनाते हैं. ये नए आवेशित कण सीधे विमान के नेविगेशन और कम्युनिकेशन जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स में समस्या पैदा कर सकते हैं. डॉ. गेटली का कहना है कि उन्होंने 2003 में लॉस एंजिल्स और न्यूयॉर्क के बीच की उड़ान के दौरान इस घटना का एक्सपीरियंस किया था जिसके बाद उन्होंने इस विषय पर शोध करना शुरू किया. सरल शब्दों में कहें तो सूरज का शक्तिशाली विस्फोट यानी CME पृथ्वी के वायुमंडल को भर देता है जिससे विमान के इलेक्ट्रॉनिक्स  और कम्युनिकेशन सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं. दुनिया की पसंदीदा उड़ान पर मंडराया खतरा! एयरबस का A320 विमान परिवार दुनिया भर की एयरलाइंस की पसंद का विमान परिवार बना हुआ है. यह बेहतरीन विमान 4,700 नॉटिकल मील यानी लगभग 8,700 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है. इस विमान में 120 से 244 यात्रियों के बैठने की क्षमता है. सबसे खास बात यह है कि A320 अभी 50% सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के साथ उड़ान भर सकता है. इस विमान में दो एडवांस टर्बोफैन इंजन का ऑप्शन मिलता है जिसकी वजह से पिछली पीढ़ी के मुकाबले इसकी ईंधन खपत में 20% तक की कमी आती है. लेकिन अब इस विमान परिवार से जुड़े लगभग 6,000 एयरक्राफ्ट पर एक बड़ी चुनौती आ गई है. हालांकि राहत की बात यह है कि ज्यादातर विमानों के लिए, समाधान काफी आसान है, केवल नया कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना होगा, जिसमें अमूमन सिर्फ तीन घंटे लगेंगे. लेकिन करीब 900 पुराने विमानों को एक बड़ी मरम्मत की जरूरत है, उनके पूरे कंप्यूटर सिस्टम को बदलना होगा. जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता इन विमानों को उड़ाने के लिए ले जाने की अनुमति नहीं होगी.  क्या हुआ है?  दरअसल, एअरबस ने A-320 सेगमेंट के विमानों के लिए एक सोलर रेडिएशन से जुड़ी समस्या की पहचान की है. सोलर रेडिएशन की वजह से फ्लाइट के कंट्रोल सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला डेटा प्रभावित हो सकता है. इसका असर A 320 सेगमेंट के करीब 6,000 विमानों पर पड़ेगा. एअरबस ने तुरंत सॉफ्टवेयर अपडेट कराने का निर्देश दिया है. भारत में इंडिगो, एअर इंडिया के विमान इस अपडेट से प्रभावित बताए जा रहे हैं. इन विमानों में बदलाव के दौरान कुछ उड़ानों में देरी या कैंसिल होने के आसार हैं. एअरबस ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया कि हाल ही में A320 फैमिली के एक विमान में ऐसी घटना सामने आई, जिसमें इंटेंस सोलर रेडिएशन ने फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम के लिए … Read more

इमरान खान के सहयोगियों में आक्रोश: ‘आसिम लॉ’ और शहबाज की कथित Puppetry पर भड़के नेता

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि इमरान खान रावलपिंडी की अडियाला जेल में बेहद खराब परिस्थितियों में रखे जा रहे हैं और उन्हें लगभग पूरी तरह से अकेलेपन में रखा गया है. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के अंदरूनी सूत्रों ने दावा किया है कि खान को कई बार मारा गया है, हाई-इंटेंसिटी कॉन्फाइनमेंट में रखा गया है और हफ्तों से उनका परिवार या कानूनी टीम उनसे मिल नहीं पाई है. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी और विश्वासपात्र डॉ. सलमान अहमद ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने वहां के शासन-प्रशासन को सेना प्रमुख और नवनियुक्त चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर की कठपुतली करार दिया है। उन्होंने कहा कि मुनीर के इशारे पर जानबूझकर इमरान खान को यातना दी जा रही है। डॉ. अहमद ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान वर्तमान में असीम लॉ के तहत काम कर रहा है, जहां सेना प्रमुख का अधिकार संवैधानिक और न्यायिक ढांचे को दरकिनार करता है। डॉ. अहमद का दावा है कि देश के मुख्य लोकतांत्रिक संस्थान पूरी तरह से समझौता किए गए हैं। संसद, न्यायपालिका, पुलिस और सरकार सब आसिम मुनीर द्वारा नियंत्रित हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को आसिम मुनीर की कठपुतलियों से ज्यादा कुछ नहीं बताया। उन्होंने कहा कि इन लोगों के पास नाममात्र की शक्ति है। हाल ही में पारित 27वें संवैधानिक संशोधन को आलोचकों ने संवैधानिक तख्तापलट बताया है। इस संशोधन ने जनरल मुनीर को जीवन भर के लिए प्रतिरक्षा प्रदान की है, उन्हें फील्ड मार्शल का पद दिया है और उन्हें चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) के रूप में सभी तीनों सेनाओं और परमाणु शस्त्रागार पर अभूतपूर्व नियंत्रण दिया है। डॉ. अहमद के हमले का मुख्य केंद्र अडियाला जेल में इमरान खान की लंबी हिरासत और उनके साथ किया गया व्यवहार था। उन्होंने आरोप लगाया कि आसिम मुनीर इमरान खान को यातना देकर पानी माप रहे हैं और जेल में पहले दिन से ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इमरान खान की लगातार कैद केवल सेना प्रमुख के इमरान खान की अतुलनीय लोकप्रियता के गहरे डर को दर्शाती है, भले ही उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पर गंभीर सरकारी कार्रवाई हुई हो। डॉ. अहमद ने कहा कि इमरान खान एक राजनीतिक बंदी हैं, लेकिन उन्हें एक कैदी के अधिकार भी नहीं दिए जाते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री के अधिकार तो भूल ही जाइए। परिवार को क्यों नहीं मिलने दिया जा रहा? इमरान खान की बहन अलीमा खानम ने CNN-News18 से कहा कि सरकार इस मुद्दे को बेवजह बड़ा बना रही है. ‘हमसे मिलने देने में दिक्कत क्या है? अगर वे मिलने देते तो ये तमाम अटकलें खत्म हो जातीं,’ उन्होंने कहा. अलीमा का दावा है कि वे नहीं मानतीं कि पाकिस्तान की सत्ता संरचना इमरान खान को शारीरिक नुकसान पहुंचाएगी, लेकिन सरकार का यह रवैया जनता में गुस्सा बढ़ा रहा है. क्या हालत सच में खराब है? PTI सूत्रों के मुताबिक इमरान खान की शारीरिक स्थिति धीरे-धीरे खराब होती जा रही है. यह गिरावट लगातार दबाव, खराब जेल परिस्थितियों और पूरी तरह सीमित बातचीत के कारण हो रही है. पहले KP के मुख्यमंत्री उनसे मिल पाते थे, लेकिन अब उन मुलाकातों को भी रोक दिया गया है. सूत्रों का दावा है कि जो भी सेहत को लेकर अपडेट दिया जा रहा था, वह वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए था. क्या सड़कों पर विरोध शुरू हो सकता है? अलीमा खानम का कहना है कि जनता का गुस्सा अब फूटने वाला है. उन्होंने कहा, ‘ये होना ही है. सवाल कब का है. अगर इमरान खान की बहनों ने खुलकर बातें बताईं तो पूरे पाकिस्तान में विरोध भड़क सकता है’. परिवार अब कोर्ट में याचिका दायर कर रहा है कि इमरान खान को तुरंत कोर्ट के सामने पेश किया जाए.

जम्मू-कश्मीर के बसंतगढ़ में अलर्ट: दरवाज़ा खटखटाकर आतंकियों ने मांगा खाना, पुलिस को कॉल के बाद बड़ा अभियान शुरू

उधमपुर जम्मू-कश्मीर के बसंतगढ़ और आसपास के इलाके में एक बार फिर से आतंकी हलचल के संकेत मिले हैं. इसके बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है. बताया जा रहा है कि बुधवार देर रात बसंतगढ़ के ऊपरी इलाके में स्थित चिंगला बलोठा गांव में तीन संदिग्ध आतंकियों ने एक बकरवाल परिवार के घर का दरवाजा खटखटाया और खाना मांगा. इससे घर का मालिक घबराकर भाग गया और इस बारे में पुलिस को जानकारी दी. प्राप्त जानकारी के अनुसार, घर का मालिक अचानक तीन अजनबी युवकों को देखकर घबरा गया और मौके का फायदा उठाकर भाग निकला. उसने तुरंत पास के पुलिस चौकी और सेना को सूचना दी. इलाके में आतंकियों के होने का इनपुट मिलने के बाद रात से ही सेना की राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), CRPF और पुलिस की संयुक्त टीमों ने चिंगला बलोठा समेत ऊपरी बसंतगढ़ के घने जंगलों, गुफाओं और चोटियों को घेर लिया है. ड्रोन और हेलीकॉप्टर से भी निगरानी की जा रही है. गुरुवार सुबह तक ये सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है. बता दें कि बसंतगढ़ क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा (LoC) से महज कुछ किलोमीटर दूर है और पिछले कई सालों से आतंकियों के लिए डोडा-किश्तवाड़ के घने जंगलों तक पहुंचने का एक प्रमुख रास्ता रहा है. हाल के महीनों में भी इसी इलाके में कई मुठभेड़ें हो चुकी हैं और कई आतंकी मारे जा चुके हैं.  

आत्मनिर्भरता की ओर कदम: कोयला खनन सूची में 18 नई कंपनियां शामिल

नई दिल्ली भारत में कोयला खनन को रफ्तार देने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश में मान्यता प्राप्त पूर्वेक्षण एजेंसियों के दायरे को बढ़ाते हुए निजी संस्थाओं को भी अधिकृत एजेंसियों की सूची में शामिल कर लिया है। 26 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार, खान व खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 4(1) के दूसरे प्रावधान के तहत, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की नेबेट (QCI-NABET) द्वारा मान्यता प्राप्त निजी संस्थाओं को आधिकारिक रूप से खनिज खोज संबंधी कार्यों के लिए अधिकृत कर दिया गया है। इस कदम से कोयला सहित खनिज संसाधनों की खोज होगी तेज सरकार का कहना है कि इस कदम से कोयला सहित खनिज संसाधनों की खोज तेज होगी, तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और देश के खनन क्षेत्र में निजी भागीदारी को नई दिशा मिलेगी। यह बदलाव आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने के साथ-साथ खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 18 नई एजेंसियों को किया गया शामिल कोयला मंत्रालय ने कहा है कि इस फैसले से 18 नई एजेंसियों को कोयला और लिग्नाइट की खोज के लिए अधिकृत सूची में जोड़ा गया है। इससे कोयला ब्लॉक आवंटियों को प्रोस्पेक्टिंग कार्यों के लिए एजेंसी चुनने में ज्यादा लचीलापन और विकल्प मिलेंगे। नई मान्यता प्राप्त एजेंसियों में ये शामिल हैं     इंडियन माइन प्लानिंग एंड कंसल्टेंट्स, कोलकाता;     मेरॉक्स माइनिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम;     यूनाइटेड एक्सप्लोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता;     माहेश्वरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता;      नेचुरल रिसोर्सेज डिवीजन – टाटा स्टील लिमिटेड, पूर्वी सिंहभूम;     माइनिंग एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड, बिदवान;     रेम्को कोल एक्सप्लोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, चंद्रपुर;     साउथ वेस्ट जियोलॉजिकल एक्सप्लोरेशन लिमिटेड, गुरुग्राम;     जियोटेक्निकल माइनिंग सॉल्यूशंस, धर्मपुरी;     नोवोमाइन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ईस्ट खासी हिल्स;     सुरमाइन कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली;     कार्तिकेय एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर;     माइनिंग टेक कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद;     जेम्स प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, रांची;     रेवेल कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद;     सीएमएमसीओ टेक्नोलॉजी सर्विसेज लिमिटेड, हैदराबाद;     जसनी जियोटेक प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर;     एपीसी ड्रिलिंग एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, नामक्कल शामिल हैं। कोयला और लिग्नाइट की खोज को मिलेगी रफ्तार सरकार का मानना है कि अधिकृत प्रोस्पेक्टिंग एजेंसियों की संख्या बढ़ाने से निजी क्षेत्र के संसाधनों और विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इससे अन्वेषण प्रक्रिया में दक्षता, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार का यह कदम कोयला और लिग्नाइट की खोज की रफ्तार को उल्लेखनीय रूप से तेज करने की दिशा में देखा जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, विस्तारित एजेंसी सूची से शुरुआती चरण में ही खनन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे देश में संसाधन विकास की गति तेज होगी। इसके साथ ही कोयला और लिग्नाइट की उपलब्धता में सुधार होगा, जो देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आधार अपडेट: UIDAI ने पेश किए नए नियम, जानें क्या हुआ बदलाव

 नई दिल्‍ली आधार जारी करने वाली संस्‍था UIDAI ने आधार नामांकन और आधार में सुधार को लेकर कुछ नियमों में बदलाव कर दिया है. इस बदलाव से आधार कार्ड बनवाने वाले और अपडेट कराने वाले यूजर्स प्रभावित हो सकते हैं. इस नियम को  Third Amendment Regulations, 2025 के तहत नोटिफाई किया गया है.  नए नियमों के तहत डॉक्‍यूमेंट्स को अपडेट किया गया है, जिसका इस्‍तेमाल पहचान, एर्डेस, रिलेशन या डेट ऑफ बर्थ के प्रमाण के तौर पर किया जा सकता है. यूआईडीएआई ने यह बदलाव बच्‍चों, युवाओं और सीनियर सिटीजन के सभी आयु वर्गों के लिए किया है.  अगर आप भी अपने आधार कार्ड को अपडेट कराने या बनवाने जा रहे हैं तो इन डॉक्‍यूमेंट्स के बारे में जान लीजिए.  नाम बदलने के लिए डॉक्‍यूमेंट्स  UIDAI ने नाम सुधारन के लिए कई रह के पहचान को अप्रूव किया है. इसमें पासपोर्ट सबसे भरोसेमंद डॉक्‍यूमेंट के तौर पर होता है. इसमें आपकी फोटो, नाम, डेट ऑफ बर्थ और एड्रेस एक साथ दर्ज होते हैं. इसके अलावा PAN कार्ड, वोटर ID (EPIC), ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी पहचान पत्र और विवाह प्रमाण पत्र भी नाम में अपडेट कर सकते हैं. एड्रेस के लिए जरूरी डॉक्‍यूमेंट एड्रेस प्रूफ के लिए यूआईडीएआई ने बहुत से डॉक्‍यूमेंट्स को मान्‍य किया है . इसमें पासपोर्ट, बैंक पासबुक/बैंक स्टेटमेंट (अपडेटेड), बिजली-पानी-गैस के बिल (तीन महीने के भीतर जारी) शामिल हैं. किराए पर रहने वाले नागरिग, रेंट एग्रीमेंट दे सकते हैं. साथ ही हाउस या प्रॉपर्टी टैक्‍स की रसीद, आईडी कार्ड, राशन कार्ड भी दे सकते हैं.  डेट ऑफ बर्थ के लिए डॉक्‍यूमेंट जन्‍मतिथि अपडेट कराने के लिए नागरिकों के अभी बहुत से डॉक्‍यूमेंट देने होते हैं, जिसमें आप जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, या 10वीं-12वीं की मार्कशीट शामिल हैं. फिजिकल पैन कार्ड भी दिया जा सकता है. ई-पैन योग्‍य नहीं माना जाता है.  अब क्‍या हुआ बदलाव?  यूआईडीएआई ने नए नियम में जो बदलाव किया है, उसके मुताबिक अब  एक ही दस्तावेज जिसमें फोटो, नाम और पता तीनों हैं, आधार अपडेट के लिए पर्याप्‍त माना जाएगा. पहले अलग-अलग प्रमाण देना जरूरी होता था, लेकिन अब एक ही डॉक्‍यूमेंट से प्रॉसेस पूरा किया जा सकता है. नाम बदलना, एड्रेस चेंज, डेट ऑफ बर्थ अपडेट करना या रिलेशन जोड़ना, ये सभी काम अब एक ही डॉक्‍यूमेंट से बदले जा सकते हैं.  आधार कैसे अपडेट कर सकते हैं?      अगर आप आधार अपडेट करना चाहते हैं तो सबसे पहले सही डॉक्‍यूमेंट्स को तैयार रखना होगा.      अब नजदीकी आधार सेंटर्स या ऑनलाइन के लिए माई आधार ऐप पर जाना होगा.      यहां आप अपने डॉक्‍यूमेंट के साथ अपडेट करने वाला फार्मा भरकर जमा कर सकते हैं.      अगर डॉक्‍यूमेंट सही हुए तो आपका आधार कार्ड अपडेट हो जाएगा.