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अयोध्या में ध्वजारोहण का महापर्व: डॉ. राजीव बिंदल ने राम मंदिर पूर्ण होने पर देशवासियों को बधाई दी

शिमला भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने आज श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरांत सम्पन्न हुए ध्वजारोहण के महापर्व पर संपूर्ण देशवासियों एवं विश्वभर के सनातन समाज को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि लगभग 500 वर्षों के लंबे संघर्ष और असंख्य ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों के अप्रतिम बलिदानों के पश्चात आज वह पावन क्षण आया है जब श्रीराम जन्मस्थान पर दिव्य और भव्य मंदिर पूर्ण रूप से संसार के समक्ष खड़ा है।  यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और तपस्या का प्रतीक है। डॉ. बिंदल ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राम मंदिर के कलश पर ध्वजा चढ़ाकर पूरे देश को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक सौगात दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्य हमारी सनातन परंपरा, संस्कृति और अस्मिता को गौरव के शिखर पर स्थापित करने वाला है। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण करोड़ों-करोड़ों भारतीयों की आस्था की पूर्णता है। यह दिवस भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व का विषय है और इसे सदियों तक स्मरण किया जाता रहेगा। डॉ. बिंदल ने एक बार पुनः समस्त देशवासियों, भक्तों एवं सनातन धर्मावलंबियों को इस पावन अवसर पर शुभकामनाएँ और बधाई दीं।

India-UK Drill ‘Ajeet Warrior’: हेलीकॉप्टर स्ट्राइक में दुश्मन ठिकाने तबाह, जवानों ने दिखाया सुपर कमांडो ऑपरेशन

नई दिल्ली  भारत और यूनाइटेड किंगडम की सेनाएं संयुक्त युद्धाभ्यास ‘अजेय वारियर’ को अंजाम दे रही हैं। इस दौरान दोनों सेनाओं ने आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का अभ्यास किया है। इस अभियान में भारत और यूके के जवान हेलीकॉप्टर की सहायता से आतंकवादियों के ठिकानों पर पहुंचे, उन पर हमला किया और आतंकी ठिकाने नष्ट करके सुरक्षित वापस निकल आए। भारतीय सेना के मुताबिक, राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में ‘अजेय वॉरियर’ भारत-यूके संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है। यहां यह युद्धाभ्यास लगातार उच्च पेशेवर तीव्रता के साथ आगे बढ़ रहा है। इसमें भारतीय सेना की सिख रेजिमेंट और ब्रिटिश सेना की टुकड़ियां शामिल हैं।  दोनों सेनाएं संयुक्त राष्ट्र जनादेश के तहत संचालन क्षमता और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने के उद्देश्य से विविध और अत्यंत मांगपूर्ण सैन्य गतिविधियों में भाग ले रही हैं। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने विभिन्न फायरिंग प्रैक्टिस, रिफ्लेक्स शूटिंग, रॉकेट लॉन्चर फायरिंग, स्नाइपर एवं एमएमजी ड्रिल्स जैसी उन्नत युद्धक प्रक्रियाओं का अभ्यास किया। यहां हालात वास्तविक युद्ध की परिस्थितियों की तर्ज पर तैयार किए गए हैं। ऐसी स्थिति ने सैनिकों की निर्णय क्षमता और प्रतिक्रिया कौशल को और अधिक धारदार बनाया है। संयुक्त सत्रों में आईडी को निष्क्रिय करना, विभिन्न सेनाओं द्वारा अपनाई जाने वाली टेक्नीक और प्रोसीजर और समकालीन परिचालन चुनौतियों पर आधारित केस स्टडी शामिल रहे। इससे दोनों सेनाओं के बीच ज्ञान-साझेदारी और सामरिक समझ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। शहरी और अर्ध-शहरी युद्धक प्रशिक्षण में हाउस एवं रूम इंटरवेंशन, काफिला सुरक्षा, रोड ओपनिंग गश्त जैसी जटिल ड्रिल्स के दौरान दोनों सेनाओं ने समन्वित, सटीक और अनुशासित कार्रवाई का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही लाइट हेलीकॉप्टर और एमआई-17 हेलीकॉप्टरों से स्लिदरिंग तथा स्मॉल-टीम हेलिबॉर्न ऑपरेशंस किए गए। इनके तहत आतंकवाद-रोधी अभियानों में आवश्यक तेजी से प्रवेश करके घुसने और सुरक्षित निकासी की सैन्य क्षमताओं को मजबूत किया गया। सेना के मुताबिक दैनिक दिनचर्या में योग, फिजिकल ट्रेनिंग, बैटल ऑब्स्टेकल कोर्स, तथा युद्ध भार के साथ 5 और 10 मील की दौड़ शामिल रही। इन अभ्यासों से सैनिकों की शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और टीम भावना में और निखार आया। अभ्यास स्थल पर दोनों सेनाओं के हथियारों और नई पीढ़ी के सैन्य उपकरणों का संयुक्त प्रदर्शन भी किया गया। सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मित्रता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। टग ऑफ वार, वॉलीबॉल और विशेष रूप से एक मैत्रीपूर्ण क्रिकेट मैच में सैनिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त बीकानेर की सांस्कृतिक यात्रा ने ब्रिटिश सैनिकों को राजस्थान की समृद्ध विरासत, कला और मेहमाननवाजी से परिचित कराया। जैसे-जैसे अजेय वॉरियर आगे बढ़ रहा है, यह अभ्यास अपने प्रमुख उद्देश्यों को मजबूती से पूरा कर रहा है। यह भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच रक्षा सहयोग और वैश्विक शांति व स्थिरता में योगदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। वहीं, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में मंगलवार को ही भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘सूर्य किरण’ प्रारंभ हुआ। यह अभ्यास 25 नवंबर से 8 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य संचालनात्मक तालमेल बढ़ाना है। इसमें पर्वतीय क्षेत्रों में जंगल युद्धक तकनीक और काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस पर विशेष ध्यान दिया गया है। दोनों सेनाएं आधुनिक तकनीकों के एकीकरण, पारस्परिक इंटरऑपरेबिलिटी और श्रेष्ठ प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान पर फोकस कर रही हैं।

सीमा पर तनाव चरम पर: पाक कार्रवाई के बाद अफगानिस्तान ने दी जवाबी धमकी

काबुल  पाकिस्तानी हवाई हमले से सख्त नाराज अफगानिस्तान ने दावा किया है कि वो पड़ोसी देश को इसका ठीकठाक जवाब देगा। पक्तिका, खोस्त और कुनार में पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक को काबुल ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया। अफगान सरकार के मुताबिक इस हमले में 10 नागरिकों ने जान गंवाई, जिनमें 9 बच्चे शामिल हैं। ये हमला पाकिस्तान की ओर से खोस्त के रिहायशी इलाकों में किया गया, तो वहीं कुनार और पक्तिका को भी निशाना बनाया गया और वहां 4 लोग घायल हो गए। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि सही समय पर जरूरी जवाब दिया जाएगा। मुजाहिद ने एक्स पोस्ट में कहा, "पक्तिका, खोस्त और कुनार प्रांतों में पाकिस्तानी सेना का एयरस्ट्राइक अफगानिस्तान की संप्रभुता पर सीधा हमला है और पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से अंतरराष्ट्रीय नियमों और सिद्धांतों का साफ उल्लंघन है।" उन्होंने आगे कहा, "पाकिस्तानी सेना को कार्रवाइयों से कुछ हासिल नहीं होता; इनसे सिर्फ यह साबित होता है कि गलत खुफिया सूचनाओं से चलाए जा रहे ऑपरेशन तनाव बढ़ाते हैं और पाकिस्तान के सैन्य शासन की नाकामियों को उजागर करते हैं।" अफगान प्रवक्ता ने आगे कहा कि काबुल को अपने इलाके की रक्षा करने का अधिकार है और "सही समय पर सही जवाब दिया जाएगा।" मुजाहिद ने कहा, "इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान इस उल्लंघन और आपराधिक गतिविधि की कड़ी निंदा करता है और एक बार फिर साफ करता है कि वह अपनी हवाई और जमीनी सीमाओं और अपने देश की रक्षा को अपना जायज धार्मिक अधिकार मानता है, और सही समय पर सही जवाब दिया जाएगा।" मुजाहिद ने कहा कि यह हमला सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात 12:00 बजे खोस्त के गुरबुज जिले के मुगलगई इलाके में हुआ। उन्होंने एक्स पोस्ट में कहा कि "पाकिस्तानी हमलावर सेनाओं ने एक स्थानीय नागरिक, वलियत खान, जो काजी मीर का बेटा था, के घर पर बमबारी की। इस वजह से, नौ बच्चे (पांच लड़के और चार लड़कियां) और एक महिला मारे गए, और पूरा घर तबाह हो गया।" मुजाहिद ने यह भी स्पष्ट किया कि उसी रात अलग-अलग एयरस्ट्राइक की गई थी, और कहा, "कुनार और पक्तिका में भी एयर एयरस्ट्राइक हुई, जहां चार आम लोग घायल हुए।" अफगान प्रांतों में हुए नए हमले से अब हिंसा के एक और दौर का डर बढ़ गया है।

EU कोर्ट का फैसला: पूरे यूरोपीय संघ में सेम-सेक्स मैरिज को मिले सम्मान

नई दिल्ली  यूरोपीय यूनियन की सबसे बड़ी कोर्ट ने सेम-सेक्स मैरिज को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए पोलैंड को फटकार लगाई है। कोर्ट ने ये भी कहा कि सभी सदस्य देशों को इस तरह की शादी को मान्यता देनी चाहिए। कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पोलैंड ने जोड़े की शादी को मान्यता न देकर गलती की। जोड़े से कहा गया था कि पोलिश कानून सेम-सेक्स मैरिज की इजाजत नहीं दे सकता। कपल ने जर्मनी में एक दूजे का हाथ थामा था और पोलैंड आकर अपनी शादी को रजिस्टर कराना चाहता था। ईयू कोर्ट ऑफ जस्टिस ने कहा, "यह न केवल आने-जाने और रहने की आजादी का उल्लंघन है, बल्कि निजी और पारिवारिक जीवन के सम्मान के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन है।" कैथोलिक बहुल पोलैंड में, एलजीबीटी+ बराबरी के अधिकारों की लड़ाई लंबे समय से चल रही है, लेकिन वर्षों से उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली है। हालांकि, मौजूदा सरकार सेम-सेक्स यूनियनों सहित सिविल पार्टनरशिप को नियंत्रित करने के लिए एक बिल पर काम कर रही है। पोलैंड स्थित मीडिया आउटलेट टीवीपी वर्ल्ड न्यूज के अनुसार यूरोपियन कोर्ट ने यह फैसला एक पोलिश कोर्ट के अनुरोध पर दिया। दरअसल, दो पुरुषों के विवाह की रजिस्ट्री नहीं की गई थी और जर्मन मैरिज सर्टिफिकेट को ट्रांसक्राइब करने से इनकार कर दिया गया था। 2018 में बर्लिन में शादी करने वाले इस कपल की पहचान इस केस में सिर्फ उनके नाम के पहले अक्षर से हुई है। कपल के वकील ने इस फैसले पर कमेंट करने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ईयू नागरिकों को दूसरे सदस्य देशों में जाने और अपने देश लौटने पर "एक नॉर्मल फैमिली लाइफ" जीने की आजादी दी जानी चाहिए। फैसले में कहा गया, "जब वे किसी होस्ट सदस्य देश में फैमिली बनाते हैं, खासकर शादी की वजह से, तो उन्हें अपने देश लौटने पर उस फैमिली लाइफ को जारी रखने का भरोसा होना चाहिए।" कोर्ट ने कहा कि इसके लिए सदस्य देशों को अपने राष्ट्रीय कानूनों में सेम जेंडर के बीच शादी की इजाजत देने की जरूरत नहीं है। लेकिन विदेशी शादियों को मान्यता देने के तरीके में सेम-सेक्स कपल्स के साथ भेदभाव करने की भी इजाजत नहीं है। पोलैंड के प्रधानमंत्री, डोनाल्ड टस्क, और उनकी यूरोप समर्थक गठबंधन सरकार का सेम-सेक्स यूनियन पर बिल पास कराने का काम उनके कंजर्वेटिव गठबंधन दल के विरोध की वजह से रुक गया है। पोलैंड के राष्ट्रपति, करोल नॉवरोकी ने भी कहा है कि वह “किसी भी ऐसे बिल को वीटो करेंगे जो शादी के संवैधानिक रूप से सुरक्षित स्टेटस को कमजोर करेगा।”

केरल में खुलेंगे नए स्कूल, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तय समय में नीति लाने को कहा

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए केरल की स्कूल शिक्षा पर चिंता जताई। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि शत प्रतिशत साक्षरता का दावा करने वाला राज्य अगर इस स्थिति में है, तो ये बहुत चिंताजनक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा में कोई कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा है कि उन सभी इलाकों में जहां पहले से कोई सरकारी लोअर प्राइमरी या प्राइमरी स्कूल नहीं है, वहां नए स्कूल खोले जाएं, जिससे हर बच्चे को पढ़ाई का मौका मिले। कोर्ट ने साफ कहा कि तीन महीने के अंदर सरकार को इसके लिए एक पॉलिसी तैयार करनी होगी।  सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जहां भी हर 1 किलोमीटर के दायरे में कोई लोअर प्राइमरी स्कूल नहीं है और हर 3 किलोमीटर के दायरे में कोई अपर प्राइमरी स्कूल नहीं है, वहां नए स्कूल खोले जाएं। अगर स्कूल के लिए कोई बिल्डिंग मौजूद नहीं है तो अस्थाई तौर पर प्राइवेट बिल्डिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही स्थायी स्कूल भवनों के लिए बजट का भी इंतजाम करना जरूरी है। इसके अलावा, कोर्ट ने ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी भी तय की।  अदालत ने कहा कि पंचायतें अपनी तरफ से उपलब्ध जमीन की जानकारी सरकार को दें ताकि नए स्कूलों के लिए जगह मिल सके। स्कूलों में टीचरों की कमी न हो, इसके लिए रिटायर्ड टीचरों को अस्थायी तौर पर नियुक्त किया जा सकता है, जब तक नए टीचरों की भर्ती पूरी नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को स्पष्ट आदेश दिया है कि हर क्षेत्र में सरकारी स्कूल होने चाहिए, जिससे कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। इसके लिए अब सरकार को तीन महीने के अंदर एक पॉलिसी तैयार करनी होगी। हालांकि, सरकार के लिए यह चुनौती भी है कि वह जल्दी से जल्दी योजना तैयार करे, बजट का प्रावधान करे और नए स्कूल खोलने की प्रक्रिया शुरू करे।

ताइवान मुद्दे पर ट्रंप–शी की बात: जिनपिंग के बयान को ताइपे ने सख्ती से खारिज किया

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सोमवार को लंबी फोन कॉल हुई। इसमें जिनपिंग ने ताइवान पर अपने अधिकार की बात कही, जिस पर ताइवान के पीएम ने रिएक्ट किया। वहीं सुर्खियों में मंगलवार (25 नवंबर) को जापानी पीएम साने ताकाइची और ट्रंप की बात-चीत भी है। चीन के आधिकारिक बयान के अनुसार, शी ने इस बातचीत में जोर देकर कहा कि ताइवान का “चीन में वापस आना” द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने अंतरराष्ट्रीय क्रम का एक अभिन्न हिस्सा है। सिन्हुआ के अनुसार शी ने ट्रंप से स्पष्ट कहा कि 'ताइवान की वापसी' को लेकर बीजिंग का रवैया स्पष्ट है और वो इसे पोस्ट वॉर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के अनुकूल मानता है। जब यह बयान सामने आया, तो ताइवान के प्रधानमंत्री चू जंग ताई ने शी के विचार को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ताइवान के 23 मिलियन लोगों के लिए किसी “वापसी” का विकल्प ही नहीं हो सकता। उन्होंने संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनका देश स्वतंत्र है। तो वहीं, ताकाइची ने जापानी मीडिया से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें कभी कॉल करने की खुली छूट दी और ये भी कहा कि आप मेरी अच्छी दोस्त हैं। ताकाइची ने कहा कि यह कॉल ट्रंप के अनुरोध पर हुई थी, जिसमें उन्होंने अपने और जापान-की स्थिति पर विचार किया। अमेरिकी अधिकारी इस मामले में थोड़े सतर्क बने दिखे क्योंकि ट्रंप ने अपनी सोशल-मीडिया पोस्ट में कुल मिलाकर यह कहा कि चीन-संयुक्त रिश्ते “बहुत मजबूत” हैं, लेकिन उन्होंने ताइवान का नाम नहीं लिया। जापानी मीडिया ताइवान पर ट्रंप की चुप्पी पर सवाल खड़े कर रहा है। जापान टुडे ने कुछ विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि ट्रंप शायद खुल कर इसलिए नहीं बोल रहे क्योंकि उन्हें चीन के साथ अपनी ट्रेड डील की फिक्र है। हो सकता है इस वजह से ताइवान को लेकर वो कुछ न कहें और इस कदम से बीजिंग को हिम्मत मिल सकती है। नतीजतन, पूर्वी एशिया में नया संघर्ष शुरू हो सकता है। ये पूरी घटना बताती है कि चीन जापान-ताइवान-अमेरिका त्रिकोण में ताइवान को लेकर अधिक दबाव बनाना चाहता है, जबकि अमेरिका जापान के साथ अपनी गठबंधन-स्थिति को संभालते हुए चीन के साथ व्यापार व रणनीतिक संबंधों को आगे ले जाना चाहता है।

सीमाओं पर बढ़ी चीनी हलचल: तिब्बत में UAV बेस व रनवे तैयार, भारत को दोतरफा संदेश!

बीजिंग  चीन एक बार फिर भारत के प्रति दोहरा रवैया अपना रहा है। एक ओर वह दोस्ती की बातें करता है, दूसरी ओर LAC के पास अपने सैन्य और लॉजिस्टिक ढांचे को तेज़ी से मजबूत कर रहा है। तिब्बत में चीन की गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं नई सड़कें, हवाई पट्टियाँ, सैन्य अड्डे और UAV परीक्षण केंद्र इसका हिस्सा हैं। सीमा पर चीन का बड़ा खेल भारत से लगती चीन की LAC पर हाल के महीनों में कई रणनीतिक बदलाव देखे गए हैं। चीन अपनी सेना की रसद क्षमता, कनेक्टिविटी, और तेज़ तैनाती की क्षमता को और मजबूत करने में जुटा है। सैनिकों और हथियारों की तेज आवाजाही के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमा के बेहद पास तकनीकी और सैन्य तैनाती के कारण भारत-चीन के संबंधों पर कई नए सवाल खड़े हो रहे हैं। भारत और चीन के बीच सीमा तनाव कोई नई बात नहीं है। 2017  में डोकलाम संघर्ष और 2020 में गलवान घाटी के खूनी संघर्ष के बाद दोनों पक्षों में बातचीत हुई, लेकिन जमीनी हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। इसके उलट, चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ स्थिति को और संवेदनशील बना रही हैं।   तिब्बत में चीन का तेज सैन्य विस्तार: चीन तिब्बत को अपनी रणनीतिक ढाल की तरह विकसित कर रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार: 1. UAV (ड्रोन) परीक्षण केंद्र     4300 मीटर की ऊँचाई पर बना यह केंद्र     सैनिकों के लिए ऊँचाई वाली लड़ाई में बड़ी मदद     चीन की हाई-टेक युद्ध रणनीति का हिस्सा 2. नया सैन्य अड्डा     720 मीटर लंबा रनवे     4 बड़े हैंगर     यह बेस चीनी सेना का लॉजिस्टिक हब बनेगा     कठिन इलाके में तेज़ सप्लाई सुनिश्चित करेगा 3. तिब्बत में भारी निवेश: चीन ने अपनी 14वीं पंचवर्षीय योजना के तहत तिब्बत के लिए 30 अरब अमेरिकी डॉलर का बजट तय किया था। इसके तहत:      हाईवे नेटवर्क को दोगुना     नई सरकारी परियोजनाएँ     रेल नेटवर्क में बड़े सुधार चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग तिब्बत को रणनीतिक मोर्चे के रूप में विकसित करने में लगातार रुचि दिखा रहे हैं। सिर्फ भारत नहीं, दक्षिण चीन सागर में भी चीन का विस्तार बढ़ रहा है। चीन की नज़र सिर्फ भारतीय सीमा पर नहीं है। दक्षिण चीन सागर में भी वह आक्रामक तरीके से विस्तार कर रहा है।चीन के कदम साफ बताते हैं कि वह बुनियादी ढांचे के विकास का इस्तेमाल अपने रणनीतिक और सैन्य विस्तार के लिए कर रहा है। तिब्बत से लेकर दक्षिण चीन सागर तक, उसकी गतिविधियाँ भारत और दुनिया के लिए लगातार चुनौती पेश कर रही हैं।  

H1B विवाद पर सफाई: ट्रंप के बयान की गलत व्याख्या हुई, व्हाइट हाउस ने विदेशी टैलेंट के समर्थन की पुष्टि की

वाशिंगटन  व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की H1B  वीजा के मुद्दे पर ‘‘बहुत गहरी और व्यावहारिक राय'' है और वह अमेरिकी कर्मचारियों के स्थान पर अन्य देशों के कर्मियों को रोजगार दिए जाने का समर्थन नहीं करते हैं। अमेरिकी कर्मचारियों के स्थान पर H1B  वीज़ा धारकों को रोजगार दिए जाने और इस पर ट्रंप के रुख के बारे में पूछे जाने पर लेविट ने कहा कि इस मुद्दे पर राष्ट्रपति के रुख को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। एच-1बी वीजा के मुद्दे पर लेविट ने कहा कि ट्रंप ‘‘इस मुद्दे पर बहुत व्यावहारिक राय रखते हैं। वह देखना चाहते हैं कि क्या विदेशी कंपनियां अमेरिका में खरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं और क्या वे बैटरी जैसी वस्तुएं बनाने के लिए विदेशी कर्मचारियों को अपने साथ ला रही हैं। वह यह देखना चाहते हैं कि शुरुआत में ही उन विनिर्माण सुविधाओं और कारखानों को चालू किया जा सके।" उन्होंने कहा कि ट्रंप हमेशा से ही अमेरिकी कर्मचारियों को ही इन नौकरियों में देखना चाहते हैं, और उन्होंने देश में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों से कहा है कि ‘‘अगर उन्हें अमेरिका में कारोबार करना है तो बेहतर होगा कि वे मेरे लोगों को नौकरी पर रखें। राष्ट्रपति के रुख को लेकर काफी गलतफहमी रही है।''   लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति अमेरिकी विनिर्माण उद्योग को पहले से कहीं बेहतर देखना चाहते हैं। लेविट ने कहा, ‘‘शुल्क के प्रभावी इस्तेमाल और दुनिया भर में अच्छे व्यापार समझौतों को कम करने के ज़रिए वह यह काम कर रहे हैं। इसीलिए उन्होंने हमारे देश में खरबों डॉलर का निवेश आकर्षित किया है। इससे यहां पर अच्छी तनख्वाह वाली अमेरिकी नौकरियां पैदा हो रही हैं।'' ट्रंप ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका को दुनिया भर से प्रतिभाओं को लाना होगा, क्योंकि देश में "कुछ खास प्रतिभाएं" नहीं हैं। ट्रंप के एमएजीए (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) समर्थकों द्वारा एच-1बी वीजा पर की गई तीखी प्रतिक्रिया के बीच राष्ट्रपति स्पष्ट कर चुके हैं कि वह देश में कुशल पेशेवर प्रवासियों का ‘स्वागत' करेंगे, जो अमेरिकी पेशेवरों को ‘चिप' और ‘मिसाइल' जैसे जटिल उत्पादों को विकसित करना "सिखाएंगे"। ट्रंप ने स्वीकार किया था कि उन्हें अपने समर्थकों से इस पर ‘‘थोड़ी नाराजगी'' झेलनी पड़ सकती है, जो आव्रजन पर प्रतिबंधों का समर्थन करते हैं।    

जाफ़र एक्सप्रेस पर हथियारबंदों की फायरिंग, डेढ़ महीने में छह हमले—पाक रेल में बढ़ा ख़तरा

पेशावर  पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित बोलान पास में जाफ़र एक्सप्रेस पर एक बार फिर हमला हुआ है। क्वेटा से पेशावर जा रही ट्रेन पर आब-ए-गुम के पास हथियारबंद लोगों ने फायरिंग की। ट्रेन में मौजूद रेलवे पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, डेढ़ महीने में यह छठा हमला है। 7 अक्टूबर को शिकारपुर में पटरी पर हुए धमाके में 7 लोग घायल हुए थे, जबकि 24 सितंबर को मस्तुंग के स्पिज़ेंड क्षेत्र में बम धमाके में 12 यात्री घायल हुए थे। इससे पहले मार्च 2025 में BLA की मेजीद ब्रिगेड ने इसी ट्रेन को बोलान पास में हाईजैक कर 400 यात्रियों को बंधक बना लिया था। उग्रवादियों ने 20 सुरक्षा कर्मियों की हत्या का दावा भी किया था। लगातार हमलों ने इस रूट की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

डॉक्टरों ने रचा इतिहास: मां की किडनी से 11 वर्षीय बच्चे का देश का पहला ट्रांसप्लांट

नई दिल्ली दिल्ली के वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल ने अपनी किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा में बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है. 19 नवंबर 2025 को यहां पहली बार एक बच्चे का सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया. यह न सिर्फ सफदरजंग अस्पताल में पहला बाल चिकित्सा (पेडियाट्रिक) किडनी ट्रांसप्लांट है बल्कि किसी भी केंद्रीय सरकारी अस्पताल में होने वाला ऐसा पहला ऑपरेशन भी है. 11 साल के बच्चे को बचाया गया मरीज 11 साल का बच्चा था जो बाइलैटरल हाइपोडिसप्लास्टिक किडनी नामक एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था. ये स्थिति करीब डेढ़ साल पहले पता चली थी, जब उसे गंभीर हालत में सफदरजंग अस्पताल लाया गया था और इलाज के दौरान उसे कार्डियक अरेस्ट तक हो गया था. जांच में पता चला कि उसकी किडनियां फेल हो चुकी थीं और तब से वो अस्पताल में नियमित डायलिसिस पर था. मां ने दी किडनी, बच्चे की सेहत में तेजी से सुधार डॉ. पवन वासुदेवा ने बताया कि बच्चों का किडनी ट्रांसप्लांट बेहद चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि बच्चे के शरीर में बड़े वेसल्स से किडनी जोड़ने और वयस्क किडनी के लिए उचित जगह बनाने जैसे कठिन कदम शामिल होते हैं. मरीज को किडनी उसकी 35 साल की मां ने दी. डॉक्टरों के अनुसार किडनी अच्छी तरह काम कर रही है, बच्चा अब डायलिसिस से मुक्त है और जल्द ही घर भेज दिया जाएगा. गरीब परिवार के लिए जीवनदान डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि बच्चे का परिवार उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से है और उसके पिता दिहाड़ी मजदूर हैं. निजी अस्पताल में यह ऑपरेशन करीब 15 लाख रुपये का आता इसलिए परिवार करीब-करीब उम्मीद छोड़ चुका था.अस्पताल प्रशासन ने ये भी बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद लगने वाली महंगी इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं भी अस्पताल बच्चे को मुफ्त उपलब्ध कराएगा. ये उपलब्धि न सिर्फ अस्पताल बल्कि देश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है.अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने बताया कि ये उपलब्धि अस्पताल की मेडिकल टीम की कड़ी मेहनत और समर्पण का नतीजा है. इस टीम ने किया ऑपरेशन  सर्जिकल ट्रांसप्लांट टीम का नेतृत्व यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. पवन वासुदेवा ने किया. उनके साथ प्रोफेसर डॉ. नीरज कुमार भी टीम में शामिल थे. बच्चे का इलाज कर रही बाल रोग (पेडियाट्रिक) टीम का नेतृत्व डॉ. शोभा शर्मा ने किया. उनके साथ डॉ. श्रीनिवासवरदन और विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप के देबता भी जुड़े रहे. एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. सुशील ने किया, जिनके साथ डॉ. ममता और डॉ. सोनाली थीं.