samacharsecretary.com

पुरानी घटना का हवाला देकर चुनाव आयोग ने चेताया, निर्वाचन अधिकारियों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के बीच चुनाव आयोग ने कोलकाता पुलिस को पत्र लिखकर चुनाव अधिकारियों की सुरक्षा के प्रति चिंता जताई है। चुनाव आयोग ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर कहा है कि एसआईआर की ड्यूटी में तैनात चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पत्र में कहा गया, जानकारी में आया है कि 24 नवंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय की सुरक्षा तोड़ी गई। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त, अडिशनल चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर, जॉइंट चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर और डिप्टी चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर की सुरक्षा से भी खिलवाड़ किया गया है।   पत्र में आगे कहा गया कि चुनाव आयोग ने पहले ही घटना का संज्ञान लिया है और चीफ इलेक्शन ऑफिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। उनके कार्यालय और आवास दोनों की सुरक्षा पुख्ता की जाए। इसके अलावा एसआईआर की प्रक्रिया और डेटा की सुरक्षा के लिए भी पर्याप्त सुरक्षा के उपाय किए जाएं। चुनाव आयोग ने कहा कि निर्देश के बाद क्या कदम उठाए गए इसकी जानकारी 48 घंटे में दी जाए। बता दें कि बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के सैकड़ों सदस्यों ने सोमवार को कॉलेज स्क्वायर से सीईओ कार्यालय तक मार्च निकाला और सीईओ कार्यालय के सामने धरना दिया था। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस के मानवीय दीवार की तरह खड़े होने के बावजूद उनमें से कुछ ने गेट तोड़ने की कोशिश की। भीड़भाड़ में कुछ प्रदर्शनकारी दफ्तर के अंदर घुस गए और वहीं धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। सोमवार रात करीब 11 बजे उस समय गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई, जब केएमसी पार्षद सजल घोष के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का एक समूह नारेबाजी करते हुए मौके पर पहुंचा और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव आयोग के अधिकारियों को डरा-धमकाकर चल रही एसआईआर प्रक्रिया को विफल करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। एसआईआर एनआरसी से भी ज्यादा खतरनाक- ममता बनर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पीछे असली मंशा राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) है। संविधान दिवस के अवसर पर रेड रोड स्थित बी. आर. आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में बनर्जी ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाया जा रहा है। इससे पहले, उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जब लोकतंत्र दांव पर हो, धर्मनिरपेक्षता ‘‘खतरे में हो’’ और संघवाद को ‘‘ध्वस्त किया जा रहा हो’’, तो लोगों को संविधान द्वारा प्रदत्त मूल्यवान मार्गदर्शन की रक्षा करनी चाहिए। बनर्जी ने कहा कि संविधान राष्ट्र की रीढ़ है, जो भारत की संस्कृतियों, भाषाओं और समुदायों की विविधता को कुशलतापूर्वक एक साथ पिरोता है।  

गांव खाली, शहर आबाद: जनसंख्या का 80 फीसदी हिस्सा अब नगरों में बस रहा

नई दिल्ली  दुनिया की कुल आबादी के 80 फीसदी लोग अब शहरों में ही बसते हैं। गांवों की याद सबको सताती है और लोग पुरानी जिंदगी जीना चाहते हैं, लेकिन इस बीच शहरीकरण के आकर्षण का यह आंकड़ा भी चौंकाने वाला है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया की 80 फीसदी आबादी अब शहरी क्षेत्रों में बसी है। ऐसा इसलिए क्योंकि बड़े पैमाने पलायन के चलते लोग शहरों में पहुंच गए हैं। इसके अलावा तमाम गांव भी ऐसे हैं, जो अब विकास की दौड़ में बढ़ते हुए शहर में ही तब्दील हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट World Urbanization Prospects 2025 के मुताबिक दुनिया के 81 फीसदी लोग अब शहरों में हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2018 में ही यह आंकड़ा महज 55 फीसदी था। रिपोर्ट के अनुसार 45 फीसदी लोग शहरों में बसे हैं तो वहीं 36 फीसदी लोग कस्बों के नागरिक हैं। यह रिपोर्ट पैट्रिक गेरलैंड के नेतृत्व में तैयार की गई है। यही नहीं अनुमान है कि 2050 तक दुनिया के 83 फीसदी लोग शहरों में पहुंच जाएंगे। इस रिपोर्ट को तैयार करने में अलग-अलग देशों के पैरामीटर का भी ख्याल रखा गया है। जैसे जापान में यदि 50 हजार लोगों की आबादी है तो उसे शहर का दर्जा दिया जाता है। लेकिन डेनमार्क में यह आंकड़ा महज 200 लोगों का ही है। इस रिपोर्ट के लिए यह पैमाना तैयार किया गया कि 50 हजार लोगों की आबादी हो और कम से कम प्रति वर्ग किलोमीटर के दायरे में 1500 लोग बसे हों। इसके अलावा कस्बों के लिए यह आंकड़ा 5000 का रखा गया है और प्रति वर्ग किलोमीटर 300 लोगों की आबादी का पैमाना रखा गया। इस तरह दुनिया की कुल 19 फीसदी आबादी ही अब विशुद्ध रूप से गांवों में बसी है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सभी हिस्सों में शहरीकरण बढ़ रहा है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों को लेकर रिपोर्ट कहती है कि यहां शिक्षा और रोजगार के लिए लोग मुख्य तौर पर शहरों का रुख कर रहे हैं। रिपोर्ट यह भी कहती है कि शहरीकरण में बिना प्लानिंग के इजाफा होने से कुछ परेशानियां भी आ रही हैं। जैसे शहर का विस्तार हो जाए और सार्वजनिक परिवहन की उसके मुताबिक व्यवस्था ना हो तो रहना मुश्किल होता है। इसके अलावा पलूशन में भी इजाफा हो रहा है क्योंकि निजी वाहनों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। वहीं यदि शहरों को प्लानिंग के साथ बसाया जाए तो वे ज्यादा कारगर होंगे और मानव जीवन के लिए ज्यादा सुविधायुक्त भी साबित होंगे।  

समुद्र में भयंकर रूप धर चुका ‘सेन्यार’ — तटीय इलाकों में बढ़ी सावधानी!

नई दिल्ली  मलक्का जलसंधि पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया है। यह बुधवार को ही दोपहर बाद इंडोनेशिया के तट से टकरा सकता है। इसी बीच बंगाल की खाड़ी पर भी कम दबाव का क्षेत्र ऐक्टिल हो गया है जो कि तूफान का रूप ले सकता है। दरअसल इस समय दो मौसमी सिस्टम ऐक्टिव हैं। मलक्का स्ट्रेट के अलावा दक्षिण श्रीलंका के पास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र तूफान का रूप ले रहा है। इस वजह से ओडिशा, पश्चिम बंगाल और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी कर दिया गया है। मौसम विभाग ने बताया कि मलक्का स्ट्रेट पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब चक्रवाती तूफान 'सेन्यार' में बदल गया है। यह भारतीय समय के अनुसार शाम को 5:30 बजे तक तट से टकराएगा। बता दें कि मलक्का स्ट्रेट अंडमान सागर से सटा हुआ है। दोनों सिस्टम की वजह से तमिलनाडु, पुदुच्चेरी, आंध्र प्रदेश और केरल में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कहा है कि सेन्यार चक्रवात का असर अगले 24 घंटे तक देखा जाएगा। बुधवार को ही यह इंडोनेशिया के तट को क्रॉस कर जाएगा। इसके बाद तूफान दक्षिण पश्चिम की ओर मुड़ सकता है। इस दौरान तटीय इलाकों में 70 से 90 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 26 नवंबर को ही निकोबार द्वीपसमूह पर मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा 27 नवंबर को हल्की बारिश हो सकती है। 28 नवंबर से मौसम में सुधार शुरू हो जाएगा। बंगाल की खाड़ी में भी उठ रहा तूफान खाड़ी के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र से कावेरी डेल्टा, तमिलनाडु के दक्षिणी और दक्षिणी तटीय जिलों में भारी बारिश हुई और अगले 24 घंटों में यह चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। आईएमडी ने कहा है कि गुरुवार को ही यह चक्रवाती तूफान में तब्दील होगा। इससे तमिलनाडु और केरल के तटीय इलाकों मे भारी बारिश की संभावना है। मंगलवार को तमिलनाडु के स्कूल और कॉलेजों को बंद रखने का आदेश दिया गया था।  

अमित शाह की शादी में शिरकत, BJP टाइपिस्ट की बेटी की शादी बनी चर्चा का विषय

 नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP), दोनों के बारे में एक बात समान रूप से कही जाती है कि दोनों ही संगठन अपने कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हैं। इसकी एक झलक हाल ही में देखने को मिली जब भाजपा कार्यालय में वर्षों से टाइपिस्ट की नौकरी कर रहे रामधन की बेटी की शादी में भारत के गृह मंत्री अमित शाह खुद पहुंच गए। इस तस्वीर की खूब चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया में लोग इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए इसे भाजपा की असली ताकत करार दे रहे हैं। 23 अगस्त को नई दिल्ली के द्वारका में संपन्न हुई इस शादी में भाजपा के कई नेताओं ने शिरकत की। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम भी इस शादी में शामिल हुए। उन्होंने भी एक तस्वीर पोस्ट की है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब आरएसएस या भाजपा या फिर किसी दूसरे दल के कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों के यहां उस दल का नेता पहुंचा हो। इससे पहले हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हरियाणा एक शादी समारोह में पहुंचे थे। वह अपने पीएसओ की बेटी को आशीर्वाद देने के लिए पटना से हरियाणा आए थे। जीनत राणा नाम के एक हैंडल ने तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा है, ‘इस तस्वीर में पहले नंबर पर खड़े व्यक्ति का नाम रामधन हैं। रामधन जी बीजेपी मुख्यालय में टाइपिस्ट हैं। रामधन जी की बेटी की कल शादी थी, सारे व्यस्तताओं को किनारे करके गृहमंत्री अमित शाह जी ना केवल शादी में शामिल हुए बल्कि एक मुखिया की तरह वहां मौजूद रहकर बारातियों की अगवानी भी की।आपको इस तस्वीर से इस सवाल का जवाब मिल जायेगा की मोदी जी – शाह जी की जोड़ी के लिए उनकी टीम क्यों समर्पित रहती हैं?’

बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना के लॉकर पर कार्रवाई, एजेंसियों का दावा—सोना और कीमती गिफ्ट मिले

ढाका  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हाल ही में मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी करार देते हुए कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस फैसले के आधार पर शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग भी भारतसरकार से की थी. बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना की मुश्किलें कम होती नहीं नजर आ रहीं. शेख हसीना की मुश्किलें अब और बढ़ती नजर आ रही हैं. बांग्लादेश के एंटी करप्शन कमीशन (एसीसी) शेख हसीना के खिलाफ अब भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के नए मामले दर्ज करने की तैयारी में है. एसीसी ने शेख हसीना से संबंधित संपत्तियों की जांच तेज कर दी है. बांग्लादेश की सेंट्रल इंटेलिजेंस सेल और नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने हाल ही में शेख हसीना के बैंक लॉकर्स की जांच की थी. बांग्लादेशी एजेंसियों का दावा है कि शेख हसीना के दो लॉकर्स से नौ किलो से अधिक सोने के गहने और पीएम पद पर रहते हुए मिले महंगे गिफ्ट मिले हैं. शेख हसीना के लॉकर्स में सोने के गहने और महंगे गिफ्ट्स के साथ ही कई कीमती वस्तुएं भी मिली हैं. बांग्लादेशी अधिकारियों का यह भी कहना है कि इनमें से कई वस्तुओं को प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए या उसके बाद, घोषित नहीं किया गया था. एसीसी अब इस मामले में मुकदमा दर्ज कर विस्तृत जांच की तैयारी में है. एसीसी की जांच का फोकस आय के स्रोत पर होगा. एजेंसी यह भी देखेगी कि इन संपत्तियों को पूर्व पीएम ने वैध प्रक्रिया के अनुसार अपनी संपत्ति घोषित की थी या नहीं. एसीसी इस बात की भी जांच करेगी कि शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहते क्या किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई थी? सूत्रों की मानें तो एसीसी पूर्व पीएम शेख हसीना के खिलाफ दो-तीन नए केस दर्ज करने की तैयारी में है. गौरतलब है कि छात्रों के आरक्षण विरोधी आंदोलन के बाद शेख हसीना को भारत में शरण लेनी पड़ी थी. मोहम्मद युनूस की अगुवाई में अंतरिम सरकार के गठन के बाद शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी है. बांग्लादेश में हालात ऐसे हैं कि अवामी लीग का लगभग हर प्रमुख नेता किसी न किसी मामले में वित्तीय जांच के दायरे में है. शेख हसीना और उनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले अंतरिम सरकार में खोल दिए गए हैं. पहले से ही मुश्किलों में घिरीं शेख हसीना और उनकी पार्टी के नेताओं की मुश्किलें नए केस से और बढ़ सकती हैं.

ये देश 16 साल से कम बच्चों पर इंटरनेट बैन! बढ़ते ऑनलाइन खतरे को रोकने बड़ा कदम

नई दिल्ली  दुनियाभर में साइबरबुलिंग, ऑनलाइन फ्रॉड और यौन शोषण की घटनाओं में बढ़ोतरी ने कई देशों की सरकारों को चिंतित कर दिया है। इसी को देखते हुए मलेशिया ने अगले साल से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट प्रतिबंध लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। सरकार का कहना है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाना अब बेहद जरूरी हो गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी निगरानी मलेशिया के संचार मंत्री फाहमी फादजिल ने बताया कि इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। सरकार अब ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों द्वारा अपनाए गए मॉडलों का अध्ययन कर रही है। मंत्री के अनुसार, यूजर्स की उम्र सत्यापित करने के लिए पहचान पत्र, पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन सिस्टम को लागू करने पर विचार किया जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी निगरानी बनाएगी। नियमों का पालन करना अनिवार्य मलेशिया ने इस साल जनवरी से 80 लाख यूजर्स वाले बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म्स को आयु सत्यापन, कंटेंट सुरक्षा और पारदर्शिता नियमों का पालन करना होगा। उद्देश्य यह है कि बच्चों को एक सुरक्षित डिजिटल स्पेस उपलब्ध कराया जा सके। 10 दिसंबर से ऑस्ट्रेलिया में लागू होगा दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया में पहली बार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध का कानून बनाया है, जो 10 दिसंबर से लागू होगा। फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स को सख्त चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर 5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। डेनमार्क और नॉर्वे भी इसी दिशा में उठा रहे कदम डेनमार्क और नॉर्वे भी इसी दिशा में कदम उठा रहे हैं। डेनमार्क 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर चुका है, जबकि नॉर्वे ने सोशल मीडिया उपयोग की न्यूनतम उम्र 15 साल तय करने का प्रस्ताव रखा है।

200 देशों को कर्ज देने वाला चीन, अमेरिका को सबसे अधिक कर्ज, ट्रंप की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

बीजिंग  दुनिया के नक्शे पर आज चीन केवल एक प्रोडक्शन सेंटर या आर्थिक शक्ति नहीं रह गया है, बल्कि अब वह दूसरे मुल्कों को कर्ज और वित्तीय सहायता देकर दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला बड़ा खिलाड़ी बन चुका है. अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान जैसे देशों से लेकर छोटे और गरीब देशों तक, लगभग हर कोने में चीन का पैसा पहुंच चुका है. हैरानी की बात यह है कि जिन देशों को चीन उधार दे रहा है, उनमें सबसे ऊपर नाम अमेरिका का है. बढ़ते तनाव, टकराव और प्रतिस्पर्धा के बावजूद ‘अंकल सैम’ ही चीन से सबसे बड़ा उधार लेने वाला देश है, यह फैक्ट दुनिया को चौंका देने के लिए काफी है. डैन वोंग नामक एक लेखक ने अपनी किताब ब्रेकनेक (Breakneck) में लिखा है कि चीन की इंजीनियरिंग क्षमता, निर्माण की गति और शहरी बदलाव सिर्फ विकास की कहानी नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुके हैं. उनका सवाल सीधा है- “क्या चीन इतना आगे निकल चुका है कि अब अमेरिका ही पीछे छूटने से डर रहा है?” इसी बीच AidData रिसर्च लैब की रिपोर्ट ने इस बहस को और तीखा कर दिया है. रिपोर्ट बताती है कि साल 2000 से 2023 तक चीन ने दुनियाभर में कर्ज और अनुदान के रूप में 2.2 ट्रिलियन डॉलर बांटे हैं, और करीब 200 देशों व क्षेत्रों को इससे फायदा या कर्ज का बोझ मिला है. दुनिया का सबसे बड़ा आधिकारिक कर्जदाता चीन ने यह पैसा केवल आर्थिक रूप से कमजोर देशों को नहीं दिया. सिर्फ 6 फीसदी रकम की सहायता ग्रांट या सस्ते कर्ज के रूप में दी है. 47 फीसदी गरीब देशों ने और 43 फीसदी अमीर व विकसित देशों ने चीन से कर्ज लिया. यानी जितने विकासशील देश चीन पर निर्भर होते जा रहे हैं, उतने ही डेवलप हो चुके और अमीर देश भी चीन पर वित्तीय रूप से निर्भर हो गए हैं. AidData के अनुसार, चीन अब दुनिया का सबसे बड़ा आधिकारिक कर्जदाता (official creditor) बन चुका है. सिर्फ इतना ही नहीं, चीन की राज्य-स्वामित्व वाली कंपनियां और बैंक पूरी दुनिया में बुनियादी ढांचा, खनिज संसाधन, एयरपोर्ट, पाइपलाइन, डेटा सेंटर और हाई-टेक कंपनियों में निवेश कर रहे हैं. रिपोर्ट कहती है कि चीन की रकम 2,500 अमेरिकी परियोजनाओं में लगी है, जिनमें टेस्ला (Tesla), अमेज़न (Amazon), डिज्नी (Disney) और बोइंग (Boeing) जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं. टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में खूब लगाया पैसा दुनिया अक्सर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की चर्चा करती है, लेकिन आंकड़ों के अनुसार BRI चीन की कुल विदेशी उधारी का सिर्फ 20 फीसदी हिस्सा है. चीन का बहुत सारा पैसा अमीर देशों की टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में भी जा रहा है. यानी वह केवल सड़कें और पुल नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक पर भी अपना नियंत्रण मजबूत कर रहा है. अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया… भारत भी… सब कर्जदार 2000 में चीन का सिर्फ 11 प्रतिशत कर्ज अमीर देशों को जाता था, लेकिन 2023 तक यह बढ़कर 75 प्रतिशत हो गया. यानी अमीर दुनिया गरीब देशों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से चीन के पैसों पर निर्भर होती गई है. चीन के 10 सबसे बड़े कर्जदार देशों की सूची में सबसे ऊपर है संयुक्त राज्य अमेरिका (202 बिलियन डॉलर), उसके बाद रूस (172 बिलियन डॉलर), ऑस्ट्रेलिया (130 बिलियन), वेनेज़ुएला (106 बिलियन) जैसे देश आते हैं. भारत भी इससे बाहर नहीं है. भारत ने चीन से 11.1 बिलियन डॉलर कर्ज और अनुदान के रूप में प्राप्त किए हैं. इन सभी आंकड़ों से एक बात साफ उभरती है कि चीन का खेल केवल डेवलपमेंट हेतु मदद का नहीं, बल्कि रणनीतिक आर्थिक प्रभाव का है. कर्ज और निवेश के माध्यम से चीन न केवल देशों में बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है, बल्कि वैश्विक राजनीतिक समीकरणों को भी अपने हित में मोड़ रहा है. और यही वजह है कि भविष्य की दुनिया की राजनीति, तकनीक और व्यापार में चीन की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक होती जा रही है.

फर्जी गुरु ने इंजीनियर से ऐंठे 48 लाख, चमत्कारी दवा का दावा निकला ठगी

बेंगलुरु  बेंगलुरु में 29 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। उसने आरोप लगाया कि स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने उसे सेक्सुअल समस्याओं के इलाज के नाम पर महंगी और हानिकारक हर्बल प्रोडक्ट्स बेचे। इसके लिए उसे 48 लाख रुपये चुकाने पड़े। शिकायतकर्ता ने बताया कि इन दवाओं के सेवन से उसकी तबीयत बिगड़ गई और किडनी में समस्या आने लगी। पीड़ित ज्ञानभारती इलाके में रहता है और शिवमोग्गा जिले का मूल निवासी है। वह पिछले तीन वर्षों से एक निजी फर्म में नौकरी कर रहा है। उसने ज्ञानभारती पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, मार्च 2023 में उसकी शादी हुई। पति-पत्नी पहले बसवेश्वरनगर में रहते थे। शादी के शुरुआती महीनों में उसे सेक्सुअल समस्याएं होने लगीं। वह केंगरी में मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के लिए गया, जहां डॉक्टरों ने टेस्ट कराए और कुछ दवाएं लिखीं। इस साल 3 मई को अस्पताल जाते समय उसने उल्लाल में लॉ कॉलेज के पास सड़क किनारे आयुर्वेदिक तंबू देखा। यहां लगे पोस्टर पर सेक्सुअल समस्याओं के तुरंत समाधान का दावा किया गया था। वह टेंट के अंदर चला गया, जहां उसे एक व्यक्ति मिला। पीड़ित ने अपनी समस्याएं उसे बताईं। उस शख्स ने कहा कि 'विजय गुरुजी' इसका तेजी से इलाज कर सकते हैं। उसने विजय से मिलने की व्यवस्था करने का वादा किया। सड़क किनारे टेंट पर पड़ी नजर रिपोर्ट के मुताबिक, उसी शाम एक व्यक्ति टेंट में आया और उसने खुद को विजय गुरुजी बताया। पीड़ित की जांच करने के बाद विजय ने कहा कि एक दुर्लभ दवा देवराज बूटि उसकी समस्या का इलाज कर देगी। उसने इसे यशवंतपुर में विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से खरीदने को कहा। उसने कहा कि यह दवा केवल उसी दुकान पर उपलब्ध है और वह इसे उत्तराखंड के हरिद्वार से लाता है। उसने कहा कि देवराज बूटि का एक ग्राम 1.6 लाख रुपये का है। उसने कहा कि दवा केवल नकद भुगतान से खरीदी जानी चाहिए। उसने सुझाव दिया कि पीड़ित अकेले जाए, क्योंकि दावा करते हुए कि अगर कोई साथ जाए तो उसकी शक्ति नष्ट हो जाएगी। माता-पिता से उधार लिए पैसे पीड़ित ने घर से नकद पैसे लिए और आयुर्वेदिक दुकान पर चला गया। वह दवा लेकर विजय के पास लौटा। स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने बताया कि देवराज बूटि का इस्तेमाल कैसे करना है और उसे खास तरह का तेल भी दिया। इस तेल की कीमत 76,000 रुपये प्रति ग्राम थी और 15 ग्राम तेल खरीदने को कहा। उसने हर हफ्ते अपनी पत्नी और माता-पिता से पैसे उधार लिए और कुल 17 लाख रुपये का भुगतान 15 ग्राम तेल और अन्य प्रोडक्ट्स के लिए किया। मेडिकल जांच की रिपोर्ट से हैरान विजय ने बाद में उसे अतिरिक्त 3 ग्राम देवराज बूटि' खरीदने के लिए दबाव डाला। प्रत्येक ग्राम के लिए 1.6 लाख रुपये देने को कहा। पीड़ित ने बैंक से 20 लाख रुपये का लोन लिया और कुल 18 ग्राम देवराज बूटि खरीदी। बाद में उसे देवराज रसाबूटि नामक एक अन्य दवा खरीदने के लिए मनाया गया, जिसकी कीमत 2.6 लाख रुपये प्रति ग्राम थी। इसके लिए उसने दोस्त से 10 लाख रुपये उधार लिए और चार ग्राम देवराज रसाबूटि खरीदी। इस तरह पीड़ित ने विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से कुल 48 लाख रुपये देकर सभी दवाएं खरीदीं। सभी दवाओं का उपयोग करने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। जब पीड़ित ने मेडिकल जांच कराई तो ब्लड टेस्ट के नतीजे से किडनी में समस्याएं दिखीं। अब शिकायतकर्ता का आरोप है कि विजय गुरुजी की हर्बल दवाओं के सेवन से उसकी सेहत बिगड़ी। उसने विजय, दवा दुकान मालिक और उस टेंट वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जिसने उसे विजय से मिलवाया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले—नौसेना के जहाज पूरी तरह भारतीय शिपयार्ड्स में तैयार

नई दिल्ली   भारतीय नौसेना के 262 विभिन्न प्रोजेक्ट डिजाइन एवं विकास परियोजनाएं उन्नत चरणों में पहुंच चुकी हैं। खास बात यह है कि जहाज निर्माण व नौसेना की यह अन्य सभी परियोजनाएं स्वदेशी रूप से विकसित की गई हैं। यह बदलाव भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण हैं। नौसैनिक क्षमता व स्वदेशीकरण की यह जानकारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी। वह  नई दिल्ली में आयोजित ‘समुद्र उत्कर्ष’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। यहां उन्होंने समुद्री विरासत पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। ‘समुद्र उत्कर्ष’ सेमिनार के आयोजन का उद्देश्य भारत की उभरती हुई जहाज निर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित करना है। इस कार्यक्रम में स्वदेशी शिपबिल्डिंग, नौसैनिक आधुनिकीकरण और समुद्री आत्मनिर्भरता पर विस्तृत चर्चा हुई। यहां रक्षामंत्री ने बताया कि कई भारतीय शिपयार्ड इस दशक के भीतर अपनी परियोजनाओं में 100 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री उपयोग करने की ओर अग्रसर हैं। इसका अर्थ है कि भारत से निर्मित किसी भी नौसैनिक प्लेटफॉर्म पर वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों का न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें गर्व है कि भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के सभी निर्माणाधीन जहाज भारतीय शिपयार्ड्स में ही तैयार हो रहे हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का प्रत्यक्ष परिचायक है। उन्होंने कहा कि विश्व के समुद्री इतिहास पर भारत की गहरी छाप है। हमारे पूर्वजों ने समुद्रों को बाधा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक संवाद के सेतु के रूप में इस्तेमाल किया। आज इस विरासत का सम्मान करते हुए भारत आगे बढ़ने के संकल्प के साथ कार्य कर रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों समुद्री तटों पर स्थित भारतीय शिपयार्ड अब आधुनिक फैब्रिकेशन लाइन्स, उन्नत मैटेरियल-हैंडलिंग सिस्टम्स, ऑटोमेटेड डिजाइन टूल्स, मॉडल टेस्टिंग सुविधाओं और डिजिटल शिपयार्ड तकनीकों से लैस हैं, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं। उन्होंने भारत की समुद्री यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि लोथल के प्राचीन बंदरगाहों से लेकर मुंबई, गोवा, विशाखापत्तनम, कोलकाता और कोचीन के आधुनिक शिपयार्डों तक का सफर भारत की तकनीकी प्रगति और धैर्य का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री निर्भरता अत्यधिक है। देश के 95 प्रतिशत व्यापार (वॉल्यूम) और लगभग 70 प्रतिशत व्यापार (वैल्यू) समुद्री मार्गों से ही होता है। हिंद महासागर में भारत की सामरिक स्थिति और 7,500 किमी की विस्तृत तटरेखा इसे वैश्विक व्यापार में एक महत्वपूर्ण शक्ति बनाती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके इंटीग्रेटेड, एंड-टू-एंड शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम में निहित है, जहां डिजाइन, मॉड्यूलर निर्माण, फिटिंग, मरम्मत और जीवन-चक्र समर्थन तक हर प्रक्रिया स्वदेशी तकनीक से संचालित है। हजारों एमएसएमई के सहयोग से भारत ने स्टील, प्रणोदन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और एडवांस्ड कॉम्बैट सिस्टम्स तक फैली मजबूत आपूर्ति-श्रृंखला विकसित की है। उन्होंने भारतीय निर्मित सैन्य प्लेटफॉर्मों के मानवीय मिशनों में योगदान का उल्लेख किया। 2015 का ऑपरेशन राहत (यमन), महामारी के दौरान ऑपरेशन समुद्र सेतु, और 2025 में म्यांमार भूकंप के समय चलाया गया ऑपरेशन ब्रह्मा, जिसमें आईएनएस सतपुड़ा, सवित्री, घड़ियाल, कर्मुक और एलसीयू 52 ने बड़े पैमाने पर राहत सामग्री पहुंचाई थी। जल के नीचे की क्षमताओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कलवरी क्लास पनडुब्बियां, जिन्हें बढ़ती स्वदेशीकरण दर के साथ एमडीएल में बनाया जा रहा है, भारत की अंडरवाटर वारफेयर क्षमता और डिजाइनिंग दक्षता का उदाहरण हैं। अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ‘केवल जहाज नहीं, बल्कि विश्वास’ और ‘केवल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि साझेदारी’ बनाने में विश्वास रखता है। उन्होंने विश्व समुदाय से मिलकर एक सुरक्षित, समृद्ध और सतत समुद्री भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

अधिभार के कारण पाकिस्तान के सामने संकट, आबादी बढ़ोतरी से संभावित चुनौतियां

इस्लामाबाद दुनिया के कई देश घटती आबादी के संकट से परेशान हैं। इटली, जापान, रूस, साउथ कोरिया जैसे देशों में तेजी से आबादी कम हो रही है और हालात ऐसे हैं कि अस्तित्व के संकट तक की बात हो रही है। यहां तक कि भारत जैसे देश में भी अब प्रजनन दर तेजी से कम हो रही है। प्रति महिला जन्मदर अब भारत में 1.9 ही रह गई है, लेकिन पाकिस्तान की आबादी में तेजी से विस्फोट हो रहा है। बदलते दौर में भी पाकिस्तान की आबादी जिस तरह से बढ़ रही है, उससे देश के आगे संकट पैदा हो सकता है। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने ही अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में पाकिस्तान की पूरी व्यवस्था ही चरमराने का अनुमान जताया है। पाकिस्तान की बढ़ती आबादी और उसके संसाधनों में असंतुलन का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह क्षेत्रफल के मामले में दुनिया का 33वां देश है। लेकिन आबादी के मामले में वह 5वें नंबर पर पहुंच गया है। कराची, लाहौर, पेशावर, रावलपिंडी, क्वेटा समेत तमाम शहरों की हालत यह है कि जरा सी बारिश भी बाढ़ जैसे हालात पैदा कर देती है। भारी आबादी के चलते कहीं भी रिहायश की सही व्यवस्था नहीं है और खेती का रकबा भी लगातार कम हो रहा है। क्लाइमेट चेंज और आर्थिक संकट जैसी समस्याएं अलग से घर रही हैं। फिलहाल पाकिस्तान की आबादी 241.5 मिलियन पर है। अब यह अगले 5 सालों में 300 मिलियन यानी 30 करोड़ तक पहुंच गई है। यही नहीं 2050 में तो यह 40 करोड़ हो जाएगी। छोटे से देश की इतनी भीषण आबादी बड़ा संकट खड़ा कर सकती है। ऐसी स्थिति इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान में प्रजनन दर 3.6 है। यह भारत के मुकाबले लगभग दोगुनी है। साउथ एशिया के देशों में किसी भी मुल्क की आबादी बढ़ने की ग्रोथ इतनी अधिक नहीं है। पाकिस्तान के बाद अफ्रीका के मुल्कों में ही आबादी बढ़ने की रफ्तार इतनी तेज देखी जा रही है। डॉन के मुताबिक इतनी भारी आबादी का असर हर सेक्टर पर दिख रहा है। एक तरफ बच्चे कुपोषित हैं तो वहीं उनके बड़े होने पर बेरोजगारी का संकट है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर जैसी समस्याएं भी पैदा हो रही है। पाकिस्तान की बढ़ती आबादी के चलते हालात यह हैं कि 5 साल से कम आयु के 40 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। इसके अलावा बच्चों को जन्म देने के दौरान ही 11 हजार माताओं की हर साल मौत हो जाती है। पाकिस्तान में गर्भ निरोधक उपायों के इस्तेमाल में कमी के चलते भी ऐसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। इसकी वजह कुछ लोगों की कट्टरता है और वे गर्भनिरोध का इस्तेमाल नहीं करते। यही नहीं यह कट्टरता बढ़ती आबादी में एक और तरीके से खाज का काम करती है। पोलियो की दवा का विरोध किया जाता है और इसके चलते अकसर पाकिस्तान में पोलियो के केस मिल जाते हैं।