samacharsecretary.com

कुत्ते के काटने के मामलों में मुआवजा तय, कर्नाटक सरकार देगी 5 लाख और चोट पर 5 हजार

बेंगलुरु   कर्नाटक सरकार ने राज्य में बढ़ते कुत्तों के काटने के मामलों को देखते हुए बड़ा ऐलान किया है. सरकार ने तय किया है कि कुत्ता काटने से किसी व्यक्ति की मौत होने पर परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. यह मुआवजा राज्य सरकार की ओर से सीधे पीड़ित परिवार को मिलेगा. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गंभीर या सामान्य चोट लगने की स्थिति में पीड़ितों को कुल 5,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसमें से 3,500 रुपये सीधे पीड़ित को और 1,500 रुपये सुवर्ण आरोग्य सुरक्षा ट्रस्ट को दिए जाएंगे, जिससे पीड़ित के इलाज का खर्च कवर होगा। किस तरह की चोटों पर मिलेगा मुआवजा? सरकार की नई गाइडलाइन में यह साफ किया गया है कि स्ट्रे डॉग द्वारा होने वाली निम्न स्थितियों पर मुआवजा मिलेगा;- त्वचा पर छेद होने पर  गहरी चोट या कट लगना शरीर पर काले-नीले निशान बनना कई जगह काटने की स्थिति पर तमिलनाडु में बढ़ती डॉग-बाइट घटनाओं पर चिंता सरकार का कहना है कि यह कदम पीड़ितों की वित्तीय मदद के साथ-साथ डॉग-बाइट मामलों की गंभीरता को देखते हुए उठाया गया है. इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने तमिलनाडु में तेजी से बढ़ते डॉग-बाइट और रैबीज मौतों पर चिंता जताई है. उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि तमिलनाडु में साल 2024 में अब तक 5.25 लाख कुत्ता काटने के मामले दर्ज हुए है. 28 लोगों की मौत रैबीज से हो चुकी है. चिदंबरम ने कहा कि कुत्तों से प्यार करने में कोई बुराई नहीं, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्ट्रे डॉग्स का टीकाकरण, स्टरलाइजेशन और नियंत्रित प्रबंधन जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को बड़ा आदेश डॉग-बाइट घटनाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि स्कूल, अस्पताल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन जैसे स्थानों से सभी स्ट्रे डॉग्स को हटाया जाए. इन जगहों को ठीक से फेंसिंग किया जाए. पकड़े गए कुत्तों को वापस उसी जगह नहीं छोड़ा जाएगा. उन्हें स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन के बाद निर्धारित डॉग शेल्टर में रखा जाएगा. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा. 

अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई: कुख्यात गैंगस्टर नोनी राणा अमेरिका में दबोचा गया

 नई दिल्ली मोस्ट वांटेड गैंगस्टर नोनी राणा को अमेरिका में गिरफ्तार कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियों ने उसे नियाग्रा बॉर्डर इलाके से उस समय हिरासत में लिया, जब वह अमेरिका से कनाडा भागने की कोशिश कर रहा था। बॉर्डर एरिया की सुरक्षा जांच के दौरान ही उसे दबोच लिया गया। नोनी राणा मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला है और कुख्यात गैंगस्टर काला राणा का छोटा भाई बताया जा रहा है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां काफी समय से उसकी तलाश में थीं। उसकी गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और प्रत्यर्पण को लेकर एजेंसियों की कार्रवाई जारी है। गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया इससे पहले गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई और कई आपराधिक मामलों में आरोपी अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया। भारत आते ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अनमोल गिरफ्तार कर लिया। एनआईए ने उसे विशेष अदालत में पेश किया, जहां से 11 दिन की हिरासत में भेज दिया गया। एनआईए के अनुसार अमेरिका में बैठकर अनमोल देश में आतंकी सिंडिकेड चला रहा था। पंजाब पुलिस ने अनमोल को ट्रेस करने में अहम भूमिका निभाई है। एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने वर्ष 2022 में खुलासा किया था कि अनमोल फर्जी पासपोर्ट के साथ देश से फरार हो गया है। वह केन्या व अन्य देशों से होते हुए अमेरिका पहुंचा था। अनमोल पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या और पिछले साल अप्रैल में अभिनेता सलमान खान के घर पर गोलीबारी में भी वांछित था।  

मानहानि मामले में राहत: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ ट्रायल पर 4 दिसंबर तक रोक बढ़ाई

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे उस मामले में राहत जारी रखी है, जिसमें उन पर 2022 की 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान सेना पर कथित अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है। अदालत ने गुरुवार को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगी अंतरिम रोक 4 दिसंबर तक बढ़ा दी। दो जजों की पीठ, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, ने यह फैसला लिया। इस मामले की सुनवाई टलने का कारण एक स्थगन पत्र बताया गया है। राहुल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती यह मामला राहुल गांधी की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 29 मई वाले आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की वह अर्जी खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने लखनऊ की ट्रायल कोर्ट की तरफ से जारी समन को रद्द करने की मांग की थी। पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ऐसा ही फैसला अगस्त में हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और उत्तर प्रदेश सरकार व शिकायतकर्ता से जवाब मांगा था। उसी दौरान कोर्ट ने राहुल गांधी से यह भी पूछा था कि उन्होंने यह कैसे कहा कि 2000 वर्ग किमी भारतीय भूमि चीन के कब्जे में है, 'क्या आप वहां थे? आपके पास कोई सबूत है?' कोर्ट ने यह भी कहा था कि 'अगर आप सच्चे भारतीय हैं, तो ऐसे बयान नहीं देंगे।' राहुल गांधी की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने रखी दलील वहीं राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि विपक्ष के नेता को देश के मुद्दों पर सवाल उठाने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि कानून (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223) के अनुसार, कोर्ट को कोई भी आपराधिक शिकायत स्वीकार करने से पहले आरोपी की बात सुननी चाहिए, जो इस मामले में नहीं हुआ। राहुल गांधी पर दिसंबर 2022 की यात्रा के दौरान हुए चीन-भारत विवाद के संदर्भ में सेना के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही थीं। इसी शिकायत के आधार पर लखनऊ की अदालत ने उनको मानहानि के आरोप में तलब किया था। मामले में 4 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई राहुल गांधी के वकील ने दलील दी कि शिकायत पढ़कर ही आरोप संदिग्ध लगते हैं, और यह भी कहा कि राहुल गांधी लखनऊ के निवासी नहीं हैं, इसलिए कोर्ट को समन जारी करने से पहले आरोपों की जांच करनी चाहिए थी। अब अगली सुनवाई 4 दिसंबर को होगी और तब तक ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया रुकी रहेगी।

सरकार करेगी आधार को और सुरक्षित, कार्ड में केवल QR कोड और फोटो दिखाई देंगे

नई दिल्‍ली.  आधार आज कितना जरूरी है, यह तो आप जान ही चुके होंगे. आपकी सभी वित्‍तीय पहुंच बिना आधार के संभव नहीं हो सकती है. जाहिर है कि इतने जरूरी डॉक्‍यूमेंट के गलत इस्‍तेमाल का खतरा भी खूब होता है. इसी खतरे को भांपते हुए आपके आधार को और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने एक बार फिर इसमें बदलाव की बात कही है. आने वाला नया आधार कार्ड सिर्फ आपकी फोटो और एक क्‍यूआर के साथ होगा. इसमें पहले की तरह लिखे नाम, पते और आधार कार्ड के नंबर को हटा दिया जाएगा. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) लोगों से जुड़ी जानकारी के दुरुपयोग को रोकने और ऑफलाइन सत्यापन को हतोत्साहित करने के लिए धारक की तस्वीर और क्यूआर कोड के साथ आधार कार्ड जारी करने पर विचार कर रहा है. आधार पर आयोजित एक सम्मेलन में यूआईडीएआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) भुवनेश कुमार ने कहा कि प्राधिकरण दिसंबर में एक नया नियम लाने पर विचार कर रहा है, ताकि होटल, कार्यक्रम आयोजकों आदि जैसी संस्थाओं द्वारा ऑफलाइन सत्यापन को हतोत्साहित किया जा सके. साथ ही व्यक्तियों की गोपनीयता बनाए रखते हुए आधार का उपयोग करके आयु सत्यापन प्रक्रिया को बढ़ाया जा सके. कैसा होगा नया आधार कार्ड कुमार ने कहा, ‘इस बारे में विचार किया जा रहा है कि कार्ड पर किसी और विवरण की जरूरत क्यों हो. इसमें केवल तस्वीर और क्यूआर कोड होना चाहिए. अगर हम और जानकारी छापेंगे, तो लोग वही मानेंगे और जो लोग इसका दुरुपयोग करना जानते हैं, वे करते रहेंगे.’ इसका मतलब है कि अब आधार कार्ड पर सिर्फ आपकी फोटो और एक क्‍यूआर कोड होगा, जिसमें आपकी सभी जानकारियां गोपनीय रूप से सुरक्षित रहेंगी और इसका दुरुपयोग भी नहीं हो सकेगा. सत्‍यापन में टूट रहे नियम आधार अधिनियम के अनुसार किसी भी व्यक्ति का आधार नंबर या बायोमेट्रिक जानकारी ऑफलाइन सत्यापन के लिए इकट्ठा, उपयोग या संग्रहित नहीं की जा सकती. फिर भी कई संस्थाएं आधार कार्ड की फोटोकॉपी इकट्ठा करती हैं और स्टोर भी करती हैं. ऐसे में उनके साथ धोखाधड़ी या इन आधार का गलत इस्‍तेमाल होने की संभावना बनी रहती है. इससे बचने के लिए ही आधार में सारी जानकारियां अब गोपनीय करने की तैयारी है, ताकि ऑफलाइन सत्‍यापन पर रोक लगाकर लोगों की जानकारियों के गलत इस्‍तेमाल को भी रोका जा सके. आधार सत्‍यापन पर क्‍या नियम देश में आधार का सत्‍यापन बिना धारक की सहमति के नहीं किया जा सकता है और कोई भी संस्‍था ऐसा करती है तो उस पर 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है. यह सहमति बायोमेट्रिक या इलेक्‍ट्रॉनिक रूप में ही ली जाएगी, जो धारक से ओटीपी, फिंगरप्रिंट, आइरिस आदि के जरिये कराया जा सकता है. केवल UIDAI की ओर से अधिकृत संस्‍था और बैंक ही आधार का सत्‍यापन कर सकते हैं. यूजर चाहे तो अपने बायोमेट्रिक डाटा को लॉक भी कर सकता है और तब सिर्फ ओटीपी ही काम करेगा. अगर कोई आधार के डाट का गलत इस्‍तेमाल करता है तो उस पर भी भारी जुर्माना लगाया जा सकता है.

स्पेशल सेल का ऑपरेशन सफल: 100 करोड़ की ड्रग्स जब्त, ड्रग गैंग के 4 मेंबर काबू

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नए साल से पहले बड़ी कार्रवाई की। ‘ऑपरेशन न्यू ईयर’ के तहत चलाए गए अभियान में पुलिस ने करीब 105 करोड़ रुपए की ड्रग्स बरामद की। यह ड्रग्स (मेथाम्फेटामाइन्स) रेव पार्टियों और बड़े सेलिब्रेशन में इस्तेमाल होती है। पुलिस ने चार तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनमें से तीन आरोपियों को दिल्ली से और एक आरोपी को बेंगलुरु से पकड़ा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन लोगों ने दिल्ली में ही एक मोबाइल ड्रग्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट (फैक्ट्री) बना रखी थी। यह फैक्ट्री एक चलते-फिरते ट्रक में छिपाई गई थी, जिसका पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया। स्पेशल सेल के डीसीपी प्रशांत गौतम ने बताया कि यह खेप नए साल की पार्टियों में सप्लाई की जानी थी। मेथाम्फेटामाइन्स की यह बड़ी मात्रा विदेश से मंगवाई गई थी और इसका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है। पुलिस अभी इनके विदेशी कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पकड़ी गई ड्रग्स की बाजार कीमत 105 करोड़ रुपए से ज्यादा है। आरोपी लंबे समय से दिल्ली-एनसीआर में ड्रग्स का कारोबार कर रहे थे और युवाओं को निशाना बना रहे थे। ट्रक में बनी यह मोबाइल लैब इतनी खतरनाक थी कि इसे कहीं भी खड़ा करके कुछ ही घंटों में ड्रग्स तैयार की जा सकती थी। दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा ने स्पेशल सेल की टीम को इस सफलता के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ दिल्ली पुलिस का अभियान और तेज होगा, ताकि राजधानी को ड्रग्स मुक्त बनाया जा सके। पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई से नए साल की कई बड़ी रेव पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई पर पूरी तरह रोक लग गई है। फिलहाल, चारों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और इनसे पूछताछ जारी है। 

लैंड यूज़ हेराफेरी का बड़ा मामला: गंगानगर में इंडस्ट्रियल जमीन को बनाया रिहायशी, जांच के आदेश

श्रीगंगानगर श्रीगंगानगर के मास्टर प्लान में गंभीर अनियमितताएं करके भूमाफिया को अधिकारियों द्वारा मोटा फायदा पहुंचाए जानेे को लेकर बड़ा बवाल हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा ने एक शिकायत पर संज्ञान लेते हुए स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिव को तत्काल प्रभाव से इसकी जाँच करवाकर टिप्पणी प्रस्तुत करने को कहा है। यह शिकायत में श्रीगंगानगर के मुकेश शाह को संगठित और बड़ा भूमाफिया बताते हुए उस पर यूआईटी और स्थानीय निकायों के अधिकारियों से मिलीभगत करके मास्टर प्लान में गंभीर हेराफेरी करवाने और करोड़ों रुपए की जमीन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है। अखबारों के अनुसार, मुकेश शाह ने रिद्धि-सिद्धि नाम से 19 कॉलोनियों में 7-10 हजार भूखंड बेचे हैं। शिकायत में कहा गया है कि मुकेश शाह ने पिछले वर्षों में कॉलोनाइज़र के नाम पर लाखों वर्गफुट जमीन पर आवासीय और व्यावसायिक भूखंड काटकर अरबों रुपये का नेटवर्क खड़ा किया है। आरोप है कि शाह ने नगर योजना अधिकारी राकेश के साथ सांठगांठ करके मास्टर प्लान में औद्योगिक उपयोग वाली महत्वपूर्ण भूमि को पहले "विशेष क्षेत्र" चिन्हांकित कराया। बाद में उसी विशेष क्षेत्र को गुपचुप तरीके गलत तथ्या दर्शाकर आवासीय उपयोग में परिवर्तित करवा लिया। जबकि विशेष क्षेत्र प्रयोजन की जमीन का इस तरह आवासीय उपयोग दर्शाया जाना कानूनन गलत है। शिकायत के अनुसार, यह प्रत्यक्ष रूप से राजस्व चोरी, योजना में धोखाधड़ी का गंभीर मामल है। इस एक परिवर्तन से उक्त भूमि के मूल्य में कई गुणा वृद्धि हुई है और राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का सीधे तौर पर नुकसान हुआ है। शिकायत में जे.सी.टी. कपड़ा मिल से जुड़ी औद्योगिक भूमि को भी स्वामित्व सुनिश्चित किए बिना ही आवासीय उपयोग दर्शित करने में गंभीर अनियमितताएं होने का उल्लेख किया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रवर्तन निदेशालय तथा आयकर विभाग दोनों की जांच के घेरे में आ चुका यह व्यक्ति इन दिनों विदेश (दुबई) भागा हुआ है। ED और आयकर विभाग की जांच के दायरे में है मुकेश शाहः शिकायत में बताया गया है कि मुकेश शाह अवैध तरीके से लाभ कमाने की गतिविधियों में संलिप्त है। वह दो बार ईडी और आयकर विभाग जैसी जांच एजेंसियों की छापेमारी में पकड़ा जा चुका है। पहली कार्रवाई उस पर वर्ष 2021 में आयकर विभाग ने की थी। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उसके यहां छापेमारी की है। दोनों बार भारी नकद तथा संपत्ति का पता चला है। इसका उल्लेख राजस्थान से प्रकाशित एक प्रमुख समाचार पत्र की खबर में भी हुआ है। तत्काल जाँच और कार्रवाई की मांगः शिकायतकर्ता ने नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री को भेजी गई शिकायत में मांग की है कि इस संगठित राजस्व अपराध की जाँच अपराध शाखा तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा उच्च स्तर पर कराई जाए। साथ ही, भविष्य में राज्य को और हानि न हो, इसके लिए मास्टर प्लान को उक्त परिसरों हेतु तत्काल प्रभाव से पुनर्विचार में लिया जाए। जांच में भूमि स्वामित्व, भूमि उपयोग परिवर्तन फाइलें, जारी पट्टों और करोड़ों रुपये के रिश्वत के आदान-प्रदान की गहन जाँच की मांग की गई है।

सीमा पर बढ़ी तनाव की आंच: पोलैंड का बड़ा कदम, रूस ने चेताया— ‘जवाब दोगुना होगा’

पोलैंड  पोलैंड ने अपने देश में चल रहे रूसी दखल और तोड़फोड़ की घटनाओं को देखते हुए रूस के आखिरी बचे कॉन्सुलेट (ग्दांस्क) को भी बंद करने का निर्णय ले लिया है। यह कदम पोलैंड में रेलवे ट्रैक उड़ाने की घटना के बाद उठाया गया है, जिसके लिए दो यूक्रेनी नागरिकों पर संदेह है जो कथित तौर पर रूसी खुफिया एजेंसियों के लिए काम कर रहे थे। पोलैंड के विदेश मंत्री रादेक सिकोर्स्की ने बताया कि रूस को कई बार चेतावनी दी गई थी कि यदि उसने “शत्रुतापूर्ण गतिविधियाँ” नहीं रोकीं तो उसके कूटनीतिक ठिकानों को और कम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “यह हमारी पूरी प्रतिक्रिया नहीं है, लेकिन मैंने ग्दांस्क में चल रहे रूस के आखिरी कॉन्सुलेट को बंद करने का फैसला किया है।” उन्होंने इसे एक “राज्य प्रायोजित आतंकवादी कृत्य” बताया क्योंकि विस्फोट का उद्देश्य लोगों को नुकसान पहुँचाना था। रूस की प्रतिक्रिया रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने कहा कि इसके जवाब में रूस भी “पोलैंड की कूटनीतिक मौजूदगी कम करेगा।” क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि पोलैंड के साथ संबंध “पूरी तरह से खराब हो चुके हैं” और इस कदम पर उन्होंने “अफसोस” जताया।   घटना क्या थी? सप्ताहांत में पोलैंड के वारसॉ से यूक्रेन सीमा की ओर जाने वाली रेलवे लाइन पर विस्फोट हुआ। पटरी को गंभीर नुकसान पहुँचा। किसी के घायल होने की सूचना नहीं। यह घटना मीका के पास हुई (वारसॉ से 100 किमी दूर) एक दूसरी घटना में पुलावी इलाके में पावर लाइनों को भी नुकसान पहुँचाया गया। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने इसे “अभूतपूर्व सबोटाज” बताया।उन्होंने संसद में बताया कि दो संदिग्ध लंबे समय से रूसी गुप्तचर एजेंसियों से जुड़े थे। दोनों संदिग्ध पोलैंड से भागकर बेलारूस चले गए हैं। पश्चिमी अधिकारियों के अनुसार, यूक्रेन पर हमले के बाद रूस और उसके सहयोगियों ने यूरोप मेंदर्जनों सबोटाज और आगजनी जैसी घटनाएँ करवाई हैं। माना जा रहा है कि इस सब के पीछे रूस का लक्ष्य यूक्रेन के लिए समर्थन कम करना औऱ यूरोपीय देशों में डर और विभाजन फैलाना है। पिछले वर्षों में पोलैंड ने पहले भी रूस के क्राकोव और पोजनान स्थित कॉन्सुलेट बंद किए थे। क्राकोव कॉन्सुलेट को इसलिए बंद किया गया क्योंकि 2024 में वारसॉ के शॉपिंग सेंटर में लगी आग को रूसी खुफिया एजेंसी द्वारा करवाया गया षड्यंत्र बताया गया।  

जापान पर चीन की सख्ती: ताइवान विवाद भड़का, सीफूड आयात पर रोक

टोक्यो/बीजिंग ताइवान को लेकर चीन और जापान के बीच रिश्तों में इस कदर कड़वाहट आ गई है कि बात सीफूड बैन तक पहुंच गई है। बुधवार को जापानी और चीनी मीडिया रिपोर्ट्स ने इसका दावा किया। चीन ने जापानी सीफूड आयात पर अगस्त 2023 में भी पाबंदी लगाई थी। तब फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट के वेस्टवॉटर को लेकर दूरी बढ़ी थी। तब चीन ने जापानी सीफूड पर बैन लगा दिया था। इससे जापान को बहुत नुकसान हुआ था, क्योंकि चीन जापान का सबसे बड़ा खरीदार था। जून 2025 में चीन ने आंशिक रूप से बैन हटाया था, जिसके बाद लगभग 700 जापानी निर्यातक फिर से रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर चुके थे। लेकिन केवल 3 को मंजूरी मिली थी। 19 नवंबर को चीन ने इसे फिर से पूर्ण रूप से बहाल कर दिया। जापानी कृषि मंत्री नोरिकाज़ु सुजुकी ने कहा कि यह निर्यातकों के लिए बड़ा झटका है। 2023 में जापान के कुल सीफूड निर्यात का 15.6 फीसदी हिस्सा चीन जाता था। हाल में पीएम साने ताकाइची के ताइवान को लेकर दिए बयान से विवाद आगे बढ़ा। ताकाइची ने संसद में कहा था कि “ताइवान में संकट का मतलब जापान में संकट है” और जापान "सामूहिक आत्मरक्षा के नाम पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।" तनाव उस समय और गहरा गया जब मंगलवार को चीन के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के महानिदेशक लियू जिनसॉन्ग की जापान के विदेश मंत्रालय के एशियाई और ओशिनिया ब्यूरो के महानिदेशक मसाकी कनाई से बैठक हुई। लियू ने बैठक के बाद कहा कि परिणाम “असंतोषजनक” रहे और जापान ने चीन की चिंताओं को दूर करने के लिए “कोई ठोस कदम” नहीं उठाया। वहीं, जापानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक ज्यादातर पूर्व में दिए गए आधिकारिक बयानों की पुनरावृत्ति साबित हुई। चीन ने दोहराया कि जब तक सांसद ताकाईची अपना बयान वापस नहीं लेतीं, तब तक बीजिंग पहले से लागू कदमों को हटाने का इरादा नहीं रखता। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने चीन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के शोधकर्ता जियांग हाओयू के हवाले से लिखा: “टोक्यो चाहे तो तनाव कम करने के लिए दूत भेजे या समझाने की कोशिश करे, लेकिन चीन का रुख साफ है—जब तक ताकाईची अपना बयान वापस नहीं लेंगी, कोई भी राजनयिक स्पष्टीकरण स्थिति को हल नहीं कर सकता।” ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच चीन और जापान के रिश्तों में पिछले कुछ दिनों में नई कड़वाहट जुड़ गई है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब जापान की एक वरिष्ठ सांसद ने संसद में कहा कि “सबसे खराब स्थिति”—जैसे कि चीन द्वारा ताइवान के आसपास समुद्री मार्गों की नाकाबंदी—में जापान को सैन्य हस्तक्षेप पर विचार करना पड़ सकता है। बीजिंग ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए तुरंत मांग की कि टिप्पणी वापस ली जाए। ताकाइची की 7 नवंबर को की गई टिप्पणी के बाद चीन ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की। चीन ने अपने नागरिकों को जापान की यात्रा से सावधान रहने की सलाह दी, साथ ही छात्रों को जापान में पढ़ाई के लिए सतर्क रहने की हिदायत दी गई। तनाव अब सांस्कृतिक और मनोरंजन क्षेत्र तक भी पहुंच चुका है। जापान की प्रसिद्ध मनोरंजन कंपनी योशिमोटो कोग्यो ने मंगलवार को घोषणा की कि “अनिवार्य परिस्थितियों” के कारण उसने शंघाई इंटरनेशनल कॉमेडी फेस्टिवल में अपने शो रद्द कर दिए हैं।

टीबी नियंत्रण में क्रांति: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से अब होगी तेजी से पहचान और रोकथाम

नई दिल्ली   दुनिया में फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों पर होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस बार एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि सामने आई। डेल्फ्ट इमेजिंग और इपकॉन ने मिलकर CAD4TB+ नाम का नया AI आधारित प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म पहली बार टीबी की पहचान, निगरानी, हॉटस्पॉट खोजने और भविष्य में संक्रमण बढ़ने की संभावना का अनुमान, सब कुछ एक ही सिस्टम में उपलब्ध कराता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक टीबी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में बेहद अहम साबित हो सकती है। टीबी की पहचान अभी भी बड़ी चुनौती WHO की ताजा रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024 में दुनिया भर में 1 करोड़ 7 लाख लोग टीबी से संक्रमित हुए, जबकि 12 लाख से अधिक लोगों की जान गई। सबसे चिंताजनक बात यह है कि लगभग 24 लाख मरीजों की पहचान ही नहीं हो पाती, खासकर अफ्रीका और ग्रामीण इलाकों में, जहां जांच सुविधाएं सीमित हैं। कई लोग स्क्रीनिंग से बाहर रह जाते हैं और संक्रमण फैलता रहता है। CAD4TB+ इसी कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है, जो AI एक्स-रे तकनीक और डेटा एनालिटिक्स को जोड़कर बताता है कि किस इलाके में टीबी अधिक है, कम है या बढ़ने की संभावना है।   विशेषज्ञों की राय डेल्फ्ट इमेजिंग के CEO गुइडो गीर्ट्स ने बताया कि कठिन इलाकों में रहने वाले लोगों तक जांच पहुंचाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब तक CAD4TB की मदद से 5.5 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है और नया वर्जन CAD4TB+ इस प्रक्रिया को और तेज, आसान और सटीक बनाएगा। इपकॉन की CEO कैरोलाइन वैन काउवेलर्ट के अनुसार, यह सिस्टम फील्ड लेवल की जांच को राष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य योजना से जोड़ने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि अब हर एक्स-रे सिर्फ एक मरीज की जांच नहीं, बल्कि पूरे देश में टीबी की स्थिति को समझने का अहम डेटा बन जाएगा।   कई देशों में मिले उपयोगी परिणाम CAD4TB तकनीक पहले से ही 90 से ज्यादा देशों में इस्तेमाल की जा रही है।     नाइजीरिया में इसने टीबी हॉटस्पॉट खोजकर ज्यादा मरीजों की पहचान की।     दक्षिण अफ्रीका में एआई की वजह से जांच की लागत कम हुई और शुरुआती चरण में मरीज मिल सके।     120 से अधिक वैज्ञानिक अनुसंधान इस तकनीक को समर्थन दे चुके हैं। इस नई एआई तकनीक से उम्मीद है कि टीबी की पहचान और तेजी से होगी, इलाज जल्दी शुरू होगा और इससे होने वाली मौतों में भी कमी आ सकती है।  

सऊदी प्रिंस से तीखा सवाल… ट्रंप ने चैनल को बताया फेक न्यूज, लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी

न्यू यॉर्क  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ‘ABC News' की पत्रकार मैरी ब्रूस पर निशाना साधते हुए उन्हें‘‘बेहद खराब रिपोर्टर'' बताया और उनसे तीखे सवाल पूछे जाने के बाद समाचार संगठन के प्रसारण का लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी। एबीसी न्यूज की व्हाइट हाउस के लिए मुख्य संवाददाता ओवल ऑफिस में उन पत्रकारों में शामिल थीं, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से सवाल पूछने की अनुमति थी। ब्रूस ने ट्रंप से पूछा कि क्या राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उनके परिवार का सऊदी अरब में व्यापार करना उचित है। इससे पहले कि ट्रंप जवाब दे पाते, ब्रूस ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से पूछा, ‘‘अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने निष्कर्ष निकाला कि आपने एक पत्रकार की हत्या की साजिश रची। 9/11 पीड़ितों के परिजन आपके यहां आने से नाराज हैं। अमेरिकी आप पर क्यों भरोसा करें? और यही सवाल आपसे भी, राष्ट्रपति ट्रंप।'' इन सवालों के बाद ट्रंप ने ABC को ‘‘फेक न्यूज'' बताया और सऊदी अरब में अपने परिवार के व्यावसायिक हितों का बचाव किया।   राष्ट्रपति ने अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि क्राउन प्रिंस का 2018 में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या में कुछ न कुछ हाथ था। बाद में ट्रंप ने ब्रूस की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रिंस से ‘‘बेहद खराब प्रश्न'' पूछा। यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन पर एक सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने ब्रूस से कहा, ‘‘आप एक खराब रिपोर्टर हैं। आपके सवाल पूछने का तरीका गलत है।'' ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि एबीसी का लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए क्योंकि आपकी खबरें बहुत फर्जी और गलत हैं।'' बहरहाल, ABC News ने ट्रंप की इन टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।