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डोनाल्ड ट्रंप ने तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा जताया, मीटिंग पर मीटिंग से झुंझलाए, रूस पर यूक्रेन का दबाव

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब रूस और यूक्रेन की शांति बातचीत से लगभग ऊब चुके हैं. कई दौर की मीटिंग चली, कई प्रस्ताव दिए गए, कई दखल भी हुए, लेकिन जमीन पर कोई बदलाव नहीं हुआ. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार साफ शब्दों में कहा है कि वह ‘अब समय बर्बाद नहीं करना चाहते’.ट्रंप की नाराजगी सिर्फ रूस पर नहीं है. वह खुलकर यूरोपीय देशों और यूक्रेन से भी खफा दिखे. NBC की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप लंबे समय से ट्रंप के प्रस्तावों से बचने की कोशिश कर रहा है, खासकर उस मांग से जिसमें यूक्रेन को रूस को जमीन सौंपने की बात कही गई है. यूरोप ने कहा है कि यह प्लान अस्वीकार्य है, जबकि ट्रंप इसे ‘तुरंत लागू होने वाला समाधान’ बताते रहे हैं. वहीं ट्रंप ने रूस-यूक्रेन की लड़ाई को तीसरे विश्वयुद्ध तक पहुंचने की बात कही है. ट्रंप ने कहा, ‘मैंने उन्हें कुछ दिन पहले बताया था. मैंने कहा था कि अगर हर कोई इसी तरह के खेल खेलता रहा, तो अंततः तीसरा विश्व युद्ध छिड़ जाएगा.’ यह उन सभी देशों को संदेश है जो या तो रूस या यूक्रेन के पक्ष में खड़े हैं. ट्रंप क्यों हुए परेशान? एक बिजनेस राउंडटेबल में ट्रंप ने कहा, ‘वे लोग चाहते हैं कि हम वीकेंड में यूरोप मीटिंग के लिए आएं. हम तभी आएंगे जब कुछ ठोस लेकर वापस आएंगे. हम समय बर्बाद करने नहीं बैठे.’ उन्होंने यहां तक कह दिया, ‘कई बार आपको लोगों को आपस में लड़ने देना पड़ता है, कई बार नहीं.’ यह बयान बताता है कि ट्रंप अब खुद को इस डिप्लोमेसी से दूर करने की तैयारी में हैं. उधर जेलेंस्की ने भी पहली बार माना कि अमेरिका उन पर ‘बड़े भूभाग छोड़ने’ का दबाव बना रहा है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने खुलासा किया कि विवाद की सबसे बड़ी वजह डोनेत्स्क क्षेत्र और जापोरिज्ज्या न्यूक्लियर प्लांट पर नियंत्रण है. ज़ेलेंस्की ने कहा, ‘वे चाहते हैं कि यूक्रेन डोनेत्स्क छोड़ दे और रूस वहां न घुसे. वे इसे फ्री इकोनॉमिक जोन कह रहे हैं.’ रूस में कहां हुआ हमला? इसी तनाव के बीच यूक्रेन ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने रूस को पूरी तरह चौंका दिया है. यूक्रेन ने पहली बार कैस्पियन सागर में रूस के ऑफशोर तेल प्लेटफॉर्म पर लंबी दूरी के ड्रोन से वार किया है. यह मिशन पहले कभी सार्वजनिक नहीं हुआ था. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस के सूत्रों ने बताया, ‘यह पहली बार है जब यूक्रेन ने कैस्पियन सागर में रूस की तेल फैसिलिटी को निशाना बनाया है. जो भी यूनिट्स रूसी युद्ध मशीन को फंड करती हैं, वे सब वैध लक्ष्य हैं.’ यह हमला रूस की बड़ी ऊर्जा कंपनियों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस की रिफाइनरी, तेल पाइपलाइन, टर्मिनल और यहां तक कि टैंकरों पर भी हमले तेज कर दिए हैं. सिर्फ अगस्त से नवंबर के बीच यूक्रेन ने रूस की 77 एनर्जी फैसिलिटी हिट की हैं, जो साल के पहले सात महीनों की तुलना में लगभग दोगुना है. बड़ी बात यह है कि अब यूक्रेन एक ही रिफाइनरी को बार-बार टारगेट कर रहा है ताकि वह कभी पूरी तरह चालू न हो सके. सारातोव रिफाइनरी को अगस्त से अब तक आठ बार निशाना बनाया जा चुका है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? विशेषज्ञों का कहना है कि रूस तेल की कमाई से सेना में भर्ती और वेतन बढ़ाकर अपना युद्ध तंत्र मजबूत कर रहा है. इसलिए यूक्रेन अब सीधा उस ‘एनर्जी ATM’ पर वार कर रहा है जिससे रूस को सबसे ज्यादा पैसा मिलता है. परिणाम साफ हैं कि रूस की मरम्मत की रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है और कई जगहों पर लंबे समय तक भारी नुकसान हुआ है. दूसरी तरफ, मोर्चे पर रूस धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और बातचीत का हर दौर रूस की मांगों को और मजबूत कर रहा है.

जापान में 6.7 का शक्तिशाली भूकंप, तटीय क्षेत्रों में सुनामी का खतरा, देश में चौथी बार भूकंप

टोक्यो जापान में आज सुबह फिर तेज झटके महसूस किए गए. समुद्र में आया 6.7 मैग्नीट्यूड का भूकंप इतना जोरदार था कि तटीय इलाकों से लेकर दूर बसे शहरों तक धरती हिल गई. भारतीय समय के मुताबिक यह भूकंप सुबह 8:14 बजे आया. इसकी गहराई 10.7 किलोमीटर थी, जो इसे खतरनाक बनाती है. भूकंप तट के करीब आया, और झटकों की तीव्रता देखकर कई जगह लोग घरों से बाहर भागते दिखे. दुकानों और दफ्तरों में अलार्म बजा दिए गए. जापान में भूकंप के बाद सुनामी की कहां चेतावनी? जापानी मीडिया आउटलेट के मुताबिक भूकंप के बाद जापान मौसम एजेंसी ने 1 मीटर तक ऊंची लहरें आने की चेतावनी जारी की है. कई तटीय इलाकों में दोपहर तक लगातार अलर्ट दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक होक्काइडो सेंट्रल पैसिफिक कोस्ट, आओमोरी प्रीफेक्चर, इवाते प्रीफेक्चर और मियागी प्रीफेक्चर में सुनामी की चेतावनी दी गई. बताया जा रहा है कि ये एक मीटर तक ऊंची हो सकती हैं. इसी हफ्ते आए कई भूकंप जापान इस हफ्ते भूकंपों की सीरीज से जूझ रहा है. सोमवार को 7.6 मैग्नीट्यूड का बड़ा भूकंप आया, जिसमें 50 से ज्यादा लोग घायल हुए. सड़कें टूटीं, इमारतें हिली, और छोटे सुनामी वेव्स भी दिखे. मंगलवार को होंचो शहर में 6.7 मैग्नीट्यूड के झटके महसूस किए गए. बुधवार को आओमोरी और होक्काइडो में 6.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया. अब शुक्रवार को फिर 6.7, यानी जापान इस सप्ताह चौथे दिन कांप चुका है. जापान ने जारी की बड़ी चेतावनी सोमवार के भूकंप के बाद जापान एजेंसी ने दुर्लभ ‘मेगाक्वेक एडवाइजरी’ जारी कर दी है. एजेंसी का कहना है कि अगले एक हफ्ते में 8.0 या उससे बड़ा भूकंप आने की संभावना बढ़ गई है. 2011 का विनाशकारी 9.0 भूकंप भी इसी पैटर्न की तरह था. जापान की टेक्टॉनिक प्लेट्स इस समय भारी दबाव में हैं, खासकर होक्काइडो-सानरिकु तट के पास. आज आए भूकंप से क्या नुकसान हुआ? अभी तक किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं मिली है. फिलहाल भूकंप के तुरंत बाद कई ट्रेनें रोक दी गईं. तटीय हाइवे बंद होने लगे हैं. वहीं स्थानीय. प्रशासन अलर्ट पर है. लोग अपने घरों से तुरंत बाहर निकल आए और खुले इलाके में जमा हो गए. सरकार ने कहा है कि हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है.

नितिन गडकरी का बयान: ‘भारत टैक्सी ऐप’ से सर्ज प्राइसिंग पर रोक, अभी टेस्टिंग और ट्रायल में है ऐप

नई दिल्ली   निजी ऑनलाइन कैब एग्रीगेटर्स यानी प्राइवेट कैब ऐप्स द्वारा किराए में बढ़ोतरी (सर्ज प्राइसिंग) के बढ़ते मामलों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सहकारी मोबाइल ऐप 'भारत टैक्सी ऐप' टेस्टिंग और ट्रायल फेज में है। गडकरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि भारत टैक्सी ऐप का उद्देश्य सहकारी मॉडल पर ड्राइवरों के स्वामित्व वाली एक एप्लीकेशन बनाना है।  यह ऐप सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) के तहत काम करेगा। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) इस 'भारत टैक्सी' राइड-हेलिंग सेवा को स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। गडकरी ने आगे कहा कि सरकार ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स गाइडलाइंस, 2025 जारी की हैं, जिनका उद्देश्य एग्रीगेटर्स, जिनमें ऐप-आधारित कैब सेवाएं भी शामिल हैं, को हल्के तरीके से रेगुलेट करना है। साथ ही, यूजर्स की सुरक्षा और ड्राइवर की भलाई से संबंधित मुद्दों का ध्यान रखना है। इन गाइडलाइंस में किराए को लेकर भी नियम दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा, "इन गाइडलाइंस में डायनेमिक प्राइसिंग की अनुमति दी गई है, जिसमें एग्रीगेटर्स राज्य-निर्धारित बेस फेयर से 50 प्रतिशत कम शुल्क ले सकते हैं और पीक घंटों में अधिकतम सर्ज प्राइसिंग को बेस फेयर के दो गुना तक सीमित किया गया है। साथ ही पारदर्शिता, जिम्मेदारी और यात्रियों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य द्वारा निर्धारित शुल्क को बेस फेयर माना जाएगा।” गाइडलाइंस के अनुसार, ड्राइवर-स्वामित्व वाले वाहन को कम से कम 80 प्रतिशत किराया मिलेगा, जबकि एग्रीगेटर द्वारा स्वामित्व वाले वाहन के मामले में ऑन-बोर्ड ड्राइवर को कम से कम 60 प्रतिशत भाड़ा मिलेगा। वहीं, सर्ज प्राइसिंग के मामले में लाभार्थी ड्राइवर होगा। इससे आपूर्ति बढ़ेगी और उच्च मांग के दौरान सेवाएं बेहतर उपलब्ध होंगी। गडकरी ने बताया कि गाइडलाइंस में यह भी प्रावधान है कि अगर एग्रीगेटर कोई अत्यधिक या अनुचित भाड़ा यात्रियों से वसूलता है, तो उनके लाइसेंस को निलंबित या रद्द किया जा सकता है। गाइडलाइंस यह सुनिश्चित करती हैं कि किसी भी यात्री से डेड माइलेज के लिए शुल्क नहीं लिया जाएगा, सिवाय इसके कि जब यात्रा की दूरी तीन किलोमीटर से कम हो और भाड़ा केवल शुरुआत बिंदु से गंतव्य तक ही लिया जाएगा।

केंद्रीय मंत्रियों की गैरमौजूदगी से राज्यसभा ठप, विपक्ष का विरोध

नई दिल्ली  संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। इस बीच कैबिनेट मंत्रियों की अनुपस्थिति के चलते शुक्रवार को राज्यसभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। यह स्थिति उस समय उत्पन्न हुई जब सदन ने 13 दिसंबर 2001 के संसद हमले में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद कामकाज शुरू किया गया। जैसे ही कार्यवाही आगे बढ़ी कि विपक्षी सांसदों ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि सदन में कोई भी कैबिनेट मंत्री मौजूद नहीं है।  इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि वह इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाएंगे और एक जूनियर मंत्री को कैबिनेट मंत्री को बुलाने का अनुरोध करने को कहा। उन्होंने कहा, “मैं प्रक्रिया को समझता हूं। मैंने मंत्री से अनुरोध किया है। एक कैबिनेट मंत्री को आना चाहिए।” लेकिन विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं हुआ। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “यह सदन का अपमान है। जब तक कोई कैबिनेट मंत्री नहीं आता, सदन को स्थगित करना होगा।” लगभग पांच मिनट इंतजार करने के बाद सभापति ने कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। सदन के पुनः जुटने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कैबिनेट मंत्रियों की अनुपस्थिति के लिए खेद जताया। उन्होंने बताया कि उन्हें लोकसभा में पूर्व स्पीकर और पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल के निधन पर श्रद्धांजलि देने के लिए जाना पड़ा था। उन्होंने यह भी बताया कि नेता सदन जेपी नड्डा के नाम से लोकसभा में प्रश्न लगे थे, जिसके कारण वे भी वहां मौजूद थे। रिजिजू ने कहा, “मुझे खेद है कि सदन में कोई कैबिनेट मंत्री मौजूद नहीं था।” कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि पाटिल राज्यसभा के भी पूर्व सदस्य रहे हैं, इसलिए यहां भी श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए। इस पर रिजिजू ने बताया कि औपचारिक प्रक्रिया के चलते थोड़ा समय लग रहा है और राज्यसभा में भी उचित श्रद्धांजलि दी जाएगी। सदन के पुनर्गठन के बाद निर्मला सीतारमण, किरन रिजिजू और जेपी नड्डा सहित अन्य मंत्री मौजूद थे।

कांग्रेस के सीनियर नेता शिवराज पाटिल का 90 वर्ष की उम्र में निधन, सात बार रहे लातूर से सांसद

 लातूर कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का शुक्रवार को लातूर में 90 साल की उम्र में निधन हो गया. पाटिल ने सुबह करीब 6:30 बजे लातूर में अपने घर पर आखिरी सांस ली, जहां वे लंबी बीमारी के कारण घर पर ही देखरेख में थे. शिवराज पाटिल ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई अहम पद संभाला, जिसमें लोकसभा स्पीकर और केंद्रीय कैबिनेट में कई अहम पद शामिल हैं. पाटिल ने लातूर लोकसभा सीट से सात बार जीत हासिल की. उनके गुजर जाने के बाद पूरे महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति में शोक का माहौल है, क्योंकि पाटिल को भारतीय राजनीति में एक शांत, संयत और बेहद मेहनती नेता के तौर पर जाना जाता था.  शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर 1935 को लातूर जिले के चाकुर में हुआ था. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले आयुर्वेद का अभ्यास किया और फिर मुंबई विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा ली. राजनीति में उनका सफर 1967 में शुरू हुआ, जब उन्होंने लातूर नगर पालिका में काम संभाला. यह शुरुआत आगे चलकर एक बड़े राजनीतिक करियर की नींव बनी. कैसा रहा सियासी सफर… 1980 में वे पहली बार लातूर लोकसभा सीट से सांसद बने और उसके बाद लगातार सात बार इसी सीट से जीतकर संसद पहुंचे. यह उपलब्धि उन्हें महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली नेताओं में जगह दिलाती है. इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में उन्होंने रक्षा, वाणिज्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण विभागों में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी निभाई. शिवराज पाटिल, 1991 से 1996 तक लोकसभा के स्पीकर रहे. अपने कार्यकाल में उन्होंने लोकसभा के आधुनिकीकरण, कंप्यूटरीकरण, कार्यवाही के सीधा प्रसारण और नई लाइब्रेरी बिल्डिंग के निर्माण जैसे कामों को तेजी दी. यह समय भारतीय संसद के तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव का अहम दौर माना जाता है. 2004 में चुनाव हारने के बावजूद उन्हें केंद्र में गृह मंत्री बनाया गया. लेकिन 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया. बाद में उन्हें पंजाब का गवर्नर और चंडीगढ़ का प्रशासक बनाया गया, जहां उन्होंने 2010 से 2015 तक सेवा दी. 

आंध्र प्रदेश: घाट रोड पर बस खाई में गिरी, 9 की मौत, कई यात्री गंभीर रूप से घायल

 मरेडुमिल्ली आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. करीब 5 बजकर 30 मिनट पर चित्तूर जिले के यात्रियों को लेकर जा रही एक प्राइवेट बस अचानक अनियंत्रित होकर मरेडुमिल्ली घाट क्षेत्र में गहरी खाई में गिर गई.  हादसा तुलसीपाकालु गांव के पास हुआ, जहां सड़क संकरी और मोड़ों से भरी मानी जाती है. बस में कुल 35 यात्री थे, चालक और क्लीनर मिलाकर संख्या 37 थी. खाई में गिरने के बाद मौके पर चीख पुकार मच गई. कई यात्री बस के अंदर फंस गए. स्थानीय लोगों ने सबसे पहले राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी. कुछ ही देर में चिंटूर पुलिस, रेस्क्यू टीम और एंबुलेंस मौके पर पहुंच गईं.  ASR जिला कलेक्टर दिनेश कुमार के अनुसार, कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी घायलों को तत्काल भद्राचलम अस्पताल ले जाया गया है, जहां कई लोगों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। हादसे की वजहों की जांच जारी दुर्घटना के बाद प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन कर रही हैं। अधिकारियों ने जानकारी दी कि बस हादसे के सही कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। सीएम नायडू ने व्यक्त किया दुख आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस हादसे पर गहरा शोक जताया। उन्होंने कहा कि चित्तूर जिले के अल्लूरी सीताराम राजू क्षेत्र के पास यात्रियों से भरी एक निजी बस का दुर्घटनाग्रस्त होना बेहद दुखद है। कई लोगों की मौत की खबर विचलित करने वाली है। सीएम ने बताया कि उन्होंने पूरी घटना की जानकारी अधिकारियों से ली है और राहत कार्यों की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। नायडू ने आश्वासन दिया कि सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।  

भारतीय नागरिकता छोड़ने का रिकॉर्ड स्तर: 9 लाख लोग हुए विदेश के हमसफ़र

नई दिल्ली  विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को संसद को जानकारी दी कि पिछले पांच वर्षों में करीब 9 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है। विदेशी नागरिकता अपनाने वालों की यह प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है। राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री किर्ती वर्धन सिंह ने बताया कि सरकार भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों का वर्षवार रिकॉर्ड रखती है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में नागरिकता त्यागने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बताया गया कि 2020 में 85,256; 2021 में 1,63,370; 2022 में 2,25,620; 2023 में 2,16,219 और 2024 में 2,06,378 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी। इसके अलावा, 2011 से 2019 के बीच 11,89,194 भारतीयों ने अपनी नागरिकता त्याग दी। इस अवधि में 2011 में 1,22,819; 2012 में 1,20,923; 2013 में 1,31,405; 2014 में 1,29,328; 2015 में 1,31,489; 2016 में 1,41,603; 2017 में 1,33,049; 2018 में 1,34,561 और 2019 में 1,44,017 लोगों ने नागरिकता छोड़ी। इसी बीच, 2024-25 में विदेशों में रहने वाले भारतीयों से प्राप्त शिकायतों के बारे में पूछे गए एक अन्य प्रश्न के उत्तर में विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि विदेश मंत्रालय को कुल 16,127 शिकायतें मिलीं। इनमें से 11,195 शिकायतें ‘मदद’ पोर्टल और 4,932 शिकायतें सीपीग्राम्स के माध्यम से दर्ज हुईं। सबसे अधिक संकट संबंधी मामले सऊदी अरब (3,049) से आए। इसके बाद यूएई (1,587), मलेशिया (662), अमेरिका (620), ओमान (613), कुवैत (549), कनाडा (345), ऑस्ट्रेलिया (318), ब्रिटेन (299) और कतर (289) का स्थान रहा। मंत्री ने बताया कि भारत ने प्रवासी भारतीयों की शिकायतों के समाधान के लिए एक “मजबूत और बहु-स्तरीय तंत्र” तैयार किया है, जिसमें इमरजेंसी हेल्पलाइन, वॉक-इन सुविधा, सोशल मीडिया और 24×7 बहुभाषी सहायता शामिल है। अधिकतर मामलों को सीधे संवाद, नियोक्ताओं से मध्यस्थता और विदेशी अधिकारियों के साथ समन्वय के जरिये शीघ्र सुलझा लिया जाता है। कुछ मामलों में देरी की वजह अधूरी जानकारी, नियोक्ताओं का सहयोग न करना और अदालत में चल रहे मामलों में भारतीय मिशनों की सीमित भूमिका बताई गई। उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास पैनल वकीलों के माध्यम से कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराते हैं, जिसके लिए इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड मदद करता है। उन्होंने कहा कि प्रवासी कामगारों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र एवं कांसुलर कैंप लगातार मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करते हैं।

बांग्लादेश चुनाव का बिगुल बजा, 12 फरवरी को मतदाता चुनेंगे नई सरकार

ढाका बांग्लादेश में आम चुनाव को लेकर तारीख फाइनल हो चुकी है। मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरुद्दीन ने बताया कि अगले साल 12 फरवरी (2026) को आम चुनाव के लिए मतदान होगा। साथ ही, इसी दिन जुलाई चार्टर पर जनमत-संग्रह आयोजित किए जाएंगे। बांग्लादेश की प्रमुख मीडिया आउटलेट द डेली स्टार ने चुनाव आयोग के हवाले से बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एएमएम नासिरुद्दीन ने यह कार्यक्रम एक रिकॉर्डेड संदेश में घोषित किया। चुनाव कार्यक्रम के बारे में बताया गया कि संसदीय चुनाव के लिए नामांकन 29 दिसंबर 2025 तक दाखिल किए जाएंगे। 30 दिसंबर से 4 जनवरी 2026 तक नामांकन की स्क्रूटनी होगी। 20 जनवरी नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है। वहीं, 21 जनवरी को प्रतीक आवंटन और अंतिम उम्मीदवार सूची जारी होगी। इसके साथ ही, 22 जनवरी से 10 फरवरी सुबह 7:30 बजे तक चुनाव प्रचार की अनुमति होगी। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इसे "नए बांग्लादेश के निर्माण का ऐतिहासिक अवसर" बताते हुए कहा कि चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए। निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रपति मो. शाहाबुद्दीन से मुलाकात कर कार्यक्रम की जानकारी दी। इससे पहले आयोग ने मुख्य न्यायाधीश सैयद रफात अहमद और मुख्य सलाहकार यूनुस से भी संवाद किया। चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। उम्मीदवारों को 48 घंटे के भीतर पोस्टर-बैनर हटाने के निर्देश दिए गए हैं। सलाहकारों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल प्रचार में करने पर रोक लगा दी गई है। फिलहाल, सरकार किसी भी नई विकास परियोजना को मंजूरी या उद्घाटन नहीं करेगी। चुनाव प्रचार केवल तीन सप्ताह पहले शुरू हो सकेगा। बता दें कि इस बार मतदान समय एक घंटे बढ़ाया गया है। इसके तहत सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक मतदान होगा। यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि मतदाताओं को दो बैलेट डालने होंगे, एक चुनाव के लिए और दूसरा जनमत-संग्रह के लिए। बताया गया कि प्रवासी बांग्लादेशियों के लिए ऑनलाइन डाक मतपत्र पंजीकरण की व्यवस्था है। बुधवार शाम तक 2,97,000 प्रवासी मतदाता पंजीकृत हो चुके थे। इन बैलेटों पर केवल दलों और निर्दलीय प्रतीकों का उल्लेख होगा, नाम नहीं। निर्वाचन आयोग ने बताया कि पूरे देश में 42,761 मतदान केंद्र और 2,44,739 मतदान बूथ हैं। इन बूथों पर लगभग 12.76 करोड़ मतदाता हैं। इसके लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। वहीं, मतपत्र और अन्य सामग्री मतदान से एक दिन पहले केंद्रों पर भेज दी जाएंगी। 

DRDO का बड़ा बयान: F-35 और Su-57 की 5th जेनरेशन जेट्स कबाड़ बनेंगे, राफेल और S-400 की भी होगी मात

बेंगलुरु  21वीं सदी में युद्ध के तौर-तरीके भी बदल चुके हैं. पैदल सेना का महत्‍व काफी सीमित हो चुका है. एयरफोर्स और नेवी की भूमिका बेहद अहम हो चुका है. सन् 1971 में इंडियन नेवी का ‘ऑपरेशन टा्रइडेंट’ हो या फिर मई 2025 का इंडियन एयरफोर्स का ऑपरेशन सिंदूर, वायुसेना और नौसेना ने दुश्‍मनों को ऐसा सबक सिखाया कि वे ताउम्र याद रखेंगे. बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के बाद ऑपरेशन सिंदूर में एयरफोर्स ने अपने जौहर से पूरी दुनिया को चकित कर दिया. सफल ऑपरेशन के बाद तीन बड़े डेवलपमेंट हुए हैं. पहला, हाइपरसोनिक मिसाइल पर फोकस बढ़ गया है. दूसरा, ताकतवर और अत्‍याधुनिक एयर डिफेंस सिस्‍टम को विकसित करने पर ज्‍यादा ध्‍यान दिया जाने लगा है. तीसरा, अल्‍ट्रा मॉडर्न फाइटर जेट (5th और 6th जेनरेशन फाइटर जेट) के डेवलपमेंट से जुड़े प्रोजेक्‍ट में काफी तेजी लाई गई है. भारत एक तरफ पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट इंपोर्ट करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है तो दूसरी तरफ AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च कर फिफ्थ जेन कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट देसी तकनीक से डेवलप करने में भी जुटा है. इन सब डेवलपमेंट के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 6th जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने वाली तकनीक डेवलप करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. यदि यह प्रोजेक्‍ट सफल रहता है तो वो दिन दूर नहीं जब भारत के पास देसी टेक्‍नोलॉजी से डेवलप 6th जेनरेशन फाइटर जेट होगा, जिसके सामने F-35 और Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमान भी पानी भरेंगे. दरअसल, DRDO के अंतर्गत आने वाले रिसर्च सेंटर इमरात (RCI) ने 6th जेनरेशन वॉरफेयर के लिए जरूरी क्‍वांटम एव‍ियोनिक्‍स सेंसर डेवलप करने के लिए प्राइवेट सेक्‍टर को औपचारिक रूप से इन्‍वाइट किया है. इस टेक्‍नोलॉजी के डेवलप होने पर भारत के लिए 6th जेनरेशन फाइटर जेट बनाना बेहद आसान हो जाएगा. बता दें कि 6th जेनरेशन फाइटर जेट किसी भी अल्‍ट्रा मॉडर्न रडार सिस्‍टम को चकमा देने में सक्षम है. साथ ही एयर डिफेंस सिस्‍टम के चक्रव्‍यू को तोड़ना भी इसके लिए कोई बड़ी बात नहीं होगी. रडार क्रॉस सेक्‍शन यानी RCS काफी कम होने की वजह से 6th जेनरेशन फाइटर जेट का रडार की पकड़ में आना फिलहाल असंभव जैसा है. ‘इंडिया डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, RCI ने भारतीय निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को क्वांटम आधारित एवियोनिक सेंसर विकसित करने के लिए औपचारिक तौर पर आमंत्रित किया है. यह तकनीक भविष्य के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की “कोर टेक्नोलॉजी” मानी जाती है. अब सवाल उठता है कि क्वांटम एवियोनिक्स क्या है? दरअसल, क्वांटम तकनीक वह क्षमता देती है, जिससे विमान GPS बंद होने, कम्युनिकेशन जाम होने या दुश्मन के उन्नत रडार सक्रिय होने जैसी स्थिति में भी सटीक दिशा, दूरी और दुश्मन की लोकेशन के बारे में जानकारी हासिल की जा सके. फिलहाल अभी तक किसी भी जेट में यह तकनीक नहीं है. RCI किन तकनीकों पर काम कर रहा है? RCI तीन प्रमुख क्वांटम क्षेत्रों पर तेजी से काम कर रहा है -:     क्वांटम इनर्शियल नेविगेशन: बिना GPS के भी सेंटीमीटर स्तर की सटीक दिशा व लोकेशन.     क्वांटम मैग्नेटोमीटर: बेहद हल्के चुंबकीय बदलाव पकड़कर स्टील्थ विमान, पनडुब्बियां या जमीन में छिपे विस्फोटक खोजने की क्षमता.     क्वांटम रडार/लिडार: एंटैंगल्ड फोटॉन तकनीक से ऐसे स्टील्थ विमान भी दिखा सकता है जिन्हें सामान्य रडार नहीं पकड़ पाते. DRDO के कदम से भारत ग्‍लोबल एविएशन सेक्‍टर में एक बड़ा प्‍लेयर बन सकता है. एफ-35 जैसे फिफ्थ जेनरेशन के फाइटर जेट से ज्‍यादा ताकतवर विमान डेवलप करने की प्रक्रिया का यह पहला कदम है. क्या होगा फायदा?     जैम या स्पूफ न होने वाला नेविगेशन     स्टील्थ विमानों की दूर से पहचान     विमान से ही पनडुब्बियों और भूमिगत खतरों का पता     कम्युनिकेशन बंद होने पर भी फॉर्मेशन में उड़ान प्राइवेट सेक्‍टर को क्‍यों किया इन्‍वाइट? इन क्वांटम सेंसरों को लड़ाकू विमान में लगाने के लिए उन्हें बेहद मजबूत, तापमान सहने योग्य और छोटे आकार में बनाना होगा. यह बड़ा तकनीकी चुनौती है, इसलिए RCI ने पहली बार निजी कंपनियों को TDF और iDEX जैसे प्रोग्रामों के तहत साथ जुड़ने के लिए बुलाया है. क्वांटम तकनीक के लिए जरूरी क्षेत्रों जैसे अल्ट्रा हाई वैक्यूम सिस्टम, फोटॉनिक चिप्स, सिंगल-फोटॉन डिटेक्टर और क्रायोजेनिक कूलिंग के क्षेत्र में भारतीय स्टार्टअप पहले से ही अच्छा काम कर रहे हैं. RCI इन्हीं कंपनियों के साथ साझेदारी कर तकनीक को आगे बढ़ाना चाहता है. RCI का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में ऐसे क्वांटम सेंसर तैयार करना है, जिन्हें भारत के भावी लड़ाकू विमानों और शुरुआती चरण में बन रहे छठी पीढ़ी के प्लेटफॉर्म में इस्‍तेमाल किया जा सके.

CJI का गुस्सा: पब्लिसिटी के लिए याचिकाएं दायर करने पर की कड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच आज (गुरुवार, 11 दिसंबर को) भी मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले में लगातार दायर हो रही याचिकाओं पर सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ये सब पब्लिसिटी पाने के लिए किया जा रहा है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि हमें सिर्फ SIR जैसे बड़े मामलों पर फोकस न रहकर बल्कि आम आदमी से जुड़े मुकदमों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, “रेलवे एक्सीडेंट का मामला देख लीजिए… एक व्यक्ति की ट्रैक पर मौत हो गई… हमने कुछ मुआवजा दिया फिर भी वारिसों को कुछ नहीं मिला। मुआवजा न मिलने पर वे कहीं गायब हो गए। अब हमने उन्हें ढूँढ़ निकाला और फिर पक्का किया कि उन्हें पैसे मिलें.. सोचिए उस विधवा के चेहरे पर मुस्कान कैसी होगी?” सभी मामलों के लिए समय का बराबर बंटवारा चाहता हूँ इसी बीच, CJI सूर्यकांत ने कहा, "अब हर मामले में बार के सदस्यों को एक टाइमलाइन देनी होगी क्योंकि कुछ मामले जो ज़रूरी लगते हैं, वे कोर्ट का सारा समय ले लेते हैं और कई जरूरी खासकर MACT मामले में याचिकाकर्ताओं को समय नहीं मिल पाता है।" उन्होंने कहा, “मैं इस कोर्ट में सभी मामलों के लिए समय का बराबर बंटवारा चाहता हूँ, SIR जैसे जरूरी मामलों में पूरा दिन लग जाता है, जो पिटीशनर मुआवज़े के मामलों वगैरह के लिए आते हैं, वे आखिरी लाइन में बैठे रहते हैं और शाम 4 बजे बिना सुनवाई के घर वापस चले जाते हैं, वे नहीं जानते कि उनका नंबर कब आएगा?” लोग अब सिर्फ़ पब्लिसिटी के लिए आ रहे इसके बाद CJI सूर्यकांत ने कहा, "मैं रजिस्ट्री को इस मामले में (SIR केस में) कोई और नई याचिका स्वीकार न करने का निर्देश दे रहा हूँ। कई लोग अब सिर्फ़ पब्लिसिटी के लिए आ रहे हैं। अब किसी नए मामले की ज़रूरत नहीं है। मुझे ऐसा कहते अफसोस हो रहा है।" इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत ने SIR के मुद्दे पर दायर अलग-अलग राज्यों के मामलों की अलग-अलग सुनवाई करने का फैसला करते हुए सभी राज्यों के लिए अलग-अलग तारीखें भी तय कर दीं। UP, केरल के मामले 18 दिसंबर को सुने जाएंगे CJI ने कहा कि तमिलनाडू का मामला 16 तारीख को सुना जाएगा। इस बीच सिब्बल बोले, पश्चिम बंगाल का मामला 17 तारीख तक के लिए टाल दिया गया है। CJI ने बिना उस पर ध्यान देते हुए आगे कहा कि बिहार के सभी मामले आज सुने जाएंगे, जबकि असम के मामले 16 को, WB के मामले भी 16 को और UP, केरल के मामले 18 दिसंबर को सुने जाएंगे।