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ट्रंप का विवादित संदेश: इजराइल में नेतन्याहू पर ‘माफी’ की राजनीति गरमाई

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को इजराइल के राष्ट्रपति को एक पत्र भेजकर उनसे देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे में क्षमा करने का अनुरोध किया है। इस घटनाक्रम को लेकर देश में अमेरिकी प्रभाव के बारे में चिंता जताई जा रही है। नेतन्याहू की ओर से इस मामले में हस्तक्षेप करने का ट्रंप का यह नवीनतम प्रयास था, जिससे इजराइल के आंतरिक मामलों में अमेरिका के अनुचित प्रभाव पर अब सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप ने पिछले महीने इजराइल की संसद में अपने भाषण के दौरान भी नेतन्याहू को क्षमा करने का अनुरोध किया था। वह गाजा में युद्ध के लिए अपनी युद्धविराम योजना के सिलसिले में इजराइल की संक्षिप्त यात्रा पर गये थे । इजराइल के राष्ट्रपति आइजैक हरजोग को बुधवार को लिखे पत्र में ट्रंप ने भ्रष्टाचार के मामले को ‘‘राजनीतिक एवं अनुचित अभियोजन'' करार दिया । ट्रंप ने पत्र में लिखा है, ‘‘जैसा कि महान इजराइल देश और अद्भुत यहूदी लोग पिछले तीन वर्षों के बेहद कठिन समय से आगे बढ़ रहे हैं, मैं आपसे (प्रधानमंत्री) बेंजामिन नेतन्याहू को पूरी तरह से क्षमा करने का आह्वान करता हूं, जो युद्ध के समय एक दुर्जेय और निर्णायक प्रधानमंत्री रहे हैं, और अब इजराइल को शांति के समय में ले कर जा रहे हैं।'' इजराइल के इतिहास में नेतन्याहू एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है। उनके विरुद्ध तीन अलग-अलग मामलों में धोखाधड़ी, विश्वासघात और रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। उनके खिलाफ अमीर राजनीतिक समर्थकों के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाया गया है। नेतन्याहू ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और ट्रंप जैसी भाषा में इसकी निंदा करते हुए इसे मीडिया, पुलिस और न्यायपालिका द्वारा रची गई एक मनगढ़ंत साजिश करार दिया। नेतन्याहू ने ‘एक्स' पर बृहस्पतिवार की देर रात पोस्ट में ट्रंप के प्रति आभार जताया, हालांकि, यह स्पष्ट रूप से माफी के अनुरोध से संबंधित नहीं था। उन्होंने लिखा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप, आपके अद्भुत समर्थन के लिए धन्यवाद। हमेशा की तरह, आप सीधे मुद्दे पर आते हैं और जैसा है, वैसा ही कहते हैं। मैं सुरक्षा को मज़बूत करने और शांति का विस्तार करने के लिए हमारी साझेदारी को जारी रखने को उत्सुक हूं।'' नेतन्याहू कई बार गवाही दे चुके हैं, लेकिन अक्टूबर 2023 में हमास के आतंकवादी हमलों के बाद शुरू हुये युद्ध और अशांति से निपटने के कारण मामले में बार-बार देरी हुई है। इज़राइल का राष्ट्रपति पद काफी हद तक एक औपचारिक है, लेकिन राष्ट्रपति के पास क्षमादान देने का अधिकार है। राष्ट्रपति हरजोग ने पत्र मिलने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि क्षमादान मांगने वाले किसी भी व्यक्ति को औपचारिक अनुरोध प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि वह नेतन्याहू के अनुरोध पर क्या प्रतिक्रिया देंगे । इजराइल के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से केवल इतना कहा कि उनका मानना ​​है कि यह मुकदमा देश के लिए एक विकर्षण और विभाजन का स्रोत रहा है और वह चाहते हैं कि नेतन्याहू और अभियोजन पक्ष किसी समझौते पर पहुंचें।

सिर्फ एक की नहीं जिम्मेदारी! CJI गवई ने विदाई से पहले दिया देश को खास संदेश

नई दिल्ली  देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने आह्वान किया है कि लैंगिक समानता (Gender justice) की दिशा में हमारी यात्रा तभी सफल होगी, जब महिलाएँ और पुरुष दोनों मिलकर सहयोग करेंगे और किसी भी चुनौती को पार पाने में समान रूप से योगदान देंगे। इसके साथ ही CJI गवई ने इस बात पर भी जोर दिया कि लैंगिक न्याय हासिल करना सिर्फ महिलाओं की इकलौती जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए पुरुषों को यह स्वीकार करना होगा कि उनके पास मौजूद असमान शक्ति को साझा करना नुकसान की बात नहीं है, बल्कि समग्र रूप से समाज की मुक्ति की दिशा में एक कदम है।   CJI ने बुधवार को ये बातें 30वें जस्टिस सुनंदा भंडारे स्मृति व्याख्यान में "सभी के लिए न्याय: लैंगिक समानता और समावेशी भारत का निर्माण" विषय पर देते हुए कहीं। उन्होंने कहा, "लैंगिक न्याय प्राप्त करना सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए पुरुषों द्वारा, विशेष रूप से हमारे संस्थानों, कार्यस्थलों और राजनीतिक व्यवस्थाओं में सत्ता के पदों पर आसीन पुरुषों द्वारा, सत्ता की सक्रिय पुनर्कल्पना की जरूरत है।" उन्होंने कहा, “वास्तविक प्रगति तभी होगी जब पुरुष यह समझेंगे कि सत्ता साझा करना नुकसान नहीं, बल्कि समाज की मुक्ति का कार्य है। इसलिए, लैंगिक समानता वाले भारत का मार्ग टकराव में नहीं, बल्कि सहयोग में निहित है, जहाँ पुरुष और महिलाएँ मिलकर हमारे संविधान द्वारा परिकल्पित समानता के नैतिक और संस्थागत ढाँचे का पुनर्निर्माण करते हैं।” 75 वर्षों की प्रगति का भी किया उल्लेख बार एंड बेंच के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश गवई ने अपने व्याख्यान में 1950 में भारत के संविधान के लागू होने से लेकर 25-25 वर्षों के तीन चरणों में इस क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "1975 के बाद, लैंगिक समानता पर राष्ट्रीय विमर्श औपचारिक अधिकारों के प्रश्नों से आगे बढ़कर, समानता के एक अभिन्न अंग के रूप में गरिमा के गहन विचार की ओर मुड़ने लगा। बातचीत केवल कानूनी समानता से आगे बढ़कर महिलाओं की स्वायत्तता, शारीरिक अखंडता और उनके जीवन के अनुभवों को आकार देने वाली सामाजिक वास्तविकताओं की मान्यता की ओर मुड़ गई।" मानव गरिमा की संरक्षक रहीं अदालतें: CJI उन्होंने कहा कि नागरिक समाज की सतर्कता, महिला आंदोलनों की दृढ़ता और आम नागरिकों के साहस ने मिलकर न्यायपालिका को समानता के संवैधानिक वादे के प्रति जवाबदेह बनाये रखा है। उन्होंने कहा कि मान्यता और समानता के लिए प्रारंभिक संघर्षों से लेकर अंतर्संबंधी और सहभागी न्याय के वर्तमान युग तक, अदालतें अक्सर समानता और मानव गरिमा के संरक्षक के रूप में खड़ी रही हैं। चुनौतियों से भरा रहा है इतिहास जस्टिस गवई ने कहा, ‘‘यह विकासक्रम चुनौतियों से रहित नहीं रहा है। ऐसे कई अवसर आए जब न्यायिक व्याख्याएं महिलाओं के वास्तविक जीवन के अनुभवों को सही तरह नहीं समझ सकीं या संविधान की परिवर्तनकारी भावना पर खरी नहीं उतरीं।” उन्होंने कहा कि नागरिक समाज की सतर्कता, महिला आंदोलनों की निरंतरता और साधारण नागरिकों के साहस ने मिलकर न्यायपालिका को समानता के संवैधानिक वादे के प्रति जवाबदेह बनाए रखा है। यात्रा अभी भी अधूरी इस कार्यक्रम में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी के उपाध्याय और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एम बी लोकुर भी शामिल हुए। प्रधान न्यायाधीश गवई ने कहा, ‘‘अदालतों और लोगों के बीच संवाद भारत की लोकतांत्रिक ताकत के सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक है, जो हमें याद दिलाता है कि लैंगिक समानता की ओर बढ़ना कोई मंजिल नहीं है, बल्कि यह एक प्रतिबद्धता है जिसे लगातार नवीनीकृत किया जाता है।’’ हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रगति के बावजूद, वास्तविक लैंगिक समानता की दिशा में यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। बता दें कि जस्टिस गवई इसी महीने 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।

अब बिना FASTag वालों की बढ़ेगी जेब ढील: 15 नवंबर से दोगुना टोल देना होगा

नई दिल्ली अगर आप अक्सर हाइवे पर सफर करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार ने टोल प्लाज़ा के नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जो 15 नवंबर 2025 से लागू होगा। इस बदलाव के बाद अब टोल का भुगतान करने के तरीके के आधार पर शुल्क तय किया जाएगा यानी नकद भुगतान करने पर ज्यादा टोल, जबकि डिजिटल भुगतान करने पर राहत मिलेगी। नया नियम क्या कहता है? केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में संशोधन किया है। इसके तहत अब अगर कोई वाहन चालक बिना वैध FASTag के टोल प्लाज़ा में प्रवेश करता है, तो उससे दोगुना शुल्क वसूला जाएगा। लेकिन अगर FASTag फेल हो जाने पर चालक UPI या किसी डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है, तो उसे केवल 1.25 गुना टोल शुल्क ही देना होगा। आसान उदाहरण से समझिए मान लीजिए किसी वाहन का सामान्य टोल 100 रुपये है — ➤ अगर FASTag सही काम कर रहा है, तो ड्राइवर को सिर्फ 100 रुपये देने होंगे। ➤ अगर FASTag फेल हो गया और ड्राइवर नकद भुगतान करता है, तो उसे 200 रुपये चुकाने होंगे। ➤ लेकिन अगर डिजिटल माध्यम (जैसे UPI, कार्ड या नेटबैंकिंग) से भुगतान किया जाता है, तो केवल 125 रुपये देने होंगे। ➤ यानी अब डिजिटल भुगतान करने वालों को सीधी छूट मिलेगी, जबकि नकद लेनदेन पर भारी जुर्माना लगेगा। सरकार का मकसद क्या है? मंत्रालय का कहना है कि यह बदलाव टोल प्लाज़ा पर पारदर्शिता बढ़ाने, नकद लेनदेन कम करने और डिजिटल इंडिया मिशन को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। इससे टोल प्लाज़ा पर लगने वाली लंबी कतारों में भी कमी आएगी और यात्रियों को तेज़ और सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा। टोल प्रणाली को और आधुनिक बनाने की तैयारी सरकार आने वाले समय में टोल सिस्टम को पूरी तरह ऑटोमैटिक और GPS आधारित बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत भविष्य में गाड़ी के सफर की दूरी के हिसाब से टोल काटा जा सकेगा।  

राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध: 8 आतंकियों की योजना, 4 शहर और 4 कारें देश भर में आतंक फैलाने के लिए

नई दिल्ली दिल्ली के लाल किला के पास हुए धमाके ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। सरकार ने इसे आतंकी साजिश करार दिया है। इस धमाके को लेकर जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। आतंकी सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग शहरों में सीरियल ब्लास्ट करने की फिराक में थे। जांच में सामने आया है कि आठ आतंकवादियों ने चार बड़े शहरों को अपना टारगेट बनाया था। इनका प्लान था कि दो-दो के ग्रुप में चार शहरों में घुसकर आईईडी से तबाही मचाई जाए। पैसों को लेकर डॉक्टरों में झगड़ा टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, उमर और शाहीन ने मिलकर करीब 20 लाख रुपये कैश जुटाए, जो दिल्ली ब्लास्ट से पहले उमर को सौंप दिए गए। लेकिन यहीं से ट्विस्ट आया। उमर और डॉ. मुजम्मिल के बीच पैसे को लेकर झगड़ा हो गया। उमर ने सिग्नल ऐप पर 2-4 मेंबर्स का सीक्रेट ग्रुप बना लिया। इतना ही नहीं, इन आतंकियों ने गुरुग्राम, नूह और आसपास के इलाकों से 20 क्विंटल से ज्यादा एनपीके फर्टिलाइजर खरीदा जिसकी कीमत करीब 3 लाख रुपये थी। गाड़ियों में छिपी तबाही की योजना जांच में पता चला कि दिल्ली की i20 और इकोस्पोर्ट जैसी पुरानी गाड़ियों के बाद, ये आतंकी दो और ऐसी ही गाड़ियां तैयार कर रहे थे। ताकी इन गाड़ियों के अंदर विस्फोटक भरकर बड़ा ब्लास्ट कर सकें। एजेंसियां अब ये पता लगा रही हैं कि क्या अलग-अलग वाहन ब्लास्ट के लिए स्पेशल तौर पर बनाए जा रहे थे। दिल्ली ब्लास्ट का कनेक्शन और एनआईए की टीम ये सब कुछ दिल्ली के लाल किले में हुए धमाके के ठीक बाद सामने आया, जहां कम से कम 10 लोग मारे गए और कई घायल हो गए। जांचकर्ताओं का मानना है कि ये जैश-ए-मोहम्मद के नए मॉड्यूल का काम था। अब एनआईए ने एसपी रैंक के सीनियर ऑफिसर्स की स्पेशल टीम गठित की है, जो पूरे मामले की गहराई से तहकीकात करेगी।

छह हफ्तों बाद अमेरिका में राहत — सीनेट वोट के बाद ट्रंप के दस्तखत से समाप्त हुआ शटडाउन

वाशिंगटन      डोनाल्ड ट्रंप झुक गए हैं और इसके साथ ही अमेरिकी इतिहास का सबसे लंबा सरकारी शटडाउन (US Shutdown) करीब 43 दिन बाद खत्म हो रहा है. बुधवार रात को सीनेट में शटडाउन खत्म करने से जुड़ा बिल पास हुआ. इसे 222-209 मतों से पारित किया गया. व्हाइट हाउस की ओर से भी पुष्टि कर दी गई है कि Donald Trump इस विधेयक पर साइन कर दिया है. अब सरकारी कामकाज औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा. ये न सिर्फ America GDP के लिए गुड न्यूज है, बल्कि अमेरिका के करीब 4 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है. आइए जानते हैं कैसे?  शटडाउन क्यों लगाया गया था?  सबसे पहले बताते हैं कि आखिर अमेरिका में इस लंबे शटडाउन की स्थिति बनी कैसे? तो, जान लीजिए अमेरिकी सीनेट में सरकारी खर्चों से जुड़े बिल पर सहमति न बन पाना इसका कारण रहा. सीनेट मेंबर्स ने इसे 14 बार खारिज किया था और US Shutdown की नौबत आ गई. रिपोर्ट के मुताबिक, अब शटडाउन स्वास्थ्य सेवा सब्सिडी (Health Service Subsidy) पर बिना किसी समाधान के साथ खत्म हो रहा है, जो डेमोक्रेट्स की सबसे बड़ी मांग थी. राष्ट्रपति ट्रंप को इसे लेकर समझौता करना पड़ा.  उड़ानें बाधित, आर्थिक डेटा ठप्प अमेरिका में शटडाउन को लेकर बीते 6 सप्ताह से गतिरोध चल रहा था, जिस पर अब ब्रेक लगा है, लेकिन इसकी वजह से जो परेशानियां पैदा हुईं उनसे निजात पाने में अभी भी समय लगेगा. बता दें कि US Shutdown से एयरलाइंस बाधित हुई थीं, तो खाद्य सहायता में देरी का सामना करना पड़ा. इसके साथ ही अमेरिका के आर्थिक आंकड़े भी ठप्प नजर आए.  रिपोर्ट्स में परिवहन सचिव सीन डफी के हवाले से कहा गया है कि उड़ानों से प्रतिबंध हटाने और हवाई अड्डे का संचालन पूरी तरह से बहाल करने में करीब एक हफ्ते तक का समय लग सकता है. वहीं Delta Airlines CEO एड बास्टियन ने चेतावनी दी है कि शटडाउन के कारण रद्द होने वाली उड़ानों से एयरलाइन की कमाई पर बेहद खराब असर पड़ा है. हालांकि, उन्होंने थैंक्सगिविंग (US ThanksGiving) तक संचालन सामान्य होने की उम्मीद जताई है. GDP से करोड़ों अमेरिकियों तक नुकसान अमेरिका में शटडाउन का आर्थिक नुकसान बहुत ज्यादा देखने को मिला. कांग्रेस के बजट कार्यालय ने भी ये अनुमान जाहिर किया था कि इससे चौथी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर में 1.5% की कमी (US GDP Growth Slowdown)  आएगी, हालांकि अब संघीय कार्यक्रमों के फिर से शुरू होने और बकाया वेतन जारी होने पर इसमें कुछ सुधार देखने को मिल सकता है.  भले ही अब ट्रंप के झुकने और जिद छोड़ने के बाद सदन में पास हुए Funding Bill पर साइन करने से शटडाउन का The End हो गया है, लेकिन हकीकत में नुकसान तो हो ही चुका है. खासकर 4.2 करोड़ अमेरिकियों का, जो सीधे तौर पर फ़ूड स्टैम्प पर निर्भर हैं. इनमें से ज्यादातर नवंबर के लाभ से वंचित रह गए. तमाम राज्यों का कहना है कि  सहायता राशि को फिर से बढ़ाने में समय लग सकता है और इन लोगों को मदद के लिए एक और हफ्ते का इंतजार करना पड़ सकता है. 'ये मूर्खतापूर्ण और निरर्थक था'  7 सीनेट डेमोक्रेट और एक इंडिपेंडेंट मेंबर ने रिपब्लिकन के साथ मिलकर दिसंबर के मध्य तक सब्सिडी पर सीनेट में मतदान के बदले में वित्त पोषण विधेयक पारित किया. सदन के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने इसे निचले सदन में लाने की कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है. हालांकि, जॉनसन ने सख्त लहजे में बोला कि, 'जैसा कि हम शुरू से ही कहते आए हैं, यह शटडाउन अंततः पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण और निरर्थक था.'

धरती के गर्भ में संकट! तिब्बत के नीचे दरक रही भारतीय प्लेट, बड़े भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की आशंका

 नई दिल्ली पृथ्वी की सतह हमेशा हिलती-डुलती रहती है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है. भारत की मुख्य टेक्टॉनिक प्लेट (इंडियन प्लेट) तिब्बत के नीचे दो हिस्सों में फट रही है. इससे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और बड़े भूगर्भीय बदलाव हो सकते हैं. अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है. अगर यह जल्दी हुआ, तो हिमालय क्षेत्र में लाखों लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है.  क्या हो रहा है? प्लेट टूटने की कहानी पृथ्वी की ऊपरी सतह कई प्लेटों (टेक्टॉनिक प्लेट्स) में बंटी है, जो धीरे-धीरे हिलती हैं. भारत की प्लेट अफ्रीका से अलग होकर उत्तर की ओर बढ़ रही है. अब नई रिसर्च बताती है कि यह प्लेट तिब्बत के नीचे 100 किलोमीटर गहराई पर दो हिस्सों में बंट रही है. ऊपरी हिस्सा हिमालय की ओर धकेल रहा है, जबकि निचला हिस्सा मंगोलिया की ओर खिसक रहा है. नेचर जियोसाइंस जर्नल में छपी इस स्टडी के मुताबिक, यह प्रक्रिया 50 लाख साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन अब तेज हो गई है. वैज्ञानिकों ने सिस्मिक वेव्स (भूकंप की लहरों) का अध्ययन किया, जो दिखाता है कि प्लेट के बीच में एक 'रिफ्ट' (फटाव) बन रहा है. यह फटाव 200-300 किलोमीटर लंबा है. अगर यह बढ़ा, तो तिब्बत का पठार और हिमालय की चोटियां बदल सकती हैं. वैज्ञानिकों की चेतावनी: बड़े खतरे सिर पर मंडरा रहे स्टडी के प्रमुख वैज्ञानिक ब्रैडेन चाउ ने कहा कि यह प्लेट टूटना हिमालय के निर्माण का नया चरण हो सकता है. लेकिन इससे बड़े भूकंप आ सकते हैं, जो 8 या 9 तीव्रता के होंगे. कोलोराडो यूनिवर्सिटी की टीम ने 20 साल के डेटा का विश्लेषण किया. वे कहते हैं कि तिब्बत के नीचे प्लेट का निचला हिस्सा पिघल रहा है, जैसे आइसक्रीम गर्मी में पिघलती है. इससे मैग्मा ऊपर आ सकता है, जो ज्वालामुखी पैदा करेगा. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के डॉ. आरके सिंह कहते हैं कि यह भारत के लिए खतरा है. हिमालय पहले ही भूकंप संवेदनशील है. 2005 का कश्मीर भूकंप (7.6 तीव्रता) इसी प्लेट की वजह से था. अगर फटाव बढ़ा, तो दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों तक झटके महसूस होंगे. स्टडी के अनुसार, यह बदलाव अगले 10-20 लाख साल में होगा, लेकिन छोटे-छोटे भूकंप अब ही बढ़ सकते हैं. टेक्टॉनिक्स प्लेट का खेल टेक्टॉनिक प्लेट्स पृथ्वी की बाहरी परत (क्रस्ट) के टुकड़े हैं, जो मैग्मा पर तैरते हैं. भारत की प्लेट हर साल 5 सेंटीमीटर उत्तर की ओर बढ़ती है. तिब्बत के नीचे यह 'सबडक्शन' (नीचे धंसना) के बजाय 'रिफ्टिंग' (टूटना) कर रही है.      कैसे पता चला? भूकंप की लहरें प्लेट के अंदर से गुजरते हुए बदल जाती हैं. वैज्ञानिकों ने GPS डेटा और सैटेलाइट इमेज से देखा कि तिब्बत ऊंचा हो रहा है.     क्यों हो रहा? प्लेट का दबाव ज्यादा हो गया. ऊपरी हिस्सा हिमालय को ऊंचा कर रहा है (हर साल 5 मिमी), लेकिन निचला हिस्सा फिसल नहीं पा रहा.     क्या होगा? फटाव से नई प्लेट्स बनेंगी, जो हिमालय को और ऊंचा या चपटा कर सकती हैं. यह प्रक्रिया धीमी है, लेकिन असर लंबा चलेगा. संभावित प्रभाव: जीवन पर क्या असर पड़ेगा?     भूकंप का खतरा: हिमालय बेल्ट में 80% दुनिया के बड़े भूकंप आते हैं. भारत, नेपाल, चीन में लाखों घर ढह सकते हैं. 2015 नेपाल भूकंप में 9,000 मौतें हुईं.     ज्वालामुखी और बाढ़: मैग्मा ऊपर आने से नए ज्वालामुखी. ग्लेशियर पिघलने से गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियां बाढ़ लाएंगी.     मानव जीवन: 10 करोड़ से ज्यादा लोग हिमालय क्षेत्र में रहते हैं. दिल्ली-NCR तक झटके. अर्थव्यवस्था को 1 लाख करोड़ का नुकसान.     पर्यावरण: हिमालय की जैव विविधता खतरे में. जलवायु बदलाव तेज होगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह प्राकृतिक है, लेकिन हमें तैयार रहना होगा. भूकंपरोधी इमारतें बनाएं. मॉनिटरिंग बढ़ाएं. भारत क्या कर रहा है? तैयारी की दिशा भारत सरकार ने GSI को और फंड दिए हैं. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) अब तिब्बत बॉर्डर पर 50 नए सेंसर लगाएगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमालय हमारा खजाना है, इसे बचाना हमारा कर्तव्य है. चीन के साथ डेटा शेयरिंग पर बात हो रही है, क्योंकि तिब्बत उनका क्षेत्र है. आगे क्या? उम्मीद की किरण वैज्ञानिक कहते हैं, यह बदलाव पृथ्वी का सामान्य चक्र है. लेकिन चेतावनी समय पर मिली है. अगर हम सतर्क रहे, तो नुकसान कम कर सकते हैं. हिमालय की चोटियां कह रही हैं कि मैं बदल रहा हूं, लेकिन मजबूत रहूंगा. दुनिया के वैज्ञानिक अब इस पर नजर रखेंगे.

लाभार्थियों के लिए खबर: पीएम किसान योजना की अगली किस्त जल्द आएगी, फटाफट करें ये जरूरी काम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केन्द्र सरकार की एक बड़ी योजना है, जिसके तहत 9.70 करोड़ किसानों को सालाना 6,000 रूपए दिए जाते है । यह राशि हर 4 माह में 3 समान किस्तों में 2-2 हजार के रूप में दी जाती है। यह पैसा डीबीटी ट्रांसफर के जरिए सीधे किसानों के खाते में भेजा जाता है। यह लाभ उन किसानों को मिलता है, जिनके पास 2 हेक्टेयर तक जमीन है और जो भारत के नागरिक है।अबतक 20 किस्तें जारी हो चुकी है और अब किसानों को 21वीं किस्त का इंतजार है। ध्यान रहे अगली किस्त का लाभ केवल उन किसानों को मिलेगा जिन्होंने ई केवाईसी, भू-सत्यापन, फॉर्मर रजिस्ट्री और मोबाईल आधार से लिंक करवा लिया है और जिनका बैंक खाते में डीबीटी ऑप्शन ऑन है।किसी भी प्रकर की समस्या आने पर किसान ईमेल आईडी pmkisan-ict@gov.in ,हेल्पलाइन नंबर- 155261 या 1800115526 (Toll Free) या फिर 011-23381092 पर संपर्क कर सकते है। नवंबर में जारी होगी पीएम किसान की 21वीं किस्त? पीएम किसान योजना के नियमानुसार, पहली किस्त अप्रैल-जुलाई के बीच , दूसरी किस्त अगस्त से नवंबर के बीच और तीसरी किस्त दिसंबर से मार्च के बीच जारी की जाती है, ऐसे में 4 महीने के हिसाब से देखें तो नवंबर में अगली किस्त का समय पूरा होगा, हालांकि अभी फाइनल डेट को लेकर कोई अधिकारिक बयान या अपडेट सामने नहीं आया है। संभावना है कि बिहार चुनाव के नतीजों के बाद नवंबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में किस्त की राशि जारी की जा सकती है। बता दे कि अबतक बाढ़ प्रभावित 4 राज्यों पंजाब, उत्तराखंड जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के किसानों के खाते में 21वीं किस्त के 2000-2000 रुपए भेज दिए गए है, अन्य को भी जल्द भेजे जाएंगे। PM KISAN: Rs 2000 चाहिए तो फटाफट पूरे कर लें ये 5 काम     कैसे करें eKYC : सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in पर जाएं। किसान कॉर्नर” अनुभाग पर जाएं और “ई-केवाईसी” विकल्प पर क्लिक करें। अपना आधार नंबर और पंजीकृत मोबाइल नंबर दर्ज करें। सत्यापन के बाद मोबाइल नंबर पर एक OTP भेजा जाएगा। OTP दर्ज करें और ईकेवायसी हो जाएगा।     कैसे करें मोबाईल आधार से लिंक: यदि उनके मोबाइल नंबर से आधार नंबर नहीं लिंक है और फिंगर नहीं लग रहा है, तो वह प्ले स्टोर पर जाकर पीएम किसान सामान निधि ऐप को डाउनलोड करके फेस के माध्यम से eKYC कर सकते हैं।     कैसे होगा भूमि सत्यापन: निकटतम कृषि विभाग के कार्यालय में जाएं और आवश्यक आवेदन फॉर्म प्राप्त कर निर्देशानुसार आवश्यक दस्तावेज़ जमा करें।इसमें आपकी पीएम किसान रजिस्ट्रेशन नंबर, खेत के संबंधित दस्तावेज़ (खसरा / खतौनी) आदि शामिल हो सकते हैं। आवेदन और दस्तावेज़ों की समीक्षा के बाद आपका चयन किया जाएगा।अगर आपका आवेदन स्वीकृत होता है, तो आपको लैंड सीडिंग कर दिया जाएगा।     कैसे करें बैंक सीडिंग: किसान को अपने खाते पर एनपीसीआई करवाना होगा।एनपीसीआई लिंक करने के लिए बैंक पासबुक और आधार कार्ड लेकर अपने नजदीकी बैंक शाखा पर संपर्क कर सकते हैं।     कैसे करें फॉर्मर रजिस्ट्री :अधिकारिक वेबसाइट http://www.upfr.agristack.gov.in पर जाएं। मोबाइल नंबर व आधार नंबर डालें और ओटीपी से वेरिफिकेशन करें। इसके बाद अपनी जमीन और बैंक अकाउंट की डिटेल दर्ज करें। जानकारी सबमिट करें और रजिस्ट्री नंबर प्राप्त करें। PM Kisan : लिस्ट में कैसे चेक करें अपना नाम     प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं।     इसके बाद farmer corner पर क्लिक करें,फॉर्मर कॉर्नर पर क्लिक करने के बाद एक नया पेज खुल जाएगा।     यहां beneficiary list के विकल्प का चयन करें। इसके बाद एक फॉर्म खुलेगा।     इसमें पहले राज्‍य, फिर जिला, ब्‍लॉक और गांव का नाम चुनें।     सभी जानकारी को भरने के बाद get report पर क्लिक करें।     इस प्रक्रिया को पूरी करते ही आपके सामने आपके गांव के पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की लिस्‍ट खुल जाएगी।     लिस्‍ट में अगर आपका नाम है, तो आपके खाते में भी पैसे आएंगे।

रूस का रुख नरम! इस्तांबुल में यूक्रेन से वार्ता के लिए तैयार मास्को

इस्तांबुल  मास्को यूक्रेन के साथ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कभी भी बातचीत को तैयार है। तुर्की में रूस के अंतरिम प्रभारी के हवाले से रूसी मीडिया एजेंसी तास ने जानकारी दी है। अंतरिम प्रभारी एलेक्सी इवानोव ने संवाददाताओं को बताया कि रूस इस्तांबुल में यूक्रेन के साथ शांति प्रक्रिया पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। 16 मई, 2 जून, 23 जुलाई को भी इस्तांबुल में दोनों देशों के बीच वार्ता हुई थी लेकिन नतीजे कुछ खास सकारात्मक नहीं आए थे। तास के अनुसार उन्होंने कहा, "रूसी पक्ष ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि हम यूक्रेनी पक्ष और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल के साथ सीधी बातचीत जारी रखने के लिए तैयार हैं। हमारे तुर्की साझेदारों ने भी लगातार इस बात पर जोर दिया है कि इस्तांबुल मंच हमारे लिए उपलब्ध है, यहां दरवाजे खुले हैं।" राजनयिक ने आगे कहा, "अगर कीव राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाता है, तो हम किसी भी समय ऐसी बातचीत के लिए तैयार हैं।" इवानोव ने बताया कि रूसी पक्ष ने पिछले दौर की बातचीत के दौरान कई प्रस्ताव रखे थे। उन्होंने आगे कहा, "तीन ऑनलाइन कार्य समूहों की स्थापना सहित कई पहलों को आगे बढ़ाया गया था। दुर्भाग्य से, हमें अभी तक यूक्रेनी पक्ष से इन पहलों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।" बता दें, जुलाई के बाद से दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने कोई वार्ता नहीं हुई है। हाल के दिनों में ये ऐसा दूसरा संकेत है जो रूस की ओर से शांति की वकालत करता है। रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के करीबी और रूस के खास दूत किरील दिमित्रियेव ने 24 अक्टूबर को ही सीएनएन को दिए इंटरव्‍यू में संकेत दिया था कि रूस, यूक्रेन और अमेरिका अब 'कूटनीतिक समाधान के काफी करीब' हैं। दिमित्रियेव अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक के लिए अमेरिका में थे। उन्‍होंने कहा, 'रूस वास्तव में सिर्फ संघर्षविराम नहीं चाहता बल्कि इस संघर्ष का अंतिम समाधान चाहता है। संघर्षविराम अक्सर कम समय के होते हैं। कई लोग इसका इस्तेमाल पुनःसैन्यीकरण और संघर्ष को फिर से शुरू करने के लिए कर सकते हैं।'

दिल्ली ब्लास्ट पर कैबिनेट का सख्त रुख, आतंकी घटना की निंदा करते हुए पारित किया प्रस्ताव

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट मीटिंग हुई। इस बैठक में दिल्ली में हुए ब्लास्ट मामले में पर चर्चा की गई और आतंकियों का सिंडेकेट खत्म करने का प्रण लिया गया। वहीं, कैबिनेट ने इस ब्लास्ट में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी और 2 मिनट का मौन रखा। कैबिनेट की बैठक के बारे में ब्रीफिंग करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस घटना की निंदा की कैबिनेट ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट इस नृशंस और कायराना कृत्य की स्पष्ट रूप से निंदा करता है, जिसके कारण निर्दोष लोगों की जान गई है। कैबिनेट सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराता है। दिल्ली ब्लास्ट के दोषियों को मिलेगी कड़ी सजा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लाल किले के पास हुए दिल्ली विस्फोट की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट निर्देश देता है कि इस घटना (दिल्ली विस्फोट) की जांच अत्यंत तत्परता और पेशेवर तरीके से की जाए ताकि अपराधियों, उनके सहयोगियों और उनके प्रायोजकों की पहचान की जा सके और उन्हें बिना किसी देरी के न्याय के कटघरे में लाया जा सके। 'हर स्थिति पर रखी जा रही नजर' बताया गया कि सरकार के उच्चतम स्तर पर स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। मंत्रिमंडल राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा के प्रति अपनी स्थायी प्रतिबद्धता के अनुरूप, सभी भारतीयों के जीवन और कल्याण की रक्षा के लिए सरकार के दृढ़ संकल्प की पुष्टि करता है।  

Cyber Slavery Racket का भंडाफोड़! CBI ने दो एजेंट पकड़े, फर्जी नौकरी के नाम पर युवाओं को म्यांमार भेजा

नई दिल्ली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए म्यांमार में स्थित साइबर अपराध घोटाले के परिसरों (Cyber Crime Scam Compounds) में अवैध रूप से भारतीय नागरिकों की तस्करी से संबंधित दो मामले दर्ज किए हैं। इस मामले में दो मुख्य एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है। ये मामले मानव तस्करी और गलत तरीके से बंधक बनाने (Wrongful Confinement) जैसे गंभीर अपराधों से संबंधित हैं, जिनके लिए आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। हाल ही में, भारत सरकार ने म्यांमार से साइबर गुलामी (Cyber Slavery) के शिकार हुए कई पीड़ितों को छुड़ाने में मदद की थी। सीबीआई की जाँच में पता चला कि विदेशी स्कैम कंपाउंडों की ओर से कई एजेंट भारत में सक्रिय थे। सीबीआई ने ऐसे ही दो एजेंटों की पहचान की, जिन्होंने राजस्थान और गुजरात से पीड़ितों को फंसाकर इन कंपाउंडों में भेजा था। इन दोनों आरोपियों को बचाए गए पीड़ितों के साथ भारत लौटते ही तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। थाईलैंड के रास्ते म्यांमार तक जालः जाँच से पता चला है कि अंतर्राष्ट्रीय संगठित सिंडिकेट भोले-भाले भारतीय नागरिकों को विदेशों में उच्च-वेतन वाली नौकरियों और आकर्षक रोजगार के अवसरों का झूठा वादा करके फंसाता है। उन्हें अक्सर थाईलैंड के रास्ते म्यांमार ले जाया जाता है। एक बार देश से बाहर ले जाने के बाद, उन्हें म्यांमार में एक जगह पर गलत तरीके से बंधक बना लिया जाता है और बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) अभियानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया जाता है। इन धोखाधड़ियों में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, निवेश घोटाले और रोमांस फ्रॉड शामिल हैं, जो दुनिया भर के लोगों, यहाँ तक कि भारतीय नागरिकों को भी निशाना बनाते हैं। तस्करी के शिकार लोगों को धमकी, कैद और शारीरिक शोषण का शिकार बनाया जाता है, और उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध अवैध साइबर अपराध गतिविधियों में शामिल होने के लिए विवश किया जाता है। इन पीड़ितों को ही आमतौर पर "साइबर गुलाम" (Cyber Slaves) कहा जाता है। सीबीआई ने कहा है कि वह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय से साइबर गुलामी और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के इस उभरते खतरे का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है। सीबीआई ने सभी नागरिकों, विशेषकर युवा नौकरी तलाशने वालों से आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापनों या अनधिकृत एजेंटों के माध्यम से दिए जा रहे विदेशी रोजगार के किसी भी प्रस्ताव के खिलाफ अत्यधिक सावधानी बरतें।