samacharsecretary.com

चांद की ओर आगे बढ़ता भारत: ऑर्बिटर से मिले डेटा ने खोले ग्लोबल एक्सप्लोरेशन के नए रास्ते

नई दिल्ली  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से एडवांस डेटा प्रोडक्ट्स प्राप्त करने की जानकारी दी। इसमें चंद्रमा के पोलर रीजन के फिजिकल और डाइइलेक्ट्रिक प्रॉपर्टीज पर नए पैरामीटर्स भी शामिल हैं। इसरो का कहना है कि यह भविष्य में ग्लोबल एक्सप्लोरेशन की दिशा में एक बड़ा डेवलपमेंट है। संगठन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "इसरो को चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से एडवांस डेटा प्रोडक्ट्स प्राप्त हुए हैं, जो कि लूनर पोलर रीजन को लेकर गहरी समझ के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।" इसरो ने आगे बताया कि इसमें चंद्रमा के सतह की फिजिकल और डाइइलेक्ट्रिक प्रॉपर्टीज को लेकर जानकारी देने वाले महत्वपूर्ण पैरामीटर्स शामिल हैं। संगठन ने कहा, "यह चंद्रमा को लेकर भविष्य के ग्लोबल एक्सप्लोरेशन की दिशा में भारत का एक बहुत बड़ा योगदान होगा।" लूनर ऑर्बिट में चंद्रयान-2 ऑर्बिटर अपने डुअल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार (डीएफएसएआर) से 2019 से लगभग 1400 रडार डेटासेट और हाई-क्वालिटी डेटा उपलब्ध करवा चुका है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह पहला ऐसा इंस्ट्रूमेंट है, जो 25 मीटर/ पिक्सल के रेजोल्यूशन पर चंद्रमा को एल बैंड फुल-पोलरिमेट्रिक मोड में मैप करता है। यह एडवांस्ड रडार मोड वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल दोनों दिशाओं में सिग्नल को भेजने के साथ-साथ रिसीव भी करता है। यह चंद्रमा की सतह से जुड़ी प्रॉपर्टीज को स्टडी करने के लिए एक अच्छा तरीका बनता है। अहमदाबाद में स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के साइंटिस्ट ने इन डेटा सेट्स का इस्तेमाल कर वॉटर-आईस की संभावित मौजूदगी, सतह का खुरदरापन और डाईइलेक्ट्रिक कॉन्स्टेंट पर एडवांस डेटा प्रोडक्ट्स डेवलप किए हैं। डाईइलेक्ट्रिक कॉन्स्टेंट चंद्रमा की सतह की डेंसिटी और पोरसिटी जैसे फीचर्स को बताता है। इसरो ने जानकारी देते हुए बताया कि फुल-पोलरिमेट्रिक डेटा को एनालाइज करने के लिए एल्गोरिदम डेवलप कर लिए गए हैं। इसके अलावा, इसरो ने स्वदेशी रूप से डेटा प्रोडक्ट्स भी जेनरेट किए हैं। ये एडवांस्ड डेटा प्रोडक्ट्स चंद्रमा के पोलर रीजन को लेकर पहली और खास तरह की जानकारियों को लेकर महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

एविएशन सिस्टम में दिक्कत: नेपाल के त्रिभुवन एयरपोर्ट पर कई फ्लाइट्स लेट

नई दिल्ली  दिल्ली में टेक्निकल ग्लिच के चलते उड़ानों में आई परेशानी के बाद आज नेपाल में भी यही समस्या देखने को मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल की राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट को स्थानीय समयानुसार शाम 5.30 पर तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ गया है, जिसकी वजह से यहां से 5 उड़ानों को फिलहाल रोक दिया गया है। बाकी आगामी फ्लाइट्स पर भी संशय बरकरार है।   मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एयरपोर्ट के रनवे की एयरफील्ड लाइटिंग में समस्या सामने आई थी। अभी कम से कम पांच उड़ानों को रोक दिया गया है और आगे की उड़ानों के निर्धारित कार्यक्रम पर भी दिक्कत बनी हुई है। गौरतलब है कि इस एयरपोर्ट से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की फ्लाइट्स उड़ान भरती हैं। गौरतलब है कि नेपाल के अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर यह ग्लिच दिल्ली में आई परेशानी के एक दिन बाद सामने आया है। राजधानी दिल्ली के एयरपोर्ट पर आई समस्या की वजह से करीब 800 उड़ानों में समस्या आई थी। यहां पर ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम में समस्या आई थी। अधिकारियों के मुताबिक सुबह करीब 5.45 पर इसकी जानकारी मिली थी। इसके बाद उसे सुधारने की कोशिश की गई लेकिन अगले पंद्रह घंटों तक यह समस्या बनी रही। इसके बाद एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने रात 9 बजे इस समस्या को सुलझाए जाने की घोषणा की थी। हालांकि, तब तक सैंकड़ों उड़ानों की आवाजाही प्रभावित रही। आपको बता दें दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशल एयरपोर्ट हर दिन करीब 1500 से ज्यादा फ्लाइट्स का संचालन करता है।

हेल्थ इश्यू वाले भारतीयों के लिए अमेरिका के दरवाज़े बंद? ट्रंप की नई वीज़ा गाइडलाइन से मचा हंगामा

वाशिंगटन  डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने वीजा से जुड़ी नई गाइडलाइन जारी की है, जिससे हड़कंप मच गया है और खास कर भारतीयों में। इस नई नीति के तहत अब डायबिटीज, मोटापा जैसी आम हेल्थ इश्यू के अलावा हृदय रोग या कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अमेरिका का वीजा मिलने में मुश्किल हो सकती है। अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनियाभर के दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को निर्देश दिए हैं कि वे वीजा आवेदकों की हेल्थ, उम्र और आर्थिक स्थिति की सख्ती से जांच करें। यदि किसी व्यक्ति के भविष्य में महंगे इलाज या सरकारी सहायता पर निर्भर होने की संभावना दिखे, तो उसका वीजा रद्द कर दिया जाए। रिपोर्ट में क्या कहा गया? नई नीति का मकसद यह है कि सरकार पर स्वास्थ्य खर्च का बोझ न बढ़े। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका आने वाले ऐसे विदेशी नागरिक जो पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, वे आगे चलकर “पब्लिक बेनिफिट” यानी सरकारी सहायता पर निर्भर हो सकते हैं। KFF हेल्थ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में रहने के लिए आवेदन करने वाले विदेशी नागरिकों को कुछ विशेष चिकित्सीय स्थितियों के कारण अब वीजा अस्वीकृति का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में विदेश विभाग द्वारा दूतावासों को भेजे गए आधिकारिक पत्र का हवाला दिया गया है, जिसमें इन दिशानिर्देशों को विस्तार से बताया गया है। बढ़ती बीमारियों पर चिंता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया की करीब 10% आबादी मधुमेह से पीड़ित है, जबकि हृदय रोग आज भी वैश्विक स्तर पर मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। ऐसे में इस नई नीति से लाखों लोगों के अमेरिका जाने के सपनों पर असर पड़ सकता है। भारत की करीब 35–40% वयस्क आबादी किसी न किसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारी (डायबिटीज, मोटापा या हृदय रोग) से प्रभावित है।   भारत में डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोग के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ताज़ा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार स्थिति इस प्रकार हैः- डायबिटीज (मधुमेह) ICMR–INDIAB रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 11.4% वयस्क आबादी (करीब 10.1 करोड़ लोग) डायबिटीज से पीड़ित है। विश्व स्तर पर भारत दूसरे स्थान पर है  जबकि पहले नंबर पर  चीन है ।   मोटापा (Obesity/Overweight) National Family Health Survey  (NFHS-5)की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय वयस्कों में लगभग 23% लोग अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। शहरी क्षेत्रों में यह दर 30% से भी अधिक है, जबकि ग्रामीण इलाकों में लगभग 15-18%।    हृदय रोग (Cardiovascular Diseases) Indian Heart Association, WHO  के मुताबिक भारत में हर साल 2.8 करोड़ से ज्यादा लोग हृदय संबंधी बीमारियों से प्रभावित होते हैं। देश में कुल मृत्यु का लगभग 28% कारण हृदय रोग हैं।    भारत पर असर     अगर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की यह नई वीजा नीति लागू होती है, तो भारत पर इसका सीधा असर पड़ेगा।     भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डायबिटीज और मोटापा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।     ऐसे में हजारों भारतीय छात्र, प्रोफेशनल्स और इमिग्रेंट्स जो अमेरिका में पढ़ाई या नौकरी के लिए आवेदन करते हैं, उन्हें वीजा मिलने में कठिनाई हो सकती है।     भारतीय मेडिकल विजिटर्स या बुजुर्ग यात्रियों के लिए भी अमेरिका की यात्रा मुश्किल हो जाएगी।     स्वास्थ्य कारणों से वीजा अस्वीकृति बढ़ने से इंडिया-अमेरिका शैक्षणिक और व्यावसायिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।     ट्रंप प्रशासन के इस कदम को कई विशेषज्ञ “ह्यूमन राइट्स और डिस्क्रिमिनेशन” के नजरिए से भी देख रहे हैं।   

सीमा से समाज तक: भारत ही नहीं, विदेशों में भी सक्रिय है आरएसएस – मोहन भागवत

बेंगलुरु कर्नाटक के बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दो दिवसीय व्याख्यानमाला के पहले दिन शनिवार को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने संघ को पूरे विश्व का सबसे अनोखा संगठन बताया है। उन्होंने कहा कि आज संघ भारत समेत कई देशों में समाजसेवी कार्य कर रहा है। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बेंगलुरु में 'संघ की यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने पर नए क्षितिज व्याख्यान श्रृंखला का उद्घाटन किया।  विश्व संवाद केंद्र कर्नाटक द्वारा आयोजित इस सत्र में संघ के विकास और अपनी शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ते भविष्य की दिशा के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने कहा, "आरएसएस के समर्थन या विरोध में आपकी जो भी राय हो, वह तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, धारणा पर नहीं, इसलिए जब हमने अपने सौ वर्ष पूरे किए तो सोचा गया कि देश में चार जगहों (दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, कलकत्ता) पर ऐसी व्याख्यान श्रृंखला आयोजित की जाए।" उन्होंने कहा, "इसी जरूरत को देखते हुए संघ की कल्पना की गई और संघ को लागू किया गया। हमारे पास आक्रमणों का एक लंबा इतिहास रहा है और युद्ध के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करने का अंतिम प्रयास 1857 में हुआ था। यह एक अखिल भारतीय प्रयास था।" डॉ. मोहन भागवत ने कहा, "कुछ लोगों ने कहा कि यह समय की बात है, इस लड़ाई में हम असफल रहे, हमें फिर से लड़ना होगा। हमें युद्ध जारी रखना होगा। हम इस लड़ाई में असफल रहे, हमें तैयारी करनी होगी और फिर से लड़ना होगा। यह सिलसिला 1945 तक चलता रहा और सुभाष बाबू कथित तौर पर विमान में लगी आग की दुर्घटना में मारे गए। दो साल में हमें आजादी मिल गई।" उन्होंने कहा, "सबसे पहले हमें संघ के बारे में जानना चाहिए। संघ के कई शुभचिंतक भी संघ को किसी विशेष परिस्थिति की प्रतिक्रिया बताते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। संघ का जन्म प्रतिक्रिया या विरोध से नहीं हुआ है। संघ हर समाज की एक अनिवार्य आवश्यकता को पूरा करने के लिए है।" डॉ. मोहन भागवत ने कहा, "भारत तभी विश्व गुरु बनेगा जब वह दुनिया को यही अपनेपन का सिद्धांत सिखाएगा। हमारी परंपरा ‘ब्रह्म’ या ‘ईश्वर’ कहती है, उसे आज विज्ञान ‘यूनिवर्सल कॉन्शसनेस’ कहता है।"

परंपरा और सम्मान: आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री मोदी की विशेष मुलाकात

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आडवाणी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी पूर्व उप प्रधानमंत्री के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचे थे। इससे पहले दिन में नरेंद्र मोदी ने एक्स पर आडवाणी को एक महान दृष्टिकोण वाला राजनेता बताया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा को एक मजबूत ताकत के रूप में उभारने में अहम भूमिका निभाने वाले आडवाणी शनिवार को 98 साल के हो गए। उन्हें इस वर्ष भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। मोदी ने एक्स पर लिखा कि लालकृष्ण आडवाणी जी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं। महान दृष्टिकोण वाले और तीक्ष्ण बुद्धिमत्ता से संपन्न राजनेता आडवाणी जी का जीवन भारत की प्रगति को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने निस्वार्थ कर्तव्य और दृढ़ सिद्धांतों की भावना को सदैव अपनाया। उनके योगदान ने भारत के लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर अमिट छाप छोड़ी है। ईश्वर उन्हें उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें। देश के अनुभवी राजनीतिज्ञों में शुमार लाल कृष्ण आडवाणी का जन्म आठ नवंबर 1927 को हुआ था। सिंध प्रांत (अब पाकिस्तान) के कराची शहर में एक सिंधी हिंदू परिवार में पैदा हुए लाल कृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में देश के गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री रहे।  

‘आओ आतंकी बनो’… पाकिस्तान में खुलेआम चल रही नफरत की रैलियां

इस्लामाबाद   पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी संगठनों द्वारा खुली रैलियां करके लोगों, खासकर युवाओं और महिलाओं, को सक्रिय भर्ती के लिए भड़काने की घटनाएँ बढ़ रही हैं। बहावलपुर में आयोजित एक हालिया रैली में जैश-ए-मोहम्मद का कट्टर कमांडर मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर ने भी हिंदुस्तान के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए और जिहाद को महिमामंत्र के रूप में पेश किया जिसका ऑडियो मीडिया संस्थानों के पास मौजूद है। भर्ती और वैचारिक ब्रेनवॉश रैली में वक्ताओं ने खुले तौर पर जिहादी जीवन के फ़ायदों का बखान किया, गरीब और वंचित वर्ग के युवाओं को “इज्जत” और “मकसद” का वादा देकर भर्ती करने की कोशिश की गई। आयोजकों ने धार्मिक ग्रंथों के कुछ संदर्भों का संदिग्ध व्याख्यात्मक इस्तेमाल कर हिंसा और कट्टरता को धार्मिक आदेश के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जबकि विद्वान और धार्मिक विशेषज्ञ इसे कुरान के सही सन्दर्भ के खिलाफ बताते हैं। धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग और ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव विश्लेषकों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर जैसी सुरक्षा कार्रवाइयों के बाद कुछ आतंकवादी कमानें खुले प्रचार-प्रसार पर ही निर्भर हो गई हैं ताकि नए अनुयायी जुटाए जा सकें। हालांकि जनमानस में बढ़ती नाराज़गी और आतंकवाद के कारण होने वाली मौतों के बाद एक बड़ा वर्ग अब आतंकवाद के प्रति संदेह और विरोध प्रकट कर रहा है। कई नागरिक यह भी मानते हैं कि धर्म के नाम पर किए जा रहे भड़काऊ बयान वास्तविक धार्मिक शिक्षा का विकृत रूप हैं। कौन है मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर? मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर को जैश-ए-मोहम्मद के कुख्यात नेताओं में गिना जाता है; वह मसूद अजहर का भाई बताया जाता है और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में भी शामिल रहा है। इतिहास में वह हाई-प्रोफाइल मामलों से जोड़कर देखा जाता रहा है। उसकी सक्रियता और सार्वजनिक रैलियाँ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। महिला ब्रिगेड और सतही ‘समाजिक काम’ का आवरण रैलियों और संगठनों का रिक्रूटमेंट सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है मसलन मसूद अजहर की बहन सईदा अजहर जैसी समर्थक-नेतृत्व महिलाओं को निशाना बनाकर गरीब महिलाओं और लड़कियों को भी भड़काने का काम चल रहा है। ये समूह अक्सर सामाजिक सहायता, शिक्षा या राहत कार्यों का आवरण देकर नई भर्ती करते हैं। स्थानीय समुदायों में भय और असुरक्षा का माहौल बढ़ रहा है। युवाओं का चरित्रहीनकरण और गलत रास्ते पर जाना समाज के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा-चुनौती बन सकता है। धर्म और धार्मिक ग्रंथों के गलत उपयोग से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका है। कार्रवाई की आवश्यकता विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सरकार-सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय धार्मिक मौलवियों, नागरिक समाज और शिक्षा संस्थानों को मिलकर इस वैचारिक युद्ध का सामना करना होगा। वास्तविक धार्मिक शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार, आर्थिक अवसरों का सृजन और युवाओं के लिए वैकल्पिक रास्तों का निर्माण आवश्यक है।   

गेहूं बैन का साइड इफेक्ट: रावलपिंडी-इस्लामाबाद में आटे की किल्लत, जनता परेशान

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और रावलपिंडी में आटे का भीषण संकट गहराता जा रहा है। पंजाब फूड डिपार्टमेंट द्वारा दोनों शहरों की मिलों को गेहूं सप्लाई पर अचानक प्रतिबंध लगाने के बाद हालात नियंत्रण से बाहर होने लगे हैं। फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने सोमवार से आटे की सप्लाई बंद करने की घोषणा कर दी है, जिससे देश की दो अहम आबादी वाले इलाकों में खाद्य आपात स्थिति की आशंका बढ़ गई है। बाजारों से गायब हुआ आटा मीडिया के अनुसार, पंजाब सरकार के आदेश के बाद शुक्रवार रात से ही सभी आटा मिलों, तंदूर मालिकों और किराना दुकानों के गेहूं और आटे के ऑर्डर रद्द कर दिए गए हैं। इसके चलते बाजारों में लाल आटा (रेड फ्लोर) और फाइन फ्लोर दोनों की भारी किल्लत हो गई है। रावलपिंडी फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने इस संकट पर आपात बैठक बुलाई, जिसकी अध्यक्षता पैट्रन-इन-चीफ शेख तारिक सादिक ने की। उन्होंने पंजाब सरकार के निर्णय की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि “रावलपिंडी और इस्लामाबाद पूरी तरह पंजाब की गेहूं सप्लाई पर निर्भर हैं। अगर परमिट तुरंत बहाल नहीं किए गए, तो उत्पादन और वितरण दोनों ठप हो जाएंगे। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह “अविवेकपूर्ण फैसला” वापस नहीं लिया, तो स्थिति मानवीय संकट में बदल सकती है। तंदूर मालिकों का गुस्सा: कीमतें दोगुनी, दुकानें सील पाकिस्तान नानबाई एसोसिएशन के अध्यक्ष शफीक कुरैशी ने बताया कि 79 किलो के लाल आटे की बोरी की कीमत 5,500 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 11,000 रुपये हो गई है। वहीं फाइन फ्लोर की कीमत 6,200 से बढ़कर 12,600 रुपये पहुंच गई है।कुरैशी ने सरकार पर “राज्य उत्पीड़न” (State Oppression) का आरोप लगाते हुए कहा कि 1 अक्टूबर से अब तक दर्जनों तंदूर गिराए गए, 79 सील किए गए, और 100 से अधिक मालिकों पर 25,000–50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि “अगर गेहूं आपूर्ति की गड़बड़ी दूर नहीं की गई, तो रोटी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगी और जनता का सब्र टूट सकता है।” 

टेक्निकल फॉल्ट से Air India उड़ान लेट, यात्रियों की परेशानी बढ़ी

मुंबई मुंबई से लंदन जाने वाली एयर इंडिया की एक उड़ान शनिवार को उड़ान भरने से कुछ समय पहले तकनीकी खराबी के कारण लगभग सात घंटे देर से चली जिससे छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्री फंस गए और उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। उड़ानएआई129 को पहले सुबह जल्दी रवाना होना था लेकिन उड़ान-पूर्व जांच के दौरान विमान में तकनीकी खामियां पाए जाने के बाद इसकी उड़ान स्थगित कर दी गई। यात्रियों के अनुसार पहली घोषणा में 30 मिनट की देरी का उल्लेख किया गया था। विमान में सवारियां सुबह लगभग छह बजे ही शुरू हुईं और यात्रियों के अपनी सीटों पर बैठने के बाद भी विमान एक घंटे से ज़्यादा समय तक रुका रहा। बाद में चालक दल ने यात्रियों को सूचित किया कि तकनीकी खराबी के कारण उड़ान आगे नहीं बढ़ सकती और सुरक्षा कारणों से सभी यात्रियों को उतरने के लिए कहा गया। लगभग 8:15 बजे, यात्रियों को सुरक्षा जांच के लिए विमान से उतरने का निर्देश दिया गया, जिसमें हैंड बैगेज की दोबारा जाँच भी शामिल थी, जिससे देरी और बढ़ गई। कई यात्रियों ने लंबी प्रतीक्षा अवधि, नींद की कमी और प्रस्थान की अनिश्चितता पर निराशा व्यक्त की। बाद में एयर इंडिया ने अपराह्न एक बजे के संशोधित प्रस्थान समय की घोषणा की और कहा कि मंजूरी से पहले विमान का गहन तकनीकी निरीक्षण किया जा रहा है। एयर इंडिया के अधिकारियों ने पुष्टि की कि संदिग्ध खराबी के कारण विमान को वापस बुलाने के तुरंत बाद बे में वापस कर दिया गया था। एयरलाइन के एक प्रवक्ता ने कहा, "यात्री सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उड़ान को फिर से र्निर्धारित करने से पहले व्यापक रखरखाव जांच की गई थी।" प्रवक्ता ने बताया कि चालक दल अपनी अनिवार्य उड़ान ड्यूटी समय सीमा तक पहुंच गया था, जिसके कारण वह अस्थायी रूप से विमान का संचालन नहीं कर पाए। एयरलाइन ने असुविधा पर खेद व्यक्त किया और कहा कि हवाई अड्डे के लाउंज में यात्रियों को जलपान और भोजन उपलब्ध कराया गया, जबकि ग्राउंड स्टाफ ने पूरी सहायता प्रदान की। प्रवक्ता ने सुरक्षा और यात्री सुविधा के प्रति एयर इंडिया की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा,"यात्रियों को जल्द से जल्द उनके गंतव्य तक पहुँचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।"

‘त्रिशूल’ वॉर प्रैक्टिस: कैसे तैयार हो रही है भारतीय सेना की अजेय टुकड़ी?

नई दिल्ली  भारतीय सेना की दक्षिणी कमांड एक खास सैन्य अभ्यास में जुटी हुई है। इस सैन्य अभ्यास का नाम त्रिशूल दिया गया है। इसका मकसद तीनों सेनाओं के बीच आपसी समन्वय को बढ़ावा देना है। इस सैन्य अभ्यास का नाम दिया गया है जय (JAI)। इसका मलतब है जॉइंटनेस यानी संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन यानी नवाचार। अधिकारियों के मुताबिक यह भारतीय सशस्त्र बलों की प्रौद्योगिकी-सक्षमता और भविष्य के लिए तैयार बल के निर्माण की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। सभी क्षेत्रों पर बढ़त बनाने का मकसद त्रिशूल अभ्यास मिशन दिखाता है कि सशस्त्र बलों की बहु-क्षेत्रीय क्षमताएं बढ़ रही हैं। साथ ही रक्षा में आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित है। इस अभ्यास का मकसद कई क्षेत्रों में सेंट्रलाइज व्यवस्था को मजबूत करना है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, साइबर, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन संचालन, खुफिया, निगरानी और पहचान के साथ-साथ वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग शामिल हैं। यह अभ्यास स्थल, समुद्र और वायु के माध्यम से निर्बाध एकीकृत सहयोग के जरिए फिजिकल और वर्चुअल क्षेत्रों में समान रूप से हावी होने की तैयारी है। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव भी शामिल ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों का यह समावेश भारत की युद्ध नीति को नेटवर्क-केंद्रित और ऑटोनोमस युद्ध की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। यहां पर सूचना, गति और सटीकता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। भविष्य के युद्धों की तैयारी,अभ्यास त्रिशूल में हाल के संघर्षों और अभियानों, विशेषकर ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों को भी इसमें शामिल किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य के युद्धों के लिए तैयारी करना है। इन युद्धों में ड्रोन, साइबर उपकरण और अंतरिक्ष संसाधन पारंपरिक सेनाओं के साथ मिलकर काम करेंगे।  

संसद का शीतकालीन सत्र तय: किरण रिजिजू बोले- 1 दिसंबर से होगी शुरुआत

नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बताया है कि संसद का शीतकालीन सत्र 1 से 19 दिसंबर तक चलेगा। किरण रिजिजू मोदी सरकार में संसदीय कार्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के शीतकालीन सत्र को मंजूरी दे दी है।   केंद्रीय मंत्री ने कहा, हमें एक सार्थक सत्र की उम्मीद है जो कि लोकतंत्र को मजबूत करने वाला और लोगों की आकांक्षाओं पर खरा उतरने वाला हो। बता दें कि 21 जुलाई से 21 अगस्त तक संसद का मॉनसून सत्र चला थआ। इस सत्र के पहले ही दिन राज्यसभा के तत्कालीन सभापति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया था। पिछले सत्र में एसआईआर और ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ था। इस सत्र में कुल 21 बैठकें हुई थीं। इस सत्र में राज्यसभा में 15 और लोकसभा में 12 बिल पास हुए थे। छोटा होगा यह सत्र संसद का यह सत्र अन्य सत्रों के मुकाबले छोटा होगा। इसके बाद जल्द ही बजट सत्र भी शुरू होना है। इससे पहले 2013 में शीतकालीन सत्र केवल 14 दिन का था। यह 5 दिसंबर से 18 दिसंबर तक ही चला था। वहीं इस सत्र में बिहार विधानसभा चुनाव की आवाज जरूर सुनाई देगी। इसके अलावा 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में एसआईआर की भी प्रक्रिया चल रही है। विपक्ष इस प्रक्रिया का विरोध कर सकता है। इस सत्र में सरकार का जोर कई अहम बिल पास करवाने पर होगा। इनमें जन विश्वास बिल, इनसॉन्लवेंसी ऐंड बैंकरप्सीबिल शामिल है।