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लेह में इंटरनेट सेवा बंद, सोनम वांगचुक को जोधपुर की हाई-सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट किया गया

लेह   लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर दो दिन पहले हिंसक प्रदर्शन हुआ था, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 90 लोग घायल हुए. इसके बाद शुक्रवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख पुलिस प्रमुख एस. डी. सिंह जामवाल के नेतृत्व में पुलिस दल ने उन्हें दोपहर करीब ढाई बजे हिरासत में लिया. गिरफ्तारी के बाद वांगचुक को लद्दाख से राजस्थान के जोधपुर की जेल में भेज दिया गया है. यह कदम प्रदर्शन और बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया. वांगचुक पर लगे आरोपों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन लद्दाख प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया है. सुरक्षा कारणों से लेह में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं. सोनम वांगचुक लंबे समय से ‘लेह एपेक्स बॉडी’ और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ जैसे संगठनों की आवाज उठाते रहे हैं. वे लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और लेह व कारगिल के लोगों के लिए संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं. पिछले पांच सालों से वे इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं. केंद्र ने हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया लेह और कारगिल, 2019 में पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य को विभाजित कर बनाये गए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा हैं. केंद्र ने हालिया हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि जलवायु कार्यकर्ता ने सभी आरोपों से इनकार किया है. वांगचुक ने गुरुवार को कहा था, ‘‘यह कहना कि यह (हिंसा) मेरे द्वारा भड़कायी गयी थी, समस्या की जड़ तक पहुंचने के बजाय, कोई बलि का बकरा ढूंढने जैसा है, और इससे हमें कोई फायदा नहीं होगा.’’ गृह मंत्रालय ने उठाया सख्त कदम जलवायु कार्यकर्ता की गिरफ्तारी उनके द्वारा स्थापित संगठन ‘स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख’ का विदेशी चंदा नियमन अधिनियम (एफसीआरए) लाइसेंस गृह मंत्रालय द्वारा रद्द करने के एक दिन बाद हुई. मंत्रालय ने कथित वित्तीय विसंगतियों और ‘‘राष्ट्रीय हित’’ के खिलाफ माने जाने वाले धन अंतरण का हवाला देते हुए वांगचुक के संगठन का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया था.

चैतन्यानंद का काला इतिहास: यौन शोषण, बड़े घोटाले और अनगिनत साजिशें सामने आईं

नई दिल्ली दिल्ली के वसंत कुंज में मौजूद श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट एंड रिसर्च (SRISIIM) का चांसलर स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी फरार है. उसके खिलाफ 17 EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) की छात्राओं ने यौन शोषण और छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं. दिल्ली पुलिस की कई टीमें अलग-अलग शहरों और राज्यों में छापेमारी कर रही हैं, लेकिन बाबा इतना शातिर है कि अब तक कानून के कटघरे में नहीं आया है. संस्थान में पढ़ने वाली कई लड़कियों ने पुलिस के सामने बाबा का काला सच बयां किया है. एक पूर्व छात्र ने भी 'आज तक' के कैमरे पर बाबा की काली करतूतों का खुलासा किया है, जो हैरान करने वाला है. इस मामले को लेकर 4 अगस्त 2025 को वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज हुई, और तब शुरू हुआ पाखंडी बाबा की हरकतों के किस्से बाहर आने का सिलसिला. श्रृंगेरी मठ के प्रशासक पीए मुरली ने स्वामी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद बाबा फरार हो गया. कहां छुपा है चैतन्यानंद? शातिर स्वामी का ठिकाना अब बड़ा रहस्य बन गया है. यौन शोषण के आरोप लगने के बाद से वो भगवाधारी फरार है. दिल्ली से भागने में उसकी मदद कौन कर रहा है? ये सवाल भी सिर उठा रहा है. पुलिस को शक है कि संस्थान और बाहर मौजूद उसके कॉकस के लोग इस काम में शामिल हैं. 5 राज्यों में पुलिस टीमें उसकी तलाश कर रही हैं, लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है. लेकिन बाबा का कोई सुराग नहीं मिल रहा. क्या वह भूमिगत हो गया है? देश से बाहर भागा है? या बहुरूपिया बनकर घूम रहा है? दिल्ली की सड़कों पर डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट वाली कारों से फर्राटा भरने वाला वो शातिर बाबा लेक्चर, किताबों और वीडियो की आड़ में अपना खेल करता था. लेकिन अब उसका पता नहीं है. फर्जी बाबा चैतन्यानंद मैनेजमेंट, नीति और नैतिकता का लेक्चर दिया करता था, अब वही संगीन आरोपों में घिरा है. अब दिल्ली पुलिस को उसकी तलाश है, जो खुद नामी संस्थान का सर्वेसर्वा था. उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद वह लापता हो गया था. उसे ट्रेस करना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि वह मोबाइल, डेबिट-क्रेडिट कार्ड या UPI का इस्तेमाल नहीं कर रहा है. लग्जरी गाड़ियों का शौकीन था फर्जी बाबा माथे पर त्रिपुंड, भगवा वस्त्र, वेदांत की बातें करने वाला वो ढ़ोंगी बाबा लग्जरी गाड़ियों का शौकीन था. पुलिस को सिर्फ उसकी लग्जरी BMW कार हाथ लगी, जो दिल्ली पुलिस ने बरामद कर ली. दावा है कि इसी BMW से चैतन्या भागा था, लेकिन कहां, यह रहस्य है. इसके अलावा, उसकी वोल्वो कार को भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया. यह कार फर्जी डिप्लोमेटिक नंबर (39 UN 1) वाली थी, जिसके लिए अलग FIR दर्ज हुई. 25 अगस्त 2025 को उसकी कार जब्त की गई. दिल्ली पुलिस ने चैतन्यानंद के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है. देश के सभी एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर उसकी निगरानी बढ़ा दी गई है. चैतन्यानंद उर्फ पार्थासारथी की तलाश में पुलिस जर्रा-जर्रा छान रही है. पूर्व छात्रों ने बताया कि बाबा के खिलाफ कई बार लड़कियों ने शिकायत की, लेकिन पुलिस से मदद न मिलने पर उनका हौसला टूट गया. साल 2016 में डिफेंस कॉलोनी थाने में शिकायत दर्ज हुई थी. साल 2009 का भी एक पुराना केस था, लेकिन पैसे और रसूख से बाबा हर बार बच निकलता था. पीड़ितों का कहना है कि असफलता से डरकर कई लड़कियां चुप हो जाती थीं. अब उसके खिलाफ 5 FIR दर्ज हैं, जिनमें दो पुरानी और तीन नई है. जिनमें धोखाधड़ी, छेड़छाड़ और फर्जी नंबर प्लेट का केस भी शामिल है. चौंकाने वाला तथ्य यह है कि बाबा ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियों को निशाना बनाता था. EWS स्कॉलरशिप वाली छात्राओं को बेहतर करियर और विदेश यात्रा का लालच देकर फंसाया जाता था. जो लड़कियां विरोध करतीं, उन्हें एग्जाम में फेल करने की धमकी दी जाती थी. वॉर्डन लड़कियों को उसके कमरे भेजती थी, WhatsApp पर 'कम टू माय रूम' जैसे मैसेज भेजे जाते. कई बार मैसेज अश्लील होते थे. लिहाजा, चैट्स डिलीट कर दिए जाते थे. CCTV टैम्पर किया जाता. 32 महिलाओं में से 17 ने शोषण की शिकायत की है. पूर्व छात्र ने बताया कि इंस्टीट्यूट में अब भी पढ़ रही लड़कियां ऐसी ही कहानियां सुना रही हैं. यह सिस्टेमैटिक एक्सप्लॉइटेशन था, जो 16 साल से चल रहा था. पुलिस ने 3 वॉर्डन्स से पूछताछ की, जो मैसेज डिलीट करने के आरोपी हैं. लड़कियों का यौन शोषण करने वाले बाबा के बारे में अब कई विस्फोटक बातें सामने आईं हैं. एक पूर्व छात्र ने स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को लेकर जो खुलासा किया, वो हैरान करने वाला है. बाबा अपने रौब और दबदबे से सालों से इंस्टीट्यूट की लड़कियों का शोषण कर रहा था. यकीन नहीं आता, लेकिन पूर्व छात्र ने 'आज तक' से बातचीत में बाबा की मोडस ऑपरेंडी खोलकर रख दी. इंस्टीट्यूट के पूर्व छात्र ने साफ कहा कि सिर्फ पूर्व छात्राएं ही नहीं, बल्कि वर्तमान लड़कियां भी ऐसी शिकायतें कर रही हैं. बाबा के खिलाफ यह कोई पहला मामला नहीं, पहले भी कई केस दर्ज हुए हैं. लेकिन शुरू से पुलिस हाथ साफ रखती रही. अब गवाह सामने आ रहे हैं. इंस्टीट्यूट का पूर्व छात्र चैतन्यानंद को लेकर जो खुलासे कर रहा था, हमने उससे पूछा कि क्या किसी लड़की ने खुद शिकायत की? उसका जवाब था कि कई लड़कियों ने कमोबेश एक जैसी कहानियां सुनाईं हैं. शिकायते की हैं. पुलिस ने बाबा के ठिकाने से जो विवादित BMW कार बरामद की, उसमें भी बाबा ने कथित तौर पर ज्यादती की थी. उस कार को खरीदने के बाद बाबा ऋषिकेश पूजा के लिए गया था, लेकिन रास्ते में साथ गई लड़कियों का शोषण भी किया था. श्री श्री जगद्गुरु शंकराचार्य महासंस्थानम दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठम का यह दागी चांसलर अब कानून की पहुंच से बाहर है. पुलिस सबूतों के साथ गवाहों को इकट्ठा कर रही. NCW ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को तुरंत इस मामले में आरोपी बाबा की गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं. उधर, दिल्ली की एक अदालत ने यौन उत्पीड़न और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से घिरे स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती की अग्रिम … Read more

शहबाज की जीत वाली कहानी पर भारत का UN में करारा जवाब, पाक का सच बयां

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के भाषण पर भारत ने कड़ा पलटवार किया है. भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने 'राइट टू रिप्लाई' का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को आतंकवाद पर घेरा. 'शहबाज ने किया आतंकवाद का महिमामंडन' पेटल गहलोत ने कहा कि सुबह इस सभा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का भाषण सुना, जिसमें उन्होंने एक बार फिर आतंकवाद का महिमामंडन किया, जो उनकी विदेश नीति का अहम हिस्सा है. उन्होंने याद दिलाया कि 25 अप्रैल 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान ने 'रेसिस्टेंस फ्रंट' जैसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन का बचाव किया था जो जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार था. उन्होंने कहा कि यह वही पाकिस्तान है जिसने ओसामा बिन लादेन को सालों तक अपने यहां छिपाए रखा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का दिखावा करता रहा. उनके मंत्रियों ने खुद माना है कि पाकिस्तान दशकों से आतंकी कैंप चलाता आया है. 'टूटे और जले हुए एयरबेस को जीत बता रहा पाकिस्तान'   भारत की राजनयिक ने पाकिस्तान को उसके झूठे दावों पर भी घेरा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जिस 'जीत' की बात कर रहे हैं, वह दरअसल भारतीय हमले में नष्ट हुए उनके एयरबेस, जले हुए हैंगर और टूटे हुए रनवे की तस्वीरें हैं, जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं. अगर पाकिस्तान इन्हें जीत मानता है, तो उसे मानने दीजिए. 'सिर्फ द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाए जाएंगे सभी मुद्दे' गहलोत ने कहा कि सच यही है कि पाकिस्तान भारत में निर्दोष नागरिकों पर आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है और भारत हमेशा अपने लोगों की सुरक्षा के लिए जवाबी कदम उठाएगा. भारत ने एक बार फिर दोहराया कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो भी मुद्दे हैं, वे केवल द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाए जाएंगे और किसी तीसरे पक्ष की इसमें कोई भूमिका नहीं होगी.

भारतीयों की बैंकिंग डिटेल्स पर संकट, इंटरनेट पर उजागर हुए संवेदनशील ट्रांसफर डेटा

नई दिल्ली डेटा लीक की एक बड़ी घटना सामने आई है। इस लीक को टेक क्रंच ने रिपोर्ट किया है। इसमें बताया गया है कि एक बड़े डेटा लीक की वजह से भारत के लाखों बैंक ट्रांसफर डॉक्‍युमेंट खतरे में आ गए हैं। ये डॉक्‍युमेंट इंटरनेट पर खुले छोड़ दिए गए थे। इस डेटा लीक को अगस्‍त महीने के आखिर में साइबर सिक्‍योरिटी फर्म ‘अपगार्ड’ ने खोजा था। रिपोर्ट के अनुसार, डेटा लीक के बारे में तमाम एजेंसियों को बताया गया, लेकिन सितंबर की शुरुआत तक उसे सेफ करने के उपाय नहीं किए गए। आखिर में कंप्‍यूटर इमरजेंसी रेस्‍पॉन्‍स टीम यानी CERT-In को जानकारी दी गई, जिसके बाद डेटा को सुरक्ष‍ित किया गया। कैसे लीक हुआ डेटा, कितने डॉक्‍युमेंट रिपोर्ट के अनुसार, यह लीक एमेजॉन के एक अनसेफ सर्वर से हुआ। उस सर्वर में 2 लाख 73 हजार पीडीएफ डॉक्‍युमेंट थे। उन डॉक्‍युमेंट्स में लोगों के अकाउंट नंबर, उनकी अन्‍य डिटेल और ट्रांजैक्‍शन की जानकारी थी। लीक हुए डॉक्‍युमेंट्स में नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH) के उसके लेनदेन वाले फॉर्म थे। 38 बैंकों और वित्तीय संस्‍थाओं से जुड़ा लीक रिपोर्ट के अनुसार, यह डेटा लीक कम से कम 38 बैंकों और वित्तीय संस्‍थानों से जुड़ा है। हैरान करने वाली बात है कि लंबे वक्‍त तक बड़ी संख्‍या में पीडीएफ डॉक्‍युमेंट इंटरनेट पर खुले थे। एजेंसियों को बताने के बावजूद उनकी तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। अपगार्ड जिसने इस लीक का पता लगाया, उसने करीब 55 हजार डॉक्‍युमेंट्स की जांच की। आधे से ज्‍यादा दस्‍तावेजों में आई फाइनेंस का नाम मिला है। डॉक्‍युमेंट्स में दूसरा सबसे ज्‍यादा दिखने वाला संस्‍थान स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई है। NPCI को दी गई थी जानकारी रिपोर्ट के अनुसार, UpGuard के रिसर्चर्स ने डेटा लीक की जानकारी आई फाइनेंस और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को दी थी। हालांकि सितंंबर की शुरुआत तक भी डेटा इंटरनेट पर खुला पड़ा हुआ था यानी कोई भी उसे एक्‍सेस कर सकता था। उस सर्वर पर हजारों फाइलें रोज अपलोड की जा रही थीं। अपगार्ड ने इस बारे में कंप्‍यूटर इमरजेंसी रेस्‍पॉन्‍स टीम को बताया, जिसके बाद डेटा को सेफ किया गया। किसी ने नहीं ली जिम्‍मेदारी टेक क्रंच की रिपोर्ट में दावा है कि इस सुरक्षा चूक की जिम्‍मेदारी किसी ने नहीं ली है। NPCI के प्रवक्ता अंकुर दहिया के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि विस्तृत जांच से पता चला है कि NPCI सिस्टम से NACH मैंडेट की कोई भी जानकारी या रिकॉर्ड लीक नहीं हुआ है। आई फाइनेंस और एसबीआई ने टेक क्रंच को कोई टिप्‍पणी नहीं दी है।

बैटरी कार और हेलीकॉप्टर सेवा से मां वैष्णो देवी की यात्रा में मिली नई सुविधा

कटड़ा शारदीय नवरात्रों में हर कोई मां वैष्णो देवी के दरबार में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहता है। वीरवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां वैष्णो देवी भवन की ओर रवाना हुए। श्रद्धालुओं ने मां वैष्णो देवी के दरबार में नमन किया है। श्राइन बोर्ड ने मां वैष्णो देवी यात्रा को और भी आसान बना दिया है।  श्रद्धालु मां वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा चलाई जा रही हैलीकॉप्टर सेवा, बैटरी कार सेवा और भवन-भैरों घाटी रोपवे सेवा का लुत्फ उठा रहे हैं। श्राइन बोर्ड के प्रवक्ता के अनुसार पहले 3 नवरात्रों के दौरान 40,558 श्रद्धालुओं ने मां वैष्णो देवी के दरबार में नमन किया था। वहीं वीरवार को रात 10 बजे तक…… श्रद्धालु कटड़ा के विभिन्न स्थलों पर बने यात्रा पंजीकरण आर.एफ.आई.डी. काऊंटर से कार्ड हासिल कर वैष्णो देवी भवन की ओर प्रस्थान कर चुके थे। बताते चलें कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा किए गए प्रयासों के तहत दिव्यांग लोगों के लिए नवरात्रों में विशेष सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है, जबकि अन्य दिनों में भी दिव्यांग श्रद्धालुओं को बैटरी कार में श्राइन बोर्ड प्राथमिकता देता है। विशेष गायन प्रस्तुतियां भी बन रहीं मुख्य आकर्षण का केंद्र वैष्णो देवी भवन पर सुबह-शाम आयोजित होने वाली अटका आरती के दौरान हर दिन विद्वानों द्वारा मंत्र उच्चारण के साथ मां भगवती का गुणगान किया जाता है। इसी कड़ी के तहत नवरात्रों के दौरान प्रसिद्ध गायकों द्वारा विशेष प्रस्तुतियां भी दी जा रही हैं जोकि हर किसी के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन प्रस्तुतियों का सीधा प्रसारण श्रद्धालु यात्रा मार्ग पर लगी एल.ई.डी. के माध्यम से देख रहे हैं।

ट्रंप का नया कदम: 1 अक्टूबर से दवाओं पर 100% और ट्रकों पर 50% तक टैक्स लागू

नई  दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी व्यापारिक नीतियों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने सीधे दवा उद्योग को निशाना बनाते हुए विदेशी फार्मा कंपनियों पर बड़ा फैसला सुनाया है, जो भारत समेत कई विकासशील और विकसित देशों को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एलान किया कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा – अगर वह अमेरिका में निर्मित नहीं हो रही है। यानी, कोई कंपनी यदि अमेरिका में फार्मा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित नहीं कर रही है, तो उसे इस भारी-भरकम टैक्स का सामना करना पड़ेगा। दवा कंपनियों पर सीधा असर यह फैसला उन देशों के लिए झटका है जो अमेरिका को बड़ी मात्रा में दवा उत्पाद निर्यात करते हैं। भारत, जो विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है, उसके लिए यह निर्णय न सिर्फ आर्थिक, बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी अमेरिका में निर्माण कार्य वास्तव में शुरू कर चुकी है, तो उस पर टैरिफ लागू नहीं होगा। “IS BUILDING” का मतलब केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर वास्तविक कार्य होना चाहिए। फर्नीचर और घरेलू सामान पर भी टैरिफ ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति सिर्फ दवा उद्योग तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ऐलान किया कि: -किचन कैबिनेट्स और बाथरूम वैनिटीज पर 50% टैरिफ -अपहोल्स्टर्ड फर्नीचर (गद्देदार फर्नीचर) पर 30% टैरिफ -भारी ट्रकों और अन्य घरेलू उत्पादों पर भी उच्च टैरिफ लगाए जाएंगे। ट्रंप का कहना है कि विदेशी कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में जरूरत से ज्यादा सामान भर दिया है, जिससे स्थानीय निर्माण उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। टैरिफ लगाना अब जरूरी हो गया है ताकि अमेरिका फिर से अपनी उत्पादन क्षमता हासिल कर सके। कई देशों पर नई टैरिफ दरें ट्रंप ने अगस्त में भी कई देशों पर टैरिफ बढ़ाए थे, जो अब लागू हो चुके हैं: भारत: 50% टैरिफ रूस: 25% अतिरिक्त जुर्माना ब्राज़ील: 50% टैरिफ दक्षिण अफ्रीका: 30% टैरिफ वियतनाम: 20% टैरिफ जापान व दक्षिण कोरिया: 15% टैरिफ अमेरिका फर्स्ट की वापसी? ट्रंप की इन घोषणाओं को उनकी पुरानी रणनीति America First का विस्तार माना जा रहा है। वे पहले भी टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं – चाहे वह चीन के साथ ट्रेड वॉर हो या यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क। इस नई घोषणा से अमेरिका में फार्मा इंडस्ट्री को तो बढ़ावा मिलेगा, लेकिन वैश्विक व्यापार संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ेगा।  

TikTok की चीन से विदाई, ट्रंप की चाल के बाद नया मालिक कौन?

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टिकटॉक को लेकर बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने  एक्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है, जिसमें TikTok के अमेरिकी ऑपरेशन्स को बेचने की मंजूरी दी गई है. यानी टिकटॉक का अमेरिकी ऑपरेशन किसी अमेरिकी इन्वेस्टर ग्रुप को बेचने की मंजूरी दे दी गई है.  ये अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद था. अमेरिका ने कई बार टिकटॉक को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. ऐसे में अगर टिकटॉक का ऑपरेशन किसी अमेरिकी कंपनी को मिलेगा, तो इससे ऐप को अमेरिका में बैन नहीं किया जाएगा.  कितनी लगाई गई है कीमत? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि टिकटॉक अमेरिका की वैल्यू 14 अरब डॉलर लगाई गई है. ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर की वजह से टिकटॉक पर बैन फिलहाल के लिए टल गया है. एक्जीक्यूटिव ऑर्डर डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस को कानून को लागू करने से रोकता है, जिसके तहत टिकटॉक की पैरेंट कंपनी ByteDance को देश भर में बैन किया जाना था.  कौन होगा नया मालिक और क्या बदलेगा? डील के तहत TikTok US अब नए बोर्ड ऑफ डायरेक्ट नियुक्त करेगा. साथ ही एल्गोरिद्म रिकमेंडेशन, सोर्स कोड और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को भी नए मालिक को ट्रांसफर किया जाएगा. ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद, Oracle अब TikTok US के सिक्योरिटी ऑपरेशन्स को हैंडल करेगा और क्लाउड सर्विस भी ऑफर करेगी.  इसके अलावा Oracle, Silver Lake और अबू धाबी बेस्ड MGX ग्रुप नई इकाई में 45 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी. वेंस ने रॉयटर्स को बताया, 'शुरुआत में चीन की ओर से कुछ प्रतिरोध था, लेकिन हम चाहते थे कि टिकटॉक काम करता रहे. हम ये भी चाहते थे कि अमेरिकी डेटा सुरक्षित रहे.' चीनी राष्ट्रपति से ट्रंप ने की बात ट्रंप ने भी रिपोर्टर्स ने बातचीत ने कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की और उन्होंने इस पर अपनी सहमति दी थी. डोनाल्ड ट्रंप ने बताया, 'मैंने उनसे (शी जिनपिंग) बताया कि हम ये करने जा रहे हैं और उन्होंने कहा आप करिए.' उन्होंने ये भी बताया कि अब TikTok US पूरी तरह से अमेरिका द्वारा ऑपरेट किया जाएगा.  ट्रंप ने ये भी कहा है कि टिकटॉक के नए मालिक इस बात का ख्याल रखेंगे कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्रोपेगेंडा फैलाने में ना हो. हालांकि, इस पूरे मामले पर ByteDance ने कोई जानकारी नहीं दी है. कंपनी ने पहले ऐसा जरूर कहा था कि वे टिकटॉक को अमेरिका में बनाए रखने के लिए पूरी तरह से कानून का पालन करेंगे.

ट्रंप का बड़ा फैसला: दवाओं और ट्रकों पर भारी टैक्स, 1 अक्टूबर से लागू

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी व्यापारिक नीतियों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने सीधे दवा उद्योग को निशाना बनाते हुए विदेशी फार्मा कंपनियों पर बड़ा फैसला सुनाया है, जो भारत समेत कई विकासशील और विकसित देशों को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एलान किया कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा – अगर वह अमेरिका में निर्मित नहीं हो रही है। यानी, कोई कंपनी यदि अमेरिका में फार्मा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित नहीं कर रही है, तो उसे इस भारी-भरकम टैक्स का सामना करना पड़ेगा। दवा कंपनियों पर सीधा असर यह फैसला उन देशों के लिए झटका है जो अमेरिका को बड़ी मात्रा में दवा उत्पाद निर्यात करते हैं। भारत, जो विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है, उसके लिए यह निर्णय न सिर्फ आर्थिक, बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी अमेरिका में निर्माण कार्य वास्तव में शुरू कर चुकी है, तो उस पर टैरिफ लागू नहीं होगा। “IS BUILDING” का मतलब केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर वास्तविक कार्य होना चाहिए। फर्नीचर और घरेलू सामान पर भी टैरिफ ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति सिर्फ दवा उद्योग तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ऐलान किया कि: -किचन कैबिनेट्स और बाथरूम वैनिटीज पर 50% टैरिफ -अपहोल्स्टर्ड फर्नीचर (गद्देदार फर्नीचर) पर 30% टैरिफ -भारी ट्रकों और अन्य घरेलू उत्पादों पर भी उच्च टैरिफ लगाए जाएंगे। ट्रंप का कहना है कि विदेशी कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में जरूरत से ज्यादा सामान भर दिया है, जिससे स्थानीय निर्माण उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। टैरिफ लगाना अब जरूरी हो गया है ताकि अमेरिका फिर से अपनी उत्पादन क्षमता हासिल कर सके। कई देशों पर नई टैरिफ दरें ट्रंप ने अगस्त में भी कई देशों पर टैरिफ बढ़ाए थे, जो अब लागू हो चुके हैं: भारत: 50% टैरिफ रूस: 25% अतिरिक्त जुर्माना ब्राज़ील: 50% टैरिफ दक्षिण अफ्रीका: 30% टैरिफ वियतनाम: 20% टैरिफ जापान व दक्षिण कोरिया: 15% टैरिफ अमेरिका फर्स्ट की वापसी? ट्रंप की इन घोषणाओं को उनकी पुरानी रणनीति America First का विस्तार माना जा रहा है। वे पहले भी टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं – चाहे वह चीन के साथ ट्रेड वॉर हो या यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क। इस नई घोषणा से अमेरिका में फार्मा इंडस्ट्री को तो बढ़ावा मिलेगा, लेकिन वैश्विक व्यापार संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

सोनम वांगचुक पर सख्त एक्शन, लेह बवाल के बाद NSA के तहत हुई गिरफ्तारी

लेह लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को आज गिरफ्तार कर लिया गया है. उनके खिलाफ ये एक्शन लेह हिंसा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हुआ है. उन्हें जेल में शिफ्ट किया जाए या कोई अन्य व्यवस्था की जाए, इस पर फैसला लिया जा रहा है. वांगचुक के खिलाफ केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप है. सोनम वांगचुक को डीजीपी एसडी सिंह जामवाल के नेतृत्व में लद्दाख पुलिस की एक टीम ने गिरफ़्तार किया है. वांगचुक की गिरफ़्तारी के बाद एहतियात के तौर पर लेह में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दी गई है. साथ ही ब्रॉडबैंड की स्पीड कम कर दी गई है. दरअसल, 24 सितंबर यानी बुधवार को लेह में हिंसक झड़प हुई थी. इसमें 4 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 90 लोग घायल हुए थे. हिंसक झड़प के बाद लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया. पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने कर्फ़्यू का सख्ती से पालन कराया. अब तक 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. लेह जिला मजिस्ट्रेट ने 2 दिन के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने का आदेश दिया. क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लेह के अलावा कारगिल सहित अन्य शहरों में भी धारा 144 लागू कर दी गई. उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने हाईलेवल सुरक्षा बैठक की और हिंसा की घटनाओं को षड्यंत्र का नतीजा बताते हुए सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए. लेह हिंसा के बाद गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक पर आरोप लगाया कि उनके भड़काऊ बयानों ने भीड़ को उकसाया, जिसके चलते प्रदर्शन हिंसक हो गए. मंत्रालय के मुताबिक वांगचुक ने अरब स्प्रिंग और नेपाल के Gen-Z आंदोलनों का हवाला देकर युवाओं को भड़काया, जिसके बाद लेह में बीजेपी कार्यालय और कुछ सरकारी गाड़ियों में आग लगा दी गई. गृह मंत्रालय ने कहा कि 24 सितंबर को सुबह 11:30 बजे वांगचुक के भाषण के बाद भीड़ उनके भूख हड़ताल स्थल से निकलकर बीजेपी ऑफिस और लेह के सीईसी दफ्तर पर हमला करने पहुंच गई. भूख हड़ताल और मांगें सोनम वांगचुक ने 10 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू की थी, उनकी मांग थी कि लद्दाख के लिए संवैधानिक गारंटी, अधिक स्वायत्तता, राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा दिया जाए. बुधवार को हिंसा बढ़ने के बाद उन्होंने अपना 2 हफ्ते का अनशन खत्म कर दिया था. मीटिंग्स का दौर जारी सरकार ने कहा कि लद्दाख में लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जैसे क्षेत्रीय संगठनों से उच्चस्तरीय समिति (HPC), उपसमितियों और अनौपचारिक बैठकों के जरिए बातचीत चल रही है.

ट्रंप वाइट हाउस में मौजूद, फिर भी गेट पर क्यों रुके रहे शहबाज-मुनीर?

न्यूयॉर्क पाकिस्तान का बेइज्जती शब्द से गहरा नाता है. चाहे कोई भी मंच हो, उसकी इंटरनेशनल बेइज्जती अक्सर होती है. अबकी बार अमेरिका में पाकिस्तान की बेइज्जती हुई है. जी हां, पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ट्रंप दरबार पहुंचे थे. शुक्रवार को वाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की मुलाकात हुई. मगर इस मुलाकात के लिए पाकिस्तानी पीएम को अपनी बेइज्जती करवानी पड़ी. डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के लिए आसिम मुनीर के साथ शहबाज शरीफ को वाइट हाउस के गेट पर इंतजार करना पड़ा. काफी देर बाद उन दोनों को डोनाल्ड ट्रंप का दीदार हुआ. अब सवाल है कि आखिर शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों करना पड़ा? दरअसल, पाकिस्तान की इस बेइज्जती का परोक्ष रूप से कारण चीन ही है. जी हां, डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को कुछ देर इंतजार कराया. कारण कि उस वक्त डोनाल्ड ट्रंप एक अहम डील में बिजी थे. जब वाइट हाउस की दहलीज पर शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर खड़े थे, तब अंदर ट्रंप का टिकटॉक को लेकर कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करना और प्रेस से मुलाकात जारी रहा. इसके कारण ही ट्रंप ने अपने घर आए मेहमान शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को इंतजार कराया. हालांकि, जब टिकटॉक डील पर सिग्नेचर और प्रेस वार्ता खत्म हो गई, तब जाकर ट्रंप ने शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर से मुलाकात की. ट्रंप और शरीफ के बीच वार्ता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ वार्ता की. ट्रंप और शहबाज शरीफ के बीच यह मुलाकात इस बात के संकेत हैं कि अमेरिका और परमाणु शक्ति वाले पाकिस्तान के बीच कुछ तो खिचड़ी पक रही है. शहबाज शरीफ उन आठ अरब या मुस्लिम देशों के टॉप अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ट्रंप से मुलाकात की. अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार होता दिख रहा है, क्योंकि रूस-यूक्रेन जंग और रूसी तेल की वजह से अमेरिका और भारत के संबंधों में खटास है. ट्रंप ने मास्को पर अप्रत्यक्ष आर्थिक दबाव डालने के प्रयास में भारत से तेल खरीद पर टैरिफ में बढ़ोतरी की है. जब ट्रंप से हुई शरीफ की मुलाकात इससे पहले अमेरिका और पाकिस्तान ने जुलाई में एक व्यापार समझौता किया था. इससे उम्मीद है कि वाशिंगटन पाकिस्तान के बड़े पैमाने पर अप्रयुक्त तेल भंडार को विकसित करने और इस्लामाबाद के लिए टैरिफ कम करने में मदद करेगा. शहबाज शरीफ गुरुवार शाम 5 बजे (अमेरिकी समयानुसार) से कुछ पहले वाइट हाउस पहुंचे. वह तब पहुंचे जब ट्रंप कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर कर रहे थे और पत्रकारों से बात कर रहे थे. दोनों नेताओं के बीच बैठक मीडिया के लिए बंद थी, और पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल शाम 6.18 बजे वाइट हाउस से रवाना हुआ. हालांकि, शहबाज शरीफ को ट्रंप से मुलाकात करने के लिए 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ा. इसके बाद दोनों के बीच यह बैठक करीब 1 घंटे 20 मिनट चली. पाक-अमेरिका कैसे आ रहे करीब? शहबाज शरीफ ने इस साल पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव कम करने के अपने प्रशासन के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ट्रंप का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया था. शहबाज शरीफ और मुनीर दोनों पक्के ट्रंप समर्थक बन चुके हैं. पाकिस्तान तो बार-बार यही कह रहा है कि अमेरिका ने ही सीजफायर करवाया. जबकि भारत का इसे लेकर साफ कहना है कि पाकिस्तान की गुहार पर भारत ने सीजफायर किया. शहबाज शरीफ और मुनीर सीजफायर का क्रेडिट ट्रंप को देते हैं, मगर पीएम मोदी इससे इनकार कर चुके हैं. बहरहाल, यह पहली बार नहीं है जब मुनीर ट्रंप दरबार पहुंचे हैं. इससे पहले भी ट्रंप उन्हें हलाल खिला चुके हैं.