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भाजपा ने मंडी में खोला नया पार्टी कार्यालय, लेह हिंसा पर बोले जयराम ठाकुर

मंडी, हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले मे भारतीय जनता पार्टी के नए जिला कार्यालय का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मौजूद रहे। नए पार्टी कार्यालय के शुभारंभ उन्होंने मीडियाकर्मियों ने कहा कि भाजपा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए हर जिले में अपना कार्यालय स्थापित कर रही है। मंडी में यह अस्थाई कार्यालय है और स्थायी भवन के लिए जमीन तलाशी जा रही है। जल्द ही इसका निर्माण भी किया जाएगा। पार्टी के नए कार्यालय के शुभारंभ की तस्वीरें शेयर करते हुए जयराम ठाकुर ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “आज मंडी में प्रदेश संगठन महामंत्री श्री सिद्धार्थन जी के साथ जिला भाजपा कार्यालय का शुभारंभ किया। यह नया कार्यालय क्षेत्र में संगठन की मजबूती के साथ-साथ जनसेवा, विकास और सुशासन के हमारे संकल्प को और गति देने का केंद्र बनेगा। उपस्थित सभी विधायकगण, पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।” कार्यालय का शुभारंभ करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान जयराम ठाकुर ने लेह में हुई हिंसक घटनाओं की कड़ी निंदा की। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। जयराम ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन हिंसा का कोई स्थान नहीं। जो लोग ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। केंद्र सरकार इस मामले पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं,, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि वोट चोरी कर सत्ता चलाने वाली कांग्रेस आज भाजपा पर ही आरोप लगाने का काम कर रही है। राहुल गांधी की देश में कोई स्वीकार्यता नहीं है, उनकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता। उनके आरोपों का कोई महत्व नहीं रह जाता और देश इस सच्चाई को देख रहा है। भाजपा के इस कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा संगठन मंत्री सिद्धार्थन, मंडी सदर के विधायक अनिल शर्मा, बल्ह के विधायक इंद्र सिंह गांधी, प्रदेश महामंत्री पायल वैद्य और मंडी जिला भाजपा अध्यक्ष निहाल चंद शर्मा समेत पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।  

देश में शुरू हो रहा स्वदेशी 4G, पीएम मोदी करेंगे BSNL की नई सेवाओं का उद्घाटन

नई दिल्ली  बीएसएनएल के इतिहास का एक और खास दिन नजदीक आ रहा है। शनिवार को बीएसएनएल के 4G नेटवर्क की शुरुआत होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीएसएनएल की 4G स्‍टैक का शुभारंभ करेंगे, जो देशभर में 98 हजार साइटों पर रोलआउट होगा। बीएसएनएल 4जी इसलिए भी खास है, क्‍योंकि यह पूरी तरह से स्‍वदेशी तकनीक पर तैयार हुआ है। अब भारत दुनिया का पांचवां ऐसा देश बन जाएगा जो 4G से जुड़े सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को खुद बना सकता है और सप्‍लाई कर सकता है। सर्विस के लॉन्‍च होते ही भारत के सभी टेलिकॉम ऑपरेटर 4G से लैस हो जाएंगे। जियो, एयरटेल, वीआई जैसी कंपनियां पहले से ही 4G और 5G नेटवर्क पर हैं। ज्‍योत‍िराद‍ित्‍य सिंधिया ने किया पोस्‍ट केंद्रीय मंत्री ज्‍योत‍िराद‍ित्‍य सिंधिया ने इस संबंध में एक पोस्‍ट किया है। उन्‍होंने ल‍िखा- भारत की दूरसंचार यात्रा में एक ऐतिहासिक छलांग। बीएसएनएल के 25 साल पूरे होने के अवसर पर शनिवार को प्रधानमंत्री दो ऐतिहासिक इन‍िशिएट‍िवप को अनवील करेंगे। उन्‍होंने लिखा है कि बीएसएनएल 4G स्टैक का का नेशनवाइड रोलआउट कल 98 हजार साइटों पर किया जाएगा। इसके अलावा देश में 4G नेटवर्क की शुरुआत की जाएगी। ज्‍योत‍िरादित्‍य सिं‍धिया ने लिखा है कि बीएसएनएल 4जी से देश का कोई कोना अछूता नहीं रहेगा। TCS ने इंटीग्रेट करवाया पूरा सिस्‍टम बीएसएनएल 4जी के रोलआउट में टाटा कंसल्‍टेंसी सर्विसेज का भी अहम रोल है। रिपोर्ट के अनुसार, 4जी के लिए कोर नेटवर्क को सी-डॉट यानी सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलिमैट‍िक्‍स ने तैयार किया है। रेड‍ियो एक्‍सेस नेटवर्क को तेजस नेटवर्क ने डेवलप किया है और पूरे सिस्‍टम को टीसीएस ने इंटीग्रेट किया है। 5G में हो सकेगा अपग्रेड प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियों के मुकाबले में बीएसएनएल 4जी लॉन्‍च करने में भले पीछे रह गई हो, लेकिन 5जी में वह बराबर की टक्‍कर दे सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बीएसएनएल के 4जी नेटवर्क को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसे आसानी से 5जी में अपग्रेड किया जा सकेगा। बीएसएनएल इस साल के आखिर तक दिल्‍ली और मुंबई से अपनी 5जी सेवाएं शुरू कर सकती है। बीएसएनएल 4जी रोलआउट का फायदा उसके 9 करोड़ से ज्‍यादा वायरलैस सब्‍सक्राइबर्स को मिलने की उम्‍मीद है। कई यूजर्स जिन्‍होंने मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्‍ट‍िविटी की वजहों से बीएसएनएल का साथ छोड़ा, वह भी वापस लौट सकते हैं, क्‍योंकि सरकारी कंपनी के रिचार्ज प्‍लान, प्राइवेट कंपनियों से सस्‍ते हैं।

लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को सेना में मिला प्रमोशन, मालेगांव ब्लास्ट केस से बरी होने के बाद नया मुकाम

नई दिल्ली मालेगांव केस में बरी हुए लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को प्रमोशन मिला है। खबर है कि उन्हें कर्नल रैंक पर प्रमोट किया गया है। कुछ हफ्तों पहले ही NIA यानी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की विशेष अदालत ने उन्हें पूर्व भारतीय जनता पार्टी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत 7 लोगों के साथ बरी किया है। अदालत का कहना था कि इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले थे, जिससे साबित हो कि आरडीएक्स लाने या बम बनाने में पुरोहित की भूमिका हो। सोशल मीडिया पर पुरोहित के पिपिंग समारोह की तस्वीरें भी जमकर शेयर की जा रहीं हैं। वह साल 1994 में मराठा लाइट इन्फेंट्री में शामिल हुए थे। वह जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन्स में शामिल रहे हैं। पिपिंग समारोह उस आयोजन को कहा जाता है, जहां किसी अधिकारी को उसके प्रमोशन के समय कंधे पर नए पद के चिन्ह लगाए जाते हैं। 31 जुलाई को बरी होने के बाद पुणे पहुंचे पुरोहित ने कहा था, 'एक सैन्यकर्मी के रूप में मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि कोई दुश्मन भी मेरी देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति निष्ठा पर सवाल नहीं उठा सकता। अदालत में अपनी दलीलों के दौरान मैंने इस बात पर जोर दिया कि मुझे कुछ भी कहा जाए, लेकिन आतंकवादी या देशद्रोही नहीं कहा जाए।' मालेगांव ब्लास्ट मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर मालेगांव शहर में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल पर लगाए गए विस्फोटक उपकरण में विस्फोट हुआ था, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और 101 घायल हुए थे। इस मामले में कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन केवल सात लोगों पर ही मुकदमा चला, क्योंकि आरोप तय होने के समय बाकी सात को बरी कर दिया गया था। ठाकुर और पुरोहित के अलावा, आरोपियों में मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी शामिल थे। जब पुरोहित को एटीएस ने गिरफ्तार किया था तब वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर कार्यरत थे। उनके खिलाफ उन बैठकों में शामिल होने का आरोप था, जहां विस्फोट की कथित साजिश रची गई थी। पुरोहित को नवंबर 2008 में गिरफ्तार किया गया था और सितंबर 2017 में उच्चतम न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी। अदालत को दिए अपने अंतिम बयान में, पुरोहित ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष ने उनके खिलाफ झूठा मामला गढ़ा है।

कनाडा की धरती से अजित डोभाल के नाम धमकी, इंतजार जारी

कनाडा कनाडा में गिरफ्तार हुआ खालिस्तानी आतंकवादी इंदरजीत सिंह गोसाल जेल से बाहर आ चुका है। खबर है कि बाहर आते ही उसने भारत को धमकी दी है। इसके अलावा SFJ यानी सिख्स फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को चेतावनी दी है। गोसाल और 2 अन्य को 19 सितंबर को हथियारों से जुड़े अपराध में गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, गोसाल जेल से बाहर आ गया है। जेल से बाहर आते ही उसने पन्नू को समर्थन देने की बात कही है। रिपोर्ट के अनुसार, गोसाल ने वीडियो में कहा, 'भारत, मैं बाहर आ गया हूं। गुरपतवंत सिंह पन्नू को समर्थन देने और 23 नवंबर 2025 को खालिस्तान रेफरेंडम आयोजित करने के लिए। दिल्ली बनेगा खालिस्तान।' रिपोर्ट के मुताबिक पन्नू ने कहा, 'अजित डोभाल, तुम क्यों कनाडा, अमेरिका या किसी यूरोपीय देश में नहीं जाते और गिरफ्तारी या प्रत्यर्पण की कोशिश करते। डोभाल, मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।' भारतीय सैनिकों को भड़काया हाल ही में NIA यानी नेशनल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने अमेरिका में रहने वाले पन्नू के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस साल स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रध्वज फहराने से रोकने के लिए इनाम की पेशकश करने और 'भारत के खिलाफ सिखों में असंतोष फैलाने' का आरोप शामिल है। FIR के अनुसार, पन्नू ने 10 अगस्त को पाकिस्तान के लाहौर प्रेस क्लब में मीट द प्रेस कार्यक्रम के दौरान ईनाम की घोषणा की थी। वॉशिंगटन से एक वीडियो संबोधन में पन्नू ने उन सिख सैनिकों को 11 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी, जो मोदी को दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा फहराने से रोकेंगे। FIR में यह भी कहा गया है कि इस कार्यक्रम में पन्नू ने एक नए खालिस्तान के मानचित्र का अनावरण किया और कहा कि पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश खालिस्तान में शामिल होंगे। पन्नू ने दावा किया था कि SFJ ने भारत के खिलाफ लड़ने के लिए एक शहीद जत्था बनाया है।  

अमित शाह का दावा: 2026 चुनाव के बाद साकार होगा ‘सोनार बांग्ला’ का सपना

कोलकाता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोलकाता के मशहूर संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा पंडाल का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने बंगाल और देशवासियों को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं दीं और कहा कि नौ दिनों तक चलने वाला शक्ति की उपासना का यह पर्व आज पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गया है। साथ ही उन्होंने इस दौरान मां दुर्गा से प्रार्थना की कि 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद बंगाल में ऐसी सरकार बने, जो राज्य को फिर से ‘सोनार बांग्ला’ (स्वर्णिम बंगाल) बना सके। शाह ने कहा कि मैंने मां दुर्गा से प्रार्थना की है कि बंगाल में ऐसी सरकार आए जो राज्य को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाए, जैसा कि रवींद्रनाथ टैगोर ने सपना देखा था। शाह ने कहा कि मैंने मां दुर्गा से प्रार्थना की है कि इस चुनाव के बाद बंगाल में ऐसी सरकार बने जो 'सोनार बांग्ला' (स्वर्णिम बंगाल) की स्थापना करे। उन्होंने बंगाल को एक बार फिर शांति, सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक बनाने की बात कही। ईश्वरचंद्र विद्यासागर को दी श्रद्धांजलि अमित शाह ने समाज सुधारक और शिक्षाविद ईश्वरचंद्र विद्यासागर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि विद्यासागर जी का महिला शिक्षा और समाज सुधार में योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसके साथ ही गृह मंत्री ने दुर्गा पूजा की शुरुआत में हुई भारी बारिश और इससे हुई मौतों पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि दस से ज्यादा लोगों की जान चली गई, हम सभी भाजपा कार्यकर्ता पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं।

नाटो प्रमुख का दावा: पीएम मोदी ने पुतिन से पूछा यूक्रेन युद्ध का अगला कदम

नई दिल्ली पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने भारत पर अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के प्रभावों पर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के टैरिफ की वजह से भारत ने  रूस से उसकी यूक्रेन स्ट्रैटेजी पर स्पष्टीकरण मांगा है. नाटो चीफ ने कहा कि ट्रंप की ओर से भारत पर लगा गए टैरिफ की वजह से रूस पर बड़ा असर पड़ रहा है. रूटे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर  पुतिन से बात कर रहे हैं. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर सीएनएन से बात करते हुए रूटे ने कहा कि भारत पर ट्रंप के टैरिफ का रूस पर बड़ा असर हो रहा है. भारत की ओर से पुतिन से बात की जा रही है. पीएम मोदी रूस से यूक्रेन पर अपनी रणनीति स्पष्ट करने को कह रहे हैं क्योंकि भारत को टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. बता दें कि ट्रंप ने पिछले महीने भारत पर 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था. इसके साथ ही रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से भारत पर अमेरिका ने 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया था. अमेरिकी सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर टैरिफ लगाया गया है. अमेरिका का कहना है कि रूस से तेल खरीदने की वजह से यूक्रेन के खिलाफ रूस को मदद मिल रही है. ट्रंप ने इस दौरान नाटो देशों से भी चीन पर टैरिफ लगाने को कहा था कि ताकि रूस का तेल कम खरीदा जा सके.

संविधान के प्रहरी का संदेश: हिंदू समाज को कमतर आंकना स्वीकार नहीं – सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि वह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के प्रावधानों को दी गई चुनौतियों पर विचार करते समय सावधानी बरतेगा। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ 1956 अधिनियम के तहत उत्तराधिकार के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा, 'हिंदू समाज की जो संरचना पहले से मौजूद है, उसे कमतर मत कीजिए। एक अदालत के रूप में, हम आपको सावधान कर रहे हैं। एक हिंदू सामाजिक संरचना है और आप इसे गिरा नहीं सकते… हम नहीं चाहते कि हमारा फैसला किसी ऐसी चीज को नष्ट दे जो हजारों सालों से चली आ रही है।' शीर्ष अदालत ने कहा कि यद्यपि महिलाओं के अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन 'सामाजिक संरचना और महिलाओं को अधिकार देने के बीच संतुलन' होना चाहिए। पीठ ने व्यापक मुद्दों पर विचार किए जाने तक समाधान की संभावना तलाशने के लिए संबंधित पक्षों को उच्चतम न्यायालय के मध्यस्थता केंद्र में भेज दिया। याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनौती दिए गए प्रावधान महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण हैं। सिब्बल ने कहा कि महिलाओं को केवल परंपराओं के कारण समान उत्तराधिकार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अधिनियम का बचाव करते हुए कहा कि यह 'समुचित ढंग से तैयार किया गया' अधिनियम है और आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता 'सामाजिक ढांचे को नष्ट' करना चाहते हैं। शीर्ष अदालत के समक्ष विचारणीय मुद्दा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15 और 16 है, जो बिना वसीयत के या बिना वसीयत के मरने वाली हिंदू महिलाओं की संपत्ति के हस्तांतरण को नियंत्रित करती है। अधिनियम की धारा 15 के अनुसार, जब किसी हिंदू महिला की बिना वसीयत के मृत्यु हो जाती है, तो उसकी संपत्ति उसके माता-पिता से पहले उसके पति के उत्तराधिकारियों को मिलती है।

कर्नाटक सीएम की अपील पर अजीम प्रेमजी का जवाब – विप्रो सरजापुर कैंपस जनता के लिए बंद रहेगा

नई दिल्ली विप्रो के संस्थापक और अध्यक्ष अजीम प्रेमजी ने कंपनी के परिसर को बाहरी यातायात के लिए खोलने से इनकार कर दिया है, क्योंकि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने क्षेत्र में सड़कों पर भीड़भाड़ कम करने के लिए सहयोग मांगा था। बेंगलुरु शहर यातायात की समस्या से जूझ रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में पूछा था कि क्या विप्रो अपना सरजापुर परिसर सार्वजनिक वाहनों के लिए खोल सकता है। प्रेमजी ने इस मुद्दे की गंभीरता को स्वीकार किया और बेंगलुरू के आउटर रिंग रोड पर यातायात की भीड़ से निपटने के लिए कॉर्पोरेट सहयोग हेतु सिद्धारमैया की अपील की सराहना की। अजीम प्रेमजी ने क्या कहा? हालांकि, विप्रो के चेयरमैन ने बताया कि सरजापुर स्थित परिसर को विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) घोषित किया गया है और वैश्विक सेवा प्रतिबद्धताओं के कारण यह सख्त प्रवेश नियंत्रण नियमों से बंधा हुआ है। प्रेमजी ने पत्र में कहा, "हमारे सरजापुर परिसर से सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही की अनुमति देने के विशिष्ट सुझाव के संबंध में हमें गंभीर कानूनी, प्रशासनिक और वैधानिक चुनौतियों की आशंका है, क्योंकि यह एक सूचीबद्ध कंपनी के स्वामित्व वाली एक विशेष निजी संपत्ति है, जो सार्वजनिक आवागमन के लिए नहीं है।" 'दीर्घकालिक समाधान के रूप में नहीं होगा प्रभावी' प्रेमजी ने आगे कहा, "इसके अलावा, यह भी सराहनीय होगा कि हमारा सरजापुर परिसर एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) है जो वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करता है। हमारी संविदात्मक शर्तों में प्रशासन और अनुपालन के लिए कड़े, अपरक्राम्य प्रवेश नियंत्रण मानदंड अनिवार्य हैं। इसके अलावा, निजी संपत्ति के माध्यम से सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही एक स्थायी, दीर्घकालिक समाधान के रूप में प्रभावी नहीं होगी।"  

‘एज ऑफ कंसेंट’ कम करना कितना सुरक्षित? जानिए दिमागी परिपक्वता, सामाजिक खतरे और वैश्विक अनुभव

नई दिल्ली तीन साल पहले तक फिलीपींस में यौन रिश्तों के लिए सहमति की उम्र महज 12 साल थी. ईसाई देश में यौन शोषण का ग्राफ इतना ऊपर पहुंच गया कि हर पांच में से एक बच्चा एक्सट्रीम हालात का शिकार होने लगा. भारी हंगामों के बाद आखिरकार साल 2022 में इसे बढ़ाते हुए 16 कर दिया गया. जापान में भी यौन संबंधों पर सहमति की उम्र 13 साल थी, जिसे कुछ वक्त पहले ही बढ़ाया गया. क्या वजह है कि बाकी देश एज ऑफ कंसेंट को बढ़ा रहे हैं और क्यों हमारे यहां इसे घटाने की चर्चा हो रही है? फिलीपींस, दुनिया के उन गिने-चुने देशों में रहा है जहां यौन सहमति की उम्र बेहद कम, केवल 12 साल थी. साल 1930 से वहां यही नियम रहा. असल में इससे पहले ये देश अमेरिकी कॉलोनी था. उसके बाद पीनल कोड रिवाइज हुआ. उस दौर के लोग मानते थे कि 12 साल की उम्र बचपन से युवावस्था की तरफ बढ़ने वाली उम्र है और लड़की शादी के लिए तैयार हो सकती है.  धर्म का भी रहा एंगल ये कैथोलिक-बहुल देश है  चर्च का मानना रहा कि शादी के बाद ही यौन संबंध बनना चाहिए. यही वजह है कि लड़कियों की जल्दी शादियां होने लगीं और उम्र बढ़ाने को लेकर गंभीर बहस नहीं हो सकी. अस्सी के दशक में पहली बार महिला अधिकारों की बात शुरू हुई लेकिन तब भी सरकार इस मुद्दे पर चुप रही. चूंकि चर्च गर्भनिरोधक और यौन शिक्षा के विरोध में रही तो एज ऑफ कंसेंट बढ़ाने की मांग दबी ही रही.  क्या नुकसान दिखने लगा टीन-एज प्रेग्नेंसी लगातार बढ़ने लगी. कोई वयस्क 13 या 14 साल की लड़की के साथ संबंध बनाकर भी साफ बच निकलता था. अब शादियां तो नहीं हो रही थीं, लेकिन रेप बढ़ रहे थे. नतीजा ये हुआ कि लाखों लड़कियां नाबालिग लड़कियां मां बन गईं. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि फिलीपींस दक्षिण-पूर्व एशिया में टीन-एज प्रेग्नेंसी कैपिटल बन चुका था. खुद स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि साल 2020 में हर दिन लगभग 500 बच्चियां गर्भवती हो रही थीं. उनके स्कूल छूट गए और जिंदगी ठहर गई.  यूएन एजेंसियां लगातार दबाव बनाने लगीं कि फिलीपींस अपना नियम बदले. साल 2021 में यूएन की कमेटी ऑन द राइट्स ऑफ द चाइल्ड ने साफ कहा कि 12 साल में कंसेंट इंटरनेशनल मानकों के खिलाफ है. अब देश पर प्रेशर था कि उसने बात न सुनी तो मुश्किल पड़ सकती है. मातृत्व और शिशु मृत्यु दर भी बढ़ चुकी थी. तब तक 9 दशक बीत चुके थे. अब जाकर फिलीपींस को लगा कि यह कानून न सिर्फ पुराना है, बल्कि खतरनाक भी है. 12 साल की उम्र को कानूनी सहमति मानना असल में अपराधियों को बचने का रास्ता देना था. साल 2022 में इसे बढ़ाते हुए 16 साल किया गया.  विकसित देश जापान के हाल भी अलग नहीं रहे वहां का क्रिमिनल कोड 1907 से चला आ रहा था, जिसमें सहमति की उम्र 13 साल तय थी. इसका मतलब यह था कि कानूनन 13 साल की बच्ची भी यौन संबंध के लिए सहमति दे सकती थी. अगर कोई मामला अदालत में जाता, तो यौन अपराधी झूठ बोलकर बच निकलता था. यहां तक कि वहां रेप की परिभाषा तक बहुत सीमित थी. कानून कहता था कि बलात्कार तभी माना जाएगा जब जबरन यौन संबंध बनाया गया हो. पीड़िता को साबित करना पड़ता था कि उसने पूरी ताकत से विरोध किया, लेकिन फिर भी खुद को बचा नहीं पाई. अगर लड़की डर गई, चुप रही, या विरोध करने की स्थिति में न हो तो कोर्ट मान लेती थी कि ये रेप नहीं, सहमति है.  वैसे जापान में टीन-एज प्रेग्नेंसी उतनी ज्यादा नहीं थी जितनी फिलीपींस में, लेकिन छोटी बच्चियों का ऑनलाइन शोषण तेज हो चुका था. अपराधी जानते थे कि वे बच निकलेंगे. साल 2020 के समय वहां यौन अपराधों के खिलाफ भारी प्रोटेस्ट हुए. यूएन ने भी दबाव डाला कि वो सहमति की उम्र को ग्लोबल मानकों के आसपास लाए. आखिरकार दो साल पहले जापान की संसद ने नया कानून पास किया, जिसमें सहमति की उम्र 13 से बढ़ाकर 16 साल कर दी गई. साथ ही, नशे में या दबाव में बनाए गए संबंधों को रेप की कैटेगरी में डाला गया.  16 साल में कितना विकसित हो पाता है मस्तिष्क अब कई देश कंसेंट की आयु 16 से बढ़ाते हुए 18 तक जाने की सोच रहे हैं, वहीं भारत में इसे कम करने की बात हो रही है. इस पक्ष की दलील है कि कई बार टीन-एजर्स रोमांटिक रिश्ते में होते हैं लेकिन उम्र की वजह से इसे भी रेप की श्रेणी में डाल दिया जाता है और लड़कों को कड़ी सजा मिलती है.  हालांकि इसका दूसरा पहलू ज्यादा गंभीर है. 16 साल की उम्र में बच्चे शारीरिक तौर पर तो बड़े हो चुके होते हैं लेकिन ब्रेन अभी पूरी तरह डेवलप नहीं हुआ होता. खासकर, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स,जो फैसला लेने, जोखिम समझने और भावनाओं को कंट्रोल करने का काम करता है, वो पूरी तरह बना ही नहीं होता. यानी इस उम्र के लोग इमोशनली तैयार नहीं हो सकते कि वे पूरी समझदारी से यौन संबंध बनाएं. हो सकता है कि इसके बाद वो गिल्ट ट्रिप पर चला जाए, डिप्रेशन का शिकार हो जाए या लगातार गलत रिश्तों में फंसता चला जाए. अगर एक पार्टनर बड़ी उम्र का हो तो दूसरा कम उम्र के चलते प्रेशर का शिकार भी हो सकता है. पढ़ाई छूटती है, सो अलग. यही वजह है कि सेंटर खुद मौजूदा आयु सीमा को बनाए रखने पर जोर दे रहा है.

धनतेरस, दिवाली, दशहरा समेत अक्टूबर के सभी व्रत-त्योहारों की तारीखें एक क्लिक में

नईदिल्ली  साल 2025 का अक्टूबर  भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में बेहद खास रहने वाला है. इसी महीने 1 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र का समापन होगा. इसके बाद करवा चौथ, दशहरा, धनतेरस, दिवाली और छठ महापर्व भी मनाए जाएंगे. देश के हर हिस्से में ये सभी त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाए जाते हैं. आइए अक्टूबर में आने वाले व्रत त्योहारों पर एक नजर डालते हैं. अक्टूबर में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट 1 अक्टूबर 2025 – महानवमी शारदीय नवरात्र की महानवमी 1 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस दिन नवमी तिथि का कन्या पूजन किया जएगा. 2 अक्टूबर 2025 – दशहरा/विजयादशमी दशहरा अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है. इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया और माता दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की. देशभर में रावण दहन और विजयादशमी उत्सव बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं. यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है. 3 अक्टूबर 2025 – पापांकुशा एकादशी सनातन धर्म में पापांकुशा एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की उपासना से समस्त पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है. 4 अक्टूबर 2025 – शनि प्रदोष व्रत शनि प्रदोष व्रत का महत्व ग्रह शांति और आयु वृद्धि में होता है. इस दिन शनि देव की पूजा और हनुमानजी की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है. 6 अक्टूबर 2025 – शरद पूर्णिमा शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होकर अमृत की वर्षा करता है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं. कोजागर पूजा के दौरान देवी लक्ष्मी की आराधना से धन, वैभव और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. 7 अक्टूबर 2025 – वाल्मीकि जयंती / मीराबाई जयंती संत वाल्मीकि और भक्ति मार्ग की आदर्श महिला मीराबाई की जयंती इस दिन मनाई जाती है. ये हमें सच्चे भक्ति भाव और जीवन में नैतिकता का महत्व सिखाते हैं. 8 अक्टूबर 2025 – कार्तिक माह प्रारंभ कार्तिक माह धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है. इस महीने में किए जाने वाले व्रत और पूजा विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं. 10 अक्टूबर 2025 – करवा चौथ / संकष्टी चतुर्थी करवा चौथ विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती हैं. संकष्टी चतुर्थी भी इस दिन विशेष महत्व रखती है. 13 अक्टूबर 2025 – अहोई अष्टमी अहोई अष्टमी व्रत माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस व्रत में माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए कामना करती हैं. 17 अक्टूबर 2025 – रमा एकादशी / तुला संक्रांति रमा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है. तुला संक्रांति के दिन सूर्य तुला राशि में प्रवेश करता है, जो कृषक और व्यापारियों के लिए शुभ माना जाता है. 18 अक्टूबर 2025 – शनि प्रदोष व्रत / धनतेरस / यम दीपम धनतेरस पर मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है. इस दिन धातु और गहनों की खरीदारी शुभ मानी जाती है. यम दीपम का उत्सव यमराज के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए मनाया जाता है. 20 अक्टूबर 2025 – नरक चतुर्दशी / लक्ष्मी पूजा / दिवाली दीवाली का पर्व इस साल 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा. यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है. इस दिन घरों में दीप जलाए जाते हैं और मां लक्ष्मी की पूजा कर धन, समृद्धि और सुख की प्राप्ति की जाती है. इस वर्ष दिवाली का पूजा मुहूर्त शाम 07:08 से 08:18 बजे तक रहेगा. 21 अक्टूबर 2025 – कार्तिक अमावस्या कार्तिक अमावस्या को पितरों की स्मृति में तर्पण और पितृपक्ष संबंधित धार्मिक कर्म किए जाते हैं. 22 अक्टूबर 2025 – गोवर्धन पूजा गोवर्धन पूजा पर गोवर्धन पर्वत की पूजा कर जीवन में संपन्नता और खुशहाली की कामना की जाती है. 23 अक्टूबर 2025 – भाई दूज भाई दूज भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व है. बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. 25 अक्टूबर 2025 – विनायक चतुर्थी गणपति भगवान की पूजा इस दिन की जाती है. यह दिन विशेष रूप से व्यापारियों और गृहस्थों के लिए मंगलकारी माना जाता है. 27 अक्टूबर 2025 – छठ पूजा छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होती है. यह व्रत स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार में खुशहाली लाने वाला माना जाता है. 31 अक्टूबर 2025 – अक्षय नवमी अक्षय नवमी को अक्षय संपत्ति और अक्षय लाभ की कामना के साथ मनाया जाता है. इस दिन की गई पूजा और दान स्थायी लाभ प्रदान करता है.