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भोपाल केस में पीड़िता का आरोप: धर्मांतरण वाली बहनें गरीब युवतियों को सेक्स रैकेट में धकेलती थीं

भोपाल  भोपाल में धर्मांतरण, रेप और देह व्यापार के आरोपों में घिरी दो बहनें आफरीन और अमरीन चार साल पहले अब्बास नगर की झुग्गी बस्ती छोड़ चुकी थीं। इसके बाद भी स्थानीय रहवासी उनकी करतूतों के कारण परेशान थे।भोपाल में धर्म परिवर्तन करवाकर सैक्स रैकेट चलाने का मामला सामने आया था, जिसमें दो सगी बहनें अपने साथियों के साथ मिलकर मासूस लड़कियों को फंसाती थीं और फिर उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता था. भोपाल में इन लोगों ने किराए पर एक कमरा भी लिया था, जो अय्याशी का अड्डा बना हुआ था. अब भोपाल केस में बड़ा खुलासा हुआ है, जब मीडिया के सामने अमरीन और आफरीन गैंग की शिकार बनी पीड़िताएं सामने आई हैं. पीड़िताओं ने लगाए गंभीर आरोप अब इसको लेकर दो पीड़िताएं सामने आई हैं, जहां वह बजरंग दल के लोगों के साथ पुलिस कंट्रोलरूम पहुंची हैं. उन्होंने अमरीन, आफरीन और चंदन यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इनमें धर्म परिवर्तन का दवाब बनाने, गौ मांस खिलाने के आरोप शामिल हैं. पीड़िताओं की तरफ से बताया गया है कि दोनों सगी बहनों के बैग में हमेशा एमडी ड्रग्स के पाउच रहते थे. कई लोग सागर विला वाले घर पर ड्रग्स लेने आते थे. इसके अलावा उन्होंने कहा कि अमरीन ने भोपाल से ही 6 से 7 लड़कियों को अपना शिकार बनाया है. वह हिंदू देवी देवताओं को गंदी गालियां देते हुए कहती थी कि तुम्हारा भगवान किसी काम का नहीं है. अल्लाह को बहुत ताकतवर बताते हुए कहती थी कि गौ मांस खा चुकीं. अब तुम हिंदू कहां हो. अब्बास नगर में रहने वाले पड़ोसी ताज मोहम्मद ने बताया कि दोनों बहनें कभी भी देर रात युवक और युवतियों को लेकर मोहल्ले में आती थीं। यहां पार्टी के नाम पर हुड़दंग करती थीं। मोहल्ले वाले विरोध करते तो वे उनके खिलाफ थाने में शिकायत कर देती थीं। इतना ही नहीं, ज्यादा विरोध करने पर रेप के झूठे केस में जेल भिजवाने की धमकी देती थीं। ताज का कहना है कि 2006 में दोनों बहनें पिता और मां के साथ मोहल्ले में रहने आई थीं। पिता की मौत के बाद अचानक दोनों का आचरण बदल गया। उनके घर बड़ी संख्या में अनजान युवक और युवतियां आने लगे। चार साल पहले दोनों बहनें फतेहगढ़ में रहने चली गईं। कुछ समय बाद भाई बिलाल भी चला गया और मां ने दूसरा निकाह कर लिया। वह भी कहीं और रहने लगी। पब और लाउंज में लड़कियों से कराती थीं ड्रग डिलीवरी आफरीन और अमरीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाली दोनों युवतियां शुक्रवार शाम को पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचीं। उन्होंने बताया कि दोनों बहनें ड्रग तस्करी का काम करती हैं। चंदन सहित कई अन्य लोग उनके इस धंधे में शामिल हैं। ड्रग की डिलीवरी भी लड़कियों से कराई जाती है। ग्राहकों को खास कोड वर्ड देकर डिलीवरी दी जाती थी। शहर के नामचीन पब और लाउंज में ड्रग को शर्ट कहा जाता था, वहीं पीड़िताओं के इस खुलासे के बाद पुलिस ने एमडी ड्रग तस्करी के नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस अमरीन और चंदन से ड्रग तस्करी के संबंध में भी पूछताछ करेगी। फ्लैट की सर्चिंग में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिले बागसेवनिया पुलिस ने अमरीन के फ्लैट से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए हैं। इसमें दो मोबाइल फोन हैं। इसके साथ अहमदाबाद में भी पुलिस ने उस स्पॉट का वेरिफिकेशन किया, जहां दोनों पीड़िता का रेप कराया गया। बागसेवनिया पुलिस यासिर की तलाश में अहमदाबाद में दबिश दे रही है। पुलिस रिमांड पर चल रहे आरोपी चंदन और अमरीन पुलिस टीम के साथ ही हैं। पहले मदद करतीं, फिर रईसजादों के सामने परोस देतीं अमरीन और आफरीन ने पुलिस को बताया कि वे गरीब घरों की लड़कियों को टारगेट करती थीं। पहले मदद के नाम पर घरेलू काम के लिए रखतीं। फिर हाई प्रोफाइल लाइफ स्टाइल का सपना दिखाकर बड़ी पार्टियों में ले जातीं। वहां उन्हें रईसजादों के आगे परोस दिया करती थीं। चार साल पहले मिसरोद में अमरीन एक स्पा संचालक के संपर्क में आई और स्पा में जॉब करने लगी। मिसरोद के स्पा में हुई चंदन से मुलाकात स्पा में ही जॉब के दौरान उसकी रायसेन के रहने वाले चंदन से मुलाकात हुई। बाद में दोनों ने मिलकर सेक्स रैकेट का संचालन शुरू किया। इस दौरान अमरीन ने अपनी कट्टर शिया विचारधारा का प्रचार कर अपने गिरोह की युवतियों को मुस्लिम बनने के लिए ब्रेनवॉश किया। चंदन का भी धर्मांतरण कराया। शराब और ड्रग्स लेने के लिए दबाव डालती थीं पीड़िताओं ने एफआईआर में बताया है कि चंदन यादव सागर रॉयल विला में अमरीन-आफरीन के साथ रहता है। दोनों बहनों के संपर्क में आने के बाद इस्लाम अपना चुका है। अमरीन और आफरीन दोनों पीड़िताओं को गुजरात और मुंबई ले गई थीं। वहां भी उन्होंने अनजान लोगों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। वे शराब पीने और एमडी ड्रग्स लेने के लिए भी दबाव डालती थीं। अमरीन के मोबाइल में कई संदिग्ध वॉट्सएप ग्रुप पुलिस ने अमरीन, आफरीन और चंदन के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। इनकी जांच कराई जाएगी। अमरीन के मोबाइल में कई संदिग्ध वॉट्सएप ग्रुप मिले हैं। उनमें कई युवतियों के फोटो भी हैं। पुलिस को अमरीन और आफरीन के देह व्यापार गिरोह से जुड़े होने के भी सबूत मिले हैं। उनके गिरोह में चंदन यादव के अलावा बिलाल और यासिर भी काम करते थे। दोनों पीड़िताओं से तीनों युवक कई बार रेप कर चुके हैं। वे किसी को भी वारदात के बारे में बताने पर बदनाम करने की धमकी देते थे। चंदन ने कहा- मुस्लिम बनो, अच्छी जगह शादी कराऊंगा भोपाल की रहने वाली पीड़िता ने पुलिस को बताया- मैं अमरीन के घर काम करती थी। एक दिन चंदन और अमरीन के बीच विवाद हो गया। चंदन नाराज होकर कहीं चला गया। अमरीन ने मुझे कहा कि चंदन को तलाशने चलना है। मैं उसके साथ चली गई। हम दोनों नारायण नगर में रहने वाली चंदन की बहन के घर पहुंचे। वहां चंदन मिला। कुछ देर बाद अमरीन कहीं चली गई। इस दौरान चंदन ने पहली बार मेरे साथ रेप किया। किसी को भी बताने पर जान से मारने की धमकी दी। बदनामी का डर भी दिखाया। … Read more

पुलिस का झांसा देकर 1 लाख रुपये की डिमांड, पीड़िता ने बताया गांजा और देह व्यापार के झूठे आरोप

बेंगलुरु नेलमंगला के पास मंगलवार रात एक 27 वर्षीय महिला से गैंगरेप के मामले ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। बेंगलुरु ग्रामीण पुलिस ने इस घटना में शामिल तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी मिथुन सहित अन्य की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार पीड़िता पश्चिम बंगाल की रहने वाली है और बेंगलुरु में पिछले छह महीनों से अपने पति और दो बेटों के साथ किराए के मकान में रह रही थी। वह शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रमों में ब्यूटीशियन का काम करती है। पीड़िता के साथ बंगाल की ही एक अन्य महिला और उसके पति का एक मित्र भी पास के मकान में रहते थे। मित्र असम का रहने वाला है। घटना के समय पीड़िता का पति काम पर गया हुआ था। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि 21 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे पांच लोग खुद को स्थानीय पुलिस बताकर उसके घर में घुस आए। उन्होंने आरोप लगाया कि वह और उसके परिचित लोग गांजा रखने और देह व्यापार में शामिल हैं। इसके बाद उन्होंने 1 लाख रुपये की मांग की। पीड़िता के अनुसार, आरोपियों ने विरोध करने पर उसे और उसकी सहेली को क्रिकेट बैट और मछेटी (चाकू जैसी हथियार) से पीटा। उसकी सहेली बेहोश हो गई। आरोपियों ने उसके छोटे बेटे और पति के दोस्त को बांधकर बाथरूम में बंद कर दिया। इसके बाद तीन आरोपियों ने उसे पास के मकान में खींचकर गैंगरेप किया। उन्होंने घर से 25,000 रुपये कैश और दो मोबाइल फोन भी लूट लिए। उसी दौरान पीड़िता का बड़ा बेटा, जो बाहर था, उसने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर मदद मांगी। कुछ ही देर में एक होयसला पेट्रोलिंग वैन मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुके थे। पुलिस ने घायल पीड़िता को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं से उसने अपनी शिकायत दर्ज कराई। मदनायकनहल्ली पुलिस थाने ने मामला दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 70 (सामूहिक दुष्कर्म) सहित अन्य धाराओं में जांच शुरू की। पुलिस ने 48 घंटे के भीतर जांच आगे बढ़ाते हुए कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया। बुधवार रात को नवीन, कार्तिक और ग्लानी को गिरफ्तार किया गया, जबकि गुरुवार दोपहर तक सुयोग, जंगली पृथ्वी और सीना को भी हिरासत में ले लिया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुख्य आरोपी मिथुन घटना का मास्टरमाइंड है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि मिथुन का पीड़िता से पुराना विवाद था और वह उसे “सबक सिखाने” की धमकी देता रहता था। उसी ने अपने साथियों को साथ लेकर पुलिस बनकर हमला करने की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार, तीन आरोपियों ने दुष्कर्म किया जबकि दो अन्य ने पीड़िता से मारपीट कर लूटपाट की। सभी आरोपियों और पीड़िता के मेडिकल परीक्षण कराए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद घटना के और भी पहलू साफ होने की उम्मीद है। फिलहाल, पुलिस ने सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और मुख्य आरोपी मिथुन की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है।

लापरवाही का शिकार ग्रामीण: लाखों खर्च के बाद भी सड़क बेहाल, ठेकेदार को नोटिस

बीजापुर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करोड़ों की योजनाएं गांवों तक बेहतर आवागमन की सुविधा देने के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन उसूर तहसील की बासागुड़ा-कुम्हारपारा सड़क इसका बिल्कुल उल्टा उदाहरण बन गई है। साल 2020 में ठेकेदार आकाश चांडक ने 60 लाख की लागत से 1.60 किमी लंबी मिट्टी-मुरुम सड़क बनाई थी। पांच साल बीतने को हैं लेकिन ठेकेदार ने इस सड़क की एक बार भी मरम्मत नहीं की। नतीजा यह हुआ कि आज यह सड़क पूरी तरह से उबड़-खाबड़ और गड्ढों से भरी खाई में तब्दील हो चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क पर चलना किसी नदी को पार करने से कम नहीं है। जगह-जगह गड्ढे, कटे किनारे और झाड़ियों ने इसे मौत का जाल बना दिया है। आलम यह है कि धरमापुर, मल्लेपल्ली और डल्ला गांव के करीब 1000 ग्रामीण रोजाना इसी सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। पैदल यात्री, बाइक सवार और ट्रैक्टर चालकों के लिए यह सफर किसी चुनौती से कम नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने सड़क निर्माण में शुरुआत से ही लापरवाही बरती और काम अधूरा छोड़ दिया। अब मरम्मत न होने से हालात बदतर हो गए हैं। उनका कहना है कि सड़क पर चलने से ज़्यादा आसान तो खेतों में चलना है। इस मामले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता नवीन कुमार टोंडे और उप अभियंता परमानंद रामटेके ने बताया कि ठेकेदार को 5 अगस्त 2025 को मरम्मत करने के लिए नोटिस भेजा गया है। लेकिन ठेकेदार ने मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया तो विभाग 18 लाख रुपये की वसूली ठेकेदार से करेगा। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ग्रामीणों की पांच साल से चली आ रही परेशानी का जिम्मेदार कौन है? और कब तक ऐसी योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही टिकाऊ साबित होंगी?