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राजौरी में भूस्खलन से सड़क ध्वस्त, मंडी (HP) में मूसलधार बारिश से जनजीवन प्रभावित

राजौरी/शिमला   राजौरी जिले में हाल ही में निर्मित 32 किलोमीटर लंबी कोटरंका-खवास सड़क पिछले दो हफ्तों से लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. 2023-24 की अवधि में पूरी होने वाली यह सड़क कोटरंका उप-मंडल और खवास तहसील के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग का काम करती थी. हालांकि, पिछले 15 दिनों से यह मार्ग पूरी तरह से कटा हुआ है. इससे स्थानीय निवासियों में भारी परेशानी है. इस व्यवधान ने दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. स्थानीय लोगों के अनुसार छात्र स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. बीमार लोगों को चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाना बेहद मुश्किल हो गया है. कई ग्रामीणों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने के लिए 15 से 20 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर होना पड़ रहा है. जमीन धंसने के कारण सड़क पुनर्निर्माण के काम बाधिक है. ये एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. राजौरी जिले के बधाल गांव में रहने वाले जतिंदर शर्मा ने मंगलवार को एएनआई को बताया, 'पिछले 15 दिनों से यहां सड़क बंद है. बाढ़ के कारण सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है. इस सड़क से और भी कई रास्ते जुड़े हैं. इस वजह से बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन की तरफ से कोई भी सड़क की मरम्मत के लिए नहीं आया है. हम अनुरोध करते हैं कि सड़क को बहाल किया जाए.' कुछ हिस्सों में जमीन धंसने से संकट और बढ़ गया है. इससे बड़े इलाके खतरे में पड़ गए हैं. कम से कम सात घर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इनमें से एक दो मंजिला घर अपनी मूल जगह से लगभग 50 मीटर नीचे खिसक गया है. हालांकि ये अभी भी सीधा खड़ा है. ऐसी घटनाओं से निवासियों में व्यापक दहशत फैल गई है. कोटरंका के अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) दिलमीर चौधरी के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. स्थानीय प्रशासन भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए पूर्ण सहयोग प्रदान कर रहा है. राहत और मुआवजा देने के प्रयास सक्रिय रूप से जारी हैं. अधिकारी के अनुसार प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की फाइलें तैयार की जा रही हैं और जल्द ही उन्हें अंतिम रूप दे दिया जाएगा. किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है. इस बीच पुंछ में मेंढर उप-मंडल के कलाबन गांव के लगभग 400 निवासियों को लगातार बारिश के कारण जमीन धंसने से कई घरों में दरारें आने के बाद अस्थायी आश्रयों में स्थानांतरित कर दिया गया है. अधिकारी, एक स्थानीय गैर-सरकारी संगठन के सहयोग से विस्थापित परिवारों को राहत सामग्री और आवश्यक वस्तुएं प्रदान कर रहे हैं. प्रशासन ने कलाबन को असुरक्षित घोषित कर दिया है और निवासियों को अगली सूचना तक वहाँ से निकलने का निर्देश दिया है.

देहरादून के टूरिस्ट हॉटस्पॉट्स में बर्बादी, मौसम का तांडव; PM मोदी और अमित शाह ने की CM धामी से बात

देहरादून  उत्तराखंड में बारिश जमकर कहर बरपा रही है. भारी बारिश की वजह से सहस्त्रधारा में बादल फटने की घटना सामने आई है. अचानक आए सैलाब में कई दुकानें और घर बह गये. इसमें दो लोग लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है. बादल सुबह करीब पांच बजे फटा. SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है.PM मोदी और अमित शाह ने CM धामी से की फोन पर बात, बारिश से पैदा हुई स्थिति की ली जानकारी. आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा, "देहरादून में सहस्त्रधारा और माल देवता तथा मसूरी से भी नुकसान की खबरें मिली हैं. देहरादून में दो से तीन लोग लापता बताए जा रहे हैं. मसूरी में एक व्यक्ति की मौत की खबर मिली है, जिसकी पुष्टि की जा रही है." उन्होंने कहा कि टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं, जबकि 300 से 400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. देहरादून में भारी बारिश हो रही है, जिससे हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. भारी बारिश में देहरादून के पास पुल का हिस्सा भी बह गया. देहरादून-हरिद्वार हाइवे पर फन वैली के पास ये तबाही दिखी. देहरादून में मालदेवता के पास सौंग नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है. ब्रिज तोड़ते हुए नदी बेकाबू रफ्तार से बह रही है. मौसम को देखते हुए पहली क्लास से लेकर 12वीं तक के सभी स्कूलों में आज बंद रहेंगे. ऋषिकेश में भी चंद्रभागा नदी उफान पर है. पानी हाईवे तक आ पहुंचा है. नदी के बहाव में कई गाड़ियां और लोग फंस गये. तीन लोगों को एसडीआरएफ की टीम ने चंद्रभागा नदी से रेस्क्यू किया है. तपकेश्वर महादेव मंदिर के परिसर में 1-2 फीट मलबा जमा हो गया. मंदिर क्षेत्र में भारी क्षति हुई. आईटी पार्क देहरादून के पास सड़कों पर वाहन खिलौनों की तरह बहते नजर आए. दो लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "देहरादून के सहस्त्रधारा में देर रात हुई अतिवृष्टि से कुछ दुकानों को नुकसान पहुंचने की दुःखद सूचना प्राप्त हुई है. जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं. इस सम्बन्ध में निरंतर स्थानीय प्रशासन से संपर्क में हूं और स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहा हूं. ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं." उत्तराखंड में कई इलाकों में रातभर हुई भारी बारिश से सड़कें, मकान और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं तथा मंगलवार तड़के एक पुल बह गया. भारी बारिश के कारण सोंग नदी उफान पर आ गई, जिससे आस-पास के इलाकों में बाढ़ आ गई. सदर के सब-डिवीज़नल मजिस्ट्रेट हरि गिरि ने कहा, "जलस्तर बढ़ रहा है और अभी बहाव बहुत तेज़ है. अभी तक किसी के मरने की सूचना नहीं है। पर्यटक होटलों में ठहरे हुए थे." देहरादून के आईटी पार्क क्षेत्र में जलभराव की खबर है, कई कार्यालयों में पानी घुस गया है, जिससे लोग फंस गए हैं. स्थानीय निवासी ऋतिक शर्मा ने कहा, "मैं सुबह 5:30 बजे से यहां फंसा हुआ हूं. यहां बहुत पानी है. कार कल रात से यहां फंसी हुई है और पानी में डूबी हुई है। पानी दफ्तरों और बेसमेंट में घुस गया है."

AI के साथ समुद्री जासूसी मुश्किल, चीन की नयी खोज ने दुनिया को चौंकाया

बीजिंग चीन तकनीक के क्षेत्र में तेजी से दौड़ रहा है। हाल ही में चीन की अलीबाबा कंपनी ने सबसे तेज और पावरफुल AI मॉडल बनाने का दावा किया। अब चीन में एक रिसर्च हुई है, जिसमें एक डरा देने वाला दावा किया गया है। शोध में बताया गया है कि जल्द ही ऐसा AI सिस्टम आएगा, जो समंदर के भीतर छिपी हुई सबमरीन को खोज लेगा। इसे AI-driven anti-submarine warfare (ASW) नाम दिया गया है। चलिए, जानते हैं कि चीन के अध्ययन में क्या-क्या बातें सामने आई हैं? बचने की संभावना मात्र 5% चाइना हेलीकॉप्टर रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के इंजीनियर मेंग हाओ ने द्वारा की गई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि ASW से पनडुब्बियों के बचने की संभावना मात्र 5% होगी। इसका मतलब ये है कि हर 20 पनडुब्बियों में से केवल एक ही इस प्रणाली से बच पाएगी। यह तकनीक पुराने खोजी तरीकों के मुकाबले में बहुत सटीक साबित हो सकती है। यह समुद्र में एक स्मार्ट कमांडर की तरह काम करती है, जो सोनार, रडार और समुद्र के तापमान जैसे डेटा का उपयोग करके पनडुब्बियों को ढूंढ लेती है। डेटा को इंटीग्रेट कर काम करती है तकनीक साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की मानें तो यह AI तकनीक हेलीकॉप्टरों से गिराए गए Sonar Buyos, पानी के नीचे के सेंसर, रडार और समुद्री के डेटा को जोड़कर समुद्र के नीचे की तस्वीर बनाएगी। यह तेजी से बताएगी कि कहां पर सबमरीन हो सकती है। कंप्यूटर सिमुलेशन में यह प्रणाली 95 प्रतिशत बार पनडुब्बियों को ढूंढने और ट्रैक करने में सफल रही, चाहे वे कितनी भी छिपने की कोशिश करें। भविष्य में और पावरफुल होगी तकनीक सबमरीन लंबे समय से एक पावरफुल हथियार मानी जाती हैं। ये परमाणु हमले कर सकती हैं, खुफिया जानकारी जुटा सकती हैं और बड़े जहाजों को डुबो सकती हैं। इतना सब करने के बावजूद इन्हें पकड़ना मुश्किल था। रिसर्चर्स का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में और बेहतर हो सकती है। यह ड्रोन, जहाज और Underwater Unmannded Vehicles के साथ जुड़कर एक नेटवर्क बना सकेगी। इसे यह AI सिस्टम समय के साथ और स्मार्ट होगा। यह तकनीक पनडुब्बी के मूवमेंट को भी डिकोड कर सकती है, जिससे पनडुब्बी आसानी से नहीं भाग सकेगी। अमेरिका के लिए होगी बड़ी चुनौती अमेरिकी नौसेना के पास 2025 तक लगभग 70 परमाणु पनडुब्बियां हैं, ये समुद्र में बिना शोर किए चुपचाप छिपी रहती हैं। पनडुब्बियां एडवांस ड्रोन भी ले जाने में सक्षम हैं, जिससे इसे खोजने वाले लोग भटकाए जाते हैं। पुरानी तकनीक से ऐसी पनडुब्बियों के बचने की संभावना 85 प्रतिशत तक थी, जो चीन के जहाजों के लिए बड़ा खतरा थी। अब चीन इस तकनीक पर काम करते हुए अमेरिकी पनडुब्बियों के लिए खतरा पैदा कर देगा।

ड्रग्स और शराब की लत बन रही एक्सीडेंट की बड़ी वजह, ड्राइवरों का नियंत्रण खोना चिंताजनक

नई दिल्ली भारत में सड़क हादसे हर साल लाखों लोगों की जान ले रहे हैं. अक्सर कहा जाता है कि तेज रफ्तार, खराब सड़कें हैं या ओवरलोडिंग के कारण ये हादसे हो रहे हैं. लेकिन एम्स ऋषिकेश की नई स्टडी ने कुछ और कारण खोज निकाले हैं, जिस पर गंभीरता से सोचना होगा. इस स्टडी में सामने आया है कि सड़क पर होने वाले आधे से ज्यादा हादसों में शराब जिम्मेदार होती है, वहीं हर पांचवें हादसे में गांजा या ड्रग्स और हर चौथे हादसे में थकान या नींद की झपकी का रोल होता है. क्या कहते हैं आंकड़े एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हुए 383 ड्राइवर पीड़ितों पर रिसर्च में सामने आया कि 57.7% ड्राइवर शराब पीकर गाड़ी चला रहे थे. वहीं 18.6% ने गांजा और दूसरी साइकोट्रॉपिक दवाएं ली थीं. इसके अलावा 14.6% ड्राइवर शराब और ड्रग्स दोनों के असर में थे. 21.7% को दिन में जरूरत से ज्यादा नींद (EDS) की समस्या थी. बाकी 26.6% को थकान और नींद से जुड़ी दिक्कतें थीं. कैसे हुई स्टडी एम्स के न्यूरोसाइकेट्री विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रवि गुप्ता बताते हैं कि एम्स में हमने हर मरीज का ब्लड और यूरिन टेस्ट किया और validated sleep tools से उनकी नींद का पैटर्न समझा. इससे जो नतीजे वो बताते हैं कि भारत में सड़क हादसे केवल सड़क और ट्रैफिक नियमों से जुड़े मुद्दे नहीं हैं बल्कि नशा और नींद की दिक्कतें भी इसमें सीधे जिम्मेदार हैं. झपकी बनी मौत की वजह एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल लाखों हादसे ऐसे होते हैं जिनमें ड्राइवर का झपकी लेना एक बड़ी वजह होती है. परिवहन मंत्रालय के अनुसार 27% एक्सीडेंट ड्राइवर की नींद आने से होते हैं. कई हादसों में ड्राइवर ने खुद माना कि लंबी ड्यूटी और नींद न मिलने से कंट्रोल खो गया. आपको बता दें कि ड्राइवरों ने बातचीत में खुद माना कि ट्रक और बस ड्राइवर कई बार 24–30 घंटे लगातार गाड़ी चलाते हैं, जबकि नियम है कि एक दिन में 8 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं होनी चाहिए. देखा जाए तो नियम-कानून तो हैं, लेकिन जमीनी सच अलग है. नहीं हो रहा नियमों का पालन? परिवहन नियम कहते हैं कि एक ड्राइवर सप्ताह में 45 घंटे से ज्यादा गाड़ी नहीं चला सकता लेकिन निजी कंपनियां इन नियमों का कितना पालन करती हैं, ये किसी से छुपा नहीं है. सच्चाई ये है कि बस और ट्रक मालिक ड्राइवरों से कम से कम 220 से 250 किलोमीटर प्रतिदिन गाड़ी चलवाते हैं. सड़क सुरक्षा परिषद के आंकड़े बताते हैं कि 40 से 45% हादसे थकान और नींद की वजह से होते हैं. नशा और नींद का खतरनाक मेल एम्स ऋषिकेश की स्टडी से स्पष्ट है कि सड़क पर उतरने वाला ड्राइवर अगर नशे में है और थका हुआ है तो हादसा लगभग तय है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी कई बार कह चुके हैं कि ड्राइवरों की थकान और नींद को लेकर कंपनियों और राज्य सरकारों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए. इन नियमों का सड़कों पर कितना पालन हो रहा, ये सोचने वाली बात है. क्यों खास है ये रिसर्च भारत में हर साल 1.35 लाख मौतें और 50 लाख से ज्यादा चोटें सड़क हादसों से होती हैं. WHO के अनुसार निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में सड़क हादसों से मौत का खतरा हाई-इनकम देशों से तीन गुना ज्यादा है. रिसर्च में शामिल रहे डॉ. रवि गुप्ता (AIIMS ऋषिकेश) का कहना है कि नींद और नशे को नजरअंदाज करना, सड़क सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है. ट्रक-बस में ड्राइवर अलर्ट सिस्टम लगाना चाहिए. नशे में गाड़ी चलाने पर लाइसेंस तुरंत रद्द हो. ये कदम उठाने जरूरी व्यावसायिक वाहनों में ड्राइवर ड्यूटी घंटों पर सख्त निगरानी हो. ट्रक और बस ड्राइवरों की नियमित हेल्थ और स्लीप टेस्टिंग भी की जाए. नशे की हालत में ड्राइविंग पर फौरन टेस्ट और कठोर सजा तय हो. कंपनियों की जवाबदेही तय करना, ओवरटाइम कराने पर उन्हें भी दंड मिले.जागरूकता अभियान चले कि नशे या नींद में गाड़ी चलाना हत्या जैसा अपराध है. क्या है ड्राइवरों की असली हालत, कब सोते हैं, कब खाते हैं? लंबे रूट्स पर चलने वाले ट्रक ड्राइवर कई बार 30 से 35 घंटे लगातार गाड़ी चलाते हैं. ढाबों पर झपकी ही उनका आराम है, घर जाने का वक्त साल में मुश्किल से 20–25 दिन मिलता है. कई ड्राइवर खुद मानते हैं कि गांजा पीकर नींद कम आती है, इसलिए गाड़ी चला पाते हैं. लेकिन यही 'जुगाड़' उन्हें एक्सीडेंट की तरफ धकेल देता है.

दिवाली से पहले खुशखबरी! जल्द आएगी PM किसान की अगली किस्त, गलती से न चूके ये प्रक्रिया

नई दिल्ली  देश के किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Yojana) की 21वीं किश्त का इंतजार अब खत्म होने वाला है. सरकार दिवाली से पहले किसानों को बड़ी सौगात देने की तैयारी कर रही है. लेकिन इस बार कुछ किसानों के लिए फिजिकल वेरिफिकेशन करवाना अनिवार्य कर दिया गया है. यदि किसान वेरिफिकेशन नहीं कराते हैं, तो उनकी 21वीं किश्त रोक दी जाएगी और वेरिफिकेशन पूरी होने तक उन्हें लाभ नहीं मिलेगा. नया अपडेट क्या है? सरकार ने योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर अपडेट जारी किया है. इसके अनुसार, 1 फरवरी 2019 के बाद जमीन खरीदने या अधिकार लेने वाले किसान, साथ ही जिन परिवारों में पति-पत्नी या 18 वर्ष से अधिक के युवा सदस्य योजना का लाभ ले रहे हैं, उन्हें फिजिकल वेरिफिकेशन करवाना अनिवार्य है. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि योजना का लाभ वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे और गलत लाभ लेने वालों पर रोक लगाई जा सके. पिछली किश्त और राशि पिछली 20वीं किश्त 2 अगस्त 2025 को जारी की गई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से इस किश्त का शुभारंभ किया था. इस दौरान 9.71 करोड़ किसानों के खातों में ₹20,500 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई थी. इस बार 21वीं किश्त की राशि भी इसी तर्ज पर किसानों के खातों में भेजी जा सकती है. अगले महीने की संभावना पिछले वर्षों के आंकड़ों को देखें तो सरकार अगस्त से नवंबर के बीच किश्त जारी करती रही है. 2024 में 18वीं किश्त 5 अक्टूबर, 2023 में 19वीं किश्त 15 नवंबर और 2022 में 17वीं किश्त 17 अक्टूबर को जारी हुई थी. इस साल दिवाली 20 अक्टूबर को है, इसलिए विशेषज्ञों का अनुमान है कि सरकार 21वीं किश्त अक्टूबर के पहले या मध्य सप्ताह में जारी कर सकती है. बिहार चुनाव और संभावित तारीख इस साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनाव आयोग सितंबर के अंत तक तारीखें घोषित कर सकता है. ऐसे में केंद्र सरकार कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने से पहले किसानों के खातों में राशि भेज सकती है. इसका मतलब है कि 21वीं किश्त अक्टूबर के पहले या मध्य में किसानों के खातों में जमा हो सकती है, जिससे किसानों को समय पर लाभ मिल सके. किसानों से आग्रह सरकार ने किसानों से आग्रह किया है कि यदि उनका वेरिफिकेशन अभी बाकी है, तो वे जल्द से जल्द इसे पूरा कर लें. इससे न केवल उनकी किश्त समय पर आएगी बल्कि योजना का लाभ सही और वास्तविक किसानों तक सुनिश्चित होगा. कुल मिलाकर, दिवाली से पहले किसानों के लिए यह एक बड़ी राहत साबित हो सकती है. फिजिकल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करने वाले किसान 21वीं किश्त का लाभ समय पर प्राप्त करेंगे, जबकि बाकी किसानों के लिए यह किश्त तब तक रोकी जाएगी जब तक उनकी जानकारी का सत्यापन नहीं हो जाता.

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल, Wholesale Inflation में आई मजबूती

नई दिल्ली  बरसात के मौसम में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ जाने की वजह से देश में थोक महंगाई दर मजबूत होकर 0.52% के स्तर पर पहुंच गई है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति 0.52% दर्ज की गई. पिछले दो महीनों तक नकारात्मक रहने के बाद यह दर अब सकारात्मक हो गई है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सीमित स्तर की थोक महंगाई स्वस्थ मानी जाती है, क्योंकि यह उद्योगों और व्यवसायों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करती है. खाद्य और विनिर्माण वस्तुओं ने बढ़ाई दर मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में थोक महंगाई दर बढ़ने की मुख्य वजह खाद्य उत्पादों, गैर-खाद्य वस्तुओं, अन्य विनिर्माण उत्पादों, गैर-धात्विक खनिजों और परिवहन उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी रही. मंत्रालय ने साफ किया कि थोक मुद्रास्फीति में यह उछाल मुख्य रूप से रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों में वृद्धि का परिणाम है. खुदरा मुद्रास्फीति में भी हल्की बढ़ोतरी पिछले सप्ताह जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के अनुसार, अगस्त 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति 2.07% रही, जो जुलाई के मुकाबले 46 आधार अंक अधिक है. हालांकि, यह वृद्धि सीमित है और अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 2-6% की सीमा के भीतर है. जुलाई 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 1.55% पर आ गई थी, जो जून 2017 के बाद से सबसे निचला स्तर था. खाद्य मुद्रास्फीति का असर उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) के अनुसार, अगस्त 2025 में खाद्य मुद्रास्फीति -0.69% रही. ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर -0.70% और शहरी क्षेत्रों में -0.58% दर्ज की गई. हालांकि, सब्जियों, मांस, मछली, तेल, वसा और अंडों की कीमतों में वृद्धि ने हेडलाइन मुद्रास्फीति को ऊपर धकेला. मंत्रालय ने बताया कि अगस्त में मुद्रास्फीति दर सबसे ज्यादा केरल, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और तमिलनाडु में रही. आरबीआई की नीतियां और भविष्य का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार 11वीं बार अपनी बेंचमार्क रेपो दर को 6.5% पर स्थिर रखा है. फरवरी 2025 में लगभग पांच साल बाद पहली बार दर में कटौती की गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि हाल ही में लागू हुए जीएसटी सुधार और स्थिर मौद्रिक नीतियों ने महंगाई को नियंत्रण में रखने में अहम भूमिका निभाई है. आरबीआई ने घटाया मुद्रास्फीति अनुमान अगस्त 2025 में थोक और खुदरा दोनों मुद्रास्फीति में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है. हालांकि, यह वृद्धि प्रबंधनीय सीमा में है और अर्थशास्त्री इसे अस्थायी मानते हैं. वर्ष 2025-26 के लिए आरबीआई ने मुद्रास्फीति का अनुमान 4% से घटाकर 3.7% कर दिया है. इससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में महंगाई पर काबू पाने और मूल्य स्थिरता बनाए रखने की संभावना मजबूत है.

2025 का अंतिम सूर्य ग्रहण: तारीख, समय और भारत में दृश्यता की पूरी जानकारी

21 सितंबर को ज्योतिषीय घटना घटित होने जा रही है. दरअसल, इस दिन साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, जो कि भारत में दृश्यमान नहीं होगा. लेकिन, संयोग की बात तो यह है कि साल का आखिरी सूर्य ग्रहण के दिन पितृ पक्ष का समापन होगा और सर्वपितृ अमावस्या का संयोग बनेगा. साथ ही, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अमावस्या तिथि पर लगने जा रहा यह ग्रहण कन्या और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा.  खगोलविदों के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब लगता है  जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है, जिससे सूर्य की रोशनी आंशिक रूप या पूर्णरूप से छिप जाती है. इससे पृथ्वी पर एक छाया बनती है, जो पूर्ण, आंशिक या वलयाकार ग्रहण के रूप में दिखाई देती है. तो अब जानते हैं कि क्या इस सूर्य ग्रहण का प्रभाव भारत पर पड़ेगा और क्या इसका सूतक काल मान्य होगा.  सूर्य ग्रहण की सही टाइमिंग और अवधि  भारतीय समय के अनुसार, 21 सितंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण रात 11 बजे शुरू होगा और इसका समापन देर रात 3 बजकर 23 मिनट पर होगा. इस ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे से ज्यादा की होगी.   किन किन जगहों पर दिखेगा सूर्य ग्रहण साल का यह अंतिम सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा. बल्कि, यह ग्रहण दक्षिणी गोलार्ध के कई हिस्सों में दिखेगा जिसमें अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिमी प्रशांत महासागर, न्यूजीलैंड और अफ्रीका के कई हिस्से शामिल होंगे, जहां यह ग्रहण नजर आने वाला है.  क्या साल के आखिरी सूर्य ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा? ज्योतिषियों के अनुसार, भारत में यह ग्रहण दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए इसका धार्मिक और आध्यात्मिक प्रभाव भारत में नहीं पड़ेगा. इसका मतलब है कि भारत में रहने वाले लोगों के लिए यह दिन सामान्य होगा और उनकी दिनचर्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण का प्रभाव केवल उन स्थानों पर पड़ता है जहां यह दृश्यमान होता है.  सूर्य ग्रहण की सावधानियां  सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ विशेष सावधानियों से बचना चाहिए. जिसमें है कि कुछ खाना नहीं चाहिए, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। लेकिन चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए इन नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं है. इस समय का उपयोग ईश्वर की उपासना और ध्यान के लिए किया जा सकता है. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना या दान का संकल्प करना अच्छा माना जाता है.  सूर्य ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए क्या करें?  सूर्य ग्रहण के दौरान अपने गुरु मंत्रों और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें. साथ ही, इस दिन ग्रहण के मोक्ष काल (ढलते हुए ग्रहण) में दान जरूर करें जैसे- गुड़, अन्न यानी आटा-गेहूं या फिर तांबे के बर्तनों का दान करें. इस दौरान ये सब दान करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है. 

भारतीय सेना की मालगाड़ी पहली बार पहुंची कश्मीर, वापसी में लाएगी सेब – विकास और भरोसे का संकेत

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर में एक ऐतिहासिक घटना हुई है. उद्धमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) पर भारतीय सेना की पहली विशेष मालगाड़ी सफलतापूर्वक चली. 12-13 सितंबर 2025 को यह गाड़ी बीडी बारी से अनंतनाग पहुंची. इसमें 753 मीट्रिक टन एडवांस्ड विंटर स्टॉकिंग (एडब्ल्यूएस) सामान लदा था, जो सेना की इकाइयों के लिए था. यह कदम सेना की सर्दियों की तैयारी में क्रांति लाएगा. यूएसबीआरएल क्या है और इसका महत्व? यूएसबीआरएल भारत का एक महत्वाकांक्षी रेल परियोजना है, जो जम्मू को कश्मीर घाटी से जोड़ती है. इसकी कुल लंबाई 272 किलोमीटर है. यह हिमालय के कठिन इलाके से गुजरती है. इसमें दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल चेनाब ब्रिज (359 मीटर ऊंचा) और भारत का सबसे लंबा रेल सुरंग पीर पंजाल (11.215 किमी) शामिल हैं. यह परियोजना 2002 में शुरू हुई और जून 2025 में पूरी तरह चालू हो गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को इसकी शुरुआत की, जब वंदे भारत ट्रेन को फ्लैग ऑफ किया गया. इस रेल लिंक से कश्मीर घाटी बाकी भारत से जुड़ गई, जो सड़कों पर भूस्खलन या बाढ़ से होने वाली परेशानियों को कम करेगी. अगस्त 2025 में पहली मालगाड़ी अनंतनाग पहुंची, जो सीमेंट ले जा रही थी. लेकिन भारतीय सेना की यह गाड़ी पहली विशेष मालगाड़ी है, जो सैन्य और सिविल उपयोग का उदाहरण है. सेना की पहली विशेष मालगाड़ी: क्या लाया और क्यों खास? 12-13 सितंबर 2025 को चली यह मालगाड़ी बीडी बारी (कटरा के पास) से अनंतनाग पहुंची. इसमें 753 मीट्रिक टन एडब्ल्यूएस सामान लदा था, जैसे राशन, ईंधन, दवाइयां और अन्य जरूरी चीजें. ये सामान जम्मू-कश्मीर में तैनात सेना की इकाइयों के लिए था, ताकि सर्दियों में बर्फीले हिमालयी इलाके में कोई कमी न हो. पहले सेना सड़कों पर ट्रक से सामान भेजती थी, जो भूस्खलन या बर्फबारी से रुक जाती थी. अब रेल से तेज और सुरक्षित तरीके से स्टॉकिंग होगी. यह सेना की क्षमता विकास का हिस्सा है, जो कठिन इलाकों में ऑपरेशनल तैयारी सुनिश्चित करेगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह कश्मीर को राष्ट्रीय फ्रेट नेटवर्क से जोड़ने का मील का पत्थर है.  सिविल-मिलिट्री फ्यूजन: कश्मीरी सेब का निर्यात यह गाड़ी सिर्फ सैन्य उपयोग की नहीं. वापसी में यह कश्मीरी सेब ले जाएगी, जो भारत के बाकी बाजारों में बेचे जाएंगे. यह ड्यूल-यूज लॉजिस्टिक्स का शानदार उदाहरण है. कश्मीरी किसान पहले भूस्खलन या बाढ़ से सड़कें बंद होने पर भारी नुकसान उठाते थे. अब रेल से उनका फल तेजी से बाजार पहुंचेगा, जिससे आर्थिक राहत मिलेगी. यह कदम सेना की राष्ट्र-निर्माण में भूमिका दिखाता है. सेना न सिर्फ रक्षा करती है, बल्कि कश्मीर के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी योगदान दे रही है. रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का सैन्य और सिविल उपयोग से क्षेत्र की लचीलापन, कनेक्टिविटी और समृद्धि बढ़ेगी. परियोजना से 5 करोड़ से ज्यादा मैन-डे रोजगार पैदा हुए हैं. यूएसबीआरएल के फायदे: कश्मीर के लिए नया दौर यह रेल लिंक कश्मीर को बदल देगी. पहले कश्मीर घाटी रेल से अलग-थलग थी, लेकिन अब पैसेंजर ट्रेनें (जैसे वंदे भारत) और मालगाड़ियां चलेंगी. इससे फल, हस्तशिल्प और अन्य सामान सस्ते में बाजार पहुंचेंगे. सेना के लिए यह सर्दियों की स्टॉकिंग आसान करेगा.  परियोजना में कई चुनौतियां थीं—जैसे हिमालय के युवा इलाके में भूगर्भीय समस्याएं. लेकिन सुरंगों में वेंटिलेशन और फायरफाइटिंग सिस्टम लगाकर सुरक्षा सुनिश्चित की गई. अब कश्मीर की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. Srinagar से रवाना हुई पहली  Rapid Cargo ट्रेन, इतने समय में तय करेगी Delhi तक का सफर  आज श्रीनगर से पहली माल ढुलाई ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना की गई है।  कश्मीर की अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए LG Manoj Sinha ने सोमवार को नौगाम रेलवे स्टेशन से कश्मीर और नई दिल्ली के बीच संयुक्त पार्सल उत्पाद-रैपिड कार्गो सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह नई पार्सल ट्रेन सेवा विशेष रूप से बागवानी उत्पादों के त्वरित परिवहन में मददगार साबित होगी और क्षेत्र के फल उत्पादकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आएगी।  मैं इस पहल के लिए रेलवे का आभारी हूँ।" उन्होंने कहा, "हमने देखा है कि भौगोलिक कारणों और खराब मौसम की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग कई बार अवरुद्ध हो जाते हैं। इस बंद होने से जल्दी खराब होने वाले सामानों को नुकसान होता है। रेलवे पार्सल सेवाओं की शुरुआत इस समस्या के समाधान की दिशा में एक बड़ी छलांग है।"   इस बीच, रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पार्सल सेवा बडगाम और आदर्श नगर, नई दिल्ली के बीच चलेगी, जिसका जम्मू के बारी ब्राह्मणा में एक निर्धारित ठहराव होगा। इस ट्रेन में 23-23 टन क्षमता वाले आठ पार्सल कोच हैं और शुरुआत में ये सेब और अखरोट ले जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि इस सुविधा से रसद व्यवस्था सुचारू होने, समय पर माल लदान और परिवहन घाटे में कमी आने की उम्मीद है। पहली ट्रेन ₹2.5 करोड़ मूल्य के फल लेकर 24 घंटे के भीतर दिल्ली पहुंचेगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इसी तरह की 15 कोच वाली वीपी ट्रेन जल्द ही अनंतनाग से फल, खासकर सेब ले जाने के लिए चलेगी। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल न केवल कश्मीर के लिए, बल्कि पूरे जम्मू और कश्मीर क्षेत्र और भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण है।

इजराइल-गाजा संघर्ष तेज़, नेतन्याहू ने जताया अमेरिका पर भरोसा, कतर ने उठाई सज़ा देने की मांग

यरूशलम: इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने  को कहा कि शीर्ष अमेरिकी राजनयिक मार्को रुबियो की इजराइल यात्रा ने सहयोगियों के बीच संबंधों की मजबूती को दिखाया है. यह बात कतर में हमास नेताओं पर हुए अभूतपूर्व इजराइली हमले की व्यापक आलोचना के कुछ दिनों बाद कही गई है. गाजा युद्ध विराम वार्ता में अमेरिकी सहयोगी और प्रमुख मध्यस्थ पर हुए हमले ने अरब और मुस्लिम नेताओं को दोहा में एकजुटता दिखाने के लिए इकट्ठा होने के लिए प्रेरित किया है. यहां कतर के प्रधानमंत्री ने दुनिया से "दोहरे मानदंडों" को त्यागने और इजराइल को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया. अमेरिकी नेता डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के लिए इजराइल की कड़ी आलोचना की, और रुबियो ने वॉशिंगटन रवाना होने से पहले पत्रकारों के सामने स्वीकार किया कि राष्ट्रपति इससे "खुश नहीं" थे. साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि इस हमले से "इजराइलियों के साथ हमारे संबंधों की प्रकृति में कोई बदलाव नहीं आएगा." फिर भी, इस हमले ने गाजा में युद्ध विराम सुनिश्चित करने के प्रयासों पर नए सिरे से दबाव डाला है, और रुबियो ने स्वीकार किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल को इसके प्रभाव के बारे में "बात करनी होगी." नेतन्याहू ने इस अभियान का बचाव किया है. इसमें हमास के अधिकारी एक नए अमेरिकी युद्ध विराम प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए थे. साथ ही ये कहा कि समूह के नेताओं को मारने से गाजा युद्ध को समाप्त करने में "मुख्य बाधा" दूर हो जाएगी. एएफपी संवाददाता के अनुसार,  को रुबियो ने नेतन्याहू और इजराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हुकाबी के साथ यरुशलम की पवित्र पश्चिमी दीवार पर प्रार्थना की. नेतन्याहू ने बाद में कहा कि इस यात्रा से पता चलता है कि इजराइली-अमेरिकी गठबंधन "पश्चिमी दीवार के उन पत्थरों जितना ही मजबूत और टिकाऊ है जिन्हें हमने अभी छुआ है." उन्होंने आगे कहा कि रुबियो और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में, "यह गठबंधन पहले कभी इतना मजबूत नहीं रहा." रुबियो की नेतन्याहू सहित अधिकारियों के साथ मुख्य बैठकें आज सोमवार को होंगी, उसके बाद मंगलवार को रवाना होंगे. उनकी यह यात्रा  कतर में अरब और मुस्लिम नेताओं के आपातकालीन शिखर सम्मेलन के साथ मेल खाती है, जिसके प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने  को एक तैयारी बैठक को संबोधित किया था. उन्होंने कहा, "समय आ गया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय दोहरे मापदंड अपनाना बंद करे और इज़राइल को उसके द्वारा किए गए सभी अपराधों के लिए दंडित करे." उन्होंने आगे कहा कि गाजा में इजराइल का "विनाश का युद्ध" सफल नहीं होगा. "इजराइल को जारी रखने के लिए जो चीज प्रोत्साहित कर रही है… वह है उसकी चुप्पी, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की उसे जवाबदेह ठहराने में असमर्थता." बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद, इजराइल ने हाल के दिनों में इस क्षेत्र के सबसे बड़े शहरी केंद्र, गाजा शहर पर कब्जा करने के प्रयास तेज कर दिए हैं. उसने निवासियों को शहर खाली करने के लिए कहा है और कई ऊंची इमारतों को उड़ा दिया है, जिनका इस्तेमाल हमास कर रहा है. अगस्त के अंत तक, संयुक्त राष्ट्र का अनुमान था कि शहर और उसके आसपास के इलाकों में लगभग 10 लाख लोग रह रहे थे, जहां उसने अकाल की घोषणा की है. इसके लिए इजराइली सहायता प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराया है. एएफपी की तस्वीरों में वाहनों और पैदल लोगों का एक समूह नष्ट इमारतों के वीरान परिदृश्य से होते हुए गाजा शहर से दक्षिण की ओर भागता हुआ दिखाई दे रहा है. गाजा शहर की निवासी 20 वर्षीय सारा अबू रमदान ने कहा, "हम लगातार गोलाबारी और शक्तिशाली विस्फोटों के बीच लगातार आतंक में जी रहे हैं. इन रॉकेटों में इतनी बड़ी मारक क्षमता क्यों है? उनका लक्ष्य क्या है? हम यहां मर रहे हैं, हमारे पास शरण लेने के लिए कोई जगह नहीं है… और दुनिया बस देख रही है." गाजा की नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने कहा कि  सुबह से इस क्षेत्र के आसपास इज़राइली हमलों में कम से कम 45 लोग मारे गए हैं. गाजा में मीडिया पर प्रतिबंध और कई इलाकों तक पहुंचने में कठिनाइयों के कारण, एएफपी नागरिक सुरक्षा एजेंसी या इजराइली सेना द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरणों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पा रहा है. कतर के पीएम की दुनिया से गुहार, इजराइल को दंडित करें, डबल स्टैंडर्ड छोड़ें कतर के प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से "दोहरे मानदंडों" को खारिज करने और इजराइल को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया. यह बात उन्होंने दोहा में हमास सदस्यों पर अभूतपूर्व इजराइली हमले के जवाब में बुलाई गई एक आपातकालीन शिखर बैठक की पूर्व संध्या पर कही. अमेरिका के एक सहयोगी द्वारा दूसरे देश की धरती पर किए गए इस घातक हमले ने आलोचनाओं की लहर पैदा कर दी. इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फटकार भी शामिल है, जिन्होंने समर्थन जताने के लिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो को इजराइल भेजा. सोमवार को अरब और इस्लामी नेताओं की आपातकालीन बैठक खाड़ी देशों के बीच एकता का एक स्पष्ट प्रदर्शन होगी और इजराइल पर और दबाव बनाने की कोशिश करेगी, जो पहले से ही गाजा में युद्ध और मानवीय संकट को समाप्त करने के लिए बढ़ती मांगों का सामना कर रहा है. कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने रविवार को एक तैयारी बैठक में कहा, "समय आ गया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय दोहरे मापदंड अपनाना बंद करे और इजराइल को उसके द्वारा किए गए सभी अपराधों के लिए दंडित करे." उन्होंने आगे कहा कि गाजा में इजराइल का "विनाश का युद्ध" सफल नहीं होगा. "इजराइल को जारी रखने के लिए जो चीज प्रोत्साहित कर रही है… वह है उसकी चुप्पी, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की उसे जवाबदेह ठहराने में असमर्थता." सोमवार के शिखर सम्मेलन में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन के शामिल होने की उम्मीद है. फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास रविवार को दोहा पहुंचे. यह देखना बाकी है कि सऊदी अरब के वास्तविक शासक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस बैठक में शामिल होंगे या नहीं, हालांकि उन्होंने इस हफ़्ते की शुरुआत में पड़ोसी देशों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए कतर का दौरा किया था. कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी के अनुसार, … Read more

सफाई पर सवाल उठे तो कमिश्नर उतरे मैदान में, फुटपाथ पर बैठकर खाया खाना

बेंगलुरु सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद ग्रेटर बेंगलुरु में फुटपाथ सुधार अभियान ने अनोखा मोड़ ले लिया. जिस जगह पर कुछ दिन पहले कनाडाई नागरिक ने फुटपाथ की बदहाल हालत पर शिकायत की थी, वहीं अब बेंगलुरु सेंट्रल बीबीएमपी कमिश्नर राजेंद्र चोलन बैठकर नाश्ता करते दिखे. क्या है पूरा मामला? दरअसल, कनाडा में रहने वाले एक शख्स ने हाल ही में एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि बेंगलुरु की सड़कों पर 1.5 किलोमीटर पैदल चलना भी मुश्किल है. यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा में आ गया. वॉलंटियर्स के साथ मिलकर साफ किया फुटपाथ वायरल वीडियो के बाद बीबीएमपी हरकत में आया. कमिश्नर राजेंद्र चोलन ने प्राइवेट वॉलंटियर्स के साथ मिलकर मैजेस्टिक इलाके में फुटपाथ साफ कराने का अभियान शुरू किया. सफाई के बाद उन्होंने खुद उसी जगह पर बैठकर स्नैक्स खाए, मानो यह संदेश देने के लिए कि अब यहां न केवल पैदल चला जा सकता है बल्कि बैठकर आराम से नाश्ता भी किया जा सकता है. यही नहीं, जिस कनाडाई नागरिक ने शुरुआत में वीडियो बनाया था, उसे भी वापस उसी जगह लाया गया. इस बार उसने एक और वीडियो रिकॉर्ड किया और फुटपाथ की सुधरी हुई हालत की तारीफ की.