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जिंदा छूटे हमास के नेता, इजरायल का नया सख्त संदेश

इजरायल  अगर बच गए होंगे तो अगली बार निशाना बनाया जाएगा… ये शब्द अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर के हैं। उन्होंने मंगलवार देर रात फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि कतर पर हवाई हमले में अगर हमास के नेता नहीं मरे, तो अगली बार हम सफल होंगे। उन्होंने आगे कहा कि इस हमले की आलोचना होगी, लेकिन हम इससे उबर जाएंगे। बता दें कि इजरायल ने गाजा में संघर्ष विराम के अमेरिकी प्रस्ताव के बीच मंगलवार को कतर में हमास नेतृत्व को निशाना बनाकर हमला किया। इसके बाद हमास ने बयान जारी कर कहा कि इजरायली हमले में उसके शीर्ष नेता बच गए, लेकिन निचले स्तर के पांच सदस्य मारे गए। हमास ने क्या कहा? हमास ने अपने बयान में कहा कि उसके शीर्ष नेता हमले में बच गए, लेकिन पांच निचले स्तर के सदस्य मारे गए, जिनमें गाजा के लिए हमास के नेता और प्रमुख वार्ताकार खलील अल-हय्या का बेटा भी शामिल है। कतर के गृह मंत्रालय ने बताया कि हमले में कतर के आंतरिक सुरक्षा बल का एक सदस्य मारा गया और कई अन्य घायल हुए। हमास के बयान के बाद इजरायली राजदूत ने कहा कि जो बच गए, वे अगली बार मारे जाएंगे। वाइट हाउस का बयान इस बीच वाइट हाउस ने कहा कि इजरायल ने कतर में हमला करने से पहले अमेरिका को सूचित कर दिया था। अमेरिका ने कतर को भी इसकी जानकारी दी थी। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने पत्रकारों से कहा कि पश्चिम एशिया के लिए अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने कतर को हमले के बारे में आगाह किया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण घटना' मानते हैं, जो क्षेत्र में शांति को बढ़ावा नहीं देगी। लेविट ने बताया कि ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात कर अपनी चिंताएं और विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त किए हैं। 7 अक्टूबर 2023 से जारी है संघर्ष गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए हमले के बाद शुरू हुए युद्ध में हमास को कई बड़े झटके लगे हैं, फिर भी यह संगठन गाजा में मौजूद है। लंबे समय से रुकी हुई युद्धविराम वार्ता का भविष्य अब और अनिश्चित हो गया है, क्योंकि इजरायल गाजा शहर पर कब्जे के लिए बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। इस हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई है और इजरायल के भीतर भी उन लोगों ने विरोध किया है, जो शेष बंधकों की जान को खतरे में देख रहे हैं।  

बिहार में विकास को रफ्तार: हाईवे चौड़ा होगा, नई रेल लाइन से बढ़ेगा कनेक्टिविटी

नई दिल्ली मोदी सरकार ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट सिंगल रेलवे लाइन सेक्शन (177 किलोमीटर) के दोहरीकरण को मंजूरी दी है। इसकी कुल लागत 3,169 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, बिहार के मोकामा-मुंगेर नेशनल हाईवे को चार लेन करने की परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। तीन साल में दोनों प्रोजेक्ट्स पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बुधवार को पीएम मोदी के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "इसमें 3,169 करोड़ रुपये का निवेश होगा। यह बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण परियोजना भी है। अगर हम इस परियोजना को मानचित्र पर देखें, तो यह बिहार से शुरू होकर रामपुरहाट में झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ती है। अभी चलने वाली ज्यादातर ट्रेनें भागलपुर से मालदा टाउन और रामपुरहाट होते हुए हावड़ा जाती हैं।'' उन्होंने आगे बताया कि इस दोहरीकरण के बाद, कई ट्रेनें भागलपुर से दुमका और वहां से सीधे रामपुरहाट जा सकेंगी। कई पैसेंजर ट्रेनें, मेल एक्सप्रेस ट्रेनें इससे होकर गुजर सकेंगी और यह देवघर तीर्थस्थल को भी जोड़ती है। एक तरह से, दक्षिण बिहार को कोलकाता से जिस कनेक्टिविटी की ज़रूरत है, वह इस परियोजना से पूरी हो जाती है।  

यूरोपीय यूनियन की कड़ी तैयारी: क्या इजरायल पर लगेगा आर्थिक और राजनीतिक शिकंजा?

स्ट्रासबर्ग यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इजरायल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह गाजा में चल रहे युद्ध के कारण इजरायल पर प्रतिबंध लगाने और आंशिक व्यापार निलंबन की मांग करने की योजना बना रही हैं। वॉन डेर लेयेन ने आगे बताया कि आयोग 'अगले महीने एक फिलिस्तीनी दानदाता समूह बनाएगा', जिसका एक हिस्सा गाजा के भविष्य के पुनर्निर्माण पर ध्यान देगा। उन्होंने कहा कि गाजा की घटनाओं और बच्चों व परिवारों की पीड़ा ने विश्व की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संसद की बैठक में उन्होंने कहा कि मानव निर्मित अकाल कभी भी युद्ध का हथियार नहीं होना चाहिए। बच्चों और मानवता के लिए इसे रोकना जरूरी है। वॉन डेर लेयेन की यह टिप्पणी उस दिन आई जब इजरायली सेना ने गाजा शहर के निवासियों को चेतावनी दी थी कि वे उस क्षेत्र को खाली करें, जहां इजरायल हमास का अंतिम गढ़ मानता है और जहां लाखों लोग अकाल की स्थिति में हैं। गाजा शहर को पूरी तरह खाली करने की यह चेतावनी पहली बार जारी की गई है। गौरतलब है कि गाजा में युद्ध तब शुरू हुआ जब 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व वाले उग्रवादियों ने 251 लोगों का अपहरण किया और लगभग 1200 लोगों की हत्या की, जिनमें ज्यादातर इजरायली नागरिक थे। गाजा में अभी भी 48 बंधक हैं, जिनमें से लगभग 20 के जीवित होने की संभावना है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायल के जवाबी हमलों में कम से कम 64000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं, हालांकि मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इनमें कितने नागरिक या लड़ाके थे। मंत्रालय के अनुसार, मारे गए लोगों में लगभग आधे महिलाएं और बच्चे थे। प्रमुख शहरों के बड़े हिस्से पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और लगभग 20 लाख फिलिस्तीनियों में से 90 फीसदी विस्थापित हो गए हैं।  

पति ने कहा था बेटा करेगा नाम रोशन… 62 साल बाद मां के सामने सच हुई बात

नई दिल्ली  एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन देश के नए उपराष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्होंने इंडिया अलायंस के बी सुदर्शन रेड्डी को हराया है। सीपी राधाकृष्णन की जीत से उनकी मां समेत पूरा परिवार काफी खुश हैं। उनकी मां जानकी अम्मल ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे का नाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के नाम पर रखा था। उन्होंने बताया कि जब उनके बेटे राधाकृष्णन का जन्म हुआ, तब देश के तत्कालीन राष्ट्रपति राधाकृष्णन पद पर थे और उनकी तरह एक शिक्षक भी थे। उन्होंने अपने बेटे का नाम पूर्व राष्ट्रपति की स्मृति में रखा। '62 साल बाद सच हो गई वो बात' न्यूज एजेंसी 'एएनआई' से बात करते हुए, नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की मां जानकी अम्मल ने कहा, "जब मेरे बेटे का जन्म हुआ, तब तत्कालीन राष्ट्रपति राधाकृष्णन पद पर थे। वह एक शिक्षक थे, और मैं भी एक शिक्षिका थी। उनकी स्मृति में, मैंने अपने बेटे का नाम उनके नाम पर रखा। उस समय, मेरे पति ने मेरी ओर देखा और पूछा, "क्या तुम यह नाम इसलिए रख रही हो क्योंकि तुम चाहती हो कि तुम्हारा बेटा एक दिन राष्ट्रपति बने?'' 62 साल बाद, जैसा मेरे पति ने कहा था, वह सच हो गया है। मुझे इस पर बहुत खुशी है।" सीपी राधाकृष्णन के भाई ने क्या कहा? मंगलवार को नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के भाई सीपी कुमारेश ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि राधाकृष्णन अब राज्यसभा के प्रबंधन की ज़िम्मेदारी संभालेंगे। सीपी कुमारेश ने कहा, "मैं बहुत-बहुत खुश हूं। यह बेहद खुशी की बात है कि राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्हें राज्यसभा के कुशल प्रबंधन की जिम्मेदारी लेनी है और वह इसे सफलतापूर्वक निभाएंगे। वह प्रधानमंत्री मोदी के विश्वास को भी कायम रखेंगे।" राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) समर्थित सीपी राधाकृष्णन मंगलवार को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति चुने गए। इंडिया गठबंधन के वोटों में भी लगाई सेंध राधाकृष्णन ने चुनाव में निर्णायक बहुमत हासिल किया, उन्हें न केवल एनडीए सांसदों का, बल्कि विपक्ष के एक वर्ग का भी समर्थन प्राप्त हुआ। मंगलवार को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में राधाकृष्णन ने इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों से हराया। एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को प्रथम वरीयता के 452 वोट मिले, जबकि इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी को प्रथम वरीयता के 300 वोट मिले। 15 वोट अवैध घोषित किए गए।  

खूनी खेल के बीच पाकिस्तान में बवाल: बलूचिस्तान में बंद, सड़कें सूनी

क्वेटा भारत के पड़ोसी देश नेपाल में जेन Z के आंदोलन के कारण सोमवार से ही हिंसा का दौर जारी है। अब तक कई दर्जन लोग पुलिस फायरिंग में मारे जा चुके हैं तो वहीं उपद्रवियों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, पीएम और राष्ट्रपति के निजी आवासों को आग के हवाले कर दिया है। पूर्व पीएम की पत्नी घर में आग लगने से जिंदा जल गईं तो वहीं वित्त मंत्री को सड़कों पर दौड़ाकर मारा गया है। इस बीच एक और पड़ोसी देश पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में भी आज बंद का आयोजन है। बलूचिस्तान के कई राजनीतिक दलों ने आज शटडाउन का ऐलान किया है, जिसका काफी असर दिख रहा है। बड़े शहर सूने दिख रहे हैं और बाजार बंद हैं। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार झोब से ग्वादर तक बड़े हाइवेज और शहर बंद पड़े हैं। यह गुस्सा इसलिए भड़का है क्योंकि पुलिस और एवं अन्य सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर रेड मारी हैं। इस दौरान कई राजनीतिक दलों के नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। इससे गुस्सा भड़क गया है। फिलहाल बलूचिस्तान में पाकिस्तानी प्रशासन ऐक्टिव है और करीब 100 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इन लोगों को सारियाब, एयरपोर्ट रोड, बाईपास समेत क्वेटा के कई इलाकों से हिरासत में लिया गया। पुलिस ने जिन लोगों को अरेस्ट किया है, उनमें बलूचिस्तान नेशनल पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ, अवामी नेशनल पार्टी, नेशनल पार्टी, जमात-ए-इस्लामी समेत कई दलों के नेता शामिल हैं। क्वेटा के अलावा भी कई शहरों से नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। जैसे सुराब से बलूचिस्तान नेशनलिस्ट पार्टी के जिला अध्यक्ष और तीन अन्य नेता अरेस्ट हुए हैं। मास्तंग से भी बीएनपी के जिलाध्यक्ष और नेशनल पार्टी के 14 लोगों को पकड़ा गया है। इसके अलावा लोरालाई से सुरक्षा बलों ने 7 नेताओं को पकड़ा है। दुकी में पीटीआई के जिला महासचिव समेत 15 लोग हिरासत में लिए गए हैं। इसके अलावा जियारत, कलात, चमन समेत कई अन्य इलाकों से भी गिरफ्तारियां होने की खबरें हैं। अवामी नेशनल पार्टी का आरोप है कि पुलिस ने सैकड़ों लोगों को अरेस्ट किया है, जिनमें कई सीनियर नेता शामिल हैं। इसी के विरोध में हड़ताल का आयोजन है। अवामी नेशनल पार्टी का कहना है कि बलूचिस्तान के इतिहास में पहली बार इतना सफल शटडाउन हुआ है। आंदोलन में उतरने नेताओं का कहना है कि बंद का सफल आयोजन बताता है कि सरकार की पाबंदियों के जनता कितना खिलाफ है। बलोच यकजेती कमेटी का कहना है कि सरकार का ऐक्शन लोकतंत्र और मानवाधिकार पर हमला है। इस समूह का कहना है कि सरकार लोगों को आतंकवाद से बचाने में फेल रही है। उलटे लोगों पर ही अत्याचार किए जा रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या बलूचिस्तान के लोगों को एक तरफ आतंकवाद और दूसरी तरफ स्टेट टेररिज्म का सामना करना होगा।  

49% बढ़ा हेलिकॉप्टर किराया! केदारनाथ धाम जाने का खर्च अब कितना?

उत्तराखंड  उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने केदारनाथ धाम की हेलिकॉप्टर यात्रा का किराया 49 प्रतिशत बढ़ा दिया है. अगर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) अंतिम अनुमति प्रदान कर देता है तो किराए की नई दरें 15 सितंबर से लागू कर दी जाएंगी. केदारनाथ धाम की हेलिकॉप्टर यात्रा के किराए में UCADA की ओर से की गई ये बढ़ोतरी श्रद्धालुओं के लिए बड़ा आर्थिक झटका है. केदारनाथ धाम यात्रा सीजन की पहली हेली सेवा 15 सितंबर से शुरू की जा सकती है. ऐसे में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से अंतिम अनुमति मिलने के बाद 10 सितंबर से आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर टिकटों की बुकिंग शुरू हो जाएगी. यात्रियों को अब केदारनाथ धाम की हेलिकॉप्टर यात्रा के लिए पहले से करीब चार से पांच हजार रुपए ज्यादा देने होंगे. सुरक्षा को लेकर कई सिफारिशें दी गईं हाल के वर्षों में बद्रीनाथ और गंगोत्री मार्ग पर हेलिकॉप्टर हादसे हुए. हादसों को देखते हुए डीजीसीए ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए जाएं. इसी क्रम में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था. इस समीति की अध्यक्षता गृह सचिव शैलेश बगौली ने की थी. समिति की ओर से हेली सेवाओं की सुरक्षा को लेकर कई सिफारिशें दी गईं थीं. समिति की सिफारिशोंं के आधार पर ही नई व्यवस्था लागू की जा रही है. किराए की जो नई दरें तय की गई हैं, उसके अनुसार, जो श्रद्दालु गुप्तकाशी से केदारनाथ धाम की हेलिकॉप्टर यात्रा करेगा उसको 12,444 रुपए किराया देना होगा. फाटा से 8,900 रुपए किराया देना होगा. इसी तरह सिरसी से 8,500 रुपए का किराया लगेगा. इससे पहले गुप्तकाशी से लगभग 8,500 रुपए और फाटा और सिरसी से लगभग 6,500 रुपए हेलिकॉप्टर से केदारनाथ धाम तक का किराया था. क्यों लिया गया किराया बढ़ाने का फैसला? UCADA के सीईओ आशीष चौहान ने बताया कि आवश्यक हालातों को ध्यान में रखकर किराया बढ़ाने का ये फैसला लिया गया है. यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर इस बार हेलिकॉप्टर सेवाओं में तकनीकी सुधार हो रहे हैं. देहरादून के सहस्त्रधारा और सिरसी में दो कंट्रोल रूम बन रहे हैं. 22 ऑपरेटरों की टीम उड़ानों पर नजर रखेगी. चारों धामों में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन बनाए जाएंगे. इससे सटीक और रियल टाइम मौसम का पता चल सकेगा. इसके अलावा पीटीजी कैमरे, एटीसी, वीएचएफ सेट और सिलोमीटर लगाए जाएंगे. आशीष चौहान ने बताया कि इन सभी उपायों के लिए अतिरिक्त लागत के कारण किराया बढ़ाया गया है.

जनता के भरोसे की नई पहल: गुजरात विधानसभा ने पारदर्शिता विधेयक-2025 पारित किया

अहमदाबाद    प्राधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के मुताबिक विकसित भारत@2047 के लिए विकसित गुजरात के निर्माण के मिशन में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तथा पॉलिसी ड्रिवन गवर्नेंस के चलते गुजरात आज जब विश्वभर के निवेशकों की पहली पसंद बना है, तब ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को वेग देकर अर्निंग वेल-लिविंग वेल की संकल्पना साकार करने का राज्य सरकार का ध्येय है. 15वीं गुजरात विधानसभा के सातवें सत्र के दूसरे दिन उद्योग मंत्री बलवंतसिंह राजपूत ने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सदन में गुजरात जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025 प्रस्तुत किया. सरलता एवं पारदर्शिता के लिए ठोस कदम मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के सरलता एवं पारदर्शिता की ओर एक और ठोस कदम के रूप में पारित हुआ यह जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025 राज्य में कानून के पालन को आसान बनाकर, डिजिटलाइज्ड कर तथा सुयोग्य ढंग से बदलाव लाकर व्यापार सरलता के साथ जीवन जीने की सरलता में भी वृद्धि करने वाला सिद्ध होगा. इतना ही नहीं; न्यायपालिका पर बोझ घटाने में भी यह विधेयक उपयुक्त बनेगा. मंत्री बलवंतसिंह राजपूत ने सदन में इस जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025 की पृष्ठभूमि रखते हुए कहा कि किसी भी देश में विकास के लिए स्थिर नीतियाँ तथा अच्छा व्यावसायिक माहौल बहुत ही महत्वपूर्ण है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने हमेशा कानूनों को आधुनिक, फ्लेक्सिबल, पीपल फ्रेंड्ली तथा विश्वास आधारित बनाया है. सरकार ने आम नागरिकों तथा उद्योगों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना है. तेज और अच्छे परिणाम का मार्गदर्शन इतना ही नहीं; टेक्नोलॉजी के उपयोग से त्वरित एवं अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकने वाले क्षेत्रों में उनके मार्गदर्शन का भी सरकार ने स्वागत किया है. इसलिए केन्द्र सरकार ने 2023 में जनविश्वास अधिनियम लागू कर कम्प्लायंसेज घटाने का प्रयास किया है. इस दिशा में केन्द्र व राज्य स्तर पर 40 हजार से अधिक कम्प्लायंसेज निर्मूल किए गए. इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहन मिला है. हाल ही में संसद में जनविश्वास विधेयक 2.0 प्रस्तुत हुआ है. राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार के जनविश्वास विधेयक 2.0 का विस्तृत अध्ययन करने के बाद गुजरात जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक-2025 तैयार किया है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल इन्क्रीमेंटल चेंज के लिए नहीं, बल्कि क्वाण्टम जंप के लक्ष्य के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुजरात के सुदृढ़ विकास की डाली गई नींव को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ट्रस्ट बेस्ड गवर्नेंस तथा प्रो-पीपल गवर्नेंस के लिए हमेशा आग्रही रहे हैं. उसे साकार करते हुए राज्य सरकार के 6 विभागों के 11 कानूनों-नियमों के अंतर्गत लगभग 516 प्रावधानों को अपराधमुक्त डिक्रिमिनलाइज्ड करना इस विधेयक का उद्देश्य है. उद्योग मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस विधेयक में कानूनों एवं नियमों में सुझाए गए सुधारों में छोटी (कम गंभीर) भूलों के लिए जहाँ तक संभव हो, कैद की सजा का प्रावधान हटा दिया गया है और फाइन यानी दंड के स्थान पर वित्तीय पैनल्टी के प्रावधान किए गए हैं. उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार के शहरी विकास विभाग, श्रम एवं कौशल विकास तथा रोजगार विभाग, नर्मदा, जल संसाधन, जलापूर्ति एवं कल्पसर विभाग, उद्योग एवं खान विभाग, कृषि, किसान कल्याण एवं सहकारिता विभाग और वित्त विभाग के 11 कानूनों-नियमों के अंतर्गत आने वाले 516 प्रावधानों को अपराधमुक्त करने से सजा के भय के स्थान पर प्रामाणिकता से कानूनों के पालन में मदद मिलेगी. उन्होंने अपराधमुक्त किए गए 516 प्रावधानों का विवरण देते हुए कहा कि एक प्रावधान में कैद की धारा है, जिसे हटाया जा रहा है. 17 प्रावधानों में कैद या फाइन को पैनल्टी में बदला जा रहा है तथा 498 प्रावधानों में फाइन को पैनल्टी में बदला जाएगा. सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास को बढ़ावा इसके अलावा; 8 कानूनों के अंतर्गत उल्लंघन के समाधान की व्यवस्था के साथ अधिकारी द्वारा राशि स्वीकार किए जा सकने के प्रावधान किए गए हैं. उद्योग मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में प्रस्तुत हुए इस विधेयक का उद्देश्य नियमों में सुधारों से भी एक कदम आगे बढ़कर सरकार व नागरिकों के बीच विश्वास को अधिक मजबूत करने का प्रयास है. इस विधेयक का उद्देश्य फाइलिंग विलंब, लाइसेंस रिन्यूल में विलंब टालना, सुरक्षा उल्लंघन संबंधी छोटी भूलों के लिए अनपेक्षित व फौजदारी आरोंपों से मुक्ति देना, न्यायिक प्रणाली पर बोझ घटाकर पैनल्टी आधारित दंड व्यवस्था लाना है. इस विधेयक से विशेषकर स्टार्टअप्स तथा एमएसएमई अधिक सुदृढ़ होंगे और छोटी (कम गंभीर) भूलों के लिए फौजदारी कार्यवाही के अनावश्यक भय के बिना अपने उद्योग-व्यवसायों का और बेहतर ढंग से विकास कर राज्य में एमएसएमई इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाएंगे.  

पोलैंड में बढ़ा तनाव: चार एयरपोर्ट बंद, रूसी ड्रोन हमले के बाद F-16 और F-35 की तैनाती

वारसॉ मध्य यूरोपीय देश पोलैंड ने कई रूसी ड्रोन्स को अपने हवाई क्षेत्र में मार गिराने का दावा किया है। इससे पहले बुधवार की अहले सुबह पोलैंड ने NATO देशों के साथ मिलकर अपने F-16 लड़ाकू विमानों को उतार दिया और राजधानी वारसॉ स्थित अपने मुख्य हवाई अड्डे समेत कुल चार एयरपोर्ट्स बंद कर दिए। यूक्रेन के पश्चिम में स्थित इस देश ने यह कदम तब उठाया है, जब रूस से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन की वायु सेना ने पोलैंड को चेतावनी दी थी कि रूसी ड्रोन्स अब यूक्रेन की सीमा पार कर पोलैंड में घुसने जा रही है। इस सूचना पर पोलैंड की वायु सेना ने आननफानन में अपने लड़ाकू विमानों की तैनाती कर दी और कुछ ही देर बाद रूसी ड्रोन मार गिराए। पोलिश वायु सेना ने कहा है कि बार-बार उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया जा रहा था। इसके बाद यह कदम उठाया गया है। इससे इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। पोलैंड की ऑपरेशनल कमांड ने कहा, "पोलिश और NATO सहयोगियों के लड़ाकू विमान हमारे हवाई क्षेत्र में उड़ान भर रहे हैं, जबकि जमीनी वायु रक्षा और रडार टोही प्रणालियों को उच्चतम स्तर पर तैयार रखा गया है।" CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी वायु सेना ने शुरुआत में कहा था कि रूसी ड्रोन पोलिश क्षेत्र में घुस आए हैं, जिससे ज़मोस्क शहर को खतरा पैदा हो गया है। यूक्रेनी मीडिया ने भी बताया कि एक ड्रोन पश्चिमी पोलिश शहर रेज़्ज़ो की ओर बढ़ रहा है, और कहा कि हवाई अड्डों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। ईरान निर्मित शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल? इस बीच, अमेरिकी प्रतिनिधि जो विल्सन ने आरोप लगाया है कि रूस ने पोलैंड पर हमला करने के लिए ईरान निर्मित शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल किया था। विल्सन ने एक्स पर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा वाइट हाउस में पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नॉरोकी की मेज़बानी के एक हफ़्ते से भी कम समय बाद रूस ईरानी शाहेद ड्रोन से नाटो सहयोगी पोलैंड पर हमला कर रहा है। यह युद्ध जैसा कृत्य है।” उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से कड़ा जवाब देने का आग्रह करते हुए लिखा, "मैं राष्ट्रपति ट्रंप से आग्रह करता हूँ कि वे रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाएं ताकि युद्ध मशीन बना रूस दिवालिया हो जाए।" विल्सन ने आगे कहा कि मॉस्को अब नाटो के धैर्य की परीक्षा ले रहा है। बेलारूस के साथ लगी सीमा बंद करेगा पोलैंड पिछले साढ़े तीन साल से रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग की वजह से पड़ोसी देश भी परेशान हैं। इसी क्रम में पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अब घोषणा की है कि एक दिन बाद यानी गुरुवार को पोलैंड बेलारूस के साथ लगी पूर्वी सीमा को बंद करने जा रहा है। दरअसल, पोलिश ससरकार बेलारूस में चल रहे रूसी सेना के आक्रामक सैन्य अभ्यास से चिंतित है। द गार्डियन के मुताबिक, पोलिश प्रधानमंत्री ने कहा कि यह रूस और बेलारूस की ओर से बढ़ती उकसावे की कार्रवाई का जवाब है। पोलैंड ने मार गिराए रशियन ड्रोन पोलैंड की सशस्त्र सेनाओं ने तत्काल जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने और NATO सहयोगी देशों के विमान तैनात किए. इसके साथ ही भूमि आधारित वायु रक्षा और राडार प्रणाली को हाई अलर्ट पर रखा गया. देश के ऑपरेशनल कमांड ने घोषणा की – ‘पोलैंड की वायु सीमा में अब हमारे और सहयोगियों के विमान सक्रिय हैं और वायु रक्षा और रडार चौकसी अब हाई अलर्ट पर है.’ इसके साथ ही कुछ प्रमुख हवाई अड्डों को भी अस्थायी रूप से बंद भी कर दिया गया. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक पोलिश आर्मी ने कहा है कि रूसी ड्रोन को मार गिराया गया है. ये पहली बार हुआ है कि नाटो देश किसी रूसी एसेट के साथ सीधे-सीधे उलझा हो. सुरक्षा में तैनात हुए अमेरिकी फाइटर जेट पोलैंड के एयरस्पेस में रशियन ड्रोन के पहुंचने के बाद नाटो देश सतर्क हो गए हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच नाटो देश और रूस की ये पहली भिड़ंत हैं, ऐसे में पोलैंड की सुरक्षा के लिए नाटो एयरक्राफ्ट सक्रिय हो चुके हैं. उन्होंने पोलिश एयरस्पेस की सुरक्षा के लिए अमेरिका का एडवांस फाइटर जेट F-35 तैनात कर दिया है. इसी बीच प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने घोषणा की है कि बेलारूस के साथ सभी बॉर्डर क्रॉसिंग बंद की जाएगी, जिसमें रेलमार्ग भी शामिल है. पोलैंड का मानना है कि रूस और बेलारूस की ओर से Zapad‑2025 नाम की बेहद आक्रामक मिलिट्री एक्सरसाइज की वजह से ये हालात पैदा हुए हैं. ऐसे में बॉर्डर क्रॉस करने पर तब तक रोक रहेगी, जब तक खतरा टल नहीं जाता. वहीं पड़ोसी नाटो देशों- लिथुआनिया और लातविया ने भी अपनी सीमाओं की सुरक्षा बढ़ा दी है. पुतिन के इरादे खतरनाक पोलैंड के राष्ट्रपति करोल नवरोकी ने भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुकिन के इरादों को भांपकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, "हमें व्लादिमीर पुतिन के अच्छे इरादों पर भरोसा नहीं है।" नवरोकी ने आगे कहा, “बेशक, हम दीर्घकालिक शांति, स्थायी शांति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो हमारे क्षेत्रों के लिए जरूरी है, लेकिन हमारा मानना ​​है कि व्लादिमीर पुतिन अन्य देशों पर भी आक्रमण करने के लिए तैयार हैं।” बफर स्टेट के रूप में काम कर रहा पोलैंड बता दें कि पोलैंड में अमेरिका और नाटो देशों के प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठान हैं, जो लंबे समय से रूस और शेष पश्चिमी यूरोप के बीच एक बफर स्टेट के रूप में काम करता रहा है। लेकिन अब यह देश भी रूस से खतरा महसूस कर रहा है। यह खतरा तब पैदा हुआ जब रूस ने रातोंरात यूक्रेन पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए। यूक्रेन की वायु सेना ने बताया कि वोलिन और ल्वीव जैसे पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों सहित देश के अधिकांश हिस्से में कई घंटों तक हवाई हमले की चेतावनी जारी रही।

लात-घूसों से पिटने के बाद गायब हुईं नेपाल की विदेश मंत्री आरजू देउबा, मचा हड़कंप

काठमांडू  नेपाल में अराजकता की स्थिति अब भी जारी है और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद भी हिंसक प्रदर्शनों का दौर थमा नहीं है. सोमवार को पुलिस की झड़प में कम से कम 20 प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद नाराज जेन-जी प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को भारी तोड़-फोड़ की और कई मंत्रियों, नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया. इसी क्रम में प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के काठमांडू में बुदानिलकांठा स्थित घर पर हमला किया. प्रदर्शनकारियों ने घर पर मौजूद देउबा और उनकी पत्नी नेपाल की विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा को बुरी तरह पीटा. सेना के हस्तक्षेप के बाद देउबा की जान तो बच गई लेकिन आरजू का कुछ पता नहीं चल पा रहा है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारी आरजू को लात-घूसों से पीटते नजर आ रहे हैं. आरजू हमले में बुरी तरह घायल हुई थीं. उनके पति को तो बचा लिया गया लेकिन उन्हें लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आ पा रही है. फिलहाल यह पता नहीं है कि देश की विदेश मंत्री इस वक्त कहां हैं.  कुछ रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि बुरी तरह पीटने के बाद आरजू को प्रदर्शनकारी अपने साथ ही लेकर चले गए. हालांकि, फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है. पूर्व प्रधानमंत्री को खूब पीटा, चेहरे से बहा खून प्रदर्शनकारियों ने देउबा के आवास में खूब तोड़फोड़ की. फुटेज में दिख रहा है कि देउबा पर हमले के बाद उनके चेहरे से खून बह रहा है. इसके बाद देउबा और आरजू को बचाने के लिए पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे.  फुटेज में देखा जा सकता है कि खून से लथपथ पूर्व प्रधानमंत्री जमीन पर बैठे हैं और सेना के जवान उन्हें घेरे हुए हैं. हालांकि, इस दौरान उनकी पत्नी कहीं नहीं दिख रही हैं. आर्मी के हाथ में नेपाल, पूरे देश में लगा कर्फ्यू नेपाल में आर्मी ने अब कमान संभाल ली है और आंदोलन से निपटने के लिए पूरे नेपाल में कर्फ्यू लगा दिया गया है. कर्फ्यू बुधवार पांच बजे से लेकर गुरुवार सुबह 6 बजे तक रहेगा. सेना ने त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सिंहदरबार जैसे स्थानों पर भी कंट्रोल कर लिया है. नेपाल में जेन-जी का यह आंदोलन 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन के केपी शर्मा ओली सरकार के फैसले से शुरू हु्आ जो कि जल्द ही हिंसक हो गया. इस हिंसा में जान-माल को भारी नुकसान पहुंचा है. भारत स्थिति पर नजर बनाए हुए है और शांति बहाली में मदद कर रहा है.

सेमीकंडक्टर में भारत की बड़ी छलांग! नीति आयोग का गजब का फॉर्मूला आया सामने

नई दिल्ली भारत सेमीकंडक्टर की दुनिया में अपने आप को स्थापित करने के लिए दिन-रात एक कर रहा है। इस साल के आखिर में भारत के पास पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप भी होने वाली है। इसी बीच नीति आयोग ने कहा है कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। इसके लिए 2D मटेरियल्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इनके इस्तेमाल से ना सिर्फ ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि कंप्यूटिंग की स्पीड में भी सुधार हो सकता है। यही कारण है कि नीति आयोग का मानना है कि भारत सेमीकंडक्टर सेक्टर को लीड करने की क्षमता रखता है। चलिए, समझते हैं कि 2D मटेरियल्स क्या हैं और सेमीकंडक्टर निर्माण में इनका क्या महत्व है?  2D मटेरियल्स ऐसी सब्सटेंस है, जो बहुत ही पतली होती है। इसकी मोटाई एक या कुछ एटम जितनी ही होती है। यह एक या कुछ एटम की मोटाई वाली। ये मटेरियल्स इतनी पतली होती है कि इन्हें देखना भी मुश्किल है। कल्पना करें कि आपका स्मार्टफोन कागज की तरह मोड़ा जा सकता है, लेकिन वह टूटता नहीं या फिर ऐसी स्क्रीन जो इतनी पतली हो कि नजर ही ना आए। ये 2D मटेरियल्स बिजली, प्रकाश और ताकत के मामले में आम 3D मटेरियल्स से बहुत अलग होती हैं। इनका इस्तेमाल सेमीकंडक्टर, मेमोरी चिप्स, क्वांटम डिवाइस और फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स में हो सकता है। 2D मटेरियल्स के क्या फायदे? नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 2D मटेरियल्स से बने ट्रांजिस्टर बहुत कम बिजली खर्च करते हैं। ये नॉर्मल ट्रांजिस्टर के मुकाबले पांच से दस गुना कम ऊर्जा लेते हैं। इससे स्मार्टफोन की बैटरी कई दिनों तक चल सकती है। इसके अलावा, ये मटेरियल्स तेज और ठंडे रहने वाले प्रोसेसर यानी सीपीयू और जीपीयू बनाने में मदद कर सकती है। इससे प्रोसेसर गर्म नहीं होंगे और ज्यादा तेजी से काम करेंगे। यह तकनीक AI और बाकी छोटे-छोटे गैजेट्स के लिए बहुत काम की हो सकती है। रिसर्च शुरुआती दौर में है 2D मटेरियल्स में भारत की संभावनाएं कम मानी जाती हैं, लेकिन रिसर्च शुरुआती दौर में है। भारत में वैज्ञानिक अभी इन 2D मटेरियल्स को बनाने और उनके बुनियादी चीजों को समझने पर काम कर रहे हैं। लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन, करने की दिशा में अभी बहुत काम बाकी है। नीति आयोग का मानना है कि अगर भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़े, तो यह तकनीक दुनिया के सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत का परचम फहरा देगी। बिजली की खपत कम होगी 2D मटेरियल्स का इस्तेमाल सिर्फ तकनीक को ही बेहतर बनाएगा, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद होंगी। इनसे बिजली की खपत कम होगी, जिससे ऊर्जा की बचत होगी।नई तरह की कंप्यूटिंग डिवाइस बनाने में मदद मिलेगी, जैसे- छोटे और हल्के AI डिवाइस, पहनने वाले गैजेट्स और क्वांटम प्रोसेसर। यदि भारत इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो वह दुनिया में तकनीकी दौड़ में सबसे आगे हो सकता है।