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भारत-यूरोपीय संघ में बढ़ी साझेदारी: वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति

ब्रसेल्स भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने ब्रसेल्स में आयोजित आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यकारी समूह की 15वीं बैठक में आतंकवाद के सभी स्वरूपों और खासतौर पर सीमा-पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है और इससे निपटने के लिए सतत एवं व्यापक वैश्विक सहयोग की जरूरत है। बैठक की सह-अध्यक्षता यूरोपीय बाहरी कार्य सेवा (ईईएएस) के सुरक्षा एवं रक्षा नीति निदेशक मचीज स्टाडेजेक और भारत के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (आतंकवाद-रोधी) के. डी. देवाल ने की। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, “भारत और ईयू ने संयुक्त राष्ट्र, ग्लोबल काउंटर टेररिज्म फोरम और एफएटीएफ जैसे बहुपक्षीय मंचों में सहयोग की अहमियत पर बल दिया। बैठक के दौरान घरेलू, क्षेत्रीय और वैश्विक खतरे के आकलनों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने कहा कि विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में अस्थिरता और संघर्ष आतंकवाद व उग्रवाद को बढ़ावा देते हैं।” बैठक में आतंकवाद के वित्त पोषण को रोकने, ऑनलाइन कट्टरपंथ की रोकथाम, आतंकियों और आतंकी संगठनों की सूचीबद्धता में सहयोग तथा नई उभरती प्रौद्योगिकियों के दुष्प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भविष्य में आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत करने के रास्तों की पहचान की। अगली बैठक नई दिल्ली में पारस्परिक सहमति से तय तिथि पर होगी। भारत और ईयू ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की। ईयू ने निर्दोष नागरिकों की हत्या पर भारत के प्रति संवेदना व्यक्त की। उल्लेखनीय है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से फोन पर बातचीत की थी। बातचीत में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को जल्द निष्कर्ष तक पहुंचाने और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर के क्रियान्वयन पर सहमति जताई गई। दोनों नेताओं ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश, नवाचार, सतत विकास, रक्षा, सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति का स्वागत किया। पीएम मोदी ने दोनों नेताओं को भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का आमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान में कहा गया, “दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के रूप में भारत और यूरोपीय संघ के बीच भरोसे, साझा मूल्यों और साझा दृष्टिकोण पर आधारित मजबूत संबंध हैं। नेताओं ने वैश्विक मुद्दों से निपटने, स्थिरता लाने और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने में भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी की अहम भूमिका को रेखांकित किया।” बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और जल्द से जल्द शांति एवं स्थिरता बहाल करने के प्रति भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया।

ताइवान ने बढ़ाई सुरक्षा: चीनी दबाव के बीच मिसाइल डिफेंस सिस्टम हुआ सक्रिय

ताइपे  ताइवान जलडमरूमध्य में चीनी सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से अलर्ट हो गया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय (एमएनडी) ने पिछले 24 घंटों में चीन की सैन्य गतिविधियों की निगरानी की सूचना दी। खबर के अनुसार, मंगलवार सुबह 6 बजे से बुधवार सुबह 6 बजे तक द्वीप के आसपास 13 चीनी सैन्य विमान, 6 नौसैनिक जहाज और एक सरकारी जहाज देखे गए। एमएनडी ने बताया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सभी 13 विमान ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा पार करके ताइवान के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में घुस आए। जवाब में ताइवानी सेना ने लड़ाकू जेट भेजे, नौसैनिक जहाज तैनात किए और तटीय मिसाइल रक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर स्थिति पर नजर रखी। खबर के मुताबिक, यह बीजिंग की 'ग्रे जोन रणनीति' का हिस्सा है, जो ताइवान पर उत्तेजक कार्रवाइयों से दबाव बनाने की रणनीति है, जो युद्ध से पहले रुक जाती है। इसमें धीरे-धीरे सैन्य तैनाती बढ़ाकर ताइवान की सुरक्षा कमजोर करने और उसकी प्रतिक्रिया क्षमता की जांच करने का लक्ष्य होता है। एमएनडी ने सितंबर में ऐसी गतिविधियों में तेज वृद्धि दर्ज की। इस महीने अब तक ताइवान ने 134 चीनी विमान और 68 नौसैनिक जहाजों को ट्रैक किया। ये आंकड़े बताते हैं कि पीएलए ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। वहीं एक्सपर्ट का कहना है कि इसका मकसद ताइवान पर निरंतर सैन्य दबाव बनाए रखना और ताइपे एवं अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश देना है। खबर के अनुसार, सितंबर 2020 से चीन लगातार द्वीप के पास अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। ये सैन्य अभियान ताइवान की संप्रभुता को चुनौती देते हैं, लेकिन सीधा संघर्ष टालते हैं। ताइवानी सेना ने पीएलए के खतरों से देश के हवाई और समुद्री क्षेत्र की रक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई है।  

मोदी और इटली की पीएम मेलोनी की फोन पर बात – व्यापार से लेकर वैश्विक मुद्दों तक हुई चर्चा

नई दिल्ली  पीएम नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से फोन पर बात की। पीएम मोदी ने इस बातचीत के बारे में एक्स पर एक पोस्ट में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ उनकी बहुत अच्छी बातचीत हुई। हमने भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई और यूक्रेन में संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करने में आपसी रुचि व्यक्त की। अपने पोस्ट में पीएम मोदी ने आगे लिखा कि पारस्परिक रूप से लाभकारी भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और IMEEEC पहल के माध्यम से संपर्क को बढ़ावा देने में इटली के सक्रिय सहयोग के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी का आभार व्यक्त किया। गौरतलब है कि मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ (EU) से भारत और चीन पर 100% तक आयात शुल्क लगाने का आग्रह किया है, ताकि रूस पर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके। यह मांग 9 सितंबर 2025 को वॉशिंगटन में वरिष्ठ अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों की एक कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान उठाई गई, जिसमें रूस की युद्ध फंडिंग को रोकने के उपायों पर चर्चा हुई। ट्रंप का कहना है कि भारत और चीन रूसी तेल और गैस के प्रमुख खरीदार हैं, जिससे रूस को आर्थिक समर्थन मिलता है और वह यूक्रेन में युद्ध जारी रख पाता है। इस संदर्भ में, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल की बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें यूक्रेन संकट और वैश्विक आर्थिक स्थिरता शामिल हो सकती है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब भारत-अमेरिका संबंध तनावपूर्ण हैं। ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीद के लिए पहले 25% और फिर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया है, जिससे भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में कुल 50% शुल्क लागू हो गया है। हालांकि, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भारत के साथ व्यापारिक संबंध सुधारने और पीएम मोदी से जल्द बातचीत की इच्छा व्यक्त की है।  

भारत से गहरा नाता और बेबाक छवि… कौन हैं सुशीला कार्की जो संभाल सकती हैं नेपाल की कमान

काठमांडू  नेपाल में तख्तापलट और खूनी हिंसा के बाद अब नई सरकार का इंतजार किया जा रहा है। जेन-जी प्रदर्शनकारी पहले काठमांडू के मेयर बालेन शाह को देश की कमान देना चाहते थे, लेकिन अब नया नाम सामने आया है। प्रदर्शनकारी नेपाल की पूर्व सीजेआई सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। यह दावा नेपाल के सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव ने किया। नेपाल की अंतरिम सरकार के मुखिया को चुनने के लिए आयोजित की गई एक वर्चुअल मीटिंग में करीब पांच हजार से ज्यादा जेन-जी युवा शामिल हुए। इसमें सुशीला कार्की को सबसे ज्यादा समर्थन मिला। उनका भारत से भी कनेक्शन है। दरअसल, कार्की ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से पोस्ट ग्रैजुएट की पढ़ाई की है। भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर नेपाल पिछले तीन दिनों से जल रहा है। केपी ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा, जिसके बाद बालेन शाह का नाम सबसे आगे आया, लेकिन सूत्रों के अनुसार, उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांग पर अपनी सहमति नहीं दी, जिसके बाद दूसरे नामों पर विचार किया जाने लगा। सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बनती दिख रही है। कौन हैं सुशीला कार्की? नेपाल के विराटनगर में सात जून, 1952 को जन्मीं सुशीला कार्की वहां की पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं। वह नेपाल की पहली और एकमात्र महिला सीजेआई हैं। उन्होंने 2016 में सीजेआई का पद संभाला। विराटनगर के कार्की परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुशीला कार्की अपने माता-पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी हैं। साल 1972 में उन्होंने विराटनगर में ही महेंद्र मोरंग कैंपस से बीए की डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने 1975 में वाराणसी की बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में पीजी किया। उन्होंने 1978 में त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से फिर बैचलर की डिग्री हासिल की। उन्होंने 1979 में विराटनगर में ही वकालत की शुरुआत की और फिर असिस्टेंट टीचर के रूप में भी काम किया। 2009 में उन्हें नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में एडहॉक जज के रूप में नियुक्त किया गया। वहीं, 2016 में वे अपने देश की सीजेआई बनीं और सात जून, 2017 तक इस पद पर रहीं।  

किसान भाइयों ध्यान दें: पीएम किसान की 21वीं किस्त पाने के लिए अभी करें ये काम

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत करोड़ों किसानों को हर साल ₹6,000 की आर्थिक मदद मिलती है, जो ₹2,000 की तीन किस्तों में सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। अब तक 20 किस्तें जारी हो चुकी हैं, और किसान बेसब्री से 21वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन, अगर आपने कुछ जरूरी काम नहीं किए हैं, तो आपकी अगली किस्त रुक सकती है। ई-केवाईसी (e-KYC) कराना है अनिवार्य यह किस्त पाने की सबसे जरूरी शर्त है। अगर आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं करवाई है, तो आपकी किस्त रोकी जा सकती है। ऑनलाइन तरीका: सबसे पहले pmkisan.gov.in वेबसाइट पर जाएं। 'Farmers Corner' में जाकर ई-केवाईसी ऑप्शन चुनें। अपना आधार नंबर डालें और ओटीपी वेरिफाई करें। चाहें तो पीएम किसान मोबाइल ऐप से फेस ऑथेंटिकेशन भी कर सकते हैं। ऑफलाइन तरीका: अगर इंटरनेट नहीं है, तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाएं। वहाँ बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट से ई-केवाईसी हो जाएगी। आधार कार्ड साथ ले जाना न भूलें। बैंक अकाउंट को आधार से लिंक करें आपकी किस्त सीधे आपके बैंक खाते में तभी आएगी जब आपका बैंक अकाउंट आधार से लिंक हो। अगर यह लिंक नहीं है, तो पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर (DBT) से नहीं आएगा। इसके लिए अपनी बैंक शाखा में जाकर आधार लिंकिंग कराएं और DBT सुविधा एक्टिव कराएं। भूमि सत्यापन कराएं अपनी किस्त बिना किसी रुकावट के पाने के लिए अपनी जमीन से जुड़े कागजात का सत्यापन करा लें। अगर आपकी जमीन का सत्यापन पूरा नहीं हुआ है, तो किस्त अटक सकती है। इसके लिए आपको अपने तहसील कार्यालय या राजस्व विभाग से संपर्क करना होगा। आप पीएम किसान पोर्टल पर भी जमीन से जुड़े दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। इसके अलावा, सुनिश्चित करें कि आपने रजिस्ट्रेशन के दौरान जो भी जानकारी दी है, वह पूरी तरह सही हो। नाम, आधार नंबर, या बैंक डिटेल्स में कोई भी गलती किस्त को रोक सकती है। कब आएगी 21वीं किस्त? रिपोर्ट्स के अनुसार, पीएम किसान योजना की 21वीं किस्त नवंबर या दिसंबर 2025 में जारी हो सकती है। सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन आमतौर पर हर चार महीने में एक किस्त जारी होती है। हाल ही में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की शिकायतों के लिए एक विशेष पोर्टल बनाने के निर्देश भी दिए हैं, जिससे उनकी समस्याओं का जल्द समाधान हो सके। अगर आप चाहते हैं कि आपकी अगली किस्त न अटके, तो इन तीनों कामों को जल्द से जल्द पूरा कर लें।  

आंखों देखा आतंक: बिहार के गांव में घरों पर आग, बाइकें भी जलाईं गईं

नेपाल  नेपाल में हाल ही में हुए तख्तापलट और उसके बाद भड़के विरोध-प्रदर्शनों का असर अब भारत की सीमाओं तक पहुंचने लगा है। नेपाल की सीमा से सटे बिहार के अररिया जिले के जोगबनी क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है। सीमा पार हो रही हिंसा के चलते भारत की ओर अलर्ट घोषित कर दिया गया है और सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद हो गई हैं। नेपाल में हिंसा, भारत में दहशत नेपाल के रानी भंसार क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए उग्र प्रदर्शन, आगजनी और नारेबाजी की घटनाएं जोगबनी बॉर्डर से महज 400 मीटर की दूरी पर घटीं। स्थानीय निवासी अजय प्रसाद के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने रंगेली महानगरपालिका समेत कई सरकारी भवनों और घरों में आग लगा दी। बिराटनगर के टॉवर चौक पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया गया और करीब 20 बाइकें फूंक दी गईं। इस हिंसा के बाद जोगबनी बाजार की अधिकांश दुकानें स्वतः बंद हो गईं। सीमा सील, आवाजाही पर रोक स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जोगबनी बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया है। नेपाल की ओर जाने वाली सड़क पर वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। स्कूल और कॉलेज भी अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं। अररिया और किशनगंज जैसे खुली सीमा वाले जिलों में माइकिंग कर लोगों से नेपाल न जाने की अपील की जा रही है। सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट बिहार के सात नेपाल सीमावर्ती जिलों पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज — में प्रशासन हाई अलर्ट पर है। पुलिस और एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) की तैनाती बढ़ा दी गई है। जोगबनी बॉर्डर पर तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। जिलाधिकारी ने स्वयं सीमा का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।   कड़ी निगरानी और तलाशी अभियान किशनगंज जिले में नेपाल और बंगाल से सटे क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। एसपी सागर कुमार लगातार थानों से रिपोर्ट ले रहे हैं। गलगलिया, जियापोखर, सुखानी, फतेहपुर, दिघलबैंक जैसे नेपाल से लगे थानों में विशेष निगरानी और चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। वाहनों की डिक्की तक की तलाशी ली जा रही है ताकि कोई संदिग्ध गतिविधि भारत में प्रवेश न कर सके। हालांकि, इलाज के लिए आने-जाने वाले एम्बुलेंस को सीमा पार जाने की अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा, कोई अन्य आवाजाही अनुमति के बिना नहीं हो रही है। वर्तमान स्थिति फिलहाल जोगबनी और आसपास के क्षेत्रों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जनता से संयम बरतने और अफवाहों से बचने की अपील की गई है।  

देश में बड़े हमलों की योजना फेल, पुलिस ने पकड़े ISIS के 8 संदिग्ध

नई दिल्ली   दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और झारखंड एटीएस ने एक संयुक्त अभियान में ISIS से जुड़े एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के तहत दिल्ली और झारखंड समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से अब तक 8 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह आतंकी मॉड्यूल पूरे देश में बड़े हमलों की साजिश रच रहा था। कैसे हुआ पर्दाफाश? दिल्ली पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी जिसके आधार पर उन्होंने मुंबई के रहने वाले आफताब नाम के एक संदिग्ध आतंकी को दिल्ली से गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक आफताब इस आतंकी मॉड्यूल का एक महत्वपूर्ण सदस्य है और वह दिल्ली में किसी बड़े हमले की योजना बना रहा था। उसके पास से कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद हुए हैं। इसी ऑपरेशन के तहत झारखंड एटीएस और दिल्ली पुलिस की एक टीम ने रांची के लोअर बाजार स्थित एक लॉज में छापेमारी की। वहां से असहर उर्फ दानिश नाम के एक और संदिग्ध को हिरासत में लिया गया। जांच में सामने आया है कि दानिश का संपर्क दिल्ली में पकड़े गए आतंकी आफताब से था।   छापेमारी में क्या-क्या मिला? पुलिस ने रांची में जिस लॉज पर छापा मारा वहां से कई चौंकाने वाली चीजें बरामद हुईं। सूत्रों के अनुसार पुलिस को वहां से हथियार, विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं। इसके अलावा कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद हुए हैं जिनकी जांच जारी है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने देश के 12 से ज़्यादा ठिकानों पर छापेमारी की है। दिल्ली और झारखंड के अलावा अन्य राज्यों से भी संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क का असली मकसद क्या था और इनके निशाने पर कौन-कौन से स्थान थे। वहीं पुलिस ने बताया कि ISIS के इस मॉड्यूल का उद्देश्य भारत में अस्थिरता फैलाना और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ना था। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि इनकी साजिशों को पूरी तरह से नाकाम किया जा सके।  

आपातकालीन हालात! नेपाल में सेना की सख्ती, जनता के लिए पूरी तरह से बंद

नेपाल नेपाली सेना ने विरोध प्रदर्शन की आड़ में किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए बुधवार को सुबह से शाम पांच बजे तक देशव्यापी प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए और अगले दिन सुबह छह बजे तक कर्फ्यू लगा दिया है। सेना ने एक बयान में चेतावनी दी कि इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, तोड़फोड़, आगजनी व व्यक्तियों या संपत्ति को निशाना बनाने वाले हमलों को आपराधिक गतिविधि माना जाएगा और उससे निपटा जाएगा। इसमें कहा गया है कि प्रतिबंधात्मक आदेश पूरे देश में सुबह से शाम पांच बजे तक प्रभावी रहेंगे और उसके बाद बृहस्पतिवार सुबह छह बजे तक कर्फ्यू लागू रहेगा। सेना ने कहा कि प्रदर्शन की आड़ में लूटपाट, आगजनी और अन्य विनाशकारी गतिविधियों की संभावित घटनाओं को रोकने के लिए ये कदम ज़रूरी हैं। बयान में कहा गया है, ‘‘बलात्कार और हिंसक हमलों का भी खतरा है। देश की सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, प्रतिबंधात्मक आदेश और कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।'' बयान में स्पष्ट किया गया है कि एम्बुलेंस, दमकल, स्वास्थ्य कार्यकर्ता और सुरक्षा बलों सहित आवश्यक सेवाओं में लगे वाहनों और कर्मियों को प्रतिबंधात्मक आदेशों और कर्फ्यू के दौरान काम करने की अनुमति होगी।   भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर सरकार के प्रतिबंध के खिलाफ सोमवार को ‘जेन-जी' द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कम से कम 19 लोगों की मौत के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके कार्यालय में घुस गए थे जिसके तुरंत बाद मंगलवार को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध सोमवार रात हटा लिया गया था। हालांकि, उनके इस्तीफे के बाद भी प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने संसद, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सरकारी इमारतों, राजनीतिक दलों के कार्यालयों और वरिष्ठ नेताओं के घरों में आग लगा दी थी।   

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 50 दिनों बाद किया खुलासा, पहला सार्वजनिक बयान आया सामने

नई दिल्ली  उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद से पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने चुप्पी साधी हुई थी। हाल ही में उन्होंने इसे लेकर बयान दिया है और नए चुने गए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को बधाई दी है। धनखड़ ने कहा कि उपराष्ट्रपति का पद उनके "विशाल अनुभव" के कारण और भी अधिक गौरव प्राप्त करेगा। यह बयान 21 जुलाई को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन पद छोड़ने के बाद उनका पहला सार्वजनिक बयान है। राधाकृष्णन को लिखे पत्र में धनखड़ ने कहा, "दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और मानवता के छठे हिस्से का घर माने जाने वाले भारत के उपराष्ट्रपति के तौर पर आपके चुने जाने पर हार्दिक बधाई।"   जगदीप धनखड़ की खामोशी पर विपक्ष ने उठाए थे सवाल राधाकृष्णन को लिखे अपने पत्र में धनखड़ ने आगे कहा,"इस प्रतिष्ठित पद पर आपकी पदोन्नति हमारे राष्ट्र के प्रतिनिधियों के विश्वास और भरोसे को दर्शाती है।" उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में राधाकृष्णन के "विशाल अनुभव" को देखते हुए उनके नेतृत्व में यह पद निश्चित रूप से और भी अधिक सम्मान और गौरव प्राप्त करेगा।   जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को अचानक "स्वास्थ्य कारणों" का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस अचानक कदम से भारतीय राजनीति में हलचल मच गई थी। विपक्ष ने उनके पद छोड़ने के तरीके पर सवाल उठाए थे। इस्तीफा देने के बाद से ही धनखड़ पूरी तरह से खामोश थे, जिससे विपक्षी दलों ने उनके ठिकाने और इरादों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। उनके इस लंबे समय की चुप्पी ने कई तरह की अटकलों को जन्म दिया था, जिस पर अब उनकी प्रतिक्रिया के बाद विराम लग गया है।

देशभर में वोटर लिस्ट SIR की प्रक्रिया अक्टूबर से शुरू, बिहार मॉडल को बनाया उदाहरण

नई दिल्ली देशभर में अक्टूबर से मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) शुरू होने की संभावना है. निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हो रही बैठक में इस पर सहमति बनी है. सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के CEO से कहा है कि 30 सितंबर तक कागज़ी कार्यवाही और जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं. अधिकांश राज्यों ने भरोसा जताया है कि वे सितंबर के अंत तक पूरी तरह तैयार हो जाएंगे. जल्द हो सकता है ऐलान बिहार विधानसभा चुनाव खत्म होने से पहले ही देशव्यापी SIR की औपचारिक घोषणा की जा सकती है. हालांकि, अंतिम तारीखें तभी तय होंगी जब सभी राज्यों के सीईओ अपनी प्रगति रिपोर्ट आयोग को सौंप देंगे. चुनाव आयोग अपडेट करेगा मतदाता सूची निर्वाचन आयोग का मानना है कि SIR के ज़रिए न सिर्फ नई मतदाता सूची अपडेट होगी, बल्कि पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रियाओं पर भरोसा भी और मज़बूत होगा. चुनाव आयोग के इस विशिष्ट आयोजन में राज्यों के सीईओ के समक्ष विभिन्न सत्रों में SIR की तैयारियों सहित साढ़े तीन घंटे से अधिक के प्रेजेंटेशन दिए गए. आयोग ने अलग अलग राज्यों के मुख्य निर्वाचन आधिकारियों को वहां होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए मतदाताओं की तस्दीक के लिए जमा कराए जाने वाले सनदी प्रमाणपत्रों की सूची बनाने को भी कहा गया है. राज्यों के हिसाब से मांगे जाएंगे दस्तावेज ये सूची राज्य में स्थानीय स्तर पर मान्य सहज उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित होगी. अलग-अलग राज्यों में दस्तावेजों के नाम और प्रकार होंगे. जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में, उत्तर पूर्वी समीवर्ती राज्यों में, समुद्र तटीय राज्यों में कई जगह पहचान और आवास के विशिष्ट प्रमाणपत्र भी होते हैं. कई जगह क्षेत्रीय स्वायत्त बोर्ड और निकाय भी ऐसे प्रमाण पत्र जारी करते हैं. चुनाव आयोग द्वारा 25 जून से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को अपडेट करने का कार्य किया. इस प्रक्रिया के पहले चरण में एक अगस्त को मसौदा मतदाता सूची जारी की गई थी, जिसमें 7.24 करोड़ नाम दर्ज थे जो पहले की तुलना में 65 लाख कम थे. एक अगस्त से एक सितंबर तक दावों और आपत्तियों की अवधि के दौरान कुल 16 लाख 56 हजार 886 लोगों ने नए नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया. इसके अलावा 2 लाख 17 हजार 49 लोगों ने नाम हटाने और 36 हजार 475 लोगों ने मतदाता सूची में सुधार के लिए आवेदन जमा किए. बिना नोटिस के नहीं कटेगा किसी का नाम: EC बिहार में SIR प्रकिया चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया, उनका पक्ष सुने बिना उनकी मतदाता पात्रता पर ERO कोई अंतिम फैसला नहीं लेंगे. आयोग ने ये भी भरोसा दिलाया था कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा और बिना नोटिस के किसी का नाम नहीं काटा जाएगा. बिहार में कैसे हुआ SIR SIR प्रक्रिया के तहत 24 जून से 25 जुलाई तक पहले चरण (गणना चरण) में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण सत्यापित किए गए. एक अगस्त को प्रकाशित मसौदा सूची के बाद एक सितंबर तक लोगों को दावे और आपत्तियां दर्ज करने का मौका दिया गया. फिलहाल 2 सितंबर से नए आवेदनों की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, सुधार करने और नाम हटाने के आवेदन शामिल होंगे.