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बांग्लादेश में हिंसा का तांडव: हिंदू व्यापारी की हत्या के बाद शव पर किया गया डांस

ढाका बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस सरकार बनने के बाद से ही हिंदुओं को प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। राजधानी ढाका में हिंदू व्यापारी की हत्या कर दी गई, जिससे एक बार फिर से पड़ोसी देश में हिंदुओं की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। लाल चंद सोहाग कबाड़ व्यापारी थे और उनकी पीट-पीटकर हत्या किए जाने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया। सैकड़ों छात्र शनिवार को सड़कों पर उतर आए और अंतरिम सरकार पर भीड़ हिंसा को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया। पुलिस ने कबाड़ व्यापारी लाल चंद सोहाग की पीट-पीटकर हत्या के सिलसिले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से दो के पास अवैध रूप से हथियार थे। ढाका के कई विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रों ने बुधवार को हुई इस घटना के विरोध में रैलियां निकालीं। जबरन वसूली करने वालों ने पुराने ढाका इलाके में मिटफोर्ड अस्पताल के सामने कबाड़ व्यापारी सोहाग की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। बीते दिनों वायरल हुए इस घटना के एक वीडियो में सोहाग को कंक्रीट के स्लैब के टुकड़ों से पीट-पीटकर मार डाला गया और फिर उसकी मौत की पुष्टि होने के बाद, हमलावर उसके शव पर नाचते हुए दिखाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, "तुम दरिंदों को लोगों को मारने का अधिकार किसने दिया? जब जबरन वसूली करने वाले उत्पात मचा रहे हैं, तो अंतरिम (सरकार) क्या कर रही है?" ये नारे छात्रों ने अपने परिसरों में लगाए। बीआरएसी विश्वविद्यालय, एनएसयू, ईस्ट वेस्ट विश्वविद्यालय और सरकारी ईडन कॉलेज जैसे निजी विश्वविद्यालयों के छात्रों ने शनिवार को प्रदर्शन किया, जबकि लाल की नृशंस हत्या का वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद प्रमुख ढाका विश्वविद्यालय और जगन्नाथ विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रथम अलो अखबार के अनुसार, लाल चंद की बहन मंजुआरा बेगम (42) ने गुरुवार को राजधानी के कोतवाली पुलिस स्टेशन में हत्या का मामला दर्ज कराया। इस मामले में 19 आरोपियों के नाम हैं और 15-20 अज्ञात संदिग्ध भी शामिल हैं। बीडीन्यूज24 ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के युवा मोर्चे के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने कथित तौर पर सोहाग की हत्या कर दी, जो उसी संगठन का एक पूर्व कार्यकर्ता था। पार्टी ने कहा कि उसने लिंचिंग के आरोपी चार अपराधियों को तुरंत पार्टी से निष्कासित कर दिया।  

खिलौना या डरावना सपना? लोगों को सहमा देने वाला ये टॉय एक साल में ही हुआ बैन

नई दिल्ली  खिलौने बच्चों के लिए मनोरंजन का साधन होते हैं जो उन्हें सीखने और उनके विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। ये बच्चों को कल्पनाशील और रचनात्मक बनने में मदद करते हैं और खेल-खेल में गिनती, अक्षर, शेप और कलर जैसी चीजें भी सिखाते हैं। कुछ खिलौने सामाजिक विकास में भी सहायक होते हैं लेकिन क्या आपने कभी ऐसे किसी खिलौने का नाम सुना है जो इतना खतरनाक साबित हुआ हो कि उसे बैन (प्रतिबंधित) करना पड़ गया हो? जी हां दुनिया में एक ऐसा खिलौना बनाया गया था जो सच में इतना खतरनाक था कि बाद में उसे प्रतिबंधित करना पड़ा। गिल्बर्ट यू-238 परमाणु ऊर्जा प्रयोगशाला: एक रेडियोएक्टिव 'लर्निंग सेट' वह खतरनाक खिलौना था 'गिल्बर्ट यू-238 परमाणु ऊर्जा प्रयोगशाला'। यह 1950 के दशक की शुरुआत में बेचा गया था। यह एक रेडियोएक्टिव खिलौना और साथ ही एक लर्निंग सेट भी था। $49.50 में मिलने वाले इस खिलौने में यूरेनियम अयस्क के चार सैंपल (ऑट्यूनाइट, टॉर्बरनाइट, यूरेनिनाइट, कॉर्नोटाइट) शामिल थे। इसके साथ इसमें एक गाइगर काउंटर (जो रेडिएशन नापने के काम आता है) और अलग-अलग कुछ अन्य औज़ार भी थे। इस सेट के साथ लोकप्रिय ब्लोंडी कॉमिक स्ट्रिप से डैगवुड पर आधारित एक कॉमिक बुक भी आई थी जिसका शीर्षक था 'लर्न हाउ डैगवुड स्प्लिट्स द एटम'। इसे मैनहट्टन प्रोजेक्ट के निदेशक जनरल लेस्ली ग्रोव्स के साथ मिलकर लिखा गया था। कैंसर और गंभीर बीमारियों का खतरा: क्यों किया गया बैन? साल 2006 में परमाणु ऊर्जा प्रयोगशाला को अब तक के 10 सबसे खतरनाक खिलौनों में से एक बताया गया था। इस खिलौने के लॉन्च के एक साल के भीतर ही इसे मार्केट से बैन करना पड़ा था क्योंकि इससे लोगों की जान पर बन आई थी। यह आज के आधुनिक टॉयगन जैसा कोई खिलौना नहीं था बल्कि बच्चों को रेडियोएक्टिव सामग्री जैसे कि यूरेनियम 238, पोलोनियम 210, लेड 210 और रेडियम 226 के साथ प्रयोग करने का मौका देता था। इससे बच्चों के लिए कैंसर और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे खतरे पैदा होने लगे थे। इस गेम के अंदर कई उपकरण और एक मैनुअल भी था जिसके ज़रिए बच्चों को बताया जाता था कि कैसे वे अपनी परमाणु चीजों के बारे में सीख सकते हैं। रेडियोएक्टिव रेडिएशन बहुत खतरनाक होता है लेकिन इस गेम में ग्लव्स या गाइडलाइन्स जैसी कोई सुरक्षा चीज़ें नहीं थीं। उस वक्त यह सोचा गया था कि बच्चे इससे चीजें सीखेंगे और विज्ञान की दुनिया में आगे बढ़ेंगे लेकिन इस भयंकर खतरे को देखते हुए इसे बाद में बैन करना पड़ा था।  

फेक प्रोफाइल के जाल में फंसी अर्जिता फुकन, वायरल तस्वीरों के आरोपी की हुई गिरफ्तारी

असम  असम के डिब्रूगढ़ में प्रतीम बोरा नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, जिसने अर्चिता फुकन का फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर उनकी मॉर्फ्ड तस्वीरें अपलोड की थीं। पुलिस के अनुसार, आरोपी बोरा फुकन का पूर्व साथी रहा है। उसने महिला को बदनाम करने और उत्पीड़न के मकसद से आपत्तिजनक कंटेंट अपलोड किया था। टिनसुकिया का निवासी बोरा कई हफ्तों से इस फेक प्रोफाइल को ऑपरेट कर रहा था, जिसके बाद फुकन के भाई की शिकायत पर शनिवार शाम उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अर्चिता फुकन को बेबीडॉल अर्ची के नाम से जाना जाता है। उसने बताया कि फर्जी अकाउंट से उनकी तस्वीरों को अमेरिकी एडल्ट स्टार केंड्रा लस्ट के साथ मॉर्फ करके शेयर किया गया। असम की इस युवती ने कहा कि उनके दोस्तों और परिचितों ने सोशल मीडिया पर वायरल इन मॉर्फ्ड तस्वीरों को देखा। पुलिस ने बताया कि प्रीतम बोरा छिप गया था, लेकिन उसका फोन ट्रेस करके उसे टिनसुकिया के एक किराए के अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया। उसके फोन और लैपटॉप को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। फुकन के साथ बोरा ने ऐसा क्यों किया पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी बोरा ने स्वीकार किया कि उसने फुकन के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट से तस्वीरें लेकर उन्हें एडिट किया था। उसने बताया कि रिश्ता खत्म होने के बाद गुस्से और भावनात्मक निराशा के कारण उसने यह फर्जी अकाउंट बनाया। बोरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी, मानहानि, पहचान हेरफेर, अश्लीलता और गोपनीयता के उल्लंघन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। बोरा पुलिस हिरासत में है और जल्द ही उसे अदालत में पेश किया जाएगा।  

‘हिंदी बोलूंगा’ कहने पर हमला, ऑटो चालक को उद्धव सेना ने बनाया निशाना

मुंबई महाराष्ट्र में भाषा को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। यहां पर पालघर जिले में एक ऑटो चालक को मराठी विरोधी टिप्पणी के लिए पीटा गया है। यह मारपीट उद्धव ठाकरे सेना गुट के कार्यकर्ताओं ने की है। शिवसेना (यूबीटी) कार्यकर्ताओं द्वारा ऑटो चालक के साथ बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले इस ऑटो चालक का एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक व्यक्ति उससे पूछ रहा था कि वह मराठी क्यों नहीं बोल रहा है। इसके जवाब में यह ड्राइवर बार-बार कह रहा था कि वह हिंदी बोलेगा।  

हमले से राज्यसभा तक का सफर: कौन हैं संघर्ष की मिसाल बने सदानंदन मास्टर?

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय संविधान से प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया है। इनमें केरल के शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता सी. सदानंदन मास्टर भी शामिल हैं, जिनका जीवन शिक्षा और संघर्ष की प्रेरणादायक मिसाल है। उनके नाम की घोषणा होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें शुभकामनाएं दी है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ''सी. सदानंदन मास्टर का जीवन साहस और अन्याय के आगे न झुकने की प्रतिमूर्ति है। हिंसा और धमकी भी राष्ट्र विकास के प्रति उनके जज्बे को डिगा नहीं सकी। एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उनके प्रयास सराहनीय हैं। युवा सशक्तिकरण के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता है। राष्ट्रपति जी द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत होने पर उन्हें बधाई। सांसद के रूप में उनकी भूमिका के लिए शुभकामनाएं।'' कौन हैं सदानंदन मास्टर? सदानंदन मास्टर केरल के त्रिशूर जिले के पेरमंगलम स्थित श्री दुर्गा विलासम हायर सेकेंडरी स्कूल में 1999 से सामाजिक विज्ञान के शिक्षक हैं। उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से बी.कॉम और कालीकट विश्वविद्यालय से बी.एड किया है। वह केरल में राष्ट्रीय अध्यापक संघ के उपाध्यक्ष और उसकी पत्रिका 'देशीय अध्यापक वार्ता' के संपादक भी हैं। 25 जनवरी 1994 को जब सदानंदन मास्टर सिर्फ 30 वर्ष के थे, तब केरल के कन्नूर जिले में उनके घर के पास उन पर जानलेवा हमला हुआ था। यह इलाका केरल में लंबे समय से राजनीतिक हिंसा का गढ़ माना जाता है। हमले में उनके दोनों पैर काट दिए गए। आरोप है कि हमला सीपीआई (एम) कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया था और यह उनके वामपंथ से वैचारिक असहमति का परिणाम था। इस हादसे के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से नाता नहीं तोड़ा और लगातार सक्रिय रहे। उन्होंने पूर्व में कन्नूर की कूथुपरम्बा विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा है और भारतीय विचार केंद्रम जैसे वैचारिक संगठनों से जुड़े रहे हैं। वह राजनीतिक हिंसा के खिलाफ मुखर रहे। इसके अलावा, शैक्षिक सुधारों में उनकी रुचि रही है। वह शांति और वैचारिक संतुलन की वकालत करने के साथ-साथ वैचारिक जागरूकता का प्रचार-प्रसार करते हैं। सी. सदानंदन मास्टर की पत्नी वनीता रानी भी एक शिक्षिका हैं। उनकी बेटी यमुना भारती बीटेक की छात्रा हैं। उनका परिवार शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है।  

तमिलनाडु में बड़ा हादसा: डीजल ले जा रही मालगाड़ी में लगी भीषण आग

तिरुवल्लूर तमिलनाडु में तिरुवल्लूर के निकट डीजल ले जा रही मालगाड़ी में रविवार सुबह भीषण आग लग गई। रेलवे के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आग पहले मालगाड़ी के एक डिब्बे में लगी और फिर तेजी से दूसरे डिब्बों में फैल गई। आग की तेज लपटें काफी ऊपर तक उठती नजर आईं, जिसका वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। रेलवे अधिकारी ने कहा कि सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियों को घटनास्थल पर भेज दिया गया। रेल सेवाओं के लिए ओवरहेड विद्युत आपूर्ति रोक दी गई। दक्षिणी रेलवे ने एक बयान में कहा, 'एहतियाती उपाय के तौर पर लोकल ट्रेन सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा 8 एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है और 5 अन्य ट्रेनों के मार्ग बदल दिए गए हैं। 8 ट्रेनों को उनके गंतव्य स्थान से पहले ही रोक दिया गया है।’ आग लगने के कारण की चल रही जांच सीनियर अधिकारी ने बताया कि आग लगने का कारण तत्काल पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसकी जांच की जा रही है। वहीं, नवी मुंबई के तुर्भे सेक्टर 20 में कृषि उपज बाजार समिति बाजार से सटे ट्रक पार्किंग स्थल में बीते दिनों भीषण आग लग गई थी। इससे वाणिज्यिक वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। आग ऊंची लपटें और धुएं काफी दूर से दिखाई दे रहे थे। आग में कश्मीरी ट्रांसपोर्टरों के वाहन सहित लगभग 8 ट्रक और टेम्पो जलकर खाक हो गए। आग अस्थायी ट्रक पार्किंग के लिए बनाए गए एमएसआरटीसी बस डिपो में लगी थी।

ईरान के राष्ट्रपति पर जानलेवा हमला, इजरायल पर लगा आरोप

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या का इरादा रखने वाले देश ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान एक इजरायली हवाई हमले में हल्के रूप से घायल हो गए हैं। यह हमला 16 जून को तेहरान के पश्चिमी हिस्से में स्थित एक इमारत पर हुआ था, जहां ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक चल रही थी। इस खबर की पुष्टि आईआरजीसी (IRGC) से जुड़ी फार्स न्यूज़ एजेंसी ने रविवार को की। इस हमले के समय राष्ट्रपति पेजेश्कियान के अलावा संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर घालिबाफ, मुख्य न्यायाधीश मोहसनी एजेई और अन्य शीर्ष सुरक्षा व सैन्य अधिकारी बैठक में मौजूद थे। पेजेश्कियान के पैर में चोट आई, वहीं अन्य अधिकारी भी निकलते समय हल्की चोटों से घायल हुए। फार्स रिपोर्ट के अनुसार, हमला छह मिसाइलों से किया गया था। यह हमला हसन नसरल्लाह की हत्या की तर्ज पर किया गया था।मिसाइलें इमारत के प्रवेश और निकास मार्गों को निशाना बनाकर दागी गईं। विस्फोट के बाद बिजली काट दी गई और भवन के ऊपरी हिस्से में तबाही मच गई। अधिकारी भवन के निचले फ्लोर में मौजूद थे। एक आपातकालीन निकासी मार्ग पहले से तैयार था, जिससे सभी अधिकारी निकलने में सफल रहे। अंदरूनी साजिश की आशंका? हमले की सटीकता और मिसाइलों का सटीक टारगेटिंग अब ईरानी अधिकारियों को किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका की आशंका दे रही है। सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गई हैं। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने हाल ही में टकर कार्लसन को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "उन्होंने मुझे मारने की कोशिश की थी। हां, उन्होंने कोशिश की लेकिन नाकाम रहे।" आपको बता दें कि इजरायल ने जंग में ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराया। मारे गए अधिकारियों में IRGC कमांडर होसैन सलामी, सशस्त्र बलों के प्रमुख मोहम्मद बाघेरी और IRGC एयर फोर्स कमांडर आमिर अली हाजीजादेह शामिल थे। पहले आई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि इजरायल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई को भी हत्या की योजना में शामिल किया था, लेकिन उपयुक्त समय नहीं मिला।  

अगला भाजपा अध्यक्ष कौन? संघ ने गिनाए योग्यताओं के मापदंड

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए तैयारी कर रही है। कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो चुकी है। उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में इसकी घोषणा बाकी है। इस सबके बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने स्पष्ट कर दिया है कि भगवा पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कैसा होगा। आपको बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत से चूकने के बाद BJP एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। सत्ता में तो है पर पहले जैसा अजेय दबदबा नहीं है। अब जब पार्टी गठबंधन सरकार चला रही है, तो RSS का हस्तक्षेप अधिक स्पष्ट और मुखर हो गया है। इंडिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि RSS प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणियों को भाजपा के लिए मैसेज के तौर पर देखा जा रहा है। संघ प्रमुख ने सत्ता में बढ़ती अहंकार की भावना और संवादहीनता की आलोचना की तो इसे सीधे तौर पर BJP नेतृत्व के व्यक्तित्व केंद्रित मॉडल पर कटाक्ष माना जाने लगा है। क्या चाहता है संघ? आरएसएस एक ऐसा अध्यक्ष चाहता है जो अपेक्षाकृत युवा हो। जो संगठन के साथ जुड़ा हो। वह केवल रणनीतिकार न हो, बल्कि वैचारिक मार्गदर्शक भी हो। आरएसएस व्यक्तिगत प्रभुत्व नहीं बल्कि संगठन आधारित नेतृत्व की चाह रखता है। भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कैडर से संवाद, फीडबैक को स्वीकार करने वाला और अंदरूनी लोकतंत्र को पुनर्स्थापित करने वाला नेता हो। पार्टी में बढ़ते टेक्नोक्रेट्स और राजनीतिक प्रवासियों की भूमिका पर आरएसएस ने चिंता जताई है। संघ का कहना है कि भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष तकनीक नहीं, तपष्या से बना नेता हो। भाजपा का नया अध्यक्ष उन लोगों से जुड़ा हो जो शाखा, प्रांत प्रचारक और बूथ स्तर पर काम कर रहे हैं। उसकी वैचारिक स्पष्टता को भी ध्यान में रखा जाए। समान नागरिक संहिता (UCC), जनसंख्या नीति, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर उसके विचार स्पष्ट हों। 28 प्रदेश अध्यक्ष बदले गए BJP ने अब तक 36 में से 28 राज्यों में नए या फिर से नियुक्त अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। बाकी महत्वपूर्ण राज्य जैसे कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और गुजरात की घोषणा बाकी है। इस जमीनी पुनर्गठन से पार्टी एक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के लिए मंच तैयार कर रही है। BJP या RSS में 75 की उम्र से रिटायरमेंट की कोई औपचारिक नीति नहीं है, लेकिन मोहन भागवत का हालिया बयान जिसमें उन्होंने 75 पार कर चुके लोगों के उत्तराधिकार तय करने की आवश्यकता पर बल दिया, ने हलचल मचा दी है।  

आरएसएस प्रमुख के बयान , पीएम पद के लिए सही च्वॉयस होंगे गडकरी : कांग्रेस विधायक

बेंगलुरु कांग्रेस के एक विधायक ने नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री बनाए जाने की मांग की है। उन्होंने इसके लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के रिटायरमेंट वाले बयान का हवाला दिया है। कांग्रेस विधायक ने आरएसएस प्रमुख के बयान का स्वागत करते हुए कहाकि अगर इसके हिसाब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद से रिटायर होते हैं तो गडकरी को पीएम बनना चाहिए। वह इस पद के लिए सही च्वॉयस होंगे। बता दें कि मोहन भागवत ने कहा था कि 75 साल की उम्र पूरी होने के बाद नेताओं को सत्ता से इस्तीफा दे देना चाहिए। इसके बाद कांग्रेस ने निशाना साधते हुए कहा था कि मोहन भागवत का इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर है। गौरतलब है कि पीएम मोदी इसी साल 75 साल के होने वाले हैं। गडकरी को देश के गरीबों की चिंता कांग्रेस विधायक बेलूर गोपालकृष्णा कर्नाटक की सागर विधानसभा से विधायक हैं। बेलूर गोपालकृष्णा ने अपने बयान में कहा है कि अगर भागवत के 75 साल में रिटारयमेंट वाली बात के हिसाब से पीएम मोदी हटते हैं तो नितिन गडकरी को अगला पीएम बनाना चाहिए। उन्होंने कहाकि गडकरी प्रधानमंत्री पद के लिए सही च्वॉयस रहेंगे। बेलूर गोपालकृष्णा ने कहाकि गडकरी को देश के गरीब लोगों की ज्यादा चिंता है। येदियुरप्पा का दिया उदाहरण पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस विधायक बेलूर गोपालकृष्णा ने कहाकि भाजपा ने 75 साल का होने के बाद बीएस येदियुरप्पा को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। उनकी आंखों में आंसू भरे हुए थे। अब भाजपा को आरएएस चीफ की इच्छा का सम्मान करना चाहिए और यही फॉर्मूला प्रधानमंत्री पद भी लागू करना चाहिए। उन्होंने कहाकि देश गरीब लोगों की संख्या बढ़ रही है। अमीर और अमीर होता जा रहा है। बेलूर ने कहाकि देश का धन कुछ लोगों के हाथ में जा रहा है। इसको देखते हुए वह प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे योग्य हैं। भाजपा हाईकमान को इस बारे में सोचना चाहिए।  

शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और आर्थिक क्षेत्र उल्लेखनीय बदलाव : उपराज्यपाल

श्रीनगर,  उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उल्लेखनीय बदलाव हो रहे हैं, खास तौर पर शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और आर्थिक क्षेत्र इसमें शामिल हैं। शोपियां में बोलते हुए उपराज्यपाल ने बदलती मानसिकता और उन झूठे आख्यानों को खत्म करने पर ज़ोर दिया जो कभी आर्मी गुडविल स्कूल जैसी पहलों में सामुदायिक भागीदारी को हतोत्साहित करते थे। उन्होंने सवाल किया कि एक समय लोगों से कहा जाता था कि वह अपने बच्चों को आर्मी गुडविल स्कूलों में न भेजें। डर और अविश्वास पैदा करने के लिए आख्यान गढ़े जाते थे लेकिन आपसे पूछता हूँ कि अगर हमारे बहादुर सैनिक हमारी सीमाओं की रक्षा कर सकते हैं तो वह हमारे बच्चों को शिक्षित करने में मदद क्यों नहीं कर सकते। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पिछले पाँच वर्षों में यह भ्रामक प्रचार कमज़ोर पड़ गया है और लोग अब इन संस्थानों में दी जा रही शिक्षा के मूल्य और गुणवत्ता को पहचान रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्मी गुडविल स्कूल दूरदराज और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में कई लोगों के लिए आशा और अवसर का प्रतीक बन गए हैं। आज इन स्कूलों के छात्र न केवल विषय सीख रहे हैं बल्कि वह ज़िम्मेदार नागरिक बन रहे हैं और कई प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उपराज्यपाल सिन्हा ने क्षेत्र में महिलाओं द्वारा की गई उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हज़ारों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में शामिल हो गई हैं और अब नौकरी चाहने वाली नहीं रही हैं, वह नौकरी देने वाली बन गई हैं और आगे बढ़कर बदलाव का नेतृत्व कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), उम्मीद और तेजस्विनी जैसी प्रमुख योजनाओं का हवाला देते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि ये कार्यक्रम केवल वित्तीय साधन नहीं बल्कि परिवर्तन के मंच हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों के माध्यम से महिलाओं को कौशल-आधारित प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन मिल रहा है। इससे उन्हें अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करने और सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने में मदद मिली है। स्थानीय स्वयं सहायता समूह खासकर शोपियां जैसे ग्रामीण इलाकों में बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई और कृषि-व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं। उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में केंद्र शासित प्रदेश की अर्थव्यवस्था दोगुनी हो गई है जो सुशासन, बेहतर कानून-व्यवस्था और विकास प्रक्रियाओं में बढ़ती जनभागीदारी के कारण संभव हुआ है। यह वृद्धि केवल आंकड़ों में ही नहीं है यह बेहतर सड़कों, स्कूलों, डिजिटल बुनियादी ढाँचे और आजीविका में भी झलकती है। हमें उम्मीद है कि यह रुझान इस वर्ष भी जारी रहेगा।