samacharsecretary.com

चार साल में पड़ोसी देशों में उथल-पुथल, भारत के चार पड़ोसी देशों में हुए तख्तापलट

नई दिल्ली पिछले चार सालों में भारत के पड़ोसी देशों में राजनीतिक हलचल ने अस्थिरता की नई परिभाषा गढ़ दी है। पिछले चार सालों में भारत के पड़ोसी देशों में राजनीतिक हलचल ने ऐसा तूफान खड़ा किया है कि अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल—सबकी सत्ता हिल गई। काबुल में तालिबान का कब्जा, श्रीलंका के राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शनकारियों का ‘स्विमिंग पूल पार्टी’, और नेपाल में युवा-जनरेशन का जबरदस्त Gen-Z क्रेज—ये सब घटनाएं साबित करती हैं कि सत्ता अब किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं रही।    नेपाल में सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन इतने तेज़ी से फैल गए कि संसद और सुप्रीम कोर्ट तक आंदोलन की लहर पहुंच गई। पांच मंत्रियों के इस्तीफे, विपक्षी सांसदों की सामूहिक बगावत और राष्ट्रपति के घर तक प्रदर्शनकारियों का घेराव—प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा महज एक शुरुआत थी; विरोध की आग अब भी धधक रही है। अफगानिस्तान: तालिबान की वापसी 2021 में अफगानिस्तान का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह उलट-पुलट गया। अमेरिकी मदद से स्थापित अशरफ गनी सरकार धराशायी हो गई और तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया। अगस्त के महीने में शहर में दाखिल होते ही तालिबान ने राष्ट्रपति भवन पर नियंत्रण जमा लिया, जबकि एयरपोर्ट पर भगदड़ में 170 से अधिक लोग मारे गए। भ्रष्टाचार, कमजोर सेना और अमेरिकी सैनिकों की वापसी ने विद्रोह को हवा दी। आज भी तालिबान का शासन कायम है, महिलाओं के अधिकारों पर पाबंदियाँ हैं और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की धमक लगातार बनी हुई है। श्रीलंका: आर्थिक संकट से राजनीति तक अफगानिस्तान के संकट के ठीक एक साल बाद, 2022 में श्रीलंका आर्थिक तूफ़ान की चपेट में आ गया। महंगाई, ईंधन और दवाइयों की किल्लत ने राजधानी कोलंबो की सड़कों को जलते हुए अंगारों में बदल दिया। लाखों लोग प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए, राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को रातोंरात देश छोड़ना पड़ा और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफा देना पड़ा। विरोध इतना उग्र था कि राष्ट्रपति भवन और संसद तक प्रदर्शनकारियों के कदमों की आवाज गूंज उठी। बांग्लादेश: छात्र आंदोलन और सत्ता परिवर्तन 2024 में बांग्लादेश के छात्र आंदोलनों ने ऐसा तूफ़ान खड़ा कर दिया कि शेख हसीना की सरकार सत्ता की कुर्सी से खिसक गई। भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और आरक्षण नीति के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों ने पूरे देश की राजनीति हिला कर रख दी। हिंसक झड़पों और गोलीबारी में 300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा बैठे। इसके बाद सेना ने अंतरिम सरकार बना दी, लेकिन आम चुनाव अब तक नहीं हो पाए हैं और देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल अब भी गरम है। बांग्लादेश आज भी संघर्ष और आंदोलन की ज्वाला में झुलस रहा है। पाकिस्तान में चार बार तख्तापलट पाकिस्तान में 1947 से ही सेना का हस्तक्षेप सत्ता में रहा है. पाकिस्तान ने एक दो नहीं बल्कि चार बार तख्तापलट का दंश झेला है. पहला तख्तापलट 1953-54 में हुआ. इसके बाद 1958 में सत्ता बदली जब पाकिस्तानी राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्कंदर अली मिर्जा ने पाकिस्तान की संविधान सभा और तत्कालीन फिरोज खान नून की सरकार को बर्खास्त किया था. फिर आया 1977 का दौर. तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे. चुनावों में धांधली के विवाद के बीच सेना प्रमुख जिया उल हक ने तख्तापलट किया. 1999 में फिर वही कहानी दोहराई गई जब सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट कर नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल किया था.  अन्य पड़ोसी देश: पाकिस्तान और मालदीव पाकिस्तान में इमरान खान के हटने के बाद राजनीति का पारा लगातार उँचा है। इमरान समर्थकों की रैलियां, हिंसक झड़पें और देशभर में तनाव ने सरकारी तंत्र को हिला कर रख दिया है। वहीं, बलूचिस्तान में अलगाववादी गुट सत्ता के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं। दूसरी तरफ़ मालदीव में नव निर्वाचित राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के ‘भारत विरोधी’ रुख़ और उनकी रूढ़िवादी नीतियों ने द्विपक्षीय संबंधों में खटास पैदा कर दी है। घरेलू स्तर पर भी उनका प्रशासन पिछली सरकार की तुलना में कड़ा और जुझारू नजर आ रहा है।  यहां लगा अमेरिका पर आरोप भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश भी 2024 में इसी तरह की आग में जल उठा था. शेख हसीना की सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और दमन के आरोप थे. जुलाई 2024 में सरकारी नौकरियों में 30% कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्र आंदोलन शुरू हुआ. जल्दी ही यह आंदोलन व्यापक हो गया. सड़कों पर उतरे लाखों युवाओं ने शेख हसीना के खिलाफ नारे लगाए और देखते ही देखते बांग्लादेश में तख्तापलट की घटना घटी. बता दें कि बांग्लादेश में तख्तापलट की घटना से अमेरिका पर आरोप लगा था. शेख हसीना के बेटे ने तख्तापलट के लिए अमेरिका पर शक जताया था. श्रीलंका की घटना  इसके अलावा साल 2022 में श्रीलंका में भी तख्तापलट की घटन देखी गई. श्रीलंका की अर्थव्यवस्था चरम संकट में थी. ईंधन, दवा, भोजन की भारी किल्लत थी. श्रीलंका ऋणों के बोझ तले दबा था लोगों का मानना था कि राजपक्षे परिवार की भ्रष्ट शासन ने जनता को तंग कर दिया. भारी संख्या में परेशान जनता सड़क पर उतरी. राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और संसद के बाहर डेरा डाला 'गोटा गो गोटा' यानी राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे सत्ता छोड़ो के नारे लगे. जुलाई 2022 तक आंदोलन इतना उफान मार गया कि गोटाबाया को देश छोड़कर भागना पड़ा.   अफगानिस्तान भी झेल चुका है तख्तापलट का दंश अफगानिस्तान में भी तख्तापलट की घटना घट चुकी है. अगस्त 2021 में अमेरिका की सेना हटने के बाद अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा हो गया. तालिबान ने 2021 में अफगानिस्तान की गनी सरकार का तख्तापलट किया था, जिसके बाद से यहां तालिबानी शासन है.

लद्दाख में हिमस्खलन की त्रासदी: तीन जवान शहीद, बचाव कार्य जोर-शोर से जारी

सियाचिन लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में एक बड़ा हिमस्खलन आया, जिसमें भारतीय सेना के तीन जवान शहीद हो गए. यह दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र है, जहां सैनिक -60 डिग्री की ठंड, तेज हवाओं और बर्फीले खतरों का सामना करते हैं. अभी तक की जानकारी के मुताबिक जवान पेट्रोलिंग कर रहे थे, तभी हिमस्खलन की चपेट में आ गए. सेना की बचाव टीमें तुरंत काम पर लग गई हैं, जो लेह और उधमपुर से मदद ले रही हैं. सियाचिन में हिमस्खलन सर्दियों में आम हैं. 1984 के ऑपरेशन मेघदूत से अब तक 1,000 से ज्यादा सैनिक मौसम की वजह से शहीद हो चुके हैं. अभी और जानकारी का इंतजार है. सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र सियाचिन   सियाचिन ग्लेशियर, जो कराकोरम पर्वत श्रृंखला में 20,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यह खबर दिल दहला देने वाली है, क्योंकि सियाचिन में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं. सियाचिन को दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र कहा जाता है. यहां तापमान -60 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है. तेज हवाएं, बर्फीले तूफान और हिमस्खलन आम हैं. यह हिमस्खलन उत्तरी ग्लेशियर क्षेत्र में हुआ, जहां ऊंचाई 18,000 से 20,000 फीट है. इस इलाके में सैनिकों को न सिर्फ दुश्मन से, बल्कि प्रकृति की मार से भी लड़ना पड़ता है. 1984 में शुरू हुए ऑपरेशन मेघदूत के बाद से भारत ने सियाचिन पर कब्जा बनाए रखा है, लेकिन मौसम की वजह से 1,000 से ज्यादा जवान शहीद हो चुके हैं. बचाव कार्य और सेना की कोशिशें हिमस्खलन की खबर मिलते ही भारतीय सेना और वायुसेना ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिए. विशेषज्ञ अवलांच रेस्क्यू टीमें (ART) मौके पर पहुंचीं, जो बर्फ में दबे जवानों को निकालने की कोशिश कर रही हैं. ये टीमें लेह और उधमपुर से समन्वय कर रही हैं. सेना के हेलिकॉप्टर, जैसे चीता और Mi-17, घायलों को निकालने और अस्पताल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं. सियाचिन में ऐसी आपात स्थिति के लिए सेना हमेशा तैयार रहती है, लेकिन बर्फ और ठंड की वजह से बचाव कार्य बेहद मुश्किल है. पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए, सेना ने सियाचिन में बुनियादी ढांचा मजबूत किया है. DRDO के ऑल-टेरेन व्हीकल (ATV) ब्रिज, डायनीमा रस्सियां और हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर जैसे चिनूक ने सप्लाई और बचाव को आसान किया है. ISRO के टेलीमेडिसिन नोड्स और HAPO चैंबर्स (हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा) ने चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाई हैं. फिर भी, सियाचिन की कठिन परिस्थितियां हर ऑपरेशन को जोखिम भरा बनाती हैं. सियाचिन: एक रणनीतिक और खतरनाक क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर 76 किलोमीटर लंबा है. कराकोरम रेंज में स्थित है. यह भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित क्षेत्र है. 1949 के कराची समझौते में इसकी सीमा साफ नहीं थी, जिसके बाद 1984 में भारत ने ऑपरेशन मेघदूत शुरू कर सियाचिन पर कब्जा किया. यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शक्सगाम घाटी (चीन को पाकिस्तान ने दी) और गिलगित-बाल्टिस्तान (पाकिस्तान के कब्जे में) के बीच एक दीवार की तरह है. अगर भारत सियाचिन छोड़ दे, तो पाकिस्तान और चीन लद्दाख को खतरे में डाल सकते हैं. लेकिन सियाचिन में सैनिकों का सबसे बड़ा दुश्मन मौसम है. 1984 से अब तक 870 से ज्यादा जवान मौसम, हिमस्खलन और अन्य कारणों से शहीद हुए हैं, जबकि युद्ध में कम नुकसान हुआ. 2016 में 10 जवान हिमस्खलन में दब गए थे, जिनमें लांस नायक हनुमंथप्पा कोप्पड़ 6 दिन बाद जिंदा निकाले गए, लेकिन बाद में उनकी मृत्यु हो गई. 2019 में चार जवान और दो पोर्टर एक हिमस्खलन में शहीद हुए थे. ये घटनाएं सियाचिन की खतरनाक सच्चाई को दर्शाती हैं.

73 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में ईडी के बड़े छापे, दिल्ली और मध्य प्रदेश में कार्रवाई

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 273 करोड़ रुपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले से जुड़ी धन शोधन जांच के तहत मंगलवार को दिल्ली और मध्य प्रदेश में छापेमारी की। एरा हाउसिंग एंड डेवलपर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (ईएचडीएल) नामक कंपनी और उसके प्रमोटरों के खिलाफ मामले में संघीय जांच एजेंसी के दिल्ली क्षेत्र द्वारा भोपाल स्थित एक परिसर सहित कुल दस परिसरों की जांच की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की जा रही है। ईडी की जांच सीबीआई की ओर से दर्ज की गई एफआईआर से शुरू हुई है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कंपनी और उसके प्रमोटरों/निदेशकों ने भारतीय औद्योगिक वित्त निगम (आईएफसीआई) द्वारा प्रदान किए गए 273 करोड़ रुपये के ऋण को "गबन" कर लिया। ईडी सूत्रों ने आरोप लगाया कि ऋण राशि को ईएचडीएल की कुछ संबंधित संस्थाओं को हस्तांतरित कर दिया गया, जो किसी भी वास्तविक व्यवसाय में संलग्न नहीं थीं।

हिमाचल में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे PM मोदी, प्रभावितों के लिए 1500 करोड़ की सहायता

नई दिल्ली उत्तर भारत के कई राज्यों में बाढ़ और बारिश की वजह से जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है। इस बीच पीएम मोदी आज बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए हिमाचल प्रदेश पहुंचे। यहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके अलावा उन्होंने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के कर्मियों से मुलाकात की। पीएम मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर भी अपने दौरे की तस्वीरें शेयर की हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर तस्वीरें शेयर करते हुए पीएम मोदी ने अपनी पोस्ट में लिखा, "हवाई सर्वेक्षण के जरिए हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और लैंडस्लाइड की स्थिति का जायजा लिया। इस कठिन समय में हम प्रदेश के अपने भाई-बहनों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। इसके साथ ही प्रभावित लोगों की मदद के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं।" बता दें कि पीएम मोदी ने मंगलवार को आपदा प्रभावित मंडी तथा कुल्लू जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया और फिर कांगड़ा पहुंचे। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पीएम मोदी का स्वागत किया। विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल और अन्य भाजपा विधायक भी गग्गल एयरपोर्ट पर मौजूद थे। 1500 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रधानमंत्री मोदी ने हिमाचल प्रदेश के लिए 1500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की। एसडीआरएफ और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की दूसरी किस्त अग्रिम रूप से जारी की जाएगी। प्रधानमंत्री ने पूरे क्षेत्र और लोगों को फिर से पटरी पर लाने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। यह कार्य कई तरीकों से किया जाएगा, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से घरों का पुनर्निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्गों का जीर्णोद्धार, स्कूलों का पुनर्निर्माण, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के तहत राहत का प्रावधान और पशुधन के लिए मिनी किट जारी करना। कृषि समुदाय को सहायता प्रदान करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को देखते हुए, विशेष रूप से उन किसानों को अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी जिनके पास वर्तमान में बिजली कनेक्शन नहीं हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत, क्षतिग्रस्त घरों की जियोटैगिंग की जाएगी। इससे नुकसान का सटीक आकलन करने और प्रभावित लोगों तक सहायता शीघ्र पहुंचाने में मदद मिलेगी। निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए, स्कूल नुकसान की सूचना दे सकेंगे और उसे जियोटैग कर सकेंगे, जिससे समग्र शिक्षा अभियान के तहत समय पर सहायता मिल सकेगी। जल संचयन हेतु पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा ताकि वर्षा जल का संग्रहण और भंडारण किया जा सके। इन प्रयासों से भूजल स्तर में सुधार होगा और बेहतर जल प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। केंद्र सरकार ने नुकसान का आकलन करने के लिए हिमाचल प्रदेश का दौरा करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल पहले ही भेज दिए हैं और उनकी विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर आगे की सहायता पर विचार किया जाएगा। मुआवजा राशि का ऐलान प्रधानमंत्री ने आपदा से प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात की। उन्होंने जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना और गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस कठिन समय में राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगी और हर संभव सहायता प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की भी घोषणा की। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन नियमों के तहत सभी प्रकार की सहायता प्रदान की जा रही है, जिसमें राज्यों को अग्रिम राशि का भुगतान भी शामिल है। उन्होंने तत्काल राहत और बचाव कार्यों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, राज्य प्रशासन और अन्य सेवा-उन्मुख संगठनों के कर्मियों के प्रयासों की सराहना की। केंद्र सरकार राज्य के ज्ञापन और केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट के आधार पर आकलन की आगे समीक्षा करेगी। प्रधानमंत्री ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार स्थिति से निपटने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। बादल फटने से हुआ नुकसान राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में 20 जून से आठ सितंबर तक बादल फटने, भारी बारिश से अचानक बाढ़ आने और भूस्खलन के कारण 4,122 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। राज्य में वर्षा जनित घटनाओं और सड़क दुर्घटनाओं में 370 लोगों की मौत हो गई है। इनमें से 205 लोगों की मौत बारिश से जुड़ी घटनाओं के कारण हुईं। इनमें 43 मौतें भूस्खलन से, 17 बादल फटने से और नौ अचानक आई बाढ़ से हुईं। इसके अलावा, 41 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में 165 मौतें हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी के हिमाचल प्रदेश दौरे से पहले सीएम सुक्खू ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से वन संरक्षण अधिनियम में छूट देने का आग्रह करेंगे, ताकि मानसून आपदा के कारण भूमिहीन हुए लोगों को वन भूमि प्रदान की जा सके। प्रधानमंत्री के आगमन से कुछ घंटे पहले ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि राज्य अपने प्रियजनों को खोने, गांवों के मलबे में दबने तथा सड़कों व बिजली आपूर्ति को व्यापक नुकसान पहुंचने का दर्द झेल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी से पहाड़ी राज्यों में सतत विकास के लिए रणनीति तैयार करने पर चर्चा शुरू करने का आग्रह करेंगे और प्रधानमंत्री के समक्ष यह प्रश्न भी उठाएंगे कि क्या पहाड़ी राज्यों में अपनाया जा रहा विकास मॉडल टिकाऊ है और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव से पहाड़ों को कैसे बचाया जा सकता है।

बड़ा राजनीतिक संकट: नेपाल के PM ओली ने छोड़ी कुर्सी, प्रदर्शनकारियों ने संसद को बनाया निशाना

काठमांडू  नेपाल में छात्रों का भारी लगातार दूसरे दिन भी बवाल जारी है। नेपाल की केपी शर्मा ओली सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत 26 सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म से बैन हटा लिया है। यह फैसला सोमवार देर रात देश भर में युवाओं के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए बाद लिया गया। इसके बाद भी युवा मान नहीं रहे थे। छात्रों के भारी दबाव के बाद नेपाल के पीएम ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। नेपाली युवाओं ने पीएम प्रचंड और पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा के घर पर हमला करने की कोशिश की है। जेन-ज़ी प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा घायल हुए हैं। नेपाल में जेन-ज़ी प्रदर्शनकारी लगातार दूसरे दिन भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे नेपाल के पीएम केपी ओली के इस्‍तीफे की मांग कर रहे थे। नेपाली सेना प्रमुख की चेतावनी के बाद ओली ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया। नेपाल के 10 से ज्‍यादा मंत्रियों ने पहले ही इस्‍तीफा दे दिया था। नेपाल के संचार, सूचना और प्रसारण मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने देर रात घोषणा की कि सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध लगान का फैसला वापस ले लिया गया है।  इससे पहले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की पार्टी के नेता रघुवीर महासेठ और माओवादी अध्यक्ष प्रचंड के घरों पर भी हमला हुआ. गृहमंत्री रमेश लेखक, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री समेत पांच मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं. लगातार बढ़ते दबाव के बीच पीएम ओली इलाज के नाम पर दुबई जाने की तैयारी कर रहे हैं और उन्होंने उपप्रधानमंत्री को कार्यवाहक जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है. कर्फ्यू और सुरक्षा के सख्त इंतजामों के बावजूद विरोध प्रदर्शनों का दायरा बढ़ता जा रहा है और राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है. इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए गृह मंत्री रमेश लेखक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. हालात बिगड़ते देख नेपाल अब तक कैबिनेट के तीन मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं और खुद पीएम ओली के बारे में कहा जा रहा है कि वे देश छोड़कर दुबई जाने की तैयारी में हैं. बेकाबू हो रहे प्रदर्शनकारियों को देखते हुए काठमांडू की सड़कों पर सेनाओं को तैनात कर दिया गया है. सोमवार को दोपहर तक कुछ इलाकों में मौजूद ये बवाल अब काठमांडू के अलावा पोखरा, बुटवल, भैरहवा, भरतपुर, इटहरी और दमक जैसे शहरों में भी फैल गया. बताया जा रहा है कि सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी उनके दफ्तर में घुस गए थे, जिसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है. पीएम ओली ने अपने इस्तीफे वाली चिट्ठी राष्ट्रपति को सौंपी है. देश में लगातार चल रही हिंसा और विद्रोह की वजह से उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा है. उनके 4 कैबिनेट मंत्री पहले ही इस्तीफा दे चुके थे. सूत्रों के हवाले से खबर है कि ओली इसके बाद दुबई जा सकते हैं. सुबह ही सोमवार को 19 प्रदर्शनकारियों की मौत से गुस्साई भीड़ ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के निजी आवास फूंक दिए और मंत्रियों को उनके घर में ही बंधक बना डाला जिसके बाद उन्हें चॉपर से रेस्क्यू किया गया. पड़ोसी देश नेपाल में सिर्फ सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने से शुरू हुई विद्रोह की चिंगारी अब पूरे नेपाल में लहक रही है. स्थिति ये है कि नेपाल के तमाम इलाकों में नई पीढ़ी के युवा हाथों में पत्थर और लाठी-डंडे लेकर घूम रहे हैं. उन्हें नियंत्रित करने में पुलिस के पसीने छूट गए हैं. उन्होंने संसद भवन में घुसकर इसमें आग लगा दी और बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे हाई प्रोफाइल लोगों के घरों में तोड़फोड़ की है.  वित्त मंत्री को जनता ने सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर लात-घूसे से पीटा नेपाल में राजनीतिक और सामाजिक तनाव की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को सरेआम सड़क पर घेर लिया और उन पर बेरहमी से लात-घूसे बरसाए। इस हिंसक घटना ने देश में विरोध प्रदर्शन की तीव्रता और गहराई को बयां किया है, जहां जनता की नाराजगी ने अब सीधे तौर पर उच्च राजनैतिक नेताओं तक को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को राजधानी काठमांडू समेत कई अन्य शहरों में प्रदर्शनकारियों ने भारी तोड़फोड़ और आगजनी की, जिससे पूरे देश की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने वित्त मंत्री विष्णु पौडेल को सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर हमला किया, जिसे देखकर हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस व्यापक आंदोलन ने सरकार के ढांचे को हिला कर रख दिया है। पहले ही कई मंत्रियों – गृह मंत्री रमेश लेखक, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल और जल आपूर्ति मंत्री प्रदीप यादव – ने इस्तीफा दिया था, और अब प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भी अपना पद छोड़ दिया है। यह साफ संकेत है कि बढ़ते जनाक्रोश को रोक पाना अब सरकार के लिए बेहद कठिन हो गया है। वित्त मंत्री विष्णु पौडेल कौन हैं? विष्णुप्रसाद पौडेल नेपाल के प्रमुख कम्युनिस्ट नेताओं में से एक हैं और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के उपाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने नेपाल सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है, जिनमें उपप्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के पद प्रमुख हैं। पौडेल ने कई मौकों पर गृह, उद्योग, जल और रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली है। उनकी व्यापक प्रशासनिक अनुभव की वजह से वे नेपाली राजनीति में एक प्रभावशाली शख्सियत माने जाते हैं।  ओली के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों का जश्न नेपाल में चल रहे प्रदर्शन के बाद जब प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दिया, तो सड़कों पर जश्न मनाया गया. आगजनी और बवाल के बीच प्रदर्शनकारियों ने नाचना शुरू कर दिया.

ऑर्थर जेल में मेहुल चोकसी के लिए साफ टॉयलेट-पानी की व्यवस्था, सरकार ने दी 14 सुविधाओं की जानकारी

मुंबई  भारत ने भगोड़े मेहुल चोकसी के दिल की धुकधुकी बढ़ा दी है. मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण की दिशा में भारत ने बड़ा कदम उठाया है. पीएनबी घोटाले का आरोपी मेहुल चोकसी बहुत जल्द भारत की सलाखों के पीछे होगा. इसके लिए भारत सरकार ने बेल्जियम सरकार के मन की शंकाओं को दूर कर दिया है. जी हां, गृह मंत्रालय ने बेल्जियम सरकार को एक खत लिखा है. इसमें मेहुल चोकसी को भारत लाने पर क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी, किस जेल में उसे रखा जाएगा, उसे किस तरह की सुरक्षा दी जाएगी, सबका जिक्र है. यह पत्र 4 सितंबर 2025 को भेजा गया. मेहुल चोकसी पीएनबी यानी पंजाब नेशनल बैंक घोटाले का मुख्य आरोपी है. इस घोटाले में हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई थी. मेहुल चोकसी को अप्रैल 2025 में बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया था. भारत की मांग पर यह कार्रवाई हुई. अब उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चल रही है. प्रत्यर्पण से पहले बेल्जियम सरकार ने भारत से मेहुल चोकसी की सुरक्षा और मानवाधिकार चिंताओं को लेकर आश्वासन मांगा था. किस जेल में होगा चोकसी का ठिकाना दरअसल, अगर मेहुल चोकसी को भारत प्रत्यर्पित किया जाता है, तो वह मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा जाएगा. खासतौर पर बैरक नंबर 12 में उसकी सेल होगी. गृह मंत्रालय ने महाराष्ट्र सरकार से सलाह लेकर यह तय किया है. मेहुल चोकसी को जेल में कई सुविधाएं मिलेंगी. उसके वाली सेल में कम से कम 3 वर्ग मीटर की जगह होगी. इसमें फर्नीचर शामिल नहीं होगा. यह जगह पूरे हिरासत काल के दौरान रहेगी, अगर वह दोषी साबित होता है. चोकसी को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी? मेहुल चोकसी को जेल में साफ मोटा कॉटन मैट, तकिया, चादर और कंबल दिए जाएंगे. अगर मेडिकल वजह से जरूरत पड़ी, तो मेटल फ्रेम या लकड़ी का बेड भी मिल सकता है. इसके अलावा, पर्याप्त रोशनी और हवा की व्यवस्था होगी. व्यक्तिगत सामान रखने के लिए स्टोरेज मिलेगा. हर दिन साफ पीने का पानी मिलेगा. मेडिकल सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी. हर दिन टॉयलेट और नहाने की सुविधा मिलेगी. चोकसी को सेल से बाहर निकलकर व्यायाम और मनोरंजन के लिए उचित समय दिया जाएगा. हिरासत के दौरान पर्याप्त भोजन मिलेगा. ये सभी सुविधाएं चोकसी के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हैं. भारत ने बेल्जियम को आश्वासन क्यों दिया? अब सवाल है कि आखिर भारत ने बेल्जियम को ये आश्वासन क्यों दिए? वजह है मानवाधिकार संबंधी चिंताएं. मेहुल चोकसी के वकील विजय अग्रवाल ने प्रत्यर्पण का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि भारत में चोकसी को उचित स्वास्थ्य देखभाल नहीं मिलेगी और राजनीतिक उत्पीड़न हो सकता है. मेहुल चोकसी कैंसर का इलाज करा रहा है. उसके स्वास्थ्य की वजह से बेल्जियम कोर्ट ने बेल रद्द की है. वकील ने अपील की योजना बनाई है. प्रत्यर्पण प्रक्रिया में इन चिंताओं को दूर करने के लिए भारत ने आश्वासन भेजे. यह प्रत्यर्पण संधि के नियमों का पालन है. मेहुल चोकसी का भतीजा भी नीरव भी भगोड़ा मेहुल चोकसी पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं में केस हैं. ये अपराध बेल्जियम कानून में भी मान्य हैं. भारत ने संयुक्त राष्ट्र की अपराध और भ्रष्टाचार विरोधी संधियों का हवाला दिया है. सीबीआई ने यह तर्क दिया है. मेहुल चोकसी का भतीजा नीरव मोदी भी इसी घोटाले में आरोपी है. चोकसी डोमिनिका से प्रत्यर्पण की कोशिश में पहले असफल रहा था. चोकसी के वकील अग्रवाल ने कहा कि चोकसी को आधिकारिक रूप से भगोड़ा नहीं घोषित किया गया. वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जांच में शामिल होने को तैयार है. क्या है पीएनबी कांड दरअलल, मेहुल चोकसी और उसके भतीजे नीरव मोदी पर पीएनबी में 13,500 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण घोटाले का आरोप है. इस घोटाले में दोनों ने कथित तौर पर मुंबई के ब्रैडी हाउस ब्रांच के कुछ बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LOU) के जरिए धोखाधड़ी की थी. मेहुल चोकसी पर इसके अलावा कई अन्य बैंकों के साथ धोखाधड़ी के मामलों में भी जांच चल रही है.

जेलेंस्की का बड़ा बयान: कहा- भारत पर टैरिफ लगाना बिल्कुल सही कदम

कीव  यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky on US Tariff) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की टैरिफ नीति का खुलकर समर्थन किया है। जेलेंस्की ने कहा कि ट्रंप ने भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाकर बिल्कुल सही किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो देश रूस से व्यापार कर रहे हैं, उन पर टैरिफ लगाना एक बेहतरीन कदम है। 'रूस के साथ व्यापार पूरी तरह खत्म करना होगा' जेलेंस्की ने एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि यूरोपीय देश अब भी रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं, जो बिल्कुल गलत है। उनका मानना है कि रूस के साथ व्यापार पूरी तरह खत्म करना होगा, तभी पुतिन पर असली दबाव डाला जा सकेगा। जेलेंस्की ने कहा, “हमें लगता है कि पुतिन पर और कड़ा दबाव डालने की जरूरत है और यह काम अमेरिका को करना चाहिए।” उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि केवल वही रूस को रोकने की क्षमता रखते हैं। “मुझे पूरा विश्वास है कि ट्रंप इस दिशा में सफल होंगे,” जेलेंस्की ने कहा। भारत और रूस को लेकर बयान जेलेंस्की से पूछा गया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनफिंग एक साथ एससीओ समिट में नजर आए थे। इस पर ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। इसके बाद ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर कड़े टैरिफ लगाए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जेलेंस्की ने कहा, “मुझे लगता है कि जो देश रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं, उन पर टैरिफ लगाना बिल्कुल सही है।” यूरोपीय देशों पर नाराजगी जेलेंस्की ने विशेष रूप से यूरोपीय देशों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कई यूरोपीय देश आज भी रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं, जिससे पुतिन को आर्थिक सहारा मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “यह कहीं से भी सही नहीं है। हमें रूस से हर तरह की खरीदारी बंद करनी होगी।” ट्रंप और पुतिन की मुलाकात पर टिप्पणी जेलेंस्की ने यह भी बताया कि तीन हफ्ते पहले अलास्का में ट्रंप और पुतिन की मुलाकात हुई थी, लेकिन इसके बाद भी रूस का रवैया नहीं बदला। रूस लगातार यूक्रेन पर हमले कर रहा है। ऐसे में रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना ही एकमात्र समाधान है। जेलेंस्की ने दोहराया कि रूस के साथ सभी डील्स बंद करनी होंगी और यह काम सिर्फ अमेरिका कर सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ट्रंप इस दिशा में निर्णायक कदम उठाएंगे।

डिनर पार्टी में मारपीट की नौबत: ट्रंप के सामने भिड़े वित्त मंत्री बेसेंट और वरिष्ठ अफसर

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डिनर पार्टी में उनके दो टॉप इकोनॉमिक अधिकारी मारपीट की नौबत तक पहुंच गए. स्थिति यहां तक पहुंच गई कि एक अधिकारी ने दूसरे के सामने कहा कि 'तेरा मुंह तोड़ दूंगा… बाहर चल'. यह घटना वाशिंगटन डीसी में एक विशेष क्लब "एक्जीक्यूटिव ब्रांच" के उद्घाटन और एक पॉडकास्ट होस्ट चमथ पालिहपितिया के जन्मदिन समारोह के दौरान हुई. ट्रंप के जिन दो अफसरों के बीच मारपीट की नौबत आई वे हैं सेक्रेटरी ऑफ फाइनेंस यानी कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट और फेडरल हाउसिंग फाइनेंस एजेंसी के डायरेक्टर बिल पुल्टे के बीच.  सीएनएन के अनुसार एग्ज़ीक्यूटिव क्लब में एक रात्रिभोज के दौरान स्कॉट बेसेन्ट ने पुल्टे के मुंह पर मुक्का मारने की धमकी दी. सूत्रों के अनुसार बेसेंट  को पता चला कि बिल पुल्टे ट्रंप के सामने उनकी चुगली कर रहे हैं.  इसकी जानकारी मिलते ही स्कॉट बेसेन्ट आपे से बाहर हो गए और उन्होंने बिल पुल्टे के चेहरे पर मुक्का मारने की धमकी दी.  यह घटना 4 सितंबर 2025 को वाशिंगटन डीसी में एक निजी डिनर के दौरान हुई. इस डिनर में कई बड़े नाम मौजूद थे जैसे ट्रांसपोर्टेशन सेक्रेटरी सीन डफी, कॉमर्स सेक्रेटरी हावर्ड लुटनिक, इंटीरियर सेक्रेटरी डग बर्गम, और नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड. लगभग 30 मेहमानों के लिए एक लम्बी मेज सजाई गई थी जिस पर उच्च श्रेणी के क्रिस्टल और चीनी मिट्टी के बर्तन लगे थे.  लेकिन कॉकटेल पार्टी के शोरगुल के बीच बेसेंट ने पुल्टे पर गालियों से भरी तीखी टिप्पणी की. दरअसल खबर यह है कि स्कॉट बेसेन्ट ने कई लोगों से सुना था कि फेडरल हाउसिंग फाइनेंस एजेंसी के निदेशक ट्रंप के सामने उनकी बुराई कर रहे थे.  मौका मिलते ही बेसेंट ने पुल्टे से कहा, "तुम राष्ट्रपति से मेरे बारे में क्यों बात कर रहे हो? भाड़ में जाओ." "मैं तुम्हारे मुंह पर मुक्का मार दूंगा." अमेरिकी राजनीति पर गहरी नजर रखने वाली वेबसाइट पॉलटिको में इस झगड़े की विस्तार से रिपोर्ट छपी है.  बेसेंट की प्रतिक्रिया देख पुल्टे स्तब्ध लग रहा था. चश्मदीदों के अनुसार इस तनावपूर्ण मुठभेड़ के बाद क्लब के सह-मालिक और फाइनेंसर ओमीद मलिक को हस्तक्षेप करना पड़ा. लेकिन बेसेंट को यह मंजूर नहीं था. वह पुल्टे को पार्टी से ही बार निकलवाना चाहता था.  बेसेंट ने क्लब मलिक से कहा, "या तो वो यहां रहेगा या मैं. तुम मुझे बताओ कि यहां से कौन निकलेगा." "या फिर," उसने आगे कहा, "हम बाहर जा सकते हैं." "क्या करने?" पुल्टे ने पूछा. "बात करने?" "नहीं," बेसेंट ने जवाब दिया. "मैं तुम्हारी पिटाई कर दूंगा." स्थिति को शांत करने के लिए मलिक ने उन लोगों को अलग किया और बेसेंट को शांत करने के लिए क्लब के दूसरे हिस्से में ले गए. डिनर के दौरान बेसेंट और पुल्टे को मेज के विपरीत छोर पर बिठाया गया. इस घटना पर बेसेंट, पुल्टे, मलिक और व्हाइट हाउस ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.  ट्रंप को उम्मीद थी तीनों साथ मिलकर काम करेंगे ट्रंप ने मई में घोषणा की थी कि बेसेंट, वाणिज्य मंत्री ल्यूटनिक और पुल्टे मिलकर काम करेंगे. लेकिन ट्रंप प्रशासन के सूत्रों के अनुसार इन अफसरों के बीच एक तरह की ज़मीनी जंग छिड़ी हुई है. इस विवाद से परिचित कुछ लोगों का कहना है कि बेसेंट का मानना ​​है कि पुल्टे ने खुद को उन मामलों में शामिल कर लिया है जिसे वित्त मंत्री अपना अधिकार क्षेत्र मानते हैं. ट्रंप से कई सीट दूर बैठे बेसेंट यह पहली बार नहीं है जब बेसेंट का ट्रंप के किसी सलाहकार से झगड़ा हुआ हो. इस साल की शुरुआत में कई सूत्रों ने सीएनएन को बताया कि बेसेंट का एलॉन मस्क से तीखी बहस हुई थी.   बेसेंट रविवार को ट्रंप के साथ यूएस ओपन में शामिल हुए हालांकि उन्हें राष्ट्रपति से कुछ सीटें दूर बैठाया गया था. 

नेपाल राजनीति में हलचल: दो मंत्रियों के इस्तीफे से ओली सरकार पर संकट, सहयोगी पार्टी ने भी किया किनारा

काठमांडू  नेपाल में Gen-Z प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है. गृह मंत्री के बाद मंगलवार को कृषि और पशुपालन विकास मंत्री रामनाथ अधिकारी ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के बजाय सत्तावादी दिशा में जा रहा है. अपने इस्तीफे में नेपाली कांग्रेस के सांसद ने लिखा कि सरकार ने नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को मान्यता देने के बजाय दमन, हिंसा और बल प्रयोग का रास्ता अपनाया है, और इसलिए वह इस्तीफा दे रहे हैं. नेपाल सरकार के मंत्री ने कहा कि यह तरीका लोकतंत्र की जगह सत्तावाद की ओर देश को ले जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि वह सत्ता में बने रहकर इस सवाल का जवाब नहीं दे सकते कि आखिर क्यों सरकार ने उस पीढ़ी के खिलाफ हिंसा का रास्ता चुना, जिसके साथ मिलकर राष्ट्र का निर्माण होना चाहिए. पहले गृहमंत्री रमेश लेखक ने दिया इस्तीफा रामनाथ अधिकारी का यह कदम सोमवार को गृहमंत्री रमेश लेखक के इस्तीफे के एक दिन बाद सामने आया है. रमेश लेखक ने सोमवार शाम प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. यह इस्तीफा भी Gen-Z प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और मौतों के बाद आया. केपी ओली से इस्तीफा देने की मांग नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा ने प्रधानमंत्री ओली से इस्तीफा देने की मांग की है. उन्होंने कहा, "निर्दोष युवाओं की मौत अनावश्यक रूप से हुई है. इसके लिए प्रधानमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और तुरंत पद छोड़ना चाहिए." नेपाली कांग्रेस की ओली सरकार से अलग होने की तैयारी  थापा ने आगे कहा कि नेपाली कांग्रेस इस स्थिति की केवल गवाह या सहभागी बनकर नहीं रह सकती. उन्होंने साफ किया कि वह इस मुद्दे को पार्टी की बैठक में भी मजबूती से उठाएंगे और पार्टी को सरकार से अलग होने पर जोर देंगे. गौरतलब है कि सोमवार को हुए प्रदर्शनों में कमोबेश 20 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे. सरकार की तरफ से सुरक्षा बलों ने कड़ा रुख अपनाया, जिसे विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने दमनकारी करार दिया. अब लगातार दो मंत्रियों के इस्तीफे और नेपाली कांग्रेस महासचिव की सख्त मांग ने प्रधानमंत्री ओली की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

NDA का पलड़ा भारी! 427 से ज्यादा सांसदों का समर्थन, उपराष्ट्रपति चुनाव में PM मोदी ने किया मतदान की शुरुआत

नई दिल्ली देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद के लिए वैचारिक बनाम संख्यात्मक मुकाबले का मंच तैयार है. मंगलवार को कुल 782 सांसद (लोकसभा और राज्यसभा दोनों से) उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान करने जा रहे हैं. जीत सुनिश्चित करने के लिए, किसी भी उम्मीदवार को 391 वोटों के साधारण बहुमत की जरूरत होती है. वर्तमान राजनीतिक अंकगणित के मुताबिक, सत्तारूढ़ एनडीए को पहले से ही करीब 427 सांसदों का समर्थन हासिल है, जो स्पष्ट रूप से बहुमत के आंकड़े से ज्यादा है. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग शुरू, पीएम मोदी ने डाला पहला वोट . कुछ दलों ने मतदान से बनाई दूरी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन की संभावनाएं और मज़बूत हो गई हैं. इस बीच, सात सांसदों वाले बीजू जनता दल (बीजेडी) और चार सांसदों वाली भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और अकाली दल ने मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है. विपक्षी गठबंधन, INDIA ब्लॉक के पास करीब 324 सांसदों का समर्थन है. ऐसे में संख्याबल के आधार पर एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का अगला उपराष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा है. उनके खिलाफ विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी वैचारिक लड़ाई लड़ने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. दोनों पक्षों की तरफ से किस उम्मीदवार को कितना समर्थन हासिल है, आइए जानते हैं. एनडीए को 427 सांसदों का समर्थन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): लोकसभा – 240 सांसद राज्यसभा – करीब 100 सांसद तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) लोकसभा – 16 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद जनता दल (यूनाइटेड) जेडीयू लोकसभा – 12 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास): लोकसभा – 5 सांसद शिवसेना (शिंदे गुट) लोकसभा – 7 सांसद राज्यसभा – करीब 3 सांसद जन सेना पार्टी (जेएसपी) लोकसभा – 2 सांसद जनता दल (सेक्युलर) लोकसभा – 2 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) लोकसभा – 2 सांसद अपना दल, एजीपी, एजेएसयू, एचएएम (एस), अजीत पवार का एनसीपी गुट, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम), यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी (यूपीपी) और चुनिंदा निर्दलीय जैसे अन्य छोटे सहयोगी दल भी एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने वाले हैं.  INDIA ब्लॉक के साथ 324 सांसद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) लोकसभा – 99 सांसद राज्यसभा – 27 सांसद समाजवादी पार्टी (सपा) लोकसभा – 37 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लोकसभा – 29 सांसद राज्यसभा – 13 सांसद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) लोकसभा – 22 सांसद राज्यसभा – 10 सांसद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) लोकसभा – 9 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद एनसीपी (शरद पवार गुट) लोकसभा – 8 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) लोकसभा – 4 सांसद राज्यसभा – 5 सांसद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सीपीएम लोकसभा – 4 सांसद राज्यसभा – 4 सांसद जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) लोकसभा – 2 सांसद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) लोकसभा – 2 सांसद राज्यसभा – 2 सांसद अन्य छोटे सहयोगी, जैसे वीसीके (2 सांसद), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल – 3 सांसद), आरएसपी (1), और अन्य भी INDIA ब्लॉक के उम्मीदवार के पक्ष में वोट करेंगे. संभावित नतीजा एनडीए के पास पहले से ही बहुमत से कहीं ज़्यादा संख्याबल है और वाईएसआर कांग्रेस का भी समर्थन मिल रहा है, इसलिए सत्तारूढ़ गठबंधन अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है. दूसरी ओर, 300 से ज़्यादा सांसदों की मज़बूत संख्या के बावजूद, INDIA ब्लॉक चुनौती से काफ़ी पीछे है.