samacharsecretary.com

ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग ऐप्स पर नियंत्रण: लोकसभा में नया कानून पारित, ,समझें क्यों जरूरी है ये नया कानून

नई दिल्ली सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को रेग्युलेट करने वाला महत्वपूर्ण बिल लोकसभा से पास हो गया है. इसका मकसद ऑनलाइन मनी गेम्स और सट्टेबाजी पर पूरी तरह से बैन लगाना और ई-स्पोर्ट्स व सोशल गेम्स को बढ़ावा देना है. एक अनुमान के मुताबिक, हर साल करीब 45 करोड़ लोग इन ऑनलाइन मनी गेम्स के चक्कर में फंसकर 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक गंवा देते हैं.   भारत ने मोदी सरकार के कार्यकाल में बीते एक दशक में यूपीआई, सेमीकंडक्टर से लेकर 5जी टेक्नोलॉजी में तेजी से डेवलप किया है. हमारे देश में जो डिजिटल क्रांति आई है उसे देख दुनिया भी हैरान है. डिजिटल दुनिया में भारत ने तेजी से कदम बढ़ाए हैं. लेकिन, इसी तेजी के बीच ऑनलाइन गेमिंग की अंधेरी दुनिया में खतरे भी कई गुना बढ़ गए हैं. इसलिए मोदी सरकार ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव लाने जा रही है. बुधवार को मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में 'प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025' को पेश किया गया.  प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 को ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 भी कहा जा रहा है. सरकार का उद्देश्य इसके पीछे असली पैसे वाले खेलों पर लगाम लगाना है. साथ ही ई-स्पोर्ट्स और स्किल-बेस्ड सोशल गेम्स को बढ़ावा देना है.  आने वाले समय में फैंटेसी लीग, कार्ड गेम्स, ऑनलाइन लॉटरी, पोकर, रमी और सट्टेबाजी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने जा रही है. इनसे जुड़ी फाइनेंशियल लेन-देन और एडवरटाइजमेंट भी अब अपराध के कैटेगरी में आएंगे. मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए कैबिनेट बैठक में ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 को मंजूरी दे दी गई थी.      ऑनलाइन मनी गेमिंग को बैन करने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में अहम विधेयक पेश किया है.     हर साल अनुमानित 45 करोड़ लोग ऑनलाइन मनी गेम्स की लत में फंसकर आर्थिक नुकसान करते हैं.     इन गेम्स की वजह से भारत में लोगों को हर साल 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होता है. सरकार क्यों लाई ये विधेयक? केंद्र सरकार ऑनलाइन गेमिंग से लोगों को हो रहे वित्तीय और सामाजिक नुकसान को रोकने के लिए यह बिल लाई है. इसका नाम प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 है. सरकारी अनुमानों के मुताबिक, हर साल करीब 45 करोड़ लोग ऑनलाइन मनी गेम्स के जाल में फंसकर नुकसान उठाते हैं. इन गेम्स की लत सिर्फ पैसों का नुकसान ही नहीं बल्कि एक सामाजिक संकट बन चुकी है.  सरकारी सूत्रों ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार, इन गेम्स की वजह से आम लोगों को हर साल करीब 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान होता है. इसकी लत की वजह से सैकड़ों परिवार आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुके हैं. कई तो आत्महत्या और हिंसा जैसा गंभीर कदम भी उठा लेते हैं.  ऑनलाइन गेमिंग बिल के 3 प्रमुख हिस्से ई-स्पोर्ट्स: इस बिल के जरिए ई-स्पोर्ट्स को पहली बार कानूनी मान्यता दी जा रही है. अब तक देश में ऑनलाइन स्पोर्ट्स गेम्स का कोई कानूनी आधार नहीं है.  ऑनलाइन सोशल गेम्स: सरकार ने ऑनलाइन सोशल गेम्स को कानूनी मान्यता देने का प्रस्ताव रखा है. ये गेम्स आम लोगों के एजुकेशन के काम आते हैं ऑनलाइन मनी गेम्स: ऐसे ऑनलाइन गेम, जिनमें पैसों का लेन-देन होता है, उन पर बैन लगाने का प्रस्ताव है. इन गेम्स को प्रमोट करने वाले और ऐसी गेमिंग सर्विस देने वाली कंपनियों पर भी सख्त कार्रवाई के प्रावधान हैं. ऑनलाइन मनी गेम्स का प्रचार करने वालों और फंड ट्रांसफर करने वालों पर भी गाज गिरेगी.  नियम तोड़ने पर कितनी होगी सजा?     ऑनलाइन मनी गेमिंग सर्विस देने वालों को तीन साल तक की जेल या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.     ऑनलाइन मनी गेम्स का विज्ञापन करने वालों को दो साल तक की जेल या 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकेगा.     अगर कोई बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी सजा बढ़कर पांच साल तक हो सकेगी, जुर्माना भी ज्यादा लगेगा.  ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (AIGF) के चीफ एग्जिक्यूटिव रोलैंड लैंडर्स के मुताबिक, यह सेक्टर अब 2 खरब रुपये तक बढ़ चुका है. वित्त वर्ष 2025 में इस सेक्टर को 31 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल हुआ था और 20 हजार करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का भुगतान किया गया था.  लैंडर्स के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष तक भारत में 50 करोड़ से अधिक लोगों ने ऑनलाइन गेमिंग सर्विस का इस्तेमाल किया था. उनका कहना है कि इस बिल के कानून बनने से 400 से ज्यादा कंपनियां बंद हो सकती हैं और दो लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म हो जाएंगी.  कड़ाई क्यों जरूरी? सरकारी सूत्रों ने बताया है कि ये प्लेटफॉर्म केवल गेम्स नहीं हैं. बल्कि ये लोगों को मनोवैज्ञानिक जाल में फंसाते हैं और लोग इसकी लत के शिकार हो जाते हैं. उन्हें वित्तीय घाटा भी होता है. कई मामले तो ऐसे भी हैं जिसमें लोग आत्महत्या भी कर लेते हैं.  इसके साथ ही इन प्लेटफॉर्म के जरिए दूसरे देश से अवैध रूप से भारत में पैसे आते हैं (मनी लॉन्ड्रिंग), आतंकियों को फंडिंग और डिजिटल धोखाधड़ी की जाती है. बिल के बड़े प्रावधान क्या हैं? ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा: वैध खेल के रूप में मान्यता, ट्रेनिंग, नीति समर्थन और इवेंट्स. सोशल और शैक्षिक गेम्स को मंजूरी: जो सीखने, जागरूकता और सकारात्मक उपयोग को बढ़ाएं. रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध: ऑफर, विज्ञापन और लेन-देन सब बैन. ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी: राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी, रजिस्ट्रेशन और कार्रवाई की ताकत. कड़े दंड: ऑपरेटरों को 3 साल तक जेल और 1 करोड़ तक जुर्माना. विज्ञापन करने वालों को 2 साल जेल और 50 लाख जुर्माना. बार-बार अपराध करने वालों पर 5 साल तक की सजा और 2 करोड़ तक का दंड. कॉर्पोरेट पर भी शिकंजा इस बिल के पास होने के बाद इसके ज़रिए कॉर्पोरेट पर भी शिकंजा कसा जाएगा. कंपनी के अधिकारी और मैनेजमेंट सीधे जिम्मेदार होंगे. हालांकि स्वतंत्र निदेशकों को बचाव मिलेगा.  भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के साथ इसके प्रावधान को जोड़े गए हैं. जिसके तहत जांच एजेंसियां बिना वारंट सर्च, सीज और गिरफ्तारी कर पाएंगी. ये बिल क्यों है जरूरी? रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: यह बिल भारत को वैश्विक गेमिंग … Read more

भारत-रूस की नजदीकी पर अमेरिकी चिंता! टैरिफ के बीच बढ़ेगा व्यापार व तेल आपूर्ति

नई दिल्ली अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ के बीच रूस का बड़ा बयान है। रूस का कहना है कि यदि किसी देश में भारतीय उत्पादों पर रोक लग रही है तो रूस के बाजार में उनका स्वागत है। भारत में रूसी मिशन के डिप्टी चीफ रोमन बाबूश्किन ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अर्थव्यवस्था को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है, लेकिन उसे यह ध्यान रखना चाहिए कि दोस्त कभी पाबंदियां नहीं लगाते। रूस कभी इस तरह की पाबंदियां नहीं लगाएगा। उन्होंने कहा कि भारत और रूस ने हमेशा कठिन समय में सहयोग कायम रखा है। हम भारत को कच्चे तेल की सप्लाई जारी रखेंगे और इसके लिए मेकेनिज्म तैयार किया है। इसके अलावा रोमन बाबूश्किन ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन की मीटिंग से इतर पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात होगी। इस मीटिंग में कई अहम मसलों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि उन्होंने व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे को लेकर कहा कि इसकी तारीखें तय नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और 2030 तक यह 100 अरब डॉलर के पार हो जाएगा। इसके अलावा भारत को फर्टिलाइजर और तेल, गैस आदि की सप्लाई करने में रूस पहले नंबर पर कायम है। रूसी राजदूत ने कहा कि अमेरिका की रणनीति गलत है और उस पर ही भारी पड़ रही है। टैरिफ वार के चलते डॉलर पर भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ व्यापारिक असंतुलन को खत्म करने के लिए रूस कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि भारतीय निर्यात रूस में बढ़े। हम चाहते हैं कि मशीनरी, फार्मा, चाय और चावल जैसी चीजों का आयात भारत से बढ़ा लें। यही नहीं उनका कहना था कि अमेरिका ने टैरिफ अटैक का जो फैसला लिया है, वह गलत और एकतरफा है। यही नहीं उनसे मीडिया से सवाल किया कि क्या भारत की ओर से रूस से तेल खरीद रोकी जा सकती है। इस पर उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा नहीं लगता है। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ चर्चा करेंगे और सारे मसलों को दूर करेंगे। रूसी दूत बोले- भारत को देते हैं तेल में एक्स्ट्रा डिस्काउंट, सप्लाई चलती रहेगी रूसी राजनयिक ने कहा कि भारत हमारे लिए बहुत मायने रखता है। राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन के मसले पर पीएम मोदी से दो बार फोन पर बात की है। उन्होंने कहा कि भारत की जरूरत का 40 फीसदी तेल रूस मुहैया करा रहा है और दुनिया भर के अन्य देशों के मुकाबले 5 फीसदी डिस्काउंट देता है। उन्होंने कहा कि भारत और रूस की दोस्ती स्वाभाविक है। हमने साथ मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल तैयार की है। इसके अलावा अन्य हथियारों पर भी काम कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने चीनी विदेश मंत्री के भारत दौरे का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि रूस, भारत और चीन का सहयोग महत्वपूर्ण है। हम चाहते हैं कि यह जल्दी और मजबूती से आगे बढ़े। 'ऑपरेशन सिंदूर में हो गई रूसी हथियारों की टेस्टिंग' उन्होंने भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया और कहा कि यह रूसी हथियारों की टेस्टिंग का भी मौका था। उन्होंने कहा कि हमारे एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की इस जंग में टेस्टिंग हो गई। भारत जब भी एयर डिफेंस सिस्टम तैयार करेगा तो रूस उसका हिस्सा रहेगा।

स्कूल में खून-खराबा: छात्र की हत्या से अहमदाबाद में उपजा बवाल, तोड़फोड़ और झड़पें

अहमदाबाद अहमदाबाद के एक निजी स्कूल में दो बच्चों के बीच मामूली झगड़े ने हत्या और सांप्रदायिक तनाव का खौफनाक रूप ले लिया। अहमदाबाद के खोखरा में मंगलवार को 10वीं क्लास के एक बच्चे को 9वीं के छात्र को चाकू से गोद डाला। अस्पताल में बच्चे की मौत के बाद बवाल मच गया। पीड़ित और आरोपी छात्र के अलग-अलग समुदाय से होने की वजह से सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो गया। उग्र भीड़ ने बुधवार को स्कूल में तोड़फोड़ मचा दी। बताया जा रहा है कि 15 साल का मृतक छात्र एक निजी स्कूल में पढ़ता था। आठवीं क्लास एक बच्चे से एक सप्ताह पहले किसी बात को लेकर उसके कजिन का झगड़ा हुआ था। पुलिस के मुताबिक एक सप्ताह पहले पीड़ित छात्र के चचेरे भाई का झगड़ा 9वीं क्लास के एक छात्र के साथ हुआ था। मंगलवार को जब पीड़ित उनसे बात करने गया तो जिससे झगड़ा हुआ था उसके दोस्त ने चाकू से हमला कर दिया। पुलिस ने आरोपी छात्र को पकड़ लिया है और उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज भी जब्त किया है और घटना के समय मौजूद रहे बच्चों से बयान लिया गया है। आरोपी छात्र के दूसरे समुदाय से होने की वजह से घटना ने सांप्रदायिक तनाव का भी रूप से लिया। स्कूल में हत्या जैसी घटना से आक्रोशित परिजनों के अलावा हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भी बुधवार को उग्र प्रदर्शन करने लगे। स्कूल में तोड़फोड़ की गई। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी केस दर्ज करने की मांग की तो बहुत से लोग स्कूल से दूसरे समुदाय के सभी बच्चों को हटाने की मांग करने लगे। स्कूल के भीतर बड़ी संख्या में लोग घुस गए और तोड़फोड़ करने लगे। सूचना पाकर बड़ी संख्या में पुलिकर्मी स्कूल पहुंचे। नारेबाजी के बीच भीड़ और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। कई परिजनों ने आरोप लगाया कि स्कूल में कुछ छात्र हथियार और ड्रग्स जैसी चीजें लेकर आते थे, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उन्हें रोकने के लिए समय रहते कोई कदम नहीं उठाया।  

भारी बारिश से मुंबई बेहाल: जनजीवन अस्त-व्यस्त, लोकल सेवाएं देर रात दोबारा शुरू

मुंबई महाराष्ट्र आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले 24 घंटों में बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में छह लोगों की मौत हो गई है। नांदेड़ जिले में बाढ़ जैसी स्थिति के कारण पांच लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहीं एनडीआरएफ की कुल 18 टीमें राज्य के कई हिस्सों में तैनात हैं, साथ ही एसडीआरएफ की छह टीमें भी तैनात हैं। हार्बर लाइन लोकल ट्रेन 15 घंटे बाद बहाल मुंबई में हुई भारी बारिश से रेल पटरियों पर पानी भर जाने के कारण मंगलवार सुबह रुकी हार्बर लाइन की लोकल ट्रेन सेवाएं करीब 15 घंटे बाद बुधवार तड़के 3 बजे दोबारा शुरू हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि पानी उतरने के बाद सेवाएं बहाल की गईं। सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वानिल निला ने बताया कि मंगलवार सुबह 11:15 बजे ट्रैक डूबने के कारण पहले हार्बर लाइन और फिर मेन लाइन की सेवाएं बंद करनी पड़ीं। मंगलवार शाम 7:30 बजे छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से ठाणे के बीच मेन लाइन की सेवाएं शुरू कर दी गई थीं, लेकिन हार्बर लाइन, जो नवी मुंबई को दक्षिण मुंबई से जोड़ती है, रातभर बंद रही। कई हिस्सों में पटरियां 15 इंच तक पानी में डूबी रहीं। बुधवार सुबह सभी सार्वजनिक परिवहन सेवाएं- बसें, लोकल ट्रेनें और मेट्रो- सामान्य रूप से चलने लगीं। रेलवे ने यात्रियों से की अपील रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट दिया है, इसलिए केवल जरूरी होने पर ही यात्रा करें और सावधानी बरतें। वेस्टर्न रेलवे ने बताया कि मंगलवार की बारिश और जलभराव की वजह से उनकी कुछ लोकल ट्रेनें बुधवार को भी रद्द रहेंगी। मुंबई में कई लोकल ट्रेन सेवाएं रद्द डीआरएम – मुंबई सेंट्रल, पश्चिम रेलवे ने बताया कि मुंबई में भारी जलभराव के कारण आज कई लोकल ट्रेन सेवाएं रद्द कर दी गई हैं। इंडिगो ने मुंबई में भारी बारिश के मद्देनजर जारी की एडवाइजरी इंडिगो ने अपने एडवाइजरी में कहा- हम चाहते हैं कि आपकी यात्रा यथासंभव परेशानी मुक्त रहे, लेकिन प्रकृति की भी अपनी योजनाएं हैं। मुंबई में फिर से भारी बारिश की आशंका है, जिससे हवाई यातायात में रुकावट आ सकती है और उड़ानों का संचालन प्रभावित हो सकता है। हालांकि हम परिचालन को सुचारू रखने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं, फिर भी हम पहले से योजना बनाने की सलाह देते हैं। आपकी उड़ान अनुसूची में कोई भी बदलाव आपके पंजीकृत संपर्क विवरण के माध्यम से साझा किया जाएगा। बारिश में फंसे लोगों की मदद जारी वहीं बारिश के कारण कई जगहों पर फंसे लोगों की मदद के लिए तमाम लोग और संगठन सामने आए हैं। इस कड़ी में विहिप सदस्यों ने कल रात शहर में भारी बारिश के बाद लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर फंसे यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराया है। कई इलाकों में जलजमाव से हालात बदतर मुंबई में लगातार भारी बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।   बाढ़ के पानी में डूबा मोरया गोसावी मंदिर महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवाड़ स्थित मोरया गोसावी मंदिर बाढ़ के पानी में डूब गया। वहीं मंगलवार को पुणे के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण खड़कवासला बांध से पानी छोड़ा गया, जिसके बाद अधिकारियों ने मुथा नदी के आसपास के इलाकों को सतर्क कर दिया।   सांताक्रूज में 24 घंटों में 200 मिमी से ज्यादा बारिश मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई के पश्चिमी उपनगरों का प्रतिनिधित्व करने वाली सांताक्रूज वेधशाला ने बुधवार सुबह 8.30 बजे समाप्त हुए 24 घंटों में 200 मिमी बारिश दर्ज की। शहर में भारी बारिश के एक दिन बाद, यह जानकारी दी गई है। मंगलवार को जिन पड़ोसी जिलों में भी भारी बारिश हुई, उनमें रायगढ़ के लोकप्रिय माथेरान हिल स्टेशन में सबसे ज्यादा 382.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। कई इलाकों में भी भारी बारिश भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक अधिकारी ने बताया, 'दक्षिण मुंबई स्थित कोलाबा वेधशाला में 107.4 मिमी बारिश हुई, जबकि पश्चिमी उपनगरों स्थित सांताक्रूज वेधशाला ने 24 घंटों के दौरान 209 मिमी बारिश दर्ज की।' महानगर के अन्य इलाकों में भी तेज बारिश हुई। मंगलवार और बुधवार सुबह के बीच विक्रोली में 229.5 मिमी, मुंबई हवाई अड्डे पर 208 मिमी, बायकुला में 193.5 मिमी, जुहू में 150 मिमी और बांद्रा में 137.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट पड़ोसी जिलों में, रायगढ़ के माथेरान में सबसे अधिक 382.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, इसके बाद सतारा के महाबलेश्वर हिल स्टेशन में 278 मिमी, रायगढ़ के न्यू पनवेल में 217.5 मिमी, रायगढ़ के कर्जत में 211.5 मिमी, रत्नागिरी के चिपलून में 123.5 मिमी और ठाणे के भायंदर में 100.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। आईएमडी ने लोगों और स्थानीय अधिकारियों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है क्योंकि मुंबई और आसपास के जिलों के कुछ हिस्सों में रुक-रुक कर भारी बारिश जारी रहने की संभावना है।  

ईस्टर्न बॉर्डर पर जनरल लेवल वार्ता, भारत-चीन ने 10 मुद्दों पर पाया समझौता

नई दिल्ली चीन के विदेश मंत्री वांग यी का भारत दौरा काफी चर्चा में रहा. वह 18 और 19 अगस्त को भारत में थे. उन्होंने यहां भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधिमंडल स्तर की 24वें दौर की वार्ता में हिस्सा लिया. इस दौरान सीमा पर तनाव कम करने, शांति बढ़ाने और विवाद को सुलझाने पर दोनों पक्षों के बीच चर्चा हुई और 10 बिंदुओं पर सहमति बनी. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की. इस दौरान वांग यी ने कजान में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मुलाकात के बाद हुई प्रगति की तारीफ की और कहा कि 23वें दौर की वार्ता के बाद से सीमा क्षेत्र स्थिर रहे हैं.  दोनों पक्षों ने कजान में दोनों देशों के नेताओं की बैठक के बाद बनी सहमति के क्रियान्वयन में हुई प्रगति का मूल्यांकन किया और भी उल्लेख किया कि 23वें दौर की वार्ता के बाद से चीन और भारत के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी हुई है. – दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर प्रतिबद्धता जताई. साथ ही चीन-भारत संबंधों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रासंगिक मुद्दों को मैत्रीपूर्ण परामर्श के जरिए हल करने की जरूरत पर जोर दिया.  – भारत और चीन के बीचहुई विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं दौर की वार्ता में तीन पारंपरिक सीमा व्यापार बाजारों (Traditional Boundary Trade Markets) को फिर से खोलने पर सहमति बनी है. – दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा स्थिति को द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए और 2005 में दोनों देशों के बीच बनी सहमति के अनुरूप सीमा विवाद को हल करने के लिए एक न्यायसंगत, तार्किक और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य फ्रेमवर्क तलाशा जाए. – दोनों पक्षों ने चीन-भारत सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के कार्य तंत्र (WMCC) के ढांचे के तहत एक विशेषज्ञ समूह बनाने का फैसला किया है, जो उन क्षेत्रों में सीमांकन (Demarcation) की संभावनाओं को तलाशेगा, जहां परिस्थितियां अनुकूल हैं. – दोनों देशों के बीच सहमति बनी कि WMCC के तहत एक कार्यसमूह बनाया जाएगा, जो सीमा पर प्रभावी प्रबंधन और नियंत्रण को बढ़ावा देगा, ताकि शांति बनी रहे. – पश्चिमी सीमा पर पहले से चल रही सामान्य स्तर की वार्ता के अलावा, पूर्वी और मध्य सीमा क्षेत्रों में भी ऐसी वार्ता शुरू होगी.प श्चिमी क्षेत्र में जल्द ही नए दौर की वार्ता होगी.  – दोनों पक्षों ने राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से सीमा प्रबंधन और नियंत्रण तंत्र का उपयोग करने पर सहमति जताई.  – दोनों पक्षों ने सीमा-पार नदियों पर सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया और सीमा-पार नदियों के लिए विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र का उपयोग करके बाढ़ की जानकारी साझा करने के समझौता ज्ञापन को नवीनीकरण करने पर संचार बनाए रखने पर सहमति जताई. चीनी पक्ष ने मानवीय सिद्धांतों के आधार पर संबंधित नदियों की आपातकालीन जल संबंधी जानकारी भारतीय पक्ष के साथ साझा करने पर सहमति दी. – दोनों पक्षों ने तीन पारंपरिक सीमा व्यापार बाजारों को फिर से खोलने पर सहमति जताई. – दोनों पक्षों ने 2026 में चीन में 25वें दौर की वार्ता आयोजित करने पर सहमति जताई.

उपराष्ट्रपति पद का नामांकन दाखिल, सीपी राधाकृष्णन के साथ पीएम मोदी भी बने प्रस्तावक

 नई दिल्ली  उपराष्ट्रपति पद के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को अपना नामांकन दाखिल किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। वह उनके पहले प्रस्तावक बने। निर्वाचन अधिकारी को नामांकन पत्रों के चार सेट सौंपे गए।इस दौरान भाजपा और एनडीए के कई वरिष्ठ नेता भी संसद भवन पहुंचे और राधाकृष्णन के साथ मौजूद रहे। इस दौरान एकजुटता दिखाने की कोशिश की गई। सीपी राधाकृष्णन के नामांकन के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी और सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। जेडीयू से ललन सिंह और संजय झा, लोजपा (रामविलास) से चिराग पासवान, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के अलावा और भी कई नेता मौजूद थे। सी.पी. राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं। वे दो बार कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी के लंबे समय से सक्रिय सदस्य रहे हैं। वह महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। अपना नामांकन दाखिल करने से पहले संसद परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल जा कर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रेरणा स्थल में प्रतिष्ठित हस्तियों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत गठबंधन के अन्य नेता भी मौजूद थे। उन्होंने सबसे पहले महात्मा गांधी की विशाल प्रतिमा के समक्ष नमन किया और फिर अन्य प्रसिद्ध हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उपरराष्ट्रपति के चुनाव में संसद में संख्याबल के हिसाब से राधाकृष्णन का चुना जाना निश्चित माना जा रहा है। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी दलों का संयुक्त उम्मीदवार बनाया है।

नई कानून पहल: 30 दिन से अधिक जेल में रहने वाले नेता खो सकते हैं अपनी कुर्सी

नई दिल्ली केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में तीन विधेयक पेश करेगी, जिनका उद्देश्य प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है तो उन्हें उनके पद से हटाया जा सके. दरअसल, मौजूदा वक्त में ऐसा किसी भी कानून में प्रावधान नहीं है कि गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत की स्थिति में नेताओं को उनके पद से हटाया जा सके. इन्हीं खामियों को दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने तीन विधेयक तैयार किए हैं जो गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी नेताओं पर नकेल कसेंगे. केंद्र सरकार बुधवार को जो विधेयक पेश करेगी, उनमें संघ राज्य क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक 2025, संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 शामिल है. बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने के लिए लोकसभा में प्रस्ताव भी पेश करेंगे. क्या है केंद्र शासित संशोधन विधेयक? केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक, 2025 के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1963 (1963 का 20 ) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी और हिरासत की स्थिति में हटाया जा सके. इसलिए इस कानून की धारा 45 में संशोधन कर ऐसी स्थिति के लिए कानूनी प्रावधान करना जरूरी है. ये विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास करता है. संविधान का 130वां संशोधन संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025 के उद्देश्यों में कहा गया है कि संविधान में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी और हिरासत की स्थिति में हटाया जा सके. इसलिए संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन कर प्रधानमंत्री या केंद्रीय मंत्री और राज्यों व दिल्ली के मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का प्रावधान करने की ज़रूरत है. वहीं, नए प्रावधानों के तहत यदि कोई मंत्री, जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या राज्यों को मंत्री शामिल हैं को पांच साल या उससे अधिक की अवधि की सजा वाले अपराध के लिए लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है तो उसे पद से हटाया जा सकता है. J&K पुनर्गठन अधिनियम में जोड़ा जाएगा खंड जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 के उद्देश्यों में कहा गया है कि जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी और हिरासत की स्थिति में हटाया जा सके. इसलिए इसकी धारा 54 में संशोधन कर नया खंड (4A) जोड़ा जाएगा. 31वें दिन स्वत: हो जाएगा पदमुक्त इस खंड के अनुसार, यदि कोई मंत्री अपने कार्यकाल के दौरान लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है तो उसे 31 वें दिन मुख्यमंत्री की सलाह पर उपराज्यपाल द्वारा हटा दिया जाएगा. इसी क्रम में अगर मुख्यमंत्री द्वारा इस पर संज्ञान नहीं लिया जाता है तो अगले दिन वह मंत्री स्वत: पद से हट जाएगा. इसी तरह का तंत्र केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के लिए भी प्रस्तावित है, जहां हिरासत में लिए गए मंत्री या प्रधानमंत्री को लगातार 30 दिनों की हिरासत के 31वें दिन हटा दिया जाएगा. प्रतिनिधियों में जनता के विश्वास पर जोर विधेयक के उद्देश्य और कारणों के विवरण में संवैधानिक नैतिकता की रक्षा और निर्वाचित प्रतिनिधियों में जनता के विश्वास को बनाए रखने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि निर्वाचित नेता लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक हैं, लेकिन वर्तमान में संविधान में किसी ऐसे प्रधानमंत्री या मंत्री को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है जो गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार और हिरासत में हो. विवरण में ये भी कहा गया है कि ये अपेक्षा की जाती है कि पद पर आसीन मंत्रियों का चरित्र और आचरण किसी भी संदेह से परे हो.गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे, गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए मंत्री संवैधानिक नैतिकता और सुशासन के सिद्धांतों को बाधित या अवरुद्ध कर सकते हैं, जिससे जनता द्वारा उनमें रखा गया संवैधानिक विश्वास कमजोर हो सकता है.

सरकारी केंद्रीय कर्मचारियों-पेंशनर्स के लिए खुशखबरी: दिवाली से पहले सैलरी में बड़ा इजाफा

    नई दिल्ली सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए इस बार की दिवाली बेहद खास हो सकती है. बता दें कि केंद्र सरकार उनके लिए एक बड़ा तोहफा लेकर आने की तैयारी कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार दिवाली से पहले महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है. DA में बढ़त का ऐलान सितंबर के अंत या अक्टूबर की शुरुआत में हो सकता है. खास बात ये है कि इस बार महंगाई भत्ते में जो बढ़ोतरी होगी, वो 7वें वेतन आयोग के तहत आखिरी हो सकती है, क्योंकि 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू होने की संभावना है. 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशखबरी है।जुलाई में श्रम मंत्रालय ने अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के जनवरी से जून के आंकड़ें जारी कर दिए है, ऐसे में संभावना है कि दिवाली से पहले केन्द्र की मोदी सरकार कर्मचारियों पेंशनरों का महंगाई भत्ता बढ़ा सकती है। इसका लाभ 50 लाख कर्मचारियों और 67 लाख पेंशनरों को मिलेगा।यह 7वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्‍ते में आखिरी वृद्धि हो सकती है, क्योंकि 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू होने की उम्मीद है। जुलाई 2025 से फिर बढ़ेगा महंगाई भत्ता केन्द्र सरकार द्वारा महंगाई की दर को देखते हुए हर साल 2 बार जनवरी और जुलाई में केन्द्रीय कर्मचारियों व पेंशनरों का महंगाई भत्ता/महंगाई राहत की दरों में संशोधन किया जाता है, जो अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करता है। यह आंकड़े जनवरी से जून और जुलाई से दिसंबर के बीच जारी किए जाते है। 7वें वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों पेंशनरों का जनवरी 2025 से 2% डीए बढ़ाया गया था, जिसका ऐलान मार्च में हुआ था, जिसके बाद डीए 53% से बढ़कर 55% पहुंच गया है और अब जुलाई 2025 से फिर डीए की दरों में बदलाव होना है जो जनवरी से जून के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करेगा। कितना बढ़ सकता है DA? फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 55% DA मिल रहा है लेकिन अब इसमें 3 से 4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है. अगर सरकार 4% DA बढ़ाती है, तो यह बढ़कर 59% हो जाएगा. वहीं अगर 3% बढ़ोतरी होती है, तो DA 58% तक पहुंचेगा. कितनी बढ़ेगी सैलरी? अगर DA 3% बढ़ता है, तो जिन कर्मचारियों का बेसिक वेतन ₹18,000 है, उन्हें हर महीने ₹540 ज्यादा मिलेंगे. वहीं जिन पेंशनर्स की बेसिक पेंशन ₹9,000 है, उन्हें ₹270 प्रति माह का फायदा होगा. यानी दिवाली से पहले उनकी जेब में अतिरिक्त पैसा आ सकता है. हालांकि DA की नई दरें 1 जुलाई से लागू मानी जाएंगी, लेकिन सरकार इसका ऐलान सितंबरअक्टूबर में करती है. ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनर्स को जुलाई, अगस्त और सितंबर के तीन महीनों का एरियर भी मिलेगा. साल में दो बार होता है DA का संशोधन सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ते में संशोधन करती है. पहली बार जनवरी में और दूसरी बार जुलाई में. हर बार इसका ऐलान कुछ महीनों बाद किया जाता है, ताकि CPI-IW यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स का डेटा पूरा मिल सके और इसी आधार पर सरकार DA की दरें तय करती है. DA बढ़ाने के लिए सरकार श्रम ब्यूरो द्वारा जारी किए जाने वाले CPI-IW आंकड़ों का इस्तेमाल करती है. बीते 12 महीनों के औसत CPI-IW के आधार पर सरकार DA में बदलाव करती है और ये पूरी प्रक्रिया 7वें वेतन आयोग के नियमों के अनुसार होती है. इस बार 3 फीसदी डीए वृद्धि संभव, एरियर भी मिलेगा अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर गौर करें तो अंक 145 पर रहा और डीए स्कोर 58.18% के आसपास आ गया ,जो 3 % वृद्धि की ओर संकेत दे रहा है।संभावना है कि जुलाई 2025 से केन्द्र सरकार 3% डीए बढ़ा सकती है जिसके बाद डीए 55% से बढ़कर 58% पहुंच जाएगा।नई दरें जुलाई 2025 से लागू होंगी ऐसे में एरियर का भी भुगतान होगा। कयास लगाए जा रहे है कि दिवाली से पहले होने वाली कैबिनेट बैठक में वित्त मंत्रालय द्वारा डीए वृद्धि का प्रस्ताव रखा सकता है, जिसमें मंजूरी मिलने के बाद आदेश जारी किए जाएंगे। यह दर जुलाई-दिसंबर के लिए होगी।अगर सितंबर में नई दरों का ऐलान होता है तो अक्टूबर में खाते में सैलरी बढ़कर आएगी और अगर अक्टूबर में लाभ मिलता है तो नवंबर में सैलरी बढ़कर मिलेगी। आईए जानते है कैसे होती है महंगाई भत्ते की गणना     केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते की गणना करने का एक फॉर्मूला है। फॉर्मूला है: 7वां सीपीसी डीए% = [{पिछले 12 महीनों के लिए एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू (आधार वर्ष 2001=100) का 12 महीने का औसत – 261.42}/261.42×100]     यह फॉर्मूला उन केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर लागू होगा जिन्हें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वेतन मिलता है। डीए%= (392.83-261.42)/261.42×100 = 50.26     पिछले 12 महीनों का औसत सीपीआई-आईडब्ल्यू 392.83 है। फॉर्मूले के मुताबिक, डीए मूल वेतन का 50.28 फीसदी आ रहा है। इसलिए, केंद्र सरकार महंगाई भत्ते को 50% (दशमलव बिंदुओं को नजरअंदाज करते हुए) तक बढ़ा सकती है।  

कैसे मोदी के तीसरे कार्यकाल में और मजबूत हुए बीजेपी-संघ के रिश्ते

नई दिल्ली आम तौर पर भारतीय जनमानस में यह मान लिया गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी एक ही है. इसके पीछे विपक्ष का दुष्प्रचार भी रहा है. पर इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है कि बीजेपी और संघ आपस में इस तरह घुल मिले हैं कि ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि ये दो जिस्म एक जान हैं. पर ऐसा भी नहीं है कि दोनों में मतभेद नहीं होते रहे हैं. संघ और बीजेपी के रिश्ते साल दर साल बनते बिगड़ते रहे हैं. बहुत ऊंचे दर्जे के मतभेद दोनों ही संगठनों के बीच पैदा होते रहे हैं . पर खासियत यह रही है कि बहुत जल्दी दोनों ही संगठनों के नेता आपस में मेल मिलाप भी करते रहे हैं. 2024 में भी दोनों के बीच रिश्ते बहुत हद तक बिगड़ गए. लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद  बीजीपी और संघ के रिश्तों की तल्खी खुल कर जनता के सामने आ गई थी. पर नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल, जो जून 2024 में शुरू हुआ, अप्रत्याशित रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रिश्तों का स्वर्णकाल बन गया. 30 मार्च 2025 को मोदी का नागपुर दौरा इस पुनर्मिलन का प्रतीक बना, जहां उन्होंने RSS संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी और मोहन भागवत के साथ भविष्य की रणनीति तैयार की. उसके बाद से लगातार यह देखा गया कि बीजेपी और आरएसएस का रिश्ता और मजबूत होता जा रहा है. लाल किले की प्राचीर से संघ की उपलब्धियों की बखान हो या उपराष्ट्रपति पद के लिए संघ बैकग्राउंड वाले सीपी राधाकृष्णन का चयन हो, ऐसा लगता है कि आरएसएस-बीजेपी के रिश्तों का स्वर्ण काल चल रहा हो.   1-मोदी और संघ का संदेश, ताली दोनों हाथ से बजती  जनता में ऐसा समझा जाता है कि संघ बीजेपी का अभिभावक है. इसलिए स्वाभाविक तौर पर यह सवाल बनता है कि पिछले क़रीब ग्यारह साल से केंद्र में काम कर रही बीजेपी सरकार के प्रदर्शन को संघ कैसे आंकता है? इसी साल मार्च में बेंगलुरु में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बैठक की तीसरी और आख़िरी पत्रकार वार्ता में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि बीजेपी का आंकलन देश के लोगों ने किया है. संघ देश से अलग नहीं है. और अभिभावक की बात है तो हम किसी भी सरकार के अभिभावक बनने को तैयार हैं, सिर्फ़ भाजपा के नहीं. होसबाले ने स्पष्ट कहा कि कोई भी पार्टी आए और हमारे विचार मिलें तो हम अभिभावक बन सकते हैं. कोई आता नहीं है वो अलग बात है. होसबाले की बातों से हम समझ सकते हैं कि बीजेपी और संघ के बारे में हम जितना समझते हैं, वास्तविकता उससे कहीं अलग है. कहा जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी कई मौकों पर आरएसएस से सलाह लिया करतीं थीं. वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने अपनी एक किताब में इंदिरा गांधी के करीबी सहयोगी अनिल बाली के हवाले से लिखा है कि, आरएसएस ने 1980 में इंदिरा गांधी को सत्ता में आने में मदद की थी. नीरजा चौधरी ने पुस्तक में लिखा है कि कांग्रेस के प्रति मुसलमानों की नाराजगी को देखते हुए वह अपनी राजनीति का हिंदूकरण करना चाहती थीं, क्योंकि उन्हें पता था कि आरएसएस की ओर से एक मौन संकेत या यहां तक कि उनके प्रति मुसलमानों का एक तटस्थ रुख भी इसमें मददगार हो सकता है. उपरोक्त बातें लिखने का मतलब सिर्फ इतना है कि संघ और बीजेपी किसी कानून से बंधे हुए नहीं हैं. दोनों अपने रास्ते कभी भी अलग करने के लिए स्वतंत्र हैं. पर नरेंद्र मोदी दूरदर्शी राजनीतिज्ञ हैं. वो बीजेपी को आगे ले जाने के लिए दूसरी विचारधारा वालों से समझौते करते रहे हैं. आरएसएस की विचारधारा तो उनके रगों में दौड़ रहा है. जाहिर है कि मोदी ने यही सोचकर संघ के साथ बीजेपी के रिश्तों को उस ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश की है, जहां तक दोनों आज तक नहीं पहुंचे थे.  2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, और उसे एनडीए सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ा. इससे पार्टी को अपनी संगठनात्मक ताकत को मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई है. हरियाणा और महाराष्ट्र और दिल्ली विधानसभा चुनावों में संघ ने बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए छोटी-छोटी बैठकों का आयोजन किया, जिससे दोनों के बीच सहयोग बढ़ा.  शायद यही कारण है कि बीजेपी के संगठनात्मक चुनावों में संघ की पृष्ठभूमि वाले नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है. कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) या संघ से जुड़े नेताओं को चुना गया. यह कदम दोनों संगठनों के बीच समन्वय को दर्शाता है.  उपराष्ट्रुपति पद के लिए कैंडिडेट के चयन में भी संघ बैकग्राउंड वाले सीपी राधाकृष्‍णन को प्राथमिकता और लालकिले के प्राचीर से तारीफ ने इस संबंध को और मजबूती प्रदान की है. उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में बीजेपी का अध्यक्ष भी कोई संघ बैकग्राउंड वाला व्यक्ति ही आएगा. 2-पिछले 2 सालों में संघ और बीजेपी के रिश्ते 30 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का RSS मुख्यालय, नागपुर में मोदी ने RSS संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी और मोहन भागवत से मुलाकात की. इसी तरह, 15 अगस्त 2024 को लाल किले से स्वतंत्रता दिवस भाषण में मोदी ने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक संगठनों की तारीफ की, जिसे अप्रत्यक्ष रूप से RSS के प्रति संकेत माना गया. 15 अगस्त 2025 के अपने भाषण में पीएम मोदी ने आरएसएस की भूरि-भूरि तारीफ की.  हालांकि, इस अवधि में कई मौकों पर RSS और बीजेपी के बीच दूरी बढ़ती नजर आई. नवंबर 2024 में मोहन भागवत का 75 साल की उम्र में रिटायरमेंट बयान को मोदी और शाह पर निशाना माना गया. फरवरी 2025 में बीजेपी अध्यक्ष के चयन में देरी और RSS के पसंदीदा उम्मीदवारों को नजरअंदाज करना भी तनाव को बढ़ाने वाला समझा गया. RSS बीजेपी को अपनी वैचारिक संतान मानता है, लेकिन वह अपनी स्वतंत्र पहचान और प्रभाव बनाए रखना चाहता है. बीजेपी, विशेषकर मोदी-शाह युग में, केंद्रीकृत शक्ति और चुनावी रणनीति पर जोर देती है, जो कभी-कभी RSS की सांस्कृतिक और संगठनात्मक प्राथमिकताओं से टकराती है.  3-नड्डा के एक बयान के चलते … Read more

पुतिन का ऐलान: मैं जेलेंस्की से जरूर मिलूंगा, युद्ध की पृष्ठभूमि में बातचीत

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि वो यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मिलने के लिए तैयार हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन से फोन पर बात करते हुए यह बात कही है। रुबियो ने कहा कि तीन साल से चल रहे युद्ध के बाद पुतिन का जेलेंस्की से मिलने के तैयार होना एक बड़ी बात है। रुबियो ने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा कि दोनों की मुलाकात के बाद युद्ध खत्म हो जाएगा, लेकिन कम से कम दोनों नेता एक दूसरे के साथ बात तो कर रहे हैं। यह एक बड़ी बात है। रुबियो ने आगे कहा कि हम पुतिन और जेलेंस्की की बैठक की दिशा में काम कर रहे हैं। अगर दोनों नेता एक दूसरे से बात करने के लिए तैयार हो जाते हैं तो यह त्रिपक्षीय बैठक भी हो सकती है जहां दोनों नेताओं के साथ ट्रंप भी बैठ सकते हैं। जल्द ही तीनों नेताओं की होगी मुलाकात: ट्रंप जेलेंस्की से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि जेलेंस्की से मिलने के बाद मैंने राष्ट्रपति पुतिन को फोन किया और राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच एक निर्धारित स्थान पर बैठक की व्यवस्था शुरू कर दी। उम्मीद है कि हम तीनों जल्द मिलेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्होंने रूस के साथ शांति समझौते के तहत यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर चर्चा की है, जिसमें यूरोप अग्रणी भूमिका निभा रहा है और वाशिंगटन के साथ समन्वय कर रहा है। जेलेंस्की ने ओवल ऑफिस में ट्रंप से आमने-सामने की मुलाकात भी की।