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इस साल का पहला और आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, तारीख 7-8 सितंबर तय

इंदौर  साल 2025 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण, जिसे 'ब्लड मून' के नाम से भी जाना जाता है, अगले महीने दिखने वाला है। सितंबर  महीने में यह खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। यह चंद्र ग्रहण कई देशों के साथ-साथ भारत में भी नजर आएगा। ऐसे में सूतक  काल भी मान्य होगा। जो जानते हैं यह खगोलीय घटना कब होगी और सूतक काल का समय क्या होगा? साल का आखिरी और दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में 7 सितंबर को दिखेगा। इसी दिन पितृपक्ष की भी शुरुआत होगी। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा।  इस दौरान चंद्रमा पूर्ण से गुजरेगा और एक चमकदार लाल रंग के गोले में बदल जाएगा। यानि इस दिन चंद्रमा लाल रंग का होगा, जिसे बल्ड मून कहा जाता है, जो कई सालों में एक बार दिखाई देता है। चंद्र ग्रहण करीब चार घंटे तक रहेगा। उज्जैन की जीवाजी वैधशाला के अधीक्षक राजेंद्र गुप्त ने बताया कि दिनांक 7-8 सितंबर 2025 को पूर्ण चन्द्र ग्रहण की खगोलीय घटना हो रही है। भारतीय समय के अनुसार पूर्ण चन्द्र ग्रहण का प्रारंभ 7 सितंबर 2025 को रात्रि 09:56:08 बजे से शुरू होगा। मध्य की स्थिति मध्यरात्रि 11:41:08 बजे पर होगी। इस समय चन्द्रमा का 136.8 प्रतिशत भाग पृथ्वी की छाया से ढका हुआ दृष्टिगोचर होगा अर्थात् पूर्ण चन्द्र ग्रहण की स्थिति दृष्टिगोचर होगी। ग्रहण के मोक्ष की स्थिति दिनांक 8 सितंबर 2025 को रात्रि 01:26:08 बजे पर होगी। यह ग्रहण भारत में पुराण रूप से दिखाई देगा। यह पूर्ण चन्द्र ग्रहण अंटार्कटिका, पश्चिमी प्रशांत महासागर, आस्ट्रेलिया, एशिया, हिन्द महासागर व यूरोप में भी दिखेगा। चन्द्र ग्रहण की स्थिति में पृथ्वी, सूर्य तथा चन्द्रमा के मध्य में होती है तथा पूर्ण ग्रहण की स्थिति में पृथ्वी की छाया से चन्द्रमा का पूर्ण भाग ढकता है। इसीलिए इसे पूर्ण चन्द्र ग्रहण कहते हैं। कब और कितने बजे लगेगा पूर्ण चंद्रग्रहण भारतीय समय के अनुसार, 7 सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण रात 9:57 बजे शुरू होगा और 8 सितंबर को 1:26 बजे तक रहेगा। ग्रहण का स्पर्श रात 11:09 बजे होगा, जबकि मध्यकाल रात 11:42 बजे होगा। इसका मोक्ष काल रात 12:23 बजे से शुरू होगा। कुल मिलाकर, यह चंद्र ग्रहण लगभग 4 घंटे तक चलेगा। एक घंटे से ज्यादा समय तक चलने वाला चरम चरण तब होगा जब चंद्रमा अपने सबसे गहरे लाल रंग में दिखाई देगा। सूतक काल का समय चंद्र ग्रहण का सूतक काल 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगा। दरअसल, चंद्र ग्रहण के शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों को नहीं किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण में मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं। साल का आखिरी और पूर्ण चंद्रग्रहण भारत के कई शहरों में दिखाई देगा। यह ग्रहण दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, बेंगलुरु समेत कुछ और शहरों में दिखाई देगा। भारत के अलावा ये ऑस्ट्रेलिया, अमेरिकी, फिजी और न्यूजीलैंड में भी दिखाया देगा।  क्या होता है 'ब्लड मून'?  खगोलीय वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया से पूरी तरह ढक जाएगा, जिससे वह लाल रंग का दिखाई देगा। यह नजारा भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्सों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। खगोलशास्त्रियों ने इसे साल की सबसे खास खगोलीय घटनाओं में से एक बताया है। बता दें कि ब्लड मून पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान होता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के ठीक बीच में आ जाती है।  

राज्यों को मिला 4.28 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर राजस्व, केंद्र ने किया ट्रांसफर

नई दिल्ली केंद्र सरकार को चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से जुलाई की अवधि में 10,95,209 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जो कि वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान का 31.3 प्रतिशत है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को दी गई। सरकार ने बताया कि इसमें से शुद्ध कर राजस्व 6,61,812 करोड़ रुपए, गैर-कर राजस्व 4,03,608 करोड़ रुपए और गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां 29,789 करोड़ रुपए हैं। वित्त मंत्रालय ने कहा कि केंद्र ने इस अवधि के दौरान कर राजस्व के रूप में राज्य सरकारों को 4,28,544 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हैं, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 61,914 करोड़ रुपए अधिक है। इस अवधि के दौरान केंद्र द्वारा किया गया कुल व्यय 15,63,625 करोड़ रुपए है, जो 2025-26 के संबंधित बजट अनुमान का 30.9 प्रतिशत है। इसमें से 12,16,699 करोड़ रुपए राजस्व खाते में से और 3,46,926 करोड़ रुपए पूंजी खाते में से खर्च किए गए हैं। कुल राजस्व व्यय में ब्याज भुगतान 4,46,690 करोड़ रुपए है, जबकि सब्सिडी 1,13,592 करोड़ रुपए है। समीक्षा अवधि में राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों और बिजली क्षेत्रों में बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर सरकार का पूंजीगत व्यय एक साल पहले के 2.6 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 3.5 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया है। यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है क्योंकि ये बुनियादी ढांचा परियोजनाएं विकास दर को बढ़ावा देती हैं और अधिक रोजगार और आय सृजन पर गुणक प्रभाव डालती हैं। सरकार का राजकोषीय घाटा भी पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित बजट अनुमान के 29.9 प्रतिशत पर नियंत्रण में है। राजकोषीय घाटे में कमी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। इससे सरकार की उधारी में कमी आती है, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में कॉर्पोरेट और उपभोक्ताओं को ऋण देने के लिए अधिक धनराशि बचती है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है। कम राजकोषीय घाटा मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने में भी मदद करता है।

LG मनोज सिन्हा ने वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन जांच के लिए गठित की कमेटी, 2 हफ्ते में रिपोर्ट

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्री माता वैष्णो देवी मार्ग पर हुई भूस्खलन की घटना को लेकर बड़ा आदेश दिया है। उन्होंने हादसे के कारणों की जाँच के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित करने के निर्देष दिए हैं। एलजी मनोज सिन्हा ने जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय तीन सदस्यीय समिति के गठन का आदेश दिया है। जम्मू के संभागीय आयुक्त और जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक इस समिति के दो अन्य सदस्य हैं। समिति को घटना के कारणों की विस्तार से जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। कमेटी भूस्खलन की वजहों की विस्तार से जाँच करने के साथ-साथ और अन्य चूक को इंगित करेगी। कमेटी को भूस्खलन के दौरान किए गए बचाव और राहत उपायों के रूप में प्रतिक्रियाओं का आकलन भी करना होगा। इसके अलावा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उपयुक्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और उपाय भी सुझाने होंगे। समिति दो हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट उपराज्यपाल को सौंपेगी। दरअसल, 27 अगस्त 2025 को श्री माता वैष्णो देवी मार्ग के पास अर्द्धकुंवारी मार्ग पर स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास श्रद्धालुओं का बड़ा दल चल रहा था। उसी समय भूस्खलन हुआ और पहाड़ों से बड़े-बड़े पत्थर टिन के शेड को चीरते हुए गिरे। इस दौरान वहां से गुजर रहे श्रद्धालु इसकी की चपेट में आ गए और मलबे में दब गए। इसमें 35 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी. 15 के शव उनके घरों में भेज दिए गए हैं। वहीं सात शवों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है।

प्रधानमंत्री का इस्तीफा या हटना? अदालत ने सुनाया अहम फैसला

थाईलैंड  थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा को आज अदालत ने एक बड़ा झटका दिया है। संवैधानिक अदालत ने उन्हें नैतिक दुर्व्यवहार के आरोप में स्थायी रूप से प्रधानमंत्री के पद से हटा दिया है। शिनावात्रा को पिछले महीने ही इस मामले की जांच के लिए निलंबित किया गया था।   क्या था पूरा मामला? शिनावात्रा पर थाईलैंड और कंबोडिया के बीच चल रहे सीमा विवाद में नैतिक दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया था। इस मामले की जांच के लिए पिछले महीने अदालत ने उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। उस दौरान डिप्टी पीएम फुमथम वेचायाचाई को अंतरिम रूप से प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।   बता दें कि आज यानि शुक्रवार 29 अगस्त को अदालत ने इस मामले पर अंतिम फैसला सुनाते हुए शिनावात्रा को पद से हटाने का आदेश दिया है जिससे थाईलैंड की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है।  

संयुक्त अंतरिक्ष मिशन से स्टार्टअप्स के लिए बढ़ेंगे सहयोग के अवसर, पीएम मोदी का बयान

टोक्यो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जैक्सा) के संयुक्त अंतरिक्ष मिशन दोनों देशों के उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को नई गति देंगे। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को टोक्यो में कही।  जापान के अखबार द योमिउरी शिम्बुन को दिए साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा कि ये संयुक्त मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के छायायुक्त क्षेत्रों की गहन समझ विकसित करने में भी मदद करेंगे। उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष क्षेत्र में हमारी सरकार-से-सरकार साझेदारी इसरो और जैक्सा के बीच सहयोग की ऐसी संस्कृति बना रही है, जिससे दोनों देशों के उद्योग और स्टार्टअप्स भी जुड़ रहे हैं। इससे एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार हो रहा है, जहां प्रयोगशालाओं से लॉन्चपैड तक और शोध से वास्तविक जीवन अनुप्रयोगों तक नवाचार का प्रवाह दोनों ओर से हो रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे खुशी है कि भारत और जापान चंद्रयान श्रृंखला के अगले मिशन यानी लूपेक्स (लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन) के लिए हाथ मिला रहे हैं। यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी छाया वाले क्षेत्रों की हमारी समझ को और गहरा करेगा।” चंद्रयान-5 चंद्रयान श्रृंखला का पांचवां मिशन है, जिसे लूपेक्स भी कहा जाता है। इसरो और जैक्सा का यह संयुक्त मिशन वर्ष 2027-28 में जापान के एच3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में जैक्सा का रोवर और इसरो का लैंडर शामिल होगा, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में जल-बर्फ की खोज और विश्लेषण करेगा। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि दोनों देशों की वैज्ञानिक टीमें मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान की नई सीमाओं को छुएंगी। उन्होंने कहा, “हमारी साझेदारी न केवल अंतरिक्ष में क्षितिज का विस्तार करेगी, बल्कि धरती पर जीवन को भी बेहतर बनाएगी।” भारत की अंतरिक्ष यात्रा को प्रधानमंत्री ने “हमारे वैज्ञानिकों के संकल्प, मेहनत और नवाचार की कहानी” बताया और कहा कि अंतरिक्ष भारत के लिए अगला आयाम है। उन्होंने कहा, “चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता से लेकर हमारी अंतरग्रहीय मिशनों में प्रगति तक, भारत ने लगातार साबित किया है कि अंतरिक्ष अंतिम सीमा नहीं, बल्कि अगली सीमा है।” पीएम मोदी ने यह भी बताया कि कैसे अंतरिक्ष विज्ञान का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन में कृषि से लेकर आपदा प्रबंधन, संचार और अन्य क्षेत्रों में दिखता है। प्रधानमंत्री मोदी 29-30 अगस्त तक जापान की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। यह यात्रा जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के आमंत्रण पर हो रही है। यह उनका जापान का आठवां दौरा है। इससे पहले वे मई 2023 में जापान आए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के टोक्यो से भारत में बड़े पैमाने पर बुलेट ट्रेन के विस्तार का किया ऐलान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के टोक्यो से भारत में बड़े पैमाने पर बुलेट ट्रेन के विस्तार का ऐलान किया है। उन्होंने ने शुक्रवार को कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल भारत और जापान के बीच एक प्रमुख परियोजना है और हमारा लक्ष्य कुछ वर्षों में यात्री सेवाएं शुरू करना है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना तो चल ही रही है। हमने एक बड़ी महत्वकांक्षा का अनावरण किया है। हमारे देश में हाई-स्पीड रेल का 7 हजार किलोमीटर लंबा नेटवर्क बनाना। मेक इन इंडिया के तहत बनेगा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क जापान की अपनी यात्रा के दौरान योमिउरी शिम्बुन को दिए गए साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि इसका अधिकांश हिस्सा मेक इन इंडिया के माध्यम से होगा, ताकि यह कार्यक्रम टिकाऊ और व्यवहार्य हो। उन्होंने कहा, "मैं इस प्रयास में जापानी कंपनियों की सक्रिय भागीदारी का स्वागत करता हूं।"   हाई-स्पीड रेल नेटवर्क इन क्षेत्रों पर भी नजर प्रधानमंत्री ने कहा, "मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत और जापान के बीच एक प्रमुख परियोजना है। हमारा लक्ष्य कुछ वर्षों में यात्री सेवाएं शुरू करना है।" पीएम मोदी ने कहा कि भारत-जापान सहयोग को हाई-स्पीड रेल से आगे बढ़ाकर गतिशीलता के अन्य क्षेत्रों को भी कवर करने की क्षमता है, जिसमें बंदरगाह, विमानन, जहाज निर्माण, सड़क परिवहन, रेलवे और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां भारत ने महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है।  

टैरिफ विवाद पर शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान– पूरे देश में देशभक्ति का जज्बा जरूरी

मैसूर  भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सबके निशाने पर आ गए हैं। भारत में स्वदेशी प्रोडक्ट्स के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल की अपील की जा रही है। इस बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ऐसी ही अपील करते हुए ट्रंप का बिना नाम लिए उन्हें अधिनायकवादी कह दिया है। उन्होंने कहा है कि आज टैरिफ लगाया जा रहा है, ऐसे में पूरे देश में देशभक्ति की भावना प्रज्वलित होनी चाहिए और स्वदेशी उत्पाद का इस्तेमाल करना चाहिए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ''मैं एक निवेदन करना चाहता हूं, विचारधारा के राजनीतिक मतभेद तो हैं, लेकिन राष्ट्रहित के मुद्दों पर पूरे देश को एक साथ खड़ा होना चाहिए। कुछ देशों के नेता अधिनायकवादी जैसा व्यवहार कर रहे हैं, जो पूरी दुनिया के लिए संकट बन गया है। ऐसे में, मैं खड़े होकर यह कहने का साहस करता हूं कि, भौतिकवाद की आग में जलती हुई मानवता को, अगर कोई शाश्वत शांति का मार्ग दिखाएगा, तो वह हमारा भारत, हमारा देश ही होगा। इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है, इसलिए जरूरी है कि हमारा देश मजबूत बने।'' केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, ''हमारे देश को दुनिया के लिए एक दिशा निर्धारित करने का प्रयास करना चाहिए। इसलिए, मैं आज भारत के सामने मौजूद चुनौतियों के विस्तार में नहीं जाना चाहता, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अपील की है। आज का ताजा संकट, टैरिफ लगाए जा रहे हैं, ऐसे माहौल में, पूरे देश में देशभक्ति की भावना प्रज्वलित होनी चाहिए। प्रत्येक भारतीय को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने दैनिक जीवन में केवल उन्हीं उत्पादों का उपयोग करेंगे जो हमारे देश में बने हैं। यह जरूरी है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो। मुझे पूरा विश्वास है कि देशवासी इस दिशा में एक नया इतिहास रचेंगे।''  

भारी बारिश ने बिगाड़ा दिल्ली-NCR का हाल, 250 फ्लाइट्स प्रभावित, सड़कें बनी तालाब

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में भारी बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजधानी की सड़कें तालाब में बदल गई हैंजिससे ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो गई है। इसके अलावा फ्लाइट ऑपरेशन पर मौसम का असर देखने को मिल रहा है। एक तरफ दिल्ली एयरपोर्ट ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है तो वहीं flightradar24.com के मुताबिक खराब मौसम के चलते दिल्ली एयरपोर्ट पर आने-जाने वाली करीब 250 फ्लाइट लेट चल रही हैं। भारी बारिश और जलभराव का सिलसिला दिल्ली एनसीआर में आगे भी जारी रह सकता है क्योंकि मौसम विभाग ने फिर भारी बारिश की चेतावनी देते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा है। दिल्ली एनसीआर में पिछले 24 घंटों में भारी बारिश हुई है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव हो गया है। नालों का पानी सड़कों पर आ गया है, जिससे जलभराव की समस्या और भी बढ़ गई है। आईएमडी के अनुसार, अगले 2-3 घंटों में दिल्ली के कई हिस्सों में मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम एजेंसी ने लोगों को घर के अंदर रहने और पेड़ों या कमज़ोर ढाचों के नीचे न छिपने की सलाह दी है। उन्हें घर से निकलने से पहले ट्रैफिक की भी जांच करने की सलाह दी गई है। उधर दिल्ली एयरपोर्ट ने भी यात्रियों के लिए एडवाइडरी जारी की है।   दिल्ली एयरपोर्ट ने कहा है कि मौसम विभाग ने दिल्ली में मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है। फिलहाल उड़ान संचालन सामान्य है लेकिन यात्रियों को सलाह दी डाती है कि उड़ानों से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए संबंधित एयरलाइन से संपर्क करें। उधर दिल्ली में बारिश के चलते प्रगति मैदान, डिफेंस कॉलोनी और प्रीत विहार जैसे इलाकों में पानी भर गया है। पश्चिम विनोद नगर, एम्स, पटपड़गंज, मयूर विहार और संगम विहार जैसे इलाकों में जलभराव की स्थिति रही। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली-नोएडा-डायरेक्ट (डीएनडी) फ्लाईवे, मथुरा रोड, विकास मार्ग, आईएसबीटी, गीता कॉलोनी और राजाराम कोहली मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। बदरपुर से आश्रम तक वाहनों की लाइन लग गई, जिससे ऑफिस जाने वालों और स्कूल बसों को भारी असुविधा हुई। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने और गाड़ियों के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए टीम को कई स्थानों पर तैनात किया गया है। एक अधिकारी ने बताया, बारिश और कुछ इलाकों में जलभराव के कारण यातायात धीमा रहा। स्थिति को सामान्य बनाने और यात्रियों की सहायता के लिए हमारे कर्मियों को तैनात किया गया है।  

जरांगे के दोहरे दांव से BJP परेशान, गणेशोत्सव के बीच बढ़ा आरक्षण का शोर

मुंबई  महाराष्ट्र एक तरफ जहां 10 दिवसीय गणेशोत्सव के रंग में रंगा हुआ है और गणपति की भक्ति में डूबा हुआ है, उसी बीच मराठों को आरक्षण दिलाने के लिए लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई के आजाद मैदान में अपना अनशन शुरू कर दिया है। वे राज्य में देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार से मराठों के लिए आरक्षण का अपना वादा पूरा करने की मांग कर रहे हैं। जरांगे ने पिछले साल भी मुंबई में मार्च किया था, तब एकनाथ शिंदे सरकार ने उन्हें मराठों को आरक्षण देने का भरोसा दिलाकर मना लिया था। हालाँकि, मनोज जरांगे और मराठा आंदोलनकारियों को सरकार ने कुछ शर्तों के साथ आजाद मैदान में सिर्फ एक दिन के लिए विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी है,लेकिन जरांगे ने अनिश्चितकालीन अनशन का ऐलान किया है। लिहाजा, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच टकराव की संभावना बढ़ गई है। त्योहारों के मौसम में मराठों के प्रदर्शन ने मुंबई पुलिस की भी चिंता बढ़ा दी है। इसकी बानगी तब देखने को मिली, जब शुक्रवार के विरोध प्रदर्शन के लिए आजाद मैदान पहुंच रहे मराठों की वजह से शहर की सड़कें जाम हो गईं और लोगों को अपने-अपने दफ्तर जाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि, व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए मंबई पुलिस ने 1,500 कर्मियों को तैनात किया था लेकिन वे नाकाफी साबित हुए। भाजपा की क्या चिंता? अब बात भाजपा की टेंशन की। पहली चिंता तो गणेशोत्सव के दौरान मंबई में मराठों के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की वजह से टकराव से जुड़ी है। दूसरी, मराठा आंदोलनकारी अब धीरे-धीरे महायुति सरकार पर हमलावर हो रहे हैं। करीब नौ महीने तक शांत रहने के बाद जरांगे पाटिल ने अब अपनी बयानबाजी तेज कर दी है। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली फडणवीस सरकार पर "मराठा समुदाय को मूर्ख" बनाने का आरोप लगाया और दावा किया कि अगर उन्हें "गोलियों का सामना" करना पड़ा, तब भी वह पीछे नहीं हटेंगे। विधानसभा चुनाव से पहले लड़ाई कर दी थी शिथिल बड़ी बात यह है कि 9 महीने पहले इन्हें मराठों ने विधानसभा चुनाव से ऐन पहले अपनी लड़ाई कम कर दी थी। उस समय सीएम एकनाथ शिंदे, जो खुद एक मराठा हैं, आगे बढ़ते हुए जरांगे को समझाने और शांत कराने में कामयाब रहे थे लेकिन इस बार वही शिंदे इस लड़ाई से दूर बने हुए हैं। भाजपा को इस बात की भी चिंता है कि उसके सहयोगी किनारे क्यों हैं। शिंदे ने यह कदम तब उठाया था, जब लोकसभा चुनावों में मराठा आंदोलन का भारी असर देखने को मिला था। लोकसभा चुनावों में मराठों के विरोध का खामियाजा 2024 के लोकसभा चुनावों में जरांगे पाटिल द्वारा मराठों से भाजपा का बहिष्कार करने का आह्वान कारगर रहा था। यही कारण बना कि सत्तारूढ़ भाजपा 28 संसदीय सीटों पर चुनाव लड़कर केवल 9 पर ही जीत सकी। जबकि उनके सहयोगी दल 20 सीटों पर लड़कर 8 सीट जीत सके। हालाँकि, विधानसभा चुनावों से पहले, भाजपा और उसके गठबंधन ने उन ओबीसी समुदायों को एकजुट करने पर ध्यान केंद्रित किया, जो कुनबी (सबसे बड़े ओबीसी समूहों में से एक जो अलग से ओबीसी आरक्षण की मांग कर रहा है) के लिए आवंटित मराठों को आरक्षण का लाभ देने का विरोध कर रहे हैं। इस रणनीति का चुनावों में अच्छा परिणाम मिला और पार्टी 148 सीटों पर चुनाव लड़कर 132 सीटें जीतकर सत्ता में वापस आ गई। स्थानीय निकाय चुनावों से पहले फिर आंदोलन स्थानीय चुनावों से पहले फिर से शुरू किए गए आंदोलन के बीच इस बार फिर से ओबीसी, जरांगे पाटिल के आरक्षण के विरोध में कमर कस रहे हैं। महाराष्ट्र ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष बबनराव तायवाड़े ने दीर्घकालिक रणनीति बनाने के लिए शुक्रवार को नागपुर में एक बैठक बुलाई है। महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अनुसार, ओबीसी राज्य की कुल आबादी का लगभग 38% हिस्सा हैं। तायवाड़े ने कहा, “ओबीसी एक बड़ी ताकत हैं और अगर कोई भी इससे छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है, तो हम सड़क पर उतरकर आंदोलन के जरिए उसका मुकाबला करेंगे। हम मराठा आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे ओबीसी कोटे से ऊपर और ऊपर होना चाहिए।” MVA सियासी लाभ के फेर में दूसरी तरफ, जारंगे पाटिल के विरोध प्रदर्शन से सियासी लाभ की उम्मीद कर रही कांग्रेस, शरद पवार की NCP और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन ने उनका समर्थन किया है। इंडियन एक्सप्रेस से कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट ने कहा, "मैं जारंगे पाटिल के आंदोलन की सफलता के लिए प्रार्थना करता हूँ ताकि मराठों को आरक्षण मिले। साथ ही, सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ओबीसी कोटा बरकरार रहे।"  

मौसम विभाग का पूर्वानुमान: यूपी समेत कई राज्यों में अगले हफ्ते तक बरसेंगे बादल

नई दिल्ली मॉनसून अपने दूसरे फेज में चल रहा है और कुछ समय बाद धीरे-धीरे खत्म होने लगेगा। ऐसे में जाने से पहले देशभर में मॉनसून की वजह से झमाझम बरसात हो रही है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड से लेकर हिमाचल प्रदेश तक में नदियां ऊफान पर हैं, वहीं, उत्तर प्रदेश, पंजाब जैसे मैदानी इलाकों में भी भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश में आने वाले दिनों में भारी बरसात की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाके में 29 अगस्त से दो सितंबर तक भारी बारिश होने वाली है। इसके अलावा, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त, एक और दो सितंबर को भारी बारिश होगी। वहीं, अन्य राज्यों की बात करें तो 30 अग्सत तक कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात, केरल, तटीय कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। आज गुजरात में अत्यधिक भारी बरसात हो सकती है। अगले पांच दिनों तक उत्तर पश्चिम भारत में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश जारी रहने वाली है। 29-31 अगस्त के दौरान हिमाचल प्रदेश, 29 अगस्त से दो सितंबर के दौरान उत्तराखंड में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बरसात होगी। उत्तर-पश्चिम भारत की बात करें तो उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान में अगले सात दिनों तक, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त से दो सितंबर, पश्चिमी राजस्थान में 31 अगस्त और एक सितंबर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त, एक और दो सितंबर को अलग अलग जगहों पर भारी बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश में 29-31 अगस्त तक, उत्तराखंड में 29 अगस्त से दो सितंबर तक, पंजाब में 30 अगस्त को बहुत भारी बारिश होगी। दक्षिण भारत की बात करें तो तटीय कर्नाटक में अगले सात दिनों तक, केरल में 29, 30 अगस्त और तीन व चार सितंबर, आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तेलंगाना, लक्षद्वीप, तमिलनाडु में 29 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने वाली है। तटीय कर्नाटक में 29 और 30 अगस्त को और केरल में 29 अगस्त को बहुत भारी बरसात होगी। अगले सात दिनों तक इलाके में अधिकांश जगह गरज और बिजली के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। पूर्व और मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश में अगले सात दिनों तक, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 29-31 अगस्त तक, विदर्भ में 29 अगस्त और चार सितंबर को, बिहार में 29 और 30 अगस्त को, झारखंड में 30 अगस्त, दो सितंबर, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में 31 अगस्त से तीन सितंबर तक अलग-अलग स्थानों में भारी बारिश की संभावना है। उत्तर पूर्व भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश में 29, 30 अगस्त, चार सितंबर, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 29 अगस्त से चार सितंबर तक अलग अलग जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम में 29 अगस्त को बहुत भारी बरसात होगी।