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‘संगीत की दुनिया में याद रहेगा उनका योगदान’– जुबीन गर्ग की मौत पर PM मोदी का भावुक संदेश

मुंबई  बॉलीवुड के मशहूर गायक जुबीन गर्ग का शुक्रवार निधन हो गया। सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग दुर्घटना में 52 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई। जुबीन की मौत के संगीत जगत सहित देशभर में शोक छा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुबीन गर्ग के निधन पर शोक व्यक्त किया। गर्ग के अचानक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए, मोदी ने कहा कि गायक को संगीत में उनके योगदान के लिए याद किया जाएगा। PM मोदी ने जताया शोक पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग के आकस्मिक निधन से स्तब्ध हूं। उन्हें संगीत में उनके समृद्ध योगदान के लिए याद किया जाएगा। उनके गायन सभी क्षेत्रों के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय थे। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। ओम शांति। अशोक सिंघल ने की ​गायक के निधन की पुष्टि इससे पहले, असम के कैबिनेट मंत्री अशोक सिंघल ने सोशल मीडिया पर गायक के निधन की पुष्टि की। मंत्री ने X पर पोस्ट किया, हमारे प्रिय ज़ुबीन गर्ग के असामयिक निधन से बहुत दुःख हुआ। असम ने न केवल एक आवाज, बल्कि एक धड़कन भी खो दी है। जुबीन दा एक गायक से कहीं बढ़कर थे; वे असम और राष्ट्र का गौरव थे, जिनके गीतों ने हमारी संस्कृति, हमारी भावनाओं और हमारी भावना को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाया। स्कूबा डाइविंग के दौरान हुआ हादसा नॉर्थ ईस्ट न्यूज़ ने बताया कि गायक सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग गतिविधि में भाग ले रहे थे, तभी वे समुद्र में गिर गए। उन्हें बचा लिया गया और आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहाँ बाद में उनकी मृत्यु हो गई। गायक शनिवार को सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में प्रस्तुति देने वाले थे। ज़ुबीन गर्ग के बारे में अधिक जानकारी 1972 में मेघालय में जन्मे जुबीन एक असमिया गायक थे, जिनका असली नाम जुबीन बोरठाकुर था। 1990 के दशक में उन्होंने अपने अंतिम नाम की जगह अपना गोत्र, गर्ग, रखकर अपना मंच नाम अपनाया। 2006 में उन्होंने फिल्म गैंगस्टर का गाना 'या अली' गाया। इस चार्टबस्टर की सफलता ने उन्हें देश भर में प्रसिद्धि दिलाई और आगे चलकर कई बॉलीवुड हिट गाने दिए, जिनमें सुबह सुबह और क्या राज है शामिल हैं। 40 से अधिक भाषाओं में गाए गाने जुबीन ने मुख्य रूप से असमिया, बंगाली और हिंदी फिल्म और संगीत उद्योगों में काम किया और गाया, लेकिन 40 से ज्यादा भाषाओं और बोलियों में भी गाया। कई सालों तक उन्हें असम का सबसे ज्यादा कमाई करने वाला गायक बताया जाता था।

डराने की कोशिश के बावजूद तालिबान ने ट्रंप को किया खारिज, क्या थी अमेरिकी राष्ट्रपति की मांग?

काबुल अफगानिस्तान में सत्ताधारी तालिबान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दो-टूक जवाब दिया है। असल में ट्रंप अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना भेजना चाहते थे। वह चाहते थे कि बगराम एयरबेस को फिर से अमेरिका को सौंप दिया जाए। लेकिन अफगानिस्तान ने इससे पूरी तरह से इनकार कर दिया है। अफगान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को इस बारे में सोशल मीडिया पर लिखा। उन्होंने लिखा है कि अफगानिस्तान अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखने का इच्छुक है। लेकिन अफगानिस्तान की धरती पर फिर से अमेरिकी सेना को आने की मंजूरी नहीं मिलेगी। इससे ट्रंप की खासी किरकिरी हो गई। इससे पहले ट्रंप ने गुरुवार को कहा था कि उनका प्रशासन बगराम एयरबेस वापस चाहता है। अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे समय से ऐसा चाहते हैं। ट्रंप का तर्क है कि चीन के खतरे को देखते हुए यह एयरबेस रणनीतिक लिहाज से काफी अहम है। उनका कहना है कि हमने तालिबान को यह एयरबेस मुफ्त में दे रखा है। ट्रंप ने आगे कहा कि असल में बगराम एयरबेस उस जगह से मात्र एक घंटे की दूरी पर है, जहां चीन परमाणु मिसाइलें बनाता है। हालांकि तालिबान अधिकारियों ने उनके इस आइडिया को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय प्रवक्ता जाकिर जलाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अफगानिस्तान और अमेरिका को एक-दूसरे से मिल-जुलकर रहना है। लेकिन अफगानिस्तान के किसी हिस्से में अमेरिकी सेना नहीं रहेगी। हम अमेरिका के साथ राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को बनाए रखना चाहते हैं। यह आपसी सम्मान और बराबरी की भावना के साथ होगा। बगराम एयरबेस काबुल के ठीक उत्तर में है। यहां पर एक बेहद कुख्यात जेल भी है। यह जगह करीब दो दशक तक अमेरिकी सैन्य संचालन का केंद्र रही। अमेरिका ने इसी जगह पर हजारों लोगों को बिना किसी आरोप या मुकदमे के कैद रखा। तमाम लोगों को यहां पर यातनाएं दी गईं। साल 2021 में अमेरिका की वापसी के बाद तालिबान ने इस जगह पर फिर से अधिकार पा लिया।  

जानलेवा अमीबा ने केरल में ली 19 जानें, ऐसे करें अपनी सुरक्षा

केरल  पिछले कुछ समय से केरल राज्य एक जीवित सूक्ष्मजीव के कारण दहशत झेल रहा है। बता दें, इस सूक्ष्मजीव का नाम नेगलेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में 'दिमाग खाने वाला अमीबा' कहा जाता है। हाल ही में केरल में ब्रेन ईटिंग अमीबा के लगभग 67 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें 19 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। ब्रेन ईटिंग अमीबा के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल और राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि यह गंभीर संक्रमण नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करके मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट कर देता है। आइए जानते हैं आखिर क्या है दिमाग खाने वाला यह अमीबा, इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपाय। क्या है ब्रेन ईटिंग अमीबा ब्रेन ईटिंग अमीबा नेग्लेरिया फाउलेरी नामक एक सूक्ष्म अमीबा के संक्रमण से होता है। यह साइज में बहुत छोटा होने की वजह से नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करके सीधा दिमाग में पहुंच जाता है। दिमाग के टिशू जो पहले से ही काफी मुलायम होते हैं, यह अमीबा उन्हें धीरे-धीरे गलाना शुरू कर देता है, जिसकी वजह से 98 प्रतिशत संक्रमित लोग जिंदा नहीं बच पाते हैं। ब्रेन ईटिंग अमीबा के कारण डॉक्टरों की मानें तो बढ़ते तापमान के कारण अमीबिक मेनिन्जाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। गर्म परिस्थितियां इस रोगाणु के लिए आदर्श प्रजननस्थल बनाती हैं। ब्रेन ईटिंग अमीबा आमतौर पर गर्म, मीठे पानी वाले स्थानों जैसे झील, तालाब, गर्म पानी के स्विमिंग पूल, या टैंक में पाया जाता है। वॉटर एक्टिविटीज के दौरान इसके मनुष्यों के संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है। संक्रमित पानी के छींटे या स्नान के दौरान यह नाक के मार्ग से मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। ब्रेन ईटिंग अमीबा के लक्षण अमीबिक मेनिन्जोएन्सेफलाइटिस के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू के समान हो सकते हैं। जो आमतौर पर संक्रमण के लगभग 9 दिन बाद दिखाई देने लगते हैं। जैसे कि- -तेज बुखार -ठंड लगना -सिरदर्द -मतली और उल्टी -गर्दन में अकड़न – रोशनी से डर -दौरे – नींद में बदलाव और चक्कर ब्रेन ईटिंग अमीबा से बचाव यह संक्रमण तेजी से मस्तिष्क को प्रभावित करता है। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो 48 से 72 घंटे में मृत्यु तक हो सकती है। लेकिन समय रहते एमआरआई समेत बाकी जांच करवाकर इस बीमारी का इलाज करवाया जा सकता है। ब्रेन ईटिंग अमीबा के इलाज के दौरान डॉक्टर आमतौर पर एंटी-एमीबिक दवाओं और सहायक देखभाल का उपयोग करते हैं, लेकिन बहुत कम मामलों में ही मरीज पूरी तरह ठीक हो पाता है।  

बाबा रामदेव की पतंजलि पर मीलॉर्ड का हमला, कोर्ट ने दी कड़ी चेतावनी

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने आज (शुक्रवार, 19 सितंबर को) योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और पतंजलि फूड्स लिमिटेड को तब कड़ी फटकार लगाई, जब डाबर इंडिया के साथ च्यवनप्राश के विज्ञापनों को लेकर चल रहे विवाद में कंपनी अपनी अपील पर अड़ गई। पतंजलि आयुर्वेद ने सिंगल बेंच के उस आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी, जिसमें उसे अपने विज्ञापनों के कुछ हिस्सों को हटाने का निर्देश दिया गया था। कथित तौर पर उन विज्ञापनों में पतंजलि ने डाबर सहित अन्य प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के च्यवनप्राश उत्पादों पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। जस्टिस हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने पतंजलि से कहा कि या तो वह अपील वापस ले ले या फिर जुर्माना भरने के लिए तैयार हो जाए। कोर्ट ने सख्त लहजे में पतंजलि को चेतावनी दी कि अगर कंपनी ने अपनी चुनौती वापस नहीं ली तो उस पर भारी भरकम जुर्माना लगाया जाएगा। पीठ ने कहा कि आदेश में पतंजलि को पूरा विज्ञापन हटाने का निर्देश नहीं दिया गया है, बल्कि केवल उसके कुछ हिस्सों में संशोधन करने का आदेश दिया गया है, जो दूसरी कंपनियों को अपमानजनक तरीके से कमतर दिखाते हैं। विवाद दिसंबर 2024 में शुरू हुआ यह विवाद दिसंबर 2024 में शुरू हुआ, जब भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी उपभोक्ता वस्तु कंपनियों में से एक, डाबर ने पतंजलि के च्यवनप्राश विज्ञापन अभियान के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। डाबर ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया कि पतंजलि के दावे भ्रामक, अपमानजनक और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वाले हैं। डाबर के क्या आरोप? दशकों से च्यवनप्राश का विपणन करने वाली डाबर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि पतंजलि के विज्ञापनों में दावा किया गया है कि उसके प्रतिद्वंद्वी कंपनी के च्यवनप्राश में पारा होता है, इसलिए वह बच्चों के लिए असुरक्षित हैं। कंपनी ने पतंजलि के इस दावे को भी चुनौती दी कि उसका च्यवनप्राश 51 जड़ी-बूटियों से तैयार किया गया था, जबकि डाबर के संस्करण में केवल 40 जड़ी-बूटियाँ हैं। डॉबर ने आरोप लगाया कि पतंजलि के इस भ्रामक विज्ञापन ने दशकों से पीढ़ियों के बीच बने उपभोक्ता विश्वास को नुकसान पहुंचाया है। सिंगल बेंच का क्या था आदेश? जुलाई 2025 में, जस्टिस मिनी पुष्करणा की सिंगल बेंच ने एक अंतरिम आदेश पारित कर पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और पतंजलि फूड्स लिमिटेड को पतंजलि स्पेशल च्यवनप्राश के अपने विज्ञापनों को संशोधित करने का निर्देश दिया था। इसी के खिलाफ पतंजलि ने डबल बेंच में अपील की थी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, पतंजलि की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता ने पीठ के सख्त रुख को देखते हुए अगली कार्रवाई के बारे में निर्देश लेने के लिए समय की माँग की। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई मंगलवार, 23 सितंबर तक टाल दी। पतंजलि आयुर्वेद के तर्क हालांकि, सुनवाई के दौरान योग गुरु रामदेव और आचार्य बालकृष्ण द्वारा सह-स्थापित पतंजलि ने अपने अभियान का बचाव करते हुए इसे वैध आत्म-प्रचार बताया। कंपनी ने कहा कि उसके विज्ञापनों में डाबर का नाम नहीं लिया गया है और न ही उसकी सीधी तुलना की गई है। कंपनी ने तर्क दिया कि विवादित बयान उत्पाद लेबल सहित सार्वजनिक जानकारी पर आधारित हैं, और इसलिए उन्हें भ्रामक नहीं माना जा सकता लेकिन पीठ ने उनकी एक नहीं सुनी।  

474 पार्टियों का पंजीकरण खत्म, चुनाव आयोग ने उठाया बड़ा कदम

नई दिल्ली  चुनाव आयोग ने गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों पर बड़ा ऐक्शन लिया है। चुनाव आयोग ने ऐसी 474 राजनीतिक पार्टियों का रजिस्ट्रेशन समाप्त कर दिया है। इससे पहले अगस्त में भी चुनाव आयोग ने बड़ा ऐक्शन लिया था और 334 दलों का पंजीकरण समाप्त किया गया था। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के मुताबिक किसी भी पंजीकृत दल को चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेना होता है। यदि वह लगातार 6 साल तक इलेक्शन से दूर रहता है तो उसका पंजीकरण समाप्त हो जाता है। इसी नियम के तहत इलेक्शन कमिशन ने यह कार्रवाई की है। इस तरह अगस्त से लेकर अब तक 808 पार्टियों का पंजीकरण समाप्त किया जा चुका है। किसी पंजीकृत राजनीतिक दल को टैक्स छूट समेत कई रियायतें मिलती हैं। लेकिन बीते 6 साल से चुनाव ना लड़ने के बाद भी ऐसी रियायतों का लाभ लेते रहने वाले दलों पर ऐक्शन हुआ है। राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन को लेकर जो गाइडलाइंस हैं, उसके मुताबिक यदि कोई दल 6 सालों तक चुनाव नहीं लड़ता है तो फिर उसका पंजीकरण समाप्त किया जा सकता है। 2019 के बाद से ही चुनाव आयोग ऐसे दलों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, जो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इसी के तहत पहले राउंड में 9 अगस्त को ऐक्शन हुआ था और फिर 18 सितंबर को दूसरा ऐक्शन हुआ। इस तरह दो महीने के अंतराल में ही 808 राजनीतिक दलों का पंजीकरण खत्म हुआ है।

खारिज़, खारिज़, खारिज़… बानू मुश्ताक मामले में CJI का स्पष्ट निर्णय

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को इस साल मैसुरु दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने के कर्नाटक सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने शुक्रवार (19 सितंबर) को कर्नाटक हाई कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश को बकरार रखा, जिसमें राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया गया था। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ एच एस गौरव ने शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी। यह उत्सव 22 सितंबर से शुरू होगा। इस याचिका में कहा गया था कि चामुंडेश्वरी मंदिर में होने वाले दशहरा के अनुष्ठान के रीति-रिवाज प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित आवश्यक धार्मिक प्रथा हैं। इस परंपरा के तहत देवी चामुंडेश्वरी के गर्भगृह के समक्ष दीप प्रज्वलित किया जाता है, हल्दी व कुमकुम लगाया जाता है, फल और फूल चढ़ाए जाते हैं। याचिकाकर्ता ने क्या दी थी दलील? याचिका के अनुसार, ये हिंदू पूजा के कार्य हैं जो आगमिक परंपराओं द्वारा निर्धारित होते हैं, और इन्हें कोई गैर-हिंदू नहीं कर सकता, जबकि मैसुरु जिला प्रशासन ने तीन सितंबर को, विपक्षी भाजपा सहित कुछ वर्गों की आपत्तियों के बावजूद, बानू मुश्ताक को औपचारिक रूप से इस आयोजन में आमंत्रित किया था। इसी फैसले को पहले हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहां चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस सीएम जोशी की पीठ ने उसे खारिज कर दिया था। SC ने पूछा, याचिका का उद्देश्य क्या है? बार एंड बेंच के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने याचिकाकर्ता से पूछा, "इस याचिका को दायर करने का उद्देश्य क्या है?" इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, "यह अनुच्छेद 25 के तहत मेरे अधिकारों को प्रभावित करता है।" इतना सुनते ही जस्टिस विक्रम नाथ ने याचिका खारिज कर दी। तभी याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि कृपया तीन मिनट के लिए मेरी बात सुनी जाए। जस्टिस विक्रम नाथ ने यूं कर दी याचिका खारिज़ जब वकील ने अपनी बात रख ली तो जस्टिस विक्रम नाथ ने फिर पूछा, "इस देश के संविधान की प्रस्तावना क्या है?" इस पर याचिकाकर्ता के वकील मिस्टर सुरेश ने कहा, “धर्मनिरपेक्ष.. लेकिन मेरी धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप न करें।” इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि यह राज्य का कार्यक्रम है…राज्य 'क', 'ख' और 'ग' में कैसे अंतर कर सकता है? इस पर फिर वकील ने कहा कि मंदिर के अंदर पूजा करना धर्मनिरपेक्ष कार्य नहीं है…यह समारोह का हिस्सा है…वहाँ कई फैसले हैं। इतना सुनते ही जस्टिस विक्रम नाथ ने फिर कहा, खारिज। कह तो दिया,अब कितनी बार कहूं? वकील ने फिर जिरह की और कहा, "बानू द्वारा ऐसे-ऐसे बयान दिए गए हैं जो हमारे अनुसार हमारे धर्म के खिलाफ हैं। ऐसी परिस्थितियों में, आप ऐसे लोगों को आमंत्रित नहीं कर सकते। दो बातें हैं – एक व्यक्ति जो धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करता है और दूसरा व्यक्ति हमारे खिलाफ बिल्कुल विपरीत रुख अपनाता है…आप ऐसे लोगों को आमंत्रित नहीं कर सकते।" इस पर जस्टिस नाथ ने कहा, "हमने तीन बार खारिज-खारिज कह दिया है, और कितनी बार कहूं?" 2027 में CJI बनेंगे जस्टिस विक्रम नाथ जस्टिस विक्रम नाथ 7 फरवरी, 2027 से 23 सितंबर, 2027 तक देश के मुख्य न्यायाधीश पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। जस्टिस सूर्यकांत के रिटायरमेंट के बाद उनका कार्यकाल लगभग 8 महीने का होगा। जस्टिस सूर्यकांत मौजूदा CJI जस्टिस बी आर गवई के बाद इसी साल नवंबर में CJI का पद संभालेंगे। बता दें कि यह विवाद बानू मुश्ताक द्वारा अतीत में दिए गए कुछ बयानों को लेकर खड़ा हुआ है, जिन्हें कुछ लोग ‘हिंदू विरोधी’ और ‘कन्नड़ विरोधी’ मानते हैं। पूर्व भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा और अन्य आलोचकों का तर्क है कि यह उत्सव परंपरागत रूप से वैदिक अनुष्ठानों और देवी चामुंडेश्वरी को पुष्पांजलि अर्पित करके शुरू होता है, ऐसे में मुश्ताक का चयन, धार्मिक भावनाओं और लंबे समय से चली आ रही परंपराओं का अनादर है। मैसुरु में दशहरा उत्सव 22 सितंबर से शुरू होकर दो अक्टूबर को विजयादशमी पर समाप्त होगा।

रक्षा मंत्री का बयान: 1965 के युद्ध की याद में बोले – जीत अपवाद नहीं, परंपरा है

नई दिल्ली  विजय हमारे लिए अपवाद नहीं, बल्कि आदत बन चुकी है। शुक्रवार को यह बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही। रक्षामंत्री ने यह बात नई दिल्ली में 1965 के युद्ध के जांबाज वयोवृद्ध सैनिकों एवं शहीद वीरों के परिजनों से भेंट करने के दौरान कही।यह कार्यक्रम पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक विजय की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस दौरान रक्षा मंत्री ने उन सभी वीर जवानों को नमन किया, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और भारत को इस शक्ति परीक्षण में विजयी बनाया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान ने सोचा था कि वह घुसपैठ, गुरिल्ला युद्धकौशल और अचानक हमलों से भारत को भयभीत कर देगा, लेकिन उसे यह आभास नहीं था कि हर भारतीय सैनिक यह भावना लेकर सेवा करता है कि राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता किसी भी कीमत पर समझौते योग्य नहीं है।” सिंह ने असल उत्तर, चाविंडा और फिल्लौरा जैसी निर्णायक लड़ाइयों में भारतीय सैनिकों की वीरता और राष्ट्रभक्ति को याद किया। उन्होंने विशेष रूप से परमवीर चक्र विजेता कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद के अदम्य साहस का उल्लेख किया, जिन्होंने असल उत्तर की लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति देकर कई दुश्मन टैंकों को ध्वस्त कर दिया। रक्षा मंत्री ने कहा, “हमारे बहादुर अब्दुल हमीद ने सिखाया कि बहादुरी हथियार के आकार से नहीं, बल्कि हृदय की महानता से होती है। उनका शौर्य बताता है कि साहस, संयम और देशभक्ति का संगम असंभव को भी संभव बना देता है।” उन्होंने कहा, “कोई भी युद्ध केवल रणभूमि पर नहीं जीता जाता, विजय पूरी राष्ट्र की सामूहिक संकल्प शक्ति का परिणाम होती है। उस समय लाल बहादुर शास्त्री के सशक्त नेतृत्व ने न केवल निर्णायक राजनीतिक दिशा दी, बल्कि पूरे राष्ट्र का मनोबल भी ऊंचा किया। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हमने एकजुट होकर युद्ध जीता।” उन्होंने कहा कि भारत ने बार-बार यह साबित किया है कि देश अपना भाग्य स्वयं रचता है। हालिया 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “पहलगाम की कायराना आतंकी वारदात ने हमें आहत किया, परंतु हमारे हौसले को नहीं तोड़ पाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकियों को सबक सिखाने का संकल्प लिया और 'ऑपरेशन सिंदूर' ने दिखा दिया कि हम कितने सक्षम हैं। हमारे सैनिकों ने जिस साहस और समन्वय से यह अभियान सफल किया, वह इस बात का प्रमाण है कि हमारे लिए विजय अपवाद नहीं, बल्कि आदत बन चुकी है।” राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए पूर्णत प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “रक्षा आधुनिकीकरण, सैनिकों के बेहतर प्रशिक्षण और उपकरणों के उन्नयन की हमारी नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारे जवान कभी संसाधनों की कमी से न जूझें।” इस अवसर पर थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, दिल्ली एरिया के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार, अन्य वरिष्ठ अधिकारी, वॉर हीरो, वीरता पुरस्कार विजेता एवं 1965 के शहीदों के परिजन उपस्थित रहे। वयोवृद्ध सैनिकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। लेफ्टिनेंट जनरल सतीश के. नाम्बियार (सेवानिवृत्त) ने रणनीतिक विचार रखे, वहीं वीर चक्र विजेता मेजर आरएस बेदी (सेवानिवृत्त) ने युद्धभूमि का रोमांचक विवरण सुनाया। यह समारोह 1965 के युद्ध में हुए बलिदानों की भावपूर्ण याद दिलाता रहा और आने वाली पीढ़ियों को साहस, त्याग और सेवा परमो धर्म के आदर्शों को जीवित रखने की प्रेरणा प्रदान करता रहा। 

भाजपा विधायक के विवादित शब्दों पर शरद पवार का ऐक्शन, फडणवीस से मांगी सफाई

मुंबई भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर की ओर से एनसीपी-एसपी के नेता जयंत पाटिल पर विवादित बयान ने हलचल मचा दी है। पडलकर के बयान पर दिग्गज नेता शरद पवार तक ने आपत्ति जताई है। यही नहीं उन्होंने सीएम देवेंद्र फडणवीस को ही सीधे शुक्रवार सुबह फोन लगाया और कहा कि वह इस मामले को देखें। शरद पवार ने कहा कि आपके विधायक का बयान महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आज तक महाराष्ट्र में किसी ने इतने निचले स्तर तक जाकर टिप्पणी नहीं की है। दरअसल गोपीचंद पडलकर और जयंत पाटिल के बीच सालों से अदावत रही है। लेकिन गुरुवार को पडलकर ने ऐसा बयान दे दिया है, जिसकी हर कोई आलोचना कर रहा है। दरअसल सांगली जिले में स्थित अपनी विधानसभा में गोपीचंद ने जयंत पाटिल पर खुद को फंसाने की कोशिश का आरोप लगाया था। पडलकर ने कहा था कि एक ठेकेदार की हत्या के मामले में मुझे जयंत पाटिल ने फंसाने की कोशिश की। पडलकर ने कहा कि मुझे हैरानी होती है कि कैसे इतना मूर्ख आदमी महाराष्ट्र का नेता हो सकता है। कैसे उन्होंने एनसीपी का महाराष्ट्र में नेतृत्व किया होगा। पडलकर ने कहा कि जयंत पाटिल मूर्ख हैं। हर एक सप्ताह में जयंत पाटिल साबित करते हैं कि वे कितने मूर्ख हैं। उन्होंने कहा था कि मेरा और ठेकेदार का कोई संबंध नहीं था। लेकिन जयंत पटेल का काम सिर्फ़ गोपीचंद पडलकर को बदनाम करना है। लेकिन मैं अब यहां क्यों हूं ? मैं ऐसी बहुत सी चीज़ें लेकर आया हूँ। इन लोगों के राज में मैं दो महीने जेल में रहा हूं। इसके आगे पडलकर कहते हैं कि जयंत पाटिल आखिर किसके बेटे हैं। उन्होंने कहा कि वह राजारामबापू पाटिल के बेटे हैं, यह लगता नहीं। कुछ तो गड़बड़ है। इसके आगे वह कहते हैं कि ये गोपीचंद पडलकर जयंत पाटिल जैसे भिखारी का बेटा नहीं है। उनके इसी बयान पर हल्ला मचा तो शरद पवार ने सीधे सीएम फडणवीस को फोन लगा दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपने विधायक को समझाएं और मामले को देखते हुए कोई ऐक्शन भी लें। दरअसल जयंत पाटिल के पिता राजाराम पाटिल का महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा नाम रहा है। इसके अलावा सूबे में सहकारिता से जुड़े कामों में भी उनके योगदान की सराहना की जाती रही है।  

अंतरराष्ट्रीय झटका: बलूच आर्मी पर प्रतिबंध लगाने की चीन-पाक योजना पर अमेरिका और यूरोप ने रोका

न्यूयॉर्क पाकिस्तान में सक्रिय विद्रोही संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी और उसकी मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की पाबंदी सूची 1267 में शामिल कराने के प्रस्ताव पर अमेरिका ने वीटो कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान और उसके सदाबहार दोस्त चीन की ओर से इस प्रस्ताव को रखा गया था। इस पर अमेरिका ने वीटो लगा दिया। इसके अलावा ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने भी विरोध किया। इस तरह यह प्रस्ताव गिर गया। दरअसल संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति 1267 के तहत यह प्रावधान है कि अलकायदा और इस्लामिक स्टेट से किसी भी तरह का ताल्लुक रखने वाले आतंकी संगठन पर पाबंदी लगाई जाती है। ऐसे संगठनों की संपत्तियों को दुनिया भर में जब्त किया जा सकता है। इसी को लेकर अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने कहा कि जिस बलूच लिबरेशन आर्मी और उसके आत्मघाती दस्ते मजीद ब्रिगेड पर पाबंदी का प्रस्ताव है, उसका अलकायदा और इस्लामिक स्टेट से तो कोई संबंध ही नहीं है। ऐसे में इन दोनों को इस सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने बुधवार को कहा था कि अफगानिस्तान में अलकायदा, इस्लामिक स्टेट, तहरीक-ए-तालिबान, ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, बलूच लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड के ठिकाने हैं। पाकिस्तानी राजनयिक का दावा था कि अफगानिस्तान में इन संगठनों के कम से कम 60 ठिकाने हैं। लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने इस दलील के आधार पर पाबंदी से इनकार किया। अमेरिका ने साफ कहा कि बलूच लिबरेशन आर्मी का अलकायदा या फिर इस्लामिक स्टेट से कोई संबंध नहीं पाया गया। इसलिए इस सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। हालांकि यह भी सही है कि अमेरिका ने बलूच लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड को आतंकी संगठन घोषित किया है। बलूचिस्तान में लंबे समय से स्वायत्तता की मांग उठती रही है। बलूच लिबरेशन आर्मी ने इस मांग को लेकर विद्रोह ही छेड़ रखा है। बता दें कि भारत कई बार पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों पर पाबंदी की मांग कर चुका है, लेकिन चीन अकसर अड़ंगे लगाता रहा है। अब ऐसा पहली बार हुआ है, जब चीन और पाकिस्तान के साझा प्रयास को अमेरिका ने इस तरह झटका दिया है। उसके अलावा फ्रांस और ब्रिटेन ने भी विरोध किया है।  

अचानक हुई ट्रंप की हेलीकॉप्टर लैंडिंग, पत्नी मेलानिया मौजूद – क्या था कारण?

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हेलीकॉप्टर की ब्रिटेन में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई है। ब्रिटेन दौरे के बाद अमेरिका वापस लौटते समय उनके हेलीकॉप्टर 'मरीन वन' में तकनीकी खराबी आ गई थी जिसके कारण उसे रास्ते में ही उतारना पड़ा। इस दौरान उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप भी उनके साथ थीं। क्या हुआ था? डोनाल्ड ट्रंप अपनी पत्नी मेलानिया के साथ ब्रिटेन से अमेरिका जाने वाली फ्लाइट पकड़ने के लिए चेकर्स से लंदन के स्टैनस्टेड एयरपोर्ट जा रहे थे। रास्ते में हेलीकॉप्टर में हाइड्रोलिक समस्या आने के कारण उसे ल्यूटन एयरपोर्ट पर आपात स्थिति में उतारना पड़ा। इस घटना के बाद उन्हें दूसरे हेलीकॉप्टर में सवार होकर स्टैनस्टेड एयरपोर्ट भेजा गया जहां से उन्होंने अमेरिका के लिए उड़ान भरी। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रपति और उनकी पत्नी पूरी तरह से सुरक्षित हैं। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने अपनी यात्रा को सुरक्षित बताया और कहा कि वह घर जाने को उत्सुक हैं। कैसा होता है 'मरीन वन' हेलीकॉप्टर? ट्रंप ने ब्रिटेन की यात्रा के लिए मरीन-वन और मरीन-टू हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया था जिन्हें 'व्हाइट टॉप' भी कहते हैं। ये हेलीकॉप्टर बेहद सुरक्षित होते हैं जिनमें मिसाइल डिफेंस सिस्टम, रडार और जैमिंग सिस्टम लगे होते हैं। इन्हें परमाणु बम विस्फोट के बाद भी चुंबकीय प्रभावों को झेलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 'मरीन वन' अक्सर अपने जैसे दिखने वाले 2-3 अन्य हेलीकॉप्टरों के समूह में उड़ता है जिन्हें टिल्ट-रोटर विमान 'ग्रीन टॉप्स' कहा जाता है ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो। ट्रंप का ब्रिटेन दौरा ट्रंप का ब्रिटेन दौरा दो दिन का था जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुलाकातें कीं। उन्होंने विंडसर कैसल में राजा और रानी से मुलाकात की और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ कूटनीतिक वार्ता की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ब्रिटेन की यात्रा को बेहद सफल और शानदार बताया है।