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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का दावा- बंगाल में सुनियोजित घुसपैठ का खेल

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते कुछ सप्ताह में लगातार यह आरोप लगाए हैं कि केंद्र सरकार के द्वारा बंगाली भाषाओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे ‘भाषाई आतंकवाद’ का नाम भी दिया है। इस बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा किया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कहा है कि पश्चिम बंगाल और आस-पास के कुछ क्षेत्रों में व्यवस्थित तरीके से घुसपैठ करवाया जा रहा है और इस काम के लिए कई एजेंट भी सक्रिय हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में भारत के नागरिक ना होने के संदेह में बंगाली भाषी मुस्लिम प्रवासियों को हिरासत में लिए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को कहा कि सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि कई इलाकों में घुसपैठ हो रहा है। उन्होंने रोहिंग्याओं का भी जिक्र किया। तुषार मेहता ने आगे बताया," रोहिंग्याओं के साथ-साथ एक व्यवस्थित गिरोह भी है। कई आतंकवादी भी घुसपैठ कर रहे हैं।" वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक महिला को बिना जांच किए देश से बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने कहा, “वह गर्भवती है। सिर्फ इसलिए कि वह बंगाली बोलती है, सरकार कह रही है कि वह एक बांग्लादेशी है। इस देश में कोई भी अधिकारी किसी व्यक्ति को बिना यह जांच किए सीमा पार कैसे धकेल सकता है कि वह विदेशी है या नहीं? ऐसा करना अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।” केंद्र सरकार से सवाल इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या लोगों को भाषा के आधार पर उठाया जा रहा है। पर एसजी मेहता ने जवाब दिया कि भाषा के आधार पर किसी को निशाना नहीं बनाया जा रहा है। कोर्ट ने केंद्र से पूछा, "दो महत्वपूर्ण मसले हैं। एक राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता, और यह सर्वोपरि है। दूसरा प्रश्न विरासत और संस्कृति का है। पंजाब और बंगाल दोनों जगह भाषा एक ही है पर सीमा पर विभाजन है। हम चाहते हैं कि आप अपना रुख स्पष्ट करें।" इस पर जवाब देते हुए SG मेहता ने कहा कि फिर प्रभावित लोगों के बजाय कोई समूह ही सुप्रीम कोर्ट क्यों आते हैं? लोग व्यक्तिगत रूप से लोग क्यों नहीं आते? यह एक समस्या है। भारत दुनिया के अवैध प्रवासियों की जगह नहीं है। एक व्यवस्था होती है। उन्हें बताना होगा कि वे भारत में क्यों रह रहे हैं।"  

ट्रंप की भारत से खुन्नस की असली वजह का खुलासा, पाकिस्तान भी आ गया बीच में

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर भारी टैरिफ की वजह रूसी तेल बताते हैं। हालांकि, इसके और भी कई कारण सामने आ रहे हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मामले में ट्रंप की व्यक्तिगत नाराजगी है और इसके तार भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम से जुड़े हैं। हालांकि, इसे लेकर भारत या अमेरिका की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी जैफरी की एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'टैरिफ मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति की व्यक्तिगत नाराजगी का नतीजा हैं कि उन्हें भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी को खत्म करने में भूमिका निभाने का मौका नहीं मिला।' इसमें कहा गया है कि ट्रंप कथित तौर पर उम्मीद लगाए बैठे थे कि उन्हें मध्यस्थ बनने का मौका मिलेगा। भारत ने लगातार कहा है कि संघर्ष विराम में किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी और वो द्विपक्षीय था। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारी आर्थिक लागत के बाद भी इस रेखा को बनाए रखा गया, जिसके कारण अमेरिका के राष्ट्रपति को अपनी प्रतिष्ठा मजबूत करने का मौका नहीं मिल पाया। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि मौका नहीं मिलने के कारण उन्हें संभावित रूप से नोबेल पुरस्कार जैसी मान्यता का मौका नहीं मिला। 22 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सेना ने 7 मई पाकिस्तान में घुसकर ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था। इसके तहत पड़ोसी मुल्क में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। जवाब में पाकिस्तान ने भी कार्रवाई की और दोनों पक्षों के बीच जल्द ही संघर्ष विराम हो गया था। भारत ने साफ किया था कि पाकिस्तान के डीजीएमओ के अनुरोध पर सीजफायर किया गया था। जबकि, ट्रंप दावा करते हैं कि उन्होंने व्यापार के जरिए भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में भी साफ कर चुके हैं इस प्रक्रिया में किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं रही है। कृषि भी है वजह रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि कोई भी भारतीय सरकार आयात के लिए कृषि क्षेत्र से समझौता नहीं करेगा, क्योंकि इसके कई दुष्परिणाम होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 करोड़ किसान और मजदूर खेती पर निर्भर है। इसमें कहा गया है कि भारत का 40 फीसदी वर्कफोर्स कृषि क्षेत्र में हैं। खबरें थीं कि अमेरिका भारतीय बाजार में अपने कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए जगह चाह रहा था। हालांकि, इसे लेकर सरकार ने आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी साफ कर चुके हैं देश के हित को पहले रखा जाएगा। वहीं, पीएम मोदी ने भी एक कार्यक्रम में कहा था कि भारतीय किसानों और मछुआरों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।  

महाकुंभ में अनुपस्थित रहने पर मोहन भागवत का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली साल की शुरुआत में प्रयागराज में आयोजित हुए महाकुंभ में करोड़ों भक्तों ने संगम में स्नान किया। इसमें राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक शामिल थे, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत महाकुंभ में स्नान के लिए नहीं पहुंचे। ऐसे में उस समय लोगों ने सवाल भी किया कि आखिर मोहन भागवत महाकुंभ क्यों नहीं गए। अब आरएसएस चीफ भागवत ने खुद इसकी वजह बताई है। उन्होंने कहा है कि हम लोगों को जहां बताया जाता है, वहां जाते हैं। हमें बताया गया था कि वहां बहुत भीड़ होगी। वहां संघ के लोग थे और कोलकाता में संगम का जल मंगवाकर स्नान किया था। आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन मोहन भागवत से सवाल किया गया, ''पूरा भारत कुंभ में उमड़ा, लेकिन आप इससे दूर रहे, ऐसा क्यों?'' इस पर भागवत ने कहा, ''ऐसा इसलिए, क्योंकि हम लोगों को जहां बताया जाता है, वहां जाते हैं। मैं यहां इसलिए हूं और आपसे बात कर रहा हूं, क्योंकि हमारे लोगों ने तय किया कि यहां कार्यक्रम होना है और आपको बोलना है। मैंने यह भी कहा कि पिछली बार मैंने बोला था तो किसी अन्य लोगों से कहो। लेकिन वे नहीं माने तो मुझे करना पड़ा। ऐसे ही कुंभ में मैंने डेट निकाली थी आने की। वहां हमारे सभी अधिकारी गए थे। वहां संघ था, लेकिन मैं नहीं था। क्योंकि हमको बताया गया कि उस समय बहुत भीड़ रहेगी।'' उन्होंने आगे कहा, ''अन्य कार्यक्रम जो आगे-पीछे तारीख में हैं, उसमें डिस्टर्ब हो सकता है, आप मत आइए। मैंने कहा कि पुण्य सबलोग ले रहे हैं, मुझे आप वंचित कर रहे हो। कम से कम मुझे पानी भेज दो कोलकाता में। ऐसे में कृष्णगोपाल जी ने मेरे लिए कुंभ का जल भेजा और मौनी अमावस्या के दिन उस जल से स्नान किया। संघ अगर कहेगा कि नर्क में जाओगे तो मैं जाऊंगा।'' बता दें कि इस साल जनवरी-फरवरी में यूपी के प्रयागराज में संगम के तट पर महाकुंभ आयोजित किया गया था। यूपी सरकार न दावा किया था कि इसमें देश-दुनिया से 66 करोड़ से ज्यादा भक्तों ने पवित्र संगम के जल से स्नान किया था।  

HC का आदेश: हिन्दू शादी को धार्मिक अनुष्ठान नहीं मानेंगे, मंदिरों के पैसे से नहीं होगा निर्माण

चेन्नई  मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में दिए एक फैसले में कहा है कि हिन्दू विवाह कोई धार्मिक उद्देश्य के लिए किया गया कार्य नहीं है, जिसके लिए मंदिरों के फंड का इस्तेमाल किया जा सके। कोर्ट ने इसके साथ ही राज्य सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत सरकार ने पांच मंदिरों को पांच अलग-अलग स्थानों पर मंदिर का फंड इस्तेमाल कर पांच मैरिज हॉल बनाने की अनुमति दी थी। जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार का आदेश हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 के नियमों और प्रावधानों का उल्लंघन है और यह 'धार्मिक उद्देश्य' की परिभाषा के तहत नहीं आता है। पीठ ने कहा कि मंदिरों का फंड सिर्फ धार्मिक उद्देश्यों या चैरिटी के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है, सामाजिक कल्याण के काम के लिए नहीं। सरकार का फैसला नियमों का उल्लंघन लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ ने कहा, “इस न्यायालय को इस निष्कर्ष पर पहुंचने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि विवाह समारोहों के लिए किराए पर देने के उद्देश्य से मैरिज हॉल का निर्माण कराया जा रहा है और सरकार का यह फैसला हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 के नियमों और प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आता है।” मंदिर के पैसे से व्यावसायिक कार्य नहीं कर सकते हाई कोर्ट ने कहा कि इस अधिनियम की धारा 66 के अनुसार, मंदिर अपने सरप्लस फंड का इस्तेमाल व्यावसायिक या लाभ कमाने वाले कामों में नहीं कर सकता बल्कि उसे सिर्फ धार्मिक या धर्मार्थ (चैरिटी) उद्देश्यों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि हिंदू विवाह, सिर्फ एक संस्कार है, धार्मिक कार्यकलाप नहीं। कोर्ट ने कहा कि यह एक ऐसा रीति-रिवाज है जो कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों से बंधा होता है, इसलिए इसे धार्मिक उद्देश्य नहीं माना जा सकता। बिना भवन योजना मंजूरी के जारी किया गया फंड याचिकाकर्ता ने सरकारी आदेशों को चुनौती देते हुए कहा था कि मंदिर के धन का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता और यह निर्णय तमिलनाडु हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 की धारा 35, 36 और 66 का उल्लंघन है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया था कि विवाह हॉल के निर्माण के लिए कोई भवन योजना मंजूर नहीं की गई थी, बावजूद इसके मंदिर फंड से धनराशि जारी कर दी गई थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि हिंदू विवाह एक धार्मिक कार्यकलाप है और यह निर्णय हिंदुओं को कम खर्च में विवाह संपन्न कराने में सहायता करने के लिए लिया गया था। यह भी तर्क दिया गया कि विवाह हॉल का निर्माण मंदिर गतिविधि के लिए भवन निर्माण के अंतर्गत आता है और अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत है लेकिन हाई कोर्ट ने उन दलीलों को खारिज कर दिया।  

पूर्व विधायक नलिन कोटडिया और अन्य 13 आरोपियों को गुजरात बिटकॉइन केस में उम्रकैद

अहमदाबाद  गुजरात के बहुचर्चित बिटकॉइन घोटाले में अहम फैसला सुनाते हुए स्पेशल एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) कोर्ट ने आज शुक्रवार को पूर्व विधायक नलिन कोटडिया, अमरेली के पूर्व एसपी जगदीश पटेल और पूर्व पीआई अनंत पटेल सहित 14 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पाया कि सभी आरोपी 2018 में सामने आए 12 करोड़ रुपए मूल्य के 176 बिटकॉइन और 32 लाख रुपए नकद की जबरन वसूली और अपहरण की साजिश में शामिल थे। यह मामला नोटबंदी के बाद सुर्खियों में आया था। बता दें कि इस केस में कुल 15 लोगों को नामजद किया गया था, जिनमें से 14 को कोर्ट ने दोषी ठहराया, जबकि एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट के फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।  क्या है पूरा मामला? यह मामला साल 2018 में उस समय सामने आया था, जब सूरत के बिल्डर शैलेश भट्ट ने आरोप लगाया था कि उनसे 176 बिटकॉइन (करीब 12 करोड़ रुपये मूल्य) और 32 लाख रुपये नकद की जबरन वसूली की गई। इसमें पुलिस अफसरों से लेकर राजनेता और वकील तक शामिल थे। शैलेश भट्ट ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन पुलिस निरीक्षक अनंत पटेल और उनकी टीम ने सरकारी वाहनों का इस्तेमाल करते हुए उनका अपहरण किया और उन्हें गांधीनगर के पास एक जगह ले जाकर 176 बिटकॉइन ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। इतना ही नहीं, बिटकॉइन ट्रांसफर होने के बाद भी उनसे फिरौती की मांग की गई। सीआईडी क्राइम ब्रांच ने इस मामले की जांच की, जिसमें तत्कालीन अमरेली एसपी जगदीश पटेल, सूरत के वकील केतन पटेल और अन्य 10 पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई। पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि पूर्व विधायक नलिन कोटडिया इस पूरे मामले में ‘फिक्सर’ की भूमिका में थे। अगस्त 2024 में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत शैलेश भट्ट को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि भट्ट ने खुद भी बिटकनेक्ट के प्रमोटर सतीश कुंभानी के दो कर्मचारियों का अपहरण कर 2,091 बिटकॉइन, 11,000 लाइटकॉइन और 14.50 करोड़ रुपए नकद वसूले थे। सतीश कुंभानी पर 2017-18 में बिटकनेक्ट नामक क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी करने का आरोप है। जनवरी 2018 में उन्होंने अचानक बिटकनेक्ट और उसका लेंडिंग प्लेटफॉर्म बंद कर दिया और निवेशकों का पैसा लेकर फरार हो गए। यह पूरा मामला गुजरात के सबसे हाई-प्रोफाइल साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग केस में से एक बन गया है, जिसमें राजनीतिक, प्रशासनिक और आपराधिक गठजोड़ साफ तौर पर उजागर हुआ है।

सरकारी फैसले पर RSS समर्थित किसान संगठन नाराज, कहा- तुरंत हो वापसी

नई दिल्ली  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कृषक संगठन भारतीय किसान संघ ने कपास के आयात पर टैक्स छूट 31 दिसंबर तक बढ़ाने पर ऐतराज जताया है। किसान संगठन का कहना है कि इस कदम से घरेलू किसानों को नुकसान होगा और लंबे समय में भारत की निर्भरता आयात पर बढ़ जाएगी। आरएसएस के आनुषांगिक संगठन की ओर से इस संबंध में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा गया है। किसान संघ ने अपने पत्र में कहा है कि 320 लाख बेल्स कपास का सालाना उत्पादन भारत में होता है, जबकि घरेलू डिमांड 391 लाख बेल्स की है। कपास के एक बेल्स में 170 किलोग्राम आता है। भारत की तरफ से हर साल 60 से 70 लाख बेल्स का ही आयात होता है। इसका अर्थ हुआ कि कुल कपास के इस्तेमाल का लगभग 12 फीसदी भारत में बाहर से आता है। भारतीय किसान संघ ने कहा कि यदि हम इंपोर्ट पर छूट देते रहे तो फिर भारत कपास के निर्यातक देश होने की बजाय अगले कुछ सालों में बड़ा आयातक बन जाएगा। किसान संगठन ने कहा कि इस साल कपास उत्पादन का रकबा बीते साल की तुलना में 3.2 फीसदी कम हो गया है। भारतीय किसान संघ ने कहा, 'यदि घरेलू कपास के बीज की उपलब्धता नहीं बढ़ी तो फिर भारत निर्यातक की बजाय आयातक देश बनकर रह जाएगा।' भारतीय किसान संघ ने कहा कि कपास की कीमतें पहले ही 7000 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 6 हजार पर आ चुकी हैं। यदि टैक्स फ्री इंपोर्ट जारी रहा तो कीमतों में और कमी आ सकती है। पत्र में किसान संघ ने लिखा, 'यदि 2000 प्रति क्विंटल में बाहर से कपास आ जाएगा तो फिर भारतीय किसानों से कोई 5000 क्विंटल में क्यों खरीदेगा।' बता दें कि कपास के आयात पर पहले वित्त मंत्रालय ने 11 अगस्त से 30 सितंबर तक छूट दी थी। अब इसे बढ़ाकर साल के अंत तक कर दिया है। भारतीय किसान संघ के महामंत्री मोहन मित्रा का कहना है कि सरकार को अपने निर्णय पर दोबारा विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से ऐसे ही यदि आयात पर सब्सिडी जारी रही तो फिर आने वाले वक्त में विदेशी कपास के लिए भारत एक अच्छा बाजार होगा। लेकिन हम स्वदेशी स्तर पर कपास के उत्पादन में पिछड़ जाएंगे।  

महुआ मोइत्रा का बयान विवादों में, विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध

नई दिल्ली  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी को लेकर तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा विवादों में आ गईं हैं। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाए हैं कि मोइत्रा ने शाह का 'सिर काटने' की बात कही है। खास बात है कि यह मामला ऐसे समय पर आया है, जब बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अभद्र टिप्पणी करने का मामला तूल पकड़ रहा है। बंगाल भाजपा ने लिखा, 'जब महुआ मोइत्रा गृहमंत्री का सिर काटने की बात करती हैं, तो ये टीएमसी की निराशा और हिंसा की संस्कृति को उजागर करता है, जो बंगाल की छवि खराब कर रही है और राज्य को पीछे ले जा रही है।' पार्टी ने एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें मोइत्रा पत्रकारों से बातचीत करती नजर आ रहीं हैं। पीएम मोदी को अपशब्द कहने वाला गिरफ्तार पीटीआई भाषा के अनुसार, बिहार पुलिस ने राज्य में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। आरोपी की पहचान मोहम्मद रिजवी उर्फ ​​रजा (20) के रूप में हुई है, जिसे दरभंगा शहर के सिंहवाड़ा इलाके से गिरफ्तार किया गया। भारतीय जनता पार्टी की दरभंगा जिला इकाई के अध्यक्ष आदित्य नारायण चौधरी की शिकायत के आधार पर उसके और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।  

मोदी बोले- अस्थिर हालात में भारत और चीन का साथ आना बड़ी बात

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बहुप्रतीक्षित चीन दौरे से पहले भारत और चीन के संबंधों पर बातचीत की है। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को जापानी अखबार द योमिउरी शिंबुन को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि उनकी यह यात्रा चीन के साथ स्थिर द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा है कि इंडो पैसिफिक रीजन में शांति बनाए रखने और वैश्विक अस्थिरता के बीच चीन के साथ स्थिर और मजबूत संबंध बेहद जरूरी हैं। प्रधानमंत्री ने चीन की यात्रा और चीन के साथ संबंधों पर पूछे गए एक लिखित सवाल के जवाब में कहा, "राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर मैं शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए यहां से तियानजिन जाऊंगा। पिछले साल कजान में राष्ट्रपति शी के साथ मेरी मुलाकात के बाद से हमारे द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर और सकारात्मक प्रगति हुई है।" पीएम मोदी ने आगे कहा कि विश्व के दो सबसे बड़े देशों के बीच इस साझेदारी से पूरे क्षेत्र की समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा, “दुनिया के दो सबसे बड़े राष्ट्रों के रूप में भारत और चीन के बीच स्थिर और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “वैश्विक अर्थव्यवस्था में वर्तमान अस्थिरता को देखते हुए, दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। भारत आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता के आधार पर रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और चुनौतियों का समाधान करने के लिए बातचीत को बढ़ाने के लिए तैयार है।” गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को दिल्ली से जापान की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। जापान दौरे के बाद प्रधानमंत्री तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के लिए चीन जाएंगे। इस दौरान पीएम मोदी चीनी प्रधानमंत्री शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे।  

सिंधु जल समझौता रोकने का डर दिखाकर पाकिस्तान ने बाढ़ की जिम्मेदारी भारत पर डाली

लाहौर  रावी, सतलुज और ब्यास नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित इजाफा होने से पंजाब में बाढ़ आ गई है। राज्य के ज्यादातर जिलों के निचले इलाके डूबे हुए हैं। सैकड़ों गांवों में जलस्तर इतना बढ़ गया है कि दूर तक पानी-पानी ही दिख रहा है। हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा है। यही नहीं रावी नदी के बढ़े जलस्तर से सीमा पार यानी पाकिस्तान में भी बाढ़ आ गई है। पाकिस्तानी पंजाब के बड़े शहर लाहौर में भी पानी घुस गया है। इससे बौखलाये पाकिस्तान ने बाढ़ के लिए भी भारत को ही जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि रावी नदी पर भारत में बने माधोपुर हेडवर्क्स में तकनीकी समस्या के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। पाकिस्तान का कहना है कि इसी के कारण तेजी से पानी का बहाव इस तरफ आया है। यही नहीं पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने इसकी सूचना नहीं दी और हमें तैयारी का भी मौका नहीं मिली। मीडिया रिपोर्ट में पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि यह सबसे चिंता की बात है कि भारत ने एक बार जानकारी तक नहीं दी कि ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। पाकिस्तान का कहना है कि सिंधु जल समझौते को रोकने के चलते ऐसे हालात बने हैं वरना ऐसा नहीं होता। पाकिस्तान का कहना है कि रविवार के बाद से अब तीन बार ही भारत से सूचना मिली थी। पहली सूचना यह मिली कि तवी नदी में जलस्तर बढ़ने वाला है। फिर दो बार सतलुज नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के बारे में बताया गया। लेकिन रावी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। द न्यूज लिखता है कि ऐसे हालात बने हैं कि पाकिस्तान का सिंधु जल आयोग भारत से इस बारे में बात भी नहीं कर पा रहा है ताकि समस्या का समाधान किया जा सके। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि माधोपुर हेडवर्क्स के कम से कम 4 गेट खराब हो गए हैं। इसके कारण बड़ी संख्या में खेती की जमीन डूब गई है। गांवों में भी पानी घुस आया है और लोग पलायन को मजबूर हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि कुल 54 फ्लडगेट्स हैं, जिनमें से किसी को भी बीते कई सालों से अपग्रेड नहीं किया गया है। माधोपुर हेडवर्क रावी नदी पर गुरदासपुर जिले में स्थित है। इसी के माध्यम से ऊपरी बारी दोआब नहर में सिंचाई के लिए पानी डाला जाता है। यह नहर पंजाब के गुरदासपुर, अमृतसर, तरन तानर और अन्य इलाकों में सिंचाई की व्यवस्था करती है। पाकिस्तान का कहना है कि लाहौर के पास स्थित शाहदरा में अचानक ही रावी नदी में 2 लाख 20 हजार क्यूसेक पानी आ गया। इसके चलते हालात बिगड़ गए हैं। क्या होता है हेडवर्क, जिसमें खराबी की बात कर रहा पाकिस्तान नदी में डायवर्जन हेडवर्क्स का निर्माण किया जाता है ताकि नहर में आने वाले पानी को नियंत्रित किया जा सके। ये नहर में गाद के प्रवेश को नियंत्रित करते हैं। ये बैराज से थोड़े छोटे होते हैं। हेडवर्क्स एक इंजीनियरिंग का शब्द है, जिसका उपयोग जलमार्ग के शीर्ष या मोड़ बिंदु पर किसी भी संरचना के लिए किया जाता है। इसका उपयोग नदी के पानी को नहर में या बड़ी नहर के पानी को छोटी नहर में मोड़ने के लिए किया जाता है।  

आरक्षण को लेकर मनोज जरांगे ने शुरू की भूख हड़ताल, समर्थकों ने चेतावनी दी

मुंबई मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे की मुंबई में भूख हड़ताल शुरू हो गई है। मनोज जरांगे शुक्रवार सुबह मुंबई के आजाद मैदान पहुंचे, जहां मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जरांगे और उनके समर्थक एक दिवसीय भूख हड़ताल कर रहे हैं। सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ मनोज जरांगे ने बुधवार को जालना जिले के अपने गांव से मार्च शुरू किया था। शुक्रवार को मुंबई में प्रवेश करते ही वाशी में समर्थकों ने उनका स्वागत किया। उनके हजारों समर्थक पहले ही मुंबई पहुंच चुके हैं। मराठाओं को कुनबी के रूप में मान्यता देने की मांग 43 वर्षीय जरांगे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत मराठा समुदाय के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं। जरांगे ने कहा है कि उनके समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगे और गणेश उत्सव में कोई बाधा नहीं डालेंगे। जरांगे की मांग है कि सभी मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए। कुनबी एक कृषक वर्ग से जुड़ी जाति है, जो ओबीसी श्रेणी में शामिल है। जिससे उन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का फायदा मिलेगा। जालना पुलिस ने जरांगे और उनके समर्थकों पर 40 शर्तें लगाने के बाद उन्हें मार्च जारी रखने की अनुमति दी थी, जिसमें उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने, वाहनों की आवाजाही में बाधा न डालने और आपत्तिजनक नारे लगाने से बचने का निर्देश दिया गया। मुंबई पुलिस ने जरांगे को 29 अगस्त को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच आजाद मैदान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी है। पुलिस ने कहा कि शाम 6 बजे सभी प्रदर्शनकारियों को वहां से चले जाना होगा। मुंबई में सुरक्षा के कड़े इंतजाम पुलिस ने यह भी शर्त रखी है कि प्रदर्शनकारियों के केवल पांच वाहन ही आजाद मैदान जा सकते हैं और वहां प्रदर्शनकारियों की संख्या 5,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने आजाद मैदान में 1500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। जरांगे के समर्थकों को ध्यान में रखते हुए रेलवे पुलिस ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर भी सुरक्षा बढ़ा दी है। 'हमें मराठा आरक्षण दो या देखते ही गोली मारने का आदेश दो' मनोज जरांगे के मराठा आरक्षण आंदोलन में भाग लेने के लिए आजाद मैदान पहुंचे नांदेड़ के एक किसान मारुति पाटिल ने कहा, 'अगर आप हमें आरक्षण नहीं दे सकते, तो हमें गोली मार दो।' अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी मारुति पाटिल के आक्रामक रुख को दोहराया और कहा कि वे तब तक नहीं जाएंगे जब तक आरक्षण आंदोलन की जीत नहीं हो जाती। मराठा आरक्षण समर्थक मारुति पाटिल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ बातचीत में कहा कि 'अगर आप हमें आरक्षण नहीं दे सकते, तो हम जीना नहीं चाहते। सरकार को देखते ही गोली मारने का आदेश दे देना चाहिए और हमें मार देना चाहिए। सरकार को अंदाजा नहीं है कि हमारी जिंदगी कितनी मुश्किल है।' पाटिल की तरह ही जरांगे के कई समर्थक पहले ही मुंबई पहुंच गए और पेड़ों के नीचे, फुटपाथों पर और रेलवे और मेट्रो स्टेशन के अंदर शरण लिए हुए हैं। पाटिल ने कहा, 'यह शर्मनाक है कि सरकार ने आंदोलन में भाग लेने वालों की सुरक्षा के लिए कोई अस्थायी ढांचा बनाने की जहमत नहीं उठाई। सब कुछ गीला है, और जमीन कीचड़ से भरी है।' 'मुख्यमंत्री को हमारी परीक्षा नहीं लेनी चाहिए' बीड जिले के परली इलाके के मोहा गांव निवासी उद्धव निंबालकर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर इस रैली का नेतृत्व कोई प्रमुख नेता कर रहा होता, तो नगर निगम बड़े-बड़े पंडाल और शेड बनवा देता। निंबालकर ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को एक ही दिन में ओबीसी कोटे से मराठों को आरक्षण देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कोई अंदाजा नहीं है कि यह आंदोलन कितना बड़ा हो जाएगा। निंबालकर ने कहा, 'उन्हें हमारी परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। अगर वह हमें आरक्षण नहीं दे सकते, तो उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ देना चाहिए।'