samacharsecretary.com

नई शिक्षा नीति पर जोर, पुरानी नीति को भागवत ने बताया गुलाम बनाने वाली

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष में आयोजित तीन दिवसीय संवाद के अंतिम दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सवाल-जवाब सत्र को संबोधित किया। विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख ने नई शिक्षा नीति की तारीफ करते हुए कहा, नई शिक्षा प्रणाली इसलिए शुरू की गई, क्योंकि हमें केवल राज्य नहीं चलाना है, हमें लोगों को चलाना है। पुरानी शिक्षा प्रणाली विदेशी आक्रमणकारियों ने बनाई थी। हम हमेशा विदेशी आक्रमणकारियों के गुलाम रहे, जो उस समय के राजा थे। वे इस देश पर शासन करना चाहते थे, इसका विकास नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने सभी प्रणालियां इस बात को ध्यान में रखते हुए बनाईं कि हम लोगों को गुलाम बनाए रखते हुए कैसे इस देश पर शासन कर सकते हैं…लेकिन अब हम स्वतंत्र हैं। इसलिए नई शिक्षा प्रणाली इसलिए शुरू की गई। संघ प्रमुख ने मुख्यधारा की शिक्षा को गुरुकुल शिक्षा से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि गुरुकुल शिक्षा का मतलब आश्रम में रहना नहीं, बल्कि देश की परंपराओं को सीखना है। भागवत ने कहा, गुरुकुल शिक्षा का मॉडल फिनलैंड के शिक्षा मॉडल जैसा है। फिनलैंड में शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए अलग विश्वविद्यालय है। स्थानीय आबादी कम होने के कारण कई लोग विदेशों से आते हैं, इसलिए वे सभी देशों के छात्रों को स्वीकार करते हैं। वहां, आठवीं कक्षा तक की शिक्षा छात्रों की मातृभाषा में दी जाती है। इस दौरान कोई क्लास वर्क नहीं दिया जाता। दस छात्रोंं पर एक शिक्षक का औसत है। संघ प्रमुख ने कहा, विदेशी नहीं, देश में इस्तेमाल होने वाली हर भाषा राष्ट्रभाषा है। सभी मातृभाषा के पास अपनी संस्कृति, अपनी विरासत है। सवाल संपर्क की भाषा पर सहमति बनाने की है। यह विदेशी नहीं होनी चाहिए। हमें मिलजुलकर तय करना होगा कि देश की संपर्क भाषा क्या होगी। इस दौरान उन्होंने संस्कृत की शिक्षा की वकालत करते हुए कहा कि चूंकि सारे ग्रंथ, उपनिषद इसी भाषा में लिखे गए, इसलिए संस्कृत के ज्ञान के बिना हम अपने देश को नहीं जान सकते। उन्होंने कहा कि अनुवाद ज्ञान का सर्वश्रेष्ठ स्रोत नहीं है। गलत अनुवाद के कारण ही देश में कई भ्रांतियां पैदा हुई हैं। अंग्रेजी उपन्यास पढ़ें पर प्रेमचंद को न छोड़ें भागवत ने कहा कि आप अंग्रेजी उपन्यास पढ़ें। हम अंग्रेज नहीं हैं, हमें अंग्रेज नहीं बनना है, लेकिन अंग्रेजी भाषा सीखने में क्या दिक्कत है? मुझे भी पिताजी ने कई अंग्रेजी उपन्यास पढ़ाए। इससे मेरे हिंदुत्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। लेकिन अंग्रेजी लेखकों को पढ़ें और प्रेमचंद जैसे भारतीय कहानीकारों को छोड़ दें, यह ठीक नहीं है। आंदोलन का समर्थन नहीं करेंगे, पर स्वयंसेवक स्वतंत्र भागवत ने फिर कहा कि राम मंदिर एकमात्र ऐसा आंदोलन था, जिसका संघ ने समर्थन किया था। वह उद्देश्य पूरा हुआ। संघ काशी-मथुरा पुनरुद्धार सहित किसी भी अन्य ऐसे अभियान का समर्थन नहीं करेगा। हालांकि भागवत ने स्पष्ट किया कि आरएसएस के स्वयंसेवक ऐसे आंदोलनों में शामिल होने के लिए स्वतंत्र हैं। हिंदू मानस में काशी-मथुरा और अयोध्या का महत्व है। दो जन्मभूमि हैं और एक निवास स्थान। स्वाभाविक है कि हिंदू समाज इसका आग्रह करेगा। हम कहते हैं बाकी जगह मंदिर और शिवलिंग मत ढूंढो। तीन का ही आग्रह है, तो उसे स्वीकार कर लो। यह भाईचारे व सौहार्द्र की दिशा में बड़ा कदम होगा। किसी से भी परहेज नहीं, पर रुकावट उधर से ही संघ प्रमुख ने कहा कि हमारे सभी सरकारों से संबंध ठीक हैं। हम सभी में परिवर्तन की संभावना देखते हैं। अच्छे कार्य के लिए किसी का भी समर्थन करने के लिए तैयार हैं। 1948 में संघ कार्यालय में आग लगाने के लिए मशाल लेकर निकलने वाले जयप्रकाश नारायण ने आपातकात के दौरान कहा कि संघ ही देश में परिवर्तन ला सकता है। दिवंगत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जब संघ मुख्यालय आए तो संस्था के प्रति उनकी गलतफहमी दूर हुई। हमें किसी से परहेज नहीं है। रुकावट उधर से है तो हम इस इच्छा का सम्मान करते हुए रुक जाते हैं। शाश्वत सच को ठुकराने की कीमत चुकाई संघ प्रमुख ने कहा कि अखंड भारत एक सत्य है। भारत से किनारा करने वाले देशों की हालत दुनिया से नहीं छिपी। इन देशों ने भारतवर्ष की एक संस्कृति, एक पूर्वज और एक मातृभूमि के शाश्वत सच को ठुकराने की कीमत चुकाई। उन्होंने कहा कि संघ ने हमेशा बंटवारे का विरोध किया। संघ के संस्थापक को विश्वास था कि उस दौरान जिस महात्मा गांधी का पूरा देश अनुसरण कर रहा था, उन्होंने कहा था कि बंटवारा मेरी लाश पर होगा। बाद में गांधीजी ने इसे स्वीकार कर लिया। चूंकि उस समय संघ के पास ताकत नहीं थी, इसलिए बंटवारा रोकने के लिए यह संगठन कुछ नहीं कर सका था। शिक्षा का मतलब यही…यह सोच बड़ी समस्या संघ प्रमुख ने कहा कि सरकारी और निजी क्षेत्र मिल कर देश में 35 फीसदी से अधिक लोगों को नौकरी नहीं दे सकते। देश में शिक्षा का मतलब नौकरी और उसमें भी सरकारी नौकरी समझा जाता है। जब से श्रम को काम के आधार पर हेय की दृष्टि से देखा गया, तभी से समस्या उत्पन्न हुई। समस्या यह है कि कृषि की पढ़ाई करने वाला पर्याप्त खेती की जमीन के बाद भी लॉन ऑफिसर बनना पसंद करता है। श्रम के महत्व को भूलते हुए कई तरह के अहम कार्यों को नीच कार्य का दर्जा दिया गया। देश में स्वरोजगार की मजबूत भावना पैदा नहीं हुई। हथियार बढ़ाने पर संघ शांति की बात करता है। हम बुद्ध के देश हैं, लेकिन हथियार बढ़ाने का मतलब युद्ध करना नहीं है। खुद की रक्षा करना भी है, क्योंकि दुनिया के सभी देश बुद्ध के देश नहीं हैं। जनसांख्यिकी में बदलाव खतरनाक भागवत ने कहा, देश के कई हिस्सों में घुसपैठ सहित अन्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकी बदलाव बेहद खतरनाक हैं। जनसांख्यिकी बदलाव का देश में बंटवारे के रूप में हमने दंश झेला है। भारत ही नहीं तिमोर, इंडोनेशिया समेत कई देशों ने इसके कारण अपने देश के मूल चरित्र और परंपरा पर खतरा महसूस किया है। भागवत ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम की भारत की नीति और भारतवर्ष के एक डीएनए के आधार पर घुसपैठ को अनुमति नहीं दी जा सकती। देश में कोई विदेशी आना चाहता है, … Read more

पूर्व RBI गवर्नर उर्जित पटेल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में बड़ी भूमिका

नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के तौर पर उनके कार्यकाल को देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण माना जाता है।  उनकी यह नियुक्ति तीन वर्षों के लिए होगी।   अप्वाइंटमेंट कमेटी ऑफ कैबिनेट की सहमति के बाद उर्जित पटेल को इस बेहद महत्वपूर्ण पद के लिए चुना गया और केंद्र सरकार के 28 अगस्त के नोटिफिकेशन में इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने दिसबंर 2018 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के पद से इस्तीफा दिया था। उनका कार्यकाल सितंबर 2019 तक था, लेकिन इसके पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। वे एनआईपीएफपी के चेयरमैन के रूप में भी काम कर चुके हैं। 

PAK पर मिसाइल हमले की तैयारी में थे 15 MiG-29K, इंडियन नेवी का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय नौसेना ने अपनी ताकत का जबरदस्त प्रदर्शन किया. वाइस एडमिरल तरुण सोबती, डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS) ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान  एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर 15 मिग-29के फाइटर जेट्स तैनात थे.  मध्य प्रदेश के डॉ. अंबेडकर नगर में आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित तीनों सेनाओं के 'रण संवाद-2025' में नौसेना की त्वरित और दृढ़ कार्रवाइयों के बारे में बताया. पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में 7 से 10 मई 2025 तक ऑपरेशन सिंदूर चला था. पहलगाम हमले से शुरुआत ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें हिंदू पुरुषों को निशाना बनाकर 26 पर्यटकों की हत्या की गई. 'द रेसिस्टेंस फ्रंट' (TRF) ने जिम्मेदारी ली, जो लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी है.  भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद समर्थन का आरोप लगाया. 7 मई को भारत ने मिसाइल हमले शुरू किए, जो पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 स्थानों पर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. पाकिस्तान ने दावा किया कि हमले नागरिक क्षेत्रों पर हुए, जिसमें 31 मौतें हुईं. भारत ने कहा कि केवल आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट किया गया. यह ऑपरेशन 10 मई को समाप्त हुआ, लेकिन इससे पहले तनाव बढ़ा, जिसमें ड्रोन और मिसाइल हमले हुए. नौसेना का रोल समुद्री ब्लॉकेड और निगरानी में था. वाइस एडमिरल सोबती ने बताया कि नौसेना का द्विवार्षिक थिएटर-लेवल एक्सरसाइज TROPEX पहले से ही पश्चिमी समुद्री तट पर संपत्तियों को तैनात कर चुका था. 96 घंटों के अंदर सभी ऑपरेशनल जहाज समुद्र में तैनात हो गए. हम बंदरगाह लौटे, गोला-बारूद की पूर्ति की (क्योंकि जहाज हमेशा पूरी तरह लोड नहीं होते) और सभी जहाजों व पनडुब्बियों को तैयार करके फिर समुद्र में उतर गए.   आईएनएस विक्रांत का रोल: 15 मिग-29के के साथ ताकत का प्रतीक ऑपरेशन का केंद्र था आईएनएस विक्रांत. भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर. इस पर 15 मिग-29के फाइटर जेट्स तैनात थे, जो डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट्स और पनडुब्बियों वाले टास्क फोर्स का बैकबोन बने. विक्रांत कराची के दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय जल में तैनात होकर डी फैक्टो ब्लॉकेड स्थापित किया, जिससे पाकिस्तानी नौसेना अपने बंदरगाहों तक सीमित हो गई. वाइस एडमिरल सोबती ने कहा कि हमने विक्रांत पर 15 मिग-29के चढ़ाए और समुद्र में तैयार हो गए. उद्देश्य फॉरवर्ड और डिटरेंट पोस्चर बनाए रखना था, ताकि विरोधी नौसेना हमें, हमारे व्यापार मार्गों, आर्थिक जीवनरेखाओं या तट को धमकी न दे सके. यह रणनीति सफल रही. उन्होंने कहा कि हम सफल रहे, क्योंकि हम पाकिस्तानी नौसेना को तट के पास बांध सके. उनके पास मैन्युवर की आजादी नहीं थी, वे बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर सके. हमने वह पोस्चर बनाए रखा. नौसेना की उपस्थिति सैटेलाइट, विमान, UAVs और तटीय रडार से समुद्री डोमेन अवेयरनेस से मजबूत हुई, जिससे पाकिस्तानी यूनिट्स बिना सीधे लड़ाई के निष्क्रिय हो गईं. नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर: बिना बॉर्डर क्रॉस किए लक्ष्य हासिल ऑपरेशन सिंदूर ने नौसेना की 'नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर' क्षमता दिखाई, जिसमें एडवांस्ड इंटेलिजेंस, लॉन्ग-रेंज मिसाइल्स और अनमैनेड सिस्टम्स से रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल किया. सोबती ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से नौसेना के अलावा पूरी सशस्त्र सेनाओं ने कई सबक सीखे. कुछ उपाय लागू हो चुके, बाकी तेजी से हो रहे हैं.      लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन स्ट्राइक: दुश्मन क्षेत्र में न घुसते हुए लैंड और सी टारगेट्स को प्रभावित करने की क्षमता बढ़ानी होगी .     काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स: लो-कॉस्ट UAVs का खतरा बढ़ा है, जैसे रेड सी और एडेन गल्फ में हूती हमलों में. मिलियन डॉलर के महंगे SAMs से लो-कॉस्ट UAVs को नष्ट करना महंगा है. हमें काउंटर-UAV सिस्टम विकसित करने होंगे.     इलेक्ट्रोमैग्नेटिक मैनेजमेंट: काउंटर-UAV जैमर्स से नौसेना के रडार प्रभावित हो सकते हैं. जहाज पहले से उपकरणों से भरे हैं, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वातावरण घना है.  नए ट्रांसमिटिंग सिस्टम्स जोड़ने से अपनी रडार क्षमता बाधित हो सकती है.  भविष्य के युद्धों के लिए सबक नौसेना की भूमिका समुद्री ब्लॉकेड में थी, जो पाकिस्तानी नौसेना को कराची बंदरगाह तक सीमित रखी. सोबती ने कहा कि नौसेना के कर्मी रैरिंग टू गो थे. एस्केलेशन लैडर कंट्रोल्ड था, क्योंकि मिलिट्री और पॉलिटिकल एम जल्द हासिल हो गया. अगर विरोधी बढ़ाता, तो हम तैयार थे. 

चुनावी सर्वे: NDA को मिली बड़ी बढ़त, BJP का अकेला प्रदर्शन पर्याप्त नहीं

 नई दिल्ली देश में अगर आज आम चुनाव हो जाएं तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की सीटें बढ़कर 324 हो जाएंगी. यही नहीं, बीजेपी की सीटें भी 240 से बढ़कर 260 हो जाएंगी. हालांकि पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े 272 से नीचे ही रहेगी. इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में ये नतीजे निकलकर आए हैं.   ये सर्वे देश के सभी राज्यों और लोकसभा क्षेत्रों में 1 जुलाई से 14 अगस्त 2025 के बीच हुआ. हर आयु वर्ग जाति, धर्म, लिंग वाले 54 हजार 788 लोग इसमें शामिल हुए. इसके अलावा पिछले 24 हफ्तों में 1 लाख 52 हजार 38 लोगों से भी राय ली गई थी. उसका विश्लेषण भी इसमें शामिल किया गया. इस तरह कुल 2 लाख 6 हजार 826 लोगों की राय से तैयार हुए मूड ऑफ द नेशन के नतीजे. हालांकि इन आंकड़ों में भी मोटे तौर पर 3 प्रतिशत और बारीक स्तर पर 5 प्रतिशत का मार्जिन एरर हो सकता है. MOTN सर्वे में पूछा गया कि अगर आज लोकसभा चुनाव हुए तो परिणाम क्या होगा, किस गठबंधन को कितनी सीटें मिलेंगी? सर्वे में सामने आया कि NDA को 324 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि INDIA ब्लॉक को 208 सीटें मिल सकती हैं, जबकि अन्य के खाते में 11 सीटें जा सकती हैं. हालांकि 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में एनडीए को 293 सीटें मिली थीं, जबकि INDIA ब्लॉक के खाते में 234 सीटें आई थीं. फरवरी-2025 में सर्वे किया गया था, जिसमें एनडीए को 343 सीटें और INDIA ब्लॉक को 188 सीटें मिलने का अनुमान था. आज चुनाव हुए तो किसको कितने वोट? अगर गठबंधन वाइज वोट शेयर की बात करें तो सर्वे के मुताबिक NDA गठबंधन को 46.7%, INDIA ब्लॉक को 40.9% और अन्य को 12.4% वोट शेयर मिल सकता है. 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में एनडीए को 43% वोट शेयर मिला था, जबकि INDIA ब्लॉक को 40% वोट मिला था. फरवरी में हुए सर्वे में एनडीए को 47% और INDIA ब्लॉक को 41% वोट शेयर मिलने का अनुमान था. आज चुनाव हुए तो किसको कितनी सीट? सर्वे में ये पूछा गया कि अगर आज लोकसभा चुनाव हो जाएं तो किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी. सर्वे में सामने आया कि बीजेपी को 260 , कांग्रेस को 97 और अन्य को 186 सीटें मिलने का अनुमान है. 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 240, कांग्रेस को 99 सीटें मिली थीं. फरवरी में हुए सर्वे में बीजेपी को 281 सीटें और कांग्रेस को 78 सीटें मिलने का अनुमान था. पार्टी वाइज वोट शेयर की बात करें तो सर्वे के मुताबिक बीजेपी के खाते में 40.6%, कांग्रेस के खाते में 20.8% और अन्य के खाते में 38.6%  वोट जा सकते हैं. 

उत्तराखंड में भारी तबाही: चमोली में बादल फटा, रुद्रप्रयाग में अलकनंदा रिवर डेंजर लेवल पार

चमोली  उत्तराखंड में तबाही का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. चमोली जिले में एक बार फिर बादल फटा है. ये घटना तहसील देवाल के मोपाटा में हुई है, जिसमें दो लोगों के लापता होने की खबर है. प्रशासन ने राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया है. वहीं केदारघाटी के लवारा गांव में पुल बहने से छेनागाड़ क्षेत्र में स्थिति गंभीर हो गई है. इसके अलावा रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा और मंदाकिनी भी उफान पर हैं, इनका पानी घरों में घुस कर तबाही मचा रहा है. बताया जा रहा है कि आवास के पास मौजूद गौशाला मलबे में दब गई है, जिसमें लगभग 15 से 20 जानवर दबने की सूचना है. प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी एक्स पर इसकी जानकारी दी. उन्होंने लिखा, जनपद रुद्रप्रयाग के बसुकेदार क्षेत्र के बड़ेथ डुंगर तोक और चमोली जिले के देवाल क्षेत्र में बादल फटने से मलबा आया है. इसकी वजह से कुछ परिवार फंस गए हैं. स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्य तेजी से कर रहा है. मैं लगातार अधिकारियों से संपर्क में हूं और आपदा सचिव व जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बचाव कार्य सही तरीके से और तेजी से किए जाएं." रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा और मंदाकिनी के संगम पर जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. अलकनंदा नदी खतरे के निशान को पार कर गई है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है. नदी का पानी आवासीय घरों तक पहुंच गया, जिसके चलते प्रशासन ने प्रभावित घरों को खाली कराया है. हालात इतने गंभीर हैं कि रुद्रप्रयाग का हनुमान मंदिर भी नदी में डूब गया है. वहीं, केदारघाटी के लवारा गांव में मोटरमार्ग पर बना पुल तेज बहाव में बह गया है. छेनागाड़ क्षेत्र में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. मंदाकिनी नदी का जलस्तर 2013 जैसी भयावह स्थिति की याद दिला रहा है. आजतक से फ़ोन पर हुई बातचीत में जिलाधिकारी प्रतीक जैन का कहना है कि बसु केदार क्षेत्र में अतिव्रष्टि के बाद 4 घर बहने की सूचना है, सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया है और स्थिति पर नज़र बनाये हुए हैं. भारी बारिश को देखते हुए रुद्रपरायग, बागेश्वर, चमोली, हरिद्वार और पिथौरागढ़ जिलों में आज स्कूलों की छुट्टी की गई है. हरिद्वार में भी भारी बारिश का दौर जारी है. यहां जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने भारी बारिश को देखते हुए सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों में आज बंद रखने के निर्देश दिए है. पिथौरागढ़ जनपद में लगातार हो रही भारी वर्षा एवं खराब मौसम की स्थिति को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी द्वारा जनपद के समस्त शासकीय, अशासकीय एवं निजी विद्यालयों (कक्षा नर्सरी से कक्षा 12 तक) तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों में दिनांक 29 अगस्त 2025 को अवकाश घोषित किया गया है. बता दें कि उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश से पर्वतीय जिलों में भूस्खलन और जलभराव की घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही हैं. चमोली जिले में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग लाता गांव के पास अचानक पहाड़ी टूटने से बंद हो गया, जिससे एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है. यहां सड़क को खोलने का काम जारी है. मौसम विभाग ने 29 अगस्त के लिए देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ में तेज बारिश के मद्देनजर ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है. वहीं बाकी क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट घोषित किया है. उत्तराखंड में अगले दो दिन अलग-अलग क्षेत्रों में भारी बारिश को देखते हुए पूरे प्रदेश को येलो अलर्ट पर रखा हुआ.

उत्तराखंड में बादल फटने से कहर: रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी में तबाही, एक महिला की मौत, कई लोग लापता

गोपेश्वर (चमोली) उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। रुद्रप्रयाग जिले के टेंडवाल गांव में मलबे में दबने से एक महिला की मौत हो गई। जबकि 18 से 20 लोग यहां लापता बताए जा रहे हैं। वहीं चमोली जिले के देवाल ब्लॉक में भी बादल फटा है। जिसमें पति-पत्नी लापता हैं और दो लोग घायल हो गए, साथ ही 20 मवेशी मलबे में दबे हैं। टिहरी के भिलंगना ब्लॉक के गेंवाली गांव पर भी बादल फटा है। गनीमत यह रही कि यहां किसी भी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। इसके अलावा रुद्रप्रयाग में भी बादल फटा है। यहां जखोली ब्लॉक के छेनागाड़, बांगर सहित कई जगहों पर अतिवृष्टि से व्यापक नुकसान हुआ है। बृहस्पतिवार को देर रात से हो रही तेज बारिश शुक्रवार को भी जारी है। बृहस्पतिवार रात को तहसील देवाल के मोपाटा में बादल फटने से भारी तबाही हुई है। कुछ घरों के मलबे में दबे होने की सूचना है। जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि मोपाटा में रहने वाले तारा सिंह और उनकी पत्नी लापता बताए जा रहे हैं। जबकि विक्रम सिंह और उनकी पत्नी घायल हुए हैं। इनके आवास और गोशाला के मलबे में दबने की सूचना है। इसमें 15 से 20 जानवर भी मलबे में दबने की सूचना है। चमोली जिले के सभी ब्लॉकों के स्कूलों में आज अवकाश घोषित डीएम ने बताया कि तहसील प्रशासन की टीम मौके लिए रवाना हो गई है। इधर, भारी बारिश को देखते हुए चमोली जनपद के सभी विकास खंडों में शुक्रवार को अवकाश घोषित कर दिया गया है। भारी बारिश के चलते देवाल में रास्ते जगह-जगह टूट गए हैं। थराली में भी रात से हो रही बारिश से लोग सहमे हैं। आदिबदरी, कर्णप्रयाग में भी तेज बारिश हो रही है। कर्णप्रयाग में मूसलाधार बारिश के चलते कालेश्वर में पहाड़ से आया मलबा कर्णप्रयाग में मूसलाधार बारिश के चलते कालेश्वर में ऊपर पहाड़ से मलबा आया है जो लोगों के घरों में घुस गया। जेसीबी मशीन के द्वारा मलवा हटाने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। अलकनंदा और पिंडर नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है। कर्णप्रयाग के सुभाषनगर में पहाड़ी से बोल्डर और मलबा गिरने से सड़क बंद हो गई है। टिहरी के भिलंगना ब्लॉक में भी फटा बादल भिलंगना ब्लॉक के गेंवाली गांव के ऊपर बीती  रात को बादल फटने की घटना हुई है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट ने बताया कि बादल फटने से कोई जनहानि नहीं हुई है। कृषि भूमि, पेयजल लाइन, विद्युत लाइनों को नुकसान पहुंचा है। राजस्व विभाग की टीम गेंवाली गांव रवाना हो गई है। अलग-अलग स्थान पर पैदल पुलिया और रास्ते टूट गए हैं।  

‘पधारो म्हारे देश’ की धुन पर जापान में पीएम मोदी का अभिनंदन, देखें वीडियो

टोक्यो  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान की दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार को तोक्यो पहुंचे हैं। एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया। राजस्थानी वेशभूषा में मौजूद जापान की महिलाओं ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। उन्होंने 'पधारो मारे देश' बोलकर वेलकम करने के बाद राजस्थानी गीत भी सुनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह जापान यात्रा अमेरिका से टैरिफ वॉर के बीच बेहद अहम मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान के तोक्यो पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री भारत-जापान साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ शाम को व्यापक चर्चा करेंगे।’अपने प्रस्थान वक्तव्य में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी जापान यात्रा दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संबंधों और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का एक अवसर प्रदान करेगी। शिगेरू इशिबा से मिलेंगे PM मोदी पीएम मोदी 29-30 अगस्त को जापान यात्रा के दौरान जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे। पीएम मोदी की जापान और चीन की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और शुल्क नीतियों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा हो गया है। चार दिवसीय यात्रा पर रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा, "मुझे विश्वास है कि जापान और चीन की मेरी यात्राएं हमारे राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगी तथा क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, सुरक्षा और सतत विकास को आगे बढ़ाने में सार्थक सहयोग के निर्माण में योगदान देंगी।" पीएम मोदी ने जापान यात्रा पर कहा, ‘‘हम अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के अगले चरण को आकार देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। दोनों देशों के बीच साझेदारी ने पिछले 11 वर्षों में लगातार और महत्वपूर्ण प्रगति की है।’’ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा भारत', बोले पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो में इंडिया-जापान इकोनॉमिक फोरम में कहा, 'आज भारत में राजनीतिक स्थिरता है, आर्थिक स्थिरता है, नीतियों में पारदर्शिता है और फैसलों में पूर्वानुमान की क्षमता है. आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है और बहुत जल्द भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है.' 'भारत में पूंजी सिर्फ बढ़ती ही नहीं, बल्कि कई गुना हो जाती है', बोले पीएम मोदी टोक्यो में पीएम मोदी ने कहा कि भारत निवेश के लिए सबसे प्रॉमिसिंग डेस्टिनेशन है. 80 प्रतिशत कंपनियां भारत में विस्तार करना चाहती हैं और 75 प्रतिशत पहले से मुनाफे में हैं. इसका मतलब है कि भारत में पूंजी सिर्फ बढ़ती ही नहीं है बल्कि कई गुना हो जाती है. 'हर क्षेत्र में भारत-जापान की पार्टनरशिप भरोसे का प्रतीक', इकोनॉमिक फोरम में बोले पीएम मोदी टोक्यो में भारत-जापान इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'भारत की विकास यात्रा में जापान हमेशा एक अहम पार्टनर रहा है. मेट्रो से मैन्युफैक्चरिंग तक, सेमीकंडक्टर से स्टार्टअप तक हमारी पार्टनरशिप आपसी विश्वास का प्रतीक बनी है और जापानी कंपनियों ने भारत में 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है.' टोक्यो में भारतीय समुदाय से मिले PM मोदी, शेयर की तस्वीरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि टोक्यो में भारतीय समुदाय की गर्मजोशी और स्नेह से वह बेहद अभिभूत हुए. उन्होंने सराहना की कि कैसे भारतीय लोग जापान में रहते हुए समाज में अहम योगदान दे रहे हैं और साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों को संजोए हुए हैं. पीएम मोदी ने आगे बताया कि कुछ ही घंटों में वह जापान के बिजनेस लीडर्स के साथ मुलाकात करेंगे, जहां भारत-जापान के व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा होगी. जानें क्यों अहम है PM मोदी का जापान दौरा जापान पीएम मोदी के दौरे के दौरान भारत में अगले दस साल के लिए 10 ट्रिलियन येन (लगभग दोगुना) निजी निवेश की घोषणा कर सकता है. यह 2022 में तय किए गए 5 ट्रिलियन येन के लक्ष्य से कहीं बड़ा कदम होगा. जापान, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का बड़ा समर्थक है और मारुति सुजुकी अब भारत से इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात भी शुरू कर रही है. अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन जैसी बड़ी परियोजना दोनों देशों की साझेदारी का उदाहरण है. इसके अलावा, भारत और जापान सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज और स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एक नया आर्थिक सुरक्षा ढांचा तैयार करने पर सहमत हो सकते हैं, जिससे भारत की चीन पर निर्भरता कम होगी. गायत्री मंत्र, राजस्थानी पोशाक… जापान के लोगों ने कुछ इस तरह किया पीएम मोदी का वेलकम भारतीय प्रवासी समुदाय ने प्रधानमंत्री मोदी का जापान पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया. जापानी समुदाय के लोगों ने पीएम मोदी का स्वागत गायत्री मंत्र और अन्य मंत्रों का पाठ करके किया. राजस्थानी पोशाक पहने जापानी लोगों ने प्रधानमंत्री के स्वागत में राजस्थानी लोकगीत गाए. टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत पीएम मोदी ने एक्स पर टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि भारत और जापान अपने विकासात्मक सहयोग को लगातार मजबूत कर रहे हैं और इस यात्रा के दौरान वह प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा समेत अन्य नेताओं से मुलाकात करने को उत्सुक हैं. मोदी ने उम्मीद जताई कि यह दौरा दोनों देशों के बीच मौजूदा साझेदारी को और गहरा करेगा और सहयोग के नए अवसर खोलेगा. मोदी 29-30 अगस्त को जापान यात्रा के दौरान जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री ने जापान यात्रा पर कहा, ‘हम अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के अगले चरण को आकार देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। दोनों देशों के बीच साझेदारी ने पिछले 11 वर्षों में लगातार और महत्वपूर्ण प्रगति की है।’ उन्होंने कहा, ‘हम अपने सहयोग को नयी उड़ान देने, आर्थिक व निवेश संबंधों के दायरे एवं महत्वाकांक्षाओं का विस्तार करने, कृत्रिम मेधा (एआई) व सेमीकंडक्टर सहित नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।’ जापान से मोदी 31 अगस्त से दो दिवसीय यात्रा पर चीन के शहर तियानजिन जाएंगे। रविवार को प्रधानमंत्री चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ वार्ता करेंगे, जिसमें पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आगे के कदमों पर ध्यान केंद्रित करने की संभावना है। पीएम मोदी एससीओ सम्मेलन से इतर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी … Read more

ट्रंप सहयोगी का बेतुका बयान: यूक्रेन में शांति का रास्ता भारत से होकर जाता है

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बिजनेस सलाहकार पीटर नवारो ने भारत को अहंकारी कहने के बाद एक बार फिर से भारत को लेकर अनर्गल आरोप लगाए हैं. नवारो ने यूक्रेन वॉर को सीधे भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद से जोड़ दिया है. नवारो ने कहा है कि यूक्रेन में शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर गुजरता है.  बुधवार को ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत में नवारो ने कहा था कि 'भारतीय इस मामले में काफी घमंडी हैं और वे कहते हैं कि ये हमारी संप्रभुता का मामला है, हम जब चाहें किसी से भी तेल खरीद सकते हैं.' नवारो ने एक्स पर एक लंबे ट्विटर थ्रेड में एकतरफा तर्कों से अमेरिकी टैरिफ को सही ठहराने की कोशिश की है और भारत पर कई आरोप लगाए हैं.  नवारो ने कहा कि यह केवल भारत के अनुचित व्यापार के बारे में नहीं है, यह पुतिन की युद्ध मशीन को भारत द्वारा दी गई वित्तीय लाइफलाइन को काटने के बारे में है. नवारो ने लिखा है कि अमेरिकी उपभोक्ता भारत का सामान खरीदते हैं, जबकि भारत हाई टैरिफ लगाकर और दूसरे उपायों से अमेरिका से सामानों का आयात नहीं करता है. भारत हमारे डॉलर से रूस का सस्ता तेल खरीदता है.  भारतीय रिफाइनरियों पर नवारो के आरोप भारतीय रिफाइनरियां अपने प्रमुख रूसी साझेदारों के साथ मिलकर रिफाइनरी चलाती हैं और कालाबाजारी में तेल को बेचकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बड़ा मुनाफा कमाती हैं. इस तरह से रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए धन जुटाने हेतु भारी मात्रा में नकदी जुटाता है. भारत की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखे बिना बेबुनियाद आरोप लगाते हुए ट्रंप के ट्रेड सलाहकार नवारो ने दावा किया कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पहले भारत के आयात में रूसी तेल का हिस्सा 1% से भी कम था. लेकिन आज ये 30 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गया है. भारत प्रतिदिन 15 लाख बैरल से भी ज़्यादा तेल मंगाता है.  उन्होंने कहा कि यह उछाल घरेलू मांग से प्रेरित नहीं है. नवारो का दावा है कि यह भारतीय मुनाफाखोरों द्वारा संचालित है और इसके लिए यूक्रेन में खून-खराबे और तबाही की अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ रही है. अपने अगले ट्वीट में नवारो ने लिखा है कि भारत की बड़ी तेल लॉबी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्रेमलिन के लिए एक विशाल रिफाइनिंग केंद्र और तेल मनी लॉन्ड्रोमैट में बदल दिया है. भारतीय रिफाइनर सस्ते रूसी तेल खरीदते हैं, उसे प्रोसेस करते हैं और यूरोप, अफ्रीका और एशिया को ईंधन निर्यात करते हैं. जबकि तटस्थता के नाम पर वे प्रतिबंधों से सुरक्षित रहते हैं.  '10 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है भारत' नवारो का दावा है कि भारत अब प्रतिदिन 10 लाख बैरल से ज्यादा रिफाइंड पेट्रोलियम का निर्यात करता है. ये मात्रा उसके द्वारा आयातित रूसी कच्चे तेल की मात्रा के आधे से भी ज़्यादा है. इससे होने वाली आय भारत के राजनीतिक रूप से जुड़े एनर्जी दिग्गजों को जाती है. और सीधे पुतिन के वॉर फंड में. जहां अमेरिका यूक्रेन को हथियार देने के लिए भुगतान करता है, वहीं भारत रूस को वित्तीय मदद देता है, जबकि वह अमेरिकी वस्तुओं पर दुनिया के कुछ सबसे ऊंचे टैरिफ लगाता है, जिससे अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान होता है. भारत के साथ हमारा 50 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है. और वे हमारे डॉलर का इस्तेमाल रूसी तेल खरीदने के लिए कर रहे हैं. यूक्रेन युद्ध में महात्वाकांक्षाओं के टकराव, नाटो का रोल, और अमेरिकी पॉलिटिकल गेम को इनकार करते हुए नवारो ने भू-राजनीतिक सच्चाइयों को झूठलाने की कोशिश की है. 'भारत खूब पैसा कमाता है, यूक्रेन के लोग मरते हैं' नवारो ने भारत पर आरोप लगाया है कि वे रूसी तेल से खूब पैसा कमाते हैं और यूक्रेनवासी मरते हैं. नवारो ने भारत के खिला सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा है कि यह यहीं नहीं रुकता. भारत रूसी हथियार खरीदना जारी रखता है और साथ ही यह मांग करता है कि अमेरिकी कंपनियां संवेदनशील सैन्य तकनीक हस्तांतरित करें और भारत में संयंत्र स्थापित करें. यह एक रणनीतिक मुफ़्तखोरी है. उन्होंने आगे कहा बाइडेन प्रशासन ने इस पागलपन को ज़्यादातर नज़रअंदाज़ किया है. राष्ट्रपति ट्रंप इसका सामना कर रहे हैं. भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाना, जिसमें 25 प्रतिशत अनुचित व्यापार के लिए और 25% राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए है.  अगर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत चाहता है कि उसके साथ अमेरिका के रणनीतिक साझेदार जैसा व्यवहार किया जाए, तो उसे वैसा ही व्यवहार करना होगा. यूक्रेन में शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर जाता है.  बता दें कि 27 अगस्त से भारत पर 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ लागू हो गया है. कई संगठनों ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी टैरिफ से भारत के 48 अरब डॉलर के निर्यात प्रभावित हो सकते हैं.    

ट्रंप टैरिफ विवाद के बीच PM मोदी और जिनपिंग आमने-सामने, बड़ी बैठक तय

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रविवार को द्विपक्षीय बैठक होने जा रही। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सम्मेलन के इतर होगी। प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह बीते सात वर्षों में प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर तनाव कम हुआ है। दोनों देशों ने देपसांग मैदानी क्षेत्र और डेमचोक क्षेत्र में गश्त के अधिकार को लेकर सहमति जताई है। वहीं, अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर रिश्ते काफी बिगड़ चुके हैं। दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात 23 अक्टूबर, 2024 को रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2018 में चीन की यात्रा की थी। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मई 2020 में चीनी घुसपैठ के बाद शुरू हुए सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन के राजनयिक संबंधों में खटास आ गई थी। तब से, दोनों देशों ने संबंधों को सुधारने की कोशिश की है। मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू किया है। चीनी पर्यटकों के लिए वीजा जारी किए हैं और सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। मई में इन प्रयासों को फिर से झटका लगा जब भारत को ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई शत्रुता के दौरान पाकिस्तानी सेना को चीन की सक्रिय सहायता के सबूत मिले।  

अब मिनटों में मिलेगा ई-वोटर आईडी कार्ड, सिर्फ एक क्लिक में डाउनलोड

नई दिल्ली कई बार होता है कि अचानक हमें किसी जरूरी काम के लिए अपने पहचान पत्र की जरूरत पड़ जाती है लेकिन अक्सर लोग इस तरह के डॉक्यूमेंट खो जाने के डर से घरों में रखना पसंद करते हैं। हालांकि ऐसी स्थिति में कई तरीके हैं जिनकी मदद से आप तुरंत फोन पर अपने पहचान पत्र को डाउनलोड कर सकते हैं। यह तरीके आपके काम उस स्थिति में भी आ सकते हैं, जब किसी वजह से आपका पहचान पत्र खो गया हो। चलिए देरी न करते हुए जल्दी से उन तरीकों को समझते हैं जिनकी मदद से आप अपने फोन पर पहचान पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। ओरिजनल जितनी है मान्यता बता दें कि आपके पहचान पत्र की ई-कॉपी हर जगह मान्य होती है और आपके इसकी मदद से मतदान भी कर सकते हैं। अगर आप चाहें तो इसका प्रिंटआउट लेकर उन जगहों पर सब्मिट भी कर सकते हैं जहां आपको किसी काम से पहचान पत्र को सबमिट करना हो। साथ ही इसे डाउनलोड करने के बदल में आप से किसी तरह का चार्ज नहीं लिया जाता। वेबसाइट से कैसे डाउनलोड करें Voter ID कार्ड? अगर आप अपना वोटर आईडी कार्ड डाउनलोड करने के लिए लैपटॉप या पीसी का इस्तेमाल करने वाले हैं, तो:     सबसे पहले https://www.nvsp.in पर जाएं।     इस वेबसाइट पर आपको e-EPIC Download के नाम से दिख रहे ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।     इसके बाद आप से अपने अकाउंट का यूजर नेम और पासवर्ड डालने के लिए कहा जाएगा। बता दें कि अगर इस वेबसाइट पर आपका अकाउंट रजिस्टर नहीं है, तो आप नीचे दिए अकाउंट रजिस्टर करने के ऑप्शन पर क्लिक करके अपना अकाउंट बना भी सकते हैं।     एक बार पोर्टल पर लॉगइन करने के बाद आपको पहचान पत्र डाउनलोड करने के लिए EPIC नंबर या फॉर्म रेफरेंस नंबर में से किसी एक ऑप्शन को चुनना होगा। यहां EPIC नंबर को चुनें।     EPIC नंबर आपके पहचान पत्र का नंबर होता है। इसे डालने के बाद स्टेट को चुनें और सर्च करें।     सर्च करने के बाद आपको अपने पहचान पत्र से जुड़ी डिटेल एक टेबल के तौर पर दिखाई जाएगी। इस डिटेल में आपको अपना नाम, रिलेटिव का नाम, स्टेट और मोबाइल नंबर दिखाई देगा।     अगर डिटेल ठीक है, तो आप OTP भेजें पर टैप करें और वेरिफाई करें।     OTP वेरिफाई करने के बाद आपको कैप्चा एंटर करना होगा और उसके बाद आपकी ई-वोटर आईडी डाउनलोड हो जाएगी। मोबाइल फोन पर Voter ID कार्ड कैसे डाउनलोड करें? अगर आप वोटर आईडी कार्ड डाउनलोड करने के लिए मोबाइल इस्तेमाल करने वाले हैं, तो आपको अपने फोन पर Voter Helpline नाम की एक ऐप डाउनलोड कर लेनी चाहिए।     इसके बाद इस ऐप पर अपने मोबाइल नंबर की मदद से अपना अकाउंट रजिस्टर कर लें। इसके लिए आपको OTP के जरिए अपने नंबर को वेरिफाई करना होगा।     इस ऐप में आपको EPIC डाउनलोड नाम से एक ऑप्शन मिलेगा।     ऐप पर आप EPIC नंबर या अपनी अन्य डिटेल्स की मदद से भी पहचान पत्र को डाउनलोड कर सकते हैं। यह ऑप्शन आपको वेबसाइट पर नहीं मिलता। ऐसे में अगर आपका पहचान पत्र खो गया है और आपके पास अपना epic नंबर नहीं है, तो आप अपनी अन्य डिटेल्स जैसे नाम, पता, जन्म की तारीख के जरिए भी पहचान पत्र को डाउनलोड कर सकते हैं।     फिलहाल हम मान कर चलते हैं कि आपके पास अपना EPIC नंबर है और उसे एंटर करने के बाद आप OTP का अनुरोध कर पाएंगे।     OTP डालने के बाद आपके पहचान पत्र की ई-कॉपी डाउनलोड हो जाएगी। ध्यान देने वाली बात अगर आपके पास EPIC नंबर नहीं है, तो आपको पहचान पत्र डाउनलोड करने के लिए Voter Helpline ऐप का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि वहां आप खुद से जुड़ी अन्य डिटेल्स की मदद से भी पहचान पत्र को डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अलावा पहचान पत्र की ई-कॉपी डाउनलोड करने के लिए आपका फोन नंबर पहचान पत्र के साथ लिंक जरूर होना चाहिए। इसके बिना आप ओटीपी को वेरिफाई नहीं कर पाएंगे और फिर आपके पहचान पत्र की ई-कॉपी डाउनलोड भी नहीं हो सकेगी।