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भारत का डर और इजरायल की चिंता: पाक-सऊदी रक्षा गठबंधन की वजहें

रियाद सऊदी तेल का राजा है, लेकिन सुरक्षा के मामले में कमजोर। सालों से ईरान उसका सबसे बड़ा दुश्मन रहा। वहीं पाकिस्तान हर तरह से भारत के सामने बौना नजर आता है। दोनों ही मुस्लिम देश एक दूसरे को ढाल की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं।  रियाद के यमामा पैलेस में एक ऐतिहासिक डील देखने को मिली। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गले मिलकर 'स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट' (एसएमडीए) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता साफ कहता है: एक देश पर मतलब दोनों पर हमला। लेकिन यह सिर्फ कागजों का खेल नहीं, बल्कि दो देशों की गहरी मजबूरी का नतीजा है। एक तरफ पाकिस्तान, जो परमाणु शक्ति होने के बावजूद भारत के सामने बेबस महसूस करता है। दूसरी तरफ सऊदी अरब है, जो ईरान की पुरानी दुश्मनी से जूझता था, लेकिन अब इजरायल को सबसे बड़ा खतरा मानने लगा है। खाड़ी के देशों के लिए यह समझौता एक नई ढाल कहा जा रहा है, जो अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर सवाल उठाने के बाद आई। आइए, विस्तार से समझते हैं कि यह समझौता क्यों हुआ, कैसे हुआ, और इसके पीछे की सच्ची कहानी क्या है। पाकिस्तान का भारत डर: परमाणु ताकत, लेकिन कन्वेंशनल कमजोरी पाकिस्तान दुनिया का छठा सबसे बड़ा परमाणु हथियार संपन्न देश है। उसके पास करीब 170 परमाणु हथियार हैं, जो किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं। लेकिन कन्वेंशनल यानी पारंपरिक जंग में भारत के सामने यह बौना नजर आता है। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 के मुताबिक, भारत की मिलिट्री रैंकिंग दुनिया में चौथी है, जबकि पाकिस्तान 12वीं पर खिसक गया है। सैनिकों की तुलना: भारत के पास 14.6 लाख एक्टिव सैनिक हैं, पाकिस्तान के सिर्फ 6.5 लाख। भारत के रिजर्व फोर्स 11.5 लाख हैं, पाकिस्तान के सिर्फ 5 लाख। हथियारों का फर्क: भारत के पास 4,200 से ज्यादा टैंक, 2,200 से ज्यादा लड़ाकू विमान और 290 से ज्यादा नौसैनिक जहाज हैं (जिनमें 2 एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल)। पाकिस्तान के पास 2,600 टैंक, 1,400 विमान और महज 121 जहाज। बजट का अंतर: भारत का डिफेंस बजट 2025-26 के लिए 79 बिलियन डॉलर (करीब 6.8 लाख करोड़ रुपये) है, जो पाकिस्तान के 10 बिलियन डॉलर से 8 गुना ज्यादा। यह फर्क सिर्फ आंकड़ों में नहीं, जमीनी हकीकत में भी दिखा। मई में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया। 7 मई को भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और पंजाब प्रांत सहित कई इलाकों में 9 ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। सकड़ों आतंकी मारे गए। चार दिनों तक चली इस जंग में पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन फिर भारत ने अपनी ब्रह्मोस मिसाइल से पाकिस्तान के अनेकों एयरबेस उड़ा दिए। मजबूरन पाकिस्तान को 10 मई को सीजफायर की गुहार लगानी पड़ी। इस संघर्ष ने पाकिस्तान को एहसास दिलाया कि कन्वेंशनल ताकत में भारत से मुकाबला मुश्किल है। परमाणु हथियार आखिरी हथियार हैं, लेकिन परमाणु जंग शुरू होते ही सब कुछ तबाह हो सकता है। इसलिए पाकिस्तान को एक मजबूत दोस्त की जरूरत थी, जो भारत के खिलाफ बैलेंस बनाए। सऊदी अरब, जो पाकिस्तान को आर्थिक और मिलिट्री मदद देता रहा है, परफेक्ट चॉइस था। सऊदी का डर: ईरान से इजरायल तक, खतरा बढ़ा सऊदी अरब तेल का राजा है, लेकिन सुरक्षा के मामले में कमजोर। सालों से ईरान उसका सबसे बड़ा दुश्मन रहा। यहां एक बड़ी ही दिलचस्प बात ये है कि इजरायल और ईरान एक दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन हैं। लेकिन दोनों की सऊदी अरब से नहीं बनती। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने 2019 में सऊदी के आरामको प्लांट पर ड्रोन हमला किया था। 2025 में भी इजरायल-ईरान से टेंशन बढ़ी। लेकिन असली टर्निंग पॉइंट आया 9 सितंबर 2025 को। कतर की राजधानी दोहा के लीक्तैफिया इलाके में इजरायली एयरस्ट्राइक हुई। हमला हमास के नेताओं पर था, जो कतर सरकार के रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में सीजफायर प्रपोजल पर मीटिंग कर रहे थे। हमले में 5 हमास मेंबर, 1 कतरी सिक्योरिटी ऑफिसर और नागरिक मारे गए। कतर ने इसे 'स्टेट टेररिज्म' कहा। अमेरिका ने कतर को मेजर नॉन-नाटो एली बनाया है और दोहा में उसका अल उदेद एयरबेस है जोकि मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा यूएस बेस। फिर भी, इजरायल ने हमला कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें पहले से खबर नहीं थी। यह हमला खाड़ी देशों के लिए बड़ा झटका था। कतर ने इजरायल को अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का दोषी ठहराया। 15 सितंबर को दोहा में अरब-इस्लामिक समिट हुई, जहां सऊदी क्राउन प्रिंस समेत कई लीडर्स ने इजरायल की निंदा की। लेकिन कोई ठोस एक्शन नहीं हुआ। सऊदी को लगा कि अमेरिकी सुरक्षा गारंटी भरोसेमंद नहीं रही। ईरान पुराना खतरा था, लेकिन अब इजरायल ने जगह ले ली। चैथम हाउस के डायरेक्टर सनम वकील कहते हैं, "गल्फ स्टेट्स अब इजरायल को सबसे बड़ा सिक्योरिटी थ्रेट मानते हैं।" इजरायल के हमले ने अरब देशों को भड़का दिया यह समझौता इजरायल के प्रति एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इजरायल को मध्य पूर्व का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश माना जाता है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजरायल पर हमले के बाद से इजरायल ने ईरान, लेबनान, फिलिस्तीनी क्षेत्रों, कतर, सीरिया और यमन में व्यापक सैन्य कार्रवाई की है। इस महीने की शुरुआत में कतर पर इजरायल के हमले ने अरब देशों को भड़का दिया। एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, "यह समझौता किसी विशिष्ट देश या घटना के जवाब में नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गहरे सहयोग को संस्थागत रूप देने का कदम है।" हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्रीय तनावों के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है।  

भारत में पहुंची ‘समुद्र की रानी’ from बांग्लादेश, लोग उत्साहित, दुकानदार हैं टेंशन में

कोलकाता  दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश से हिल्सा मछली, जिसे समुद्र की रानी भी कहा जाता है, की पहली खेप भारत-बांग्लादेश सीमा पर पहुंच चुकी है। आठ ट्रकों में करीब 32 टन मछली भारत आई है। बांग्लादेश ने हाल ही में त्योहारों को ध्यान में रखते हुए 1200 टन हिल्सा मछली के निर्यात को मंजूरी दी थी। यह आपूर्ति 16 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच होगी। प्रत्येक ट्रक में पद्मा नदी की लगभग चार टन मछलियां लदी हैं। मछली आयातक संघ के सचिव सैयद अनवर मकसूद ने बताया कि यह खेप थोक बाजारों में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि एक किलो 'पद्मा हिल्सा' की कीमत ग्राहकों के लिए लगभग 1800 रुपये होगी। मकसूद ने आगे कहा कि अब लगभग हर दिन बांग्लादेश से मछलियां कोलकाता के बाजारों में आएंगी। खुदरा विक्रेताओं में तनाव इस कीमती खेप ने मछली प्रेमियों और व्यापारियों में उत्साह पैदा किया है, खासकर पद्मा नदी की हिल्सा के अनोखे स्वाद के कारण। हालांकि, ऊंची कीमतों के चलते खुदरा विक्रेता चिंतित हैं। सुबह-सुबह नीलामी के लिए जुटे खुदरा विक्रेताओं ने ऊंची दरों पर चिंता जताई। एक स्थानीय विक्रेता ने कहा कि मछली की गुणवत्ता शानदार है, लेकिन इसकी कीमत इतनी अधिक है कि इससे ज्यादा मुनाफा कमाने की उम्मीद नहीं है। अगर लोग इतनी ऊंची कीमत पर मछली खरीदेंगे, तभी हम कुछ लाभ कमा पाएंगे। खुदरा बाजार में कीमतों के और बढ़ने की संभावना है, और अनुमान है कि कीमत 2000 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक हो सकती है। इन मछलियों का आकार 800 ग्राम से 1 किलोग्राम तक बताया जा रहा है। एक अन्य विक्रेता ने स्थानीय मछलियों से प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए कहा कि पहले कुछ लोगों ने गुजरात से हिल्सा मंगवाई थी। दोनों का स्वाद अलग है, और बांग्लादेशी मछली की मांग हमेशा ज्यादा रहती है, लेकिन इस बार कीमत बहुत अधिक है। क्या बोले अधिकारी? अधिकारियों ने बताया कि बांग्लादेश सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मछली की यह खेप उसकी निर्यात नीति 2024–27 के तहत होनी चाहिए, जिसमें न्यूनतम निर्यात मूल्य 12.5 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम निर्धारित है। इस मंजूरी की वैधता 16 सितंबर से 5 अक्टूबर तक है।  

भगवान विष्णु पर बयान को लेकर CJI गवई ने जताई सफाई, VHP ने की संयम की अपील

नई दिल्ली  खजुराहो के प्रसिद्ध जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की मरम्मत करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बीआर गवई ने एक टिप्पणी कर दी थी। इसको लेकर सोशल मीडिया पर जमकर बवाल हो रहा था। यही नहीं विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन ने भी चीफ जस्टिस को नसीहत दी थी कि वाणी पर संयम रखना चाहिए। अब इस मामले में खुद चीफ जस्टिस बीआर गवई का बयान आया है और उन्होंने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मेरे बयान को सोशल मीडिया पर गलत ढंग से पेश किया गया। उन्होंने कहा कि किसी ने मुझे अगले दिन बताया कि मेरी टिप्पणी को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं। चीफ जस्टिस ने यह टिप्पणी किसी मामले की सुनवाई के दौरान की। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैं चीफ जस्टिस बीआर गवई को बीते 10 सालों से जानता हूं। वह हर धार्मिक स्थल जाते हैं और सभी का आदर करते हैं। मेहता ने कहा कि यह एक गंभीर मसला है। उन्होंने कहा कि हमने न्यूटन का लॉ पढ़ा है कि हर ऐक्शन का रिएक्शन होता है। लेकिन आज तो हर ऐक्शन पर सोशल मीडिया में गलत रिएक्शन होता है। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस तो अकसर सभी धर्मों के स्थलों पर जाते हैं। वह सभी का आदर करते हैं। वहीं कपिल सिब्बल भी इस दौरान मौजूद थे। उन्होंने कहा कि ऐसी चीजों का सामना तो हम हर दिन करते हैं। इस तरह किसी को बदनाम नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि नेपाल में भी ऐसी ही चीजें हुई थीं। बता दें कि मूर्ति की मरम्मत की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने याची को झिड़कते हुए कहा था कि आपकी अर्जी जनहित याचिका नहीं है बल्कि प्रचार याचिका है। उन्होंने कहा था कि यदि आप भगवान विष्णु के इतने कट्टर भक्त हैं तो फिर उन्हीं से प्रार्थना कीजिए। उनकी टिप्पणी का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा था और लोग उनकी आलोचना कर रहे थे। क्या कहा था चीफ जस्टिस ने, जिस पर मचा इतना बवाल इसी को लेकर विश्व हिंदू परिषद का भी गुरुवार को बयान आया। संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने चीफ जस्टिस के नाम एक लेटर लिखा था। उन्होंने लिखा था, 'परसों सर्वोच्च न्यायालय में खजुराहो के प्रसिद्ध जावरी मंदिर में स्थित भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की मरम्मत के लिए याचिका की सुनवाई थी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी की, मूर्ति की मरम्मत के लिए भगवान से ही प्रार्थना कीजिए। आप कहते हैं कि आप भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हैं, तो अब उन्हीं से प्रार्थना कीजिए। न्यायालय न्याय का मंदिर है। भारतीय समाज की न्यायालयों में श्रद्धा और विश्वास है। हम सब का कर्तव्य है कि यह विश्वास ना सिर्फ बना रहे वरन् और मजबूत हो।' VHP बोली- जजों को भी रखना होगा वाणी पर संयम इसके आगे नसीहत देते हुए विश्व हिंदू परिषद ने कहा, 'हम सब का यह भी कर्तव्य है कि अपनी वाणी में संयम रखें। विशेष तौर पर न्यायालय के अंदर। यह जिम्मेवारी मुकदमा लड़ने वालों की है, वकीलों की है और उतनी ही न्यायाधीशों की भी है। हमको लगता है कि मुख्य न्यायाधीश की मौखिक टिप्पणी ने हिन्दू धर्म की आस्थाओं का उपहास उड़ाया गया है। अच्छा होगा अगर इस तरह की टिप्पणी करने से बचा जाए।'  

तालिबान का इंटरनेट प्रतिबंध: अफगान नागरिकों की डिजिटल दुनिया ठप्प

जलालाबाद अफगानिस्तान में तालिबान ने अजीबोगरीब फरमान जारी किया है। तालिबानी शासन ने "अनैतिकता रोकने" के नाम पर पूरे देश में इंटरनेल और  फाइबर-ऑप्टिक सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे पूरे देश में खलबली मच गई है। तालिबान द्वारा शुरू की गई यह सख्ती अब पूरे देश में लागू हो चुकी है। देश के सर्वोच्च नेता द्वारा फाइबर-ऑप्टिक इंटरनेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बाद कई और प्रांत इंटरनेट सेवाओं से कट गए हैं। 4 साल से सत्ता में है तालिबान तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता संभाली थी। इसके बाद यह पहली बार है जब इस तरह का व्यापक प्रतिबंध लगाया गया है। इस फैसले से अब सरकारी दफ्तरों, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों के घरों में Wi-Fi इंटरनेट सेवा पूरी तरह ठप हो गई है। हालांकि मोबाइल इंटरनेट सेवा अब भी चालू है। अधिकारियों का कहना है कि "जरूरी कार्यों" के लिए वैकल्पिक उपायों की तलाश की जा रही है। मंगलवार को उत्तरी बल्ख प्रांत में Wi-Fi सेवा के बंद होने की पुष्टि की गई, वहीं देश के अन्य हिस्सों से भी भारी व्यवधान की खबरें मिल रही हैं। गुरुवार को बघलान, बदख्शान, कुंदुज़, नंगरहार और तखार जैसे प्रांतों में इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई। अफगान मीडिया ने की निंदा अफगान मीडिया समर्थन संगठन (AMSO) ने इस प्रतिबंध की कड़ी निंदा की और अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। संगठन ने कहा, "तालिबान नेता के आदेश पर उठाया गया यह कदम न केवल लाखों नागरिकों की मुफ्त सूचना और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को बाधित करता है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया कार्यों के लिए भी एक गंभीर खतरा है। पिछले वर्ष, संचार मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह अलोकोज़ई ने TOLO न्यूज़ को बताया था कि अफगानिस्तान में 1,800 किलोमीटर से अधिक लंबा फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क है, और इसमें 488 किलोमीटर और जोड़ने की मंजूरी भी दी गई थी। नंगरहार संस्कृति निदेशालय के सिद्दीकुल्लाह कुरैशी ने एसोसिएटेड प्रेस को इस प्रतिबंध की पुष्टि की। कुंदुज़ के राज्यपाल कार्यालय ने एक आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में इंटरनेट बंदी की सूचना साझा की।

ट्रंप का बड़ा कदम: चार्ली किर्क हत्याकांड के बाद एंटीफा को किया प्रमुख आतंकवादी संगठन घोषित

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने एंटीफा संगठन को एक प्रमुख आतंकी संगठन घोषित किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर करते हुए कहा कि मुझे हमारे अनेक अमेरिकी देशभक्तों को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैं एंटीफा, एक बीमार, खतरनाक, कट्टरपंथी वामपंथी आपदा को एक प्रमुख आतंकवादी संगठन घोषित कर रहा हूं। ट्रंप ने कहा कि एंटीफा को वित्तपोषित करने वालों की उच्चतम कानूनी मानकों और प्रथाओं के अनुसार गहन जांच की जाए। ट्रंप ने इसलिए लिया एक्शन ट्रंप ने एंटीफा को इसलिए आतंकी संगठन घोषित किया। क्योंकि हाल ही में उनके करीबी चार्ली किर्क की हत्या हुई थी। इसका हत्यारा टायलर रॉबिन्सन वामपंथी राजनीतिक विचारधारा का था। एंटीफा संगठन ऐसे ही वामपंथी विचारधारा को आगे बढ़ा रहा था। एंटीफा दूर-वामपंथी और फासीवाद-विरोधी आंदोलन करता है। ट्रंप ने समूह को वित्त पोषित करने वाले व्यक्तियों और संगठनों की गहन जांच का आह्वान किया।    ट्रंप ने पहले किया था वादा बता दें कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान एंटीफा को एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिह्नित करने का वचन दिया था। उस समय उनके अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने समूह की गतिविधियों को “घरेलू आतंकवाद” बताया था। अब ट्रंप ने करीबी चार्ली किर्क की हत्या के बाद सख्ती करना शुरू कर दिया है। क्या है एंटीफा? एंटीफा (फासीवाद विरोधी) एक औपचारिक संगठन नहीं है। यह एक शिथिल रूप से परिभाषित सामाजिक आंदोलन है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कानून आधिकारिक तौर पर नामित विदेशी आतंकवादी समूहों को “भौतिक सहायता” देने पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन घरेलू संगठनों के लिए कोई समान कानून नहीं है। ‘एंटीफा’ शब्द आम तौर पर वामपंथी, अक्सर अति-वामपंथी, राजनीतिक विचारों वाले व्यक्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला को दिखाता है। यह आमतौर पर मुख्यधारा की डेमोक्रेटिक पार्टी के एजेंडे से बाहर होते हैं। इस आंदोलन में एक केंद्रीकृत नेतृत्व संरचना या राष्ट्रीय मुख्यालय का अभाव है, हालांकि कुछ स्थानीय समूह नियमित रूप से मिलते रहते हैं।

बड़े त्योहारों पर होगी सफर आसान, नवरात्र से दिवाली तक स्पेशल ट्रेन सेवा

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे ने यात्रियों को नवरात्र और दिवाली का तोहफा दिया है। रेलवे ने 26 सितंबर से नवंबर के अंत तक स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। भारतीय रेल अधिकारियों का दावा है कि दिवाली, छठ पूजा समेत फेस्टिव सीजन में करीब 6000 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की प्लानिंग है। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता के अनुसार ये स्पेशल ट्रेनें उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, और असम समेत देश के विभिन्न राज्यों के लिए होंगी। जिससे त्यौहारों पर घर लौट रहे लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। स्पेशल ट्रेनों के अलावा लोगों की भीड़ का अंदाजा लगाते हुए स्टेशनों पर खास अरेंजमेंट किए जा रहे हैं।   हर राज्य के यात्रियों लिए स्पेशल प्लान रेलवे मंत्रालय के अनुसार 26 सितंबर से 5 नवंबर के बीच जबलपुर से दानापुर के बीच स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। ये ट्रेन हर बुधवार और शुक्रवार को चलेगी। इसी तरह मुंबई सेंट्रल से काठगोदाम के बीच 1 अक्टूबर से, उघना से सूबेदारगंज के बीच 3 अक्टूबर से और बान्द्रा टर्मिनस से बदनी के बीच 6 अक्टूबर से स्पेशल ट्रेन चलाई जाएंगी। दिवाली और छठ पर ट्रेनों में होती है ज्यादा भीड़ जानकारी के अनुसार आनंद विहार-भागलपुर के बीच स्पेशल पूजा स्पेशल ट्रेन चलाई जाएंगी। ये ट्रेन 20 सितंबर से 30 नवंबर तक रोजाना चलेगी। वहीं, 2 अक्टूबर से 6 नवंबर तक कोलकाता से लखनऊ के बीच स्पेशल ट्रेन चलेगी। दिवाली और छठ के लिए 27 सितंबर से एक नवंबर तक प्रत्येक शनिवार को मऊ और उधना के बीच स्पेशल ट्रेन चलेगी। बता दें फेस्टिवल सीजन में ट्रेनों में काफी भीड़ होती है। यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कुछ डिब्बे रिजर्व में रखे हैं जिन्हें आखिरी में भीड़भाड़ वाले रूट पर चलाया जाएगा।

पहाड़ों में कहर: बादल फटने से तबाही, लापता हुए 10 लोग

उत्तराखंड धीरे-धीरे सितंबर का महीना बीतने वाला है, लेकिन मानसूनी आफत अभी खत्म नहीं हुई है। देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर आसमानी आफत आई है। गुरुवार सुबह ही चमोली में बादल फट गया। इससे चमोली और नंदानगर में भीषण बरसात शुरू हो गई है। मलबा आने से कई घर तबाह हो गए हैं। प्रशासन में राहत और बचाव दल को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया है। अभी तक 6 घर तबाह हो गए हैं। वहीं 10 लोगों के लापता होने की खबर है। हाल ही में देहरादून के सहशस्त्र धारा में बादल फटने की घटना हुई थी। बताया जा रहा है कि कुंतरी और धुर्मा गांव में बादल फटे हैं। भारी बारिश का अलर्ट जारी मौसम विभाग ने उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। देहरादून, ऋषिकेश, पोढ़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी, हरिद्वार समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी हुई है। प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है। नदी के किनारे बसे लोगों से सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की जा रही है।   2 लोगों को किया रेस्क्यू सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए घटना स्थल पर पहुंच गए। अभी तक 2 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि कई जानवर भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। । मौके पर मेडिकल टीमें और तीन एम्बुलेंस भेजी गई हैं। क्या बोले डीएम? चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि चमोली जिले के नंदानगर घाट क्षेत्र में बुधवार रात बादल फटने से नुकसान हुआ। नंदानगर के कुंत्री लंगाफली वार्ड में छह घर मलबे में दब गए। जिलाधिकारी ने कहा कि 2 को बचा लिया गया है। राहत और बचाव कार्य जारी है।  

डिफेंस एग्रीमेंट से सऊदी-पाकिस्तान की नजदीकियां बढ़ीं, एक पर हमला हुआ तो दूसरा भी मानेगा अपना

दुबई   पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार (17 सितंबर 2025) को एक अहम रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए. ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ नाम के इस समझौते के तहत यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सऊदी अरब दौरे के दौरान हुआ. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने राजकीय दौरे पर रियाद पहुंचे थे, जहां सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने अल-यमामा पैलेस में उनका स्वागत किया. इसी मौके पर यह रक्षा समझौता किया गया. पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम कार्यालय की ओर से जारी बयान में साफ कहा गया कि किसी भी तरह की आक्रामकता दोनों देशों के खिलाफ मानी जाएगी. संयुक्त बयान में कहा गया कि यह समझौता आठ दशकों पुराने रिश्तों, भाईचारे, इस्लामी एकजुटता और साझा रणनीतिक हितों पर आधारित है. इसका मकसद रक्षा सहयोग को और गहरा करना और किसी भी हमले के खिलाफ साझा रोकथाम क्षमता को मजबूत बनाना है. इसमें साफ तौर पर लिखा है कि किसी एक देश पर आक्रामक कार्रवाई दोनों देशों पर आक्रमण मानी जाएगी. खाड़ी देशों के दौरे पर शहबाज पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ विदेश मंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब, सूचना मंत्री अताउल्लाह तारड़, पर्यावरण मंत्री मुसादिक मलिक और विशेष सहायक तारिक फातमी मौजूद थे. यह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक हफ्ते में खाड़ी क्षेत्र का तीसरा दौरा है. इससे पहले वे कतर दो बार गए- 11 और 15 सितंबर को जहां उन्होंने इजरायल के हमले के बाद हमास नेतृत्व के समर्थन में और अरब-इस्लामिक देशों की आपात बैठक में हिस्सा लिया. डील नहीं ये बदलाव का संकेत! यह समझौता 9 सितंबर 2025 को कतर की राजधानी दोहा में इजरायल के हमले के ठीक एक हफ्ते बाद हुआ, जिसमें हमास नेताओं को निशाना बनाया गया. किसी ने सोचा नहीं था कि कतर पर इजरायल हमला कर देगा. यह हमला अमेरिकी मंजूरी के साथ हुआ था, जिससे खाड़ी देशों (सऊदी, कतर, यूएई) में अमेरिकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे. सऊदी राजपरिवार के लिए भी यह झटका है, क्योंकि कतर भी अमेरिकी सैन्य अड्डे वाला सहयोगी है. वह अमेरिका के साथ एक नई सैन्य डील चाहता है, जिसमें उसके सुरक्षा की गारंटी हो. हालांकि अभी इसमें सऊदी कामयाब नहीं हुआ है. वहीं पाकिस्तान भी ऐसा ही कोई सहयोगी चाहता है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसने देख लिया कि कोई भी उसे बचाने नहीं आया. यह डील ईरान को भी सीधा संदेश देती है. सऊदी अरब और ईरान के बीच हाल ही में रिश्ते सामान्य करने की कोशिश हुई थी, लेकिन पाकिस्तान के साथ यह समझौता फिर से ईरान-सऊदी प्रतिस्पर्धा को हवा दे सकता है. सऊदी की क्या मजबूरी? दरअसल, परमाणु हथियार संपन्न पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी का सैन्य साझेदार रहा है. सऊदी अरब ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता प्रदान की है. साफ-साफ कहें तो पाकिस्तान ने यह डील केवल भारत से बचने के लिए की है. मगर सऊदी अरब की ओर से यह डील मजबूरी के साथ-साथ सोची-समझी चाल है. सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब को अब पहले की तरह अमेरिका पर भरोसा नहीं है. कहा जाता है कि यह समझौता अमेरिका की ‘धोखेबाजी’ का नतीजा है. अमेरिका शुरू से चाहता है कि सऊदी अरब इजरायल संग अपने रिश्ते सामान्य करे. सऊदी को अब अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर यकीन नहीं. पांच प्वाइंट में जानिए डिफेंस डील के पीछे सऊदी अरब की मजबूरी     इजरायल का कतर की राजधानी दोहा में अटैक     ईरान से सऊदी अरब के तल्ख रिश्ते     अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर सऊदी को भरोसा नहीं     पाकिस्तान का परमाणु संपन्न देश होना     इस्लामिक मुल्कों को एकजुट करना यह भी कारण है जिस तरह इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमला किया, इसने भी सऊदी अरब की चिंता को और बढ़ा दिया. जी हां, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह रणनीतिक रक्षा समझौता पड़ोसी कतर की राजधानी दोहा में हुए हमले के ठीक बाद हुआ है. इजरायल ने दोहा में हमास नेताओं पर हमला किया था. हालांकि, दोहा में हुए हवाई हमले की अमेरिका ने निंदा की, मगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया. इसलिए सऊदी को हमेशा यह डर सता रहा है कि इजरायल कहीं सऊदी तक न अपनी नजर बढ़ा ले. वैसे भी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गाजा युद्ध को ‘नरसंहार’ करार दिया था. सऊदी ने अक्सर इजरायल की आलोचना की है.

देशभर में लागू होगा SIR, वोटिंग में दस्तावेजों की जरूरत होगी खत्म? जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली पूरे देश में होने वाले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद, 50 करोड़ से ज्यादा वोटर्स को किसी भी अतिरिक्त दस्तावेज़ की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसका कारण यह है कि उनके नाम पहले से ही मतदाता सूची में दर्ज हैं. एक जुलाई, 1987 से पहले जन्म होने की अंडरटेकिंग देने वाले मतदाताओं को कोई अन्य दस्तावेज लगाने की जरूरत नहीं होगी. निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, भारत के आधे से ज्यादा वोटर्स इस नए प्रोसेस के दायरे में आएंगे. इन मतदाताओं को कोई भी दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि उनका नाम उनके राज्य में आयोजित पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की मतदाता सूची में शामिल होगा.  ज्यादातर राज्यों में मतदाता सूची का आखिरी एसआईआर 2002 से 2008 के बीच हुआ था, जिसे इस प्रक्रिया के लिए कट-ऑफ माना जाएगा. राज्यों की तैयारी… अधिकारियों ने बताया कि निर्वाचन आयोग जल्द ही अखिल भारतीय एसआईआर को लागू करने की तारीख तय करेगा. राज्यों में मतदाता सूचियों को सुधारने करने का काम इस साल के अंत से पहले शुरू हो सकता है. पिछले हफ्ते ही हुए एक सम्मेलन में, राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को अपने-अपने राज्यों में पिछली एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूची तैयार रखने को कहा गया है. सुर्खियों में बिहार का SIR  बिहार में आखिरी एसआईआर 2003 में हुआ था. इसके मुताबिक, अभी इसमें सूचीबद्ध कुल मतदाताओं के 60%, यानी 4.96 करोड़ मतदाताओं को अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान स्थापित करने के लिए मतदाता सूची के प्रासंगिक भाग को छोड़कर कोई सहायक दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है. बिहार में इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी हो चुका है, जहां विपक्षी दलों ने दस्तावेजों की कमी के कारण लोगों के मताधिकार से वंचित होने की आशंका जताई थी. अन्य मतदाताओं के लिए नियम केवल 40% मतदाताओं को ही अपनी जन्मतिथि या स्थान की पुष्टि के लिए सूचीबद्ध 12 दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा. इसके अलावा, वोटर बनने या राज्य के बाहर से आने वाले कुछ आवेदकों के लिए एक अतिरिक्त 'घोषणा पत्र' भी शुरू किया गया है. ऐसे लोगों को यह शपथपत्र देना होगा कि उनका जन्म 1 जुलाई, 1987 से पहले भारत में हुआ था.

गुजरात में बड़ी कार्रवाई: साबरमती तट पर 700+ निर्माण ढहाए गए, प्रशासन का सख्त एक्शन

अहमदाबाद गुजरात के गांधीनगर में एक बार फिर बड़ा बुलडोजर ऐक्शन लिया गया है। साबरमती के किनारे कई इलाकों में गुरुवार सुबह से ही बुलडोजर गरजने लगे। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सरकारी जमीन पर बने 700 से अधिक मकान और अन्य ढांचों को तोड़ा जा रहा है। गांधीनगर जिला प्रशासन के मुताबिक साबरमती नदी के किनारे जीईबी, पेथापुर, चारेदी इलाकों में सरकारी जमीनों पर अतिमक्रमण किया गया था। कई बार इन्हें जगह खाली करने की चेतावनी दी गई थी। गुरुवार सुबह भारी सुरक्षा इंतजाम के बीच तोड़फोड़ दस्तों ने बुलडोजर अभियान की शुरुआत की। एक साथ दर्जनों बुलडोजर मकानों को तोड़ते नजर आए। लोगों का भारी विरोध, बुलडोजर पलटा पेटापुर में बुलडोजर ऐक्शन के विरोध में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। भारी सुरक्षा के बावजूद लोग जोरदार विरोध प्रदर्शन करने लगे। माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस बीच अफरा-तफरी में एक बुलडोजर भी पलट गया। गनीमत है कि इसकी जद में कोई नहीं आया। पुलिसकर्मियों ने किसी तरह लोगों को काबू किया।