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इमरान खान को मिली सुप्रीम कोर्ट से जमानत, क्या जल्द होंगे जेल से रिहा?

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए अच्छी खबर है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। 2023 में सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों से जुड़े कई मामलों में उन्हें राहत मिली है। अदालत के रिकॉर्ड और उनके वकील ने यह जानकारी साझा की। मुख्य न्यायाधीश याह्या अफरीदी की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने लाहौर हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें खान की 8 मामलों में जमानत याचिका खारिज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की रिहाई की शर्त सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की रिहाई का आदेश दिया, लेकिन शर्त रखी कि उन्हें किसी अन्य मामले में वांछित नहीं होना चाहिए। यही कारण है कि इमरान खान अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि वे भ्रष्टाचार के एक मामले में पहले ही दोषी ठहराए जा चुके हैं। क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान पर भ्रष्टाचार से लेकर आतंकवाद तक के कई मुकदमे दर्ज हैं। हालांकि, वे इन सभी मामलों को झूठा और राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताते हैं। किस मामले में मिली जमानत? मई 2023 में इमरान खान को एक भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिनमें रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय भी शामिल था। इस हिंसा के बाद इमरान खान और उनकी पार्टी ( पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ) के कई नेताओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों को भी हाल ही में ऐसे ही मामलों में दोषी ठहराया गया है। क्या जेल से बाहर आ पाएंगे इमरान खान? सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बावजूद इमरान खान की कानूनी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। उन्हें अन्य मामलों में अभी जेल में रहना होगा। इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। पार्टी ने एक्स पर एक पोस्ट में इसे 'इमरान खान की जीत' करार दिया।  

भाजपा की राह तय करेगा CP राधाकृष्णन, RSS को भेजे गए दो महत्वपूर्ण संदेश

नई दिल्ली  सीपी राधाकृष्णन को भाजपा ने उपराष्ट्रपति पद का कैंडिडेट बनाया है, जिस पर एनडीए के सभी दलों ने सहमति जताई है। विपक्षी अलायंस ने भी पूर्व जस्टिस सुदर्शन रेड्डी को चुनाव में उतार दिया है। अब 9 सितंबर का इंतजार है, लेकिन नतीजा पहले से ही तय माना जा रहा है कि सीपी राधाकृष्णन को चुनाव जीतने में ज्यादा कठिनाई नहीं होगी। भाजपा के सूत्र मानते हैं कि यह मसला सिर्फ उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत का नहीं है बल्कि समीकरण साधने का भी है। इसीलिए सीपी राधाकृष्णन को भाजपा ने कैंडिडेट बनाया है। उनके आने से एक साथ तीन समीकरण सधेंगे, जो हैं- आरएसएस, दक्षिण और विवादों से मुक्ति। दरअसल भाजपा ने पहले सत्यपाल मलिक और फिर जगदीप धनखड़ को मौके दिए। समाजवादी बैकग्राउंड से आने वाले दोनों नेता कई मसलों पर मुखर रहे और शुरुआती दिनों में भाजपा के कोर मुद्दों पर आक्रामक होकर बात की। उनके ये तेवर भाजपा समर्थकों को खूब जमे भी, लेकिन यही रवैया बाद के दिनों में उनका सरकार के खिलाफ दिखने लगा। यहीं से परेशानी शुरू होने लगी। सत्यपाल मलिक ने तो सीधे पीएम मोदी को ही टारगेट करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा जगदीप धनखड़ ने भी किसान आंदोलन और फिर अदालत को लेकर जैसा रुख अपनाया, उससे सरकार असहज होने लगी। उपराष्ट्रपति पद की गरिमा के भी इसे विपरीत माना गया। ऐसे में भाजपा ने बेहद लो-प्रोफाइल रहने वाले सीपी राधाकृष्णन पर दांव लगाया है। उनकी इसी खासियत का इशारों और मजेदार तरीके से पीएम मोदी ने जिक्र किया और कहा कि वह खेल प्रेमी हैं, लेकिन राजनीति में खेल नहीं करते। साफ है कि अब भाजपा हाईकमान ऐसा उपराष्ट्रपति या राज्यपाल नहीं चाहता, जो चर्चाओं में रहे और सरकार को असहज करे। इस लाइन में सीपी फिट बैठते हैं। इसके अलावा वह पुराने संघी हैं। 16 साल की उम्र में आरएसएस के स्वयंसवेक बने थे। उन्हें मौका देकर भाजपा ने अपने मातृ संगठन आरएसएस को भी संकेत दिया है कि उनके विचार और लोगों का स्वागत है और उन्हें तवज्जो दी जा रही है। सत्यपाल मलिक और जगदीप धनखड़ के रुख पर संघ समर्थकों का यही कहना था कि यह बाहर से लाए गए लोग थे और उसके चलते ही नुकसान हो रहा है। इस तरह संघ को महत्व देते हुए सीपीआर को चुना गया है। बता दें कि यह लगातार दूसरा संकेत आरएसएस को दिया गया है। इससे पहले 15 अगस्त को लाल किले से पहली बार पीएम मोदी ने आरएसएस की तारीफ की थी और उसके 100 साल के सफर को देश और समाज को समर्पित बताया था। अब तीसरे समीकरण की बात करते हैं। अगले साल तमिलनाडु में चुनाव है और सीपीआर को मौका दिया गया है, जो वहीं से आते हैं। वह कोयंबटूर से दो बार सांसद रहे हैं, जो तमिलनाडु में भाजपा का एकमात्र गढ़ कहा जाता है।  

कांग्रेस के कई युवा नेता प्रतिभाशाली, पीएम मोदी ने एनडीए नेताओं पर भी किया कमेंट

नई दिल्ली  पीएम मोदी ने चाय मीटिंग में एनडीए नेताओं के सामने कांग्रेस के कई युवा नेताओं की तारीफ की और कहा कि विपक्ष खासकर कांग्रेस में कई युवा नेता काफी टैलेंटेड हैं, लेकिन ‘परिवार की असुरक्षा’ की वजह से उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता। इंडिया टुडे के सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी ने यह भी कहा कि इस तरह के युवा नेताओं की मौजूदगी राहुल गांधी गांधी को असुरक्षित और घबराहट महसूस करवा रही होगी। इस बैठक में विपक्ष का कोई भी सांसद शामिल नहीं हुआ और सिर्फ एनडीए के ही सदस्य मौजूद थे। पीएम मोदी ने आज खत्म हुए संसद के मॉनसून सत्र को भी अच्छा बताया और कहा कि इसमें कई महत्वपूर्ण बिल पास हुए। खासतौर पर उन्होंने ऑनलाइन गेम्स बिल के पास होने की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इसके पास होने से दूरगामी असर पड़ेगा और यह सीधे जनता को प्रभावित करेगा। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पीएम मोदी ने प्रमुख बिलों पर चर्चा से दूर रहने के लिए विपक्ष की आलोचना भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सिर्फ व्यवधान पैदा करने में ही लगा रहा। बता दें कि 20 अगस्त को संसद में प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 पास हो गया, जिसमें ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों और उनके प्रमोटर्स के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि मॉनसून सत्र में 14 विधेयक पुर:स्थापित किए गए तथा कुल 12 विधेयक पारित किए गए। बिरला ने लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले गुरुवार को अपने वक्तव्य में कहा कि इस सत्र में 14 सरकारी विधेयक पुर:स्थापित किए गए तथा कुल 12 विधेयक पारित हुए। गत 28 और 29 जुलाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा हुई, जिसका समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तर के साथ हुआ। 18 अगस्त को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों पर विशेष चर्चा आरंभ की गई। उन्होंने कहा कि इस सत्र में कार्यसूची में 419 तारांकित प्रश्न शामिल किए गए थे, किंतु लगातार नियोजित व्यवधान के कारण केवल 55 प्रश्न ही मौखिक उत्तर हेतु लिए जा सके। उन्होंने कहा, ''हम सभी ने सत्र के प्रारंभ में तय किया था कि हम इस सत्र में 120 घंटे चर्चा और संवाद करेंगे। कार्य मंत्रणा समिति में भी इस पर सहमति थी लेकिन लगातार गतिरोध और नियोजित व्यवधान के कारण हम मुश्किल से 37 घंटे ही इस सत्र में काम कर पाए।''  

NIA की बड़ी कार्रवाई, रामलिंगम हत्याकांड में PFI से संबंध रखने वाला आरोपी गिरफ्तार

तमिलनाडु राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 2019 में हुए रामलिंगम हत्या कांड मामले में तमिलनाडु में नौ जगहों पर छापेमारी की है। डिंडीगुल और तेनकासी जिलों की इन जगहों पर एनआईए की छापेमारी का मकसद फरार अपराधियों का पता लगाना था। इसी सिलसिले में एनआईए ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया आतंकी संगठन के एक सदस्य को भी गिरफ्तार किया है। बुधवार सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में सबसे पहले एसडीपीआई पदाधिकारी शेख अब्दुल्ला के बेगमपुर स्थित आवास, एक और सदस्य यूसुफ के ओड्डंचत्रम स्थित घर और अमर के बटलागुंडु के ठिकाने पर छापे मारे गए इसी तरह तेनकासी में भी छापेमारी की गई। एजेंसी ने कोडईकनाल स्थित अंबुर बिरयानी होटल्स के मालिक इम्थातुल्लाह को 2021 में फरार अपराधियों को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार किया है। डिंडीगुल और तेनकासी में हुई छापेमारी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।रिपोर्ट्स के मुताबिक बिरयानी होटल्स के मालिक इम्थातुल्लाह ने तीन आरोपियों को पनाह दी थी। इनमें से दो आरोपी अब्दुल मजीद और शाहुल हमीद को एजेंसी ने जनवरी 2025 में ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि एक अन्य अपराधी मोहम्मद अली जिन्ना अभी भी फरार है। एजेंसी ने जिन्ना और दो अन्य फरार पीओ बुरहानुद्दीन और नफील हसन के बारे में जानकारी देने पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। ये सभी तंजावुर जिले के हैं और पूर्व में पीएफआई के पदाधिकारी थे। आपको बता दें कुंभकोणम निवासी पीएमके के पूर्व पदाधिकारी रामलिंगम (48) की हत्या 2019 में तंजावुर इलाके में कर दी गई थी। कथित तौर रामलिंगम ने मुस्लिम संगठनों के धार्मिक प्रचार का विरोध किया था। इसी के चलते एक गिरोह ने इनकी हत्या कर दी थी। अगस्त 2019 में एनआईए ने यह मामला तमिलनाडु पुलिस से अपने पास ले लिया। एजेंसी ने 2019 में चेन्नई की पूनमल्ली स्थित अपनी विशेष अदालत में कुल 18 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इनमें से कुल 6 फरार बताए गए थे। इस मामले में अभी तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।  

भारतीय वायुसेना में 97 Tejas MK-1A, जानें कितना बड़ा होगा जेट बेड़ा और भविष्य की रणनीति

नई दिल्ली भारत ने हाल ही में 97 LCA (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) तेजस मार्क 1A फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दी है, जिसकी कीमत करीब 62,000 करोड़ रुपये है. यह डील मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे भारतीय वायुसेना (IAF) का फाइटर जेट बेड़ा न केवल बड़ा होगा, बल्कि आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से लैस भी होगा.  वर्तमान में भारतीय वायुसेना का बेड़ा भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 31 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है. प्रत्येक स्क्वाड्रन में औसतन 18 जेट्स होते हैं, यानी कुल मिलाकर IAF के पास करीब 558 फाइटर जेट्स हैं. इनमें शामिल हैं…     सुखोई Su-30 MKI: 265 जेट्स (भारत में निर्मित, रूस से लाइसेंस प्राप्त)     मिग-21: 36 जेट्स (2025 में रिटायर होने वाले)     मिग-29: 65 जेट्स     मिराज 2000: 44 जेट्स     राफेल: 36 जेट्स     जगुआर: 130 जेट्स     तेजस मार्क 1: 31 जेट्स (2 स्क्वाड्रन) हालांकि, पुराने मिग-21, मिग-23 और मिग-27 के रिटायर होने से स्क्वाड्रन की संख्या घटी है. सितंबर 2025 में आखिरी दो मिग-21 स्क्वाड्रन (नंबर 3 और 23) रिटायर हो जाएंगे, जिससे स्क्वाड्रन की संख्या 29 तक कम हो जाएगी. 97 LCA मार्क 1A का प्रभाव 97 LCA मार्क 1A जेट्स की खरीद के साथ, IAF का तेजस बेड़ा काफी मजबूत होगा. वर्तमान में IAF के पास…     40 तेजस मार्क 1 जेट्स हैं (2 स्क्वाड्रन: नंबर 45 ‘फ्लाइंग डैगर्स’ और नंबर 18 ‘फ्लाइंग बुलेट्स’)     83 LCA मार्क 1A का ऑर्डर पहले से दिया जा चुका है (2021 में, 48000 करोड़ रुपये की डील). नई डील के साथ, 97 और LCA मार्क 1A जेट्स जुड़ने से कुल 180 LCA मार्क 1A और 40 मार्क 1 जेट्स होंगे, यानी 220 तेजस जेट्स. यह IAF के बेड़े का एक बड़ा हिस्सा होगा. ये जेट्स पुराने मिग-21 की जगह लेंगे और स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करने में मदद करेंगे. LCA मार्क 1A में 65% से अधिक स्वदेशी सामग्री है. यह उन्नत AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सुइट और अस्त्र मिसाइल जैसी तकनीकों से लैस है. यह 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमले करने में सक्षम है.  IAF का बेड़ा कितना बड़ा होगा? 97 LCA मार्क 1A के शामिल होने के बाद, IAF का बेड़ा 220 तेजस (मार्क 1 और मार्क 1A) के साथ-साथ अन्य जेट्स (Su-30 MKI, राफेल, मिग-29, मिराज, और जगुआर) को मिलाकर करीब 600-620 फाइटर जेट्स का होगा. यह 33-34 स्क्वाड्रन के बराबर होगा. हालांकि, यह अभी भी 42 स्क्वाड्रन के लक्ष्य से कम है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने 2025 के अंत तक 12 LCA मार्क 1A जेट्स और 2029 तक 83 जेट्स की पूरी डिलीवरी का वादा किया है. 97 नए जेट्स की डिलीवरी 10 साल में पूरी होगी, यानी 2035 तक. भविष्य की योजनाएं: 60 स्क्वाड्रन का लक्ष्य IAF ने 2047 तक अपने बेड़े को 60 स्क्वाड्रन (लगभग 1,080-1,200 जेट्स) तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. यह लक्ष्य भारत के दो मोर्चों—पाकिस्तान और चीन—से बढ़ते खतरों को देखते हुए जरूरी है. चीन के पास 1,900 से अधिक फाइटर जेट्स हैं, जिनमें पांचवीं पीढ़ी के J-20 शामिल हैं, जबकि पाकिस्तान अपने JF-17 बेड़े को अपग्रेड कर रहा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए IAF की योजनाएं हैं… LCA मार्क 2: यह तेजस का उन्नत संस्करण है, जो GE F414 इंजन से लैस होगा और 6,500 किलो पेलोड ले जा सकता है. IAF ने 120-200 LCA मार्क 2 जेट्स का ऑर्डर देने की योजना बनाई है. इसका पहला प्रोटोटाइप 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में उड़ेगा. 2029 से बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होगा. यह मिग-29, मिराज 2000 और जगुआर की जगह लेगा. एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA): यह भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर होगा, जिसे 2035 तक शामिल करने की योजना है. IAF 200 AMCA जेट्स (मार्क 1 और मार्क 2) खरीदना चाहता है, जो हवा में श्रेष्ठता और गहरे हमलों के लिए होंगे. इसमें स्टील्थ, सुपरक्रूज और उन्नत सेंसर होंगे. मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA): IAF 114 नए फाइटर जेट्स खरीदने की योजना बना रहा है, जिसमें राफेल, F-15EX, F/A-18 सुपर हॉर्नेट, टाइफून और Su-35 जैसे विकल्प हैं. यह डील स्क्वाड्रन की कमी को जल्दी पूरा करने के लिए है. Su-30 MKI अपग्रेड: IAF अपने 260 Su-30 MKI जेट्स को अपग्रेड करेगा, जिसमें स्वदेशी उत्तम AESA रडार, डिजिटल कॉकपिट और नया मिशन कंप्यूटर शामिल होगा. इसमें 78% स्वदेशी सामग्री होगी. मानवरहित विमान (UAV): IAF 2030 तक 30-50 ड्रोन (छोटे, मध्यम, और बड़े) खरीदेगा, जैसे DRDO घातक और ALFA-S स्वार्म ड्रोन, जो नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध के लिए होंगे. चुनौतियां और समाधान उत्पादन में देरी: तेजस मार्क 1A की डिलीवरी में देरी हुई, क्योंकि GE F404 इंजन की आपूर्ति में रुकावट आई. मार्च 2025 तक पहला जेट मिलने की उम्मीद है. HAL 2025 में 12 जेट्स देगा. स्वदेशी इंजन: तेजस अभी अमेरिकी GE F404 इंजन पर निर्भर है. भारत का कावेरी इंजन प्रोजेक्ट चल रहा है, लेकिन अभी परिपक्व नहीं है. HAL और GE अब F414 इंजन का भारत में सह-उत्पादन करेंगे. निजी क्षेत्र की भागीदारी: सरकार ने एक समिति बनाई है, जो निजी क्षेत्र को तेजस और AMCA के उत्पादन में शामिल करने की योजना बना रही है. इससे उत्पादन तेज होगा और लागत कम होगी. मेक इन इंडिया का प्रभाव 97 LCA मार्क 1A की डील मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगी. इन जेट्स में 65% स्वदेशी सामग्री है. मार्क 2 में यह 70% तक होगी. यह छोटे और मध्यम उद्यमों को रोजगार देगा और भारत को एयरोस्पेस में आत्मनिर्भर बनाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजस के ट्रेनर वेरिएंट में उड़ान भरी और इसकी तारीफ की, जिससे स्वदेशी तकनीक में भरोसा बढ़ा.  

सरकार के वकील से CJI ने पूछा- क्या न्यायपालिका सिर्फ कमजोर दर्शक बनी रहे?

नई दिल्ली राज्यपाल और राष्ट्रपति को विधानसभा से पारित बिलों को मंजूरी देने या फिर लौटाने के लिए 90 दिनों की टाइमलाइन तय करने पर सुप्रीम कोर्ट में दिलचस्प बहस जारी है। राष्ट्रपति की ओर से इस केस में रेफरेंस दाखिल किया गया है और अब अदालत में इस पर बहस चल रही है। गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए आर्टिकल 200 का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संविधान के इस प्रावधान के अनुसार राज्यपाल की शक्ति व्यापक है और उसके दायरे में यह आता है कि वह अपने विवेक से किसी बिल पर फैसला लें। संवैधानिक और राजनीतिक शिष्टता का पालन करते हुए राज्यपाल फैसला लेते हैं और उसके लिए कोई समयसीमा तय करना गलत है। सरकार का पक्ष रखते हुए तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल और राष्ट्रपति एक संवैधानिक संस्था हैं। इसी तरह अदालत भी संवैधानिक संस्था है। सवाल है कि आखिर एक संवैधानिक संस्था अपने बराबर की दूसरी संस्था के लिए टाइमलाइन कैसे तय कर सकती है। इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि ऐसी स्थिति हो गई है कि दोनों अपनी-अपनी तरफ से अतिवादी रुख अपना रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि एक ने अपना निर्णय ले लिया है। लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता कि किसी का ही पक्ष सही है। इस दौरान चीफ जस्टिस बीआर गवई ने भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यदि कोई संवैधानिक संस्था गलती करती है तो समाधान की जरूरत है। यह अदालत संविधान का ही एक अंग है। यदि एक संवैधानिक संस्था बिना किसी वैध कारण के अपना काम नहीं कर रही है तो फिर क्या अदालत को यह कहना चाहिए कि हम शक्तिहीन हैं और हमारे हाथ बंधे हैं। हमें कुछ तो निर्णय करना होगा। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के अधिकार क्षेत्र पर ही सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले को कोर्ट में ले जाना और उसका फैसला करना ठीक नहीं है। तुषार मेहता ने कहा कि मान लीजिए कि गवर्नर किसी बिल पर फैसला नहीं ले रहे हैं तो उसके राजनीतिक समाधान हैं। एक प्रतिनिधिमंडल ऐसे मामलों में पीएम या राष्ट्रपति के पास जा सकता है। इस तरह मसला हल हो सकता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि अदालत की ओर से टाइमलाइन तय की जाए। ऐसे मामले कई राज्यों में सामने आए हैं। राजनीतिक परिपक्वता से ही ऐसे मसले हल हुए हैं। इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि ठीक है, हम टाइमलाइन तय नहीं करेंगे। लेकिन एक प्रॉसेस तो होना चाहिए।  

लोगों के दिलों पर राज करने वाले जज फ्रैंक कैप्रियो अब नहीं रहे

न्यूयॉर्क  अमेरिका के प्रसिद्ध जज फ्रैंक कैप्रियो का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह अग्नाशय के कैंसर से जूझ रहे थे। कैप्रियो को उनके दयालु स्वभाव और करुणामय फैसलों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। वे 'कैच इन प्रोविडेंस' रियलिटी शो के माध्यम से विश्व भर में लोकप्रिय हुए, जिसमें उनके ट्रैफिक और छोटे-मोटे मामलों की सुनवाई के अनोखे अंदाज को दिखाया गया। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर बेहद वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने एक बुजुर्ग व्यक्ति का ओवरस्पीडिंग का चालान माफ कर दिया था, क्योंकि यह पहली बार था जब उस व्यक्ति ने तय सीमा से अधिक गति से गाड़ी चलाई थी। दुखद खबर की घोषणा बुधवार देर दोपहर उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक बयान जारी किया गया, जिसमें प्रशंसकों को बताया गया कि प्रिय न्यायाधीश कैप्रियो का अग्नाशय के कैंसर से लंबी और साहसी लड़ाई के बाद 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बयान में कहा गया कि अपनी करुणा, विनम्रता और लोगों की भलाई में अटूट विश्वास के कारण जज कैप्रियो ने अदालत के अंदर और बाहर अपने काम से लाखों लोगों के जीवन को छुआ। उनकी गर्मजोशी, हास्य और दयालुता ने उन्हें जानने वाले सभी लोगों पर एक अमिट छाप छोड़ी। कैंसर के खिलाफ लड़ाई पर खुलकर बात कैप्रियो ने अपनी कैंसर की लड़ाई के बारे में खुलकर बात की थी। 1 जून को उन्होंने टिकटॉक पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय कैंसर सर्वाइवर्स डे पर इस बीमारी को मात देने वालों का जश्न मनाया। उन्होंने कहा था कि मैं हर उस व्यक्ति का सम्मान करना चाहता हूं जिसने इस लड़ाई का सामना किया और जीत हासिल की। मैं खुद इस समय इसी लड़ाई में हूं। मैं डेढ़ साल से अग्नाशय के कैंसर से जूझ रहा हूं, और मुझे उम्मीद है कि ईश्वर की कृपा से एक दिन मैं भी इस बीमारी से उबर जाऊंगा। निधन से पहले इंस्टाग्राम पर अंतिम पोस्ट कैप्रियो के निधन की घोषणा से कुछ घंटे पहले, उनके इंस्टाग्राम पर अस्पताल के बिस्तर से उनकी एक तस्वीर पोस्ट की गई थी। तस्वीर के साथ प्रशंसकों के लिए एक संदेश भी था, जिसमें उन्होंने उनकी प्रार्थनाओं, प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। बता दें कि कैप्रियो के इंस्टाग्राम पर 3.3 मिलियन और टिकटॉक पर 1.6 मिलियन फॉलोअर्स थे। अपने सोशल मीडिया बायो में उन्होंने लिखा था कि उन्हें 'दुनिया के सबसे अच्छे जज' के रूप में जाना जाता है।  

भारत में छिपी FBI की मोस्ट वॉन्टेड सिंडी सिंह, हुई गिरफ्तारी

नई दिल्ली FBI यानी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन को बड़ी सफलता मिली है। ब्यूरो ने टॉप 10 भगोड़ों की सूची में शामिल सिंडी रॉड्रिगेज सिंह को भारत से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस सफलता पर FBI प्रमुख काश पटेल ने भारतीय अधिकारियों की भी तारीफ की है। सिंह पर अपने 6 साल के बेटे की हत्या के आरोप हैं। मामला 2023 का है। खबर है कि सिंह अमेरिका में कानूनी मामले से बचने के लिए भागकर अमेरिका आ गई थी। सिंह के नाम पर मुकदमे से बचने के लिए भागने को लेकर एक FBI वॉरंट और 10 साल से कम उम्र के बच्चे की हत्या के मामले में टेक्सास राज्य का एक वॉरंट है। यह मामला 20 मार्च 2023 में सामने आया था। उस दौरान टेक्सास डिपार्टमेंट ऑफ फैमिली एंड प्रोटेक्टिव सर्विसेज की तरफ से एक टीम सिंह के बेटे की जानकारी लेने गई थी। खास बात है कि बच्चा अक्तूबर 2022 से नहीं देखा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों ने बताया था कि बच्चे को कई स्वास्थ्य संबंधी और शारीरिक परेशानियां हैं। इनमें डेवलपमेंटल डिसऑर्डर, सोशल डिसऑर्डर, पल्मोनरी इडेमा, बोन डेंसिटी और एस्टोपिया जैसी कई परेशानियां शामिल हैं। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि सिंह गुमराह कर रही है और कह रही है कि उनका बेटा नवंबर 2022 से ही पिता के साथ मैक्सिको में है। इसके दो दिनों के बाद 22 मार्च 2023 में सिंह, उसका पति और 6 बच्चों ने भारत के लिए उड़ान भरी। जांचकर्ताओं को पता चला कि गुमशुदा बच्चा फ्लाइट में नहीं हैं। इसके बाद जुलाई में सिंह को भगोड़ों की सूची में डाला गया। ऐसे चढ़ी हत्थे 2 अक्टूबर 2024 को सिंह के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी हुआ था और सभी सदस्य देशों को भेजा गया था। उस दौरान भारत को प्रत्यर्पण से जुड़े दस्तावेज भी दिए गए थे, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी संभव हो सकी। पटेल ने कहा, '…टेक्सास, जहां से इस केस की शुरुआत हुई, वहां के स्थानीय साझेदारों, न्याय विभाग के साथ भारत में हमारे साझेदारों का धन्यवाद।'

PM-CM अयोग्यता बिल: दो बाधाओं पर NDA की जीत, अब तीसरी चुनौती करेगी मुश्किल

नई दिल्ली लोकसभा ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री की गंभीर अपराध में गिरफ्तारी और 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रखे जाने पर उन्हें पद से हटाने के प्रावधान वाले 130वें संविधान संशोधन विधेयक तथा दो अन्य विधेयकों को विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बीच बुधवार को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया है। ऐसी चर्चा है कि संसद के शीतकालीन सत्र से पहले JPC इस बिल पर अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंप देगी। उसके बाद इस बिल को पारित कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। चूंकि यह संविधान संशोधन बिल है, इसलिए इसे पारित कराने की प्रक्रिया में तीन बड़ी अचड़नें हैं। नियमानुसार इसे संसद के दोनों सदनों से विशेष बहुमत के साथ पारित कराया जाना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन बिल को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में दो स्तरों पर बहुमत चाहिए। पहला, कुल सदस्यों का बहुमत और दूसरा, उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। तीसरी अड़चन आधे से अधिक राज्यों की विधानसभाओं से भी इस बिल को पारित कराना होगा। संसद में दोनों सदनों में NDA की ताकत क्या? अब बात संसद में एनडीए के संख्या बल की और इस संशोधन विधेयक को पारित कराने में आने वाली अड़चन की। चूंकि, संसद में दो स्तर पर बहुमत चाहिए जिसमें पहला सदन की कुल सदस्य संख्या का 50% से अधिक मत जरूरी है, तो इस अड़चन को सरकार आसानी से पार कर लेगी क्योंकि लोकसभा में 542 सदस्य हैं। ऐसे में 50 फीसदी मत यानी बिल के पक्ष में 272 सांसदों का वोट चाहिए, जबकि मौजूदा समय में उसके पास लोकसभा में 293 सांसद हैं। इसी तरह राज्यसभा में अभी कुल सदस्यों की संख्या 239 है। साधारण बहुमत के लिए 120 सांसदों के मत की जरूरत होगी, जो आसानी से पूरी हो जाएगी क्योंकि राज्यसभा में NDA के अभी 132 सांसद हैं। दो तिहाई बहुमत में बड़ी अड़चन अब बात दो तिहाई बहुमत की, जो दूसरी और सबसे अहम अड़चन है। लोकसभा में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा 362 है, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा 160 है। चूंकि लोकसभा में NDA के सांसदों की संख्या सिर्फ 293 है और राज्यसभा में सिर्फ 132 है तो इस मामले में दोनों ही सदनों में यह बिल अटक सकता है। यानी लोकसभा में कुल 69 सांसद और राज्यसभा में कुल 28 सांसदों के समर्थन की दरकार सरकार को होगी। बिना विपक्षी समर्थन के ⅔ बहुमत मिलना मुश्किल इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार के पास संसद के दोनों ही सदनों में दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं है। दूसरी तरफ विपक्षी इंडिया गठबंधन इस बिल का काला कानून बताकर इसका जबर्दस्त विरोध कर रहे हैं। अगर सरकार दोनों ही सदनों में नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, जगनमोहन रेड्डी की YRCPC और निर्दलियों का भी समर्थन हासिल कर लेती है, तब भी दो तिहाई बहुमत का जुगाड़ नहीं कर पाएगी। ऐसे में इस बिल का संसद से पारित होना नामुमकिन लगता है। विधानसभाओं से भी पारित होना चाहिए बिल इस बिल को पारित कराने की तीसरी बड़ी जरूरत आधे से अधिक राज्य विधानसभाओं से पारित कराना है। चूंकि भारत राज्यों का संघ है, इसलिए ऐसे संविधान संशोधन बिल का 50 परसेंट राज्यों की असेंबली से पास होना जरूरी है। इस मामले में एनडीए को कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि आधे से ज्यादा राज्यों में एनडीए की सरकार है। ऐसे में और क्या संभावना? एक संभावना यह भी बन रही है कि अगर विपक्ष संयुक्त संसदीय समिति में शामिल होता है और उसके सुझावों को सरकार मान लेती है, जिसमें यह कहा जा सकता है कि न्यायिक हिरासत की बजाय सजा होने पर ही इस्तीफे को अनिवार्य बनाया जाए, तब संभावना बन सकती है कि विपक्षी दल उसका समर्थन करें। अन्यथा इस संशोधन बिल के पारित होने की संभावना कम ही है। बता दें कि अभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर किसी भी संसद या विधानसभा सदस्य की सदस्यता स्वत: ही समाप्त हो जाती है और उसे पद से इस्तीफा देना पड़ता है।  

अब 23 सितंबर तक भारतीय विमान नहीं कर सकेंगे पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल

लाहौर  पाकिस्तान के अधिकारियों ने बुधवार को भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध 23 सितंबर तक बढ़ा दिया। पाकिस्तान हवाई अड्डा प्राधिकरण ने एक नया नोटम (नोटिस टू एयरमैन) जारी किया है, जिसमें पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में भारतीय विमानों पर प्रतिबंध को एक महीने के लिए बढ़ाने की घोषणा की गई है। हवाई अड्डा प्राधिकरण ने कहा कि भारतीय एयरलाइनों द्वारा संचालित सभी विमानों को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध भारत के स्वामित्व वाले या पट्टे पर लिए गए सैन्य और नागरिक विमानों पर भी लागू रहेगा। पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव के मद्देनजर यह प्रतिबंध सबसे पहले 23 अप्रैल को एक महीने के लिए लगाया गया था। इस कदम से भारतीय विमानों के पाकिस्तानी क्षेत्र में उड़ान भरने पर रोक लग गई। पाकिस्‍तान को हो रहा मोटा नुकसान पाकिस्तान के एयरपोर्ट प्राधिकरण को भारतीय एयरलाइंस के लिए हवाई क्षेत्र बंद करने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. दो महीने में ही पाकिस्‍तान को 4.1 अरब रुपये (127 करोड़ भारतीय रुपये) का नुकसान झेलना पड़ा है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने संसद में पिछले दिनों यह जानकारी दी थी.  पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि भारतीय पंजीकृत विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद करने से पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) को 4.1 अरब रुपये का ओवरफ्लाइंग राजस्व नुकसान हुआ है. 2019 में भी हुआ था नुकसान पाकिस्तान को 2019 में भी भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का खामियाजा भुगतना पड़ा था. तब प्रतिबंध लगाने से लगभग 451 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ था. पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने से भारतीय एयरलाइन कंपनियों को भी नुकसान हो रहा है. 30 अप्रैल को एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारतीय एयरलाइनों को हर महीने करीब 306 करोड़ रुपए से ज्यादा एक्स्ट्रा खर्च करने पड़ सकता है. एअर इंडिया ने अनुमान लगाया था कि अगर एक साल तक एयर स्पेस बंद रहता है तो उसे करीब 5081 करोड़ रुपए का वित्‍तीय नुकसान होगा. कुछ दिनों बाद 30 अप्रैल को भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी विमानों और एयरलाइनों के लिए हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। इस प्रतिबंध को पहली बार 23 मई को बढ़ाया गया था। ऑपरेशन सिंदूर के समय लगाई थी पाबंदी पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष के मद्देनजर यह प्रतिबंध सबसे पहले 23 अप्रैल को एक महीने के लिए लगाया गया था. 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जो पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में आतंकी ढांचों को निशाना बनाकर एक विशाल सैन्य अभियान था. जिसके बाद पाकिस्तान की ओर से भी भारत पर हमले किए गए, जिनका भारत ने मुंह तोड़ जवाब दिया था. दोनों देशों के बीच 4 दिन संघर्ष चलने के बाद सीजफायर हो गया, लेकिन पाकिस्तान ने अभी तक हवाई क्षेत्र से पाबंदी नहीं हटाई है. एक तरफ संबंध सुधारने की बात वहीं पाकिस्तान के मुख्य सहयोगी चीन ने इच्छा जताई है कि भारत पाकिस्तान रिश्तों में सुधार करें, साथ ही दोनों के बीच चीन ने मध्यस्थता कराने की भी पेशकश की है. लेकिन पाकिस्तान का कदम भविष्य में होने वाली ऐसी किसी भी वार्ता पर असर डाल सकता है.