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यूक्रेन संकट: भारत बेदाग, ट्रंप प्रशासन के अधिकारी अमेरिकी मीडिया में घिरे

वाशिंगटन  अमेरिकी यहूदियों के एक समर्थक समूह ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की आलोचना करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों पर निशाना साधा और कहा कि रूस-यूक्रेन संकट के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है। समूह ने अमेरिका-भारत संबंधों को बेहतर बनाने का आह्वान किया। ट्रंप प्रशासन के अधिकारी रूस के तेल खरीदने को लेकर भारत की आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि तेल से अर्जित पैसों से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है। अमेरिका ज्यूइश कमेटी (एजेसी) ने शुक्रवार को इस मामले पर टिप्पणी की। इससे पहले व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने रूस-यूक्रेन संकट को “मोदी का युद्ध” करार देते हुए कहा था कि “शांति का मार्ग आंशिक रूप से नयी दिल्ली से होकर जाता है।” एजेसी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि वह "अमेरिकी अधिकारियों की ओर से भारत पर किये गए जुबानी हमलों से बहुत हैरान और चिंतित है।" समूह ने नवारो की टिप्पणी को "अपमानजनक आरोप" करार दिया। पोस्ट में कहा गया है, "हमें ऊर्जा के जरूरतमंद भारत की रूसी तेल पर निर्भरता पर खेद है, लेकिन भारत पुतिन के युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं है, यह एक सहयोगी लोकतांत्रिक देश और अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।" पोस्ट में कहा गया है, “यह महत्वपूर्ण संबंधों को पुन: स्थापित करने का समय है।”  

टैरिफ विवाद पर केंद्र का रुख साफ, पीयूष गोयल ने कहा—भारत कभी झुकेगा नहीं

नई दिल्ली  अमेरिका के साथ जारी टैरिफ विवाद पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने खुलकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के सामने नहीं झुकेगा और न ही कमजोर पड़ेगा। इसके बजाय वह दुनिया की नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बाजारों में अपनी पैठ बनाने पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा। एक निजी कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने भारत के निर्यात को बढ़ाने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा आने वाले कुछ समय में केंद्र सरकार सभी क्षेत्रों को सपोर्ट करने और निर्यात के लिए तमाम फैसले लेगी। भारत हमेशा केंद्रीय मंत्री ने कहा, "मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि इस साल हमारा निर्यात पिछले वित्त वर्ष की तुलना में ज्यादा होगा।" 27 अगस्त को भारत पर टैरिफ लागू होने के बाद अपनी पहली टिप्पणी में केंद्रीय मंत्री ने कहा, "भारत हमेशा से ही मुक्त व्यापार समझौते के लिए तैयार है। लेकिन अगर कोई हमारे साथ भेदभाव करता है, तो मैं समझता हूं कि भारत के 140 करोड़ आबादी के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की बात है। इसको ध्यान में रखते हुए हम कभी नहीं झुकेंगे। इसका सामना करते हुए एक साथ आगे बढ़ते रहेंगे। आपको बता दें केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने भारत के ऊपर व्यापार को लेकर 25 फीसदी और रूस से तेल खरीदने के नाम पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। ऐसे में भारत से अमेरिका जाने वाले निर्यात में भारी कमी आने की आवश्यकता है। इसकी वजह से हमारे देश में हजारों लोगों की नौकरी पर खतरा मंडराना शुरू हो गया है। एक तरफ अमेरिका का कहना है कि भारत के ऊपर लगाए गए प्रतिबंध रूस के ऊपर यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए दबाव बनाने का एक प्रयास है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका खुद भी रूस से साथ व्यापार में लगा हुआ है और चीन, जो कि रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीददार है, उससे कुछ भी कहने में डर रहा है। जहां तक व्यापारिक क्षेत्र में लगे 25 प्रतिशत टैरिफ की बात है, तो भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह डेयरी और कृषि उत्पादों में किसी भी प्रकार की छूट नहीं देगा। अमेरिका की मांग है कि भारत डेयरी क्षेत्र में उसके प्रोडक्ट्स को भी बाजार में आने का मौका दे, लेकिन यह भारतीय किसानों और डेयरी क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत बड़ा आत्मघाती कदम साबित होगा। अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने लगातार टैरिफ को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया है। इसका असर यह है कि पूरी ग्लोबल सप्लाई चैन अस्त-व्यस्त हो गई है।  

कुख्यात समंदर चाचा मारा गया, आतंकियों को सीमा पार कराता था ‘ह्यूमन GPS’

 श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल की. एनकाउंटर में बागू खान उर्फ समंदर चाचा मारा गया है, जिसे आतंकियों की दुनिया में 'ह्यूमन जीपीएस' कहा जाता था. सूत्रों के मुताबिक, समंदर चाचा के साथ एक और पाकिस्तानी घुसपैठिया भी ढेर हुआ है. बागू खान उर्फ समंदर चाचा 1995 से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में रह रहा था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वो पिछले तीन दशकों से गुरेज सेक्टर और आसपास के इलाकों से 100 से ज्यादा घुसपैठी प्रयासों को अंजाम दिलाने में शामिल रहा, जिनमें से ज्यादातर सफल रहे. इलाके के कठिन पहाड़ी और गुप्त रास्तों की गहरी जानकारी उसे आतंकी संगठनों के लिए बेहद खास बनाती थी. आतंकी संगठनों की करता था मदद हालांकि, वो हिजबुल कमांडर था, लेकिन समंदर चाचा सिर्फ एक आतंकी संगठन तक सीमित नहीं था. उसने लगभग हर आतंकी संगठन को घुसपैठ की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मदद की. इसी वजह से आतंकी उसे 'ह्यूमन जीपीएस' कहकर बुलाते थे. एनकाउंटर में ढेर सूत्रों ने बताया कि 28 अगस्त की रात जब वो नौशेरा नार इलाके से एक और घुसपैठ की कोशिश कर रहा था, तभी सुरक्षा बलों ने उसे घेर लिया. मुठभेड़ में समंदर चाचा और उसके साथ मौजूद एक और आतंकी मारा गया. अगले दिन यानी 29 अगस्त की सुबह तक इलाके में गोलीबारी और तलाशी अभियान जारी रहा. आतंकियों के नेटवर्क को बड़ा झटका सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, समंदर चाचा की मौत आतंकी संगठनों के लॉजिस्टिक नेटवर्क को करारा झटका है. उसके मारे जाने से घुसपैठ की कई संभावित योजनाएं ध्वस्त हो गई हैं. समंदर चाचा वर्षों तक सुरक्षा बलों की पकड़ से बचता रहा है.

विशेष सत्र बुलाया, ममता बनर्जी की SIR पर सेंसर मोशन की तैयारी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सत्तारूढ़ टीएमसी और बीजेपी दोनों ने जोरदार तैयारियां शुरू कर दी हैं। पश्चिम बंगाल की सरकार 1 से 4 सितंबर तक विधानसभा का विशेष सत्र बुला रही है। इसमें बीजेपी शासित राज्यों में बंगालियों के साथ कथित अत्याचार को लेकर सेंसर मोशन लाया जा सकता है। इसके अलावा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ भी विधानसभा में प्रस्ताव किया जा सकता है। बता दें कि चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर करवाया है जिसका विपक्ष पुरजोर विरोध कर रहा है। बंगाल में तीन दिन विधानसभा का विशेष सत्र चलेगा। ममता बनर्जी ने कई बार राजस्थान से ओडिशा तक बंगालियों पर होने वाले अत्याचार को लेकर बीजेपी पर हमला किया है। ममता बनर्जी ने दूसरे राज्यों से वापसे आने वाले बंगालियों के लिए श्रमश्री योजना की भी शुरुआत की है। इसके तहत मजदूरों को 5 रुपये प्रति महीने की आर्थिक सहायता दी जाएगी। जानकारी के मुताबिक विधानसभा में टीएमसी एसआईआर का विरोध करेगी। कई जानकारों का कहना है कि चुनाव आयोग बंगाल में भी विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर करवा सकता है। उधर राहुल गांधी बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा' निकाल रहे हैं। टीएमसी नेता यूसुफ पठान और ललितेश त्रिपाठी बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के अंतिम चरण में सोमवार को हिस्सा लेकर अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे। पार्टी सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक हैं। बिहार में जारी कांग्रेस की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के तहत शुक्रवार को सीवान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ‘‘निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से वोट चोरी करते पकड़ी गई है’, इसलिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता घबरा गए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से 65 लाख लोगों के नाम हटाना उनके मताधिकार पर हमला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा 17 अगस्त को शुरू की गई इस यात्रा का उद्देश्य बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से लोगों के मतदान के अधिकार पर कथित हमले को उजागर करना है।  

पुतिन भारत आ रहे हैं दिसंबर में, क्रेमलिन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर में भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। इस बात की पुष्टि क्रेमलिन के वरिष्ठ अधिकारी यूरी उशाकोव ने की है। उन्होंने बताया कि आगामी सोमवार को चीन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की मुलाकात होगी, जहां दोनों नेता पुतिन की दिसंबर यात्रा की तैयारियों पर चर्चा करेंगे। इससे पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी संकेत दिया था कि पुतिन जल्द ही भारत आएंगे, हालांकि उस समय यात्रा की तारीखें तय नहीं हुई थीं। डोभाल ने भारत-रूस के विशेष और पुराने रिश्तों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश इस संबंध को बहुत महत्व देते हैं। रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने जताई नाराजगी पुतिन की भारत यात्रा की घोषणा ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल आयात को लेकर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कदम को रूस के खिलाफ दबाव बनाने के प्रयास के तौर पर लिया है। ट्रंप का आरोप है कि भारत डिस्काउंट पर रूस से तेल खरीदकर उसे उच्च दाम पर वैश्विक बाजार में बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा है। उन्होंने ट्वीट में कहा था कि ‘भारत को इससे फर्क नहीं पड़ता कि यूक्रेन में रूस की मशीनरी से कितने लोग मारे जा रहे हैं।’ भारत ने अमेरिकी आरोपों को ठुकराया भारत ने अमेरिकी टैरिफ को अनुचित, गैर-न्यायसंगत और अस्वीकार्य करार दिया है। भारत का कहना है कि जब अमेरिका और यूरोप भी रूस से ऊर्जा खरीद रहे थे, तो भारत पर ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है। फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस की कमाई पर रोक लगाने की कोशिश की, लेकिन यूरोप के बाजार बंद होने के कारण रूस ने अपना तेल भारत और चीन जैसे देशों की ओर मोड़ दिया। इसके कारण रूस की अरबों डॉलर की कमाई जारी है। 

जापानी पीएम के साथ ट्रेन राइड पर निकले PM मोदी, भारतीय ड्राइवरों से बातचीत

टोक्यो  जापान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम शिगेरु इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन का भी लुत्फ उठाया। साथ ही उन्होंने बुलेट ट्रेन ड्राइविंग की ट्रेनिंग लेने वाले भारतीयों से भी मुलाकात की। जापानी प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए कहा, प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेंदाई की यात्रा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद ने ALFA-X ट्रेन को भी देखा और जानकारी ली। बता दें कि भारतीय ड्राइवर जेआर ईस्ट के साथ इस समय ट्रेनिंग कर रहे हैं। जेआर ईस्ट जापान की एक रेलवे कंपनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्लैटफॉर्म पर ही उनसे मुलाकात की और फोटो भी खिंचवाईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को जापान के मियागी प्रांत के सेंडाई में स्थित एक सेमीकंडक्टर संयंत्र गए। इससे पहले प्रधानमंत्री ने जापान के 16 प्रांतों के गवर्नर से मुलाकात की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत ‘राज्य-प्रांत सहयोग’ को मजबूत किए जाने का आह्वान किया। जापान के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान में यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘तोक्यो में आज सुबह जापान के 16 प्रांतों के गवर्नर के साथ बातचीत की। राज्य-प्रांत सहयोग भारत-जापान मैत्री का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यही कारण है कि कल 15वें वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन के दौरान इस पर अलग से एक पहल की गई।’ उन्होंने कहा, ‘व्यापार, नवोन्मेष, उद्यमिता आदि क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। ‘स्टार्टअप’, प्रौद्योगिकी और एआई जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्र भी लाभकारी हो सकते हैं।’ विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों पर आधारित भारत-जापान संबंध निरंतर मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि तोक्यो और नयी दिल्ली पर परंपरागत रूप से ध्यान केंद्रित करने से आगे बढ़कर राज्य-प्रांत संबंधों को नए सिरे से बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य-प्रांत साझेदारी पहल व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, कौशल, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग को बढ़ावा देगी। प्रधानमंत्री ने जापान के विभिन्न प्रांतों के गवर्नर और भारतीय राज्य सरकारों से विनिर्माण, गतिशीलता, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे, नवोन्मेष, ‘स्टार्ट-अप’ और लघु व्यवसायों में सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया। पहलगाम हमले पर क्या बोले पीएम मोदी और जापानी प्रधानमंत्री इशिबा? भारत और जापान ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है. दोनों देशों ने कहा कि हमले के जिम्मेदार आतंकियों, उनके आयोजकों और फाइनेंसर्स को तुरंत न्याय के कटघरे में लाया जाए. यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के बीच शिखर वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दिया गया. 'सफल दौरे से मिले शानदार नतीजे', PM मोदी की यात्रा के दौरान भारत-जापान के बीच ये समझौते हुए पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत और जापान के बीच कई समझौते हुए. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक एक्स पोस्ट में इसकी जानकारी दी जिसे प्रधानमंत्री ने रीपोस्ट किया. प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के गवर्नरों से मुलाकात की अपने दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के अलग-अलग प्रीफेक्चरों (राज्य-स्तर की इकाइयों) के गवर्नरों से मुलाकात की. इस बातचीत में 16 गवर्नरों ने हिस्सा लिया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जापान के रिश्ते बहुत पुराने सभ्यता से जुड़े हुए हैं और आज भी लगातार मजबूत हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि अब जरूरत है कि दिल्ली और टोक्यो तक सीमित रिश्तों को आगे बढ़ाकर भारत के राज्यों और जापान के प्रीफेक्चरों के बीच सीधा सहयोग बढ़ाया जाए. इसके लिए 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में 'स्टेट-प्रीफेक्चर पार्टनरशिप' की शुरुआत की गई थी, जो ट्रेड, तकनीक, पर्यटन, सुरक्षा, स्किल और कल्चर जैसे क्षेत्रों में रिश्तों को और मजबूत करेगी. मोदी ने भारतीय राज्यों और जापानी गवर्नरों से कहा कि वे मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, स्टार्टअप्स, छोटे उद्योग और नए इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी करें. उन्होंने कहा कि जैसे जापान के हर प्रीफेक्चर की अपनी खास ताकत है, वैसे ही भारत के हर राज्य की अपनी अलग क्षमता है. अगर दोनों मिलकर काम करें तो बड़ा फायदा होगा. मोदी ने खासतौर पर युवाओं और कौशल विकास के आदान-प्रदान पर जोर दिया और कहा कि जापानी टेक्नोलॉजी और भारतीय टैलेंट साथ आएंगे तो नए अवसर बनेंगे. गवर्नरों ने भी माना कि अगर राज्यों और प्रीफेक्चरों के बीच सीधे रिश्ते बढ़ते हैं तो भारत-जापान के कारोबारी, शैक्षिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे.

HC ने तमिलनाडु सरकार को दिया झटका, कहा—मंदिर का पैसा सरकारी नहीं

मदुरै मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को झटका दिया है। कोर्ट की तरफ से कहा गया कि भक्तों द्वारा मंदिर को दान किया गया धन केवल देवता का है। ऐसे में इसका इस्तेमाल केवल मंदिर के किसी काम के लिए या फिर धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। इस फैसले के साथ ही हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 2023 से 2025 के बीच जारी किए गए उन 5 आदेशों को भी रद्द कर दिया, जिनमें मंदिर के धन का उपयोग करके विवाह मंडपों का निर्माण करने को कहा गया था। मंदिर की संपत्ति और धन को सरकार द्वारा व्यावसायिक रूप से उपयोग करने के खिलाफ दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि सरकार के पास मंदिर के धन का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि सरकार ने जिन विवाह भवनों का निर्माण मंदिर के पैसे से करवाना चाहती है उसका कोई धार्मिक उद्देश्य नहीं है, क्योंकि इन्हें किराए पर दिया जा रहा है। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति एस.एम सुब्रहमण्यम और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने इस सप्ताह की शुरुआत में यह आदेश पारित किया। पीठ ने कहा कि तमिल नाडु सरकार मंदिर के संसाधनों का उपयोग केवल मंदिरों के रखरखाव और विकास तथा उससे जुड़ी धार्मिक गतिविधियों पर करने के लिए बाध्य है। इसका उपयोग व्यावसायिक रूप से नहीं किया जा सकता। हिंदू विवाह एक संस्कार, धार्मिक उद्देश्य नहीं: मद्रास हाईकोर्ट राज्य सरकार की तरफ से वकील वीरा कथिरावन ने तर्क दिया कि मंदिर के धन का उपयोग समाज के लिए ही किया जा रहा है। जिन भवनों का निर्माण किया गया है, उनमें धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत किए जाने वाले हिंदू विवाह को ही अनुमित दी जाएगी। राज्य ने अदालत को आगे बताया कि अभी तक कोई पैसा जारी नहीं किया गया है और सभी प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त की जाएगी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने राज्य के इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसने माना कि हिंदू विवाह को एक संस्कार माना जाता है, लेकिन हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत इसमें संविदात्मक तत्व भी शामिल हैं। इसलिए, हिंदू विवाह एचआर एंड सीई अधिनियम के तहत अपने आप में एक “धार्मिक उद्देश्य” नहीं है कोर्ट ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1959 का जिक्र करते हुए कहा कि यह अधिनियम मंदिर के धन को केवल धार्मिक कार्यों या धर्मार्थ उद्देश्यों जैसे की पूजा, अन्नदान, तीर्थ यात्रियों के कल्याण और गरीबों की सहायता के लिए खर्ज करने की अनुमित देता है, न कि किसी ऐसे काम के लिए, जिससे सरकार के राजस्व में वृद्धि हो। संपत्ति पर देवता का अधिकार: HC कोर्ट ने कहा, " भक्तों द्वारा मंदिर या देवता को दान की गई चल और अचल संपत्ति पर देवता का अधिकार होता है। ऐसे में इसका उपयोग केवल मंदिरों में उत्सव मनाने के लिए या मंदिर के रखरखाव के लिए या विकास के लिए इसका उपयोग किया जा सका है। मंदिर के पैसे को सार्वजनिक पैसा या सरकारी पैसा नहीं माना जा सकता। यह पैसा हिंदू धार्मिक लोगों द्वारा दिया जाता है, यह उनके धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं या विचारधाराओं के प्रति उनके भावनात्मक और आध्यात्मिक लगाव के कारण दिया गया है।" अपने इस आदेश के साथ ही अदालत ने चेतावनी भी दी कि मंदिर के धन को स्पष्ट रूस से अनुमति प्राप्त उद्देश्यों के लिए ही खर्च किया जाना चाहिए। अनुमति का दायरा बढ़ाने का प्रयास किया जाता है तो फिर इस धन के दुरुपयोग और गबन का रास्ता खुल जाएगा। अदालत ने कहा कि इस तरह का दुरुपयोग "मंदिर के संसाधनों का दुरुपयोग" होगा और हिंदू श्रद्धालुओं के धार्मिक अधिकारों का भी उल्लंघन होगा, "जो आस्था के साथ मंदिरों में दान करते हैं।"

पूर्व विधायक पेंशन के लिए जगदीप धनखड़ ने दिया आवेदन, विधानसभा में चर्चा

जयपुर. भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा के पूर्व विधायक के रूप में पेंशन के लिए आवेदन दायर किया है. जगदीप धनखड़ 1993 से 1998 तक अजमेर जिले के किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक रहे हैं. उन्होंने हाल ही में विधानसभा सचिवालय में पेंशन के लिए आवेदन किया है. सूत्रों के अनुसार, विधानसभा सचिवालय ने उनके आवेदन पर स्वीकृति प्रक्रिया शुरू कर दी है. यदि उनका आवेदन स्वीकृत होता है, तो उन्हें प्रतिमाह 42 हजार रुपये की पेंशन और पूर्व विधायकों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो सकता है. जगदीप धनखड़ का राजनीतिक सफर लंबा और विविध रहा है. वे 1989 से 1991 तक झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से जनता दल के सांसद रहे और चंद्रशेखर सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया. इसके बाद 1993 में वे कांग्रेस के टिकट पर किशनगढ़ से विधायक चुने गए. 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और 2022 से 2025 तक भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में उन्होंने अपनी सेवाएं दीं. अब उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पूर्व विधायक के रूप में पेंशन के लिए आवेदन किया है. पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया राजस्थान विधानसभा सचिवालय ने धनखड़ के आवेदन की जांच शुरू कर दी है. राजस्थान सरकार के नियमों के अनुसार, पूर्व विधायकों को उनके कार्यकाल के आधार पर पेंशन और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती है. धनखड़ के मामले में, उनके 1993-1998 के कार्यकाल को देखते हुए पेंशन की पात्रता निर्धारित की जाएगी. स्वीकृति मिलने पर उन्हें प्रतिमाह 42 हजार रुपये की पेंशन के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाएं, यात्रा भत्ता और अन्य लाभ मिल सकते हैं. राजस्थान में पूर्व विधायकों को पेंशन के अलावा कई अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती है.जिसमें पूर्व विधायकों और उनके परिवार को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं दी जाती है. इसके अलावा सरकारी कार्यों या विधानसभा से संबंधित यात्राओं के लिए भत्ता दिया जाता है.वहीं विधानसभा द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भागीदारी और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं भी दी जाती है. धनखड़ के आवेदन ने राजस्थान की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दिया है. उनके इस कदम को उनके लंबे राजनीतिक करियर के एक और अध्याय के रूप में देखा जा रहा है. विधानसभा सचिवालय जल्द ही उनके आवेदन पर अंतिम निर्णय ले सकता है.

यमन में बड़ा हादसा: इजरायल की एयर स्ट्राइक में हूती नेताओं की मौत का दावा

सना  इजरायल ने यमन राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा हवाई हमला किया है। इस हमले में हूतियों के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को बड़ा नुकसान हुआ है। इजरायली टीवी KAN ने यमन के मीडिया का हवाला देते हुए बताया कि इस हमले में हूती प्रधानमंत्री गालिब अल-रहावी और समूह के कई सैन्य अधिकारी मारे गए। इजरायली मीडिया ने इसे यमन के हूतियों पर सबसे बड़ा हमला कहा है। हमला उस वक्त किया गया ये शीर्ष नेता हूती प्रमुख के अल-मलिक हूती का राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित भाषण देख रहे थे। इस हमले की खबर सबसे पहले हूती समूह से संचालित अल मसीरा टीवी ने दी और फिर रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज और IDF ने भी हमले की पुष्टि की। हालांकि, उन्होंने लक्ष्यों के बारे में नहीं बताया। अपार्टमेंट के अंदर बनाया गया निशाना यमन के अल-जम्हूरिया चैनल ने बताया कि हूती प्रधानमंत्री अल-रहावी अपने कई सहयोगियों के साथ एक अपार्टमेंट में थे, जब उन्हें निशाना बनाया गया। इजरायल के चैनल 12 ने बताया कि हूती रक्षा मंत्री मोहम्मद नासिर अल-अथिफी और चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद अब्द अल-करीम अल-गमारी के भी इस हमले में मारे जाने की संभावना है। हालांकि, तीनों हूती नेताओं की मौत के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इजरायली मीडिया ने भी इस बात पर जोर दिया है कि इस समय उनकी स्थिति अज्ञात है। सऊदी अखबार अल-हदथ ने बताया कि इजरायली वायु सेना ने यमनी राजधानी सना में उन घरों को निशाना बनाया, जहां वरिष्ठ अधिकारी छिपे हुए थे। हूती सरकार के रक्षा मंत्री असद अल-शरकाबी की मौत लेकिन यमन की सरकार में रॉयटर के सूत्रों के अनुसार इजरायली हमले में हूती सरकार के रक्षा मंत्री असद अल-शरकाबी की मौत हो गई है। इसी प्रकार से हूती के सैन्य प्रमुख अब्द अल-करीम अल-घामरी भी मारे गए हैं। इजरायल के हमले और उससे हुए नुकसान पर हूती संगठन ने कोई बयान जारी नहीं किया है और न ही इस सिलसिले में पूछे गए सवाल का जवाब दिया है। इजरायल ने किए थे हवाई हमले इजरायली वायुसेना ने कहा है कि लड़ाकू विमानों ने सना के उस परिसर को निशाना बनाया था जहां पर हूती संगठन के प्रमुख लोग एकत्रित थे। खुफिया सूत्रों से जानकारी मिलने के बाद यह हमला किया गया था।  हूती प्रमुख अब्दुल मलिक अल-हाउती का टेलीविजन संबोधन सुनने के लिए कई स्थानों पर एकत्रित संगठन के पदाधिकारियों और लड़ाकों पर हमले किए गए। इसमें मारे गए लोगों के बारे में सूचनाएं एकत्रित की जा रही हैं। हूती गाजा में इजरायली कार्रवाई के विरोध में उल्लेखनीय है कि ईरान समर्थित हूती गाजा में इजरायली कार्रवाई के विरोध में लाल सागर से गुजर रहे जहाजों पर लगातार हमले कर रहे हैं। साथ ही इजरायल पर भी दर्जनों ड्रोन और मिसाइल दाग चुके हैं। अल-हूती का भाषण सुनने के लिए जमा थे नेता इजरायली मीडिया रिपोर्ट में अज्ञात सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि इजरायल की खुफिया एजेंसियों को पता चला कि रक्षा मंत्री समेत 10 हूती मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी समूह के नेता अब्दुल मलिक अल-हूती का एक नियोजित भाषण सुनने के लिए सना के बाहर इकठ्ठा हो रहे थे। इसके बाद इजरायली वायु सेना ने इस बैठक को निशाना बनाकर हमला किया। अल रहावी एक साल से हूतियों के कब्जे वाले यमन के प्रधानमंत्री थे। हालांकि, उन्हें अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली थी।

जम्मू-कश्मीर रियासी हादसा: भूस्खलन में 7 की मौत, कई लोगों के दबे होने की आशंका

 रियासी  जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के राजगढ़ इलाके में भारी बारिश और ऊपरी इलाकों में बादल फटने से एक बार फिर से फ्लैश फ्लड की स्थिति बन गई है. इस घटना में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 4 लोग लापता बताए जा रहे हैं. वहीं रियासी जिले के महौर क्षेत्र में लगातार भारी बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं. शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार मलबे से अब तक 7 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. प्रशासन के अनुसार कई मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से कुछ पूरी तरह बाढ़ के पानी में बह गए. हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है. रेस्क्यू टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं ताकि लापता लोगों को तलाशा जा सके. साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत केंद्र बनाए गए हैं. अधिकारियों ने कहा कि हालात पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भी भेजी जाएंगी. लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है. वहीं रियासी भूस्खलन की घटना में स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीमें मौके पर राहत-बचाव अभियान चला रही हैं. जम्मू-कश्मीर में लगातार बादल फटने की घटना और फ्लैश फ्लड अगस्त 2025 में जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भारी तबाही मची है. इस महीने में प्रदेश को लगातार फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड्स का सामना करना पड़ा, जिससे खासतौर पर जम्मू क्षेत्र में बड़ी तबाही हुई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले हफ्ते में आई भीषण बारिश ने जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी और डोडा जिलों में तबाही मचाई. इन घटनाओं में अब तक 36 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सिर्फ रियासी और डोडा जिलों में ही कम से कम 9 लोगों की जान गई. भारी बारिश से भूस्खलन हुए, नदियों का जलस्तर बढ़ गया और कई गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई. इससे पहले, 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के चिशोटी गांव में एक बादल फटने की घटना हुई थी. यह इलाका माता वैष्णो देवी यात्रा के मार्ग पर स्थित है और समुद्र तल से 9,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है. इस क्लाउडबर्स्ट में कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल और लापता बताए गए. तेज फ्लैश फ्लड्स ने श्रद्धालुओं के कैंप, मकान और पुल बहा दिए. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इलाके में सामान्य बारिश ही दर्ज हुई थी, लेकिन क्लाउडबर्स्ट की वजह से सीमित क्षेत्र में अचानक पानी का सैलाब आ गया. क्लाउडबर्स्ट क्या है? भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, किसी छोटे क्षेत्र (20–30 वर्ग किलोमीटर) में एक घंटे में 10 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश को क्लाउडबर्स्ट कहा जाता है. यह घटना अक्सर पहाड़ी इलाकों में होती है. मॉनसून की नमी से भरी हवाएं जब पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं, तो ठंडी होकर घने बादल बना देती हैं. इनमें जब पानी का भार असहनीय हो जाता है तो अचानक भारी बारिश के रूप में गिरता है. इस अचानक बारिश से मिनटों में फ्लैश फ्लड, लैंडस्लाइड और मडफ्लो जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं. वैज्ञानिक मानते हैं कि क्लाइमेट चेंज की वजह से इस तरह की घटनाओं की संख्या और तीव्रता दोनों बढ़ रही हैं.