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रूस ने यूक्रेन पर किया बहुत बड़ा हमला, एक रात में दागे 728 ड्रोन; मचा दी तबाही

मॉस्को  यूक्रेन की वायु सेना ने बुधवार को बताया कि रूस ने बीती रात यूक्रेन पर रिकॉर्ड 728 शाहेद ड्रोन और डमी ड्रोन दागे. रूस की तरफ से ड्रोन्स की बौछार के साथ-साथ 13 मिसाइलें भी दागी गईं. रूस ने यूक्रेन पर ये हमला ऐसे वक्त में किया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध खत्म करने को लेकर रूसी राष्ट्रपति से हुई अनबन के बीच यूक्रेन को मिसाइल देने का वादा किया है. अमेरिका ने पहले साफ कर दिया था कि वो यूक्रेन को हथियार नहीं देगा लेकिन फिर ट्रंप ने कह दिया है कि अमेरिका यूक्रेन को अपनी सुरक्षा के लिए हथियार मुहैया कराएगा. अमेरिकी न्यूज वेबसाइट Axios की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से फोन पर बात की और कहा कि वो यूक्रेन को जल्द ही 10 पेट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर्स भेजेंगे. मिसाइल इंटरसेप्टर एक तरह का डिफेंसिव मिसाइल होता है जो बैलेस्टिक मिसाइलों के हमले को रोकता है. यह खबर सामने आने के बाद रूस-अमेरिका में तनाव बढ़ता दिखा है और इसी बीच खबर आ रही है कि रूस ने यूक्रेन पर रिकॉर्ड संख्या में ड्रोन बरसाए हैं. यूक्रेन की वायु सेना ने एक बयान में कहा कि यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम ने 296 ड्रोन और सात मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 415 से अधिक ड्रोन रडार से गायब हो गए या जाम हो गए. इसमें कहा गया है कि हमले में मुख्य रूप से यूक्रेन के पश्चिमी वोलिन क्षेत्र और वोलिन क्षेत्र की राजधानी लुत्स्क को निशाना बनाया गया, जो यूक्रेन के उत्तर-पश्चिम में स्थित है. यह क्षेत्र पोलैंड और बेलारूस की सीमा से लगा हुआ है. कतर के सरकारी ब्रॉडकास्टर अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी कुर्स्क शहर के कार्यवाहक क्षेत्रीय गवर्नर अलेक्जेंडर खिनश्टाइन ने बताया कि शहर के एक समुद्र तट पर यूक्रेनी हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और सात लोग घायल हो गए, जिनमें एक पांच साल का बच्चा भी शामिल है. रूस की समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, मृतकों में एक रूसी नेशनल गार्ड का अधिकारी भी शामिल है. रूसी एजेंसी ने बताया कि कुर्स्क क्षेत्र के रिल्स्क में यूक्रेनी ड्रोन हमले में सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, एक एम्बुलेंस बिल्डिंग और एक प्रशासनिक भवन को भी निशाना बनाया गया, जिसमें दो लोग घायल हो गए. कुर्स्क के कार्यवाहक मेयर सर्गेई कोटलारोव ने कहा कि गिराए गए यूक्रेनी ड्रोन के मलबे से जेलेज्नोडोरोजनी जिले में कई घर क्षतिग्रस्त हो गए. यूक्रेन के दोनेत्स्क में मारे गए तीन लोग यूक्रेन के दोनेत्सक के गवर्नर वादिम फिलाशकिन ने कहा कि रूस के हमलों में क्षेत्र में तीन लोग मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए. क्षेत्रीय प्रशासन ने कहा कि यूक्रेन के सुमी क्षेत्र पर रूसी हमलों में चार लोग मारे गए और चार अन्य घायल हो गए. यूक्रेन के अखबार कीव इंडिपेंडेंट ने बताया कि यूक्रेन की वायुसेना ने पूरे देश के लिए मिसाइल अलर्ट जारी किया था जिसके बाद बुधवार को लगभग आधी रात को कीव में विस्फोटों की आवाज सुनी गई. रूस-यूक्रेन में संघर्षविराम की ट्रंप की कोशिशें हो रही नाकाम रूस और यूक्रेन का युद्ध 24 फरवरी 2022 से जारी है जिसमें दोनों पक्षों को काफी नुकसान हुआ है, खासकर यूक्रेन को. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति बनने से पहले अपने चुनावी कैंपेन में कहा था कि वो राष्ट्रपति बनते ही रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करवा देंगे. राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम की कोशिशें भी की हैं जो नाकाम रही हैं. इससे बौखलाए ट्रंप ने मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर सीधा हमला बोला है. ट्रंप ने कहा है कि वो पुतिन से खुश नहीं हैं क्योंकि वो बहुत से लोगों की जान ले रहे हैं. ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबा खिंचने और हिंसा बढ़ने पर भी नाराजगी जताई और कहा कि संघर्ष अब पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है क्योंकि इससे वैश्विक सुरक्षा पर असर हो रहा है. ट्रंप ने पुतिन से नाराजगी जताते हुए कहा, 'हमें पुतिन की तरफ से बहुत बकवास सुनने की मिलती है. वो जो दोस्ती दिखाते हैं, वो बेकार है.' 

पीएम नरेंद्र मोदी अफ्रीकी देश नामीबिया पहुंचे, पारंपरिक नृत्य के साथ हुआ स्वागत

नामीबिया पांच देशों के विदेश यात्रा के अंतिम पड़ाव में पीएम नरेंद्र मोदी अफ्रीकी देश नामीबिया पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी आज सुबह 11 बजे (भारतीय समयानुसार) दक्षिण अफ्रीकी देश नामीबिया पहुंचे। राजधानी विंडहोक के एयरपोर्ट पर लैंड होने के बाद पीएम मोदी का पारंपरिक नृत्य के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री भी खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने खुद कलाकारों के साथ नामीबियाई पारंपरिक ढोलक भी बजाया। मोदी राष्ट्रपति नंदी-नदैतवा के निमंत्रण पर नामीबिया की यात्रा पर पहुंचे हैं। नामीबियाई राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की पहली नामीबिया यात्रा है। साथ ही 27 सालों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नामीबिया दौरा है। वहीं भारत से किसी प्रधानमंत्री की तीसरी यात्रा है। PM मोदी से पहले 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नामीबिया गए थे। इससे पहले 1990 में उस वक्त PM रहे वीपी सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी सहित कई हाई रैंक लीडर नामीबिया के स्वतंत्रता दिवस पर वहां गए थे। प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति नंदी-नदैतवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री नामीबिया के संस्थापक जनक एवं प्रथम राष्ट्रपति दिवंगत डॉ. सैम नुजोमा को भी श्रद्धांजलि देंगे। साथ ही नामीबिया की संसद को भी संबोधित करेंगे। पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य ऊर्जा, शिक्षा, रक्षा, व्यापार, और वन्यजीव संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है. भारत, नामीबिया में तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहता है, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी, जिसमें स्वास्थ्य और औषधि निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। मोदी यहां राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवा से मिलेंगे। दोनों देशों के बीच डायमंड बिजनेस, जरूरी खनिजों और यूरेनियम सप्लाई पर चर्चा की संभावना है। इसके अलावा मोदी नामीबिया की संसद को भी संबोधित करेंगे। मोदी का नामीबिया दौरा 2 जुलाई से 10 जुलाई तक 5 देशों की यात्रा का हिस्सा है, जिसमें घाना, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया शामिल हैं। नामीबिया हीरा, यूरेनियम, तांबा, फॉस्फेट और अन्य खनिजों से समृद्ध देश है। नामीबिया में क्या है खास? नामीबिया में यूरेनियम, लिथियम और डिसप्रोशियम जैसे दुर्लभ खनिजों के विशाल भंडार हैं। ये खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं. भारत यूरेनियम आयात को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहा है। नामीबिया डायमंड प्रोसेसिंग का हब भी है। यह देश हीरे, सोना, और अन्य खनिजों के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है. यहां का नामीब रेगिस्तान दुनिया के सबसे खूबसूरत और प्राचीन रेगिस्तानों में से एक है। यह अपनी सुंदरता और लाल रेत के टीलों के लिए प्रसिद्ध है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल नामीब सैंड सी का हिस्सा है। यहां के एटोशा नेशनल पार्क, स्वाकॉपमुंड और स्केलेटन कोस्ट जैसे क्षेत्र वन्यजीव और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं।

PM मोदी को ब्राजील का सर्वोच्च सम्मान, ‘नेशनल ऑर्डर ऑफ सदर्न क्रॉस’ मिला

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक प्रतिष्ठा में एक और तमगा जुड़ गया है। मंगलवार को ब्राजील ने पीएम मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस से सम्मानित किया है। उन्हें ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया है। ब्राजील ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और प्रमुख वैश्विक प्लेटफार्मों पर भारत-ब्राजील सहयोग को बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। गौरतलब है कि मई 2014 में पदभार ग्रहण करने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी को यह 26वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है। पीएम मोदी ने अपने भव्य स्वागत और सर्वोच्च सम्मान देने के लिए ब्राजील की सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। पीएम ने कहा है कि यह 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व की बात है। पीएम मोदी ने कहा, “आज राष्ट्रपति जी द्वारा मुझे ब्राजील के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से विभूषित किया जाना, मेरे लिए ही नहीं, 140 करोड़ भारतीयों के लिए अत्यंत गर्व और भावुकता का पल है। इसके लिए ब्राजील की सरकार और लोगों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।” प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत इससे पहले ब्राजील में राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता से पहले प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया गया। यहां प्रधानमंत्री मोदी के औपचारिक स्वागत कार्यक्रम में 114 घुड़सवारों का दस्ता मौजूद था। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उनके स्वागत की झलकियां साझा करते हुए कहा है कि इस यात्रा से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को गति मिलेगी। उन्होंने पोस्ट में कहा,“ ब्रासीलिया में औपचारिक स्वागत की झलकियां। ब्राजील की यह राजकीय यात्रा हमारे द्विपक्षीय संबंधों को गति प्रदान करेगी।” बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले 57 वर्षों में ब्राजील की राजकीय यात्रा पर जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। पीएम मोदी पांच देशों की यात्रा के चौथे चरण में ब्राजील पहुंचे हैं, जहां उन्होंने सोमवार को रियो डी जेनेरियो में ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लिया था। PM का हुआ भव्य स्वागत जब पीएम ब्रासीलिया पहुंचे तो वहां एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने उन कलाकारों की सराहना की जिन्होंने उनके स्वागत में पारंपरिक ब्राजीलियाई सांबा रेगे नृत्य पेश किया. साथ ही इस दौरान पीएम मोदी के सम्मान में भारतीय संस्कृति को भी पेश किया गया. दरअसल, पीएम मोदी 6-7 जुलाई को रियो डी जेनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद ब्रासीलिया पहुंचे. इस यात्रा के दौरान ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला डी सिल्वा ने पीएम मोदी को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और प्रमुख वैश्विक मंचों पर भारत-ब्राजील सहयोग बढ़ाने में योगदान के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया. कई मुद्दों पर हुई द्विपक्षीय वार्ता विदेश मंत्रालय (MEA) के बयान के अनुसार, अपनी यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा के साथ व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वास्थ्य और लोगों के बीच आपसी संबंधों सहित आपसी हित के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को व्यापक बनाने पर द्विपक्षीय चर्चा की. PM ब्रिक्स समिट में हुए शामिल इसी के साथ पीएम मोदी ने ब्रिक्स समिट को प्रोडक्टिव बताया. पीएम ने कहा कि उन्होंने और बाकी देश के नेताओं ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में व्यापक विचार-विमर्श किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठकें विभिन्न देशों के साथ भारत की दोस्ती को बढ़ावा देंगी. पीएम मोदी अर्जेंटीना की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद शनिवार (स्थानीय समय) को ब्राजील पहुंचे. ब्राजील के बाद, प्रधानमंत्री मोदी 9 जुलाई को नामीबिया पहुंचे हैं. पीएम वहां की संसद को भी संबोधित करेंगे. उन्होंने बुधवार को घाना से पांच देशों की अपनी यात्रा शुरू की थी. घाना से प्रधानमंत्री मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो गए और फिर अर्जेंटीना और ब्राजील का दौरा किया.

‘INS निस्तर’ समंदर में दुश्मन को ढूंढने वाला योद्धा, अब नए रूप में मारी एंट्री, समुद्र में रेस्क्यू ऑपरेशन होंगे और मजबूत

 विशाखापट्टनम   विशाखापट्टनम में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने भारतीय नौसेना को पहला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल ‘निस्तार’ सौंपा. यह जहाज भारत में ही डिजाइन और बनाया गया है. यह गहरे समुद्र में रेस्क्यू ऑपरेशन की क्षमता को बढ़ाएगा.  ‘निस्तार’ क्या है और क्यों खास है? ‘निस्तार’ एक ऐसा युद्धपोत है, जो गहरे समुद्र में गोताखोरी और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बनाया गया है. इसका नाम संस्कृत शब्द ‘निस्तार’ से आया है, जिसका मतलब है मुक्ति, बचाव या उद्धार. यह दुनिया के कुछ चुनिंदा नौसेनाओं के पास मौजूद खास तकनीक वाला जहाज है.     आकार और वजन: यह जहाज 118 मीटर लंबा है और इसका वजन करीब 10,000 टन है.     खास उपकरण: इसमें आधुनिक डाइविंग उपकरण हैं, जो 300 मीटर गहराई तक सैचुरेशन डाइविंग (लंबे समय तक गहरे पानी में रहना) और 75 मीटर तक साइड डाइविंग ऑपरेशन कर सकते हैं.     रेस्क्यू की क्षमता: यह जहाज डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल (DSRV) के लिए ‘मदर शिप’ का काम करता है. अगर किसी पनडुब्बी में आपातकालीन स्थिति हो, तो यह लोगों को बचाने में मदद करता है.     गहरे समुद्र में काम: इसमें रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROVs) हैं, जो 1000 मीटर गहराई तक गोताखोरों की निगरानी और सैल्वेज ऑपरेशन (समुद्र से चीजें निकालना) कर सकते हैं. स्वदेशी तकनीक का कमाल ‘निस्तार’ को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने बनाया है. इसे इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के नियमों के अनुसार डिजाइन किया गया है. इस जहाज में 75% से ज्यादा हिस्सा स्वदेशी है. यह भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल का शानदार उदाहरण है. ‘निस्तार’ का महत्व     नौसेना की ताकत बढ़ी: ‘निस्तार’ भारतीय नौसेना को गहरे समुद्र में रेस्क्यू ऑपरेशन करने की नई ताकत देगा। यह खासकर पनडुब्बी आपातकाल में बहुत जरूरी है.      दुर्लभ क्षमता: दुनिया में बहुत कम नौसेनाओं के पास ऐसी तकनीक है. यह जहाज भारत को समुद्री रक्षा में और मजबूत बनाता है.     स्वदेशी गर्व: इस जहाज का निर्माण भारत में हुआ है, जो हमारी तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है. कैसे काम करता है ‘निस्तार’? ‘निस्तार’ का मुख्य काम गहरे समुद्र में गोताखोरी और बचाव कार्य करना है. अगर कोई पनडुब्बी समुद्र में फंस जाए या उसमें कोई खराबी हो, तो यह जहाज तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर सकता है. इसके ROVs समुद्र की गहराई में जाकर स्थिति का जायजा लेते हैं. जरूरी सामान या लोगों को बचाने में मदद करते हैं. इसके अलावा, यह जहाज समुद्र में डूबी चीजों को निकालने के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है. भारत के लिए गर्व की बात ‘निस्तार’ का भारतीय नौसेना में शामिल होना एक बड़ा कदम है. यह न सिर्फ हमारी नौसेना को मजबूत करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत अब ऐसी उन्नत तकनीक अपने दम पर बना सकता है. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड और भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत ने इस सपने को हकीकत में बदला है. INS निस्तर’ समंदर में दुश्मन को ढूंढने वाला योद्धा भारतीय नौसेना अपनी ताकत को और मजबूत करने जा रही है. 18 जुलाई को भारतीय नौसेना के बेड़े में एक बेहद खास जहाज शामिल होने जा रहा है “INS निस्तर”. यह सिर्फ एक सपोर्ट शिप नहीं, बल्कि समुद्र की गहराइयों में दुश्मन की किसी भी चाल को नाकाम करने वाला साइलेंट किलर है. INS निस्तर का नाम सुनते ही 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग की याद ताजा हो जाती है. उस जंग में पाकिस्तान ने अपनी सबसे घातक पनडुब्बी PNS गाजी को INS विक्रांत को निशाना बनाने भेजा था. लेकिन भारतीय नौसेना की चतुराई से गाजी को विशाखापत्तनम के पास समंदर की गहराई में ही खत्म कर दिया गया. उस ऑपरेशन में जो डाइविंग टेंडर इस्तेमाल हुआ था, उसी का नाम था INS निस्तर. अब उसी विरासत को नया जीवन देकर भारत ने INS निस्तर को और आधुनिक रूप में तैयार किया है. INS निस्तर क्यों है खास?     INS निस्तर भारतीय नौसेना का पहला डेडिकेटेड डायविंग सपोर्ट वेसल (DSV) होगा, जिसे आपात स्थिति में किसी भी पनडुब्बी को बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.     यह जहाज करीब 80 फीसदी स्वदेशी तकनीक और सामग्री से बना है.     इसका वजन 9350 टन है और यह 120 मीटर लंबा है.     INS निस्तर में 200 से ज्यादा नौसैनिक तैनात रह सकते हैं और यह बिना बंदरगाह लौटे 60 दिन तक समंदर में ऑपरेशन कर सकता है.     इसमें डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हेकिल (DSRV) लगी है, जो समंदर में 650 मीटर गहराई तक जाकर किसी भी फंसी पनडुब्बी के सैनिकों को बचा सकती है.     इसमें हेलिकॉप्टर ऑपरेशन की सुविधा भी है, जिससे आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तेजी से किया जा सकेगा.     अब तक भारतीय नौसेना को पनडुब्बी हादसों या रेस्क्यू मिशन में ONGC या निजी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था. लेकिन INS निस्तर और इसके जुड़वां जहाज INS निपुण के आने से भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा.     INS निस्तर को पूर्वी तट यानी ईस्ट कोस्ट पर तैनात किया जाएगा, जबकि INS निपुण पश्चिमी तट यानी वेस्ट कोस्ट पर रहेगा. इससे किसी भी कोने में पनडुब्बी हादसे की स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सकेगी. पाकिस्तान और चीन को करारा जवाब पाकिस्तान के पास फिलहाल 5 ऑपरेशनल पनडुब्बियां हैं, लेकिन उसने चीन से 8 नई पनडुब्बियों का ऑर्डर दिया है. इनमें से चार कराची में और चार चीन में बन रही हैं. अनुमान है कि 2027 तक ये सब पाकिस्तानी नेवी में शामिल हो जाएंगी. वहीं, चीन लगातार हिंद महासागर में अपनी पनडुब्बियों की मौजूदगी बढ़ा रहा है. ऐसे में भारत के लिए सिर्फ अटैक क्षमता ही नहीं, बल्कि मजबूत रेस्क्यू और सपोर्ट सिस्टम भी जरूरी था. INS निस्तर और निपुण इस रणनीति को पूरा करेंगे. स्वदेशी निर्माण से आत्मनिर्भर भारत की ओर एक कदम INS निस्तर का 80 फीसदी हिस्सा देश में ही तैयार हुआ है. यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान की ताकत दिखाता है. यह जहाज न सिर्फ भारतीय नौसेना की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर मित्र देशों की पनडुब्बियों को भी बचा सकेगा. आज जब भारत की अंडरवॉटर ताकत तेजी से बढ़ रही है 17 … Read more

वडोदरा : महिसागर नदी पर बना पुल टूटा, दो की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

 वडोदरा  गुजरात के वडोदरा जिले में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया जब वडोदरा और आणंद को जोड़ने वाला गम्भीरा पुल भरभराकर गिर गया. इस हादसे में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हुए हैं. पुल के गिरते ही पांच वाहन सीधे नदी में जा गिरे, जिनमें एक ट्रक और एक पिकअप वाहन अब भी नदी में फंसे हुए हैं. यह हादसा पादरा क्षेत्र में हुआ जहां महिसागर नदी पर गम्भीरा पुल 43 साल पहले बना था. घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंचा और रेसक्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. पुल गिरने के स्थान पर नदी में पानी जमा है, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन अधिकारियों को खासा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडोदरा जिले में पुल ढहने की घटना पर दुख जाहिर किया. इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई और कई घायल भी हुए हैं. पीएम मोदी ने मृतकों के परिजनों के लिए सहायता राशि की घोषणा की है. वहीं घायलों को भी आर्थिक मदद मिलेगी. प्रधानमंत्री ने घायलों के जल्दी ठीक होने की कामना भी की है. पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट के जरिए कहा, ''गुजरात के वडोदरा जिले में पुल के ढहने की वजह से हुई जनहानि बेहद दुखद है. जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएँ. घायलों के जल्दी स्वस्थ होने की कामना करता हूँ. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजन को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी. घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएँगे.'' मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश दरअसल वडोदरा जिले की महिसागर नदी पर बना एक पुल ढह गया, जिसकी वजह से 9 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए हैं. पुल ढहने की वजह से 5 गाड़ियां भी नीचे गिर गईं. एक ट्रक बमुश्किल पुल पर अटका हुआ दिखाई दिया. जानकारी के मुताबिक पुल को 1985 में बनाया गया था. गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जांच के आदेश दिए हैं. भूपेंद्र पटेल ने बताया हादसे का कारण गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी दुख जाहिर किया. उन्होंने एक्स पोस्ट के जरिए पुल ढहने का कारण भी बताया. मुख्यमंत्री ने लिखा, "आणंद और वडोदरा को जोड़ने वाले गंभीरा पुल के 23 गर्डरों में से एक गर्डर के टूटने से हुई दुर्घटना दुखद है. मैं इस दुर्घटना में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं." नदी में पानी कम, कीचड़ में रेस्क्यू टीम को हो रही मुश्किल रेस्क्यू टीम नाव की मदद से घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, लेकिन नदी में पानी कम होने और कीचड़ के जमा होने की वजह से वे मौके तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. पानी में गिरे वाहनों को निकालने की जद्दोजहद में अधिकारी लगे हैं, और पुलिस टीम भी कीचड़ से वाहनों को निकालने की कोशिश कर रही है. पानी में जा गिरे ट्रक को रस्सी से बांधकर निकालने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए यहां क्रेन भी लाया गया है, ताकि रस्सी से बांधकर ट्रक को ऊपर लाया जा सके. इसमें रेस्क्यू टीम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना सुबह 8.30 बजे के आसपास की है. वडोदरा के कलेक्टर अनिल धमेलिया ने बताया कि अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 6 लोग घायल हुए हैं. घायलों में से दो को बेहतर इलाज के लिए वडोदरा के एसएसजी अस्पताल रेफर किया गया है. रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है और मौके पर NDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौजूद हैं.  कलेक्टर ने बताया कि नदी में अब भी एक ट्रक और एक पिकअप फंसे हुए हैं जिन्हें निकालने की कोशिश की जा रही है. हादसे के पीछे की वजह पुल का अचानक टूटना बताया जा रहा है. हालांकि, पुल में किसी तरह का क्रैक था, या यह पुल कैसे गिरा इसकी जांच अभी बाकी है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और तुरंत पुल डिजाइन टीम, मुख्य इंजीनियर और विशेषज्ञों को मौके पर भेजने के निर्देश दिए हैं. साथ ही उन्होंने हादसे की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है. बताया जा रहा है कि यह पुल पिछले साल ही मरम्मत किया गया था. पुल पर बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए राज्य सरकार ने तीन महीने पहले 212 करोड़ की लागत से एक नए पुल को मंजूरी दी थी. इस नए पुल के डिजाइन और टेंडरिंग की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. गुजरात के वडोदरा जिले में बुधवार तड़के एक जर्जर पुल के ढह जाने से कई वाहन महिसागर नदी में गिर गए, जिससे कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य को बचा लिया गया। वडोदरा के ज़िला कलेक्टर अनिल धमेलिया ने बताया , “हमने 5 लोगों को बचाया है जिन्हें मामूली चोटें आई हैं और दो की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बचाव अभियान जारी है। हमें पता चला है कि पुल का एक हिस्सा अचानक टूट जाने से दो ट्रक, एक ईको वैन, एक पिकअप वैन और एक ऑटो-रिक्शा नदी में गिर गए।” घायलों को वडोदरा जिले के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है। धमेलिया ने बताया कि बचाए गए 5 लोगों में से 4 को मामूली चोटें आयीं हैं। गुजरात के वडोदरा में मध्य गुजरात को सौराष्ट्र से जोड़ने वाला महिसागर नदी पर बना 45 साल पुराना ब्रिज मंगलवार सुबह अचानक टूट गया। इस हादसे में ब्रिज से गुजर रहे दो ट्रक, एक बोलेरो समेत 4 वाहन नदी में गिर गए। इस हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई, 3 लोगों को स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू कर बचा लिया। हादसे वाली जगह पर फायर ब्रिगेड की तीन टीमें भेजी गई हैं।ब्रिज के टूटने से दक्षिण गुजरात के पर्यटन और परिवहन व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा। यह पुल भरूच, सूरत, नवसारी, तापी और वलसाड को सौराष्ट्र से जोड़ता था। अब ब्रिज टूटने के बाद दक्षिण गुजरात के लोगों को सौराष्ट्र पहुंचने में ज्यादा समय लगेगा शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, एक ट्रक, एक वैन और एक कार पुल पार कर रहे थे तभी पुल टूट … Read more

हूती विद्रोहियों का लाल सागर में आतंक जारी, हूती के हमले में ग्रीस का जहाज डूबा

सना  यमन के हूती चरमपंथियों ने लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर एक बार फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। सोमवार को हूती चरमपंथियों के हमले में लाइबेरिया के झंडे वाले यूनानी कंपनी के जहाज इटरनिटी सी के चालक दल के चार सदस्य मारे गए। यूरोपीय संघ के एक नौसैनिक बल ने मंगलवार को जहाज पर नाविकों की मौत की पुष्टि की है। इसके अलावा समूह ने एक और जहाज पर कब्जा करने और उसे डुबोने का दावा किया है और उसका वीडियो भी शेयर किया है। इस साल जहाज पर हमले में किसी चालक दल के सदस्य की मौत का पहला मामला है। इसके पहले जहाज पर हमले में आखिरी बार जून 2024 में मौते हुई थीं। जहाज पर बम और ड्रोन से बोला गया हमला यह हमले संभावित रूप से लाल सागर के जलमार्ग को निशाना बनाने के एक नये अभियान का शुरुआती संकेत है, जिससे हाल के हफ्तों में अधिक जहाजों का गुजरना शुरू हो गया था। सोमवार रात को जब यह जहाज़ उत्तर दिशा में स्वेज नहर की ओर बढ़ रहा था, तभी छोटी नावों में सवार लोगों और बम से लैस ड्रोन से उस पर हमला किया गया। जहाज पर मौजूद सुरक्षा गार्ड ने भी अपने हथियारों से जवाबी हमला किया। यूरोपीय संघ के ऑपरेशन एस्पाइड्स और निजी सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे ने इन विवरणों की जानकारी दी। हूतियों विद्रोहियों को हमले के लिए बताया जिम्मेदार हालांकि हूतियों ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन यमन की निर्वासित सरकार और यूरोपीय संघ के बल ने हमले के लिए विद्रोहियों को दोषी ठहराया है। यूरोपीय संघ के बल ने हताहतों की जानकारी देते हुए कहा कि हमले में घायल चालक दल के एक सदस्य को अपना पैर गंवाना पड़ा है। चालक दल के सदस्य जहाज पर ही फंसे हुए हैं, जो अब लाल सागर में बिना नियंत्रण के बह रहा है। हूतियों ने डुबोया जहाज हूतियों ने रविवार को लाइबेरियाई झंडे वाले, यूनान स्वामित्व वाले बल्क कैरियर ‘मैजिक सीज’ पर ड्रोन, मिसाइल, रॉकेट-चालित ग्रेनेड और छोटे हथियारों से हमला किया था। इस हमले की वजह से इसके चालक दल के 22 सदस्यों को जहाज़ छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। विद्रोहियों ने बाद में कहा कि यह जहाज़ लाल सागर में डूब गया। एक वीडियो में हथियारबंद लोगों को जहाज पर चढ़ते और बाद में विस्फोट के बाद जहाज को डूबते दिखा गया है। दोनों हमलों और सोमवार को विद्रोहियों को निशाना बनाकर किए गए इजराइली हवाई हमले की वजह से जहाजों को हूती विद्रोहियों द्वारा निशाना बनाने का अभियान फिर से शुरू होने की आशंका उत्पन्न हो गई है। इससे अमेरिकी और पश्चिमी देशों की सेनाएं फिर से क्षेत्र में आ सकती हैं। खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक बड़े हवाई हमले में विद्रोहियों को निशाना बनाया है। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब इजराइल-हमास युद्ध, ईरान-इजराइल युद्ध और ईरानी परमाणु स्थलों पर अमेरिका के हवाई हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है।  

सहायक कार्यकारी अधिकारी ए राजशेखर बाबू को चर्च की प्रार्थना में भाग लेने के कारण टीटीडी द्वारा निलंबित कर दिया गया

तिरुपति  तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने अपने एक अधिकारी ए. राजशेखर बाबू को चर्च में प्रार्थना करने के कारण निलंबित कर दिया है। TTD श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का प्रबंधन करता है। बयान में कहा गया कि अधिकारी को दूसरे धर्म का पालन करने के आरोप में निलंबित किया गया है। TTD के अनुसार, राजशेखर बाबू हर रविवार को अपने गृहनगर, पुत्तूर के एक चर्च में प्रार्थना करने जाते थे। यह बात TTD के ध्यान में आई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। TTD ने एक बयान में कहा, 'यह TTD के नियमों का उल्लंघन है। एक कर्मचारी के रूप में उन्हें TTD की आचार संहिता का पालन करना चाहिए था। उन्होंने एक हिंदू धार्मिक संगठन के कर्मचारी के रूप में गैरजिम्मेदारी से काम किया है।' जांच और सबूतों के बाद हुआ सस्पेंशन बयान में आगे कहा गया है कि TTD सतर्कता विभाग की रिपोर्ट और अन्य सबूतों की जांच के बाद, नियमों के अनुसार उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। TTD ने पहले मामले की जांच की। फिर, नियमों के अनुसार, राजशेखर बाबू को निलंबित कर दिया गया। केवल हिंदू ही मंदिरों में कर सकते हैं काम फरवरी में, TTD ने 18 कर्मचारियों के खिलाफ गैर-हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी। यह कार्रवाई TTD बोर्ड के नए अध्यक्ष बीआर नायडू की घोषणा के बाद की गई। नायडू ने कहा था कि मंदिर निकाय के संचालित संस्थानों में केवल हिंदुओं को ही काम करने का नियम है। इन कर्मचारियों में छह शिक्षक भी शामिल थे, जो TTD द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में काम करते थे। इन सभी पर गैर-हिंदू धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। छह अन्य कर्मचारियों पर चला डंडा इसके अलावा, एक उप कार्यकारी अधिकारी (कल्याण), एक सहायक कार्यकारी अधिकारी, एक सहायक तकनीकी अधिकारी (इलेक्ट्रिकल), एक छात्रावास कार्यकर्ता, दो इलेक्ट्रीशियन और दो नर्सों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। TTD ने आदेश दिया था कि इन कर्मचारियों को तिरुमाला में, TTD के अधीन किसी भी मंदिर में या किसी भी धार्मिक कार्यक्रम से संबंधित काम के लिए तैनात नहीं किया जाना चाहिए। यह भी निर्णय लिया गया कि यदि वे ऐसी जगहों पर काम कर रहे हैं, तो उन्हें तुरंत स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए। TTD ने यह सुनिश्चित किया कि इन कर्मचारियों को मंदिर से जुड़े किसी भी काम में शामिल न किया जाए। इस नियम के तहत एक्शन इन 18 कर्मचारियों को TTD के धार्मिक कार्यों में भाग लेने से रोक दिया गया था। उन्हें TTD के किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मना किया गया था। TTD चाहता था कि ये कर्मचारी मंदिर के किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा न लें। इन कर्मचारियों ने भगवान वेंकटेश्वर के सामने शपथ ली थी कि वे केवल हिंदू धर्म और हिंदू परंपराओं का पालन करेंगे। यह शपथ राजस्व विभाग (Endowments) के GO No 1060 में जारी नियम 9 (vi) के अनुसार थी, जो 24 अक्टूबर, 1989 को जारी किया गया था। इसके बावजूद, वे गैर-हिंदू धार्मिक परंपराओं का पालन कर रहे थे। इसका मतलब है कि उन्होंने मंदिर के नियमों को तोड़ा था।  

केरल की निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को यमन की जेल में दी जाएगी फांसी, जाने नर्स कैसे पहुंचीं हूतियों की जेल में, जानें किसकी हत्या में मिली सजा-ए-मौत

सना यमन के एक नागरिक तलाल अब्दो मेहदी की हत्या में दोषी करार दी गईं भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को फांसी दी जाएगी। यहमन में सरकारी अधिकारियों और तलाल के परिवार के साथ बातचीत में शामिल एक सामाजिक कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम बास्करन ने बताया है कि निमिषा की फांसी की तारीख मुकर्रर कर दी गई है। क्या अब भी है बिचने का रास्ता? जेरोम ने कहा कि जेल के अधिकारियों ने उन्हें फांसी की तारीख बताई है। कि निमिषा पर जिस शख्स की हत्या का आरोप है उसके परिवार से अब भी बातचीत चल रही है, हालांकि कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। यमन के उस परिवार को 10 लाख डॉलर की पेशकश की गई थी। यह रकम चुकाने के लिए स्पॉन्सर्स से मदद ली जा रही है। सूत्रों का यह भी कहना है कि निमिषा की जान बचाने के लिए भारत सरकार भी दखल दे सकती है। कहां रहता है निमिषा का परिवार निमिषा केरल के पलक्कड़ की रहने वाली हैं। उनकी मां का नाम प्रेमा कुमारी है और वह किसी के घर में नौकरी करती हैं। पिछले साल वह यमन में ही थीं। निमिषा कई साल तक यमन में नर्स की नौकरी करती थीं। 2017 में उनपर यमनी नागरिक की हत्या के आरोप लगे। यमन में मृतक तलाल के ही सहयोग से निमिषा क्लीनिक चलाती थीं। रिपोर्ट में बताया गया कि मानसिक और शारीरिक शोषण से तंग आकर उन्होंने तलाल की हत्या कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखी थी मौत की सजा यमन की निचली अदालत ने पहले निमिषा प्रिया को मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। यमन के राष्ट्रपति राशद अल आलिमी ने भी निमिषा की सजा पर मुहर लगा दी। निमिषा की सजा माफ होने का एक ही रास्ता था। अगर तलाल का परिवार पैसे के बदले उन्हें रिहा करने पर राजी हो जाता तब निमिषा की फांसी रुक सकती थी। निमिषा प्रिया 2011 में नर्स के रूप में काम करने के लिए केरल के पलक्कड़ से यमन की राजधानी सना आई थीं। वह अपने परिवार के साथ गई थीं लेकिन साल 2014 में उनके पति और बेटी भारत लौट गए। इसी साल विद्रोही समूह हूती ने सना पर कब्जा कर लिया। यमन में गृहयुद्ध के चलते निमिषा भारत नहीं लौट सकीं और उनके पति और बच्चा यमन नहीं जा सके। निमिषा ने तलाल के साथ खोला क्लीनिक निमिषा ने कई अस्पतालों में नर्स का काम करने के बाद यमन में ही अपना क्लीनिक खोल लिया। इसमें प्रिया के साथ यमन के नागरिक तलाल महदी उनके साझीदार थे। हालांकि जल्दी ही निमिषा और तलाल के बीच अनबन होने लगी। दोनों के बीच तल्खी इतनी बढ़ी कि तलाल ने निमिषा के साथ मारपीट शुरू कर दी। साल 2016 में निमिषा ने तलाल पर मारपीट और शोषण का आरोप लगाते हुए पुलिस रिपोर्ट की और तलाल गिरफ्तार हो गया। तलाल ने 2017 में जेल से बाहर आने पर फिर से निमिषा को फिर परेशान करना शुरू कर दिया। यहां तक कि निमिषा का पासपोर्ट भी तलाल ने रख लिया और उनको परेशान करने लगा। आरोप है कि अपना पासपोर्ट वापस लेने के लिए निमिषा ने तलाल को नशीला इंजेक्शन लगाया लेकिन इसकी ओवरडोज से तलाल की मौत हो गई। पानी के टैंक में डाल दी बॉडी तलाल की मौत के मामले की जांच करते हुए अगस्त, 2017 में पुलिस ने निमिषा और उनके साथी अब्दुल हन्नान को गिरफ्तार किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट में बताया गया कि तलाल की मौत के बाद निमिषा ने अपने दोस्त अब्दुल हनान की मदद से उसकी बॉडी के टुकड़े कर दिए और पानी के टैंक में डिस्पोज कर दिया। पुलिस की जांच और पेश किए गए सबूतों को अदालत ने ठीक माना। यमनी अदालत ने साल 2018 में प्रिया को हत्या का दोषी ठहराया और 2020 में मौत की सजा सुनाई। अब्दुल हनान को उम्रकैद की सजा सुनाई। यमन की सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने नवंबर 2023 में प्रिया की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद 2024 में राष्ट्रपति ने निमिषा की सजा को बरकरार रखा। ब्लड मनी देने की कोशिश नाकाम निमिषा प्रिया को मौत की सजा के बाद उनके परिवार ने लगातार कई कोशिशें की हैं। निमिषा की मां मां प्रेमा कुमारी ने पीड़ित परिवार के साथ ब्लड मनी पर बातचीत करने की कोशिश की तो भारत सरकार से भी गुहार लगाई। महदी के परिवार से ब्लड मनी बातचीत सफल नहीं हो सकी तो दूसरी ओर यमनी राष्ट्रपति ने भी सजा माफी की अपील खारिज कर दी। हूतियों के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध ना होने और यमन में लगातार जारी गृहयुद्ध ने भारतीय अधिकारियों के लिए भी सना में संपर्क साधना मुश्किल किया। इससे प्रिया को फांसी से बचने के सभी रास्ते एक के बाद बंद होते चले गए। बीते आठ साल से जेल में बंद निमिषा की फांसी की तारीख अब आ गई है। निमिषा को 16 जुलाई को फांसी दी जानी है।

DRDO ने बनाया अत्याधुनिक Mounted Gun System, फायर करके तुरंत स्थान बदलने की क्षमता

बेंगलुरु भारत की रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने एक नया और अत्याधुनिक माउंटेड गन सिस्टम (MGS) विकसित किया है, जो भारतीय सेना की मारक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. यह सिस्टम पूरी तरह से स्वदेशी है. इसे व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (VRDE), अहमदनगर ने डिज़ाइन और विकसित किया है. MGS अब सेना के उपयोगकर्ता परीक्षणों (यूज़र ट्रायल्स) के लिए तैयार है. जल्द ही विभिन्न इलाकों में इसका परीक्षण शुरू होगा.  माउंटेड गन सिस्टम (MGS) क्या है? माउंटेड गन सिस्टम एक ऐसी तोप प्रणाली है, जो एक बख्तरबंद हाई-मोबिलिटी वाहन (HMV) पर लगाई जाती है. यह 155 मिलीमीटर/52 कैलिबर की एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) पर आधारित है, जिसे DRDO की आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) ने विकसित किया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसकी शूट एंड स्कूट (फायर करके तुरंत स्थान बदलने की) क्षमता, जो इसे आधुनिक युद्ध में बेहद प्रभावी बनाती है. MGS को 8×8 टाट्रा हाई-मोबिलिटी वाहन पर लगाया गया है, जिसे भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) ने बनाया है. यह सिस्टम रेगिस्तान, पहाड़ी इलाकों और ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों जैसे सियाचिन में भी आसानी से काम कर सकता है. यह भारतीय सेना की फील्ड आर्टिलरी रेशनलाइजेशन प्लान (FARP) का हिस्सा है, जिसके तहत सेना को 814 माउंटेड गन सिस्टम की जरूरत है. MGS की प्रमुख विशेषताएं     रेंज और सटीकता: अधिकतम रेंज: 45 किलोमीटर (गोला बारूद के प्रकार पर निर्भर).     उच्च सटीकता: यह सिस्टम पिनपॉइंट एक्यूरेसी के साथ लक्ष्य को भेद सकता है, जो इसे हाई-वैल्यू टारगेट्स जैसे हवाई अड्डों, रडार स्टेशनों और कमांड सेंटर्स को नष्ट करने में सक्षम बनाता है.     शूट एंड स्कूट: MGS की सबसे बड़ी ताकत इसकी तेजी है. यह 80 सेकंड में तैनात होकर फायर करने के लिए तैयार हो जाता है. 85 सेकंड में स्थान बदल सकता है. इससे दुश्मन को जवाबी हमला करने का मौका नहीं मिलता.     फायरिंग रेट: यह एक मिनट में 6 गोले दाग सकता है (बर्स्ट रेट: 3 राउंड्स/30 सेकंड, इंटेंस रेट: 12 राउंड्स/3 मिनट). यह 50 वर्ग मीटर के क्षेत्र को पूरी तरह से निशाना बना सकता है.     मोबिलिटी: यह सिस्टम रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में काम कर सकता है.     गति: रफ इलाकों में 60 किमी/घंटा और मैदानी इलाकों में 90 किमी/घंटा. इसे रेल या C-17 परिवहन विमान से आसानी से ले जाया जा सकता है.     वजन और डिज़ाइन: कुल वजन: 30 टन (15 टन तोप + 15 टन वाहन). यह 40 टन के पुलों पर आसानी से चल सकता है, जो इसे ज्यादातर इलाकों में उपयोगी बनाता है.     क्रू: 7 सदस्यों के लिए जगह, जो बुलेटप्रूफ केबिन में सुरक्षित रहते हैं.     स्वदेशी तकनीक: MGS में इस्तेमाल होने वाले 80% उपकरण भारत में ही निर्मित हैं, जिसमें 155mm/52 कैलिबर की तोप, गोला-बारूद और वाहन शामिल हैं. यह मेक इन इंडिया पहल का हिस्सा है, जिसमें भारत फोर्ज, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) जैसे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं. अन्य विशेषताएं     स्वचालित गोला-बारूद हैंडलिंग सिस्टम: यह 24 गोले और उनके लिए बाय-मॉड्यूलर चार्ज सिस्टम (BMCS) ले जा सकता है.     इंटीग्रेटेड फायर कंट्रोल सिस्टम (FCS): यह आर्टिलरी कॉम्बैट कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (ACCCS) के साथ संगत है, जो तकनीकी फायर कंट्रोल, फायर प्लानिंग और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट को आसान बनाता है.     आर्मर्ड केबिन: क्रू को दुश्मन के जवाबी हमले से बचाने के लिए बख्तरबंद केबिन (वर्तमान में स्टील, भविष्य में कम्पोजिट सामग्री). सेना के लिए क्यों है गेम-चेंजर? MGS की कई खूबियां इसे भारतीय सेना के लिए एक गेम-चेंजर बनाती हैं… तेज तैनाती और गतिशीलता: आधुनिक युद्ध में गतिशीलता बहुत महत्वपूर्ण है. MGS की शूट एंड स्कूट क्षमता इसे दुश्मन के जवाबी हमले से बचाती है. यह मैकेनाइज्ड फोर्सेस की गति के साथ तालमेल रख सकता है. हर इलाके में उपयोगी: चाहे सियाचिन की बर्फीली चोटियां हों, राजस्थान का रेगिस्तान हो, या पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाके, MGS हर स्थिति में प्रभावी है. इसका 8×8 टाट्रा चेसिस इसे ऊबड़-खाबड़ इलाकों में भी चलने में सक्षम बनाता है. स्वदेशी तकनीक का प्रदर्शन: यह सिस्टम पूरी तरह से भारत में विकसित किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है. इसे विदेशों में भी निर्यात किया जा सकता है, जैसे कि आर्मेनिया को 2023 में 6 यूनिट्स निर्यात की गईं. प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त: MGS की तुलना फ्रांस के सीज़र और इज़राइल के ATMOS जैसे सिस्टम्स से की जा रही है, जिन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध में अपनी प्रभावशीलता साबित की है. यह भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत बनाता है. परीक्षण और प्रगति परीक्षण: MGS ने पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज (PFFR) में सितंबर 2023 में कई परीक्षण पूरे किए, जिसमें न्यूनतम और अधिकतम रेंज फायरिंग, सटीकता और डायरेक्ट फायरिंग शामिल थी. मोबिलिटी और परफॉर्मेंस: इसने 600 किलोमीटर के आंतरिक परीक्षण और रेगिस्तान व पहाड़ी इलाकों में गतिशीलता परीक्षण पास किए हैं. आर्मर्ड केबिन: बख्तरबंद केबिन के स्टैंडअलोन फायरिंग टेस्ट भी पूरे हो चुके हैं. यूज़र ट्रायल्स: भारतीय सेना जल्द ही विभिन्न इलाकों और मौसम में MGS का परीक्षण शुरू करेगी. ट्रायल्स 2026 तक पूरे होने की उम्मीद है. उद्योग और सहयोग MGS का विकास DRDO की अगुवाई में भारतीय उद्योगों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (DPSU) और प्रमुख शिक्षण संस्थानों के सहयोग से किया गया है.  प्रमुख साझेदार     भारत फोर्ज लिमिटेड: MGS की तकनीक को 7 जून 2025 को हस्तांतरित किया गया.     टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL): ATAGS पर आधारित अपने ट्रक-माउंटेड हॉवित्जर (TMH) के साथ प्रतिस्पर्धा में है.     एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL): धनुष तोप पर आधारित MGS विकसित कर रहा है.     BEML: 8×8 टाट्रा चेसिस प्रदान करता है. उत्पादन: मार्च 2025 में, रक्षा मंत्रालय ने ₹6,900 करोड़ की लागत से 307 ATAGS यूनिट्स के लिए भारत फोर्ज और टाटा के साथ अनुबंध किए. सेना को कुल 700-800 MGS यूनिट्स की जरूरत है. वैश्विक संदर्भ और निर्यात की संभावना हाल के रूस-यूक्रेन युद्ध ने माउंटेड गन सिस्टम्स की अहमियत को उजागर किया है. फ्रांस का सीज़र और इज़रायल का ATMOS जैसे सिस्टम्स ने तेज गतिशीलता … Read more

आज 9 जुलाई को बड़े स्तर पर भारत बंद की तैयारी, बैंकिंग, इंश्योरेंस, पोस्टल सेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों के 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी शामिल हो सकते

नई दिल्ली आज बुधवार को बड़े स्तर पर भारत बंद की तैयारी है। अनुमान है इस बंद में बैंकिंग, इंश्योरेंस, पोस्टल सेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों के 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। यह हड़ताल 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने बुलाई है और इसे भारत बंद का नाम दिया है। यह भारत बंद सरकार की मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों के विरोध में बुलाया गया है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की अमरजीत कौर ने कहाकि हड़ताल में 25 करोड़ से अधिक कर्मचारियों के भाग लेने की उम्मीद है। किसान और ग्रामीण कर्मचारी भी देशभर में इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनेंगे। हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा कि हड़ताल के कारण बैंकिंग, डाक, कोयला खनन, कारखाने, राज्य परिवहन सेवाएं प्रभावित होंगी। सरकार की नीतियों पर सवाल भारत बंद कर रहे संगठनों ने पिछले साल श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को 17-सूत्रीय मांगों का एक चार्टर सौंपा था। इनका कहना है कि सरकार पिछले 10 वर्षों से वार्षिक श्रम सम्मेलन का आयोजन नहीं कर रही है। यह मजदूरों-कर्मचारियों के हितों के खिलाफ फैसले ले रही है। मजदूर संगठनों के मंच ने यह आरोप भी लगाया कि आर्थिक नीतियों के कारण बेरोजगारी बढ़ रही है, जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं, मजदूरी में गिरावट आ रही है और शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बुनियादी नागरिक सुविधाओं में सामाजिक क्षेत्र के खर्च में कटौती हो रही है। ये सभी गरीबों, निम्न आय वर्ग के लोगों के साथ मध्यम वर्ग के लिए और अधिक असमानता और अभाव पैदा कर रहे हैं। इस बात का लगाया आरोप मंच ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी विभागों में युवाओं को नियमित नियुक्तियां देने के बजाय रिटायर्ड लोगों को ही काम पर रखने की नीति देश को आगे नहीं ले जाएगी। वजह, 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम आयु की है। वहीं, बेरोजगारों की संख्या 20 से 25 साल के आयु वर्ग के लोगों में सबसे अधिक है। बयान में कहा गया है कि हम सरकार से बेरोजगारी पर ध्यान देने, स्वीकृत पदों पर भर्ती करने, अधिक नौकरियों के सृजन, मनरेगा श्रमिकों के कार्य दिवसों एवं मजदूरी में बढ़ोतरी के साथ शहरी क्षेत्रों के लिए भी समान कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए ईएलआई (रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना लागू करने में व्यस्त है। यह भी हड़ताल में रहेंगे शामिल एनएमडीसी लिमिटेड और अन्य गैर-कोयला खनिज, इस्पात, राज्य सरकार के विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के श्रमिक नेताओं ने भी हड़ताल में शामिल होने का नोटिस दिया है। श्रमिक नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है और ग्रामीण भारत में बड़े पैमाने पर लामबंदी करने का फैसला किया है। श्रमिक संगठनों ने इसके पहले 26 नवंबर, 2020, 28-29 मार्च, 2022 और पिछले साल 16 फरवरी को भी इसी तरह की देशव्यापी हड़ताल की थी।  देशभर में आज  9 जुलाई को भारत बंद का ऐलान किया गया है। यह बंद 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर बुलाया है। इनमें बैंक, बीमा, डाक, कोयला खदान, हाईवे और कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टरों के 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है। इस विरोध प्रदर्शन को ' भारत बंद ' नाम दिया गया है। यूनियनों का कहना है कि सरकार की नीतियां कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाली और मजदूरों के खिलाफ हैं। ग्रामीण भारत से किसान और खेतिहर मजदूर भी इस बंद में शामिल होंगे। अडानी ने किसे दिया बिना शर्त 12600 करोड़ रुपये का ऑफर? इस कंपनी को खरीदने का है प्लान बंद में इन ट्रेड यूनियनों का समर्थन इस हड़ताल में कई प्रमुख राष्ट्रीय संगठन शामिल हैं। इनमें ये शामिल हैं:     इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)     ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)     हिंद मजदूर सभा (HMS)     सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU)     ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC)     ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC)     सेल्फ एम्प्लॉयड वीमेंस एसोसिएशन (SEWA)     ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU)     लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF)     यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC) क्या खुला है, क्या बंद रहेगा? इस हड़ताल से कई क्षेत्रों पर असर पड़ने की उम्मीद है। इनमें बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, डाक विभाग, कोयला खनन और कारखाने, राज्य परिवहन सेवाएं, सरकारी कार्यालय शामिल हैं। एनएमडीसी और स्टील व खनिज क्षेत्रों की कई सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों ने भी हड़ताल में शामिल होने की पुष्टि की है। हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के उद्योगों और सेवाओं में मजबूत भागीदारी देखने को मिलेगी। क्या बैंक बंद रहेंगे? बैंकिंग यूनियनों ने अलग से बंद के कारण सेवाओं में व्यवधान की पुष्टि नहीं की है। लेकिन, बंद आयोजकों के अनुसार वित्तीय सेवाएं प्रभावित होंगी। बंद आयोजकों ने कहा कि हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सहकारी बैंकिंग क्षेत्रों के कर्मचारी शामिल हैं। इससे कई क्षेत्रों में शाखा सेवाएं, चेक क्लीयरेंस और ग्राहक सहायता जैसी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। स्कूल, कॉलेज, ऑफिस का क्या होगा? 9 जुलाई को स्कूल, कॉलेज और प्राइवेट ऑफिस खुले रहने की उम्मीद है। हालांकि, परिवहन संबंधी समस्याओं के कारण कुछ क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। ट्रेड यूनियनों और सहयोगी ग्रुप की ओर से कई शहरों में विरोध मार्च और सड़क प्रदर्शन किए जाने से सार्वजनिक बसें, टैक्सियां और ऐप-आधारित कैब सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे स्थानीय यात्रा और लॉजिस्टिक्स संचालन में देरी या रद्द होने की संभावना है। क्या रेल सेवाएं प्रभावित होंगी? 9 जुलाई को देशव्यापी रेलवे हड़ताल की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम की आशंका है, जिससे कुछ क्षेत्रों में ट्रेन सेवाएं बाधित हो सकती हैं या उनमें देरी हो सकती है। रेलवे यूनियनों ने औपचारिक रूप से भारत बंद में भाग नहीं लिया है। लेकिन, पहले हुईं इस तरह की हड़तालों में देखा गया है कि प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशनों के पास या पटरियों पर प्रदर्शन करते … Read more