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SC में केंद्र का हलफनामा: नाबालिग की सहमति भी अवैध यौन संबंध में शामिल

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि यौन संबंधों के लिए सहमति की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष से कम नहीं हो सकती। यह बयान एक याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें यौन सहमति की उम्र को कम करने की मांग की गई थी। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि मौजूदा कानून, विशेष रूप से यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) और भारतीय न्याय संहिता, नाबालिगों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं। सरकार का तर्क है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण और दुरुपयोग से बचाने के लिए यह उम्र सीमा आवश्यक है। सरकार ने कहा कि मौजूदा उम्र संबंधि प्रावधान नाबालिगों को यौन शोषण से विशेष रूप से उनके परिचितों द्वारा होने वाले अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। हालांकि, सरकार ने यह स्वीकार किया कि किशोरावस्था में प्रेम संबंधों और आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों के मामलों में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किया जा सकता है। 18 साल उम्र- एक सोच-समझकर लिया गया फैसला है अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी द्वारा प्रस्तुत विस्तृत लिखित जवाब में केंद्र ने कहा, "भारतीय कानून के तहत 18 वर्ष की सहमति की उम्र एक सोच-समझकर लिया गया विधायी निर्णय है, जो बच्चों के लिए एक गैर-परक्राम्य सुरक्षा ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से किया गया है।" सरकार ने कहा कि भारत के संविधान के तहत बच्चों को प्रदत्त संरक्षण के मद्देनजर यह आयु सीमा तय की गई है और इसे कमजोर करना दशकों से चली आ रही बाल सुरक्षा कानूनों की प्रगति को पीछे धकेलने जैसा होगा। केंद्र ने यह भी कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 और हाल ही में लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) जैसे कानून इस सिद्धांत पर आधारित हैं कि 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति यौन गतिविधि के लिए वैध और सूचित सहमति देने में सक्षम नहीं होते। सरकार ने यह भी चेताया कि यदि इस आयु सीमा में कोई छूट दी जाती है, तो यह कानून का दुरुपयोग करने वालों को बचाव का रास्ता देगा, जो पीड़ित की भावनात्मक निर्भरता या चुप्पी का फायदा उठाते हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी बताई सरकार ने सहमति की उम्र में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता, 1860 में यह उम्र 10 साल थी। इसके बाद 1891 के ऐज ऑफ कंसेंट एक्ट में इसे 12 साल किया गया। 1925 और 1929 में इसे बढ़ाकर 14 साल किया गया। 1940 में यह 16 वर्ष और अंततः 1978 में इसे 18 वर्ष किया गया, जो अब तक लागू है। कोर्ट में न्यायिक विवेक की गुंजाइश हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि न्यायपालिका विशिष्ट मामलों में विवेक का प्रयोग कर सकती है, खासकर तब जब मामला दो किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने प्रेम संबंध का हो और दोनों की उम्र 18 वर्ष के आसपास हो। ऐसे मामलों में "close-in-age" छूट पर विचार किया जा सकता है। अपराधियों को संरक्षण न मिले केंद्र ने कहा कि NCRB और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों जैसे सेव द चिल्ड्रन और हक सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि 50% से अधिक बाल यौन अपराध ऐसे लोगों द्वारा किए जाते हैं जो पीड़ित को जानते हैं या जिन पर बच्चे भरोसा करते हैं, जैसे परिजन, शिक्षक, पड़ोसी आदि। सरकार ने चेताया कि यदि सहमति की उम्र घटाई गई, तो ऐसे ही अपराधियों को यह कहकर राहत मिल सकती है कि यौन संबंध सहमति से हुए थे, जिससे POCSO कानून की मंशा पर कुठाराघात होगा। बच्चों को दोषी ठहराने का खतरा सरकार ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि यौन शोषण करने वाला व्यक्ति माता-पिता या कोई नजदीकी रिश्तेदार हो, तो बच्चा विरोध करने या शिकायत करने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे मामलों में 'सहमति' की दलील देना बच्चे को ही दोषी ठहराने जैसा है, और इससे बच्चे के शरीर और गरिमा की सुरक्षा कमजोर होती है।

HIV मामलों में वृद्धि के बीच Meghalaya में शादी से पहले compulsory टेस्टिंग क़ानून की तैयारी

शिलांग देश के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में अब शादी से पहले एचआईवी टेस्ट को अनिवार्य बनाने की तैयारी चल रही है। हेल्थ मिनिस्टर एंपरीन लिंगदोह ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में एचआईवी/एड्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए विवाह से पहले जांच अनिवार्य करने के लिए नया कानून लाने पर विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि मेघालय एचआईवी/एड्स प्रसार के मामले में देश में छठे स्थान पर है और पूर्वोत्तर क्षेत्र पर इसका अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। लिंगदोह ने कहा, ‘अगर गोवा ने विवाह से पहले एचआईवी जांच को अनिवार्य कर दिया है तो मेघालय को भी इस तरह का कानून क्यों नहीं लागू करना चाहिए? यह पूरे समाज के लिए फायदेमंद होगा।’ स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसोंग की अध्यक्षता में एक बैठक में हिस्सा लिया, जिसमें समाज कल्याण मंत्री पॉल लिंगदोह और ईस्ट खासी हिल्स जिले के आठ विधायक भी शामिल हुए। इस बैठक में एचआईवी/एड्स पर एक नीति बनाने पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में कैबिनेट नोट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही इसी तरह की बैठकें गारो हिल्स और जैंतिया हिल्स क्षेत्रों में आयोजित की जाएंगी ताकि क्षेत्रवार रणनीति तैयार की जा सके। स्वास्थ्य मंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि सिर्फ ईस्ट खासी हिल्स जिले में ही अब तक एचआईवी/एड्स के 3,432 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से केवल 1,581 मरीज ही उपचार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में इस संक्रमण का प्रमुख कारण असुरक्षित यौन संबंध हैं। मंत्री ने कहा, ‘हमें सुनिश्चित करना होगा कि जांच के बाद संक्रमित पाए गए हर व्यक्ति का इलाज कराया जाए। एचआईवी/एड्स घातक नहीं है, अगर इसका समय पर और सही तरीके से इलाज हो।’ बता दें कि गोवा में भी ऐसे तमाम मामले पाए जाने के बाद एचआईवी टेस्ट को लेकर नियम बनाया गया है।

LOC पर बारूदी सुरंग का धमाका, एक वीर जवान शहीद, दो सैनिक घायल

पुंछ पुंछ जिले के कृष्णा घाटी उपजिला में बारूदी सुरंग के धमाके से एक जवान बलिदान और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा तब हुआ जब भारतीय सेना की 7वीं रेजिमेंट के नायब सूबेदार हरि राम, हवलदार गजेंद्र सिंह और सिपाही ललित कुमार अपनी अग्रीम चोकी के पास नियमित गश्त कर रहे थे। इसी दौरान वे क्षेत्र में दबी एम-16 माइन के विस्फोट की चपेट में आ गए। धमाके में नायब सूबेदार हरि राम बलिदान हो गए, जबकि हवलदार गजेंद्र सिंह और सिपाही ललित कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। घटना की जानकारी अधिकारियों को मिलते ही राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है।

एफटीए से किसानों को होगा सीधा लाभ, कृषि निर्यात में आएगी तेजी : शिवराज सिंह

नई दिल्ली केंद्र सरकार द्वारा किए गए भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता का कृषि क्षेत्र पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसे लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के किसानों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन करते हुए किसान भाइयों-बहनों को बधाई दी है। शिवराज सिंह ने कहा कि यह समझौता अद्भुत, अभूतपूर्व, ऐतिहासिक और राष्ट्र तथा किसानों के व्यापक हित में है। दिल्ली में मीडिया को दिए वक्तव्य में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हमारा यूके के साथ जो व्यापक आर्थिक व्यापार समझौता हुआ है, वो भारतीय कृषि और किसानों के लिए वरदान है। भारत ट्रेड सरप्लस देश है, मतलब यूके को हम निर्यात करते हैं 8 हजार 500 करोड़ के कृषि उत्पाद और वहां से हम आयात करते हैं। 3 हजार 200 करोड़ रुपये के कृषि उत्पाद। मतलब, हमारा निर्यात ज्यादा है व आयात कम है और इसका फायदा निर्यात ज्यादा होने से होगा। इससे निश्चित तौर पर भारत को मिलेगा। विज्ञापन शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के हितों का पूरी तरह संरक्षण किया गया है। किसान हित हमारे लिए सर्वोपरि है। किसानों की सेवा भगवान की पूजा जैसी है। इसलिए, ऐसी चीजें, जिनके आयात से हमारे किसानों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता था, उनमें कोई रियायत समझौते पर नहीं दी गई है। गेहूं, चावल, मक्का, अनाजों में जिनका व्यापक उत्पादन होता है हमारे यहां, भारत ने कोई कन्सेशन नहीं दिया है। अगर हम फलों में देखें तो सेब, अनार, अंगूर, नाशपाती, आलू बुखारा, फलों का राजा आम, अमरूद इन पर भी हमने कोई कन्सेशन नहीं दिया है। हम ऑयल सीड्स को देखें, तिलहन को देखे तो सोयाबीन, मूंगफली, सरसों में हमने कोई रियायत नहीं दी है। वहीं, नट्स को देखें तो काजू, बादाम, अखरोट इन पर हमने कोई रियायत नहीं दी है। सब्जियों में आलू, प्याज़, टमाटर, लहसुन, मटर जो हमारे यहां व्यापक पैमाने पर होता है, हमने यूके को कोई कन्सेशन नहीं दिया है। इसी तरह, दलहन में काला चना, चना, उड़द, मूंग, मसूर, राजमा, तुअर इन पर हमने कोई छूट यूके को नहीं दी है। फूलों में गुलाब, लीली, ऑर्किड इन पर हमने कोई रियायत नहीं दी है। मसालों में हल्दी, बड़ी इलायची जैसे मसालों पर भी हमने कोई छूट नहीं दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि इसका मतलब है कि ये चीजें भारत में यूके से सस्ती नहीं आएंगी तो किसानों के आर्थिक हित सुरक्षित रखे गए हैं। दूसरी तरफ यूके ने जिन चीजों पर 0% इम्पोर्ट ड्यूटी की है, यूके को हमारा कृषि उत्पाद जाता है, चाहे फसलें हो, फल-सब्जियां हो, उन पर इम्पोर्ट ड्यूटी लगती थी, लेकिन व्यापक पैमाने पर, इसलिए क्योंकि सभी प्रमुख कृषि उत्पादों पर इम्पोर्ट ड्यूटी 0% कर दी गई है। मतलब, यूके की जनता अब भारत से जो कृषि उत्पाद जाएंगे, उन्हें सस्ता खरीद सकती है, क्योंकि इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी। अगर इम्पोर्ट ड्यूटी लगती तो वहां महंगा होता, और अगर वहां महंगा होता तो ख़रीद की संभावनाएं कम होती। और उस श्रेणी में देखें तो सारे फल, सूखे मेवे, सभी सब्जियां, सभी तिलहन मतलब सरसों हो, सोयाबीन, मूंगफली हो, सभी दलहन, जितनी भी दालें हैं, सभी फूल, सभी औषधि पौधे, इन पर इम्पोर्ट ड्यूटी जीरो कर दी गई है। उन्होंने कहा, इसका मतलब है अब हमारे ये कृषि उत्पाद व्यापक पैमाने पर वहां जा सकेंगे। हमारा निर्यात बढ़ेगा, वहीं आयात पर हमने कोई रियायत नहीं दी है, लेकिन निर्यात पर 0% इम्पोर्ट ड्यूटी पर ये चीजें जाएंगी हमारी, तो वहां इम्पोर्ट ड्यूटी 0% है, जिससे इनका व्यापार बढ़ेगा, निर्यात ज़्यादा होगा। और, डेरी उत्पादों को भी इसी श्रेणी में रखा गया है।

बांग्लादेश : महिला कर्मचारियों का पहनावा तय करने वाले निर्देश के खिलाफ बवाल, वापस ली ‘तालिबानी’ ड्रेस पॉलिसी

ढाका  बांग्लादेश में तालिबान की तरह मोरल पुलिसिंग करने की मोहम्मद यूनुस सरकार की कोशिश मुंह के बल गिरी है. बांग्लादेश के सेंट्रल बैंक ने ऑर्डर जारी कर कहा था कि दफ्तर महिला अधिकारियों को शॉर्ट ड्रेस, शॉर्ट स्लीव और लेगिंग्स पहनने की अनुमति नहीं होगी. बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने तीन दिन पहले महिला कर्मचारियों को 'शालीन और पेशेवर' कपड़े पहनकर दफ्तर आने कहा था. बांग्लादेश बैंक के मानव संसाधन विभाग ने यह भी चेतावनी दी थी कि आदेश का पालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. लेकिन सोशल मीडिया में तूफान उठ खड़ा हुआ. लोग बांग्लादेश बैंक मैनेजमेंट को फेसबुक और एक्स पर 'शालीन और पेशेवर' की परिभाषा बताने लगे. बात इतनी बढ़ी कि फिलहाल बांग्लादेश बैंक ने आदेश वापस ले लिया है. कई लोगों ने इस आदेश की तुलना तालिबानी ऑर्डर की.  रद्द किए गए आदेश के तहत पुरुष कर्मचारियों को लंबी या आधी बाजू वाली औपचारिक शर्ट, औपचारिक पैंट और जूते पहनने का निर्देश दिया गया था, जबकि जींस और फैंसी पजामे पहनने की अनुमति नहीं थी.  महिलाओं के लिए जारी निर्देश में सभी महिलाओं को साड़ी, सलवार-कमीज, कोई अन्य सादा, शालीन, पेशेवर परिधान, साधारण हेडस्कार्फ़ अथवा हिजाब पहनने के लिए कहा गया था. इस आदेश के तहत उन्हें औपचारिक सैंडल या जूते पहनने की अनुमति दी. केंद्रीय बैंक के आदेश में महिलाओं को छोटी बाजू के कपड़े या लंबे ढीले पोशाक और लेगिंग पहनने से मना किया गया था.  निर्देश में कहा गया था कि, "सभी स्तरों के अधिकारियों और कर्मचारियों को देश के सामाजिक मानदंडों के अनुरूप शालीन और पेशेवर ढंग से कपड़े पहनने चाहिए." इस आदेश का विरोध करते हुए एक्स पर एक यूजर ने लिखा कि इस्लामिक एजेंडे के तहत बांग्लादेश बैंक ने महिला अधिकारियों को शॉर्ट स्लीव और लैंगिंग्स नहीं पहनने को कहा है. लेकिन बांग्लादेश बैंक के गवर्नर की बेटी अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी पहनती है. इसके अलावा सभी विभागों को ड्रेस कोड दिशानिर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए एक अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था.  कुछ लोगों ने इस आदेश की तुलना अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन के आदेशों से भी की जिसमें सभी महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर सिर से पांव तक कपड़े पहनने का आदेश दिया गया है. एक यूजर ने ट्वीट किया, "नए तालिबानी युग में एक सतर्क तानाशाह का शासन." बांग्लादेश महिला परिषद की अध्यक्ष फ़ौजिया मुस्लिम ने स्थानीय मीडिया को बताया कि बांग्लादेश में ऐसा निर्देश अभूतपूर्व है. उन्होंने कहा, "एक खास सांस्कृतिक माहौल को आकार दिया जा रहा है, और यह निर्देश उसी प्रयास को दर्शाता है." सोशल मीडिया पर मचे बवाल के बीच बांग्लादेश बैंक ने गुरुवार को यह निर्देश वापस ले लिया. प्रवक्ता आरिफ़ हुसैन खान ने कहा कि, "यह सर्कुलर पूरी तरह से एक सलाह है. हिजाब या बुर्का पहनने के संबंध में कोई बाध्यता नहीं लगाई गई है." वहीं इस विवाद के बीच बुधवार रात पारित एक अध्यादेश ने नागरिकों को और भी ज्यादा नाराज कर दिया है. इसमें सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव है. बांग्लादेश में बढ़ता तालिबानी असर गौरतलब है कि बांग्लादेश में हाल के कुछ महीनों में कट्टरपंथी तत्वों का उभार हुआ है. यहां तालिबानी विचारधारा का फुटप्रिंट भी बढ़ा है. रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में इस्लामिक विचारधारा का प्रभाव इतना बढ़ा है कि युवा अब तालिबान और TTP की ओर आकर्षित हो रहे हैं. बांग्लादेश से कम से कम दो पाकिस्तानी तालिबानी सदस्यों के पाकिस्तान होते हुए अफ़ग़ानिस्तान जाने के सबूत मिले हैं. उनमें से एक अप्रैल में वज़ीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना के साथ मुठभेड़ में मारा गया था. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मलेशिया ने जून में 36 बांग्लादेशी नागरिकों को आतंकवादी नेटवर्क से कथित संबंधों के आरोप में हिरासत में लिया था. 

वायरल वीडियो बना कारण? कोल्डप्ले कॉन्सर्ट के बाद HR हेड ने छोड़ा पद

वाशिंगटन पिछले दिनों अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी एस्ट्रोनॉमर (Astronomer) के सीईओ एंडी बायरन और कंपनी की एचआर हेड क्रिस्टिन कैबोट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वायरल वीडियो में वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में नजर आ रहे हैं. ये वीडियो बोस्टन के गिलेट स्टेडियम में कोल्डप्ले के हालिया कॉन्सर्ट के वक्त बनाया गया था. वीडियो वायरल होने के बाद पहले एंडी बायरन ने इस्तीफा दिया और अब क्रिस्टिन कैबोट ने भी टेक फर्म छोड़ दिया है.  कैबोट और एंडी बायरन उस वक्त शॉक हो गए थे, जब बोस्टन के जिलेट स्टेडियम में 55 हजार लोगों के सामने एक बड़ी स्क्रीन पर उनके मुस्कुराते हुए चेहरे दिखाई दिए थे. स्क्रीन पर खुद की तस्वीरें देखने के बाद बायरन और सुश्री कैबोट खचाखच भरे स्टेडियम में शर्मिंदगी महसूस करने के बाद छिपने के लिए दौड़ते देखे गए थे. बता दें कि दोनों के पास अपना परिवार है. विदेशी मीडिया के मुताबिक, एस्ट्रोनॉमर के एक कर्मचारी ने बताया, "क्रिस्टिन कैबोट अब एस्ट्रोनॉमर में नहीं हैं, उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है." 'आचरण और जवाबदेही…' यह खबर बायरन द्वारा 'कंपनी के मानकों पर खरा न उतरने' के बाद अपने पद से इस्तीफ़ा देने के कुछ ही दिनों बाद आई है. कंपनी ने एक बयान में कहा, "जैसा कि पहले कहा गया है, एस्ट्रोनॉमर उन मूल्यों और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्ध है, जो हमारी फाउंडिंग के वक्त से ही हमें आगे का रास्ता दिखाते रहे हैं. हमारे ऑफिसर्स से आचरण और जवाबदेही दोनों में मानक स्थापित करने की अपेक्षा की जाती है, और हाल ही में, उस मानक को पूरा नहीं किया गया." कंपनी ने कहा कि एंडी बायरन ने अपना इस्तीफ़ा दे दिया है और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने उसे स्वीकार कर लिया है. बोर्ड हमारे अगले मुख्य कार्यकारी अधिकारी की तलाश शुरू करेगा क्योंकि को-फाउंडर और चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर पीट डेजॉय अंतरिम सीईओ के रूप में काम करना जारी रखेंगे. ऐसे नजर आया कपल… दरअसल, बुधवार रात कोल्डप्ले के कॉन्सर्ट के दौरान जब किस कैम ने दर्शकों में मौजूद कपल्स पर फोकस किया तो कैमरा एंडी बायरन और क्रिस्टिन कैबोट पर रुक गया. वीडियो में दोनों एक-दूसरे की बाहों में नजर आए. लेकिन जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि वह स्क्रीन पर दिखाए जा रहे हैं, तो बायरन ने जल्दी से खुद को छिपाने की कोशिश की और कैबोट ने अपने चेहरे को हाथों से ढक लिया. इसके बाद मौके की नजाकत को समझते हुए सिंगर क्रिस मार्टिन ने कहा, 'ओह… या तो ये दोनों अफेयर में हैं या फिर बहुत शर्मीले हैं.'

श्रद्धा का सैलाब: बाबा बर्फानी के लिए एक और जत्था रवाना

जम्मू,  दक्षिण कश्मीर हिमालय स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में बाबा बफार्नी के दर्शन करने के लिये 2,896 तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था शुक्रवार सुबह 'बम बम भोले' का जयघोष करते हुए यात्री निवास भगवती नगर आधार शिविर से रवाना हुआ। सरकारी सूत्रों ने बताया “ आज सुबह 2,896 तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जम्मू आधार शिविर से कश्मीर स्थित श्री अमरनाथ यात्रा गुफा मंदिर के लिए रवाना हुआ।” उन्होंने बताया कि 790 तीर्थयात्री पहलगाम और 2,106 तीर्थयात्री बालटाल के लिए 117 वाहनों के बेड़े में रवाना हुए, जिनमें हल्के मोटर वाहन और भारी वाहन शामिल हैं। यह वार्षिक तीर्थयात्रा दो जुलाई को दोनों मार्गों से शुरू हुई थी और 09 अगस्त को रक्षाबंधन पर समाप्त होगी। अब तक तीन लाख से अधिक तीर्थयात्री पवित्र हिमलिंग के दर्शन कर चुके हैं।  

UK के बाजार में बढ़ेगी भारतीय उत्पादों की मांग, FTA से भारत को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच द्विपक्षीय व्यापर को लेकर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर साइन हो चुकी है. इस समझौते के बाद UK का बड़ा बाजार भारतीय प्रोडक्ट्स के लिए खुल जाएंगे, जबकि ब्रिटिश प्रोडक्ट्स की भारत में मौजूदगी और बिक्री दोनों बढ़ जाएगी. लेकिन अब अनुमान ये लगाया जा रहा है कि इस डील से किस देश को ज्यादा फायदा होने वाला है, जबकि अभी तो केवल दस्तावेजों पर ही साइन हुए हैं. दरअसल, UK के बीच यह समझौता दोनों देशों के लिए 'Win-Win' वाला सिचुएशन है. लेकिन भारत को दीर्घकालिक लाभ अधिक हो सकता है, क्योंकि इसके एक्सपोर्ट सेक्टर में खासकर MSME और कृषि को वैश्विक बाजार में मजबूती मिलेगी. साथ ही भारतीय प्रोफेशनल के लिए ब्रिटेन में अवसर बढ़ेंगे. अगर यूके की बात करें तो उसे तत्काल आर्थिक राहत और भारतीय बाजार में पहुंच का फायदा होने वाला है. दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 120 अरब डॉलर तक बढ़ाना है, जो इस समझौते का पहला टारगेट है. ब्रिटेन पहले से ही भारत में 36 अरब डॉलर का निवेशक है. इस समझौते से मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में और निवेश की संभावना है.  दोनों देशों के बीच व्यापार टारगेट बता दें, दोनों देशों के बीच साल 2023-24 में व्यापार 4.74 लाख करोड़ रुपये (लगभग 60 अरब डॉलर) का था, और इस समझौते से भारत का निर्यात 60% तक बढ़ सकता है. अनुमान है कि अगले 5 साल में भारतीय गारमेंट्स, चमड़ा, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद और ऑटोमोबाइल पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में ब्रिटेन को निर्यात में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.  ब्रिटेन में खूब बिकेंगे ये प्रोडक्ट्स इस समझौते से 95% से अधिक कृषि और इससे जुड़े खाद्य प्रोडक्ट्स पर शून्य शुल्क लगेगा, जिससे कृषि निर्यात बढ़ेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी. अगले तीन वर्षों में कृषि निर्यात में 20% से अधिक की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो 2030 तक भारत के 100 अरब डालर के कृषि-निर्यात के लक्ष्य को पूरा करने में योगदान देगा. ब्रिटेन के 90% उत्पादों पर भारत में शुल्क हटाया जाएगा या कम किया जाएगा. ब्रिटेन में भारतीय मसाले, फल-सब्जियां, और हस्तशिल्प सस्ते और अधिक उपलब्ध होंगे. स्कॉच व्हिस्की (150% से 75%, फिर 10 वर्षों में 40%), कारें (100% से 10%), कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, बिस्किट, सैल्मन मछली, और मेडिकल डिवाइसेज जैसे उत्पाद भारत में सस्ते होंगे.   किसान के लिए बड़े मौके इससे भारतीय किसानों के लिए प्रीमियम ब्रिटिश बाजार के दरवाजे खुलेंगे, जो जर्मनी, नीदरलैंड और अन्य यूरोपीय संघ के देशों को मिलने वाले फायदे के बराबर या उससे भी अधिक होगा. हल्दी, काली मिर्च, इलायची, अचार और दालों को भी शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी. जबकि ब्रिटेन का भारत को निर्यात (व्हिस्की, कारें, मेडिकल उपकरण) भी 60% तक बढ़ सकता है. लक्ष्य ये भी है कि दोनों देशों के बीच व्यापार प्रक्रियाओं को सरल और डिजिटल बनाए, जिससे व्यापार लागत कम होगी. इस डील एक हिस्सा ये भी है कि भारत में कपड़ा, चमड़ा, और रत्न-आभूषण जैसे उद्योगों नौकरिकों के अवसर बढ़ेंगे. MSME सेक्टर विशेष रूप से क्षेत्रीय हस्तशिल्प जैसे कोल्हापुरी चप्पल और बनारसी साड़ी, को ब्रिटेन के बाजार में बढ़त मिलेगी. ब्रिटेन में भी हजारों नौकरियां पैदा होंगी, खासकर व्हिस्की, ऑटोमोबाइल, और चिकित्सा उपकरण सेक्टर में.  भारत के 99% निर्यात पर ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिसपर फिलहाल 4-16% शुल्क लिए जाते हैं. इससे वस्त्र, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा. विशेष रूप से कृषि और समुद्री उत्पादों (जैसे झींगा, टूना, मसाले, हल्दी, कटहल, बाजरा) पर 95% से अधिक शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे अगले 5 वर्षों में कृषि निर्यात में 20% की वृद्धि की उम्मीद है.  मेक इन इंडिया की ताकत उम्मीद की जा रही है कि 5 साल के बाद यह समझौता भारत में 'मेक इन इंडिया' और महिला उद्यमिता को मजबूती देगा, क्योंकि समझौते में लैंगिक समानता और श्रम अधिकारों पर जोर दिया गया है. डील के तहत भारतीय प्रोफेशनल (जैसे आईटी, हेल्थ, योग प्रशिक्षक) को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा और सामाजिक सुरक्षा अंशदान में तीन साल की छूट से लाभ होगा. जबकि 5 साल के बाद करीब 100 अतिरिक्त वार्षिक वीजा और बढ़ी हुई श्रम गतिशीलता से भारतीय युवाओं को ब्रिटेन में अधिक अवसर मिलेंगे. 60,000 से अधिक आईटी पेशेवरों को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा के माध्यम से काम करने में आसानी होगी. आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का विस्तार यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा. साल 2030 तक यानी 5 साल के बाद भारत और ब्रिटेन 'UK-India Vision 2035' के तहत रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, जलवायु, और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे. हालांकि फिलहाल ये यह कहना कि किसे ज्यादा फायदा होगा, ये जटिल है, क्योंकि दोनों देशों को अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे. 

कंबोडिया vs थाईलैंड टकराव से बढ़ा संकट, पहले ही यूक्रेन-PAK-ईरान झेल चुके तबाही

बैंकॉक/नोम पेन्ह  थाईलैंड और कंबोडिया के बीच युद्ध भयानक होता जा रहा है। थाईलैंड की सेना ने अब कंबोडिया के खिलाफ 'ऑपरेशन युथा बोडिन' लॉन्च करने का ऐलान किया है। थाई सेना ने कहा है कि वो 'पवित्र भूमि के लिए युद्ध' शुरू कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक थाईलैंड की सेना ने ऑपरेशन लॉन्च करने की घोषणा करते हुए कहा है कि उसका मकसद 'थाई भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को कुचलने' की है। कंबोडिया की सेना पर जबरदस्त हमला करते हुए थाईलैंड की सेना ने 'युथा बोडिन' नाम से जबरदस्त जमीनी और हवाई हमला शुरू कर दिया है। जिसके बाद सीमा पर जारी हिंसक झड़पों के दूसरे दिन थाईलैंड की सरकार ने 4 सीमावर्ती प्रांतों से एक लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अब तक 15 लोगों की मौत की रिपोर्ट दर्ज दी गई है, जिनमें 14 आम नागरिक हैं। आपको बता दें कि गुरुवार को सुबह सुबह दोनों देशों की सेनाओं के बीच एक विवादित इलाके में गोलीबारी शुरू होने के साथ युद्ध शुरू हो गई थी। जल्द ही यह झड़प भारी हथियारों और रॉकेट हमलों में तब्दील हो गई। थाई सेना ने बयान में कहा है कि कंबोडियाई सेना ने BM-21 ग्रैड रॉकेट सिस्टम और फील्ड आर्टिलरी का इस्तेमाल किया है। इसके अलावा थाईलैंड की सेना ने कहा है कि 'स्थिति के मुताबिक उचित कार्रवाई की जा रही है।' जबकि कंबोडिया ने दावा किया कि थाई सैनिकों ने बिना उकसावे के उनके इलाके में घुसपैठ की, जिसके जवाब में उन्होंने 'आत्मरक्षा के अधिकार' के तहत कार्रवाई की है। थाईलैंड का 'युथा बोडिन' ऑपरेशन कितना खतरनाक? आपको बता दें कि थाईलैंड की भाषा में 'युथा बोडिन' का मतलब "भूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च युद्ध" होता है। 'युथा' युद्ध का प्रतीक है, जबकि 'बोडिन' पवित्र भूमि को दर्शाता है। थाईलैंड के सैन्य अधिकारियों के मुताबिक यह नाम थाईलैंड की संप्रभुता का उल्लंघन करने की हिम्मत करने वाले किसी भी विरोधी के खिलाफ एक निर्णायक और वैध रणनीतिक प्रतिक्रिया को दर्शाता है। इसके अलावा थाईलैंड की सेना ने अपने अभियान में कहा है कि "थाई भूमि पर अतिक्रमण करने वाले सभी लोगों को कुचल दो, जमीन के लिए, लोगों के लिए, थाई सम्मान के लिए।" थाईलैंड की सेना ने शुक्रवार को उबोन रत्चथानी और सुरिन प्रांतों में झड़पों की सूचना दी है। इसने कहा है कि कंबोडिया ने तोपखाने और रूस के बने रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल किया है। थाई सेना ने एक बयान में कहा है कि "कंबोडियाई बलों ने भारी हथियारों, फील्ड आर्टिलरी और बीएम-21 रॉकेट सिस्टम का उपयोग करके लगातार बमबारी की है।" रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच की ये झड़प करीब 209 किलोमीटर के दायरे में हो रही है। जिसमें कम से कम 6 जगहों पर भारी गोलीबारी हो रही है। दोनों देशों के बीच 13 वर्षों में सबसे भीषण लड़ाई तब शुरू हुई, जब थाईलैंड ने बुधवार को नोम पेन्ह स्थित अपने राजदूत को वापस बुला लिया और कंबोडिया के दूत को निष्कासित कर दिया। यह घटना उस घटना के बाद हुई जिसमें एक अन्य थाई सैनिक बारूदी सुरंग हमले में घायल हो गया। बैंकॉक का आरोप है कि कंबोडिया ने ये बारूदी सुरंग बिछाया था। थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथाम वेचायाचाई ने कहा है कि "हम शांति से समाधान चाहते हैं, लेकिन यह एक जानबूझकर उकसावे वाली कार्रवाई है। हमें अपनी सीमाओं की रक्षा करनी पड़ी।" कंबोडिया-थाईलैंड टकराव बना साल का छठा संघर्ष, यूक्रेन से PAK तक दुनिया में अशांति 2025 दुनिया के लिए युद्धों का साल बन गया है. कंबोडिया-थाईलैंड युद्ध इस साल का पांचवां बड़ा संघर्ष है, जो प्रीह विहार और ता मुएन थोम मंदिरों के पास सीमा विवाद से शुरू हुआ. इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान युद्ध, यूक्रेन-रूस, इज़रायल-हमास, सूडान गृहयुद्ध और ईरान-पाकिस्तान तनाव ने दुनिया को हिलाकर रख दिया, इन युद्धों ने लाखों लोगों की जान ली, इमारतों को मलबे में बदला और हथियारों की बिक्री को आसमान पर पहुंचा दिया. आइए, इन पांच युद्धों की तबाही, मौतें, इमारतों का नुकसान और हथियारों की बिक्री को समझते हैं. 1. भारत-पाकिस्तान युद्ध (2025) क्या हुआ? 7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. ये कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (26 नागरिक मारे गए) के जवाब में थी. पाकिस्तान ने इसे युद्ध की कार्रवाई बताकर जवाबी हमले शुरू किए, जिसमें ड्रोन, मिसाइल और फाइटर जेट्स का इस्तेमाल हुआ. 10 मई को युद्धविराम हुआ.  तबाही और मौतें भारत मौतें: 16 नागरिक (पुंछ में 5 बच्चे शामिल).    नुकसान: जम्मू, श्रीनगर, पुंछ और राजौरी में गोलाबारी से घर, एक हिंदू मंदिर और बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त.  विस्थापन: हजारों लोग जम्मू-कश्मीर और पंजाब के सीमावर्ती इलाकों से भागे. पाकिस्तान मौतें: 40 नागरिक (7 महिलाएं, 15 बच्चे) और 11 सैनिक मारे गए. 100+ आतंकी मारे गए. नुकसान: मुरीदके, बहावलपुर, और 11 एयरबेस (सूरतगढ़, सिरसा, आदि) तबाह. विस्थापन: लाहौर और सियालकोट में लोग सुरक्षित ठिकानों पर गए. हथियारों की बिक्री भारत: राफेल जेट्स, ब्रह्मोस मिसाइल, S-400 डिफेंस सिस्टम और इज़रायल-भारत ड्रोन का इस्तेमाल.   पाकिस्तान: JF-17 जेट्स (चीन), शाहेद-136 ड्रोन (ईरान) और 122 मिमी रॉकेट।   विश्लेषण: इस युद्ध ने $5-10 बिलियन की हथियार खरीद को बढ़ावा दिया, खासकर ड्रोन और मिसाइल सिस्टम की मांग बढ़ी.   2. कंबोडिया-थाईलैंड युद्ध (2025) क्या हुआ? 24 जुलाई 2025 को थाईलैंड ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर F-16 जेट्स से हवाई हमले किए, क्योंकि कंबोडिया ने ड्रोन और रॉकेट से हमला किया था. ये विवाद प्रीह विहार और ता मुएन थोम मंदिरों के सीमा क्षेत्र को लेकर था.   तबाही और मौतें थाईलैंड मौतें: 14 लोग मारे गए (13 नागरिक, 1 सैनिक), 46 घायल.   नुकसान: सिसाकेट और सुरिन में गैस स्टेशन, अस्पताल और प्रीह विहार मंदिर को नुकसान.   विस्थापन: 40,000-1,00,000 लोग विस्थापित. कंबोडिया मौतें: 20 लोग मारे गए, दावे की पुष्टि नहीं.   नुकसान: ओड्डार मीनचे में सैन्य ठिकाने और पगोडा रोड नष्ट. हथियारों की बिक्री थाईलैंड: F-16 (अमेरिका) और SAAB ग्रिपेन.   कंबोडिया: BM-21 रॉकेट (चीन/रूस).   विश्लेषण: ड्रोन और रॉकेट सिस्टम की मांग बढ़ी. 3. यूक्रेन-रूस युद्ध (2022-2025) क्या हुआ? रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला शुरू किया, जो 2025 … Read more

मालदीव के रक्षा मंत्रालय की बिल्डिंग पर पीएम मोदी का इतना बड़ा बैनर: मुइज्जू ने मोदी को ऐसे कहा शुक्रिया

नई दिल्ली मालदीव की राजधानी माले में हाल ही में बना रक्षा मंत्रालय भवन आज सुर्खियों में है. इस भवन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. मालदीव में रक्षा मंत्रालय भवन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का होना भारत-मालदीव संबंधों की मजबूती और आपसी सम्मान का प्रतीक है. 25 जुलाई 2025 को पीएम मोदी की दो दिवसीय यात्रा के दौरान, जब वे राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के निमंत्रण पर मालदीव पहुंचे, इस भवन पर उनकी तस्वीर लगाई गई, जो भारत की बढ़ती क्षेत्रीय प्रभावशक्ति और मालदीव के साथ रक्षा सहयोग को दर्शाती है. यह कदम हाल के तनावों के बाद संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है, खासकर जब मालदीव ने भारत को First Responder मानता है. कुछ लोग इसे भारत के प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश या चीन के बढ़ते हस्तक्षेप के जवाब के रूप में भी देखते हैं.   क्या है खास? इस बिल्डिंग में पर्यावरण का खास ख्याल रखा गया है. इसमें सौर पैनल और बादल संग्रहण प्रणाली लगाई गई है, जो इसे पर्यावरण-अनुकूल बनाती है. भवन में कमांड सेंटर, रक्षा संचालन कक्ष और प्रशिक्षण सुविधाएं हैं, जो मालदीव की सेना को आधुनिक तकनीक से लैस करेंगे. इसकी तीन मंजिलें और ग्लास फेसेड डिज़ाइन इसे भव्य बनाता है. क्यों बना यह भवन? मालदीव ने हाल के सालों में अपनी रक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया है, भारत-चीन प्रभाव के बीच. 2023 में मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने रक्षा बजट को दोगुना कर $50 मिलियन (लगभग 420 करोड़ रुपये) किया था. यह भवन उसी रणनीति का हिस्सा है, जो देश की समुद्री सीमाओं और पर्यटन को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है. भारत के साथ रिश्ता भारत ने इस प्रोजेक्ट में तकनीकी सहायता दी है. 2024 में भारत-मालदीव रक्षा समझौते के तहत भारतीय विशेषज्ञों ने भवन की सुरक्षा और डिज़ाइन में मदद की. मालदीव के रक्षा मंत्री ने कहा कि यह भवन हमारे देश की संप्रभुता को मजबूत करेगा. हालांकि, कुछ लोग इसे चीन के बढ़ते प्रभाव के जवाब के तौर पर देख रहे हैं.