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शनि देव का 2026 प्लान: कब रहेंगे सीधी चाल में, कब वक्री—किन राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

शनिदेव नए साल 2026 में 7 महीने मार्गी रहेंगे, अभी भी शनि मीन राशि में मार्गी है, इसके बाद शनिदेव 5 साल के लिए वक्री हो जाएंगे। आइए जानें इससे किन राशियों के लिए लाभ के योग बनेंगे। 28 नवंबर 2025 से ही शनिदेव मीन राशि में मार्गी में गोचर कर रहे हैं। शनि की मार्गी से जहां कईराशियों को लाभ होगा, वहीं, कई राशि के लोगों के लिए दिक्कतें हो सकती हैं। शनिदेव को न्याय और कर्म का देने के देवता कहा जाता है। ऐसाकहा जाता है कि शनिदेव अगर आपकी कुंडली में अच्छे हैं, तो आपको बहुत अच्छे फल देते हैं, लेकिन खराब होने पर कई जगह में परेशानी पैदा करते हैं। आइए जानें शनि का मार्गी होना किन राशियों को लाभ कराएंगे- वृषभ राशि वालों के शनि 2026 में 11वें राशि में गोचर कर रहे हैं,इस तरह आपकी लाइफ में कई तरह के पुराने काम पूरे होंगे, आपके लिए विदेश जाने के योग भी बनेंगे। इस राशि के लोगों को नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है,आपको लिए नौकरी में नए मौके भी मिलेंगे। कन्या राशि वालों के 7वें भाव में शनि गोचर कर रहे हैं। शनि आपका नाम कराएंगे और नौकरी या किसी क्षेत्र में आपको लाभ करा सकते हैं। आज इस राशि के लोगों को दोस्तों से सहयोग मिलेगा। इस समय आपको लोन मिल सकता है। बिजनेस में आपको नईडील मिल सकती है। इनकम में आपके उतारचढ़ाव आएंगे। दोस्तों से आर्थिक मदद मिल सकती है। तुला राशि राशि वालो को छठा भाव में शनि का गोचर हो रहा है। इस समय आपको संतान में किसी बात को लेकर चिंता हो सकती है। जिम्मेदारी में वृद्धि, ऑफिस में लगन बढ़ेगी। बिजनेस में आपके पुराने लोगों से बैर भाव बढ़ेगा। इस समय आपके खर्चे में बढ़ोत्तरी हो सकती है। मकर राशि वालों के तीसरा भाव में शनि का गोचर हो रहा है। आपको इस समय आत्मविश्वास मिल सकता है, आपके लिए बड़ों का आशीर्वाद और तारीफ मिल सकती है। इस समय सेविंग्स भी आपकी खूब होगी। कुंभ राशि वालों को दूसरा भाव में शनि का गोचर हो रहा है। आपका इस समय रुका हुआ पैसा वापस मिलेगा। आपको बातचीत में वाणी में परेशानी हो सकती है। रिलेशनशिप में भी दिक्कतें आपको हो सकती हैं।

2026 में इन राशियों पर रहेगी खुशियों की बरसात: केतु का नक्षत्र परिवर्तन बना करेगा असर

वैदिक पंचांग के अनुसार, नया वर्ष नई उम्मीद और नए परिणाम लेकर आता है. साल 2026 भी कुछ ऐसे ही शुभ परिणामों के साथ प्रवेश करेगा. दरअसल, साल 2026 की शुरुआत होते ही पापी ग्रह केतु का नक्षत्र परिवर्तन होने वाला है. यह गोचर 25 जनवरी 2026, रविवार को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम पद में होगा. पंचांग के मुताबिक, इस पद में केतु 29 मार्च 2026, रविवार तक विराजमान रहेगा. इसके बाद यह मघा नक्षत्र के चतुर्थ पद में चला जाएगा.  ज्योतिष शास्त्र में केतु को पापी ग्रह माना जाता है, जो हमेशा उल्टी चाल चलता है. केतु की चाल को बहुत ही नकारात्मक माना जाता है. तो आइए जानते हैं कि साल 2026 के जनवरी मास में होने जा रहे केतु के नक्षत्र परिवर्तन से किन राशियों के हाथ लगेगी तरक्की.  वृषभ केतु का नक्षत्र परिवर्तन वृषभ राशि वालों के लिए सोचने के तरीके में बदलाव ला सकता है. पुराने तनाव धीरे-धीरे कम होंगे. मन में सकरात्मक फैसले लेने की क्षमता बढ़ेगी. नौकरी या कामकाज में जो अड़चनें चल रही थीं, वे हटने लगेंगी. परिवार के साथ रिश्ते भी पहले से बेहतर होंगे. आत्मविश्वास में बढ़ोतरी महसूस होगी. सिंह सिंह राशि के जातकों को इस बदलाव से आर्थिक और मानसिक राहत मिल सकती है. जो लोग लंबे समय से किसी योजना पर काम कर रहे थे, उन्हें अच्छे नतीजे मिलने की संभावना है. खर्चो पर नियंत्रण बनेगा. अचानक धन लाभ के योग भी बन सकते हैं. सेहत को लेकर भी पहले से बेहतर महसूस करेंगे. वृश्चिक वृश्चिक राशि वालों के लिए केतु का नक्षत्र परिवर्तन भाग्य का साथ दिला सकता है. करियर से जुड़े फैसले सही दिशा दिलाएंगे. नए अवसर मिल सकते हैं. पढ़ाई या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों को भी फायदा होगा. इस समय गुरुजनों और बड़े लोगों का सहयोग खास रूप से मिलेगा.

खाना बनाते समय महिलाओं की ये 5 आदतें बन सकती हैं घर की बरकत की दुश्मन

आज से कई सौ सालों पहले आचार्य चाणक्य ने जो बातें कहीं थी, वो आज के जीवन में भी काफी व्यवहारिक हैं। आज भी कई लोग जीवन में सही रास्ते की तलाश में आचार्य चाणक्य की नीतियों का सहारा लेते हैं। इनमें केवल राजनीति, अर्थशास्त्र जैसे विषयों का ही ज्ञान नहीं मिलता बल्कि गृहस्थ जीवन से जुड़ी कई बातें भी सीखने को मिलती हैं। उदाहरण के लिए आचार्य चाणक्य का मानना था कि महिलाओं को खाना बनाते समय कुछ बातें विशेष रूप से ध्यान रखनी चाहिए। ये गलतियां यदि वो दोहराती हैं, तो इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है और घर में एक नकारात्मकता सी बनी रहती है। उन्होंने इन 5 गलतियों को किसी भी हाल में ना करने की सलाह दी है, आइए जानते हैं। बिना नहाए कभी नहीं बनाना चाहिए खाना आचार्य चाणक्य सलाह देते हैं कि कभी भी महिलाओं को बिना नहाए खाना नहीं बनाना चाहिए। बिना नहाए, गंदे कपड़ों में खाना बनाना अशुद्ध माना जाता है। ऐसा खाना ना सिर्फ सेहत पर बुरा असर डाल सकता है, बल्कि घर में मासिक अशांति का कारण भी बन सकता है। इससे घर में एक नकारात्मक ऊर्जा फैलने लगती है, जिससे घर की बरकत कम हो जाती है। नेगेटिव इमोशन के साथ ना पकाएं भोजन आचार्य चाणक्य कहते हैं कि खाने को आप किस सोच के साथ पका रहे हैं, ये काफी मायने रखता है। यही आप दुखी मन से, उदास हो कर या गुस्से में खाना पकाती हैं, तो ये नकारात्मक सोच भोजन भी ग्रहण कर लेता है। ऐसे में परिवार के अन्य सदस्य जो इसे ग्रहण करते हैं, उनके मन पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। आचार्य सलाह देते हैं कि खाना हमेशा शांत मन से और खुशी के साथ पकाना चाहिए। बासी और खराब सामग्री का इस्तेमाल करना आचार्य के मुताबिक खाना बनाते हुए हमेशा ताजी और शुद्ध सामग्री को ही इस्तेमाल में लाना चाहिए। अगर आप बासी सामग्री या खराब तेल-मसाले इस्तेमाल में लाती हैं, तो ये सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आचार्य कहते हैं कि भोजन जितना ताजा और शुद्ध होता है, उतना ही मन और शरीर को शक्ति देता है। खाना बनाते हुए इधर-उधर की बातों में उलझे रहना कई महिलाएं खाना तो बनाती हैं, लेकिन उनका ध्यान बातों या फिर दूसरे कामों में लगा रहता है। आचार्य कहते हैं कि इस तरह कभी भी खाना नहीं बनाना चाहिए। जब भी खाना बनाएं, सिर्फ उसपर ही ध्यान रखें। ऐसा करने से भोजन सिर्फ स्वदिष्ट ही नहीं बनता, बल्कि आपके मन का प्रभाव भी उसपर पड़ता है। भगवान को याद ना करना अपनी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि खाना बनाते हुए आपके मन में हमेशा भगवान का स्मरण या आभार की भावना होनी चाहिए। ऐसा करने से खाने में एक सकारात्मक ऊर्जा आती है, जिससे घर में खुशहाली और बरकत बनी रहती है।

पति-पत्नी के सोने की सही दिशा: वास्तु के अनुसार कौन किस साइड सोए?

हमारे सोने का तरीका और बिस्तर पर हमारी स्थिति न केवल हमारी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते की ऊर्जा और सामंजस्य को भी निर्धारित करती है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष विज्ञान में इस विषय को लेकर स्पष्ट नियम बताए गए हैं कि पति को पत्नी की किस तरफ सोना चाहिए, वरना रिश्ते में अनबन और दूरियां बढ़ सकती हैं। रिश्ते में प्यार बनाए रखने के लिए आइए जानते हैं पति को पत्नी की किस तरफ सोना चाहिए। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार सही दिशा वास्तु और ज्योतिष में, पति-पत्नी के रिश्ते में संतुलन बनाए रखने के लिए पुरुषों को हमेशा अधिक भारी या रक्षक की भूमिका दी जाती है, जबकि महिलाओं को पोषणकर्ता या ग्रहणकर्ता की भूमिका में देखा जाता है। वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पति को हमेशा पत्नी के दाई ओर सोना चाहिए। दाईं ओर सोने का आध्यात्मिक और ऊर्जा संबंधी कारण यह नियम केवल परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे ऊर्जा और शारीरिक संतुलन से जुड़े गहरे कारण हैं। भारतीय दर्शन में, शिव को शक्ति की दाईं ओर स्थान दिया गया है। पति को दाईं ओर सोने से रिश्ते में पुरुष ऊर्जा का संतुलन और नियंत्रण बना रहता है, जो घर के मुखिया के लिए आवश्यक है। यह भी माना जाता है कि पुरुष का दाईं ओर सोना पत्नी के हृदय को पति की भुजाओं या शरीर के नज़दीक रखता है, जिससे भावनात्मक जुड़ाव और सुरक्षा की भावना मजबूत होती है। वास्तु के अनुसार, पति के दाईं ओर सोने से दोनों की ऊर्जाएँ संतुलित रहती हैं, जिससे अनावश्यक बहस, अनबन और वैचारिक मतभेद कम होते हैं। बाईं ओर सोने के परिणाम यदि पति अपनी पत्नी की बाईं ओर सोता है, तो रिश्ते में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। वास्तु के अनुसार, यह स्थिति रिश्ते में असंतुलन पैदा करती है। पुरुष ऊर्जा दबने लगती है। अनावश्यक खर्च और विवाद: कई ज्योतिषीय मतों के अनुसार, यह स्थिति आर्थिक अस्थिरता और पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर बड़े विवाद पैदा कर सकती है, जिससे दूरियां बढ़ने लगती हैं। यदि पत्नी हर बार दाईं ओर सोती है, तो रिश्ते में उसकी ऊर्जा का प्रभुत्व बढ़ जाता है, जिससे पति को निर्णय लेने में कठिनाई हो सकती है। रिश्ते में बराबर का सामंजस्य बनाए रखने के लिए यह संतुलन आवश्यक है। सोने की दिशा का वास्तु नियम सोने के दौरान यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पति-पत्नी का सिर किस दिशा में हो। पति-पत्नी को हमेशा दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोना चाहिए। इससे प्रेम, स्थिरता और स्वास्थ्य बना रहता है। उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोने से बचें, क्योंकि यह स्वास्थ्य और रिश्तों में चुम्बकीय अशांति पैदा करता है।

कल है पौष माह की मासिक शिवरात्रि, नोट करें पूजा का सही समय, विधि और चमत्कारी मंत्र

मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है। वर्तमान में पौष माह चल रहा है और पौष मास की मासिक शिवरात्रि 18 दिसंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन रात्रि में भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और शिवजी की कृपा प्राप्त होती है। हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पौष माह की मासिक शिवरात्रि भी विशेष फलदायी मानी जाती है। पौष मासिक शिवरात्रि 2024: तिथि और शुभ मुहूर्त पौष, कृष्ण चतुर्दशी प्रारम्भ – 02:32 ए एम, दिसम्बर 18 पौष, कृष्ण चतुर्दशी समाप्त – 04:59 ए एम, दिसम्बर 19 पूजा का शुभ मुहूर्त- 11:51 पी एम से 12:45 ए एम, दिसम्बर 19 पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में दीपक जलाएं। शिवलिंग का गंगाजल, दूध आदि से अभिषेक करें। भगवान शिव के साथ माता पार्वती की भी विधिवत पूजा करें। भगवान गणेश की पूजा अवश्य करें, क्योंकि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणपति पूजन आवश्यक माना गया है। पूरे मन से भोलेनाथ का ध्यान करें। भगवान की आरती अवश्य करें। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। अंत में भगवान शिव को भोग अर्पित करें। पूजा सामग्री की लिस्ट- फूल, पंच फल, पंच मेवा, रत्न, सोना-चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध घी, शहद, गंगाजल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध, रोली, मौली, जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, चंदन, शिव और माता पार्वती के श्रृंगार की सामग्री। मासिक शिवरात्रि के उपाय: मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूरे दिन व्रत रखें। प्रदोष काल या रात्रि में भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें तथा ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। शिवचालीसा या शिवपुराण का पाठ करें और अंत में भोलेनाथ की आरती करें। मान्यता है कि इन उपायों को करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मंत्र: ॐ नमः शिवाय।- इस मंत्र का मासिक शिवरात्रि के दिन 108 बार जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे मन की शांति मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

आज का राशिफल 17 दिसंबर: किसे मिलेगा भाग्य का साथ और किसे बरतनी होगी सावधानी

मेष 17 दिसंबर के दिन लाइफ में बैलेंस व खुद की देखभाल को प्राथमिकता दें। नए अवसरों के लिए खुले रहें। नया प्रोजेक्ट या कोई जिम्मेदारी आपके सामने आ सकती है। अपना बजट प्लान बनाएं। ऐसी एक्टिविटी के लिए समय निकालें, जो आपको खुशी दे सके। वृषभ 17 दिसंबर का दिन महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ रहा है। आज लव, करियर और धन के मामले में कई मौके मिल सकते हैं। इन बदलावों को पॉजिटिव नजरिए के साथ अपनाएं। अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। मिथुन 17 दिसंबर के दिन हेल्थ पर नजर बनाए रखें। धन के मामले में समय-समय पर जांच परख और जरूरी बदलाव भी करें। किसी भी प्रॉब्लम पर तुरंत ध्यान दें। डिसिप्लिन बनाए रखें। आपका रिश्ता मजबूत होगा। कर्क 17 दिसंबर के दिन फालतू के खर्चे से बचें। अपनी फिलिंग्स को खुलकर और ईमानदारी के साथ बताएं। अपने प्रोफेशनल गोल्स को ध्यान में रखकर आगे बढ़ें। अपने रास्ते में आने वाले अवसरों का लाभ उठाएं। सिंह 17 दिसंबर के दिन अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलें। रिश्ते में विश्वास होना जरूरी है। अपने प्रेम जीवन में इन बदलावों को अपनाएं। हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखना जरूरी है। अप्रत्याशित खर्च हो सकते हैं। कन्या 17 दिसंबर के दिन काम पूरा करने के लिए नए-नए तरीकों को अपनाएं। सैलरी में वृद्धि के अवसर हैं। हेल्थ पर नजर बनाए रखें। नए अनुभवों के लिए तैयार रहें। काम या पर्सनल लाइफ से तनाव बढ़ सकता है। तुला 17 दिसंबर के दिन पहले से प्लानिंग करना बुद्धिमानी होगी। सहकर्मियों के साथ मिलकर काम करना फायदेमंद रहेगा। सिंगल तुला राशि वाले खुद को किसी नए व्यक्ति की ओर अट्रैक्ट होते हुए पा सकते हैं। वृश्चिक 17 दिसंबर के दिन आपको अपनी लव लाइफ में ऐसे मौके मिलेंगे, जिससे आपका कनेक्शन इमोशनल तौर पर मजबूत होगा। फालतू खरीदारी से बचें और योजना पर ध्यान दें। जरूरी टास्क को प्राथमिकता दें। धनु 17 दिसंबर के दिन खुद की देखभाल करें। एक्सरसाइज, आराम और हेल्दी डाइट आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। दिन इमोशनल साबित हो सकता है। आपको कई महत्वपूर्ण डिसीजन लेने पड़ सकते हैं। मकर 17 दिसंबर के दिन आपको प्रोडक्टिव रिजल्ट्स मिलेंगे साथ ही सीनियर्स से संभावित मान्यता मिलेगी। स्ट्रेस को कम करने के लिए मेडिटेशन करें। पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस बनाएं। कुंभ 17 दिसंबर के दिन अपना फोकस बनाए रखें। खुले दिमाग से बदलावों को अपनाएं। विकास और सफलता के अवसरों का लाभ उठाएं। अगर आप किसी रिलेशनशिप में हैं तो अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं। मीन 17 दिसंबर के दिन रिलेशनशिप वाले जातक अपने बीच की अंडरस्टैंडिंग बढ़ाएं। जरूरत पड़ने पर दूसरों को काम सौंप दें। अपने खर्चों को समझदारी से मैनेज करना जरूरी है। हेल्दी लाइफस्टाइल को प्राथमिकता दें।

2026 में सोने के पाये पर चलेंगे शनि देव, तीन राशियों के लिए बढ़ेगी चुनौती

वैदिक ज्योतिष में शनि देव को कर्मफल दाता कहा गया है। शनि ग्रह की चाल, दृष्टि और विशेष रूप से उनका पाया (वाहन का प्रभाव) मानव जीवन पर गहरा असर डालता है। जब शनि देव सोने के पाये से चलते हैं, तो इसे ज्योतिष शास्त्र में अशुभ संकेत माना गया है। नए साल 2026 में भी शनि देव मीन राशि में स्थित रहेंगे और इस दौरान 3 राशियों पर सोने के पाये का प्रभाव रहेगा, जिससे इन राशियों को सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। शनि का सोने का पाया क्या होता है? शनि के 4 पाये माने गए हैं सोना, चांदी, तांबा और लोहा। इनमें सोने का पाया सबसे अधिक कष्टदायक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, जब शनि इस पाये से चलते हैं, तो व्यक्ति को आर्थिक समस्याएं, मानसिक तनाव, कार्यों में बाधा और संबंधों में तनाव का सामना करना पड़ सकता है। इन 3 राशियों पर रहेगा सोने के पाये का प्रभाव वृषभ राशि: नुकसान से बचने के लिए सतर्क रहें। नए साल 2026 में वृषभ राशि वालों पर शनि देव सोने के पाये से प्रभाव डाल सकते हैं। पारिवारिक विवाद बढ़ सकते हैं। खर्चों में अचानक वृद्धि संभव। दांपत्य जीवन में तनाव। धन से जुड़े फैसलों में नुकसान। सलाह: इस समय अनावश्यक खर्च, झगड़े और जोखिम भरे निवेश से बचें। तुला राशि: आर्थिक मामलों में बरतें सावधानी तुला राशि पर भी शनि का यह प्रभाव आर्थिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। धन हानि के योग। किसी करीबी से धोखा मिल सकता है। साझेदारी के कामों में रुकावट। मेहनत के बावजूद परिणाम देर से मिलना। सलाह: किसी पर आंख बंद करके भरोसा न करें और दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। मीन राशि: मानसिक दबाव और असमंजस शनि मीन राशि में ही स्थित रहेंगे, जिससे इस राशि के जातकों पर प्रभाव अधिक गहरा हो सकता है। आत्मविश्वास में कमी, नकारात्मक विचारों की अधिकता, कार्यस्थल पर तनाव, स्वास्थ्य में गिरावट और भय की भावना। सलाह: ध्यान, मंत्र जाप और नियमित दिनचर्या से मानसिक संतुलन बनाए रखें। शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय शनिवार को शनिदेव की पूजा करें। काले तिल, सरसों का तेल और काली उड़द का दान करें। “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें। बुजुर्गों और जरूरतमंदों की सेवा करें। Shani Transit 2026 में सोने के पाये का प्रभाव वृषभ, तुला और मीन राशि के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है। हालांकि, शनि देव न्यायप्रिय हैं और सही कर्म, संयम और श्रद्धा से उनके अशुभ प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सावधानी और धैर्य ही इस समय का सबसे बड़ा उपाय है।

खरमास में जहां उत्तर भारत में रुकते हैं शुभ काम, वहीं दक्षिण में क्यों नहीं? जानिए वजह

पंचांग के अनुसार, 16 दिसंबर 2025 से खरमास का आरंभ होता है और यह पूरे एक महीने यानी 14 जनवरी तक चलता है, तब देश के एक हिस्से में मांगलिक और शुभ कार्य थम जाते हैं, तो वहीं दूसरे हिस्से में भक्ति और आध्यात्म का एक पवित्र महीना शुरू हो जाता है. उत्तर भारत और दक्षिण भारत की परंपराएं इस एक महीने की अवधि को लेकर पूरी तरह से विपरीत रुख रखती हैं. आइए विस्तार से जानते हैं कि जब उत्तर भारत में खरमास के कारण शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है, तब दक्षिण का रिवाज क्या कहता है और क्यों यह अवधि वहां ‘सबसे पवित्र’ मानी जाती है. उत्तर भारत: खरमास की परंपरा और शुभ कार्यों पर प्रतिबंध खरमास की परंपरा मुख्य रूप से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों, जैसे बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रचलित है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि (धनु संक्रांति) या मीन राशि (मीन संक्रांति) में प्रवेश करते हैं, तो उस पूरे एक महीने की अवधि को ‘खरमास’ या ‘मलमास’ कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि सूर्य का बृहस्पति (धनु और मीन राशि के स्वामी) की राशियों में प्रवेश करने से उनका प्रभाव कम हो जाता है, जिससे ऊर्जा और शुभता में कमी आती है. इस अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नई संपत्ति की खरीद या बड़े व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक और शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है. दक्षिण भारत: मार्गज़ी का पवित्र महीना उत्तर भारत के विपरीत, दक्षिण भारत की परंपरा खरमास को उस रूप में नहीं मानती है और न ही शुभ कार्यों पर उस तरह का कोई प्रतिबंध लगाती है. दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु) में यह अवधि एक अलग नाम और अत्यंत पवित्र महत्व के साथ जानी जाती है. दक्षिण भारत के कैलेंडर में, 16 दिसंबर से शुरू होने वाली इस अवधि को ‘मार्गज़ी’ महीने के रूप में जाना जाता है. मार्गज़ी महीने को दक्षिण भारत में भगवान की आराधना के लिए और मांगलिक कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है. क्या दक्षिण भारत में शुभ कार्यों पर रोक होती है? दक्षिण भारत में खरमास के कारण शादी-विवाह या अन्य शुभ कार्यों पर कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं होता है. हालांकि, कुछ समुदाय अपनी परंपरा के अनुसार मुहूर्त देखते हैं, लेकिन इसे अशुभ काल नहीं माना जाता है. इसलिए भारतीय परंपराओं में, एक ही खगोलीय घटना को लेकर दो भिन्न दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं, उत्तर भारत में लोग इस अवधि को ‘अशुभ’ मानकर शुभ कार्यों को टाल देते हैं. वहीं, दक्षिण भारत में इसे शुभ और ईश्वर को समर्पित महीना मानकर भक्ति और आध्यात्म में लीन हो जाते हैं.

तनाव की जड़ कहीं घर का क्लटर तो नहीं? जानें सरल वास्तु टिप्स

हमारा घर हमारी ऊर्जा का दर्पण होता है। जब घर में अनचाही वस्तुओं का ढेर लग जाता है, जिसे हम क्लटर या कबाड़ कहते हैं तो वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह घर की सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोक देता है। इससे मानसिक शांति भंग होती है, तनाव बढ़ता है और आर्थिक प्रगति में बाधाएं आने लगती हैं। तो आइए जानते हैं घर को क्लटर मुक्त करने के लिए कौन से वास्तु उपाय अपनाने चाहिए। प्रवेश द्वार को रखें स्वच्छ और खाली रखें मुख्य द्वार को घर का 'मुख' माना जाता है, जहां से सुख-समृद्धि और अवसर प्रवेश करते हैं। दरवाज़े के ठीक सामने टूटे गमले, पुराने जूते-चप्पल, या बेकार के फर्नीचर का ढेर नहीं रखना चाहिए। उपाय: प्रवेश द्वार के पास से हर तरह का क्लटर हटाएं। सुनिश्चित करें कि दरवाज़ा बिना किसी रुकावट के पूरी तरह खुल सके। दरवाज़े के पास कभी भी टूटी हुई या बंद पड़ी वस्तुएं न रखें। यह अवसर और धन के प्रवेश में सीधे बाधा डालता है। टूटी और ख़राब वस्तुओं को तुरंत बाहर करें घर में ख़राब पड़ी वस्तुएं जीवन में ठहराव और निष्क्रियता को दर्शाती हैं, जो प्रगति में बाधा डालती हैं। बंद घड़ियां, फूटे कांच के बर्तन, खराब इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स या फटे हुए कपड़े घर में नहीं रखने चाहिए। उपाय: अगर कोई वस्तु एक सप्ताह से अधिक समय से टूटी हुई है और उसे ठीक नहीं किया जा सकता, तो उसे तुरंत फेंक दें या दान कर दें। विशेष रूप से बंद पड़ी घड़ियां प्रगति को रोकती हैं। उन्हें या तो चालू करें या हटा दें। बिस्तर के नीचे और कोनों को खाली रखें घर के कोने और सोने का स्थान ऊर्जा को सबसे अधिक अवशोषित करते हैं। बिस्तर के नीचे जूते, बक्से, या पुरानी किताबें और कमरों के कोनों में जमे धूल भरे सामान रखने से बचें। उपाय: बेडरूम में बिस्तर के नीचे कुछ भी स्टोर करने से बचें। यह नींद की गुणवत्ता और रिश्तों को प्रभावित करता है। कोनों में जमा सामान हटाएँ। कोनों में हल्की रोशनी की व्यवस्था करें, क्योंकि अंधेरे कोने नकारात्मक ऊर्जा का घर बन जाते हैं। पुराने कागजात और रद्दी का प्रबंधन कागजों का ढेर मानसिक बोझ और अनसुलझे मामलों को दर्शाता है। डेस्क पर, डाइनिंग टेबल पर या ड्रॉअर में जमा हुए पुराने बिल, मैगजीन, और उपयोग न किए गए दस्तावेज़ के तुरंत घर से हटा दें। उपाय: सप्ताह में एक बार कागजातों की छंटनी करें। जो बिल या दस्तावेज़ अब आवश्यक नहीं हैं, उन्हें तुरंत नष्ट कर दें महत्वपूर्ण कागजातों के लिए व्यवस्थित फाइलिंग सिस्टम बनाएं ताकि वित्तीय और कानूनी क्लटर दूर हो।

अमावस्या की डेट को लेकर भ्रम खत्म! 18 या 19—कब है अमावस्या?

पौष अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. यह तिथि पितरों को समर्पित होती है और इस दिन स्नान, दान और तर्पण करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी अमावस्या की सही तारीख को लेकर भक्तों के मन में कुछ भ्रम है. पंचांग की गणना के अनुसार, आइए जानते हैं साल 2025 में पौष अमावस्या किस दिन मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार, पौष माह की अमावस्या तिथि 19 दिसंबर, शुक्रवार के दिन सुबह 04 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी. वहीं इस तिथि का समापन 20 दिसंबर सुबह 07 बजकर 12 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में साल की आखिरी अमावस्या 19 दिसंबर, शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी. ज्योतिष शास्त्र के नियम के अनुसार, अमावस्या का व्रत और स्नान-दान उस दिन किया जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि मौजूद हो या पूरे दिन व्याप्त हो. इसी आधार पर 19 दिसंबर 2025 को ही मुख्य रूप से पौष अमावस्या का अनुष्ठान करना शुभ रहेगा. पौष अमावस्या का धार्मिक महत्व पितरों को शांति: यह दिन विशेष रूप से पितरों (पूर्वजों) के तर्पण के लिए समर्पित है. इस दिन श्राद्ध कर्म करने, तर्पण देने और ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितृ दोष समाप्त होता है और पितरों को शांति मिलती है. सूर्य और चंद्रमा का मिलन: अमावस्या तिथि को सूर्य (देवता) और चंद्रमा (पितर) एक ही राशि में होते हैं. इसलिए इसे देव और पितृ दोनों को प्रसन्न करने का दिन माना जाता है. पाप मुक्ति: मान्यता है कि इस पवित्र तिथि पर गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. काल सर्प दोष निवारण: जिन जातकों की कुंडली में काल सर्प दोष होता है, वे इस दिन विशेष पूजा और अनुष्ठान करके इस दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं. पौष अमावस्या की पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें. यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं. हाथ में जल और पुष्प लेकर मन ही मन ‘अमावस्या के निमित्त पितरों को तर्पण और दान का संकल्प लें. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें. अपने हाथ की अंगुलियों के बीच से जल, तिल और कुश लेकर तीन बार ‘गोत्र’ और ‘नाम’ का उच्चारण करते हुए पितरों को तर्पण करें. शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 7 बार परिक्रमा करें. पीपल के पेड़ में सभी देवी-देवताओं और पितरों का वास माना जाता है. सामर्थ्य अनुसार किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराएं और उन्हें वस्त्र तथा दक्षिणा भेंट करें. पौष अमावस्या पर दान का महत्व पौष अमावस्या पर दान को बहुत ही शुभ माना जाता है. चावल, आटा, दाल, और मौसमी सब्जियां दान करें. काले तिल का दान करना पितरों की शांति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है. गरीबों को ऊनी वस्त्र या कंबल दान करें, क्योंकि यह पौष मास की ठंड का समय होता है. गौशाला में चारा या धन का दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है.