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आर्थिक परेशानियों से राहत पाने का समय: जनवरी का अंतिम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. जनवरी 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत कल यानी 30 जनवरी को रखा जाएगा. शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा. मान्यता है कि शुक्र प्रदोष का व्रत रखने से न केवल सुख-समृद्धि आती है, बल्कि आर्थिक तंगी से भी मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं इस व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व. प्रदोष व्रत 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग की गणना के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का विवरण इस प्रकार है.     त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 30 जनवरी 2026, 11:09 बजे से.     त्रयोदशी तिथि समाप्त: 31 जनवरी 2026, सुबह 08:25 बजे तक. व्रत की तिथि: चूंकि प्रदोष काल में शिव पूजा का महत्व है, इसलिए यह व्रत 30 जनवरी 2026, शुक्रवार को ही रखा जाएगा. पूजा का सबसे शुभ समय: भगवान शिव की पूजा के लिए शाम को 05:59 PM से रात 08:37 PM तक का समय सर्वश्रेष्ठ है. भक्तों के पास महादेव की आराधना के लिए लगभग ढाई घंटे का शुभ समय रहेगा. शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सप्ताह के अलग-अलग दिनों में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का फल भी अलग होता है. शुक्र प्रदोष व्रत विशेष रूप से सौभाग्य, वैवाहिक सुख और धन-संपदा के लिए किया जाता है. प्रदोष काल वह समय होता है जब भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं. इस समय की गई पूजा से भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होकर भक्तों के संकट दूर करते हैं. प्रदोष व्रत की पूजा विधि अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं या जीवन में सुख शांति चाहते हैं, तो इस विधि से पूजा करें. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (संभव हो तो सफेद) धारण करें. हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. प्रदोष काल में दोबारा स्नान करें या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ हो जाएं. शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें. भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा सफेद फूल और मिठाई अर्पित करें. पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का निरंतर जाप करें. शुक्र प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और अंत में शिव जी की आरती करें.शुक्र प्रदोष के दिन शिवलिंग पर सफेद चंदन का लेप लगाएं और खीर का भोग लगाएं. इससे शुक्र ग्रह मजबूत होता है और घर में सुख-सुविधाओं की वृद्धि होती है.

पैसा आता है लेकिन टिकता नहीं? चाणक्य नीति के ये 5 सूत्र सिखाएँगे धन की बचत

नौकरीपेशा लोगों की अकसर खुद से यह शिकायत रहती है कि महीना खत्म होने से पहले ही उनकी जेब के पैसे खत्म हो जाते हैं। पूरे महीने मेहनत करके कमाया हुआ धन, खर्चों की कटौती करने के भी नहीं बच पाता है। अगर आपका हाल भी कुछ ऐसा ही है तो चाणक्य नीति में आपकी परेशानी का हल मौजूद है। चाणक्य नीति में धन के प्रबंधन और बचत के लिए कई उपयोगी सिद्धांत बताए गए हैं, जो आज के समय में भी बेहद असरदार हैं। धन की बचत से जुड़े चाणक्य के ये 5 सिद्धांत व्यक्ति को को आर्थिक सुरक्षा देकर सम्मानित जीवन जीने में भी मदद करते हैं। धन की बचत से जुड़े चाणक्य नीति के 5 सिद्धांत आय का एक हिस्सा अवश्य बचाएं चाणक्य के अनुसार, जिस तरह बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही छोटी-छोटी बचत से धन संचय होता है। व्यक्ति को चाहिए कि अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा, चाहे वह कितना भी कम क्यों ना हो, नियमित रूप से बचत के लिए अलग निकालकर रखें। यह धन भविष्य में आपातकाल या बड़े लक्ष्यों को पूरा करने के काम आता है। अनावश्यक खर्चों से बचें चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति अपनी आय से अधिक खर्च करता है, वह शीघ्र ही दरिद्र हो जाता है। चाणक्य नीति के अनुसार, दिखावे के लिए अनावश्यक खर्च करने से बचना चाहिए। केवल जरूरी और उपयोगी चीजों पर ही धन खर्च करें। उदाहरण के लिए ब्रांडेड कपड़ों या लग्जरी वस्तुओं पर खर्च करने के बजाय, गुणवत्तापूर्ण और किफायती विकल्प चुनें। धन का विवेकपूर्ण निवेश करें धन को केवल वहां उपयोग करें, जहां सुरक्षित रहते हुए वह अधिक बढ़ सके। चाणक्य की इस सलाह का मतलब है कि धन को बेकार एक जगह न पड़ा रहने दें, बल्कि जोखिम का आकलन करते हुए उसे ऐसी जगह निवेश करें जहां वह समय के साथ बढ़े, जैसे व्यापार, संपत्ति, या सुरक्षित निवेश योजनाएं। म्यूचुअल फंड, या सोने में निवेश धन को बढ़ाने का सुरक्षित तरीका हो सकता है। भविष्य के लिए योजना बनाएं जो व्यक्ति भविष्य की चिंता नहीं करता, वह एक दिन संकट में पड़ जाता है। चाणक्य के अनुसार, भविष्य की जरूरतों, जैसे शिक्षा, विवाह, या आपातकाल के लिए धन संचय करना चाहिए। इसके लिए नियमित बचत और दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है। लालच और जोखिम से बचें लालच में आकर धन का दुरुपयोग करने वाला व्यक्ति अपना सर्वनाश कर लेता है। चाणक्य सलाह देते हैं कि जल्दी अमीर बनने की चाह में जोखिम भरे निवेश या जुआ जैसी गतिविधियों से बचें। धन को सुरक्षित और समझदारी से प्रबंधित करें।

क्या आप भी सुबह सबसे पहले ये 5 चीजें देखते हैं? हो सकता है इसी वजह से बिगड़ता हो आपका दिन

हम अक्सर कहते हैं कि "आज का दिन ही खराब है", लेकिन कभी इसके पीछे की वजह पर गौर नहीं करते। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारा शरीर और मन अत्यधिक संवेदनशील होता है। उस वक्त हम जो देखते हैं, उसका सीधा असर हमारी मानसिक ऊर्जा और भाग्य पर पड़ता है। प्राचीन वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ चीजें नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं। अगर दिन की शुरुआत ही इन चीजों को देखकर हो, तो न केवल मानसिक तनाव बढ़ता है, बल्कि आर्थिक हानि के योग भी बनने लगते हैं। भूलकर भी न देखें ये 5 चीजें बंद घड़ी (रुका हुआ समय): वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, सुबह उठते ही बंद घड़ी देखना बहुत अशुभ है। यह आपके जीवन में ठहराव और कार्यों में बाधा आने का संकेत है। यह दर्शाता है कि आपका अच्छा समय रुक गया है। शीशे में चेहरा देखना: बहुत से लोगों की आदत होती है जागते ही शीशा देखने की। वास्तु के अनुसार, रात भर की नकारात्मक ऊर्जा सुबह चेहरे पर होती है। शीशा देखने से वह ऊर्जा वापस आप में समा जाती है, जिससे दिनभर चिड़चिड़ापन रह सकता है। जूठे बर्तन: अगर आप सुबह उठकर किचन में सबसे पहले रात के जूठे बर्तन देखते हैं, तो यह सीधे तौर पर आर्थिक तंगी को न्योता देना है। इससे घर में दरिद्रता का वास होता है। अपनी या दूसरों की परछाई: सुबह-सुबह परछाई देखना (चाहे वह अपनी हो या किसी और की) राहु का प्रभाव बढ़ाता है। इससे मन में डर, भ्रम और कार्यों में उलझन पैदा होती है। जंगली जानवरों की तस्वीर: बेडरूम में कभी भी हिंसक जानवरों की फोटो न लगाएं। सुबह इन्हें देखने से स्वभाव में क्रोध बढ़ता है और परिवार में क्लेश होने की संभावना रहती है। धार्मिक ग्रंथों और वास्तु के जानकारों के अनुसार, इन नकारात्मक चीजों से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि सुबह उठते ही अपनी हथेलियों के दर्शन करें या किसी देवी-देवता की शांत तस्वीर देखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।  

राहु का प्रभाव और गोमेद रत्न: मन की उलझनों से मुक्ति किसे मिल सकती है?

हेसोनाइट, जिसे हिंदी में गोमेद कहा जाता है, राहु से जुड़ा रत्न है. राहु कोई दिखाई देने वाला ग्रह नहीं, बल्कि छाया ग्रह माने जाते हैं. राहु भ्रम, महत्वाकांक्षा, विदेशी प्रभाव, अचानक घटनाएं, जुनून और अलग रास्तों का संकेत देते हैं. गोमेद राहु की बिखरी और भ्रमित ऊर्जा को संभालने और उसे सही दिशा में लगाने के लिए पहना जाता है, खासकर राजनीति, विदेश, अचानक सफलता और भौतिक क्षेत्रों में. राहु अचानक उतार-चढ़ाव, विदेश यात्रा, राजनीति, जन-प्रभाव, तकनीक, नशा, डर, भ्रम और मानसिक पैटर्न से जुड़े माने जाते हैं. पीड़ित राहु चिंता, भ्रम, नशे, कानूनी झंझट, अचानक नुकसान और बदनामी दे सकते हैं. संतुलित राहु तेज दिमाग, नाम और अलग तरह की सफलता देते हैं. गोमेद गार्नेट परिवार का रत्न है. इसका रंग शहद जैसा भूरा से लेकर लाल-नारंगी (दालचीनी जैसा) होता है. इसमें हल्की तैलीय या धुंधली चमक होती है, जो इसे दूसरे रत्नों से अलग बनाती है. अच्छा गोमेद साफ, एकसार रंग वाला और बिना दरार या काले धब्बों के होना चाहिए. श्रीलंका (सीलोन) का गोमेद सबसे अच्छा माना जाता है. गोमेद से जुड़े ज्योतिषीय, सांस्कृतिक और व्यावहारिक पहलू वैदिक ज्योतिष में गोमेद को राहु ग्रह का रत्न माना जाता है. राहु बाकी ग्रहों की तरह सीधा असर नहीं करता, बल्कि यह मन, डर, लालच, भ्रम, अचानक घटनाओं और कर्म से जुड़े मामलों को प्रभावित करता है. गोमेद का काम भ्रम को बढ़ाना नहीं, बल्कि वहां नियंत्रण और स्पष्टता लाना है, जहां राहु की वजह से उलझन, बेचैनी या अजीब व्यवहार पैदा हो जाता है. कर्म और दशा के अनुसार, गोमेद ज्यादातर राहु की महादशा या अंतरदशा में पहनने की सलाह दी जाती है. खासकर तब, जब बिना वजह रुकावटें आ रही हों, अचानक नुकसान हो रहा हो, कोर्टकचहरी के मामले चल रहे हों, लत की समस्या हो या बार-बार डर और घबराहट सताती हो. अगर कुंडली में राहु शुभ हो लेकिन अटका हुआ हो, तो गोमेद विदेश से जुड़े मौके, अनोखी सफलता, टेक्नोलॉजी, राजनीति और जनसंचार जैसे क्षेत्रों में अचानक ब्रेकथ्रू दिला सकता है. सांस्कृतिक रूप से राहु को छाया ग्रह और ग्रहण से जोड़ा गया है. पुराने समय में गोमेद को धोखा, काला जादू और छुपे हुए दुश्मनों से बचाव के लिए ताबीज की तरह भी पहना जाता था. आध्यात्मिक रूप से गोमेद जरूरत से ज्यादा कल्पनाशक्ति, भ्रम या वहम को जमीन से जोड़ता है. यही वजह है कि यह गहरे मानसिक या तांत्रिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है. व्यावहारिक रूप से गोमेद खरीदते समय ध्यान रखें कि उसका रंग शहद या दालचीनी जैसा हो और उसमें हल्की तेलीय चमक हो, कांच जैसी तेज चमक नहीं. आमतौर पर गोमेद 5 से 8 रत्ती तक पहनने की सलाह दी जाती है, लेकिन सही वजन उम्र, शरीर के वजन और कुंडली के अनुसार तय किया जाना चाहिए. कृत्रिम रूप से गर्म किया हुआ, बहुत फीका या बेजान गोमेद नहीं पहनना चाहिए. एक आम गलती यह होती है कि लोग अचानक पैसा या ताकत पाने के लिए बिना जांच गोमेद पहन लेते हैं. अगर कुंडली में राहु अशुभ हो, तो गोमेद पहनने से वहम, लत, डर या मानसिक अस्थिरता बढ़ सकती है इसलिए गोमेद पहनने से पहले ट्रायल पहनना और किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेना बहुत जरूरी है. सही स्थिति में गोमेद ढाल और इंजन दोनों की तरह काम करता है—यह सुरक्षा भी देता है और महत्वाकांक्षा को नियंत्रित तरीके से सफलता की ओर ले जाता है. गोमेद रत्न पहनने के ज्योतिषीय लाभ     डर, घबराहट और मानसिक भ्रम कम करेगा     नकारात्मक ऊर्जा और भ्रम से सुरक्षा देगा     अचानक करियर और धन लाभ में मदद करेगा     राजनीति, मीडिया और जन-प्रभाव वाले क्षेत्रों में सफलता देगा     विदेश यात्रा, विदेश में बसने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सहयोग करेगा     नशे और जुनूनी आदतों को नियंत्रित करने में मदद करेगा     राहु महादशा चल रही हो या बिना कारण बार-बार समस्याएं आ रही हों, तो गोमेद सलाह दिया जाता है. गोमेद पहनने की विधि     धातु: चांदी या पंचधातु     उंगली: मध्य उंगली     हाथ: दाहिना     दिन: शनिवार शाम     समय: राहु काल     मंत्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (108 बार) गोमेद पहनते समय बरतें ये सावधानियां     गोमेद हमेशा ट्रायल के बाद ही पहनें     ट्रायल अवधि: 57 दिन     डर, बुरे सपने, बीमारी या नुकसान हो तो तुरंत उतार दें     टूटा, फीका या ट्रीट किया हुआ गोमेद न पहनें     मोती, माणिक, पुखराज या नीलम के साथ बिना सलाह न पहनें गोमेद सजावटी नहीं, बल्कि सुधार करने वाला रत्न है. राहु अनुकूल हों तो यह अचानक सफलता और सुरक्षा दे सकता है. राहु प्रतिकूल हों तो भ्रम और अस्थिरता बढ़ा सकता है. इसलिए कुंडली जांच बेहद जरूरी है.

घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करे ड्रैगन, बनाएं इसे सुरक्षा कवच

फेंगशुई का विज्ञान इसी बात पर जोर देता है कि अधिक से अधिक सकारात्मक ऊर्जा पाने के लिए ऐसे उपाय अपनाए जाए जिनमें कम से कम साजो-समान, प्रयास या समय खर्च करना पड़ें। फेंगशुई चाईनिस वास्तु है। जो चीन में ही नहीं भारत के लोगों में भी काफी लोकप्रिय है। पशु-पक्षियों को फेंगशुई बहुत महत्व देता है और उन्हें उचित दिशा में रखकर मनचाही इच्छाओं की पूर्ति करता है। फेंगशुई ज्ञाताओं का मानना है कि घर के मुख्यद्वार के बाहर काला कछुआ, लाल पक्षी, सफेद बाघ एवं हरा ड्रैगन होते हैं जो घर को सुरक्षा प्रदान करते हैं। फेंगशुई में ड्रैगन को चार दिव्य प्राणियों में गिना जाता है। उनमें से मुख्य रूप से घर में ड्रैगन की मूर्ति या चित्र अवश्य रखना चाहिए। ड्रैगन यांग ऊर्जा का प्रतीक होता है। यह सौभाग्य के लिए सबसे अधिक ताकतवर माना जाता है। घर के अंदर ड्रैगन अपने घर के परिवार वाले भाग में लकड़ी की या हरे रंग की लगा सकते हैं या घर के बैठक कक्ष में लगाएं। ड्रैगन को ऊंचाई पर नहीं रखना चाहिए और न ही शयन कक्ष में रखना चाहिए क्योंकि शयनकक्ष की प्रकृति यिन होती है। जिससे पारिवारिक सदस्यों को मानसिक तनाव और बेचैनी की स्थिती बनी रहती है। ड्रैगन लकड़ी, चीनि मिट्टी या क्रिस्टल का होना चाहिए। मैटल यहां तक की सोने का ड्रैगन भी अच्छा नहीं माना जाता। ड्रैगन किसी भी धातु का नहीं होना चाहिए क्योंकि दोनों यांग शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। मिट्टी से बनें चाईनिस पात्र एवं फूलदान आदि जिन पर हरा ड्रैगन बना हो, उन्हें बहुत शुभ माना जाता है। किसी प्रिय को उपहार देने के लिए यह अनुपम भेंट है। लकड़ी के ड्रैगन को दक्षिण- पूर्व या पूर्व में, सेरेमिक, क्रिस्टल के ड्रैगन को दक्षिण- पूर्व, उत्तर-पूर्व या उत्तर पश्चिम में रखें। पढ़ने वाले बच्चे इसे अपनी स्टडी टेबल पर रखें। आज की मार्डन जनरेशन में ड्रैगन को फैशन और ज्यूलरी के रूप में भी काफी पसंद किया जा रहा है जैसे ड्रैगन नेकलेस, ड्रैगन ईयररिंग्स, ड्रैगन ब्रेसलेट, ड्रैगन रिंग, ड्रैगन थम रिंग आदि। ये देखने में बेहद ग्लैमरस लगते हैं।  

वास्तु के अनुसार घर की घंटियां और विंड चाइम: जानें किस दिशा में लटकाना है सबसे शुभ

हवा के झोंकों के साथ जब घर में विंड चाइम या छोटी घंटियों की सुरीली आवाज गूंजती है, तो मन को एक अजीब सा सुकून मिलता है। लेकिन, क्या आपको पता है कि यह प्यारी सी आवाज सिर्फ सुनने में अच्छी नहीं लगती, बल्कि आपके जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सुख-समृद्धि के द्वार भी खोल सकती है? वास्तु शास्त्र में ध्वनि तरंगों का बहुत महत्व है। सही दिशा में लगी विंड चाइम सोई हुई किस्मत को जगाने का काम करती है। वहीं, गलत दिशा में लगी घंटी मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। दिशाओं का रखें खास ख्याल विंड चाइम खरीदते समय सबसे पहले उसकी दिशा और धातु पर ध्यान देना चाहिए। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आप पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में विंड चाइम लगाना चाहते हैं, तो धातु से बनी विंड चाइम का चुनाव करें। यह दिशा बच्चों के करियर और सौभाग्य के लिए उत्तम मानी जाती है। वहीं, अगर आप घर की पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा को सजाना चाहते हैं, तो लकड़ी या बांस से बनी विंड चाइम सबसे शुभ फल देती है। ऐसा माना जाता है कि लकड़ी का तत्व विकास और उन्नति का प्रतीक है। छड़ों की संख्या का जादुई अंक विंड चाइम में छड़ों  की संख्या का भी अपना महत्व है। घर में शांति और क्लेश दूर करने के लिए 7 या 8 छड़ों वाली विंड चाइम लगानी चाहिए। वहीं, अगर आप अपनी लोकप्रियता या सामाजिक दायरे को बढ़ाना चाहते हैं, तो 6 छड़ों वाली विंड चाइम को उत्तर-पश्चिम दिशा में लटकाना लाभकारी होता है। प्रवेश द्वार पर घंटी का महत्व सिर्फ विंड चाइम ही नहीं, घर के मुख्य द्वार पर छोटी पीतल की घंटी लटकाना भी सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। जब भी कोई दरवाजा खोलता है, तो घंटी की आवाज से घर की 'डेड एनर्जी' (रुकी हुई ऊर्जा) एक्टिव हो जाती है। यह आवाज घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक शक्तियों को बाहर ही रोक देती है। कहां न लगाएं विंड चाइम? वास्तु के अनुसार, कभी भी ऐसी जगह विंड चाइम न लगाएं, जहां उसके नीचे कोई बैठता हो या सोता हो। इसके अलावा, किचन या स्टोर रूम के अंधेरे कोनों में भी इसे लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि वहां इसकी ऊर्जा का सही प्रवाह नहीं हो पाता।  

29 जनवरी का राशिफल: आज ग्रहों की स्थिति किस राशि के लिए शुभ-अशुभ?

मेष 29 जनवरी के दिन ये महत्वपूर्ण है कि आप पिछले प्रेम संबंधों से दूरी बनाए रखें क्योंकि इससे शाम के समय में प्रॉब्लम हो सकती है। फिटनेस पर फोकस करने से आपका स्ट्रेस कम होगा। नई जिम्मेदारियां आपको बिजी रख सकती हैं। वृषभ 29 जनवरी के दिन आप बड़े फाइनेंशियल डिसीजन लेने पर विचार कर सकते हैं। विचारों में मामूली मतभेद के बावजूद, आपका साथी आपके साथ समय बिताना पसंद करेगा। तनाव से दूर रहें। मिथुन 29 जनवरी के दिन धन और स्वास्थ्य दोनों अच्छे रहेंगे। उन एक्टिविटी में शामिल होने पर विचार करें, जो आपको पसंद हैं। आर्थिक सफलता दिन की एक प्रमुख विशेषता होगी। आप अपना लक्ष्य प्राप्त करें। कर्क 29 जनवरी के दिन किसी भी मुद्दे को अनदेखा न करें। लॉन्ग डिस्टेंस के रिलेशनशिप में आज ज्यादा कोशिश की आवश्यकता होगी। आप दोपहर के दौरान प्रॉपर्टी से जुड़ी बात कर सकते हैं। सिंह 29 जनवरी के दिन अहंकार से संबंधित छोटी-मोटी समस्याएं हो सकती हैं। ऑफिस में सभी एक्सपेक्टेशन को पूरा करने के लिए आपको सावधान रहना चाहिए। अपने प्रेमी के साथ टाइम स्पेंड करने के लिए ज्यादा से ज्यादा पल तलाशें। कन्या 29 जनवरी के दिन मशीनों से काम करने वालों को अपना गोल पूरा करने में थोड़ी परेशानी हो सकती है। आप इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी खरीद सकते हैं। आज लव के मामले में कोई बड़ी समस्या नहीं होगी। तुला 29 जनवरी के दिन बिजनेसमैन सफलता के साथ कोई नया आइडिया लॉन्च कर सकते हैं। ऑफिस में अपनी पेशेवर योग्यता दिखाने के लिए अधिक समय निकालें। लड़ाई झगड़े वाले टॉपिक से बचें। वृश्चिक 29 जनवरी के दिन कभी-कभी कोई सीनियर आपकी ईमानदारी पर उंगली उठा सकता है, लेकिन उसका जवाब न दें। आप भाई-बहन या किसी दोस्त के साथ मुद्दे को सुलझाने के लिए आज का दिन चुन सकते हैं। धनु 29 जनवरी के दिन आमतौर पर कनेक्शन मजबूत रहेगा। अगर आप नोटिस पीरियड में हैं, तो दिन खत्म होने से पहले आपको नई नौकरी का प्रस्ताव मिल सकता है। समझदारी से पैसों से जुड़े फैसले लें। मकर 29 जनवरी के दिन मैनेजमेंट कार्यों को संभालने वाले लोग ऑफिस पॉलिटिक्स का शिकार हो सकते हैं। आप व्यापार पर भी विचार कर सकते हैं, जो अच्छा रिटर्न ला सकता है। जो प्रेमी रिश्ते को अगले लेवल पर ले जाना चाहते हैं, उन्हें माता-पिता से मिलने और इस पर बात करने के लिए एक या दो दिन इंतजार करना चाहिए। कुंभ 29 जनवरी के दिन रोमांस पर ध्यान दें। कलाकारों और क्रिएटिव लोगों को आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। कपड़ा, प्लास्टिक की वस्तुओं और फर्नीचर को संभालने वाले व्यापारियों को अच्छा रिटर्न मिल सकता है। मीन 29 जनवरी के दिन बदलाव को अपनाएं। प्यार, करियर, धन और स्वास्थ्य में नए अवसरों के लिए खुले रहें। ऑफिस में बहस करने से बचें। सौंपे गए काम पर ध्यान केंद्रित करें। आपके खातों में अधिक समृद्धि आएगी।

Holi 2026: कब है होलिका दहन और धुलेंडी? शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व की पूरी जानकारी

हिंदू धर्म में होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. यह त्योहार दो दिन मनाया जाता है. पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और दूसरे दिन धुलेंडी, जिसे रंगों वाली होली भी कहा जाता है. हर साल की तरह इस साल भी होली की तारीख को लेकर लोगों के मन में कंफ्यूजन रहता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 2026 में होलिका दहन और रंगों वाली होली कब मनाई जाएगी, साथ ही जानेंगे इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व. होलिका दहन और धुलेंडी की तारीख साल 2026 में पूर्णिमा तिथि और प्रदोष काल के संयोग के कारण होली की तिथियां इस प्रकार होंगी.     होलिका दहन: 3 मार्च 2026 (मंगलवार)     धुलेंडी (रंगों वाली होली): 4 मार्च 2026 (बुधवार) शुभ मुहूर्त और समय ज्योतिषीय गणना के अनुसार,     पूर्णिमा तिथि शुरू: 2 मार्च 2026, शाम 05:55 बजे से.     पूर्णिमा तिथि का समापन 3 मार्च 2026, शाम 05:07 बजे तक. शास्त्र सम्मत नियम है कि होलिका दहन हमेशा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में किया जाता है. चूंकि 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि का प्रभाव रहेगा, इसलिए होलिका दहन 3 मार्च को ही मनाया जाएगा. इसके अगले सूर्योदय पर यानी 4 मार्च को रंगों वाली होली खेली जाएगी. होलिका दहन की पूजा विधि     तैयारी: दहन वाली जगह पर सूखी लकड़ी, घास और गोबर के उपले इकट्ठा करें.     पूजा सामग्री: रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे और एक कलश जल साथ रखें.     विधि: होलिका के चारों ओर सात बार कच्चा सूत लपेटें और जल अर्पित करें. भगवान नरसिंह और भक्त प्रहलाद का ध्यान करते हुए फल, फूल और मिठाइयां चढ़ाएं.     अग्नि प्रज्वलन: शुभ मुहूर्त में होलिका में अग्नि लगाएं और नई फसल (जैसे गेहूं की बालियां) को उसकी लौ में सेकें. होली का महत्व होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक और सामाजिक कारण छिपे हैं. यह पर्व भगवान विष्णु के अनन्य भक्त प्रहलाद की रक्षा और अहंकारी हिरण्यकश्यप की बहन होलिका के अंत की याद दिलाता है. यह दिन ऊंच-नीच और पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाने का है. होली का त्योहार वसंत ऋतु के आगमन और सर्दियों की विदाई का भी संदेश देता है.

चाणक्य नीति के अनुसार: इन पारिवारिक बातों को बाहर बताया तो बिखर सकता है पूरा परिवार

कूटनीति और जीवन दर्शन के महानायक माने जाने वाले आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं। चाणक्य नीति केवल राज्य चलाने का शास्त्र नहीं है, बल्कि यह एक मनुष्य को अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन को सुरक्षित व सम्मानित बनाए रखने की कला भी सिखाती है। चाणक्य का मानना था कि एक मजबूत परिवार की नींव उसकी 'गोपनीयता' और 'मर्यादा' पर टिकी होती है। आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य के अनुसार परिवार की वो कौन सी 5 बातें हैं, जिनका जिक्र भूलकर भी बाहरी व्यक्ति से नहीं करना चाहिए। बाहरी व्यक्ति के साथ कभी शेयर ना करें ये 5 बातें घर के झगड़े और मनमुटाव चाणक्य के अनुसार, हर परिवार में छोटे-बड़े झगड़े होते रहते हैं, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि आप उनकी चर्चा अपनी सभी दोस्तों से करें। घर की कलह को बाहर ले जाना सबसे बड़ी मूर्खता है। जब आप घर की लड़ाई दूसरों को बताते हैं, तो लोग आपकी मदद करने की जगह पीठ-पीछे आपका मजाक बनाकर भविष्य में इसका फायदा उठाकर परिवार में फूट डालने की कोशिश करते हैं। आर्थिक स्थिति और धन का लाभ अपनी आर्थिक तंगी या धन लाभ से जुड़ी बातें भी किसी को नहीं बतानी चाहिए। यदि आप अपनी आर्थिक कमजोरी बताते हैं, तो लोग आपका सम्मान करना बंद कर देंगे और मदद के समय हाथ पीछे खींच लेंगे। वहीं, अधिक धन की चर्चा लोगों में ईर्ष्या पैदा करती है, जो आपके परिवार की सुरक्षा का खतरा बन सकती है। जीवनसाथी का व्यवहार और कमियां एक सुखी गृहस्थ जीवन के लिए पति और पत्नी के बीच की बातें गुप्त रखना जरूरी होता है। अपने जीवनसाथी की बुराई या उनकी कमियों का जिक्र दूसरों के सामने करने से न सिर्फ उनकी इज्जत कम होती है, बल्कि समाज में आपके परिवार के चरित्र पर भी सवाल उठते हैं। चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने जीवनसाथी का अपमान दूसरों से करवाता है, वह स्वयं कभी सुखी नहीं रह सकता। अपमान की घटनाएं यदि समाज में या कार्यस्थल पर कभी आपका अपमान हुआ हो, तो उस घटना को अपने तक ही सीमित रखें। दूसरों को अपने अपमान के बारे में बताने से आपकी छवि 'कमजोर' व्यक्ति की बनती है। लोग आपको सहानुभूति देने की जगह आपको कम आंकना शुरू कर देते हैं। परिवार के रहस्य हर परिवार में कुछ ऐसी बातें होती हैं, जिनका सार्वजनिक होना सम्मान को ठेस पहुंचा सकता है। चाहे वह किसी सदस्य की बीमारी हो या कोई पुरानी गलती, इन रहस्यों को किसी 'भरोसेमंद' मित्र के साथ भी साझा करने से बचें। ऐसा इसलिए क्योंकि समय बदलने पर मित्र भी शत्रु में बदल सकता है।

कहीं आपकी टेबल ही तो नहीं रोक रही सफलता? जानें डेस्क से जुड़े खास वास्तु नियम

अक्सर हम अपने काम में कड़ी मेहनत करते हैं। लेकिन, फिर भी ऑफिस या घर पर काम करते समय वह मानसिक शांति और तरक्की महसूस नहीं होती जिसकी हम उम्मीद करते हैं। क्या आपने कभी अपनी वर्क टेबल यानी काम करने की मेज पर ध्यान दिया है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, आपकी टेबल पर रखी हर छोटी-बड़ी चीज आपकी कार्यक्षमता और करियर की ग्रोथ पर काफी हद तक असर डालती हैं। लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक्स की सही जगह आज के समय में लैपटॉप हमारी वर्क टेबल का सबसे अहम हिस्सा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, लैपटॉप, कंप्यूटर या कोई भी बिजली से चलने वाला गैजेट हमेशा टेबल के दक्षिण-पूर्व (South-East) कोने में होना चाहिए। इसे आग्नेय कोण कहा जाता है, जो अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। सही दिशा में रखा लैपटॉप न केवल लंबे समय तक चलता है, बल्कि आपके विचारों में स्पष्टता भी लाता है। मेज पर पौधों का जादू डेस्क पर हरियाली न केवल आंखों को सुकून देती है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है। वास्तु के अनुसार, टेबल के उत्तर या पूर्व (North or East) दिशा में छोटा 'मनी प्लांट' या 'बैम्बू प्लांट' रखना बेहद शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि टेबल पर कभी भी कैक्टस या कांटेदार पौधे न रखें, क्योंकि ये आपसी संबंधों में कड़वाहट और काम में बाधाएं पैदा करते हैं। चीजों का बिखराव और ग्रोथ क्या आपकी टेबल फाइलों और कागजों से भरी रहती है? वास्तु के अनुसार, अव्यवस्थित मेज मानसिक भ्रम पैदा करती है। मेज का बीच का हिस्सा हमेशा खाली और साफ होना चाहिए, जिसे 'ब्रह्म स्थान' कहा जाता है। काम खत्म करने के बाद अपनी टेबल को साफ करना आने वाले कल की सफलता की नींव रखता है। पानी और रोशनी का संतुलन पानी की बोतल हमेशा टेबल के उत्तर या उत्तर-पूर्व (North-East) दिशा में रखें। यह दिशा जल तत्व की है और यहां पानी रखने से एकाग्रता बढ़ती है। साथ ही, आपकी टेबल पर सही मात्रा में रोशनी होनी चाहिए। अगर आप टेबल लैंप का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे दक्षिण-पूर्व कोने में रखना ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है।