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माता सीता की अग्निपरीक्षा का सच,माया सीता की कथा और रहस्य

माता सीता जब लंका से वापस आईं थी तब माता सीता ने अग्निपरीक्षा देनी पड़ थी। लेकिन, क्या आप जानते हैं माता सीता की इस अग्नि परीक्षा के पीछे एक बड़ा रहस्य है। रामायण कथा सिर्फ एक भाषा में नहीं बल्कि कई भाषाओं में है। अलग अलग रामायण में बताया गया है कि मां सीता एक नहीं बल्कि दो थी और माता सीता के इन दोनों स्वरुपों के बारे में भगवान राम जानते थे। आइए जानते हैं माता सीता की अग्नि परीक्षा का सच और माता सीता के दोनों स्वरुपों की कथा। क्या दो माता सीता थी ? रामायण की पौराणिक कथाओं के अनुसार, रामायण में एक नहीं बल्कि दो सीता थीं। एक माता सीता और दूसरी उनकी छाया। जब लक्ष्मण जी कंदमूल फल लेने के लिए वन में चले गए थे। तब भगवान राम ने माता सीते से कहा कि अब लीला करने वाला हूं और में राक्षसों का वध करुंगा। भगवान राम पहले की जानते थे कि रावण माता सीता का हरण करने वाला है। इसिलए उन्होंने अग्निदेव से माता सीता की सुरक्षा के लिए कहा। तब अग्निदेव के पास असली सीता गई और माता सीता की छाया वहीं रुक गई। माता सीता अग्निदेव की पूजा करती थी। इसलिए अग्निदेव उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकते थे। पूरे वनवास के दौरान माता सीता ही भगवान राम के साथ रही थी। जब रावण माता सीता को लेकर गया तो वह असली माता सीता को नहीं बल्कि माया सीता को लेकर गया था। क्यों की गई थी माता सीता का अग्नि परीक्षा जब भगवान राम ने रावण का वध किया उसके बाद जब अयोध्या वापस आना के समय हुआ तो माता सीता का अग्नि परीक्षा का बात कही गई। लक्ष्मजी ने इसका बहुत विरोध किया। लेकिन, भगवान राम सच जानते थे इसलिए माता सीता की अग्नि परीक्षा की गई। अग्निपरीक्षा एक दिव्य लीला थी। जैसे ही माता सीता अग्नि में प3वेश करती हैं वैसे ही माया सीता अग्नि में विलीन हो जाती है और अग्नि से जो बाहर प्रकट होती हैं वह असली माता सीता है। इसलिए ही माता सीता की अग्नि परीक्षा की गई थी ताकि माया सीता अग्नि में समा जाएं और आसली माता सीता वापस प्रभु राम के साथ अयोध्या लौंट जाएं।

घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के आसान फेंगशुई उपाय

दिनभर की थकान और दफ्तर की भागदौड़ के बाद जब हम घर की दहलीज पर कदम रखते हैं, तो उम्मीद होती है कि वहां सुकून मिलेगा. लेकिन क्या कभी आपने ये महसूस किया है कि घर पहुंचते ही बिना वजह भारीपन, उदासी या चिड़चिड़ापन महसूस होने लगे? अगर हां, तो यह आपके घर का वास्तु या फेंगशुई दोष हो सकता है. अक्सर लोग फेंगशुई के नाम पर महंगे शो-पीस खरीदने लगते हैं, लेकिन असल में फेंगशुई ऊर्जा के सही संतुलन का नाम है. आइए जानते हैं कि कैसे आप अपनी जेब से एक चवन्नी खर्च किए बिना अपने आशियाने को खुशियों से भर सकते हैं. 1. कबाड़ को हटाएं फेंगशुई का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण नियम है सफाई.  रुकी हुई ऊर्जा अक्सर पुराने कबाड़, टूटे हुए सामान या लंबे समय से बंद पड़ी अलमारियों में जमा हो जाती है. यदि आपके घर में ऐसी चीजें हैं जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते, तो उन्हें हटा दें. खाली जगह का मतलब है नई ऊर्जा के लिए रास्ता बनाना. जैसे ही आप घर का कोना-कोना साफ करते हैं, आप खुद को हल्का और मानसिक रूप से शांत महसूस करेंगे. 2. ताजी हवा और प्राकृतिक रोशनी सूरज की रोशनी और ताजी हवा प्राकृतिक रूप से नकारात्मकता को नष्ट करती है. रोज सुबह कम से कम 20 मिनट के लिए अपने घर की खिड़कियां और दरवाजे जरूर खोलें. फेंगशुई में माना जाता है कि चलती हुई हवा ऊर्जा के प्रवाह को सुचारू बनाती है. अगर आपके घर के किसी कोने में हमेशा अंधेरा रहता है, तो वहां रोशनी की व्यवस्था करें ताकि ऊर्जा सही हो जाए. 3. मुख्य द्वार फेंगशुई के अनुसार, 'ची' यानी ऊर्जा मुख्य द्वार से ही घर में प्रवेश करती है. बिना खर्च किए इसे बेहतर बनाने के लिए बस अपने मुख्य द्वार को साफ रखें.  वहां रखे पुराने जूते-चप्पल हटा दें. ये सुनिश्चित करें कि दरवाजा खुलते समय आवाज न करे.  एक साफ और सुंदर प्रवेश द्वार न केवल मेहमानों को, बल्कि सुख-समृद्धि को भी आकर्षित करता है. 4. शीशों का सही इस्तेमाल आपके घर में मौजूद पुराने शीशे भी फेंगशुई का बड़ा टूल बन सकते हैं. बस उनकी दिशा बदलें.  यदि आपके घर के किसी खिड़की के बाहर हरियाली या सुंदर दृश्य है, तो उसके सामने शीशा लगाएं. इससे बाहर की सकारात्मक ऊर्जा परावर्तित  होकर घर के अंदर आएगी. ध्यान रहे, शीशा कभी भी मुख्य द्वार या बिस्तर के ठीक सामने न रखें, वरना यह ऊर्जा को वापस बाहर भेज सकता है या नींद में खलल डाल सकता है. 5. पानी और नमक घर की निगेटिविटी सोखने के लिए नमक सबसे सस्ता और असरदार तरीका है.  पोंछे के पानी में थोड़ा सा समुद्री नमक या सेंधा नमक मिलाकर घर की सफाई करें. इसके अलावा, बाथरूम या घर के अंधेरे कोनों में एक कटोरी में नमक भरकर रखें.  यह वातावरण की दूषित ऊर्जा को सोख लेता है.  हर हफ्ते इस नमक को बदल दें.  यह छोटा सा बदलाव घर के माहौल को काफी सकारात्मक बना देता है.

30 अप्रैल 2026 को बनेगा बुधादित्य राजयोग, इन राशियों की बदलेगी किस्मत

30 अप्रैल 2026 को ग्रहों की चाल में एक खास बदलाव देखने को मिलेगा. इस दिन बुद्धि के कारक बुध ग्रह मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही सूर्य देव मौजूद हैं. सूर्य और बुध का एक साथ आना ज्योतिष में बेहद शुभ माना जाता है और इसी संयोग को बुधादित्य राजयोग कहा जाता है. यह योग कुछ राशियों के लिए तरक्की और धन लाभ के नए रास्ते खोल सकता है. बुधादित्य राजयोग का असर कैसा रहेगा? ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य और बुध एक ही राशि में होते हैं, तो व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है. ऐसे लोगों को सम्मान मिलता है और करियर में आगे बढ़ने के मौके मिलते हैं. इस दौरान रुके हुए काम बनने लगते हैं और आमदनी के नए स्रोत भी बन सकते हैं. इन राशियों के लिए रहेगा खास फायदेमंद मेष राशि (Aries) मेष राशि के लिए यह समय काफी अच्छा साबित हो सकता है. नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है. बिजनेस में मुनाफा बढ़ेगा और निवेश से लाभ होने के संकेत हैं. आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और आय में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि वालों को कार्यक्षेत्र में पहचान मिल सकती है. ऑफिस में आपके काम की तारीफ होगी. वैवाहिक जीवन में भी मिठास बढ़ेगी. नई नौकरी या प्रमोशन के योग बन सकते हैं. व्यापार में कोई बड़ा फायदा या डील मिल सकती है. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के लिए यह योग भाग्य को मजबूत करने वाला रहेगा. आपके कई काम आसानी से पूरे हो सकते हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के संकेत हैं. विदेश जाने के अवसर मिल सकते हैं और आय में भी अच्छा इजाफा हो सकता है. बुध देवता को प्रसन्न करने के उपाय रोज सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करें बुधवार के दिन भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं गाय को हरा चारा खिलाएं जरूरतमंद लोगों की मदद करें

सुबह उठते ही आईना देखना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें वास्तु के नियम

 हममें से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि सुबह नींद खुलते ही सबसे पहले आईना देखते हैं. बालों को ठीक करना हो या बस चेहरा देखना, हमें लगता है इसमें बुरा क्या है? लेकिन वास्तु शास्त्र की मानें तो ये छोटी सी आदत आपके पूरे दिन को खराब कर सकती है.   चेहरे पर होती है रात भर की सुस्ती वास्तु कहता है कि जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारे शरीर में आलस और नकारात्मक ऊर्जा भरी होती है. आपने गौर किया होगा कि सुबह चेहरा थोड़ा सूजा हुआ और बुझा-बुझा सा दिखता है.  जैसे ही आप आईना देखते हैं, वो नकारात्मक तरंगें आपकी आंखों के जरिए वापस शरीर में चली जाती हैं. नतीजतन पूरा दिन भारीपन और चिड़चिड़ेपन में बीतता है.  खुद को देखने से अच्छा है ईश्वर को याद करना शास्त्रों में सुबह के समय को ब्रह्म मुहूर्त के आसपास का सबसे पवित्र समय माना गया है. धर्मग्रंथों के अनुसार, सुबह उठते ही सबसे पहले अपने इष्ट देव का स्मरण करना चाहिए या अपनी हथेलियों के दर्शन करने चाहिए. हथेलियों के दर्शन का रहस्य हथेलियों को देखते समय इस मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है. "कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥" इसका अर्थ है कि हाथ के अग्र भाग में माँ लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु (या ब्रह्मा) का वास होता है. जब आप आईना देखते हैं, तो आप इस दैवीय ऊर्जा के बजाय अपनी शारीरिक माया से जुड़ जाते हैं, जिसे अध्यात्म में मोह-माया का प्रतीक माना गया है. बेड के सामने आईना? अगर आपके बेड के ठीक सामने ड्रेसिंग टेबल है और आपकी आंख खुलते ही सबसे पहले अपनी शक्ल दिखती है, तो ये वास्तु के हिसाब से बड़ा दोष है. धार्मिक दृष्टि से माना जाता है कि सोते समय हमारी आत्मा का एक सूक्ष्म अंश शरीर से बाहर विचरण करता है, और आईना उस ऊर्जा को भ्रमित कर सकता है.  इससे घर में तनाव बढ़ता है. तो फिर सुबह उठकर क्या करें? आईने को ढक दें: अगर बेडरूम में आईना है और उसे हटा नहीं सकते, तो रात को सोते समय उस पर एक साफ पर्दा या सफेद कपड़ा डाल दें. यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखने से रोकता है. धार्मिक चित्रों के दर्शन: अपने कमरे में ऐसी जगह पर भगवान, उगते हुए सूरज या चहचहाते पक्षियों की तस्वीर लगाएं जहाँ सुबह सबसे पहले आपकी नजर पड़े. शास्त्रों में इसे मंगल दर्शन कहा गया है. हथेलियां चूमकर दिन शुरू करें: बिस्तर छोड़ने से पहले अपनी हथेलियों को देखें, उन्हें अपने चेहरे पर फेरें. इससे हाथों की सकारात्मक ऊर्जा आपके शरीर में प्रवाहित होती है. चेहरा धोने के बाद ही देखें आईना: जब आप फ्रेश हो जाएं, नहा लें या कम से कम ठंडे पानी से आंखें धो लें, तब आईना देखना सुरक्षित माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जल से शुद्ध होने के बाद शरीर का आभामंडल (Aura) स्वच्छ हो जाता है.

मई 2026 में बनेगा द्विद्वादश राजयोग, इन राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ

 ज्योतिष शास्त्र में जब दो ग्रह एक-दूसरे से 30 डिग्री के अंतर पर स्थित होते हैं, तो उसे द्विद्वादश योग कहा जाता है. मई का महीना बहुत ही विशेष माना जा रहा है. दरअसल, मई के महीने में कई सारे शुभ योगों का निर्माण होने जा रहा है, जिनमें से एक है द्विद्वादश राजयोग. द्रिक पंचांग के अनुसार, 11 मई 2026, सोमवार की सुबह करीब 06:36 बजे एक महत्वपूर्ण ग्रह स्थिति बनने जा रही है. इस समय शुक्र और गुरु ग्रह एक-दूसरे से 30 डिग्री के कोण पर रहेंगे, जिससे द्विद्वादश योग का निर्माण होगा. ज्योतिष में शुक्र को सुख, प्रेम, धन और विलासिता का प्रतीक माना जाता है, जबकि गुरु ज्ञान, भाग्य और समृद्धि से जुड़ा ग्रह है. ऐसे में इन दोनों शुभ ग्रहों का यह संबंध कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है. यह प्रभाव कुछ दिनों तक बना रह सकता है. तो आइए जानते हैं कि द्विद्वादश योग से किन राशियों को लाभ होगा. वृषभ राशि वृषभ राशि के लोगों के लिए यह समय भावनात्मक और पारिवारिक रूप से सुखद रहेगा. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. जीवन के प्रति नजरिया सकारात्मक बनेगा. प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी और परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा. आध्यात्मिक चीजों की ओर भी झुकाव बढ़ सकता है. तुला राशि तुला राशि वालों के लिए यह योग खुशहाली के संकेत दे रहा है. घर-परिवार में सुख-सुविधाएं बढ़ सकती हैं. समाज में आपकी पहचान मजबूत होगी. आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. करियर में भी अच्छे मौके मिल सकते हैं. प्रेम जीवन में नई शुरुआत या मजबूती आने की संभावना है. धनु राशि धनु राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्य का साथ देने वाला साबित हो सकता है. व्यापार में लाभ के योग बनेंगे. दांपत्य जीवन में खुशियां बढ़ेंगी. अचानक धन लाभ के मौके मिल सकते हैं. धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी, जिससे मानसिक संतुलन बना रहेगा. मीन राशि मीन राशि के लोगों के लिए यह योग कई क्षेत्रों में प्रगति का संकेत दे रहा है. घर और संपत्ति से जुड़े मामलों में फायदा हो सकता है. शिक्षा, कला और रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ेगी. रिश्तों में सुधार आएगा और सफलता के नए रास्ते खुल सकते हैं. परिवार से जुड़े मामलों में धैर्य रखना फायदेमंद रहेगा.

25 अप्रैल का राशिफल: कुछ राशियों के लिए रहेगा शुभ, कुछ को नई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है

मेष राशि आपका स्वभाव हल्का-फुल्का और मजाकिया रहेगा, जिससे लोग खुश होंगे, लेकिन परिवार में किसी बात को लेकर मनमुटाव हो सकता है। आर्थिक रूप से अप्रत्याशित लाभ के योग हैं, हालांकि जीवनसाथी के खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। कार्यों के साथ आराम भी जरूरी है, वरना हेल्थ प्रभावित हो सकता है। कार्यक्षेत्र में पुराने तरीकों को बदलने की जरूरत है। किसी बड़े-बुजुर्ग की सलाह आपके लिए मार्गदर्शक साबित होगी। वृषभ राशि आपका व्यक्तित्व आकर्षक रहेगा और लोग आपकी कार्यशैली की सराहना करेंगे। बड़े भाई या परिवार से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। आर्थिक मामलों में उधार चुकाने के लिए दिन अच्छा है। काम में नई तकनीक अपनाना लाभदायक रहेगा। परिवार में खुशियां आएंगी और प्रेम संबंधों में गहराई बढ़ेगी। स्वास्थ्य के लिहाज से वजन और खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। मिथुन राशि कार्यक्षेत्र में व्यस्तता बढ़ेगी जिससे थकान हो सकती है, लेकिन आपके काम की सराहना भी होगी। रुका हुआ धन वापस मिलने और संतान से लाभ के योग हैं, हालांकि खर्च बढ़ सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। प्रेम संबंध मजबूत होंगे, लेकिन जीवनसाथी के व्यवहार में बदलाव आपको सोचने पर मजबूर कर सकता है। कर्क राशि ध्यान और योग से स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। आर्थिक रूप से लाभ के संकेत हैं, खासकर पहले दिया गया पैसा वापस मिल सकता है। बिजनेस में आत्मविश्वास से सफलता मिलेगी और आय बढ़ेगी। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। घरेलू जिम्मेदारियों के कारण थोड़ी व्यस्तता रहेगी, लेकिन करियर में नए अवसर भी मिल सकते हैं। सिंह राशि आपको आराम और परिवार के साथ समय बिताने की जरूरत है, हालांकि काम का दबाव आपको व्यस्त रख सकता है। कार्यस्थल की राजनीति से दूर रहें और सतर्कता बनाए रखें। भाई-बहन की मदद से लाभ मिल सकता है। स्वास्थ्य को लेकर आंखों और शरीर की थकान पर ध्यान दें। प्रेम संबंधों में सुधार के लिए धैर्य और समझदारी जरूरी है। कन्या राशि कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन सराहनीय रहेगा और नए अवसर मिल सकते हैं। बिजनेस में नए प्रोडक्ट या रणनीति से लाभ होगा। आर्थिक रूप से लाभ के योग हैं, लेकिन खर्च भी बढ़ सकते हैं। रिश्तों में व्यवहार को मधुर रखना जरूरी है, वरना विवाद हो सकता है। भूमि या संपत्ति में निवेश फायदेमंद रहेगा। तुला राशि आर्थिक मामलों में सतर्क रहना जरूरी है, लेकिन सही निर्णय लेने पर लाभ मिलेगा और कर्ज से राहत भी मिल सकती है। व्यापार में मुनाफा होगा और महत्वपूर्ण संपर्क बनेंगे। पुराने दोस्तों से मुलाकात संभव है। पारिवारिक विवाद में आपकी भूमिका अहम रहेगी। लव लाइफ में उतार-चढ़ाव रह सकते हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखें। वृश्चिक राशि स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और रुका हुआ धन वापस मिलने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा और नए अवसर मिल सकते हैं। परिवार के साथ अच्छा समय बितेगा और कोई आउटिंग प्लान हो सकता है। रिश्तों में मजबूती आएगी, लेकिन भावनाओं पर नियंत्रण रखना जरूरी है। किसी नए व्यक्ति से मुलाकात जीवन में बदलाव ला सकती है। धनु राशि प्रॉपर्टी या कानूनी मामलों में सावधानी बरतें, फैसले आपके पक्ष में नहीं भी जा सकते हैं। व्यापार में नई डील करते समय जल्दबाजी से बचें और पार्टनरशिप में मतभेद हो सकते हैं। कार्यस्थल पर आलस्य नुकसानदायक रहेगा। परिवार और जीवनसाथी से बातचीत में शब्दों का चयन सोच-समझकर करें। सेहत के लिए नियमित व्यायाम जरूरी है। मकर राशि आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और टीमवर्क से कार्य सफल होंगे। निवेश से लाभ के योग हैं। परिवार में कोई शुभ कार्य या आयोजन हो सकता है। प्रेम संबंध मधुर रहेंगे और विद्यार्थी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। खुद को अपडेट करने और नई चीजें सीखने का प्रयास करें। कुंभ राशि दोस्तों के साथ अच्छा समय बितेगा और मानसिक शांति महसूस होगी। कार्यक्षेत्र में भाग्य का साथ मिलेगा और ट्रांसफर या बदलाव के योग बन सकते हैं। अनुभवी व्यक्ति की सलाह से व्यापार में सुधार होगा। प्रेम जीवन में संयम रखें और गुस्से से बचें। परिवार का सहयोग मिलेगा और दिन संतुलित रहेगा। मीन राशि कार्यक्षेत्र में सतर्क रहें, खासकर ऑफिस पॉलिटिक्स से बचें। नई जिम्मेदारियों के साथ सीखने के अवसर मिलेंगे। आर्थिक रूप से खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए संतुलन जरूरी है। परिवार और दोस्तों के साथ अच्छा समय बितेगा। प्रेम जीवन में विश्वास बढ़ेगा। सेहत को लेकर सावधान रहें और मौसम के प्रभाव से बचाव करें।

बीज की तरह उगने का संदेश: मात्शोना ध्लिवायो का प्रेरक विचार

व्हेन पीपल ट्राय टू बेरी यू, रिमाइंड योरसेल्फ यू आर अ सीड।" यानी जब लोग आपको दफनाने की कोशिश करें, तो खुद को याद दिलाएं कि आप एक 'बीज' हैं। – मात्शोना ध्लिवायो) जीवन में कई बार ऐसा लगता है कि चारों तरफ अंधेरा है। लोग आपकी आलोचना करते हैं, आपको नीचा दिखाते हैं, या आपकी मेहनत को मिट्टी में मिलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे हताश पलों के लिए प्रसिद्ध दार्शनिक मात्शोना ध्लिवायो (Matshona Dhliwayo) का यह विचार किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। आइए, इस गहरे विचार को समझते हैं। इस विचार का असली अर्थ इस कोट में एक बहुत ही खूबसूरत रूपक (Metaphor) है। जब हम किसी चीज को दफनाते हैं, तो उसका मतलब होता है उसका 'अंत'। लेकिन जब एक बीज को मिट्टी में दबाया जाता है, तो वह उसका अंत नहीं, बल्कि 'नई शुरुआत' होती है। लेखक कहना चाहते हैं कि जब दुनिया आपको दबाने, कुचलने या अंधेरे में धकेलने की कोशिश करे, तो घबराएं नहीं। वो अनजाने में आपको वही माहौल दे रहे हैं जो एक बीज को पेड़ बनने के लिए चाहिए। अंधेरा और दबाव ही आपको अंकुरित होने में मदद करेंगे। आपका 'दफन' होना दरअसल आपके 'उदय' होने की तैयारी है। कौन हैं मात्शोना ध्लिवायो? मात्शोना ध्लिवायो, जिम्बाब्वे में जन्मे और कनाडा में बसे एक प्रसिद्ध दार्शनिक, लेखक और उद्यमी हैं। वे अपनी 'विजडम कोट्स' के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। उनकी लेखनी की खासियत यह है कि वे बहुत कम शब्दों में जीवन के सबसे मुश्किल सच को बड़ी सरलता से कह जाते हैं। उनकी किताबें आध्यात्मिकता, सफलता और व्यक्तिगत विकास पर केंद्रित होती हैं। आज के दौर में यह क्यों जरूरी है? आज 2026 में, हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहां प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव चरम पर है।     Workplace Politics: ऑफिस में कोई क्रेडिट ले जाता है या बॉस के सामने आपकी इमेज खराब करता है।     Social Media: लोग ट्रोल्स बनकर आपको नीचा दिखाते हैं।     Failures: कभी-कभी हालात हमें कर्ज या असफलता के बोझ तले दबा देते हैं। ऐसे समय में यह विचार हमें याद दिलाता है कि "प्रेशर कुकर" जैसी स्थिति ही हमें हीरा बनाती है। यह हमें 'विक्टिम' बनने की बजाय 'योद्धा' बनने की प्रेरणा देता है। इसे अपनी जिंदगी में कैसे उतारें? सिर्फ पढ़ने से कुछ नहीं होगा, इसे अमल में लाना जरूरी है। यहां 3 तरीके दिए गए हैं:     बीज जमीन के नीचे शोर नहीं मचाता, वह चुपचाप उगता है। जब लोग आलोचना करें, तो पलटकर जवाब देने की बजाय अपनी 'जड़ों' (Skills) को मजबूत करें। आपकी सफलता शोर मचाएगी।     लोग जो 'गंदगी' (नकारात्मकता) आप पर फेंक रहे हैं, उसे खाद समझें। वही गंदगी आपको पोषण देगी और आपको मजबूत बनाएगी।     दफन होने के तुरंत बाद पौधा नहीं निकलता। इसमें वक्त लगता है। अपने बुरे वक्त में खुद पर भरोसा रखें, आप खत्म नहीं हुए हैं, बस तैयार हो रहे हैं। मात्शोना ध्लिवायो का यह विचार हमें लचीलापन (Resilience) सिखाता है। अगली बार जब आपको लगे कि दुनिया का बोझ आपको दबा रहा है, तो मुस्कुराएं और खुद से कहें- "मैं खत्म होने वाला कचरा नहीं, मैं सृजन करने वाला बीज हूं।" मिट्टी के सीने को चीरकर बाहर आना ही आपकी नियति है। उगते रहिए!  

वट सावित्री व्रत 2026: जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत बेहद शुभ माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और सतीत्व के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस छीन लिए थे। हर साल की तरह इस बार भी महिलाओं के मन में इस व्रत की तारीख को लेकर थोड़ी कन्फ्यूजन है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं। वट सावित्री व्रत 2026 तिथि और समय हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई को सुबह 05 बजकर 11 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 17 मई को रात 01 बजकर 30 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए वट सावित्री व्रत 16 मई को रखा जाएगा। इसी दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। पूजा का शुभ मुहूर्त 16 मई को सुबह से ही पूजा के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 07 मिनट से 04 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 4 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 07 बजकर 04 मिनट से 07 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा कर सकते हैं। वट वृक्ष की पूजा का महत्व शास्त्रों में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना गया है, क्योंकि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है। इस वृक्ष की पूजा कर महिलाएं अपने पति के लिए लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि मांगती हैं। पूजा के दौरान वट वृक्ष पर सूत का धागा लपेटना और 7 या 108 बार परिक्रमा करना विशेष फलदायी होता है। पूजन विधि इस दिन महिलाएं सुबह स्नान के बाद नए वस्त्र पहनकर शृंगार करती हैं। पूजा की थाली में धूप, दीप, रोली, अक्षत, कच्चा सूत, फल और भीगे हुए चने रखे जाते हैं। सावित्री और सत्यवान की कथा सुनी जाती है और अंत में बड़ों का आशीर्वाद लेकर व्रत पूर्ण किया जाता है। कई स्थानों पर इस दिन आटे के गुलगुले व कई तरह के पकवान बनाने की भी परंपरा है।  

सीता नवमी पर विवाह में देरी दूर करने के खास उपाय और पूजा विधि

 वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को 'सीता नवमी' या 'जानकी नवमी' के रूप में बड़े ही भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सीता का प्राकट्य धरती से हुआ था। माता सीता को त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सीता नवमी का दिन उन जातकों के लिए वरदान के समान है, जिनके विवाह में देरी हो रही है। ऐसे में आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं। सीता नवमी और मां गौरी का संबंध माता सीता ने खुद भगवान श्री राम को पति के रूप में पाने के लिए देवी गौरी की कठिन आराधना की थी। उन्होंने 'गिरिजा पूजन' कर माता गौरी से सुयोग्य वर का आशीर्वाद मांगा था। यही वजह है कि सीता नवमी के दिन अगर कुंवारी कन्याएं माता गौरी की पूजा करती हैं, तो उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। करें ये खास उपाय गौरी-सीता पूजन: सीता नवमी के दिन माता सीता और भगवान राम के साथ मां गौरी की प्रतिमा स्थापित करें। माता सीता को पीली चुनरी और मां गौरी को लाल चुनरी अर्पित करें। इससे कुंडली के दोष शांत होते हैं। शृंगार सामग्री का दान: इस दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री दान करने से विवाह के योग जल्दी बनते हैं। मनोकामना पूर्ति मंत्र: पूजा के दौरान तुलसीदास जी द्वारा रचित 'रामचरितमानस' के उस प्रसंग का पाठ करें, जिसमें सीता जी गौरी पूजन करती हैं। प्रसंग "मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो।" इस चौपाई के जप से विवाह की अड़चनें स्वतः समाप्त होने लगती हैं। पीले फूल चढ़ाएं: अगर विवाह तय होकर बार-बार टूट जाता है, तो सीता नवमी पर राम-सीता के चरणों में 108 पीले फूल अर्पित करें। ।।गौरी स्तुति।। जय जय गिरिराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी॥ जय गजबदन षडानन माता। जगत जननि दामिनी दुति गाता॥ देवी पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥ मोर मनोरथ जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबही के॥ कीन्हेऊं प्रगट न कारन तेहिं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं॥ बिनय प्रेम बस भई भवानी। खसी माल मुरति मुसुकानि॥ सादर सियं प्रसादु सर धरेऊ। बोली गौरी हरषु हियं भरेऊ॥ सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥ नारद बचन सदा सूचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥ मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो। करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥ एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हियं हरषीं अली। तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥ ।।गौरी स्त्रोत।। ॐ रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके। हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके।। हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके। शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके।। मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले। सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये।। पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते। पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम्।। मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले। संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्।। देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः। प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे।। तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम्। वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने-दिने।। मामरक्ष रक्ष-रक्ष ॐ मंगल मंगले।

गर्मी में घर में सांप आने का कारण और वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके संकेत

तपती गर्मी और उमस के कारण जमीन के अंदर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे बचने के लिए सांप अक्सर ठंडी जगहों की तलाश में इंसानी बस्तियों या घरों का रुख करते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र में सांपों के आगमन को केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं माना जाता. इसे घर की ऊर्जा और वास्तु दोषों से जोड़कर देखा जाता है. क्या कहता है वास्तु शास्त्र? वास्तु के अनुसार, सांप का घर में आना राहु और केतु ग्रहों के प्रभाव को दर्शाता है. यदि आपके घर में राहु का दोष है, तो ऐसे जीव घर की ओर आकर्षित हो सकते हैं. विशेष रूप से घर का नैऋत्य कोण (South-West) यदि दूषित हो या वहां गंदगी रहती हो, तो यह राहु को सक्रिय करता है, जो सांपों के आगमन का कारण बन सकता है. इन दिशाओं से निकलना है खतरे की घंटी अगर सांप बार-बार घर की उत्तर-पश्चिम (Vayavya) या दक्षिण-पश्चिम दिशा से प्रवेश कर रहा है, तो यह घर में अस्थिरता और मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के नीचे दरारें होना या दहलीज का टूटा होना भी नकारात्मक ऊर्जा और रेंगने वाले जीवों को निमंत्रण देता है. पितृ दोष और कालसर्प दोष का संकेत पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सांपों का संबंध हमारे पूर्वजों से भी माना गया है. यदि किसी को सपने में बार-बार सांप दिखें या गर्मियों में अचानक घर के आंगन में सांप आ जाए, तो यह पितृ दोष या कुंडली में कालसर्प दोष का संकेत हो सकता है. यह इस बात की ओर इशारा करता है कि घर में किसी विशेष पूजा या शुद्धि की आवश्यकता है. वास्तु दोष दूर करने के उपाय गर्मियों में सांपों को घर से दूर रखने और वास्तु दोष को शांत करने के लिए आप ये उपाय कर सकते हैं: सफाई का महत्व: घर के ईशान कोण (North-East) को हमेशा साफ और खाली रखें. यहां कबाड़ जमा होने से राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है. सर्पगंधा का पौधा: घर के मुख्य द्वार के पास या बगीचे में सर्पगंधा या लेमन ग्रास का पौधा लगाएं. इनकी सुगंध से सांप दूर रहते हैं और वास्तु भी ठीक रहता है. चंदन की धूप: घर में नियमित रूप से चंदन की धूप या अगरबत्ती जलाएं. इसकी महक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. शिव उपासना: चूंकि सांप भगवान शिव के आभूषण हैं, इसलिए घर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप या शिव चालीसा का पाठ करने से भय और दोष दोनों दूर होते हैं.