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वास्तु के ये 5 नियम बदल देंगे आपकी किस्मत, सुबह और शाम की इन गलतियों को सुधारने से घर में आएगी सुख और समृद्धि

  वास्तु शास्त्र में सुबह और शाम के समय को घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का सबसे खास वक्त माना गया है. हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते थे कि घर की बरकत केवल अच्छी कमाई से नहीं, बल्कि सही आदतों से आती है. अक्सर हम अनजाने में सुबह उठने या शाम के वक्त कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे घर में दरिद्रता आने लगती है. अगर आप भी महसूस करते हैं कि मेहनत के बाद भी पैसा नहीं टिक रहा या घर में तनाव रहता है, तो आपको अपनी दिनचर्या के इन 5 वास्तु नियमों पर ध्यान देने की जरूरत है. 1. सुबह देर तक सोना सूर्योदय के बाद भी देर तक सोते रहना स्वास्थ्य और सौभाग्य दोनों के लिए बुरा माना जाता है. वास्तु के अनुसार, जो लोग सुबह देर तक सोते हैं, उनके घर में नकारात्मकता बढ़ती है, ऐसे घरों में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता. कोशिश करें कि सूर्योदय से पहले या साथ उठें. 2. शाम को झाड़ू लगाना शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय यानी सूर्यास्त के वक्त घर में झाड़ू नहीं लगानी चाहिए. माना जाता है कि शाम को झाड़ू लगाने से घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती है. अगर झाड़ू लगाना बहुत जरूरी हो, तो कूड़ा घर के बाहर न फेंकें, उसे एक कोने में इकट्ठा कर दें. 3. सूर्यास्त के समय सोना शाम के समय सोना वर्जित माना गया है. जो लोग गोधूलि वेला (शाम के वक्त) में सोते हैं, उन्हें शारीरिक बीमारियां घेर सकती हैं . घर में दरिद्रता आती है. यह समय पूजा-पाठ और ध्यान का होता है, न कि सोने का. 4. मुख्य द्वार पर अंधेरा रखना शाम होते ही घर के मुख्य द्वार पर रोशनी जरूर करनी चाहिए. अंधेरा दरवाजा नकारात्मक शक्तियों को आकर्षित करता है. प्रवेश द्वार पर दीपक या बल्ब जलाकर रखने से मां लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं, जिससे व्यापार व करियर में तरक्की होती है. 5. तुलसी के पास गंदगी या अंधेरा सुबह-शाम तुलसी की देखभाल बहुत जरूरी है. शाम को तुलसी के पास दीपक जरूर जलाएं, लेकिन याद रखें कि सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्तों को कभी न छुएं और न ही जल चढ़ाएं. तुलसी के आसपास गंदगी रखना भी धन हानि का बड़ा कारण बनता है.

शुक्र और शनि के मिलन से बना दुर्लभ दशांक योग, आज से अगले 48 घंटे इन 3 राशियों के लिए खुलेंगे बंद किस्मत के ताले

  ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को ऐश्वर्य, सुख-सुविधा और विलासिता का कारक माना जाता है, वहीं शनि देव कर्म, अनुशासन और न्याय के अधिपति हैं. जब इन दो महत्वपूर्ण ग्रहों के बीच विशेष दृष्टि संबंध बनता है, तो यह राजयोग के जैसा शक्तिशाली फल मिलने लगता है. ज्योतिष गणना के अनुसार, जब शुक्र और शनि एक-दूसरे से दशम भाव (10th House) में स्थित होते हैं या उनके बीच 36 डिग्री की विशेष दूरी होती है, तो इसे दशांक दृष्टि या दशांक योग कहा जाता है.   10 अप्रैल को बना महासंयोग: 48 घंटे रहेंगे बेहद खास आज 10 अप्रैल 2026 को यह दुर्लभ दशांक योग सुबह ही बन चुका है. आज सुबह 04:39 बजे शुक्र और शनि एक-दूसरे से ठीक 36 डिग्री के विशेष कोण पर आए, जिससे इस शुभ योग की शुरुआत हुई. इस खगोलीय घटना का सबसे तीव्र और सीधा असर अगले 48 घंटों तक बना रहेगा. यह समय आर्थिक निवेश, नए व्यावसायिक समझौतों और करियर से जुड़े बड़े फैसले लेने के लिए बेहद शुभ है. विशेष रूप से तीन भाग्यशाली राशियों के लिए यह योग दरिद्रता दूर करने वाला और बंद किस्मत के ताले खोलने वाला साबित होगा. इन 3 राशियों पर होगी धन की वर्षा वृषभ राशि (Taurus): आपकी राशि के स्वामी शुक्र हैं.  शनि आपके भाग्य भाव के स्वामी हैं. इस योग के कारण व्यापार में बड़ा मुनाफा होगा. अगर आप नया घर या गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह समय सबसे उत्तम है. तुला राशि (Libra): आपके लिए यह योग करियर में बड़ी छलांग लगाने वाला साबित होगा. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और वेतन वृद्धि की खुशखबरी मिल सकती है.  आपकी लाइफस्टाइल में बड़ा सकारात्मक बदलाव आएगा. कुंभ राशि (Aquarius): शनि आपकी ही राशि के स्वामी हैं. शुक्र की कृपा से आपको पैतृक संपत्ति से लाभ मिल सकता है. जो जातक कला, मीडिया या फैशन जगत से जुड़े हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है. सुख-समृद्धि के लिए करें ये उपाय दशांक योग का पूर्ण लाभ लेने के लिए शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी को सफेद मिठाई का भोग लगाएं. साथ ही, शनिवार को गरीबों को काले चने या वस्त्र दान करें.  इससे शनि और शुक्र दोनों ग्रह मजबूत होंगे. जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी.

मेष राशि में 14 अप्रैल को सूर्य का महागोचर, उच्च अवस्था में आकर चमकाएंगे कई राशियों का भाग्य और कुछ के लिए बढ़ेगी मुश्किल

 सूर्य महाराज 14 अप्रैल 2026 को मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव मेष राशि में उच्च अवस्था में होते हैं और इसके अधिपति देव मंगल ग्रह हैं. ऐसा माना जाता है कि मेष राशि में सूर्य देव उच्च अवस्था में होते हैं इसलिए हम कह सकते हैं कि इस राशि में सूर्य ग्रह बहुत शक्तिशाली स्थिति में होते हैं. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को उग्र ग्रह माना जाता है और जब यह मेष राशि में स्थित होते हैं. मेष राशि में सूर्य के आने से जातकों की बुद्धि तेज होती है. कई विषयों का अच्छा ज्ञान भी होता है. सूर्य मेष राशि में होने पर जातक योद्धा, सरकार से जुड़े क्षेत्रों जैसे सेना और पुलिस आदि में नेतृत्व संबंधित भूमिकाओं में सफलता प्राप्त करते हैं. ज्योतिषियों की मानें तो, सूर्य का यह गोचर कई राशियों के लिए अशुभ भी रहेगा. आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में. वृषभ राशि वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य देव का यह गोचर बारहवें भाव में होने जा रहा है. जीवन में समस्याएं आ सकती हैं. करियर में सफलता पाने के लिए अनेक बार प्रयास करने पड़ सकते हैं. बेकार की यात्राएं करनी पड़ सकती हैं. काफी धन खर्च हो सकता है. माता की सेहत आपके लिए चिंता का विषय हो सकती है. कुछ परिस्थितियों में अपने घर से दूर रहना पड़ सकता है. सरकार या प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. सेहत का ख्याल रखना होगा. कन्या राशि कन्या राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रह बारहवें भाव में गोचर करने जा रहे हैं. इस दौरान किसी नियम का उल्लंघन न करें. किसी भी तरह की गलती से बचना होगा. स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. आपको सावधानी बरतने और समझदारी से काम लेना होगा. आर्थिक नुकसान हो सकता है. तुला राशि तुला राशि वालों के लिए सूर्य का गोचर ग्यारहवें भाव में होगा. आपके रिश्ते में समस्याएं पैदा कर सकती हैं. अहंकार से जुड़े विवाद आपके रिश्तों में तनाव पैदा कर सकते हैं. आपके लिए धैर्य और समझदारी से काम लेना जरूरी होगा. आपको यात्रा के दौरान परेशानियां हो सकती हैं. व्यापार में भी कठिनाई का अनुभव हो सकता है. पेशेवर जीवन में अगर आप सतर्क रहकर काम करेंगे, तो आपको धन लाभ हो सकता है. मानसिक तनाव हो सकता है.

साल 2026 में 24 अप्रैल को मनाई जाएगी बगलामुखी जयंती, शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली मां पीताम्बरा की पूजा का बन रहा शुभ संयोग

 हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का बहुत महत्व है, जिनमें से आठवीं शक्ति माँ बगलामुखी हैं. इन्हें पीताम्बरा भी कहा जाता है क्योंकि इन्हें पीला रंग बहुत प्रिय है. मान्यता है कि इनकी पूजा करने से विरोधियों पर जीत मिलती है. साल 2026 में माँ बगलामुखी की जयंती बहुत ही शुभ संयोग में मनाई जाएगी. कब है बगलामुखी जयंती? साल 2026 में बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी. अष्टमी तिथि 24 अप्रैल 2026 सुबह 07:18 बजे से शुरू होगी. तिथि का समापन 25 अप्रैल 2026 सुबह 05:51 बजे तक होगा. पूजा के लिए शुक्रवार का पूरा दिन बहुत शुभ रहने वाला है. माँ बगलामुखी की महिमा माँ बगलामुखी को स्तंभन की देवी माना जाता है. कहते हैं कि इनकी कृपा से इंसान की वाणी और शत्रुओं की बुद्धि पर नियंत्रण पाया जा सकता है. कोर्ट-कचहरी के मामलों या वाद-विवाद में सफलता पाने के लिए माँ बगलामुखी की साधना अचूक मानी जाती है. पूजा की आसान विधि माँ की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है, इसलिए इसे पीताम्बरा उपासना भी कहते हैं. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पीले रंग के कपड़े पहनें. पूजा के लिए पीले रंग के आसन का इस्तेमाल करें. माँ की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से साफ करें. उन्हें पीले फूल, पीला चंदन, पीला फल और पीला भोग (जैसे बेसन के लड्डू) चढ़ाएं. पूजा के दौरान शुद्ध घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं. संभव हो तो इस दिन व्रत रखें और माँ के मंत्रों का जाप करें. शक्तिशाली मंत्र पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना बहुत फलदायी माना जाता है. "ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वान्कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।" मंत्र का जाप हल्दी की माला से करना सबसे उत्तम माना जाता है. कहाँ है प्रमुख मंदिर? माँ बगलामुखी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित पीताम्बरा पीठ और हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित बगलामुखी मंदिर शामिल हैं. जयंती के दिन इन मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और हवन किए जाते हैं, जिनमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं.

10 अप्रैल 2026 राशिफल: मेष में बढ़ेगी हलचल, सिंह और मकर के लिए मेहनत का फल

मेष 10 अप्रैल के दिन योजना बनाने के लिए बेहतरीन समय है। बदलती एनर्जी को अपनाना चाहिए। अपनी स्किल्स और समझ को बढ़ाने की ओर ध्यान देना चाहिए। विलासिता की वस्तुओं की अप्रत्याशित खरीदारी से बचना महत्वपूर्ण है। वृषभ 10 अप्रैल के दिन कुछ लोगों को अपने परिवार या भविष्य की योजनाओं से संबंधित खर्च उठाने पड़ सकते हैं। स्मार्ट बजट आपको संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है। काम पर, निरंतर प्रयास तारीफ दिला सकते हैं, भले ही प्रगति धीमी लगे। मिथुन 10 अप्रैल के दिन आपको अपनी खर्च करने की आदतों पर ध्यान देने और वित्तीय योजनाओं को फिर से प्लान करना पड़ सकता है। आपकी ईमानदारी स्ट्रांग बॉन्ड या रोमांचक नई शुरुआत का कारण बन सकती है। सेहत का ध्यान रखें। कर्क 10 अप्रैल के दिन आपकी क्षमता और स्किल्स को प्रेजेंट करने का समय है। अपने मन पर भरोसा रखें और अच्छे रिश्ते बनाने पर फोकस करें। बैलेंस बनाने पर फोकस करें। आपको अपनी स्किल्स दिखाने का मौका मिल सकता है। सिंह 10 अप्रैल के दिन अपने गोल्स की तरफ आगे बढ़ने और बदलाव लाने का एक दुर्लभ अवसर मिल सकता है। आपको अप्रत्याशित चुनौतियों और आकर्षक अवसरों दोनों का स्वाद चखने का मौका मिलेगा। कन्या 10 अप्रैल के दिन आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। आपको ट्रैवल या ड्राइव करते समय सावधान रहना चाहिए। ऑफिस में लोग आपकी मेहनत और प्रयासों की तारीफ करेंगे। तुला 10 अप्रैल के दिन आप अपना आत्मविश्वास दोबारा कायम कर सकते हैं। पर्सनल विकास और करियर विकास के तौर पर किए गए सिक्योर इन्वेस्टमेंट से महत्वपूर्ण लाभ हो सकता है। वृश्चिक 10 अप्रैल के दिन जल्दबाजी में खर्च करने के बजाय सोच समझकर प्लान करना चाहिए। गुस्से और वाणी पर काबू रखें। आपको मनचाहा लाभ मिल सकता है। काम के सिलसिले में ट्रैवल करना पड़ सकता है। धनु 10 अप्रैल के दिन नेटवर्किंग या पुराने दोस्तों की मदद से नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होगा। स्टूडेंट्स, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें खास ध्यान देना होगा। मकर 10 अप्रैल के दिन विद्यालय में स्टूडेंट्स की सफलता का राज रहेगा कि वे रट्टा मारने के बजाय दीप लर्निंग पर फोकस करें। स्वयं की तुलना दूसरों से न करें। लव लाइफ में रोमांस रहेगा। कुंभ 10 अप्रैल के दिन की शुरुआत में कुछ चुनौतियों आएंगी, जिनका सामना करना पड़ सकता है। सेहत का ध्यान रखना आवश्यक है। आप अपने अपने सभी पेंडिंग काम पूरा करने के लिए मोटिवेटेड महसूस करेंगे। मीन 10 अप्रैल के दिन आज का दिन आपके लिए मिले-जुले परिणाम लेकर आया है। आपको पैसों के मामले में लाभ हो सकता है। कुछ की जिम्मेदारी बढ़ेगी, लेकिन साथ ही आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा।  

सफल होना है तो सीखें चुप रहने की कला, आचार्य चाणक्य के अनुसार कम बोलने वाले ही बनते हैं समझदार

आचार्य चाणक्य प्राचीन भारत के महान विद्वान, शिक्षक, अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ थे, जिनको कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है. चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को मार्गदर्शन देकर मौर्य साम्राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनकी नीतियों और बुद्धिमत्ता के कारण उन्हें भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली विचारकों में गिना जाता है. इन्हीं नीतियों का उदाहरण था चाणक्य नीति. चाणक्य नीति एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें जीवन को सही तरीके से जीने के नियम और ज्ञान के बारे में बताया गया है. इसमें व्यक्ति के व्यवहार, रिश्तों, सफलता, धन, शिक्षा, राजनीति और समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताया गया है. चाणक्य नीति की बातें आज के जीवन में बहुत ही उपयोगी मानी जाती है, जिनमें सबसे विशेष बात है कम बोलना. आचार्य चाणक्य के अनुसार, कम बोलने की आदत व्यक्ति को समझदार बनाती है. जो लोग कम बोलते हैं, वे अक्सर जीवन में ज्यादा सफल और सम्मानित होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि वे अपनी ऊर्जा बेवजह की बातों में खर्च करने के बजाय सही जगह इस्तेमाल करते हैं. सोच-समझकर बोलना बनाता है समझदार आचार्य चाणक्य के मुताबिक, कम बोलने वाले लोग हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देते हैं. वे पहले स्थिति को समझते हैं, फिर अपनी बात रखते हैं. इससे उनके फैसले ज्यादा सही होते हैं और वे गलतफहमियों से भी बचे रहते हैं. यही आदत उन्हें दूसरों से ज्यादा परिपक्व बनाती है. जो लोग कम बोलते हैं उनकी बातें ज्यादा महत्व रखती हैं. वे फालतू की चर्चा में नहीं पड़ते, इसलिए जब भी कुछ कहते हैं, लोग ध्यान से सुनते हैं. इससे उनकी बातों का प्रभाव भी बढ़ता है और समाज में उनकी अलग पहचान बनती है. हर बात शेयर करना नहीं है सही कम बोलने का एक फायदा यह भी है कि व्यक्ति अपनी योजनाएं और निजी बातें हर किसी को नहीं बताता है. चाणक्य मानते हैं कि अपनी रणनीति को सीमित लोगों तक रखना ही समझदारी है. इससे नुकसान होने की संभावना कम हो जाती है. कई बार चुप रहना ही सबसे अच्छा फैसला होता है. खासकर तब, जब सामने वाला आपकी बात समझने के मूड में न हो. ऐसे में शांत रहकर स्थिति को संभालना ज्यादा बेहतर होता है. जो लोग कम बोलते हैं, उन्हें लोग ज्यादा गंभीरता से लेते हैं. उनकी बातों की अहमियत होती है और समाज में उन्हें सम्मान मिलता है. यही आदत उन्हें धीरे-धीरे सफलता की ओर भी ले जाती है.

सावधान! शनि बदल रहे हैं अपना नक्षत्र, मेष और मकर समेत इन राशियों पर बढ़ेगा मानसिक और आर्थिक दबाव

 ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मों का न्यायाधीश माना जाता है.  जब यह ग्रह अपनी चाल या नक्षत्र बदलता है, तो इसका असर सिर्फ राशियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यक्ति की सोच, निर्णय लेने की क्षमता और आर्थिक हालात पर भी साफ दिखाई देता है. इस बार शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026 17 अप्रैल 2026 से एक नए नक्षत्रीय चरण में प्रवेश करेगा. यह स्थिति लगभग एक महीने तक बनी रहेगी . इस दौरान कई लोगों को जीवन में धीमापन और दबाव महसूस हो सकता है. इस समय रुके हुए कामों में देरी बढ़ सकती है, जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसान दे सकते हैं. कई बार ऐसा लगेगा कि हालात आपके खिलाफ जा रहे हैं, लेकिन वास्तव में यह समय आपको परखने और मजबूत बनाने का होता है. हालांकि, जो लोग धैर्य रखते हैं, सही रणनीति अपनाते हैं और बिना शॉर्टकट के आगे बढ़ते हैं, उनके लिए यही समय भविष्य की सफलता की नींव रख सकता है. यही वजह है कि इस अवधि को सिर्फ कठिन समय नहीं, बल्कि एक तरह का रीसेट पीरियड भी माना जा रहा है. इन 4 राशियों पर रहेगा सबसे ज्यादा असर 1. मेष राशि (Aries) इस दौरान मेष राशि वालों के लिए हालात थोड़े चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. करियर में रुकावट या अचानक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसान दे सकते हैं. आर्थिक मामलों में सतर्क रहना जरूरी होगा. 2. कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि वालों को इस समय भावनात्मक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. रिश्तों में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं.परिवार से जुड़ी चिंताएं परेशान कर सकती हैं. मानसिक तनाव महसूस हो सकता है, शांत रहें . बातचीत से समस्याएं सुलझाएं. 3. तुला राशि (Libra) तुला राशि वालों के लिए यह समय मेहनत का होगा, लेकिन परिणाम धीरे मिलेंगे. करियर में प्रगति धीमी हो सकती है.काम का दबाव बढ़ सकता है. आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है. लगातार मेहनत करते रहें, समय के साथ स्थिति बेहतर होगी. 4. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि पर शनि का प्रभाव गहरा माना जाता है, इसलिए यह समय थोड़ा भारी रह सकता है. खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है. सेहत को लेकर लापरवाही नुकसान दे सकती है. जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं. खर्चों पर नियंत्रण रखें. आखिर में क्या होगा? शनि का यह चरण भले ही शुरुआत में मुश्किलों से भरा लगे, लेकिन इसका असली उद्देश्य आपको मजबूत बनाना है. यह समय आपकी गलतियों को सुधारने, धैर्य सीखने और सही दिशा में आगे बढ़ने का मौका देता है.अगर आप इस दौरान संयम और मेहनत के साथ आगे बढ़ते हैं, तो यही समय आपके जीवन में बड़ा बदलाव लाकर एक नई शुरुआत की नींव रख सकता है.

कालाष्टमी 2026: 10 अप्रैल को है ‘काशी के कोतवाल’ का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और प्रिय भोग

:कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है. साल 2026 में यह पर्व 10 अप्रैल को मनाया जाएगा. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से भय दूर होता है और जीवन की परेशानियां समाप्त हो जाती हैं. काल भैरव को “काशी का कोतवाल” भी कहा जाता है, जो अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करते हैं. कालाष्टमी 2026: शुभ मुहूर्त और समय हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है:     अष्टमी तिथि प्रारंभ: 9 अप्रैल 2026, रात्रि 09:19 बजे से     अष्टमी तिथि समाप्त: 10 अप्रैल 2026, रात्रि 11:15 बजे तक     मुख्य व्रत तिथि: उदय तिथि के अनुसार, मुख्य व्रत 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा. प्रिय भोग मान्यता है कि भगवान काल भैरव को इमरती, जलेबी, बाटी-चूरमा, तली हुई पापड़, बेसन के लड्डू और काले उड़द से बनी चीजें अत्यंत प्रिय हैं. इसलिए पूजा के लिए भोग में इन चीजों को अवश्य शामिल करें. इसके अलावा, इस दिन कच्चा दूध और मीठी रोटी का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है. शुभ रंग भगवान काल भैरव का संबंध शनि और राहु से भी माना जाता है. इसलिए उन्हें काला और नीला रंग पहनाना शुभ माना जाता है. प्रिय फूल काल भैरव को कनेर और आक के फूल चढ़ाना श्रेष्ठ माना गया है. इसके अलावा उन्हें नीले रंग के फूल जैसे अपराजिता भी अर्पित किए जा सकते हैं. पूजन विधि: ऐसे करें आराधना     स्नान और संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान काल भैरव के व्रत का संकल्प लें.     स्थापना: चौकी पर काल भैरव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.     अभिषेक: काल भैरव का पंचामृत या कच्चे दूध से अभिषेक करें.     दीपक: चौमुखी दीपक जलाएं, जिसमें सरसों का तेल प्रयोग करें.     पाठ और मंत्र: भगवान काल भैरव के मंत्र “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” या “ॐ कालभैरवाय नमः” का जप करें. इस दिन काल भैरव अष्टक का पाठ करना विशेष फलदायी होता है.     कथा और चालीसा: भगवान काल भैरव की व्रत कथा और चालीसा का पाठ करें.     आरती: अंत में आरती कर पूजा पूर्ण करें. कालाष्टमी की पौराणिक कथा शिव पुराण के अनुसार, एक बार सृष्टि की रचना करने वाले ब्रह्मा जी और पालनकर्ता भगवान विष्णु के बीच यह बहस छिड़ गई कि उनमें सबसे महान कौन है. इस विवाद को सुलझाने के लिए महादेव एक अंतहीन ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए. दोनों के बीच यह शर्त रखी गई कि जो भी इस प्रकाश स्तंभ का आदि या अंत खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा. भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण कर पाताल की ओर जाकर सत्य स्वीकार किया कि इसका कोई अंत नहीं है. दूसरी ओर, ब्रह्मा जी हंस बनकर आकाश की ओर गए. अंत न मिलने पर भी उन्होंने छल करके दावा किया कि उन्होंने अंत देख लिया है और केतकी के पुष्प को भी झूठ बोलने के लिए राज़ी कर लिया. ब्रह्मा जी के इस अहंकार और असत्य को देखकर भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए, और उनके क्रोध से भयंकर रूप वाले काल भैरव प्रकट हुए. काल भैरव ने अपने नाखून से ब्रह्मा जी का पांचवां मुख काट दिया, जिससे उन्होंने झूठ बोला था और शिव की निंदा की थी. चूंकि काल भैरव ने एक ब्राह्मण (ब्रह्मा जी) का सिर काटा था, इसलिए उन पर ‘ब्रह्महत्या’ का पाप लगा और वह कटा हुआ सिर उनके हाथ से चिपक गया. इस पाप से मुक्ति पाने के लिए वे तीनों लोकों में भटके, लेकिन अंततः जब वे काशी (वाराणसी) पहुंचे, तो वह सिर उनके हाथ से छूट गया और वे मुक्त हो गए. तभी से काल भैरव को ‘काशी का कोतवाल’ कहा जाता है, जिनके दर्शन के बिना काशी की यात्रा अधूरी मानी जाती है.

घर में लगा मनी प्लांट कहीं आपको कंगाल तो नहीं बना रहा? वास्तु की इन 5 गलतियों को आज ही सुधारें

 घर के कोने में लगा हुआ मनी प्लांट सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि वास्तु के मुताबिक शुभ पौधा माना जाता है. वास्तु शास्त्र कहता है कि अगर इसकी सही से देखभाल की जाए, तो यह सोई हुई किस्मत जगा सकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही इस धन वर्षा को आर्थिक तंगी में बदल सकती है?अगर कड़ी मेहनत के बाद भी हाथ खाली रहता है, तो चेक करें कहीं आप ये गलतियां तो नहीं कर रहे. 1. दिशा का रखें ध्यान मनी प्लांट को कभी भी उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में न रखें. वास्तु के अनुसार, यह दिशा इस पौधे के लिए सबसे ज्यादा नकारात्मक मानी जाती है. इसे हमेशा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में लगाएं, क्योंकि यह भगवान गणेश की दिशा है, जो बाधाओं को दूर करते हैं. 2. जमीन चूमती बेल मनी प्लांट को 'वेल्थ क्रीपर' कहा जाता है.  इसकी बेलें जितनी ऊपर की ओर जाएंगी, आपकी तरक्की का ग्राफ भी उतना ही ऊंचा होगा. अगर इसकी बेलें जमीन पर रेंग रही हैं, तो समझ लीजिए कि आपके घर की लक्ष्मी बाहर जाने का रास्ता ढूंढ रही है.  किसी धागे या डंडी के सहारे इसे हमेशा ऊपर की ओर चढ़ाएं. 3. पीलापन यानी नकारात्मकता का साया मुरझाए और सूखे पत्ते सिर्फ पौधे की बीमारी नहीं, बल्कि आने वाले आर्थिक संकट का इशारा हैं.  अगर आपके मनी प्लांट के पत्ते पीले पड़ रहे हैं, तो उन्हें तुरंत हटा दें.  सूखे पत्ते घर की पॉजिटिव एनर्जी को सोख लेते हैं. 4. कांच की बोतल या मिट्टी का गमला? वास्तु के अनुसार, मनी प्लांट को नीले रंग की कांच की बोतल या मिट्टी के गमले में लगाना सबसे शुभ होता है. ध्यान रखें कि इसे प्लास्टिक के डिब्बे या गंदे बर्तन में न लगाएं, इससे तरक्की के रास्ते बंद हो सकते हैं. 5. दूसरों को कभी न दें अपना मनी प्लांट क्या आप जानते हैं? अपने घर के फलते-फूलते मनी प्लांट की कटिंग कभी किसी और को नहीं देनी चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से आप अपनी सुख-समृद्धि और 'वीनस' (शुक्र ग्रह) का प्रभाव दूसरे को सौंप देते हैं. मनी प्लांट में पानी देते समय उसमें दो बूंद कच्चा दूध मिला दें. माना जाता है कि ऐसा करने से घर में धन की आवक बढ़ती है ,परिवार के सदस्यों के बीच तालमेल बेहतर होता है.

मेष संक्रांति पर ‘वैधृति योग’ का साया, 14 मई तक इन 3 राशियों पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा

 हिंदू कैलेंडर के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 को सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है. इस बार की संक्रांति खुशियों से ज्यादा चेतावनी लेकर आ रही है. ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति से वैधृति योग का निर्माण हो रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत अशुभ माना गया है. यह योग 14 मई तक बना रहेगा. यह योग अचानक होने वाली घटनाओं, विवादों और आर्थिक नुकसान का कारक बनता है. आइए जानते हैं किन 3 राशियों को इस दौरान सबसे ज्यादा संभलकर रहने की जरूरत है. इन 3 राशियों पर मंडरा रहा है खतरा 1. मेष राशि (Aries) सूर्य आपकी ही राशि में प्रवेश कर रहे हैं, अशुभ योग का असर सबसे ज्यादा आप पर दिखेगा. आर्थिक निवेश से बचें, भारी धन हानि के संकेत हैं.  मानसिक तनाव, सिरदर्द और अनिद्रा जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. वाणी पर संयम रखें, वरना अपनों से विवाद हो सकता है. 2. कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि वालों के लिए यह समय धैर्य की परीक्षा लेने वाला होगा. पैसों के लेन-देन और शॉर्टकट से कमाई करने के चक्कर में न पड़ें. कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों से अनबन हो सकती है. वाहन चलाते समय सावधानी बरतें, चोट या दुर्घटना का योग बन रहा है. 3. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के जातकों को करियर और पारिवारिक मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. प्रोफेशनल लाइफ में तालमेल की कमी रहेगी. नई योजनाओं को फिलहाल टाल दें.  माता-पिता के साथ मतभेद बढ़ सकते हैं. दूसरों की सलाह को अनसुना करना आपकी सामाजिक छवि बिगाड़ सकता है. वैधृति योग के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय अगर आपकी राशि ऊपर दी गई लिस्ट में है, तो घबराएं नहीं.  ज्योतिष शास्त्र में कुछ सरल उपाय बताए गए हैं जो इस नकारात्मकता को कम कर सकते हैं. शिवलिंग अभिषेक: मंदिर जाकर महादेव का दूध या गंगाजल से अभिषेक करें. मंत्र जाप: 'ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें. हनुमान चालीसा: मंगलवार का दिन होने के कारण हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी रहेगा. रुद्राक्ष: मानसिक शांति के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करना भी शुभ माना जाता है.