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शेयर बाजार की जोरदार शुरुआत, GST कट और ट्रंप के सुर बदलने से निवेशकों में उत्साह

मुंबई  मोदी सरकार के जीएसटी रेट कट के ऐलान का अभी भी असर शेयर बाजार पर दिख रहा है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाले सेंसेक्स इंडेक्स ने खुलने के साथ ही 200 अंकों की छलांग लगा दी, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी अपने पिछले बंद के मुकाबले तेजी के साथ ग्रीन जोन में ओपन हुआ. शुरुआती कारोबार में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स के साथ ही महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंफोसिस, बीईएल जैसे बड़े शेयर तेज रफ्तार के साथ भागते हुए नजर आए. जीएसटी कट के असर के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत को लेकर बदले रुख का प्रभाव भी बाजार पर साफ देखने को मिला है.  ग्रीन जोन में खुले दोनों इंडेक्स शेयर बाजार की तेज शुरुआत के बीच सेंसेक्स अपने पिछले बंद 80,710.76 के मुकाबले चढ़कर 80.904.40 के लेवल पर ओपन हुआ और फिर मिनटों में ही ये 81,000 के लेवल के पार निकल गया. बीएसई इंडेक्स की तरह ही निफ्टी की भी चाल नजर आई और ये एनएसई इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 24,741 की तुलना में चढ़कर 24,802.60 पर खुलने के बाद 24,831.35 तक उछला.  ये 10 शेयर ओपन होते ही भागे मार्केट में कारोबार शुरू होने के साथ ही जिन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, उनमें टॉप-10 स्टॉक्स की बात करें, तो लार्जकैप में टाटा स्टील शेयर (2.50%), टाटा मोटर्स शेयर (2.35%), महिंद्रा एंड महिंद्रा शेयर (1.95%) और अडानी पोर्ट्स शेयर (1.10%) की तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में शामिल फर्स्टक्राई शेयर (3.90%), मान्यवर शेयर (3%), भारतफोर्ज शेयर (2.95%) और ओलेक्ट्रा शेयर (2.90%) की तेजी लेकर ट्रेड कर रहे थे. स्मॉलकैप कंपनियों में प्राइम फोकस शेयर (10%) और म्यूफिन शेयर (8.10%) चढ़कर कारोबार कर रहा था.  बीते सप्ताह ऐसी थी बाजार की चल  बीता सप्ताह शेयर बाजार के लिए शानदार रहा था. हालांकि दोनों इंडेक्स आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को मामूली घट-बढ़ के साथ बंद हुए थे. सेंसेक्स महज 7.25 अंक गिरकर लेकर 80,710.76 पर, जबकि निफ्टी सिर्फ 6.70 अंक की बढ़त लेकर 24,741 पर क्लोज हुआ था. लेकिन, पूरे सप्ताह की चाल देखें, तो बीएसई का सेंसेक्स 901.11 अंक या 1.12% की बढ़त में रहा, वहीं एनएसई का निफ्टी में 314.15 अंक या 1.28% का उछाल दर्ज किया गया था. बाजार में रौनक के चलते निवेशकों ने भी खूब कमाई की थी.  मिल रहे थे तेजी के संकेत  भारत के लिए सोमवार को पहले से ही विदेशों से पॉजिटव सिग्नल मिल रहे थे. जापान, हांगकांग-साउथ कोरिया समेत ज्यादातर एशियाई बाजार तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे. जापान का निक्केई इंडेक्स 700 अंक से ज्यादा चढ़कर 43,700 के लेवल पर कारोबार कर रहा था, तो वहीं हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी 35 अंक की बढ़त लेते हुए 25,453.50 के लेवल पर, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी तेजी पकड़े हुए ग्रीन जोन में नजर आ रहा था और ये तेजी के साथ 3,206.34 पर ट्रेड कर रहा था. गिफ्ट निफ्टी भी 70 अंक चढ़कर कारोबार कर रहा था.  जीएसटी के साथ ट्रंप के बदले रुख का असर जीएसटी सुधार को लेकर किए गए मोदी सरकार के ऐलानों का असर पहले से ही शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा था, सरकार ने टैक्स स्लैब की संख्या घटाने के साथ ही कई सामानों पर जीएसटी से राहत दी है. जिसके बाद संबंधित कंपनियों के शेयर रॉकेट बने हुए हैं. वहीं अब भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की सॉफ्ट टोन का इम्पैक्ट भी देखने को मिला है. बता दें कि भारत-यूएस के बीच रूसी तेल खरीद को लेकर बीते कई महीनों से अनबन की खबरों के बाद पिछले शनिवार को अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना भड़काऊ रुख छोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति दोस्ती का कार्ड चला है. वहीं पीएम मोदी ने भी तुरंत पॉजिटिव रिस्पांस देते हुए और भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर विश्वास जताया.

दिवाली पर किसानों की झोली होगी भारी! GST कटौती और PM KISAN 21वीं किस्त की तैयारी

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार ने GST Rate Cut करके किसानों को ही नहीं पूरे देशवासियों को दिवाली का गिफ्ट नवरात्रि में ही दे दिया। 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरें लागू होंगी। रोजमर्रा की जरूरतों का लगभग हर सामान सस्ता हो गया। कुछ वस्तुओं पर तो 0 जीएसटी लगेगा। ये गिफ्ट देश के हर वर्ग के लोग किसानों से लेकर मिडिल क्लास तक सभी के लिए हैं। लेकिन किसानों को दिवाली पर मोदी सरकार एक और तोहफा दे सकती है। ये तोहफा PM KISAN YOJANA की 21वीं किस्त का हो सकता है। पीएम किसान योजना केंद्र सरकार की एक योजना है जिसे किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे पहले 2 अगस्त को PM Modi ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से 20वीं किस्त जारी की थी। अब किसानों को अगली किस्त का इंतजार है। GST Rate Cut के बाद अब दिवाली पर PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त? कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि किसानों को दिवाली या दिवाली से पहले 21वीं किस्त का तोहफा मिल सकता है। पिछले साल की बात करें तो अक्टूबर 2024 में मोदी सरकार ने 18वीं किस्त जारी की थी। इस बार दिवाली 20 और 21 अक्टूबर को पड़ रही है।  ऐसे में संभावना यही है कि इस बार भी अक्टूबर में मोदी सरकार PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त जारी कर सकती है। हालांकि, अभी सरकार द्वारा आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बैंक खाते में आएंगे 2-2 हजार? अगर दिवाली से पहले किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये आते हैं तो यह डबल धमाके जैसे होगा। क्योंकि सरकार ने पहले ही जीएसटी की दरों में कटौती कर दी है। 22 सितंबर यानी नवरात्रि के पहले दिन से New GST Rates लागू हो रहे हैं। सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त (21st installment of the PM Kisan Samman Nidhi Yojana) जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। इस योजना के तहत, पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये मिलते हैं, जो 2,000 रुपये की तीन किस्तों में विभाजित होते हैं, सीधे उनके बैंक खातों में।  

अब जेब ढीली करेगी ऑनलाइन फूड डिलीवरी: Zomato और Swiggy ने लगाया नया चार्ज

नई दिल्ली  अगर आप अक्सर Zomato, Swiggy या Magicpin से ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। फेस्टिव सीजन से ठीक पहले, इन प्रमुख फूड डिलीवरी कंपनियों ने अपनी 'प्लेटफॉर्म फीस' बढ़ा दी है, जिससे अब ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना पहले से महंगा हो जाएगा। इसके अलावा, 22 सितंबर से डिलीवरी चार्ज पर लगने वाले 18% जीएसटी के बाद यह बोझ और भी बढ़ जाएगा। किस कंपनी ने कितना बढ़ाया चार्ज? Swiggy: स्विगी ने चुनिंदा शहरों में अपनी प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर 15 रुपये प्रति ऑर्डर कर दी है, जिसमें जीएसटी भी शामिल है। Zomato: ज़ोमैटो ने भी अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की है, जो अब 12.50 रुपये (जीएसटी को छोड़कर) हो गई है। Magicpin: मैजिकपिन, जो इन कंपनियों के बाद सबसे बड़ा फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म है, ने भी अपना शुल्क बढ़ाकर 10 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा है कि यह इंडस्ट्री के रुझान के अनुरूप है और उनका शुल्क अभी भी सबसे कम है। जीएसटी के बाद बढ़ेगा और बोझ 22 सितंबर से लागू होने वाले डिलीवरी चार्ज पर 18% जीएसटी के कारण ग्राहकों पर और भी बोझ बढ़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए नियम के बाद ज़ोमैटो पर हर ऑर्डर पर करीब 2 रुपये और स्विगी पर करीब 2.6 रुपये का अतिरिक्त चार्ज लग सकता है। हालांकि, कंपनियों की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। फूड डिलीवरी कंपनियों के लिए यह प्लेटफॉर्म फीस अब कमाई का एक नया जरिया बन गई है। 

सरकारी कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर: समय खत्म होने से पहले करें यह फैसला

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) से नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में लौटने का अवसर दिया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल एक बार मिलेगी और इसके बाद दोबारा UPS में लौटना संभव नहीं होगा। सरकार ने कहा कि पात्र कर्मचारी और रिटायर कर्मचारी इस विकल्प का इस्तेमाल 30 सितंबर 2025 तक कर सकते हैं। तय समय सीमा के बाद यदि कोई कर्मचारी कदम नहीं उठाता है, तो उसे डिफॉल्ट रूप से UPS के अंतर्गत ही माना जाएगा। बता दें कि यह कदम उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो तय लाभ वाली UPS योजना से हटकर बाजार-आधारित NPS में जाना चाहते हैं। UPS निश्चित पेंशन, DA से जुड़ा महंगाई समायोजन, ग्रेच्युइटी और पारिवारिक पेंशन जैसे लाभ देता है, जबकि NPS कर्मचारियों को अधिक रिटर्न और निवेश में लचीलापन प्रदान करता है, लेकिन इसमें बाजार जोखिम भी शामिल रहता है। क्या हैं शर्तें बता दें कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए UPS से NPS में बदलाव को लेकर स्पष्ट शर्तें तय की हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह विकल्प केवल एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकेगा और कर्मचारी इसके बाद दोबारा (UPS) में वापस नहीं लौट पाएंगे। बदलाव का निर्णय भी समय से पहले लेना होगा। कर्मचारी को यह विकल्प अपनी सेवानिवृत्ति से कम से कम एक वर्ष पहले या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) से कम से कम तीन महीने पहले, जो भी पहले हो, चुनना होगा। इसके अलावा, जिन कर्मचारियों पर हटाए जाने, बर्खास्तगी, दंडस्वरूप अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसी कार्रवाई चल रही हो, या जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो, वे इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाएंगे। कौन सा विकल्प चुने कर्मचारी वित्त मंत्रालय द्वारा पेश किए गए पेंशन विकल्पों को लेकर अब स्पष्ट तुलना सामने आ गई है। जानकारों का कहना है कि UPS कर्मचारियों के लिए एक कम जोखिम वाला, सरकारी गारंटी वाला विकल्प है। इसमें पेंशन के साथ ग्रेच्युइटी और पारिवारिक पेंशन जैसी सुविधाएँ भी मिलती हैं। हालांकि, इसकी सीमाएं भी हैं—जैसे कि निवेश में लचीलापन कम होना, एकमुश्त निकासी का हिस्सा छोटा होना और ऊंचे रिटर्न की संभावना अपेक्षाकृत कम रहना। वहीं, नेंशनल पेंशन स्कीम (NPS) एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन स्कीम है, जिसमें निवेश इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटी में किया जाता है। इससे कर्मचारियों को निवेश आवंटन पर ज्यादा नियंत्रण और बेहतर ग्रोथ की संभावना मिलती है। NPS में कर्मचारी अपनी पेंशन राशि में से 60% हिस्सा एकमुश्त निकाल सकते हैं, जबकि बाकी 40% से अनिवार्य रूप से एन्युइटी खरीदनी पड़ती है। इसमें कर लाभ भी शामिल हैं, जैसे धारा 80C और 80CCD के तहत छूट। लेकिन चूंकि यह बाजार से जुड़ा है, इसलिए इसमें जोखिम बना रहता है और UPS की तरह मुद्रास्फीति समायोजन या पारिवारिक पेंशन की सुविधा नहीं मिलती। तुलनात्मक रूप से देखें तो, UPS एक डिफाइंड बेनिफिट प्लान है, जिसमें पेंशन की गारंटी और DA से जुड़ा महंगाई भत्ता मिलता है। UPS में कर्मचारी को बेसिक वेतन + DA का 10% योगदान करना होता है, जबकि नियोक्ता (सरकार) 18.5% योगदान करती है। दूसरी ओर, NPS एक डिफाइंड कंट्रिब्यूशन प्लान है, जिसमें कर्मचारी भी 10% योगदान करते हैं लेकिन नियोक्ता का हिस्सा 14% होता है। UPS में पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्युइटी उपलब्ध हैं, जबकि NPS में ये दोनों सुविधाएं नहीं हैं। इसके बदले NPS अधिक रिटर्न और निवेश की आजादी देता है, लेकिन जोखिम और अनिश्चितता भी साथ लाता है।

जब पीएम मोदी ने निर्मला सीतारमण को फोन कर जीएसटी पर सलाह दी, पढ़िए क्या हुआ आगे

नई दिल्ली  जीएसटी में व्यापक सुधार रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि इसकी शुरुआत माल एवं सेवा कर परिषद की पिछले साल दिसंबर में जैसलमेर में हुई बैठक से पहले ही हो गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को फोन कर जीएसटी को व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाने और दरों को युक्तिसंगत बनाने को कहा था, जिसके बाद इस पर काम तेजी से आगे बढ़ा। यह बात स्वयं सीतारमण ने बताई है। इसके चलते बेहद सरल जीएसटी प्रणाली का रास्ता साफ हुआ जिसमें कर की दरें कम हैं। इससे एक तरफ जहां कंपनियों के लिए पालन का बोझ कम हुआ है, वहीं रोजमर्रा के इस्तेमाल के समेत लगभग 400 वस्तुओं पर कर दरें कम हुई हैं। निर्मला सीतारमण ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘वास्तव में जीएसटी में व्यापक सुधारों का काम पहले ही शुरू हो चुका था। राजस्थान के जैसलमेर में हुई पिछली जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही प्रधानमंत्री ने मुझे फोन किया था। उन्होंने कहा, ‘एक बार आप जीएसटी को देख लो, व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाओ और दरों पर इतने सारे भ्रम की स्थिति क्यों है? मुझे लगता है कि 9 महीने पहले हुई जैसलमेर बैठक से पहले की बात है।’ उन्होंने कहा, ‘फिर बजट के दौरान जब हम आयकर उपायों पर चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने मुझे याद दिलाया कि आप जीएसटी के ऊपर काम कर रही हैं न। यह एक चीज थी।’ पीएम ने फोन पर क्या कहा सीतारमण ने कहा, ‘दूसरा, मंत्री समूह डेढ़ साल से काम कर रहे थे। मैं उनमें से प्रत्येक की सराहना करती हूं कि उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की और उनके सुझाव सामने आए।’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद मैंने यह फैसला लिया कि अब समय आ गया कि हम GST के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करें। न केवल दरों की, न केवल स्लैब की संख्या की, बल्कि इस दृष्टिकोण से भी देखें कि एक व्यवसाय, लघु या मझोले व्यवसाय के लिए यह कितना और बेहतर होगा।’ वित्त मंत्री ने कहा कि हमने इन सब बातों पर गौर किया। वस्तुओं के वर्गीकरण को देखा जिससे काफी भ्रम पैदा हो रहा था। स्वभाविक रूप से दर पर भी गौर किया। 1 फरवरी, 2025 से लेकर लगभग 15 मई तक हम इसकी अध्ययन समीक्षा आदि का काम करते रहे।’ वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, ‘मई के मध्य में मैं प्रधानमंत्री के पास गई। उन्हें जानकारी दी और बताया कि हम कदम उठाने के करीब हैं। यह एक प्रस्ताव का रूप ले सकता है और उनसे समय देने का अनुरोध किया। उसके बाद उन्होंने कहा कि आप देखिए इसे कैसे जीएसटी परिषद में ले जा सकती हैं। फिर मैं टीम के साथ बैठी और तय किया कि यह केंद्र का प्रस्ताव होगा, जो जीओएम को भेजा जाएगा क्योंकि जीओएम में राज्यों के मंत्री हैं। मैं वहां नहीं हूं। वास्तव में हम चाहते थे कि यह स्पष्ट हो जाए कि हम जीओएम की ओर से किए गए सभी कार्यों का सम्मान करते हैं। लेकिन यहां एक प्रस्ताव विशेष रूप से केंद्र की ओर से आ रहा है, जो परिषद में एक-तिहाई भागीदार है।’ GST को लेकर किस तरह की चर्चा सीतारमण ने कहा, ‘हमने मंत्री समूहों को प्रस्ताव दिया और मंत्री समूहों ने उस पर विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच और उससे भी पहले जैसलमेर में वित्त राज्यमंत्री को क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह का चेयरमैन बनाया गया था। वह उस पर विचार कर रहे थे। लेकिन वहां भी क्षतिपूर्ति उपकर के बाद, अगर वह उसे समाप्त करने का फैसला लेते हैं, तो उन मदों का क्या होगा जो क्षतिपूर्ति उपकर के अंतर्गत आती हैं? अब वे कहां जाएंगी? यह दरों को युक्तिसंगत बनाने का मामला है। इसलिए मंत्रिसमूह ने यह निर्णय लिया कि उपकर और उसे समाप्त करने के संबंध में, उन्हें हर नियम व शर्तों पर काम करना होगा। इसके अलावा, दरें तय करने के लिए गठित मंत्रियों का समूह दरों को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर रहा था। इसलिए मंत्रिसमूह के सदस्यों की सहमति से यह तय किया गया कि उपकर पर काम कर रहे सदस्य भी दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समूह समिति में भाग लेंगे।’ इसके बाद दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समिति (जिसकी शुरुआत वास्तव में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज सोमप्पा बोम्मई से हुई थी और जिसका नेतृत्व बाद में बिहार के उपमुख्यमंत्री ने किया) ने मंत्रिसमूह के कार्यों के अलावा, केंद्र की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर भी विचार किया। निर्मला सीतारमण के अनुसार, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बेहतर होगा कि यह पूरा मामला परिषद में ही रखा जाए, बजाय इसके कि वे इस प्रस्ताव पर आगे विचार करें। फिर यह सब परिषद के पास आया और परिषद ने इसे स्वीकार कर लिया। जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह बुधवार को माल एवं सेवा कर के 4 स्लैब की जगह 2 स्लैब करने का फैसला किया। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी। विलासिता और सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाए जाने के तहत टेलीविजन व एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता उत्पादों के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामान समेत करीब 400 वस्तुओं पर दरें कम की गई हैं। सीतारमण ने कहा कि ऐतिहासिक जीएसटी सुधार लोगों के लिए सुधार है।  

कब और कैसे हुआ GST सुधार का आगाज़? जानें वित्त मंत्री की बारीक बातें

नई दिल्ली  जीएसटी में व्यापक सुधार रातों-रात नहीं हुआ बल्कि इसकी शुरुआत माल एवं सेवा कर परिषद की पिछले साल दिसंबर में जैसलमेर में हुई बैठक से पहले ही हो गयी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को फोन कर जीएसटी को व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाने और दरों को युक्तिसंगत बनाने को कहा था, जिसके बाद इस पर काम तेजी से आगे बढ़ा। यह बात स्वयं सीतारमण ने बतायी। इसके परिणामस्वरूप सरल जीएसटी प्रणाली का रास्ता साफ हुआ जिसमें कर की दरें कम हैं। इससे एक तरफ जहां कंपनियों के लिए अनुपालन का बोझ कम हुआ है वहीं रोजमर्रा के इस्तेमाल के समेत लगभग 400 वस्तुओं पर कर दरें कम हुई हैं। सीतारमण ने पीटीआई-भाषा को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘वास्तव में जीएसटी में व्यापक सुधारों का काम पहले ही शुरू हो चुका था। राजस्थान के जैसलमेर में हुई पिछली जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही, प्रधानमंत्री ने मुझे फोन करके कहा था,‘एक बार आप जीएसटी को देख लो, व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाओ और दरों पर इतने सारे भ्रम की स्थिति क्यों है? मुझे लगता है कि नौ महीने पहले हुई जैसलमेर बैठक से पहले की बात है।'' उन्होंने कहा, ‘‘फिर, बजट के दौरान, जब हम आयकर उपायों पर चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने मुझे (प्रधानमंत्री) याद दिलाया कि ‘आप जीएसटी के ऊपर काम कर रही हैं न।' यह एक चीज थी।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘दूसरा, मंत्री समूह (जीओएम) डेढ़ साल से काम कर रहे थे और मैं उनमें से प्रत्येक की सराहना करती हूं कि उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की और उनके सुझाव सामने आए।'' उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद मैंने यह निर्णय लिया कि अब समय आ गया है कि हम जीएसटी के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करें, न केवल दरों की, न केवल स्लैब की संख्या की, बल्कि इस दृष्टिकोण से भी देखें कि एक व्यवसाय, लघु या मझोले व्यवसाय के लिए यह कितना और बेहतर होगा'' वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हमने इन सब बातों पर गौर किया। वस्तुओं के वर्गीकरण को देखा जिससे काफी भ्रम पैदा हो रहा था… फिर, स्वभाविक रूप से दर पर भी गौर किया। एक फरवरी, 2025 से लेकर लगभग 15 मई तक हम इसकी अध्ययन समीक्षा आदि का काम करते रहे।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘मई के मध्य में… मैं प्रधानमंत्री के पास गयी, उन्हें जानकारी दी और बताया कि हम कदम उठाने के करीब हैं। यह एक प्रस्ताव का रूप ले सकता है और उनसे समय देने का अनुरोध किया…। उसके बाद उन्होंने कहा कि आप देखिये इसे कैसे जीएसटी परिषद में ले जा सकती हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘फिर मैं टीम के साथ बैठी और तय किया कि यह केंद्र का प्रस्ताव होगा, जो जीओएम को भेजा जाएगा, क्योंकि जीओएम में राज्यों के मंत्री हैं। मैं वहां नहीं हूं। वास्तव में हम चाहते थे कि यह स्पष्ट हो जाए कि हम जीओएम द्वारा किए गए सभी कार्यों का सम्मान करते हैं। लेकिन यहां एक प्रस्ताव विशेष रूप से केंद्र की ओर से आ रहा है, जो परिषद में एक-तिहाई भागीदार है।'' वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘नियमानुसार, हमने मंत्री समूहों को प्रस्ताव दिया और मंत्री समूहों ने उस पर विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच, और उससे भी पहले, जैसलमेर में, वित्त राज्यमंत्री को क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह का चेयरमैन बनाया गया था और वह उस पर विचार कर रहे थे। लेकिन वहां भी, क्षतिपूर्ति उपकर के बाद, अगर वह उसे समाप्त करने का फैसला लेते हैं, तो उन मदों का क्या होगा जो क्षतिपूर्ति उपकर के अंतर्गत आती हैं? अब वे कहां जाएंगी? यह दरों को युक्तिसंगत बनाने का मामला है। इसलिए मंत्रिसमूह ने यह निर्णय लिया कि उपकर और उसे समाप्त करने के संबंध में, उन्हें हर नियम एवं शर्तों पर काम करना होगा। लेकिन इसके अलावा, दरें तय करने के लिए गठित मंत्रियों का समूह दरों को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर रहा था। इसलिए, मंत्रिसमूह के सदस्यों की सहमति से, यह तय किया गया कि उपकर पर काम कर रहे सदस्य भी दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समूह समिति में भाग लेंगे…।'' फिर दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समिति जिसकी शुरुआत वास्तव में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज सोमप्पा बोम्मई से हुई थी और जिसका नेतृत्व बाद में बिहार के उपमुख्यमंत्री ने किया, ने मंत्रिसमूह द्वारा किए गए कार्यों के अलावा, केंद्र द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर भी विचार किया। सीतारमण के अनुसार, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बेहतर होगा कि यह पूरा मामला परिषद में ही रखा जाए, बजाय इसके कि वे इस प्रस्ताव पर आगे विचार करें। फिर यह सब परिषद के पास आया और परिषद ने इसे स्वीकार कर लिया। जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह बुधवार को माल एवं सेवा कर के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी जबकि विलासिता एवं सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत टेलीविजन एवं एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता उत्पादों के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामान समेत करीब 400 वस्तुओं पर दरें कम की गयी हैं।  

TATA गाड़ियों की कीमतों में बड़ी कटौती, GST छूट के बाद 1.55 लाख तक सस्ता हुआ कार

मुंबई  गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST Reforms) स्लैब में बड़े बदलाव के बाद देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने आज आधिकारिक तौर पर अपनी कारों की कीमत में कटौती का ऐलान कर दिया है. टाटा मोटर्स ने अपनी सबसे सस्ती कार टाटा टिएगो से लेकर मशहूर एसयूवी टाटा सफारी तक, सभी वाहनों की कीमत में बदलाव किया है. कारों की कीमत में की गई ये कटौती आगामी 22 सितंबर 2025 से देश भर के डीलरशिप पर पर लागू होगी.  टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड और टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शैलेश चंद्रा ने अपने बयान में कहा है कि, "22 सितम्बर 2025 से लागू होने वाली पैसेंजर व्हीकल्स पर GST में कटौती एक प्रगतिशील और समयानुकूल फैसला है. जिससे देश भर में लाखों लोगों के लिए व्यक्तिगत मोबिलिटी और सुलभ हो जाएगी." उन्होंने कहा कि "कंपनी के कस्टमर फर्स्ट सिद्धांत के अनुरूप टाटा मोटर्स इस जीएसटी रिफॉर्म की पूरी भावना और उद्देश्य का सम्मान करती है. कंपनी अपने ग्राहकों को जीएसटी कटौती का पूरा लाभ देगी." शैलेश चंद्रा ने आगे कहा कि "इससे टाटा मोटर्स की लोकप्रिय कारों और एसयूवी रेंज और अधिक किफायती होगी, जिससे पहली बार वाहन खरीदने वाले ग्राहकों को प्रोत्साहन मिलेगा और देशभर में नई पीढ़ी की मोबिलिटी की ओर बदलाव और तेज होगा." किन कारों की कीमत में कितनी हुई कटौती? टाटा के मॉडल कीमतों में कटौती (रुपयों में) टिएगो  75,000 टिगोर 80,000 अल्ट्रोज  1,10,000 पंच 85,000 नेक्सन 1,55,000 कर्व   65,000 हैरियर   1,40,000 सफारी   1,45,000 नोट: कारों की एक्चुअल प्राइसिंग के लिए अपने नजदीकी डीलरशिप से संपर्क करें. फेस्टीव सीजन में मिलेगा लाभ टाटा मोटर्स का यह ऐलान भारत के त्योहारों के सीजन से ठीक पहले आया है. जो परंपरागत रूप से वाहनों की बिक्री का पीक पीरियड माना जाता है. कंपनी ने ग्राहकों को यह सलाह भी दी है कि संभावित बढ़ी हुई मांग को देखते हुए वे समय से पहले ही बुकिंग कर लें. जीएसटी कटौती टाटा मोटर्स की पूरी पैसेंजर व्हीकल रेंज पर लागू होगी. इसमें एंट्री-लेवल हैचबैक Tiago पर ग्राहकों को अधिकतम 75,000 रुपये तक की बचत होगी. इसी तरह Tigor पर अधिकतम 80,000 रुपये और लोकप्रिय कॉम्पैक्ट एसयूवी Punch पर 85,000 रुपये तक की राहत मिलेगी. वहीं सबसे बड़ी कटौती Nexon में देखने को मिली है, जिसके दाम 1.55 लाख रुपये तक घट गए हैं. बता दें कि, हाल ही में हुए जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में यह फैसला लिया गया था कि, छोटी कारें, जिनमें 1200 सीसी तक के पेट्रोल इंजन, 1500 सीसी तक के डीजल इंजन और 4 मीटर से कम लंबाई वाली कारें शामिल हैं, उन पर अब केवल 18% जीएसटी लगेगा, जो पहले 28% था. इससे इस कैटेगरी में आने वाली कारों की कीमत में भारी कटौती हुई है.

GST का नया स्ट्रक्चर अब लागू, ईंधन दामों में बदलाव की संभावना!

नई दिल्ली  जीएसटी स्ट्रक्चर में हुए ऐतिहासिक बदलाव के लागू होते ही रोजमर्रा के कई सामान सस्ते हो जाएंगे। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ज्यादातर कंपनियां आम लोगों को इसका फायदा पहुंचाने के लिए तैयार हैं। वहीं, पेट्रोल-डीजल को लेकर कई लोगों के मन में संशय है। अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पर एक अहम बयान दिया है। क्या कहा वित्त मंत्री ने? निर्मला सीतारमण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पेट्रोलियम उत्पाद और अल्कोहल निकट भविष्य में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे से बाहर रहेंगे। एक इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा कि निकट भविष्य में पेट्रोलियम या अल्कोहल को जीएसटी के दायरे में लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मतलब ये हुआ कि पेट्रोल और डीजल के दाम पहले की तरह रहेंगे। इसमें बदलाव तेल कंपनियां या सरकार अपने हिसाब से करेंगी। आम लोगों को राहत देने के लिए वित्त मंत्री क्या बोलीं? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पीटीआई-भाषा को दिये साक्षात्कार में कहा कि हम दरों में कटौती का लाभ आम लोगों को देने के लिए उद्योग से बातचीत कर रहे हैं और 22 सितंबर से (जीएसटी दरों में कटौती के लागू होने की तिथि) हमारा पूरा ध्यान इसी पर होगा कि लोगों का इसका लाभ मिले। क्या हुआ है बदलाव केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों की भागीदारी वाली जीएसटी परिषद ने बुधवार को जीएसटी के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया। अब टैक्स की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी जबकि विलासिता एवं सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत टेलीविजन एवं एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता वस्तुओं के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामानों पर दरें कम की गयी हैं।

महिंद्रा ने घटाए वाहन दाम, GST लागू होने से पहले Thar और Scorpio पर बड़ी राहत

मुंबई गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) स्लैब स्ट्रक्चर में हुए बदलाव के रूझान आने शुरू हो गए हैं. बीते कल देर शाम टाटा मोटर्स ने अपने कारों की कीमतों में कटौती का ऐलान किया. आज प्रमुख एसयूवी निर्माता कंपनी महिंद्रा एक कदम और आगे बढ़ते हुए, GST डेडलाइन (22 सितंबर) से पहले ही कारों की कीमत में 1.56 लाख रुपये तक की कटौती का ऐलान किया है. जीएसटी में छूट के ऐलान के बाद कंपनी द्वारा कारों की कीमत में कटौती के बाद महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर किया है. जिसमें लिखा गया है कि, "सभी लोग 22 सितंबर कह रहे हैं… हमने कहा अभी. महिंद्रा लाइनअप पर सभी कारों पर जीएसटी बेनिफिट्स आज यानी 6 सितंबर से मिलेंगे." इस तस्वीर को शेयर करते हुए आनंद महिंद्रा ने कैप्शन में लिखा कि, "एक्शन, केवल वादा नहीं" किन कारों कितनी छूट? सबसे पहले बता दें कि, महिंद्रा अपने पूरे ICE (पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहन) SUV पोर्टफोलियो पर ग्राहकों को जीएसटी 2.0 का पूरा लाभ तत्काल प्रभाव से पास-ऑन करेगी. जीएसटी में कटौती के चलते महिंद्रा के लोकप्रिय मॉडल्स जैसे थार, स्कॉर्पियो, बोलेरो, XUV700 और स्कॉर्पियो-एन अब ग्राहकों को 1.01 लाख रुपये से 1.56 लाख रुपये तक की बचत के साथ उपलब्ध होंगे, जो मॉडल और वेरिएंट पर निर्भर करेगा. कंपनी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, बोलेरो और बोलेरो नियो की कीमतों में अधिकतम 1.27 लाख रुपये तक की कटौती हुई है. वहीं, XUV3XO पेट्रोल पर 1.40 लाख रुपये और XUV3XO डीजल पर सबसे ज्यादा 1.56 लाख रुपये की कटौती की गई है. नई कीमतें सभी डीलरशिप और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शी तरीके से अपडेट कर दी जाएंगी. यानी आप नजदीकी डीलरशिप पर जाकर नई कीमतों के साथ अपनी पसंदीदा कार बुक कर सकते हैं. टाटा मोटर्स ने भी 1.55 लाख तक घटाए दाम केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी में छूट के ऐलान के बाद टाटा मोटर्स ने सबसे पहले अपने व्हीकल पोर्टफोलियो की कीमतों में कटौती की घोषणा की थी. टाटा मोटर्स अपने सबसे सस्ती कार टाटा टिएगो से लेकर टाटा नेक्सन और सफारी तक सभी मॉडलों पर 1.55 लाख रुपये तक की छूट का ऐलान किया है. हालांकि टाटा के कारों पर ये कटौती आगामी 22 सितंबर से लागू होगी. GST स्लैब को लेकर सरकार का ऐलान बता दें कि, बीते दिनों केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी काउंसिल की मीटिंग के बाद गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) स्लैब के स्ट्रक्चर में बदलाव की घोषणा की थी. जिसमें उन्होंने कहा कि, "अब देश में 4 के बजाय केवल दो जीएसटी स्लैब (5% और 8%) ही रहेंगे. इसके अलावा लग्ज़री और सिन गुड्स को स्पेशल 40% जीएसटी के दायरे में रखा जाएगा." नए जीएसटी स्लैब को लागू किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि, "ये नया जीएसटी स्ट्रक्चर आगामी 22 सितंबर 2025 से देश भर में लागू किया जाएगा." क्या है नया नियम? नए नियम के अनुसार 1200 सीसी से कम पेट्रोल, 1500 सीसी से कम डीजल इंजन वाली कारें और जिनकी लंबाई 4 मीटर से कम हैं. उन पर अब 28% के बजाय केवल 18% जीएसटी लागू होगा. जिससे इन कारों की कीमतों में भारी कटौती हो रही है. एक डाटा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जुलाई के बीच देश भर में बेची जाने वाली कुल पैसेंजर कारों में तकरीबन 61% वो कारें थीं, जिनकी लंबाई 4 मीटर से कम है. वहीं 4 मीटर से लंबी कारों का मार्केट शेयर केवल 39% है. ऐसे में सरकार के इस फैसले का असर बड़े ग्राहक वर्ग पर पड़ेगा. साथ ही त्योहारी सीजन में कार बाजार के गुलजार होने की पूरी संभावना है.

महंगाई पर राहत की उम्मीद! SBI रिपोर्ट से सामने आया सबूत

नई दिल्ली  जीएसटी दरों में बड़ा बदलाव होने वाला है, जिससे आम घरेलू सामान और सेवाओं पर टैक्स कम होगा. इससे अगले वित्त वर्ष (2025-26) में रिटेल इंफ्लेशन 0.65 से 0.75 प्रतिशत तक घट सकता है. एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए जीएसटी नियम लागू होने के बाद देश में महंगाई कम होगी जीएसटी काउंसिल की 56वीं मीटिंग में पुरानी चार स्तरीय टैक्स स्ट्रक्चर (5%, 12%, 18%, 28%) को हटाकर दो स्तरीय टैक्स स्ट्रक्चर (5% और 18%) को मंजूरी दी गई. साथ ही, कुछ लग्जरी सामान और सेवाओं के लिए 40% की स्पेशल टैक्स दर तय की गई है, जिसके तहत रोजमर्जा की काफी चीजें सस्ती हो गई हैं और कुछ तो टैक्स फ्री ही हो गई हैं. नई दरें कब से लागू होंगी? तंबाकू और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स को छोड़कर नई टैक्स दरें 22 सितंबर 2025 से लागू होंगी. रिपोर्ट कहती है कि 453 सामानों की जीएसटी दर में बदलाव हुआ है. इनमें से 413 सामानों पर टैक्स कम हुआ है, जबकि सिर्फ 40 सामानों पर टैक्स बढ़ा है. करीब 295 जरूरी सामानों पर जीएसटी 12% से घटकर 5% या 0% हो गई है. इससे खासकर खाने-पीने की चीजों पर 60% फायदा ग्राहकों को मिलेगा, जिससे कंज्यूमर वैल्यू इंडेक्स आधारित इंफ्लेशन 0.25 से 0.30% तक कम हो सकती है. रिटेल इंफ्लेशन पर क्या असर होगा? एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि इसके अलावा, सेवाओं पर जीएसटी दरों को रेशनाइलज बनाने से अन्य वस्तुओं और सेवाओं पर खुदरा मुद्रास्फीति में 0.40 से 0.45 प्रतिशत की और कमी आएगी. इसमें ग्राहकों को लाभ 50 प्रतिशत मिलने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान रिटेल इंफ्लेशन में 0.65 से 0.75 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. जीएसटी की औसत दर कितनी हुई? जीएसटी काउंसिल के रेट रेशनलाइजेशन से सितंबर 2019 में औसत जीएसटी दर 14.4% से घटकर 11.6% हो गई थी. अब नए बदलावों के बाद ये और कम होकर 9.5% हो सकती है. नए जीएसटी नियमों से जरूरी सामान और सेवाएं सस्ती होंगी, जिससे महंगाई कम होगी और आम लोगों को फायदा होगा.