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भारत में टेस्ला ने लॉन्च की पहली कार, कीमत ₹60 लाख, रेंज कितनी? जानें

मुंबई  लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भारतीय बाजार में टेस्ला कंपनी की कार लॉन्च हो ही गई। जी हां, आज 15 जुलाई को एलन मस्क की कंपनी टेस्ला ने मुंबई स्थित बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में अपने पहले शोरूम और एक्सपीरियंस सेंटर की ओपनिंग के साथ ही भारतीय बाजार में अपनी पहली कार टेस्ला मॉडल वाई लॉन्च करने की घोषणा की। टेस्ला मॉडल वाई की भारत में शुरुआती एक्स शोरूम प्राइस 60 लाख रुपये रखी गई है, जो कि रियर व्हील ड्राइव वेरिएंट की है। आइए, आपको टेस्ला की कारों की इंडिया लॉन्च के साथ ही सारी खासियतों के बारे में बताते हैं। टेस्ला मॉडल वाई के दो वेरिएंट टेस्ला भारत में दो मॉडल बेचेगी। पहला मॉडल है Model Y रियर-व्हील ड्राइव (RWD), जिसकी कीमत 60 लाख रुपये है। दूसरा मॉडल है Model Y लॉन्ग रेंज RWD, जिसकी कीमत 68 लाख रुपये है। कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर कीमतों की जानकारी दी है। अमेरिका के मुकाबले भारत में इसकी कीमत काफी ज्यादा है। दअसल, इंपोर्ट ड्यूटी के साथ ही बाकी खर्चों वजह से टेस्ला की कारें भारत में अमेरिका, यूरोप और चीन के मुकाबले महंगी मिलेगी। अमेरिका में Model Y की शुरुआती कीमत लगभग 38.63 लाख रुपये है। वहीं, चीन में यह लगभग 31.57 लाख रुपये और जर्मनी में लगभग 46.09 लाख रुपये में मिलती है। इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से महंगी हो जाती है कार आपको बता दें कि Model Y टेस्ला के शंघाई प्लांट से मुंबई आई हैं। इन गाड़ियों पर 21 लाख प्रति यूनिट से ज्यादा की इंपोर्ट ड्यूटी लगी है। दरअसल, भारत में 40,000 डॉलर से कम कीमत वाली पूरी तरह से बनी हुई गाड़ियों पर 70 फीसदी टैक्स लगता है। टेस्ला ऐसे समय में भारत में आई है, जब उसे बीवाईडी जैसी पॉपुलर चीनी ईवी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। बीवाईडी की कारें भारत में भी टेस्ला को कड़ी टक्कर देगी। वेरिएंट के हिसाब से भारत में टेस्ला Model Y की एक्स-शोरूम कीमतें दी गई हैं: Tesla Model Y RWD – ₹59.89 लाख Tesla Model Y Long Range RWD – ₹67.89 लाख टेस्ला का पहला शोरूम मुंबई में शुरू हो चुका है. अगला शोरूम जल्द ही नई दिल्ली में खुलने की उम्मीद है. Model Y की बिक्री की शुरुआत मुंबई, दिल्ली और गुरुग्राम में की जाएगी. इसकी डिलीवरी 2025 के कैलेंडर वर्ष की तीसरी तिमाही से शुरू होगी. कितनी है दोनों कारों की रेंज Tesla Model Y के RWD वर्ज़न की दावा की गई रेंज एक बार फुल चार्ज पर 500 किलोमीटर है, जबकि Long Range RWD वर्ज़न की दावा की गई रेंज इससे बेहतर है, जोकि 622 किलोमीटर बताई गई है. यह रेंज WLTC (वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज्ड लाइट व्हीकल्स टेस्ट साइकिल) के अनुसार बताई गई है. परफॉर्मेंस की बात करें तो, Model Y RWD वर्ज़न 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार 5.9 सेकंड में पकड़ सकता है. वहीं, Long Range RWD वर्ज़न यही गति 5.6 सेकंड में हासिल करता है. दोनों ही वर्ज़न की टॉप स्पीड 201 किमी/घंटा है.   दिल्ली में जल्द खुलेगा एक्सपीरियंस सेंटर यहां सबसे जरूरी बात यह है कि टेस्ला ने मुंबई में अपना शोरूम भी खोला है। दरअसल, एलन मस्क ने लगभग दो साल पहले भारतीय ईवी मार्केट में दिलचस्पी दिखाई थी। टेस्ला ने मार्च में मुंबई स्थित बीकेसी में जगह किराये पर ली थी। इसके बाद से कंपनी ने यहां भर्तियां की। जल्द ही दिल्ली में भी टेस्ला का एक्सपीरियंस सेंटर खुलेगा। कंपनी डीलरशिप की बजाय सीधे ग्राहकों को गाड़ियां बेचेगी। आने वाले समय में क्या टेस्ला भारत में कार बना सकती है, यह सवाल सभी के मन में हैं।

इंडियन सड़कों पर दौड़ेगी Tesla Model Y – लॉन्च से पहले जानिए इसकी रेंज और फीचर्स

नई दिल्ली एलन मस्क के नेतृत्व वाली अमेरिकन कार निर्माता कंपनी टेस्ला ने आधिकारिक तौर पर भारतीय बाजार में एंट्री का ऐलान कर दिया है। कल यानी 15 जुलाई 2025 कोटेस्ला की भारत में एंट्री होगी। इसके साथ ही 2003 में टेस्ला मोटर्स की नींव रखने के 22 साल बाद भारत में इसका ‘गृह प्रवेश’ हो रहा है। टेस्ला ने पहली बार भारत में अपनी एंट्री को लेकर सोशल मीडिया पर एक टीजर जारी किया है। यह टीजर बहुत सिंपल है। इसमें सिर्फ टेस्ला का लोगो और ‘इंडिया’ लिखा हुआ है, साथ ही कैप्शन दिया गया है – कमिंग सून यानी जल्द आ रहे हैं। समोसा-जलेबी और लड्डू पर भी मिलेगी सिगरेट जैसी वार्निंग, मोटापे के खिलाफ सरकार का नया प्लान, जानें क्या कहती है स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी  मस्क की कंपनी Tesla 15 जुलाई को मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में देश का अपना पहला शोरूम खोल रही है। कंपनी अपने EVs को इंडियन मार्केट में लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। टेस्ला भारत में Model Y को पेश करेगी। ये दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक कार है। इसे भारत में पूरी तरह से निर्मित यूनिट(CBU) के रूप में बेचा जाएगा। टेस्ला फिलहाल भारत की सड़कों पर अपनी दो पॉपुलर इलेक्ट्रिक कारों – Model Y (मॉडल वाई) और Model 3 (मॉडल 3) की टेस्टिंग कर रही है। एक खास बात यह है कि भारतीय मार्केट के लिए इनमें अमेरिका में इस्तेमाल होने वाला NACS चार्जिंग पोर्ट नहीं, बल्कि CCS2 चार्जिंग पोर्ट दिया जाएगा। टेस्ला ने 5 Model Y कारें मुंबई पोर्ट के जरिए भारत मंगाई हैं। ये सभी रियर-व्हील ड्राइव वर्जन हैं, जिन्हें शंघाई स्थित फैक्ट्री से इंपोर्ट किया गया है। ये गाड़ियां भारतीय सड़कों पर चल रही हैं और टेस्टिंग के दौरान कई बार देखी गई हैं। दूसरे देशों में फिलहाल Tesla Model Y दो वेरिएंट रियर-व्हील ड्राइव (RWD) और लॉन्ग-रेंज ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) में उपलब्ध है। किसी भी EV के लिए उसकी रेंज सबसे महत्वपूर्ण होती है। Tesla की कारें अपनी लंबी रेंज के लिए जानी जाती है। चीन लाइट-ड्यूटी व्हीकल टेस्ट साइकिल (CLTC) के अनुसार, Model Y RWD को एक बार फुल चार्ज करने पर 593 किमी की रेंज का दावा किया गया है, जबकि Model Y लॉन्ग रेंज AWD 750 किमी तक चल सकती है। RWD वर्जन सिर्फ 5.9 सेकंड में 0 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकता है, जबकि डुअल मोटर्स वाला लॉन्ग-रेंज AWD वर्जन यही रफ्तार 4.3 सेकंड में पकड़ कर सकता है। Model Y का ग्राउंड क्लीयरेंस 167 मिमी है। इसमें 19-20 इंच के व्हील्स मिलते है। Tesla Model Y के फीचर्स Model Y अपने स्लोपिंग और कूपे जैसी अट्रैक्टिव डिजाइन के लिए जानी जाती है। इसका कर्व फ्रंट LED स्ट्रिप के साथ आता है। कार में आगे और पीछे LED लाइट्स दी गई है। पीछे की तरफ कनेक्टेड LED टेललाइट्स है। कुल मिलाकर बाहरी डिजाइन को सिंपल लेकिन काफी आकर्षक बनाया गया है। इंटीरियर भी बाहरी हिस्से की तरह अट्रैक्टिव है। इसमें एक स्लीक डैशबोर्ड के साथ 15.4 इंच का सेंटर टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है। ज्यादातर फंक्शन्स को इस बड़े इंफोटेनमेंट यूनिट से कंट्रोल किया जा सकता है। केबिन के अंदर आपको बहुत ज्यादा फैंसी चीजें नहीं मिलेंगी। फ्रंट सेंटर आर्मरेस्ट के पीछे एक और टचस्क्रीन यूनिट (8 इंच) है, जिसे विशेष रूप से पीछे बैठे यात्रियों के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी एक खास बात ये भी है कि पीछे वाली सीट पूरी तरह से फोल्डेबल है। Tesla Model Y की भारत में कितनी हो सकती है कीमत भारत में 40,000 अमेरिकी डॉलर तक की CBU कारों पर 70% का बेसिक कस्टम ड्यूटी लगता है। पिछले महीने ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट किया था कि Tesla के शंघाई कारखाने से पांच Model Y यूनिट मुंबई पहुंची है और प्रत्येक की कीमत सिर्फ 32,000 अमेरिकी डॉलर से कम बताई गई थी। इंडिया में इस पर ड्यूटी लगाने के बाद Tesla Model Y की कीमत करीब 50 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के आसपास हो सकती है।  

कानपुर से कैलिफोर्निया तक धमाल! Trapit Bansal को मिली जुकरबर्ग की 800 करोड़ की जॉब ऑफर

मुंबई  Meta CEO और Facebook के फाउंडर Mark Zuckerberg, AI सेक्टर के लिए बड़ी तैयारी कर रहे हैं. अभी वह Google, ChatGPT मेकर OpenAI को बड़ी चुनौती देने के लिए Superintelligence Labs का ऐलान कर चुके हैं और अब इस लैब्स के लिए बड़े लेवल पर हायरिंग कर रहे हैं. हाल ही उन्होंने कानपुर से पढ़ाई करने वाले Trapit Bansal को 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का पैकेज देकर हायर किया था और अब वे Apple में काम कर चुके Ruoming Pang को शामिल करने जा रहे हैं.  Meta ने उनको एक बड़ा पैकेज का ऑफर दिया है, जिसकी कीमत 200 मिलियिन अमेरिकी डॉलर ( करीब 1670 करोड़ रुपये) है. इस सैलेरी के सामने OpenAI से Meta में Trapit Bansal की 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 800 करोड़ रुपये) का पैकेज आधा नजर आता है. Superintelligence Group में हो रही बड़े लेवल की हायरिंग  यहां आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि Superintelligence Group इकलौती जगह है, जहां की लोगों को सबसे ज्यादा सैलेरी पर हायर किया जा रहा है.  ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, Meta द्वारा दिया जा रहा ये पैकेज इसलिए दे रहे हैं ताकि कर्मचारी अपनी परफोर्मेंस को बरकरार रखें और टारगेट को हासिल कर सकें. अगर वे कंपनी को जल्दी छोड़ते हैं या फिर कंपनी के स्टॉक नीचे जाते हैं तो उनकी पेमेंट में कटौती की जा सकती है.  ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया है कि सुपरइंटीलेंस लैब के लिए हायर किए जा रहे कर्मचारियों की सैलेरी में बॉनस, बेस सैलेरी और मेटा स्टॉक आदि को शामिल किया है. साथ ही अगर कोई कर्मचारी Meta में शामिल होने के लिए अपनी हिस्सेदारी छोड़ रहा है तो कंपनी उसकी भरपाई करने की कोशिश करती है.  OpenAI का बड़ा मार्केट शेयर  AI डेटा को एनालाइज करने वाली वेबसाइट Similarweb की रिपोर्ट के मुताबिक, Generative AI Tools Traffic में OpenAI का मार्केट शेयर 150 मिलियन्स से भी ज्यादा है. वहीं Google भी इस मामले में सेकेंड पॉजिशन पर है. अब Meta न्यू हायरिंग करके कई कंपनियों को पछाड़ना चाहती है.  WhatsApp में भी मिलता है Meta AI Meta के पास पहले से खुद का आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) है, जिसका नाम Meta AI है. वैसे तो ChatGPT की तरह ही Meta AI  का पोर्टल और ऐप मौजूद है. यह ऐप Google Play Store और App Store पर है. इसके अलावा Meta AI  का यूज WhatsApp के अंदर भी किया जा सकता है, जिसके लिए मैसेजिंग ऐप के अंदर ही Meta AI का आइकन मिलता है. 

शेयर कीमतों में पंप एंड डंप स्‍कीम का यूज, सेबी की जांच के दायरे में BSE में लिस्‍टेड 200 कंपनियां

मुंबई  भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) मार्केट में हेरफेर से निपटने के लिए अपने प्रयासों को तेज कर रहा है और भारतीय शेयर बाजार में कथित पंप-एंड-डंप की बड़े पैमाने पर जांच शुरू करेगा. एनडीटीवी प्रॉफिट की एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 200 लिस्‍टेड कंपनियां बेखबर निवेशकों को शेयर की कीमतें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप में जांच के दायरे में हैं. आशंका है कि ये कंपनियां पंप एंड डंप के जरिए शेयर कीमतों में हेरफेर कर रही हैं.  बिजनेस टुडे के मुताबिक, सेबी ने पिछले तीन दिनों में 80 से ज्‍यादा जगहों पर सर्च ऑपरेशन चलाया है. नियामक ने 100 से ज्‍यादा कंप्यूटर्स और 150 मोबाइल फोनों से डेटा जब्त किया है, जो व्यापक डिजिटल जांच को दिखाता है. सेबी की ये व्‍यापक कार्रवाई निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कई महीनों से चलाए जा रहे एक व्‍यापक अभियान का हिस्‍सा है. अभी इस मामले में जांच जारी है.  जेन स्‍ट्रीट पर सेबी का बड़ा खुलासा Jane Street, एक ग्‍लोबल ट्रेडिंग फर्म है, जिसपर सेबी द्वारा रणनीतिक खरीद-बिक्री गतिविधियों के माध्यम से बैंक निफ्टी इंडेक्‍स में हेरफेर करने और कथित तौर पर रिटेल निवेशकों की कीमत पर भारी मुनाफा कमाने का आरोप लगाया गया है. सेबी के इस खुलासे के बाद भारतीय शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों में खलबली मची है.   सेबी के अंतरिम आदेश ने Jane Street को भारतीय बाजारों में कारोबार करने से बैन कर दिया है. हालांकि कंपनी इन आरोपों से इनकार किया है और सेबी के फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रही है. सोलोमन एंड कंपनी की पार्टनर किंजल चंपानेरिया ने उपलब्ध कानूनी विकल्पों के बारे में बताया, 'सेबी के 3 जुलाई 2025 के आदेश के अनुसार, सेबी ने कई शर्तें लगाई हैं और संस्थाओं से और जानकारी मांगी है. इनमें जमा राशि, कारोबार का विवरण, संपत्तियों का विवरण आदि शामिल हैं.'  जेन स्‍ट्रीट के बाद एक्‍शन कें सेबी  इस खुलासे के बाद सेबी ने कई और फर्मों की जांच शुरू की है. कुछ ट्रेडिंग फर्म पर सेबी बारीकी से नजर रख रही है. वहीं शेयर बाजार में ट्रेडिंग वैल्‍यूम में भी गिरावट देखी जा रही है. जेन स्‍ट्रीट पर खुलासे के बाद BSE को भी नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा है. कुछ आंकड़ें कहते हैं कि BSE के EPS में 4 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है. 

Youtube पर कंटेंट क्रिएशन के लिए बदले नियम, ऐसे वीडियो बनाने वालों को नहीं मिलेगा पैसा

अब यूट्यूब से कमाई करना आसान नहीं रहेगा। 15 जुलाई से यूट्यूब की मॉनेटाइजेशन पॉलिसी में बड़ा बदलाव होने वाला है। दरअसल यूट्यूब मास-प्रोड्यूस्ड कंटेंट पर सख्ती बढ़ाने जा रहा है। बदले नियमों के मुताबिक अब यूट्यूब उन्हें ही वीडियो से कमाई करने का मौका देगा जो असली और नया कंटेंट बना रहे हैं। दरअसल यूट्यूब बड़ी संख्या में बनने वाले और एक जैसे वीडियो की पहचान को बेहतर बनाने जा रहा है ताकि ऐसे वीडियो से होने वाली कमाई को कम किया जा सके। यूट्यूब चाहता है कि दर्शकों को हर चैनल की तरह से नया और ओरिजनल कंटेंट मिले। 15 जुलाई से लागू होने जा रहे इन नए नियमों के बारे में डिटेल में जानते हैं और पता करते हैं कि आखिर किस तरह के वीडियो बनाने से अब यूट्यूब पर कमाई नहीं हुआ करेगी। क्या है नए नियम यूट्यूब की नई पॉलिसी के तहत अब अगर कोई क्रिएटर चाहता है कि उसकी वीडियो पैसा कमाए, तो जरूरी होगा कि उसका वीडियो ओरिजनल हो। अगर किसी वीडियो को किसी दूसरी जगह से उठाया जाता है, तो भी उसमें बदलाव करना जरूरी होगा। यूट्यूब चाहता है कि क्रिएटर्स के वीडियो व्यूज से ज्यादा जानकारी देने या दर्शकों का मनोरंजन करने पर केंद्रित होने चाहिए। इतना ही नहीं यह सख्ती ऐसे कंटेंट पर भी लागू होगी जो AI से बनाए जाते हैं। यूट्यूब यह सब अपने प्लेटफॉर्म से बोरिंग और एक जैसे कंटेंट की सफाई के लिए कर रहा है। यूट्यूब की ओर से इस बारे में जानकारी एक सपोर्ट पेज पर दी है। इस पर बताया गया है कि वह अपनी मॉनेटाइजेशन पॉलिसी को अपडेट करने जा रहे हैं। ऐसा 'मास-प्रोड्यूस्ड और रिपीट होने वाले कंटेंट' की पहचान करने के लिए किया गया है। इस सपोर्ट पेज पर यूट्यूब से साफ किया है कि उसने हमेशा से क्रिएटर्स से ओरिजनल और ऑथेंटिक कंटेंट बनाने की डिमांड की है। चैनल मोनेटाइज के लिए पूरी करनी होगी ये शर्तें यानी चैनल मोनेटाइज कराने के लिए आपके पास 1000 से ज्यादा सब्सक्राइबर्स होने चाहिए. इसके अलावा चैनल पर 12 महीनों में 4000 पब्लिक वॉच आवर होने चाहिए या फिर 1 करोड़ शॉर्ट्स व्यू 90 दिनों में आने चाहिए. हालांकि, अब शर्त सिर्फ इतनी नहीं रहेगी, बल्कि आपका कंटेंट ओरिजनल और ऑथेंटिक होना चाहिए.  YouTube ये अपडेट स्पैम और AI कंटेंट की संख्या को कम करने और ओरिजनल कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए लेकर आ रहा है. ऐसे क्रिएटर्स जो इस अपडेट को मिस करते हैं, उन्हें डिमोनेटाइजेशन का सामना करना पड़ सकता है. भले ही उनके कंटेंट पर अच्छे नंबर आ रहे हो.  AI कंटेंट्स की बढ़ रही संख्या AI टेक्नोलॉजी की एंट्री के साथ ही YouTube पर ऐसे कंटेंट्स की बाढ़ सी आ गई है. कंपनी के हिसाब से इन लो-क्वालिटी मीडिया या कंटेंट को AI की मदद से जनरेट किया जा रहा है. उदाहरण के लिए किसी फोटो पर आपको आसानी से एक AI वॉयसओवर मिल जाएगा या फिर किसी वीडियो क्लिप पर AI वॉयसओवर टाइप का कंटेंट आपको यूट्यूब पर मिल जाएगा.  कई ऐसे चैनल्स भी हैं, जो AI कंटेंट जनरेट करके लाखों सब्सक्राइबर्स को जोड़ चुके हैं. ये वीडियोज AI की मदद से जनरेट किया जाते हैं और उन्हें असली की तरह पेश किया जाता है. ऐसे कंटेंट्स को लेकर ही YouTube पॉलिसी अपडेट को लेकर आ रहा है. कंपनी की मानें, तो ये छोटा अपडेट है, लेकिन इसका असर AI की मदद बल्क कंटेंट क्रिएट करने वालों पर पड़ेगा. शॉर्ट्स ने बदला ट्रेंड यूट्यूब पर एक जैसे वीडियो का ट्रेंड शॉर्ट्स की वजह से शुरू हुआ है। साल 2020-2021 में कंपनी ने रील्स जैसे वीडियो को अपने प्लेटफॉर्म पर पेश किया था। इस तरह के वीडियो को यूट्यूब पर शॉर्ट्स नाम दिया गया था। बड़ी बात यह है कि यूट्यूब से पहले इस तरह के वीडियो जिस भी प्लेटफॉर्म पर पॉपुलर थे जैसे कि टिकटॉक, वहां एक जैसा और रिपीट होने वाला कंटेंट आम बात था। अब क्योंकि प्लेटफॉर्म के तौर यूट्यूब का नेचर टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म से अलग इसलिए मॉनेटाइजेशन पॉलिसी में बदलाव करके रिपीट होने वाले वीडियो की सफाई यूट्यूब करना चाह रहा है। AI वीडियो पर भी गाज? हाल ही में यूट्यूब और अन्य वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर एआई वीडियो की बाढ़ देखने को मिली थी। यूट्यूब के सख्त नियमों का खामियाजा इस तरह के वीडियो को भी भुगतना पड़ सकता है। बताया जा रहा है रिवाइज्ड गाइडलाइन्स में AI से बने वीडियोज भी शामिल हो सकते हैं। यह ऐसे वीडियो होते हैं जहां क्रिएटर्स AI से जेनरेटेड आवाजों का इस्तेमाल करके किसी और के वीडियोज पर रिएक्ट करते हैं। हालांकि इस पर स्पष्ट जानकारी का फिलहाल इंतजार है।  

चीन और अमेरिका को पीछे छोड़ जापान ने मारी बाजी, इंटरनेट स्पीड में बना डाला वर्ल्ड रिकॉर्ड

नई दिल्ली हाई स्पीड इंटरनेट आजकल हर किसी की जरूरत बन गया है। सभी लोग अच्छी स्पीड वाला इंटरनेट इस्तेमाल करना चाहते हैं और इसके लिए 5G रिचार्ज प्लान्स खरीदते हैं या वाई-फाई लगवाना पसंद करते हैं। लेकिन, फिर भी कभी-कभी इंटरनेट की स्पीड स्लो हो जाती है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्या हो अगर आपको कभी भी बफरिंग का सामना न करना पड़े या डाउनलोडिंग शुरू करते ही मूवी या कोई और बड़ी फाइल फट से डाउनलोड हो जाए। आपको शायद यकीन न हो लेकिन जापान में यह सच हो चुका है। जापान में वैज्ञानिकों ने सबसे ज्यादा इंटरनेट स्पीड हासिल की है और सिर्फ यही नहीं उन्होंने इंटरनेट स्पीड के मामले में एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया है। ध्‍यान देने वाली बात है कि चीन और अमेरिका ट्रेड वॉर में उलझे हुए हैं और जापान ने यह कारनाम करके दिखाया है। आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं. वैज्ञानिकों ने बनाया इंटरनेट स्पीड का वर्ल्ड रिकॉर्ड दरअसल, जापान में वैज्ञानिकों की एक टीम ने इंटरनेट स्पीड का नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 1.02 पेटाबिट प्रति सेकंड की जबरदस्त स्पीड हासिल की है। यह स्पीड इतनी फास्ट है कि बड़ी से बड़ी कोई फाइल पलक झपकते ही डाउनलोड हो सकती है. यह स्पीड इतनी तेज है कि आप एक सेकंड में नेटफ्लिक्स की पूरी लाइब्रेरी, 8K वीडियो या विकिपीडिया की सारी जानकारी हजारों बार डाउनलोड कर सकते हैं। कितनी तेज है स्पीड? यह स्पीड कितनी तेज है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह भारत में मिलने वाली औरत इंटरनेट स्पीड से लगभग 1 करोड़ 60 लाख गुना तेज है और अमेरिका में लोगों को मिलने वाली सामान्य स्पीड से 35 लाख गुना ज्यादा तेज है। वैज्ञानिकों ने किया कमाल यह कमाल जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजी (NICT) के वैज्ञानिकों ने किया है। उन्होंने सुमितोमो इलेक्ट्रिक और इंटरनेशनल रीसर्चर्स के एक ग्रुप के साथ मिलकर फाइबर ऑप्टिक केबलों का इस्तेमाल करके एक सुपर हाई-स्पीड नेटवर्क बनाया। सबसे अच्छी बात यह है कि उन्होंने जो केबल इस्तेमाल किया है, वह आज हम जो केबल इस्तेमाल करते हैं, उसी साइज का है। अंतर सिर्फ अंदरूनी बनावट में है। इसमें एक कोर के बजाय 19 कोर हैं, जिसका मतलब है कि यह एक साथ बहुत ज्यादा डेटा ले जा सकता है। इन खास केबल्स का इस्तेमाल करके टीम ने 1,800 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक भारी मात्रा में डेटा भेजा और वह भी बिना स्पीड कम हुए। उन्होंने ट्रांसमीटरों, रिसीवरों और लूपिंग सर्किट के साथ एक सेटअप का इस्तेमाल किया, जिससे डेटा आसानी से फ्लो होता रहा।

विकसित भारत मिशन में पूर्वोत्तर की भागीदारी जरूरी: वित्त मंत्री का बड़ा बयान

शिलांग  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा पूर्वोत्तर क्षेत्र को 'अष्ट लक्ष्मी' कहते हैं और यहां अच्छे स्वभाव वाले लोग, प्राकृतिक संसाधन, सांस्कृतिक समृद्धि, रणनीतिक स्थान और ऊर्जावान युवा तक हर चीज प्रचुर मात्रा में है। इस कारण से यह क्षेत्र विकसित भारत 2047 विजन में बड़ा योगदान देगा। आईआईएम शिलांग में आईआईसीए नॉर्थ ईस्ट कॉन्क्लेव 2025 में बोलते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, "हम हमेशा सबका साथ और सबका विकास के बारे में बात करते हैं और यह पूर्वोत्तर क्षेत्र को शामिल किए बिना पूरा नहीं हो सकता। यह केवल जन धन खाते खोलकर वित्तीय समावेशन के बारे में नहीं, बल्कि युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के बारे में भी है।" वित्त मंत्री ने आगे कहा, "आज के समय में युवा स्वयं को दुनिया की जरूरतों के मुकाबले तेजी से खुद को ढाल रहे हैं। ऐसे में नीतिगत समर्थन भी मिले तो यह उद्यमिता विकास के लिए एक बहुत अच्छा मंच तैयार कर सकती है।" वित्त मंत्री ने कहा, "पूर्वोत्तर क्षेत्र में 2,300 डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं, जिनमें से 69 अकेले मेघालय में स्थित हैं। यह महत्वपूर्ण है कि आईआईएम शिलांग जैसे संस्थान क्रॉस-पॉलीनेशन में मदद करें और सभी पेशेवरों को एक साथ लाएं और समय-समय पर मिलें। अब जब आईआईसीए यहां है, तो उन्हें लोगों को एक साथ लाने का माध्यम बनना चाहिए, जिससे बेहतर चर्चाओं और अनुपालन संबंधी मुद्दों का समाधान किया जा सके।" इसके अलावा वित्त मंत्री ने आईआईसीए नॉर्थ ईस्ट कॉन्क्लेव 2025 में स्टार्टअप एग्जीबिशन का दौरा किया और स्टार्टअप संस्थापकों के साथ बातचीत की। इस दौरान उनके साथ मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा भी मौजूद थे। इस एग्जीबिशन में पूर्वोत्तर क्षेत्र के 39 स्टार्टअप, एफपीओ, वित्तीय संस्थान और इनक्यूबेटर शामिल हुए। वित्त मंत्री ने कहा कि आईआईसीए नॉर्थ ईस्ट कॉन्क्लेव 2025 एक परिवर्तनकारी आयोजन के रूप में स्थापित है, जो क्षेत्र की उद्यमशीलता क्षमता को उजागर करेगा और ज्ञान, नीति और साझेदारी के माध्यम से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को स्थानीय आकांक्षाओं के साथ जोड़ेगा।

भारत में Tesla लॉन्च की तैयारी पूरी, जानिए कब और कहां खुलेगा पहला शोरूम

मुंबई  आखिरकार सालों के लंबे इंतजार के बाद एलन मस्क के नेतृत्व वाली अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला की इंडिया में एंट्री होने जा रही है. अलग-अलग मौकों पर कई बार टेस्ला की कारों को भारतीय सड़कों पर स्पॉट किया गया था, लेकिन अब इन कारों का इंतजार खत्म होने जा रहा है. टेस्ला इंडिया में अपने ऑफिशियल ऑपरेशन की शुरुआत करने जा रही है और कंपनी के पहले शोरूम की शुरुआत मुंबई में होगी.  कहां खुलेगा टेस्ला का शोरूम? रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक आगामी 15 जुलाई को टेस्ला का इंडिया में पहला शोरूम मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लैक्स (BKC) में शुरू किया जाएगा. इस शोरूम की शुरुआत के साथ टेस्ला की साउथ एशिया में एक फॉर्मल एंट्री होगी. लगभग 4000 वर्ग फुट में फैले टेस्ला के इस पहले शोरूम से इंडिया ऑपरेशन की शुरुआत होगी. मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में शोरूम का काम तकरीबन खत्म हो चुका है. ये शोरूम ग्राहकों के लिए टेस्ला के 'एक्सपीरिएंस सेंटर' के तौर पर काम करेगा, जिसमें ग्राहकों को टेस्ला की कारों को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिलेगा. टेस्ला भारत में डायरेक्ट-टू-कस्टमर (Direct-to-Customer) रिटेल मॉडल के साथ वाहनों की बिक्री करेगी. लेकिन कारों की बिक्री के बाद सहायता के लिए ब्रांड के पास स्थानीय साझेदार भी होंगे. जो आफ्टर सेल्स सपोर्ट मुहैया कराएंगे.  टेस्ला ने निकाली थी जॉब वैकेंसी मुंबई के बाद टेस्ला देश की राजधानी दिल्ली में भी अगला शोरूम खोलेगी. हाल ही में टेस्ला ने मुंबई और पुणे में अलग-अलग पदों पर वैकेंसी (Tesla Jobs in India) भी निकाली थी. जिसमें सेल्स एक्जीक्यूटिव, सप्लाई चेन, इंजीनियरिंग और आईटी, ऑपरेशन बिजनेस सपोर्ट, चार्जिंग इंफ्रा, एआई और रोबोटिक, सेल्स और कस्टमर सपोर्ट सहित कई अलग-अलग डिविजन में नौकरियों के लिए आवदेन मांगे गए थें. भारत पहुंची चीन में बनी टेस्ला की कारें ब्लूमबर्ग की पिछली रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि, टेस्ला की कारों का पहला सेट भारत पहुंच चुका है. टेस्ला की मशहूर इलेक्ट्रिक एसयूवी – मॉडल वाई (Model Y) रियर-व्हील ड्राइव को चीन में स्थित टेस्ला की फैक्ट्री से भारत भेजा गया है. कंपनी ने इस कार के कुल 5 यूनिट को चीन के शंघाई से भारत में इंपोर्ट किया है. Model Y दुनिया की बेस्ट सेलिंग इलेक्ट्रिक कारों में से एक है और संभवत: कंपनी इसी कार से भारत में अपने सफर की शुरुआत कर सकती है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि, टेस्ला ने अमेरिका, चीन और नीदरलैंड से सुपरचार्जर कंपोनेंट, कार एक्सेसरीज, मर्चेंडाइज और स्पेयर्स को भी इंपोर्ट किया है. दुनिया के सबसे रईस शख्स एलन मस्क (Elon Musk) के नेतृत्व वाली टेस्ला इस समय यूरोप और चीन के बाजार में बिक्री में भारी गिरावट से जूझ रही है. यही कारण है कि टेस्ला जल्द से जल्द दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजार यानी भारत में प्रवेश करने की योजना बना रही है. क्या होगी कीमत? हालांकि आधिकारिक लॉन्च से पहले टेस्ला की पहली कार की कीमत के बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है. लेकिन ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि, इंपोर्ट की गई इन कारों में से प्रत्येक मॉडल की कीमत 27.7 लाख रुपये (लगभग 31,988 डॉलर) घोषित की गई है और इन पर 21 लाख रुपये से अधिक का इंपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है. अब लॉन्च के बाद ही इस कार की कीमत का खुलासा हो सकेगा. क्या भारत में लगेगा टेस्ला का प्लांट? फिलहाल टेस्ला भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है. केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने पिछले महीने मीडिया को दिए अपने एक बयान में कहा था कि, "टेस्ला की प्राथमिकता भारत में अपने शोरूम का विस्तार करने में है. कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि, "हालांकि टेस्ला ने बहुत कम रुचि दिखाई है, लेकिन कई ग्लोबल ब्रांड्स – जिनमें हुंडई, मर्सिडीज-बेंज, स्कोडा और किआ शामिल हैं – ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू करने की इच्छा व्यक्त की है.

कौन सा देश बोला ‘नहीं’? Grok AI बैन से मस्क की योजना पर उठा सवाल

नई दिल्ली  तुर्की ने एलॉन मस्क के AI चैटबॉट Grok को ब्लॉक कर दिया है. कोर्ट के आदेश के बाद तुर्की में इस चैटबॉट को ब्लॉक किया गया है, जिसे मस्क की कंपनी xAI ने विकसित किया है. ChatGPT की वाट लगा देगा मस्क का Grok 4? इस दिन होगा लॉन्च एलन मस्क एक बार फिर चर्चा में हैं, इस बार अपने नए AI मॉडल Grok 4 के लॉन्च को लेकर सुर्खियों में हैं. मस्क की AI कंपनी xAI ने इस पावरफुल चैटबॉट को तैयार किया है, जो सीधे तौर पर ChatGPT को टक्कर देने वाला माना जा रहा है. अब सवाल ये है कि क्या सच में Grok 4, OpenAI के सबसे पॉपुलर मॉडल को पीछे छोड़ देगा? एलन मस्क के ने अपनी एक्स पोस्ट में ग्रोक 4 की लॉन्च डेट कंफर्म कर दी है. यहां जानें Grok 4 क्या है, इसमें क्या खास है और इसका लॉन्च कब होने वाला है. Grok 4 क्या है? Grok 4, एलन मस्क की कंपनी xAI का नया AI मॉडल है. ये एक एडवांस चैटबॉट है जो सवालों के जवाब देने, कोडिंग में मदद करने और सवाल-जवाब दे सकता है. एलन मस्क ने इसे इस तरह डिजाइन करवाया है कि ये बिना किसी राजनीतिक रुकावट के, क्लीयर और बेबाक तरीके से जवाब दे सकता है. ये मॉडल खासकर डेवलपर्स, टेक यूजर्स और AI रिसर्चर्स के लिए तैयार किया गया है. कब होगा Grok 4 का लॉन्च? एलन मस्क ने खुद ये जानकारी दी है कि Grok 4 का लॉन्च 9 जुलाई 2025 अमेरिकी टाइम के हिसाब से होगा. भारत में ये 10 जुलाई 2025 की सुबह 8:30 बजे लाइव स्ट्रीम के जरिए पेश किया जाएगा. आप इसे X प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीमिंग कर सकते हैं. इसके अलावा आप xAI की वेबसाइट और YouTube पर कुछ चैनलों के जरिए भी देखा जा सकेगा. Grok 4 में क्या खास है? Grok 4 अपने पिछले वर्जन से कई मायनों में बेहतर हो सकता है. ये कोडिंग एक्सपर्ट है. Grok 4 को खासतौर पर प्रोग्रामिंग और कोडिंग टास्क के लिए ट्रेन किया गया है. ये कोड लिखने, डिबग करने और सिखाने में मदद करेगा. मस्क का दावा है कि ये डीप थिंकिंग में ChatGPT से आगे निकल सकता है. इस वर्जन को एक नए कोडिंग-फोकस्ड मॉडल पर ट्रेन किया गया है जो डेवलपर्स के लिए ज्यादा यूजफुल साबित होगा. इसमें ड्यूल‑पर्सनैलिटी मोड देखने को मिलेगा. एक मोड funny and sarcastic है, जबकि दूसरा फैक्ट बेस्ड और सीरियस मोड हो सकता है. यूजर अपनी पसंद से स्टाइल चुन सकता है. Grok 4 और ChatGPT Grok 4 का लॉन्च AI दुनिया में एक बड़ा मोड़ ला सकता है. एलन मस्क का ये नया मॉडल उन यूजर्स के लिए खास है जो एआई से फास्ट, क्लीयर और टेक्निकल सपोर्ट चाहते हैं. हालांकि ChatGPT सिंपल, भरोसेमंद जवाब और भाषा के वजह से आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. लेकिन Grok 4 जैसे नए ऑप्शन आने से मुकाबला और भी तगड़ा हो गया है.  

भारत के सबसे महंगे स्टॉक ने रचा इतिहास, एक शेयर की कीमत 150000 रुपये के अधिक

मुंबई  डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा एक शेयर की कीमत, हर किसी के पोर्टफोलियो में नहीं हो सकता है ये शेयर. आज देश के सबसे महंगे शेयर MRF लिमिटेड की कीमत बढ़कर 1.5 लाख रुपये से ज्यादा हो गई. एक बार ये देश का सबसे महंगा शेयर हो गया है. पिछले तीन महीने में MRF के शेयर ने तगड़ा रिटर्न दिया है.  दरअसल, बुधवार को MRF का शेयर 1,44,945 रुपये पर खुला और कारोबार के दौरान 1,50,995 रुपये तक पहुंच गया, जो कि शेयर के ऑल टाइम हाई बेहद करीब है. MRF का ऑल टाइम हाई प्राइस 1,51,283.40 रुपये है, जो इसने फरवरी 2024 में टच किया था. एक बार फिर MRF के शेयर ने Elcid Investments को पीछे छोड़कर देश का सबसे महंगा शेयर बन गया है.   इसी साल 4 मार्च को शेयर गिरकर 1 लाख रुपये के आसपास पहुंच गया था, जहां से पिछले तीन महीने में एकतरफा रैली देखने को मिली है, यानी महज तीन में MRF के शेयर ने करीब 50 फीसदी का रिटर्न दिया है. हालांकि पिछले एक साल में शेयर ने 14 फीसदी रिटर्न बनाकर दिया है. 5 साल में रिटर्न का आंकड़ा बढ़कर 132 फीसदी तक हो जाता है. MRF के फिर डेढ़ लाख रुपये के पार जो भी हो, MRF के शेयर के लिए 1.50 लाख रुपये का आंकड़ा एक साइक्लोजिकल बैरिकेड था, जिसने उसने आज पार कर लिया है. MRF कंपनी की कहानी बेहद की रोचक रही है. कंपनी पैसेंजर कारों, दोपहिया, ट्रक, और यहां तक कि भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई विमानों के लिए टायर बनाती है. इसके अलावा, फनस्कूल ब्रांड के तहत खिलौने और पेंट्स भी इसका हिस्सा हैं. वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का राजस्व 28,153 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 1,869 करोड़ रुपये रहा, जो इसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है. अगर कंपनी के इतिहास पर नजर डालें तो MRF के एक शेयर की कीमत 1995 में करीब 1,100 रुपये थी, पिछले 30 वर्षों में शेयर ने 18.5% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) के साथ निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. 2005 तक शेयर मूल्य बढ़कर लगभग 3,500 रुपये हो गया. इस अवधि में कंपनी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई और निर्यात बाजार में प्रवेश किया, जिससे राजस्व में स्थिर वृद्धि हुई. 2005 से 2015 तक MRF ने वैश्विक और घरेलू मांग का लाभ उठाया. कंपनी ने ट्रक, बस, और ऑफ-रोड टायर सेगमेंट में विस्तार किया. 2015 तक शेयर मूल्य 40,000 रुपये के स्तर को पार कर गया, जो 27.8% CAGR का संकेत देता है. इस दौरान कंपनी ने फनस्कूल (खिलौने) और पेंट्स जैसे विविध कारोबार शुरू किए और भारतीय वायुसेना के लिए विशेष टायर बनाए. 2015 के बाद शेयर में ऐतिहासिक उछाल  2015 से 2025 तक MRF के शेयर ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया. जून 2023 में इसका शेयर मूल्य 1 लाख रुपये को पार कर गया, जो भारत में किसी कंपनी का पहला ऐसा रिकॉर्ड था. फिर जनवरी- 2024 में 1.50 रुपये के स्तर को पार किया, उसके बाद शेयर में लंब वक्त तक गिरावट हावी रहा. लेकिन एक बार फिर  MRF के शेयर ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया है.   MRF कंपनी की कहानी बेहद ही दिलचस्प है, आइए जानते हैं कैसे गुब्बारे बनाते-बनाते ये टायर मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस में आई और कैसे इसके शेयर ने देश के सबसे हैवीवेट शेयर का तमगा हासिल किया. गुब्बारे बनाने से हुआ था बिजनेस शुरू टायर की दुनिया का बादशाह बनने से पहले इस कंपनी के फाउंडर के.एम. मामेन मपिल्लई (K. M. Mammen Mappillai) गुब्बारे बनाते थे. मपिल्लई ने साल 1946 में कारोबारी दुनिया में कदम रखा. उन्होंने तिरुवोट्टियूर, मद्रास में एक छोटे से शेड में गुब्बारे बनाने का कारोबार शुरू किया. वे ज्यादातर बच्चों के खिलौने के साथ ही इंडस्ट्रियल ग्लव्स और लैटेक्स से बनी हुई चीजों का निर्माण करते थे. समय के साथ उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार किया और इस पर आगे बढ़ते हुए साल 1952 में मद्रास रबर फैक्ट्री (MRF) की स्थापना की. ट्रेड रबर बनाने का उनका कारोबर की दुनिया में प्रवेश करने के महज 4 वर्षों के भीतर ही कंपनी तेजी से आगे बढ़ी और साल 1956 तक MRF 50% शेयर के साथ भारत में ट्रेड रबर का मार्केट लीडर बन गया. समय के साथ बदला कारोबार  5 नवंबर 1961 को MRF को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का दर्जा मिला. उस वक्त तक कंपनी मैन्सफील्ड टायर एंड रबर कंपनी के सहयोग से ऑटोमोबाइल, विमान, साइकिल के लिए टायर और ट्यूब बनाती थी. 1965 में कंपनी ने अपने पहले फॉरेन वेंचर के जरिए अमेरिका (US) में टायरों का निर्यात शुरू कर दिया. 80 के दशक में भारतीय ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव आया, किफायती कारों ने दस्तक दी, जिसका उदाहरण मारुति 800 (Maruti 800) है. वहीं टू-व्हीलर इंडस्ट्री ने भी रफ्तार पकड़ ली थी, 1985 में कंपनी ने टू-व्हीलर्स के लिए टायर बनाने शुरू कर दिए. 1993 तक MRF का कारोबार स्थापित हो चुका था और अब ये कंपनी ट्रक, कार, बाइक-स्कूटर बाजार तक में अव्वल बन गई थी.