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इस हफ्ते आ रहे 3 IPO, निवेशकों को रखें तैयार – देखें पूरी जानकारी और डिटेल्स

  नई दिल्ली अगर आप आईपीओ में निवेश (IPO Investment) का प्लान बना रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए खास है. दरअसल, इस हफ्ते तीन कंपनियां अपने आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन करने जा रही है. इनमें एक मैनबोर्ड, जबकि दो एसएमई आईपीओ शामिल हैं, ये दोनों ही SME IPO  मिलकर प्राइमरी मार्केट से 137 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने के लिए उतरेंगे. आइए जानते हैं इनके प्राइस बैंड, इश्यू साइज से लेकर लॉट तक के बारे में फुल डिटेल. हफ्ते के पहले दिन ये IPO  सप्ताह के पहले कारोबारी दिन आज 16 फरवरी को ओपन होने वाला आईपीओ एसएमई कैटेगरी का है. फुल-सर्विस गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन कंपनी फ्रैक्टल इंडस्ट्रीज अपना इश्यू (Fractal Industries IPO) ओपन करने वाली है. इसका साइज 49 करोड़ रुपये है और निवेशक इसमें 18 फरवरी तक बोलियां लगा सकेंगे. आईपीओ के तहत कंपनी 22,68,600 शेयर जारी करेगी, जो 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले होंगे.  Myntra, Ajio और Flipkart जैसे प्लेटफॉर्मों को सर्विस देने वाली गारमेंट्स डिजाइन और मैन्युफैक्चर कंपनी ने अपने आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 205-216 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जबकि लॉट साइज 600 शेयरों का है और रिटेल इन्वेस्टर्स को कम से कम दो लॉट के लिए बोली लगानी होगी. ऐसे में अपर प्राइस बैंड के हिसाब से किसी भी निवेशक को इस SME IPO में 1200 शेयरों के लिए 2,59,200 रुपये लगाने होंगे. इसकी लिस्टिंग 23 फरवरी को BSE SME में होगी.  ये है हफ्ते का दूसरा आईपीओ अगला आईपीओ 18 फरवरी को सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन होने वाला है और इसमें निवेशक 20 फरवरी तक पैसे लगा सकेंगे. ये इश्यू 2018 में स्थापित यशतेज इंडस्ट्रीज (इंडिया) लिमिटेड ला रही है, जो सोयाबीन ऑयल बनाने के बिजनेस से जुड़ी हुई है. कंपनी B2B सेगमेंट में काम करती है, यानी इसके द्वारा तैयार किया गया ऑयल रिफाइनिंग करने वाले ग्राहकों को बेचा जाता है. इसका एसएमई कैटेगरी के Yashhtej Industries (India) IPO का साइज 88.88 करोड़ रुपये है और कंपनी 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 80,79,600 शेयरों के बोलियां आमंत्रित करेगी.  प्राइस बैंड की बात करें, तो ये 110 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 1200 शेयरों का है. रिटेल निवेशकों को 2 लॉट यानी 2400 शेयरों के लिए बोली लगानी होगी और इसके लिए कुल 2,64,000 रुपये का निवेश करना होगा. इसकी लिस्टिंग भी BSE SME पर होगी और संभावित लिस्टिंग डेट 25 फरवरी है.  तीसरा IPO होगा मैनबोर्ड  अगले हफ्ते ओपन होने वाले तीन आईपीओ में से आखिरी मैनबोर्ड कैटेगरी का इश्यू है. देश में IVF उपचार में काम करने वाली कंपनी गौडियम आईवीएफ एंड वुमन हेल्थ लिमिटेड का इश्यू (Gaudium IVF IPO) 20 फरवरी को ओपन होने जा रहा है और इसमें 24 फरवरी तक पैसे लगाए जा सकेंगे. इससे पहले 18 फरवरी को इसे Anchor Investors के लिए ओपन किया जाएगा. इसके प्राइस बैंक और लॉट साइज का खुलासा फिलहाल नहीं किया गया है.  मौजूदा डिटेल पर गौर करें, तो कंपनी आईपीओ के तहत 5 रुपये की फेस वैल्यू वाले 2,08,86,200 शेयर जारी करेगी. इनमें से 1,13,92,500 शेयर फ्रेश होंगे, जबकि बारी शेयरों को ऑफर फॉर सेल यानी OFS के जरिए बेचा जाएगा. 2015 में स्थापित इस कंपनी के शेयरों की BSE-NSE पर लिस्टिंग 27 फरवरी को होगी. 

लाखों पेंशनर्स के लिए राहत! पुराने रिटायरमेंट वालों को भी मिलेगा नए नियमों का फायदा

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद लाखों केंद्रीय पेंशनभोगियों के मन में उपजी चिंताओं पर सरकार ने विराम लगा दिया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 31 दिसंबर, 2025 तक रिटायर होने वाले कर्मचारियों को भी नए वेतन आयोग के लाभों के दायरे में रखा जाएगा। वित्त मंत्रालय ने संसद में किया साफ केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग (8th CPC) के लाभार्थियों को लेकर चल रहे संशय को दूर कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने संसद में साफ किया है कि वेतन आयोग की सिफारिशें केवल मौजूदा कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि उन लाखों पेंशनभोगियों के लिए भी होंगी जो 31 दिसंबर, 2025 या उससे पहले सेवानिवृत्त (Retire) हो चुके हैं। लोकसभा में सरकार का स्पष्टीकरण पेंशन नियमों में बदलाव और पुराने बनाम नए पेंशनभोगियों के बीच संभावित भेदभाव की खबरों के बीच वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में स्थिति साफ की। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि 8वें वेतन आयोग को विशेष रूप से केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन (Pay), भत्ते (Allowances) और पेंशन (Pension) पर अपनी सिफारिशें देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।   पेंशनर्स के लिए क्यों था संशय? दरअसल, 'फाइनेंस एक्ट 2025' द्वारा मौजूदा पेंशन नियमों के वैधीकरण के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या नए रिवीजन का लाभ केवल उन लोगों को मिलेगा जो 1 जनवरी 2026 के बाद रिटायर होंगे। हालांकि, सरकार के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि…     पेंशन में बदलाव केंद्र सरकार द्वारा जारी 'जनरल ऑर्डर्स' के माध्यम से किया जाता है।     8th CPC की सिफारिशें स्वीकार होने के बाद, ये आदेश सभी पात्र पेंशनभोगियों पर लागू होंगे।     यह प्रक्रिया सेंट्रल सिविल सर्विसेज़ (पेंशन) रूल्स, 2021 के तहत संचालित होती है।

फ्लाइट कैंसलेशन के बाद इंडिगो की भर्ती मुहिम, 1000 नए पायलट्स शामिल होंगे

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो को पिछले साल दिसंबर में पायलट और अन्य क्रू की भारी किल्लत की वजह से 7 दिनों के भीतर 5000 से भी ज्यादा फ्लाइट्स को कैंसिल करना पड़ा था। अब इंडिगो अपने परिचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए 1,000 से अधिक पायलटों की भर्ती करने जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिगो की इस भर्ती में ट्रेनी फर्स्ट ऑफिसर, सीनियर फर्स्ट ऑफिसर और कैप्टन शामिल हैं। अगर इंडिगो इस भर्ती को सफलतापूर्वक पूरा करती है तो यह भारतीय एयरलाइन कंपनी द्वारा की गई अभी तक की सबसे बड़ी भर्तियों में से एक होगी। फ्रेशर भी रखे जाने की प्लानिंग  रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती नोटिस से पता चलता है कि एयरलाइन अपने नेटवर्क के प्रमुख विमान एयरबस ए320 पर बिना अनुभव वाले आवेदकों की भी भर्ती करने के लिए तैयार है। वहीं, एयरलाइन के नए नियमों के तहत पायलट द्वारा रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच की जाने वाली लैंडिंग की संख्या सीमित कर दी गई है, साथ ही साप्ताहिक विश्राम की आवश्यकताएं भी बढ़ा दी गई हैं। पायलटों के भर्ती की तैयारी एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि एयरलाइन अपने विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पायलटों की निरंतर भर्ती के लिए सक्रिय रूप से तैयारी कर रही है। एयरलाइन के इंटरनल ट्रेनिंग सिस्टम पहले से मजबूत है, जिसके तहत प्रति माह लगभग 20-25 फर्स्ट ऑफिसर को कप्तान के पद पर पदोन्नत किया जाता है। एयरलाइन औसतन प्रति माह लगभग चार नए विमान शामिल करती है। दिसंबर में क्यों रद हुई थी उड़ानें? नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की जांच में पाया गया कि एयरलाइन ने नए नियमों के लिए पर्याप्त भर्ती नहीं की और न ही ट्रेनिंग में तेजी लाई, जिससे पायलटों पर बार-बार ट्रांसफर, लंबे वर्किंग डेज और लंबे समय तक खाली उड़ान के कारण प्रेशर बढ़ गया। इंडिगो को 2,422 कप्तानों की आवश्यकता थी, लेकिन एयरलाइन के अनुसार उसके पास केवल 2,357 कप्तान ही थे। जिसकी वजह से रोस्टर पूरी तरह से लागू नहीं हो सका और उड़ानों को रद करना पड़ा।  

नया Mahindra Udo थ्री-व्हीलर: 3 ड्राइव मोड के साथ बाजार में आया, जानें कीमत और रेंज

मुंबई  महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी लिमिटेड (MLMML), जो ऑटोमेकर की छोटी कमर्शियल गाड़ी बनाने वाली कंपनी है, उसने भारत में Mahindra UDO नाम का एक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर लॉन्च किया है. कंपनी का कहना है कि UDO की प्रेरणा हवाई जहाज़ से मिली है और वह इसे 'ऑटोप्लेन' के तौर पर देखती है. कंपनी का यह भी कहना है कि Mahindra UDO शब्द का हिंदी में मतलब 'उड़ना' है. Mahindra का कहना है कि 1948 से पारंपरिक ऑटो डिज़ाइन में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिसमें ड्राइवरों और यात्रियों के कम्फर्ट का ध्यान नहीं रखा गया है. क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा थ्री-व्हीलर EV मार्केट है, Mahindra UDO के साथ, Mahindra का मकसद ऑटो ड्राइवरों की इज्ज़त बढ़ाना और उनकी प्रोफेशनल इमेज और ओनरशिप एक्सपीरियंस को बदलना है. Mahindra Udo की कीमत और वारंटी Mahindra Udo ऑटो को कंपनी ने 3,84,299 रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है, लेकिन कुछ समय के लिए, यह इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर 3,58,999 रुपये (एक्स-शोरूम) में बेचा जाएगा. इस पर 1.5 लाख km या 6 साल की वारंटी मिलेगी, जो भी पहले हो. Mahindra का कहना है कि Mahindra Udo इंडस्ट्री की पहली इलेक्ट्रिक ऑटो है, जो 1 लाख km तक फ्री सर्विस के साथ आती है. कंपनी का कहना है कि Udo खरीदने वाले कस्टमर UDAY NXT स्कीम में खुद को एनरोल कर सकते हैं. यह गाड़ी के मालिक को 20 लाख रुपये का एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, फाइनेंशियल काउंसलिंग और भी बहुत कुछ देती है. Mahindra Udo का डिजाइन और इंटीरियर Mahindra ने Udo को सेगमेंट में पहली बार फुल मोनोकोक कंस्ट्रक्शन पर बनाया है, जिससे ऑटो का स्ट्रक्चर और भी बेहतर हो गया है. इसमें हेडलैंप, मिरर और एक बड़ी विंडशील्ड के साथ एक स्लीक, एयरोडायनामिक डिज़ाइन दिया गया है, जो इसे सड़क पर एक ऐसी पहचान देता है, जो इसे दूसरे इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा से अलग बनाती है. Mahindra Udo में एर्गोनॉमिक डिज़ाइन वाली सीटें मिलती हैं, जिनमें ड्राइवर और पैसेंजर के आराम का ध्यान रखा गया है. इसमें ड्राइवर के लिए एक पायलट सीट मिलती है, जो इस सेगमेंट की दूसरी गाड़ियों से लगभग 20 परसेंट मोटी है. इस इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर में लंबी यात्राओं के लिए लाउंज जैसे आराम के लिए काफी हेडरूम और लेगरूम है. इसमें इंडिपेंडेंट रियर सस्पेंशन और डुअल फोर्क फ्रंट सस्पेंशन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह ऑटो बेहतर राइड क्वालिटी दे पाता है. Mahindra Udo की बैटरी, रेंज और फीचर्स नए Mahindra Udo में IP67 रेटेड 11.7kWh लेज़र-वेल्डेड लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया गया है. यह एक परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस (PMS) मोटर को पावर देती है. यह इलेक्ट्रिक मोटर 13.41 bhp का पीक पावर आउटपुट और 52 Nm का पीक टॉर्क आउटपुट देती है. रेंज की बात करें तो इस इलेक्ट्रिक ऑटो की असल रेंज 200 km (265 km ARAI-सर्टिफाइड रेंज) है. इतना ही नहीं, यह इलेक्ट्रिक ऑटो तीन राइड मोड्स के साथ आता है, जिसमें रेंज, राइड और रेस शामिल हैं. इस ऑटो की टॉप स्पीड 55 kmph (रेस मोड में) है. फीचर्स की बात करें तो इस ऑटो में हिल होल्ड असिस्ट और क्रीप फ़ंक्शन मिलते हैं. Mahindra Udo में 12-इंच के ट्यूबलेस टायर लगाए गए हैं.

Bitcoin में तेज गिरावट: आधी हुई वैल्यू, एक्सपर्ट्स जता रहे और 55% फिसलने का अंदेशा

 नई दिल्‍ली बिटकॉइन की कीमतों में इस हफ्ते भी गिरावट तेज रही, लेकिन शनिवार को इसमें 4 फीसदी की तेजी रही और इसकी कीमत  लगभग 68,864 डॉलर पर आ चुकी है. हालांकि एक्‍सपटर्स को इस तेजी पर कुछ खास भरोसा नहीं हो रहा है.  उनका कहना है कि इस बड़ी गिरावट के बीच यह एक छोटी सी उछाल है और गिरावट अभी भी हावी है.  बिटकॉइन अभी भी अपने  रिकॉर्ड स्‍तर से करीब आधा गिर चुका है. क्रिप्टोकरेंसी अक्टूबर में अपने उच्चतम स्तर से लगभग 44% गिर चुकी है, जो पिछले कई महीनों में हुए करेक्शन के कारण हुआ है. शुक्रवार को बिटकॉइन लगभग $69,180 पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले साल के अंत में आई तेजी के दौरान देखे गए स्तरों से काफी नीचे है. अभी और गिर सकता है बिटकॉइन मिड टर्म को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, नेड डेविस रिसर्च (एनडीआर) के रणनीतिकारों ने चेतावनी दी है कि भारी बिकवाली के बाद भी आगे और गिरावट आ सकती है. इस महीने की शुरुआत में ग्राहकों को जारी एक नोट में, एनडीआर ने कहा कि अगर मौजूदा मंदी एक पूरे बिटकॉइन विंटर में बदल जाती है, तो कीमतें मौजूदा स्तरों से काफी नीचे तक गिर सकती हैं.  55 फीसदी तक टूट सकता है बिटकॉइन नेड डेविस रिसर्च के मुख्य रणनीतिकार पैट त्सचोसिक और विश्लेषक फिलिप मौल्स के अनुसार, गंभीर मंदी की स्थिति में बिटकॉइन की कीमत गिरकर 31,000 डॉलर तक जा सकती है. इस तरह की गिरावट का मतलब मौजूदा कीमतों से लगभग 55% की और गिरावट होगी, जिससे हाल के उच्चतम स्तर के करीब निवेश करने वाले निवेशकों को और अधिक ज्‍यादा नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.  75 फीसदी तक टूट चुका है बिटकॉन एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि बिटकॉइन की ऐतिहासिक गिरावट विश्लेषण पर आधारित है. उन्होंने बताया कि पिछली बड़ी बिकवाली के दौरान, बिटकॉइन में आमतौर पर लगभग 70% से 75% की गिरावट देखी गई है, जब गिरावट लंबे समय तक मंदी के दौर में बदल गई. अगर इतिहास खुद को दोहराता है, तो मौजूदा गिरावट अभी भी जारी रह सकती है. बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार, नेड डेविस रिसर्च ने यह भी बताया कि 2011 से लेकर अब तक बिटकॉइन की मंदी के दौर में औसतन लगभग 84% की गिरावट आई है. ये गिरावटें न केवल गहरी थीं, बल्कि लंबी भी रहीं.  औसतन, पिछले बिटकॉइन की मंदी के दौर लगभग 225 दिनों तक चले, जो लंबे समय तक कमजोरी की संभावना को उजागर करते हैं.  

EU-US समझौतों से खुलेगा 60 ट्रिलियन डॉलर का मौका, पीयूष गोयल का बड़ा बयान

 नई दिल्‍ली कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के लिए एक बड़ा मार्केट खुलने जा रहा है. उन्‍होंने कहा कि भारत के लिए अमेरिका और यूरोपीय यूनियन मिलकर एक्सपोर्टर्स के लिए लगभग 55-60 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट खोल रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि इन देशों से डील के साथ ही हमने किसानों और 95% से ज्‍यादा खेती की उपज के हितों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा है.  शुक्रवार को एक बिजनेस समिट में बोलते हुए गोयल ने कहा कि AI से नौकरियां जाने के डर को भी खत्‍म किया है. यह इंसानों की जगह नहीं लेगा, सिर्फ काम का तरीका बदल जाएगा और हमें इसके लिए तैयार रहना होगा. उन्‍होंने कई रिफॉर्म और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी जिक्र किया.    गोयल ने कहा कि आज देश तेजी से आगे बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन मोड में रिफॉर्म एक्सप्रेस को आगे बढ़ाया है. भारत ने पिछले कुछ महीनों में न्यूज़ीलैंड, UK, ओमान, EU के साथ FTA डील किया है और अमेरिका के साथ एक अंतरिक ट्रेड एग्रीमेंट को फाइनल किया है. सिर्फ अमेरिका में 20 ट्रिलियन का मार्केट  कुछ दिन पहले ही पीयूष गोयल ने कहा था कि अमेरिका के साथ डील के बाद भारत को एक बड़ा मार्केट मिलने जा रहा है. अब भारत के छोटे-मध्‍यम उद्योग से लेकर एग्री और टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री की अमेरिका में कीफायती दाम पर एंट्री होगी. इस डील से अमेरिका के 20 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट खुल चुका है.  वहीं इससे पहले अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25 फीसदी दंडात्‍मक टैरिफ को हटाते हुए, रेसिप्रोकल टैरिफ को 18% पर कर दिया. अमेरिकी  राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इसकी जानकारी दी थी. गौरतलब है कि भारत पर अमेरिका ने रूस तेल खरीदारी को लेकर 25 फीसदी एक्स्‍ट्रा टैरिफ लगा दिया था, जो बढ़कर 50 फीसदी हो गया था. इसके बाद से ही दोनों देशों के साथ डील पर चर्चा चल रही थी और अब इस डील पर मोहर लगने जा रहा है.  27 देशों से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट  अमेरिका से अंतरिक व्‍यापार समझौता से पहले भारत ने यूरोपीय यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया था. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत 27 देशों के समूह यूरोपीय यूनियन और भारत ने दोनों देशों की ज्‍यादातर चीजों पर टैरिफ कम करने पर सहमति जाहिर की है. इन डील्‍स के जरिए 99 फीसदी भारतीय उत्‍पादों पर टैरिफ कम होगा. संवेदनशील चीजों को इस डील से बाहर रखा गया है.

रूस-अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत को तेल बेचने में सबसे आगे, रोजाना 1.13 मिलियन बैरल क्रूड

नई दिल्ली फरवरी के पहले हिस्से में सऊदी अरब ने भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने में रूस को पीछे छोड़ दिया है. कीमतों में कटौती और कम भाड़ा लागत के चलते सऊदी अरब एक बार फिर भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा है. वैश्विक शिप ट्रैकिंग फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी के पहले 10 दिनों में सऊदी अरब ने भारत को औसतन 11.3 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) कच्चा तेल भेजा, जबकि रूस की ऑयल सप्लाई 10.9 लाख बीपीडी रही. करीब एक साल बाद सऊदी अरब की सप्लाई फिर 10 लाख बीपीडी के पार पहुंची है. एक महीने में बदल गई पूरी तस्वीर लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी के आंकड़ों पर नजर डालें तो उस वक्त भारत ने रूस से 11.4 लाख बीपीडी तेल आयात किया था. इसके बाद इराक से 10.3 लाख बीपीडी और सऊदी अरब से करीब 7.74 लाख बीपीडी तेल आया था. हालांकि फरवरी की शुरुआत में ही तस्वीर बदलती दिख रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बदलाव भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील के फ्रेमवर्क के बाद सामने आया है. अमेरिका ने भारत पर प्रस्तावित रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने और रूसी तेल खरीद को हतोत्साहित करने के लिए लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को हटाने की घोषणा की है. इसके बाद भारत ने रूस पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करने के संकेत दिए हैं. 90 फीसदी तेल का आयात करता है भारत भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है और वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल खरीदार है. साथ ही भारत चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर भी है, जिसकी रिफाइनिंग क्षमता 258 मिलियन टन प्रति वर्ष है, जो 2030 तक बढ़कर 309 मिलियन टन से ज्यादा होने की उम्मीद है. सऊदी अरब से सप्लाई बढ़ने की एक बड़ी वजह कम ट्रांसपोर्ट लागत भी है. सऊदी अरामको ने प्रति बैरल 30 सेंट का प्रीमियम हटाकर अपने तेल की कीमत को ओमान और दुबई ग्रेड के बराबर कर दिया है. इसके अलावा पश्चिम एशिया से भारत तक तेल पहुंचने में करीब तीन दिन लगते हैं, जबकि अमेरिका से यही समय 45 से 55 दिन तक का होता है. ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब के पास अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है, जिससे वह जरूरत पड़ने पर तेजी से सप्लाई बढ़ा सकता है. यही वजह है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने पर जोर दे रहा है. फिलहाल रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत का झुकाव एक बार फिर सऊदी अरब की ओर बढ़ता दिख रहा है. शुरुआती संकेत यही बताते हैं कि आने वाले महीनों में भारत के तेल आयात मानचित्र में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

गोल्ड-सिल्वर में भारी गिरावट! Valentine’s Day पर चांदी लुढ़की, सोने के दाम भी टूटे—देखें नया रेट

झारखण्ड अगर आप सोना-चांदी खरीदने या गहने बनवाने की सोच रहे हैं, तो पहले ताजा भाव जरूर जान लें। बाजार में इन दिनों सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। ऐसे में सही जानकारी के बिना खरीदारी करना महंगा पड़ सकता है। रांची में सोना-चांदी के दाम में गिरावट रांची ज्वेलरी एसोसिएशन के अनुसार राजधानी रांची में सोने और चांदी की कीमतों में कमी आई है। आज 22 कैरेट सोना 1,44,300 रुपये प्रति 10 ग्राम और 24 कैरेट सोना 1,51,520 रुपये प्रति 10 ग्राम बिक रहा है। चांदी की बात करें तो आज इसका भाव 2,80,000 रुपये प्रति किलो है। जबकि शनिवार को चांदी 3,00,000 रुपये प्रति किलो बिक रही थी। यानी एक ही दिन में चांदी 20,000 रुपये सस्ती हो गई है। सोना भी हुआ सस्ता रांची में 22 और 24 कैरेट सोने की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है।     22 कैरेट सोना कल 1,46,200 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो आज घटकर 1,44,300 रुपये हो गया है। यानी 1,900 रुपये की कमी आई है।     24 कैरेट सोना कल 1,53,510 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो आज 1,51,520 रुपये पर आ गया है। यानी 1,990 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। अन्य शहरों में क्या है हाल? बोकारो     22 कैरेट सोना: 1,46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम      24 कैरेट सोना: 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम     चांदी: 2,55,000 रुपये प्रति किलो जमशेदपुर     22 कैरेट सोना: 1,42,200 रुपये प्रति 10 ग्राम     24 कैरेट सोना: 1,55,240 रुपये प्रति 10 ग्राम     चांदी: 2,45,630 रुपये प्रति किलो देवघर     22 कैरेट सोना: 1,43,229 रुपये प्रति 10 ग्राम     24 कैरेट सोना: 1,56,250 रुपये प्रति 10 ग्राम     चांदी: 2,45,630 रुपये प्रति किलो कुल मिलाकर, आज सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए राहत की खबर है। हालांकि बाजार में दाम रोज बदल रहे हैं, इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर जांच लें।  

Toyota ने पेश की 3-रो इलेक्ट्रिक SUV, जानें क्या होगी भारत में उपलब्धता

मुंबई  जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी टोयोटा ने आखिरकार अपनी पहली फ्लैगशिप तीन-रो वाली इलेक्ट्रिक SUV से पर्दा उठा दिया है। लंबे समय से इलेक्ट्रिक सेगमेंट में मौजूद रहने के बावजूद टोयोटा के पास अब तक ऐसी कोई फुल-साइज़ EV नहीं थी, जो सीधे तौर पर फैमिली और प्रीमियम SUV खरीदारों को टारगेट कर सके। इसी खाली जगह को भरने के लिए कंपनी ने नई Toyota Highlander EV को पेश किया है, जिसे 2027 से बिक्री के लिए उतारा जाएगा। इस मॉडल को खास तौर पर Kia EV9 और Hyundai Ioniq 9 जैसी इलेक्ट्रिक SUVs को चुनौती देने के लिए तैयार किया गया है। बदला हुआ डिजाइन, ज्यादा दमदार रोड प्रेजेंस 2027 Toyota Highlander EV को कंपनी की लेटेस्ट डिजाइन लैंग्वेज पर तैयार किया गया है। इसका फ्रंट लुक काफी बोल्ड रखा गया है, जिसमें हैमरहेड-स्टाइल फेस, फुल-लेंथ LED DRL और अलग से सेट किए गए LED हेडलैंप्स देखने को मिलते हैं। साइड प्रोफाइल में शार्प लाइन्स, उभरे हुए फेंडर्स और लंबा ग्लासहाउस इसे एक स्लीक लेकिन मजबूत सिल्हूट देते हैं। पीछे की तरफ कनेक्टेड LED टेललैंप्स और स्पॉइलर इसे मॉडर्न EV पहचान देते हैं। आकार के लिहाज से नई Highlander EV पहले से बड़ी हो गई है। इसकी चौड़ाई और व्हीलबेस में बढ़ोतरी की गई है, जिससे केबिन में तीनों रो के लिए ज्यादा स्पेस मिलता है और थर्ड रो में बैठना पहले के मुकाबले ज्यादा आरामदायक हो गया है। टेक-फॉरवर्ड और प्रीमियम इंटीरियर Toyota Highlander EV का केबिन पूरी तरह मॉडर्न अप्रोच के साथ डिजाइन किया गया है। डैशबोर्ड पर बड़ा 14-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो वायरलेस कनेक्टिविटी को सपोर्ट करता है। ड्राइवर के सामने 12.3-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है, जिसमें फुल-स्क्रीन नेविगेशन की सुविधा दी गई है। इसके अलावा हेड-अप डिस्प्ले, 64-कलर एम्बिएंट लाइटिंग और कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा पैनोरमिक ग्लासरूफ इसे और प्रीमियम बनाते हैं। फ्रंट सीट्स हीटेड हैं, दूसरी रो में कैप्टन सीट्स दी गई हैं और तीनों रो में चार्जिंग पोर्ट्स की सुविधा मौजूद है, जिससे लंबी यात्राएं ज्यादा सुविधाजनक बनती हैं। पावरट्रेन और रेंज के विकल्प नई Toyota Highlander EV को XLE और Limited वेरिएंट्स में उतारा जाएगा। इसमें फ्रंट-व्हील ड्राइव और ऑल-व्हील ड्राइव, दोनों ऑप्शन मिलते हैं। बेस वेरिएंट में 77 kWh की बैटरी दी गई है, जो सिंगल मोटर सेटअप के साथ एक चार्ज में करीब 462 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है। ऑल-व्हील ड्राइव वर्जन में डुअल मोटर सेटअप मिलता है, जिससे पावर और टॉर्क में बढ़ोतरी होती है, हालांकि रेंज थोड़ी कम हो जाती है। वहीं बड़े 95.8 kWh बैटरी पैक के साथ यह SUV एक चार्ज में 515 किलोमीटर तक चल सकती है, जो इसे लंबी दूरी की फैमिली EV के तौर पर मजबूत बनाता है। भारत में लॉन्च की क्या है संभावना? Toyota Highlander EV को पहले अमेरिकी बाजार में लॉन्च किया जाएगा और इसकी बिक्री 2027 की शुरुआत से शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल कंपनी ने भारत में इसके लॉन्च को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हालांकि, अगर इसे भारतीय बाजार में लाया जाता है, तो संभावना है कि यह CBU रूट के जरिए पेश की जाए। भारत में इस समय प्रीमियम तीन-रो इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में Kia EV9 अकेली मजबूत दावेदार है, जबकि लग्ज़री सेगमेंट में Mercedes-Benz EQS और Mercedes-Benz EQB मौजूद हैं। ऐसे में अगर Toyota Highlander EV भारत आती है, तो यह सीधे तौर पर Kia EV9 को कड़ी टक्कर दे सकती है।

RIL को अमेरिकी मंजूरी, वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात का रास्ता साफ

 नई दिल्‍ली अमेरिका ने रिलायंस इंडस्‍ट्रीज को वेनुजुएला में तेल खरीदने के लिए लाइसेंस दे दिया है. अब रिलायंस बिना किसी अनुमति या सैक्‍शन के वेनेजुएला में तेल खरीद सकेगी. रॉयटर्स की रिपोर्ट में सोर्स के हवाले से ये जानकारी दी गई है. वहीं जनवरी में ही रिलायंस ने लाइसेंस के लिए अप्‍लाई किया था और अब लाइसेंस दे दिया गया है.  रिलायंस ने जनवरी में यह लाइसेंस पाने के लिए आवेदन किया था, और इससे पहले कंपनी ने करीब 2 मिलियन बैरल वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदा था, जो कि अप्रैल में डिलीवरी होने की उम्मीद है, ये खरीद व्यापारिक कंपनियों Vitol और Trafigura से हुई थी, जिन्होंने इसी तरह के लाइसेंस प्राप्त किए थे.  महीने की शुरुआत में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि वाशिंगटन कराकास और वाशिंगटन के बीच 2 अरब डॉलर के तेल आपूर्ति समझौते और देश के तेल उद्योग के लिए एक महत्वाकांक्षी 100 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण योजना को सुविधाजनक बनाने के लिए वेनेजुएला के ऊर्जा उद्योग पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देगा. इस फैसले के बाद अब भारत को तेल बेचने के लिए रिलायंस को लाइसेंस देने की खबर आई है. अमेरिकी लाइसेंस मिलने का मतलब है कि अब रिलायंस इडस्‍ट्रीज वेनेजुएला से भारी मात्रा में तेल बिना रोक-टोक के खरीद सकती है. वेनेजुएला के तेल से रूसी तेल की भरपाई रिलायंस को लाइसेंस देने से वेनेजुएला के तेल निर्यात में तेजी आ सकती है और दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के संचालक के लिए कच्चे तेल की लागत कम हो सकती है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वेनेजुएला के तेल खरीदकर रिलायंस रूसी तेल की भरपाई करेगा.  सस्‍ते भाव पर मिल सकता है कच्‍चा तेल RIL को यह लाइसेंस अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के एनर्जी सेक्टर में लगे प्रतिबंधों को ढील देने की कड़ी में मिला है. जो कि वेनेजुएला और अमेरिकी सरकार के बीच एक बड़े तेल सप्लाई डील और ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलेप करने की योजना के तहत है. इससे रिलायंस को सस्ते भाव पर कच्चे तेल मिल सकता है, क्योंकि वेनेजुएला का तेल आमतौर पर ब्रेंट रेफरेंस के मुकाबले डिस्काउंट पर मिलता है. अमेरिका ने हटाया 25% टैरिफ  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भारत पर लगाए गए 25% दंडात्मक टैरिफ को हटा दिया था और कहा था कि भारत वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा. रिपोर्र्ट्स का दावा है कि रिलायंस समेत भारतीय रिफाइनरियां अप्रैल में डिलीवरी के लिए रूसी तेल की खरीद से बच रही हैं. रिफाइनिंग एवं व्यापार सूत्रों के अनुसार, वे लंबे समय तक ऐसे व्यापार से दूर रहने की उम्मीद कर रही हैं, एक ऐसा कदम जो नई दिल्ली को वाशिंगटन के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में मदद कर सकता है.