samacharsecretary.com

चांदी की कीमतों में अचानक मंदी, New Rates के अनुसार हुई भारी गिरावट

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतें (Gold-Silver Rates) लगातार हैरान कर रही हैं. खासतौर पर चांदी के भाव में इस हफ्ते की शुरुआत से ही उथल-पुथल देखने को मिल रही है. सोमवार को ये अचानक 21000 रुपये टूटी थी, तो मंगलवार को फिर तूफानी रफ्तार से भागती हुई नजर आई. साल के आखिरी कारोबारी दिन बुधवार 31 दिसंबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर खुलने के साथ ही चांदी का वायदा भाव 18000 रुपये तक टूट गया और चांदी सस्ती (Silver Price Crash) हो गई.   खुलते ही क्रैश हो गई Silver साल के आखिरी दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में (Comex Silver Price) बुरी तरह फिसला, तो ऐसा ही हाल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर भी देखने को मिली MCX Gold Rate अपने बीते कारोबारी दिन के बंद वायदा भाव 2,51,012 रुपये प्रति किलो की तुलना में बुरी तरह टूटकर ओपन हुआ. ये शुरुआती कारोबार में 18000 रुपये से ज्यादा करीब 6.90% सस्ती होकर 2,32,228 रुपये प्रति किलो पर आ गई. हालांकि, जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा ये कीमती धातु रिकवरी करती हुई भी नजर आई, लेकिन खबर लिखे जाने तक Silver Price 10,812 रुपये (4.31%) की गिरावट के साथ 2,40,200 रुपये पर कारोबार कर रहा था.  तीन दिनों चांदी में तगड़ा उतार-चढ़ाव 2025 के आखिरी हफ्ते के महज तीन कारोबारी दिनों में ही चांदी के भाव (Silver Rates) में तगड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को जैसे ही एमसीएक्स पर वायदा कारोबार की शुरुआत हुई थी, 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का दाम तूफानी तेजी पकड़ते हुए 2.54 लाख के पार पहुंच गया था, जो इसका नया लाइफ टाइम हाई लेवल है. लेकिन आधे दिन का कारोबार होने के बाद अचानक ये भर-भराकर टूटने लगी और पलक झपकते ही 21,511 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई.  सोमवार को चांदी की कीमत में आई तेज गिरावट, मंगलवार को देखने को नहीं मिली. दूसरे कारोबारी दिन Silver Price फिर रॉकेट की रफ्तार से चढ़ता हुआ नजर आया और ये 17000 रुपये से ज्यादा महंगी हो गई. लेकिन तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को फिर बाजी पलटी और ये कीमती धातु झटके में 18000 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई.  रिकॉर्ड हाई से कितनी सस्ती है चांदी?  अगर बात चांदी के रिकॉर्ड हाई लेवल से आई गिरावट के बारे में करें, तो सोमवार को MCX Silver Price 2,54,174 रुपये प्रति किलोग्राम के हाई लेवल पर पहुंचा था और बुधवार को शुरुआती कारोबार में ये 2,32,228 रुपये तक टूट गया था. ऐसे में लाइफ टाइम हाई से 1 किलो चांदी का वायदा भाव (1 Kg Silver Rate) फिलहाल 21,946 रुपये प्रति किलो तक कम चल रहा है. Gold का भाव भी झटके में टूटा सोना भी चांदी की चाल से चाल मिलाकर चलता हुआ नजर आ रहा है. Gold Rate अपने रिकॉर्ड हाई लेवल 1,40,655 रुपये प्रति 10 ग्राम की तुलना में काफी कम हो गया है. बुधवार को MCX पर 5 फरवरी की एक्सपायरी वाले 24 कैरेट सोने का वायदा भाव (10 Gram 24 Karat Gold Rate) गिरावट के साथ 1,35,756 रुपये पर कारोबार कर रहा था. ऐसे में अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से सोना अब 4,899 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता है.  (नोट- Gold-Silver किसी भी धातु को खरीदने या बेचने से पहले अपने सलाहकार की मदद लेना जरूरी है.aajtak.in सिर्फ जानकारी दे रहा है, इसे निवेश की सलाह कतई न समझें.)

31 दिसंबर को जोमैटो और स्विगी के डिलीवरी वर्कर्स की हड़ताल, इन कंपनियों को होगा कितना नुकसान?

नई दिल्ली  आज यानी 31 दिसंबर को अगर स्विगी (Swiggy), जोमैटो (Zomato), ब्लिंकइट (Blinkit) और जेप्टो (Zepto) के डिलीवरी करने वाले गिग वर्कर हड़ताल करने की प्लानिंग कर रहे हैं. अगर ये सभी हड़ताल पर चले गए, तो इन कंपनियों को एक ही दिन में करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है. ये कंपनियां ऑनलाइन खाना और सामान पहुंचाने का काम करती हैं, और नए साल की पार्टी के दिन ऑर्डर्स के नंबर बहुत अधिक होते हैं. यदि हड़ताल हुई से डिलीवरी रुक जाएगी, तो दुकान का शटर डाउन जैसे हालात बन जाएंगे. हमने इन कंपनियों के पुराने बिक्री के आंकड़ों से हिसाब लगाया है कि कितना नुकसान होगा? क्यों हड़ताल करना चाहते हैं डिलीवरी बॉयज? डिलीवरी बॉयज लंबे समय से शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें कम पैसे मिलते हैं. काम ज्यादा है और सिक्योरिटी है ही नहीं. अगर वे 31 दिसंबर को काम बंद कर दें, तो इन कंपनियों के ऐप पर ऑर्डर तो धड़ाधड़ आएंगे, लेकिन सामान पहुंचाने वाला कोई नहीं होगा. नतीजतन, ग्राहक नाराज, और कंपनियों की कमाई पर पानी फिर जाएगा. हमने ये आंकड़े कंपनियों की 2024-25 की सालाना रिपोर्ट से लिए गए हैं और रोजाना की एवरेज सेल निकाली है. ध्यान दें, ये सिर्फ अनुमान हैं, असली नुकसान नए साल की वजह से और ज्यादा हो सकता है, क्योंकि उस दिन पार्टी के लिए ऑर्डर दोगुने-तिगुने तक हो सकते हैं. स्विगी नुकसान में रहकर भी रहेगी फायदे में! स्विगी देश की बड़ी फूड डिलीवरी कंपनी है. इसकी सालाना कमाई करीब 15,227 करोड़ रुपये है. मतलब, औसतन हर दिन 41.7 करोड़ रुपये की बिक्री होती है. कंपनी अभी घाटे में चल रही है. हर 100 रुपये की कमाई पर 20.5 रुपये का घाटा झेल रही है. लेकिन हड़ताल से उस दिन की पूरी बिक्री रुक जाएगी, तो नुकसान 41.7 करोड़ रुपये का होगा. अच्छी बात ये कि कुछ खर्च बच जाएगा, जैसे डिलीवरी का पैसा, पैकेजिंग इत्यादी. तो स्विगी का घाटा थोड़ा कम हो सकता है. कंपनी करीब 8.5 करोड़ रुपये की बचत कर लेगी. फिर भी, कुल मिलाकर कंपनी को बड़ा झटका लगेगा, क्योंकि ग्राहकों को अच्छा एक्सपीरियंस नहीं होगा. जोमैटो का हाल क्या? जोमैटो भी फूड डिलीवरी में बड़ा नाम है. इसकी सालाना कमाई लगभग 15,037 करोड़ रुपये है, यानी रोजाना की एवरेज 41.2 करोड़ रुपये. कंपनी अब फायदे में है. हर 100 रुपये पर 3.5 रुपये का मुनाफा कमा रही है. हड़ताल से एक दिन की बिक्री खोने पर 41.2 करोड़ का नुकसान होगा, और मुनाफे में 1.4 करोड़ की कमी आएगी. जोमैटो की ब्लिंकइट अलग से चलती है, लेकिन फूड वाला हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित होगा. ब्लिंकइट पर असर ब्लिंकइट जोमैटो की ही कंपनी है, जो किराने और सामान की क्विक डिलीवरी करती है. सालाना कमाई 5,206 करोड़ रुपये है, मतलब रोज 14.3 करोड़. ये कंपनी भी घाटे में है. प्रति 100 रुपये पर यह 0.6 रुपये का घाटा उठा रही है. हड़ताल से 14.3 करोड़ की बिक्री रुकेगी, लेकिन कुछ खर्च बचने से घाटा 10 लाख कम हो सकता है. जैसा कि पहले भी बता चुके हैं कि नए वर्ष से ऐन पहले सेल ज्यादा होने की उम्मीद है. जेप्टो को सबसे बड़ा घाटा? जेप्टो भी किराने की क्विक डिलीवरी करती है और बहुत तेजी से फैल रही है. सालाना कमाई 11,110 करोड़, यानी रोज 30.4 करोड़ रुपये का रेवेन्यू. लेकिन इसका घाटा बड़ा है. यह हर 100 रुपये पर 30.3 रुपये का नुकसान उठा रही है. हड़ताल से 30.4 करोड़ की बिक्री खोएगी, लेकिन खर्च बचने से घाटा 9.2 करोड़ कम हो सकता है. जेप्टो नई कंपनी है, तो ऐसे में ग्राहक दूसरी जगह जा सकते हैं. इन चारों कंपनियों को मिलाकर एक दिन में करीब 127.6 करोड़ रुपये की बिक्री रुक सकती है. लेकिन घाटे वाली कंपनियों में कुछ पैसे बचेंगे, तो असली नुकसान थोड़ा कम होगा. फिर भी, नए साल की पूर्व संध्या पर ये बड़ा झटका होगा, क्योंकि ग्राहक परेशान होंगे और कंपनियां तनाव में.

लगातार दूसरे दिन फिसले सोना-चांदी, निवेशकों को ऊँचे भाव से मिली राहत

नई दिल्ली सोने और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरी दिन गिरावट देखने को मिली है। 24 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,35,000 रुपए प्रति 10 ग्राम से नीचे लुढ़क गया है, साथ ही चांदी की कीमत भी 2.33 लाख रुपए प्रति किलो से नीचे पहुंच गई है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 2,182 रुपए कम होकर 1,34,599 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,36,781 रुपए प्रति 10 ग्राम था। 22 कैरेट सोने की कीमत 1,23,293 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,25,291 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम 1,02,586 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,00,949 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी कमी देखी गई है। चांदी का दाम 3,111 रुपए कम होकर 2,32,329 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,35,440 रुपए प्रति किलो था। हाजिर के उलट वायदा बाजार में सोने और चांदी में तेजी देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के 5 फरवरी 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 1.35 प्रतिशत बढ़कर 1,36,767 रुपए हो गया है। चांदी 5 मार्च 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 6 प्रतिशत बढ़कर 2,37,894 रुपए हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में तेजी हावी रही। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोने का दाम 1.61 प्रतिशत बढ़कर 4,412 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 7.04 प्रतिशत बढ़कर 75.44 डॉलर प्रति औंस पर है। एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि सोना एमसीएक्स पर करीब 1,200 रुपए की तेजी के साथ बंद हुआ। कॉमेक्स में रिकवरी से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला। बाजार में निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेड के मिनट्स पर हैं। आने वाले समय में सोना 1,32,000 रुपए से 1,38,500 रुपए की रेंज में रह सकता है। 

iPhone 16 ने भारत में तोड़ा रिकॉर्ड, 65 लाख यूनिट्स की बिक्री के साथ सबसे ज्यादा बिकने वाला स्मार्टफोन बना

मुंबई   अमेरिकी टेक दिग्गज एप्पल इंक. ने भारत में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आसान क्रेडिट, कैशबैक जैसे विभिन्न ऑफर्स की बदौलत आईफोन 16 अब भारत का सबसे अधिक बिकने वाला स्मार्टफोन बन गया है, जिसने चीन की वीवो के सबसे लोकप्रिय बजट मॉडल को भी पीछे छोड़ दिया है। काउंटरप्वाइंट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल ने 2025 के पहले 11 महीनों में आईफोन 16 के करीब 65 लाख यूनिट्स बेचे और इसके साथ ही यह भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला स्मार्टफोन बन गया। एप्पल ने इस अवधि में एंड्रॉएड फोन बनाने वाली कई बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया। बीबीके इलेक्ट्रॉनिक्स समर्थित वीवो का वाई29 5जी इस अवधि में 47 लाख यूनिट्स की बिक्री के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, 33 लाख बिक्री के साथ आईफोन 15 भी भारत में बेस्ट‑सेलिंग फोन की टॉप 5 लिस्ट में शामिल रहा। एप्पल के फोन, जिनकी कीमत आईफोन 15 के लिए 47,000 रुपए से शुरू होती है, वीवो के सबसे अधिक बिकने वाले हैंडसेट (14,000 रुपए) की कीमत से तीन गुना से भी अधिक है। रिपोर्ट में बताया गया कि एप्पल की यह सफलता बदलते ग्राहक व्यवहार को दर्शाती है। पहले भारत में ज्यादातर लोग एंट्री‑लेवल और मिड‑रेंज फोन ही खरीदते थे, लेकिन अब महंगे स्मार्टफोन की मांग बढ़ रही है। एप्पल ने भारत में स्थानीय निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) बढ़ाकर चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई है। हाल ही में कंपनी ने बेंगलुरु, पुणे और नोएडा में तीन नए एप्पल स्टोर खोले, जिससे भारत में इसके कुल पांच स्टोर हो गए। एप्पल ने ग्राहकों के लिए नो‑कॉस्ट ईएमआई, कैशबैक और बैंक स्कीम जैसी सुविधाएं भी दी हैं, जिससे कंपनी के महंगे फोन खरीदना आसान हो गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एप्पल ने नवंबर में भारत से 2 अरब डॉलर के आईफोन एक्सपोर्ट किए, जो अब तक का सबसे बड़ा है। कंपनी की फाइलिंग के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में एप्पल इंडिया ने घरेलू बिक्री में 9 अरब डॉलर का रिकॉर्ड बनाया और हर पांचवें आईफोन का निर्माण या असेंबली भारत में किया गया। भारत में एप्पल की मैन्युफैक्चरिंग ने ग्लोबल प्रोडक्शन वैल्यू में 12 प्रतिशत का योगदान दिया। साथ ही, कंपनी ने पहली बार भारत में महंगे प्रो और प्रो मैक्स मॉडल का निर्माण भी शुरू किया। कंपनी की फाइलिंग में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका से 178.4 अरब डॉलर का रेवेन्यू आया, जो एप्पल के ग्लोबल रेवेन्यू का करीब 43 प्रतिशत है और इन आईफोन में से बढ़ती संख्या भारत से भेजी गई।

चांदी में भूचाल, एक घंटे में ₹21500 की गिरावट—जानिए किस फैसले से हुई क्रैश

नई दिल्ली चांदी (Silver) की खूब चर्चा हो रही है, सोमवार को भी चांदी की कीमतों में बड़ी उछाल देखने को मिली. MCX पर भाव बढ़कर 2.54 लाख रुपये किलो तक पहुंच गया. लेकिन उसके बाद अचानक एक भूचाल आया और चांदी की कीमत 21500 रुपये प्रति किलो तक गिर गई, यानी एक झटके में सोमवार को चांदी 21 हजार रुपये से ज्यादा सस्ती हो गई.    एक तरह से सराफा बाजार में एक बड़ा मार्केट ड्रामा देखने को मिला. चांदी के भाव ने दिन की शुरुआत में इतिहास रच दिया और फिर एक ही घंटे में 21,500 रुपये तक लुढ़क गए, निवेशक समझ नहीं पा रहे हैं कि ऐसा क्या हुआ, जो चांदी भर-भराकर टूट गई.   पिछले हफ्ते से लगातार रिकॉर्ड बना रही चांदी सोमवार को उस वक्त औंधे मुंह गिर पड़ी, जब उसने ढाई लाख रुपए प्रति किलोग्राम के हाई लेवल को छुआ। इसके कुछ देर बाद ही एक घंटे में चांदी में 21000 रुपए से ज्यादा की भारी गिरावट आई। MCX पर मार्च 2026 डिलीवरी वाली चांदी फिसलकर 2,33,120 रुपए प्रति किलोग्राम (silver price crast today) पर आ गई। जिसने निवेशकों को चौंका कर रख दिया। अब सवाल यह कि आखिर चांदी ने इतनी बड़ी गिरावट आई क्यों? दरअसल, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं, बल्कि मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक माहौल के ठंडा पड़ने का नतीजा है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचते ही ट्रेडर्स ने मुनाफा काटना शुरू किया और सेफ-हेवन डिमांड में अचानक ठंडक दिखी। MCX पर भारी गिरावट, 5300 रुपए तक गिरे दाम खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 मार्च 2026 एक्सपायरी वाली चांदी 2,34,400 रुपए (silver price today) प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी। पिछले दिन के मुकाबले इसमें 2.25 फीसदी यानी 5387 रुपए की गिरावट आई। पिछले कारोबारी सत्र के दौरान यह 2,39,787 रुपए (silver rate today) पर क्लोज हुई थी। खास बात यह है कि आज सुबह मार्केट खुलते ही चांदी में अचानक तेजी आई और कीमत 2,54,174 रुपए प्रति किलोग्राम के हाई लेवल पर पहुचं गई। लेकिन 1 बजे के आसपास इसमें तेजी से गिरावट (silver price crash) आई और 2.34 लाख के आसपास कारोबार करने लगी। यानी चांदी में 21,500 रुपए से ज्यादा की गिरावट आई।  रूस-यूक्रेन युद्धविराम के संकेतों ने गिराई कीमत?  अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही तस्वीर दिखी। चांदी पहली बार उथल-पुथल भरे कारोबार में 80 डॉलर प्रति औंस के ऊपर गई, लेकिन बाद में 75 डॉलर के नीचे फिसल गई। वजह- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप (Donald Trump) और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेंलेंस्की (Volodymyr Zelensky) के बीच युद्धविराम को लेकर 'काफी करीब' पहुंचने की बात। ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्ष यानी रूस और यूक्रेन की शांति वार्ता 'बहुत करीब' है, जिससे सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर पड़ी। MCX पर आई इस तेज गिरावट को बुलियन मार्केट में ब्रॉड प्रॉफिट बुकिंग का हिस्सा माना जा रहा है। रिलायंस सिक्योरिटीज (Reliance Securities) के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी कहते हैं कि, "ट्रेंड अब भी पॉजिटिव है, लेकिन उतार-चढ़ाव तेज रहेगा। 2.40 लाख चांदी के लिए नजदीकी सपोर्ट है।" वहीं अमेरिकी फर्म BTIG ने चेताया कि कीमती धातुएं पैराबॉलिक हो चुकी हैं। फर्म का कहना है कि, "ऐसी तेजी आमतौर पर समय लेकर नहीं, बल्कि तेज डाउनसाइड रिएक्शन के साथ खत्म होती है।" तकनीकी चार्ट पर चांदी 200-DMA से करीब 89% ऊपर थी- इतिहास बताता है कि ऐसी स्थिति में आगे के हफ्तों में कीमतें अक्सर नीचे आती हैं। अचानक चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट  सुबह जब MCX पर चांदी के मार्च वायदा भाव ने 2,54,174 रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड तोड़ा, तब ऐसे लग रहा था कि 2025 का यह आखिरी कारोबारी सत्र चांदी के नाम हो जाएगा. लेकिन जैसे ही बाजार में प्रॉफिट बुकिंग की लहर चली, भाव ने रफ्तार से उल्टी दिशा पकड़ी और 2,32,663 रुपये तक गिर गया, यानी कुछ ही देर में चांदी की कीमत करीब 21,500 रुपये घट गई.  जानकारों के मुताबिक यह गिरावट अचानक नहीं है, बल्कि तेज उछाल के बाद की सामान्य प्रतिक्रिया है. कई ट्रेडरों ने लाभ सुरक्षित करने के लिए चांदी बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में गिरावट की गति और तेज हो गई. चांदी में तूफानी तेजी के पीछे कारण बता दें, सबसे पहले चांदी पर अंतरराष्ट्रीय बाजार ने दबाव बनाया. वैश्विक सिल्वर की कीमतें पहले $80 प्रति औंस तक पहुंच गईं. लेकिन उसके बाद लुढ़क कर $75 पर पहुंच गई, जिससे घरेलू भावों पर असर पड़ा है. इस बदलाव में यूक्रेन-रूस तनाव में कुछ शांति की खबरें भी शामिल रहीं, जिसकी वजह से 'Safe-Haven' यानी सुरक्षित निवेश की मांग कम हुई.  गौरतलब है कि चांदी ने पिछले एक साल में जबरदस्त रिटर्न दिया है. दिसंबर 2024 में चांदी का भाव करीब 90 लाख रुपये किलो था. जहां से भाव 150% से ज्यादा उछल चुका है. सोमवार को चांदी की कीमत MCX पर 254000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई.  विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतों में कई कारणों से बढ़ोतरी देखी जा रही है. औद्योगिक मांग में उछाल, निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ती रुचि और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण चांदी की डिमांड बढ़ती जा रही है. खास तौर पर ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर पैनल्स में चांदी की बढ़ती मांग ने कीमतों को उछलने में मदद की है. '10% हाई के बाद 25% गिरी चांदी' BTIG के एनालिस्ट जोनाथन क्रिन्स्की (Jonathan Krinsky) ने 1987 का उदाहरण देते हुए कहा कि जब-जब चांदी ने मल्टी-मंथ हाई पर 10% की एक दिन की छलांग लगाई, उसके बाद 25% तक की गिरावट भी देखी गई। ICICI Prudential Mutual Fund के CIO (फिक्स्ड इनकम) मनीष बंथिया भी मानते हैं कि, "इतनी शानदार रैलियां अक्सर नरमी से नहीं, झटके से ठंडी पड़ती हैं।" हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं होती। केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, गिरावट के बाद चांदी ने 80 डॉलर के आसपास तेज रिबाउंड भी दिखाया। मध्य-पूर्व तनाव, अमेरिका-वेनेजुएला खींचतान और दरों में कटौती की उम्मीदें अब भी कीमतों को सहारा दे रही हैं। लंबी अवधि में सप्लाई की कमी, कम इन्वेंट्री और औद्योगिक मांग के चलते ट्रेंड मजबूत है। लेकिन फिलहाल, तेज उतार-चढ़ाव ही नई हकीकत है।

सोना और चांदी में उलझन: चांदी 2.5 लाख पार, सोना महंगा होने के बाद अचानक गिरावट

इंदौर  चांदी के बाजार में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला है और एमसीएक्स पर इसकी कीमत पहली बार 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम (Silver Price Today) के पार पहुंच गई है. पिछले हफ्ते चांदी में 31,348 रुपये यानी 15.04 फीसदी की तेजी दर्ज की गई थी. इस दौरान बाजार में आक्रामक खरीदारी देखी गई और उतार-चढ़ाव के बीच चांदी नई ऊंचाई पर पहुंच गई. चांदी की कीमतों में लगातार तेज़ी देखने को मिल रही है और यह नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. इसकी बड़ी वजह इंडस्ट्रियल में बढ़ती मांग, अगले साल अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, और वैश्विक सप्लाई में रुकावट को लेकर चिंता है. इसके अलावा जियो पॉलिटिकल टेंशन भी चांदी की कीमतों को समर्थन दे रहा है. पिछले हफ्ते ही चांदी की कीमतों में करीब 15% की तेज उछाल देखने को मिला था और इसकी मुख्य वजह ग्लोबल सप्लाई का सख्त होना, खासतौर पर चीन में, जहां चांदी की मांग सबसे ज्यादा है. चीन सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों का बड़ा निर्माता है, और इन सेक्टर्स में बढ़ती मांग ने चांदी की कीमतों को और ऊपर कर दिया है. थमने का नाम नहीं ले रही चांदी चांदी की कीमतें (Silver Price) थमने का नाम नहीं ले रही हैं. बीते सप्ताह के चार कारोबारी दिनों में ही सिल्वर रेट 32000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा चढ़ गया था. तो वहीं सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कारोबार की शुरुआत होते ही Silver Rate अपने पिछले बंद 2,39,787 रुपये की तुलना में उछलकर 2,54,174 रुपये के नए हाई लेवल पर पहुंच गया. इस हिसाब से देखें, तो ओपनिंग के साथ ही ये कीमती धातु 14,387 रुपये महंगी हो गई.  खुलते ही सस्ता हो गया सोना एक ओर जहां चांदी की कीमत और इसकी रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है, तो वहीं दूसरी ओर सोने में सोमवार को सुस्ती देखने को मिली है. खुलने के साथ ही 5 फरवरी की एक्सपायरी वाला MCX Gold Rate 1,39,501 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया, जो इसके पिछले बंद भाव 1,39,873 रुपये की तुलना में 372 रुपये की गिरावट (Gold Price Fall) है. हालांकि, जिस तेजी से सोने का भाव बढ़ा है, उसकी तुलना में ये गिरावट मामूली ही है, लेकिन राहत भरी कही जा सकती है.   चांदी में 175 फीसदी का उछाल कैलेंडर वर्ष के दौरान चांदी ने 1,52,554 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी की है. 31 दिसंबर 2024 को 87,233 रुपये प्रति किलो का भाव था जो अब बढ़कर लगभग 175 फीसदी के उछाल के साथ नई ऊंचाई पर पहुंच गया है. चांदी ने इस तेजी के साथ निवेशकों को साल भर में जोरदार रिटर्न (MCX Silver Price) दिया है. क्यों बढ़ती जा रही है चांदी की कीमत? मेहता इक्विटीज के वीपी कमोडिटी Rahul Kalantri के अनुसार चांदी अब सिर्फ सोने जैसी कीमती धातु के रूप में ट्रेड नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि हाई-परफॉर्मेंस टेक्नोलॉजी में इसकी बढ़ती जरूरत, भंडार की कमी और उद्योगों की मांग इसकी बुनियाद बदल रही है. राहुल के मुताबिक चांदी सोने से अलग होती दिख रही है और 2026 में यह बेहतर निवेश अवसर दे सकती है. Silver में तेजी का China कनेक्शन  बात करें चांदी की कीमत में इस जोरदार तेजी (Silver Price Rise Reason) के बारे में, तो इसके एक नहीं बल्कि कई कारण नजर आते हैं. अमेरिका डॉलर के कमजोर होने और फेड रेट ट की उम्मीदों ने निवेशकों को फिर से सुरक्षित ठिकाने के तौर कीमती धातुओं की ओर मोड़ा है. चांदी की बात करें, तो खासतौर पर इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड (Silver Demand) लगातार बढ़ रही है, जबकि सप्लाई नहीं हो पा रही है. इलेक्ट्रिक व्हीकल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स तक सभी में सिल्वर का यूज है और इससे इसकी डिमांड का अंदाजा लगाया जा सकता है. वहीं दूसरी ओर चीन की चांदी पर सख्ती (China On Silver) की खबरों ने इसे और रफ्तार देने का काम किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया का सबसे बड़ा चांदी उत्पादक चीन नए साल की पहली तारीख यानी 1 जनवरी 2026 से Silver Export पर सख्ती करने की तैयारी में है. जिनपिंग सरकार इसका एक्सपोर्ट लाइसेंस को लेकर नियम लागू कर सकता है, जिससे इसका निर्यात सीमित हो सकता है. दुनिया के सबसे अमीर इंसान (World's Richest Person) और इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला (Tesla) के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) ने भी चांदी की कीमतों पर चिंता जताई है. दि गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने एक ट्विटर (अब X) पोस्ट में लिखा है कि, 'यह अच्छा नहीं है, कई इंडस्ट्रियल प्रक्रियाओं में चांदी की आवश्यकता होती है.' चांदी पर चीन का बड़ा फैसला कमोडिटी बाजार विशेषज्ञों ने बताया कि चीन (China News) में सप्लाई टाइट होने और वैश्विक मार्केट में उपलब्धता कम होने से यह तेजी देखने को मिली है. चीन चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल उत्पादन में इसकी प्रमुख भूमिका है. विश्लेषकों के अनुसार बीजिंग 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात पर नियंत्रण लागू करेगा जिसके लिए लाइसेंस जरूरी होगा. यह व्यवस्था 2027 तक जारी रहने की संभावना है जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा. 2026 में भी महंगा हो सकता है Gold Silver विश्लेषकों का कहना है कि सोने और चांदी में 2026 में भी बढ़त देखी जा सकती है. इसका कारण ग्लोबल रेट कट की उम्मीद, सेफ हेवन डिमांड और मजबूती वाली इंडस्ट्रियल जरूरतें बताई जा रही हैं. हालांकि ट्रेडर्स के लिए यह भी कहा गया है कि 2025 की असाधारण रैली के बाद तेजी की रफ्तार मध्यम हो सकती है. चांदी के रेट में क्यों देखने को मिल रही है तेजी? चांदी की मांग- चांदी के भाव में तेजी आने के पीछे कुछ अहम वजहें शामिल है. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस सिक्योरिटीज़ के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी ने बताया है कि चांदी कई सालों से सप्लाई की कमी में है. दुनिया भर में खानों से निकलने वाली चांदी की मात्रा मांग को पूरा नहीं कर पा रही और स्टॉक्स भी लगातार घट रहे हैं. अगर यह कमी और बढ़ती है, तो चांदी की कीमतें और अधिक ऊंची हो सकती हैं. इसी तरह, अक्षा कांबोज़, जो भारत बुलियन … Read more

यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट: इंडिगो ने 130 उड़ानें रद्द की, 94 रूट्स प्रभावित

नई दिल्ली केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के सख्त निर्देशों के बाद इंडिगो (IndiGo) ने अपनी घरेलू उड़ानों में कटौती कर दी है. इंडियन एक्‍सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडिगो ने अपने दैनिक शेड्यूल में लगभग 10 फीसदी की कटौती करते हुए 94 अलग-अलग रूट्स पर अपनी करीब 130 फ्लाइट्स को रोक दिया है. इंडिगो ने दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-बेंगलुरु और मुंबई-बेंगलुरु जैसे व्यस्‍त रूटों पर उड़ानों की संख्या में कोई कटौती नहीं की है. वहीं देश प्रमख हवाई अड्डों में बेंगलुरु से सबसे ज्‍यादा उड़ानों में कटौती की गई है. इंडिगो अब प्रतिदिन कुल 2,200 उड़ानों (घरेलू + अंतरराष्ट्रीय) के स्तर पर खुद को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है. पहले यह संख्या 2,300 के पार थी. सूत्रों का कहना है कि यह न्‍यू नॉर्मल मार्च 2026 तक जारी रह सकता है. दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो ने जो शेड्यूल फाइल किया था और 29 दिसंबर के लिए जो संशोधित शेड्यूल सामने आया, उनमें जमीन-आसमान का अंतर है. दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो ने 29 दिसंबर के लिए 2,008 घरेलू उड़ानों की योजना बनाई थी, लेकिन नए अपडेटेड चार्ट में यह संख्या घटकर 1,878 रह गई है. इंडिगो के इस नए शेड्यूल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि एयरलाइन ने अपने ‘कैश काउ’ यानी सबसे ज्यादा कमाई कराने वाले और व्यस्ततम रूट्स को पूरी तरह सुरक्षित रखा है. यह कटौती दिसंबर की शुरुआत में आए बड़े ऑपरेशनल व्यवधान के बाद की गई, जिसके चलते कुछ ही दिनों में हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं. दिल्‍ली से इंडिगो ने नहीं की फ्लाइट कम इंडिगो के सबसे बड़े बेस दिल्ली से एक भी उड़ान कम नहीं की गई है. वहीं, सपनों के शहर मुंबई में केवल दो उड़ानों (एक आने वाली और एक जाने वाली) की कटौती हुई है. दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-बेंगलुरु और मुंबई-बेंगलुरु जैसे हाई-ट्रैफिक रूट्स पर उड़ानों की संख्या जस की तस बनी हुई है. दिल्ली-मुंबई रूट पर आज भी 20-20 उड़ानें शान से उड़ान भर रही हैं. इस कटौती की सबसे ज्यादा मार कम दूरी वाले यानी शॉर्ट-हॉल रूट्स पर पड़ी है. इसमें एक ही राज्य के भीतर चलने वाली या पड़ोसी राज्यों के शहरों को जोड़ने वाली उड़ानें शामिल हैं. किस एयरपोर्ट पर हुई सबसे ज्‍यादा कटौती बेंगलुरु में सबसे अधिक परिचालन संबंधी बदलाव देखे गए हैं. 29 दिसंबर के शेड्यूल में बेंगलुरु से जुड़ी 52 उड़ानों (26 प्रस्थान और 26 आगमन) को हटा दिया गया है.     बेंगलुरु: 52 उड़ानें कम     हैदराबाद: 34 उड़ानें कम     चेन्नई: 32 उड़ानें कम     कोलकाता: 22 फ्लाइट्स कम     अहमदाबाद : 22 उड़ानें कम इस रूट पर सबसे ज्‍यादा कटौती इंडिगो ने इस छंटनी को बहुत ही सूक्ष्म तरीके से अंजाम दिया है. चेन्नई-मदुरै और मदुरै-चेन्नई रूट पर सबसे बड़ी कटौती हुई है, जहां 8 उड़ानों की जगह अब केवल 3 उड़ानें रह गई हैं. गोवा-सूरत और चेन्नई-दुर्गापुर जैसे कुछ रूट्स ऐसे भी हैं, जहां चलने वाली इकलौती फ्लाइट को भी हटा दिया गया है, जिससे फिलहाल इन शहरों के बीच इंडिगो का संपर्क टूट गया है. कटौती के बीच इंडिगो ने दिल्ली-नागपुर और दिल्ली-हैदराबाद जैसे कुछ महत्वपूर्ण रूट्स पर एक-एक अतिरिक्त उड़ान जोड़ी भी है, ताकि हाई-डिमांड वाले क्षेत्रों में पकड़ बनी रहे. क्या यह 10% कटौती के आदेश का पालन है? तकनीकी रूप से देखें तो 2,008 से 1,878 उड़ानों पर आना करीब 6.5% की कमी है. हालांकि, विमानन सूत्रों का कहना है कि इंडिगो पूरी तरह नियमों का पालन कर रही है. दरअसल, DGCA की 10% कटौती एयरलाइन के ‘स्वीकृत विंटर शेड्यूल’ पर लागू होती है, जो लगभग 2,145 दैनिक उड़ानों का था. इस आधार पर अनुमत उड़ानों की संख्या 1,930 के करीब आती है. चूंकि इंडिगो अभी 1,878 उड़ानें ही संचालित कर रहा है, इसलिए वह निर्धारित सीमा के भीतर ही है. एयरलाइंस अक्सर परिचालन में लचीलापन रखने के लिए स्वीकृत कोटा से कम उड़ानें ही चलाती हैं. अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कटौती से बेअसर राहत की बात यह है कि DGCA का यह आदेश केवल घरेलू उड़ानों के लिए था. इंडिगो का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, जो प्रतिदिन 300 से अधिक उड़ानों का है, इस कटौती से पूरी तरह अछूता है. एयरलाइन विदेशों के लिए अपनी सेवाओं को उसी आक्रामकता और फ्रीक्वेंसी के साथ जारी रखे हुए है. क्रू की उपलब्धता और नेटवर्क मैनेजमेंट एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कटौती केवल नियामक के दबाव में नहीं है, बल्कि यह एयरलाइन के लिए ‘आत्मनिरीक्षण’ का समय भी है. पिछले कुछ हफ्तों में भारी ऑपरेशनल व्यवधान और हजारों उड़ानों के रद्द होने से इंडिगो की साख पर सवाल उठे थे. अब, रूट्स की दूरी और क्रू की उपलब्धता के आधार पर शेड्यूल को दोबारा सेट किया गया है ताकि भविष्य में अचानक उड़ानें रद्द करने की नौबत न आए.  

चांदी में रिकॉर्ड उछाल: 24 घंटे में ₹19,700 महंगी हुई सिल्वर, कीमतों ने तोड़ा स्तर

नई दिल्ली  पिछले कुछ दिनों में चांदी ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों को चौंका दिया है। कीमतों में ऐसी ऐतिहासिक तेजी देखने को मिल रही है, जो अब तक दुर्लभ मानी जाती थी। शनिवार, 27 दिसंबर को इंदौर के सर्राफा बाजार में चांदी एक ही दिन में 19,700 रुपये उछलकर 2.53 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। MCX के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अब तक चांदी 150 फीसदी से ज्यादा महंगी हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसका भाव 75 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया है। खास बात यह है कि यह तेजी किसी डर या सट्टेबाजी की वजह से नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी कारणों से आई है। सप्लाई से ज्यादा मांग चांदी लंबे समय से स्ट्रक्चरल डेफिसिट में है, यानी इसकी मांग सप्लाई से कहीं ज्यादा है। उद्योग रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 में वैश्विक बाजार में 100 मिलियन औंस से अधिक की कमी रह सकती है। चूंकि चांदी मुख्य रूप से कॉपर, जिंक और लेड की खदानों से बाय-प्रोडक्ट के तौर पर निकलती है, इसलिए इसकी सप्लाई तेजी से बढ़ाना आसान नहीं है। गोदामों में घट रहा स्टॉक COMEX, लंदन और शंघाई जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय वॉल्ट्स में चांदी का स्टॉक लगातार घटता जा रहा है। जैसे-जैसे इन्वेंट्री कम हो रही है, वैसे-वैसे फिजिकल चांदी की उपलब्धता और तंग होती जा रही है। इसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है। इंडस्ट्रियल डिमांड ने बढ़ाया दबाव आज चांदी की 50-60 फीसदी मांग इंडस्ट्रियल सेक्टर से आती है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल सेक्टर में चांदी की खपत तेजी से बढ़ी है। ग्रीन एनर्जी पर बढ़ता फोकस इस मांग को और मजबूत बना रहा है। चीन फैक्टर से बाजार में हलचल चर्चा है कि चीन 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात पर सख्ती कर सकता है। हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस आशंका ने ही निवेशकों को फिजिकल चांदी खरीदने के लिए प्रेरित कर दिया है। आगे क्या करें निवेशक? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी ठोस आधार पर टिकी है। हालांकि चांदी स्वभाव से उतार-चढ़ाव वाली धातु है, इसलिए शॉर्ट टर्म में हल्की गिरावट संभव है। लंबी अवधि में, खासकर 2026 तक, इसके दाम 80 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच सकते हैं।

कार खरीदारों को लगेगा ब्रेक! 2026 की शुरुआत में बढ़ेंगे गाड़ियों के दाम

नई दिल्ली  भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर में नए साल की शुरुआत के साथ ही कारों की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है। कई प्रमुख कार निर्माता कंपनियों ने जनवरी 2026 से अपनी गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि की है। कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में इजाफा, लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत और संचालन व्यय में वृद्धि इस कदम के प्रमुख कारण हैं। यह बदलाव मास मार्केट कारों, इलेक्ट्रिक वाहनों और लग्जरी मॉडलों सभी पर लागू होगा। आइए जानते हैं कौन-कौन सी कंपनियां कीमत में बढ़ोतरी करने वाली हैं। मर्सिडीज-बेंज इंडिया मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने अपनी पूरी रेंज की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। कंपनी ने कहा कि इनपुट कॉस्ट और मुद्रा विनिमय संबंधी दबाव इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण हैं। यह बढ़ोतरी एंट्री-लेवल सेडान, SUVs और हाई-परफॉर्मेंस मॉडल सभी को प्रभावित करेगी। यदि आप अभी इस कंपनी की कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो साल के अंत तक बुकिंग कर सकते हैं। निसान मोटर इंडिया निसान मोटर इंडिया ने जनवरी 2026 से अपनी पूरी लाइनअप में लगभग 3% तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इसमें Magnite जैसे लोकप्रिय मॉडल भी शामिल हैं। कंपनी ने बताया कि निर्माण और सप्लाई चेन की लागत में लगातार बढ़ोतरी के कारण यह कदम उठाया जा रहा है। हालांकि, कुछ प्रभाव को आंतरिक रूप से कम करने की कोशिश की गई है। होंडा कार्स इंडिया होंडा इंडिया ने भी अपनी सभी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि की है। कंपनी ने इनपुट और संचालन लागत में बढ़ोतरी को इस कदम का मुख्य कारण बताया है। हालांकि, होंडा ने अभी तक कीमतों में बढ़ोतरी की सटीक दर का खुलासा नहीं किया है।   एमजी मोटर इंडिया एमजी मोटर इंडिया कुछ चुनिंदा मॉडलों, जैसे कि Comet EV, Windsor EV और Hector रेंज, की कीमतों में लगभग 2% तक की बढ़ोतरी करेगी। कंपनी ने कहा कि कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत उत्पादन खर्च को प्रभावित कर रही है, जिसके चलते कीमतों में यह समायोजन किया जा रहा है। BYD इंडिया BYD इंडिया ने Sealion 7 इलेक्ट्रिक SUV की कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि की है। हालांकि पूरे लाइनअप में समान बढ़ोतरी नहीं की गई है। कंपनी ने कहा कि बैटरी सोर्सिंग और इंपोर्ट से जुड़ी लागतों में इजाफा इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण हैं।  

उड़ान भरता भारत: नवंबर में घरेलू हवाई यात्रियों ने छुआ डेढ़ करोड़ का आंकड़ा

नई दिल्ली  घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या इस साल नवंबर में सालाना आधार पर 6.92 प्रतिशत बढ़कर एक करोड़ 52 लाख 38 हजार पर पहुंच गई। यह पहली बार है जब किसी एक महीने में डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों ने हवाई यात्रा की है। इससे पहले अधिकतम आंकड़ा दिसंबर 2024 में दर्ज किया गया था जब एक करोड़ 49 लाख 28 हजार लोगों ने हवाई यात्रा की थी। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से नवंबर तक 11 महीने में कुल 15 करोड़ 26 लाख 35 हजार लोगों ने हवाई यात्रा की है। यह पिछले साल की समान अवधि से 4.26 प्रतिशत अधिक है। खास बात यह है कि नवंबर में यह रिकॉर्ड तब बना है जब इस साल दीपावली और छठ के पर्व अक्टूबर में ही समाप्त हो चुके थे, जब अमूमन मांग काफी अधिक होती है। आंकड़ों के अनुसार, भरी सीटों का अनुपात (पीएलएफ) के मामले अकासा एयर 93.8 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रही। इंडिगो 88.7 प्रतिशत के साथ दूसरे और स्पाइसजेट 87.7 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रही। एयर इंडिया समूह का पीएलएफ 87.5 प्रतिशत और इंडियावन एयर का 82.7 प्रतिशत रहा। यात्री संख्या के मामले में नवंबर में इंडिगो और अकासा की बाजार हिस्सेदारी घट गयी जबकि एयर इंडिया समूह (एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस) और स्पाइसजेट की बाजार हिस्सेदारी में वृद्धि हुई। इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी अक्टूबर के 65.6 प्रतिशत के कम होकर 63.6 प्रतिशत रह गयी। एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी 26.7 प्रतिशत, अकासा की 4.7 प्रतिशत और स्पाइसजेट की 3.7 प्रतिशत रही। देश के छह मेट्रो शहरों दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में समय पर उड़ान भरने के मामले में अकासा एयर 72.2 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रही। एयर इंडिया समूह की 69.1 प्रतिशत उड़ानें, इंडिगो की 69 प्रतिशत, अलायंस एयर की 59 प्रतिशत और स्पाइसजेट की 48.4 प्रतिशत समय पर रवाना हुईं। समय पर उड़ानों को रवाना करने के मामले में 86.4 प्रतिशत के साथ चेन्नई एयरपोर्ट पहले स्थान पर रहा। इसके बाद क्रमशः बेंगलुरु एयरपोर्ट से 78.6 प्रतिशत, हैदराबाद से 75.5 प्रतिशत, कोलकाता से 74.4 प्रतिशत, दिल्ली से 62.2 प्रतिशत और मुंबई से 50.1 प्रतिशत उड़ानें समय पर रवाना हुईं।