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कीमती धातुओं के दाम बेकाबू, सोना और चांदी में हुई तेज़ी, 17000 रुपये महंगी हुई रजत

 नई दिल्‍ली  चांदी की कीमत में तेजी का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। हफ्ते के अंतिम दिन यह नए रेकॉर्ड पर पहुंच गई। एमसीएक्स पर इसकी कीमत में 17,000 रुपये से अधिक तेजी आई। कारोबार के दौरान यह 2,42,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी और अंत में 2,40,935 रुपये पर बंद हुई। कॉमेक्स पर इसका भाव $79.70 प्रति औंस के नए रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके साथ ही चांदी दुनिया की दूसरे सबसे वैल्यूएबल एसेट बनने के करीब पहुंच चुकी है। इसका मार्केट कैप 4.4 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है और यह एनवीडिया की वैल्यू को पार करने से मात्र 4.5% दूर है। अगर यह एनवीडिया को पछाड़ती है तो सोने के बाद दुनिया की दूसरी बड़ी एसेट बन जाएगी। शुक्रवार के बंद भाव पर एनवीडिया का मार्केट कैप 4.638 ट्रिलियन डॉलर है और यह दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी है। सोना और चांदी के दाम बेकाबू हो चुके हैं. हर दिन इनकी कीमत तेजी से चढ़ जाती है. रिटेल से लेकर बड़े निवेश भी अब खुलकर इसपर दाव लगा रहे हैं. इस तेजी के साथ ही बड़े-बड़े एक्‍सपर्ट भी ये मान रहे हैं कि सोने-चांदी के दाम (Gold-Silver Rates)  लॉन्‍ग टर्म में ऊपर की ओर जाएंगे. कीमती धातुओं के दाम रुकने वाले नहीं हैं. आए दिन ये धातुएं अपने रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच रही हैं.  अब कल यानी शुक्रवार को ही देखें तो एमसीएक्‍स पर चांदी के भाव में गजब की तेजी रही. कमोडिटी मार्केट में कारोबार बंद होने तक 5 मार्च वायदा के लिए 1 किलो चांदी की कीमत 17145 रुपये चढ़कर 2,40,935 रुपये पर थी. हालांकि चांदी दिन के कारोबार के दौरान 19,000 रुपये चढ़कर 2 लाख 42 हजार रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी, जो इसका ऑल टाइम हाई लेवल है.  वहीं सोने की कीमत में भी तेज उछाल देखने को मिली थी. MCX पर कल 5 फरवरी वायदा के लिए 10 ग्राम सोने का भाव 70 रुपये चढ़कर 139940 रुपये पर पहुंच गई, जबकि दिन के कारोबार के दौरान सोने के भाव में करीब 1200 रुपये की उछाल आई थी. सोने ने भी कल अपना ऑल टाइम हाई लेवल टच किया था.  एक सप्‍ताह में ही सोने-चांदी के दाम बेकाबू पिछले एक हफ्ते में ही सोने-चांदी के दाम में गजब की उछाल आई है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर की चीज हो चुकी है. 19 दिसबंर को 10 ग्राम सोने का भाव 1,34,196 रुपये था और आज इसकी कीमत  1.40 लाख रुपये के करीब है. यानी एक सप्‍ताह में ही इसकी कीमत में 6000 रुपये की तेजी आई है. इससे भी ज्‍यादा तेजी चांदी की कीमत में आई है. 19 दिसंबर को चांदी की कीमत 2 लाख 8 हजार रुपये प्रति किलो पर थी, लेकिन इसकी कीमत 2 लाख 40 हजार रुपये हो चुकी है. एक सप्‍ताह में ही इसके दाम में 32 हजार रुपये की उछाल आई है.  क्यों बढ़ रही है डिमांड? चांदी ने 52 सप्ताह के निचले स्तर $27.545 प्रति औंस से लगभग 190% की बढ़ोतरी है। जानकारों का कहना है कि अल्पावधि से मध्यावधि में चांदी की कीमत $100 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान है। सेफ हेवन की बढ़ती मांग बढ़ती औद्योगिक खपत और लगातार आपूर्ति की कमी के कारण चांदी की कीमत में उछाल आई है। साथ ही सॉलिड-स्टेट बैटरी की मांग भी बढ़ रही है जिसमें चांदी एक मुख्य कच्चा माल है। यह बैटरी केवल 10 मिनट में सेल फोन को पूरी तरह चार्ज कर सकती है। जानकारों का कहना है कि दुनिया में अभी चांदी का उत्पादन करीब 850 मिलियन औंस है जबकि इसकी मांग लगभग 1.16 बिलियन औंस है। सॉलिड-स्टेट बैटरी के अलावा ईवी और सोलर एनर्जी में भी चांदी की डिमांड बढ़ रही है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव ने चांदी के पारंपरिक कैरिबियन शिपिंग मार्ग को बाधित कर दिया है। इससे दुनिया के सबसे बड़े सप्लायर पेरू से चांदी का निर्यात प्रभावित हुआ है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में चांदी की कीमत में और तेजी आने की उम्मीद है। सोने और चांदी के भाव में क्‍यों आ रही इतनी तेजी?      इंटरनेशनल लेवल पर सोने और चांदी की कीमत अपने रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच चुकी है. जिस कारण घरेलू बाजार में भी सोने और चांदी के दाम लगातार उछाल पर है.       गोल्‍ड और सिल्‍वर ETF में निवेशकों की संख्‍या तेजी से बढ़ रही है. मार्केट में गिरावट के बीच लोग सोने और चांदी ईटीएफ के माध्‍यम से सेफ निवेश की ओर बढ़ रहे हैं.      डॉलर कमजोर हुआ है और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्‍याज दर में कटौती की उम्‍मीदें बढ़ी है, जिस कारण सोने और चांदी के लिए मांग बढ़ रही है.     इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे सेक्‍टर्स में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है. इससे इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ा है और निवेशक इसकी तेजी में भाग ले रहे हैं.       राजनीतिक तनाव, तेल बाजार और संघर्ष के कारण निवेशक जोखिम से बचने के लिए सोना-चांदी ज्‍यादा मात्रा में खरीद रहे हैं.     केंद्रीय बैंकों द्वारा भी कीमती धातुएं ज्‍यादा मात्रा में खरीदी जा रही हैं, जिससे इसकी मांग बनी हुई है और दाम ऊपर की ओर चढ़ रहे हैं.  क्‍या करना चाहिए?  एक्सपर्टस का कहना है कि सोने और चांदी की मांग बनी रहेगी, लेकिन शॉर्ट टर्म में इसमें मुनाफावसूली देखी जा सकती है और गिरावट आ सकती है. ऐसे में निवेशकों को सावधानी से पैसे लगाने चाहिए. उनका कहना है कि गोल्‍ड और सिल्‍वर फिजिकल नहीं खरीदकर, ETF के माध्‍यम से हर हफ्ते या महीने में खरीद सकते हैं और धीरे-धीरे करके मोटा पैसा लगा सकते हैं. लॉन्‍ग टर्म में ये आपको ज्‍यादा मुनाफा करा सकता है.   

नई Kawasaki Ninja 1100SX भारत में उपलब्ध, 2026 मॉडल की कीमत और खासियतें

मुंबई  मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी Kawasaki India ने 2026 मॉडल ईयर के लिए अपने पूरे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को अपडेट करने का काम शुरू कर दिया है, और इसी क्रम में कंपनी ने अपनी लेटेस्ट बाइक Kawasaki Ninja 1100SX का अपडेटेड वर्जन बाजार में उतारा है. यह बड़ी Ninja पहले जैसी ही है और इसकी कीमत भी पहले जितनी ही 14.42 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है. एकमात्र बदलाव इसमें एक नया कलर ऑप्शन दिया गया है, जो ब्लैक और गोल्ड है, जिसने इस बाइक के सिग्नेचर ब्लैक और ग्रीन कलर की जगह ली है. 2026 Kawasaki Ninja 1100SX का इंजन Ninja 1100SX में मिलने वाले इंजन की बात करें तो इसमें वही 1,099cc, चार-सिलेंडर, लिक्विड-कूल्ड इंजन है, जो पहले की तरह ही 136hp की पावर और 113Nm का अधिकतम टॉर्क देता है. ज़्यादातर इनलाइन चार इंजनों के उलट, यह इंजन बाइक के कैरेक्टर के हिसाब से पीकी टॉप-एंड रश देने के बजाय, असल दुनिया में इस्तेमाल होने वाली मिड-रेंज ग्रंट देने पर ज़्यादा फोकस करता है. यह इंजन लेटेस्ट सरकारी नियमों के अनुसार पूरी तरह से E20-कम्प्लायंट भी है. इस इंजन को एक एल्यूमीनियम फ्रेम में फिट किया गया है और दोनों तरफ पूरी तरह से एडजस्टेबल शोवा सस्पेंशन लगे हैं. ब्रेकिंग के लिए मोटरसाइकिल में टोकिगो के ब्रेक लगाए गए हैं, जो Kawasaki के हैं और इसमें डुअल-चैनल ABS मिलता है. 2026 Kawasaki Ninja 1100SX के फीचर्स राइडर एड्स के सूट के तौर पर इस बाइक में चार राइडिंग मोड – रेन, रोड, स्पोर्ट और राइडर शामिल हैं, जिनमें ट्रैक्शन कंट्रोल इंटरवेंशन, थ्रॉटल सेंसिटिविटी और पावर डिलीवरी पर असर पड़ता है, जैसे-जैसे आप इन्हें बदलते हैं. राइडर मोड पूरी तरह से कस्टमाइज़ेबल है, और जब Ninja इस मोड में होती है तो 4.3-इंच TFT का लेआउट थोड़ा अलग होता है. इसके अलावा, मोटरसाइकिल में एक बिडायरेक्शनल क्विकशिफ्टर राइडिंग एड्स के सूट को पूरा करता है, जिसे सिक्स-एक्सिस IMU (इनर्टियल मेज़रमेंट यूनिट) से मदद मिलती है. यह सब 2025 मॉडल जैसा ही है, और 2026 Kawasaki Ninja 1100SX को 2025 मॉडल से अलग पहचानने का एकमात्र तरीका इसका नया कलर ऑप्शन है. Kawasaki Ninja 1100SX भारतीय सड़कों पर सच में इस्तेमाल करने लायक और आरामदायक लीटर-क्लास मशीन है, और इसकी 14.42 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, इंडिया) कीमत पर इसके जैसी दूसरी कोई बाइक ज़्यादा नहीं है.

इलेक्ट्रिक वाहनों में क्रांति की तैयारी: सैमसंग बना रही फास्ट-चार्जिंग बैटरी, ज्यादा रेंज का दावा

नई दिल्ली इलेक्‍ट्रि‍क गाड़‍ियों के मार्केट में नई क्रांति आ सकती है। ग्राहकों की सबसे बड़ी उलझन सुझल सकती है। जिस रेंज और चार्जिंग स्‍पीड को लेकर लोग सबसे ज्‍यादा फ‍िक्र करते हैं और इलेक्‍ट्र‍िक गाड़‍ियां खरीदने से बचते हैं, उसका हल न‍िकालने पर काम शुरू हो गया है। साउथ कोरियाई दिग्‍गज कंपनी सैमसंग ( Samsung ) सिलिकॉन-कार्बन (Si-C) एनोड बैटरी को बनाने जा रही है। एक र‍िपोर्ट के अनुसार, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स की बैटरी बनाने वाली कंपनी सैमसंग SDI ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए बैटरी पैक टेक्नोलॉजी को मिलकर विकसित करने के लिए KG Mobility के साथ एक साझेदारी की घोषणा की है। केजी मोब‍िलिटी, साउथ कोरिया की प्रमुख ऑटोमोबाइल मैन्‍युफैक्‍चरर है। किस तकनीक का इस्‍तेमाल करती है नई बैटरी? सैममोबाइल की रिपोर्ट (ref.) के अनुसार, इस सिलिकॉन-कार्बन (Si-C) एनोड बैटरी में सैमसंग SDI के 46-सीरीज की सिलिंड्रिकल सेल का इस्तेमाल किया जाएगा। दावा है कि जब यह बैटरी इलेक्‍ट्र‍िक गाड़‍ियों में लगने लगेगी तो उनकी रेंज और चार्जिंग स्‍पीड में जबरदस्‍त सुधार होगा। ऐसी उम्‍मीद की जा रही है कि भविष्‍य में इस तकनीक को स्‍मार्टफोन्‍स में भी लाया जाएगा। ऐसा होता है तो हम लंबी बैटरी लाइफ वाले स्‍मार्टफोन्‍स को भी लॉन्‍च होता हुआ देखेंगे। बैटरी फूलने की समस्‍या होगी कम, बढ़ेगी लाइफ रिपोर्ट के अनुसार, सैमसंग SDI ने KG Mobility के साथ एक एक एमओयू साइन किया है। अब दोनों कंपनियां मिलकर इलेक्ट्रिक कारों के लिए इस बैटरी पैक टेक्नोलॉजी पर काम करेंगी। बताया जा रहा है कि सैमसंग SDI की नई बैटरी में हाई-निकेल NCA कैथोड और खास सिलिकॉन कार्बन नैनोकम्पोजिट एनोड का इस्तेमाल किया गया है। दावा है कि नई तकनीक से बैटरियों के फूलने की शिकायत में कमी आएगी और उनकी लाइफ बढ़ेगी। डिजाइन ऐसा, जिससे मिलेगी फास्‍ट चार्जिंग रिपोर्ट के अनुसार, सैमसंग ने बैटरी के डिजाइन पर खास ध्‍यान दिया है। उसने बैटरी को इस तरह तैयार किया है कि वह अंदरूनी तौर पर कम रेजिस्‍ट होती है, जिससे बैटरी में करंट का फ्लो अच्‍छा बना रहता है। इससे बैटरी में पावर आउटपुट बढ़ता है और वह तेजी से चार्ज भी हो पाती है। बताया जाता है कि बैटरी में गर्मी को कंट्रोल करने की प्रक्र‍िया को भी सुधारा गया है। यह पहले डेवलप की गई बैटरियों से ज्‍यादा भरोसेमंद और सुरक्ष‍ित है। किन कारों में लगेगी ये बैटरी अभी तक आई जानकारी के अनुसार, नए बैटरी पैक KG Mobility की नेक्‍स्‍ट जेन इलेक्ट्रिक कारों में इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि ऐसी उम्‍मीद की जानी चाहिए कि भविष्‍य में ये बैटरी अन्‍य कार कंपनियों को भी पावर देगी। वहीं, यह उम्‍मीद भी है कि भविष्‍य में सैमसंग की यह तकनीक उसकी गैलेक्‍सी सीरीज के स्‍मार्टफोन्‍स में भी आएगी।

फ्री ट्रेड डील के बाद भी भारत के लिए जरूरी काम, रिपोर्ट में मिली अहम जानकारी

नई दिल्‍ली भारत ने एक के बाद एक दूसरे देशों से 18 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्‍ताक्षर किया है, लेकिन एक्‍सपोर्ट में उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहा है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का कहना है कि नए समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बजाय मौजूदा समझौतों से निर्यात में ठोस लाभ सुनिश्चित करने पर फोकस करना चाहिए. खासकर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, इंजीनियरिंग और टेक्‍सटाइल्‍स सेक्‍टर में, जहां से ज्‍यादा लाभ मिल सकता है.  रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल निर्यात 825 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन वित्त वर्ष 2026 के दौरान इसमें मामूली इजाफा हुआ है और यह करीब 850 अरब अमेरिकी डॉलर तक होने का अनुमान है. ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिकी टैरिफ के असर कारण इसमें ज्‍यादा इजाफा नहीं हुआ है.   कमजोर इंटरनेशलन डिमांड और बढ़ते सेफ उपायों के कारण माल निर्यात में कोई खास बदलाव नहीं होने की उम्मीद है, जबकि सर्विस सेक्‍टर एक्‍सपोर्ट 400 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो सकता है. यह भारत के समग्र व्यापार प्रदर्शन को सपोर्ट कर सकता है.  भारत ने की 18 एफटीए डील GTRI की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18 मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं और साल 2026 में और भी हस्ताक्षर होने की संभावना है. ऐसे में भारत की प्राथमिकता समझौतों पर हस्ताक्षर करने से हटकर मुक्त व्यापार समझौतों से वास्तविक निर्यात लाभ प्राप्त करने की ओर होनी चाहिए.  GTRI ने इस बात पर फोकस किया है कि भारत पिछले कई सालों में सबसे कठिन ग्‍लोबल ट्रेड सिचुएशन के साथ 2026 में एंट्री ल रहा है. विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते संरक्षणवाद, वैश्विक मांग में मंदी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी नई व्यापार बाधाएं भारत के निर्यात बढ़ाने के प्रयासों के साथ मेल खा रही हैं. इससे बाजार में विस्‍तार के बजाय मौजूदा स्थिति को बनाए रखने पर ज्‍यादा फोकस हो रहा है.  टैरिफ सबसे बड़ा दबाव  संयुक्त राज्य अमेरिका एक महत्वपूर्ण दबाव के तौर पर उभरा है. डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व व्यापार संगठन के मानदंडों को दरकिनार करते हुए एकतरफा भारी टैरिफ लागू किया है. मई और नवंबर 2025 के बीच मौजूदा 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग 21 प्रतिशत गिर गया.  निर्यात में और गिरावट आ सकती है जीटीआरआई ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ को वापस नहीं लेता या कोई व्यापार समझौता नहीं करता, भारत के सबसे बड़े बाजार को निर्यात में और गिरावट आ सकती है.  भारत के लिए यूरोप से भी चुनौती यूरोप एक अलग चुनौती पेश कर रहा है. यूरोपीय संघ 1 जनवरी, 2026 से अपना कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म लागू करेगा, जिसके तहत आयात पर कार्बन टैक्‍स लाया जाएगा. अभी ये टैक्‍स लागू होने से पहले ही यूरोपीय संघ को भारत के इस्पात निर्यात में लगभग 24 प्रतिशत की गिरावट आई है.  हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद, रिपोर्ट में लचीलेपन के संकेत मिले हैं. अमेरिका को निर्यात में गिरावट के बावजूद अन्‍य ग्‍लोबल मार्केट को शिपमेंट में करीब 5.5 फीसदी की तेजी है. जीटीआरआई ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक भू-राजनीति पर सीमित प्रभाव के साथ, भारत को अपने देश पर फोकस करना चाहिए. 

Gold और Silver की कीमतों में जबरदस्त उछाल, सोना ₹1,287 बढ़कर रिकॉर्ड पर, चांदी ₹2.32 लाख पार

इंदौर  सोने-चांदी की दहाड़ से सर्राफा बाजारों में सन्नाटा पसरा है। आज सोने-चांदी के भाव एक और नया इतिहास लिख चुके हैं। दोनों धातुएं आज भी एक नए ऑल टाइम हाई पर हैं। चांदी के भाव एक झटके में 13117 रुपये प्रति किलो उछकर 232100 रुपये प्रति किलो पर खुले। जबकि, सोने के भाव में 1287 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई है। जीएसटी समेत चांदी अब 239063 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। जबकि, 24 कैरेट गोल्ड का रेट अब जीएसटी समेत 142051 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी ने ऐसा उछाल दिखाया है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है। MCX पर दोनों कीमती धातुएं अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। बाजार में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से बुलियन सेगमेंट में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। MCX पर सोना 1.39 लाख के पार, बना नया रिकॉर्ड मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना तेज उछाल के साथ नया इतिहास रच गया। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने 1,39,290 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर छू लिया, जो अब तक का सबसे ऊंचा भाव है।दोपहर के कारोबार में भी सोना मजबूती बनाए हुए नजर आया और करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ ट्रेड करता दिखा। निवेशकों का रुझान साफ तौर पर सोने की ओर बढ़ा है। चांदी की रफ्तार और तेज, 2.33 लाख रुपये के पार सोने के साथ-साथ चांदी ने भी बाजार में तूफान ला दिया। MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने 2,33,183 रुपये प्रति किलो का स्तर छूकर नया ऑल-टाइम हाई बना दिया।दिनभर के कारोबार में चांदी में हजारों रुपये की तेजी देखने को मिली, जिसने इसे निवेशकों का सबसे पसंदीदा एसेट बना दिया। कैरेट के हिसाब से गोल्ड के भाव आज 23 कैरेट गोल्ड भी 1282 रुपये उछल कर 137362 रुपयेकै प्रति 10 ग्राम के भाव पर खुला। जीएसटी संग इसकी कीमत अब 141482 रुपये हो गई है। अभी इसमें मेकिंग चार्ज नहीं जुड़ा है। 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 1179 रुपये चढ़कर 126329 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। जीएसटी संग यह 130118 रुपये है। 18 कैरेट गोल्ड 966 रुपये की तेजी के साथ 103436 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है और जीएसटी के साथ इसकी कीमत 106539 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। 14 कैरेट गोल्ड का रेट भी 753 रुपये चढ़ा है। आज यह 80680 रुपये पर खुला और जीएसटी समेत यह 83100 रुपये पर है। 2025 में सोना-चांदी ने दिया जबरदस्त रिटर्न इस साल की बात करें तो सोना और चांदी दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया है। सोने ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है, वहीं चांदी ने तो उम्मीद से कहीं ज्यादा कमाई कराई है। यही वजह है कि मौजूदा समय में बुलियन मार्केट को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चमक, डॉलर के मुकाबले मजबूती वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचा, जबकि चांदी ने भी नया उच्चतम स्तर छू लिया।अमेरिकी बाजारों में निवेशकों की बढ़ती मांग और आर्थिक अनिश्चितता ने इस तेजी को और बल दिया। आखिर क्यों बढ़ रही हैं सोना-चांदी की कीमतें? विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक तनाव, महंगाई की चिंता, ब्याज दरों को लेकर असमंजस और डॉलर में उतार-चढ़ाव जैसे कारणों से निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं। ऐसे माहौल में सोना और चांदी सबसे भरोसेमंद निवेश बनकर उभरे हैं। आगे क्या रहेगा ट्रेंड, निवेशकों को क्या करना चाहिए? मौजूदा हालात में बुलियन बाजार का ट्रेंड मजबूत नजर आ रहा है। हालांकि, जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर होती हैं, तो मुनाफावसूली का जोखिम भी बढ़ जाता है।निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें और बाजार की दिशा को समझते हुए ही निवेश करें। इस साल सोना ₹61,752 और चांदी ₹1,46,083 महंगी हुई     इस साल अब तक सोने की कीमत 61,752 रुपए बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो अब 1,37,914 रुपए हो गया है।     चांदी का भाव भी इस दौरान 1,46,083 रुपए बढ़ गया है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो अब 2,32,100 रुपए प्रति किलो हो गई है। गोल्ड में तेजी के 3 प्रमुख कारण     डॉलर कमजोर – अमेरिका के ब्याज दर घटाने से डॉलर कमजोर हुआ और सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हुई, इससे लोग खरीदने लगे।     जियोपॉलिटिकल – रूस-यूक्रेन जंग और दुनिया में तनाव बढ़ने से निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर खरीद रहे हैं।     रिजर्व बैंक – चीन जैसे देश अपने रिजर्व बैंक में सोना भर रहे हैं, ये सालभर में 900 टन से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, इसलिए दाम ऊपर जा रहे हैं। चांदी में तेजी के 3 प्रमुख कारण     इंडस्ट्रियल डिमांड – सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV में भारी इस्तेमाल, चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, जरूरी कच्चा माल बन गई है।     ट्रंप का टैरिफ डर – अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, ग्लोबल सप्लाई में कमी से कीमतें ऊपर चढ़ीं।     मैन्युफैक्चरर होड़ में – प्रोडक्शन रुकने के डर से सभी पहले से खरीद रहे हैं, इसी वजह से आने वाले महीनों में भी तेजी बनी रहेगी। आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि चांदी की डिमांड में अभी तेजी है जिसके आगे भी बने रहने का अनुमान है। ऐसे में चांदी इस साल के आखिर तक चांदी की कीमत 2.50 लाख रुपए किलो पहुंच सकती है। वहीं अगर सोने के बात करें इसकी डिमांड में भी तेजी बनी हुई। ऐसे में अगले साल तक ये 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार जा सकता है। वहीं इस साल के आखिर तक इसकी कीमत 1.40 लाख रुपए किलो पहुंच सकती है। सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड … Read more

Egg Price रिकॉर्ड हाई: सर्दियों में 25–50% तक महंगे हुए अंडे, जनवरी में और बढ़ोतरी संभव

 नई दिल्ली दिल्ली, मुंबई, पुणे, सूरत, लखनऊ, वाराणसी, पटना, रांची जैसे कई बड़े शहरों में इस बार अंडे की कीमतें रिकॉर्ड तोड़ रही हैं. कोई भी शहर ऐसा नहीं है, जहां दुकानों में रिटेल में एक अंडा 8 रुपये से कम बिक रहा हो. आमतौर पर हर साल 7-9 रुपये में मिलने वाला अंडा इस सर्दी में बहुत महंगा हो गया है. दुकानदार और खरीदार दोनों हैरान हैं कि अंडे को इस बार क्या हुआ? अभी दिसंबर चल रहा है और जनवरी बाकी है, तो क्या कीमतें और बढ़ेंगी? पोल्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस साल अंडा ऊंचे दाम पर नहीं बिका तो बीते साल के दाम तो छोड़िए अंडा खरीदने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती.अंडों के बाजार रेट पर नजर दौड़ाएं तो अगस्त-सितंबर के मुकाबले 25 से 50 फीसद तक महंगे हो चुके हैं. अभी जनवरी का पूरा महीना बाकी है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि दाम और बढ़ सकते हैं. डिमांड बढ़ने से महंगा हुआ अंडा यूपी पोल्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अकबर अली ने बताया कि दिसंबर आते ही पूरे देश में अंडों की मांग बहुत बढ़ गई है. यह सिर्फ एक शहर या राज्य में नहीं, हर जगह की अंडों की मांग बढ़ी है. उत्तर प्रदेश को ही रोज 5.5 से 6 करोड़ अंडों की जरूरत होती है, जिसमें से 3.5 से 4 करोड़ दूसरे राज्यों से आते हैं. यूपी में दुकानों पर रिटेल में एक अंडा 8 से 10 रुपये तक बिक रहा है. जबकि होलसेल यानी थोक में कीमत 7.5 रुपये तक पहुंच गई है. ट्रांसपोर्ट का खर्च जोड़ें तो कीमत और बढ़ जाती है. बाजार को देखकर ऐसा लग रहा है कि होलसेल में 15.20 पैसे प्रति अंडा और महंगा हो सकता है. ऐसे में  जनवरी में अगर अंडा 8.5 रुपये का हो जाए तो हैरानी नहीं. फरवरी से ही कीमतें कम होने की उम्मीद है. अगर सही दाम नहीं मिले तो अंडा ढूंढना पड़ेगा! पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रनपाल ढांढा ने कहा कि अंडा अगर 8 रुपये का बिक रहा है तो उसे महंगा नहीं कह सकते. इस पोल्ट्री फार्मर को अंडे के सही कीमत मिल रही है. दरअसल, बीते कई साल से पोल्ट्री फीड महंगा हो रहा है लेकिन अंडे के दाम नहीं बढ़े थे. हर साल बड़ी संख्या में फार्मर अपने पोल्ट्री फार्म बंद कर रहे हैं. जिससे अंडा उत्पादन कम हो रहा है. अगर इस बार भी अच्छे दाम नहीं मिलते, तो आगे अंडा मिलना मुश्किल हो जाता. बता दें कि पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होने वाली मक्का और सोयाबीन की सरकारी कीमत हर साल बढ़ जाती है, लेकिन अंडे की नहीं. दुनिया में सबसे सस्ता अंडा भारत में ही बिकता है. सबसे सस्ता अंडा नमक्कल-होसपेट में  नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमिटी (NECC) के रोज के रेट देखें तो थोक में सबसे सस्ता अंडा नमक्कल और होसपेट में बिक रहा है. जहां 640-645 रुपये प्रति 100 अंडे का रेट है. विशेषज्ञों के मुताबिक, ये दोनों भारत की सबसे बड़ी अंडा मार्केट हैं. नमक्कल से सबसे ज्यादा अंडा दूसरे देशों में निर्यात होता है.

ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर ब्रेक: 2 दिन जोमैटो-स्विगी रहेंगे प्रभावित, डिलीवरी बॉय हड़ताल पर

नई दिल्ली  जोमैटो, स्विगी, जेप्टो, ब्लिंकिट, अमेजन और फ्लिपकार्ट से जुड़े डिलीवरी वर्कर 25 और 31 दिसंबर को हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। इस प्रस्तावित आंदोलन का नेतृत्व इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) और तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) कर रहे हैं। डिलीवरी वर्करों की मांग है कि उन्हें नौकरी की गारंटी, बेहतर वेतन, सुरक्षित कार्य वातावरण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ प्रदान किए जाएं। यह विरोध प्रदर्शन उन चिंताओं को सामने लाता है, जिनमें तेजी से बढ़ती प्लेटफॉर्म कंपनियों की कमाई के मुकाबले डिलीवरी वर्करों की बिगड़ती कार्य स्थितियां शामिल हैं। यूनियनों का देशव्यापी आंदोलन का ऐलान यूनियनों का कहना है कि यह हड़ताल खराब होती कार्य परिस्थितियों और लगातार घटते भुगतान के खिलाफ एक संगठित आवाज है। IFAT और TGPWU ने संयुक्त रूप से इस हड़ताल का आह्वान किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी कर यूनियनों ने स्विगी, जोमैटो, फ्लिपकार्ट मिनट्स सहित सभी प्रमुख फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी वर्करों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। यूनियनों ने इसे देशव्यापी आंदोलन बताया है और इसे जानबूझकर उन दिनों के लिए तय किया गया है, जब फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेवाओं की मांग सबसे अधिक रहती है। क्या है यूनियनों की मुख्य मांगे यूनियन की प्रमुख मांगों में नौकरी की सुरक्षा, अधिक वेतन, सुरक्षित कामकाजी हालात और सामाजिक सुरक्षा के लाभ शामिल हैं। TGPWU के संस्थापक अध्यक्ष शेख सलाउद्दीन ने एक बयान में कहा कि अस्थिर कार्य ढांचा, घटती आय और सामाजिक सुरक्षा की पूरी तरह से कमी के कारण डिलीवरी वर्कर बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल न्याय, सम्मान और जवाबदेही की मांग है। उनका कहना है कि सरकार अब आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकती, जब प्लेटफॉर्म कंपनियां वर्करों की जान जोखिम में डालकर मुनाफा कमा रही हैं। नए श्रम कानून जल्द हो लागू यह प्रस्तावित हड़ताल ऐसे समय में सामने आई है, जब सरकार ने कुछ ही हफ्ते पहले नए श्रम कानून लागू किए हैं। इन कानूनों में पहली बार गिग वर्क, प्लेटफॉर्म वर्क और एग्रीगेटर की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। नए नियमों के तहत, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म डिलीवरी, वेयरहाउसिंग और इससे जुड़ी सेवाओं के लिए गिग वर्करों पर निर्भर हैं, उन्हें अपने वार्षिक कारोबार का 1 से 2 प्रतिशत गिग वर्कर वेलफेयर फंड में जमा करना अनिवार्य होगा। इस घोषणा के बाद जोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल और स्विगी ने बयान जारी कर कहा है कि वे नए श्रम कानूनों का पालन करेंगे। कंपनियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन बदलावों का उनके लंबे समय के व्यवसाय या वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। वहीं, डिलीवरी वर्करों का कहना है कि जमीनी स्तर पर हालात में सुधार के लिए इन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन बेहद जरूरी है।  

इंदौर सराफा मार्केट: सोना बना निवेशकों की पहली पसंद, चांदी के भाव भी उड़े

इंदौर  आसमान छू रहे सोने और चांदी की कीमतों के चलते देश भर में इसे सबसे सुरक्षित निवेश माना जा रहा है. यही वजह है कि 1 महीने में चांदी की कीमतों में करीब 65000 की वृद्धि हो चुकी है. वहीं, सोना भी 10000 की उछाल पर है. चांदी की कीमतें बढ़ाने की एक वजह इसके विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक आइटम और अन्य संसाधनों में उपयोग है. जिसके कारण चांदी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. निवेशकों में सोने चांदी की डिमांड देश में त्योहारी सीजन और शादियों के बाद भी सोने और चांदी की कीमत तेजी से बढ़ रही है. बीते 1 महीने में सराफा बाजार की धारणा पर गौर किया जाए, पता चलता है कि बड़े-बड़े निवेशकों के बीच सोने और चांदी की बंपर डिमांड है. जिसके चलते फिलहाल प्रदेश के सबसे बड़े इंदौर सराफा बाजार में चांदी प्रति किलो 2 लाख 2000 और सोना 134500 प्रति तोले के भाव पर पहुंच गया है. प्रॉपर्टी सेक्टर में निवेश पड़ा ठंडा सराफा बाजार में अन्य वस्तुओं के ग्राहक बिल्कुल घट गए हैं, लेकिन सोने चांदी की थोक खरीदी वाले बुलियन मार्केट में केडबरी और पांसे की बिक्री जोरों पर है. इधर रियल एस्टेट मार्केट और प्रॉपर्टी में निवेश करने वाले लोग भी अब सोने और चांदी को सबसे सुरक्षित निवेश मान रहे हैं. इसके चलते भी भाव बढ़ रहे हैं. वहीं, इन दिनों पूरा प्रॉपर्टी सेक्टर खरीदी बिक्री के लिहाज से बिल्कुल ठंडा है. सोना को सबसे सुरक्षित निवेश मान रहे ग्राहक इंदौर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुमचंद सोनी बताते हैं कि "सोने और चांदी के भाव में लगातार वृद्धि हो रही है. इसलिए कोई भी निवेशक इसी में निवेश कर रहा है. यदि भाव में वृद्धि के यही हाल रहे, तो कुछ दिनों में ही प्रति किलो चांदी की कीमत ढाई लाख रुपए हो जाएगी और सोना डेढ़ लाख रुपए तोला तक पहुंच जाएगा. वैसे भी सोना ग्राहकों के बीच सबसे सुरक्षित निवेश माना जा रहा है, जो खरीदी के लिहाज से पहली पसंद बना हुआ है." इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में चांदी के इस्तेमाल से बढ़ रहा रेट ज्वेलरी के फुटकर विक्रेता वसंत सोनी बताते हैं कि "शादियों के सीजन में सोने और चांदी की जमकर खरीदारी हुई है, लेकिन फिलहाल बाजार ठंडा है. चांदी की थोक खरीदारी आभूषणों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में हो रही है, जिसके चलते भाव में लगातार उछाल बना हुआ है."

Russia–India Oil Trade: प्रतिबंधों से बाहर सप्लायरों से रूस का तेल खरीद रही रिलायंस

मुंबई  रूस से भारत को सस्ता तेल मिलता है, और भारत वर्षों से खरीदते आया है. लेकिन बीच में अमेरिकी विरोध के बाद भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना थोड़ा कम कर दिया था. लेकिन अब खबर है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने रूस से कच्चा तेल खरीदना फिर से शुरू कर दिया है. कुछ समय पहले मुकेश अंबानी की कंपनी ने रूसी तेल का आयात रोक दिया था, लेकिन अब दोबारा इसे मंगाया जा रहा है. यह तेल गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस की रिफाइनरी में इस्तेमाल किया जाएगा, जहां से पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधन बनाए जाते हैं. दरअसल, अमेरिका ने रूस की कुछ बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे. इन प्रतिबंधों के बाद कई भारतीय कंपनियां रूसी तेल खरीदने में सावधानी बरतने लगी थीं. इसी वजह से रिलायंस ने भी कुछ समय के लिए रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था. लेकिन अब कंपनी ऐसे सप्लायरों से तेल खरीद रही है, जो इन प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आते.  अमेरिकी बैन का अब क्या होगा? बता दें,अमेरिकी प्रशासन ने 22 अक्टूबर को रूस के दो बड़े तेल उत्पादक Rosneft और Lukoil पर बैन लगाए थे और रिफाइनरी कंपनियों को इन आपूर्तिकर्ताओं के साथ अपने सौदों को पूरा करने के लिए महीनेभर का वक्त दिया था. उस आदेश के बाद Reliance ने कुछ समय के लिए रूसी तेल की खरीद रोक दी थी.  आयात फिर से शुरू होने से पहले Reliance को अमेरिकी प्रशासन से एक अतिरिक्त महीने की छूट भी प्राप्त हुई थी, ताकि वह पहले से किए गए करार के तहत प्राप्त जहाजों को रिसीव कर सके. इस एक महीने की अनुमति ने कंपनी को समयसीमा के भीतर पुराने सौदों को पूरा करने में मदद की है.  सौदे पूरा करने के लिए मिला था महीनेभर का वक्त रिलायंस रूसी तेल इसलिए भी खरीदता है, कि ये दूसरे देशों के मुकाबले सस्ता मिलता है. सस्ता तेल मिलने से कंपनी को ईंधन बनाने में लागत कम पड़ती है और देश को भी फायदा होता है. रिलायंस का यह कदम ऐसे समय आया है, जब भारत में रूसी तेल का आयात घटने लगा था. अगर रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी खरीदारी दोबारा शुरू करती है, तो इससे भारत में रूसी तेल की हिस्सेदारी बनी रह सकती है. इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलती है. गौरतलब है कि भारत दुनिया का बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है. ऐसे में सस्ते तेल का विकल्प बहुत अहम होता है.   खबर के मुताबिक, यह तेल बड़े समुद्री जहाजों (टैंकरों) के जरिये भारत लाया जा रहा है. जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है और यहां हर रोज लाखों बैरल तेल रिफाइन किया जाता है. यहां बना ईंधन भारत के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई होता है.

Bajaj ने पेश की अपडेटेड Pulsar 150, जानें नए फीचर्स और कीमत

मुंबई   स्वदेशी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Bajaj Auto ने भारत में अपनी अपडेटेड Bajaj Pulsar 150 को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को 1.09 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर उतारा गया है. कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को तीन वेरिएंट में उतारा है. इनमें पहला Pulsar 150 SD, जिसकी कीमत 1.09 लाख रुपये है, Pulsar 150 SD UG, जिसकी कीमत 1.12 लाख रुपये है, और तीसरा Pulsar 150 TD UG है, जिसकी कीमत 1.15 लाख रुपये है. पिछले वर्जन की तुलना में, इसके बेस मॉडल की कीमत में 3,600 रुपये की मामूली बढ़ोतरी हुई है. यहां हम बताने जा रहे हैं कि इसमें पुराने मॉडल के मुकाबले क्या बदलाव हुए हैं. 2026 Bajaj Pulsar 150 का डिजाइन Classic Pulsar के लेटेस्ट अपडेट में कॉस्मेटिक और लाइटिंग में बदलाव किए गए हैं. Bajaj Pulsar 150 में अब नए ग्राफिक्स के साथ LED हेडलाइट और LED टर्न इंडिकेटर्स दिए गए हैं. इसके अलावा, इसमें नए पेंट स्कीम के साथ नए ग्राफिक्स भी मिलते हैं, जिसमें ऑरेंज हाइलाइट्स वाला ग्रीन कलर शामिल है. इसी कलर को अपडेटेड Bajaj Pulsar 220F में देखा गया था, और ब्लू, ग्रे और रेड ऑप्शन भी हैं, जिनमें से हर एक के साथ ब्लैक कलर दिया गया है. 2026 Bajaj Pulsar 150 का इंजन इसके स्पेसिफिकेशन्स के बारे में बात करें तो, Bajaj Pulsar 150 में पहले वाला इंजन ही मिलता है, जोकि एक 149cc, सिंगल-सिलेंडर एयर-कूल्ड इंजन है. यह इंजन 8,500 rpm पर 13.8 bhp की मैक्सिमम पावर और 6,500 rpm पर 13.4 Nm का अधिकतम टॉर्क प्रदान करता है. इस इंजन के साथ 5-स्पीड गियरबॉक्स मिलता है. इसके अलावा, मोटरसाइकिल में कोई बदलाव नहीं किया गया है. Bajaj Pulsar 150 लंबे समय से पल्सर ब्रांड के मुख्य पिलर्स में से एक रही है और बाइक ने कम्यूटर और स्पोर्टी कम्यूटर सेगमेंट में Bajaj Auto की मौजूदगी को बनाने में अहम भूमिका निभाई है. बदलते ट्रेंड और लाइनअप में नए मॉडल आने के बावजूद, Pulsar 150 काफी समय से काफी हद तक उसी रूप में बनी हुई है, जिसमें रास्ते में सिर्फ़ मामूली अपडेट किए गए हैं.