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बिहार के बाद केरल मिशन? विनोद तावड़े के कंधों पर बीजेपी को मजबूत करने का दारोमदार

 नई दिल्ली बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी नितिन नबीन ने ऐसे समय संभाली है, जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, पुदुचेरी और केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी तेज है. इनमें से किसी भी राज्य में बीजेपी के लिए चुनावी लड़ाई आसान नहीं है. नितिन नबीन ने अपनी ताजपोशी के साथ पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के लिए ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू कर दिए हैं.  नितिन नबीन ने बीजेपी के लिए सबसे मुश्किल माने जाने वाले केरल विधानसभा चुनाव की कमान विनोद तावड़े को सौंपी तो साथ ही चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. उनके साथ शोभा करंदलाजे को सह प्रभारी बनाया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि विनोद तावड़े बिहार की तरह ही केरल में भी कमल खिला पाएंगे? वहीं, आशीष शेलार को तेलंगाना नगर निकाय चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया है. उनके साथ अशोक परनामी व रेखा शर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा वरिष्ठ नेता राम माधव को ग्रेटर बेंगलुरु निकाय चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया गया है तो सतीश पुनिया और संजय उपाध्याय को सह प्रभारी का दातित्व सौंपा है.  विनोद तावड़े को मिला केरल का मुश्किल टास्क मिशन साउथ के तहत बीजेपी दक्षिण भारत के तमाम राज्यों में अपनी सियासी जमीन तलाश रही है. फिर चाहे तमिलनाडु हो या फिर केरल विधानसभा चुनाव का मैदान. पीएम मोदी समेत तमाम बड़े नेताओं की नजर इन राज्यों पर टिकी है. ऐसे में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने केरल की चुनावी जंग को फतह करने के लिए बिहार चुनाव जिताने वाले विनोद तावड़े को सौंपी है, उन्हें विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया है और साथ ही कर्नाटक से आने वाली  शोभा करंदलाजे को सौंपा है.  केरल में सत्ता का रास्ते को ईसाई और मुस्लिम वोट के द्वारा तय होते है, जिसके चलते ही बीजेपी की राह काफी मुश्किल भरी रही है. बीजेपी केरल में तेजी से बढ़ी है, लेकिन सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने में यूडीएफ और एलडीएफ एक बड़ी बाधा हैं. केरल का चुनाव इन्हीं दोनों गठबंधन के बीच सिमटा हुआ है.  हालांकि, बीजेपी को केरल में 2014 में14 प्रतिशत वोट मिले थे, 2019 में 16 प्रतिशत और 2024 में यह बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया.  बीजेपी को केरल की सत्ता तक पहुंचने के लिए 20 से 30 और 30 से 40 फीसदी के वोट क का सफर तय करना है. ऐसे में विनोद तावड़े को एक मुश्किल भरा टास्क नितिन नबीन ने सौंपा है.  बिहार की तरह केरल में खिला पाएंगे कमल विनोद तावड़े को भले ही केरल चुनाव में बीजेपी को जिताने की जिम्मेदारी मिली हो, लेकिन बिहार की तरह केरल की राह आसान नहीं है. केरल में बीजेपी के लिए इसलिए भी मुश्किल रहा है, क्योंकि यहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और लेफ्ट-सीपीएम के अगुवाई वाले एलडीएफ का अपना-अपना मजबूत वोट बैंक है. केरल में मुस्लिम और ईसाई वोटर ही नहीं हिंदू वोटर भी यूडीएफ और एलडीएफ के बीच बंटे हुए हैं, बीजेपी तेजी से अपने पैर पसारे हैं, पर सत्ता तक पहुंचने की मंजिल काफी मुश्किल भरी है.  केरल की कुल आबादी में नायर समुदाय करीब 15 फीसदी हिस्सेदारी रखता है. इसमें केरल के अपर कास्ट हिंदू आते हैं. इसके अलावा पिछड़ा वर्ग के तहत आने वाले एझवा समुदाय भी काफी अहम भूमिका निभाता है. इसकी केरल में कुल आबादी करीब 28 फीसदी है. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन खुद इस समुदाय से आते हैं. यानी विजयन का ये पारंपरिक वोट बैंक है. इसीलिए इस पर सीपीएम का एकाधिकार माना जाता है. केरल की राजनीति को जानने वाले बीजेपी की हार का कारण केरल की साक्षरता दर को भी मानते हैं. उनका कहना है कि केरल में देश के बाकी राज्यों के मुकाबले ज्यादा पढ़े-लिखे लोग हैं, जो किसी भी मुद्दे पर भावनाओं में बहकर वोट नहीं करते हैं. लोगों को हर विषय की अच्छी जानकारी होती है और वो स्पष्ट होते हैं कि उन्हें कहां और किसे वोट करना है. मुस्लिम और ईसाई में सेंधमारी कितनी मुश्किल केरल में मुस्लिम और ईसाई समुदाय की आबादी 45 फीसदी है. जिसमें बीजेपी अभी तक सेंध नहीं लगा पाई. इस 45 फीसदी वोटबैंक में बिना सेंधमारी किए केरल की सत्ता में आना मुमकिन नहीं है. हालांकि, पिछले चुनावों में बीजेपी का केरल के नायर समुदाय में वोट बैंक बढ़ा है. सबरीमाला के मुद्दे के बाद से ही ये समुदाय बीजेपी की तरफ झुकता नजर आया. केरल के 45 फीसदी वोट बैंक की हमने बात की, यानी अल्पसंख्यक वोट बैंक कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ का माना जाता है. ईसाई और मुस्लिम ज्यादातर इसी फ्रंट को चुनते हैं. वहीं केरल की पिछड़ी जातियों में लेफ्ट का काफी ज्यादा प्रभाव माना जाता है. केरल में हिंदू वोट करीब 55 फीसदी है, जिनके वोट एलडीएफ और यूडीएफ के बीच बंटे हुए हैं.  बीजेपी क्या हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण कर पाएगी केरल में हिंदू वोटों का कितना भी ध्रुवीकरण हो जाए ये बीजेपी को जीत तक नहीं पहुंचा सकते हैं. हिंदू वोटों के बड़े हिस्से पर लेफ्ट और कांग्रेस का कब्जा है. केरल में पिछले करीब 80 साल से आरएसएस लगातार काम कर रहा है. देश के अलग-अलग राज्यों में भी आरएसएस कार्यकर्ता और नेता बीजेपी के लिए जमीन बनाने का काम करते आए हैं और कई जगह पार्टी को सफलता भी हाथ लगी है. लेकिन केरल में अब तक कोई करिश्मा नहीं दिखा है.  राज्य के तकरीबन 80 फीसदी हिंदू दो प्रमुख संगठनों- एसएनडीपी और एएसएस के समर्थक हैं. इनमें एसएनडीपी को ओबीसी मानी जाने वाली जाति के और दूसरा एनएसएस अगड़ी जातियों में आने वाले नायर लोगों का संगठन है.  बीजेपी तमाम कोशिशों के बाद भी इन दोनों संगठनों में अपनी पैठ नहीं जमा सकी है.  एनएनडीपी के समर्थन वाले राजनीतिक संगठन बीडीजेएस से गठजोड़ कर नायर वोटों के बीच तोड़ी पकड़ बनाई है.  बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग कैसे होगी हिट  केरल में बीजेपी हर समुदाय में ध्रुवीकरण की तरफ देख रही है. हिंदू वोटों में ध्रुवीकरण करने में पार्टी कहीं न कहीं कामयाब भी रही है. बीजेपी कहीं न कहीं खुद को तीसरे मोर्चे के तौर पर स्थापित करने में कामयाब रही है. हालांकि ये उतनी संख्या में नहीं है, जिनती पार्टी … Read more

दिल्ली में भाजपा मुख्यालय: नितिन नबीन बने नए अध्यक्ष, मोदी का समर्थन

नई दिल्ली भाजपा के नव निर्वाचित अध्यक्ष नितिन नबीन ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में पदभार संभाला।इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और जे.पी. नड्डा मौजूद हैं।भारतीय जनता पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल चुका है। मंगलवार को औपचारिक रूप से नितिन नबीन के नाम का ऐलान हुआ। नए अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम वरिष्ठ नेता, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और संगठन के वरिष्ठ लोग शामिल हुए । खास बात यह भी है कि भाजपा की स्थापना के 45 साल पूरे हो चुके हैं और पार्टी को भी 45 वर्षीय राष्ट्रीय अध्यक्ष मिला है। भाजपा के इतिहास में यह संयोग संगठन के भीतर पीढ़ीगत बदलाव और भविष्य की राजनीति की दिशा का प्रतीक माना जा रहा है। युवा ऊर्जा और अनुभव के संतुलन के साथ नितिन नबीन से पार्टी को नई राजनीतिक ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद की जा रही है। आईए नितिन नबीन के सियासी सफर पर एक नजर डालते हैं। 23 मई 1980 को रांची में जन्मे नितिन नबीन की शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट माइकल हाई स्कूल से हुई। दिल्ली के सीएसकेएम पब्लिक स्कूल से उन्होंने सीनियर सेकेंडरी शिक्षा पूरी की। बिहार की राजनीति में नितिन नबीन का नाम नया नहीं है। राजनीति भले ही उन्हें विरासत में मिली, लेकिन पहचान अपने दम पर बनाई। उनके पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा की गिनती भाजपा के कद्दावर नेताओं में होती थी, जो पटना पश्चिम विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे थे। पिता के निधन के बाद नितिन नबीन ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और संगठन के सधे हुए कार्यकर्ता और चुनावी रणनीतिकार के रुप में अपनी पहचान बनाई।पिता के निधन के बाद 2006 में पटना पश्चिम विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर नितिन नबीन पहली बार सदन पहुंचे। परिसीमन के बाद बांकीपुर सीट से उनकी राजनीतिक जमीन और मजबूत हुई। 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार जीत दर्ज कर वे पांच बार विधायक बने। बिहार विधानसभा में वे उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनकी जीत की निरंतरता पार्टी के लिए भरोसे का आधार रही है।बिहार की एनडीए सरकार में नितिन नबीन ने सड़क निर्माण, शहरी विकास, आवास और विधि जैसे अहम विभाग संभाले। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ का यह मेल ही उन्हें पार्टी के भीतर अलग पहचान देता है। हालांकि, 2025 में मंत्री बनने के कुछ ही समय बाद उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसके बाद उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।नितिन नबीन की असली ताकत संगठन में दिखी। 2016 से 2019 तक बिहार भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क खड़ा किया। इसके बाद वे भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव बने। संगठन में पहचान बनी तो पार्टी ने उन्हें बिहार से बाहर जिम्मेदारियां सौंपीं। सिक्किम में संगठन प्रभारी और फिर छत्तीसगढ़ के सह-इंचार्ज के तौर पर उन्होंने चुनावी प्रबंधन की कमान संभाली।छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव नितिन नबीन के राजनीतिक करियर का निर्णायक मोड़ माना जाता है। जिस समय भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस को मजबूत माना जा रहा था और ज्यादातर सर्वे कांग्रेस की वापसी का दावा कर रहे थे, उस वक्त भाजपा ने नबीन पर भरोसा जताया। संगठनात्मक पुनर्गठन, बूथ स्तर तक समन्वय और रणनीतिक तैयारी का नतीजा रहा कि भाजपा ने स्पष्ट बहुमत से सत्ता में वापसी की।संगठन के भीतर उन्हें ऐसा व्यक्ति माना जाता है जो नेतृत्व की सीमाओं को समझता है और वरिष्ठ जनों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है। करीब दो दशकों का संगठनात्मक और चुनावी अनुभव, पांच बार विधायक रहने का रिकॉर्ड और मंत्री पद के अनुभव ने नितिन नबीन को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में एक मजबूत चेहरा बनाया।

आयोग का अहम फैसला: नगर निगम चुनाव में 25 वर्षों बाद लौटेगा बैलेट पेपर सिस्टम

कर्नाटक बेंगलुरु में 25 वर्षों के बाद नगर निकाय चुनावों में मतदान बैलट पेपर से होगा। कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अंतर्गत आने वाले 5 नई नगर निगमों के चुनाव EMV के बजाय बैलट पेपर से कराए जाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी जी.एस. संगरेशी ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय कानूनी रूप से वैध है और सुप्रीम कोर्ट के किसी भी फैसले का उल्लंघन नहीं करता। यह फैसला बेंगलुरु के स्थानीय निकाय चुनावों में एक बड़ा बदलाव है, जहां पिछली बार 2000 के आसपास बैलट पेपर का इस्तेमाल हुआ था। अब तक ईवीएम का उपयोग होता आ रहा था, लेकिन अब पारंपरिक तरीके की वापसी हो रही है।   यह चुनाव 25 मई के बाद और 30 जून से पहले संपन्न कराए जाने हैं, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है। इसका कारण 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाओं के बाद का समय निर्धारित करना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। इन चुनावों में लगभग 88.91 लाख मतदाता शामिल होंगे, जिनके नाम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स में दर्ज हैं। राज्य चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि इस साल के अंत में होने वाले जिला और तालुक पंचायत चुनाव भी बैलट पेपर से ही होंगे। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाताओं के विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया माना जा रहा है। क्या बैलेट पेपर से मतगणना में देरी होगी? राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि मतगणना में देरी नहीं होगी, क्योंकि पर्याप्त लॉजिस्टिक्स, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस बल की व्यवस्था की जाएगी। चुनाव एक ही दिन में पूरा कर परिणाम घोषित करने की योजना है। जीबीए के तहत 5 नगर निगमों (सेंट्रल, नॉर्थ, साउथ, ईस्ट और वेस्ट बेंगलुरु) में कुल 369 वार्ड हैं और लगभग 89 लाख मतदाता हैं। ड्राफ्ट मतदाता सूची 19 जनवरी को जारी की गई है, जिसमें आपत्तियां 20 जनवरी से 3 फरवरी तक दर्ज की जा सकती हैं। अंतिम सूची 16 मार्च को प्रकाशित होगी। यह फैसला पिछले साल कर्नाटक कैबिनेट की सिफारिश के अनुरूप है। कांग्रेस सरकार के शासन में यह कदम उठाया गया है, जबकि पार्टी ने पहले ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे।

गुजरात में केजरीवाल का तीखा संदेश: जेल जाने की बात कही, कार्यकर्ताओं को दिलाई शपथ

वडोदरा गुजरात के वडोदरा में आम आदमी पार्टी का सम्मेलन हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी इस सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर जोरदार हमला बोला सभी पार्टी के सभी एकजुट होकर बीजेपी का सामना करने के लिए कहा। अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि जैसे-जैसे गुजरात के चुनाव पास आएंगे, बीजेपी सबको भेजना शुरू होगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, जेल जाने के लिए तैयार रहना होगा। इसी के साथ उन्होंने ये भी कहा कि ये लोग जेल भेजेंगे और मैं 2 महीने में छुड़ा कर ले कर आउंगा।   इस दौरान उन्होंने कहा, अगर 30 साल में बीजेपी ने अच्छी सरकार चलाई होती तो आज यहां एक भी आदमी नहीं आता। आप यहां आए हैं, इसका मतलब आप बहुत दुखी है। उन्होंने कहा, सब मिलकर 2027 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनाएंगे और ऐसी सरकार बनाएंगे जहां हर कोई खुशहाल होगा और सारी सुविधा मिलेगी। कोई डराएगा नहीं और कोई डरेगा नहीं। अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर सबको जेल भेजने का आरोप लगाया।। उन्होंने कहा, 2 साल के अंदर ये सबको जेल भेजेंगे और जेल जाने के लिए तैयार रहना होगा। अरविंज केजरीवाल ने कहा, मैं 6 महीने जेल रहकर आया, मेरा क्या कसूर था। केजरीवाल ने आगे कहा, ये लोग कार्यकर्ताओं को भी जेल भेजेंगे लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, मैं 2-3 महीने में छुड़वा कर ले कर आउंगा। इसी के साथ केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं से एक कसम भी खिलवाई। अरविंद केजरीवाल ने कहा, अब बस दो साल बचे हैं और इस दौरान खूब मेहनत करनी होगी। लोगों को जोड़नाी होगा। सब कसम खाकर जाएंगे कि हर कार्यकर्ता हर रोज पांच वोट बनाएगा।  

नामांकन से मतदान तक: इस तरह चुना जाता है भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार को अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की, जिसके तहत शीर्ष नेताओं ने कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन ( 45) के नामांकन पत्र दाखिल किए। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और वरिष्ठ नेताओं धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव और किरेन रीजीजू की मौजूदगी में निर्वाचन अधिकारी के लक्ष्मण को नामांकन पत्रों का एक सेट सौंपा। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और राज्य के अन्य नेताओं ने भी नितिन नवीन के समर्थन में नामांकन पत्रों का एक और सेट दाखिल किया।   बता दें कि नितिन नवीन को पिछले महीने ही पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद थे। बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, झारखंड समेत कई राज्यों के नेताओं ने भी नितिन नवीन के समर्थन में नामांकन पत्र दाखिल किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी के शीर्ष नेताओं के समर्थन से नितिन नवीन का भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। आइए अब जानते हैं कि भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष कैसे चुना जाता है, क्या हैं योग्यताएं, नियम और पूरी प्रक्रिया… चुनाव की प्रक्रिया भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है। यह मंडल पार्टी की राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों और विभिन्न राज्यों की परिषदों से चुने गए प्रतिनिधियों से मिलकर बनता है। इसकी निगरानी पार्टी के राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी करते हैं।     निर्वाचक मंडल की सूची तैयार और प्रकाशित होने के बाद नामांकन शुरू होता है     नामांकन पत्र दाखिल किए जाते हैं। आमतौर पर उम्मीदवार तीन अलग-अलग सेट में नामांकन दाखिल कर सकता है     इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच होती है     उसके बाद नाम वापसी का समय मिलता है     नाम वापसी के बाद राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हैं कि चुनाव सर्वसम्मति से हो रहा है या मतदान की जरूरत है     अगर एक से अधिक उम्मीदवार बचते हैं, तो मतदान कराया जाता है और उसी दिन मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाते हैं     अगर नाम वापसी के बाद सिर्फ एक उम्मीदवार बचता है, तो उसे निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया जाता है राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की योग्यताएं     भाजपा संविधान के अनुसार, उम्मीदवार कम से कम 15 वर्ष से पार्टी का प्राथमिक (सक्रिय) सदस्य होना चाहिए     निर्वाचक मंडल के कम से कम 20 सदस्य संयुक्त रूप से उसका नाम प्रस्तावित करें     प्रस्ताव पर उम्मीदवार के हस्ताक्षर जरूरी हैं     यह प्रस्ताव कम से कम 5 अलग-अलग राज्यों से आना चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव पूरे हो चुके हों कार्यकाल कितना होता है? भाजपा संविधान की धारा 20 के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है। पार्टी चाहे तो इसे एक बार और 3 वर्ष के लिए बढ़ा सकती है। इस तरह अधिकतम 6 वर्ष तक एक व्यक्ति इस पद पर रह सकता है।

नितिन नबीन BJP के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय, नामांकन दाखिल; निर्विरोध चुने जाने के संकेत

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए नितिन नबीन ने नामांकन कर दिया है. इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में प्रस्तावक बने. बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कल मंगलवार को होगा. इससे पहले सभी बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, सीनियर लीडर समेत तमाम लोग पार्टी कार्यालय में मौजूद रहे. बता दें, बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर बिना किसी विरोध के चुने जाने की संभावना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी नेतृत्व इस पद के लिए उनकी उम्मीदवारी के समर्थन में है. बीजेपी के नेशनल रिटर्निंग ऑफिसर के. लक्ष्मण के बताए गए चुनाव शेड्यूल के मुताबिक, इस पोस्ट के लिए नामांकन सोमवार को दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे के बीच फाइल किया जाएगा और चुनाव प्रक्रिया पूरा होने के अगले दिन नए पार्टी चीफ के नाम की घोषणा की जाएगी. 19 जनवरी को शाम 4 बजे से शाम 5 बजे के बीच नॉमिनेशन पेपर्स की स्क्रूटनी की जाएगी. आज ही शाम 5 बजे से शाम 6 बजे के बीच नामांकन वापस लिए जा सकेंगे. बीजेपी के एक सोर्स ने पीटीआई को बताया, 'इस मौके पर हमारे लगभग सभी मुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे. इसके अलावा बीजेपी के सभी स्टेट यूनिट प्रेसिडेंट और पार्टी के दूसरे बड़े नेता भी यहां मौजूद रहेंगे.' नबीन जो बिहार से पांच बार के विधायक हैं और हाल ही में बीजेपी के नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट बनाए गए हैं, सोमवार को पार्टी के नेशनल प्रेसिडेंट पद के लिए अपना नॉमिनेशन जमा करेंगे. बीजेपी के राष्ट्रीय रिटर्निंग ऑफिसर के. लक्ष्मण द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, नितिन नबीन अध्यक्ष पद के लिए नामांकन सोमवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच दाखिल करेंगे. इसके बाद शाम 4 से 5 बजे तक नामांकन पत्र की जांच की जाएगी और शाम 5 से 6 बजे के बीच नामांकन वापसी की प्रक्रिया की जाएगी. अगर इस प्रक्रिया के बाद जरूरत पड़ती है तो 20 जनवरी को मतदान होगा, लेकिन वर्तमान स्थिति में नितिन नबीन के निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने की संभावनाएं हैं. हालांकि, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का आधिकारिक ऐलान 20 जनवरी को ही किया जाएगा. पर नामांकन प्रक्रिया के बाद बीजेपी के नए अध्यक्ष को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी. बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी का कहना है कि पार्टी का संगठनात्मक ढांचा पूरी तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया से तय होता है. उन्होंने कहा कि सोमवार को नामांकन होगा और अगले दिन नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी जाएगी. पीएम मोदी और अमित शाह होंगे प्रस्तावक सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन तीन अलग-अलग सेट में नामांकन दाखिल कर सकते हैं. एक नामांकन पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा प्रस्तावक होंगे. जबकि दूसरे सेट में 20 से ज्यादा निर्वाचित बीजेपी प्रदेश अध्यक्षों के नाम हो सकते हैं. तीसरे सेट में बीजेपी नेशनल काउंसिल के सदस्यों का समर्थन होने की बात कही जा रही है. दिग्गज नेताओं का दिल्ली में जमावड़ा पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में हलचल तेज है. इस चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए बीजेपी शासित राज्यों के लगभग सभी मुख्यमंत्री, राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य दिल्ली पहुंच रहे हैं. बीजेपी के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया कि हमारे लगभग सभी मुख्यमंत्री इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे. इसके अलावा बीजेपी के सभी राज्य यूनिटों के  अध्यक्ष और पार्टी के अन्य प्रमुख नेता भी यहां मौजूद रहेंगे. कैसे होता है बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव? बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी की राष्ट्रीय परिषद और राज्य परिषदों के प्रतिनिधियों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है और इस प्रक्रिया की देखरेख पार्टी के राष्ट्रीय प्रतिवेदक द्वारा की जाती है. बीजेपी के संविधान के अनुसार, किसी राज्य के निर्वाचक मंडल के कोई भी 20 सदस्य संयुक्त रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए ऐसे व्यक्ति का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं जो चार कार्यकाल तक पार्टी का सक्रिय सदस्य रहा हो और जिसकी सदस्यता के पंद्रह वर्ष पूरे हो चुके हों. लेकिन ऐसा संयुक्त प्रस्ताव कम-से-कम पांच राज्यों से आना चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के लिए चुनाव संपन्न हो चुके हों. कल होगा शपथ ग्रहण सूत्रों का कहना है कि नितिन नबीन को निर्विरोध बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाएगा और वह कल सुबह 11:30 बजे पीएम मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, नितिन गड़करी, बीजेपी शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और प्रदेशों के अध्यक्ष और संगठन मंत्रियों की मौजूदगी में बीजेपी अध्यक्ष पद का पदग्रहण करेंगे.   कौन हैं नितिन नबीन नितिन नबीन बिहार के पांच बार के विधायक हैं  और पार्टी में मजबूत संगठनकर्ता के रूप में जाने जाते हैं. वह 2010 से लगातार बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक चुने गए हैं. वह पहली बार 2006 में पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे. हाल ही में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. अब वह पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कमान संभालने के लिए तैयार हैं. उनके नेतृत्व में पार्टी आगामी चुनौतियों और संगठनात्मक मजबूती की दिशा में नया रोडमैप तैयार करेगी बीजेपी के नेशनल प्रेसिडेंट का चुनाव एक इलेक्टोरल कॉलेज करता है, जिसमें पार्टी की नेशनल काउंसिल और स्टेट काउंसिल के रिप्रेजेंटेटिव होते हैं, और इस प्रोसेस की देखरेख पार्टी के नेशनल रिटर्निंग ऑफिसर करते हैं. बीजेपी के संविधान के अनुसार किसी राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के कोई भी 20 सदस्य मिलकर ऐसे व्यक्ति का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित कर सकते हैं, जो चार बार एक्टिव सदस्य रहा हो और जिसकी सदस्यता पंद्रह साल की हो. हालांकि ऐसा संयुक्त प्रस्ताव कम से कम पांच राज्यों से आना चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव पूरे हो चुके हों, ऐसा इसमें तय है. शुक्रवार को चुनाव शेड्यूल जारी करते हुए, पार्टी के राष्ट्रीय रिटर्निंग ऑफिसर के लक्ष्मण ने कहा था, 'जरूरत पड़ने पर 20 जनवरी को मतदान होगा … Read more

PC शर्मा ने कहा: दूषित पानी पीने से टीम इंडिया हारी, बयान ने मचाई राजनीतिक हलचल

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई, जब कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने टीम इंडिया की हार को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि टीम इंडिया न्यूजीलैंड से इसलिए हारी क्योंकि खिलाड़ियों ने इंदौर का दूषित पानी पिया था. इस बयान के बाद खेल से लेकर राजनीति तक बहस छिड़ गई. इंदौर का पानी और खिलाड़ियों के लिए बना काल पीसी शर्मा ने इंदौर की जल व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर में लंबे समय से पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब आम जनता दूषित पानी पीने को मजबूर है, तो खिलाड़ी कैसे बचे रहेंगे. उनका कहना था कि खराब पानी से सेहत पर असर पड़ता है और यही वजह टीम इंडिया की हार भी हो सकती है. हार से ज्यादा बयान पर चर्चा टीम इंडिया की हार पर जहां क्रिकेट फैंस निराश थे, वहीं पीसी शर्मा का यह बयान चर्चा का केंद्र बन गया. सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सच में पानी की गुणवत्ता खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकती है या फिर यह सिर्फ एक सियासी तंज है. बयान के बाद इंदौर नगर निगम और प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया. बीजेपी पर भी साधा निशाना पीसी शर्मा यहीं नहीं रुके. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि जब शहर में पानी जैसी बुनियादी सुविधा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, तब जश्न मनाना संवेदनहीनता है. उन्होंने कहा कि इतनी मौतें हो चुकी हैं और ये लोग उत्सव मना रहे हैं, यह समझ से परे है. बयान से बढ़ी सियासी गरमी बीजेपी की ओर से इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताया गया है, जबकि कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि पीसी शर्मा ने एक गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया है. फिलहाल बयान ने इंदौर की पानी व्यवस्था, प्रशासनिक जिम्मेदारी और खेल को राजनीति से जोड़ने पर नई बहस छेड़ दी है.

क्या लॉटरी सिस्टम तय करेगा मुंबई का अगला मेयर? शिंदे मॉडल पर सियासी हलचल

मुंबई  महाराष्ट्र के नगर महापालिका परिषद चुनाव नतीजों की चर्चा दिल्ली तक हो रही है, लेकिन सभी की निगाहें मुंबई के मेयर पद पर लगी हुई हैं. पिछले 28 सालों से बीएमसी पर काबिज रही उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को करारी मात खानी पड़ी है. ऐसे में बीजेपी को पहली बार मुंबई में मिली भारी जीत के बाद सवाल उठ रहा है कि देश की सबसे समृद्ध माने जाने वाली महानगर पालिका बीएमसी के मेयर कौन बनेगा?  मुंबई नगर महापालिका चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो शिंदे के शिवसेना के साथ बीएमसी पर अपना कब्जा जमाए रखने का नंबर गेम भी हैं. इसके बाद भी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया में वक्त लगेगा, इसलिए इस बीच कई उतार चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं.  बीएमसी के नए मेयर का चुनाव निगम सदन में पार्षदों के मतदान के जरिए किया जाएगा.  मुंबई नगर प्रशासन द्वारा नवनिर्वाचित पार्षतों की बुलाई जाने वाली विशेष बैठक में यह चुनाव होने की संभावना है, लेकिन उससे पहले मेयर किस जाति और किस वर्ग का होगा, ये फॉर्मूला एकनाथ शिंदे के मंत्रालय के द्वारा 'लॉटरी सिस्टम' से तय होगा?  शिंदे के 'लॉटरी सिस्टम' से तय होगा मेयर मुंबई में बीएमसी का मेयर किस जाति और किस वर्ग से होगा, इसका फैसला राज्य के अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (शहरी विकास विभाग) के द्वारा तय होता है. राज्य के शहरी विकास विभाग का जिम्मा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है. ऐसे में मेयर पद के आरक्षण का फैसला शिंदे के विभाग के द्वारा तय किया जाना है.   बीएमसी में मेयर का पद रोटेशन के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित होता है. महाराष्ट्र का शहरी विकास विभाग मेयर पद के श्रेणी तय करने के लिए लॉटरी की प्रक्रिया कराता है.  मेयर पद के लिए आरक्षण प्रक्रिया को चुनाव के पहले तय नहीं किया. इसी कारण किस महापालिका मे कौन सी जाति या वर्ग का मेयर होगा ये अभी तक तय नहीं हुआ है. ऐसे में मुंबई के मेयर का पद भी तय नहीं है. पुरुष, महिला, ओबीसी, अनुसूचित जाति के आधार पर रोटेशन अभी तय होना है. माना जा रहा है कि इसी हफ्ते अब एकनाथ शिंदे के अगुवाई वाला शहरी विकास विभाग मेयर पद के आरक्षण तय करने के लिए लॉटरी प्रक्रिया अपना सकता है. ऐसे में पहले शहरी विकास विभाग के द्वारा मेयर का आरक्षण तय होगा. सूत्रों की मानें तो 22 जनवरी को आरक्षण तय हो सकता है और उसके बाद मेयर ही कौन बनेगा, उसे लेकर फैसला होगा.  महाराष्ट्र में कैसे होगा नए मेयरों का चुनाव मेयर पद पर आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीएमसी के नए मेयर का चुनाव होगा. इस तरह से महाराष्ट्र के मुंबई को आखिरकार चार साल बाद मेयर मिलने जा रहा है. मुंबई के मेयर का पद संभालने वाली आखिरी शख्स शिवसेना की किशोरी पेडनेकर थीं, जो इस बार भी जीतकर आईं है, लेकिन उद्धव की सेना को बहुमत का नंबर नहीं मिल सका है. इसके चलते उनका मेयर बनने की राह काफी मुश्किल है.  बीएमसी मेयर को काफी ताकतवर माना जाता है और इस पद के लिए दावेदारी भी बड़ी होती है. मुंबई के बीएमसी में अलग-अलग वॉर्डों से कुल 227 पार्षद (नगर सेवक) चुनाव जीतकर आए हैं, जिन्हें मुंबई में नगर सेवक या फिर कॉरपोरेटर कहा जाता है. ऐसे में जिस पार्टी का बहुमत होता है, वही मेयर पद की उम्मीदवारी में सबसे बड़ी दावेदार होती है.  नगर महापालिका चुनाव जीतकर आने वाले पार्षद ही मेयर का चुनाव करते हैं. मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है, वहीं पार्षद 5 साल के लिए चुने जाते हैं. एक मेयर का कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरे मेयर का चुनाव होता है. ऐसे में प्रशासन नवनिर्वाचित निगम पार्षदों की विशेष बैठक बुलाएगा, जिसमें मेयर और उपमेयर का चुनाव होगा. 28 जनवरी को नगर प्रशासन पार्षदों की विशेष बैठक बुला सकता है. बैठक में मेयर पद के लिए सभी निर्वाचित पार्षद मतदान करेंगे और जिसे सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वही मेयर चुना जाएगा. हालांकि. यह जरूरी नहीं है कि सबसे ज्यादा पार्षदों वाली पार्टी का उम्मीदवार ही मेयर बने, लेकिन बीते वर्षों के अनुभव बताते हैं कि आमतौर पर बहुमत या मजबूत गठबंधन वाली पार्टी इस पद पर काबिज होती रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी पहली बार मुंबई में अपने मेयर बना सकती है.  मेयर के साथ उपमेयर का भी होगा चुनाव शहरी विकास विभाग (यूडीडी) इसी हफ्ते मेयर पद के आरक्षण को लेकर लॉटरी निकालेगा. इसमें यह तय होगा कि मेयर पद सामान्य वर्ग, महिला या किसी आरक्षित श्रेणी के लिए होगा. आरक्षण की घोषणा के बाद पात्र पार्षद नामांकन दाखिल करेंगे और उसके कुछ दिनों बाद मेयर का चुनाव कराया जाएगा. इस तरह मेयर चुनाव जनवरी के अंतिम सप्ताह में होना तय माना जा रहा है. मेयर के साथ उपमेयर का भी चुनाव होगा. इसके अलावा स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन के पद भी सभी की निगाहें हैं.  बीएमसी में भले ही मेयर का पद सबसे बड़ा हो, लेकिन असली ताकत किसी और के पास होती है. सबसे अमीर नगरपालिका में दो विंग होती है, पहली राजनीतिक विंग और दूसरी प्रशासनिक विंग. राजनीतिक विंग के मुखिया मेयर होते है जबकि प्रशासनिक विंग को नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) हेड करते हैं. ऐसे में बीजेपी के पास अपने दम पर मेयर बनाने का नंबर नहीं है, जिसके चलते शिंदे के समर्थन से ही बीएमसी पर कब्जा जमा सकता है. इस वजह से शिंदे की बार्गेनिंग पावर बढ़ गई है और उनकी नजर भी बीएमसी के अहम पद है.  बीजेपी और एकनाथ शिंदे में होगी शह-मात मेयर चुनाव की प्रक्रिया के तहत पहले आरक्षण तय किया जाता है, फिर विशेष बैठक में सभी पार्षद मतदान करते हैं. साधारण बहुमत हासिल करने वाला उम्मीदवार मेयर और उपमेयर घोषित किया जाता है. हालांकि, किसी दल के पास अगर स्पष्ट बहुमत नहीं होता, तो गठबंधन और चुनाव के बाद की राजनीतिक बातचीत निर्णायक भूमिका निभाती है. मुंबई में इस बार मेयर चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार 227 निर्वाचित पार्षदों के साथ 10 नामांकित पार्षद भी होंगे। मार्च 2023 में मुंबई नगर निगम अधिनियम में संशोधन … Read more

कौन बनेगा मुंबई का मेयर? शिंदे की चाल ने BMC की राजनीति में बढ़ाया रोमांच

मुंबई मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव परिणामों के बाद अब सत्ता के समीकरणों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बार किसी भी स्थिति में मुंबई पर अपना मेयर बिठाने का संकल्प लिया था। 89 सीटें जीतकर बीजेपी इस सपने के करीब भी पहुंच गई है, लेकिन सत्ता की चाबी अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों में नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे ने बीजेपी की मजबूरी को भांपते हुए एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। खबर है कि शिंदे गुट की ओर से मुंबई के मेयर पद की मांग की जा सकती है।   तर्क यह दिया जा रहा है कि यह वर्ष बालासाहेब ठाकरे का जन्मशताब्दी वर्ष है। शिंदे गुट इस मौके पर बालासाहेब की इच्छा पूरी करने का हवाला देते हुए बीजेपी से ढाई साल के लिए मेयर पद की मांग कर सकता है। इसके अलावा, स्थायी समिति के अध्यक्ष पद और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी शिंदे सेना अपना दावा ठोक सकती है। बीजेपी के लिए शिंदे अनिवार्य बीएमसी में बहुमत के लिए 114 पार्षदों की आवश्यकता है। वर्तमान स्थिति के मुताबिक, बीजेपी की 89 सीटें, शिंदे सेना की 29 सीटें, ठाकरे गुट की 65 सीटें और मनसे की 6 सीटें हैं। बीजेपी के पास 89 सीटें हैं, लेकिन बिना शिंदे गुट के 29 पार्षदों के वह बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सकती। इसी बढ़त का फायदा उठाकर अब शिंदे सेना सौदेबाजी की तैयारी में है। होटल पॉलिटिक्स की शुरुआत एकनाथ शिंदे ने कल ही अपने सभी 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को बांद्रा के 'ताज लैंड्स एंड' होटल में शिफ्ट कर दिया है। सत्ता स्थापना की प्रक्रिया पूरी होने तक ये सभी पार्षद वहीं रहेंगे। शिंदे के इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और इसे बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। फडणवीस की प्रतिक्रिया मेयर पद को लेकर मचे घमासान पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "हमें पूर्ण बहुमत मिला है। ऊपर वाले ने ही तय किया है कि मुंबई में महायुति का ही मेयर बनेगा। शिंदे साहब और हम साथ बैठकर सब तय करेंगे और मुंबई को बेहतर तरीके से चलाएंगे।" पार्षदों को होटल में रखने के सवाल पर फडणवीस ने कहा कि जैसे हमने अपने पार्षदों को साथ बुलाया, वैसे ही उन्होंने भी किया होगा। अब हमें तोड़-फोड़ की कोई जरूरत नहीं है।  

बेअदबी विवाद गरमाया: AAP MP ने पीएम मोदी से कपिल मिश्रा के खिलाफ ऐक्शन लेने की अपील की

नई दिल्ली/पंजाब दिल्ली विधानसभा के अंदर कथित बेअदबी वाला विवाद थमता नहीं दिख रह है। आतिशी के गुरु तेग बहादुर के कथित अपमान वाले वीडियो पर संग्राम जारी है। मंत्री कपिल मिश्रा समेत तमाम बीजेपी नेताओं ने इसपर आतिशी से जवाब मांगा है। खुद विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि वीडियो फर्जी नहीं है। अब आम आदमी पार्टी के सांसद ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि कपिल मिश्रा की ओर से यह झूठ जानबूझकर फैलाया गया था, जिसका स्पष्ट उद्देश्य सिख धार्मिक भावनाओं को हथियार बनाकर आक्रोश पैदा करना और राजनीतिक लाभ उठाना था। यह केवल एक राजनीतिक गलतफहमी नहीं है, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से किया गया ईशनिंदा (धार्मिक अपमान) का कार्य है।   आप सांसद ने पीएम को पत्र में क्या लिखा? आम आदमी पार्टी के सांसद मलविंदर सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि भारत का इतिहास सिख गुरुओं के बेमिसाल बलिदानों से रोशन है, जिन्होंने सत्ता या सुख-सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा, मानवीय गरिमा और हर व्यक्ति के अपनी अंतरात्मा के अनुसार जीने के अधिकार के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। गुरु अर्जन देव जी की शहादत से लेकर गुरु तेग बहादुर जी के सर्वोच्च बलिदान तक, गुरु परंपरा इस सभ्यता की नैतिक रीढ़ की हड्डी की तरह खड़ी है, जो अत्याचार और झूठ के सामने कभी नहीं झुकी। मलविंदर सिंह कंग ने आगे लिखा कि आपने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से गुरुओं की विरासत और उनकी अनमोल शिक्षाओं के प्रति अपनी व्यक्तिगत श्रद्धा और विश्वास व्यक्त किया है। आपके नेतृत्व में, भारत सरकार ने युद्ध से प्रभावित अफगानिस्तान से पवित्र 'श्री गुरु ग्रंथ साहिब' को सुरक्षित वापस लाने और उनकी रक्षा करने में असाधारण दृढ़ संकल्प और संवेदनशीलता दिखाई है। आपके इस कार्य का दुनिया भर के सिखों ने गहरा सम्मान किया और इसे भावुकता के साथ स्वीकार किया। इन कार्यों ने यह साबित किया कि आपकी प्रतिबद्धता केवल एक राजनेता के रूप में नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति के रूप में है जो उस आध्यात्मिक कर्ज को समझता है जो यह देश गुरुओं का ऋणी है। फर्जी वीडियो से जानबूझकर झूठ फैलाया गया कंग ने आगे लिखा कि यही कारण है कि वर्तमान घटनाक्रम से गहरी पीड़ा और दुख हो रहा है। पंजाब और दिल्ली दोनों की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्टों ने अब यह पूरी तरह से साबित कर दिया है कि एक छेड़छाड़ की गई और फर्जी वीडियो जानबूझकर फैलाई गई थी। इसका उद्देश्य श्रीमती आतिशी पर सिख गुरुओं के बारे में अपमानजनक बातें करने का झूठा आरोप लगाना था। वैज्ञानिक जांच के नतीजे इसे स्पष्ट कर देते हैं—उनके द्वारा ऐसे कोई शब्द कभी नहीं बोले गए थे। ऐसे समय में जब सिख समुदाय पूरी श्रद्धा के साथ गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस मना रहा था, जिन्होंने धर्म और दूसरों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया, इस तरह की हरकतें नैतिकता का घोर उल्लंघन हैं। राजनीतिक लाभ के लिए झूठ और हेरफेर के जरिए गुरुओं की पवित्रता का सहारा लेना उनकी विरासत का एक अक्षम्य अपमान है। मलविंदर सिंह कंग ने आगे लिखा कि माननीय प्रधानमंत्री जी, गुरुओं की शिक्षाओं में अटूट विश्वास रखने वाले व्यक्ति के रूप में, हम आपकी अंतरात्मा और नेतृत्व पर भरोसा करते हैं। जब आपकी अपनी पार्टी के लोग गुरु परंपरा का अपमान करने वाले कार्यों में शामिल होते हैं, तो आपकी चुप्पी या निष्क्रियता को सहमति के रूप में समझा जा सकता है। इतिहास हमें सिखाता है कि गुरुओं ने कभी भी बेअदबी, छल या अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया, चाहे वह किसी ने भी किया हो। इसलिए, हम कपिल मिश्रा के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की उम्मीद करते हैं, जिसमें उन्हें सभी आधिकारिक पदों से हटाना और उनके कार्यों की सार्वजनिक रूप से निंदा करना शामिल है। ऐसी निर्णायक कार्रवाई आपके नेतृत्व को कमजोर नहीं बल्कि मजबूत करेगी। इससे यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि गुरुओं की पवित्रता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता और कोई भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा धर्म से ऊपर नहीं है। सिख समुदाय हमेशा इस राष्ट्र की ढाल और तलवार बनकर खड़ा रहा है। आज, वह कोई उपकार नहीं, बल्कि न्याय और नैतिक स्पष्टता चाहता है। इस समय आपका हस्तक्षेप यह पुष्टि करेगा कि जिन आदर्शों के लिए गुरुओं ने अपने प्राण त्यागे थे, वे आधुनिक भारत में भी सुरक्षित हैं।