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फैक्ट्री स्थापना की रफ्तार पर राहुल गांधी की तारीफ, मंत्री वैष्णव का जवाब— ‘धन्यवाद’

नई दिल्ली  कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के बीच हल्की नोक-झोंक सामने आई है। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष सोशल मीडिया पर किए एक पोस्ट में कर्नाटक सरकार की तारीफ की थी। उनकी यह तारीफ आईफोन निर्माता कंपनी फॉक्सकॉन द्वारा तेजी से लगाई गई फैक्ट्री और केवल 9 महीनों में करीब 30 हजार कर्मचारियों के भर्ती के संदर्भ में थी। इसमें से 80 फीसदी महिलाएं हैं। हालांकि, राहुल गांधी की इस तारीफ को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेक इन इंडिया की तारीफ बताते हुए धन्यवाद कह दिया।   राहुल गांधी के फेसबुक पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर इस उपलब्धि का श्रेय केंद्र की मोदी सरकार को दिया। उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया कार्यक्रम की सफलता को स्वीकार करने के लिए राहुल गांधी का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी स्वीकार किया है कि भारत एक उत्पादक अर्थव्यवस्था बन रहा है।" वैष्णव ने कहा कि मेक इन इंडिया के जरिए देश की निर्माण क्षमता मजबूत हुई है और भारत वैश्विक स्तर पर लगातार उत्पादन का केंद्र बनता जा रहा है। क्या कहा था गांधी ने? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को फेसबुक पर एक रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कर्नाटक सरकार की तारीफ की थी। उन्होंने लिखा, "सिर्फ आठ-नौ महीनों में 30 हजार कर्मचारियों की भर्ती, यह भारत में अब तक का सबसे तेज फैक्ट्री रैंप अप है।" अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए राहुल ने लिखा, "यह सिर्फ आंकड़े नहीं है, यह रोजगार को बढ़ाने के लिए एक परिवर्तनकारी कदम है। इस यूनिट को बड़े पैमाने पर महिलाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है। यह उपलब्धि इसे और भी ज्यादा खास बनाती है। कई युवतियों के लिए यह उनकी पहली नौकरी है। कर्नाटक एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहा है, जहां मैन्यूफैक्चरिंग इस स्तर और रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही है।" गांधी ने कहा, "यही वह भारत है, जिसे हम बनाना चाहते हैं गरिमा के साथ सभी के लिए नौकरी का अवसर।" गौरतलब है कि ताइवान स्थित फॉक्सकॉन एप्पल के उपकरणों की कॉन्ट्रेक्ट मैन्युफैक्चरर है। भारत में बड़े पैमाने पर इसका प्लांट लगाया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह फैक्ट्री एप्पल की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहती है।

सांसद कंगना रनोट को लेकर मंडी में सियासी बवाल, युवा कांग्रेस ने चंदा अभियान चलाकर किया विरोध प्रदर्शन

मंडी हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस ने अपने 90 दिवसीय एजेंडे के तहत शनिवार को मंडी में सांसद कंगना रनोट के कथित बयानों के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान युवा कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सांसद कंगना रनोट के निजी खर्चों को पूरा करने के नाम पर चंदा एकत्रित किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह प्रदर्शन युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं हिमाचल प्रदेश के सह प्रभारी ज्योतिष एचएम के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष निखिल ठाकुर और प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रमणि कुलेठी भी मौजूद रहे। ज्योतिष एचएम ने बताया कि सांसद कंगना रनोट द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान के जवाब में यह चंदा अभियान शुरू किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सांसद के तौर पर मिलने वाले वेतन से उनके स्टाफ का खर्च भी पूरा नहीं हो पाता। कार्यक्रम के तहत युवा कांग्रेस ने मंडी शहर में रोष रैली भी निकाली। रैली के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए डीसी कार्यालय के बाहर केंद्र सरकार का पुतला दहन किया। युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रमणि कुलेठी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों को अब तक केंद्र से कोई ठोस मदद नहीं मिली है, जिससे प्रदेश के युवाओं में भारी रोष है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनहित के मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है और योजनाओं के नाम बदलकर लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। युवा कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के हितों को नजरअंदाज करना बंद करे और आपदा प्रभावितों सहित आम जनता को तुरंत राहत प्रदान करे।

राजनीति का ‘बैंक बैलेंस’ खेल: बीजेपी सबसे अमीर, कांग्रेस बेहद पीछे, आंकड़े कर देंगे हैरान

नई दिल्ली  दिल्ली में इस साल हुए विधानसभा चुनावों के बाद चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों द्वारा सौंपे गए वित्तीय खुलासों में देश की प्रमुख पार्टियों की आर्थिक स्थिति का बड़ा अंतर सामने आया है। इन खुलासों के मुताबिक, केंद्र और अब दिल्ली की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास 6,900 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक जमा राशि है। वहीं उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के पास पार्टी मुख्यालय से लेकर राज्य और जिला इकाइयों को मिलाकर मात्र 53 करोड़ रुपये की राशि है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिलचस्प तथ्य यह है कि सीमित चुनावी उपस्थिति के बावजूद बहुजन समाज पार्टी (BSP) के खातों में 580 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि दर्ज की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि चुनावी प्रदर्शन और पार्टी की वित्तीय स्थिति के बीच सीधा संबंध हमेशा नहीं होता। अन्य दलों की स्थिति चुनाव आयोग को सौंपे गए विवरण के अनुसार,     आम आदमी पार्टी (AAP) की केंद्रीय इकाई के पास 9.9 करोड़ रुपये     भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPM) के पास 4 करोड़ रुपये     भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के पास मात्र 41 लाख रुपये     जबकि BSP के खाते में 580 करोड़ रुपये की राशि दर्ज की गई है। ये आंकड़े भारत निर्वाचन आयोग को दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद विभिन्न दलों द्वारा दिए गए बैंक बैलेंस विवरण पर आधारित हैं। कांग्रेस को 2024-25 में 517 करोड़ रुपये का चंदा इस बीच, 24 अक्टूबर को चुनाव आयोग में दाखिल योगदान विवरण (कंट्रीब्यूशन स्टेटमेंट) में कांग्रेस ने बताया कि उसे वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 517 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ है। यह वह राशि है जो 20,000 रुपये से अधिक के व्यक्तिगत दान के रूप में मिली और जिसे कानून के तहत सार्वजनिक रूप से घोषित करना अनिवार्य है। नियमों के अनुसार, राजनीतिक दल 20,000 रुपये से कम के दान देने वालों का विवरण सार्वजनिक नहीं करते, जबकि कुल संग्रह का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं छोटे-छोटे दानों से आता है। राजनीतिक दलों के फंड संग्रह के प्रमुख स्रोतों में व्यक्तिगत दानदाता, कॉरपोरेट संस्थान और विभिन्न ट्रस्ट शामिल होते हैं। बिहार चुनावों के बाद अब तक कोई रिपोर्ट नहीं उधर, बिहार में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने चुनाव आयोग को योगदान या बैंक बैलेंस से जुड़ी कोई रिपोर्ट जमा नहीं कराई है। इससे वहां दलों की मौजूदा वित्तीय स्थिति को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं हो पाई है।

दिग्विजय सिंह का बयान: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले भारत में अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े

भोपाल बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर सियासत तेज हो गई है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले, भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही कार्रवाइयों का “रिएक्शन” हैं. अल्पसंख्यकों पर कार्रवाई का असर पड़ोसी देश तक दिग्विजय सिंह ने कहा कि भारत में कट्टरपंथी ताकतें अल्पसंख्यकों पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं. उनका दावा है कि इसी का असर पड़ोसी देश बांग्लादेश में देखने को मिल रहा है, जहां हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. हिंदुओं पर अत्याचार की घोर निंदा पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचार की वे घोर निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव स्वीकार्य नहीं है और इस तरह की घटनाएं मानवता पर धब्बा हैं. राजनीतिक बयान से बढ़ी बहस दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है. जहां एक तरफ उनके समर्थक इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल इस बयान को लेकर सवाल उठा रहे हैं. दिग्विजय सिंह ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि मानवाधिकारों से जुड़ा हुआ है. उन्होंने केंद्र सरकार से भी अपील की कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाए. भाजपा का पलटवार: ‘भूल से 10 साल मुख्यमंत्री रहे’ दिग्विजय सिंह के इस बयान पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह “भूल से 10 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे” और आज वे यह तय नहीं कर पा रहे कि वे हिंदुस्तान के नागरिक हैं या पाकिस्तान के एजेंट. आतंकवाद से जोड़ते हुए लगाए गंभीर आरोप रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकियों ने दिग्विजय सिंह को “सुपारी” दे रखी है और उन्हें अपना प्रवक्ता बना रखा है. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह का बयान देशविरोधी ताकतों को बल देता है और अंतरराष्ट्रीय इस्लामी आतंकवाद को नैरेटिव मजबूत करने में मदद करता है. आतंकियों का साथ दिया’ का आरोप रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में आतंकियों का समर्थन किया और जब मौका मिला, उन्हें सम्मानित भी किया. उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकवाद का समर्थन करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि हिंदुस्तान की जनता सब जानती है और समय आने पर जवाब भी देती है. मानवाधिकार बनाम देशहित की बहस इस पूरे घटनाक्रम ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर बहस को दो ध्रुवों में बांट दिया है. कांग्रेस इसे मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इसे देशविरोधी सोच और आतंकवाद को परोक्ष समर्थन बताकर हमलावर है.

बीजेपी के निशाने पर प्रियंका गांधी, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने किया जवाबी हमला

 नई दिल्ली बांग्लादेश में एक हिंदू दीपू चंद्र दास की भीड़ ने ईश निंदा के कथित आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इस मुद्दे पर देशभर में प्रोटेस्ट हो रहे हैं. इसे लेकर सियासत भी गर्मा गई है. केंद्र की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने विपक्षी कांग्रेस और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर निशाना साधा है. बीजेपी का आरोप है कि प्रियंका गांधी केवल गाजा पर ही बोलती हैं. बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति अनदेखा करती हैं. इसे लेकर अब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पलटवार किया है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पिछली बार बांग्लादेश के अंदर जो हो रहा था, उस पर सबसे ज्यादा बोलने का काम प्रियंका गांधी ने किया. उन्होंने आगे कहा कि प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री बनाइए न, फिर देखिए कैसे जवाब देती हैं इंदिरा गांधी की तरह. इमरान मसूद ने कहा कि इंदिरा गांधी पाकिस्तान के दो टुकड़े कर के आई थीं न, ऐसे ही प्रियंका गांधी भी जवाब देंगी. उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी ऐसा इलाज करेंगी कि ये (बांग्लादेश) भारत विरोधी अड्डा नहीं बन पाएगा. प्रियंका गांधी अगर प्रधानमंत्री बन गईं, तो राहुल गांधी क्या करेंगे? इस सवाल पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की टोन बदल गई. उन्होंने जवाब में कहा कि राहुल गांधी भी वही करेंगे. इमरान मसूद ने कहा कि ये इंदिरा गांधी के पोता-पोती हैं. ये (राहुल गांधी और प्रियंका गांधी) एक चेहरे के ऊपर ही दो आंखें हैं. इनको अलग-अलग नहीं देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी हमारे नेता हैं, वह प्रियंका गांधी के भी नेता हैं. इमरान मसूद ने यह भी स्पष्ट किया कि कौन क्या रहेगा, यह पार्टी देखेगी. मैं तो छोटा सा सिपाही हूं. उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वह जब असम और बंगाल जाते हैं, तब चुनाव की बात करते हैं. अपना एजेंडा चलाने की कोशिश करते हैं. इमरान मसूद ने कहा कि बांग्लादेश से जब हिंदू भागकर आता है, तब हमारी सीमाएं बंद हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत विरोधी अड्डा बनता जा रहा है. यह बहुत ही दुखद है. इमरान मसूद ने कहा कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी को सब लोग जानते हैं. इनके हाथ में जब कमान होगी, पूरी दुनिया देखेगी.

इंडिगो एयरलाइन को बीजेपी नेता नाजिया खान की दो टूक— ‘कठमुल्लों के आगे झुको मत’, चुनौती से गरमाई राजनीति

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक सेल की नेता नाजिया इलाही खान ने आरोप लगाया है कि मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से निकलते समय इंडिगो के कर्मचारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने इंडिगो के मालिक पर हमला करते हुए कहा कि इंडिगो का रवैया हर मामले में दोहरा रहता है। उन्होंने कहा कि अगर हिम्मत है तो इंडिगो उन्हें ब्लैकलिस्ट करके दिखाए। उन्होंने इंडिगो पर मुस्लिमों और पाकिस्तान का समर्थन करने का भी आरोप लगाया है। खान ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस घटना जानकारी देते हुए एक वीडियो क्लिप पोस्ट की। इसमें वह हवाई अड्डे के टर्मिनल पर एयरलाइन कर्मचारियों के साथ बहस करती दिख रही हैं। उन्होंने बताया कि दुर्व्यवहार चेक-इन काउंटर से शुरू हुआ और बोर्डिंग प्रक्रिया तक जारी रहा। खान ने कहा कि वह किसी भी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं। नाजिया इलाही खान ने कहा, इंडिगो के मालिक को भारत और पाकिस्तान दोनों के मुस्लिम समर्थकों की बात सुननी चाहिए और मैं चुप नहीं रहने वाली हूं। उन्होंने कहा कि जब भी इंडिगो के उम्माह कर्मचारी अपनी जिहादी मानसिकता का प्रदर्शन करेंगे, तब मैं उनके हिजाब उतार दूंगी। यह मेरी चुनौती है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन मुस्लिम कर्मचारियों का पक्ष लेती है। खान ने कहा कि अपना बयान डिलीट करने के लिए उन्हें धमकी दी जा रही है। एक्स पर साझा किए गए पोस्ट में उन्होंने कहा, अब मुझे समझ में आने लगा है कि इंडिगो का संचालन कैसे होता है और इसके मुस्लिमों के साथ कितने गहरे संबंध हैं। इंडिगो अब अपने मुस्लिम समर्थकों की बात ही सुने और मुझे ब्लैकलिस्ट कर दे। इंडिगो बड़ी संख्या में मुस्लिम कर्मचारियों की भर्ती करता है। इंडिगो एयरलाइन या तो उन्हें कंट्रोल कर ले या फिर उनकी भर्ती बंद कर दे। उन्होंने कहा, मैंने जैसे ही इंडोगो की तीन मुसलमानों पर बोला, सोशल मीडिया पर मुझ सुअरों की झुंड ने घेरना शुरू कर दिया। इंडिगो को टैग करके कठमुल्लों ने कहा कि नाजिया को इंडिगो से ब्लैकलिस्ट कर दो। मैं भी कह रही हूं इंडिगो से कि मुझे ब्लैकलिस्ट कर दो। क्योंकि अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो जितनी बार मैं इंडिगो से यात्रा करूंगी और मुसलमानों कि जिहादी मानसिकता सामने आएगी, उतनी बार मैं वीडियो बनाकर पोस्ट करूंगी। अगर हमें पाकिस्तान से धमकियां आती हैं तो हम इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। खान ने तीन एयरलाइन कर्मचारियों का नाम लेते हुए आरोप लगाया था कि यात्रा के विभिन्न चरणों में कर्मचारियों ने बार-बार और जानबूझकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने बताया कि वह आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रा कर रही थीं। यह वीडियो वायरल हो गया और इस पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस टिप्पणी से बहस छिड़ गयी है। इसमें यूजर्स ने एयरलाइन स्टाफ के कथित बर्ताव और बातचीत में इस्तेमाल की गई भाषा दोनों पर अलग-अलग राय व्यक्त की है। खान ने आरोप लगाया है कि उन्हें उनकी राजनीतिक पहचान और देशभक्ति के कारण निशाना बनाया गया है। उन्होंने एयरलाइन की आंतरिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाया और जवाबदेही की मांग की और कहा कि गलती साबित हुई तो सिर्फ माफी पर्याप्त नहीं होगी। इंडिगो की तरफ से खान के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अधिकारियों ने भी इस घटना के संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज होने की पुष्टि नहीं की है।  

राज्यसभा और विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में हलचल बढ़ने की संभावना

नई दिल्ली आने वाला साल 2026 चुनावी हलचल से भरा होने वाला है। 2026 में संसद के ऊपरी सदन में भी बड़ा परिवर्तन हो सकता है। अगले साल जहां पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु औऱ असम में विधानसभा के चुनाव होने हैं तो वहीं राज्यसभा में भी लगभग 75 सीटों पर चुनाव होने हैं। ये सीटें अप्रैल, जून और नवंबर में खाली होने वाली हैं। इसके बाद देखना होगा कि राज्यसभा में एनडीए और इंडिया गठबंधन का क्या समीकरण बनता है। आने वाले समय में बिहार से पांच और उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटें खाली हो जाएंगी। इसके अलावा महाराष्ट्र, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल औऱ तमिलनाडु के साथ कई पूर्वोत्तर के राज्यों की सीटें भी खाली होने वाली हैं। इन दिग्गज नेताओं को खत्म हो रहा कार्यकाल 2026 में राज्यसभा चुनाव का बड़ा महत्व होने वाला है। इससे ही संसद का आगे का लेजिस्लेटिव अजेंडा तय होने वाला है। 2026 में जिन दिग्गज नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, दिग्वजिय सिंह, शरद पवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन शामिल हैं। यह अभी नहीं कहा जा सकता है कि इनमें से कितने नेताओँ की सदन में वापसी होगी और कितने की जगह नए चेहरे ले लेंगे। अप्रैल से जून तक और फिर नवंबर में बिहार से पांच सीटें खाली हो जाएंगी। ये सीटें अप्रैल में ही खालीहोंगी। इसके अलावा झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल औ तमिलनाडु के सांसदों का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है। नवंबर में उत्तर प्रदेश की सीटें भी खाली होंगी। इसके अलावा मध्य प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेशष मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की भी कई सीटें खाली होने वाली हैं। फिलहाल राज्यसभा में एनडीए की 129 सीटें हैं। वहीं विपक्षी दलों के केवल 78 सांसद राज्यसभा में हैं। 2026 में होने वाले चुनाव राज्यसभा में ताकत को बैलेंस भी कर सकते हैं। इसके अलावा विधानसभा के चुनाव भी राजनीतिक दलों की रणनीति में परिवर्तन करेंगे। बिहार की पांचों सीटें 9 अप्रैल को खाली हो जाएंगी। आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता, अमरेंद्र धारी सिंह, जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर के साथ उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। बिहार विधानसभा में एनडीए की ताबड़तोड़ जीत के बाद संभव है कि बीजेपी और जेडूयी दो-दो सीटों पर काबिज हो जाए। उपेंद्र कुशवाहा के अलावा कुछ नेताओं की सदन में वापसी भी हो सकती है। महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए अप्रैल में चुनाव हो सकते हैं। शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

BMC चुनाव से पहले ठाकरे बंधुओं की रणनीति उलझी: गठबंधन की घोषणा टली, बढ़ी सियासी चुनौती

मुंबई  महाराष्ट्र में 288 नगर परिषद और नगर पंचायत के चुनाव नतीजे 'ब्रांड ठाकरे' के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है. यही वजह है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे आपसी दुश्मनी भुलाकर एक साथ मिलकर बीएमसी सहित 29 नगर निगम के चुनाव लड़ने का फैसला किया है, लेकिन अचानक एक मोड़ आ गया. उद्धव की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की मनसे के गठबंधन का औपचारिक ऐलान मंगलवार को टल गया है. उद्धव ठाकरे भले ही 2019 में बीजेपी से अलग होकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो गए थे, लेकिन शिवसेना और 'ब्रांड ठाकरे' को बचाकर नहीं रख पाए. एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर उद्धव ठाकरे की सारी सियासत खत्म कर दी है. पहले विधानसभा की सियासी बाजी अपने नाम की और अब नगर परिषद व नगर पंचायत के चुनाव जीतकर उद्धव के लिए सियासी संकट खड़ा कर दिया है. महाराष्ट्र के 246 नगर परिषद और 42 नगर पंचायत के लिए हुए चुनाव में 70 प्रतिशत से अधिक नगर अध्यक्ष बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति के जीतकर आए हैं. उद्धव ठाकरे की शिवसेना सिंगल डिजिट में सीमित रह गई तो राज ठाकरे की पार्टी का खाता नहीं खुला. अब बीएमसी सहित 29 नगर निगम का चुनाव 'ठाकरे ब्रांड' का फाइनल इम्तिहान उद्धव के लिए बन गया है. मुंबई के बीएमसी पर ठाकरे परिवार का करीब 30 साल कब्जा है, जिसको बचाने के लिए 20 साल का सियासी दुश्मनी को भुलाकर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने हाथ मिलाया है, लेकिन लगता है कि उसमें ग्रहण लग गया है.  बीएमसी चुनाव के लिए नामांकन शुरू बीएमसी सहित राज्य की 29 नगर निगम चुनाव के लिए मंगलवार से अधिसूचना जारी हो रही जिसके साथ नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. नामांकन पत्र भरने की अंतिम तारीख 30 दिसंबर है. इसके बाद 31 दिसंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी जबकि 2 जनवरी 2026 तक नाम वापस लेने की अंतिम तारीख है. इसके बाद चुनाव चिन्ह का आवंटन किया जाएगा. महाराष्ट्र में बीएमसी सहित सभी 29 नगर निगम के कुल 2869 पार्षद सीटों पर 15 जनवरी को मतदान होगा जबकि नतीजे 16 जनवरी को आएंगे. बीएमसी के अलावा, जिन नगर निगम में चुनाव है, उसमें नवी मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर, वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, कोल्हापुर, उल्हासनगर, पिंपरी-चिंचवड, सोलापुर, अमरावती, अकोला, लातूर, परभणी, चंद्रपुर, भिवंडी-निजामपुर, मालेगांव, पनवेल, मीरा-भायंदर, नांदेड़-वाघाला, सांगली-मिराज, कुपवाड, जलगांव, धुले, अहिल्यानगर, इचलकरंजी और जालना शामिल हैं. 'ठाकरे ब्रदर्स' के बीच गठबंधन पर सस्पेंस बीजेपी ने बीएमसी और बाकी के नगर निगम चुनाव एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ मिलकर लड़ने का फैसला किया है. बीजेपी ने अजित पवार के साथ 'फ्रेंडली फाइट' करने की प्लानिंग की है. महायुति की रणनीति को देखते हुए 'ठाकरे ब्रदर्स' ने 20 साल पुरानी राजनीतिक रंजिश को भुलाकर एक साथ आने का फैसला किया ताकि बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना की जोड़ी से दो-दो हाथ कर सकें. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच बीएमसी सहित राज्य के बाकी नगर निगम चुनाव के लिए सीटों का बंटवारे पर सहमति बन गई थी. ऐसे में माना जा रहा था कि मंगलवार को शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के गठबंधन का औपचारिक ऐलान होना होगा.  शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के बीच गठबंधन का आधिकारिक ऐलान वर्ली स्थित एनएससीआई डोम में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए किए जाने की संभावना खी. इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा थे, लेकिन अचानक कैंसिल हो गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्या वजह है कि प्रेस कॉफ्रेंस को टालना पड़ा. सीट शेयरिंग तय हो गई थी, फिर क्या हुआ एमएनएस नेता नितिन सरदेसाई और बाला नांदगांवकर सोमवार देर शाम ‘मातोश्री’ पहुंचे, जहां उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर गठबंधन को अंतिम रूप दिया गया. सूत्रों के अनुसार, बीएमसी की कुल 227 सीटों में से शिवसेना (यूबीटी) 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं, राज ठाकरे की एमएनएस 60 से 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. इसके अलावा बची सीटें एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) और अन्य छोटे सहयोगी दलों को दिए जाने की संभावना है.  इस तरह सीट शेयरिंग का फॉर्मूला बन रहा था, लेकिन माना जा रहा है कि कांग्रेस को महाविकास अघाड़ी में शामिल करने को लेकर सहमति बनाई जा रही है. इसीलिए शिवसेना ने मंगलवार को होने वाली प्रेस कॉफ्रेंस को टाल दिया है.  कांग्रेस को साधने में जुटे संजय राउत महायुति के नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव में प्रदर्शन को देकते हुए उद्धव ठाकरे की शिवसेना अपना आखिरी किला बचाए रखने की हरसंभव कवायद में जुट गई है. एक तरफ राज ठाकरे के साथ हाथ मिलाने की प्लानिंग है तो दूसरी तरफ कांग्रेस को साथ लेने की कोशिश तेज कर दी है. शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से फोन पर बात की और आगामी बीएमसी चुनावों के लिए संयुक्त रणनीति पर चर्चा की. संजय राउत लगातार राहुल गांधी के संपर्क में भी हैं, ताकि कांग्रेस को महा विकास आघाड़ी में बनाए रखा जा सके. शरद पवार की एनसीपी (एसपी) भी सभी दलों को एकजुट रखने के लिए सक्रिय मध्यस्थता कर रही है. विपक्षी गठबंधन में शामिल दलों का मानना है कि एकजुट रहकर ही महायुति को चुनौती दी जा सकती है. हालांकि, संजय राउत की असल चुनौती राज ठाकरे की मनसे के साथ कांग्रेस के साथ संबंधों को संतुलित करने की है. कांग्रेस ने राज ठाकरे के साथ मंच साझा करने से साफ इनकार किया है, क्योंकि मनसे की उत्तर भारतीयों और मुस्लिमों के खिलाफ आक्रामक छवि कांग्रेस के वैचारिक आधार से टकराती है. कांग्रेस को साथ लेने का रास्ता बनाया जा रहा है, जिसके चलते मंगलवार को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की होने वाली संयुक्त प्रेस कॉफ्रेंस को टाल दिया गया है.  उद्धव के लिए आखिरी किला बचाने का चैलेंज महाराष्ट्र की राजनीति में बीएमसी का नियंत्रण राज्य की सत्ता के समान माना जाता है. बीजेपी की पूरी कोशिश बीएमसी से ठाकरे परिवार के वर्चस्व को खत्म करना चाहती है, जबकि उद्धव ठाकरे के लिए यह चुनाव अपनी साख बचाने का आखिरी मौका है. महाराष्ट्र में पिछले पांच सालों के सियासी संग्राम में सबसे ज्यादा नुकसान तो ब्रांड ठाकरे को हुआ है, जिसके चलते … Read more

राज्यसभा की 75 सीटों के गणित ने बढ़ाई शरद पवार और उपेंद्र कुशवाहा की वापसी की चुनौती

नई दिल्ली साल 2025 अब अलविदा हो रहा है और 2026 में दस्तक के लिए तैयार हैं. भारत के सियासी परिदृश्य के लिहाज से 2026 को चुनावी साल के तौर पर देखा जा रहा है. दक्षिण भारत में केरल और तमिलनाडु से लेकर पूर्वोत्तर के असम और बंगाल सहित पांच राज्यो में विधानसभा चुनाव होंगे. इस दौरान उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक में राज्यसभा चुनाव की असल इम्तिहान होगा, जो संसद के उच्च सदन की तस्वीर काफी बदल जाएगी? साल 2026 में अप्रैल से लेकर जून और नंबर तक तकरीबन 75 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने है, जिसमें बिहार की पांच और उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीट है. 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनाव एनडीए और विपक्षी दलों के 'इंडिया गठबंधन' दोनों के लिए अहम माने जा रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, दिग्विजय सिंह, शरद पवार और कई केंद्रीय मंत्री जैसे हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा, रवनीत सिंह बिट्टू, जॉर्ज कुरियन जैसे दिग्गज नेताओं के राज्यसभा का कार्यकाल 2026 में खत्म हो जाएगा. ऐसे में देखना है कि किस दिग्गज नेता की वापसी होती है और कौन से नए चेहरे की संसद में एंट्री होती है? 2026 में 75 राज्यसभा सीटें हो रही खाली साल 2026 में अप्रैल से लेकर जून और नवंबर तक करीब 75 राज्यसभा की सीटें खाली हो रही है. महाराष्ट्र की 7 राज्यसभा सीटें अप्रैल में खाली हो रही है तो बिहार की पांच सीटें भी अप्रैल में खाली हो जाएंगी. इसके अलावा झारखंड की दो सीटें, आंध्र प्रदेश की 4, झारखंड की 2, तेलंगाना की एक, पश्चिम बंगाल की 5, तमिलनाडु की 6 राज्यसभा सीट खाली हो रही है. उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटें है, जो नवंबर तक खाली होंगी. इसके अलावा मध्य प्रदेश से लेकर असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर और मिजोरम जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों से चुनकर आए राज्यसभा का भी कार्यकाल समाप्त हो रहा है. उत्तराखंड और हिमाचल की भी एक-एक राज्यसभा सीट खाली हो रही है. इसके अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सीटों का भी कार्यकाल समाप्त हो रहा. राज्यसभा में एनडीए के पास 129 सीटें हैं जबकि विपक्ष के पास 78 सीटें हैं. इसलिए ये चुनाव उच्च सदन में शक्ति संतुलन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. इन चुनावों से पता चलेगा कि राज्यसभा में किस पार्टी का दबदबा रहेगा. बिहार में किसकी होगी उच्च सदन से छुट्टी बिहार की पांच राज्यसभा सीटें 9 अप्रैल 2026 को खाली हो रही हैं, जिसके चलते मार्च तक चुनाव करा लिए जाएंगे. बिहार से राज्यसभा के जिन 5 नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह), जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राज्यसभा चुनाव के लिए भी सीन बदल गया है. एक राज्यसभा सीट के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. इस लिहाज से बीजेपी और जेडीयू दो-दो सीटें जीतने की हैसियत में है तो एक सीट विपक्ष के खाते में जा सकती है. बीजेपी से राज्यसभा के लिए कई दावेदार है. ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा की राज्यसभा में वापसी पर संकट गहरा सकता है. महाराष्ट्र में किसे मिलेगा राज्यसभा का मौका महाराष्ट्र में सात सीटें अप्रैल 2026 में खाली हो रही है. शरद पवार (NCP-SP), प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना UBT) और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले जैसे बड़े नेताओं के उच्च सदन का कार्यकाल खत्म हो रहा है. 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद सीन बदल गया है. शरद पवार और प्रियंका चतुर्वेदी की संसद में वापसी पर ग्रहण लग सकता है. महाराष्ट्र में महायुति आसानी से 7 सीटें जीत लेगी और विपक्ष के खाते में सिर्फ एक सीट जा सकती है. ऐसे में कांग्रेस क्या खुद अपने नेता को राज्यसभा भेजी या फिर शरद पवार या उद्धव ठाकरे की पार्टी को भेजने के लिए रजामंद होगी. महाविकास अघाड़ी में सबसे ज्यादा विधायक कांग्रेस के पास है. यही वजह है कि आगामी राज्यसभा चुनाव काफी रोचक होने जा रहा है. खड़गे और देवगौड़ा में कौन करेगा वापसी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कर्नाटक से राज्यसभा सदस्य हैं. उनका कार्यकाल 25 जून 2026 को खत्म हो रहा है. मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी रिटायर होंगे, वे भी कर्नाटक से ही हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 25 जून 2026 को रिटायर होंगे। एचडी देवेगौड़ा और हरिवंश 9 अप्रैल 2026 को रिटायर होंगे. कर्नाटक में चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं, जिसमें से तीन सीटें कांग्रेस जीत सकती है. विपक्ष के खाते में सिर्फ एक सीट आनी है. बीजेपी अपने किसी नेता को संसद भेजेगी या फिर जेडीएस को समर्थक करेगी. यूपी में 10 सीटों पर राज्यसभा चुनाव उत्तर प्रदेश से मोदी सरकार के दो मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा भी रिटायर होने वाले हैं. उनका कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को खत्म हो रहा है. इनके साथ ही उत्तर प्रदेश से 8 और सदस्य भी रिटायर होंगे. इन 10 सीटों में 8 सीटें बीजेपी और एक सीट सपा और एक बसपा के पास है. 2026 में रिटायर होने वाले राज्यसभा सांसदों में बृजलाल, सीमा द्विवेदी, चंद्रप्रभा उर्फ गीता, हरदीप सिंह पुरी, रामजी, दिनेश शर्मा, नीरज शेखर, अरुण सिंह और बीएल वर्मा का नाम शामिल हैं. सपा से प्रोफेसर रामगोपाल यादव हैं. यूपी विधानसभा की मौजूदा संख्याबल की बात करें तो बीजेपी के 258, सपा के 103, अपना दल के 13, रालोद के 9, निषाद पार्टी के 5, सुभासपा के 6, कांग्रेस के 2, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2 बसपा 1 और सपा के बागियों कुल 3 सदस्य हैं. यानी कुल 402 सदस्यों की संख्या पूरी है और 1 सीट रिक्त है. इस आधार पर एक राज्यसभा सीट के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है.इस गणित के लिहाज से सपा 2 और बीजेपी 8 राज्यसभा सीटें जीत सकती है. बसपा राज्यसभा में जीरो पर सिमट सकती है. जाने किसकी होगी वापसी और किसकी नहीं कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हुए रवनीत सिंह बिट्टू भी रिटायर होने वाले हैं. उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी का दामन थाम लिया था. पंजाब के लुधियाना से चुनाव … Read more

NDA का दबदबा महाराष्ट्र निकाय चुनाव में, बीजेपी का प्रत्याशी 1 वोट से हारा

मुंबई  महाराष्ट्र निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (NDA) को बंपर जीत हासिल हुई है। 288 सीटों (246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों) के रिजल्ट में महायुति को 207 सीटों पर जीत मिली। रविवार रात तक स्टेट इलेक्शन कमीशन ने फाइनल रिजल्ट जारी कर दिए। गठबंधन में भाजपा 117 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 53 सीटें, NCP अजित को 37 सीटें मिलीं। वहीं, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन 44 सीटों तक सीमित रहा। इसमें कांग्रेस कांग्रेस को 28 सीटें मिलीं, जबकि शरद पवार की NCP को केवल 7 और शिवसेना (UBT) को 9 सीटें हासिल हुईं। 32 सीटें अन्य को मिली हैं। गढ़चिरौली में वार्ड नंबर 4 में बीजेपी उम्मीदवार संजय मंडवगड़े केवल एक वोट से चुनाव हार गए। लास्ट काउंटिंग के बाद उन्हें 716 वोट मिले। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी श्रीकांत देशमुख को 717 वोट मिले। दरअसल, महाराष्ट्र की 288 नगर परिषदों और नगर पंचायत के लिए दो चरणों में चुनाव हुआ था। पहले चरण में 2 दिसंबर को 263 निकायों में मतदान हुआ था। बाकी 23 नगर परिषदों और कुछ खाली पदों पर 20 दिसंबर को वोटिंग हुई थी। धुले की डोंडाइचा नगर परिषद और सोलापुर की उंगर नगर पंचायत में अध्यक्ष और सदस्यों का चुनाव निर्विरोध हुआ था। जलगांव जिले की जामनेर नगर परिषद में भी अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला नहीं हुआ था। तीनों पदों पर भाजपा ने निर्विरोध जीत हासिल की। पीएम ने बधाई दी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महायुति को समर्थन देने के लिए महाराष्ट्र के मतदाताओं का धन्यवाद किया और इसे विकास पर जनता के भरोसे से जोड़ा। गृहमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को बधाई दी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परिणामों को सुशासन और विकास की राजनीति की जीत बताया। BJP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने इसे ऐतिहासिक सफलता कहा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, अजित पवार और प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण को बधाई दी। लोहा नगर परिषद में एक ही परिवार के 6 लोग हारे लोहा नगर परिषद में बीजेपी की फैमिली पैक रणनीति फेल हो गई। यहां अध्यक्ष पद के लिए उसके उम्मीदवार गजानन सूर्यवंशी और उनके पांच रिश्तेदार हार गए। CM फडनवीस बोले- भाजपा पार्षद 1602 से बढ़कर 3325 हुए वहीं, निकाय चुनाव में महायुति की जीत पर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा- नगरपालिका और नगर पंचायत चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और महायुति को मिली जबरदस्त सफलता के लिए मैं महाराष्ट्र की जनता का आभार व्यक्त करता हूं। 2017 में 94 नगरपालिकाओं की तुलना में इस बार हमने 129 नगरपालिकाओं (45 प्रतिशत) में जीत हासिल की है। फडणवीस ने कहा कि महायुति के तौर पर हमने 215 नगरपालिकाएं (74.65 प्रतिशत) जीती हैं। 2017 में भाजपा के 1602 पार्षद थे। अब बढ़कर 3325 हो गए हैं। पार्षद की कुल संख्या 6952 है, इनमें से महायुति के 4331 पार्षद जीते हैं। इस बीच आइए आपको महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव की 5 पांच बातें बताते हैं… महायुति गठबंधन को मिली शानदार जीत महाराष्ट्र निकाय चुनाव में महायुति गठबंधन को शानदार जीत मिली है। बता दें कि इस गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल हैं। महायुति गठबंधन ने नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनावों में दबदबा बनाया और 288 नगर परिषद अध्यक्ष पदों में से 207 पर जीत हासिल की। वहीं, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) सिर्फ 44 सीटों तक ही सीमित रह गई, जिससे जमीनी स्तर पर सत्ताधारी गठबंधन की संगठनात्मक बढ़त साफ दिखती है। सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी BJP विधानसभा चुनाव के जैसे ही इस स्थानीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इस स्थानीय निकाय निकाय चुनाव में बीजेपी ने 117 नगर पालिका अध्यक्ष पदों और 3,300 से ज़्यादा पार्षद सीटों के साथ शानदार प्रदर्शन किया। किस मुद्दे का रहा असर गौरतलब है कि बीजेपी और उसके सहयोगियों ने बार-बार नतीजों को विकास-केंद्रित अभियान के समर्थन के तौर पर पेश किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नतीजे जन-केंद्रित विकास में जनता के भरोसे को दिखाते हैं, जबकि फडणवीस ने इस बात पर जोर दिया कि गठबंधन ने निजी हमलों से बचते हुए शासन, इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरों और कस्बों के लिए भविष्य की योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया। MVA ने मानी हार कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और NCP (SP) वाली महा विकास अघाड़ी ने हार स्वीकार कर ली, लेकिन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं थे, जबकि शिवसेना (UBT) नेताओं ने पैसे की ताकत और EVM में हेरफेर का आरोप लगाया, इन दावों को सत्ताधारी गठबंधन ने खारिज कर दिया। अजित पवार की एनसीपी ने प्रमुख गढ़ों में कब्जा रखा बरकरार विधानसभा चुनाव के तरह ही, महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में भी अजित पवार के नेतृत्व वाली NCP ने पुणे जिले और बारामती में खास ताकत दिखाई। एनसीपी ने ज्यादातर सीटों पर जीत हासिल की। यह प्रदर्शन राज्य स्तर पर गठबंधन बदलने के बावजूद, छोटे शहरी केंद्रों पर पवार की पकड़ को मजबूत करता है।   संजय राउत बोले- चुनाव में पैसों की बारिश हुई शिवसेना (उद्धव) सांसद संजय राउत ने कहा- BJP को 120-125 सीटें मिलीं, शिंदे ग्रुप को 54 मिलीं और अजित पवार को 40-42 सीटें मिलीं। ये नंबर असेंबली वाले ही हैं, है ना? वही मशीन, वही सेटिंग और वही पैसा। यही हमारी डेमोक्रेसी है। नंबरों में बिल्कुल भी बदलाव नहीं हुआ है। BJP ने मशीनें उसी तरह सेट की हैं। इसीलिए वही नंबर दिख रहे हैं। उन्हें कम से कम नंबर तो बदलने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि इस इलेक्शन में पैसों की बारिश हुई। उस बारिश से कौन बचेगा? हमारे उगाए और बोए हुए खेत भी उसके आगे झुक गए हैं। BJP और शिंदे ग्रुप 30 करोड़ रुपए के बजट वाली म्युनिसिपैलिटी पर 150 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। राउत ने कहा कि अभी तक हमने म्युनिसिपल इलेक्शन में कैंपेनिंग के लिए हेलिकॉप्टर और प्राइवेट प्लेन का इस्तेमाल नहीं किया है। हमने ये इलेक्शन वर्कर्स पर छोड़ दिए थे, लेकिन यहां तो … Read more