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सीएम यादव और केंद्रीय मंत्री शिवराज की दिल्ली बैठक, वैदिक घड़ी के साथ उठे सवाल: सामान्य मुलाकात या नई रणनीति?

भोपाल  केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अचानक प्रदेश कार्यालय पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की। इसके बाद दिल्ली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें वैदिक घड़ी भेंट स्वरूप दी। दोनों नेताओं ने अपनी मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर मुलाकात की तस्वीर शेयर कर लिखा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर उन्हें वैदिक घड़ी भेंट की। वहीं, केंद्रीय मंत्री चौहान ने इस मुलाकात को सौहार्दपूर्ण बताते हुए डॉ. यादव का आभार जताया।  बता दें मध्य प्रदेश में प्रदेश कार्यकारिणी और निगम मंडलों में लंबे समय से अटकी नियुक्तियां होनी है। ऐसे में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की साथ में हो रही मुलाकातों को केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा है। प्रदेश में निगम मंडलों की नियुक्तियों पर जल्द होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बता दें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में प्रदेश कार्यालय में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी चर्चा की थी।   मुलाकात है सामान्य या पक रही नई खिचड़ी मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों हलचल तेज है। भोपाल से दिल्ली तक नई खिचड़की को लेकर अटकले हैं। बीते एक सप्ताह से प्रदेश के अलग-अलग कद्दावर नेताओं से सीएम मोहन यादव की मुलाकात हो रही है। इन मुलाकातों को सामान्य बताया जा रहा है लेकिन जानकारों का कहना है कि यह मुलाकात सामान्य नहीं है। ये सारी कवायद बोर्ड और निगमों में नियुक्ति को लेकर चल रही है। शिवराज सिंह चौहान से दो बार की मुलाकात दरअसल, सीएम मोहन यादव ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से दो बार मुलाकात की है। पहले भोपाल में दोनों की सौजन्य मुलाकात हुई थी। इसके बाद दिल्ली में भी शिवराज सिंह चौहान के आवास पर जाकर सीएम मोहन यादव ने उनसे मुलाकात की है। मुलाकात के दौरान सीएम मोहन यादव ने उन्हें वैदिक घड़ी भेंट की है। सरकार की तरफ से इस मुलाकात को सामान्य ही बताया गया है। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष से भी मिले यही नहीं, एमपी में बीते एक सप्ताह से मेल और मुलाकातों का दौर चल रहा है। इससे पहले सीएम मोहन यादव ने भोपाल में विधानसभा अध्यक्ष के घर गए थे। उनसे उनकी मुलाकात हुई थी। इस दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी। सबको साधने की कोशिश मध्य प्रदेश में बोर्ड और निगम अध्यक्षों के पद खाली हैं। इन जगहों पर सियासी नियुक्तियां होनी हैं। कई बड़े नेता भी इसके इंतजार में बैठे हैं। अब अटकलें हैं कि जल्द ही इन जगहों पर नियुक्तियां होंगी। इन्हीं नियुक्तियों को लेकर सारी कवायद चल रही है। सीएम मोहन यादव और संगठन की कोशिश है कि सभी खेमे के लोगों को साधा जाए। ये सारी कवायदें इसी को लेकर है। सबकी सहमति मिलने के बाद ही फाइनल सूची जारी की जाएगी। संगठन के साथ भी चल रहीं बातें इन अटकलों के बीच बीते दिनों सीएम हाउस में पार्टी के तमाम सीनियर नेताओं की बैठक हुई थी। इस बैठक में सरकार और संगठन के तमाम सीनियर नेता मौजूद थे। कहा जा रहा है कि इस मीटिंग में भी नियुक्तियों को लेकर ही चर्चा हुई थी। साथ ही यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि मोहन कैबिनेट का भी विस्तार हो सकता है। कुछ नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है।

BJP में भारी उत्साह, बिहार चुनाव के लिए 5000+ उम्मीदवारों ने दाखिला भरा

 पटना बिहार विधानसभा का चुनाव मुहाने पर आ चुका है। ऐसे में चुनाव लड़ने की इच्छा पाले लोगों के दिलों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। टिकट की चाह में लोग पार्टी कार्यालयों में उमड़ रहे हैं। ऐसे में चुनाव लड़ने के लिए भाजपा में पांच हजार से अधिक लोगों के आवेदन उनके बायोडाटा के साथ आ चुके हैं। यह सिलसिला अभी जारी है। विभिन्न स्रोतों से सभी अपना आवेदन जमा कर रहे हैं। सबसे अधिक आवेदन पार्टी कार्यालय में पहुंचकर लोग जमा कर रहे हैं। वहीं, कई वरिष्ठ नेताओं को भी अपना बायोडाटा दे रहे हैं। आवेदकों में सर्वाधिक संख्या युवाओं की है, जिनकी उम्र 35 से 45 वर्ष तक की है। इनमें पार्टी से जुड़े नेता, कार्यकर्ता, पूर्व विधायक, ग्राम पंचायत, नगर निकाय के प्रतिनिधि तथा समाजसेवी शामिल हैं। दरअसल, बिहार शुरू से संवेदनशील और जागरूक राजनीतिक राज्य के रूप में जाना जाता रहा है। चुनाव लड़ने की इच्छा से आगे आए युवाओं का हुजूम इसका ताजा प्रमाण भी दे रहा है। दिलचस्प बात यह है कि उन विधानसभा क्षेत्रों से अधिक आवेदन मिले हैं, जहां के विधायक उम्रदराज हैं। यहां के दावेदारों को इस बात का अंदाजा है कि वर्तमान विधायक का टिकट कट सकता है। पार्टी में अंदरखाने भी इस बात की चर्चा जोरों पर है। अपना बायोडाटा जमा करने के साथ ही आवेदक नेताओं से मिलकर अपना दावा भी पेश कर रहे हैं। पार्टी का लंबे समय तक सेवा करने का हवाला दे रहे हैं। वहीं, कई ऐसे हैं जिनकी उम्र अब 70 वर्ष के आस-पास है, लेकिन कभी चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं मिला सका है। अब, वे अपने परिवार के किसी सदस्य के टिकट के लिए दावा कर रहे हैं। वहीं, कई नेता-कार्यकर्ता यह भी धमकी दे रहे हैं कि अगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो वे जनसुराज में चले जाएंगे। अथवा किसी दूसरे पार्टी से जाकर चुनाव लड़ जाएंगे। इससे भाजपा को नुकसान पहुंच सकता है। पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि पटना के क्षेत्रों में कुम्हरार और दानापुर से सबसे अधिक आवेदन बायोडाटा जमा हुए हैं। मालूम हो कि वर्तमान में भाजपा के 80 विधायक हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा 110 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। तब एनडीए में चार दल थे। इस बार एनडीए में पांच दल हैं। इनमें भाजपा, जदयू, लोजपा आर, हम और रालोमो शामिल हैं। ऐसे में एनडीए के तहत भाजपा इस चुनाव में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, यह तो अगले दो सप्ताह में साफ होगा। मगर टिकट के दावेदार एक-एक घटना और हर सूचना पर नजर गड़ाए हुए हैं।  

CWC बैठक में खरगे का बयान: ट्रंप के कदम भारत के लिए चुनौतीपूर्ण

नई दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे  ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों को लेकर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जिनको “मेरे दोस्त” बताकर ढिंढोरा पीटते हैं, वही दोस्त आज भारत को अनेक संकट में डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, "पटना में हो रही कार्य समिति की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। हम ऐसे समय में मिल रहे हैं, जबकि अन्तराष्ट्रीय और राष्ट्रीय, दोनों स्तरों पर भारत एक बेहद चुनौतीपूर्ण और चिंताजनक दौर से गुज़र रहा है।" खरगे ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी मुसीबतें नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की नाकामी और कूटनीतिक विफलता का नतीजा हैं। उन्होंने कटाक्ष किया, प्रधानमंत्री जिनको “मेरे दोस्त” बताकर ढिंढोरा पीटते हैं, वही दोस्त आज भारत को अनेक संकट में डाल रहे हैं। ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में अपने संबोधन में कहा था कि चीन और भारत रूसी तेल खरीद कर यूक्रेन में रूसी युद्ध के "प्राथमिक वित्तपोषक" हैं। ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल की खरीद के लिए भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगाया है, जिससे अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर यह दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाया था।  

निर्मला सप्रे की सदस्यता पर विवाद जारी, 8 अक्टूबर को हाईकोर्ट में फैसला आएगा

सागर  कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता खतरे में है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि सप्रे ने कांग्रेस से जीतने के बाद भाजपा का समर्थन किया। उन्होंने भाजपा के मंच पर प्रचार भी किया। कोर्ट इस मामले की सुनवाई 8 अक्टूबर को करेगा। देखना होगा कि उनकी सदस्यता रहेगी या जाएगी। कांग्रेस के टिकट से जीती थीं निर्मला निर्मला सप्रे 2023 में बीना से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनीं। उमंग सिंघार का कहना है कि सप्रे ने दल बदल विरोधी कानून का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सप्रे ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का मंच साझा किया। उन्होंने भाजपा का दुपट्टा पहनकर प्रचार किया और कांग्रेस के खिलाफ बयान भी दिए। सिंघार ने मांग की है कि उनकी सदस्यता रद्द की जाए। विधानसभा अध्यक्ष से कर चुके शिकायत कांग्रेस पार्टी ने पहले विधानसभा अध्यक्ष को इस बारे में शिकायत की थी। उनका कहना था कि अध्यक्ष ने 90 दिन से ज्यादा समय तक कोई कार्रवाई नहीं की। इसलिए, उन्हें हाई कोर्ट जाना पड़ा। हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने पहले याचिका खारिज कर दी थी। अब जबलपुर बेंच इस मामले की जांच करेगी। अदालत के फैसले पर टिकी नजर कांग्रेस का कहना है कि सप्रे ने खुले तौर पर पार्टी बदल ली है। वहीं, भाजपा इसे 'विचारधारा के समर्थन' का नाम दे रही है। अब यह देखना होगा कि अदालत इसे दलबदल मानती है या नहीं। इस पर कोर्ट का फैसला ही अंतिम होगा।  

अब काफी हुआ! – CM ममता पर कटाक्ष के बाद अभिषेक बनर्जी ने उठाए मोदी-बीजेपी पर बड़े सवाल

कोलकाता  तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अयोध्या मंदिर में राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा राम नवमी से तीन महीने पहले कर दी थी. अभिषेक की यह टिप्पणी दुर्गा पूजा पंडालों को ‘देवी पक्ष’ से पहले खोलने के लिए पश्चिम बंगाल बीजेपी द्वारा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना किए जाने के बीच आई है.तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक ने अपने डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र में संवाददाताओं से बात करते हुए मोदी सरकार पर ‘दोहरी बात कहने की कला में निपुण होने, नोटबंदी की अचानक घोषणा के लिए कोई जवाबदेही नहीं लेने, जिसके कारण कई लोगों की मौत हो गई थी और संघीय व्यवस्था की भावना के विरुद्ध राज्य का बकाया नहीं देने का आरोप लगाया. राम नवमी से पहले प्राण प्रतिष्ठा पर उठाया सवाल पंडालों को देवी पक्ष से पहले खोलने को लेकर विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर, अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘ठीक है, उन्होंने देवी पक्ष की शुरुआत से एक दिन पहले पंडाल खोल दिए और मूर्तियों के पट नहीं खोले. उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री द्वारा राम नवमी से तीन महीने पहले जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर में राम लला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करने के बारे में क्या कहना है? क्या किसी बीजेपी नेता ने लोकसभा चुनाव को देखते हुए उठाए गए उस कदम पर टिप्पणी की है? पश्चिम बंगाल की धनराशि रोकने का आरोप बीजेपी पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए अभिषेक बनर्जी ने सवाल किया कि पश्चिम बंगाल को कितना पैसा दिया गया और राज्य से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों के माध्यम से कितना लिया गया. बीजेपी पर मनरेगा जैसी परियोजनाओं के लिए पश्चिम बंगाल को मिलने वाली धनराशि रोकने का आरोप लगाते हुए उन्होंने मोदी सरकार पर ‘इस मुद्दे पर कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान नहीं करने’ का आरोप लगाया. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों की बात करते हैं, तो उन्हें यह बताना चाहिए कि 69 लाख जॉब कार्ड धारकों को अभी तक केंद्र से पैसा क्यों नहीं मिला है. राज्य ने उनकी मदद के लिए अपने सीमित कोष से संसाधन जुटाए.  

चुनाव आयोग पर घटते भरोसे का दावा, भाजपा-राहुल विवाद पर शरद पवार का हमला

मुंबई  राहुल गांधी बीते कई महीनों से वोटर लिस्ट में धांधली समेत कई आरोप चुनाव आयोग पर लगा रहे हैं। इस मामले में अकसर भाजपा जवाब देती नजर आती है। इसी को लेकर एनसीपी-एसपी के नेता शरद पवार ने कहा है कि इससे तो चुनाव आयोग पर भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि जब भी कांग्रेस सांसद राहुल गांधी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं तो भाजपा नेता नियमित रूप से प्रतिक्रिया देते हैं। इससे चुनाव आयोग पर 'अविश्वास' बढ़ता है। पवार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इन सवालों पर आयोग की ओर से जवाब देने के बजाय भाजपा और उसके नेता प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने कहा, 'लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी जब संसद में यह मुद्दा उठाते हैं तो संबंधित संस्था को इसका संज्ञान लेना चाहिए था। लेकिन हो यह रहा है कि जब गांधी चुनाव आयोग की आलोचना करते हैं तो आयोग जवाब नहीं देता बल्कि भाजपा और उसके नेता प्रतिक्रिया देते हैं।' पवार ने आगे कहा कि चुनाव आयोग की बजाय मुख्यमंत्री और अन्य नेता ऐसे मुद्दों पर जवाब दे रहे हैं, जिससे आयोग के प्रति अविश्वास की भावना बढ़ रही है। ऐसा होना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। राहुल गांधी ने हाल ही में 'वोट चोरी' के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की थी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र को नष्ट करने वालों की रक्षा करने का आरोप लगाया था। गांधी ने कर्नाटक और महाराष्ट्र की दो विधानसभा सीटों के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया था कि वहां मतदाताओं के नाम धोखाधड़ी से हटाए या जोड़े गए हैं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को गलत और निराधार बताया है और कहा है कि 'किसी भी आम नागरिक द्वारा ऑनलाइन वोट डिलीट नहीं किया जा सकता जैसा राहुल गांधी का दावा है।' आयोग ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए केवल उसी बूथ के अन्य मतदाता फॉर्म 7 के जरिए आवेदन कर सकते हैं न कि कोई भी आम नागरिक। राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद विपक्षी दलों में एकजुटता देखी गई है, जिसमें शरद पवार और अन्य नेताओं ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में 'वोट चोरी' के उदाहरण दिए हैं।  

पटना में होगी कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक, 24 सितंबर को राहुल और खड़गे की भागीदारी तय

पटना  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने सोमवार को बताया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 24 सितंबर को पटना में होने वाली कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में शामिल होंगे. पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अल्लावरु ने कहा कि कांग्रेस बिहार में दूसरा 'स्वतंत्रता संग्राम' लड़ रही है, यही कारण है कि इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन बिहार में किया जा रहा है. उन्होंने कहा, 'सीडब्ल्यूसी बैठक में एआईसीसी अध्यक्ष खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मौजूद रहेंगे. सभी सीडब्ल्यूसी सदस्यों को आमंत्रित किया गया है. कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस बैठक में शामिल हो सकते हैं.' कृष्णा अल्लावरु ने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'उस छात्र की तरह हैं जो मेहनत से पढ़ाई नहीं करता, बल्कि परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करता है.' कृष्णा अल्लावरु ने यह भी कहा कि बिहार, जहां हाल ही में राहुल गांधी ने 1,300 किलोमीटर की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली थी, अब राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया है. अल्लावरु ने कहा, 'हम बिहार में दूसरा स्वतंत्रता संग्राम लड़ रहे हैं, यही कारण है कि सीडब्ल्यूसी की बैठक यहां आयोजित की जा रही है.' इंडिया ब्लॉक में सीट बंटवारे के सवाल पर अल्लावरु ने कहा कि सहयोगी दलों के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है और जल्द ही हम एक व्यवहारिक फॉर्मूला लेकर आएंगे. उन्होंने कहा कि सीट बंटवारे को लेकर बीजेपी नीत एनडीए में अव्यवस्था दिख रही है. जब उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव को इंडिया ब्लॉक का मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया जाएगा, तो उन्होंने कहा, 'उचित समय पर सभी गठबंधन सहयोगी एक साथ बैठकर इस पर फैसला लेंगे.' बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. निर्वाचन आयोग अक्टूबर के पहले हफ्ते में बिहार विधानसभा चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा कर सकता है.

प्रियंका गांधी का नया मिशन, 5 सीटों पर ‘हर बूथ मजबूत’ अभियान की शुरुआत

भोपाल  चुनावों में लगातार हार के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी जहां वोट चोरी के खिलाफ अभियान चलाकर बीजेपी और चुनाव आयोग को घेर रहे हैं, वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी देश की 5 विधानसभा सीटों पर 'हर बूथ मजबूत' कार्यक्रम शुरू करने जा रहीं हैं। मप्र, उप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा की एक-एक विधानसभा सीटों को इस प्रोग्राम के लिए चुना गया है। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो प्रियंका गांधी ने 'हर बूथ मजबूत' कार्यक्रम के लिए मुरैना जिले की दिमनी विधानसभा सीट को चुना है। दिमनी से बीजेपी के कद्दावर नेता और मप्र के विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर विधायक हैं। राजस्थान के बाड़मेर जिले की सिवाना से कांग्रेस के पूर्व विधायक और राजस्थान राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष गोपाराम मेघवाल को प्रियंका गांधी ने दिमनी की जिम्मेदारी सौंपी है। देश की इन 5 विधानसभा सीटों में चलेगा प्रोजेक्ट राज्य सीट मध्यप्रदेश दिमनी (मुरैना) उत्तर प्रदेश बांसगांव छत्तीसगढ़ कांकेर राजस्थान विराटनगर हरियाणा अलवर कैसे हुआ विधानसभा सीटों का चयन कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अलग-अलग राज्यों की 5 ऐसी विधानसभा सीटें इस कार्यक्रम के लिए चुनी हैं जहां पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस कम अंतर से चुनाव हारी है। इस कार्यक्रम के लिए 25 ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां कांग्रेस कैंडिडेट्स की हार का अंतर 33 से 35 हजार के बीच रहा है। वहीं 30 सीटें ऐसी हैं जहां हार का अंतर 50 से 55 हजार के बीच रहा है। 20-20 बूथों के कलस्टर बनाए जाएंगे इस कार्यक्रम के तहत चुने गए विधानसभा क्षेत्र में 20-20 बूथों के कलस्टर बनाए जाएंगे। हर कलस्टर बूथ रक्षक नियुक्त किया जाएगा। बूथ रक्षक को प्रियंका गांधी की टीम ट्रेनिंग देंगी। बूथ रक्षक अपने कलस्टर की बूथ समितियों के सदस्यों को गाइड करेगा। बूथ रक्षक ये सुनिश्चित करेंगे कि किस मतदान केन्द्र पर कितने मतदाताओं के नाम गलत जुडे़ हुए हैं। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव की वोटर लिस्ट में चुनाव के दो महीने पहले काटे, जोड़े गए नामों का एनालिसिस करेंगे। बूथ रक्षक बीएलओ के साथ ये सुनिश्चित करेंगे कि एक भी सही वोटर मतदाता सूची से न छूटे और एक भी गलत नाम वोटर लिस्ट में शामिल न रहे। एमपी में दिमनी सीट को ही क्यों चुना? इस प्रोजेक्ट को प्रियंका गांधी खुद लीड कर रहीं हैं। ऐसे में टीम के लिए दिल्ली से मुरैना आना ज्यादा आसान हो सकता है। मप्र में 2003 से भाजपा की सरकार होने के बावजूद चंबल में कांग्रेस मजबूत स्थिति में रही है। मुरैना-श्योपुर लोकसभा सीट में कुल 8 विधानसभा आती हैं, जिनमें से पांच विधानसभाओं श्योपुर, विजयपुर, जौरा, मुरैना और अंबाह में कांग्रेस के विधायक हैं, वहीं भाजपा के पाले में केवल तीन विधानसभा सबलगढ़, सुमावली और दिमनी सीटें हैं।

कहीं कम ना आ जाए संख्या – जाति सर्वे पर हर वर्ग में टेंशन, CM सिद्धारमैया ने बताई हकीकत

बेंगलुरु कर्नाटक में आज से जाति जनगणना की शुरुआत हो रही है। 15 दिनों तक यह सर्वे चलेगा और फिर जल्दी ही रिपोर्ट भी जारी किए जाने की तैयारी है। सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार के इस फैसले का उनकी कैबिनेट के ही कुछ सदस्यों समेत बड़े पैमाने पर लोग विरोध कर रहे हैं। लेकिन अल्पसंख्यक, दलित और ओबीसी वर्ग की राजनीति करने वाले सिद्धारमैया का कहना है कि वह राहुल गांधी की लाइन पर चल रहे हैं, जिनका कहना है कि जातिगत जनगणना से सही आंकड़े आएंगे और फिर उसके आधार पर योजनाएं बनाने से सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने में मदद मिलेगी। राज्य के प्रभावशाली लिंगायत, वोक्कालिगा, कुर्बा, मुस्लिम, जैन और ब्राह्मण समुदाय के लोगों की मीटिंग हुई है। इन बैठकों में शीर्ष नेताओं ने समाज से अपील की है कि वे 15 दिनों तक चलने वाली जातिगत जनगणना में अपनी उपजाति ना बताएं। सिर्फ जाति का ही जिक्र करें ताकि उपजाति बताने से संख्या कम ना नजर आए। एक बार पहले भी सूबे में सर्वे में हुआ था, जिसे लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय की ओर से खारिज किया गया था। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस सर्वे को स्थगित करने की मांग की है या फिर इसे तीन महीने में कराने की मांग की है ताकि कोई खामी न रह जाए। वोक्कालिगा समाज के एक मठ के स्वामी निर्मलानंद ने कहा कि हमें संदेह है कि यह सर्वे सही से होगा। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य की आबादी 7 करोड़ हैं और महज 15 दिन में ही सर्वे करने की बात कही जा रही है। इससे पहले तेलंगाना में 65 दिन तक सर्वे चला था, जबकि वहां की आबादी हमारे यहां के मुकाबले आधी यानी करीब 3.5 करोड़ ही है। शुक्रवार को वीरशैव-लिंगायत समाज की हुबली में मीटिंग हुई थी। इस बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि खुद को लिंगायत ही लिखें। उसमें कोई उपजाति ना बताएं। इसके अलावा मुस्लिम, जैन, ब्राह्मण समाज के लोगों की भी मीटिंग हुई। इन बैठकों में प्रस्ताव दिया गया कि अपनी जाति ही लिखें, उपजाति का जिक्र ना करें। जैसे कहा गया कि ब्राह्मण समुदाय के लोग अपनी जाति में ब्राह्मण ही लिखें। कोई उपनाम आदि ना लिखें। इसी तरह जैन समुदाय के लोगों का भी कहना है कि जैन ही लिखा जाए। इसके अलावा मुसलमानों की मीटिंग में कहा गया कि अपना धर्म इस्लाम ही लिखें और जाति के स्थान पर मुस्लिम लिखा जाए। वोक्कालिगा समाज में भी काफी सक्रियता दिख रही है। वहीं डीके शिवकुमार ने इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है।

CM स्टालिन का वक्फ बिल पर समर्थन, बोले: मुस्लिमों के हितों की रक्षा जारी रहेगी

चेन्नई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने पैगंबर मोहम्मद की 1500वीं जयंती के अवसर पर एक बयान देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है. स्टालिन ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद ने दुनिया को प्रेम और शांति का संदेश दिया और उनकी शिक्षाओं को अपनाकर विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी डीएमके हमेशा अल्पसंख्यक समुदाय खासकर मुस्लिमों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगी और उनके हितों की रक्षा करेगी. इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और विपक्षी दलों ने इसे धार्मिक ध्रुवीकरण का प्रयास करार दिया है. मुख्यमंत्री स्टालिन ने चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा- पैगंबर मोहम्मद ने दुनिया को मोहब्बत और भाईचारे का संदेश दिया. उनकी 1500वीं जयंती के अवसर पर हमें उनके इस संदेश को अपनाना चाहिए और विश्व में शांति स्थापित करने की दिशा में काम करना चाहिए. डीएमके हमेशा से अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है. जब भी मुस्लिम समुदाय या अन्य अल्पसंख्यकों पर कोई संकट आएगा डीएमके उनकी रक्षा के लिए एक मजबूत किला बनकर खड़ी रहेगी. तमिलनाडु की राजनीति में तूफान इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में एक नया तूफान खड़ा हो गया है. विपक्षी दलों विशेष रूप से बीजेपी और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने स्टालिन के इस बयान को वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देखा है. उसका कहना है कि स्टालिन का यह बयान धार्मिक आधार पर समाज को बांटने की कोशिश है. डीएमके हमेशा से तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है और यह बयान उसी का एक उदाहरण है. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके अल्पसंख्यक समुदाय को केवल वोटबैंक के रूप में देखती है और उनके कल्याण के लिए कोई ठोस नीति लागू नहीं करती. मुख्यमंत्री ने संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और तीन तलाक जैसे मुद्दों को लेकर AIADMK पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अन्नाद्रमुक के विश्वासघात के कारण ही मुख्य विपक्षी दल (AIADMK) के अनवर राजा जैसे नेता उस पार्टी को छोड़कर DMK में शामिल हो गए। पैगंबर मोहम्मद की 1,500वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा कि द्रमुक संस्थापक सीएन अन्नादुरई और दिवंगत पार्टी संरक्षक एम करुणानिधि पहली बार तिरुवरूर में मिलाद-उन-नबी से जुड़े एक कार्यक्रम में मिले थे और दोनों नेताओं के बीच जो घनिष्ठता बढ़ी, वह तमिलनाडु के विकास की नींव बनी। गाजा मुद्दे पर तत्काल कदम उठाने का केंद्र से आग्रह विभिन्न दलों के मुस्लिम नेताओं की मौजूदगी का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि एकता जीत की ओर पहला कदम है। पैगंबर मोहम्मद के उपदेशों की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सुधारवादी नेता पेरियार ईवीआर और प्रतिष्ठित नेता अन्नादुरई तथा करुणानिधि ने पैगंबर के सिखाए समानता और प्रेम के संदेश की सराहना की थी। गाजा पट्टी की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्टालिन ने कहा कि फलस्तीनियों पर हो रहे अत्याचारों को तत्काल रोका जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से इस संबंध में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। मिलाद-उन-नबी पर अवकाश स्टालिन ने कहा कि करुणानिधि ने ही 1969 में मिलाद-उन-नबी के लिए अवकाश घोषित किया था और 2001 में अन्नाद्रमुक सरकार ने इसे रद्द कर दिया था, जबकि द्रमुक सरकार ने 2006 में इसे बहाल कर दिया था। स्कूली पाठ्यक्रम में पैगंबर मोहम्मद पर विषयवस्तु शामिल करने के एसडीपीआई नेता नेल्लई मुबारक के अनुरोध का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे पहले ही पाठ्यक्रम में शामिल किया जा चुका है। अगर मुसलमानों को कोई परेशानी होती है, तो… उन्होंने कहा, ‘‘केवल इतना ही नहीं; अगर मुसलमानों को कोई परेशानी होती है, तो सबसे पहले आपके समर्थन में आने वाला राजनीतिक दल द्रमुक ही रहा है।’’ स्टालिन ने कहा, ‘‘वह द्रमुक ही थी, जिसने सीएए के खिलाफ सच्ची मित्रता की भावना से लड़ाई लड़ी थी।’’ अन्नाद्रमुक प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ईके पलानीस्वामी का नाम लिए बिना स्टालिन ने कहा, ‘‘आप अच्छी तरह से जानते हैं कि किसने पूछा था कि क्या कोई इससे (सीएए) प्रभावित हुआ है और इन्हीं के शासन काल में सीएए का विरोध करने पर मुसलमानों पर लाठीचार्ज किया गया था।’’ AIADMK के मानदंड दोहरे उन्होंने कहा कि इसी तरह, केंद्र के तीन तलाक कानून लाने पर अन्नाद्रमुक द्वारा अपनाए गए ‘‘दोहरे मानदंडों’’ से सभी वाकिफ हैं, यही कारण था कि अनवर राजा जैसे नेता विश्वासघात के कारण अन्नाद्रमुक छोड़कर द्रमुक में शामिल हो गए। स्टालिन ने अन्नाद्रमुक का नाम लिए बिना कहा, ‘‘जो लोग भाजपा की घटिया और निरंकुश राजनीति का समर्थन करके विश्वासघात कर रहे हैं, उनका बहिष्कार किया जाना चाहिए।’