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मानसून से पहले नदियों और बड़े नालों का पानी रोकने की क्षमता को बढ़ाया जा रहा

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए बड़े बदलाव कर रही है। सरकार बाढ़ नियंत्रण की पारंपरिक विधियों की जगह कुछ नए तरीके अपना रही है, जिससे करोड़ों रुपये की बचत होगी। साथ ही बाढ़ नियंत्रण के लिए किसानों की जमीनों का बार-बार अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा।  प्रदेश सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों में नए तरीकों से लगभग 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि को सुरक्षित किया और 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को इससे फायदा मिला। इसके बाद बाढ़ नियंत्रण के नए तरीकों को विस्तार देने की तैयारी चल रही है। अब तक बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन के लिए पत्थर की बड़ी मेड़, गैबियन दीवारें (लोहे की तार के बक्सों में पत्थर की दीवार), बड़े-बड़े बांध और तटबंध बनाने का ध्यान दिया जा रहा था। वहीं दूसरे तरीके में कई जगहों पर संवेदनशील क्षेत्रों में नदी और बड़े नालों से गाद निकालने, कीचड़ हटाने पर ध्यान दिया जा रहा है। ताकि नदी के मार्ग और मोड़ को पानी की अधिक क्षमता वहन करने लायक बनाया जा सके। लखीमपुर खीरी में बाढ़ सुरक्षा परियोजना के तहत इस नए तरीके को अपनाया गया। इंजीनियरों ने नदी की क्षमता बढ़ाने के लिए गाद निकाली, जिस पर महज 22 करोड़ रुपये खर्च हुए। पहले यहीं बाढ़ नियंत्रण की तैयारी में 180 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान था। बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज के आस-पास और सरयू क्षेत्र में भी नए तरीके से महज 5 करोड़ रुपये का खर्च आया, जिस पर पहले अन्य उपायों के जरिए 115 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान था। नदियों से 16 किलोमीटर तक निकाली गई गाद इसी क्रम में बाढ़ नियंत्रण से जुड़े विभागों ने इंजीनियरों के साथ मिलकर घाघरा, शारदा और सुहेली नदियों के कई हिस्सों में बड़ा बदलाव किया। इन नदियों के मार्ग में करीब 9 से 16 किलोमीटर तक गाद निकालकर उनकी क्षमता में विस्तार किया गया है। इस मॉडल से हर मानसून में तटबंध और मिट्टी के बांध बनाने के लिए बाढ़ प्रभावित जिलों में कृषि भूमि का अधिग्रहण कम होगा, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। योगी सरकार में 8 से ज्यादा वर्षों में लगभग 1,665 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की गईं हैं। साथ ही अब तक 60 नदियों से गाद निकालने और कई नहरों का निर्माण भी किया गया है। वहीं वर्ष 2026 में बाढ़ नियंत्रण के नए मॉडल के तहत उच्च जोखिम वाली नदियों-नालों की ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी होगी। साथ ही गाद निकालने की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर रखा जाएगा। योगी सरकार का प्रयास है कि अब तक स्पुर (नदी के किनारों पर बड़े पत्थर रखना), जियो बैग्स (रेत से भरे बड़े थैले), पुराने ढांचों की मरम्मत, पत्थरों को बदलने और आपातकालीन सुदृढ़ीकरण कार्यों में होने वाले खर्चों को नए तरीकों से कम किया जाए। पुराने तरीकों को एक साथ बंद नहीं किया जाएगा, हालांकि इनके विकल्प तलाशे जाएं।

9 वर्षों में 14 लाख युवाओं को विभिन्न विधाओं में कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ाया गया

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा, तकनीकी दक्षता और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। योगी सरकार ने कौशल विकास को केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे रोजगार, उद्योग और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए प्रदेश के लाखों युवाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का काम किया है। प्रदेश सरकार की नीतियों का परिणाम है कि पिछले 9 वर्षों में लगभग 14 लाख युवाओं को विभिन्न विधाओं में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवाएं, ऑटोमोबाइल, निर्माण, फैशन डिजाइनिंग, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, कृषि आधारित उद्योगों समेत कई क्षेत्रों को शामिल किया गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं में से 7.50 लाख से अधिक को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा गया, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली। “प्रोजेक्ट प्रवीण” के अंतर्गत अब तक 1.35 लाख को कौशल प्रशिक्षण योगी सरकार ने युवाओं को उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप तैयार करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आधुनिक तकनीक और बाजार की मांग से जोड़ा है। इसी क्रम में संचालित “प्रोजेक्ट प्रवीण” योजना युवाओं के बीच काफी प्रभावी साबित हुई है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 1.35 लाख विद्यार्थियों को विभिन्न आधुनिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षता प्रदान करना है, ताकि वे डिग्री के साथ रोजगार के लिए भी पूरी तरह तैयार हों। 188 रोजगार मेलों से लगभग 4.40 लाख युवाओं को रोजगार प्रदेश सरकार ने रोजगार के अवसरों को युवाओं तक सीधे पहुंचाने के लिए मंडल और जनपद स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार मेलों का आयोजन भी किया। पिछले 9 वर्षों में आयोजित 188 वृहद रोजगार मेलों के माध्यम से लगभग 4.40 लाख युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ। इन मेलों में देश की प्रतिष्ठित कंपनियों, औद्योगिक संस्थानों और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भाग लिया। इससे युवाओं को अपने ही प्रदेश में बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए और पलायन में भी कमी आई। “स्किल कैपिटल” के रूप में पहचान मजबूत कर रहा यूपी योगी सरकार का फोकस केवल नौकरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और मार्केट लिंकिंग उपलब्ध कराई जा रही है। यही कारण है कि प्रदेश में स्टार्टअप, एमएसएमई और स्थानीय उद्योगों से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला राज्य है और यदि इस युवा शक्ति को कौशल और रोजगार से जोड़ा जाए तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई तक पहुंचा सकती है। योगी सरकार की नीतियों ने इसी सोच को जमीन पर उतारने का कार्य किया है। कौशल विकास, रोजगार सृजन और उद्योगों के विस्तार के समन्वय से उत्तर प्रदेश तेजी से “स्किल कैपिटल” के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

खाते में 551 करोड़ दिखते ही मचा हड़कंप, यूपी में ऐप ग्लिच या साइबर साजिश की जांच शुरू

सीतापुर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक साधारण परिवार के साथ ऐसा वाकया हुआ कि उनकी रातों की नींद उड़ गई। मछरेहटा इलाके में परिवार के लोग उस वक्त खुशी से झूम उठे जब उन्होंने अपने 'जियो पेमेंट बैंक ऐप' (Jio Payment Bank App) के खाते में 5.5 अरब (551 करोड़) रुपये से अधिक की राशि देखी। पहले तो उन्हें लगा कि उनकी किस्मत खुल गई है, लेकिन जल्द ही यह खुशी भारी चिंता और घबराहट में बदल गई। इतनी बड़ी रकम कहां से आई, किसने भेजी और क्यों, इन सवालों ने उन्हें परेशान कर दिया। अंततः, उन्होंने पुलिस से संपर्क कर सुरक्षा की गुहार लगाई है। साइबर क्राइम पुलिस जांच में जुट गई है। ऐप में अरबों की रकम, पर खाते में नहीं मछरेहटा थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुरुआती पड़ताल की। थाना प्रभारी (एसओ) ने बताया कि जांच में एक बेहद अजीब बात सामने आई है। पीड़ितों के बैंक खाते में वास्तव में एक रुपया भी नहीं आया है; अरबों की यह भारी-भरकम राशि सिर्फ मोबाइल ऐप पर ही दिखाई दे रही है। यह ऐप की कोई तकनीकी खराबी (Glitch) है या कोई साइबर धोखाधड़ी की साजिश, इसकी जांच अब साइबर क्राइम सेल (Cyber Crime Cell) को सौंपी गई है। दस्तावेज लेने वाले युवक पर संदेह पीड़ितों ने पुलिस को दी गई तहरीर में एक स्थानीय युवक, सर्वेश, पर संदेह जाहिर करते हुए शिकायत की है। बारेपारा गांव की रूपा और उनके भतीजे गजराज ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले सर्वेश नाम के युवक को अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज दिए थे। गजराज के मुताबिक, पत्नी की मृत्यु के बाद 'मृतक आश्रित लाभ', पिता मेढ़ई की 'पेंशन' और 'किसान सम्मान निधि' के आवेदन के लिए ये दस्तावेज दिए गए थे। पेंशन की जगह दिखा अरबों का बैलेंस सर्वेश ने हाल ही में उन्हें बताया था कि पेंशन का काम हो गया है। इसके बाद जब गजराज ने अपना जियो पेमेंट बैंक ऐप चेक किया, तो वह सन्न रह गया। खाते में ₹5,51,00,00,000/- (5.51 अरब) रुपये से अधिक का बैलेंस दिखा रहा था। गजराज ने बताया कि पहले वह बहुत खुश हुआ, लेकिन बाद में इतनी बड़ी रकम देखकर घबरा गया। उसे अनहोनी की आशंका सताने लगी। उसने सर्वेश से अपना खाता बंद कराने को भी कहा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस की सतर्कता और साइबर सेल की भूमिका 5.5 अरब रुपये आने की चर्चा पूरे इलाके में होने लगी । पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि मोबाइल ऐप में अरबों की राशि कैसे दिख रही थी और क्या सर्वेश नाम के युवक ने दस्तावेजों का कोई गलत इस्तेमाल किया है। साइबर एक्सपर्ट्स इस मामले के डिजिटल पहलुओं को खंगाल रहे हैं ताकि इस रहस्य से पर्दा उठ सके।

योगी सरकार ने बदल दी बाढ़ प्रबंधन की रणनीति, नदियों से गाद निकालने पर जोर

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए बड़े बदलाव कर रही है। सरकार बाढ़ नियंत्रण की पारंपरिक विधियों की जगह कुछ नए तरीके अपना रही है, जिससे करोड़ों रुपये की बचत होगी। साथ ही बाढ़ नियंत्रण के लिए किसानों की जमीनों का बार-बार अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों में नए तरीकों से लगभग 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि को सुरक्षित किया और 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को इससे फायदा मिला। इसके बाद बाढ़ नियंत्रण के नए तरीकों को विस्तार देने की तैयारी चल रही है। अब तक बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन के लिए पत्थर की बड़ी मेड़, गैबियन दीवारें (लोहे की तार के बक्सों में पत्थर की दीवार), बड़े-बड़े बांध और तटबंध बनाने का ध्यान दिया जा रहा था। वहीं दूसरे तरीके में कई जगहों पर संवेदनशील क्षेत्रों में नदी और बड़े नालों से गाद निकालने, कीचड़ हटाने पर ध्यान दिया जा रहा है। ताकि नदी के मार्ग और मोड़ को पानी की अधिक क्षमता वहन करने लायक बनाया जा सके। लखीमपुर खीरी में बाढ़ सुरक्षा परियोजना के तहत इस नए तरीके को अपनाया गया। इंजीनियरों ने नदी की क्षमता बढ़ाने के लिए गाद निकाली, जिस पर महज 22 करोड़ रुपये खर्च हुए। पहले यहीं बाढ़ नियंत्रण की तैयारी में 180 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान था। बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज के आस-पास और सरयू क्षेत्र में भी नए तरीके से महज 5 करोड़ रुपये का खर्च आया, जिस पर पहले अन्य उपायों के जरिए 115 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान था। नदियों से 16 किलोमीटर तक निकाली गई गाद इसी क्रम में बाढ़ नियंत्रण से जुड़े विभागों ने इंजीनियरों के साथ मिलकर घाघरा, शारदा और सुहेली नदियों के कई हिस्सों में बड़ा बदलाव किया। इन नदियों के मार्ग में करीब 9 से 16 किलोमीटर तक गाद निकालकर उनकी क्षमता में विस्तार किया गया है। इस मॉडल से हर मानसून में तटबंध और मिट्टी के बांध बनाने के लिए बाढ़ प्रभावित जिलों में कृषि भूमि का अधिग्रहण कम होगा, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। योगी सरकार में 8 से ज्यादा वर्षों में लगभग 1,665 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की गईं हैं। साथ ही अब तक 60 नदियों से गाद निकालने और कई नहरों का निर्माण भी किया गया है। वहीं वर्ष 2026 में बाढ़ नियंत्रण के नए मॉडल के तहत उच्च जोखिम वाली नदियों-नालों की ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी होगी। साथ ही गाद निकालने की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर रखा जाएगा। योगी सरकार का प्रयास है कि अब तक स्पुर (नदी के किनारों पर बड़े पत्थर रखना), जियो बैग्स (रेत से भरे बड़े थैले), पुराने ढांचों की मरम्मत, पत्थरों को बदलने और आपातकालीन सुदृढ़ीकरण कार्यों में होने वाले खर्चों को नए तरीकों से कम किया जाए। पुराने तरीकों को एक साथ बंद नहीं किया जाएगा, हालांकि इनके विकल्प तलाशे जाएं।

राजेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए नई सुविधाएं

 आगरा आगरा के राजपुर चुंगी स्थित प्राचीन राजेश्वर महादेव मंदिर में प्रदेश सरकार 1.42 करोड़ रुपये की लागत से काम कराएगी। इसमें मुख्य मार्ग पर भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण होने के साथ मंदिर परिसर में फ्लोरिंग और स्टोन क्लैडिंग का काम किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेंच, पानी की सुविधाएं होंगी तथा मंदिर परिसर में ड्रेनेज की व्यवस्था की जाएगी। राजेश्वर महादेव मंदिर शहर के चार प्रमुख शिवालयों में से एक माना जाता है। यहां सावन में और महाशिवरात्रि पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। सौंदर्यीकरण के तहत मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच, दिशा-निर्देश के लिए साइनेज, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, विश्राम स्थल और बेहतर प्रकाश व्यवस्था की जा रही है, ताकि दर्शनार्थियों को कोई परेशानी न हो। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि राजेश्वर महादेव मंदिर का पर्यटन विकास क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देगा। जो काम होंगे, उससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रदेश सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को केवल आस्था तक सीमित न रखकर उन्हें स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से भी जोड़ना है। इससे स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प, छोटे व्यवसाय और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। दिन में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग राजेश्वर मंदिर के बारे में मान्यता है कि शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। सुबह मंगला आरती के दौरान सफेद रंग, दोपहर की आरती के दौरान हल्का नीला और शाम की आरती के दौरान गुलाबी नजर आता है। 900 साल पुराने मंदिर की स्थापना के बारे मेंं किंवदंती प्रचलित है, जिसके अनुसार राजाखेड़ा निवासी सेठ नर्मदा नदी के पास से बैलगाड़ी से शिवलिंग स्थापित करने के लिए ले जा रहे थे। मंदिर के नजदीक ही एक कुआं था, आराम करने के दौरान सेठ को शिवजी ने स्वप्न दिया कि शिवलिंग को यहीं स्थापित कर दिया जाए। सेठ ने इसकी अनदेखी की और शिवलिंग को ले जाने की कोशिश करने लगे, लेकिन शिवलिंग वहीं स्थिर हो गया। तभी से यहां शिवलिंग स्थापित है।  

मोहनलालगंज में मादक पदार्थ गिरोह का भंडाफोड़, 1.4 किलो अफीम के साथ आरोपी पकड़ा गया

लखनऊ लखनऊ में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह के सदस्य को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 1.426 किलोग्राम अफीम बरामद की है। आरोपी को मोहनलालगंज क्षेत्र में राधा स्वामी सत्संग आश्रम से लखनऊ की ओर माधवखेड़ा हनुमान मंदिर के पास पकड़ा गया। बरामद अफीम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। एसटीएफ लखनऊ के पुलिस उपाधीक्षक धर्मेश कुमार शाही के निर्देशन में टीम लगातार मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटा रही थी। बुधवार को इंस्पेक्टर राघवेंद्र सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया। गिरफ्तार तस्कर की पहचान बिहार के बेतिया निवासी शाहीम आलम के रूप में हुई है। आरोपी ने कई अहम खुलासे किए पूछताछ में आरोपी ने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने बताया कि उसका गिरोह लंबे समय से अफीम की खरीद-फरोख्त कर रहा था और उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब तथा हरियाणा समेत कई राज्यों में इसकी सप्लाई करता था। आरोपी के अनुसार, गिरोह एक किलो अफीम की सप्लाई के बदले करीब 6 से 7 लाख रुपये तक लेता था। तस्करी के दौरान खरीदारों की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती थी। तय स्थान पर पहुंचने के बाद संबंधित व्यक्ति खुद संपर्क कर भुगतान करता और माल लेकर चला जाता था। गिरोह सीमित संपर्क और गुप्त तरीकों से लेन-देन करता था ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। फिलहाल एसटीएफ ने आरोपी के खिलाफ मोहनलालगंज थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उसके नेटवर्क और अन्य साथियों की तलाश में जुटी हुई है।  

मेरिट आधारित चयन से होगी सीएम फेलो की तैनाती, हर जिले में नियुक्त होंगे युवा

लखनऊ प्रदेश के हर जिले में तैनात होने वाले सीएम फैलो को सरकारी नौकरियों में उम्र में छूट मिलेगी। इस पद के लिए योग्य युवाओं के चयन के लिए पूरी प्रक्रिया जारी की गई है। तैनाती से पहले दो हफ्ते का प्रशिक्षण कराया जाएगा। प्रयोग सफल होने पर ये संख्या बढ़ाई जाने का भी प्रस्ताव है। प्रक्रिया के तहत प्रदेश के सभी जिलों में तैनात किए जाने वाले सीएम फेलो को सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट देने का प्रावधान किया गया है। पिछले सप्ताह यूपी कैबिनेट से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब चयन प्रक्रिया और तैनाती व्यवस्था पर तेजी से काम शुरू हो गया है। अपर मुख्य सचिव नियोजन आलोक कुमार के मुताबिक, इस पद के लिए चयन यूपी स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के तहत होगा जो मेरिट आधारित होगा। कुल 100 अंकों की चयन प्रणाली बनाई गई है, जिसमें 50 अंक लिखित परीक्षा, 30 अंक अधिमानी अर्हता और 20 अंक साक्षात्कार के निर्धारित किए गए हैं। इससे केवल अकादमिक योग्यता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक समझ, नेतृत्व क्षमता और क्षेत्रीय कार्य अनुभव वाले युवाओं को भी मौका मिलेगा। उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों को अतिरिक्त लाभ लिखित परीक्षा में नीति निर्माण, प्रशासनिक समझ, समसामयिक घटनाक्रम, डेटा विश्लेषण, डिजिटल गवर्नेंस और समस्या समाधान से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। अधिमानी अर्हता के तहत नीति अनुसंधान, सामाजिक क्षेत्र में कार्य अनुभव, डिजिटल टेक्नोलॉजी, डाटा मैनेजमेंट, प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग और प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों को अतिरिक्त वेटेज दिया जाएगा। तैनाती से पहले चयनित फेलो को दो सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रयोग सफल रहने पर बढ़ाई जाएगी संख्या शुरुआती चरण में सीमित संख्या में फेलो की तैनाती की जाएगी, लेकिन शासन ने संकेत दिए हैं कि प्रयोग सफल रहने पर फेलो की संख्या बढ़ाई जा सकती है। सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट का प्रावधान इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है।    

राज्य कर विभाग की नई पहल, व्यापारियों की समस्याओं का मौके पर होगा समाधान

 लखनऊ  राज्य कर विभाग अब ‘व्यापारी संवाद’ कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक व्यापारियों तक पहुंचने की कोशिश करेगा। इसके लिए संवाद कार्यक्रम अब सेक्टर स्तर पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। संवाद के माध्यम से विभागीय अधिकारी व्यापारियों को कर नियमों का पालन करने के प्रति जागरूक करने के साथ ही उनकी समस्याएं सुनेंगे और मौके पर ही समाधान करने की कोशिश करेंगे। संवाद कार्यक्रम जून से शुरू होंगे। राज्य कर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि व्यापारी संवाद कार्यक्रम में क्षेत्र के व्यापारी, चार्टर्ड एकाउंटेंट के साथ ही प्रतिष्ठित लोग बुलाए जाते हैं। अब तक यह कार्यक्रम विभाग के 20 जोन में ही आयोजित किए जाते थे, पहली बार इसका आयोजन विभाग के 364 सेक्टरों में करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय से विभाग अधिक से अधिक व्यापारियों तक अपनी बात पहुंचा सकेगा। व्यापारी संवाद सम्मेलनों में मुख्यालय स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। कार्यक्रमों में विभागीय अधिकारी व्यापारियों के साथ ही उपस्थित अन्य लोगों को जीएसटी नियमों की जानकारी, रिटर्न फाइलिंग और विधिक व्यवस्थाओं के प्रति जागरूक करेंगे। मुख्यालय से जाने वाले अधिकारी व्यापारियों से संवाद के दौरान उनकी दिक्कतें सुनने के साथ ही साथ ही मौके पर ही समाधान करने की कोशिश करेंगे। नए व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण के प्रति प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में करदाताओं के अनुकूल माहौल तैयार करना है।

पर्यटन मंत्री का बड़ा आदेश, निर्माण कार्यों में देरी पर होगी कठोर कार्रवाई

 लखनऊ  पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने वर्ष 2027 में होने वाले विधान सभा चुनाव से पहले पर्यटन विभाग की परियाेजनाओं को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने कहा है कि स्वीकृत परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया पूरा करते हुए 20 मई तक स्वीकृति पत्र जारी करें। निर्माणाधीन परियोजनाओं को 20 नवंबर तक हर हाल में पूरा कराया जाए। चेतावनी दी कि फाइलों को लटकाने की संस्कृति छोड़ दें, ऐसी शिकायत पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। पर्यटन भवन में आयोजित बैठक में मंत्री ने कहा कि चुनाव को देखते हुए निर्माणाधीन परियोजनाओं को पूरा कर लोकार्पण के लिए तैयार करें। नवंबर तक परिणाम धरातल पर दिखना चाहिए। वर्ष 2017 से अब तक पर्यटन और संस्कृति, दोनाें विभागों द्वारा कराए गए कार्य, लागत, स्वीकृति और व्यय धनराशि, योजनाओं की प्रगति आदि की रिपोर्ट तैयार की जाए। मंत्री ने कहा कि कुंदरकी विधान सभा क्षेत्र में 16 अप्रैल को शिलान्यास के बाद अब तक काम शुरू नहीं हुआ है और इस संबंध में कार्यदायी संस्था एवं अधिकारियों द्वारा गलत सूचना दी गई। यह आपत्तिजनक है। निर्देश दिए कि समय-समय पर मुख्यालय से अधिकारियों की टीम फोटोग्राफर सहित मौके पर जाकर कार्य की प्रगति का भौतिक सत्यापन करे। परियोजनाओं में विलंब होने पर संबंधित कार्यदायी संस्था और अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। आगरा और मथुरा में हेलीपोर्ट को संचालित किया जाए। जिलाें के स्थापना दिवस पर महोत्सव का आयोजन कराया जाए। अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने निर्देश दिए कि जो कार्य शुरू किए गए हैं, उन्हें समय से पूरा किया जाए। भुगतान के लिए समय सारिणी निर्धारित की जाए। बैठक में विशेष सचिव पर्यटन मृदुल चौधरी, प्रबंध निदेशक यूपीएसटीडीसी आशीष कुमार, निदेशक ईको पर्यटन पुष्प कुमार के., विशेष सचिव संस्कृति संजय कुमार सिंह, पर्यटन सलाहकार जेपी सिंह, क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी अंजू चौधरी, संयुक्त निदेशक प्रीति श्रीवास्तव, प्रचार अधिकारी कीर्ति आदि मौजूद थे।  

ड्यूटी से गायब और भ्रष्टाचार में लिप्त डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई, डिप्टी सीएम का बड़ा हंटर

लखनऊ उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त लापरवाही और अनुशासनहीनता के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हंटर चलाया है। ड्यूटी से गायब रहने, भ्रष्टाचार में लिप्त होने और मरीजों के इलाज में कोताही बरतने वाले 5 डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा, एक सीएमओ समेत 16 अन्य चिकित्साधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। 5 डॉक्टर सेवा से बर्खास्त लंबे समय से बिना किसी सूचना के ड्यूटी से नदारद रहने वाले डॉक्टरों पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। इनमें डॉ. अलकनन्दा (गोरखपुर), डॉ. रामजी भरद्वाज (कुशीनगर), डॉ. सौरभ सिंह (बलरामपुर), डॉ. विकलेश कुमार शर्मा (अमेठी) और डॉ. मोनिका वर्मा (औरैया) शामिल हैं। निजी अस्पतालों से साठगांठ पर गिरी गाज अम्बेडकर नगर के सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा को निजी नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण में अनियमितता का दोषी पाया गया है। व्यक्तिगत स्वार्थ और पद के दुरुपयोग के मामले में इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं, हरदोई के संडीला अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह पर भी अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर गाज गिरी है। वसूली और अभद्रता पर भी कार्रवाई हमीरपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि की तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोक दी गई हैं। उन पर प्रसूताओं से अवैध वसूली और अभद्रता के आरोप सिद्ध हुए हैं। इसके साथ ही, राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं के सह-आचार्य डॉ. रितुज अग्रवाल के खिलाफ गाली-गलौज और अभद्रता के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। अन्य प्रमुख कार्रवाइयां: प्रयागराज: मेजा अधीक्षक डॉ. शमीम अख्तर का प्रशासनिक लापरवाही के कारण तबादला और जांच। मथुरा: गलत मेडिकोलीगल रिपोर्ट बनाने पर डॉ. देवेंद्र कुमार और डॉ. विकास मिश्रा पर एक्शन। झांसी: प्राइवेट प्रैक्टिस करने के दोषी ट्रामा सेंटर के आर्थोसर्जन डॉ. पवन साहू की 2 वेतनवृद्धियां रोकी गईं। प्रतिनियुक्ति समाप्त: अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने पर डॉ. आदित्य पाण्डेय की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है। सेवा से बर्खास्त किए गए डॉक्टर डॉ. अलकनन्दा: चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सालय, गोरखपुर डॉ. रामजी भरद्वाज: चिकित्साधिकारी, कुशीनगर डॉ. सौरभ सिंह: चिकित्साधिकारी, बलरामपुर डॉ. विकलेश कुमार शर्मा: सी.एच.सी. जगदीशपुर, अमेठी डॉ. मोनिका वर्मा: सी.एच.सी. दिबियापुर, औरैया विभागीय कार्यवाही के दायरे में आए अधिकारी डॉ. संजय कुमार शैवाल: मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO), अम्बेडकर नगर डॉ. संजय वर्मा: डिप्टी सी.एम.ओ., अम्बेडकर नगर डॉ. मनोज कुमार सिंह: चिकित्सा अधीक्षक, सण्डीला, हरदोई डॉ. शमीम अख्तर: अधीक्षक, सी.एच.सी. मेजा, प्रयागराज डॉ. अनिल कुमार सिंह: तत्कालीन अधीक्षक, लम्भुआ (वर्तमान- कादीपुर), सुल्तानपुर डॉ. धर्मराज: चिकित्साधिकारी, सुल्तानपुर डॉ. देवेन्द्र कुमार: इमरजेंसी मेडिकल अफसर, जिला चिकित्सालय, मथुरा डॉ. विकास मिश्रा: सर्जन, जिला चिकित्सालय, मथुरा डॉ. अन्नू चन्द्रा: चिकित्साधिकारी, बलरामपुर डॉ. शिवेश जायसवाल: चिकित्साधिकारी, राजकीय चिकित्सालय, वाराणसी डॉ. राजेश कुमार वर्मा: चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सालय, बदायूँ डॉ. गणेश कुमार: चिकित्सा अधीक्षक, सी.एच.सी. गोला, लखीमपुर खीरी डॉ. अरूण कुमार: चिकित्साधिकारी, जिला चिकित्सालय, बदायूँ डॉ. अरविन्द कुमार श्रीवास्तव: संयुक्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें डॉ. जानकीश चन्द्र शंखधर: चिकित्साधिकारी, जिला संयुक्त चिकित्सालय, सम्भल डॉ. रितुज अग्रवाल: सह-आचार्य (अस्थिरोग), राजकीय मेडिकल कॉलेज, बदायूँ वेतनवृद्धि रोकने और अन्य दंड पाने वाले डॉक्टर डॉ. लालमणि: स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला महिला चिकित्सालय, हमीरपुर (3 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. सन्तोष सिंह: चिकित्साधिकारी, बलरामपुर (4 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. निशा बुन्देला: चिकित्साधिकारी, झाँसी (2 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. पवन साहू: आर्थोसर्जन, ट्रामा सेन्टर, मोठ, झाँसी (2 वेतनवृद्धियां रुकीं) डॉ. आदित्य पाण्डेय: स्टेट हेल्थ एजेंसी (वाराणसी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर मूल पद पर भेजे गए) डॉ. प्रतिभा यादव: चिकित्साधिकारी, सी.एच.सी. महसी, बहराइच (परिनिन्दा का दण्ड) डॉ. राकेश सिंह: चिकित्साधिकारी, सी.एच.सी. राल, मथुरा (परिनिन्दा का दण्ड)