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स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर सरकार का यू-टर्न, अब नहीं देना होगा नया सिक्योरिटी चार्ज

लखनऊ उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी जीत की खबर है। स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदलने के बाद नई दरों पर सिक्योरिटी मनी वसूलने के फैसले को पावर कॉर्पोरेशन ने देर रात वापस ले लिया है। अब उपभोक्ताओं से पुरानी जमा सिक्योरिटी ही मान्य होगी और नई कॉस्ट डेटा बुक के तहत अतिरिक्त पैसा नहीं वसूला जाएगा। देर रात बदला गया आदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के कड़े विरोध के बाद रात करीब 10:30 बजे पावर कॉर्पोरेशन ने अपना आदेश संशोधित किया। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाते हुए इसे 'कानून की ताकत' बताया है। कॉर्पोरेशन ने पहले आदेश दिया था कि पोस्टपेड होने पर उपभोक्ताओं को नई कॉस्ट डेटा बुक-2025 के अनुसार बढ़ी हुई सिक्योरिटी मनी देनी होगी, जिसका सीधा बोझ लगभग 83 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ रहा था। क्या था विवाद? जब पावर कॉर्पोरेशन ने उपभोक्ताओं के पोस्टपेड कनेक्शन को प्रीपेड मोड में बदला था, तब उनकी जमा सिक्योरिटी मनी को उनके प्रीपेड अकाउंट में रिचार्ज के रूप में डाल दिया गया था। अब दोबारा पोस्टपेड होने पर कॉर्पोरेशन नई दरों से सुरक्षा राशि मांग रहा था। अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, "प्रदेश के कई कनेक्शन 10 साल, 20 साल या उससे भी पुराने हैं। उस समय के नियमों के अनुसार सिक्योरिटी जमा की गई थी। अब वर्तमान की नई दरों के हिसाब से अतिरिक्त पैसा मांगना पूरी तरह गलत और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन था।" उपभोक्ता परिषद की बड़ी जीत उपभोक्ता परिषद ने इस मामले में विद्युत नियामक आयोग में लोकमत प्रस्ताव दाखिल करने की तैयारी भी कर ली थी। परिषद का तर्क था कि चूंकि उपभोक्ताओं ने पहले ही अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी थी, इसलिए सिस्टम के बार-बार बदलने का खामियाजा जनता क्यों भुगते। देर रात आए इस फैसले से उन मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें हजारों रुपये की अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी बिल में जुड़कर आने का डर था। जून से एसएमएस और व्हाट्सएप पर मिलेगा बिल सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड प्रणाली में बदले जा रहे हैं। अगले महीने से उपभोक्ताओं को इस्तेमाल की गई बिजली का बिल मिलेगा। मई 2026 की खपत का बिल जून 2026 में पोस्टपेड प्रणाली के तहत जारी किया जाएगा। यह बिल एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से मिलेगा। हर महीने की 10 तारीख तक बिल जारी किए जाएंगे। 15 दिन के अंदर बिल जमा करना होगा। बिल न मिलने पर मैनुअल रीडिंग लेकर बिल लेकर पैसा जमा कर सकते हैं।

योगी सरकार में एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बने प्रदेश के युवा

9 वर्षों में रोजगार, निवेश और आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा मॉडल बना उत्तर प्रदेश योगी सरकार में एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बने प्रदेश के युवा रोजगार क्रांति के जरिए नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बन चुके हैं युवा महिलाओं और युवाओं को सरकारी नौकरी से लेकर स्वरोजगार तक मिल रहा खूब मौका लखनऊ  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने पिछले 9 वर्षों में रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किये हैं। योगी सरकार ने रोजगार के मामले को मिशन के रूप में लिया है। इसके तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने के लक्ष्य के साथ युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। सरकार, सरकारी क्षेत्र में नौकरी के अवसर देने के साथ निजी क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए मौके उपलब्ध करा रही है।  उत्तर प्रदेश, देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला राज्य बन चुका है। इसी क्रम में बीते 9 वर्षों में योगी सरकार ने 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं। यूपी पुलिस में ही इस दौरान 2.19 लाख भर्ती पूरी हो चुकी हैं। वहीं वर्ष 2026 में 80 हजार से अधिक पदों पर भर्ती होनी है। शिक्षा विभाग में करीब 1.65 लाख से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के द्वारा वर्ष 2017 से 2025 तक 53 हजार से ज्यादा,  उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के द्वारा 47 हजार से ज्यादा भर्तियां पारदर्शी तरीके से पूरी की गईँ। उत्तर प्रदेश में आज कारखानों की संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में मात्र 14 हजार कारखाने ही पंजीकृत थे। नौजवानों के नए रोजगार की संभावनाएं भी पैदा हुईं। सरकारी नौकरी की जगह अपना रोजगार करने वाले नौजवान को एमएसएमई सेक्टर से बड़ा लाभ मिला है। केवल एमएसएमई सेक्टर से ही प्रदेश में 3 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं से युवाओं और महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का सपना भी साकार हुआ। खादी एंव ग्रामोद्योग क्षेत्र में विस्तार से 4.63 लाख रोजगार सृजित किए गए हैं। विगत 9 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव से 1 करोड़ से ज्यादा युवाओं के लिए रोजगार और सेवायोजन के अवसर उपलब्ध होने की संभावना है। बीते 9 वर्षों में 4 ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को जमीन पर उतारा गया है, जिनसे 60 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।  मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना के अंतर्गत अब तक 38 हजार से ज्यादा लाभार्थियों को 1,09,710 लाख से अधिक की मार्जिन मनी वितरित की गई। इस तरह योगी सरकार ने केवल रोजगार ही नहीं बल्कि स्वरोजगार के भी मौके प्रदेशवासियों के हित में उपलब्ध कराए हैं। प्रदेश में शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं को सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ शुरू किया गया। वर्ष 2024-25 से अब तक 1.47 लाख युवाओं को इस योजना का लाभ दिया गया, जिससे 4.51 लाख लोगों को रोजगार मिला है। योगी सरकार ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में उत्कष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राजपत्रित पदों पर सेवायोजित करने की नीति घोषित की है। इसके तहत अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दी जा चुकी है। प्रदेश में महिलाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुले बीसी सखी योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र की महिला को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया गया। इसके तहत ग्रामीण महिलाओं ने बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में 42,711 करोड़ का लेन-देन किया और 116 करोड़ का लाभांश कमाया। खेती में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से ऊपर ले जाने का लक्ष्य लखपति दीदी के जरिए पूरा किया जा रहा है। इससे प्रदेश में 18.55 लाख महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच गईं हैं। एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर रोजगार कर रही हैं। कृषि आजीविका संवर्धन गतिविधियों से 64.34 लाख महिला किसान परिवारों को जोड़ा गया है। इन आंकड़ों को देखकर कहा जा रहा है कि आज उत्तर प्रदेश का युवा केवल नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर नहीं देख रहा, बल्कि अपने ही प्रदेश में रोजगार और व्यवसाय के अवसर प्राप्त कर रहा है। योगी सरकार की योजनाओं ने युवाओं और महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा किया है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश आज रोजगार, निवेश, उद्यमिता और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में देश के सामने एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।

फिरौती के लिए अपहरण तथा डकैती के मामलों में यूपी देश में सबसे निचले पायदान पर

एनसीआरबी रिपोर्ट: अपराध के मामलों में यूपी की स्थिति काफी बेहतर फिरौती के लिए अपहरण तथा डकैती के मामलों में यूपी देश में सबसे निचले पायदान पर महिलाओं के प्रति अपराधियों को सजा दिलाने में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 लखनऊ  राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वर्ष 2024 के आंकड़ों ने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बेहतर स्थिति को दर्शाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के सापेक्ष उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 180.2 रहा। कुल अपराधों में उत्तर प्रदेश का देश में 18वां स्थान है, जबकि देश की 17 फीसदी जनसंख्या यूपी में निवास करती है। गौरतलब है कि किसी भी राज्य में अपराध की स्थिति को समझने के लिए क्राइम रेट सबसे बेहतर एवं विश्वसनीय माध्यम है। प्रति एक लाख जनसंख्या के सापेक्ष अपराधों की संख्या को अपराध दर (Crime Rate) के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह एक स्थापित वास्तविक संकेतक है, जो राज्य के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करता है। क्राइम रेट ही अपराधों की सही स्थिति समझने के लिए प्रामाणिक संकेतक है। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 28 राज्यों एवं 8 केन्द्रशासित प्रदेशों में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की मजबूत स्थिति इस प्रकार समझी जा सकती है। हत्या के मामलों में देश में यूपी का स्थान 29वां है, जबकि हत्या के प्रयास के मामलों में यह 26वें स्थान पर है। शीलभंग के मामलों में प्रदेश 20वें स्थान पर है, जबकि फिरौती हेतु अपहरण के मामलों में राज्य पूरे देश में सबसे नीचे 36वें नंबर पर है। दुष्कर्म के मामलों में यूपी देश में 24वें स्थान पर है, जो राज्य में बेहतर कानून-व्यस्था को इंगित करता है। इसी प्रकार बलवे के मामलों में उत्तर प्रदेश 19वें स्थान पर है। इसी प्रकार डकैती के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे निचले पायदान यानी 36वें स्थान पर है। लूट के मामलों में प्रदेश 28वें स्थान पर और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में यूपी का स्थान 23वां है। महिलाओं के प्रति अपराधों में यूपी 17वें नंबर पर है, जबकि बच्चों के विरुद्द अपराध के मामले में प्रदेश का स्थान 27वां है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि देश के अन्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में उत्तर प्रदेश की स्थिति अपराध नियंत्रण के मामले में काफी बेहतर है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि योगी सरकार लगातार अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है, जिसके ठोस परिणाम भी सामने आ रहे हैं। महिला न्याय (Conviction Rate): यूपी देश का शीर्ष राज्य अपराधियों को सजा दिलाने (दोषसिद्धि) में उत्तर प्रदेश पूरे देश के लिए एक मानक स्थापित कर चुका है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में अदालतों द्वारा सजा सुनाने की दर इस प्रकार है- उत्तर प्रदेश: दोषसिद्धि दर 76.6% (शीर्ष) पश्चिम बंगाल: यहां दर मात्र 1.6% है। कर्नाटक: यहां मात्र 4.8% मामलों में सजा होती है। तेलंगाना: यहां दर 14.8% है। केरल: यहां दर मात्र 17.0% है। पंजाब: यहां दर 19.0% है। तमिलनाडु: यहां दर 23.4% है। उपरोक्त आंकड़े बताते हैं कि यूपी में महिला अपराध करने वाले अपराधी के बचने की संभावना न्यूनतम है, जबकि अन्य राज्यों में अपराधियों के छूटने की दर 75% से 98% तक है। इसी प्रकार राज्य में मर्यादा भंग के अपराधों की दर मात्र 18.6 है, जबकि तेलंगाना में 52.8, पश्चिम बंगाल में 39.5, केरल में यह 23.9 है। गंभीर अपराधों पर नियंत्रण यूपी में हत्या के मामलों की दर प्रति लाख जनसंख्या मात्र 1.3 है, जो तेलंगाना (2.7),  झारखण्ड (3.7) और पंजाब (2.5) की तुलना में काफी कम है। यूपी के महानगर जांच पूरी करने में देश के अन्य बड़े मेट्रो शहरों से कहीं अधिक तेज हैं। कानपुर में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में चार्जशीट दर 84.4%, लखनऊ में 83.7% है। जेलों में क्षमता और अनुशासन के मामले में भी यूपी का प्रशासन अन्य राज्यों से बेहतर है। यूपी में महिला जेलों में अधिभोग दर (Occupancy Rate) मात्र 36.7% है, जो महिला कैदियों को सुव्यवस्थित वातावरण प्रदान करता है। यूपी की केंद्रीय जेलों की अधिभोग दर 74.3% है, जो पंजाब (118.4%) और केरल (149.9%) की तुलना में बहुत बेहतर है। एनसीआरबी रिपोर्ट का सांख्यिकीय डेटा स्पष्ट करता है कि उत्तर प्रदेश न केवल महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों को दंडित करने (76.6% दोषसिद्धि) में देश में अग्रणी है, बल्कि गंभीर अपराधों (हत्या, धोखाधड़ी) और महिला सुरक्षा के मानकों पर दक्षिण भारतीय राज्यों और पंजाब/पश्चिम बंगाल की तुलना में कहीं अधिक बेहतर स्थिति में है।

स्मार्ट मीटर अब पोस्टपेड मोड में, संचालन के आदेश जारी

स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने के आदेश जारी प्रदेश में समाप्त हुई स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था: ऊर्जा मंत्री   आरडीएसएस योजना के अंतर्गत लगे स्मार्ट मीटर तत्काल प्रभाव से होंगे पोस्टपेड उपभोक्ताओं को जून से मिलेगी पोस्टपेड बिलिंग सुविधा, स्मार्ट पोस्टपेड बिल हर माह 10 तारीख तक जारी होंगे अब सभी नए बिजली कनेक्शन स्मार्ट पोस्टपेड मोड में होंगे जारी 15 मई से 30 जून तक लगाए जाएंगे स्मार्ट मीटर शिकायत निस्तारण कैंप उपभोक्ता हित में लगातार फैसले ले रही योगी सरकार: ए.के. शर्मा लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में लगे सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत लगाए गए सभी स्मार्ट मीटर तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड प्रणाली में बदले जा रहे हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को बिजली इस्तेमाल करने के बाद बिल मिलेगा। मई 2026 की खपत का बिल जून 2026 में पोस्टपेड प्रणाली के तहत जारी किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आम विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में संचालित स्मार्ट प्री-पेड मीटर व्यवस्था को समाप्त कर सभी स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों और केस्को कानपुर में लागू यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करेगी।  ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं को बिल एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिये उपलब्ध कराया जाएगा। स्मार्ट पोस्टपेड बिल प्रत्येक माह की 10 तारीख तक जारी किए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में नेटवर्क अथवा संचार संबंधी समस्या के कारण स्मार्ट मीटर की ऑटोमैटिक रीडिंग प्राप्त नहीं होगी, वहां एएमआईएसपी एजेंसियों के माध्यम से मैनुअल रीडिंग लेकर समय से बिल उपलब्ध कराया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर सिस्टम में पंजीकृत नहीं हैं या गलत दर्ज हैं, उनके लिए डिस्कॉम स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही उपभोक्ता संबंधित विद्युत वितरण निगम के व्हाट्सएप चैटबॉट एवं 1912 हेल्पलाइन के माध्यम से भी अपना बिल प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश में अब सभी नए विद्युत संयोजन स्मार्ट पोस्टपेड मोड में ही जारी किए जाएंगे। पूर्व में प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के दौरान समायोजित की गई सुरक्षा धनराशि को अब विद्युत प्रदाय संहिता-2005 एवं कॉस्ट डाटा बुक-2026 के प्रावधानों के अनुसार चार समान मासिक किस्तों में उपभोक्ताओं के बिलों में जोड़ा जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पोस्टपेड उपभोक्ताओं को पूर्व की भांति बिल जारी होने की तारीख से 15 दिन का भुगतान समय और उसके बाद 7 दिन की डिस्कनेक्शन अवधि प्रदान की जाएगी। निर्धारित समय तक भुगतान न होने पर विद्युत प्रदाय संहिता एवं टैरिफ आदेश के अनुसार विलंब अधिभार लागू होगा। घरेलू उपभोक्ताओं को विशेष राहत देते हुए 30 अप्रैल 2026 तक के बकाया विद्युत बिल को 10 आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा प्रदान की गई है। जबकि अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को 40, 30 और 30 प्रतिशत की तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा मिलेगी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिलों से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई 2026 से 30 जून 2026 तक अधिशासी अभियंता एवं उपखंड अधिकारी कार्यालयों पर विशेष कैंप एवं सहायता केंद्र लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 1912 हेल्पलाइन पर भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

डीजीपी ने एनसीआरबी आंकड़ों को बताया यूपी की मजबूत कानून-व्यवस्था का प्रमाण

एनसीआरबी के आंकड़े यूपी की मजबूत कानून-व्यवस्था की गवाही: डीजीपी राष्ट्रीय क्राइम रेट से काफी कम रहा यूपी का क्राइम रेट अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति धरातल पर उतरी लखनऊ  पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 रिपोर्ट निर्विवाद रूप से स्थापित करती है कि क्राइम रेट ही विभिन्न राज्यों के बीच अपराध की तुलना का एकमात्र वैज्ञानिक और सांख्यिकीय दृष्टि से उचित आधार है। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के मुकाबले उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट मात्र 180.2 है। यह सुधार सतत और सुविचारित प्रयासों का प्रतिफल है। यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में अपराध व अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति कागज़ों से निकलकर धरातल पर उतरी है।  कठोर कार्रवाई से स्थापित किया कानून-व्यवस्था का राज पुलिस महानिदेशक ने कहा कि गत 9 वर्षों में आधुनिक पुलिस स्टेशन, सतर्क एंटी-रोमियो स्क्वॉड, हर थाने पर समर्पित महिला हेल्प डेस्क, कमज़ोर वर्गों को त्वरित न्याय दिलाने वाले फास्ट-ट्रैक कोर्ट और संगठित अपराधों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था का राज स्थापित किया है। एनसीआरबी के आंकड़े इसी की गवाही देते हैं। छोटी से छोटी शिकायत का संज्ञान लेती है यूपी पुलिस पुलिस महानिदेशक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोई भी व्यक्ति बिना किसी भय-संकोच के पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज करा सकता है। उत्तर प्रदेश पुलिस इसके प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हम डिजिटल माध्यमों पर भी आई छोटी से छोटी शिकायत का संज्ञान लेते हैं और जहां भी उचित हो, उसे एफआईआर में परिवर्तित करते हैं। अधिक पंजीकरण एक अधिक संवेदनशील, सुलभ और पारदर्शी पुलिस बल की पहचान है। यही वह संस्कृति है, जिसका निर्माण उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न के तहत कर रही है।

उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी, योगी सरकार में भर्ती प्रक्रिया रही पारदर्शी

योगी सरकार में पारदर्शी भर्ती, उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी 15 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का इंतजार खत्म, 12,333 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए सफल घोषित डीवी/पीएसटी की प्रक्रिया मई के तीसरे सप्ताह में होगी आयोजित  14 और 15 मार्च 2026 को चार पालियों में आयोजित हुई थी परीक्षा लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया है। गुरुवार को उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया गया है। 4543 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती प्रक्रिया में 15,75,760 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परिणाम जारी होने के साथ ही लाखों युवाओं का इंतजार खत्म हो गया है। 12,333 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए सफल घोषित उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने नियमावली और निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा परिणाम घोषित किया है। परीक्षा 14 और 15 मार्च 2026 को चार पालियों में आयोजित की गई थी। पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए प्रत्येक विषय में न्यूनतम 35 प्रतिशत और कुल 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में से मेरिट और आरक्षण के आधार पर 12,333 अभ्यर्थियों को अभिलेख सत्यापन एवं शारीरिक मानक परीक्षण (डीवी/पीएसटी) के लिए सफल घोषित किया गया है। निष्पक्ष और समयबद्ध भर्ती से युवाओं में बढ़ा भरोसा योगी सरकार में भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और समयबद्ध बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि युवाओं का सरकारी भर्तियों के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है। भर्ती बोर्ड के मुताबिक, डीवी/पीएसटी की प्रक्रिया मई के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी। इसकी पूरी जानकारी जल्द ही बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।

योगी सरकार की कड़ी नीतियों से पर्यटन परियोजनाओं में होगी तेजी, नवंबर तक मिलेंगे ठोस नतीजे

योगी सरकार की सख्ती से पर्यटन परियोजनाओं में आएगी तेजी, नवंबर तक धरातल पर दिखेंगे परिणाम पर्यटन विकास को नई रफ्तार, अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं में बढ़ी जवाबदेही  ऐतिहासिक स्थलों और हेलीपोर्ट परियोजनाओं पर विशेष फोकस, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को दिए निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में उत्तर प्रदेश में पर्यटन और संस्कृति क्षेत्र तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में लखनऊ स्थित पर्यटन भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी स्वीकृत परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया 20 मई 2026 तक पूरी कर स्वीकृत पत्र जारी किए जाएं। साथ ही निर्माणाधीन परियोजनाओं को 20 नवंबर 2026 तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि फाइलों को लटकाने और काम में लापरवाही की संस्कृति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को समय से पूरा करने पर जोर पर्यटन मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नवंबर 2026 तक प्रदेश में चल रही परियोजनाओं का परिणाम जमीन पर दिखाई देना चाहिए, ताकि इनका लोकार्पण कर जनता को समर्पित किया जा सके। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि मुख्यालय से अधिकारी समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण टीम फोटोग्राफर के साथ मौके पर जाकर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का भौतिक सत्यापन करेगी। इससे परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यों में तेजी आएगी। मंत्री ने कहा कि सरकार केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि धरातल पर परिणाम चाहती है। उन्होंने अधिकारियों को पत्राचार के बजाय समाधान आधारित कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए। पर्यटन स्थलों के विकास से बढ़ेगा प्रदेश का गौरव समीक्षा बैठक में आगरा और मथुरा में हेलीपोर्ट परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के निर्देश भी दिए गए। वहीं भारत सरकार स्तर पर लंबित योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत नैमिषारण्य में प्रस्तावित कार्यों को जल्द शुरू करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों के इतिहास लेखन और शिलालेख संबंधी कार्यों को स्थापित प्रक्रिया के अनुसार संचालित करने के निर्देश दिए गए। जिला महोत्सवों को जनपद स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य रूप से आयोजित करने पर भी विशेष बल दिया गया। वहीं वर्ष 2017 से अब तक पर्यटन और संस्कृति विभाग द्वारा कराए गए कार्यों, उनकी लागत, स्वीकृत धनराशि और प्रगति की जनपदवार रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिससे विकास कार्यों की प्रभावी निगरानी हो सके। पारदर्शिता और जवाबदेही पर योगी सरकार का फोकस बैठक में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि परियोजनाओं को पूरा करने में किसी प्रकार की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने भुगतान प्रक्रिया के लिए समय सारिणी तय करने के निर्देश दिए, ताकि कार्यदायी संस्थाओं को समय पर भुगतान हो सके और परियोजनाएं प्रभावित न हों। पर्यटन मंत्री ने नकारा और कार्य में रुचि न लेने वाले ठेकेदारों को सिस्टम से बाहर करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि योगी सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी व्यवस्था, जवाबदेही और तेज विकास है।  बैठक में विशेष सचिव पर्यटन मृदुल चौधरी, प्रबंध निदेशक यूपीएसटीडीसी आशीष कुमार, निदेशक इको पर्यटन पुष्प कुमार के., विशेष सचिव संस्कृति संजय कुमार सिंह, पर्यटन सलाहकार जे.पी. सिंह, क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी अंजू चौधरी, संयुक्त निदेशक प्रीति श्रीवास्तव, प्रचार अधिकारी कीर्ति एवं कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

फ्रूट होराइजन 2026’ में कृषि मंत्री का फोकस, भारतीय फलों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर जोर

लखनऊ गुरुवार को लखनऊ पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की आमदनी बढ़ाए जाने की तरीके बताए। चौहान ने लखनऊ में दो दिवसीय 'फ्रूट होराइजन 2026' कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से कहा कि इस कार्यक्रम का आयोजन फलों का उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और प्रसंस्करण के मूलभूत ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा, 'लखनऊ में दो दिवसीय 'फ्रूट होराइजन 2026' कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य फलों का उत्पादन बढ़ाना, गुणवत्ता सुधारना और खाद्य प्रसंस्करण की गतिविधियों को मजबूत करना है।' केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने, रोजगार सृजित करने और विदेशी मुद्रा कमाने के लिए भारत को फल और सब्जियों का निर्यात बढ़ाना होगा। मंत्री ने कहा कि भारत कई तरह के फलों, खासकर आम का एक प्रमुख उत्पादक है। उन्होंने कहा, 'हम जिस मात्रा और गुणवत्ता के आम पैदा करते हैं उसकी दुनिया में कोई बराबरी नहीं है। चाहे आम हों, अंगूर हों, केले हों या लीची, हम इनके प्रमुख उत्पादकों में शामिल हैं। हालांकि हमारा निर्यात अब भी काफी कम है।' केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि भारतीय फल और सब्जियां बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचें। फल और सब्जियों के निर्यात से बढ़ेगा रोजगार उन्होंने कहा, अगर हमारे फलों और सब्जियों का निर्यात बढ़ता है तो किसानों की आय बढ़ेगी, विदेशी मुद्रा की कमाई बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। चौहान ने कहा कि सरकार किसानों, निर्यातकों, प्रसंस्करणकर्ताओं और आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) जैसी संस्थाओं को एक साझा मंच पर साथ लायी है, ताकि इस क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की जा सके। चौहान ने कहा कि सरकार किसानों और निर्यातकों के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान खोजने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जहां कुछ मुद्दों को तुरंत हल किया जा सकता है, वहीं कुछ मुद्दों के लिए लंबे समय तक शोध की जरूरत होगी।

सीएम योगी का बड़ा दावा: यूपी बना देश का रोजगार और विकास का ग्रोथ इंजन

 लखनऊ यूपी में सरकारी भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और तकनीक आधारित बनाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को आयुष विभाग, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग तथा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के लिए चयनित 481 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। लोकभवन में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन रोजगार के अंतर्गत प्रदेश सरकार लगातार नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित कर रही है। अब तक 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। पूरी प्रक्रिया में किसी को कहीं भी सिफारिश कराने की नौबत नहीं आई। परीक्षा के बाद भी किसी स्तर पर सिफारिश या अनैतिक साधनों का उपयोग करने की कोई गुंजाइश नहीं थी। इसी साफ नीयत और स्पष्ट नीति का परिणाम है कि आज आपको नियुक्ति पत्र प्राप्त हो रहा है। सीएम योगी ने कहा कि पहले भर्तियां पैसों, जाति, मत, मजहब और क्षेत्र देखकर होती थीं, जिससे योग्य नौजवानों का शोषण होता था, लेकिन अब उत्तर प्रदेश में योग्यता ही चयन का आधार बनी है। किसी योग्य अभ्यर्थी की जगह घूसखोर व्यक्ति व्यवस्था में आ जाता, तो वह अगले 30-35 वर्षों तक पूरे सिस्टम को घुन की तरह खोखला करता। इसलिए सरकार ने पहले दिन से ही भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और लीकेज की संभावनाओं को समाप्त करने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जवाबदेही, तकनीक और पारदर्शिता के कारण आज यूपी देश में सबसे अधिक नियुक्तियां देने वाला राज्य बन चुका है। 15 दिनों के अंदर चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में सरकार ने नियुक्ति पत्र वितरण के नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। कोई सोच भी नहीं सकता था कि यूपी के नौजवानों को निष्पक्ष, पारदर्शी व सहज प्रक्रिया से सरकारी नौकरियां मिल पाएंगी। हमने अलग-अलग आयोगों व बोर्डों को जवाबदेही सौंपी और तकनीक का उपयोग कर हर योग्य नौजवान के साथ न्याय सुनिश्चित किया। इसी का परिणाम है कि हमने 9 लाख से अधिक नौजवानों को सरकारी नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराए हैं। पिछले 15 दिनों के अंदर यह हमारा चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। यूपी को बना दिया गया था भ्रष्ट-गुंडा-अराजक प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि याद कीजिए 2017 से पहले का उत्तर प्रदेश। देश-दुनिया में लोग यूपी का नाम सुनते ही शक की निगाह से देखते थे, दस कदम पीछे हट जाते थे। उत्तर प्रदेश को भ्रष्ट, गुंडा और अराजक प्रदेश बनाकर हर यूपीवासी के सामने पहचान का संकट खड़ा कर दिया था। लेकिन, मुझे बेहद प्रसन्नता है कि अब आप कहीं भी जाएं, यूपी का नाम सुनते ही सामने वाले का चेहरा चमक उठता है, वह स्वागत के लिए उत्सुक दिखाई देता है। यह है परसेप्शन का बदलाव और परिणाम भी उसी के अनुरूप हैं। प्रति व्यक्ति आय, वार्षिक बजट व अर्थव्यवस्था को तीन गुना किया मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय, वार्षिक बजट व समग्र अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है। यूपी अब रेवेन्यू सरप्लस राज्य और देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन है। यह सबसे ज्यादा नियुक्ति पत्र देने वाला, सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे बनाने वाला, किसानों को सर्वाधिक प्रोत्साहन देने वाला और समाज के हर वर्ग को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने वाला प्रदेश बन गया है। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले एमएसएमई क्षेत्र लगभग बंद पड़ा था, कोई प्रोत्साहन नहीं था, चारों तरफ अव्यवस्था और हताशा थी। आज देश में सबसे अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) उत्तर प्रदेश में हैं। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में 3 करोड़ से अधिक लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। गत वर्ष यूपी में 4000 से अधिक बड़े उद्योग आए और पिछले 9 वर्षों में बड़े उद्योगों की संख्या 14,000 से बढ़कर 32,000 से अधिक हो गई है। जिस यूपी को पहले देश के बॉटम-3 राज्यों में गिना जाता था, आज टॉप-3 राज्यों में शामिल है। उद्योग की मांग के अनुरूप स्किल्ड मैनपावर मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास विभाग बड़ा और महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। अनुकूल वातावरण व नीतियों से यूपी में लगातार बड़े निवेश प्रस्ताव आ रहे हैं, इन उद्योगों को मांग के अनुरूप स्किल्ड मैनपॉवर उपलब्ध कराना व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग तथा इसके अनुदेशकों की जिम्मेदारी है। व्यावसायिक शिक्षा विभाग ने टाटा टेक्नोलॉजीज के साथ मिलकर 150 से अधिक आईटीआई को आधुनिक बना दिया है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, स्पेस टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग आदि क्षेत्रों में सर्टिफिकेट कोर्स और ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। हम कुशल प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन व अन्य टेक्नीशियन भी तैयार कर रहे हैं। आज नियुक्त होने वाले 272 ट्रेंड अनुदेशक इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

नोएडा एयरपोर्ट: लखनऊ की पहली उड़ान, टिकट बुकिंग शुरू और किराया जानें

 ग्रेटर नोएडा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR के करोड़ों लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों की शुरुआत की आधिकारिक तारीख और रूट फाइनल हो गया है. IndiGo आज से अपनी उड़ानों के लिए टिकटों की बिक्री शुरू करने जा रही है।  एयरपोर्ट से पहली कमर्शियल फ्लाइट 15 जून को उड़ान भरेगी. यह न सिर्फ जेवर एयरपोर्ट के लिए बल्कि देश के एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर होगा. इंडिगो इस एयरपोर्ट से ऑपरेशन शुरू करने वाली पहली एयरलाइन बन गई है।  लखनऊ-नोएडा के बीच पहला रूट शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली उड़ान लखनऊ से नोएडा के लिए संचालित की जाएगी. यह रूट उत्तर प्रदेश की राजधानी और उभरते हुए औद्योगिक हब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी को कई गुना मजबूत कर देगा. किराए की बात करें तो 10 हजार रुपये से शुरू होगा।  15 जून की स्पेशल फ्लाइट्स डिटेल:-  लखनऊ से नोएडा, नोएडा से लखनऊ नोएडा से बेंगलुरु, बेंगलुरु से नोएडा 16 जून से नोएडा से लखनऊ के अलावा जम्मू, श्रीनगर, धर्मशाला सहित 16 मंजिलों के लिए फ्लाइट्स चलेंगी।  1 जुलाई से उड़ानों के शेड्यूल का विस्तार होगा. दरअसल, 1 जुलाई से नोएडा पर हर दिन लगभग 28 उड़ानें उतरेंगी और उड़ान भरेंगी. इसके अलावा, कुछ स्पेशल डेस्टिनेशन के लिए स्पेशल उड़ानें भी होंगी।  बिजनेस और टूरिज्म को मिलेगा बूस्ट जेवर एयरपोर्ट को भारत के सबसे बड़े एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है.  इसके शुरू होने से दिल्ली-NCR और पश्चिमी यूपी के यात्रियों को अब फ्लाइट पकड़ने के लिए दिल्ली (IGI) एयरपोर्ट जाने की मजबूरी नहीं होगी।  इसके अलावा, एयर कनेक्टिविटी मजबूत होने से इलाके में नए इन्वेस्टमेंट और व्यापारिक अवसरों के द्वार खुलेंगे. साथ ही आगरा और मथुरा जैसे पर्यटन केंद्रों के करीब होने के कारण विदेशी पर्यटकों के लिए भी यह पसंदीदा विकल्प बनेगा।