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बिजली बिल के बकायेदारों के खिलाफ चलेगा बड़ा अभियान, छह माह से दस साल तक के डिफॉल्टर्स पर होगी कुर्की

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग बिजली बिलों के बकाएदार हैं। मध्यांचल विद्युत निगम के अंतर्गत आने वाले जिलों में तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। निगम की सितम्बर 2026 में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि करीब 15.65 लाख उपभोक्ताओं ने बिजली कनेक्शन लेने के बाद से आज तक एक बार भी बिल जमा नहीं किया है। इन बकायेदारों में छह माह से लेकर 10 साल तक पुराने उपभोक्ता शामिल हैं, जिन पर 10 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का भारी-भरकम बकाया है। अब इनके खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जाएगा। कुर्की तक की कार्रवाई की जाएगी। विभाग की नौ सितम्बर की रिपोर्ट के मुताबिक जानकीपुरम 661, गोमतीनगर 145, अमौसी 8342, लखनऊ सेंट्रल जोन 40, सीतापुर जोन 3,35,962, रायबरेली जोन 1,12,073, अयोध्या जोन 3,66,298, देवीपाटन जोन 3,78,204, बरेली-एक जोन 1,14,749 और बरेली-दो जोन 2,48,726 है। यानि 15,65,200 बकायेदार है। विभाग द्वारा कई बकायेदारों को कुर्की के नोटिस जारी किये जा चुके हैं, फिर भी न तो उनसे वसूली हो सकी है और न ही उनके बिजली कनेक्शन काटे गए हैं। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की इस लापरवाही के कारण निगम को अरबों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। एमडी ने सभी संबंधित एक्सईएन और एसडीओ को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे डिफाल्टरों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाकर वसूली की जाए। यदि बकाया राशि जमा नहीं की जाती है, तो उनके कनेक्शन काटने के साथ-साथ कुर्की की विधिक कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी। बिजली संकट को लेकर उपभोक्ता परिषद आक्रोशित वहीं, कोयले की कमी की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति को राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पहले से तैयारियों में बरती गई लापरवाही बताया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि हर साल सितंबर में बारिश और जलभराव जैसी स्थिति होती है। हालांकि, दिक्कत इस बार केवल इसलिए हुई क्योंकि पावर कॉरपोरेशन ने अपनी तैयारियां पूरी नहीं रखी थीं। उन्होंने कहा कि यूपी में 2000 से 3000 मेगावॉट बिजली की कमी पहले ही बनी हुई थी, लेकिन सोमवार को यूपीएसएलडीसी के आंकड़ों के मुताबिक लंबे समय के लिए बंद हुईं और मशीनों की वजह से यह कमी 5340 मेगावॉट हो गई है। ओबरा-सी की यूनिट-1 व यूनिट-2, मेजा यूनिट-1 और हरदुआगंज की यूनिट-9 से उत्पादन नहीं हो रहा है। इसके अलावा रोजा यूनिट-2, अनपरा यूनिट-7, घाटमपुर यूनिट-1, हरदुआगंज एक्सटेंशन-2 की यूनिट-1 और जवाहरपुर यूनिट-2 भी बंद है। यह कोयले की उपलब्धता में कमी के बजाय प्रबंधन में की गई चूक का नतीजा है। सितंबर 2025 में प्रदेश ने 30,255 मेगावॉट अधिकतम बिजली आपूर्ति की गई थी, जबकि इस साल सितंबर में आपूर्ति करीब 25,000-26,000 मेगावॉट के आसपास बनी है, जबकि जरूरत 27,000-29,000 मेगावॉट है।

जलभराव को लेकर योगी सरकार सख्त, नगरीय निकायों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से आमजन को राहत दिलाने के लिए योगी सरकार ने नगरीय निकायों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने प्रदेश के सभी नगरीय क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था की नियमित निगरानी और संवेदनशील इलाकों में पहले से आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ए.के. शर्मा ने अधिकारियों से कहा कि वाराणसी सहित प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में जल निकासी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र को चिन्हित कर वहां नालों, सीवर लाइनों और पम्पिंग स्टेशनों की स्थिति की पहले से समीक्षा की जाए। जहां कहीं भी जल निकासी की व्यवस्था में कमी दिखाई दे, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। अधिकारी संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में पहले से आवश्यक तैयारियां पूरी रखें। नगर विकास मंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन की ओर से अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन और दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऐसे में कार्यों के क्रियान्वयन में लापरवाही या उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी स्वीकार नहीं होगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नागरिकों को बेहतर, सुगम और सुरक्षित नगरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। एके शर्मा ने कहा कि वाराणसी जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर में जल निकासी, सीवर और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। जलभराव के तत्काल समाधान के साथ इसके स्थायी निराकरण के लिए भी प्रभावी कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। योगी सरकार की प्राथमिकता आमजन को राहत और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। वाराणसी में हुई कार्रवाई इसी जवाबदेही का संदेश है कि जनहित के कार्यों में जिम्मेदारी से समझौता करने वालों के खिलाफ शासन सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो की 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन

लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रीन मोबिलिटी और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के विजन का असर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के संचालन प्रतिफल (राजस्व) में लगातार दिखाई दे रहा है। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में डिपो की 100 ई-बसों ने कुल 2.96 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.99 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान की और 61.75 लाख से अधिक का राजस्व अर्जित किया। इस अवधि में प्रति बस प्रतिदिन परिचालन, यात्री संख्या और आय के आधार पर अगस्त की तुलना में बेहतर औसत दैनिक प्रदर्शन दर्ज किया गया। नियमित संचालन प्रारंभ होने के बाद 20 जून से 13 सितंबर 2026 तक तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों ने कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन किया। इस दौरान 7.18 लाख से ज्यादा यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ उठाया, जिससे कुल 2.24 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया। जून से सितंबर तक बढ़ता गया ई-बसों का कारोबार नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के अधिकारियों के मुताबिक 20 से 30 जून के 11 दिनों में 100 ई-बसों ने 1.47 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 28,053 यात्रियों को सेवा दी और 9.07 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। जुलाई में परिचालन बढ़कर 4.79 लाख किलोमीटर, यात्री संख्या 1.50 लाख और राजस्व 47.93 लाख तक पहुंच गया। अगस्त में बसों ने 5.89 लाख किलोमीटर की दूरी तय की और 3.40 लाख यात्रियों को सेवा दी। इस महीने 1.05 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में ही 2.96 लाख किलोमीटर परिचालन, 1.99 लाख यात्रियों और 61.75 लाख का राजस्व प्राप्त किया। अगस्त के 190.21 किलोमीटर प्रति बस प्रतिदिन के मुकाबले सितंबर में यह बढ़कर 227.78 किलोमीटर हो गया। इसी प्रकार यात्री प्रति बस प्रतिदिन की संख्या 109.79 से बढ़कर 153.68 और आय प्रति बस प्रतिदिन 3,414.86 से बढ़कर 4,750.20 रुपये हो गई। आय प्रति किलोमीटर भी 17.95 से बढ़कर 20.85 रुपये हो गई है। चारों अवधियों को मिलाकर 20 जून से 13 सितंबर तक कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन हुआ, जबकि 7.18 लाख यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ लिया। इस दौरान कुल 2.24 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर में बनाया बेहतर दैनिक प्रदर्शन नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 1.50 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.04 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा दी। इस दौरान 31.45 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 231.17 किलोमीटर, यात्री संख्या 160.14 और आय 4,839.17 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर भी 20.93 पहुंच गई। अगस्त की तुलना में दैनिक परिचालन और यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। ग्रेटर नोएडा में यात्री संख्या और आय ने पकड़ी तेज रफ्तार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 77,110 किलोमीटर की दूरी तय की और 53,194 यात्रियों को सफर कराया। इससे 16.17 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 237.26 किलोमीटर और यात्री संख्या 163.67 रही। आय प्रति किलोमीटर 20.98 रुपये व आय प्रति बस प्रतिदिन 4,978.15 रुपये दर्ज की गई। तीनों प्राधिकरणों में ग्रेटर नोएडा प्रति बस प्रतिदिन परिचालित किलोमीटर, यात्री संख्या, आय प्रति किलोमीटर व आय प्रति बस प्रतिदिन के आधार पर शीर्ष पर रहा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी बढ़ा ई-बसों का उपयोग यमुना प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 68,749 किलोमीटर का परिचालन किया और 42,497 यात्रियों को सेवा दी। इस अवधि में 14.11 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 211.54 किलोमीटर, यात्री संख्या 130.76 और आय प्रति बस प्रतिदिन 4,344.32 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर 20.54 रुपये दर्ज हुई, जिससे इस क्षेत्र में भी ई-बस सेवा के मजबूत होते उपयोग का परिणाम दिख रहा है। सीएम योगी के विजन से मिली ग्रीन मोबिलिटी को मजबूती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जून 2026 में नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का उद्घाटन और ई-बसों को हरी झंडी दिखाते हुए एनसीआर में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया था। उनका विजन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को ग्रीन मोबिलिटी से जोड़ते हुए जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत करना है। बॉक्स नोएडा में बनेगा कमांड सेंटर, होगी लाइव निगरानी यूपीएसआरटीसी मुख्यालय लखनऊ के मुताबिक नोएडा में तीनों प्राधिकरणों से जुड़ी इलेक्ट्रिक बसों के लिए कमांड सेंटर बनाने की तैयारी भी चल रही है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रस्तावित 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम से ई-बसों की लाइव निगरानी की जाएगी। इससे बसों के संचालन, रूट और सेवाओं पर लगातार नजर रखने के साथ यात्रियों को बेहतर और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

GeM पर यूपी के कारोबारियों का बढ़ा दबदबा, एक साल में जुड़े 1 लाख से अधिक नए विक्रेता

योगी सरकार की नीतियों से जेम पर बढ़ी यूपी के कारोबारियों की धमक, एक साल में 1 लाख से अधिक नए विक्रेता जुड़े सरकारी खरीद में स्थानीय उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी, महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप फर्मों के पंजीकरण में भी उल्लेखनीय वृद्धि 31 मार्च 2026 तक कुल पंजीकृत फर्मों की संख्या 7.86 लाख पहुंची, एमएसई फर्मों का पंजीकरण 16 फीसदी और महिला फर्मों का 21 फीसदी बढ़ा उद्यमिता, एमएसएमई विकास और कारोबारी सुगमता पर जोर के चलते प्रदेश की अर्थव्यवस्था में छोटे कारोबारियों की भूमिका हो रही और अधिक मजबूत लखनऊ  योगी सरकार की कारोबारी सुगमता, एमएसएमई प्रोत्साहन और स्थानीय उद्यमियों को सरकारी खरीद से जोड़ने की नीतियों का असर अब सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश के कारोबारियों की सरकारी खरीद व्यवस्था में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश में जेम पर पंजीकृत कुल फर्मों की संख्या बढ़कर 7,86,687 पहुंच गई। यह 31 मार्च 2025 को दर्ज 6,85,488 फर्मों के मुकाबले 15 फीसदी अधिक है। यानी एक साल में 1,01,199 नई फर्में जेम से जुड़ीं। सरकारी खरीद के इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कारोबारियों की बढ़ती मौजूदगी प्रदेश में छोटे उद्यमों, महिला उद्यमियों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के कारोबार को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। आंकड़े बताते हैं कि कुल पंजीकरण के साथ-साथ एमएसई, महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप फर्मों की भागीदारी में भी तेजी आई है। एमएसई फर्मों का पंजीकरण 16 फीसदी बढ़ा जेम पर उत्तर प्रदेश की सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसई) फर्मों का पंजीकरण 31 मार्च 2025 के 1,06,855 से बढ़कर 31 मार्च 2026 को 1,23,075 हो गया। इस श्रेणी में 16,220 फर्मों की वृद्धि दर्ज की गई, जो 16 फीसदी है। इससे संकेत मिलता है कि प्रदेश के छोटे उद्यम सरकारी खरीद के लिए उपलब्ध डिजिटल बाजार का अधिक लाभ उठा रहे हैं। योगी सरकार की एमएसएमई केंद्रित नीतियों के तहत छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहन देने, कारोबार के अवसर बढ़ाने और सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जेम पर पंजीकरण में यह बढ़ोतरी इसी दिशा में आगे बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। महिला उद्यमियों की भागीदारी में 21 फीसदी उछाल सरकारी खरीद व्यवस्था में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। 31 मार्च 2025 को GeM पर कुल 19,418 महिला फर्म पंजीकृत थीं, जिनकी संख्या 31 मार्च 2026 को बढ़कर 23,407 हो गई। एक वर्ष में 3,989 महिला फर्मों का इजाफा हुआ। इस तरह महिला फर्म पंजीकरण में 21 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़ोतरी प्रदेश में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सरकारी खरीद में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी उन्हें अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर देती है। एससी-एसटी फर्मों का पंजीकरण 18 फीसदी बढ़ा जेम पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की फर्मों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 31 मार्च 2025 को 4,890 एससी/एसटी फर्म पंजीकृत थीं। 31 मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 5,783 हो गई। इस श्रेणी में 893 फर्मों की बढ़ोतरी हुई, जो 18 फीसदी है। सरकारी खरीद के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन वर्गों की बढ़ती भागीदारी समावेशी कारोबारी अवसरों की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे छोटे उद्यमों को सरकारी संस्थानों के लिए उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराने का अवसर मिलता है। स्टार्टअप फर्मों की संख्या 21 फीसदी बढ़ी प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की बढ़ती सक्रियता भी GeM के आंकड़ों में दिखाई दे रही है। 31 मार्च 2025 को कुल 4,404 स्टार्टअप फर्में पंजीकृत थीं, जो 31 मार्च 2026 को बढ़कर 5,350 हो गईं। एक वर्ष में 946 स्टार्टअप फर्मों का इजाफा हुआ। इस श्रेणी में 21 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। स्टार्टअप फर्मों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि नए उद्यम सरकारी संस्थानों के लिए अपने नवाचार, तकनीकी समाधान और सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में निवेश, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की सरकार की प्राथमिकताओं के बीच यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है। सरकारी खरीद में स्थानीय कारोबारियों के लिए बढ़ते अवसर उत्तर प्रदेश में जेम के स्टेट नोडल और डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की क्रय नीति छोटे और स्थानीय उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। उत्तर प्रदेश जेम क्रय नीति-2024 छोटे उद्यमियों के लिए वरदान साबित हुई है। इस नीति के माध्यम से सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ छोटे उद्यमियों को भी सरकारी खरीद में भागीदारी का बेहतर अवसर मिल रहा है। उत्तर प्रदेश द्वारा अपनाई गई इस व्यवस्था की उपयोगिता अब व्यापक स्तर पर दिखाई दे रही है और देश के अन्य हिस्सों में भी इसे अपनाया जा रहा है। यह नीति स्पष्ट रूप से योगी सरकार की उस मंशा को दर्शाती है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ छोटे और स्थानीय उद्यमियों को आगे बढ़ाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर समान रूप से जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में कुल फर्मों के साथ एमएसई, महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप फर्मों की संख्या में वृद्धि यह संकेत देती है कि सरकारी खरीद व्यवस्था में विविध कारोबारी समूहों की भागीदारी बढ़ रही है।  एक नजर में जेम पर यूपी की बढ़ती भागीदारी श्रेणी| कुल विक्रेता-31 मार्च 2025| कुल विक्रेता-31 मार्च 2026| वृद्धि कुल पंजीकृत फर्म| 6,85,488| 7,86,687| 15% कुल एमएसई फर्म| 1,06,855| 1,23,075| 16% कुल महिला फर्म| 19,418| 23,407| 21% कुल एससी/एसटी फर्म| 4,890| 5,783| 18% कुल स्टार्टअप फर्म| 4,404| 5,350| 21%

महिलाओं के अधिकारों की ढाल बनेगा यूसीसी, भूपेंद्र चौधरी ने किया बड़ा दावा

'मोदी की गारंटी पर देश को भरोसा', यूसीसी पर अमित शाह के बयान का भूपेंद्र चौधरी ने किया स्वागत महिलाओं के अधिकारों की ढाल बनेगा यूसीसी, भूपेंद्र चौधरी ने किया बड़ा दावा यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा लखनऊ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पहले ही अपने संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता को प्रमुखता से शामिल किया था और इसे लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की थी। भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा का संकल्प पत्र 14 अप्रैल 2024 को जारी किया गया था। पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से समान नागरिक संहिता को शामिल किया था और संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप इसे राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के तहत लागू करने की बात कही थी। महिलाओं की समानता की दिशा में मजबूत कदम 'यूसीसी' उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि जब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं होती, तब तक महिलाओं को उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। समान नागरिक संहिता महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने और समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार देश में एक आधुनिक, प्रभावी और सभी नागरिकों को समान सुरक्षा प्रदान करने वाला कानून लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का हालिया बयान इसी दिशा में सरकार की मंशा और संकल्प को दर्शाता है। पीएम मोदी की गांरटी पर देश को विश्वास भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि वह गृह मंत्री अमित शाह के इस वक्तव्य का स्वागत करते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो गारंटी है, उस पर देश को विश्वास है और केंद्र सरकार अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो वादे देश की जनता से किए हैं, उन्हें पूरा करने का काम लगातार किया जा रहा है और समान नागरिक संहिता भी उसी संकल्प का हिस्सा है। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उनके इस बयान के बाद यूसीसी को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने भी पार्टी के रुख को दोहराते हुए इसे महिलाओं के अधिकारों और समान न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है।

31 हजार से अधिक PRD जवानों को परिवार सहित 5 लाख तक का इलाज, योगी सरकार ने बढ़ाया सुरक्षा कवच

जो प्रदेश की सेवा में जुटे, योगी सरकार ने उनके परिवारों को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच 31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने समाज के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले पीआरडी स्वयंसेवकों, विद्यालयों की रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के कल्याण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन सेवा वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ उनके और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया है। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ने से रोकने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि सरकार ने कर्मचारी के साथ उसके आश्रित परिवार को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में रखा है। 31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज प्रदेश की सुरक्षा, यातायात, आपदा और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करने वाले 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार का लाभ मिलेगा। इससे पीआरडी स्वयंसेवकों के परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़ी रकम जुटाने की चिंता से राहत मिलेगी। रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों के लिए भी सरकार ने आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को एक साथ जोड़ा है। उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की वृद्धि के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया गया है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह सुविधा बीमारी के समय बड़ा आर्थिक सहारा साबित हो सकती है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ बाल विकास, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए भी सरकार ने मानदेय बढ़ाया है। कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है। साथ ही दोनों के परिवारों को पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया गया है। मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर इन फैसलों में योगी सरकार की नीति का एक स्पष्ट पक्ष दिखाई देता है, सेवा करने वाले व्यक्ति के साथ उसके परिवार की भी चिंता। बीमारी में इलाज के लिए बड़ी रकम की व्यवस्था करना निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा सीधे परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ती है। पीआरडी जवानों से लेकर रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों तक, सरकार ने मानदेय बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा जोड़कर इन सेवा वर्गों के लिए आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का दोहरा कवच तैयार किया है।

व्यक्तिगत कारणों और पारिवारिक प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए आईएएस दिव्या मित्तल ने दिया था स्वैच्छिक इस्तीफा

लखनऊ यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल आज से प्रशासनिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त हो गई हैं। उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या का इस्तीफा केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने स्वीकार्य करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। उनका इस्तीफा आज 15 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। दिव्या ने 30 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए स्वेच्छा से प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था। अब उनके अगले कदम पर अटकलें लगाई जा रही हैं। राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार को भेजा था। इसके बाद केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के पास पहुंचा था। दिव्या के पति गगनदीप सिंह ढिल्लों ने भी चार साल पहले 2022 में सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया था। गगनदीप सिंह 2011 बैच के भारतीय व्यापार सेवा (आईटीएस) अधिकारी थे। यूपी कॉडर की वर्ष 2013 बैच की आईएएस दिव्या मित्तल ने इस्तीफा दिए जाने की जानकारी अपने फेसबुक और एक्स एकाउंट के माध्यम से दी थी। दिव्या को मई 2026 में देवरिया के डीएम के पद से हटाकर राजस्व विभाग में अपेक्षाकृत कम महत्व के विशेष सचिव के पद पर तैनात किया गया था। वे तभी से असहज बताई जा रही थीं। मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर पहली तैनाती आईएएस बनने के बाद मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर पहली तैनाती मिली थी। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और कानपुर नगर में यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक के पद पर तैनात रहीं। बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष भी रहीं। संतकबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में काम किया। बीच में उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी में मुख्य कार्यपालक अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाली। आईआईटी और आईआईएम की पढ़ाई, लाखों की नौकरी छोड़ी दिव्या मित्तल का जन्म हरियाणा के रेवाड़ी में 23 नवंबर 1983 को हुआ था। शुरुआती पढ़ाई के बाद आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री हासिल की। गगनदीप के साथ शादी के बाद दोनों लंदन चले गए। जहां एक कंपनी की जॉब की। बाद में लाखों की सैलरी वाली नौकरी छोड़ देश सेवा के लिए दोनों भारत आ गए और यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। 2021 में पति गगनदीप और 2013 में दिव्या मित्तल ने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की। मिर्जापुर से लड़ेंगी चुनाव? दिव्या को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। एक चर्चा उनके मिर्जापुर से विधानसभा चुनाव लड़ने की भी है। इस्तीफा देते समय भी उन्होंने मिर्जापुर को ही याद किया था। यहां की एक बुजुर्ग मां को याद किया था। उन्होंने अपनी पोस्ट लिखा था कि आज आभार से आंखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध मां, जो अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचता देख कुछ नहीं बोलीं, बस कांपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।?

अगले 48 घंटों में हल्की बारिश के आसार, 19 सितंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून की होगी विदाई

लखनऊ उत्तर प्रदेश में इस सीजन मानसून की झमाझम बारिश के बाद अब इसकी विदाई की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। लखनऊ के अमौसी स्थित यूपी-उत्तराखंड के मौसम मुख्यालय के अनुसार 19 सितंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क हो जाने की संभावना है। इससे पहले पश्चिमी यूपी में 17 सितंबर को एक बार फिर झमाझमा बारिशकी हो सकती है। अब पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक वापसी शुरू होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। 48 घंटे आंशिक तेजी के बाद थमेगी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश में कोई बहुत बड़ा सक्रिय मौसम तंत्र मौजूद नहीं है। हालांकि अरब सागर से आ रही नमी के असर से आगामी 48 घंटों के दौरान राज्य में बारिश की गतिविधियों में हल्की आंशिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके बाद मानसूनी बारिश में उत्तरोत्तर कमी आएगी और 19 सितंबर से पश्चिमी यूपी का मौसम शुष्क होने लगेगा। मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र पिछले 72 घंटों में मध्य भारत से गुजरते हुए वर्तमान में दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उससे सटे गुजरात के ऊपर केंद्रित है। मानसून की ट्रफलाइन अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसकी हुई है लेकिन इसका पूर्वी छोर सामान्य स्थिति के निकट है। कोई बड़ा सिस्टम न होने के बावजूद केवल नमी के प्रभाव से सीमित और छिटपुट बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। सामान्य से तीन फीसदी का अंतर रहा इस बार मौसम विभाग के अनुसार इस सीजन के दौरान यूपी में अब तक 666 मिलीमीटर वर्षा हुई है। यह सामान्य (685.7 मिमी) से केवल 3 प्रतिशत कम है। वेस्ट यूपी में छह फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। वेस्ट यूपी में इस सीजन मानसून ने खूब भिगोया है। यहां सामान्य 628 मिमी की तुलना में 663.9 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। यानी सामान्य से 6 फीसदी अधिक वर्षा हुई। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 667.5 मिलीमीटर वर्षा हुई जो सामान्य (726.9 मिमी) के मुकाबले 8 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। विदाई से पहले वेस्ट यूपी को भिगो सकता है मानसून मेरठ सहित वेस्ट यूपी में विदाई से पहले मानसून एक बार फिर से भिगो सकता है। 17 सितंबर तक पूरे क्षेत्र में अच्छी बारिश के आसार बन रहे हैं। आज देर रात से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसे पहले भी वेस्ट यूपी में कुछ हिस्सों में बौछारें और हल्की बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं। 19 सितंबर के बाद राजस्थान से मानसून वापसी की प्रक्रिया भी शुरू होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने सोमवार को इसकी घोषणा कर दी। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार केा मेरठ में दिन-रात का तापमान क्रमश: 34.1 एवं 24.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। रविवार के सापेक्ष दिन में 0.9 और रात में 0.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई। बावजूद इसके दिन-रात के तापमान सामान्य से 0.2 एवं 1.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड हुए। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक सामान्य के आसपास ही तापमान बने रहने के आसार हैं। सोमवार को मेरठ का एक्यूआई 61 दर्ज हुआ जो संतोषजनक श्रेणी में है।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में ई-बसों का बढ़ा क्रेज, 7.18 लाख से ज्यादा लोगों ने किया सफर

योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो की 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित ई-बसों में अब तक 7.18 लाख से अधिक लोगों ने की यात्रा तीनों प्राधिकरणों में 2.24 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ, लगातार सेवाओं का हो रहा विस्तार जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से ग्रीन मोबिलिटी तक, योगी सरकार के विजन को मिली जमीनी स्तर पर सफलता 24 घंटे लाइव निगरानी की तैयारी, नोएडा में बनेगा तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों के लिए कमांड सेंटर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रीन मोबिलिटी और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के विजन का असर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के संचालन प्रतिफल (राजस्व) में लगातार दिखाई दे रहा है। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में डिपो की 100 ई-बसों ने कुल 2.96 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.99 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान की और 61.75 लाख से अधिक का राजस्व अर्जित किया। इस अवधि में प्रति बस प्रतिदिन परिचालन, यात्री संख्या और आय के आधार पर अगस्त की तुलना में बेहतर औसत दैनिक प्रदर्शन दर्ज किया गया। नियमित संचालन प्रारंभ होने के बाद 20 जून से 13 सितंबर 2026 तक तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों ने कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन किया। इस दौरान 7.18 लाख से ज्यादा यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ उठाया, जिससे कुल 2.24 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया। जून से सितंबर तक बढ़ता गया ई-बसों का कारोबार नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के अधिकारियों के मुताबिक 20 से 30 जून के 11 दिनों में 100 ई-बसों ने 1.47 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 28,053 यात्रियों को सेवा दी और 9.07 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। जुलाई में परिचालन बढ़कर 4.79 लाख किलोमीटर, यात्री संख्या 1.50 लाख और राजस्व 47.93 लाख तक पहुंच गया। अगस्त में बसों ने 5.89 लाख किलोमीटर की दूरी तय की और 3.40 लाख यात्रियों को सेवा दी। इस महीने 1.05 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में ही 2.96 लाख किलोमीटर परिचालन, 1.99 लाख यात्रियों और 61.75 लाख का राजस्व प्राप्त किया। अगस्त के 190.21 किलोमीटर प्रति बस प्रतिदिन के मुकाबले सितंबर में यह बढ़कर 227.78 किलोमीटर हो गया। इसी प्रकार यात्री प्रति बस प्रतिदिन की संख्या 109.79 से बढ़कर 153.68 और आय प्रति बस प्रतिदिन 3,414.86 से बढ़कर 4,750.20 रुपये हो गई। आय प्रति किलोमीटर भी 17.95 से बढ़कर 20.85 रुपये हो गई है। चारों अवधियों को मिलाकर 20 जून से 13 सितंबर तक कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन हुआ, जबकि 7.18 लाख यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ लिया। इस दौरान कुल 2.24 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया। नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर में बनाया बेहतर दैनिक प्रदर्शन नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 1.50 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.04 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा दी। इस दौरान 31.45 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 231.17 किलोमीटर, यात्री संख्या 160.14 और आय 4,839.17 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर भी 20.93 पहुंच गई। अगस्त की तुलना में दैनिक परिचालन और यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। ग्रेटर नोएडा में यात्री संख्या और आय ने पकड़ी तेज रफ्तार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 77,110 किलोमीटर की दूरी तय की और 53,194 यात्रियों को सफर कराया। इससे 16.17 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 237.26 किलोमीटर और यात्री संख्या 163.67 रही। आय प्रति किलोमीटर 20.98 रुपये व आय प्रति बस प्रतिदिन 4,978.15 रुपये दर्ज की गई। तीनों प्राधिकरणों में ग्रेटर नोएडा प्रति बस प्रतिदिन परिचालित किलोमीटर, यात्री संख्या, आय प्रति किलोमीटर व आय प्रति बस प्रतिदिन के आधार पर शीर्ष पर रहा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी बढ़ा ई-बसों का उपयोग यमुना प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 68,749 किलोमीटर का परिचालन किया और 42,497 यात्रियों को सेवा दी। इस अवधि में 14.11 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 211.54 किलोमीटर, यात्री संख्या 130.76 और आय प्रति बस प्रतिदिन 4,344.32 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर 20.54 रुपये दर्ज हुई, जिससे इस क्षेत्र में भी ई-बस सेवा के मजबूत होते उपयोग का परिणाम दिख रहा है। सीएम योगी के विजन से मिली ग्रीन मोबिलिटी को मजबूती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जून 2026 में नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का उद्घाटन और ई-बसों को हरी झंडी दिखाते हुए एनसीआर में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया था। उनका विजन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को ग्रीन मोबिलिटी से जोड़ते हुए जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत करना है। बॉक्स नोएडा में बनेगा कमांड सेंटर, होगी लाइव निगरानी यूपीएसआरटीसी मुख्यालय लखनऊ के मुताबिक नोएडा में तीनों प्राधिकरणों से जुड़ी इलेक्ट्रिक बसों के लिए कमांड सेंटर बनाने की तैयारी भी चल रही है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रस्तावित 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम से ई-बसों की लाइव निगरानी की जाएगी। इससे बसों के संचालन, रूट और सेवाओं पर लगातार नजर रखने के साथ यात्रियों को बेहतर और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

31 हजार से अधिक PRD जवानों को परिवार सहित 5 लाख तक का इलाज, रसोइयों-आंगनवाड़ी कर्मियों को भी लाभ

जो प्रदेश की सेवा में जुटे, योगी सरकार ने उनके परिवारों को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच 31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने समाज के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले पीआरडी स्वयंसेवकों, विद्यालयों की रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के कल्याण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन सेवा वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ उनके और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया है। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ने से रोकने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि सरकार ने कर्मचारी के साथ उसके आश्रित परिवार को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में रखा है। 31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज प्रदेश की सुरक्षा, यातायात, आपदा और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करने वाले 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार का लाभ मिलेगा। इससे पीआरडी स्वयंसेवकों के परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़ी रकम जुटाने की चिंता से राहत मिलेगी। रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों के लिए भी सरकार ने आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को एक साथ जोड़ा है। उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की वृद्धि के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया गया है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह सुविधा बीमारी के समय बड़ा आर्थिक सहारा साबित हो सकती है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ बाल विकास, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए भी सरकार ने मानदेय बढ़ाया है। कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है। साथ ही दोनों के परिवारों को पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया गया है। मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर इन फैसलों में योगी सरकार की नीति का एक स्पष्ट पक्ष दिखाई देता है, सेवा करने वाले व्यक्ति के साथ उसके परिवार की भी चिंता। बीमारी में इलाज के लिए बड़ी रकम की व्यवस्था करना निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा सीधे परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ती है। पीआरडी जवानों से लेकर रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों तक, सरकार ने मानदेय बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा जोड़कर इन सेवा वर्गों के लिए आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का दोहरा कवच तैयार किया है।