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20 रुपये का सिक्का 5-6 रुपये में तैयार, एजेंटों को 15 रुपये तक में बेचता था गिरोह

सहारनपुर यूपी के सहारनपुर में पीएनबी बैंक की करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपए के नकली नोटों की जांच के बीच ही नकली सिक्कों की फैक्ट्री ने खलबली मचाई हुई है। इसके सिंडिकेट की नींव दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखी गई थी। नकली सिक्कों के इस कारोबार में मुनाफे का बड़ा खेल सामने आया है। पुलिस पूछताछ के मुताबिक 20 रुपये का एक नकली सिक्का तैयार करने में करीब पांच से छह रुपये खर्च होते थे। तैयार सिक्के एजेंटों को 12 से 15 रुपये तक में बेचे जाते थे। कम लागत और अधिक अंकित मूल्य के कारण गिरोह ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को कारोबार का आधार बनाया। छह मशीनों से रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के तैयार किए जाने की बात सामने आई है। गिरोह के मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह और सहारनपुर निवासी हिमांशु उर्फ गुल्लू की मुलाकात तिहाड़ जेल में ही हुई थी। पुलिस का दावा है कि इसी मुलाकात ने सहारनपुर में नकली सिक्कों की फैक्ट्री खड़ी कर दी। सहारनपुर पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा था। उस समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। जेल में उसकी मुलाकात हिमांशु से हुई। दोनों जेल से बाहर आए तो संपर्क बना रहा। इसके बाद सहारनपुर में नकली सिक्कों के कारोबार की योजना तैयार हुई और धीरे-धीरे अन्य लोग भी इससे जुड़ते गए। अलग-अलग हिस्सों में बंटा था काम गिरोह ने काम को अलग-अलग हिस्सों में बांट रखा था। कोई मशीन और उत्पादन की जिम्मेदारी संभालता था तो कोई तैयार सिक्कों को एजेंटों तक पहुंचाता था। तीतरों क्षेत्र में मशीनें लगाकर बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया गया। पुलिस के अनुसार गिरोह में करीब आठ लोग सक्रिय थे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तिहाड़ में बनी इस कड़ी ने बाहर निकलने के बाद कितने लोगों को अपने साथ जोड़ा और नेटवर्क किन-किन शहरों तक पहुंचा। पुलिस को मिले सात रजिस्टर और आठ मोबाइल इस सवाल का जवाब तलाशने में अहम साबित हो सकते हैं। जांच एजेंसियां पुराने संपर्कों, एजेंटों और संभावित सहयोगियों की पहचान में जुटी हैं। नेपाल में भी फैक्ट्री लगाने की कोशिश पुलिस से बचने के लिए नेपाल में छिपे उपकार ने वहां भी नकली सिक्कों के निर्माण का ठिकाना खड़ा करने की कोशिश की थी। अब वर्षों बाद उसी नेटवर्क का उत्पादन केंद्र यूपी के सहारनपुर में तैयार किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय है। पहले सुनार का काम करने वाले उपकार ने सिक्के बनाने की तकनीकी जानकारी को बाद में नकली करेंसी के इस कारोबार में इस्तेमाल किया। वर्ष 2017 में उसे हरियाणा के कोंडली से गिरफ्तार किया गया था। सहारनपुर में तैयार सिक्कों को खपाने के लिए भी नेटवर्क तैयार था। एजेंटों के जरिए माल शराब ठेकों, टोल प्लाजा और किराना दुकानों तक पहुंचाया जाना था। जांच में पंजाब से बिहार और पश्चिमी यूपी तक संपर्क सामने आए हैं। मधुबनी, भदोही और बदायूं के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस अब मोबाइल और रजिस्टरों के जरिए एजेंटों, मशीनों की व्यवस्था और सप्लाई चैन से जुड़े लोगों की कड़ियां जोड़ रही है। पंजाब से बिहार तक फैला नेटवर्क नकली सिक्कों के इस नेटवर्क की पहुंच कई राज्यों तक सामने आई है। मुख्य आरोपी उपकार लूथरा पंजाब का रहने वाला है। पुलिस जांच में पंजाब के साथ बिहार और उत्तर प्रदेश के मधुबनी, भदोही व बदायूं के नाम सामने आए हैं। पुराने संपर्कों और जेल में हुई मुलाकातों के बाद सहारनपुर में नेटवर्क खड़ा किया गया था।

केयर इकोनॉमी से यूपी में खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, 12 विभाग मिलकर बनाएंगे रोडमैप

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और जरूरतमंदों की देखभाल को अब संगठित सेवा क्षेत्र से जोड़कर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। योगी सरकार ने ‘केयर इकोनॉमी’ को रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा का नया आधार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में सोमवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में समाज कल्याण विभाग की नोडल भूमिका में ‘सतत केयर इकोनॉमी का निर्माण देखभाल कार्य को पहचान, महिलाओं को सशक्तीकरण और समावेशी आजीविका के अवसर’ विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित हुई। राज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से केयर इकोनॉमी उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन और बुजुर्गों व वंचित वर्गों की सुरक्षा के लिए परिवर्तनकारी कदम साबित होगी। कुशल केयरगिवर्स तैयार करने, उनके प्रशिक्षण और प्रमाणन तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से प्रदेश में मजबूत, समावेशी और टिकाऊ केयर इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है। कार्यशाला व्यापक ‘राज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप’ तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बनेगी। 12 विभाग मिलकर तय करेंगे आगे की रणनीति कार्यशाला में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम, कौशल विकास और दिव्यांगजन सशक्तीकरण समेत 12 प्रमुख सरकारी विभागों ने भागीदारी की। इसका उद्देश्य अलग-अलग विभागों की योजनाओं और संसाधनों को एक साझा रणनीति से जोड़कर केयर सेक्टर को व्यवस्थित रूप देना है। इससे देखभाल के पारंपरिक और अनौपचारिक कार्य को भी आर्थिक गतिविधि के रूप में पहचान देने की दिशा में काम होगा। 4 प्रमुख स्तंभों पर हुआ मंथन कार्यशाला में केयर इकोनॉमी के चार प्रमुख स्तंभों पर विशेष चर्चा हुई। पहला, घरेलू और अनौपचारिक देखभाल कार्य का आर्थिक मूल्यांकन कर उसे पहचान और उचित मूल्य देना। दूसरा, महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करना। तीसरा, केयर वर्कफोर्स के लिए मानक प्रशिक्षण, प्रमाणन और टिकाऊ रोजगार की व्यवस्था करना। चौथा, सेवाओं की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए पीपीपी मॉडल, बीमा योजनाओं और सीएसआर फंड के उपयोग की संभावनाएं तलाशना। केयरगिवर्स को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ने पर जोर समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने केयर इकोनॉमी को सामाजिक जरूरत के साथ-साथ रोजगार का उभरता हुआ क्षेत्र बताते हुए कहा कि प्रदेश में देखभाल सेवाओं को व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए विभागीय समन्वय जरूरी है। प्रशिक्षित और प्रमाणित केयरगिवर्स तैयार होने से जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेंगी और युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रशिक्षण, प्रमाणन और रोजगार की पूरी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में यूपी सिडको के चेयरमैन वाई.पी. सिंह, महिला एवं बाल विकास सचिव मनीषा त्रिघाटिया, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के उपाध्यक्ष विश्वनाथ, प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव, समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह समेत वित्त, कौशल विकास, स्वास्थ्य और दिव्यांग कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

युवाओं को नशे से बचाने के लिए योगी सरकार का सख्त संदेश-‘वीडियो सामने आते ही एक्शन’

लखनऊ युवाओं और नाबालिगों को नशे की चपेट में आने से बचाने के लिए योगी सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। सरकार की नीति केवल अवैध और जहरीली शराब पर अंकुश लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कम उम्र के बच्चों तक शराब की पहुंच रोकने पर भी विशेष जोर है। लखनऊ में नाबालिग को शराब बेचने से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही आबकारी विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर यह संदेश साफ कर दिया कि नियमों से खिलवाड़ किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं होगा। सोशल मीडिया एक्स और अन्य प्लेटफॉर्म पर वीडियो प्रसारित होने के बाद सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया और संबंधित के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला आबकारी अधिकारी, लखनऊ ने 11 सितंबर को वीडियो की जांच कराई। जांच में वीडियो विकासनगर थाना क्षेत्र के शुभौली स्थित एक कम्पोजिट दुकान के सेल्समैन की एक व्यक्ति से कहासुनी का पाया गया। वीडियो में सेल्समैन पर नाबालिग बच्चे को शराब बेचने की बात कही जा रही थी। तुरंत हटाया गया सेल्समैन, 30 हजार जुर्माना जांच के दौरान सेल्समैन का व्यवहार उचित नहीं पाए जाने पर उसे तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। इसके साथ ही संबंधित कम्पोजिट दुकान के खिलाफ नियमानुसार प्रशमन की कार्रवाई करते हुए 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। वीडियो सामने आने के बाद इतनी तेजी से हुई कार्रवाई ने साफ किया कि सरकार नाबालिगों तक नशे की पहुंच रोकने के मामले में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। यूपी बना देश के अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा मामला दोबारा आने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और पारदर्शी नीतियों के चलते पिछले साढ़े चार वर्षों से अधिक समय से प्रदेश में अवैध या जहरीली शराब की बिक्री का कोई मामला सामने नहीं आया है। आबकारी विभाग देश के अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बन चुका है और इस छवि को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

सीएम योगी का बड़ा संदेश: शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण जरूरी, अनावश्यक शिकायत करने वालों पर भी हो कार्रवाई

लखनऊ राजधानी लखनऊ में गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस पर सोमवार को समारोह आयोजित किया गया। इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा ने किया।इस दौरान संगठन की पांच दशक की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में संगठन के गठन से लेकर अब तक की यात्रा, कार्यप्रणाली, शिकायतों की जांच और प्रमुख उपलब्धियों को क्रमवार प्रदर्शित किया गया। यहां बताते चलें कि लोक आयुक्त संगठन भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में अहम भूमिका निभाता है। समारोह में लोक आयुक्त प्रशासन के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है किसी संस्था से जुड़ा जन विश्वास  इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत किसी संस्था से जुड़ा सामान्यजन का विश्वास है। गुड गवर्नेंस आमजन के विश्वास पर निर्भर करता है। उन्होंने सुशासन के लक्ष्यों को भी गिनाया। कहा कि किसी संस्था में सामान्य व्यक्ति बेझिझक आए और नियमानुसार परिणाम को समयबद्ध प्राप्त कर सके। यही हमारी कसौटी होती है। शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो। साथ ही अनावश्यक शिकायत करने वालों पर भी शिकंजा कसने का काम भी हो।   जनविश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी  सीएम ने कहा कि संस्था के गठन मात्र से समस्या का समाधान नहीं होता। जन-विश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी है। संविधान निर्माताओं ने भारत की व्यवस्था के लिए संसदीय लोकतंत्र दिया। यदि जनप्रतिनिधि ने विश्वास खोया तो सरकार गई।     अनावश्यक शिकायत करने वालों पर कसना होगा शिकंजा  सीएम ने आगे कहा कि आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन, जनता दर्शन आदि के जरिये जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान कराया जाता है। हालांकि, कुछ लोग अनावश्यक शिकायत भी लेकर आते हैं, बताते हैं कि मेरी व्यक्तिगत समस्या नहीं है, लेकिन किसी के खिलाफ शिकायत करनी है। यदि हम प्रमाण मांगते हैं तो आनाकानी भी होती है।  एक अनुभव साझा करते हुए सीएम ने कहा कि एक सज्जन ने एक विद्यालय के खिलाफ शिकायत की। जांच में शिकायत झूठी निकली तो उन्होंने कहा कि पूरे जिले के विद्यालयों की जांच की जाए। ऐसी झूठी शिकायतों को खारिज किया जाना चाहिए। किसी संस्था को विश्वास के प्रतीक के रूप में स्थापित करने के लिए आवश्यक है कि अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी विश्वास व्यक्त करे कि मेरी समस्या का समाधान होगा। तकनीक के कारण अब पीडीएस की शिकायत नहीं  सीएम ने कहा कि लोक आयुक्त संगठन ने टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग किया है। 2017 में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) में सबसे अधिक शिकायत खाद्यान्न वितरण की आती थी। जनता दर्शन में 100 में से 60 शिकायतें पीडीएस की होती थी। इससे परेशान होकर लगातार हम बैठक करते थे, फिर हमने तकनीक का प्रयोग किया। ई-पॉस मशीन लगाकर उसे मुख्यालय पर स्क्रीन लगाकर जोड़ दिया। इसके बाद यदि 80 हजार राशन कोटे की दुकानों में किसी ने कुछ इधर-उधर किया तो तुरंत अलर्ट आ जाता है। इससे हेराफेरी की गुंजाइश शून्य हो गई। साढ़े 9 साल में 34 लाख राजस्व मामलों का निस्तारण सीएम ने राजस्व विभाग के मामलों का भी जिक्र किया। कहा कि 2017 में भूमि संबंधी विवाद, पैमाइश, वरासत, नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। इससे अनावश्यक विवाद होते थे। केवल वरासत से जुड़े लगभग छह लाख मामले लंबित थे। सभी के निस्तारण की समयसीमा तय की गई। तय किया गया कि लैंड यूज की समस्या का समाधान 30 दिन में नहीं हुआ तो इसे डीम्ड मान लिया जाएगा, यानी गलत होने पर निस्तारण करने वाले की जवाबदेही तय होगी। साढ़े 9 साल में 34 लाख मामले का निस्तारण हुआ, लेकिन 9 साल में 9 लाख और मामले भी सामने आए। वरासत, पैमाइश आदि की समस्याओं का समाधान किया गया।  हर तहसील में दिया गया रोबोट  सीएम ने कहा कि पैमाइश में शिकायत मिली कि लेखपाल ने जरीब में थोड़ा इधर-उधर कर दिया है। अब इस समस्या का भी समाधान हो गया। इसके लिए हर तहसील में रोबोट दे दिया है। इतनी पारदर्शिता हुई कि एक इंच भी कोई इधर-उधर नहीं कर सकता। टेक्नोलॉजी दिलाएगी शिकायतों के अंबार से मुक्ति  सीएम ने कहा कि टेक्नोलॉजी का उपयोग कर शिकायतों के अंबार का समाधान निकाल सकते हैं। हो सकता है कि लोकसेवक को बचाने का प्रयास होता है, लेकिन शिकायत जब लोक आयुक्त संगठन के पास जाती है तो वह मेरिट के आधार पर समाधान निकालता है। कई बार जब व्यक्ति को ताकत मिलती है तो वह उदंडतापूर्ण व्यवहार करने लगता है, उस पर अंकुश जरूरी है।   यूपी में 14 सितंबर 1977 को गठित हुआ लोक आयुक्त संगठन  सीएम ने कहा कि आजादी के बाद लगा होगा कि आने वाले समय में नेतृत्व देने वाले लोग ही व्यवस्था में गदर मचा डालेंगे, तब इमरजेंसी के तत्काल बाद बनी पहली सरकार ने लोक आयुक्त संगठन के निर्माण की तरफ कदम बढ़ाए। उत्तर प्रदेश में लोक आयुक्त संगठन का विधिवत कार्य 14 सितंबर 1977 को प्रारंभ हुआ। उस समय न्यायमूर्ति विशंभर दयाल ने उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन को नेतृत्व प्रदान किया था। तबसे प्रारंभ हुई संगठन की यह यात्रा न्यायमूर्ति संजय मिश्र के नेतृत्व में नई पहचान, नई आभा के साथ जारी है। विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत  सीएम ने कहा कि बहुत सारी समस्याओं के समाधान को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया गया है। 2014 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी ने जनधन अकाउंट खोलने की बात की तो विपक्ष ने खिल्ली उड़ाई। आज जनधन अकाउंट की ताकत सबके सामने है। अब डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में धनराशि जाती है। विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत है।  उन्होंने विधवा, निराश्रित, वृद्धजन की बेचारगी को बताते हुए 2017 के पहले मिलने वाली राशि में घूसखोरी का भी जिक्र करते हुए कहा कि अब यूपी में ऐसा नहीं है। सरकार डीबीटी के माध्यम से सीधे अकाउंट में 1.10 करोड़ लोगों को वार्षिक 12 हजार पेंशन दे रही है। व्यवस्था से बिचौलिए समाप्त कर दिए गए। इस दौरान लोक … Read more

अखिलेश यादव से भिड़े जयंत चौधरी, बोले- मैंने मुंह खोल दिया तो बहुत मुश्किल हो जाएगी

दिल्ली जयंत चौधरी और अखिलेश यादव में वार-पलटवार जारी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच वार-पलटवार थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत में अखिलेश के बयान से जुड़े सवाल पर जयंत चौधरी भयानक रूप से भड़क गए। जयंत ने कहा कि अगर मैंने मुंह खोल दिया तो अखिलेश यादव को यहां भी खड़े नहीं हो पाएंगे। दरअसल, समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश ने राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख पर तंज कसते हुए कहा था, हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी वे हमें छोड़कर चले गए। जयंत चौधरी ने कहा जयंत चौधरी ने कहा कि यूपी में 403 विधानसभा सीटें हैं। यूपी में चुनाव है। जयंत ने ऐलान करते हुए कहा कि उत्तराखंड में भी चुनाव होंगे और हम वहां भी चुनाव लड़ेंगे। सभी सीटें पर एनडीए की संयुक्त लड़ाई है। हम सब एक हैं। जयंत चौधरी ने कहा कि एकजुट लड़ाई और एकमात्र कोशिश यह सुनिश्चित करना है कि विकास के रास्ते न रुके। जयंत चौधरी ने कहा कि किस पार्टी के चुनाव चिह्न का इस्तेमाल होगा, इस बारे में बात करें तो राजनीतिक पार्टियां समय के साथ अपने चुनाव चिह्न बदलती रहती हैं। मैं अधिकार के साथ एनडीए की बातें करता हूं। मैं गंभीरता के कारण कुछ बातें नहीं कहना चाहता हूं अखिलेश यादव के बयान पर मीडिया के पूछे गए सवाल पर जयंत चौधरी भड़क गए। जयंत ने कहा कि जब हमारा उनके यानी समाजवादी पार्टी के साथ साझा था, तब बंद दरवाजों के पीछे हुई हर बात सार्वजनिक नहीं की गई थी। मैं गंभीरता के कारण कुछ बातें नहीं कहना चाहता हूं। अगर मैं खुलकर उन मामलों को बता दूं, तो यहां भी खड़े होने की भी जगह नहीं बचेगी। अखिलेश यादव आज जिस तरह के हल्केपन बातें कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। चौधरी चरण सिंह के सम्मान को विधानसभा सीटों की संख्या से नहीं मापा या तय किया जा सकता है। उनके प्रति सम्मान हर किसी के दिल में बसा है और हमेशा रहेगा, चाहे कोई कुछ भी दावा करे। भले ही राष्ट्रीय लोक दल को एक भी सीट न मिले, फिर भी चौधरी चरण सिंह का सम्मान और प्रतिष्ठा कभी कम नहीं होगी।   चवन्‍नी कोई मुद्दा नहीं, विकास का मुद्दा होना चाहिए अखिलेश यादव वाले बयान पर जयंत ने यह भी कहा कि राजनीति मुद्दों पर की जाती है। अखिलेश को नसीहत देते हुए जयंत ने कहा कि चवन्‍नी कोई मुद्दा नहीं है। विकास का मुद्दा होना चाहिए। आज सहारनपुर से दिल्‍ली जाने में केवल डेढ़ घंटे लगते हैं। पहले छह घंटे लगा करते थे।

नन्ही कल्पनाओं में सजेगा विकास का दशक, योगी सरकार में बच्चों को मिलेगा ‘मेरे सपनों का भारत’ का मंच

लखनऊ योगी सरकार विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को देश की विकास यात्रा से जोड़ते हुए उन्हें अपने ‘सपनों के भारत’ को चित्र, पोस्टर और भाषण के माध्यम से अभिव्यक्त करने का मंच देने जा रही है। 11 सितंबर को बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्रियों की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने संबंधित अधिकारियों को ‘मेरे सपनों का भारत’ कार्यक्रम के प्रभावी आयोजन के निर्देश दिए हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय स्तर से जिला स्तर तक प्रतियोगिताएं और प्रदर्शनी आयोजित होंगी।  इस पहल के माध्यम से बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर देने के साथ उन्हें देश की विकास यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की अपनी कल्पनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। योगी सरकार की यह पहल विद्यालयों को प्रतिभा, कल्पना और राष्ट्र के भविष्य पर संवाद के जीवंत मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। चित्रों में दिखेगा विकास का दशक बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए 17 से 26 सितंबर 2026 तक ‘मेरे सपनों का भारत चित्र सेवा’ प्रतियोगिता आयोजित होगी। विद्यार्थी पिछले 10 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में हुई उपलब्धियों को अपनी कल्पना और रचनात्मकता के रंगों के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे। विद्यालय स्तर पर अभिभावकों को भी आयोजन में आमंत्रित किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय से श्रेष्ठ पांच विद्यार्थियों के चित्र एवं पोस्टर चयनित कर जिला स्तर की प्रदर्शनी में प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी समन्वय करते हुए नोडल अधिकारी नामित करेंगे। जिला स्तर पर दिखेगी प्रतिभा जिला स्तर पर 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसमें विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र, ट्रॉफी/मेडल और पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए भी 17 से 26 सितंबर तक ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता होगी। जिन विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 भी संचालित हैं, वहां चित्रकला एवं पोस्टर प्रतियोगिता भी कराई जाएगी। सरकारी एवं निजी विद्यालयों में अधिकाधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालय से जिला स्तर तक आयोजन जिला स्तरीय कार्यक्रम में कक्षा 6 से 8 के श्रेष्ठ पांच चित्रकार विद्यार्थियों तथा कक्षा 9 से 12 के चयनित विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां शामिल होंगी। माध्यमिक स्तर पर जिला विद्यालय निरीक्षक नोडल अधिकारी की भूमिका निभाएंगे और आयोजन के लिए समन्वय बैठकें कराई जाएंगी। प्रतियोगिताओं के लिए ड्राइंग शीट, रंग एवं अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था अनुमन्य समग्र शिक्षा मदों से की जाएगी।

2027 से पहले अखिलेश का किसान कार्ड, मुफ्त इलाज से लेकर समय पर गन्ना भुगतान का ऐलान

लखनऊ अखिलेश यादव ने कहा कि सपा सरकार बनने पर किसानों को इलाज मुफ्त होगा। उन्होंने कहा कि सरकार बनने पर किसानों को गन्ना मूल्य 24 घंटे में भुगतान होगा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले वादे पर वादे कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने अब किसानों से वादे किए हैं। सोमवार को अखिलेश यादव ने कहा कि कहा है कि सपा किसानों की अपनी पार्टी है। 2027 का विधानसभा चुनाव किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह चुनाव किसानों के भविष्य का चुनाव है।उन्होंने वादा किया कि सरकार बनने पर किसानों को गन्ना मूल्य 24 घंटे में भुगतान होगा। भरपूर बिजली दी जाएगी। खाद, बीज, पानी, सिंचाई की समुचित व्यवस्था होगी। किसानों को खाद के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। किसानों की फसलों का लाभकारी मूल्य दिया जाएगा। किसानों का इलाज मुफ्त होगा। उन्होंने कहा कि इथेनॉल का लाभ किसानों को मिलना चाहिए। समाजवादी पार्टी किसानों के साथ है अखिलेश से सोमवार को पार्टी मुख्यालय में पश्चिमी यूपी के किसानों और कई खापों के चौधरियों ने भेंट की। इस मौके पर सपा के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी मौजूद रहे। अखिलेश ने किसानों से बात करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी किसानों के साथ है। उन्होंने कहा कि किसान जब खाद मांगता है तो भाजपा सरकार लाठियां लेकर दौड़ाती है। भाजपा सरकार में किसानों की दुर्दशा हो गई। बिचौलिये हावी है। किसानों को फसलों का सही मूल्य नहीं मिल रहा है। भाजपा सरकार ने दस वर्षों में किसानों को धोखा दिया है। किसानों को कभी समय पर खाद-बीज नहीं मिल पाया। किसानों के हित में फैसले लिए जाएंगे उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में प्राथमिकता से गांवों का विकास होगा। किसानों के हित में फैसले लिए जाएंगे। समाजवादी पार्टी के लिए किसान सर्वोपरि है। समाजवादी पार्टी की पिछली सरकारों में किसानों के हित में बड़े-बड़े फैसले लिए थे। किसानों ने कहा कि उन्हें अखिलेश यादव पर भरोसा है। अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में उन्होंने खेती का बजट बढ़ाया था। सभी खाप के प्रतिनिधि किसानों के संकल्प लिया कि वे 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को बहुमत दिलाकर अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने के लिए एकजुट प्रयास करेंगे। इस अवसर पर बुढ़ाना मुजफ्फरनगर के चौधरी विरेंद्र प्रधान ने अखिलेश को हल भेंट किया। बागपत के किसानों ने अपने हुक्का के साथ भेंट की। इससे पहले बीते दिनों अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा था कि सपा सरकार बनने पर आउसोर्सिंग व्यवस्था खत्म होगी और पक्की नौकरी मिलेगी। लोकसभा चुनाव में भले ही सपा सभी 80 सीटें जीत लें, फिर ईवीएम का विरोध करेंगे। यह पहला विधानसभा चुनाव होगा जिसकी घोषणा होते ही भाजपा हार मान लेगी। चुनाव की तारीख आते ही जनता अपना फैसला बता देगी। सरकार चाहे जितना पैसा खर्च करे, चाहे जितना अपना पॉलिटिकल मेकअप करा ले जनता इन्हें हटा देगी।

पीड़ितों से खुद मिले सीएम योगी, अधिकारियों को दिए त्वरित समाधान के निर्देश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि सरकार हर पीड़ित की उचित समस्या का समाधान कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की शिकायतों का निस्तारण संवेदनशीलता और शीघ्रता से किया जाए। उन्होंने हर पात्र व्यक्ति को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था करने और जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। हर पीड़ित के पास चलकर पहुंचे सीएम मुख्यमंत्री ‘जनता दर्शन’ में कुर्सियों पर बैठे हर पीड़ित के पास खुद चलकर गए। उनकी समस्याओं व शिकायतों को ध्यान से सुना। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि हर पीड़ित की उचित समस्या का समाधान सुनिश्चित कराया जाएगा। पुलिस से जुड़ीं शिकायतों पर सख्त हुए सीएम सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष कुछ पीड़ितों ने पुलिस से जुड़ी अलग-अलग शिकायतें बताईं। इस पर सीएम सख्त हो गए। उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त, एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी स्तर के अधिकारी ध्यान दें, किसी भी मामले में थाना, चौकी, बीट स्तर पर हीलाहवाली की शिकायत बर्दाश्त नहीं होगी। हर मामले में दोषियों पर नियमसंगत कार्रवाई सुनिश्चित करें। सीएम ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। बच्चों का हाल जाना और चॉकलेट दीं मुख्यमंत्री ने ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ आए नन्हे-मुन्नों का हालचाल जाना। उनकी पढ़ाई और उनकी रुचि के बारे में भी पूछा। सीएम ने बच्चों से कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ो और अन्य गतिविधियों (खेल, संगीत, कला आदि) में भी हिस्सा लो। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट देते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।

वाराणसी में जलभराव पर योगी सरकार की सख्ती, लापरवाही पर अधिशासी अभियंता निलंबित

लखनऊ  योगी सरकार ने जनसमस्याओं के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया है। वाराणसी में जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के निर्माण खंड (वि./यां.) में तैनात अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-7 के अंतर्गत अनुशासनिक जांच भी बैठाई गई है। नगर निकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्य अभियंता (क्रय), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), लखनऊ को इस प्रकरण में पदेन जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। सरकार ने इस कार्रवाई के जरिये स्पष्ट किया है कि जनसुविधाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया कि चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन पर नदी के बैकफ्लो को रोकने के लिए आवश्यक गेट/बैरियर लगाने संबंधी आकलन और कार्ययोजना तैयार नहीं की गई। इसके अलावा उच्चाधिकारियों के निर्देशों के अनुपालन में भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया कि 3 और 4 सितंबर को चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन तथा गोईठहां एसटीपी पर स्थित पम्प बंद रखे गए। भारी बारिश के दौरान समय से पम्पों का संचालन नहीं होने से सीवर लाइनों पर अत्यधिक लोड पड़ा और शहर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई। इससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और विभाग की छवि भी प्रभावित हुई। नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने 12 और 13 सितंबर को वाराणसी दौरे के दौरान जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया था। उन्होंने अधिकारियों को जल निकासी की व्यवस्था युद्धस्तर पर सुनिश्चित करने और आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी न होने देने के निर्देश दिए थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जलभराव की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए लापरवाही करने वाले अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। फिलहाल शासन ने अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबन अवधि में मुख्य अभियंता (कानपुर क्षेत्र), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), कानपुर कार्यालय से संबद्ध किया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की घोषणा

लखनऊ इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नई पीढ़ी के अधिवक्ता संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी बनें और न्याय को जमीनी धरातल तक पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रख सकती है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय सभी अधिवक्ताओं को सालाना पांच लाख रुपये तक की कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस सुविधा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के चैंबर में फर्नीचर व उपकरण के लिए शासन सहयोग करेगा और 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट दिए जाएंगे। इसके साथ ही राज्य विधि अधिकारियों की फीस में भी 50 फीसदी से अधिक वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यूपी पुलिस में 45 से 50 प्रतिशत पद खाली थे। व्यवस्था में पारदर्शिता-जवाबदेही, कानून-व्यवस्था और न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी चुनौती थे। वहीं अब पुलिस प्रशिक्षण क्षमता 3,000 से बढ़ाकर 60,000 कार्मिक प्रतिवर्ष की गई है। पहले 10 जनपदों में जिला अदालतें अस्थायी व किराए के भवनों में चलती थीं और अधिवक्ताओं के चैंबर जर्जर थे। अब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट चैंबर बनाए जा चुके हैं। उन्होंने अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि 1.5 लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये और अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को आर्थिक सहायता की पात्रता आयु 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंदी दिवस के साथ हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का भी अवसर है। उन्होंने आस्था की इस भूमि से प्रदेशवासियों को हिंदी दिवस, हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी की हृदय से बधाई और शुभकामनाएं दीं। स्वाधीनता आंदोलन से राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ता समाज की अहम भूमिका मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह समाज की राय बनाने के साथ उसके विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है। स्वाधीनता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, स्वतंत्र भारत में शासन-प्रशासन के संचालन, लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूती देने और राष्ट्र निर्माण के वर्तमान अभियान तक अधिवक्ता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन लंबे समय तक बिखरा रहा। दक्षिण अफ्रीका से अपनी वकालत छोड़कर महात्मा गांधी के आंदोलन की कमान संभालने के बाद इसे नई दिशा और गति मिली। प्रयागराज की धरती भी ऐसे अनेक अधिवक्ताओं की गवाह रही है, जिन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रैक्टिस के साथ स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित मोतीलाल नेहरू और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे अधिवक्ताओं ने लंबे समय तक देश और स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी तथा क्रांतिकारियों के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी देश की आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयागराज से जुड़े जीवन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संगम तट पर स्थित प्रेसिडेंशियल सूट भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष और देश के प्रथम राष्ट्रपति की याद दिलाता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रत्येक कुंभ के दौरान प्रयागराज आते थे और माघ मेले में कल्पवास करते थे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार और प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वयं सोमनाथ पहुंचे थे। राष्ट्र के प्रति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के योगदान और संविधान निर्माण से लेकर स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में उनकी भूमिका के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित करने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के तीनों प्रमुख स्तंभ अपनी-अपनी व्यवस्था के तहत काम करते हैं, लेकिन उनके बीच बेहतर समन्वय और संवाद लोकतंत्र को अधिक परिपक्व और मजबूत बनाता है। न्यायपालिका भी विधि के शासन और सुशासन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि न्याय के रथ के बार और बेंच दो महत्वपूर्ण पहिए हैं। दोनों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय हमेशा बना रहना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की बैठकों में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याओं को भी समान महत्व दिया जाता है। मुख्य न्यायाधीश, न्यायपालिका के संरक्षक के रूप में, अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों को भी शासन के सामने प्रभावी तरीके से रखते हैं और उनके समाधान का रास्ता निकालने का प्रयास होता है। बार-बेंच के बीच सम्मान, संवाद और समन्वय जरूरी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि न्याय प्रशासन के लिए बार और बेंच के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी 2017 से पहले की स्थिति की ओर ध्यान दिलाया। उस समय चुनौती केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि व्यवस्था के दृष्टिकोण, प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही, कानून-व्यवस्था तथा न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भी थी। न्याय व्यवस्था की पहली कड़ी पुलिस है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 56 जनपदों में सबसे ऊंची इमारतों में पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर, पुलिस बैरक या प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। उन्होंने लखनऊ में 2017 में किए गए पुलिस बैरक के अचानक निरीक्षण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि वहां दो पुलिसकर्मी रह रहे थे और छत टूटी होने के साथ जाले लगे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों से दिन-रात, सर्दी-गर्मी और बरसात में रक्षक की भूमिका निभाने की अपेक्षा है, उन्हें बुनियादी सुविधाएं देना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों की स्थिति भी बेहद खराब थी। कई अदालतें अस्थायी और किराए के भवनों में संचालित होती थीं। सरकार ने प्रभावी विटनेस प्रोटेक्शन की व्यवस्था मजबूत की है। पहले गवाहों के डर के कारण मुकर जाने से गंभीर आपराधिक मामलों में सजा दिलाना चुनौती बन जाता था। अपराधियों को जेल से अदालत लाने के लिए पुराने और असुरक्षित वाहनों की जगह व्यवस्था को सुरक्षित बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बेहतर समन्वय से व्यवस्था में रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्मेशन के परिणाम सामने आ रहे हैं। सुदृढ़ न्यायपालिका … Read more