samacharsecretary.com

फर्जी क्राइम ब्रांच कॉल और धमकियों का डर: बिजनौर में महिला की आत्महत्या से सनसनी

  बिजनौर बिजनौर जिले में साइबर अपराध का अब तक का सबसे क्रूर चेहरा सामने आया है। साइबर अपराधियों ने महिला को कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर इतना डराया, धमकाया कि शादी की सालगिरह से एक दिन पहले उसने फांसी लगाकर जान दे दी। अंतिम संस्कार के समय साइबर ठग का फोन आने पर परिजनों को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को तहरीर दी गई। पुलिस ने अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज की है। महिला गृहिणी थी। पति एक फैक्टरी में नौकरी करता है। पुलिस के अनुसार, कोतवाली शहर के गांव फरीदपुर भोगी निवासी गृहिणी मोनिका (28) पत्नी रणधीर ने सोमवार की रात घर में दुपट्टे से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। मंगलवार की सुबह साथ सोई दोनों बेटियां जिया (8) और नंदनी (11) उठीं तो मां को दुपट्टे से लटका देखा। उनकी चीखें सुनकर परिजन आ गए। सूचना पर मायके वाले पहुंचे। शुरुआत में मामला किसी लड़के से जुड़ा होने की आशंका हुई तो लोकलाज के डर से अंतिम संस्कार करने बैराज ले गए। मोनिका के भतीजे संयोग ने बताया कि अंतिम संस्कार के समय मोनिका के मोबाइल पर लगातार घंटी बज रही थी। जब फोन उठाया तो वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखा। उसने खुद को क्राइम ब्रांच से बताया।   मोनिका से बात कराने के लिए कहा। उसकी बातचीत से रिश्तेदारों का शक साइबर अपराध की ओर गया। श्मशान घाट से आने के बाद मंगवार की शाम को कमरे में तलाश की गई तो एक डायरी में सुसाइड नोट मिला। इसमें मोनिका ने एक लड़के द्वारा परेशान करने, ब्लैकमेल करने की बातें लिखी थीं। मोनिका का मोबाइल चेक किया तो व्हाट्सएप पर पांच ऐसे नंबर मिले, जिन पर ऑडियो, कॉल, मिस्डकॉल, मैसेज पड़े थे। इनमें कोई खुद को क्राइम ब्रांच से बता रहा तो किसी ने मोनिका पर तस्करी का आरोप लगाया। पाकिस्तान सीरीज के नंबरों से आए मैसेज साइबर अपराधियों ने मोनिका को फंसाने के लिए मजबूत जाल बिछाया था। क्राइम ब्रांच अफसर से लेकर तस्कर तक का रोल साइबर अपराधी करते थे। दस दिन से ज्यादा समय तक मोनिका को डिजिटल अरेस्ट कर कार्रवाई की धमकी देते रहे। वह बात नहीं करती थी तो अलग-अलग नंबरों से मैसेज आते। ऑडियो रिकॉर्डिंग में उसकी जिंदगी तबाह करने, उसके परिवार के लोगों, रिश्तदारों को देख लेने की धमकी दी गई। परिजनों से पूछताछ की गई है। मामला साइबर अपराध से जुड़ा लग रहा है। परिजनों की तहरीर पर शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई है। अभिषेक झा, एसपी बिजनौर    

यूपी विधानसभा में गरजे सीएम योगी, सपा-कांग्रेस को महिला मुद्दों पर घेरा

लखनऊ यूपी विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा को महिलाओं को लेकर हुई घटनाओं के बारे में आईना दिखाया। मायावती के साथ गेस्ट हाउस कांड को याद दिलाकर योगी सपा पर जमकर बरसे। योगी ने कहा कि उस समय गेस्ट हाउस कांड में दलित महिला मुख्यमंत्री मायावती की हत्या करने की कोशिश की गई। योगी ने कहा कि सपा माफियाओं के सामने नतमस्तक है। योगी ने कहा कि सपा विधायक पूजा पाल इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि जब राजू पाल की हत्या हुई थी, तब सपा माफियाओं के सामने झुक गई थी. सीएम ने आरोप लगाया कि सपा की सहानुभूति न तो पिछड़ों, दलितों और न ही पूजा पाल जैसे लोगों के प्रति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शाहबानों प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस का जिस तरह यूपी में पतन हुआ है वह न हुआ होता अगर कांग्रेस मुस्लिम महिला को न्याय देने के लिए मौलानाओं के आगे घुटने टेक कर नाक न रगड़ती। उन्होंने कहा सपा का भी ऐसा ही हश्र होने वाला है, इसमें ज्यादा देर नहीं लगेगी। विपक्ष ने महिला कल्याण से जुड़े सभी फैसलों में हमेशा विरोध किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को महिला सशक्तिकरण के लिए बुलाए गए विशेष सत्र के दौरान निंदा प्रस्ताव रखने से पहले बोल रहे थे। योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी हो या फिर कांग्रेस इन्होंने महिला कल्याण से जुड़े सभी फैसलों में हमेशा कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि नारी के उन्नयन, उत्थान और उन्हें संपन्न बनाने के लिए समय-समय पर आए मुद्दों का इंडी गठबंधन ने हमेशा विरोध किया है। जब वर्ष 2014 में महिलाओं के लिए जनधन योजना आई तो सपा-कांग्रेस ने विरोध किया। फिर जब नारियों की गरिमा कायम रखने के लिए खुले में शौच के विरोध में शौचालय बनाने की योजना आई तो सपा-कांग्रेस ने विरोध किया। सपा सरकार में विधवा पेंशव व वृद्धा पेंशन में 300 रुपये देते थे। लाभकारी योजनाएं गिनाएं और सपा-कांग्रेस को आड़े हाथों लिया उन्होंने इंडी गठबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दिल्ली से लेकर लखनऊ आने तक सपा के सदस्य बहुत उतावले दिखाई दे रहे हैं। रंग बदलने में तो गिरगिट भी सपा के सामने संकोच कर जाए। रंग बदलने में ये इतने आगे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में नारी वंदन अधिनियम पास न होने के बाद सपा-कांग्रेस के सदस्य कैसे हंस रहे थे और मेजें थपथपा रहे थे। उनका यह आचरण सभी ने देखा है। मुख्यमंत्री ने एक-एक कर सभी लाभकारी योजनाएं गिनाएं और सपा-कांग्रेस को जमकर आड़े हाथों लिया। मुख्यमंत्री बोले, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया तो सपा-कांग्रेस ने विरोध किया। सपा सरकार में ढाई वर्ष में मात्र 40 लाख शौचालय बने थे। वर्ष 2017 के बाद हमने डेढ़ वर्ष में दो करोड़ से अधिक शौचालय बनवाए। पूरे देश में 12 करोड़ शौचालय बनाए गए। संसद में विरोध क्यों किया गया मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय की ओर इशारा करते हुए कहा कि आप तो सोशलिस्ट हैं। शौचालय नारी गरिमा के प्रतीक थे, मोहल्लों की स्वच्छता के प्रतीक थे लेकिन आपने विरोध किया। हमने दो करोड़ से अधिक शौचालय बनाए और पूर्वांचल से इंस्फेलाइटिस रोग को काबू किया। कहा कि आज मैं कह सकता हूं कि एक भी मौत इंस्फेलाइटिस से नहीं हो रही जबकि पहले हजारों बच्चों की मौत होती थी। उन्होंने कहा कि जब गांव में महिलाओं शौच के लिए जाती थीं तो सपा के शोहदे उन पर छींटाकशी करते थे। आखिर सपा चाहती है कि कानून लागू किया जाए तो फिर संसद में विरोध क्यों किया गया। सपा ने नहीं दिया एक भी प्रधानमंत्री आवास मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के ढाई वर्ष के शासन में एक भी पीएम आवास नहीं बन सका था। एनडीए सरकार ने देश भर में 4 करोड़ मकान बनाए हैं। सिर्फ यूपी में 65 लाख पीएम आवास बनाए गए हैं। यही नहीं भूमि का मालिकाना हक देने के लिए पीएम घरौनी योजना लागू की गई। अब भूमि का मालिकाना हक महिलाओं को दिया जा रहा है। यूपी में एक करोड़ घरौनी दी गई है। इसी तरह सपा ने सामूहिक विवाह योजना का विरोध किया। यूपी में 6 लाख बेटियों की शादी कराई गई है। सपा ने इसका भी विरोध किया था। सपा ने कन्या सुमंगला योजना का भी विरोध सपा-कांग्रेस ने किया। हम 26 लाख से अधिक महिलाओं को 25 हजार रुपये दे रहे हैं।

बेसिक से उच्च शिक्षा तक बड़ी राहत: कैशलेस मेडिकल सुविधा के लिए नया पोर्टल तैयार

लखनऊ लाखों शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए साचीज के सहयोग से पोर्टल बनकर लगभग तैयार हो गया है। जल्द ही इसे लाइव किया जाएगा। प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा दिए जाने का निर्णय कैबिनेट ने जनवरी में लिया था। इसके बाद इसकी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। इस क्रम में विभाग की ओर से साचीज को शिक्षकों का डाटा उपलब्ध कराते हुए पोर्टल तैयार किया जा रहा है। इसमें शिक्षकों की जानकारी तो मानव संपदा पोर्टल से अपडेट हो जाएगी। किंतु उनको अपने आश्रितों की जानकारी खुद भरनी होगी। जल्द ही इस पोर्टल को लाइव कर दिया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि शिक्षकों को जल्द से जल्द इसका लाभ दिलाया जा सके। वहीं उच्च शिक्षण संस्थानों के 1.35 लाख शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशालय की संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. शशि कपूर ने सभी रजिस्ट्रार व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को बताया है कि साचीज के द्वारा अपनी वेबसाइट पर उच्च शिक्षा का टैब दिया जाएगा। इसमें संबंधित लाभार्थी द्वारा अपना विवरण फीड किया जाएगा। विवरण फीड करने के बाद संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव को विवरण दिखाई देगा, जिसे वह अनुमोदन करेंगे। उसके बाद संबंधित विवरण अगली कार्यवाही के लिए स्टेट नोडल अधिकारी के पास जाएगा। उन्होंने सभी संबंधितों को इससे जुड़ी कार्यवाही अपने स्तर से पूरी करने का निर्देश दिया है। साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा का कहना है कि सभी शिक्षकों का डाटा मिल रहा है। इसके साथ ही पोर्टल का ट्रायल भी चल रहा है। हमारा प्रयास है कि इसको मई में शुरू कर दें। ताकि शिक्षकों व उनके आश्रितों को समय से इसका लाभ मिल सके।  

ट्रेन से तेज सफर! गंगा एक्सप्रेसवे बदलेगा यूपी का ट्रैवल टाइम, 14 घंटे का रास्ता होगा 6 घंटे में पूरा

लखनऊ यूपी परिवहन निगम की कोई भी बस अभी प्रयागराज से सीधे मेरठ नहीं जाती है। वहां जाने के दो माध्यम हैं, ट्रेन या फिर निजी साधन। प्रयागराज से जो दो एक्सप्रेस ट्रेन मेरठ जाती है, उसमें से एक जितना समय लेती है उससे आधे से भी कम तो दूसरी से लगभग ढाई घंटे कम समय में ही निजी साधन से गंगा एक्सप्रेस वे के जरिए मेरठ पहुंचा जा सकेगा। दावा किया जा रहा है कि गंगा एक्सप्रेस वे से मेरठ तक की दूरी छह घंटे में तय हो सकेगी। प्रयागराज संगम रेलवे स्टेशन से नौचंदी एक्सप्रेस रोजाना शाम 5.50 बजे चलकर 653 किमी की दूरी तय करते हुए अगले दिन सुबह 8.30 बजे मेरठ पहुंचती है। यह ट्रेन लखनऊ, हरदोई, बरेली, मुरादाबाद, अमरोहा व हापुड़ से होकर मेरठ जाती है। कुल 14 घंटे लगते हैं पर गंगा एक्सप्रेस वे पर निजी साधन से सफर करने में इससे लगभग आठ घंटा कम लगेगा। इसी तरह सूबेदारगंज स्टेशन से चलने वाली संगम एक्सप्रेस फतेहपुर, कानपुर, इटावा, टुंडला, हाथरस, बुलंदशहर व हापुड़ होते हुए मेरठ तक करीब 8.30 घंटे में पहुंचती है।यह ट्रेन सूबेदारगंज से शाम 5.50 बजे चलती है और अगले दिन 637 किमी की दूरी तय करके सुबह 8.30 बजे पहुंचती है। इस ट्रेन से जितना वक्त लगता है, उससे ढाई घंटा कम गंगा एक्सप्रेस वे से लगेगा। अपने निजी वाहन से मेरठ जाने वालों को अभी तक कानपुर के रास्ते होकर जाना पड़ता था। एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण हो जाने से 594 किमी का सफर छह घंटे में पूरा हो जाएगा। प्रयागराज की सोरांव तहसील के जूड़ापुर दांदू गांव के पास एक्सप्रेस-वे का दूसरा टोल प्लाजा बनाया गया है। प्रतापगढ़ से 143 किमी दूरी कम, बचेंगे छह घंटे अभी तक प्रतापगढ़ से मेरठ जाने के लिए न तो कोई सीधी ट्रेन है और न ही यूपी परिवहन निगम की कोई बस ही वहां के लिए चलती है। काशी और पद्मावत दो ट्रेन हैं, जो प्रतापगढ़ होते हुए हापुड़ तक जाती हैं। हापुड़ तक जाने में ही दोनों ट्रेन दस घंटे से अधिक का समय लेती हैं। सीधे मेरठ जाने वालों के पास एक मात्र विकल्प निजी साधन है। निजी साधन से मेरठ जाने में अभी 11 से 12 घंटे लगते हैं। प्रतापगढ़ से मेरठ तक की कुल दूरी 738 किमी है, गंगा एक्सप्रेस वे से यह दूरी कम होकर 595 रह जाएगी। 143 किमी कम होने और एक्सप्रेस वे के सुगम यातायात की वजह से यह दूरी आधे समय यानी छह घंटे में ही तय की जा सकेगी। इससे उन कारोबारियों को खास तौर से सहूलियत होगी, जिनका कारोबार के सिलसिले में अक्सर मेरठ तक जाना होता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर किया धर्म ध्वजारोहण

भारत को जोड़ने की ताकत हैं राम-कृष्ण और शिवः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर किया धर्म ध्वजारोहण  सीएम योगी ने भगवान शिव व रामलला का विधिवत दर्शन-पूजन कर उतारी आरती जहां अयोध्या और राम होंगे, वहां विजय सुनिश्चित हैः मुख्यमंत्री सीएम ने की अपील- महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए अयोध्या,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धर्म ध्वजारोहण किया। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव व श्रीरामलला का विधिवत दर्शन-पूजन कर आरती भी उतारी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु राम हमें जोड़ने के माध्यम बने हैं। श्रीराम उत्तर को दक्षिण से और श्रीकृष्ण पूरब को पश्चिम से जोड़ रहे हैं। इसी प्रकार भगवान शंकर द्वादश ज्योतिर्लिंग के माध्यम से भारत के कण-कण को जोड़ रहे हैं। ये तीनों भारत को जोड़ने की शक्ति हैं और यही हमारी भी सबसे बड़ी ताकत है। डॉ. लोहिया कहते थे कि श्रीराम, श्रीकृष्ण व शिवशंकर हैं तो कोई भारत का बाल बांका नहीं कर सकता, लेकिन यह बात उनके शिष्य नहीं समझेंगे, क्योंकि समझ उन्हें आता है, जिनमें समझ का सामर्थ्य होता है। जिनमें समझ का सामर्थ्य नहीं, उन रामद्रोहियों-शिवद्रोहियों के लिए कोई ठौर-ठिकाना नहीं होगा।  जहां अयोध्या और राम होंगे, वहां विजय ही होगी  सीएम ने गर्व से कहा कि इतने बड़े आंदोलन ने बता दिया कि जहां अयोध्या होगी और जहां राम होंगे, वहां विजय होगी। सम-विषम परिस्थितियों में हम न रुकेंगे, न झुकेंगे, न डिगेंगे और लक्ष्य को भी प्राप्त करेंगे। दुनिया अयोध्या धाम का अनुसरण कर रही है। सीएम ने नई अयोध्या की स्थिति का भी जिक्र किया। कहा कि नई अयोध्या त्रेतायुग की याद दिला रही है और यही डबल इंजन की ताकत है। यह तभी हो पाया, जब एक साथ एक स्वर में सनातन धर्मावलंबी बोल उठे, तभी रामजन्मभूमि में मंदिर निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो गया था।  महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए सीएम ने लोगों से आग्रह किया कि सनातन धर्म की एकता के जरिए भारत की एकता व अखंडता को मजबूती दीजिए। महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए और बांटने वालों से सावधान रहिए। यह वही पाप कर रहे हैं, जो मध्यकाल में देश को बांटने और समाज की एकता को खंडित करने वालों ने किया था। बांटने का पाप देशद्रोह से कम नहीं है। यह पाप कभी मत होने दें। जिस दिन 140 करोड़ भारतवासी अपने नेतृत्व पर विश्वास करते हुए बढ़ेंगे, दुनिया उनके सामने बाधक नहीं बन सकती।  ईश्वरीय कृपा ही है कि मौसम सुहाना हो गया सीएम ने कहा कि ट्रस्ट के पदाधिकारी पहले तपती गर्मी, फिर बिजली की कड़क और बारिश की चेतावनी से चिंतित हो गए, लेकिन यह ईश्वरीय कृपा ही है कि मौसम सुहाना हो गया। प्रभु की कृपा के लिए शुद्ध नीयत से उनके पास शरणागत होना पड़ेगा। जब भक्त और याचक बनकर प्रभु के चरणों में जाते हैं तो हमारी मनोकामना पूर्ण होती है। जब यह अकड़ होती है कि हमने किया है, तो प्रभु उसे रगड़ भी देते हैं।  सभी के मन में एक ही भाव था कि प्रभु का मंदिर बने और हम अपनी आंखों से देख सकें सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण अभियान है। भारत व दुनिया में जहां भी सनातन धर्मावलंबी रहा, वह गिरिवासी, वनवासी, वंचित, भिक्षावृत्ति से जीवन यापन करने वाला हो या राजमहल जैसे प्रासाद में रहने वाला बड़ा उद्यमी, सभी के मन में एक ही भाव था कि प्रभु राम का भव्य मंदिर बने और वह इसे अपनी आंखों से देख सके। पीढ़ी दर पीढ़ी चली गईं, संघर्ष व आंदोलन बढ़ता गया। महिला, पुरुष, बच्चे, युवा समेत समाज के हर तबके ने, सनातन धर्म की हर उपासना विधियों से जुड़े लोगों ने लगातार 500 वर्ष तक संघर्ष किया। एक दिन वह काली रात आई थी, जब प्रभु श्रीराम के मंदिर को अपवित्र करके विवादित ढांचा खड़ा कर दिया गया, लेकिन 1528 से बिना किसी रोक-टोक या भय के कोई दिन ऐसा नहीं रहा होगा, जब सनातन धर्मावलंबियों ने श्रीराम जन्मभूमि के लिए सोचा न हो और कुछ करने की इच्छाशक्ति के साथ अभियान का हिस्सा न बनें हो।  देश के हर कोने में लोग जयश्रीराम कहते हैं  सीएम योगी ने कहा कि प्रभु जब अपना काम कराना चाहते हैं, तभी सफलता प्राप्त होती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जब 1983 में आंदोलन को अपने हाथों में लिया तो आंदोलन चरम की ओर बढ़ता गया। अशोक सिंहल जी ने बिखरी हुई ताकत को एक किया। इस आंदोलन में क्षेत्र, जाति, भाषा की दीवारें टूटी हैं। आज भी देश के किसी कोने में हम जाते हैं तो उसके प्रभाव को महसूस करते हैं। अरुणाचल या ओडिशा, नगालैंड हो या मिजोरम, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड का सुदूर कोना, पश्चिमी-पूर्वी, उत्तरी-दक्षिण, मध्य भारत हो या छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसा जनजाति क्षेत्र, जैसे ही लोग हमें देखते हैं, वे सबसे पहले जयश्रीराम कहते हैं। मैं पश्चिम बंगाल के चुनाव में दूरदराज के गांवों में गया। वहां भी सड़कों पर आकर महिलाएं, बच्चे, पुरुष सभी ने जयश्रीराम से अभिवादन किया।  जिस दिन राम मंदिर का फैसला आया, वह भारत के इतिहास का सबसे खुशहाल दिन  सीएम योगी ने कहा कि हम सभी गुलामी का ढांचा हटने और आंदोलन के साक्षी हैं। जब उच्चतम न्यायालय ने सर्वसम्मति से रामजन्मभूमि का फैसला दिया तो देश-दुनिया के सनातन धर्मावलंबी झूम उठे। कुछ लोग धमकाते थे कि राम जन्मभूमि का फैसला आएगा तो यह होगा-वह होगा। ये वही लोग हैं, जो वकील खड़ा करते थे, रामसेतु को तोड़ना चाहते थे, रामभक्तों पर गोलियां चलाते थे और चाहते थे कि समस्या का समाधान न निकले और सनातन धर्मावलंबी अपमानित हो, लेकिन जब उच्चतम न्यायालय ने सनातन धर्म की भावनाओं के अनुरूप साक्ष्यों के आधार पर सर्वसम्मति से फैसला किया तो देश-दुनिया ने भी उसका स्वागत किया। जिस दिन यह फैसला आया, वह भारत के इतिहास के सबसे शांत और खुशहाल दिन में से एक था।   जब मंदिर बना तो हर आंख में थे खुशी के आंसू सीएम योगी ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में श्रीरामजन्मभूमि … Read more

UP Transport Data Leak? निजी DBA पर गंभीर सवाल, वर्षों से एक ही जगह जमे कर्मचारी निशाने पर

लखनऊ परिवहन विभाग का संवेदनशील डेटा निजी डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर (डीबीए) के हाथों में है। प्रदेश के कई जिलों में अफसरों के खास डीबीए वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, ये डीबीए दलालों को वाहनों और ड्राइविंग लाइसेंसों से संबंधित विवरण उपलब्ध करा रहे हैं। इससे विभाग का पूरा डेटा गंभीर खतरे में है और दलालों से इनकी मिलीभगत उजागर हुई है।   करीब बीस वर्ष पहले परिवहन विभाग को ऑनलाइन डेटा रखरखाव के लिए ऐसे कर्मचारियों की आवश्यकता महसूस हुई थी। आरटीओ-एआरटीओ को डेटा निकासी के लिए अधिकृत किया गया था, लेकिन डीबीए ही उनकी यूजर आईडी से डेटा निकालते हैं। ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ियों की फिटनेस, परमिट और उनकी संख्या सहित पूरा डेटा डीबीए की आसान पहुंच में है। वर्षों से एक ही जिले में तैनात डीबीए की दलालों से सांठगांठ हो गई है। वे दलालों को डीएल, परमिट और फिटनेस जैसी महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मिलीभगत की जानकारी वरिष्ठ अफसरों को भी है। प्रदेशभर में कुल 80 डीबीए कार्यरत हैं, जिनमें से दो लखनऊ में तैनात हैं। बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, अमरोहा, वाराणसी, मुरादाबाद, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और कानपुर में कई डीबीए वर्षों से एक ही जगह पर हैं। भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर सवाल ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी ने डीएल बनाने वाले निजीकर्मियों की शिकायत की थी। उन्होंने दलालों से मिलीभगत का हवाला देते हुए पूर्व परिवहन आयुक्त किंजल सिंह से शिकायत की। इसके बाद बिना किसी जांच के निजी डीएलकर्मियों का प्रदेशभर में स्थानांतरण और हटाने का सिलसिला शुरू हुआ। सूत्रों के अनुसार, पूर्व अपर परिवहन आयुक्त, आईटी पर निजीकर्मियों से वसूली के आरोप भी लगे थे। किंजल सिंह ने इन मामलों में कोई जांच नहीं करवाई। सवाल उठता है कि जब निजी डीएलकर्मियों का स्थानांतरण हो सकता है, तो डीबीए को क्यों बचाया जा रहा है। डीबीए के स्थानांतरण में विफलता ऐसा नहीं है कि डीबीए के स्थानांतरण की कोशिशें नहीं हुईं। तीन साल पहले परिवहन विभाग के आला अफसरों ने स्थानांतरण की कवायद शुरू की थी। हालांकि, अफसरों के खास और जुगाड़ी डीबीए इस प्रक्रिया से बच निकलने में सफल रहे। उन पर किसी भी तरह की आंच नहीं आई और वे अपनी जगह पर बने रहे। सूत्र बताते हैं कि ये डीबीए दलालों के साथ मिलकर अफसरों के लिए भी काम करते हैं। इसी कारण अफसरों ने उन्हें बचाने के लिए पूरा जोर लगा दिया। डाटा सुरक्षा और मिलीभगत का खतरा डीबीए की आसान पहुंच के कारण विभाग का संवेदनशील डाटा लगातार खतरे में है। दलालों को गोपनीय जानकारी मिलने से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है। यह स्थिति परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अफसरों की मिलीभगत या उदासीनता के कारण यह समस्या वर्षों से बनी हुई है। डाटा सुरक्षा सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है। डीबीए की तैनाती और स्थानांतरण नीतियों की समीक्षा करना महत्वपूर्ण है।  

यूपी में मौसम बना आफत: तेज आंधी, बारिश और वज्रपात से 18 लोगों की जान गई

लखनऊ  प्रदेश में जारी भीषण गर्मी और लू के दौर के बीच बुधवार को तेज हवाओं के साथ हुई बारिश कुछ जिलों के लिए आफत बनकर बरसी। इस दौरान आंधी-बारिश के कारण दीवार ढहने, पेड़ गिरने और बिजली गिरने से हुए हादसों में प्रदेश में 18 लोगों की मौत हो गई। सुल्तानपुर में 7, अमेठी व अयोध्या में 3-3 लोगों की जान चली गई। पूर्वांचल के जिलों में पांच लोगों की मौत हुई है। लखनऊ में शहर से गांव तक की बिजली व्यवस्था चरमरा गई। 100 खंभे और बिजली के तार टूट गए। मौसम की मार ट्रेनों के संचालन पर भी पड़ी। उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल की कई ट्रेनें प्रभावित हुईं। मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार को भी प्रदेश के करीब 35 जिलों में गरज-चमक और बूंदाबांदी की संभावना जताई है। प्रदेश के करीब 20 जिलों में बुधवार को गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश का दौर चला। वाराणसी में 109 किमी प्रति घंटे, अयोध्या में 87 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली। हालांकि, इन सबके बीच 45.8 डिग्री सेल्सियस के साथ बांदा बुधवार को भी प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा। लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, सीतापुर में तेज बारिश के साथ ओले भी गिरे। गोरखपुर में 19.2 मिमी, प्रयागराज में 11.2 मिमी और वाराणसी में 9 मिमी वर्षा दर्ज की गई। अमेठी और आजमगढ़ में 5 मिमी बारिश हुई। लखनऊ में जगह-जगह तार पर पेड़ों के गिरने से 400 गांवों व कस्बों की बिजली व्यवस्था तीन से सात घंटे तक ध्वस्त रही। 24 घंटे तक रहेगा ऐसा ही मौसम मध्य क्षोभमंडल में उत्तरी पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के आसपास बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से पूरे प्रदेश में यह बदलाव देखने को मिला। अगले 24 घंटे तक मौसम का यही रुख बने रहने के संकेत हैं। अतुल कुमार सिंह, आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक   यहां है गरज चमक के साथ वज्रपात की संभावना बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, रायबरेली, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर महोबा, झांसी, ललितपुर व आस पास के क्षेत्र। यहां है झोंकेदार हवा (गति 40-50 किमी/घंटा) की आशंका बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही, कन्नीज, कानपुर देहात, कानपुर नगर व आस पास के क्षेत्र।    

अंश निर्धारण में बहराइच ने मारी बाजी, 99.6% निस्तारण के साथ बना मॉडल जिला

अंश निर्धारण में बहराइच अव्वल, 99.6% निस्तारण के साथ बना मॉडल जिला मुख्यमंत्री योगी के राजस्व सुधार अभियान को मिली गति, जमीनी स्तर पर सक्रियता से हासिल हुई बड़ी उपलब्धि डीएम अक्षय त्रिपाठी के नियमित समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने से यह उपलब्धि हासिल हुई लखनऊ  प्रदेश में भूमि संबंधी कार्यों को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए चल रहे योगी सरकार के अंश निर्धारण अभियान में बहराइच जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के नेतृत्व में जिले ने निर्धारित समय सीमा के भीतर 99.6 प्रतिशत मामलों का निस्तारण कर एक नई मिसाल कायम की है। जमीनी स्तर पर सक्रियता बनी सफलता की कुंजी योगी सरकार की प्राथमिकता वाले इस अभियान के तहत बहराइच जिला प्रशासन ने गांव-गांव जाकर अंश निर्धारण की प्रक्रिया को गति दी। राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों ने किसानों एवं भूमिधरों के बीच विवादित हिस्सों का सत्यापन कर रिकॉर्ड को अपडेट किया, जिससे वर्षों से लंबित मामलों का समाधान संभव हो सका। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि नियमित समीक्षा, जिम्मेदारी तय करने और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण के कारण यह उपलब्धि हासिल हुई। प्रशासन की इस सक्रियता से न केवल भूमि विवादों में कमी आएगी, बल्कि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अधिक सुगम होगी। प्रदेश के लिए बन सकता है रोल मॉडल अंश निर्धारण की प्रक्रिया भूमि प्रबंधन और विकास कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। पहले कई परियोजनाएं इसी कारण अटक जाती थीं, लेकिन अब बहराइच जैसे जिलों के बेहतर प्रदर्शन से यह समस्या दूर होती दिख रही है। बहराइच का यह मॉडल अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की दिशा में देखा जा रहा है, जिससे पूरे प्रदेश में भूमि रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी और विवादमुक्त बनाया जा सके।

योगी सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ सपना

गंगा एक्सप्रेसवे की कहानी, जिसने लिखी विकास की महागाथा योगी सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ सपना गंगा एक्सप्रेसवे : कड़ी चुनौतियों के बीच भी नहीं रुकी रफ्तार, निर्धारित समयसीमा में पूरा हुआ सपना लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा देखा गया एक सपना बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के रूप में देश को समर्पित हो गया। यह कहानी सिर्फ एक सड़क बनने की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जहां स्पष्ट नीति, मजबूत इच्छाशक्ति, तकनीक और प्रशासनिक दक्षता ने कच्ची मिट्टी पर विकास की महागाथा लिख दी। गंगा एक्सप्रेसवे की निर्माण यात्रा इस बात का प्रमाण है कि बुलंद इरादों और प्रभावी क्रियान्वयन से कुछ भी संभव है। गंगा एक्सप्रेसवे, निर्णय से निर्माण तक की वह कहानी है, जो उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ की दिशा में नई गति देगी। 2017–2019: सुनियोजित विकास की रूपरेखा वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार के मुखिया के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यभार संभाला और ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड गंगा एक्सप्रेसवे विकसित करने का फैसला किया गया। 2018–19 में डीपीआर, भूमि चिन्हांकन और टेक्नो-इकोनॉमिक स्टडी पूरी की गई। यही वह चरण था, जहां प्रदेश के समावेशी विकास तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इस एक्सप्रेसवे की डिजाइन तैयार की गई और इसे अमली जामा पहनाने के लिए डेडिकेटेड टीम तैयार की गई। 2020–2021: नीति से क्रियान्वयन तक वर्ष 2020 गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जब परियोजना को आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां प्राप्त हुईं और इसके वित्तीय ढांचे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत अंतिम रूप दिया गया। इससे न केवल निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ, बल्कि परियोजना के समयबद्ध और पेशेवर क्रियान्वयन की मजबूत नींव भी रखी गई। इसके बाद वर्ष 2021 में टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक तरीके से पूरा करते हुए पूरे प्रोजेक्ट को 4 प्रमुख ग्रुप/पैकेज में विभाजित किया गया। इन पैकेजों का कार्यान्वयन देश की अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों, आईआरबी, अडानी, एचजी इंफ्रा और एलएंडटी जैसी एजेंसियों को सौंपा गया। यह मल्टी-पैकेज रणनीति परियोजना के लिए गेम चेंजर साबित हुई, क्योंकि इससे अलग-अलग हिस्सों में एक साथ निर्माण कार्य शुरू हो सका। 2021–2025: नींव से निर्माण तक 18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया, जिसके साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने जमीन पर वास्तविक गति पकड़ी। शिलान्यास के तुरंत बाद 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के अलग-अलग पैकेजों में निर्माण कार्य शुरू किया गया। नतीजतन, जहां पहले ऐसी मेगा परियोजनाएं वर्षों तक खिंच जाती थीं, वहीं इस रणनीतिक योजना के कारण गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण ने अभूतपूर्व गति पकड़ी और यह प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ने लगा। 2026: सपना बना हकीकत ट्रायल रन, सेफ्टी ऑडिट और अंतिम तकनीकी जांच पूरी होने के बाद 29 अप्रैल 2026 को गंगा एक्सप्रेसवे का भव्य लोकार्पण हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस परियोजना का 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया था, उसी का उद्घाटन भी उनके कर-कमलों से संपन्न हुआ, जो समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रतिबद्धता का प्रतीक है।  चुनौतियां आईं, लेकिन रुकी नहीं रफ्तार भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय संतुलन, कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी और जटिल तकनीकी कार्यों जैसी बड़ी चुनौतियों के बावजूद गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कभी थमा नहीं। लगभग एक लाख किसानों से भूमि अधिग्रहण को पारदर्शी मुआवजा और डीबीटी के माध्यम से तेज और विवाद-मुक्त बनाया गया, वहीं पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए अलाइनमेंट को संतुलित ढंग से विकसित किया गया। कोविड काल में श्रमिकों और सप्लाई चेन की बाधाओं के बीच भी स्थानीय संसाधनों के उपयोग और चरणबद्ध निर्माण रणनीति से कार्य निरंतर चलता रहा। सीएम योगी की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता रही निर्णायक इस पूरे प्रोजेक्ट की गति बनाए रखने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता निर्णायक रही। उन्होंने नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से हर चरण की प्रगति पर नजर रखी, जबकि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की सक्रिय भूमिका ने जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को गति दी। ड्रोन सर्वे, डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की गई। परिणामस्वरूप, यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल चुनौतियों को पार करता हुआ आगे बढ़ा, बल्कि तय समयसीमा में पूरा होकर प्रभावी प्रशासन और मजबूत नेतृत्व का उदाहरण भी बना।

शिलान्यास से उद्घाटन तक: योगी सरकार की तेज़ी से विकास की पहचान

शिलान्यास से लेकर उद्घाटन तक का संकल्प, तेज गति है योगी सरकार की पहचान एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर से उत्तर प्रदेश को मिली नई पहचान योगी सरकार में हर विकास योजना को रिकॉर्ड समय में किया गया पूरा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने यह दिखाया है कि योजनाओं को केवल शुरू करना ही नहीं, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करना ही असली विकास है। सीएम योगी ने यूपी को ‘कंप्लीट पैकेज मॉडल’ दिया। इसमें परियोजनाओं की परिकल्पना से लेकर उनके पूर्ण होने तक काम कभी नहीं रुकता, चाहे जेवर एयरपोर्ट, गंगा, पूर्वांचल, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे हों या इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अन्य योजनाएं। ताजा उदाहरण देखा जाए तो गंगा एक्सप्रेसवे हमारे सामने है। 595 किलोमीटर के एक नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे का उत्तर प्रदेश में 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया गया और 29 अप्रैल 2026 को आज जनता को समर्पित कर दिया गया। सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश को 9 वर्षों में बीमारू राज्य की पहचान से बाहर निकाला। उन्होंने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सड़क, मेट्रो, एयरपोर्ट समेत अन्य तमाम क्षेत्रों में सौगात दी। सीएम योगी के कार्यकाल में सिर्फ योजनाएं बनी ही नहीं बल्कि वह जमीन पर भी उतरीं। उन्होंने योजनाओं का शिलान्यास किया फिर जमीनी स्तर पर इनकी तैयारी, विभागों की जिम्मेदारी, निर्माणाधीन योजनाओं की लगातार निगरानी खुद की और आखिर में उनका लोकार्पण कर प्रदेश की जनता को लाभ पहुंचाया। सीएम योगी के निर्देशन में ही जेवर एयरपोर्ट के पहले फेज का रिकॉर्ड टाइम में उद्घाटन 28 मार्च 2026 को हुआ, जिसका शिलान्यास 25 नवंबर 2021 को किया गया था। यह उत्तर प्रदेश का पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के बढ़ते हवाई यातायात के दबाव कम करने का काम कर रहा है। साथ ही सीएम योगी के विजन के चलते ही उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना, जहां 5 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे बन चुके हैं। पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे समेत लिंक एक्सप्रेस पूरे हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन की ही देन है कि 14 जुलाई 2018 को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास हुआ और 16 नवंबर 2021 को इसका उद्घाटन भी कर दिया गया। इसी क्रम में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की आधारशिला फरवरी 2020 में रखी गई और जुलाई 2022 में इसे जनता को समर्पित किया गया। उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य से बाहर निकालने के लिए बुंदेलखंड जैसे तमाम पिछड़े क्षेत्रों सड़क नेटवर्क को बढ़ावा दिया गया। इससे क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव हो रहा है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का भी मार्च 2019 में शिलान्यास हुआ। यह एक्सप्रेसवे भी लगभग बनकर तैयार है, जिसका लोकार्पण योगी सरकार अगले कुछ महीने में कर सकती है। इससे लखनऊ-कानपुर के बीच की यात्रा का समय लगभग दो घंटे से घटकर 45 मिनट हो जाएगा।  वहीं पूर्वांचल की राह आसान करने वाले गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में पूरा किया गया। इस परियोजना पर काम फरवरी 2020 से शुरू हुआ था। प्रदेश सरकार के दृढ़ संकल्प के चलते इसका जून 2025 में योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन किया। वहीं 115 किलोमीटर लंबे झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर भी कार्य योजना बनाई जा रही है। अनुमान है कि इस पर 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह 63 गांव से होकर गुजरेगा, जिससे विकास की धारा बहेगी। इन्हीं विजन के चलते आज देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में शानदार उपलब्धि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल दो एयरपोर्ट संचालित हो रहे थे, जिसमें लखनऊ और वाराणसी का नाम शामिल है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन ने देश में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल दी। राज्य 21 एयरपोर्ट का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी ने यूपी को 5 इंटरनेशनल एयपोर्ट वाले राज्य के रूप में पहचान दिलाई है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण अयोध्या एयरपोर्ट भी है। अयोध्या में फरवरी 2022 से महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनना शुरू हुआ था। यह रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हुआ और 30 दिसंबर 2023 में उद्घाटन किया गया। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के लिए 10 मार्च 2024 की तारीख काफी अहम रही। इस दिन एक साथ आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, मुरादाबाद और श्रावस्ती के हवाई अड्डों का उद्घाटन किया गया। सीएम योगी के विजन का नतीजा है कि जहां 2016-17 में महज 59.97 लाख लोगों ने हवाई यात्रा की थी। वहीं 2024-25 में यह संख्या 14 करोड़ से ज्यादा हो गई। हर शहर को मेट्रो देने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में रैपिड रेल और मेट्रो परियोजनाओं को लेकर भी काफी काम हुआ है। इस तरफ भी योगी सरकार ने पूरा ध्यान दिया है। यूपी के शहरों के अंदर यातायात सुधारने के लिए तेजी से मेट्रो कनेक्टिविटी भी बढ़ाई जा रही है। इसी क्रम में 7 दिसंबर 2020 को आगरा मेट्रो की नींव रखी गई। महज चार साल के अंदर मार्च 2024 में इसका उद्घाटन कर संचालन शुरू किया गया। वहीं 22 फरवरी 2026 को मेरठ मेट्रो का संचालन शुरू हुआ। वहीं योगी सरकार ने गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज में भी मेट्रो संचालन की मंशा जाहिर की है। रक्षा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का बढ़ रहा योगदान केंद्र सरकार ने योगी सरकार पर भी भरोसा जताया और नतीजा रहा कि आज यूपी में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट भी बन चुकी है। लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट का उद्घाटन मई-जून 2025 में हुआ, जिससे देश में यूपी की अलग छवि बनी है। वहीं वर्ष 2019 में यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) की नींव रखी गई और वर्ष 2023 से इसका संचालन शुरू हुआ। इसके तहत कानपुर में गोला-बारूद और मिसाइल संयंत्र अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस में फरवरी 2024 से काम शुरू हो गया है। रक्षा उत्पादों के निर्माण में उत्तर प्रदेश बड़ी भूमिका निभा रहा है। इन विकास योजनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि योगी सरकार के ‘कंप्लीट पैकेज मॉडल’ की सफलता के पीछे बदलाव की लाने की इच्छा और प्रशासनिक सुधार महत्वपूर्ण कारण हैं। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है और काम में लापरवाही के लिए सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इसके साथ ही तकनीक का उपयोग बढ़ाकर परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाया गया, जिससे सफलता … Read more